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                <title>Swatantra Bharat - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>संपादकीय पेज के लिए आलेख </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>अंतर्राष्ट्रीय दबाव बेरोजगारी असमानता से जूझती आज़ादी ! </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इन दिनों देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ का जशन मना रहा है। हुक्मरानों के आह्वान पर देश में घर घर तिरंगा फहराया गया । राजपथ से लेकर जनपथ तक रोशनी की झालर जगमगा रही हैं लेकिन इस खुशहाल भारत के पीछे एक और हकीकत भी छिपी है एक ओर अमेरिका का टेरिफ है चीन की दादागिरी है पाकिस्तान की साजिशें है और  बेरोजगारी, गरीबी, भ्रष्टाचार, सामाजिक असमानता व सस्ते सुलभ न्याय से महरूम हिंदुस्तान, जिसमें आज भी  भूख है, बेगार करने और अन्याय सहने की मजबूरी है, पूंजीवाद के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185258/article-for-editorial-page"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img_20260727_151239-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>अंतर्राष्ट्रीय दबाव बेरोजगारी असमानता से जूझती आज़ादी ! </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन दिनों देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ का जशन मना रहा है। हुक्मरानों के आह्वान पर देश में घर घर तिरंगा फहराया गया । राजपथ से लेकर जनपथ तक रोशनी की झालर जगमगा रही हैं लेकिन इस खुशहाल भारत के पीछे एक और हकीकत भी छिपी है एक ओर अमेरिका का टेरिफ है चीन की दादागिरी है पाकिस्तान की साजिशें है और  बेरोजगारी, गरीबी, भ्रष्टाचार, सामाजिक असमानता व सस्ते सुलभ न्याय से महरूम हिंदुस्तान, जिसमें आज भी  भूख है, बेगार करने और अन्याय सहने की मजबूरी है, पूंजीवाद के हाथों में जकड़ती लोकतांत्रिक व्यवस्था है इन सबसे इतर नारे हैं उम्मीद हैं और इनके बीच बेरोजगारी महंगाई भ्रष्टाचार से कराहता आम आदमी और नशे अभद्रता रीलबाजी में फंसा जेनजी युवा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बेरोजगारी </div>
<div style="text-align:justify;">हालिया आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत में बेरोजगारी दर लगभग 5.5% है, जो वैश्विक औसत (4.9%) के आसपास और कई प्रमुख जी-20 अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में स्थिर स्थिति में है, हालांकि युवाओं के बीच यह दर तुलनात्मक रूप से अधिक बनी हुई है।आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के अनुसार देश में कुल बेरोजगारी दर स्थिस्थिर है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र की दर लगभग 5.1% और शहरी क्षेत्र की दर लगभग 6.4% से 6.6% के बीच दर्ज की गई है।युवा बेरोजगारी की समस्या चुनौती बनकठभारत में 15 से 29 आयु वर्ग के युवाओं में बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से अधिक (लगभग 15% से 16% के बीच) है, जो कौशल अंतराल और तकनीक-आधारित बदलावों को दर्शाती है। वैश्विक और भारतीय बाजारों में अनौपचारिक रोजगार और गुणवत्तापूर्ण पूर्णकालिक नौकरियों की उपलब्धता एक बड़ी चिंता बनी हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> गरीबी की अंतहीन समस्या </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में आज भी गरीबी की समस्या विकराल बनी हुई है। भारत में 20 करोड़ से भी ज्यादा लोग ऐसे हैं, जो गरीबी रेखा से नीचे हैं और काफी मुश्किल से अपना जीवन यापन कर रहे हैं। गरीबी से जुड़े कई ऐसे आंकड़े हैं, जो वाकई डराने वाले हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, भारत में अभी भी लगभग 23.4 करोड़ लोग गरीबी के स्तर पर जीवन जीने को मजबूर हैं। यह संख्या इस बात पर निर्भर करती है कि गरीबी को मापने के लिए किस मानक या पैमाने का उपयोग किया जा रहा है। बहुआयामी गरीबी सूचकांक के संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर जैसे संकेतकों के आधार पर भारत में लगभग 23.4 करोड़ लोग घोर या बहुआयामी गरीबी में जी रहे हैं, जो दुनिया में सबसे अधिक है।विश्व बैंक के अत्यधिक गरीबी के आंकड़े बता रहे हैं कि विश्व बैंक के मानकों ($2.15 प्रतिदिन आय) के अनुसार, भारत में अत्यधिक गरीबी में जीने वाले लोगों की संख्या घटकर लगभग 7.5 करोड़ (75 मिलियन) रह गई है। पिछले एक दशक में लगभग 26.9 से 27 करोड़ लोग इस अत्यधिक गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। यदि उच्च स्तर यानी लगभग $4.20 प्रतिदिन के मानक को देखा जाए, तो भारत की लगभग 23.9% आबादी (करीब 34.2 करोड़ लोग) आर्थिक सुरक्षा के उस दायरे से नीचे आती है।</div>
