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                <title>Australia - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Australia RSS Feed</description>
                
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                <title>ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में जैत्र सिंह ने गणित में स्वर्ण पदक प्राप्त किया</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>लखनऊ। </strong>राजधानी लखनऊ के लिए यह अत्यंत गौरव का विषय है कि न्यू साउथ वेल्स, सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) स्थित प्रतिष्ठित पररामाटा वेस्ट पब्लिक स्कूल के कक्षा-2 के छात्र जैत्र सिंह ने गणित विषय में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। 15 दिसंबर 2025 को जैत्र ने सिडनी में अध्ययनरत विभिन्न देशों से आए विद्यार्थियों को पीछे छोड़ते हुए गणित उपलब्धि स्वर्ण पदक–2025 प्राप्त किया।</div>
<div>  </div>
<div>यह उपलब्धि जैत्र की असाधारण प्रतिभा, परिश्रम और अनुशासन का प्रमाण है, जिसने केजी व प्रथम वर्ष में भी गोल्ड मैडल लाकर न केवल अपने विद्यालय में बल्कि अपने परिवार और लखनऊ का</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163741/jaitra-singh-received-gold-medal-in-mathematics-in-sydney-australia"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/131887.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>लखनऊ। </strong>राजधानी लखनऊ के लिए यह अत्यंत गौरव का विषय है कि न्यू साउथ वेल्स, सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) स्थित प्रतिष्ठित पररामाटा वेस्ट पब्लिक स्कूल के कक्षा-2 के छात्र जैत्र सिंह ने गणित विषय में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। 15 दिसंबर 2025 को जैत्र ने सिडनी में अध्ययनरत विभिन्न देशों से आए विद्यार्थियों को पीछे छोड़ते हुए गणित उपलब्धि स्वर्ण पदक–2025 प्राप्त किया।</div>
<div> </div>
<div>यह उपलब्धि जैत्र की असाधारण प्रतिभा, परिश्रम और अनुशासन का प्रमाण है, जिसने केजी व प्रथम वर्ष में भी गोल्ड मैडल लाकर न केवल अपने विद्यालय में बल्कि अपने परिवार और लखनऊ का भी नाम गौरवान्वित किया है। जैत्र सिंह,  सौरभ सिंह एवं दीपिका सिंह के सुपुत्र हैं, जो वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया में कार्यरत हैं। वे भारत के प्रतिष्ठित वरिष्ठ पर्यावरण वैज्ञानिक तथा स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज, लखनऊ के महानिदेशक डॉ. भरत राज सिंह के पौत्र हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>विज्ञान खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Dec 2025 18:01:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हरियाणा के युवक को ऑस्ट्रेलिया में 40 साल कैद।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ऑस्ट्रेलिया की एक कोर्ट ने हरियाणा के एक नेता बालेश धनखड़ को 40 साल की सजा सुनाई है. धनखड़ पर पांच कोरियन महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस शख्स पर पांच कोरियाई महिलाओं के साथ सुनियोजित तरीके से यौन उत्पीड़न की घटना को अंजाम देने का' आरोप है. अब इस शख्स को 30 साल की सजा बगैर किसी पैरोल के भुगतनी होगी.</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">धनखड़ महिलाओं को धोखा देने के लिए फर्जी नौकरी विज्ञापनों का इस्तेमाल करता था, उन्हें अपने सिडनी घर के आसपास के स्थानों पर बुलाता था, जहां वह</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149690/haryana-youth-imprisoned-for-40-years-in-australia"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/6.jpeg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऑस्ट्रेलिया की एक कोर्ट ने हरियाणा के एक नेता बालेश धनखड़ को 40 साल की सजा सुनाई है. धनखड़ पर पांच कोरियन महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस शख्स पर पांच कोरियाई महिलाओं के साथ सुनियोजित तरीके से यौन उत्पीड़न की घटना को अंजाम देने का' आरोप है. अब इस शख्स को 30 साल की सजा बगैर किसी पैरोल के भुगतनी होगी.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">धनखड़ महिलाओं को धोखा देने के लिए फर्जी नौकरी विज्ञापनों का इस्तेमाल करता था, उन्हें अपने सिडनी घर के आसपास के स्थानों पर बुलाता था, जहां वह उन्हें नशीला पदार्थ खिलाता था और उनके साथ मारपीट करता था. समाचार एजेंसी ऑस्ट्रेलियन एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार आईटी सेक्टर में काम कर चुके बालेश महिला को नशा देने के बाद उनका यौन उत्पीड़न करता था.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शुक्रवार को धनखड़ को सजा सुनाते हुए, जिला न्यायालय के न्यायाधीश माइकल किंग ने उसके कामों को 'पूर्व-नियोजित, अच्छे तरीके से सोच-समझकर और चालाकी से किया गया बताया। न्यायाधीश ने कहा कि धनखड़ ने अपनी संतुष्टि के लिए पीड़ितों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया. रिपोर्ट में जज का हवाला देते हुए कहा गया, 'यह पांच महिलाओं के खिलाप सोचा-समझा गया घृणित अपराध था.' सभी पीड़ितों की उम्र 21 और 27 के बीच बताई जा रही है.  धनखड़ ने एक ऐसी एक्सेल स्प्रेडशीट बनाई थी, जिसमें उसने अपने फर्जी नौकरी विज्ञापनों के आवेदकों को उनकी शक्ल और बुद्धि के आधार पर रेटिंग दी थी.।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> इसमें प्रत्येक पीड़ित के साथ उसकी बातचीत का विवरण भी था, जिसमें उनकी व्यक्तिगत जानकारी और उनकी कमजोरी का आकलन भी शामिल था. 2018 में अपनी गिरफ्तारी से पहले तक, धनखड़ भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय में काफी लोकप्रिय था. रिपोर्ट के अनुसार, उसने भारतीय जनता पार्टी के एक सैटेलाइट समूह की स्थापना की और हिंदू काउंसिल ऑफ ऑस्ट्रेलिया के प्रवक्ता के रूप में काम किया. उसने एबीसी, ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको, टोयोटा और सिडनी ट्रेन्स जैसे संगठनों के साथ डेटा विज़ुअलाइज़ेशन कंसल्टेंट के रूप में काम किया था. धनखड़ 2006 में एक छात्र के रूप में ऑस्ट्रेलिया पहुंचा था. </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> न्यायाधीश ने कहा कि दूसरों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए काम करने वाले एक सामाजिक रूप से सक्रिय व्यक्ति के रूप में उसकी बाहरी छवि 'उसके गंभीर रूप से दोषपूर्ण और शिकारी चरित्र के साथ पूरी तरह से असंगत थी', अदालत में सामने आई. अक्टूबर 2018 में उसके पांचवें अपराध के बाद, पुलिस ने सिडनी के केंद्रीय व्यापार जिले में उसके यूनिट पर छापा मारा, जहां उसे डेट-रेप ड्रग्स और एक वीडियो रिकॉर्डर मिला, जिसे घड़ी रेडियो के रूप में छिपाया गया था. </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>2023 में एक जूरी ने उसे 39 अपराधों का दोषी पाया, जिसमें यौन उत्पीड़न के 13 मामले शामिल थे.।</strong></h4>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">धनखड़ ने महिलाओं को नशीला पदार्थ देने या गैर-सहमति वाले यौन संबंध बनाने से इनकार किया. एक लेखक को बताया कि 'मैं सहमति की व्याख्या कैसे करता हूं, और कानून सहमति को कैसे देखता है, इसमें अंतर है.' उसकी गैर-पैरोल अवधि अप्रैल 2053 में खत्म होगी. उसकी पूरी 40 साल की सजा तब समाप्त होगी जब वह 83 वर्ष का हो जाएगा.</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Mar 2025 21:09:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सन्यास लेने से क्यों डरते हैं हमारे नेता ?</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="aju">
