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                <title>Success Stories - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Success Stories RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>IAS Success Story: राजस्थान की बेटी बनीं आईएएस आफ़सर, 22 साल की उम्र में मिली सफलता </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: राजस्थान की मोनिका यादव ने यह साबित कर दिया कि ईमानदारी और मेहनत के दम पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। महज 22 साल की उम्र में उन्होंने वह कर दिखाया जो कई लोग वर्षों की तैयारी के बाद भी नहीं कर पाते। उनका संबंध राजस्थान के सीकर जिले के लिसाडिया गांव से है, जहां से निकलकर उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता पाई।</p>
<p><strong>पहले प्रयास में यूपीएससी पास</strong></p>
<p>मोनिका के पिता हरफूल सिंह यादव एक आरएएस अधिकारी हैं। घर में प्रशासनिक माहौल होने के कारण बचपन से ही उनका रुझान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173001/ias-success-story-rajasthans-daughter-became-ias-officer-got-success"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/ias-success-story-(29).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: राजस्थान की मोनिका यादव ने यह साबित कर दिया कि ईमानदारी और मेहनत के दम पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। महज 22 साल की उम्र में उन्होंने वह कर दिखाया जो कई लोग वर्षों की तैयारी के बाद भी नहीं कर पाते। उनका संबंध राजस्थान के सीकर जिले के लिसाडिया गांव से है, जहां से निकलकर उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता पाई।</p>
<p><strong>पहले प्रयास में यूपीएससी पास</strong></p>
<p>मोनिका के पिता हरफूल सिंह यादव एक आरएएस अधिकारी हैं। घर में प्रशासनिक माहौल होने के कारण बचपन से ही उनका रुझान सिविल सेवा की ओर रहा। उन्होंने 22 वर्ष की उम्र में पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर 403वीं रैंक हासिल की। इसके बाद उन्होंने राजस्थान सिविल सेवा परीक्षा में भी 93वीं रैंक प्राप्त की।</p>
<p>मोनिका ने सिर्फ यूपीएससी ही नहीं, बल्कि नेट, जेआरएफ और सीए जैसी कठिन परीक्षाएं भी उत्तीर्ण कीं। उनकी उपलब्धियां यहीं नहीं रुकीं। लखनऊ स्थित भारतीय रेलवे प्रबंधन संस्थान में 78 सप्ताह की ट्रेनिंग के दौरान उन्हें सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का पुरस्कार भी मिला।</p>
<p><strong>परिवार से मिला मजबूत समर्थन</strong></p>
<p>मोनिका के पिता हरफूल सिंह यादव वरिष्ठ आरएएस अधिकारी हैं, जबकि उनकी मां सुनीता यादव गृहिणी हैं। तीन भाई-बहनों में वह सबसे बड़ी हैं। बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहने वाली मोनिका का स्कूल रिकॉर्ड भी बेहद शानदार रहा। परिवार के सहयोग और अनुशासन ने उनकी सफलता की राह को मजबूत बनाया।</p>
<p><strong>आईएएस अधिकारी से हुई शादी</strong></p>
<p>आईएएस बनने के बाद भी मोनिका अपनी जड़ों से जुड़ी हुई हैं। उनकी शादी आईएएस अधिकारी सुशील यादव से हुई है। सोशल मीडिया पर भी वह काफी सक्रिय रहती हैं और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 15:50:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>UPSC में बलिया का परचम: मोनिका श्रीवास्तव ने हासिल की 16वीं रैंक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बलिया।</strong> संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के ताजा परिणाम में बलिया जिले के पांच अभ्यर्थियों ने शानदार सफलता हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। इस बार पंदह ब्लॉक के खरसरा गांव की बेटी मोनिका श्रीवास्तव ने ऑल इंडिया 16वीं रैंक प्राप्त कर सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल की। वहीं गड़हांचल क्षेत्र के दौलतपुर गांव के रहने वाले रविशेखर सिंह ने 176वीं रैंक प्राप्त कर परिवार और जिले का मान बढ़ाया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अलावा अनिंद्य पाण्डेय ने 158वीं रैंक, शिक्षा पाठक ने 453वीं रैंक और आदित्य कृष्ण तिवारी ने 540वीं रैंक हासिल कर जिले को गौरवान्वित किया है। लगातार दूसरे वर्ष</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172801/shankaracharya-leaves-for-lucknow-for-religious-war-to-declare-mother"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1000928399.