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                <title>Swantantra prabhat Bihar news - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>नीतीश कुमार होना आसान नहीं है</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="en-us" xml:lang="en-us">महेन्द्र तिवारी</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय राजनीति के फलक पर नीतीश कुमार एक ऐसी पहेली हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे सुलझाने का दावा हर कोई करता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पूरी तरह कोई समझ नहीं पाता। एक ऐसा नेता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके पास लालू प्रसाद यादव जैसा नैसर्गिक करिश्मा नहीं है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">न ही उनके पास भाजपा जैसा विशाल सांगठनिक ढांचा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी वह साल-दर-साल बिहार की सत्ता की धुरी बने हुए हैं। यह राजनीतिक उत्तरजीविता का ऐसा उदाहरण है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो राजनीति विज्ञान के छात्रों के लिए किसी शोध से कम नहीं। नीतीश कुमार के व्यक्तित्व को समझने के लिए हमें उस दौर में</span></p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172868/it-is-not-easy-to-be-nitish-kumar"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/नीतीश-कुमार-होना-आसान-नहीं-है.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="en-us" xml:lang="en-us">महेन्द्र तिवारी</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय राजनीति के फलक पर नीतीश कुमार एक ऐसी पहेली हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे सुलझाने का दावा हर कोई करता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पूरी तरह कोई समझ नहीं पाता। एक ऐसा नेता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके पास लालू प्रसाद यादव जैसा नैसर्गिक करिश्मा नहीं है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">न ही उनके पास भाजपा जैसा विशाल सांगठनिक ढांचा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी वह साल-दर-साल बिहार की सत्ता की धुरी बने हुए हैं। यह राजनीतिक उत्तरजीविता का ऐसा उदाहरण है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो राजनीति विज्ञान के छात्रों के लिए किसी शोध से कम नहीं। नीतीश कुमार के व्यक्तित्व को समझने के लिए हमें उस दौर में पीछे जाना होगा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जब बिहार </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">जंगलराज</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के तमगे से जूझ रहा था।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">2005</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> में जब उन्होंने सत्ता संभाली</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो उनके सामने एक ऐसा राज्य था जिसकी सड़कें गायब थीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहां शाम ढलते ही लोग घरों में दुबक जाते थे और जहां विकास की परिभाषा केवल सरकारी विज्ञापनों तक सीमित थी। उस समय नीतीश कुमार ने </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुशासन बाबू</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की जो छवि गढ़ी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वह रातों-रात नहीं बनी थी। उसके पीछे दशकों का संघर्ष और समाजवाद की वह विचारधारा थी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे उन्होंने राम मनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण से सीखा था। नीतीश कुमार होना इसलिए कठिन है क्योंकि उन्हें हर कदम पर एक संतुलन साधना पड़ता है एक तरफ अपनी समाजवादी साख बचाए रखने की चुनौती और दूसरी तरफ सत्ता के समीकरणों को साधने की मजबूरी।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी राजनीति का सबसे दिलचस्प और विवादित पहलू उनका पाला बदलना रहा है। आलोचक उन्हें </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">पलटू राम</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कहते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अगर इसे गहराई से देखें</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह एक ऐसे नेता की छटपटाहट भी हो सकती है जो अपने एजेंडे को लागू करने के लिए किसी भी हद तक समझौता करने को तैयार है। </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या यह सत्ता का लालच है या बिहार के विकास की मजबूरी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पर बहस अंतहीन हो सकती है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन एक सच यह भी है कि नीतीश कुमार ने कभी भी अपनी व्यक्तिगत ईमानदारी और छवि पर दाग नहीं लगने दिया। भारतीय राजनीति में जहां भ्रष्टाचार एक सामान्य शिष्टाचार बन गया हो</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वहां एक