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                <title>renewable energy - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>renewable energy RSS Feed</description>
                
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                <title>लू की हवा का प्रकोप, कैसे सांस लेंगे हम</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">बेरहम तथा अप्राकृतिक प्रकृति के दोहन का परिणाम अब अपने चरम परिणामों के साथ हमारे सामने खड़ा है। आने वाले महीनों में मौसम वैज्ञानिकों ने जिस तीव्र गर्मी की आशंका जताई है, वह केवल मौसमी उतार-चढ़ाव नहीं बल्कि दशकों से जारी प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन का प्रत्यक्ष परिणाम है। इंटरगवर्नमेंटल क्लाइमेटिक चेंज स्टडीज की नवीनतम रिपोर्टें स्पष्ट करती हैं कि वैश्विक तापमान औद्योगिक क्रांति के बाद लगभग 1.1 से 1.2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है और यदि वर्तमान उत्सर्जन दर जारी रही तो 2030 के दशक में यह 1.5 डिग्री की सीमा को पार कर जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ल्ड मेटियोरोलिजकल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177276/how-will-we-breathe-the-wrath-of-heat-wave"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/154169033.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बेरहम तथा अप्राकृतिक प्रकृति के दोहन का परिणाम अब अपने चरम परिणामों के साथ हमारे सामने खड़ा है। आने वाले महीनों में मौसम वैज्ञानिकों ने जिस तीव्र गर्मी की आशंका जताई है, वह केवल मौसमी उतार-चढ़ाव नहीं बल्कि दशकों से जारी प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन का प्रत्यक्ष परिणाम है। इंटरगवर्नमेंटल क्लाइमेटिक चेंज स्टडीज की नवीनतम रिपोर्टें स्पष्ट करती हैं कि वैश्विक तापमान औद्योगिक क्रांति के बाद लगभग 1.1 से 1.2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है और यदि वर्तमान उत्सर्जन दर जारी रही तो 2030 के दशक में यह 1.5 डिग्री की सीमा को पार कर जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ल्ड मेटियोरोलिजकल ऑर्गेनाइजेशन ने हाल ही में चेतावनी दी है कि पिछले आठ वर्ष मानव इतिहास के सबसे गर्म वर्ष रहे हैं और दक्षिण एशिया विशेष रूप से चरम हीटवेव की चपेट में है। जब हम अपने विकास का इतिहास देखते हैं तो ब्रिटिश सत्ता के दौरान हमारे संसाधनों का अंधाधुंध दोहन हुआ, परंतु विडंबना यह है कि स्वतंत्रता के बाद भी हमने उसी मॉडल को और तीव्र रूप में अपनाया, परिणामस्वरूप मनुष्य तो स्वतंत्र हुआ पर प्रकृति आज भी बंधनों में जकड़ी रही। यूनाइटेड नेशंस एनवायरमेंटल एजेंसी के अनुसार दुनिया हर वर्ष लगभग 1 करोड़ हेक्टेयर वन क्षेत्र खो रही है, और भारत भी इससे अछूता नहीं है, जहाँ शहरीकरण और औद्योगीकरण की तेज रफ्तार ने जंगलों, जलस्रोतों और जैव विविधता पर गंभीर दबाव डाला है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमूमन हमारी जरूरत रोटी, कपड़ा, मकान और जल की थी, किंतु हमने विकास को उपभोग और विस्तार की अंधी दौड़ बना दिया, मशीनें जितनी विशाल होती गईं, मनुष्य उतना ही प्रकृति से दूर और बौना होता गया। फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन के आंकड़े बताते हैं कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से विश्व की लगभग 33 प्रतिशत भूमि की उर्वरता प्रभावित हुई है, भारत में भी कई क्षेत्रों में मिट्टी की गुणवत्ता तेजी से गिर रही है और भूजल स्तर खतरनाक रूप से नीचे जा रहा है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार भारत विश्व के उन देशों में शामिल है जहाँ जल संकट तेजी से गहराता जा रहा है और 2030 तक देश की जल मांग उपलब्ध संसाधनों से दोगुनी हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब से हमने विकास के नाम पर उद्योगों की चिमनियाँ ऊँची कीं, मोबाइल क्रांति का बटन दबाया और डिजिटल संसार में प्रवेश किया, तब से प्रकृति की ध्वनियाँ धीमी पड़ती चली गईं, झरनों का कलकल स्वर, पक्षियों का कलरव और नदियों की जीवनदायिनी धारा जैसे विलुप्त होती जा रही है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अनुसार भारत के कई प्रमुख शहरों की वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुँच चुकी है, वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन अनुमान है कि वायु प्रदूषण के कारण हर वर्ष लाखों समयपूर्व मृत्यु हो रही हैं। अब प्रश्न यह है कि विकास के नाम पर हमें केवल डिजिटल इंडिया चाहिए या हरित भारत की भी आवश्यकता है, क्या बच्चों के हाथ में केवल इंटरनेट देकर हम भविष्य सुरक्षित कर लेंगे या उन्हें स्वच्छ हवा, जल और हरियाली भी देनी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हरा-भरा हिंदुस्तान और डिजिटल इंडिया विरोधी नहीं बल्कि पूरक हो सकते हैं, बशर्ते हम संतुलन बनाना सीखें। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा संस्थान के अनुसार नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेज़ी से बढ़ना ही जलवायु संकट से निपटने का सबसे प्रभावी उपाय है और भारत ने सौर तथा पवन ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति भी की है, फिर भी यह प्रयास पर्याप्त नहीं है जब तक कि हम उपभोग की प्रवृत्ति को नियंत्रित न करें। महात्मा गांधी का यह कथन आज और भी प्रासंगिक हो उठता है कि पृथ्वी सभी की आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है, किंतु किसी एक के लालच को नहीं। भारत की विडंबना यह है कि एक ओर महानगरों की चकाचौंध, मेट्रो, डिजिटल नेटवर्क और ऊँची इमारतें हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण भारत में आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, किसान पसीना बहा रहा है और बच्चे दीपक या कैरोसिन की रोशनी में पढ़ रहे हैं, यह असमानता केवल आर्थिक नहीं बल्कि विकास के असंतुलित मॉडल की भी देन है।</p>
<p style="text-align:justify;">नीति आयोग की रिपोर्टों में भी जल संकट, कृषि संकट और पर्यावरणीय असंतुलन को गंभीर चुनौती के रूप में रेखांकित किया गया है। हमें यह स्वीकार करना होगा कि विकास का रास्ता हरित क्रांति, सतत संसाधन उपयोग और पर्यावरण संरक्षण से होकर ही गुजरता है, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोगैस, ज्वार-भाटा ऊर्जा जैसे विकल्प केवल विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्यता बन चुके हैं। यदि जल, खनिज और प्राकृतिक संसाधन ही समाप्त हो गए तो न तो उद्योग चलेंगे, न ऊर्जा उत्पादन होगा और न ही डिजिटल इंडिया का सपना साकार होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी कवि की पंक्ति आज सच लगती है कि यदि घर बनाओ तो एक पेड़ भी लगा लेना, क्योंकि वही पेड़ आने वाली पीढ़ियों की सांसों का आधार बनेगा। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम विकास की परिभाषा को पुनः परिभाषित करें, उसे केवल आर्थिक प्रगति नहीं बल्कि पर्यावरणीय संतुलन, सामाजिक समानता और मानवीय संवेदनाओं के साथ जोड़ें, तभी हम अपनी 141 करोड़ जनसंख्या को स्वच्छ, सुरक्षित और संतुलित भविष्य दे पाएंगे और एक ऐसे भारत का निर्माण कर सकेंगे जहाँ हरित क्रांति और डिजिटल प्रगति साथ-साथ आगे बढ़ें, न कि एक-दूसरे के विकल्प बनकर खड़े हों।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 17:29:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Solar Pump: हरियाणा मे किसानों के लिए खुशखबरी, सोलर पंप पर मिल रही 75% सब्सिडी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>Solar Pump: हरियाणा के किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग की ओर से प्रधानमंत्री कुसुम (PM-KUSUM) योजना के तहत किसानों को 75 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर एनर्जी पंप लगाने का अवसर दिया जा रहा है। नारनौल के अतिरिक्त उपायुक्त ने जानकारी दी कि इच्छुक किसान 25 दिसंबर से 29 दिसंबर 2025 तक हरियाणा सरकार के सरल पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।</p><p>योजना के तहत किसानों को 3 एचपी, 5 एचपी, 7.5 एचपी और 10 एचपी क्षमता के सोलर पंप 12 अलग-अलग श्रेणियों में उपलब्ध कराए जाएंगे। लाभार्थियों का चयन परिवार की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164276/good-news-for-farmers-in-haryana-75-subsidy-is-available"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/solar-pump.jpg" alt=""></a><br /><p>Solar Pump: हरियाणा के किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग की ओर से प्रधानमंत्री कुसुम (PM-KUSUM) योजना के तहत किसानों को 75 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर एनर्जी पंप लगाने का अवसर दिया जा रहा है। नारनौल के अतिरिक्त उपायुक्त ने जानकारी दी कि इच्छुक किसान 25 दिसंबर से 29 दिसंबर 2025 तक हरियाणा सरकार के सरल पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।</p><p>योजना के तहत किसानों को 3 एचपी, 5 एचपी, 7.5 एचपी और 10 एचपी क्षमता के सोलर पंप 12 अलग-अलग श्रेणियों में उपलब्ध कराए जाएंगे। लाभार्थियों का चयन परिवार की वार्षिक आय और उपलब्ध कृषि भूमि के आधार पर किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों ने पहले बिजली आधारित ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए आवेदन किया है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी, बशर्ते वे अपना मौजूदा बिजली कनेक्शन सरेंडर करें। इसके अलावा वर्ष 2019 से 2023 के बीच बिजली आधारित ट्यूबवेल के लिए आवेदन करने वाले किसान भी प्राथमिकता सूची में शामिल रहेंगे।