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बलिया।</strong> संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के ताजा परिणाम में बलिया जिले के पांच अभ्यर्थियों ने शानदार सफलता हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। इस बार पंदह ब्लॉक के खरसरा गांव की बेटी मोनिका श्रीवास्तव ने ऑल इंडिया 16वीं रैंक प्राप्त कर सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल की। वहीं गड़हांचल क्षेत्र के दौलतपुर गांव के रहने वाले रविशेखर सिंह ने 176वीं रैंक प्राप्त कर परिवार और जिले का मान बढ़ाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अलावा अनिंद्य पाण्डेय ने 158वीं रैंक, शिक्षा पाठक ने 453वीं रैंक और आदित्य कृष्ण तिवारी ने 540वीं रैंक हासिल कर जिले को गौरवान्वित किया है। लगातार दूसरे वर्ष बलिया के युवाओं ने UPSC जैसी कठिन परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। पिछले वर्ष भी जिले की बेटी शक्ति दूबे ने पूरे देश में पहला स्थान प्राप्त कर इतिहास रचा था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>16वीं रैंक लाकर मोनिका ने बढ़ाया जिले का मान</strong></div>
<div style="text-align:justify;">पंदह ब्लॉक के खरसरा गांव की रहने वाली मोनिका श्रीवास्तव ने इस बार ऑल इंडिया 16वीं रैंक हासिल की है। इससे पहले उन्हें 455वीं रैंक मिली थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत जारी रखी।मोनिका की शुरुआती पढ़ाई बिहार के औरंगाबाद से हुई, जबकि उन्होंने IIT गुवाहाटी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया। तकनीकी क्षेत्र में बेहतर करियर की संभावनाओं के बावजूद उन्होंने सिविल सेवा को अपना लक्ष्य बनाया और अंततः शानदार सफलता हासिल की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान में वह भारतीय रेल यातायात सेवा (IRTS) में ट्रेनिंग ऑफिसर के पद पर कार्यरत थीं। होली के मौके पर जब वह गांव आई हुई थीं, उसी दौरान उन्हें परिणाम घोषित होने और 16वीं रैंक मिलने की जानकारी मिली।उनके पिता ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव सेवानिवृत्त अभियंता हैं, जबकि मां भारती श्रीवास्तव औरंगाबाद (बिहार) में प्रधानाध्यापिका हैं। मोनिका ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और निरंतर मेहनत को दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>घर से ऑनलाइन पढ़ाई कर रविशेखर ने पाई सफलता</strong></div>
<div style="text-align:justify;">गड़हांचल क्षेत्र के दौलतपुर गांव के रहने वाले रविशेखर सिंह ने UPSC में 176वीं रैंक हासिल की है। उनके पिता दिलीप सिंह बलिया में असिस्टेंट पोस्ट मास्टर के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।रविशेखर ने बताया कि उन्होंने घर से ही ऑनलाइन पढ़ाई कर यह सफलता हासिल की। उनकी प्रारंभिक शिक्षा बसंतपुर में, इंटरमीडिएट की पढ़ाई नागाजी माल्देपुर से और स्नातक की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से हुई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि यह उनका तीसरा प्रयास था और दूसरा इंटरव्यू था। वह रोजाना 6 से 8 घंटे पढ़ाई करते थे। रविशेखर ने कहा कि तैयारी करने वाले युवाओं को “सीरियस नहीं बल्कि सिन्सियर” रहना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>मां की आंखों से छलके खुशी के आंसू</strong></div>
<div style="text-align:justify;">रविशेखर की मां पुष्पा देवी बेटे की सफलता की खबर सुनकर भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि रवि बचपन से ही मेधावी रहा है और पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहा। उन्होंने कहा कि आज बेटे की सफलता से पूरे परिवार की वर्षों की मेहनत सफल हो गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अनिंद्य पाण्डेय ने सुधारी अपनी रैंक</div>
<div style="text-align:justify;">रामपुर निवासी कमलेश पाण्डेय के बेटे अनिंद्य पाण्डेय ने इस बार 158वीं रैंक हासिल की है। इससे पहले सिविल सेवा परीक्षा 2024 में उन्हें 271वीं रैंक मिली थी। इस बार उन्होंने सौ से अधिक स्थान की छलांग लगाकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">शिक्षा पाठक ने 453वीं रैंक हासिल की</div>