<div class="aCi">  </div>
</div>
<div class="gs">
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<div class="aHl">ऑस्ट्रेलिया के धाकड़ बल्लेबाज स्टीव स्मिथ ने वनडे क्रिकेट से संन्यास लेकर सभी को चौंका दिया। दुनिया के तमाम क्रिकेटर स्मिथ की तरह ही क्रिकेट से एक तय समय के बाद खुद सन्यास लेने का सार्वजनिक ऐलान करते हैं ,लेकिन दुनिया में खासतौर पर  भारत में ऐसे बहुत कम नेता हैं जो स्वेच्छा से राजनीति से सन्यास लेने का ऐलान करते हों। भारतीय परम्परा  में तो सन्यास जीवन  की सर्वोत्कृष्ट अवस्था है। सन्यास की सनातन  परम्परा सामंतकाल में भी थी लेकिन लोकतंत्र में इसका परित्याग कार दिया। अकेली राजनीति ऐसी है जिसमें  आश्रम व्यवस्था लागू नहीं होती । यानि न</div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149536/why-are-our-leaders-afraid-to-retire"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download.png" alt=""></a><br /><div class="aju">
<div class="aCi"> </div>
</div>
<div class="gs">
<div>
<div class="aHl">ऑस्ट्रेलिया के धाकड़ बल्लेबाज स्टीव स्मिथ ने वनडे क्रिकेट से संन्यास लेकर सभी को चौंका दिया। दुनिया के तमाम क्रिकेटर स्मिथ की तरह ही क्रिकेट से एक तय समय के बाद खुद सन्यास लेने का सार्वजनिक ऐलान करते हैं ,लेकिन दुनिया में खासतौर पर  भारत में ऐसे बहुत कम नेता हैं जो स्वेच्छा से राजनीति से सन्यास लेने का ऐलान करते हों। भारतीय परम्परा  में तो सन्यास जीवन  की सर्वोत्कृष्ट अवस्था है। सन्यास की सनातन  परम्परा सामंतकाल में भी थी लेकिन लोकतंत्र में इसका परित्याग कार दिया। अकेली राजनीति ऐसी है जिसमें  आश्रम व्यवस्था लागू नहीं होती । यानि न नेता ब्रम्हचर्य का पालन करता है ,न गृहस्थ रहना चाहता है और न वानप्रस्थ में जाना चाहता है ,सन्यास लेना तो बहुत दूर की बात   है। राजनीति में जब कोई सन्यास नहीं लेता तो उसे मार्गदर्शक मंडल में डाल दिया जाता है।</div>
<div class="aHl"> </div>
<div class="aHl">मैंने जब से होश  सम्हाला है तभी से राजनीति में सक्रिय बहुत कम लोगों को राजनीति से सन्यास लेने की घोषणा करते देखा है ,उलटे सन्यास ले चुके लोग राजनीति  में घुसपैठ करते जरूर देखे हैं और इस समय तो राजनीति में सन्यासियों की पौ -बारह है।वे केंद्र में भी मंत्री हैं और मुख्यमंत्री भी।  खिलाडियों में सन्यास लेना आम बात  है लेकिन राजनीति में सन्यास लेना ख़ास घटना मानी जाती है। नेताओं को उनकी अपनी पार्टियां जबरन हाशिये पर डाल देतीं हैं क्योंकि वे खिलाड़ियों की तरह खेल भावना से राजनीयति से सन्यास नहीं  लेते। किसी भी दल में सन्यासी न हों ऐसी बात नहीं है ,लेकिन उनकी संख्या न के बराबर है।</div>
<div class="aHl"> </div>
<div class="aHl">नानाजी देशमुख या कामराज या ज्योति बसु जैसे बहुत कम नेता हुए हैं जिन्होंने स्वेच्छा से सन्यास लिया हो । सवाल ये है कि आखिर राजनीति में ऐसा क्या है जो नेता उससे सन्यास नहीं लेना नहीं चाहते ? इस विषय पर न किसी ने शोध किया है और न पीएचडी की उपाधि  हासिल की है ,क्योंकि इस विषय पर शोध करने की न फुरसत है और न इजाजत। मान लीजिये इजाजत मिल भी जाए तो गाइड नहीं मिलेगा। क्योंकि विषय ही अछूत है।</div>
<div class="aHl"> </div>
<div class="aHl">राजनीति से सन्यास लेने वाले भारत के प्रमुख नेताओं पर यदि आपको निबंध लिखने के लिए कह दिया जाये तो आप मुश्किल से एक-दो पृष्ठ ही लिख पाएंगे,क्योंकि राजनीति से ससम्मान सन्यास लेने वाले हैं  ही गिने चुने। देश के पहले प्रधानमंत्री से लेकर आज के प्रधानमंत्री तक किसी ने राजनीति से सन्यास लेने के बारे में कार्ययोजना बनाना तो दूर, कभी सोचा तक नहीं। इस मामले में हर विचारधारा के नेता एक जैसा सोचते है।  राजनीति में व्यक्ति जीवन पर्यन्त सक्रिय रहना चाहता है। कुर्सी के बिना जीवित रहना किसी भी नेता के लिए असम्भव काम है। भारतीय राजनीति में कोई सन्यास नहीं लेता लेकिन शारीरिक अस्वस्थता की वजह से उसे घर बैठना पड़े तो अलग बात है। मिसाल के तौर पर पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी।</div>
<div class="aHl"> </div>
<div class="aHl">दुनिया में राजनीति ही एक मात्र ऐसा क्षेत्र है जहाँ  सन्यास का न कोई लिखित विधान है और न कोई विवादास्पद इतिहास। राजनीति में कोई औरंगजेब भी तो नहीं है जिसने कम से कम पचास साल शासन किया हो।हमारे सनातन में तो राजा- महाराजा  अपने जीते जी अपने उत्तराधिकारी की न सिर्फ घोषणा कर देते थे बल्कि उनका राज्याभिषेक भी करा देते थे। राजनीति में नेता अपना उत्तर्राधिकारी तो घोषत करते हैं लेकिन खुद सन्यास नहीं लेते। हमारी संसद और विधानसभाओं  में पिता-पुत्र ,पति-पत्नी,भाई-भाई साथ -साथ मिल जायेंगे। राजनीति  से नेताओं को सन्यास केवल मृत्यु ही दिलाती है। मुमकिन है कि मै गलत होऊं ,लेकिन मैंने तो अपनी स्मृति में अपवादों को छोड़ किसी को औपचारिक रूप से सन्यास लेते नहीं देखा। आपने देखा हो तो जरूर बताएं।</div>
<div class="aHl"> </div>
<div class="aHl">मौजूदा राजनीति  में हमारे तमाम नेता  80  पार कर चुके हैं लेकिन राजनीति छोड़ने को तैयार नहीं हैं ,ये भी पता नहीं चल पता कि राजीति ने नेताओं को पकड़ रखा है या नेताओं ने राजनीति को ? अब कांग्रेस से ही शुरू कीजिये। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे हो या ,श्रीमती सोनिया गाँधी सन्यास के बारे में कोई योजना अभी तक नहीं बना पायीं हैं। भाजपा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का भी राजनीति से सन्यास से कोई इरादा नहीं है।  एनसीपी  के शरद पंवार हर बार, आखरी बार कहते हैं और हर बार राजनीति से चिपके दिखाई देते हैं।  राजद के लालू प्रसाद जी ने अपनी पत्नी और बेटे -बेटियों को भी स्थापित कर दिया लेकिन सन्यास की घोषणा नहीं की।</div>
<div class="aHl"> </div>
<div class="aHl"> बहन मायावती तो किसी आश्रम में रहीं ही नहीं  इसलिए  उनके सन्यास  आश्रम में जाने का सवाल ही नहीं उठता। सन्यास की उम्र तो बहन ममता बनर्जी की भी हो गयी है लेकिन वे भी इस बारे में शायद सोच नहीं पायी हैं। नीतीश कुमार भी सन्यासी नहीं बनना चाहते। समाजवादियों में भी कोई सन्यासी हो तो आप बताइये ?  वाम पंथियों में एक ज्योति बासु अपवाद रहे,उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से राजनीति से सन्यास लेकर बुद्धदेव भट्टाचार्य को अपना उत्तराधिकारी बना दिया था ,अन्यथा वामपंथी भी आजन्म नेता होते हैं  और मरते समय तक पोलित ब्यूरो सम्हालने का हौसला रखते हैं।</div>
<div class="aHl"> </div>
