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                <title>rashmi verma - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>अब कानपुर के खेतों, तालाबों में खिल रहे हैं मोती </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>खेत तालाब अब केवल सिंचाई और वर्षा जल संचयन तक सीमित नहीं रह गए हैं। कानपुर नगर के बिधनू विकासखंड स्थित ग्राम सम्भुआ में एक खेत तालाब में मोती उत्पादन और मत्स्य पालन का अभिनव प्रयोग किया जा रहा है।</div>
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<div style="text-align:justify;">लगभग 30 हजार सीपियों पर आधारित इस परियोजना में प्रति सीपी दो मोती तैयार किए जा रहे हैं। इनमें चयनित सीपियों में विशेष मोल्ड तकनीक के माध्यम से स्वस्तिक, भगवान गणेश, पुष्प, पत्तियों तथा अन्य कलात्मक आकृतियों वाले डिजाइनर पर्ल विकसित किए जा रहे हैं।</div>
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<div style="text-align:justify;">लगभग 18 से 20 लाख रुपये की लागत वाली इस परियोजना से तैयार होने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183735/now-pearls-are-blooming-in-the-fields-and-ponds-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1002109825.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>खेत तालाब अब केवल सिंचाई और वर्षा जल संचयन तक सीमित नहीं रह गए हैं। कानपुर नगर के बिधनू विकासखंड स्थित ग्राम सम्भुआ में एक खेत तालाब में मोती उत्पादन और मत्स्य पालन का अभिनव प्रयोग किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लगभग 30 हजार सीपियों पर आधारित इस परियोजना में प्रति सीपी दो मोती तैयार किए जा रहे हैं। इनमें चयनित सीपियों में विशेष मोल्ड तकनीक के माध्यम से स्वस्तिक, भगवान गणेश, पुष्प, पत्तियों तथा अन्य कलात्मक आकृतियों वाले डिजाइनर पर्ल विकसित किए जा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लगभग 18 से 20 लाख रुपये की लागत वाली इस परियोजना से तैयार होने वाले मोती करीब 50 लाख रुपये में बिकने का अनुमान है, जबकि मत्स्य पालन से प्रतिवर्ष लगभग चार लाख रुपये की अतिरिक्त आय होने की संभावना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने इस परियोजना का निरीक्षण कर अधिकारियों को इसे जनपद के अन्य खेत तालाब लाभार्थियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत भूमि संरक्षण अनुभाग द्वारा ग्राम सम्भुआ निवासी श्रीमती रश्मि वर्मा के खेत में 22 मीटर लंबा, 20 मीटर चौड़ा एवं तीन मीटर गहरा खेत तालाब निर्मित कराया गया है। योजना के तहत उन्हें खेत तालाब निर्माण पर 50 प्रतिशत (अधिकतम ₹52,500) का अनुदान डीबीटी के माध्यम से उपलब्ध कराया गया। कृषि विभाग एवं मणि एग्रो हब के सहयोग से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने तालाब में मोती की खेती शुरू की। वर्तमान में इस परियोजना को लगभग नौ माह पूरे हो चुके हैं तथा करीब 18 माह में मोती तैयार हो जाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस परियोजना की विशेषता यह है कि चयनित सीपियों में विशेष साँचे (मोल्ड) प्रत्यारोपित किए गए हैं, जिन पर सीपी प्राकृतिक रूप से मोती की परतें चढ़ाती है। इसी प्रक्रिया से स्वस्तिक, भगवान गणेश, पुष्प, पत्तियों तथा अन्य कलात्मक आकृतियों वाले डिजाइनर पर्ल तैयार किए जा रहे हैं। सामान्य गोल मोतियों की तुलना में ऐसे डिजाइनर पर्ल आभूषण एवं सजावटी बाजार में अधिक मांग वाले उत्पाद माने जाते हैं, जिससे बेहतर मूल्य मिलने की संभावना रहती है। वहीं सामान्य सीपियों में प्रति सीपी दो मोती तैयार किए जा रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता भी बढ़ रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">परियोजना के साथ मत्स्य पालन को भी जोड़ा गया है। रश्मि वर्मा ने बताया कि उनके दूसरे खेत तालाब में मत्स्य पालन किया जा रहा है और अब तक तीन बार मत्स्य उत्पादन किया जा चुका है। इससे प्रतिवर्ष लगभग चार लाख रुपये की अतिरिक्त आय होने की संभावना है। उन्होंने अन्य किसानों से भी खेत तालाबों का उपयोग केवल सिंचाई तक सीमित न रखकर मत्स्य पालन, मोती की खेती तथा अन्य आयवर्धक गतिविधियों से जोड़ने की अपील की।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 17:37:47 +0530</pubDate>
