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                <title>भारतीय जनता पार्टी - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>भारतीय जनता पार्टी RSS Feed</description>
                
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                <title>कार्यकर्ताओं का सम्मान सर्वोच्च : डॉ. देवी सिंह पटेल</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सोमेश्वर नाथ मंडल की मासिक बैठक का आयोजन मंडल कार्यालय में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय जनता पार्टी के जिला उपाध्यक्ष एवं मंडल प्रभारी डॉ. देवी सिंह पटेल उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता मंडल अध्यक्ष हरिकृष्ण पांडेय ने की, जबकि संचालन महामंत्री हरिकृष्ण शुक्ला ने किया।बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. देवी सिंह पटेल ने कहा कि कार्यकर्ता ही पार्टी की सबसे बड़ी ताकत हैं। कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम और सहयोग से ही केंद्र एवं प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी हुई है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार बिना</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179628/6a0c801e9c8bc"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260520-wa0104-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सोमेश्वर नाथ मंडल की मासिक बैठक का आयोजन मंडल कार्यालय में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय जनता पार्टी के जिला उपाध्यक्ष एवं मंडल प्रभारी डॉ. देवी सिंह पटेल उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता मंडल अध्यक्ष हरिकृष्ण पांडेय ने की, जबकि संचालन महामंत्री हरिकृष्ण शुक्ला ने किया।बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. देवी सिंह पटेल ने कहा कि कार्यकर्ता ही पार्टी की सबसे बड़ी ताकत हैं। कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम और सहयोग से ही केंद्र एवं प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी हुई है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार बिना जाति और धर्म का भेदभाव किए सभी वर्गों और समाज के लोगों के विकास के लिए कार्य कर रही है।उन्होंने कहा कि भाजपा ऐसी पार्टी है जो हर समाज और हर वर्ग के लोगों को साथ लेकर चलती है। पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं के प्रयासों के कारण ही भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान कायम की है।इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष हरिकृष्ण पांडेय, महामंत्री कृष्ण कुमार शुक्ला, वरिष्ठ भाजपा नेता योगेंद्र शुक्ला, पार्षद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता लाल बहादुर साहू, मंडल उपाध्यक्ष विकास श्रीवास्तव, सेक्टर प्रभारी पंडित दामोदर प्रसाद तिवारी, सुभाष कुशवाहा, गणेश पांडेय, विनोद कुमार यादव, सेक्टर संयोजक आलोक भारती, तारकेश्वर पांडेय, भारत भूषण तिवारी, रमन सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 21:19:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> जनता की समस्याओं से मुंह मोड़ने का परिणाम भुगत रहा विपक्ष,।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong>नरेंद्र कश्यप सोमवार को प्रयागराज पहुंचे, जहां उन्होंने इलाहाबाद संग्रहालय स्थित अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क में दिव्यांगजनों के लिए नव निर्मित अनुभव वीथिका स्थापना समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दिव्यांगजनों के लिए विकसित की गई विशेष सुविधाओं की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए एक प्रेरणादायक पहल बताया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मीडिया से बातचीत करते हुए राज्य मंत्री नरेंद्र कश्यप ने विपक्षी दलों पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार देश की मूल समस्याओं से मुंह मोड़ता रहा है और केंद्र सरकार की जनहितकारी नीतियों का विरोध करता आया है। उनका कहना</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179099/the-opposition-is-suffering-the-consequences-of-turning-a-blind-eye-to-the-problems-of-the-public"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260511-wa0110.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong>नरेंद्र कश्यप सोमवार को प्रयागराज पहुंचे, जहां उन्होंने इलाहाबाद संग्रहालय स्थित अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क में दिव्यांगजनों के लिए नव निर्मित अनुभव वीथिका स्थापना समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दिव्यांगजनों के लिए विकसित की गई विशेष सुविधाओं की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए एक प्रेरणादायक पहल बताया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मीडिया से बातचीत करते हुए राज्य मंत्री नरेंद्र कश्यप ने विपक्षी दलों पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार देश की मूल समस्याओं से मुंह मोड़ता रहा है और केंद्र सरकार की जनहितकारी नीतियों का विरोध करता आया है। उनका कहना था कि विपक्ष को जनता की समस्याओं को समझते हुए सरकार को सकारात्मक सुझाव देने चाहिए थे, लेकिन इसके बजाय इंडी गठबंधन ने हमेशा अराजकता को बढ़ावा देने का कार्य किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने पश्चिम बंगाल की राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि वहां भारतीय जनता पार्टी की मजबूती के पीछे विपक्ष की नीतियां और जनता से दूरी मुख्य कारण रही है। उन्होंने दावा किया कि ममता सरकार के खिलाफ जनता का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है और इसका असर राजनीतिक परिणामों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राज्य मंत्री ने इलाहाबाद संग्रहालय में दिव्यांगजनों के लिए तैयार की गई अनुभव वीथिका की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समय की आवश्यकता हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि इस विशेष वीथिका में सुनने, देखने और स्पर्श के माध्यम से ऐतिहासिक तथ्यों और विरासत को समझने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इससे दिव्यांगजन भी देश की सांस्कृतिक धरोहर से गहराई से जुड़ सकेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नरेंद्र कश्यप ने कहा कि प्रदेश और देश के अन्य ऐतिहासिक एवं पर्यटन स्थलों पर भी इस प्रकार की सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए ताकि समाज का विशेष वर्ग किसी भी प्रकार से मुख्यधारा से अलग महसूस न करे। कार्यक्रम में संग्रहालय प्रशासन, भाजपा पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 21:12:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत पर भाजपाइयों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी मनाई</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>नगर पंचायत बिस्कोहर के अध्यक्ष अजय गुप्ता के अगुवाई में पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत पर एक दूसरे को लडडू खिला कर खुशी का इजहार करते हुए सोमवार को भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल, असम, पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत के उपलक्ष्य में बिस्कोहर स्थित  भाजपा कार्यालय से बस स्टॉप चौराहे तक विजय जुलूस निकालकर भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ हर्षोल्लास के साथ जश्न मनाया गया। इस दौरान पटाखे फोड़कर एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर सभासद नृपेंद्र सिंह, राजू कसौधन ,सूर्यमणि चौधरी , विद्यासागर गुप्ता ,मुकेश पाठक , कुट्टूर पांडेय , जसवंत सिंह</div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178214/bjp-workers-celebrated-the-historic-victory-in-west-bengal-by"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1777904909739.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>नगर पंचायत बिस्कोहर के अध्यक्ष अजय गुप्ता के अगुवाई में पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत पर एक दूसरे को लडडू खिला कर खुशी का इजहार करते हुए सोमवार को भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल, असम, पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत के उपलक्ष्य में बिस्कोहर स्थित  भाजपा कार्यालय से बस स्टॉप चौराहे तक विजय जुलूस निकालकर भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ हर्षोल्लास के साथ जश्न मनाया गया। इस दौरान पटाखे फोड़कर एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर सभासद नृपेंद्र सिंह, राजू कसौधन ,सूर्यमणि चौधरी , विद्यासागर गुप्ता ,मुकेश पाठक , कुट्टूर पांडेय , जसवंत सिंह ,मनीराम प्रजापति , राम नरेश पासवान,दद्दन यादव ,राजा त्रिपाठी , अनूप पांडेय ,विमल सिंह , लालू नाईक , शिवपति उपाध्याय ,रोहित कसौधन,रामसूरत शर्मा  मोनू गुप्ता, मनोज यादव, रवि सिंह,अटल प्रजापति,कन्हैया वरूण, पुललु बाबा सहित भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे।</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 16:43:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भाजपा के लिए बडी चुनौती होगी  टीएमटी नेटवर्क को तोड़ना </title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक मधुप</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा ने पश्चिम बंगाल में  पूर्ण बहुमत से भी कहीं ज्यादा सीट पाकर सत्ता तो कब्जा ली ,भारी बहुमत भी  हासिल कर लिया ,किंतु उसे यहां टीएमटी की बड़ी चुनौती का लगातार सामना  करना  होगा।टीएमटी उसके सामने लगातार चुनौती खड़ी करती रहेगी।  पश्चिम बंगाल की राजनीति वह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण अध्याय है। यह केवल सत्ता के हस्तांतरण का मामला नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक गहरी जड़ें जमा चुके राजनीतिक तंत्र को उखाड़कर नया तंत्र स्थापित करने की प्रक्रिया है। बूथ लेबिल तक अपना  नेटवर्क बनाना  है। जड़ तक पंहुचे भ्रष्टाचार को</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178074/the-big-challenge-for-bjp-will-be-to-break-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/rajneeti.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक मधुप</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा ने पश्चिम बंगाल में  पूर्ण बहुमत से भी कहीं ज्यादा सीट पाकर सत्ता तो कब्जा ली ,भारी बहुमत भी  हासिल कर लिया ,किंतु उसे यहां टीएमटी की बड़ी चुनौती का लगातार सामना  करना  होगा।टीएमटी उसके सामने लगातार चुनौती खड़ी करती रहेगी।  पश्चिम बंगाल की राजनीति वह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण अध्याय है। यह केवल सत्ता के हस्तांतरण का मामला नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक गहरी जड़ें जमा चुके राजनीतिक तंत्र को उखाड़कर नया तंत्र स्थापित करने की प्रक्रिया है। बूथ लेबिल तक अपना  नेटवर्क बनाना  है। जड़ तक पंहुचे भ्रष्टाचार को खत्म कर  यहां विकास के रास्ते खोलना एक बड़ी चुनौती होगी। भर्ती घोटालों के लिए बदनाम बंगाल को गंगा  सागर के जल से पवित्र करना  होगा। इस  सबके  लिए उसे कड़ी मेहनत करनी होगी।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पिछले 15 साल  से  बंगाल की नसों में इस कदर समाई हुई है कि उसे केवल चुनावी जीत से बेदखल नहीं किया जा सकता। भाजपा के लिए असली चुनौती शपथ ग्रहण के बाद शुरू होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि बंगाल में सत्ता का अर्थ केवल सचिवालय (नबन्ना) पर कब्जा करना नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">पाड़ा</span>' (<span lang="hi" xml:lang="hi">मोहल्ले) और </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बूथ</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">पर अपना नियंत्रण स्थापित करना है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बंगाल की राजनीति की सबसे बड़ी विशेषता इसका कैडर-आधारित ढांचा है। पहले यह केडर बेस ढांचा पहले वामपंथियों के पास था</span><span lang="hi" xml:lang="hi">।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">  इसे  ममता बनर्जी ने एक लंबे और हिंसक संघर्ष के बाद अपने पाले में किया। आज टीएमसी का संगठन केवल एक राजनीतिक दल नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा तंत्र बन चुका है। ग्रामीण इलाकों में एक साधारण ग्रामीण के लिए टीएमसी का स्थानीय नेता ही कानून है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वही रोजगार दिलाने वाला है । वही सामाजिक विवादों का निपटारा करने वाला </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">दादा</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">है। भाजपा के लिए सबसे पहली और बड़ी बाधा इसी </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बूथ-स्तर</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">के संगठन को तोड़ना है। भाजपा ने पिछले कुछ वर्षों में बंगाल में अपना आधार तो बढ़ाया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उसका ढांचा अभी भी कई जगहों पर </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ऊपर से नीचे</span>'  <span lang="hi" xml:lang="hi">की ओर है। टीएमसी की जगह लेने के लिए भाजपा को ऐसे कार्यकर्ताओं की फौज खड़ी करनी होगी जो केवल चुनाव के समय सक्रिय न हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि साल के 365 दिन जनता के सुख-दुख में साथ खड़े रहें।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">टीएमसी की दादागिरी और गुंडागर्दी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बंगाल की राजनीतिक संस्कृति का एक दुखद हिस्सा बन चुकी है। यहाँ </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मसल पावर</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मनी पावर</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">का ऐसा गठजोड़ है जो विपक्षी कार्यकर्ताओं को पनपने नहीं देता। भाजपा यदि सरकार बना भी लेती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे एक ऐसी पुलिस व्यवस्था और प्रशासन को पुनर्जीवित करना होगा जो दशकों से राजनीतिक इशारों पर नाचने का आदी हो चुका है। टीएमसी के कार्यकर्ता जो स्थानीय स्तर पर ठेकेदारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिंडिकेट और वसूली के तंत्र से जुड़े हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे आसानी से अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे। भाजपा को यहाँ </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">कानून के राज</span>'<span lang="hi" xml:lang="hi"> </span> <span lang="hi" xml:lang="hi">को बहाल करने के लिए कठोर कदम उठाने होंगे</span><span lang="hi" xml:lang="hi">।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही यह भी ध्यान रखना होगा कि वह स्वयं उसी हिंसा के चक्र में न फंस जाए। जनता को यह विश्वास दिलाना होगा कि भाजपा की सरकार में किसी भी व्यक्ति को अपनी राजनीतिक विचारधारा के कारण जान का जोखिम नहीं उठाना पड़ेगा।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वास बहाली की इस प्रक्रिया में </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">अस्मिता</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">विकास</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">का संतुलन सबसे महत्वपूर्ण है। टीएमसी ने हमेशा भाजपा को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बाहरी</span>' (<span lang="hi" xml:lang="hi">बोहिरागोतो) दल के रूप में चित्रित किया है। इस नैरेटिव को काटने के लिए भाजपा को बंगाली संस्कृति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भाषा और परंपराओं के प्रति अपनी निष्ठा को और अधिक प्रखरता से साबित करना होगा। केवल जय श्री राम के नारे से बंगाल नहीं जीता जा सकता</span><span lang="hi" xml:lang="hi">। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यहाँ के लोगों के मन में महाप्रभु चैतन्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रामकृष्ण परमहंस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वामी विवेकानंद और रबींद्रनाथ टैगोर के प्रति जो अगाध श्रद्धा है</span><span lang="hi" xml:lang="hi">। सुभाष चंद्र बोस उनके आदर्श हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  इन सब को उन्हें  अपने राजनीतिक विमर्श का केंद्र बनाना होगा। जब तक बंगाल का सामान्य नागरिक यह महसूस नहीं करेगा कि भाजपा उसकी संस्कृति की संरक्षक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक पूर्ण विश्वास हासिल करना असंभव है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">घुंसपेठियों के लिए महफूज पश्चिमी बंगाल से बाहरी देशों के अवैध प्रवासियों को रोकना भी एक चुनौती होगी।  हालांकि चुनाव आयोग की सख्ती  और बंगाल में केंद्रीय बलों की तैनाती से इस अवैध घुसपैंठियों के हौसले काफी कमजोर हैं।इन्हें पूरी तरह तोड़ना  होगा ।