<div class="aHl">मुझे लगता है कि राजनीति में सन्यास शब्द से चिढ़ने वाले ,सन्यास को फालतू की चीज मानने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। किसी दल में कोई ऐसा नेता नहीं  है जो   स्मिथ  की तरह ,सचिन तेंदुलकर ,कपिल देव् की तरह अपने सक्रिय जीवन से सन्यास लेने की घोषणा कर अपने चाहने वालों को चौंकाए। अमेरिका में जो वाइडन साहब 80  पार कर भी सन्यासी नहीं बने ,वे तो ईसाई हैं ,उनके यहां शायद सन्यास की व्यवस्था नहीं है। वहां शायद रिटायरमेंट चलता हो लेकिन हम भारतियों की जीवन  शैली में सन्यास एक खास व्यवस्था है लेकिन हमारे नेता सन्यास के नाम से ही बिदक जाते हैं। आपको यकीन न हो तो अपने क्षेत्र के किसी विधायक,संसद,मंत्री या प्रधानमंत्री से रजनीति से सन्यास लेने के बारे में प्रश्न करके देख लीजिये ? हकीकत समझ जायेंगे।</div>
<div></div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL"></div>
</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Mar 2025 15:25:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सड़े हुए शव की दुर्गंध वाला फूल तीसरी बार खिला आस्ट्रेलिया में</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नेशनल बॉटैनिक गार्डन, </strong><span class="Y2IQFc" lang="hi" xml:lang="hi"><strong>मेलबर्न-</strong> </span>ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा में सड़े हुए शव की दुर्गंध वाला दुर्लभ फूल खिला है। तीन महीनों में इस तरह के फूल के खिलने का यह तीसरा मौका है। ऑस्ट्रेलियन नेशनल बॉटैनिक गार्डन में यह फूल शनिवार को पहली बार खिला और सोमवार तक मुरझाने की प्रक्रिया में था। इससे पहले, जनवरी के अंत में सिडनी के रॉयल बॉटैनिक गार्डन और नवंबर में मेलबर्न के पास गीलॉन्ग बॉटैनिक गार्डन में भी ऐसा ही फूल खिला था। कॉर्प्स फ्लावर का वैज्ञानिक नाम अमोर्फोफैलस टाइटेनियम है। यह फूल इंडोनेशिया के पश्चिमी सुमात्रा के वर्षावनों में पाया जाता है।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148448/flower-flower-of-rotten-dead-body-feeds-in-australia-for"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/download-(27).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नेशनल बॉटैनिक गार्डन, </strong><span class="Y2IQFc" lang="hi" xml:lang="hi"><strong>मेलबर्न-</strong> </span>ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा में सड़े हुए शव की दुर्गंध वाला दुर्लभ फूल खिला है। तीन महीनों में इस तरह के फूल के खिलने का यह तीसरा मौका है। ऑस्ट्रेलियन नेशनल बॉटैनिक गार्डन में यह फूल शनिवार को पहली बार खिला और सोमवार तक मुरझाने की प्रक्रिया में था। इससे पहले, जनवरी के अंत में सिडनी के रॉयल बॉटैनिक गार्डन और नवंबर में मेलबर्न के पास गीलॉन्ग बॉटैनिक गार्डन में भी ऐसा ही फूल खिला था। कॉर्प्स फ्लावर का वैज्ञानिक नाम अमोर्फोफैलस टाइटेनियम है। यह फूल इंडोनेशिया के पश्चिमी सुमात्रा के वर्षावनों में पाया जाता है।</p>
<p>डेल ने कहा, ‘‘हमें नहीं लगा था कि हमारे यहां सही परिस्थितियां हैं। इसलिए, जब यह फूल खिला, तो यह हमारे लिए एक सुखद आश्चर्य था।'' फूल शनिवार दोपहर को खुलना शुरू हुआ और कुछ ही घंटों में पूरे इलाके में तेज दुर्गंध फैल गई। डेल ने कहा, ‘‘शनिवार शाम तक, इसकी गंध इतनी तीव्र हो गई थी कि इसे सड़क के दूसरी ओर से भी महसूस किया जा सकता था। यह दुर्गंध वास्तव में उल्टी कराने वाली थी।'' कैनबरा में खिले 135 सेंटीमीटर लंबे इस फूल को देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी।</p>
<p>ग्रीनहाउस में जगह की कमी के कारण टिकट प्रणाली के जरिए केवल कुछ सौ लोगों को ही अंदर जाने की अनुमति दी गई। फूल की गंध को लेकर लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने इसे मरे हुए जानवर की बदबू जैसी बताया तो कुछ ने कहा कि यह सड़े हुए अंडों, पसीने भरे मोजों, सीवेज और कचरे की मिश्रित गंध जैसी है।  </p>
<p>यह प्राकृतिक रूप से सात से दस साल में एक बार खिलता है और कुछ ही दिनों तक खिला रहता है। इसकी तेज दुर्गंध सड़े हुए मांस जैसी होती है जो मक्खियों और अन्य परागण करने वाले कीटों को आकर्षित करती है। कैनबरा की कार्यकारी नर्सरी प्रबंधक कैरोल डेल ने कहा कि इस फूल के खिलने के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं है। उन्होंने बताया कि यह फूल तब खिलता है जब पौधा अपने भूमिगत कंद (कॉर्म) में पर्याप्त ऊर्जा जमा कर लेता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि एक सिद्धांत यह है कि ऑस्ट्रेलिया में उगाए गए इन सभी पौधों की उम्र लगभग समान है और वे अब पर्याप्त ऊर्जा संचित करने के बाद फूल देने के लिए तैयार हो गए हैं। डेल ने यह भी बताया कि कैनबरा, सिडनी और गीलॉन्ग की जलवायु एक-दूसरे से अलग है और हर जगह इन पौधों को अलग-अलग खाद और देखभाल प्रदान की जाती है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Feb 2025 17:59:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>  घर छोड़ के मत जाओ कही घर न मिलेगा</title>
                                    <description><![CDATA[<div>अपने व अपने परिवार के लिये जीविकोपार्जन की तलाश में बाहर निकलना अथवा अप्रवासी बनना प्रकृति का बनाया एक ऐसा चक्र है जिससे पृथ्वी का शायद कोई भी प्राणी अछूता नहीं। रोज़ी रोटी की तलाश में सभी प्राणियों को अपने अपने घरों से निकलकर बाहर जाना ही होता है। चूँकि प्रकृति ने मानव को अतिरिक्त सोच बुद्धि व योग्यता से नवाज़ा है इसलिये वह अपने अप्रवासन का रास्ता अपनी आर्थिक हैसियत,अपनी भविष्य की मनोकमनायें,कमाई का स्तर सुविधाजनक राज्य, देश व ठिकाने आदि बहुत कुछ देखकर तय करता है।</div>
<div>  </div>
<div>गत पांच दशकों से अमेरिका,कनाडा व ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भारत के अप्रवासियों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148364/%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/indian-imagrants.jpg" alt=""></a><br /><div>अपने व अपने परिवार के लिये जीविकोपार्जन की तलाश में बाहर निकलना अथवा अप्रवासी बनना प्रकृति का बनाया एक ऐसा चक्र है जिससे पृथ्वी का शायद कोई भी प्राणी अछूता नहीं। रोज़ी रोटी की तलाश में सभी प्राणियों को अपने अपने घरों से निकलकर बाहर जाना ही होता है। चूँकि प्रकृति ने मानव को अतिरिक्त सोच बुद्धि व योग्यता से नवाज़ा है इसलिये वह अपने अप्रवासन का रास्ता अपनी आर्थिक हैसियत,अपनी भविष्य की मनोकमनायें,कमाई का स्तर सुविधाजनक राज्य, देश व ठिकाने आदि बहुत कुछ देखकर तय करता है।</div>
<div> </div>
<div>गत पांच दशकों से अमेरिका,कनाडा व ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भारत के अप्रवासियों के लिये आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। रोज़गार के अतिरिक्त भारतीय मुद्रा के मुक़ाबले डॉलर्स की कीमतों में भारी अंतर,सुरक्षित,साफ़ सुथरा,वातावरण,शुद्धता,ईमानदारी,भ्रष्टाचार मुक्त वातावरण,सामाजिक सुरक्षा,बच्चों की शिक्षा व बुज़ुर्गों की सुरक्षा जैसी अनेक बातें भारतीयों को इन देशों में आने के लिये आकर्षित करती हैं। </div>
<div> </div>
