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                <title>IAS Divya Tanwar - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>IAS Divya Tanwar RSS Feed</description>
                
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                <title>IAS Success Story: हरियाणा के छोटे से गांव की बेटी बनी IAS अफसर, पढ़ें दिव्या तंवर की सक्सेस स्टोरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: हरियाणा के एक छोटे से गांव निंबी की रहने वाली दिव्या तंवर ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, मंजिल तक पहुंचा जा सकता है। दिव्या की सफलता की कहानी लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों और मुश्किल हालात के बावजूद अपने सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।</p>
<p>साल 2011 में दिव्या के सिर से पिता का साया उठ गया। यह वह समय था जब अक्सर बच्चों की पढ़ाई रुक जाती है, लेकिन उनकी मां बबीता तंवर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163288/ias-success-story-daughter-of-a-small-village-in-haryana"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-divya-tanwar-(4).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: हरियाणा के एक छोटे से गांव निंबी की रहने वाली दिव्या तंवर ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, मंजिल तक पहुंचा जा सकता है। दिव्या की सफलता की कहानी लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों और मुश्किल हालात के बावजूद अपने सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।</p>
<p>साल 2011 में दिव्या के सिर से पिता का साया उठ गया। यह वह समय था जब अक्सर बच्चों की पढ़ाई रुक जाती है, लेकिन उनकी मां बबीता तंवर ने हालात के सामने हार नहीं मानी। उन्होंने दिन में खेतों में मजदूरी की और रात को सिलाई करके अपने चार बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा उठाया। मां के इस संघर्ष ने दिव्या को कभी न रुकने की सीख दी।</p>
<p>दिव्या ने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की और फिर नवोदय विद्यालय से अपनी शिक्षा जारी रखी। इसके बाद उन्होंने महेंद्रगढ़ के सरकारी वीमेंस कॉलेज से बीएससी की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के साथ-साथ दिव्या बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपने खर्च खुद निकालती थीं। इसी दौरान उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा देने का फैसला किया।</p>
<p>बड़े शहरों की महंगी कोचिंग की बजाय दिव्या ने फ्री ऑनलाइन स्टडी मटेरियल और मॉक टेस्ट पर भरोसा किया। वह रोजाना 10 घंटे की मेहनत से पढ़ाई करती थीं। उनका समर्पण रंग लाया और 2021 में पहले ही प्रयास में उन्होंने UPSC परीक्षा पास कर 438वीं रैंक हासिल की और IPS बनीं। लेकिन उनका सपना IAS बनने का था, इसलिए उन्होंने एक और प्रयास किया।</p>
<p>दूसरे प्रयास में दिव्या ने 2022 की UPSC परीक्षा में 105वीं रैंक हासिल कर आखिरकार IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा कर लिया। वर्तमान में वे मणिपुर कैडर में सेवा दे रही हैं।</p>
<p>दिव्या की यह कहानी सिर्फ परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि एक मां की ममता, संघर्ष और बेटी के अटूट हौसले की कहानी है। गरीबी, पिता की कमी और सीमित संसाधनों के बावजूद दिव्या ने कभी हार नहीं मानी। वे आज लाखों लड़कियों के लिए एक मिसाल हैं कि अगर मेहनत और हिम्मत साथ हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रह सकता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Dec 2025 21:19:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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                <title>IAS Success Story: हरियाणा के छोटे से गांव की बेटी बनी IAS अफसर, पढ़ें दिव्या तंवर की सक्सेस स्टोरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: हरियाणा के एक छोटे से गांव निंबी की रहने वाली दिव्या तंवर ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, मंजिल तक पहुंचा जा सकता है। दिव्या की सफलता की कहानी लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों और मुश्किल हालात के बावजूद अपने सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।</p>