अच्छा यह है  कि कभी  सत्ताकाकेंद्र बिदूं  रही माकपा अब पूरी तरह हाशिंए पर चली गई  वरन कभी  उसकी पश्चिमी बंगाल में वही हालत थी तो वहां आज टीएमसी की हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक मोर्चे पर बंगाल आज एक बड़े संकट से गुजर रहा है। उद्योगों का पलायन और युवाओं का रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर रुख करना एक कड़वी सच्चाई है। भाजपा को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">सोनार बांग्ला</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">के सपने को हकीकत में बदलने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप देना होगा। सिंडिकेट राज को खत्म करना केवल पुलिसिया कार्रवाई से संभव नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसके लिए वैकल्पिक रोजगार के अवसर पैदा करने होंगे। यदि भाजपा बंगाल में बड़े निवेश लाने में सफल रहती है और आईटी से लेकर विनिर्माण क्षेत्र तक में नौकरियां पैदा करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो टीएमसी का कैडर जो आज केवल मजबूरी या लालच में सत्ता से चिपका है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह धीरे-धीरे बिखरने लगेगा।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा के लिए एक और बड़ी चुनौती राज्य के जनसांख्यिकीय समीकरण हैं। बंगाल की राजनीति में ध्रुवीकरण एक सच्चाई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन एक स्थिर सरकार चलाने के लिए उसे समाज के सभी वर्गों का विश्वास जीतना होगा। टीएमसी का आधार केवल गुंडागर्दी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उनकी विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं भी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">लक्ष्मी भंडार</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">या </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">कन्याश्री</span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">। इन योजनाओं ने महिलाओं के एक बड़े वर्ग को ममता बनर्जी के साथ जोड़ा है। भाजपा को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह न केवल इन योजनाओं का बेहतर विकल्प दे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि प्रशासन में पारदर्शिता लाकर भ्रष्टाचार को पूरी तरह समाप्त करे।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल में भाजपा की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह टीएमसी के </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">भय के तंत्र</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">भरोसे के तंत्र</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">में कितनी जल्दी बदल पाती है। संगठन बनाना ईंट-पत्थर जोड़ने जैसा नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह लोगों के दिलों में जगह बनाने जैसा है। टीएमसी के घर पर कब्जा करने का मतलब उनके कार्यालयों पर झंडा फहराना नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस आम बंगाली के मन से डर निकालना है जो आज अपनी राय जाहिर करने से कतराता है। भाजपा को एक ऐसी समावेशी राजनीति का परिचय देना होगा जहाँ विकास का लाभ कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिना किसी कट-मनी या राजनीतिक भेदभाव के। यदि भाजपा इस परीक्षा में सफल होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी वह बंगाल में एक स्थायी और सार्थक परिवर्तन ला पाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अन्यथा सत्ता का परिवर्तन केवल चेहरों का बदलाव बनकर रह जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यवस्था का नहीं। बंगाल की मिट्टी को शांति और प्रगति की प्यास है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और जो दल इस प्यास को बुझाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वही सही मायने में बंगाल का भाग्य विधाता बनेगा।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक मधुप</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">( लेखक वरिष्ठ  पत्रकार  हैं)  </span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 16:27:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल में भाजपा—तो मुख्यमंत्री कौन </title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">  देश के इतिहास में पहली बार</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में विधानसभा चुनाव के दौरान </span>92 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत से अधिक रिकॉर्ड मतदान ने सभी पूर्वानुमानों और एग्जिट पोल को नई दिशा दे दी है। अधिकांश सर्वेक्षणों में प्रमुख विपक्षी दल</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय जनता पार्टी</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के राज्य में पहली बार सरकार बनाने के दावे सामने आ रहे हैं। यह परिदृश्य न केवल राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राज्य की बदलती जन-चेतना का भी संकेत देता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चुनाव पूर्व मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण को लेकर राज्य की मुख्यमंत्री</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ममता बनर्जी</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और न्यायिक चुनौतियाँ भी पेश कीं। हालांकि</span>,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178003/bjp-in-west-bengal-%E2%80%93-then-who-is-the-chief"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/abhinav-shukla.webp" alt=""></a><br /><p> </p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> देश के इतिहास में पहली बार</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में विधानसभा चुनाव के दौरान </span>92 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत से अधिक रिकॉर्ड मतदान ने सभी पूर्वानुमानों और एग्जिट पोल को नई दिशा दे दी है। अधिकांश सर्वेक्षणों में प्रमुख विपक्षी दल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय जनता पार्टी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के राज्य में पहली बार सरकार बनाने के दावे सामने आ रहे हैं। यह परिदृश्य न केवल राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राज्य की बदलती जन-चेतना का भी संकेत देता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चुनाव पूर्व मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण को लेकर राज्य की मुख्यमंत्री</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ममता बनर्जी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और न्यायिक चुनौतियाँ भी पेश कीं। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सर्वोच्च न्यायालय</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के हस्तक्षेप के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ी। अनुमान है कि लाखों ऐसे लोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अपने नागरिकता संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मतदान सूची से बाहर रह गए। इस पृष्ठभूमि में हुई बंपर वोटिंग को कई विश्लेषक मतदाता सूची के शुद्धिकरण का परिणाम मान रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे सूची में शामिल मतदाताओं ने निर्भीक होकर मतदान किया।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">     ऐतिहासिक रूप से देखें तो</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की कर्मभूमि और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">श्यामाप्रसाद मुखर्जी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की जन्मस्थली रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी यह विडंबना ही रही कि भाजपा को अब तक राज्य में सत्ता का अवसर नहीं मिला। </span>2014 <span lang="hi" xml:lang="hi">के बाद पार्टी ने यहां अपनी पकड़ मजबूत की और एक दशक के भीतर वाम दलों तथा कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए मुख्य विपक्षी दल बन गई।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अगर मतगणना के नतीजे भाजपा के पक्ष में आते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सबसे बड़ा प्रश्न होगा—राज्य का पहला भाजपा मुख्यमंत्री कौन बनेगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">इस दौड़ में कई नाम चर्चा में हैं। तृणमूल कांग्रेस से आए प्रभावशाली नेता</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुवेंदु अधिकारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रदेश अध्यक्ष</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सामिक भट्टाचार्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युवा सांसद</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">निशीथ प्रमाणिक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और लोकप्रिय महिला चेहरा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लॉकेट चटर्जी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रमुख दावेदारों के रूप में देखे जा रहे हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">    हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा की कार्यशैली को देखते हुए किसी नए या अपेक्षाकृत कम चर्चित चेहरे को आगे लाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इतना निश्चित है कि यदि भाजपा सत्ता में आती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो मुख्यमंत्री का चेहरा ऐसा होगा जो बंगाल की माटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृति और सामाजिक संरचना से गहराई से जुड़ा हो। पश्चिम बंगाल का यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन की संभावना भर नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह राज्य की राजनीतिक दिशा में संभावित बड़े बदलाव का संकेत भी है। अब सबकी निगाहें मतगणना पर टिकी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां यह तय होगा कि बंगाल की जनता किसे अपना नेतृत्व सौंपती है।