मुख्यमंत्री का बेदाग बने रहना वाकई आसान नहीं है। उनकी ताकत उनके वोट बैंक में नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उनकी कार्यशैली में रही है। उन्होंने बिहार में एक नया वर्ग तैयार किया </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">मौन मतदाता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">। इसमें महिलाएं और अति पिछड़े वर्ग शामिल हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> जब नीतीश ने लड़कियों को साइकिल दी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो वह केवल एक वाहन नहीं था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वह बिहार की आधी आबादी के लिए आजादी का परवाना था। सड़क पर साइकिल चलाती उन लड़कियों ने बिहार के सामाजिक ढांचे को बदल दिया। नीतीश कुमार को पता था कि अगर उन्हें बड़े जनाधार वाले नेताओं से लड़ना है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो उन्हें समाज के उन हिस्सों तक पहुंचना होगा जिन्हें अब तक राजनीति में केवल </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">नंबर</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समझा जाता था।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नीतीश कुमार का शासन मॉडल अक्सर नौकरशाही पर बहुत अधिक निर्भर रहा है। उनके बारे में कहा जाता है कि वे राजनेताओं से ज्यादा अफसरों पर भरोसा करते हैं। यह उनकी ताकत भी रही और कमजोरी भी। ताकत इसलिए क्योंकि इसने योजनाओं को धरातल पर उतारने में मदद की</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और कमजोरी इसलिए क्योंकि इसने उन्हें अपनी ही पार्टी के नेताओं से दूर कर दिया। एक अकेला नेता जो अपनी शर्तों पर सरकार चलाना चाहता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उसके लिए गठबंधन की राजनीति किसी जलती हुई मोमबत्ती को दोनों सिरों से पकड़ने जैसा है। </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कभी भाजपा का हिंदुत्व</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो कभी राजद का </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">माय</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समीकरण इन दो पाटों के बीच अपनी </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">धर्मनिरपेक्ष</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">विकासवादी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">छवि को बचाए रखना किसी बाजीगर का ही काम हो सकता है। नीतीश कुमार ने बिहार को बिजली दी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सड़कें दीं और शराबबंदी जैसा साहसी (भले ही विवादास्पद) फैसला लिया। शराबबंदी के पीछे का तर्क विशुद्ध रूप से सामाजिक था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो उनके महिला वोट बैंक को मजबूती देता था। हालांकि</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके क्रियान्वयन में हुई विफलताओं ने उनकी प्रशासनिक साख पर सवाल भी उठाए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन नीतीश अपनी जिद पर अड़े रहे। यह जिद ही उन्हें खास बनाती है और यही उनके लिए मुश्किलें भी खड़ी करती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नीतीश कुमार के राजनीतिक सफर का एक और पहलू उनकी </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">तन्हाई</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">है। वे एक ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिनके पास अपनी पार्टी जेडीयू के भीतर भी कोई स्पष्ट उत्तराधिकारी नहीं है। वे एक ऐसे बरगद के पेड़ की तरह हैं जिसकी छाया तो बहुत है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उसके नीचे दूसरा कोई पौधा नहीं पनप पाया। यह स्थिति एक नेता के लिए असुरक्षा का कारण भी बन सकती है और उसकी अपरिहार्यता का प्रमाण भी। </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज के दौर में जब राजनीति सोशल मीडिया के शोर और इवेंट मैनेजमेंट से चलती है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नीतीश कुमार अभी भी पुराने ढर्रे की उस गंभीर राजनीति में विश्वास रखते हैं जहां फाइलों का अध्ययन और आंकड़ों की बाजीगरी प्राथमिक होती है। वे एक </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">मैकेनिकल इंजीनियर</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हैं और उनकी राजनीति में भी वही इंजीनियरिंग साफ दिखती है। वे जानते हैं कि किस पुर्जे को कब और कहां फिट करना है ताकि सत्ता की मशीन चलती रहे। लेकिन इस मशीन को चलाने की कीमत उन्हें अपनी साख की अस्थिरता से चुकानी पड़ी है। जनता के बीच उनकी विश्वसनीयता का ग्राफ कभी ऊपर तो कभी नीचे जाता रहा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी वे प्रासंगिक बने रहे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नीतीश कुमार होना इसलिए भी मुश्किल है क्योंकि उनके ऊपर हमेशा एक </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">बड़े