<div style="text-align:justify;">उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत में कुल 21.92 फीसदी लोग गरीबी की रेखा से नीचे अपना जीवन यापन कर रहे हैं।अगर इनकी संख्या की बात करें तो ये संख्या है 2697.83 लाख यानी 26 करोड़ 97 लाख गरीब हैं, वहीं, इनमें ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा गरीबी होती हैं, क्योंकि ग्रामीण इलाकों में गरीबी का प्रतिशत 25.70 है जबकि शहरी क्षेत्र में यह प्रतिशत 13.70 फीसदी है। वहीं, कुल गरीबों में भी 21 करोड़ के करीब गरीब सिर्फ ग्रामीण इलाकों में रहते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में 5 करोड़ गरीब लोग रहते हैं. यानी देश में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों का बड़ा हिस्सा गांव में रहने वाले हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अगर राज्य के हिसाब से देखें तो छोटे राज्यों में हाल ज्यादा बुरा है. जैसे दादरा और नागर हवेली में 39.31 फीसदी, झारखंड में 39.96 फीसदी, ओडिशा में 32. 59 फीसदी गरीब लोग रहते हैं. वहीं, उत्तरप्रदेश में करीब 29 और बिहार में करीब 33 फीसदी लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">   भुखमरी </div>
<div style="text-align:justify;">नवीनतम ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2025 रिपोर्ट के अनुसार, कुल 123 देशों की सूची में भारत को 102वां स्थान मिला है। इस सूचकांक में भारत का कुल स्कोर 25.8 है, जो देश में भूख और कुपोषण की स्थिति को 'गंभीर' श्रेणी में रखता है। 123 देशों की पड़ताल में भारत का स्थान 102 वां है इस के अनुसार 25.8श्रेणी गंभीर प्रमुख स्वास्थ्य व पोषण 12.0%बाल बौनापन उम्र के हिसाब से कम लंबाई 32.9%बाल कमज़ोरी लंबाई के हिसाब से कम वजन 18.7% रिपोर्ट में दूसरी सबसे अधिक बाल मृत्यु दर 2.8% है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> भुखमरी सूचकांक वर्ष 2020 में भारत 94वें स्थान पर था।भूख और कुपोषण पर नजर रखने वाली वैश्विक भुखमरी सूचकांक की वेबसाइट के अनुसार चीन, ब्राजील और कुवैत सहित अठारह देशों ने पांच से कम के जीएचआई स्कोर के साथ अग्रिम पंक्ति में है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्ष 2020 में भारत 107 देशों में 94वें स्थान पर था। अब 116 देशों में यह 101वें स्थान पर आ गया है। जीएचआई स्कोर की गणना चार संकेतकों पर की जाती है, जिनमें अल्पपोषण, कुपोषण, बच्चों की वृद्धि दर और बाल मृत्यु दर शामिल हैं।रिपोर्ट के अनुसार, पड़ोसी देश जैसे नेपाल (76), बांग्लादेश (76), म्यांमार (71) और पाकिस्तान (92) भी भुखमरी को लेकर चिंताजनक स्थिति में हैं, लेकिन भारत की तुलना में अपने नागरिकों को भोजन उपलब्ध कराने को लेकर इन देशों ने बेहतर प्रदर्शन किया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> आंकड़ों के अनुसार, भारत में में संयुक्त राष्ट्र की अनुमानित गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले 8.3 करोड़ लोग हैं।दुनिया की गरीब जनता का सबसे ज्यादा हिस्सा, 12.2 फीसदी भाग भारत और 12.2 फीसदी नाइजीरिया में है।लेकिन नाइजीरिया में 8,30,05,482 गरीबी रेखा के नीचे हैं जबकि भारत में यह संख्या 8,30,68,597 है।इन हालात में गरीबी को काबू करने की कोई सूरत अभी दूर तक दिखाई नही दे रही है। </div>
<div style="text-align:justify;">कुपोषण साल 2020 की विश्व खाद्य सुरक्षा की रिपोर्ट के अनुसार भारत में उस समय 18.92 करोड़ लोग कुपोषित थे।साल 2021 में ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट में भारत के 27.5 अंक हैं जो कि बहुत ही खराब स्थिति को दर्शाती है।एक वैश्विक पत्रिका द्वारा हाल ही में जारी एक रिपोर्ट कहती है कि 10 में से 7 भारतीय पौष्टिक आहार का खर्च नहीं उठा पाते हैं।एक ओर भुखमरी, दूसरी ओर 10.4 करोड़ टन अनाज सरकारी गोदामों में सड़ने के लिए पड़ा था।</div>
<div style="text-align:justify;">   भ्रष्टाचार </div>