</p><p>प्रशासन ने भूजल स्तर को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिन गांवों में भूजल स्तर 100 फीट से नीचे चला गया है, वहां माइक्रो-इरिगेशन सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। अन्य क्षेत्रों में भी भूमिगत पाइपलाइन या माइक्रो-इरिगेशन सिस्टम जरूरी रहेगा। वहीं, धान की खेती करने वाले वे किसान जिनके क्षेत्र में भूजल स्तर 40 मीटर से नीचे है, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे।</p><p>वेटिंग लिस्ट में शामिल पुराने आवेदकों को भी राहत दी गई है। यदि वे अपने सोलर पंप की क्षमता या प्रकार बदलना चाहते हैं, तो वे पुरानी फैमिली आईडी के माध्यम से दोबारा आवेदन कर सकते हैं। ऐसे किसानों को नया चालान जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि उनका अंश पहले ही विभाग के पास जमा है। यदि तय समय सीमा में नया आवेदन नहीं किया गया और पंप आवंटित नहीं होता, तो जमा की गई राशि वापस कर दी जाएगी।</p><p>ऑनलाइन आवेदन के लिए किसानों के पास फैमिली आईडी, कृषि भूमि के रिकॉर्ड या जमाबंदी और यह प्रमाण पत्र होना जरूरी है कि आवेदक के नाम पर कोई बिजली आधारित पंप नहीं है। आवेदन प्रक्रिया और कंपनी चयन के बाद किसानों को वर्चुअल अकाउंट नंबर के साथ चालान जारी किया जाएगा, जिसमें लाभार्थी को अपना हिस्सा NEFT या RTGS के माध्यम से जमा करना होगा।</p><p>विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि सोलर पंपों पर 5 साल की वारंटी दी जाएगी और साथ ही 5 वर्षों के लिए चोरी व प्राकृतिक आपदाओं के खिलाफ बीमा सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Dec 2025 10:49:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Hydrogen Train: हरियाणा में दौड़ेगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, जानें कब और कहां से चलेगी </title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">Hydrogen Train: भारत</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">हरित</span> <span class="cf0">ऊर्जा</span><span class="cf0"> (</span><span class="cf1">Green Energy) </span><span class="cf0">की</span> <span class="cf0">दिशा</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">एक</span> <span class="cf0">ऐतिहासिक</span> <span class="cf0">कदम</span> <span class="cf0">उठाया</span> <span class="cf0">गया</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">देश</span> <span class="cf0">का</span> <span class="cf0">पहला</span> <span class="cf0">हाइड्रोजन</span> <span class="cf0">उत्पादन</span> <span class="cf0">प्लांट</span> <span class="cf0">लगभग</span> <span class="cf0">तैयार</span> <span class="cf0">है</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">अगले</span><span class="cf0"> 10-15 </span><span class="cf0">दिनों</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">पूरी</span> <span class="cf0">तरह</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">चालू</span> <span class="cf0">होने</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">संभावना</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">इसके</span> <span class="cf0">बाद</span> <span class="cf0">भारत</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">पहली</span> <span class="cf0">हाइड्रोजन</span> <span class="cf0">ईंधन</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">चलने</span> <span class="cf0">वाली</span> <span class="cf0">ट्रेन</span> <span class="cf0">जींद-गोहाना-सोनीपत</span> <span class="cf0">मार्ग</span> <span class="cf0">पर</span> <span class="cf0">पटरियों</span> <span class="cf0">पर</span> <span class="cf0">दौड़ेगी</span><span class="cf0">।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">प्लांट</span> <span class="cf0">निर्माण</span><span class="cf0"> कार्य अंतिम चरण में</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">इस </span><span class="cf0">पायलट</span><span class="cf0"> परियोजना के तहत 430 किलोग्राम प्रतिदिन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता वाला प्लांट स्थापित किया गया है, जिस पर करीब 70 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। प्लांट में अभी परीक्षण (</span><span class="cf0">टेस्टिंग</span><span class="cf0">) जारी</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156638/hydrogen-train"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/hydrogen-train.