<div style="text-align:justify;">पियरौटा गांव की रहने वाली शिक्षा पाठक ने 453वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिवार, शिक्षकों और लगातार मेहनत को दिया। शिक्षा ने कहा कि अगर व्यक्ति हार नहीं मानता और सही दिशा में प्रयास करता है तो सफलता जरूर मिलती है।</div>
<div style="text-align:justify;">मां के सपनों को पूरा करने निकले आदित्य</div>
<div style="text-align:justify;">चितबड़ागांव के रहने वाले आदित्य कृष्ण तिवारी ने दूसरे प्रयास में 540वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी (DTU) से बीटेक किया और दो साल नौकरी भी की।</div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि अपनी अफसर मां के सपनों को पूरा करने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी और सिविल सेवा की तैयारी में जुट गए। कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने यह सफलता हासिल की और अपने परिवार का सपना पूरा किया।</div>
<div style="text-align:justify;">जिले में खुशी का माहौल</div>
<div style="text-align:justify;">UPSC के परिणाम आने के बाद बलिया जिले में खुशी की लहर है। इन युवाओं की सफलता से न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे जिले के लोग गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। लोग लगातार इनके घर पहुंचकर बधाई दे रहे हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Mar 2026 23:29:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: राजस्थान की बेटी बनीं आईएएस आफ़सर, 22 साल की उम्र में मिली सफलता </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: राजस्थान की मोनिका यादव ने यह साबित कर दिया कि ईमानदारी और मेहनत के दम पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। महज 22 साल की उम्र में उन्होंने वह कर दिखाया जो कई लोग वर्षों की तैयारी के बाद भी नहीं कर पाते। उनका संबंध राजस्थान के सीकर जिले के लिसाडिया गांव से है, जहां से निकलकर उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता पाई।</p>
<p><strong>पहले प्रयास में यूपीएससी पास</strong></p>
<p>मोनिका के पिता हरफूल सिंह यादव एक आरएएस अधिकारी हैं। घर में प्रशासनिक माहौल होने के कारण बचपन से ही उनका रुझान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172157/ias-success-story-rajasthans-daughter-became-ias-officer-got-success"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/ias-success-story-(29).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: राजस्थान की मोनिका यादव ने यह साबित कर दिया कि ईमानदारी और मेहनत के दम पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। महज 22 साल की उम्र में उन्होंने वह कर दिखाया जो कई लोग वर्षों की तैयारी के बाद भी नहीं कर पाते। उनका संबंध राजस्थान के सीकर जिले के लिसाडिया गांव से है, जहां से निकलकर उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता पाई।</p>
<p><strong>पहले प्रयास में यूपीएससी पास</strong></p>
<p>मोनिका के पिता हरफूल सिंह यादव एक आरएएस अधिकारी हैं। घर में प्रशासनिक माहौल होने के कारण बचपन से ही उनका रुझान सिविल सेवा की ओर रहा। उन्होंने 22 वर्ष की उम्र में पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर 403वीं रैंक हासिल की। इसके बाद उन्होंने राजस्थान सिविल सेवा परीक्षा में भी 93वीं रैंक प्राप्त की।</p>
<p>मोनिका ने सिर्फ यूपीएससी ही नहीं, बल्कि नेट, जेआरएफ और सीए जैसी कठिन परीक्षाएं भी उत्तीर्ण कीं। उनकी उपलब्धियां यहीं नहीं रुकीं। लखनऊ स्थित भारतीय रेलवे प्रबंधन संस्थान में 78 सप्ताह की ट्रेनिंग के दौरान उन्हें सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का पुरस्कार भी मिला।</p>
<p><strong>परिवार से मिला मजबूत समर्थन</strong></p>
<p>मोनिका के पिता हरफूल सिंह यादव वरिष्ठ आरएएस अधिकारी हैं, जबकि उनकी मां सुनीता यादव गृहिणी हैं। तीन भाई-बहनों में वह सबसे बड़ी हैं। बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहने वाली मोनिका का स्कूल रिकॉर्ड भी बेहद शानदार रहा। परिवार के सहयोग और अनुशासन ने उनकी सफलता की राह को मजबूत बनाया।</p>
<p><strong>आईएएस अधिकारी से हुई शादी</strong></p>