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>                                                                                             अरविंद रावल</strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 18:16:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राघव चड्ढा की बगावत और आम आदमी पार्टी का भविष्य क्या यह एक राजनीतिक मोड़ है या टूट की शुरुआत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारतीय राजनीति में दल बदल और आंतरिक बगावत कोई नई बात नहीं है लेकिन जब किसी उभरती हुई पार्टी के भीतर इस तरह का बड़ा घटनाक्रम सामने आता है तो उसके दूरगामी असर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हाल ही में राघव चड्ढा और उनके साथ कई राज्यसभा सांसदों का आम आदमी पार्टी से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी में जाने का फैसला एक बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत देता है। यह केवल व्यक्तियों का दल बदल नहीं बल्कि एक संगठन की आंतरिक स्थिति और उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आम आदमी पार्टी ने अपने गठन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177221/draft-add-your-traghav-chaddhas-rebellion-and-the-future-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/raghav-chadha-in-bjp.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारतीय राजनीति में दल बदल और आंतरिक बगावत कोई नई बात नहीं है लेकिन जब किसी उभरती हुई पार्टी के भीतर इस तरह का बड़ा घटनाक्रम सामने आता है तो उसके दूरगामी असर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हाल ही में राघव चड्ढा और उनके साथ कई राज्यसभा सांसदों का आम आदमी पार्टी से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी में जाने का फैसला एक बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत देता है। यह केवल व्यक्तियों का दल बदल नहीं बल्कि एक संगठन की आंतरिक स्थिति और उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आम आदमी पार्टी ने अपने गठन के समय खुद को एक वैकल्पिक राजनीति के रूप में प्रस्तुत किया था। ईमानदारी पारदर्शिता और जनहित के मुद्दों को केंद्र में रखकर इस पार्टी ने तेजी से लोकप्रियता हासिल की। दिल्ली में लगातार जीत और पंजाब में सरकार बनाना इस बात का प्रमाण था कि जनता ने इस पार्टी को स्वीकार किया है। लेकिन अब जिस तरह से पार्टी के भीतर असंतोष और टूट सामने आ रही है वह यह संकेत देता है कि अंदरूनी ढांचे में कहीं न कहीं कमजोरी मौजूद है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राघव चड्ढा का पार्टी से अलग होना अचानक नहीं हुआ। पिछले कुछ वर्षों से उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरी की खबरें सामने आती रही थीं। महत्वपूर्ण बैठकों में अनुपस्थिति सोशल मीडिया पर अलग पहचान बनाने की कोशिश और संगठनात्मक गतिविधियों से दूरी यह सभी संकेत पहले से मौजूद थे। जब उन्हें राज्यसभा में उपनेता पद से हटाया गया तो यह स्पष्ट हो गया कि संबंध सामान्य नहीं रहे हैं। इसके बाद उनका इस्तीफा और फिर भाजपा में शामिल होना एक तय दिशा की ओर बढ़ता कदम प्रतीत होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है दो तिहाई सांसदों का गणित। भारतीय संविधान के तहत दल बदल कानून यह कहता है कि यदि किसी पार्टी के दो तिहाई सांसद एक साथ दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं तो उनकी सदस्यता सुरक्षित रहती है। यही कारण है कि राघव चड्ढा ने अपने साथ पर्याप्त संख्या में सांसदों को जोड़ने का प्रयास किया। यह केवल राजनीतिक निर्णय नहीं बल्कि एक रणनीतिक कदम भी था जिससे उनकी संसदीय स्थिति बनी रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यहां सवाल उठता है कि क्या यह केवल व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का मामला है या फिर पार्टी की कार्यप्रणाली में वास्तविक समस्याएं हैं। जब एक दो नहीं बल्कि कई सांसद एक साथ पार्टी छोड़ते हैं तो यह संकेत देता है कि असंतोष व्यापक है। स्वाति मालीवाल जैसे नेताओं का पहले से असहज होना और अन्य नेताओं का अचानक अलग होना यह दर्शाता है कि संवाद और विश्वास की कमी रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब तुलना शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से की जा रही है। इन दोनों दलों में भी इसी तरह की टूट देखने को मिली थी जहां दो तिहाई विधायकों के अलग होने से पार्टी का नियंत्रण बदल गया। हालांकि वर्तमान स्थिति में आम आदमी पार्टी के मामले में यह टूट राज्यसभा तक सीमित है इसलिए सरकार पर तत्काल कोई खतरा नहीं है। लेकिन यदि यही स्थिति पंजाब विधानसभा तक पहुंचती है तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पंजाब इस समय आम आदमी पार्टी का सबसे मजबूत आधार है। यदि वहां भी इसी तरह का असंतोष पैदा होता है और बड़ी संख्या में विधायक अलग होते हैं तो पार्टी की पहचान और अस्तित्व दोनों पर खतरा आ सकता है। इसलिए यह घटनाक्रम केवल एक संसदीय बदलाव नहीं बल्कि भविष्य की संभावनाओं का संकेत भी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय जनता पार्टी के लिए यह घटनाक्रम कई मायनों में लाभकारी है। पहला राज्यसभा में उसकी संख्या बढ़ेगी जिससे विधायी प्रक्रिया में उसे मजबूती मिलेगी। दूसरा पंजाब जैसे राज्य में उसे नए चेहरों और नेटवर्क का फायदा मिलेगा। तीसरा राघव चड्ढा जैसे युवा और लोकप्रिय नेता का जुड़ना पार्टी की छवि को भी प्रभावित कर सकता है खासकर युवाओं के बीच।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर आम आदमी पार्टी की विश्वसनीयता पर पड़ता है। जिस पार्टी ने खुद को वैकल्पिक और साफ सुथरी राजनीति का प्रतीक बताया था उसके भीतर इस तरह की टूट यह संकेत देती है कि सिद्धांत और व्यवहार में अंतर हो सकता है। विपक्षी दलों को अब यह कहने का मौका मिलेगा कि यह पार्टी भी अन्य दलों की तरह ही आंतरिक संघर्ष और स्वार्थ की राजनीति से अछूती नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह भी ध्यान देने योग्य है कि राजनीति में व्यक्तित्व और संगठन दोनों का संतुलन जरूरी होता है। यदि नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद कमजोर हो जाए तो असंतोष बढ़ता है। आम आदमी पार्टी के मामले में यही स्थिति दिखाई देती है जहां कुछ नेताओं को लगता है कि उनकी भूमिका कम हो रही है या उनकी बात नहीं सुनी जा रही।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आगे की राह आम आदमी पार्टी के लिए आसान नहीं है। उसे सबसे पहले अपने संगठन को मजबूत करना होगा और बचे हुए नेताओं के बीच विश्वास कायम करना होगा। साथ ही उसे यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों। इसके लिए पारदर्शी संवाद और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया जरूरी है।दूसरी ओर यह भी संभव है कि यह संकट पार्टी के लिए एक अवसर साबित हो। कई बार संकट संगठन को आत्ममंथन का मौका देता है और नई दिशा तय करने में मदद करता है। यदि आम आदमी पार्टी इस स्थिति से सीख लेकर अपने ढांचे को सुधारती है तो वह फिर से मजबूत होकर उभर सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंत में यह कहना गलत नहीं होगा कि राघव चड्ढा की बगावत केवल एक राजनीतिक घटना नहीं बल्कि एक संकेत है। यह संकेत है कि किसी भी संगठन में आंतरिक संतुलन और विश्वास कितना महत्वपूर्ण होता है। यह भी दिखाता है कि राजनीति में सिद्धांतों के साथ साथ व्यावहारिक रणनीति भी उतनी ही जरूरी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि आम आदमी पार्टी इस चुनौती का सामना कैसे करती है और क्या वह अपने मूल आदर्शों को बनाए रखते हुए खुद को फिर से संगठित कर पाती है या नहीं। वहीं भारतीय राजनीति में यह घटनाक्रम एक और उदाहरण के रूप में दर्ज होगा जहां सत्ता संतुलन और रणनीति ने एक नई दिशा तय की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 17:27:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेठी में भाजपा द्वारा स्वच्छता अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> संगठन के निर्देशानुसार भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष सुधांशु शुक्ला के नेतृत्व में जनपद अमेठी के ग्राम सराय खेमा में स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रतिमा स्थल की साफ-सफाई कर वातावरण को स्वच्छ और सुंदर बनाने का संदेश दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">तत्पश्चात बाबा साहब की प्रतिमा का दूध से अभिषेक कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष सुधांशु शुक्ला ने उपस्थित कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीणों को संबोधित करते हुए बाबा साहब के जीवन, संघर्ष और उनके द्वारा देश को दिए गए संविधान की महत्ता पर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176034/cleanliness-campaign-by-bjp-in-amethi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/3-4.