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                <title>पंजाब - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>पंजाब RSS Feed</description>
                
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                <title>ऑपरेशन सिंदूर में जवानों की सेवा कर 11 वर्षीय श्रवण सिंह बना देशभक्ति, समर्पण और साहस का अद्भुत प्रतीक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">जब किसी देश की सीमाओं पर सैनिक दिन-रात पहरा दे रहे होते हैं, तब पूरा राष्ट्र उनके साहस और त्याग के भरोसे निश्चिंत होकर जीवन जीता है। लेकिन कभी-कभी इसी देश की मिट्टी से ऐसे अनमोल रत्न जन्म लेते हैं, जो छोटी-सी उम्र में ही राष्ट्रसेवा का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत कर देते हैं कि पूरा देश गर्व से भर उठता है। पंजाब के फिरोजपुर जिले के ‘चक तारा वाली’ गांव का 11 वर्षीय श्रवण सिंह ऐसा ही एक अद्भुत बालक है, जिसकी देशभक्ति और समर्पण की भावना ने करोड़ों भारतीयों का हृदय जीत लिया है। जिस उम्र में बच्चे खिलौनों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178865/11-year-old-shravan-singh-became-a-wonderful-symbol-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/4488d7a01b06f10315418667501c682d17484130177341201_original.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">जब किसी देश की सीमाओं पर सैनिक दिन-रात पहरा दे रहे होते हैं, तब पूरा राष्ट्र उनके साहस और त्याग के भरोसे निश्चिंत होकर जीवन जीता है। लेकिन कभी-कभी इसी देश की मिट्टी से ऐसे अनमोल रत्न जन्म लेते हैं, जो छोटी-सी उम्र में ही राष्ट्रसेवा का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत कर देते हैं कि पूरा देश गर्व से भर उठता है। पंजाब के फिरोजपुर जिले के ‘चक तारा वाली’ गांव का 11 वर्षीय श्रवण सिंह ऐसा ही एक अद्भुत बालक है, जिसकी देशभक्ति और समर्पण की भावना ने करोड़ों भारतीयों का हृदय जीत लिया है। जिस उम्र में बच्चे खिलौनों और खेलों में खोए रहते हैं, उस उम्र में श्रवण सिंह भारतीय सेना के जवानों की सेवा में स्वयं को समर्पित कर चुका था। उसका हर कदम राष्ट्रभक्ति की उस पवित्र भावना से प्रेरित था, जो किसी साधारण बच्चे में नहीं, बल्कि किसी असाधारण आत्मा में ही दिखाई देती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब भारतीय सेना सीमा पर पूरी मुस्तैदी से डटी हुई थी, तब श्रवण सिंह बिना किसी भय और संकोच के जवानों के बीच पहुंचता रहा। सुबह होते ही वह चाय लेकर खेतों और कच्चे रास्तों से गुजरता हुआ सेना के कैंप तक पहुंच जाता। दोपहर की भीषण गर्मी में वह जवानों के लिए बर्फ लेकर जाता ताकि देश की रक्षा में लगे सैनिकों को थोड़ी राहत मिल सके। शाम के समय वह दूध और लस्सी लेकर फिर कैंप में पहुंच जाता। उसके मन में न कोई डर था, न कोई स्वार्थ। उसके भीतर केवल एक ही भावना थी—देश के वीर जवानों की सेवा करना। यह भावना किसी किताब से नहीं आती, यह राष्ट्रप्रेम की वह आग होती है जो आत्मा में जन्म लेती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्रवण सिंह जब जवानों के बीच जाता था तो उनके साथ बड़े गर्व से घूमता और उनकी बंदूक हाथ में लेकर कहता, “मैं भी बड़ा होकर सैनिक बनूंगा।” यह केवल एक मासूम इच्छा नहीं थी, बल्कि उस बालक के हृदय में धधकती देशभक्ति की लौ थी। उसकी आंखों में सेना की वर्दी के प्रति जो सम्मान था, वह बताता है कि भारत की नई पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम की भावना कितनी गहरी है। श्रवण के भीतर देश के लिए कुछ कर गुजरने का जो जज्बा दिखाई देता है, वह वास्तव में करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा है।