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                <title>Increase in forest and wildlife - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>प्रदेश सरकार के संरक्षण व संवर्धन से ही प्रदेश के वन एवं वन्यजीवों में हुई बढ़ोत्तरी</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="adn ads">
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<div style="text-align:justify;"><strong> प्रयागराज - </strong>प्राकृतिक संसाधनांे में वनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। वन हमारे अतीत के गौरृव, संस्कृति, सभ्यता और विकास के प्रतीक है। वन प्राणदायिनी वायु व जीवों की उत्पत्ति में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करते है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुश नेतृत्व में प्रदेश में गत 08 वर्षाें में 242 करोड़ वृक्षारोपण किया गया और चालू वर्ष में भी 37.21 करोड़ से अधिक  वृक्षारोपण करते हुए प्रदेश की हरीतिमा व वनावरण में वृद्धि की गयी है। प्रदेश का भौगोलिक क्षेत्र 09 कृषि जलवायु क्षेत्रों (एग्रो क्लाईमेटिक जोन)-भाबर व तराई क्षेत्र, पश्चिमी मैदानी क्षेत्र, मध्य पश्चिमी मैदानी क्षेत्र, दक्षिण पश्चिमी</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156754/increase-in-forest-and-wildlife-of-the-state-only-due"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/hindi-divas4.jpg" alt=""></a><br /><div class="adn ads">
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<div style="text-align:justify;"><strong> प्रयागराज - </strong>प्राकृतिक संसाधनांे में वनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। वन हमारे अतीत के गौरृव, संस्कृति, सभ्यता और विकास के प्रतीक है। वन प्राणदायिनी वायु व जीवों की उत्पत्ति में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करते है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुश नेतृत्व में प्रदेश में गत 08 वर्षाें में 242 करोड़ वृक्षारोपण किया गया और चालू वर्ष में भी 37.21 करोड़ से अधिक  वृक्षारोपण करते हुए प्रदेश की हरीतिमा व वनावरण में वृद्धि की गयी है। प्रदेश का भौगोलिक क्षेत्र 09 कृषि जलवायु क्षेत्रों (एग्रो क्लाईमेटिक जोन)-भाबर व तराई क्षेत्र, पश्चिमी मैदानी क्षेत्र, मध्य पश्चिमी मैदानी क्षेत्र, दक्षिण पश्चिमी अर्ध शुष्क मैदानी क्षेत्र, केन्द्रीय मैदानी क्षेत्र, उत्तर पूर्वी मैदानी क्षेत्र, पूर्वी मैदानी क्षेत्र बुन्देलखण्ड क्षेत्र एवं विन्ध्य क्षेत्र में वर्गीकृत हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदेश में जलवायु व भौगोलिक विविधता के कारण ही  शीतकाल में स्थानीय तथा प्रवासी पक्षियों के मनमोहक झुण्ड प्रदेश की झीलों का मुख्य आकर्षण होते है। पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में पक्षियों का महत्वपूर्ण योगदान है। हमारे देश में लगभग 300 प्रजातियों के पक्षी तिब्बत, चीन यूरोप तथा साइबेरिया से हिमालय पर्वत पार कर उत्तर प्रदेश की मैदानी झीलों व नदियों में शीतकालीन प्रवास के लिए आते हैं। इनमें कुछ पक्षी 5000 कि.