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> संगठन के निर्देशानुसार भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष सुधांशु शुक्ला के नेतृत्व में जनपद अमेठी के ग्राम सराय खेमा में स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रतिमा स्थल की साफ-सफाई कर वातावरण को स्वच्छ और सुंदर बनाने का संदेश दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तत्पश्चात बाबा साहब की प्रतिमा का दूध से अभिषेक कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष सुधांशु शुक्ला ने उपस्थित कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीणों को संबोधित करते हुए बाबा साहब के जीवन, संघर्ष और उनके द्वारा देश को दिए गए संविधान की महत्ता पर प्रकाश डाला।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने समाज के वंचित एवं शोषित वर्गों को समान अधिकार दिलाने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उनके विचार आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।कार्यक्रम में बाबा साहब से जुड़े “पंचतीर्थ” के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई तथा केंद्र व प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा उनके सम्मान और विचारों के संरक्षण हेतु किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा बाबा साहब के जीवन से जुड़े स्थलों को विकसित कर नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।इस दौरान बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता एवं स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर स्वच्छता और सामाजिक समरसता का संकल्प लिया तथा बाबा साहब के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 20:59:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रामकृष्णनगर में बीजेपी में बड़ा विभाजन, सैकड़ों पुरुष और महिलाएं कांग्रेस में शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि :</strong> श्रीभूमि जिले के रामकृष्णनगर क्षेत्र में चुनाव से पहले सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा है। एक साथ सैकड़ों पुरुष और महिला बीजेपी कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़कर इंडियन नेशनल कांग्रेस में शामिल होने का फैसला किया। इस घटनाक्रम से राजनीतिक हलकों में तेज हलचल मच गई है। गत सोमवार को कांग्रेस उम्मीदवार सुरुचि राय की उपस्थिति में औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल हुए। मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय विधायक विजय मालाकार के करीबी कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के तानाशाही तथा अधिनायकवादी रवैये के कारण वे लंबे समय से उपेक्षित महसूस</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174781/big-split-in-bjp-in-ramakrishnanagar-hundreds-of-men-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1001403046.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि :</strong> श्रीभूमि जिले के रामकृष्णनगर क्षेत्र में चुनाव से पहले सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा है। एक साथ सैकड़ों पुरुष और महिला बीजेपी कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़कर इंडियन नेशनल कांग्रेस में शामिल होने का फैसला किया। इस घटनाक्रम से राजनीतिक हलकों में तेज हलचल मच गई है। गत सोमवार को कांग्रेस उम्मीदवार सुरुचि राय की उपस्थिति में औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल हुए। मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय विधायक विजय मालाकार के करीबी कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के तानाशाही तथा अधिनायकवादी रवैये के कारण वे लंबे समय से उपेक्षित महसूस कर रहे थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनका कहना है कि कई बार इस मुद्दे को विधायक के संज्ञान में लाया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। दलबदल करने वालों के अनुसार, “सत्तारूढ़ दल की इस तानाशाही और अधिनायकवादी कार्यशैली को हम अब और सहन नहीं कर सकते। इसलिए मजबूर होकर हमने यह निर्णय लिया। जहां सामान्य कार्यकर्ताओं और मतदाताओं की कोई अहमियत नहीं है, वहां बने रहने का कोई अर्थ नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस में शामिल होने के बाद वे आगामी दिनों में पार्टी उम्मीदवार के समर्थन में काम करेंगे और आम जनता के हित में संघर्ष जारी रखेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गौरतलब है कि यह सामूहिक दलबदल रामकृष्णनगर क्षेत्र के दुल्लभछड़ा जीपी के वार्ड नंबर 7, मोकामछड़ा इलाके में हुआ। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना से हिंदू वोट बैंक में संभावित विभाजन के संकेत मिल रहे हैं, जो चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है। दलबदल करने वालों का नेतृत्व राहुल चौहान, रंजीत पाल, मनोज कानू, शिव शंकर ग्वाला, संतोष कानू (गुड्डू), प्रदीप राय, प्रणय नाथ, अनुप नाथ सहित अन्य स्थानीय पुरुष और महिला ने योगदान क्या।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 18:52:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रामकृष्णनगर में चुनावी प्रचार चरम पर, बीजेपी बनाम कांग्रेस में कड़ा मुकाबले का संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि -</strong>  श्रीभूमि जिले के रामकृष्णनगर विधानसभा क्षेत्र में जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आ रहा है, वैसे-वैसे राजनीतिक सरगर्मी तेज़ होती जा रही है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच सीधा मुकाबला अब और भी दिलचस्प होता जा रहा है। वर्तमान के दो बार विधायक एवं बीजेपी प्रत्याशी विजय मालाकार तथा कांग्रेस प्रत्याशी, वकील और पूर्व जिला परिषद सदस्य सुरुचि राय दोनों ही सभाओं और रैलियों के जरिए जोरदार प्रचार अभियान चला रहे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी सुरुचि राय ने अपने जनसभाओं में शिक्षा को मुख्य मुद्दा बनाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र के दुल्लभछड़ा,</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174670/election-campaign-at-its-peak-in-ramakrishnanagar-indicating-tough-contest"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1001397049.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि -</strong> श्रीभूमि जिले के रामकृष्णनगर विधानसभा क्षेत्र में जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आ रहा है, वैसे-वैसे राजनीतिक सरगर्मी तेज़ होती जा रही है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच सीधा मुकाबला अब और भी दिलचस्प होता जा रहा है। वर्तमान के दो बार विधायक एवं बीजेपी प्रत्याशी विजय मालाकार तथा कांग्रेस प्रत्याशी, वकील और पूर्व जिला परिषद सदस्य सुरुचि राय दोनों ही सभाओं और रैलियों के जरिए जोरदार प्रचार अभियान चला रहे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी सुरुचि राय ने अपने जनसभाओं में शिक्षा को मुख्य मुद्दा बनाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र के दुल्लभछड़ा, निविया, चेरागी और रंगपुर जैसे दूरदराज़ इलाकों के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए कई किलोमीटर दूर रामकृष्णनगर जाना पड़ता है, जिससे मजदूर और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने वादा किया कि जीतने पर क्षेत्र में डिग्री कॉलेज, सर्कल ऑफिस और अन्य आवश्यक सरकारी संस्थानों की स्थापना की जाएगी। साथ ही, उन्होंने पिछले पंचायत चुनाव में अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए पारदर्शी प्रशासन की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। वहीं, बीजेपी उम्मीदवार विजय मालाकार विकास के मुद्दे को केंद्र में रखकर प्रचार कर रहे हैं। उनका दावा है कि कांग्रेस के लंबे शासनकाल की तुलना में बीजेपी ने कम समय में कहीं अधिक विकास कार्य किए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि पहले क्षेत्र में संचार व्यवस्था कमजोर थी और कानून-व्यवस्था भी चिंताजनक थी, जबकि वर्तमान सरकार ने इन क्षेत्रों में सुधार किया है। उन्होंने जनता से पिछले और वर्तमान हालात की तुलना करने की अपील की और अपनी जीत को लेकर आशावाद जताया। कुल मिलाकर, रामकृष्णनगर में इस बार का चुनाव विकास बनाम बुनियादी सुविधाओं के मुद्दे पर केंद्रित होकर बेहद प्रतिस्पर्धी बन चुका है। अब देखना होगा कि मतदाता किसे अपना समर्थन देते हैं और इस कड़े मुकाबले में जीत किसकी होती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/174670/election-campaign-at-its-peak-in-ramakrishnanagar-indicating-tough-contest</link>