<div> अप्रवासन करने वालों में एक वर्ग जो उच्च शिक्षा प्राप्त वैज्ञानिक,शोधार्थी,इंजीनियर्स,डॉक्टर्स,स्पेस वैज्ञानिक आदि जैसे क्षेत्रों से जुड़ा होता है। ऐसे प्रतिभाशाली लोगों के लिये तो लगभग पूरी दुनिया के दरवाज़े हमेशा खुले रहते हैं। दूसरा वर्ग शिक्षा हासिल करने की ग़रज़ से या शिक्षा हासिल करने के बहाने इन देशों में जाता है और वहीँ का होकर रह जाता है। और तीसरा वर्ग पैसों के बल पर इन देशों में जाना चाहता है।</div>
<div> </div>
<div>और यही वर्ग आसानी से विदेश भेजने वाले एजेंटों के जाल में फंसकर कबूतरबाज़ी या डंकी रुट का शिकार हो जाता है। ऐसे कई लोग जहाँ संपन्न परिवारों के होते हैं वहीं अनेक ऐसे भी होते हैं जिन्होंने अपने घर का सोना,ज़मीन आदि बेचकर या गिरवी रखकर एजेंटों को मुंह मांगी रक़म दी होती है।</div>
<div> </div>
<div> <img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-02/indians-in-us-army-plane.jpg" alt="indians in us army plane" width="768" height="511"></img>यहां उस वर्ग का उल्लेख करना भी बेहद ज़रूरी है जो सत्ता में या तो शीर्ष पदों पर है या जिसके ऊँचे रसूख़ हैं या फिर उच्चाधिकारी वर्ग यहाँ तक कि वह वर्ग भी जोकि देश के युवाओं को "मेक इन इण्डिया " और रोज़गार मांगो मत बल्कि रोज़गार दो,यहाँ तक कि शिक्षित लोगों के पकोड़ा बेचने को भी रोज़गार मानता है ऐसे अनेक लोगों के बच्चे या तो विदेशों में उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं या फिर वहां बड़े व्यवसाय कर रहे हैं। कई 'राष्ट्रभक्त महामनवों ' की संतानें तो विदेशी नागरिकता तक लिये बैठी हैं।                </div>
<div> </div>
<div>बहरहाल, अतिवाद की ओर तेज़ी से बढ़ते विश्व में अमेरिका ने एक बार फिर अतिविवादित व्यक्ति डोनाल्ड ट्रंप को अपना राष्ट्रपति चुन लिया है। उनके आलोचक ट्रम्प को एक नस्लवादी, कट्टरपंथी तथा एक स्त्री-द्वेषी और एक विदूषक के रूप में देखते हैं। सच पूछिये तो ऐसे व्यक्ति का पृथ्वी पर सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बनने का विचार ही शांतिप्रिय दुनिया के लिये चिंता पैदा करने तथा दुनिया की नींद हराम करने के लिए पर्याप्त है। ट्रंप जहाँ कई देशों को अपनी 'गिद्ध दृष्टि' से देख रहे हैं वहीं ट्रंप प्रशासन द्वारा ब्राज़ील, ग्वाटेमाला, पेरू और होंडुरास के लोगों को भी  'अवैध ' बताकर अमेरिकी सैन्य विमान से ही उनके देश वापस भेजा गया है।</div>
<div> </div>
<div>भारत भी उन्हीं दुर्भाग्यशाली देशों में एक है जिसके 'अवैध' बताये जा रहे 104 अमेरिकी प्रवासी अमेरिकी मालवाहक सैन्य विमान में भरकर बड़ी ही अपमानजनक स्थिति में वापस भारत लाये जा चुके हैं। ख़बर यह भी है कि इसी तरह के 487 भारतीयों की एक और खेप अमेरिका किसी भी समय भारत वापस भेज सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक़ इस समय अमेरिका में लगभग 7. 25 लाख लोग ऐसे रह रहे हैं जिनको 'अवैध प्रवासी' के रूप में चिन्हित किया जा चुका है। इस तरह के लगभग 1700 'अवैध प्रवासी' भारतीयों को अमेरिका में हिरासत में लेकर उन्हें डिटेंशन सेंटर में भी डाला जा चुका है। </div>
<div> </div>
<div>वीज़ा,इमिग्रेशन,नागरिकता आदि देने या इनसे सम्बंधित क़ानून बनाने का हर देश का अपना अधिकार है। परन्तु ट्रंप की वापसी के बाद जिस अपमानजनक तरीक़े से भारतीय युवाओं को निकला जा रहा है और सरकार द्वारा उसपर लीपा पोती की जा रही है और भारतीय युवाओं के अपमान को लेकर कोई शिकायत अमेरिका के समक्ष दर्ज नहीं कराई जा रही है उसे लेकर भारतीय युवाओं में निराशा ज़रूर है। ख़ासतौर से इस बात के मद्दे नज़र कि प्रधान मंत्री मोदी अपने को ट्रंप का दोस्त बताते हैं।</div>
<div> </div>
<div>यहाँ तक कि उनके पिछले चुनाव में अमेरिका जाकर 'अबकी बार ट्रंप सरकार ' का नारा भी लगवाते हैं ? ऐसे में यह सवाल उठना स्वभाविक है कि आख़िर ट्रंप ने भी उस दोस्ती की लाज क्यों नहीं रखी? क्यों हमारे युवाओं के हाथों में हथकड़ी  पैरों में बेड़ियाँ व ज़ंजीरें मुंह पर मास्क आदि लगाकर सैन्य विमान में बिठाकर बड़ी ही कष्टदायक स्थिति में उन्हें भारत भेजा गया ? क्या वजह थी कि जिस तरह रूस-यूक्रेन जंग के कारण यूक्रेन से वापस आने वाले युवाओं के लिये ऑपरेशन गंगा चलाया गया था और मंत्रियों द्वारा विमान में घुसकर उनका स्वागत किया गया था उसी तरह भारत अपने विमान भेजकर उन तथाकथित 'अवैध अप्रवासियों' को वापस क्यों नहीं बुलाता ?</div>
<div> </div>
<div>ख़ासकर यह सवाल इसलिये और भी पूछा जा रहा है कि जब कोलंबिया के कथित अवैध प्रवासियों को अमेरिकी सैन्य विमान द्वारा कोलंबिया वापस भेजने की घोषणा की गई तो कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेड्रो द्वारा इसका सख़्त विरोध किया गया। उसी समय राष्ट्रपति पेड्रो ने कहा कि वो अपने नागरिकों की 'गरिमा' को बरक़रार रखना चाहते हैं। इसके फ़ौरन कोलंबिया वायु सेना के दो विमान अमेरिका गए और वो अपने नागरिकों को ससम्मान लेकर राजधानी बोगोटा वापस पहुंचे। क्या भारत अपने नागरिकों के सम्मान के लिये ऐसा नहीं कर सकता था ?</div>
<div> </div>
<div>आज जब अमेरिकी डॉलर का मूल्य 87.79 ,कनाडा डॉलर का मूल्य 61.31 एवं ऑस्ट्रेलिया डॉलर का 54.97 रुपये है ऐसे में इन देशों में काम की तलाश में कौन जाना नहीं चाहेगा ? वैसे भी जब भारत सरकार स्वयं यह कह कर अपनी पीठ थपथपाये  कि हम भारत के 80 करोड़ लोगों को मुफ़्त राशन दे रहे हैं इसी से साफ़ हो जाता है कि इस सरकार ने आम लोगों को किस स्थिति में पहुंचा दिया है। यहाँ तक कि 'रेवड़ी आवंटन ' तो अब भारत के मुख्य चुनावी एजेंडे में शामिल हो चुका है।</div>
<div> </div>
<div>ऐसे में प्रतिभाओं का पालयन तो हो ही रहा है साथ ही आम आदमी भी चाहे अपनी ज़मीन,सोना,मकान आदि गिरवी रखकर या बेचकर इन देशों में जाना चाहते हैं। उन्हें विश्वास होता है कि उनका व उनके परिवार का भविष्य भारत में सुरक्षित नहीं। देश में आर्थिक अनिश्चितता का जो वातावरण है उससे वे वाक़िफ़ हैं तभी विदेशी एजेंटों के झांसे में आकर विदेश यात्रा हेतु कई ग़लत व ग़ैर क़ानूनी क़दम उठा लेते हैं। इनमें कई लोगों को तो अवैध तरीक़े से सीमा पार करने हेतु जंगलों व ख़तरनाक समुद्री रास्तों से गुज़रना होता है।</div>
<div> </div>
<div>कई युवा तो अपनी जान भी गँवा बैठते हैं। लिहाज़ा जहाँ भारत को विश्व की महाशक्ति बनने का सपना दिखाने वालों की यह ज़िम्मेदारी है कि वह अपने देश में ही अधिक से अधिक ऐसे अवसर उपलब्ध करायें ताकि पलायन पर नियंत्रण किया जा सके और इसतरह के अपमान से युवाओं को बचाया जा सके। दूसरी तरफ़ युवाओं को भी भारत में ही रहकर हर सरकारों पर रोज़गार के अवसर उपलब्ध करने का दबाव बनाना चाहिये। साथ ही संतोष व मान सम्मान का दामन कभी नहीं छोड़ना चाहिये। डॉ बशीर बद्र साहब ने ठीक ही कहा है कि-<em>'भीगी हुई आँखों का ये मनज़र न मिलेगा'। घर छोड़ के मत जाओ कहीं घर न मिलेगा।।