<p>साल 2011 में दिव्या के सिर से पिता का साया उठ गया। यह वह समय था जब अक्सर बच्चों की पढ़ाई रुक जाती है, लेकिन उनकी मां बबीता तंवर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162722/ias-success-story-daughter-of-a-small-village-in-haryana"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/c6c254221a9fb7538f21a74137ca36fd.webp" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: हरियाणा के एक छोटे से गांव निंबी की रहने वाली दिव्या तंवर ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, मंजिल तक पहुंचा जा सकता है। दिव्या की सफलता की कहानी लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों और मुश्किल हालात के बावजूद अपने सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।</p>
<p>साल 2011 में दिव्या के सिर से पिता का साया उठ गया। यह वह समय था जब अक्सर बच्चों की पढ़ाई रुक जाती है, लेकिन उनकी मां बबीता तंवर ने हालात के सामने हार नहीं मानी। उन्होंने दिन में खेतों में मजदूरी की और रात को सिलाई करके अपने चार बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा उठाया। मां के इस संघर्ष ने दिव्या को कभी न रुकने की सीख दी।</p>
<p>दिव्या ने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की और फिर नवोदय विद्यालय से अपनी शिक्षा जारी रखी। इसके बाद उन्होंने महेंद्रगढ़ के सरकारी वीमेंस कॉलेज से बीएससी की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के साथ-साथ दिव्या बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपने खर्च खुद निकालती थीं। इसी दौरान उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा देने का फैसला किया।</p>
<p>बड़े शहरों की महंगी कोचिंग की बजाय दिव्या ने फ्री ऑनलाइन स्टडी मटेरियल और मॉक टेस्ट पर भरोसा किया। वह रोजाना 10 घंटे की मेहनत से पढ़ाई करती थीं। उनका समर्पण रंग लाया और 2021 में पहले ही प्रयास में उन्होंने UPSC परीक्षा पास कर 438वीं रैंक हासिल की और IPS बनीं। लेकिन उनका सपना IAS बनने का था, इसलिए उन्होंने एक और प्रयास किया।</p>
<p>दूसरे प्रयास में दिव्या ने 2022 की UPSC परीक्षा में 105वीं रैंक हासिल कर आखिरकार IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा कर लिया। वर्तमान में वे मणिपुर कैडर में सेवा दे रही हैं।</p>
<p>दिव्या की यह कहानी सिर्फ परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि एक मां की ममता, संघर्ष और बेटी के अटूट हौसले की कहानी है। गरीबी, पिता की कमी और सीमित संसाधनों के बावजूद दिव्या ने कभी हार नहीं मानी। वे आज लाखों लड़कियों के लिए एक मिसाल हैं कि अगर मेहनत और हिम्मत साथ हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रह सकता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
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                <pubDate>Sat, 06 Dec 2025 15:09:29 +0530</pubDate>
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                <title>IAS Success Story: हरियाणा के छोटे से गांव की बेटी बनी IAS अफसर, पढ़ें दिव्या तंवर की सक्सेस स्टोरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: हरियाणा के एक छोटे से गांव निंबी की रहने वाली दिव्या तंवर ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, मंजिल तक पहुंचा जा सकता है। दिव्या की सफलता की कहानी लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों और मुश्किल हालात के बावजूद अपने सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।</p>
<p>साल 2011 में दिव्या के सिर से पिता का साया उठ गया। यह वह समय था जब अक्सर बच्चों की पढ़ाई रुक जाती है, लेकिन उनकी मां बबीता तंवर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/160592/ias-success-story-daughter-of-a-small-village-in-haryana"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/c6c254221a9fb7538f21a74137ca36fd.webp" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: हरियाणा के एक छोटे से गांव निंबी की रहने वाली दिव्या तंवर ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, मंजिल तक पहुंचा जा सकता है। दिव्या की सफलता की कहानी लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों और मुश्किल हालात के बावजूद अपने सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।</p>