<div style="text-align:justify;">भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक 2025 में भारत 182 देशों में 91वें स्थान पर है। भारत का कुल स्कोर 39 (100 में से) है, जो पिछले वर्ष (2024 में 96वीं रैंक) की तुलना में पाँच स्थानों का सुधार दर्शाता है। यह रिपोर्ट ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी की जाती है।डेनमार्क, फिनलैंड और सिंगापुर सबसे कम भ्रष्ट देशों में शामिल हैं। भारत का प्रदर्शन (101रैंक)पाकिस्तान (136वीं रैंक), श्रीलंका (107वीं रैंक), और नेपाल (109वीं रैंक) से बेहतर है, लेकिन चीन (76वीं रैंक) और भूटान (18वीं रैंक) से पीछे है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जबकि भ्रष्टाचार अवधारणा सूचकांक 2021 में 180 देशों की सूची में भारत को 85वां स्थान मिला था ।ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की ओर से जारी एक रिपोर्ट के अनुसार पिछली बार के मुकाबले भारत की रैंकिंग एक स्थान का सुधार हुआ है। हालांकि रिपोर्ट में भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए गए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सार्वजनिक क्षेत्र के भ्रष्टाचार के कथित स्तरों के आधार पर 180 देशों और क्षेत्रों की रैंकिंग की सूची तैयार की जाती है।इस रैंकिंग में सौ में से 40अंक हासिल कर भारत ने 85वां स्थान दर्ज किया है। यह हालात देश में व्याप्त भ्रष्टाचार को बयान करते हैं।देश के तमाम सरकारी विभागों में बिना रिशवत कोई काम होना टेड़ी खीर है। </div>
<div style="text-align:justify;">   गरीब अमीर के बीच खाई </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विश्व असमानता रिपोर्ट 2026 (तीसरा संस्करण) पेरिस स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के द्वारा जारी की गई है। यह रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के शीर्ष 10% सबसे अमीर लोगों के पास वैश्विक संपत्ति का तीन-चौथाई (लगभग 75%) हिस्सा है, जबकि सबसे निचले 50% हिस्से के पास केवल 2% संपत्ति है।भारत में शीर्ष 10% लोगों के पास राष्ट्रीय आय का 58% हिस्सा है, जबकि निचले 50% लोगों को केवल 15% ही मिलता है।देश के शीर्ष 1% अमीरों के पास कुल संपत्ति का लगभग 40% हिस्सा है, और शीर्ष 10% के पास करीब 65% संपत्ति है।भारत में केवल 15.7% महिलाएं नौकरी कर रही हैं, और कुल श्रम आय में उनका हिस्सा महज 20% के आसपास है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में असमानता गहराई से जड़ें जमा चुकी है, जहाँ शीर्ष 10% राष्ट्रीय आय का 58% हिस्सा अर्जित करते हैं और शीर्ष 1% के पास देश की कुल संपत्ति का 40% हिस्सा है। इसे महिला श्रम शक्ति भागीदारी दर के 15.7% पर स्थिर बने रहने से और बढ़ावा मिलता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जलवायु असमानता के लिए सबसे धनी 10% लोग निजी पूंजी से होने वाले उत्सर्जन के 77% के लिये उत्तरदायी हैं; केवल शीर्ष 1% अकेले 41% योगदान करते हैं, जो असमान ज़िम्मेदारी और जोखिम को दर्शाता है।</div>
<div style="text-align:justify;">   न्याय बना अन्याय</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश में अदालतों में न्याय के लिए लम्बी लाइन लगीं है अगली पेशी अगले साल के चलते लाखों की संख्या में वादी व पीड़ित तारीख पर चक्कर काटते हुए दुनिया से चले जाते हैं पर न्याय नहीं मिलता। स्थिति यह है कि देशभर की अदालतों में निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कुल 5.64 करोड़ से अधिक मुकदमे लंबित (पेंडिंग) हैं।अदालत के स्तर पर लंबित मामलों का विवरणसुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च अदालत): लगभग 96,000 से अधिक केस पेंडिंग हैं।हाई कोर्ट (उच्च न्यायालय): देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में लगभग 63.76 लाख मामले पेंडिंग हैं।जिला और अधीनस्थ अदालतें (निचली अदालतें): कुल पेंडिंग मामलों का सबसे बड़ा हिस्सा यानी करीब 4.98 करोड़ से अधिक मामले निचली अदालतों में अटके हैं, जो कुल लंबित मामलों का लगभग 85% से अधिक है।</div>
<div style="text-align:justify;">साइबर अपराध </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश में अपराध की स्थिति भी बदतर है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अंतिम उपलब्ध आंकड़े बताते हैं राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की नवीनतम "क्राइम इन इंडिया" रिपोर्ट के अनुसार, पारंपरिक शारीरिक और हिंसक अपराधों में मामूली कमी दर्ज की गई है, जबकि डिजिटल व वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। देश में समग्र अपराध दर घटकर लगभग 418.9 प्रति लाख जनसंख्या पर आ गई है। विभिन्न डिजिटल और ऑनलाइन धोखाधड़ी में लगभग 17% से 18% की वृद्धि दर्ज की गई है। कुल साइबर मामलों में से लगभग 72% से अधिक का उद्देश्य वित्तीय ठगी रहा है महिलाओं के विरुद्ध मामलों में आंशिक (लगभग 1.5%) कमी आई है, जबकि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में लगभग 7.8% की वृद्धि देखी गई है। हत्या के मामलों में लगभग 2.4% की गिरावट दर्ज की गई है, हालांकि अपहरण और अन्य विवादित मामलों की संख्या में क्षेत्रीय भिन्नता बनी हुई है। वित्तीय गबन और धोखाधड़ी से जुड़े आर्थिक अपराधों में करीब 4.6% की वृद्धि हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय चरित्र में गिरावट </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीयों के राष्ट्रीय चरित्र में गिरावट के प्रमुख लक्षणों में अनियंत्रित भ्रष्टाचार, सार्वजनिक संपत्ति के प्रति लापरवाही, नागरिक अनुशासन का अभाव और राष्ट्रहित की तुलना में व्यक्तिगत स्वार्थ को प्राथमिकता देना शामिल है। समाज में नैतिक मूल्यों और सहिष्णुता की कमी भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कभी भारतीय लोगों का राष्ट्रीय चरित्र विविधता में एकता, सहिष्णुता, आतिथ्य-सत्कार, परिवार के प्रति अटूट जुड़ाव और कठिन परिस्थितियों में भी उच्च सहनशक्ति (लचीलेपन) पर आधारित है। यहाँ के समाज में धर्म, आध्यात्मिकता और सामूहिक जीवन की भावना गहराई तक समाई हुई है।लेकिन अब स्थिति भिन्न हो चली है। समाज में नैतिक और सामाजिक पतन की शुरुआत हो गई है। भ्रष्टाचार अब अपवाद नहीं बल्कि एक सामान्य और स्वीकृत बात बन गई है। लोग अपने अधिकारों के प्रति अत्यधिक जागरूक हैं, लेकिन अपने मूल कर्तव्यों को भूल रहे हैं। विभिन्न समूहों के बीच सहनशीलता घट रही है और असहिष्णुता बढ़ रही है। 'मेरा क्या फायदा' की सोच ने सामूहिक कल्याण और देशभक्ति की भावना को पीछे छोड़ दिया है।सरकारी संपत्तियों, पार्कों और धरोहरों को गंदा करना या नुकसान पहुँचाना आम हो गया है। यातायात नियमों और सामान्य कानूनों का पालन न करने को शान की बात समझा जाता है। अपराध या दुर्घटना के समय मदद करने के बजाय लोग वीडियो बनाने में व्यस्त रहते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में राजनीतिक दलों की आपसी प्रतिद्वंद्विता अब इतना बढ़ गया है कि पिछले एक दशक में देश की सबसे बड़ी पंचायत संसद में सबसे कम समय का उपयोग किया जाता है विपक्ष संसद को अखाड़ा बनाने पर तुला है और सत्ता धारी विपक्ष के साथ सूक्ष्मता आम सहमति बनाने में नाकाम रहे हैं। देश ने नीट पेपर लीक के मुद्दे पर हुए प्रदर्शन में जैनजी के भीतर आक्रोश को देखा वहीं जैनजी के कंधे का इस्तेमाल करने की राजनीति को भी देखा वहीं आंदोलन की आड़ में अराजकता अभद्रता असंयमित गालीबाजी को भी सहन किया। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 17:17:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>स्वतंत्र भारत के इतिहास में चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा पर सबसे बड़ा संकट</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारतवर्ष में दुनिया की सबसे जटिल समझी जाने वाली चुनावी प्रक्रिया को अपनाने व इसे पूरा कराने को लेकर जिस केंद्रीय चुनाव आयोग की पीठ पूरी दुनिया थपथपाया करती थी व दुनिया के विभिन्न देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडल व चुनाव विशेषज्ञ जिस भारतीय चुनाव संचालन को देखने व समझने के लिये अब भी भारत आते रहते हैं वही चुनाव व चुनाव आयोग इन दिनों विपक्षी दलों के अति गंभीर आरोपों से जूझ रहा है। चुनाव आयोग व इस तरह के कई अन्य केंद्रीय संस्थानों पर सत्ता का पक्षपात करने के आरोप तो पहले भी लगते</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163507/the-biggest-crisis-on-the-reputation-of-the-election-commission"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/vote-chor.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारतवर्ष में दुनिया की सबसे जटिल समझी जाने वाली चुनावी प्रक्रिया को अपनाने व इसे पूरा कराने को लेकर जिस केंद्रीय चुनाव आयोग की पीठ पूरी दुनिया थपथपाया करती थी व दुनिया के विभिन्न देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडल व चुनाव विशेषज्ञ जिस भारतीय चुनाव संचालन को देखने व समझने के लिये अब भी भारत आते रहते हैं वही चुनाव व चुनाव आयोग इन दिनों विपक्षी दलों के अति गंभीर आरोपों से जूझ रहा है। चुनाव आयोग व इस तरह के कई अन्य केंद्रीय संस्थानों पर सत्ता का पक्षपात करने के आरोप तो पहले भी लगते रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परन्तु वर्तमान चुनाव आयोग जिस तरह सत्ता को फ़ायदा पहुँचाने वाले नए नए चुनावी नियम बना रहा है,विपक्ष की प्रमाण सहित दी जाने वाली शिकयतों की अनसुनी कर रहा है, सत्ता द्वारा चुनाव आचार संहिता की धज्जियाँ उड़ाने के बावजूद आँखें मूंदे बैठा रहता है,और अब एस आई आर के बहाने कथित तौर पर जहाँ करोड़ों फ़र्ज़ी मतों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है वहीँ संभावित रूप से विपक्ष की ओर जाने वाले मतों को चिन्हित कर उन्हें किसी न किसी बहाने से मतदाता सूची से काटने का काम किया जा रहा है। यानी स्पष्ट रूप से लोकततंत्र में लोक के मताधिकार पर 'डाका ' डाला जा रहा है।        </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वैसे तो पूरा विपक्ष ही चुनाव आयोग को केवल संदेह नहीं बल्कि सत्ता से मिलकर संविधान के साथ विश्वासघात किये जाने की दृष्टि से देख रहा है। लोक सभा व राज्य सभा के सर्वोच्च सदनों में चुनाव आयोग को निशाना बनाया जा रहा है। परन्तु नेता विपक्ष राहुल गाँधी ने तो चुनाव आयोग द्वारा की और करायी जाने वाली धांधली पर तो बाक़ायदा 'शोध' कर डाला है। और वे अपने इस चुनाव धांधली सम्बन्धी 'शोध परिणाम' को प्रेस कॉन्फ़्रेंस में प्रदर्शित करने से लेकर जनता जनार्दन के बीच सड़कों व गलियों तक पहुँच रहे हैं। इस संबंध वे अब तक 4 प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर 'वोट चोरी ' के पूरे सबूत पेश कर चुके हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त वे अगस्त-सितंबर 2025 के बीच बिहार में 16 दिनों की 1,300 किमी लंबी वोटर अधिकार यात्रा भी SIR के विरुद्ध निकाल चुके हैं। इसके अलावा 200 से अधिक सांसदों व विधायकों के साथ वे 11 अगस्त 2025 को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त मुख्यालय तक एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन रुपी पैदल मार्च भी कर चुके हैं। एक ओर तो राहुल चुनाव आयोग द्वारा उपलब्ध कराये गये डेटा के अनुसार ही आयोग द्वारा बरती गयी अनियमितताओं संबंधी साक्ष्य पेश करते हैं तो दूसरी ओर  चुनाव आयोग कभी इन आरोपों को "बेबुनियाद" बता कर अपना पल्ला झाड़ लेता है तो कभी उल्टे राहुल से ही शपथ-पत्र मांगने लगता है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परन्तु लगता है कि राहुल गांधी और उनकी कांग्रेस पार्टी ने तो गोया चुनाव आयोग को पूरी तरह बेनक़ाब करने का संकल्प ही कर लिया है। गत 14 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस ने एक विशाल रैली आयोजित की। "वोट चोर, गद्दी छोड़" के शीर्षक से किये गये इस आयोजन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने देशभर से लाखों कार्यकर्ता जुटाये। इस रैली का भी मुख्य उद्देश्य हरियाणा, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में हाल के विधानसभा चुनावों में कथित "वोट चोरी" और मतदाता सूची में हेराफेरी के आरोप लगाना था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस विशाल रैली में भी कांग्रेस ने भाजपा और चुनाव आयोग पर मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाते हुए लोकतंत्र तथा संविधान की रक्षा का संकल्प लिया। इस तरह की किसी रैली में यह पहला मौक़ा था जब कि सीधे तौर पर सबसे तीखा हमला मुख्य चुनाव आयुक्त और उसके दो आयुक्तों पर बोला गया। सांसद प्रियंका गाँधी ने एक बार और राहुल गांधी ने तो दो बार अपने भाषण में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी का नाम लेकर उनपर सीधे निशाना साधा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन नेताओं ने उनका नाम लेते हुये आरोप लगाया कि 'चुनाव आयोग भाजपा सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है, वोट चोरी को संरक्षण दे रहा है तथा आयोग निष्पक्ष नहीं है। ये लोग नहीं भूलें कि वे देश के चुनाव आयुक्त हैं, नरेंद्र मोदी के नहीं।"राहुल ने यह भी कहा कि 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव आयुक्तों को क़ानूनी सुरक्षा (इम्यूनिटी) देने वाला क़ानून बदला है, ताकि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न हो सके। कांग्रेस सत्ता में आने पर इस क़ानून को बदलेगी और आयुक्तों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेगी। यहाँ भी राहुल ने दोहराया कि "चुनाव आयोग असत्य के साथ खड़ा नज़र आ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि कैसे हरियाणा में चुनाव चोरी हुआ, किस  तरह  कर्नाटक में लाखों वोट डिलीट हुए और महाराष्ट्र में फ़र्ज़ी वोट जोड़े गए परन्तु चुनाव आयोग ने कोई जवाब नहीं दिया।" यहाँ भी राहुल ने चुनावी धांधलियों के कई और उदाहरण पेश किये। यही नहीं बल्कि राहुल गांधी द्वारा देश भर से चुनाव आयोग के विरुद्ध लगभग 6 करोड़ हस्ताक्षर कराए गए हैं। यह अभियान कथित वोट चोरी के आरोपों के खिलाफ चलाया गया था, और इन हस्ताक्षरों को राष्ट्रपति को सौंपने की योजना है। इन 6 करोड़ हस्ताक्षर को भी 14 दिसंबर 2025 को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित 'वोट चोर गद्दी छोड़' रैली के दौरान प्रदर्शित किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी रैली में कांग्रेस के कई प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया को हर क़दम पर संदिग्ध बताते हुये संस्थाओं पर दबाव डालने का आरोप लगाया जबकि कुछ वक्ताओं ने चुनाव आयोग को भाजपा की