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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 18:33:23 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>बिहार की राजनीति- निशांत कुमार का राजनीतिक उदय</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="center">  </p>
<p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="en-us" xml:lang="en-us">- महेन्द्र तिवारी</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बिहार की राजनीति आज उस मोड़ पर खड़ी है जहाँ सत्ता के गलियारों में बदलाव की सरसराहट नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक युग के अवसान और नए नेतृत्व के अभ्युदय की पदचाप सुनाई दे रही है। पिछले दो दशकों से बिहार की नियति को अपनी उंगलियों पर नचाने वाले नीतीश कुमार ने अपनी राजनीतिक यात्रा के उस पड़ाव पर कदम रखा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ से वापसी के रास्ते संगठन की मजबूती और उत्तराधिकार के प्रश्न पर जाकर टिक जाते हैं। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के भीतर लंबे समय से जिस सन्नाटे को महसूस किया जा रहा था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">,</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173025/political-rise-of-nishant-kumar"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/mahendra_tiwari.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="center"> </p>
<p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="en-us" xml:lang="en-us">- महेन्द्र तिवारी</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बिहार की राजनीति आज उस मोड़ पर खड़ी है जहाँ सत्ता के गलियारों में बदलाव की सरसराहट नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक युग के अवसान और नए नेतृत्व के अभ्युदय की पदचाप सुनाई दे रही है। पिछले दो दशकों से बिहार की नियति को अपनी उंगलियों पर नचाने वाले नीतीश कुमार ने अपनी राजनीतिक यात्रा के उस पड़ाव पर कदम रखा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ से वापसी के रास्ते संगठन की मजबूती और उत्तराधिकार के प्रश्न पर जाकर टिक जाते हैं। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के भीतर लंबे समय से जिस सन्नाटे को महसूस किया जा रहा था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वह 8 मार्च 2026 को पटना स्थित पार्टी मुख्यालय में नारों की गूँज के साथ टूट गया। निशांत कुमार का राजनीति में औपचारिक प्रवेश केवल एक व्यक्ति का दल में शामिल होना नहीं है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह एक क्षेत्रीय दल के अस्तित्व को बचाने की उस छटपटाहट का परिणाम है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो अक्सर </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">वन मैन शो</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वाली पार्टियों में उनके शीर्ष नेता के सक्रिय राजनीति से दूर होने पर दिखाई देती है। नीतीश कुमार ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में जिस समाजवाद और वंशवाद विरोधी विचारधारा का झंडा बुलंद किया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आज उनकी पार्टी उसी वंशवाद के छाते तले खुद को सुरक्षित महसूस कर रही है। यह भारतीय राजनीति की एक कड़वी हकीकत है कि क्षेत्रीय दल विचारधारा से ज्यादा एक चेहरे से बंधे होते हैं और जब वह चेहरा धुंधला पड़ने लगता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो कार्यकर्ता किसी ऐसे नाम की तलाश करते हैं जो उस विरासत को संजो सके। निशांत कुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे एक ऐसे पिता के उत्तराधिकारी बनकर आए हैं जिन्होंने अपनी शर्तों पर राजनीति की है। नीतीश कुमार वह शख्सियत रहे हैं जिन्होंने विधानसभा में संख्या बल कम होने के बावजूद गठबंधन के साथियों को अपनी उंगलियों पर नचाया और चार बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर यह साबित किया कि राजनीति में करिश्मा और चाणक्य नीति का मेल क्या होता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">2025 के विधानसभा चुनावों ने नीतीश कुमार की लोकप्रियता पर उठ रहे तमाम सवालों पर विराम लगा दिया था। उनके गिरते स्वास्थ्य और भूलने की बीमारी की चर्चाओं के बीच जब परिणाम आए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे चौंकाने वाले थे। जनता ने उन्हें न केवल वोट दिया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि बिहार के ग्रामीण अंचलों में आज भी </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुशासन बाबू</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की धमक बरकरार है। यहाँ तक कि भारतीय जनता पार्टी को मिली भारी सफलता के पीछे भी नीतीश कुमार का वह अति पिछड़ा और महिला वोट बैंक सक्रिय था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो खामोशी से उनके पक्ष में लामबंद रहता है। लेकिन अपने राजनीतिक चरमोत्कर्ष पर नीतीश कुमार का राज्यसभा जाने का फैसला और पार्टी की बागडोर परोक्ष रूप से निशांत कुमार के हाथों में सौंपने की तैयारी ने कार्यकर्ताओं को हतप्रभ कर दिया है। निशांत के स्वागत में लगे </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत हैं तो निश्चिंत हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के नारे दरअसल कार्यकर्ताओं के उसी भय को दर्शाते हैं जो नीतीश के बिना पार्टी के बिखरने की आशंका से पैदा हुआ है। 40 वर्षीय निशांत</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो पेशे से इंजीनियर हैं और अब तक सक्रिय राजनीति की चकाचौंध से दूर रहे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनके लिए यह डगर कांटों भरी है। राजनीति कोई इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट नहीं है जहाँ फार्मूलों से नतीजे निकाले जा सकें</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यहाँ समीकरण हर पल बदलते हैं। उनकी पहली और सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के उस मूल आधार—कुर्मी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कोइरी और अति पिछड़ा वर्ग—को अपने साथ जोड़े रखने की है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो नीतीश कुमार के व्यक्तित्व के आकर्षण में जेडीयू के साथ रहा है। क्या एक सौम्य और राजनीति से दूर रहा युवा इन वर्गों की आकांक्षाओं को वह स्वर दे पाएगा जो उनके पिता ने दिया था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि तेजस्वी यादव और चिराग पासवान जैसे युवा नेता पहले से ही बिहार की मिट्टी में अपनी जड़ें गहरी कर चुके हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री एक ऐसे समय में हुई है जब उनके प्रतिद्वंद्वी राजनीति के मजे हुए खिलाड़ी बन चुके हैं। तेजस्वी यादव ने जहाँ लालू प्रसाद यादव की विरासत को अपनी मेहनत और संघर्ष से एक नई ऊँचाई दी है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं चिराग पासवान ने भी </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">हनुमान</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की छवि से निकलकर अपनी स्वतंत्र पहचान बनाई है। इन दोनों नेताओं के विपरीत निशांत को राजनीति विरासत में मिली तो है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उन्होंने कभी अपने पिता के साथ धूप-छाँव में संघर्ष नहीं किया। वे नीतीश कुमार के उन राजनीतिक दांव-पेंचों के साक्षी नहीं रहे हैं जिन्होंने जेडीयू को बार-बार संकट से उबारा। ऐसे में पार्टी के भीतर मौजूद </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">घाघ</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और पुराने नेताओं के साथ तालमेल बिठाना उनके लिए अग्निपरीक्षा जैसा होगा। जेडीयू के भीतर कई ऐसे दिग्गज नेता हैं जो खुद को नीतीश का स्वाभाविक उत्तराधिकारी मानते रहे हैं। राजीव रंजन सिंह और संजय झा जैसे नेताओं की मौजूदगी में निशांत को अपनी स्वतंत्र पहचान बनानी होगी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वरना यह आशंका हमेशा बनी रहेगी कि वे केवल एक </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">रबर स्टैंप</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बनकर रह जाएंगे और पार्टी की दूसरी लाइन के नेता उन्हें अपने हितों के लिए इस्तेमाल करेंगे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक और गंभीर चुनौती भारतीय जनता पार्टी के साथ संबंधों को लेकर है। बिहार में बीजेपी अब वह छोटी पार्टी नहीं रही जो नीतीश कुमार के पीछे चलती थी। 