<p>साल 2011 में दिव्या के सिर से पिता का साया उठ गया। यह वह समय था जब अक्सर बच्चों की पढ़ाई रुक जाती है, लेकिन उनकी मां बबीता तंवर ने हालात के सामने हार नहीं मानी। उन्होंने दिन में खेतों में मजदूरी की और रात को सिलाई करके अपने चार बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा उठाया। मां के इस संघर्ष ने दिव्या को कभी न रुकने की सीख दी।</p>
<p>दिव्या ने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की और फिर नवोदय विद्यालय से अपनी शिक्षा जारी रखी। इसके बाद उन्होंने महेंद्रगढ़ के सरकारी वीमेंस कॉलेज से बीएससी की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के साथ-साथ दिव्या बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपने खर्च खुद निकालती थीं। इसी दौरान उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा देने का फैसला किया।</p>
<p>बड़े शहरों की महंगी कोचिंग की बजाय दिव्या ने फ्री ऑनलाइन स्टडी मटेरियल और मॉक टेस्ट पर भरोसा किया। वह रोजाना 10 घंटे की मेहनत से पढ़ाई करती थीं। उनका समर्पण रंग लाया और 2021 में पहले ही प्रयास में उन्होंने UPSC परीक्षा पास कर 438वीं रैंक हासिल की और IPS बनीं। लेकिन उनका सपना IAS बनने का था, इसलिए उन्होंने एक और प्रयास किया।</p>
<p>दूसरे प्रयास में दिव्या ने 2022 की UPSC परीक्षा में 105वीं रैंक हासिल कर आखिरकार IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा कर लिया। वर्तमान में वे मणिपुर कैडर में सेवा दे रही हैं।</p>
<p>दिव्या की यह कहानी सिर्फ परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि एक मां की ममता, संघर्ष और बेटी के अटूट हौसले की कहानी है। गरीबी, पिता की कमी और सीमित संसाधनों के बावजूद दिव्या ने कभी हार नहीं मानी। वे आज लाखों लड़कियों के लिए एक मिसाल हैं कि अगर मेहनत और हिम्मत साथ हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रह सकता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
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                <pubDate>Sun, 16 Nov 2025 20:55:33 +0530</pubDate>
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                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: हरियाणा के एक छोटे से गांव निंबी की रहने वाली दिव्या तंवर ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, मंजिल तक पहुंचा जा सकता है। दिव्या की सफलता की कहानी लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों और मुश्किल हालात के बावजूद अपने सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।</p>
<p>साल 2011 में दिव्या के सिर से पिता का साया उठ गया। यह वह समय था जब अक्सर बच्चों की पढ़ाई रुक जाती है, लेकिन उनकी मां बबीता तंवर</p>...]]></description>
                
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<p>साल 2011 में दिव्या के सिर से पिता का साया उठ गया। यह वह समय था जब अक्सर बच्चों की पढ़ाई रुक जाती है, लेकिन उनकी मां बबीता तंवर ने हालात के सामने हार नहीं मानी। उन्होंने दिन में खेतों में मजदूरी की और रात को सिलाई करके अपने चार बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा उठाया। मां के इस संघर्ष ने दिव्या को कभी न रुकने की सीख दी।</p>
<p>दिव्या ने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की और फिर नवोदय विद्यालय से अपनी शिक्षा जारी रखी। इसके बाद उन्होंने महेंद्रगढ़ के सरकारी वीमेंस कॉलेज से बीएससी की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के साथ-साथ दिव्या बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपने खर्च खुद निकालती थीं। इसी दौरान उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा देने का फैसला किया।</p>
<p>बड़े शहरों की महंगी कोचिंग की बजाय दिव्या ने फ्री ऑनलाइन स्टडी मटेरियल और मॉक टेस्ट पर भरोसा किया। वह रोजाना 10 घंटे की मेहनत से पढ़ाई करती थीं। उनका समर्पण रंग लाया और 2021 में पहले ही प्रयास में उन्होंने UPSC परीक्षा पास कर 438वीं रैंक हासिल की और IPS बनीं। लेकिन उनका सपना IAS बनने का था, इसलिए उन्होंने एक और प्रयास किया।</p>
<p>दूसरे प्रयास में दिव्या ने 2022 की UPSC परीक्षा में 105वीं रैंक हासिल कर आखिरकार IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा कर लिया। वर्तमान में वे मणिपुर कैडर में सेवा दे रही हैं।</p>