भाई</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की छाया रही है। कभी वह छाया लालू प्रसाद यादव की थी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो कभी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की। इस छाया से बाहर निकलकर अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना कि बिहार की बागडोर उन्हीं के हाथ में रहे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एक निरंतर चलने वाला युद्ध है। उन्होंने बिहार को उस हीन भावना से बाहर निकाला जो </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">90</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> के दशक के अंत में घर कर गई थी। उन्होंने </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">बिहार गौरव</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की बात की</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रवासी बिहारियों को वापस आने का न्योता दिया और राज्य के बजट को कई गुना बढ़ाया।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> लेकिन इन सबके बावजूद</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पलायन और बेरोजगारी जैसे राक्षसों को वे पूरी तरह काबू नहीं कर पाए। यह उनकी राजनीति की एक दुखद विडंबना है कि जिस राज्य को उन्होंने विकास की पटरी पर दौड़ाने की कोशिश की</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वहां का युवा आज भी रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर देखने को मजबूर है। एक मुख्यमंत्री के रूप में इस विफलता का बोझ ढोना और फिर भी यह कहना कि "सब ठीक है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">," </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वाकई आसान नहीं है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अक्सर यह सवाल उठता है कि नीतीश कुमार का अंतिम लक्ष्य क्या है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या वे प्रधानमंत्री बनना चाहते थे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">या वे केवल बिहार के इतिहास में अपना नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज कराना चाहते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी महत्वाकांक्षाएं हमेशा उनके चेहरे की झुर्रियों और उनकी नपी-तुली बातों के पीछे छिपी रहती हैं। वे एक ऐसे खिलाड़ी हैं जो अपने पत्ते तभी खोलते हैं जब सामने वाला अपनी चाल चल चुका होता है। </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी यह अनिश्चितता उनके सहयोगियों के लिए डरावनी और विरोधियों के लिए चुनौतीपूर्ण होती है। नीतीश कुमार ने बिहार की राजनीति को </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">जाति</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से निकालकर </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">जमात</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">विकास</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की ओर ले जाने की कोशिश की</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अंततः उन्हें भी जातिगत जनगणना जैसे हथियारों का सहारा लेना पड़ा। यह इस बात का प्रमाण है कि जमीन की हकीकतें कितनी भी आदर्शवादी राजनीति को घुटने टेकने पर मजबूर कर सकती हैं।</span> </p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नीतीश कुमार के व्यक्तित्व का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा उनका व्यक्तिगत संयम है। वे चकाचौंध से दूर रहते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनका परिवार राजनीति से कोसों दूर है और वे अपनी निजी जिंदगी को बहुत गोपनीय रखते हैं। भारतीय राजनीति के इस दौर में</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहां परिवारवाद एक बड़ी समस्या है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नीतीश कुमार का इस मामले में अडिग रहना उन्हें सम्मान दिलाता है। लेकिन यही संयम उन्हें कभी-कभी </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">अहंकारी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">या </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">संपर्कविहीन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नेता के रूप में भी चित्रित कर देता है। उनके बारे में प्रसिद्ध है कि वे एक बार जो तय कर लेते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">फिर किसी की नहीं सुनते। यह दृढ़ता ही थी जिसने बिहार में कानून का राज स्थापित किया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यही जिद आज उनकी पार्टी के भीतर असंतोष का कारण भी बनती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंत में</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नीतीश कुमार होना एक निरंतर द्वंद्व में जीने जैसा है। यह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो आधुनिक बिहार का निर्माता कहलाना चाहता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जिसे