</em></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Feb 2025 16:59:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अवैध प्रवासन: वैश्विक संकट पर राजनीति, राष्ट्रहित के विरुद्ध</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">अवैध प्रवासन केवल किसी एक राष्ट्र की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि समूचे विश्व की गंभीर और बहुआयामी समस्या बन चुकी है। जब कोई व्यक्ति बिना कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किए किसी अन्य देश में प्रवेश करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह उस देश की संप्रभुता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन जाता है। इसके परिणामस्वरूप आर्थिक असंतुलन बढ़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संसाधनों का अनुचित दोहन होता है और सामाजिक स्थिरता प्रभावित होती है। अधिकांश देश इस समस्या से जूझ रहे हैं और इसे रोकने हेतु कठोर नीतियाँ लागू कर रहे हैं। अमेरिका और भारत इस दिशा में विशेष सक्रियता</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148282/illegal-migration-against-the-national-interest-on-the-global-crisis"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/download-(16).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">अवैध प्रवासन केवल किसी एक राष्ट्र की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि समूचे विश्व की गंभीर और बहुआयामी समस्या बन चुकी है। जब कोई व्यक्ति बिना कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किए किसी अन्य देश में प्रवेश करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह उस देश की संप्रभुता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन जाता है। इसके परिणामस्वरूप आर्थिक असंतुलन बढ़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संसाधनों का अनुचित दोहन होता है और सामाजिक स्थिरता प्रभावित होती है। अधिकांश देश इस समस्या से जूझ रहे हैं और इसे रोकने हेतु कठोर नीतियाँ लागू कर रहे हैं। अमेरिका और भारत इस दिशा में विशेष सक्रियता दिखा रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका ने लंबे समय से अवैध प्रवासन के विरुद्ध सख्त रुख अपनाया है। हाल के वर्षों में अमेरिकी प्रशासन ने अवैध प्रवासियों की पहचान और निर्वासन की प्रक्रिया को गति दी है। हाल ही में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका ने </span>104 <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय नागरिकों को अवैध प्रवास का दोषी मानते हुए स्वदेश लौटाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो यह दर्शाता है कि वह अपने आव्रजन कानूनों को सख्ती से लागू कर रहा है। अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (</span><span lang="hi" xml:lang="hi">आई.सी.ई.</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका में लगभग </span>19,000 <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय अवैध रूप से रह रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें शीघ्र ही निष्कासित किया जा सकता है। ट्रंप प्रशासन द्वारा लागू ‘लैकेन रिले एक्ट’ के अंतर्गत अवैध प्रवासियों की शीघ्र पहचान व निष्कासन की प्रक्रिया तेज की गई थी। इस कानून के तहत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपराधों में संलिप्त पाए गए प्रवासियों को तत्काल हिरासत में लेकर देश से बाहर निकाला जा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत भी अवैध प्रवासन पर कठोर रुख अपना रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक राष्ट्र को अपने अवैध प्रवासियों की वापसी सुनिश्चित करने में सहयोग देना चाहिए। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह संदेश दृढ़ता से दिया है कि अवैध प्रवासन किसी भी देश के हित में नहीं है। अमेरिका से भारतीय नागरिकों का प्रत्यर्पण कोई नई घटना नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक सतत प्रक्रिया है। वर्ष </span>2012 <span lang="hi" xml:lang="hi">से प्रभावी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के तहत डिपोर्ट किए गए व्यक्तियों को विशेष सुरक्षा उपायों के साथ विमान में रेस्ट्रेंट्स (बांधकर) भेजा जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे यात्रा के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">अवैध प्रवासन के दुष्परिणाम व्यापक और गहरे हैं। यह न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आर्थिक संसाधनों पर अनावश्यक भार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपराध वृद्धि और स्थानीय नागरिकों के रोजगार में कटौती जैसे गंभीर प्रभाव छोड़ता है। बिना पंजीकरण और सत्यापन के प्रवासियों का प्रवेश किसी भी देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। कई बार ये प्रवासी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का अनुचित लाभ उठाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे करदाताओं पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ता है। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये प्रवासी निम्न वेतन पर कार्य करने को तैयार रहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे स्थानीय श्रमिकों के रोजगार अवसर प्रभावित होते हैं और श्रम बाजार असंतुलित हो जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">अवैध प्रवासन मानव तस्करी और शोषण को भी बढ़ावा देता है। बेहतर जीवन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा या रोजगार की तलाश में लोग मानव तस्करों के जाल में फंस जाते हैं और अवैध मार्गों से दूसरे देशों में प्रवेश करते हैं। वहां वे अमानवीय परिस्थितियों में जीवन यापन के लिए विवश हो जाते हैं। इन प्रवासियों को श्रम शोषण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असुरक्षित कार्य वातावरण और बंधुआ मजदूरी जैसी अमानवीय स्थितियों का सामना करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाओं और बच्चों की तस्करी भी अवैध प्रवासन से जुड़ी एक गंभीर समस्या है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो वैश्विक चिंता का विषय बन चुकी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ स्वार्थी राजनीतिक दल और छद्म मानवाधिकार संगठन अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए इस गंभीर विषय को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग देने का दुस्साहस कर रहे हैं। वे सरकार पर निराधार आरोप लगाते हैं कि ट्रंप और मोदी की प्रगाढ़ मित्रता के बावजूद ट्रंप प्रशासन की कठोर आव्रजन नीति अमानवीय है। जबकि सच्चाई यह है कि प्रत्येक संप्रभु राष्ट्र का परम कर्तव्य अपने नागरिकों के अधिकारों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है। इस विषय को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और राजनीतिक समीकरणों के चश्मे से देखना अथवा भ्रामक नैरेटिव गढ़ना केवल कुत्सित प्रचार का साधन है। जब अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कनाडा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे शक्तिशाली देश अवैध प्रवासन पर कठोर नीतियाँ लागू कर अपनी सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो भारत को भी किसी प्रकार की शिथिलता नहीं बरतनी चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">कानून</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानून होता है—अवैध सदैव अवैध ही रहेगा।