2025 के नतीजों के बाद बीजेपी अब खुद को </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">बड़े भाई</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की भूमिका में देख रही है। गठबंधन की राजनीति अक्सर क्रूर होती है और हर बड़ी पार्टी अपने छोटे सहयोगी को निगलने या उसे अप्रासंगिक बनाने की कोशिश करती है। बीजेपी की दीर्घकालिक रणनीति बिहार में अपना मुख्यमंत्री लाने की है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से हटने के बाद जेडीयू के लिए जूनियर पार्टनर बनकर अपनी स्वायत्तता बचाए रखना लगभग असंभव सा कार्य होगा। बीजेपी चाहेगी कि भविष्य में जेडीयू का उसमें विलय हो जाए या फिर वह इतनी कमजोर हो जाए कि उसका अपना कोई अस्तित्व न बचे। निशांत कुमार को इस </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">मित्रवत हमले</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से पार्टी को बचाना होगा। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि जेडीयू केवल एक चुनाव जिताने वाली मशीन न बनकर रह जाए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसका अपना वैचारिक स्टैंड भी बना रहे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत के पक्ष में एक बात यह जाती है कि वे शिक्षित हैं और उनकी छवि साफ-सुथरी है। बिहार की युवा पीढ़ी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो जातिगत समीकरणों से ऊपर उठकर विकास और शिक्षा की बात करती है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत में एक उम्मीद देख सकती है। लेकिन राजनीति में केवल शिक्षा और सौम्यता काफी नहीं होती</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यहाँ जनमानस से जुड़ने के लिए पसीना बहाना पड़ता है। नीतीश कुमार की अनुपस्थिति में जब वे सदस्यता ले रहे थे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसमें एक गहरा संदेश छिपा था। नीतीश ने शायद यह जतलाने की कोशिश की कि वे अभी भी वंशवाद के खिलाफ हैं और निशांत का आना पार्टी की इच्छा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी निजी जिद नहीं। हालांकि</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह संदेश आम जनता तक किस रूप में पहुँचता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह देखने वाली बात होगी। क्या जनता इसे नीतीश की मजबूरी समझेगी या एक सोची-समझी रणनीति</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि जनता के बीच यह संदेश गया कि जेडीयू अब केवल एक परिवार को बचाने की कोशिश कर रही है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो नीतीश कुमार द्वारा दशकों में कमाई गई </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुशासन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की साख को धक्का लग सकता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जेडीयू की सांगठनिक स्थिति वर्तमान में नाजुक है। 2010 में 115 सीटें जीतने वाली पार्टी 2020 में 45 पर सिमट गई थी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि 2025 में उसने फिर से 85 सीटों के साथ वापसी की। यह उतार-चढ़ाव दिखाता है कि पार्टी का जनाधार पूरी तरह सुरक्षित नहीं है और वह गठबंधन के साथी की मजबूती पर निर्भर करता है। नीतीश कुमार का करिश्मा ही वह गोंद था जो इस गठबंधन को वजन देता था। अब जब गठबंधन की कमान निशांत की ओर झुक रही है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो उन्हें साबित करना होगा कि वे केवल नीतीश के पुत्र नहीं हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक कुशल रणनीतिकार भी हैं। उन्हें उन विधायकों और नेताओं को टूटने से रोकना होगा जो सत्ता के नए केंद्रों की तलाश में दूसरी पार्टियों का रुख कर सकते हैं। अटकलें हैं कि उन्हें डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है या पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष। पद चाहे जो भी मिले</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">असली चुनौती सड़क पर उतरकर कार्यकर्ताओं का विश्वास जीतने की होगी।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंततः</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत कुमार की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे अपने पिता के </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">मार्गदर्शन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का उपयोग किस सीमा तक करते हैं। नीतीश कुमार ने भले ही कह दिया हो कि "मैं हूँ ना"</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन दिल्ली की राजनीति और पटना की जमीन के बीच का फासला बहुत बड़ा होता है। गठबंधन की राजनीति में सहयोगी दल अक्सर कमजोर कड़ियों की तलाश में रहते हैं। यदि निशांत ने अपनी राजनीतिक परिपक्वता का परिचय जल्द नहीं दिया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो जेडीयू का अस्तित्व बीजेपी के बढ़ते प्रभुत्व और तेजस्वी यादव के आक्रामक विपक्ष के बीच सैंडविच बनकर रह सकता है। बिहार की राजनीति में यह एक नए अध्याय की शुरुआत है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें विरासत का बोझ है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिद्वंद्वियों की चुनौती है और एक ऐसी जनता की उम्मीदें हैं जो अब पुराने नारों से आगे निकलना चाहती है। निशांत कुमार को यह समझना होगा कि उनके पिता ने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि उन्हें शिखर पर बने रहने के लिए शून्य से शुरुआत करनी है। यह चुनौती किसी भी युद्ध से बड़ी है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि यहाँ हारने के लिए एक पूरी विरासत है और जीतने के लिए केवल संघर्ष।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत कुमार की राह में सबसे बड़ी बाधा वह </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">सूडो-पॉलिटिकल</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ढांचा भी है जिसे उनके पिता ने बड़ी कुशलता से बुना था। नीतीश कुमार ने अधिकारियों के भरोसे शासन चलाया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता अक्सर खुद को उपेक्षित महसूस करते रहे। यदि निशांत भी इसी रास्ते पर चलते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो कार्यकर्ताओं का उत्साह जल्दी ही ठंडे बस्ते में चला जाएगा। उन्हें पार्टी के भीतर लोकतंत्र को बहाल करना होगा और उन कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित करना होगा जो अब तक केवल नीतीश के नाम पर वोट मांगते आए हैं। बिहार का भविष्य अब इस बात पर टिका है कि क्या यह नया नेतृत्व सुशासन की उस लौ को जलाए रख पाता है या फिर सत्ता की इस खींचतान में जेडीयू इतिहास के पन्नों में एक और क्षेत्रीय दल के रूप में दर्ज हो जाती है जो अपने नायक के जाने के बाद अपनी पहचान खो बैठा। 8 मार्च की वह शाम पटना के आकाश में नई उम्मीदें लेकर आई थी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उन उम्मीदों को हकीकत में बदलना निशांत कुमार के लिए लोहे के चने चबाने जैसा होगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 21:17:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कांग्रेस मुख्यालय पर भाजपा का रोष प्रदर्शन-हजारों कार्यकर्ताओं ने दी गिरफ्तारी :वीरेंद्र सचदेवा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली-</strong>    प्रयास किया उसके विरोध में दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा के नेतृत्व में हजारों भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस मुख्यालय पर विराट रोष प्रदर्शन किया और गिरफ्तारी दी। प्रदेश उपाध्यक्ष एवं विधायक राजकुमार भाटिया द्वारा संचालित प्रदर्शन में एकत्र हजारों कार्यकर्ता जिनमें सांसद, विधायक, निगम पार्षद सम्मलित थे को प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा के आलावा पूर्व भाजपा अध्यक्ष एवं सांसद मनोज तिवारी,व प्रदेश पदाधिकारी विष्णु मित्तल, प्रवीण शंकर कपूर, विनय रावत, लता गुप्ता, सारिका जैन, सोना कुमारी, बृजेश राय, सुमित भसीन, संतोष ओझा,अजय सहरावत, नितिन त्यागी, भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री रोहित</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वीरेन्द्र</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170684/bjps-anger-protest-at-congress-headquarters-thousands-of-workers"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/img-20260221-wa0006.