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                <title>infrastructure development - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>infrastructure development RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अंग्रेजी शासन काल में बना अप्सरा नदी का वाधहुआ जर्जर पर पुल निर्माण की विधायक ने की मांग कोई ठोस कार्रवाई नहीं </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बरेली/ </strong>क्योलड़िया नवाबगंज-क्योलड़िया मार्ग पर अप्सरा नदी स्थित क्योलड़िया डैम के पास पुल निर्माण की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। क्षेत्रीय विधायक और दर्जनों गांव के ग्राम प्रधानों ने उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को पत्र भेजकर पुल निर्माण की   मांग की है। उन्होंने कहा कि आठ से नौ दशक पुराना जर्जर डैम से ही बड़े वाहनों का आवागमन होता है। जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। यहां डैम के पास सैकड़ों गांवों के आवागमन के लिए पुल निर्माण आवश्यक है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">निवर्तमान मंडल अध्यक्ष शशि कपूर समेत दर्जनों गांवों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180147/mla-demands-construction-of-dilapidated-bridge-over-apsara-river-built"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1.-----------------------अ.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बरेली/ </strong>क्योलड़िया नवाबगंज-क्योलड़िया मार्ग पर अप्सरा नदी स्थित क्योलड़िया डैम के पास पुल निर्माण की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। क्षेत्रीय विधायक और दर्जनों गांव के ग्राम प्रधानों ने उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को पत्र भेजकर पुल निर्माण की   मांग की है। उन्होंने कहा कि आठ से नौ दशक पुराना जर्जर डैम से ही बड़े वाहनों का आवागमन होता है। जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। यहां डैम के पास सैकड़ों गांवों के आवागमन के लिए पुल निर्माण आवश्यक है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निवर्तमान मंडल अध्यक्ष शशि कपूर समेत दर्जनों गांवों के प्रधानों ने क्षेत्रीय विधायक डॉ एम पी आर्य को लिखित शिकायत कर अवगत कराया कि क्योलड़िया डैम अंग्रेजी शासनकाल में बनाया गया था और वर्तमान में इसकी स्थिति काफी जर्जर हो चुकी है। इसी डैम से होकर तहसील और ब्लॉक मुख्यालय तक लोगों का आवागमन होता है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्षेत्र के खंड विकास कार्यालय, खंड शिक्षा कार्यालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पशु चिकित्सालय, कृषि विभाग, पुलिस स्टेशन, बैंक, विद्यालय और कॉलेज समेत तमाम सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों तक पहुंचने के लिए लोग इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि डैम से बड़े वाहनों का आवागमन संभव नहीं होने के कारण क्षेत्र के विकास पर असर पड़ रहा है। लोगों को 15 से 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है,।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> जिससे व्यापारियों और ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कच्चा और पक्का माल लाने-ले जाने में भी दिक्कतें बनी हुई हैं। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि पुल निर्माण होने से क्षेत्र के हजारों लोगों को राहत मिलेगी और आवागमन सुगम हो सकेगा। जिस पर विधायक ने राज्य सेतु निगम से पुल निर्माण की मांग करते हुए पत्र दिया। पत्र पर सेतु निगम ने जांच की तो पुल की अधिक लंबाई होने के चलते सेतु निगम ने लोक निर्माण विभाग को स्टीमेट बनाकर भेजने को कहा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों को आंशका है इस अप्सरा नदी के बांध का निर्माण न होने से किसी दिन बड़ा हदसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि किसी बात के ऊपर से स्कूल जाने वाले नन्हे मुन्ने बच्चों को लेकर वहां आते-जाते हैं किसी के ऊपर सेह कर गन्ने से अरे ट्रैक्टर-ट्रॉली ही निकलते हैं एक दशक को विभाग ने इस बांध के ऊपरसे भारी वाहनों का निकलना वर्जित कर दियाथ परंतु अब 10 वर्षों से उसे पुणे खोल दिया गया है। जोकिसी भी समय बड़ी घटना को अंजाम दे सकता है विभाग इस परआंख मीच बैठाहआ है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 18:46:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>थारू विकास परियोजना, विशुनपुर विश्राम को मिली नई गति</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर।</strong> जनपद के थारू जनजाति क्षेत्र में प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को धरातल पर प्रभावी रूप से क्रियान्वित करते हुए थारू विकास परियोजना, विशुनपुर विश्राम को सशक्त बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। जिलाधिकारी विपिन कुमार जैन के निर्देशन एवं सतत अनुश्रवण में परियोजना क्षेत्र के समग्र विकास हेतु शासन द्वारा ₹1.28 करोड़ की धनराशि स्वीकृत एवं प्राप्त हुई है। इस धनराशि के माध्यम से क्षेत्र में आधारभूत संरचनाओं को सुदृढ़ करने, जनसेवाओं का विस्तार करने तथा स्थानीय निवासियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यों को तेजी से कराया जा रहा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175530/tharu-development-project-vishunpur-vishram-gets-new-momentum"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1001708543.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर।</strong> जनपद के थारू जनजाति क्षेत्र में प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को धरातल पर प्रभावी रूप से क्रियान्वित करते हुए थारू विकास परियोजना, विशुनपुर विश्राम को सशक्त बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। जिलाधिकारी विपिन कुमार जैन के निर्देशन एवं सतत अनुश्रवण में परियोजना क्षेत्र के समग्र विकास हेतु शासन द्वारा ₹1.28 करोड़ की धनराशि स्वीकृत एवं प्राप्त हुई है। इस धनराशि के माध्यम से क्षेत्र में आधारभूत संरचनाओं को सुदृढ़ करने, जनसेवाओं का विस्तार करने तथा स्थानीय निवासियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यों को तेजी से कराया जा रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/1001708541.jpg" alt="थारू विकास परियोजना, विशुनपुर विश्राम को मिली नई गति" width="1200" height="800"></img></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>परियोजना परिसर का हो रहा कायाकल्प</strong></div><div style="text-align:justify;">थारू विकास परियोजना परिसर में रंग-रोगन, मरम्मत, सौंदर्यीकरण एवं संरचनात्मक सुधार के कार्य तेजी से चल रहे हैं। भवनों की बाहरी एवं आंतरिक साज-सज्जा को बेहतर बनाकर परिसर को आधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है। इससे यह केंद्र न केवल प्रशासनिक गतिविधियों का प्रमुख स्थान बनेगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास के मॉडल के रूप में भी स्थापित होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, बढ़ी ओपीडी</strong></div><div style="text-align:justify;">परियोजना क्षेत्र स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) का भी कायाकल्प किया गया है। यहां आधुनिक चिकित्सा उपकरण, दवाएं, फर्नीचर एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। सुविधाओं में सुधार का असर ओपीडी में मरीजों की बढ़ती संख्या के रूप में देखा जा रहा है। अब ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं स्थानीय स्तर पर ही मिल रही हैं, जिससे बाहर जाने की आवश्यकता कम हुई है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>अभ्युदय योजना से युवाओं को मिल रहा लाभ</strong></div><div style="text-align:justify;">समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत क्षेत्र के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं एवं NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग दी जा रही है। अनुभवी शिक्षकों के मार्गदर्शन से छात्रों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल रही है, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध हो रही है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>समग्र विकास पर प्रशासन का जोर</strong></div><div style="text-align:justify;">प्रशासन द्वारा थारू बाहुल्य क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता देते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, रोजगार एवं आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। परियोजना के माध्यम से वर्तमान सुविधाओं के साथ-साथ भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक विकास की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 19:22:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>New Highway: पीएम मोदी ने इन राज्यों को दी बड़ी सौगात, 20668 करोड़ रुपये के दो प्रोजेक्ट्स को दी मंजूरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>New Highway: देश में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की रफ्तार को और तेज करते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने साल के अंत में महाराष्ट्र और ओडिशा को बड़ी सौगात दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के दो अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं पर कुल 20,668 करोड़ रुपये की लागत आएगी, जिससे दोनों राज्यों में कनेक्टिविटी और विकास को नया आयाम मिलेगा।</p>
<p>कैबिनेट के फैसलों में सबसे बड़ा हिस्सा महाराष्ट्र के खाते में गया है। सरकार ने नासिक और सोलापुर के बीच 6 लेन के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165031/new-highway-pm-modi-gave-a-big-gift-to-these"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/new-highway-(12).jpg" alt=""></a><br /><p>New Highway: देश में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की रफ्तार को और तेज करते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने साल के अंत में महाराष्ट्र और ओडिशा को बड़ी सौगात दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के दो अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं पर कुल 20,668 करोड़ रुपये की लागत आएगी, जिससे दोनों राज्यों में कनेक्टिविटी और विकास को नया आयाम मिलेगा।</p>
<p>कैबिनेट के फैसलों में सबसे बड़ा हिस्सा महाराष्ट्र के खाते में गया है। सरकार ने नासिक और सोलापुर के बीच 6 लेन के ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को मंजूरी दी है। इस परियोजना की कुल लागत 19,142 करोड़ रुपये है और इसकी लंबाई 374 किलोमीटर होगी। यह कॉरिडोर नासिक फाटा से खेड़ तक पुणे और अहमदनगर होते हुए बनाया जाएगा।</p>
<p>यह ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट इसलिए खास है क्योंकि इसके तहत नई जमीन का अधिग्रहण कर बिल्कुल नया हाईवे विकसित किया जाएगा। इससे मौजूदा सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और शहरों के भीतर जाने की बजाय बाईपास के जरिए तेज और सुगम यात्रा संभव हो सकेगी। फिलहाल नासिक से सोलापुर की यात्रा में लोगों को जाम और संकरे रास्तों की परेशानी झेलनी पड़ती है, जो इस कॉरिडोर के बनने से काफी हद तक दूर हो जाएगी।</p>