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसे किसी तर्क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भावनात्मक आडंबर या राजनीतिक विचारधारा के आवरण में वैध नहीं ठहराया जा सकता। जो कार्य संविधान और विधि-विधान के प्रतिकूल है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। इसलिए प्रत्येक राष्ट्र को अपने कानूनों का कठोर अनुपालन सुनिश्चित करते हुए अवैध प्रवासन को पूर्णतः हतोत्साहित करने के लिए सशक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रभावी और निर्णायक कदम उठाने होंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">अवैध प्रवासन के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और कठोर नीतियों की अनिवार्यता है। प्रत्येक देश को अपनी सीमाओं की सुरक्षा सुदृढ़ कर कड़े आव्रजन नियम लागू करने होंगे। सरकारों को रोजगार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा और अन्य सामाजिक कारकों पर ध्यान देना होगा ताकि लोग अवैध प्रवासन के लिए विवश न हों। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानूनी प्रक्रियाओं को सरल और सुगम बनाकर वैध प्रवासन को प्रोत्साहित करना भी एक प्रभावी समाधान हो सकता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि सभी देश इस समस्या से दृढ़ संकल्प और निष्पक्ष नीति के साथ निपटें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो अवैध प्रवासन पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। कानूनी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करना और वैध प्रवासन को बढ़ावा देना ही इसका दीर्घकालिक व स्थायी समाधान है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/148282/illegal-migration-against-the-national-interest-on-the-global-crisis</link>
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                <pubDate>Fri, 07 Feb 2025 16:24:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Hamas थीम का बनाया गया केक, सोशल मीडिया पर खूब हुई बहस </title>
                                    <description><![CDATA[<p>एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में चार साल के ऑस्ट्रेलियाई बच्चे के लिए हमास थीम पर आधारित जन्मदिन का केक, जिसमें फिलिस्तीनी झंडे से घिरा एक आतंकवादी दिख रहा था, ने व्यापक आक्रोश फैलाया, जिसके कारण ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस को जांच शुरू करनी पड़ी। रिपोर्टों के अनुसार, केक बनाने के लिए ज़िम्मेदार ऑस्ट्रेलियाई बेकरी ने गर्व से इसकी तस्वीरें ऑनलाइन पोस्ट की थीं, जिन्हें अब तीव्र प्रतिक्रिया के बाद हटा दिया गया है।</p>
<p>न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार, फूफू द्वारा ओवेन बेकरी ने मंगलवार को तस्वीरें पोस्ट कीं, जिसमें युवा लड़के को फिलिस्तीनी झंडे से सजाए गए एक बड़े केक के पास</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141558/hamas-theme-cake-created-a-lot-of-debate-on-social"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/hamas_large_1439_19.webp" alt=""></a><br /><p>एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में चार साल के ऑस्ट्रेलियाई बच्चे के लिए हमास थीम पर आधारित जन्मदिन का केक, जिसमें फिलिस्तीनी झंडे से घिरा एक आतंकवादी दिख रहा था, ने व्यापक आक्रोश फैलाया, जिसके कारण ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस को जांच शुरू करनी पड़ी। रिपोर्टों के अनुसार, केक बनाने के लिए ज़िम्मेदार ऑस्ट्रेलियाई बेकरी ने गर्व से इसकी तस्वीरें ऑनलाइन पोस्ट की थीं, जिन्हें अब तीव्र प्रतिक्रिया के बाद हटा दिया गया है।</p>
<p>न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार, फूफू द्वारा ओवेन बेकरी ने मंगलवार को तस्वीरें पोस्ट कीं, जिसमें युवा लड़के को फिलिस्तीनी झंडे से सजाए गए एक बड़े केक के पास खड़ा दिखाया गया और हमास के प्रवक्ता अबू ओबैदा की उंगली उठाए हुए एक तस्वीर दिखाई गई। पोज़ की नकल करते हुए लड़के ने केक पर बनी आकृति के समान हेडस्कार्फ़ और पोशाक पहनी हुई थी।</p>
<p>प्रारंभ में बेकरी को केक के लिए सकारात्मक टिप्पणियाँ मिलीं, लोगों ने लड़के को एक चैंपियन कहा। इसके तुरंत बाद, इस पोस्ट की भारी आलोचना की गई, जिसके कारण इसके इंस्टाग्राम और फेसबुक पेजों को बंद करना पड़ा क्योंकि विरोधी धार्मिक नेताओं ने युवा लड़के को "शिक्षा" देने का आह्वान किया था। ऑस्ट्रेलियाई यहूदी समूह के मुख्य कार्यकारी रॉबर्ट ग्रेगरी ने कहा कि एक बच्चे को आतंकवादी के रूप में तैयार करना, जिसमें हमास का हेडबैंड भी शामिल है, निंदनीय है और बाल शोषण का एक रूप है।</p>
<p>ग्रेगरी ने कहा कि इस्लामिक उग्रवाद और युवाओं का कट्टरपंथ सिर्फ यहूदी समुदाय के लिए एक समस्या नहीं है। यह सभी आस्ट्रेलियाई लोगों के लिए खतरा है। ऑस्ट्रेलिया में हाल ही में मुस्लिम युवाओं द्वारा कथित तौर पर अन्य ऑस्ट्रेलियाई लोगों को चाकू मारने या उन पर हमला करने की साजिश रचने की कई घटनाएं देखी गई हैं। उपदेश कम उम्र में ही शुरू हो जाता है और यह वैसा ही है जैसा पूरे मध्य पूर्व में देखा जाता है। यह बाल आतंकवादी संवारने से कम नहीं है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 May 2024 14:53:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑस्ट्रेलिया में हुई भारतीय छात्र की हत्या, 2 भारतीय भाई गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत के 22 वर्षीय एक एमटेक छात्र की हत्या के सिलसिले में वांछित भारतीय मूल के दो भाइयों को ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। खबरों में यह जानकारी दी गई। ‘गाउलबर्न पोस्ट' की खबर के अनुसार, अभिजीत ए (26) और रोबिन गार्टन (27) को मंगलवार को न्यू साउथ वेल्स के गाउलबर्न शहर में गिरफ्तार किया गया था और पुलिस उन्हें विक्टोरिया प्रत्यर्पित करने की तैयारी कर रही है।</p>
<p>मेलबर्न के दक्षिण पूर्व में ओर्मोंड स्थित एक घर में शनिवार देर रात नोबेल पार्क निवासी नवजीत संधू की हत्या के बाद से दोनों भाई फरार थे। इस दौरान 30</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/140997/indian-student-murdered-in-australia-2-indian-brothers-arrested"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/2024_5image_12_26_204484370aus-ll.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत के 22 वर्षीय एक एमटेक छात्र की हत्या के सिलसिले में वांछित भारतीय मूल के दो भाइयों को ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। खबरों में यह जानकारी दी गई। ‘गाउलबर्न पोस्ट' की खबर के अनुसार, अभिजीत ए (26) और रोबिन गार्टन (27) को मंगलवार को न्यू साउथ वेल्स के गाउलबर्न शहर में गिरफ्तार किया गया था और पुलिस उन्हें विक्टोरिया प्रत्यर्पित करने की तैयारी कर रही है।</p>
<p>मेलबर्न के दक्षिण पूर्व में ओर्मोंड स्थित एक घर में शनिवार देर रात नोबेल पार्क निवासी नवजीत संधू की हत्या के बाद से दोनों भाई फरार थे। इस दौरान 30 वर्षीय एक व्यक्ति भी घायल हो गया था। खबर के अनुसार, पुलिस ने बृहस्पतिवार को गार्टन पर हत्या तथा हत्या के प्रयास का आरोप लगाया वहीं अभिजीत पर झगड़ा करने का मामला दर्ज किया गया।</p>