<p>दिव्या की यह कहानी सिर्फ परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि एक मां की ममता, संघर्ष और बेटी के अटूट हौसले की कहानी है। गरीबी, पिता की कमी और सीमित संसाधनों के बावजूद दिव्या ने कभी हार नहीं मानी। वे आज लाखों लड़कियों के लिए एक मिसाल हैं कि अगर मेहनत और हिम्मत साथ हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रह सकता।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 11 Nov 2025 21:34:04 +0530</pubDate>
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                <title>IAS Success Story: गांव की बेटी बिना कोचिंग बनीं IAS अफसर, दो बार क्रैक किया UPSC एग्जाम</title>
                                    <description><![CDATA[<p><span class="cf0">IAS Success Story: UPSC </span><span class="cf1">सिविल सर्विस परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस चुनौती में हिस्सा लेते हैं, लेकिन उनमें से गिने-चुने ही पहले प्रयास में सफलता हासिल कर पाते हैं। उन्हीं में एक नाम है दिव्या तंवर, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से वह कर दिखाया जो करोड़ों युवाओं का सपना होता है।</span></p>
<h3><strong><span class="cf1">मां की मेहनत से सीखा संघर्ष का जज्बा</span></strong></h3>
<p><span class="cf1">हरियाणा के महेन्द्रगढ़ जिले के निंबी गांव में जन्मीं दिव्या तंवर का जीवन आसान नहीं रहा। वर्ष 2011 में उनके पिता का निधन हो गया,</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/159307/ias-success-story-village-daughter-became-ias-officer-without-coaching"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/ias-divya-tanwar-(2).jpg" alt=""></a><br /><p><span class="cf0">IAS Success Story: UPSC </span><span class="cf1">सिविल सर्विस परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस चुनौती में हिस्सा लेते हैं, लेकिन उनमें से गिने-चुने ही पहले प्रयास में सफलता हासिल कर पाते हैं। उन्हीं में एक नाम है दिव्या तंवर, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से वह कर दिखाया जो करोड़ों युवाओं का सपना होता है।</span></p>
<h3><strong><span class="cf1">मां की मेहनत से सीखा संघर्ष का जज्बा</span></strong></h3>
<p><span class="cf1">हरियाणा के महेन्द्रगढ़ जिले के निंबी गांव में जन्मीं दिव्या तंवर का जीवन आसान नहीं रहा। वर्ष 2011 में उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद परिवार की पूरी ज़िम्मेदारी उनकी मां बबीता तंवर पर आ गई। बबीता जी ने खेतों में मजदूरी की, कपड़े सिले और चार बच्चों की परवरिश अकेले की।</span></p>
<p><span class="cf1"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/maharashtra-times.jpg" alt="maharashtra-times" width="1600" height="900"></img></span></p>
<p><span class="cf1">आर्थिक तंगी के बावजूद दिव्या की शिक्षा में कभी समझौता नहीं किया गया। उन्होंने सरकारी स्कूल और नवोदय विद्यालय से पढ़ाई की। विज्ञान विषय से स्नातक की डिग्री पूरी करने के बाद, उन्होंने बचपन से देखा सपना </span><span class="cf2">– UPSC </span><span class="cf1">पास कर देश सेवा करने का </span><span class="cf2">– </span><span class="cf1">साकार करने की ठानी।</span></p>
<h3><strong><span class="cf1">पहले प्रयास में बनीं देश की सबसे कम उम्र की </span><span class="cf0">IPS</span></strong></h3>
<p><span class="cf1">जहां अधिकांश उम्मीदवार महंगे कोचिंग संस्थानों पर निर्भर होते हैं, वहीं दिव्या ने ऑनलाइन संसाधनों और मॉक टेस्ट की मदद से खुद पढ़ाई की। उनकी कड़ी मेहनत और अनुशासन का ही परिणाम था कि वर्ष 2021 में पहली बार </span><span class="cf0">UPSC </span><span class="cf1">परीक्षा में शामिल होकर उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 438 प्राप्त की।</span></p>
<p><span class="cf1"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/100544145.jpg" alt="100544145" width="1200" height="900"></img></span></p>
<p><span class="cf1">उस समय उनकी उम्र महज 21 वर्ष थी और वे देश की सबसे कम उम्र की </span><span class="cf0">IPS </span><span class="cf1">अधिकारियों में से एक बन गईं। उनके लिखित परीक्षा में 751 अंक और पर्सनैलिटी टेस्ट में 179 अंक आए, जिससे उनका कुल स्कोर 930 रहा।</span></p>