कठपुतली बताते हुये आयोग पर सबूतों की जांच नहीं करने का भी आरोप लगाया। कुछ नेताओं का मत था कि देश में निष्पक्ष अंपायर की कमी है। जबकि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने तो मुख्य रूप से भाजपा पर "वोट चोरी" करके सत्ता में आने का आरोप लगाया और चुनाव आयोग पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसमें कोई संदेह नहीं कि यह रैली कांग्रेस की ओर से चुनावी अनियमितताओं के ख़िलाफ़ अब तक का एक सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन थी, जिसमें चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सार्वजनिक रूप से खुलकर गंभीर सवाल उठाए गए। साथ ही यह भी सच है कि चुनाव आयोग पर प्रमाण सहित लगने वाले  इसतरह के आरोपों और आयोग द्वारा इन आरोप को नज़र अंदाज़ करने से भी स्वतंत्र भारत के इतिहास में चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा यहाँ पर भी सबसे बड़ा संकट सामने आ खड़ा हुआ है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 17:02:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>आत्मरक्षा - सुरक्षा के लिए शिक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[<div>आत्मरक्षा स्वयं को, अपनी संपत्ति को या किसी अन्य को शारीरिक क्षति से बचाने का कार्य है। महिलाओं के जीवन में आत्मरक्षा की अहम भूमिका है। आत्मरक्षा एक ऐसा कौशल है जिसे प्रत्येक महिला को अपने और दूसरों के जीवन को दैनिक आधार पर या जब भी स्थिति की आवश्यकता हो, सुरक्षित बनाने के लिए हासिल करना चाहिए। महिलाएं अक्सर अपनी शारीरिक क्षमता के कारण इसका शिकार बनती हैं। आत्मरक्षा तकनीकें उन्हें उन स्थितियों पर नियंत्रण रखने में सक्षम बनाती हैं जिनमें वे मौखिक दुर्व्यवहार, शारीरिक हमले आदि का शिकार हो सकती हैं। ऐसी तकनीकें यह महसूस करने में आत्मविश्वास</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/140923/self-defense-%E2%80%93-education-for-safety"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/hindi-divas12.jpg" alt=""></a><br /><div>आत्मरक्षा स्वयं को, अपनी संपत्ति को या किसी अन्य को शारीरिक क्षति से बचाने का कार्य है। महिलाओं के जीवन में आत्मरक्षा की अहम भूमिका है। आत्मरक्षा एक ऐसा कौशल है जिसे प्रत्येक महिला को अपने और दूसरों के जीवन को दैनिक आधार पर या जब भी स्थिति की आवश्यकता हो, सुरक्षित बनाने के लिए हासिल करना चाहिए। महिलाएं अक्सर अपनी शारीरिक क्षमता के कारण इसका शिकार बनती हैं। आत्मरक्षा तकनीकें उन्हें उन स्थितियों पर नियंत्रण रखने में सक्षम बनाती हैं जिनमें वे मौखिक दुर्व्यवहार, शारीरिक हमले आदि का शिकार हो सकती हैं। ऐसी तकनीकें यह महसूस करने में आत्मविश्वास भी बढ़ाती हैं कि यदि कोई आपकी सीमाओं का सम्मान नहीं करता है, तो आपको उन्हें रोकना चाहिए। विशेषकर महिलाओं में अपराध बढ़ रहे हैं। और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कहां रहते हैं या काम करते हैं, आपको किसी हिंसक या घुसपैठिए अपराध का शिकार बनने का खतरा है। इससे निपटने का एक ही सही तरीका है, कुछ मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और आत्मरक्षा उपकरणों के साथ अपनी सुरक्षा करना। सबसे अधिक संभावना है, जब कोई व्यक्तिगत हमला होता है तो इसकी बहुत अधिक संभावना होती है कि पुलिस पास में खड़ी नहीं होगी और यह भी संभावना है कि पुलिस केवल क्षति होने के बाद ही इसमें शामिल हो सकती है। हर कोई सुरक्षित महसूस करने का हकदार है और आत्मरक्षा उपकरण प्रदान करती है।</div>
<div>जबकि अकादमिक शिक्षा पर इतना ध्यान दिया जाता है, किसी को आत्मरक्षा को बेकार या अनावश्यक नहीं मानना ​​चाहिए क्योंकि जैसे शैक्षणिक हमारे भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है, वैसे ही आत्मरक्षा हमारी सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। आत्मरक्षा शिक्षा अधिकांश लोग आत्मरक्षा को किसी हमलावर की कमर पर लात मारना या मुक्का मारना समझते हैं। लेकिन आत्मरक्षा का वास्तविक अर्थ किसी ऐसे व्यक्ति से लड़ने से बचने के लिए हर संभव प्रयास करना है जो आपको धमकी देता है या हमला करता है। आत्मरक्षा में केवल अपनी मुट्ठियों का नहीं बल्कि अपने सिर का उपयोग करना शामिल है। इस शिक्षा के लिए किसी आवश्यकता की आवश्यकता नहीं है या बहुत ही न्यूनतम आवश्यकता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके पास कोई पिछला अनुभव है या नहीं। इसमें कोई वर्दी, विदेशी शब्दावली, पारंपरिक अनुष्ठान या औपचारिकताएं नहीं हैं। यह सिर्फ व्यावहारिक और सरल जीवन रक्षक कौशल तकनीक है जिसके लिए न्यूनतम प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है। आत्मरक्षा शिक्षा केवल सशक्त महिलाओं के लिए नहीं है, यह सभी महिलाओं और सभी उम्र की महिलाओं के लिए है। इसे औपचारिक होने की आवश्यकता नहीं है. कोई भी इसे कहीं से भी प्राप्त कर सकता है, चाहे वह दोस्तों, रिश्तेदारों, परिवार, साहित्य आदि से हो। लेकिन केवल मूर्खतापूर्ण युक्तियों पर भरोसा करने के बजाय उचित ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव होना बेहतर है।</div>