<p>उन्हें बृहस्पतिवार की सुबह गाउलबर्न स्थानीय अदालत में पेश किया गया जहां से उन्हें विक्टोरिया प्रत्यर्पित करने की अनुमति दी गई। हरियाणा के करनाल में रहने वाले नवजीत के चाचा यशवीर ने बताया कि एक अन्य छात्र ने उस पर चाकू से हमला कर दिया जब वह किराये के मुद्दे पर कुछ भारतीय छात्रों के बीच झगड़े में सुलह की कोशिश कर रहा था। यशवीर के अनुसार नवजीत की हत्या के आरोपी भी करनाल के रहने वाले हैं।  </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/140997/indian-student-murdered-in-australia-2-indian-brothers-arrested</link>
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                <pubDate>Thu, 09 May 2024 13:58:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एस.जयशंकर की ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बनीज से मुलाकात , द्विपक्षीय रणनीतिक संबंधों पर हुई चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p>विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से शनिवार को मुलाकात की और द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी, आर्थिक अवसरों, लोगों के बीच संबंध एवं क्रिकेट समेत कई विषयों पर चर्चा की। जयशंकर फिजी से यहां पहुंचे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुभकामना संदेश उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष को दिया। जयशंकर ने ट्वीट किया, ‘‘ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से मिलकर प्रसन्नता हुई।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्यक्तिगत शुभकामना संदेश उन्हें दिया। चर्चा के दौरान हमारी रणनीतिक साझेदारी की भावना प्रतिबिंबित हुई। उस संबंध में हाल के घटनाक्रमों से प्रधानमंत्री अल्बनीज को अवगत कराया।'' ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री अल्बनीज</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/127445/s-jaishankar-meets-australian-pm-anthony-albanese-discusses-bilateral-strategic"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-02/154.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p>विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से शनिवार को मुलाकात की और द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी, आर्थिक अवसरों, लोगों के बीच संबंध एवं क्रिकेट समेत कई विषयों पर चर्चा की। जयशंकर फिजी से यहां पहुंचे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुभकामना संदेश उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष को दिया। जयशंकर ने ट्वीट किया, ‘‘ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से मिलकर प्रसन्नता हुई।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्यक्तिगत शुभकामना संदेश उन्हें दिया। चर्चा के दौरान हमारी रणनीतिक साझेदारी की भावना प्रतिबिंबित हुई। उस संबंध में हाल के घटनाक्रमों से प्रधानमंत्री अल्बनीज को अवगत कराया।'' ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री अल्बनीज ने ट्वीट किया, ‘‘अगले महीने अपनी भारत यात्रा से पहले आज सुबह डॉ. एस. जयशंकर से मिलना बहुत अच्छा रहा। हमने अपनी रणनीतिक साझेदारी, आर्थिक अवसरों और लोगों के बीच संबंधों पर चर्चा की, जो हमारे देशों को समृद्ध करते हैं।''</p>
<p>इससे पहले जयशंकर ने ‘सिडनी बिजनेस ब्रेकफास्ट' कार्यक्रम में बात की, जहां उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज के वैश्विक परिदृश्य में समान विचारधारा वाले देशों को ‘‘अर्थव्यवस्था को जोखिम से मुक्त करने'' के लिए एकसाथ काम करने और डिजिटल दुनिया की चुनौतियों का सामना करने एवं अर्थव्यवस्था के लिए स्थिरता प्रदान करने वाले संबंध बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, ‘‘बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक महत्वपूर्ण साझेदारी बन रही है और सभी हितधारकों के योगदान का स्वागत है।'' </p>
<p><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Feb 2023 14:53:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बर्फीले तूफान का अमेरिका सहित कई देशों में कहर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></p>
<p>अमेरिका में आए जानलेवा बर्फीला तूफान अब दुनिया के अन्य देशों तक कहर बरपा रहा है। अमेरिका के बाद कनाडा, मैक्सिको, जापान और ऑस्ट्रिया तक बर्फीला तूफान जानलेवा और मुसीबत भरा साबित हो रहा है। अमेरिका में अब तक 60 लोगों की जान जा चुकी है और जापान में हिमपात की चपेट में आकर 17 लोग मारे गए हैं। मैक्सिको के कई शहरों की बिजली गुल है और ऑस्ट्रिया में बर्फ की मोटी चादर में कई लोग दब गए हैं।</p>
<p>अमेरिका में बर्फीले तूफान से देश के करीब 20 करोड़ लोग बुरी तरह प्रभावित हैं। न्यूयॉर्क और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/126648/snow-storm-wreaks-havoc-in-many-countries-including-america"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2022-12/49.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></p>
<p>अमेरिका में आए जानलेवा बर्फीला तूफान अब दुनिया के अन्य देशों तक कहर बरपा रहा है। अमेरिका के बाद कनाडा, मैक्सिको, जापान और ऑस्ट्रिया तक बर्फीला तूफान जानलेवा और मुसीबत भरा साबित हो रहा है। अमेरिका में अब तक 60 लोगों की जान जा चुकी है और जापान में हिमपात की चपेट में आकर 17 लोग मारे गए हैं। मैक्सिको के कई शहरों की बिजली गुल है और ऑस्ट्रिया में बर्फ की मोटी चादर में कई लोग दब गए हैं।</p>
<p>अमेरिका में बर्फीले तूफान से देश के करीब 20 करोड़ लोग बुरी तरह प्रभावित हैं। न्यूयॉर्क और मोटाना जैसे शहर का तापमान शून्य से 45 डिग्री नीचे तक पहुंच गया है। अमेरिकी अधिकारी इसे सदी का भयावह तूफान बता रहे हैं। अमेरिका के लाखों घरों की बिजली गुल है, आवाजाही ठप है और चारों ओर बर्फ जमा है। आइओवा, विस्कोन्सिन, मिनेसोटा और मिशिगन में भी हालात खराब हैं। बफैलो सिटी में दृश्यता शून्य तक पहुंच चुकी है और एरी झील जम गयी है। न्यूयॉर्क के गवर्नर कैथी होचुल ने राष्ट्रपति जो बाइडन से फोन पर बात कर उनसे मदद की गुहार लगाई है। पश्चिमी न्यूयॉर्क के इलाके 30 से 40 इंच मोटी बर्फ से ढके रहे। तूफान की वजह से सिएटल तक बिजली गुल रही। अटलांटा, शिकागो, डेनेवर, डेट्रॉयट और न्यूयॉर्क तक हवाई अड्डों का बुरा हाल है और हवाई यातायात ठप पड़ा हुआ है। खराब मौसम के कारण 15 हजार से ज्यादा उड़ानें रद्द की गयी हैं।</p>
<p>अमेरिका के अलावा आसपास के देश भी बर्फीले तूफान का दंश झेलने को विवश हैं। कनाडा में भी लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। यहां चार लोगों की जान जा चुकी है। मैक्सिको में तूफान कहर बरपा रहा है। यहां मरीजों तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पा रही है। मैक्सिको के कई शहरों में बिजली गुल है। जापान में भारी हिमपात के कारण राजमार्गों पर सैकड़ों वाहन फंसे हैं। हिमपात के कारण 17 लोगों की मौत हो चुकी है और 90 से ज्यादा घायल हैं। जापान में घायलों में से कई छतों से बर्फ हटाते वक्त गिर गए या छतों से फिसलने वाली बर्फ की मोटी चादर के ढेर के नीचे दब गए। इस कारण भी वहां मृतक संख्या बढ़ रही है।</p>