<p>आर्थिक और धार्मिक दृष्टि से भी यह कॉरिडोर बेहद अहम माना जा रहा है। नासिक, जो अंगूर की खेती और धार्मिक पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है, सीधे सोलापुर जैसे बड़े टेक्सटाइल हब से जुड़ जाएगा। इससे अहमदनगर और बीड जैसे जिलों को भी फायदा होगा। माल ढुलाई की लागत कम होगी और किसानों को सब्जियों व फलों को मंडियों तक पहुंचाने में आसानी मिलेगी। यह कॉरिडोर सूरत–चेन्नई इकोनॉमिक कॉरिडोर का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा।</p>
<p>वहीं, सरकार ने पूर्वी भारत पर भी खास ध्यान देते हुए ओडिशा में राष्ट्रीय राजमार्ग-326 के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण को मंजूरी दी है। इस परियोजना पर 1,526 करोड़ रुपये खर्च होंगे और यह 206 किलोमीटर लंबी होगी। यह हाईवे मलकानगिरी से कोरापुट तक विकसित किया जाएगा।</p>
<p>यह परियोजना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह इलाका लंबे समय से नक्सल प्रभावित रहा है। सड़क के चौड़ीकरण से सुरक्षा बलों की आवाजाही आसान होगी और स्थानीय लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी। साथ ही यह हाईवे ओडिशा को आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ से जोड़ने वाली अहम कड़ी है, जिससे तीनों राज्यों के बीच व्यापार और सामाजिक संपर्क को मजबूती मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Jan 2026 09:39:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट” (ACED-2025) का भव्य आयोजन दिनांक 28 एवं 29 नवम्बर 2025 को सफलतापूर्वक किया गया।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>राजधानी लखनऊ के द इंस्टिट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) उत्तर प्रदेश राज्य केंद्र, लखनऊ द्वारा, ऑल इंडिया कॉन्फ्रेंस, “एडवांस्ड सिविल इंजीनियरिंग प्रैक्टिसेज फॉर सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट” (ACED-2025) का भव्य आयोजन दिनांक 28 एवं 29 नवम्बर 2025 को सफलतापूर्वक किया गया। इस राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य सिविल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों, उन्नत शोध, सतत विकास (Sustainable Development) एवं पर्यावरण अनुकूल बुनियादी ढाँचे (Infrastructure) के निर्माण पर विशेषज्ञों के विचारों का आदान-प्रदान करना था। सम्मेलन के मुख्य अतिथि ई. अशोक कुमार द्विवेदी, अभियंता-मुख्य, लोक निर्माण विभाग, लखनऊ उन्होंने अपने संबोधन में प्रदेश में तेज़ी से विकसित हो रहे आधारभूत ढाँचे,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162211/the-grand-event-of-%E2%80%9Cinfrastructure-development%E2%80%9D-aced-2025-was-successfully-organized"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/96679.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>राजधानी लखनऊ के द इंस्टिट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) उत्तर प्रदेश राज्य केंद्र, लखनऊ द्वारा, ऑल इंडिया कॉन्फ्रेंस, “एडवांस्ड सिविल इंजीनियरिंग प्रैक्टिसेज फॉर सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट” (ACED-2025) का भव्य आयोजन दिनांक 28 एवं 29 नवम्बर 2025 को सफलतापूर्वक किया गया। इस राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य सिविल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों, उन्नत शोध, सतत विकास (Sustainable Development) एवं पर्यावरण अनुकूल बुनियादी ढाँचे (Infrastructure) के निर्माण पर विशेषज्ञों के विचारों का आदान-प्रदान करना था। सम्मेलन के मुख्य अतिथि ई. अशोक कुमार द्विवेदी, अभियंता-मुख्य, लोक निर्माण विभाग, लखनऊ उन्होंने अपने संबोधन में प्रदेश में तेज़ी से विकसित हो रहे आधारभूत ढाँचे, सड़क निर्माण, पुलों एवं राजमार्गों के आधुनिकीकरण तथा इंजीनियरों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होने कार्यक्रम की आवश्यकता एवं लाभ की भी जानकारी दी जो इस प्रकार से है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">1. उन्नत तकनीकों का आदान-प्रदान</div>
<div style="text-align:justify;">देशभर के विशेषज्ञों ने सिविल इंजीनियरिंग की नवीनतम तकनीकों, अनुसंधान तथा आधुनिक निर्माण प्रथाओं के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की।</div>
<div style="text-align:justify;">2. सतत (Sustainable) विकास को बढ़ावा</div>
<div style="text-align:justify;">पर्यावरण अनुकूल निर्माण पद्धतियाँ, ऊर्जा-संरक्षण, जल प्रबंधन और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर के महत्व पर विशेषज्ञों की राय ने प्रतिभागियों को नए दृष्टिकोण दिए।</div>
<div style="text-align:justify;">3. इंजीनियरों में तकनीकी क्षमता वृद्धि</div>
<div style="text-align:justify;">वर्कशॉप, पेपर प्रेजेंटेशन और पैनल डिस्कशन के माध्यम से इंजीनियरों को उभरती चुनौतियों और समाधान के बारे में व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;">4. नीति-निर्माण के लिए उपयोगी सुझाव सड़क, पुल, इमारतों और सार्वजनिक परियोजनाओं से संबंधित कई तकनीकी सुझाव इस सम्मेलन में सामने आए, जिन्हें भविष्य की नीतियों में सम्मिलित किया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;">5. युवा इंजीनियरों और छात्रों को मार्गदर्शन अनुभवी विशेषज्ञों के संबोधन और इंटरैक्शन से विद्यार्थियों को आधुनिक इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर निर्माण का स्पष्ट मार्ग मिला।</div>
<div style="text-align:justify;">6. उद्योग, अनुसंधान संस्थान और सरकार के बीच समन्वय सम्मेलन ने विभिन्न संस्थानों, विभागों और उद्योग जगत के बीच बेहतर सहयोग स्थापित करने का अवसर प्रदान किया।</div>