<div>आत्मरक्षा शिक्षा के साधन कार्यशालाएँ: महिलाओं को सड़कों, ट्रेनों या यहाँ तक कि उनके घरों की सीमा में होने वाले हमलों के खिलाफ तैयार करने के लिए समय-समय पर महिलाओं के लिए आत्मरक्षा पर कार्यशालाएँ आयोजित की जाती हैं। ऐसी कार्यशालाएँ आम तौर पर गैर सरकारी संगठनों द्वारा आयोजित की जाती हैं और वे आपको सिखाती हैं कि किसी उपद्रव से कैसे निपटा जाए, खुद को हमलावर से कैसे बचाया जाए और उससे कैसे निपटा जाए। विशेष कार्यक्रम: हाई स्कूलों, कॉलेजों, सामुदायिक केंद्रों, महिला आश्रयों, व्यवसायों और अन्य संगठनों के लिए विशेष कार्यक्रम विकल्प उपलब्ध हैं। आत्मरक्षा कार्यक्रम विशेष रूप से विभिन्न स्थितियों में महिलाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। इनमें से अधिकांश स्कूलों या कॉलेजों में स्कूल के बाद की गतिविधि के रूप में, या कक्षा-समय के दौरान शारीरिक शिक्षा या यौन शिक्षा कक्षाओं के लिए एक विशेष पाठ्यक्रम घटक के रूप में पेश किए जाते हैं। ये कार्यक्रम अस्पतालों, व्यवसायों, सामुदायिक संगठनों और महिला केंद्रों को भी शिक्षा प्रदान कर सकते हैं। पाठ्यक्रम में व्याख्यान और व्यावहारिक आत्मरक्षा तकनीकें शामिल हैं व्यक्तिगत प्रशिक्षक: कुछ प्रशिक्षक आपके पास आकर व्यक्तिगत ध्यान देते हैं और एक कार्यक्रम अपनाते हैंअपनी आवश्यकताओं को पूरा करो। वे आपको बताते हैं और सिखाते हैं कि किसी हमले से कैसे बचना है, या जिस स्थिति में आप पर हमला होता है, उस स्थिति में कैसे मुकाबला करना है आदि। मार्शल आर्ट स्कूल: विभिन्न मार्शल आर्ट कक्षाओं में किकबॉक्सिंग, ताए-क्वोन-डो, कुंग फू, कराटे, क्राव मागा स्ट्रेचिंग, कंडीशनिंग और प्रभावी तकनीकों का संयोजन शामिल है जो आत्मविश्वास बढ़ाएंगे, तनाव कम करेंगे, ऊर्जा, फिटनेस, स्वास्थ्य को बढ़ावा देंगे और आपको सिखाएंगे।</div>
<div>आत्म सुरक्षा की एक बहुत ही व्यावहारिक प्रणाली। ऐसी कलाएँ न केवल शरीर और दिमाग दोनों को बेहतर बनाती हैं बल्कि यह आपको जीवन बचाने के कौशल से भी सशक्त बनाती हैं। इंटरनेट: इंटरनेट आत्मरक्षा की जानकारी का खजाना है। विभिन्न ऑनलाइन पाठ्यक्रम और स्व-सहायता मार्गदर्शिकाएँ आत्मरक्षा के लिए आवश्यक चीज़ें प्रदान करती हैं। कुछ आत्मरक्षा उपकरणों की खरीदारी भी कराते हैं और महिलाओं पर अपराध की रोकथाम और जागरूकता भी बढ़ाते हैं। उनमें से एक है <a href="http://www.selfdefence.in/">http://www.selfdefence.in/</a> किताबें, पत्रिकाएँ और अन्य साहित्य: विभिन्न प्रकार के प्रकाशन आत्म सुरक्षा के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करते हैं। मीडिया प्रपत्र: विभिन्न टीवी चैनल और रेडियो कार्यक्रम इस पहलू पर शिक्षा के एजेंट के रूप में कार्य करते हैं। कुछ डीवीडी, सीडी, सीडी-रोम आदि भी इस उद्देश्य में मदद करते हैं। आत्मरक्षा के तरीके आत्मरक्षा उपकरण: विभिन्न प्रकार के उपकरण दुकानों और ऑनलाइन उपलब्ध हैं जो बहुत उपयोगी हैं। महिलाएं तीखे स्प्रे, चाबियां, छाते आदि जैसे रक्षात्मक हथियार ले जा सकती हैं। ऐसे उपकरण मुख्य रूप से बचाव और भागने के लिए होते हैं, न कि लंबी लड़ाई में शामिल होने के लिए। काली मिर्च स्प्रे या स्टन गन जैसे आत्मरक्षा उत्पाद खरीदने का सकारात्मक कदम आपकी जागरूकता में सुधार करता है और आपकी आत्मविश्वास की छवि को बढ़ाता है। हथियार: कुछ देशों में, आत्मरक्षा के उद्देश्यों के लिए हथियार ले जाना कानूनी है। जबकि अन्य देशों में किसी को लाइसेंस की आवश्यकता हो सकती है या कुछ वस्तुओं को बिना लाइसेंस के ले जाना कानूनी हो सकता है। लेकिन बहुत सारे विवाद हैं क्योंकि इनका उपयोग हिंसक अपराध करने के लिए किया जा सकता है दिमाग की उपस्थिति: व्यक्ति को दिमाग की मौजूदगी की जरूरत है और घबराहट में नहीं फंसना चाहिए। इसके लिए कुछ सबसे आसान रणनीतियाँ हैं - कुछ कहना, चिल्लाना, लड़ना और महत्वपूर्ण बात यह है कि आपको आश्वस्त दिखना चाहिए, भले ही आपके पास कोई कार्य योजना और इसे लागू करने के लिए सही उपकरण न हों। सतर्क रहना आत्म-सुरक्षा की दिशा में पहला कदम है मार्शल आर्ट सीखना: आत्मरक्षा के लिए मार्शल आर्ट की कई शैलियों का अभ्यास किया जाता है।</div>