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली-</strong>  प्रयास किया उसके विरोध में दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा के नेतृत्व में हजारों भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस मुख्यालय पर विराट रोष प्रदर्शन किया और गिरफ्तारी दी। प्रदेश उपाध्यक्ष एवं विधायक राजकुमार भाटिया द्वारा संचालित प्रदर्शन में एकत्र हजारों कार्यकर्ता जिनमें सांसद, विधायक, निगम पार्षद सम्मलित थे को प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा के आलावा पूर्व भाजपा अध्यक्ष एवं सांसद मनोज तिवारी,व प्रदेश पदाधिकारी विष्णु मित्तल, प्रवीण शंकर कपूर, विनय रावत, लता गुप्ता, सारिका जैन, सोना कुमारी, बृजेश राय, सुमित भसीन, संतोष ओझा,अजय सहरावत, नितिन त्यागी, भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री रोहित चहल, उप महापौर जयभगवान यादव, जिला अध्यक्ष वीरेन्द्र बब्बर,अजय खटाना, अरविंद गर्ग, विनोद सहरावत, राज शर्मा गौतम, दीपक गाबा, विजेन्द्र धामा, चंद्रपाल बख्शी, रविन्द्र चौधरी, माया विष्ट आदि ने प्रदर्शन को सम्बोधित किया और फिर बैरिकेड्स तोड़ने के बाद गिरफ्तारी दी।वीरेन्द्र सचदेवा एवं लगभग एक हजार प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं ने जब दूसरा बैरिकेड्स तोड़ कर आगे बढ़े तो दिल्ली पुलिस ने बल प्रयोग कर उन्हे रोका और गिरफ्तार कर तुगलक रोड थाने ले जाया गया, जहां से लगभग एक घंटे बाद चेतावनी देकर छोड़ दिया गया ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वीरेन्द्र सचदेवा ने प्रदर्शन में सम्मिलित कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए पहले भारत माता की जय एवं वंदेमातरम का उदघोष करवाया और कांग्रेस द्वारा कल ए.आई. समिट में प्रदर्शन करने की निंदा की।दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि ए.आई. समिट भाजपा का नहीं भारत राष्ट्र का कार्यक्रम था और उसमे घुस कर प्रदर्शन करना सीधा सीधा राष्ट्रद्रोह है। साथ ही उन्होंने कहा कि एआई समिट जैसे महत्वपूर्ण मंच पर, जहां भारत अपनी नवाचार क्षमता, स्टार्टअप इकोसिस्टम और डिजिटल क्रांति का प्रदर्शन कर रहा था, वहां इस प्रकार का प्रदर्शन कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति को दर्शाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सचदेवा ने कहा कि जब पूरा विश्व भारत की तकनीकी प्रगति और डिजिटल नेतृत्व को स्वीकार कर रहा है, ऐसे समय में कांग्रेस द्वारा इस प्रकार का हंगामा करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी देशहित से ऊपर अपनी राजनीतिक हताशा को रख रही है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत की उपलब्धियों को कमतर दिखाने का प्रयास कर रही है। सचदेवा ने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि यह वही मानसिकता है जो संसद से लेकर सड़कों तक देश को बदनाम करने की कोशिश करती रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि भारत आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में तकनीक, स्टार्टअप और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है, जिसे कांग्रेस पचा नहीं पा रही है। मनोज तिवारी ने भी प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि जिस प्रकार की कल घटना घटी है वह समान्य घटना नहीं है हालांकि जबतक पुलिस उन कांग्रेस के गुंडो को गिरफ्तार करती उससे पहले ही वहां उपस्थित जनता ने ही उन्हें सबक सिखा दिया लेकिन ए.आई. समिट में कांग्रेस ने यह सिर्फ विरोध नहीं किया है बल्कि राहुल गांधी और पूरी कांग्रेस पार्टी का फ्रस्ट्रेशन दर्शाया है। 80 से ज्यादा देशों से युवा ए.आई. समिट में आए हैं जो कांग्रेस को नहीं पच पा रहा है। यह भाजपा में ए.आई. समिट नहीं था बल्कि यह भारत का एआई समिट था।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
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                                            <category>दिल्‍ली</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Feb 2026 19:44:54 +0530</pubDate>
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                <title>संगठन सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम, बस्ती में भाजपा की जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में भारतीय जनता पार्टी द्वारा जनपद बस्ती में प्रारंभ किए जा रहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान के अंतर्गत जिला स्तरीय कार्यशाला मंगलवार को भाजपा कार्यालय सभागार में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। इस कार्यशाला का उद्देश्य प्रशिक्षण महाभियान की रूपरेखा, उद्देश्य एवं कार्यपद्धति से कार्यकर्ताओं को अवगत कराना रहा। प्रशिक्षण महाभियान के अंतर्गत प्रदेश स्तर पर तीन दिवसीय, जिला स्तर पर दो दिवसीय, मंडल स्तर पर 24 घंटे तथा बूथ स्तर पर दो सत्रों में प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए जाएंगे।</div>
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<div style="text-align:justify;">कार्यशाला में पार्टी के जिला प्रभारी डा. समीर सिंह एवं जिलाध्यक्ष विवेकानन्द मिश्र ने उपस्थित प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170083/big-step-towards-organization-empowerment"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/img-20260217-wa0315.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में भारतीय जनता पार्टी द्वारा जनपद बस्ती में प्रारंभ किए जा रहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान के अंतर्गत जिला स्तरीय कार्यशाला मंगलवार को भाजपा कार्यालय सभागार में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। इस कार्यशाला का उद्देश्य प्रशिक्षण महाभियान की रूपरेखा, उद्देश्य एवं कार्यपद्धति से कार्यकर्ताओं को अवगत कराना रहा। प्रशिक्षण महाभियान के अंतर्गत प्रदेश स्तर पर तीन दिवसीय, जिला स्तर पर दो दिवसीय, मंडल स्तर पर 24 घंटे तथा बूथ स्तर पर दो सत्रों में प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए जाएंगे।</div>
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<div style="text-align:justify;">कार्यशाला में पार्टी के जिला प्रभारी डा. समीर सिंह एवं जिलाध्यक्ष विवेकानन्द मिश्र ने उपस्थित प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण अभियान को लेकर विस्तारपूर्वक मार्गदर्शन प्रदान किया। कार्यशाला का संचालन पार्टी के जिला उपाध्यक्ष एवं प्रशिक्षण महाभियान के जिला संयोजक प्रत्युष सिंह ने किया। पार्टी द्वारा यह निर्णय लिया गया कि प्रशिक्षण वर्ग बूथ स्तर तक आयोजित किए जाएंगे, जिससे संगठन की जड़ें और अधिक सुदृढ़ हों।</div>
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<div style="text-align:justify;">डा. समीर सिंह ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यकर्ता को तराशने की प्रक्रिया है। व्यक्ति निर्माण से ही संगठन का निर्माण होता है। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान को संगठन सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि यह अभियान कार्यकर्ताओं को विचार, व्यवहार और नेतृत्व के स्तर पर समृद्ध करेगा। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय और एकात्म मानववाद के दर्शन को भाजपा की कार्यसंस्कृति की आधारशिला बताया।</div>
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<div style="text-align:justify;">जिलाध्यक्ष विवेकानन्द मिश्र ने कहा कि यह प्रशिक्षण महाभियान कार्यकर्ताओं को वैचारिक रूप से सशक्त, अनुशासित और सेवा भाव से ओत-प्रोत बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन ‘एक देश, एक विधान’ का संदेश देता है, जबकि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद राजनीति को अंतिम पंक्ति के व्यक्ति से जोड़ता है। उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा एक संगठन आधारित, कार्यकर्ता आधारित और विचारधारा आधारित राजनीतिक दल है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्री मिश्र ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे स्व. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय एवं श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों को अपने आचरण में उतारते हुए संगठन एवं राष्ट्र सेवा के पथ पर आगे बढ़ें।कार्यशाला में जिले में निवास करने वाले प्रदेश व क्षेत्र पदाधिकारी, जिला एवं मंडल प्रशिक्षण टोली, मण्डल प्रभारी एवं मण्डल अध्यक्ष, जिला पदाधिकारी, जिला मोर्चा अध्यक्ष एवं महामंत्री, प्रकोष्ठ, पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा, निवर्तमान विधानसभा प्रत्याशी, नगर पालिका एवं नगर पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख, प्रदेश एवं जिला, सहकारी संघ एवं बैंक के अध्यक्ष सम्मिलित हुए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 19:21:14 +0530</pubDate>
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