</div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय सेना भी इस नन्हे सिपाही के समर्पण और सेवा भावना से अत्यंत प्रभावित हुई। सेना ने श्रवण को केवल सम्मान ही नहीं दिया, बल्कि उसे अपने परिवार का हिस्सा मानते हुए “गोद” ले लिया। यह किसी भी बच्चे के लिए बहुत बड़ा सम्मान है। सेना ने उसकी शिक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी उठाई। जब जवानों को पता चला कि श्रवण डायबिटीज जैसी बीमारी से जूझ रहा है, तब उन्होंने तुरंत उसकी चिकित्सा की व्यवस्था की। उसकी बेहतर पढ़ाई के लिए प्राइवेट स्कूल में दाखिला कराया गया और आगे की शिक्षा के लिए कपूरथला भेजने का निर्णय लिया गया। यह केवल सहायता नहीं, बल्कि उस देशभक्त बालक के प्रति सेना का प्रेम और सम्मान है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्रवण सिंह की कहानी यह सिद्ध करती है कि देशभक्ति उम्र की मोहताज नहीं होती। केवल 11 वर्ष की उम्र में उसने जो कार्य किया, वह बड़े-बड़े लोगों के लिए भी प्रेरणा बन गया। वह न किसी पुरस्कार के लिए काम कर रहा था, न किसी प्रसिद्धि के लिए। उसके मन में केवल भारत माता के प्रति प्रेम था। यही कारण है कि उसकी सेवा भावना को पूरे देश ने सलाम किया और उसे प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी श्रवण सिंह की खुलकर प्रशंसा की। बाल पुरस्कार समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने उसके जज्बे को याद करते हुए कहा था कि जिन कपड़ों और चप्पलों में यह बच्चा देश सेवा कर रहा था, उन्हें संभालकर रखा जाए क्योंकि वे इतिहास का हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री के ये शब्द केवल तारीफ नहीं थे, बल्कि उस बालक के राष्ट्रप्रेम को दिया गया सर्वोच्च सम्मान थे। देश के प्रधानमंत्री का किसी छोटे बच्चे के समर्पण को इस प्रकार सम्मान देना यह दर्शाता है कि श्रवण का कार्य कितना असाधारण था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्रवण सिंह को देशभर की अनेक संस्थाओं ने सम्मानित किया। कश्मीर से लेकर इंदौर तक उसे बुलाकर सम्मान दिया गया। उसे पहली बार हवाई जहाज में बैठाकर इंदौर ले जाया गया। यह सब उस बच्चे के लिए किसी सपने जैसा था, लेकिन इन सब उपलब्धियों के बाद भी श्रवण के स्वभाव में कोई बदलाव नहीं आया। वह आज भी उसी सादगी और विनम्रता के साथ अपने गांव में रहता है। यही उसकी सबसे बड़ी विशेषता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आईपीएल में पंजाब किंग्स की मालकिन और प्रसिद्ध अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने भी श्रवण को मोहाली आमंत्रित किया। वहां उसने उनके साथ बैठकर क्रिकेट मैच देखा। लेकिन श्रवण के लिए सबसे बड़ा गौरव क्रिकेट मैच देखना नहीं, बल्कि भारतीय सेना के जवानों के बीच रहना था। उसके लिए सैनिकों की वर्दी किसी हीरो से कम नहीं थी। यही कारण है कि वह हर समय सेना के प्रति सम्मान और प्रेम से भरा दिखाई देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्रवण के परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत साधारण है। उसके पिता सोना सिंह एक छोटे किसान हैं और मां आंगनवाड़ी में काम करती हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद इस परिवार ने अपने बेटे में देशभक्ति और संस्कारों की जो भावना जगाई, वह वास्तव में अनुकरणीय है। श्रवण के माता-पिता को भी यह अंदाजा नहीं था कि उनका