अपनी कुर्सी बचाने के लिए बार-बार उन सिद्धांतों से समझौता करना पड़ता है जिन्हें उसने कभी पवित्र माना था। वे एक ऐसे नायक हैं जिनके चरित्र में शेड्स ऑफ ग्रे अधिक हैं। न तो वे पूरी तरह </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">सफेद</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आदर्शवादी हैं और न ही पूरी तरह </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">काले</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अवसरवादी। वे समय की मांग के अनुसार रंग बदलने वाले एक कुशल राजनेता हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो जानते हैं कि राजनीति संभावनाओं का खेल है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> बिहार के इतिहास में नीतीश कुमार का मूल्यांकन केवल उनके पाला बदलने के आधार पर नहीं होगा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस बदलाव के आधार पर होगा जो उन्होंने एक आम बिहारी के जीवन में लाने की कोशिश की। उनके विरोधी चाहे जो कहें</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि उन्होंने बिहार को एक </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">पहचान</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दी है। एक ऐसी पहचान</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो अराजकता से दूर और प्रगति की ओर अग्रसर है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">2026 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के इस दौर में भी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जब राजनीति पूरी तरह बदल चुकी है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नीतीश कुमार का प्रासंगिक बने रहना यह साबित करता है कि वे सिर्फ एक नेता नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बिहार की राजनीति का एक अनिवार्य अध्याय हैं। और सच यही है कि उस अध्याय को लिखना या उसे जी पाना</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वाकई हर किसी के बस की बात नहीं है। नीतीश कुमार होना</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दरअसल</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अपनी ही छाया से लड़ते हुए सत्ता के शिखर पर बने रहने की एक अंतहीन साधना है।</span></p>]]>
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                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 18:19:49 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]>
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                <title>राजस्थान की केमिकल फैक्ट्री में विस्फोट: बिहार के 5 मजदूरों की जिंदा जलकर मौत</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>मोतिहारी।</strong> राजस्थान की एक केमिकल फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में बिहार के पांच मजदूरों की जिंदा जलकर मौत हो गई। हादसे में कुल सात लोगों की मौत की सूचना है। घटना के बाद मृतकों के परिवारों में मातम पसरा हुआ है।</p>
<p>मृतकों में पूर्वी चंपारण जिले के घोड़ासहन, चिरैया और हरसिद्धि क्षेत्र के श्रमिक शामिल हैं। प्रशासन ने चार शवों की पहचान कर ली है, जबकि एक शव बुरी तरह जल जाने के कारण पहचान की प्रक्रिया जारी है।</p>
<h6><strong>मृतकों के नाम:</strong></h6>
<ul>
<li>
<p>मिंटू कुमार (श्रीपुर नगरवा, घोड़ासहन)</p>
</li>
<li>
<p>सुजंत कुमार (नारायणपुर, शिकारगंज थाना क्षेत्र, चिरैया)</p>
</li>
<li>
<p>अमरेश कुमार (मटिअरवा, हरसिद्धि)</p>
</li>
<li>
<p>श्याम</p></li></ul>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170023/explosion-in-rajasthans-chemical-factory-5-workers-from-bihar-burnt"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/1200-675-26054709-thumbnail-16x9-mot.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मोतिहारी।</strong> राजस्थान की एक केमिकल फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में बिहार के पांच मजदूरों की जिंदा जलकर मौत हो गई। हादसे में कुल सात लोगों की मौत की सूचना है। घटना के बाद मृतकों के परिवारों में मातम पसरा हुआ है।</p>
<p>मृतकों में पूर्वी चंपारण जिले के घोड़ासहन, चिरैया और हरसिद्धि क्षेत्र के श्रमिक शामिल हैं। प्रशासन ने चार शवों की पहचान कर ली है, जबकि एक शव बुरी तरह जल जाने के कारण पहचान की प्रक्रिया जारी है।</p>
<h6><strong>मृतकों के नाम:</strong></h6>
<ul>
<li>
<p>मिंटू कुमार (श्रीपुर नगरवा, घोड़ासहन)</p>
</li>
<li>
<p>सुजंत कुमार (नारायणपुर, शिकारगंज थाना क्षेत्र, चिरैया)</p>
</li>
<li>
<p>अमरेश कुमार (मटिअरवा, हरसिद्धि)</p>
</li>
<li>
<p>श्याम कुमार (हरसिद्धि)</p>
</li>
<li>
<p>रवि कुमार (हरसिद्धि)</p>
</li>
</ul>
<h6><strong>घायल मजदूर:</strong></h6>
<ul>
<li>
<p>मनु पासवान</p>
</li>
<li>
<p>नितेश कुमार</p>
</li>
<li>
<p>कन्हैया पासवान</p>
</li>
<li>
<p>आशिक पासवान</p>
</li>
<li>
<p>दीपलाल कुमार</p>
</li>
</ul>