<p>जापान में बर्फ प्रभावित क्षेत्रों में निवासियों से बर्फ हटाने के दौरान सावधानी बरतने और अकेले काम न करने की सलाह दी गयी है। उधर ऑस्ट्रिया में हिमस्खलन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। जुएर्स कस्बे के पास लोगों के बर्फ में दबे होने की आशंका है। पश्चिमी ऑस्ट्रिया में आए हिमस्खलन से खतरे को स्थानीय पर्वतीय बचाव सेवा ने ‘उच्च’ श्रेणी में रखा है। हिमस्खलन 2,700 मीटर ऊंचे पर्वत पर जुएर्स और लेच एम अर्लबर्ग के बीच हुआ, जहां दबे लोगों को बचाने में 200 बचावकर्मी लगाए गए हैं। ऑस्ट्रिया में इस कारण विमान सेवाएं भी ठप हो गयी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Dec 2022 19:52:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>चीन से मुकाबले के लिए जापान-ऑस्ट्रेलिया आये नजदीक</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात । </strong></p>
<p>जापान और ऑस्ट्रेलिया हाल के वर्षों में सुरक्षा सहयोग बढ़ा रहे हैं । चीन का मुकाबला करने के लिए दोनों देश एक दूसरे को आकस्मिक स्थिति में संयुक्त कार्रवाई करने की क्षमता के रूप में देख रहे हैं।  अक्टूबर में, दोनों राष्ट्रों ने सुरक्षा सहयोग पर एक संयुक्त घोषणापत्र जारी किया, जिसमें आपातकालीन स्थितियों के लिए सहयोगी प्रतिक्रियाओं पर विचार करने का वचन दिया गया था । उनका का यह कदम जो भारत-प्रशांत क्षेत्र में एकतरफा बल द्वारा यथास्थिति को बदलने के लिए चीन के छिपे हुए खतरे पर साझा चिंताओं को दर्शाता है।</p>
<p>जबकि लगभग 15</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/126632/japan-australia-come-closer-to-compete-with-china"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2022-12/62.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात । </strong></p>
<p>जापान और ऑस्ट्रेलिया हाल के वर्षों में सुरक्षा सहयोग बढ़ा रहे हैं । चीन का मुकाबला करने के लिए दोनों देश एक दूसरे को आकस्मिक स्थिति में संयुक्त कार्रवाई करने की क्षमता के रूप में देख रहे हैं।  अक्टूबर में, दोनों राष्ट्रों ने सुरक्षा सहयोग पर एक संयुक्त घोषणापत्र जारी किया, जिसमें आपातकालीन स्थितियों के लिए सहयोगी प्रतिक्रियाओं पर विचार करने का वचन दिया गया था । उनका का यह कदम जो भारत-प्रशांत क्षेत्र में एकतरफा बल द्वारा यथास्थिति को बदलने के लिए चीन के छिपे हुए खतरे पर साझा चिंताओं को दर्शाता है।</p>
<p>जबकि लगभग 15 साल पहले अपनाई गई उनकी पिछली संयुक्त घोषणा में  चीन के खतरे के बारे में  चेतावनी को इंगित करने वाली कोई भाषा नहीं थी। लेकिन अब ऑस्ट्रेलिया की चीन को लेकर धारणा  स्पष्ट रूप से बदल गई है। और जापानभी इस क्षेत्र में चीन से संबंधित जोखिमों से निपटने के लिए ऑस्ट्रेलिया के साथ अपने "अर्ध-गठबंधन" संबंध को और मजबूत करना चाहता है।</p>
<p>प्रधान मंत्री फुमियो किशिदा और उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष, एंथनी अल्बानीस ने पर्थ, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में अक्टूबर को बातचीत की और बाद में संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किए। एक संयुक्त समाचार सम्मेलन में, अल्बनीस ने कहा कि "यह ऐतिहासिक घोषणा हमारे रणनीतिक संरेखण के क्षेत्र में एक मजबूत संकेत है।किशिदा ने भी घोषणा पर प्रकाश डालते हुए कहा, "इसमें हमारे सुरक्षा और रक्षा सहयोग को और गहरा करने के उद्देश्य से पर्याप्त सामग्री है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Dec 2022 22:19:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑस्ट्रेलिया को वनडे के लिए मिला नया कप्तान, इस धुरंधर गेंदबाज़ को मिली है जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p>  </p>
<p>ऑस्ट्रेलिया को वनडे में नया कप्तान मिल चूका है। पैट कमिंस ऑस्ट्रेलिया के नए कप्तान बने हैं। एरॉन फिंच के वनडे फॉर्मेट से संन्यास लेने के बाद यह जगह खाली थी। ऐसे में कमिंस के अलावा डेविड वॉर्नर का भी नाम कप्तान बनने की संभावितों में था। अब कमिंस को नया कप्तान बनाया गया है। वह पहले से ही टेस्ट कप्तान हैं। वहीं, टी20 में फिंच फिलहाल कप्तान बने रहेंगे। आगामी टी20 विश्व कप में फिंच ही ऑस्ट्रेलियाई टीम की कप्तानी कर रहे हैं।</p>
<p><br />कमिंस इंग्लैंड के खिलाफ आगामी वनडे सीरीज में टीम की कप्तानी करते दिखेंगे। मंगलवार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/125215/australia-got-a-new-captain-for-odis-this-swashbuckling-bowler"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2022-10/pat.webp" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p> </p>
<p>ऑस्ट्रेलिया को वनडे में नया कप्तान मिल चूका है। पैट कमिंस ऑस्ट्रेलिया के नए कप्तान बने हैं। एरॉन फिंच के वनडे फॉर्मेट से संन्यास लेने के बाद यह जगह खाली थी। ऐसे में कमिंस के अलावा डेविड वॉर्नर का भी नाम कप्तान बनने की संभावितों में था। अब कमिंस को नया कप्तान बनाया गया है। वह पहले से ही टेस्ट कप्तान हैं। वहीं, टी20 में फिंच फिलहाल कप्तान बने रहेंगे। आगामी टी20 विश्व कप में फिंच ही ऑस्ट्रेलियाई टीम की कप्तानी कर रहे हैं।</p>
<p><br />कमिंस इंग्लैंड के खिलाफ आगामी वनडे सीरीज में टीम की कप्तानी करते दिखेंगे। मंगलवार को इसकी घोषणा की गई। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने प्रेस रिलीज में कमिंस को कोट करते हुए कहा- मैंने फिंची के नेतृत्व में खेलने का भरपूर आनंद लिया है और उनके नेतृत्व से काफी कुछ सीखा है। हालांकि, हम बहुत भाग्यशाली हैं कि हमारे पास एक ऐसी वनडे टीम है, जिसमें कई अनुभवी खिलाड़ी हैं।<br />इस नियुक्ति पर टिप्पणी करते हुए, चयनकर्ताओं के अध्यक्ष जॉर्ज बेली ने कहा- कमिंस ने टेस्ट टीम की कप्तानी संभालने के बाद से शानदार काम किया है और हम भारत में 2023 विश्व कप के लिए वनडे टीम का नेतृत्व की जिम्मेदारी उन्हें सौंपने के लिए तत्पर हैं। ऑस्ट्रेलिया को टी20 विश्व कप के तुरंत बाद 17 नवंबर से शुरू होने वाले तीन वनडे मैचों में इंग्लैंड के खिलाफ खेलना है और फिर जनवरी में घर में दक्षिण अफ्रीका से भिड़ना है।</p>
<p><br />कमिंस ऑस्ट्रेलिया के 27वें वनडे कप्तान हैं। वहीं, ऑस्ट्रेलियाई टीम का वनडे में प्रतिनिधित्व करने वाले पहले विशिष्ट तेज गेंदबाज हैं। उनसे पहले शेन वॉटसन, किम ह्यूज और बिल लॉरी वनडे में ऑस्ट्रेलिया के कप्तान रह चुके हैं, लेकिन यह सब बैटिंग ऑलराउंडर थे। कमिंस एक प्रोपर तेज गेंदबाज हैं। उन्होंने अब तक ऑस्ट्रेलिया के लिए 43 टेस्ट, 73 वनडे और 46 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं।<br />टेस्ट में कमिंस के नाम 199 विकेट, वनडे में 119 विकेट और टी20 अंतरराष्ट्रीय में 52 विकेट हैं। इसके अलावा कमिंस टेस्ट में 16.92 की औसत से 880 रन, वनडे में 10.12 की औसत से 324 रन और टी20 में 95 रन बना चुके हैं। कमिंस लोअर ऑर्डर में अच्छी बल्लेबाजी भी कर लेते हैं। अगले साल वनडे विश्व कप होना है। ऐसे में कमिंस का अनुभव टीम के काम आ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Featured</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Oct 2022 09:53:14 +0530</pubDate>
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