छोटा-सा बेटा एक दिन पूरे देश के लिए प्रेरणा बन जाएगा। लेकिन सच्चाई यही है कि महानता कभी साधनों से नहीं, बल्कि विचारों और भावनाओं से जन्म लेती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज जब समाज में स्वार्थ और व्यक्तिगत लाभ की भावना बढ़ती दिखाई देती है, तब श्रवण सिंह जैसे बच्चे आशा की किरण बनकर सामने आते हैं। वह बताता है कि सच्चा देशप्रेम क्या होता है। देशभक्ति केवल नारों और भाषणों से सिद्ध नहीं होती, बल्कि सेवा, त्याग और समर्पण से प्रकट होती है। श्रवण ने यह साबित कर दिया कि यदि मन में राष्ट्र के प्रति प्रेम हो तो छोटी उम्र भी बड़े कार्य करने से नहीं रोक सकती।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्रवण सिंह वास्तव में भारत माता का वह वीर पुत्र है, जिसकी कहानी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी। उसकी आंखों में सैनिक बनने का सपना केवल उसका व्यक्तिगत सपना नहीं, बल्कि राष्ट्र के गौरव का सपना है। वह करोड़ों बच्चों के लिए उदाहरण है कि देश के प्रति प्रेम और सम्मान बचपन से ही जीवन का सबसे बड़ा संस्कार होना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह नन्हा सिपाही केवल पंजाब का नहीं, बल्कि पूरे भारत का गौरव बन चुका है। उसकी देशभक्ति, निस्वार्थ सेवा और समर्पण की भावना हर भारतीय के हृदय में राष्ट्रप्रेम की नई ऊर्जा भरती है। श्रवण सिंह जैसे बच्चे ही भारत के भविष्य की असली ताकत हैं, जिनके कारण यह विश्वास और मजबूत होता है कि भारत की आत्मा आज भी देशभक्ति और बलिदान की भावना से ओतप्रोत है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div>  <strong>    *कांतिलाल मांडोत*</strong></div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 15:59:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>14-15 फरवरी को आज़मगढ़ में आयोजित होगा सरदार पटेल इंटर स्टेट वॉलीबॉल टूर्नामेंट-2026</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश)</strong>, 12 फरवरी 2026 पूर्वाचल एवं ग्रामीण भारत में युवाओं के कौशल विकास, खेल प्रतिभा संवर्धन, नवाचार तथा स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्यरत सामाजिक संस्था IDEA and Startup Purv द्वारा 14 एवं 15 फरवरी 2026 को "सरदार पटेल इंटर स्टेट वॉलीबॉल टूर्नामेंट-2026" का आयोजन केशव वि‌द्यापीठ इंटर कॉलेज परिसर, मऊकुतुबपुर, सगड़ी, आज़मगढ़ में किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">यह आयोजन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि युवाओं के समग्र विकास की एक व्यापक और चरणबद्ध पहल की शुरुआत है। संस्था की योजना इस क्षेत्र के आस-पास के गांवों से खेल संस्कृति विकसित करने, गांव</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169401/sardar-patel-inter-state-volleyball-tournament-2026-will-be-organized-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/1000580605.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश)</strong>, 12 फरवरी 2026 पूर्वाचल एवं ग्रामीण भारत में युवाओं के कौशल विकास, खेल प्रतिभा संवर्धन, नवाचार तथा स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्यरत सामाजिक संस्था IDEA and Startup Purv द्वारा 14 एवं 15 फरवरी 2026 को "सरदार पटेल इंटर स्टेट वॉलीबॉल टूर्नामेंट-2026" का आयोजन केशव वि‌द्यापीठ इंटर कॉलेज परिसर, मऊकुतुबपुर, सगड़ी, आज़मगढ़ में किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह आयोजन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि युवाओं के समग्र विकास की एक व्यापक और चरणबद्ध पहल की शुरुआत है। संस्था की योजना इस क्षेत्र के आस-पास के गांवों से खेल संस्कृति विकसित करने, गांव स्तर पर स्पोर्ट्स क्लब स्थापित करने तथा स्थानीय प्रतिभाओं को संगठित मंच प्रदान करने की है। इसके पश्चात इन्हीं युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, मार्गदर्शन, स्टार्टअप जागरूकता एवं उ‌द्यमिता कार्यक्रमों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर एवं रोजगार सृजक बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इस प्रकार गांव-गांव खेल संस्कृति से क्लब, क्लब से स्किल और स्किल से स्टार्टअप/उ‌द्यमिता तक एक सतत विकास श्रृंखला विकसित की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी क्रम में आज़मगढ़ जनपद के हरैया एवं अजमतगढ़ ब्लॉकों को प्रारंभिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां चरणबद्ध रूप से खेल, स्किलिंग और स्टार्टअप गतिविधियां संचालित की जाएंगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">टूर्नामेंट में उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली एवं चंडीगढ़ सहित विभिन्न राज्यों की प्रतिष्ठित टीमें भाग लेंगी। विजेता टीम को ₹51,000, उपविजेता को ₹31,000 तथा मैन ऑफ द सीरीज़ को ₹10,000 प्रदान किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त सर्वश्रेष्ठ अटैकर, सर्वश्रेष्ठ लिबेरो और सर्वश्रेष्ठ सेटर को ₹5,000-25,000 की विशेष पुरस्कार राशि दी जाएगी। दर्शकों के लिए QR कोड आधारित सहभागिता प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी, जिसमें तीन भाग्यशाली विजेताओं को आकर्षक नगद पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संस्था के संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. ओंकार राय, पूर्व महानिदेशक, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI): पूर्व विकास आयुक्त (SEZ IT/TeS); तथा पर्व कार्यकारी अध्यक्ष, स्टार्टअप ओडिशा ने कहा, "यह पहल केवल एक खेल आयोजन नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रतिभा पहचान, संरचित प्रशिक्षण और दीर्घकालिक खिलाड़ी विकास का प्रयास है। हमारा उद्देश्य खेल को आधार बनाकर युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित करना तथा उन्हें कौशल और स्टार्टअप अवसरों से जोडना है</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Featured</category>
                                            <category>खेल मनोरंजन</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 20:06:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Railway News: दिवाली पर रेल यात्रियों को बड़ा तोहफा, राजस्थान से हरियाणा-पंजाब तक चलेगी स्पेशल ट्रेनें</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Railway News: </strong>दिवाली पर रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। हरियाणा ने त्यौहारी सीजन पर अतिरिक्त भीड़- भाड़ और यात्रियों के सफर को आरामदायक बनाने के उद्देश्य से भारतीय रेलवे द्वारा स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इसी कड़ी में राजस्थान के श्रीगंगानगर से हरियाणा और पंजाब के रास्ते 2 साप्ताहिक स्पेशल ट्रेनें चलाई गई है। </p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, इन ट्रेनों के संचालन से हरियाणा और पंजाब में रहने वाले UP और बिहार के प्रवासियों के लिए दिपावली और छठ पर्व पर घर पहुंचना आसान हो जाएगा। Railway News</p>
<p><strong>स्पेशल ट्रेन</strong></p>