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">Hydrogen Train: भारत</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">हरित</span> <span class="cf0">ऊर्जा</span><span class="cf0"> (</span><span class="cf1">Green Energy) </span><span class="cf0">की</span> <span class="cf0">दिशा</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">एक</span> <span class="cf0">ऐतिहासिक</span> <span class="cf0">कदम</span> <span class="cf0">उठाया</span> <span class="cf0">गया</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">देश</span> <span class="cf0">का</span> <span class="cf0">पहला</span> <span class="cf0">हाइड्रोजन</span> <span class="cf0">उत्पादन</span> <span class="cf0">प्लांट</span> <span class="cf0">लगभग</span> <span class="cf0">तैयार</span> <span class="cf0">है</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">अगले</span><span class="cf0"> 10-15 </span><span class="cf0">दिनों</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">पूरी</span> <span class="cf0">तरह</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">चालू</span> <span class="cf0">होने</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">संभावना</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">इसके</span> <span class="cf0">बाद</span> <span class="cf0">भारत</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">पहली</span> <span class="cf0">हाइड्रोजन</span> <span class="cf0">ईंधन</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">चलने</span> <span class="cf0">वाली</span> <span class="cf0">ट्रेन</span> <span class="cf0">जींद-गोहाना-सोनीपत</span> <span class="cf0">मार्ग</span> <span class="cf0">पर</span> <span class="cf0">पटरियों</span> <span class="cf0">पर</span> <span class="cf0">दौड़ेगी</span><span class="cf0">।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">प्लांट</span> <span class="cf0">निर्माण</span><span class="cf0"> कार्य अंतिम चरण में</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">इस </span><span class="cf0">पायलट</span><span class="cf0"> परियोजना के तहत 430 किलोग्राम प्रतिदिन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता वाला प्लांट स्थापित किया गया है, जिस पर करीब 70 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। प्लांट में अभी परीक्षण (</span><span class="cf0">टेस्टिंग</span><span class="cf0">) जारी है </span><span class="cf0">और</span><span class="cf0"> आवश्यक </span><span class="cf0">विभागीय</span> <span class="cf0">एनओसी</span><span class="cf0"> (</span><span class="cf1">NOC) </span><span class="cf0">मिलने की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है।</span></p>
<p><span class="cf0">हालांकि, हाल ही में हुई जांच में फायर </span><span class="cf0">फाइटिंग</span> <span class="cf0">सिस्टम</span><span class="cf0"> में कुछ खामियां पाई गई थीं, जिन्हें दूर किया जा रहा है।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">सबसे पहले चलेगी </span><span class="cf0">जींद-गोहाना-सोनीपत</span><span class="cf0"> मार्ग पर </span><span class="cf0">हाइड्रोजन</span><span class="cf0"> ट्रेन</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">इस परियोजना का सबसे रोमांचक पहलू यह है कि भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के </span><span class="cf0">जींद-गोहाना-सोनीपत</span><span class="cf0"> रेल मार्ग पर दौड़ेगी। यह ट्रैक लगभग 89 किलोमीटर लंबा है। इस ट्रेन की गति 110 से 140 </span><span class="cf0">किमी</span><span class="cf0">/घंटा होगी और इसमें एक बार में 2638 यात्री सफर कर सकेंगे।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">कैसे</span> <span class="cf0">काम</span> <span class="cf0">करती</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0"> हाइड्रोजन ट्रेन?</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">यह ट्रेन हाइड्रोजन </span><span class="cf0">फ्यूल</span><span class="cf0"> सेल तकनीक पर आधारित होगी। इंजन में डीजल या कोयले की बजाय हाइड्रोजन गैस का उपयोग होगा। सबसे खास बात यह है कि इस ट्रेन से कार्बन </span><span class="cf0">डाइऑक्साइड</span><span class="cf0"> या अन्य हानिकारक </span><span class="cf0">गैसें</span><span class="cf0"> नहीं </span><span class="cf0">निकलेंगी</span><span class="cf0">। इसके बदले इंजन सिर्फ भाप और पानी </span><span class="cf0">उत्सर्जित</span><span class="cf0"> करेगा, जिससे यह ट्रेन 100% पर्यावरण-अनुकूल होगी।</span></p>
<p><span class="cf0">इस पहल से रेलवे को धीरे-धीरे डीजल ट्रेनों से हटाकर ग्रीन ट्रांसपोर्ट की ओर बढ़ने में मदद मिलेगी। हाइड्रोजन ट्रेनों से न केवल कार्बन उत्सर्जन कम होगा, बल्कि ईंधन की लागत में भी लंबे समय में कमी आएगी।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Oct 2025 11:11:48 +0530</pubDate>
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