<div style="text-align:justify;">7. सुरक्षित और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण की दिशा में योगदान डिज़ास्टर रेज़िलिएंट, टिकाऊ और किफायती इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी रणनीतियाँ प्रस्तुत की गईं। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रो. जे. पी. साहू, सिविल इंजीनियरिंग विभाग, आई.आई.टी. लखनऊ रहे। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों, इंजीनियरों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों एवं विभिन्न तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य सिविल इंजीनियरिंग क्षेत्र में हो रहे आधुनिक नवाचारों, तकनीकों तथा टिकाऊ अवसंरचना निर्माण की श्रेष्ठ प्रथाओं पर विचार-विमर्श करना है। विशिष्ट अतिथियों ने सिविल इंजीनियरिंग में उभरती चुनौतियों, नवीन तकनीकों जैसे—स्मार्ट मटेरियल्स, आधुनिक सर्वे तकनीकें, ग्रीन कंस्ट्रक्शन, डिजास्टर रेज़िलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर तथा जल संरक्षण आधारित डिज़ाइन पर महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए। सम्मेलन में देशभर के विभिन्न तकनीकी संस्थानों, सरकारी विभागों, इंजीनियरिंग संगठनों तथा उद्योग जगत से आए विशेषज्ञों, प्रतिनिधियों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दो दिनों तक चली विभिन्न तकनीकी सत्रों, पेपर प्रेजेंटेशन्स, इंटरैक्टिव वर्कशॉप्स एवं पैनल डिस्कशनों में इंजीनियरिंग के भविष्य तथा सतत विकास की दिशा में अहम सुझाव सामने आए। कार्यक्रम में संस्थान के अध्यक्ष इं.वी. बी. सिंह, एफ आई ई भी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सम्मेलन भारत को सतत और मज़बूत इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम की शुरुआत में संस्थान के चेयरमैन इं. सत्य प्रकाश, एफ आई ई ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया।कार्यक्रम के संयोजक इं. अवधेश कुमार, एफ आई ई ने विषय की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे तकनीकी वार्तालाप इंजीनियरों और युवा मस्तिष्कों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं मानवीय संवेदनशीलता को सशक्त बनाते हैं। कार्यक्रम के समापन पर ई. वी. पी. सिंह, एफ आई ई, मानद सचिव, उत्तर प्रदेश राज्य केन्द्र ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया और सभी अतिथियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने स्नेहभोज (लंच) में सहभागिता की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Nov 2025 20:23:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>New Highway: यूपी-मध्य प्रदेश की दूरी होगी कम, बनेगा 200 किमी लंबा फोरलेन ग्रीनफील्ड हाईवे</title>
                                    <description><![CDATA[<p>New Highway:  <span class="cf0">उत्तर</span> <span class="cf0">प्रदेश</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">मध्य</span> <span class="cf0">प्रदेश</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">आपस</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">जोड़ने</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">लिए</span> <span class="cf0">एक</span> <span class="cf0">नई</span> <span class="cf0">विकास</span> <span class="cf0">परियोजना</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">हरी</span> <span class="cf0">झंडी</span> <span class="cf0">मिल</span> <span class="cf0">गई</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">बरेली</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">ग्वालियर</span> <span class="cf0">तक</span><span class="cf0"> 200 </span><span class="cf0">किलोमीटर</span> <span class="cf0">लंबे</span> <span class="cf0">फोरलेन</span> <span class="cf0">ग्रीनफील्ड</span> <span class="cf0">हाईवे</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">निर्माण</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">प्रक्रिया</span> <span class="cf0">तेज़</span> <span class="cf0">कर</span> <span class="cf0">दी</span> <span class="cf0">गई</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">इस</span> <span class="cf0">हाईवे</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">बनने</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">दोनों</span> <span class="cf0">राज्यों</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">बीच</span> <span class="cf0">यात्रा</span> <span class="cf0">आसान</span> <span class="cf0">होगी</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">पर्यटन</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">बढ़ावा</span> <span class="cf0">मिलेगा</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">व्यापारिक</span> <span class="cf0">गतिविधियां</span> <span class="cf0">भी</span><span class="cf0"> तेज होंगी।