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                <title>गोण्डा की सीएमओ रश्मि वर्मा पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, सांसद-विधायक बेबस</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>गोण्डा।</strong> जिले की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर रश्मि वर्मा एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। उन पर भ्रष्टाचार, संवेदनहीनता और सत्ता के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगे हैं। प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता पंडित पंकज कुमार पाण्डेय ने साक्ष्यों के साथ करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार और सरकारी फंडों की बंदरबांट का खुलासा किया है। लेकिन शासन में उनकी कथित ‘मजबूत पकड़’ के चलते कोई कार्रवाई नहीं हो रही। सत्ताधारी दल के सांसद और विधायक भी उनकी शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद बेबस नजर आ रहे हैं, क्योंकि शासन स्तर पर इन शिकायतों को नजरअंदाज किया जा रहा है।</div>
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<div style="text-align:justify;">यह मामला</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/157178/serious-allegations-of-corruption-against-gonda-cmo-rashmi-verma-mps"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/img-20251012-wa0025.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>गोण्डा।</strong> जिले की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर रश्मि वर्मा एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। उन पर भ्रष्टाचार, संवेदनहीनता और सत्ता के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगे हैं। प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता पंडित पंकज कुमार पाण्डेय ने साक्ष्यों के साथ करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार और सरकारी फंडों की बंदरबांट का खुलासा किया है। लेकिन शासन में उनकी कथित ‘मजबूत पकड़’ के चलते कोई कार्रवाई नहीं हो रही। सत्ताधारी दल के सांसद और विधायक भी उनकी शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद बेबस नजर आ रहे हैं, क्योंकि शासन स्तर पर इन शिकायतों को नजरअंदाज किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह मामला गोण्डा ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की बदहाली को उजागर करता है। पाण्डेय ने दस्तावेजों और वीडियो के जरिए आरोप लगाया कि सीएमओ के कार्यकाल में दवाओं की खरीद में कमीशनबाजी, अवैध नर्सिंग होम्स को संरक्षण और भर्ती में रिश्वतखोरी का खेल चल रहा है। सितंबर 2025 में एक अवैध नर्सिंग होम में दो नवजातों की मौत के बाद वर्मा का एक वायरल वीडियो ने तूल पकड़ा, जिसमें वे कथित तौर पर संवेदनहीन बयान देती दिखीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसने जनता का गुस्सा भड़का दिया। समाजवादी पार्टी और पत्रकारों ने उनकी बर्खास्तगी की मांग की, लेकिन वर्मा ने इसे ‘एडिटेड वीडियो’ करार दिया। उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग पहले से ही बदहाली का शिकार है। ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी, दवाओं का अभाव और अवैध क्लीनिकों का जाल आम है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के फंडों का दुरुपयोग भी कोई नई बात नहीं। गोण्डा में सीएमओ की कथित मनमानी इसकी बानगी है। सवाल उठता है कि जब सांसद-विधायक लाचार हैं, तो आम जनता की सुनवाई कौन करेगा? पाण्डेय जैसे कार्यकर्ता सिस्टम से लड़ रहे हैं, लेकिन बिना उच्चस्तरीय जांच, जैसे सीबीआई या ईडी, के सुधार मुश्किल है। जनता का स्वास्थ्य भ्रष्टाचार का शिकार नहीं होना चाहिए। सरकार को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Oct 2025 16:08:42 +0530</pubDate>
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