<p>आईएएस बनने के बाद भी मोनिका अपनी जड़ों से जुड़ी हुई हैं। उनकी शादी आईएएस अधिकारी सुशील यादव से हुई है। सोशल मीडिया पर भी वह काफी सक्रिय रहती हैं और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Mar 2026 11:24:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: राजस्थान की मोनिका बनी 22 साल की उम्र में IAS, मेहनत और लगन की बेहतरीन मिसाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">IAS Success Story: राजस्थान के सीकर जिले के लिसाडिया गांव की मोनिका यादव ने साबित कर दिया कि इमानदारी और मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती। महज 22 साल की उम्र में उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास कर IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>कम उम्र में बड़ी उपलब्धि</strong></p>
<p style="text-align:justify;">मोनिका के पिता हरफूल सिंह यादव RAS अधिकारी हैं, जिससे उनके मन में हमेशा से सिविल सेवा की ओर आकर्षण रहा। मोनिका ने पहले प्रयास में ही UPSC परीक्षा में 403वीं रैंक हासिल की। इसके साथ ही उन्होंने राजस्थान सिविल सेवा परीक्षा में भी 93वीं रैंक प्राप्त की।</p>
<p style="text-align:justify;">मोनिका</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/159574/ias-success-story-monica-from-rajasthan-became-a-great-example"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/1f9a3f518215bd0ac2006847aab23f92.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">IAS Success Story: राजस्थान के सीकर जिले के लिसाडिया गांव की मोनिका यादव ने साबित कर दिया कि इमानदारी और मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती। महज 22 साल की उम्र में उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास कर IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>कम उम्र में बड़ी उपलब्धि</strong></p>
<p style="text-align:justify;">मोनिका के पिता हरफूल सिंह यादव RAS अधिकारी हैं, जिससे उनके मन में हमेशा से सिविल सेवा की ओर आकर्षण रहा। मोनिका ने पहले प्रयास में ही UPSC परीक्षा में 403वीं रैंक हासिल की। इसके साथ ही उन्होंने राजस्थान सिविल सेवा परीक्षा में भी 93वीं रैंक प्राप्त की।</p>
<p style="text-align:justify;">मोनिका ने NET, JRF और CA जैसी कठिन परीक्षाएं भी पास की हैं। इसके अलावा, लखनऊ स्थित भारतीय रेलवे प्रबंधन संस्थान में 78 सप्ताह की ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने सबसे अच्छा प्रदर्शन का पुरस्कार भी जीता, जिससे अपने जिले का नाम रौशन किया।</p>
<p style="text-align:justify;">IAS बनने के बाद भी मोनिका अपनी मिट्टी से जुड़ी रही हैं। सोशल मीडिया पर भी वह सक्रिय रहती हैं। मोनिका की शादी IAS सुशील यादव से हुई है। परिवार की बात करें तो उनके पिता हरफूल सिंह यादव सीनियर RAS अधिकारी हैं और मां सुनिता यादव हाउसवाइफ है। मोनिका तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Nov 2025 15:17:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: हरियाणा की बेटी राजस्थान में बनीं DSP, किसान परिवार से निकलकर बनीं DSP</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>Success Story:</strong> कहते है की मेहनत करने वालों की कभी भी हार नहीं होती है इसकी कहानी हम आपको बताने जा रहें है, जिसकी प्रेरणा बनी DSP अंजू यादव। जिन्होंने जिंदगी की हर मुश्किल को सीढ़ी बनाया। घूंघट से निकलकर पढ़ाई की और राजस्थान पुलिस सर्विस परीक्षा पास की और आज डीएसपी पद पर तैनात हैं। आइए जानते हैं उनकी सक्सेस स्टोरी...</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ऐसे बनीं DSP</strong></p>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा के नारनौल जिले के छोटे से गांव धौलेड़ा में 1988 में जन्मी अंजू यादव किसान परिवार से आती हैं। पिता लालाराम खेती और परचून की दुकान से परिवार चलाते थे, मां हाउसवाइफ थीं। चार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158116/success-story-haryanas-daughter-became-dsp-in-rajasthan-she-came"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/latest-news---2025-10-20t165230.1181.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Success Story:</strong> कहते है की मेहनत करने वालों की कभी भी हार नहीं होती है इसकी कहानी हम आपको बताने जा रहें है, जिसकी प्रेरणा बनी DSP अंजू यादव। जिन्होंने जिंदगी की हर मुश्किल को सीढ़ी बनाया। घूंघट से निकलकर पढ़ाई की और राजस्थान पुलिस सर्विस परीक्षा पास की और आज डीएसपी पद पर तैनात हैं। आइए जानते हैं उनकी सक्सेस स्टोरी...