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">बरेली से ग्वालियर तक होगा सीधा संपर्क</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">इस हाईवे की योजना बरेली से </span><span class="cf0">बदायूं</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">फर्रुखाबाद</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">मैनपुरी</span><span class="cf0"> और </span><span class="cf0">इटावा</span><span class="cf0"> होते हुए मध्य प्रदेश के ग्वालियर तक बनाई गई है। यह एक </span><span class="cf0">ग्रीनफील्ड</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/159526/new-highway-distance-between-up-madhya-pradesh-will-be-reduced-200"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/new-highway-(3).jpg" alt=""></a><br /><p>New Highway:  <span class="cf0">उत्तर</span> <span class="cf0">प्रदेश</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">मध्य</span> <span class="cf0">प्रदेश</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">आपस</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">जोड़ने</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">लिए</span> <span class="cf0">एक</span> <span class="cf0">नई</span> <span class="cf0">विकास</span> <span class="cf0">परियोजना</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">हरी</span> <span class="cf0">झंडी</span> <span class="cf0">मिल</span> <span class="cf0">गई</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">बरेली</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">ग्वालियर</span> <span class="cf0">तक</span><span class="cf0"> 200 </span><span class="cf0">किलोमीटर</span> <span class="cf0">लंबे</span> <span class="cf0">फोरलेन</span> <span class="cf0">ग्रीनफील्ड</span> <span class="cf0">हाईवे</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">निर्माण</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">प्रक्रिया</span> <span class="cf0">तेज़</span> <span class="cf0">कर</span> <span class="cf0">दी</span> <span class="cf0">गई</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">इस</span> <span class="cf0">हाईवे</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">बनने</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">दोनों</span> <span class="cf0">राज्यों</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">बीच</span> <span class="cf0">यात्रा</span> <span class="cf0">आसान</span> <span class="cf0">होगी</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">पर्यटन</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">बढ़ावा</span> <span class="cf0">मिलेगा</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">व्यापारिक</span> <span class="cf0">गतिविधियां</span> <span class="cf0">भी</span><span class="cf0"> तेज होंगी।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">बरेली से ग्वालियर तक होगा सीधा संपर्क</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">इस हाईवे की योजना बरेली से </span><span class="cf0">बदायूं</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">फर्रुखाबाद</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">मैनपुरी</span><span class="cf0"> और </span><span class="cf0">इटावा</span><span class="cf0"> होते हुए मध्य प्रदेश के ग्वालियर तक बनाई गई है। यह एक </span><span class="cf0">ग्रीनफील्ड</span> <span class="cf0">फोरलेन</span><span class="cf0"> हाईवे होगा, यानी इसे </span><span class="cf0">पूरी</span><span class="cf0"> तरह नई ज़मीन पर बनाया जाएगा जिससे यातायात पर कम से कम प्रभाव पड़े।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">डीपीआर</span><span class="cf0"> की तैयारी शुरू</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">इस परियोजना की </span><span class="cf0">डिटेल्ड</span> <span class="cf0">प्रोजेक्ट</span><span class="cf0"> रिपोर्ट (</span><span class="cf1">DPR) </span><span class="cf0">तैयार करने के लिए संबंधित एजेंसी का चयन कर लिया गया है। </span><span class="cf1">DPR </span><span class="cf0">के बाद </span><span class="cf0">निर्माण</span> <span class="cf0">का</span><span class="cf0"> रास्ता साफ हो जाएगा। </span><span class="cf0">एनएचएआई</span><span class="cf0"> के अधिकारी यह तय कर रहे हैं कि कहां-कहां </span><span class="cf0">फ्लाईओवर</span><span class="cf0"> और </span><span class="cf0">अंडरपास</span><span class="cf0"> बनाए जाएंगे, ताकि लोगों को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा मिल सके।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">पर्यटन और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">बरेली से ग्वालियर तक सीधा और तेज़ संपर्क स्थापित होने से पर्यटन स्थलों का विकास होगा। साथ ही बरेली, </span><span class="cf0">फर्रुखाबाद</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">मैनपुरी</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">इटावा</span><span class="cf0"> और ग्वालियर जैसे शहरों के बीच आयात-निर्यात को भी गति मिलेगी। यह </span><span class="cf0">हाईवे</span> <span class="cf0">दोनों</span> <span class="cf0">राज्यों</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">आर्थिक</span> <span class="cf0">प्रगति</span> <span class="cf0">का</span> <span class="cf0">वाहक</span> <span class="cf0">बन</span> <span class="cf0">सकता</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">बरेली</span> <span class="cf0">बन</span> <span class="cf0">रहा</span> <span class="cf0">कनेक्टिविटी</span> <span class="cf0">का</span> <span class="cf0">हब</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">बरेली</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">राज्य</span> <span class="cf0">सरकार</span> <span class="cf0">द्वारा</span> <span class="cf0">एक</span> <span class="cf0">प्रमुख</span> <span class="cf0">संपर्क</span> <span class="cf0">केंद्र</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">रूप</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">विकसित</span><span class="cf0"> किया जा रहा है। नाथ </span><span class="cf0">कॉरिडोर</span><span class="cf0"> के तहत धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया गया। बरेली-</span><span class="cf0">सितारगंज</span><span class="cf0"> हाईवे का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिससे </span><span class="cf0">नैनीताल</span><span class="cf0"> तक पहुंच आसान होगी।</span></p>