<p>जानकारी के मुताबिक, ट्रेन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/157650/railway-news-big-gift-to-railway-passengers-on-diwali-special"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/latest-news---2025-10-18t181012.604.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Railway News: </strong>दिवाली पर रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। हरियाणा ने त्यौहारी सीजन पर अतिरिक्त भीड़- भाड़ और यात्रियों के सफर को आरामदायक बनाने के उद्देश्य से भारतीय रेलवे द्वारा स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इसी कड़ी में राजस्थान के श्रीगंगानगर से हरियाणा और पंजाब के रास्ते 2 साप्ताहिक स्पेशल ट्रेनें चलाई गई है। </p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, इन ट्रेनों के संचालन से हरियाणा और पंजाब में रहने वाले UP और बिहार के प्रवासियों के लिए दिपावली और छठ पर्व पर घर पहुंचना आसान हो जाएगा। Railway News</p>
<p><strong>स्पेशल ट्रेन</strong></p>
<p>जानकारी के मुताबिक, ट्रेन नंबर 04731, श्रीगंगानगर- समस्तीपुर साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन 19 अक्टूबर से 2 नवंबर तक प्रत्येक रविवार को श्रीगंगानगर से 13.25 बजे रवाना होकर अगले दिन रात 11 बजे समस्तीपुर पहुंचेगी। इसी तरह वापसी में ट्रेन नंबर 04732, समस्तीपुर-  श्रीगंगानगर 21 अक्टूबर से 4 नवंबर तक समस्तीपुर से प्रत्येक मंगलवार को 1 बजे रवाना होकर अगले दिन 12.20 बजे श्रीगंगानगर पहुंचेगी। Railway News</p>
<p><strong>ठहराव</strong></p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, बीच रास्ते यह ट्रेन दोनों दिशाओं में सादुलशहर, हनुमानगढ, संगरिया, मंडी डबवाली, रामां, सिरसा, मंडी आदमपुर, हिसार, हांसी, रोहतक, दिल्ली, गाजियाबाद, मुरादाबाद, बरेली, सीतापुर, बुढ़वल, गोंडा, बस्ती, गोरखपुर, देवरिया सदर, सीवान, छपरा, सोनपुर, हाजीपुर व मुजफ्फरपुर स्टेशनों पर ठहराव करेगी। इस ट्रेन में 2 थर्ड एसी, 4 द्वितीय शयनयान, 12 साधारण श्रेणी व 2 गार्ड डिब्बों सहित कुल डिब्बों की संख्या 20 होगी। Railway News</p>
<p><strong>शेड्यूल</strong></p>
<p>जानकारी के मुताबिक, ट्रेन नंबर 04729, श्रीगंगानगर- गोरखपुर साप्ताहिक स्पेशल रेलसेवा 23 व 30 अक्टूबर को श्रीगंगानगर से प्रत्येक वीरवार को 13.25 बजे रवाना होकर अगले दिन 16.30 बजे गोरखपुर पहुंचेगी। इसी तरह वापसी में ट्रेन नंबर 04730, गोरखपुर- श्रीगंगानगर साप्ताहिक स्पेशल रेलसेवा 24 व 31 अक्टूबर को गोरखपुर से प्रत्येक शुक्रवार को 19.30 बजे रवाना होकर तीसरे दिन 02.45 बजे श्रीगंगानगर पहुंचेगी। Railway News</p>
<p><strong>ठहराव</strong></p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, बीच रास्ते यह ट्रेन दोनों दिशाओं में सादुलशहर, हनुमानगढ, संगरिया, मंडी डबवाली, रामां, सिरसा, मंडी आदमपुर, हिसार, हांसी, रोहतक, दिल्ली, गाजियाबाद, मुरादाबाद, बरेली, सीतापुर, बुढ़वल, गोंडा, बलरामपुर, बढ़नी व सिद्धार्थनगर स्टेशनों पर ठहराव करेगी। इस ट्रेन में 2 थर्ड एसी, 4 द्वितीय शयनयान, 12 साधारण श्रेणी व 2 गार्ड डिब्बों सहित कुल डिब्बों की संख्या 20 होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/157650/railway-news-big-gift-to-railway-passengers-on-diwali-special</link>
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                <pubDate>Sat, 18 Oct 2025 18:10:24 +0530</pubDate>
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