</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ऐसे बनीं DSP</strong></p>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा के नारनौल जिले के छोटे से गांव धौलेड़ा में 1988 में जन्मी अंजू यादव किसान परिवार से आती हैं। पिता लालाराम खेती और परचून की दुकान से परिवार चलाते थे, मां हाउसवाइफ थीं। चार बेटियों का पालन-पोषण आसान नहीं था, लेकिन माता-पिता ने कभी उन्हें बेटों से कम नहीं समझा। आज इसी परवरिश का नतीजा है कि अंजू राजस्थान पुलिस सेवा (RPS) में DSP हैं। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>21 साल में शादी, 24 में बनीं मां</strong></p>
<p style="text-align:justify;">बहुत कम उम्र में शादी और फिर मां बनने के बाद अंजू की जिंदगी जिम्मेदारियों से भर गई। ससुराल से सपोर्ट न मिलने पर वे मायके लौट आईं। बेटे मुकुलदीप की परवरिश की जिम्मेदारी भी उन पर ही आ गई। यही वह दौर था जब ज्यादातर लोग अपने सपनों को खत्म मान लेते हैं, लेकिन अंजू ने हार मानने के बजाय खुद को साबित करने की ठानी। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरकारी स्कूल से पढ़ाई</strong></p>
<p style="text-align:justify;">गांव के सरकारी स्कूल से 12वीं तक पढ़ाई करने के बाद उन्होंने डिस्टेंस मोड से ग्रेजुएशन किया। कोई बड़ा स्कूल, कोई महंगी कोचिंग नहीं, सिर्फ हौसला और लगन ही उनके साथ थी। करियर की शुरुआत शिक्षक के तौर पर की। अंजू ने अपनी मेहनत से तीन बार सरकारी टीचर की नौकरी हासिल की। 2016 में पहली बार मध्यप्रदेश के भिंड में जवाहर नवोदय विद्यालय में पढ़ाने लगीं। इसके बाद राजस्थान और दिल्ली के सरकारी स्कूलों में भी पढ़ाया। दिल्ली में उन्होंने करीब पांच साल तक बच्चों को पढ़ाया। इस दौरान उन्होंने बेटे की परवरिश और नौकरी दोनों साथ में किया। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>हिम्मत का फैसला</strong></p>
<p style="text-align:justify;">2021 में पति नित्यानंद का बीमारी से निधन हो गया। अकेले बेटे और जिम्मेदारियों के बीच यह समय बेहद कठिन था, लेकिन अंजू ने इस दुख को अपनी ताकत बनाया। उसी साल राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) की परीक्षा का फॉर्म भरा। लगातार मेहनत की और 2023 में रिजल्ट आने पर विधवा कोटे से 1725वीं रैंक हासिल की। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सितंबर 2025 DSP बनी अंजू</strong></p>
<p style="text-align:justify;">लंबे संघर्ष और मेहनत के बाद आखिरकार सितंबर 2025 में उनकी पासिंग परेड हुई और वे राजस्थान पुलिस सेवा में DSP बन गईं। वर्दी पहनकर उन्होंने साबित कर दिया कि असली जीत हालात से लड़कर ही मिलती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Oct 2025 21:06:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: 21 साल की उम्र में बनी IAS अफसर, जाने दिव्या तंवर की सक्सेस स्टोरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Success Story: </strong>मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती है, क्योंकि उन्हे सफलता का स्वाद अवश्य मिलता है। हरियाणा की दिव्या तंवर ने दिखा दिया कि अगर इरादा मजबूत हो, तो ये मंजिल असंभव नहीं। खेतों में काम करने वाली मां की बेटी ने गरीबी, जिम्मेदारियों और संघर्षों के बीच दो बार UPSC पास कर IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया। Success Story IAS Divya Tanwar</p>
<p>जानकारी के मुताबिक, हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के एक छोटे से गांव निंबी की रहने वाली दिव्या तंवर ने वो कर दिखाया जो कई लोग सिर्फ सपनों में सोचते हैं। दिव्या का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158049/success-story-know-the-success-story-of-divya-tanwar-who"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/latest-news---2025-10-23t002458.024.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Success Story: </strong>मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती है, क्योंकि उन्हे सफलता का स्वाद अवश्य मिलता है। हरियाणा की दिव्या तंवर ने दिखा दिया कि अगर इरादा मजबूत हो, तो ये मंजिल असंभव नहीं। खेतों में काम करने वाली मां की बेटी ने गरीबी, जिम्मेदारियों और संघर्षों के बीच दो बार UPSC पास कर IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया। Success Story IAS Divya Tanwar</p>