<p><span class="cf0">बरेली-मथुरा स्टेट हाईवे को नेशनल हाईवे घोषित कर </span><span class="cf0">फोरलेन</span><span class="cf0"> में </span><span class="cf0">बदला</span><span class="cf0"> जा रहा है, जिससे बरेली से आगरा तक का सफर भी तेज और सुगम होगा। अब बरेली-अयोध्या संपर्क की भी योजना बनाई जा रही है।</span></p>
<p><span class="cf0">योगी सरकार की ओर से इस परियोजना को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। अब सर्वेक्षण के माध्यम से यह तय किया जा रहा है कि किस हिस्से में </span><span class="cf0">अंडरपास</span><span class="cf0"> होंगे और कहां </span><span class="cf0">फ्लाईओवर</span><span class="cf0"> की ज़रूरत पड़ेगी। परियोजना को जल्द ही ज़मीन पर उतारने की </span><span class="cf0">तैयारी</span><span class="cf0"> है।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/159526/new-highway-distance-between-up-madhya-pradesh-will-be-reduced-200</link>
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                <pubDate>Sun, 09 Nov 2025 21:42:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>New Expressway: दिल्ली से गुरुग्राम पहुंचेंगे सिर्फ 20 मिनट में, बनेगा ये नया  एक्सप्रेसवे </title>
                                    <description><![CDATA[<p>New Expressway: दिल्ली और गुरुग्राम के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एम्स से गुरुग्राम तक एक नया एक्सप्रेसवे बनाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। यह एक्सप्रेसवे महिपालपुर के रास्ते से गुज़रेगा और परियोजना के लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है।</p>
<p>डीपीआर में यह स्पष्ट किया जाएगा कि किस हिस्से को भूमिगत और किसे एलिवेटेड बनाया जाएगा। माना जा रहा है कि एम्स से महिपालपुर तक का हिस्सा भूमिगत होगा जबकि बाकी हिस्सा एलिवेटेड होगा। डीपीआर पूरी होने के बाद स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी।</p>
<p>इस समय एम्स</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156956/new-expressway"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/new-expressway-(14).jpg" alt=""></a><br /><p>New Expressway: दिल्ली और गुरुग्राम के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एम्स से गुरुग्राम तक एक नया एक्सप्रेसवे बनाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। यह एक्सप्रेसवे महिपालपुर के रास्ते से गुज़रेगा और परियोजना के लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है।</p>
<p>डीपीआर में यह स्पष्ट किया जाएगा कि किस हिस्से को भूमिगत और किसे एलिवेटेड बनाया जाएगा। माना जा रहा है कि एम्स से महिपालपुर तक का हिस्सा भूमिगत होगा जबकि बाकी हिस्सा एलिवेटेड होगा। डीपीआर पूरी होने के बाद स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी।</p>
<p>इस समय एम्स से गुरुग्राम के सिरहौल बॉर्डर तक पहुंचने में कम से कम डेढ़ घंटे का समय लगता है। वहीं, गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड तक पहुंचने में दो घंटे तक लग जाते हैं। नए एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद यह समय घटकर मात्र 20-25 मिनट रह जाएगा। इससे दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर महिपालपुर और सिरहौल के बीच ट्रैफिक जाम में भारी कमी आएगी। </p>
<h3><strong>35 किलोमीटर लंबा सिग्नल-फ्री कॉरिडोर</strong></h3>
<p>प्रस्तावित एक्सप्रेसवे की लंबाई लगभग 35 किलोमीटर होगी और यह पूरी तरह सिग्नल-मुक्त होगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 5,000 करोड़ रुपये है। यह एक्सप्रेसवे गुरुग्राम में घाटा गांव के पास गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड से जुड़ेगा और इसके सभी हिस्से चाहे वे भूमिगत हों या एलिवेटेड छह-छह लेन के होंगे।</p>
<p>यह एक्सप्रेसवे दिल्ली के एम्स आईएनए से शुरू होकर ब्रिगेडियर होशियार सिंह मार्ग, अफ्रीका एवेन्यू, वसंत विहार, नेल्सन मंडेला मार्ग और वसंत कुंज से होकर गुज़रेगा। यह दिल्ली में एयरपोर्ट की ओर जाने वाली प्रमुख सड़कों को भी जोड़ेगा।</p>
<h3><strong>राजमार्गों और एक्सप्रेसवे का नेटवर्क</strong></h3>
<p>यह नया एक्सप्रेसवे दिल्ली और हरियाणा के कई मुख्य मार्गों से जुड़ेगा। यह गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड से जुड़कर एसपीआर (साउथर्न पेरिफेरल रोड) से जुड़ेगा, जो आगे दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे और द्वारका एक्सप्रेसवे को जोड़ता है। इसके अतिरिक्त, यह गुरुग्राम-सोहना हाईवे के वाटिका चौक से होते हुए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से भी जुड़ेगा। इस प्रकार यह एक्सप्रेसवे दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों के यात्रियों के लिए एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करेगा।</p>
<h3><strong>भीषण ट्रैफिक से राहत की उम्मीद</strong></h3>