<p>सभी घायलों का इलाज राजस्थान के भिवाड़ी स्थित एक निजी अस्पताल में चल रहा है। कुछ की हालत नाजुक बताई जा रही है।</p>
<hr />
<h6><strong>मुख्यमंत्री ने किया मुआवजे का ऐलान</strong></h6>
<p>मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मृतकों के आश्रितों को दो-दो लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है। जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने बताया कि आपदा प्रबंधन विभाग राजस्थान प्रशासन के संपर्क में है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।</p>
<hr />
<h6><strong>पिता के इलाज के लिए गया था राजस्थान</strong></h6>
<p>घोड़ासहन के श्रीपुर नगरवा निवासी मिंटू पासवान अपने पिता सिकंदर पासवान के इलाज के लिए राजस्थान कमाने गए थे। उनके पिता पक्षाघात से पीड़ित हैं। मिंटू पिछले दो वर्षों से अपने परिवार के साथ राजस्थान में रह रहे थे। गांव में दादा गगन देव पासवान (72 वर्ष) अकेले रहते हैं। घटना की सूचना मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई।</p>
<hr />
<h6><strong>धमाके के बाद लगी भीषण आग</strong></h6>
<p>बताया जा रहा है कि फैक्ट्री में जोरदार धमाका हुआ, जिसके बाद भीषण आग लग गई। मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। नारायणपुर गांव के पांच अन्य मजदूर भी गंभीर रूप से झुलस गए हैं। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी गांव पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/170023/explosion-in-rajasthans-chemical-factory-5-workers-from-bihar-burnt</link>
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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 20:44:29 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कर्पूरीग्राम से पीएम मोदी ने किया चुनावी शंखनाद, कांग्रेस बोली</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>समस्तीपुर। </strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री और जननायक कर्पूरी ठाकुर के जन्मस्थान कर्पूरीग्राम पहुंचकर आगामी विधानसभा चुनावों का शंखनाद कर दिया। इस दौरान उन्होंने कर्पूरी ठाकुर को नमन किया और उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।</p>
<p>वहीं कांग्रेस ने पीएम मोदी पर पलटवार करते हुए कहा कि 1979 में जनसंघ, जिससे बीजेपी की उत्पत्ति हुई, ने ही कर्पूरी ठाकुर की सरकार गिरा दी थी। कांग्रेस का कहना है कि जब कर्पूरी ठाकुर ने ओबीसी आरक्षण लागू किया था, तब जनसंघ ने इसका विरोध किया था।</p>
<p>कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री से सवाल किया, “क्या</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158181/pm-modi-made-election-conch-sound-from-karpurigram-congress-bid"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/img-20251024-wa0070.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>समस्तीपुर। </strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री और जननायक कर्पूरी ठाकुर के जन्मस्थान कर्पूरीग्राम पहुंचकर आगामी विधानसभा चुनावों का शंखनाद कर दिया। इस दौरान उन्होंने कर्पूरी ठाकुर को नमन किया और उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।</p>
<p>वहीं कांग्रेस ने पीएम मोदी पर पलटवार करते हुए कहा कि 1979 में जनसंघ, जिससे बीजेपी की उत्पत्ति हुई, ने ही कर्पूरी ठाकुर की सरकार गिरा दी थी। कांग्रेस का कहना है कि जब कर्पूरी ठाकुर ने ओबीसी आरक्षण लागू किया था, तब जनसंघ ने इसका विरोध किया था।</p>
<p>कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री से सवाल किया, “क्या यह सच नहीं है कि आरएसएस और जनसंघ ने मिलकर कर्पूरी ठाकुर को परेशान किया था? क्या यह सच नहीं है कि उन्होंने जातिगत जनगणना की मांग करने वालों को ‘अर्बन नक्सल’ कहा और संसद में उस मांग को खारिज किया गया?”</p>
<p>जयराम रमेश ने आगे कहा कि पीएम मोदी की ‘ट्रबल इंजन सरकार’ नहीं चाहती कि बिहार में एससी, एसटी, ओबीसी और ईबीसी को 65 प्रतिशत आरक्षण मिले। उन्होंने कहा कि बिहार में जहां इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया, वहीं तमिलनाडु में कांग्रेस सरकार ने 1994 में ही आरक्षण कानून लागू कर दिया था।</p>
<p>गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी आज समस्तीपुर और बेगूसराय में दो रैलियों को संबोधित करेंगे। कर्पूरीग्राम में उनकी रैली को खास माना जा रहा है, क्योंकि बीते वर्ष एनडीए सरकार ने ही कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न से सम्मानित किया था।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पीएम मोदी अपने संबोधनों में विपक्ष पर तीखा हमला बोल सकते हैं। तेजस्वी यादव के उस सवाल पर भी जवाब देने की संभावना है, जिसमें उन्होंने पूछा था कि एनडीए अब तक मुख्यमंत्री पद का चेहरा क्यों नहीं घोषित कर पाया। साथ ही इंडिया गठबंधन में जारी मतभेदों पर भी प्रधानमंत्री कटाक्ष कर सकते हैं।</p>