<div>इनमें से कुछ हैं किकबॉक्सिंग, ताए-क्वोन-डो, कुंग फू, कराटे, क्राव मागा आदि। जूडो में कई आत्मरक्षा तकनीकें हैं। कुछ शैलियाँ लगभग विशेष रूप से आत्मरक्षा के लिए प्रशिक्षित की जाती हैं, जबकि अन्य को आत्मरक्षा के लिए प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है। अधिक संपूर्ण आत्मरक्षा प्रशिक्षण न केवल सिखाता है कि हमले के खिलाफ शारीरिक रूप से कैसे बचाव किया जाए बल्कि इसमें व्यक्तिगत सुरक्षा युक्तियाँ और तकनीकें भी शामिल हैं जो जागरूकता बढ़ाती हैं और टकराव और संभावित खतरों से बचने की क्षमता में सुधार करती हैं। उपद्रवियों से निपटने के लिए बुनियादी बातें डी-एस्केलेशन: यह किसी संभावित हिंसक स्थिति को उसके आने से पहले शांत करने के लिए आवाज, स्वर और शारीरिक भाषा का उपयोग है। हमलावर हमेशा अजनबी नहीं होते जो अंधेरी गलियों से बाहर निकलते हैं। कोई परिचित आप पर हमला कर सकता है. यहीं पर एक और महत्वपूर्ण आत्मरक्षा कौशल काम आता है। इस कौशल को विशेषज्ञ डी-एस्केलेशन कहते हैं। ऐसी बातें कहना और करना जिससे आपके हमलावर को कोई खतरा न हो, आपको कुछ नियंत्रण मिल सकता है। दूर हो जाओ: आत्मरक्षा का सबसे सुरक्षित तरीका संभव होने पर भाग जाना है। सुरक्षा की वजह से दौड़ना अक्सर लड़ने के लिए अनुशंसित विकल्प होता है और क्योंकि यह पीड़ित को किसी भी कानूनी नतीजे से बचाता है जिसके परिणाम की संभावना हो सकती है।d पीड़ित लड़ाई जीत गया। सुधार: रोजमर्रा की वस्तुएं, जैसे बेसबॉल बैट या बॉडी स्प्रे, का उपयोग आत्मरक्षा के लिए तात्कालिक हथियार के रूप में भी किया जा सकता है, हालांकि, वे उद्देश्य-निर्मित हथियार के रूप में उतने प्रभावी नहीं हो सकते हैं। कुबोटन जैसे कुछ गैर-घातक हथियार भी रोजमर्रा की वस्तुओं जैसे कि चाबी की जंजीरों से मिलते जुलते बनाए गए हैं। समूह में यात्रा करें: रात में बाहर जाते समय समूह में यात्रा करें क्योंकि इससे शरारती तत्वों का ध्यान बहुत कम या बिल्कुल ही आकर्षित होता है। दूसरों को सूचित करें: डेट पर या दोस्तों के साथ जाते समय, किसी को बताएं कि आप कहां जा रहे हैं और कब लौटने की उम्मीद है। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 May 2024 21:17:34 +0530</pubDate>
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                <title>सीएचसी सोहावल में हेल्थ एटीएम कार्ड मशीन का हुआ लोकार्पण</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></p>
<p><strong>सोहावल, अयोध्या।</strong>सीएचसी सोहावल की मिली हेल्थ एटीएम मशीन का बीकापुर विधायक अमित सिंह चौहान ने शुभारंभ किया।समारोह पूर्वक हुए कार्यक्रम में मुख्य आतिथि बीकापुर विधायक का प्रभारी अबसार अंसारी ने माला पहनाकर स्वागत किया।एटीएम लोकार्पण के दौरान मौजूद क्षेत्र वासियों एवं मरीजों को संबोधित करते हुए विधायक अमित सिंह ने सरकार की नीतियों का बखान करते हुए कहा कि मौजूदा प्रदेश सरकार गांव गरीब की होने के कारण गांव गांव में ज्यादा सुविधा उपलब्ध कराने की मंशा उजागर करती है।छोटी बड़ी 37 बीमारियों की जांच के लिए एटीएम मशीन लग जाने से शहर एवं बड़े महंगे तथा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/128462/health-atm-card-machine-inaugurated-in-chc-sohawal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-04/whatsapp-image-2023-04-04-at-7.13.25-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></p>
<p><strong>सोहावल, अयोध्या।</strong>सीएचसी सोहावल की मिली हेल्थ एटीएम मशीन का बीकापुर विधायक अमित सिंह चौहान ने शुभारंभ किया।समारोह पूर्वक हुए कार्यक्रम में मुख्य आतिथि बीकापुर विधायक का प्रभारी अबसार अंसारी ने माला पहनाकर स्वागत किया।एटीएम लोकार्पण के दौरान मौजूद क्षेत्र वासियों एवं मरीजों को संबोधित करते हुए विधायक अमित सिंह ने सरकार की नीतियों का बखान करते हुए कहा कि मौजूदा प्रदेश सरकार गांव गरीब की होने के कारण गांव गांव में ज्यादा सुविधा उपलब्ध कराने की मंशा उजागर करती है।छोटी बड़ी 37 बीमारियों की जांच के लिए एटीएम मशीन लग जाने से शहर एवं बड़े महंगे तथा लंबी दूरी तय कर शहरों में नही जाना पड़ेगा।</p>
<p>जिससे छुटकारा दिलाते हुए सरकार ने एटीएम गारामीण क्षेत्र सभी सीएचसी केंद्रो पर एटीएम लगाकर जांच प्रक्रिया सहज कर दी है ।इस मौके वरिष्ठ भाजपा नेता सूर्य प्रसाद श्रीवास्तव नंद कुमार रमेश सिंह नानमून सीएचसी प्रभारी डा० अबसार अंसारी डा० फातिमाआमीर अतीक हर गोविंद विजय शुक्ला सहित स्वास्थय कर्मचारी मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>स्वास्थ्य-आरोग्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Apr 2023 18:03:47 +0530</pubDate>
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