<p>दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर सबसे ज्यादा जाम महिपालपुर और सिरहौल बॉर्डर के बीच लगता है। यहां हर दिन औसतन तीन लाख वाहन गुजरते हैं, खासकर सुबह 8 से 11 बजे और शाम 5 से 9 बजे के बीच। द्वारका एक्सप्रेसवे बनने के बावजूद यह इलाका ट्रैफिक के लिहाज से चुनौती बना हुआ है।</p>
<p>नई परियोजना पूरी होने पर दिल्ली एयरपोर्ट या एम्स से निकलने वाले वाहन सीधे फरीदाबाद, पलवल, नूंह, जयपुर, अलवर, दौसा और यहां तक कि वडोदरा और मुंबई तक जा सकेंगे, बिना सिरहौल बॉर्डर, इफको चौक या राजीव चौक जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों से गुज़रे। इससे यात्रियों को समय की बचत तो होगी ही, साथ ही दिल्ली-एनसीआर के ट्रैफिक दबाव को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/156956/new-expressway</link>
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                <pubDate>Thu, 09 Oct 2025 13:44:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>New Highway: यूपी-मध्य प्रदेश की दूरी होगी कम, बनेगा 200 किमी लंबा फोरलेन ग्रीनफील्ड हाईवे</title>
                                    <description><![CDATA[<p>New Highway:  <span class="cf0">उत्तर</span> <span class="cf0">प्रदेश</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">मध्य</span> <span class="cf0">प्रदेश</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">आपस</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">जोड़ने</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">लिए</span> <span class="cf0">एक</span> <span class="cf0">नई</span> <span class="cf0">विकास</span> <span class="cf0">परियोजना</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">हरी</span> <span class="cf0">झंडी</span> <span class="cf0">मिल</span> <span class="cf0">गई</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">बरेली</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">ग्वालियर</span> <span class="cf0">तक</span><span class="cf0"> 200 </span><span class="cf0">किलोमीटर</span> <span class="cf0">लंबे</span> <span class="cf0">फोरलेन</span> <span class="cf0">ग्रीनफील्ड</span> <span class="cf0">हाईवे</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">निर्माण</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">प्रक्रिया</span> <span class="cf0">तेज़</span> <span class="cf0">कर</span> <span class="cf0">दी</span> <span class="cf0">गई</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">इस</span> <span class="cf0">हाईवे</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">बनने</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">दोनों</span> <span class="cf0">राज्यों</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">बीच</span> <span class="cf0">यात्रा</span> <span class="cf0">आसान</span> <span class="cf0">होगी</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">पर्यटन</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">बढ़ावा</span> <span class="cf0">मिलेगा</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">व्यापारिक</span> <span class="cf0">गतिविधियां</span> <span class="cf0">भी</span><span class="cf0"> तेज होंगी।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">बरेली से ग्वालियर तक होगा सीधा संपर्क</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">इस हाईवे की योजना बरेली से </span><span class="cf0">बदायूं</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">फर्रुखाबाद</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">मैनपुरी</span><span class="cf0"> और </span><span class="cf0">इटावा</span><span class="cf0"> होते हुए मध्य प्रदेश के ग्वालियर तक बनाई गई है। यह एक </span><span class="cf0">ग्रीनफील्ड</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156652/the-distance-of-up-madhya-pradesh-will-be-less"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/new-highway-(3).jpg" alt=""></a><br /><p>New Highway:  <span class="cf0">उत्तर</span> <span class="cf0">प्रदेश</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">मध्य</span> <span class="cf0">प्रदेश</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">आपस</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">जोड़ने</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">लिए</span> <span class="cf0">एक</span> <span class="cf0">नई</span> <span class="cf0">विकास</span> <span class="cf0">परियोजना</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">हरी</span> <span class="cf0">झंडी</span> <span class="cf0">मिल</span> <span class="cf0">गई</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">बरेली</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">ग्वालियर</span> <span class="cf0">तक</span><span class="cf0"> 200 </span><span class="cf0">किलोमीटर</span> <span class="cf0">लंबे</span> <span class="cf0">फोरलेन</span> <span class="cf0">ग्रीनफील्ड</span> <span class="cf0">हाईवे</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">निर्माण</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">प्रक्रिया</span> <span class="cf0">तेज़</span> <span class="cf0">कर</span> <span class="cf0">दी</span> <span class="cf0">गई</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">इस</span> <span class="cf0">हाईवे</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">बनने</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">दोनों</span> <span class="cf0">राज्यों</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">बीच</span> <span class="cf0">यात्रा</span> <span class="cf0">आसान</span> <span class="cf0">होगी</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">पर्यटन</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">बढ़ावा</span> <span class="cf0">मिलेगा</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">व्यापारिक</span> <span class="cf0">गतिविधियां</span> <span class="cf0">भी</span><span class="cf0"> तेज होंगी।