<p>जानकारी के मुताबिक, हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के एक छोटे से गांव निंबी की रहने वाली दिव्या तंवर ने वो कर दिखाया जो कई लोग सिर्फ सपनों में सोचते हैं। दिव्या का बचपन संघर्षों से भरा रहा। साल 2011 में पिता के निधन के बाद परिवार की सारी जिम्मेदारी उनकी मां बबीता तंवर पर आ गई। Success Story IAS Divya Tanwar</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-10/divya-tanwar-2024-02-14bf5d0d12b07c27214485a03aa6c51b.jpg" alt="divya-tanwar-2024-02-14bf5d0d12b07c27214485a03aa6c51b" width="1200" height="900"></img></p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, मां ने खेतों में मजदूरी की, कपड़े सीए और चार बच्चों की परवरिश में दिन-रात एक कर दिया। हालात कठिन थे लेकिन उन्होंने कभी बेटी की पढ़ाई रुकने नहीं दी। Success Story IAS Divya Tanwar</p>
<p><strong>आगे बढ़ना</strong></p>
<p>जानकारी के मुताबिक, दिव्या बचपन से ही पढ़ाई में तेज थीं। उन्होंने सरकारी स्कूल और नवोदय विद्यालय से अपनी शुरुआती पढ़ाई की। पैसों की कमी के बावजूद उन्होंने साइंस में ग्रेजुएशन किया। तभी से उन्होंने ठान लिया कि वो कुछ बड़ा करेंगी। उनका सपना था UPSC पास कर देश की सेवा करना। Success Story IAS Divya Tanwar</p>
<p><strong>मेहनत पर भरोसा</strong></p>
<p><strong><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-10/1514914-gold-rate-today-january-15-check-18-22-and-24-carat-gold-rate-in-different-cities-5.jpg" alt="1514914-gold-rate-today-january-15-check-18-22-and-24-carat-gold-rate-in-different-cities-5" width="1500" height="900"></img></strong></p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, जहां ज्यादातर छात्र महंगे कोचिंग सेंटर्स पर निर्भर रहते हैं, वहीं दिव्या ने ऑनलाइन क्लासेज और मॉक टेस्ट की मदद से खुद तैयारी की। उन्होंने खुद से नोट्स बनाए, रोज़ घंटों पढ़ाई की और अपनी कमजोरियों पर काम किया। मां की मेहनत और अपनी लगन ने उन्हें कभी हारने नहीं दिया। Success Story IAS Divya Tanwar</p>
<p><strong>रचा इतिहास</strong></p>
<p>जानकारी के मुताबिक, साल 2021 में दिव्या ने पहली बार UPSC परीक्षा दी। और अपनी पहली ही कोशिश में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 438 हासिल की। इतनी कम उम्र में UPSC पास करना बड़ी बात थी। सिर्फ 21 साल की उम्र में दिव्या IPS अफसर बन गईं। उनका नाम देशभर में छा गया। गांव के लोग गर्व से कहने लगे — “बबीता की बेटी ने कमाल कर दिया।” Success Story IAS Divya Tanwar</p>
<p><strong>दूसरी बार में बनी IAS</strong></p>
<p><strong><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-10/8cgdhp1s_success-story_625x300_28_august_25.jpg" alt="8cgdhp1s_success-story_625x300_28_August_25" width="1200" height="738"></img></strong></p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, लेकिन दिव्या का सफर यहीं खत्म नहीं हुआ। IPS बनने के बाद भी उनका सपना था IAS बनना। उन्होंने कहा था कि जब तक IAS नहीं बनतीं, तब तक चैन नहीं लूंगी। साल 2022 में उन्होंने दोबारा UPSC परीक्षा दी। और इस बार उन्होंने AIR 105 हासिल कर दिखाया। दूसरे प्रयास में उन्होंने लिखित परीक्षा में 834 अंक और इंटरव्यू में 160 अंक हासिल किए। कुल 994 अंकों के साथ दिव्या IAS बन गईं। Success Story IAS Divya Tanwar</p>
<p><strong>निभा रही हैं जिम्मेदारी</strong></p>
<p>जानकारी के मुताबिक, आज दिव्या तंवर मणिपुर कैडर में IAS अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। उनकी कहानी हर उस लड़की के लिए मिसाल है जो हालात से डरकर अपने सपनों को छोड़ देती है। Success Story IAS Divya Tanwar</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, दिव्या ने दिखा दिया कि अगर मन में सच्चा इरादा और हिम्मत हो तो कोई मुश्किल बड़ी नहीं होती।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Oct 2025 00:27:55 +0530</pubDate>
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