<h3><strong><span class="cf1">दूसरे प्रयास में जब सपना हुआ साकार और बनीं </span><span class="cf0">IAS</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">IPS </span><span class="cf1">बनने के बाद भी दिव्या का सपना यहीं खत्म नहीं हुआ। उन्होंने 2022 में दोबारा </span><span class="cf0">UPSC </span><span class="cf1">परीक्षा दी और इस बार </span><span class="cf0">AIR 105 </span><span class="cf1">हासिल कर </span><span class="cf0">IAS </span><span class="cf1">अधिकारी बनने का सपना भी पूरा कर लिया।</span></p>
<p><span class="cf1">इस बार उन्होंने लिखित परीक्षा में 834 अंक और इंटरव्यू में 160 अंक हासिल किए, जिससे उनका कुल स्कोर 994 बना। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिव्या तंवर वर्तमान में मणिपुर कैडर में </span><span class="cf0">IAS </span><span class="cf1">अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Nov 2025 12:34:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: बिना कोचिंग पहले IPS और फिर बनी IAS, हरियाणा के छोटे से गांव का नाम किया रोशन</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Success Story:</strong> UPSC द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में सफल होना देश के लाखों उम्मीदवारों का सपना होता है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी IAS अफसर के बारें में बताने वाले है, जिन्होनें इस परीक्षा को दो बार पास किया। पहले प्रयास में बिना कोचिंग इस परीक्षा को पास कर वह IPS बनी और अपने दूसरे प्रयास में IAS का पद हासिल किया।</p>
<p>हरियाणा की रहने वाली है IAS Divya Tanwar</p>
<p>हम बात कर रहे है IAS दिव्या तंवर की। हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के निम्बी गांव की रहने वाली दिव्या ने शुरुआती पढ़ाई अपने होम टाउन के एक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158512/success-story-without-coaching-first-became-ips-and-then-ias"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/latest-news---2025-10-30t151700.494.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Success Story:</strong> UPSC द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में सफल होना देश के लाखों उम्मीदवारों का सपना होता है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी IAS अफसर के बारें में बताने वाले है, जिन्होनें इस परीक्षा को दो बार पास किया। पहले प्रयास में बिना कोचिंग इस परीक्षा को पास कर वह IPS बनी और अपने दूसरे प्रयास में IAS का पद हासिल किया।</p>
<p>हरियाणा की रहने वाली है IAS Divya Tanwar</p>
<p>हम बात कर रहे है IAS दिव्या तंवर की। हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के निम्बी गांव की रहने वाली दिव्या ने शुरुआती पढ़ाई अपने होम टाउन के एक सरकारी स्कूल में की थी। इसके बाद में उनका चयन नवोदय विद्यालय, महेंद्रगढ़ में हो गया।​</p>
<p>UPSC की तैयारी</p>
<p>12वीं के बाद उन्होनें महेंद्रगढ़ के ही एक सरकारी महिला कॉलेज से BSc की पढ़ाई पूरी। ग्रेजुएशन के बाद उन्होनें UPSC की परीक्षा देने का मन बनाया और इसके लिए तैयारी शुरू कर दी। दिव्या जब छोटी थी तो उनके पिता का निधन हो गया। घर की सारी जिम्मेदारी उनकी मां पर थी। लेकिन उन्होनें अपनी बेटी का हर कदम पर साथ दिया।</p>
<p>पहली प्रयास में बनीं IPS</p>
<p>दिव्या तंवर ने साल 2021 में पहली बार UPSC की परीक्षा दी। तब दिव्या की उम्र महज 21 साल की थीं। अपने पहले प्रयास में दिव्या ने UPSC जैसी मुश्किल परीक्षा को न सिर्फ पास किया बल्कि ऑल इंडिया 438वीं रैंक हासिल की और वह IPS बनी। लेकिन दिव्या का सपना था कि वह IAS बने। फिर क्या था दिव्या ने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी।</p>
<p>बनी IAS अफसर</p>
<p>इसके बाद दिव्या ने साल 2022 में ही दूसरी बार UPSC की परीक्षा दी। अपने दूसरे प्रयास में भी दिव्या को सफलता मिली। साल 2022 में दिव्या ने ऑल इंडिया रैंक 105 हासिल कर अपना IAS बनने का सपना पूरा कर लिया। वर्तमान में दिव्या मणिपुर कैडर में सेवा दे रही हैं और अपने दृढ़ संकल्प और महत्वाकांक्षा की मिसाल बन चुकी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Oct 2025 15:17:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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