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">बरेली से ग्वालियर तक होगा सीधा संपर्क</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">इस हाईवे की योजना बरेली से </span><span class="cf0">बदायूं</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">फर्रुखाबाद</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">मैनपुरी</span><span class="cf0"> और </span><span class="cf0">इटावा</span><span class="cf0"> होते हुए मध्य प्रदेश के ग्वालियर तक बनाई गई है। यह एक </span><span class="cf0">ग्रीनफील्ड</span> <span class="cf0">फोरलेन</span><span class="cf0"> हाईवे होगा, यानी इसे </span><span class="cf0">पूरी</span><span class="cf0"> तरह नई ज़मीन पर बनाया जाएगा जिससे यातायात पर कम से कम प्रभाव पड़े।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">डीपीआर</span><span class="cf0"> की तैयारी शुरू</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">इस परियोजना की </span><span class="cf0">डिटेल्ड</span> <span class="cf0">प्रोजेक्ट</span><span class="cf0"> रिपोर्ट (</span><span class="cf1">DPR) </span><span class="cf0">तैयार करने के लिए संबंधित एजेंसी का चयन कर लिया गया है। </span><span class="cf1">DPR </span><span class="cf0">के बाद </span><span class="cf0">निर्माण</span> <span class="cf0">का</span><span class="cf0"> रास्ता साफ हो जाएगा। </span><span class="cf0">एनएचएआई</span><span class="cf0"> के अधिकारी यह तय कर रहे हैं कि कहां-कहां </span><span class="cf0">फ्लाईओवर</span><span class="cf0"> और </span><span class="cf0">अंडरपास</span><span class="cf0"> बनाए जाएंगे, ताकि लोगों को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा मिल सके।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">पर्यटन और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">बरेली से ग्वालियर तक सीधा और तेज़ संपर्क स्थापित होने से पर्यटन स्थलों का विकास होगा। साथ ही बरेली, </span><span class="cf0">फर्रुखाबाद</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">मैनपुरी</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">इटावा</span><span class="cf0"> और ग्वालियर जैसे शहरों के बीच आयात-निर्यात को भी गति मिलेगी। यह </span><span class="cf0">हाईवे</span> <span class="cf0">दोनों</span> <span class="cf0">राज्यों</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">आर्थिक</span> <span class="cf0">प्रगति</span> <span class="cf0">का</span> <span class="cf0">वाहक</span> <span class="cf0">बन</span> <span class="cf0">सकता</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">बरेली</span> <span class="cf0">बन</span> <span class="cf0">रहा</span> <span class="cf0">कनेक्टिविटी</span> <span class="cf0">का</span> <span class="cf0">हब</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">बरेली</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">राज्य</span> <span class="cf0">सरकार</span> <span class="cf0">द्वारा</span> <span class="cf0">एक</span> <span class="cf0">प्रमुख</span> <span class="cf0">संपर्क</span> <span class="cf0">केंद्र</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">रूप</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">विकसित</span><span class="cf0"> किया जा रहा है। नाथ </span><span class="cf0">कॉरिडोर</span><span class="cf0"> के तहत धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया गया। बरेली-</span><span class="cf0">सितारगंज</span><span class="cf0"> हाईवे का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिससे </span><span class="cf0">नैनीताल</span><span class="cf0"> तक पहुंच आसान होगी।</span></p>
<p><span class="cf0">बरेली-मथुरा स्टेट हाईवे को नेशनल हाईवे घोषित कर </span><span class="cf0">फोरलेन</span><span class="cf0"> में </span><span class="cf0">बदला</span><span class="cf0"> जा रहा है, जिससे बरेली से आगरा तक का सफर भी तेज और सुगम होगा। अब बरेली-अयोध्या संपर्क की भी योजना बनाई जा रही है।</span></p>
<p><span class="cf0">योगी सरकार की ओर से इस परियोजना को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। अब सर्वेक्षण के माध्यम से यह तय किया जा रहा है कि किस हिस्से में </span><span class="cf0">अंडरपास</span><span class="cf0"> होंगे और कहां </span><span class="cf0">फ्लाईओवर</span><span class="cf0"> की ज़रूरत पड़ेगी। परियोजना को जल्द ही ज़मीन पर उतारने की </span><span class="cf0">तैयारी</span><span class="cf0"> है।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Oct 2025 12:40:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>

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