मी. की दूरी पार कर तथा 8500 मीटर की ऊँचाई तक उड़कर उत्तर प्रदेश में आते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">, शीशम, बीजासाल, खैर, बबूल, बॉस, नरकुल, बेत, खस  घास तथा दुर्लभ औषधीय जड़ी बूटियों बहुलता से मिलती हैं। फलदार पौधों जैसे बेल, ऑवला, नींबू व बेर की जंगली किस्मों की प्रचुरता उत्तर प्रदेश के वनों में है। प्रदेश में कृषि फसलों की लगभग 80 प्रजातियों की जंगली किस्में भी पहचानी गयी है। साल (शोरिया रोबस्टा) के घने वन, घास के मैदान शीशम (डलबर्जिया सिस्सू) की बहुलता वाले घास युक्त वन, सागौन (टेक्टोना ग्रान्डिस), खैर (अकेसिया कटैचू), यूकेलिप्टस, जामुन (साइजिजियम क्यूमिनाई), दलदली क्षेत्र दीमक की बाम्बियों से आच्छादित क्षेत्र, 550 से अधिक पक्षी प्रजातियों, 150 से अधिक तितली प्रजातियाँ, आठ गिद्ध प्रजातियों, वन क्षेत्रों में सेराविड्स की पाँच प्रजातियाँ-चीतल (एक्सिस एक्सिस), सॉभर (रूसा यूनीक्लोर), मंुतिजैक (मुन्टिएकुस मुन्टिजैक), पाड़ा (एक्सिस पोरसिनस) तथा बारासिंघा (रूसेरवस डुबाउसेली), सर्वाधिक संकटापन्न पक्षी बंगाल पलोरिकेन (होयूबारोप्सिस बेंगालेसिस), हिस्पिड हेगर, सरीसृप की विभिन्न प्रजातियों, एक सींग वाला गैंडा राष्ट्रीय पशु बाघ, राष्ट्रीय धरोहर हाथी सहित विभिन्न प्राणी व पादप प्रजातियों प्रदेश की वन जैव विविधता को समृद्धि प्रदान कर रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में एक राष्ट्रीय उद्यान (दुधवा राष्ट्रीय उद्यान), चार टाइगर रिजर्व (दुधवा टाइगर रिजर्व पीलीभीत टाइगर रिजर्व, अमानगढ़ टाइगर रिजर्व एवं रानीपुर टाइगर रिजर्व), दो हाथी रिजर्व (शिवालिक हाथी रिजर्व व तराई हाथी रिजर्व), एक कन्जर्वेशन रिजर्व (ब्लैक बक कन्जर्वेशन रिजर्व मेजा प्रयागराज) एवं 26 वन्यजीव विहारों में वन जैव विविधता पल व बढ़ रही है। प्रदेश के 4 प्राणि उद्यानों (नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान, लखनऊ, कानपुर प्राणि उद्यान, कानपुर, शहीद अशफाक उल्लाह खाँ प्राणि उद्यान, गोरखपुर एवं इटावा लॉयन सफारी, इटावा) व एक जैव विविधता विरासत स्थल (घड़ियाल पुनर्वास एवं प्रजनन केन्द्र, कुकरैल, लखनऊ) जैव विविधता के एक्स सीटू संरक्षण में योगदान दे रहे हैं। प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान व बन्यजीव विहारों से प्रदेश के वन क्षेत्र का लगभग 38 प्रतिशत एवं भौगोलिक क्षेत्र का 2.6 प्रतिशत भाग आच्छादित है। वन क्षेत्र के सापेक्ष संरक्षित क्षेत्र, प्रतिशत की दृष्टि से देश में सर्वाधिक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदेश में लगभग 11.45 लाख हेक्टेयर (प्रदेश के भौगोलिक क्षेत्र का 4.8 प्रतिशत) वेटलैण्ट्स से आच्छादित है। प्रदेश के वेटलैण्ड्स मगर, घड़ियाल, राष्ट्रीय जलीय जीव डॉल्फिन, राज्य पशु बारासिंघा, राज्य पक्षी सारस, स्वच्छ जल की कछुओं की चौदह प्रजातियों एवं शीत ऋतु में प्रतिकूल परिस्थितियों से बचने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, अफ्रीका आस्ट्रेलिया, म्यांमार, चीन व यूरोप के विभिन्न देशों से आने वाले इंडियन स्कीमर, बार हेडेड गूज, रुडीशेल्डक रेड क्रेस्टेड पोचार्ड, मलार्ड, कुरंजा, ग्रे लेग जैसे अतिथि पक्षियों के प्रिय बास स्थल हैं। प्रदेश में अन्तर्राष्ट्रीय महत्व के 10 वेटलैण्ड्स का प्रबन्धन रामसर साईट के रूप में किया जा रहा है। रामसर साईट की संख्या के दृष्टिगत देश में उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है।</div>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Oct 2025 17:22:39 +0530</pubDate>
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