<p>बता दें कि कर्पूरी ठाकुर के पुत्र रामनाथ ठाकुर वर्तमान में राज्यसभा सांसद और केंद्र सरकार में मंत्री हैं, जबकि उनकी पोती जागृति ठाकुर मोरवा विधानसभा सीट से जनसुराज पार्टी की प्रत्याशी हैं।</p>
<p>बिहार विधानसभा की 243 सीटों पर दो चरणों में—6 और 11 नवंबर को मतदान होगा, जबकि परिणाम 17 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/158181/pm-modi-made-election-conch-sound-from-karpurigram-congress-bid</link>
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                <pubDate>Fri, 31 Oct 2025 17:51:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[BIHAR SWATANTRA PRABHAT]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>त्रिवेणीगंज अस्पताल में मरीजो के जान से होता है खिलवाड़ </title>
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                        <![CDATA[<p><strong>पटना, बिहार ब्यूरो।</strong></p><p>सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल में लापरवाही और भ्रष्टाचार का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल पर मरीजों की जांच रिपोर्ट फर्जी तरीके से तैयार करने और दवाइयों के नाम पर कागजी खेल सामने आया है। </p><p>जानकारी के अनुसार, नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड  6 निवासी 57 वर्षीय बाल्मीकि प्रसाद दास पिछले एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित थे। बुधवार को परिजन उन्हें इलाज के लिए अनुमंडलीय अस्पताल लेकर पहुंचे। ओपीडी में मौजूद चिकित्सकों ने मरीज का सीबीसी, हीमोग्लोबिन, ब्लड शुगर, यूरिन आरई, एचबीएसएजी, ब्लड ग्रुप, ट्रूनेट, विडाल और डेंगू (IgM एवं IgG) जांच कराने</p>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158614/lives-of-patients-are-being-played-with-in-triveniganj-hospital"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/img-20251031-wa0140.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पटना, बिहार ब्यूरो।</strong></p><p>सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल में लापरवाही और भ्रष्टाचार का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल पर मरीजों की जांच रिपोर्ट फर्जी तरीके से तैयार करने और दवाइयों के नाम पर कागजी खेल सामने आया है। </p><p>जानकारी के अनुसार, नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड  6 निवासी 57 वर्षीय बाल्मीकि प्रसाद दास पिछले एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित थे। बुधवार को परिजन उन्हें इलाज के लिए अनुमंडलीय अस्पताल लेकर पहुंचे। ओपीडी में मौजूद चिकित्सकों ने मरीज का सीबीसी, हीमोग्लोबिन, ब्लड शुगर, यूरिन आरई, एचबीएसएजी, ब्लड ग्रुप, ट्रूनेट, विडाल और डेंगू (IgM एवं IgG) जांच कराने का निर्देश दिया।</p><p>परिजन जब सरकारी लैब (कमरा संख्या 6) पहुंचे, तो लैब कर्मी ने समय की कमी का हवाला देते हुए जांच करने से मना कर दिया।  कहा कि “डेढ़ बज गए  है, अब जांच नहीं हो सकती।”  परिजन बिना जांच कराए घर लौट गए।</p><p>लेकिन दो दिन बाद शुक्रवार हुआ उससेपरिजन के साथ आम अवाम   भौचक है। मरीज के पुत्र के मोबाइल पर बीआर जीओवीटी से एक मैसेज आया जिसमें लिखा था <br />प्रिय बाल्मीकि प्रसाद दास, आपका लैब परीक्षण पूरा हो गया है। आपकी रिपोर्ट 31 अक्टूबर को जनरेट की जाएगी।<br /> परिजन शुक्रवार को अस्पताल पहुंचे, तो उन्हें बिना किसी सैंपल लिए ही जांच रिपोर्ट थमा दी गई। रिपोर्ट देखकर परिजन हैरान रह गए। मरीज के पुत्र ने सवाल उठाया —</p><p>जब मेरे पिता से ब्लड या किसी प्रकार का सैंपल लिया ही नहीं गया, तो रिपोर्ट बनी कैसे?<br /> परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में जांच और दवा वितरण के नाम पर घोटाला चल रहा है। मरीजों को बिना जांच किए फर्जी रिपोर्टें दी जा रही हैं और दवा केवल कागज पर लिखकर थमा दी जाती है।<br /> मरीज के परिजन ने  मामले की शिकायत एसडीओ  सह रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष अभिषेक कुमार और सिविल सर्जन से की गई है। परिजनों ने निष्पक्ष जांच और दोषी कर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है ताकि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ हो रहे इस खुलेआम खिलवाड़ पर रोक लग सके।<br />  इस संबंध में सुपौल सिविल सर्जन डॉ. ललन कुमार ठाकुर ने कहा कि मामला मेरे संज्ञान में आया है। हम स्वयं शनिवार को अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचकर जांच करेंगे।</p>]]>
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                                                            <category>स्वास्थ्य-आरोग्य</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/158614/lives-of-patients-are-being-played-with-in-triveniganj-hospital</link>
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                <pubDate>Fri, 31 Oct 2025 17:45:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[BIHAR SWATANTRA PRABHAT]]>
                    </dc:creator>
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