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                <title>renewable energy - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>renewable energy RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>दासिया में बन रहे इथेनॉल प्लांट सभी मानकों का हो रहा पालन,अक्टूबर 2026 तक उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य- निदेशक रोहन जायसवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती  जिले में रुधौली विधानसभा क्षेत्र के दासिया गांव में निर्माणाधीन अनीता डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड के प्रस्तावित इथेनॉल प्लांट को लेकर सोमवार को रेलवे स्टेशन रोड स्थित एक निजी होटल में प्रेसवार्ता आयोजित की गई। कंपनी के निदेशक रोहन जायसवाल और अन्य अधिकारियों ने परियोजना की विस्तृत जानकारी देते हुए इसे पर्यावरण अनुकूल एवं आधुनिक तकनीक पर आधारित बताया।रोहन जायसवाल ने कहा कि प्लांट में अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे किसी भी प्रकार का अशोधित या हानिकारक अपशिष्ट जल बाहर नहीं छोड़ा जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने दावा किया कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े सभी मानकों का कड़ाई</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182879/ethanol-plants-being-built-in-dacia-are-following-all-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260706-wa0065.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती  जिले में रुधौली विधानसभा क्षेत्र के दासिया गांव में निर्माणाधीन अनीता डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड के प्रस्तावित इथेनॉल प्लांट को लेकर सोमवार को रेलवे स्टेशन रोड स्थित एक निजी होटल में प्रेसवार्ता आयोजित की गई। कंपनी के निदेशक रोहन जायसवाल और अन्य अधिकारियों ने परियोजना की विस्तृत जानकारी देते हुए इसे पर्यावरण अनुकूल एवं आधुनिक तकनीक पर आधारित बताया।रोहन जायसवाल ने कहा कि प्लांट में अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे किसी भी प्रकार का अशोधित या हानिकारक अपशिष्ट जल बाहर नहीं छोड़ा जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने दावा किया कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े सभी मानकों का कड़ाई से पालन किया जाएगा तथा अपशिष्ट का वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण किया जाएगा।एनओसी संबंधी सवालों के जवाब में कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय, प्रादेशिक और स्थानीय स्तर पर आवश्यक सभी विभागीय अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त किए जा चुके हैं। साथ ही जिला पंचायत एवं ग्राम पंचायत से भी अनुमति मिल चुकी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार शिलान्यास से पूर्व मुख्य राजस्व अधिकारी की मौजूदगी में किसानों के साथ बैठक की गई थी, जिसके बाद नियमानुसार निर्माण कार्य शुरू कराया गया।कंपनी का दावा है कि परियोजना का लगभग 75 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और अक्टूबर 2026 तक उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। प्लांट में किसानों से टूटे चावल, मक्का, भूसी सहित अन्य कृषि उत्पाद खरीदकर इथेनॉल का उत्पादन किया जाएगा, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब दो हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। प्रेसवार्ता के दौरान पर्यावरणीय प्रभाव, भूजल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और स्थानीय लोगों की आशंकाओं से जुड़े सवाल भी उठाए गए, जिनका कंपनी प्रतिनिधियों ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि परियोजना का संचालन सभी वैधानिक और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप किया जाएगा तथा संबंधित विभागों की नियमित निगरानी भी होती रहेगी। इस अवसर पर कंपनी के प्रोपराइटर सुधीर जायसवाल, यूनिट हेड आर.के. दुबे, चीफ कंसल्टेंट पी.एन. पांडेय, तकनीकी विशेषज्ञ तथा प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि मौजूद रहे।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 21:58:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्रामीण भारत की शिक्षा और स्वास्थ्य को ऊर्जा दे सकते हैं सोलर प्लांट</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> भारत वर्ष </span>2047 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">श्री नरेंद्र मोदी</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरित ऊर्जा और आधुनिक शिक्षा जैसे अनेक महत्वाकांक्षी अभियान चलाए जा रहे हैं। लेकिन इन सभी योजनाओं की सफलता का आधार एक ही है निर्बाध बिजली आपूर्ति।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के महानगरों और बड़े शहरों में बिजली की उपलब्धता अपेक्षाकृत बेहतर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए वहां डिजिटल शिक्षा और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लोगों तक पहुँच रहा है। इसके विपरीत तहसील</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कस्बाई और ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेज और अस्पताल आज</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182800/solar-plants-can-provide-energy-to-the-education-and-health"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/image1170x530cropped.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> भारत वर्ष </span>2047 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">श्री नरेंद्र मोदी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरित ऊर्जा और आधुनिक शिक्षा जैसे अनेक महत्वाकांक्षी अभियान चलाए जा रहे हैं। लेकिन इन सभी योजनाओं की सफलता का आधार एक ही है निर्बाध बिजली आपूर्ति।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के महानगरों और बड़े शहरों में बिजली की उपलब्धता अपेक्षाकृत बेहतर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए वहां डिजिटल शिक्षा और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लोगों तक पहुँच रहा है। इसके विपरीत तहसील</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कस्बाई और ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेज और अस्पताल आज भी बिजली की अनियमित आपूर्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कम वोल्टेज और बार-बार होने वाली तकनीकी खराबियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में स्मार्ट क्लास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल लैब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कंप्यूटर शिक्षा और आधुनिक चिकित्सा उपकरण केवल सरकारी योजनाओं की फाइलों तक सीमित होकर रह जाते हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विडंबना यह भी है कि एक ओर सरकार सरकारी संस्थानों को हाईटेक बनाने पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं दूसरी ओर इन संस्थानों के सुचारू संचालन के लिए सबसे आवश्यक संसाधन बिजली की स्थायी व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। बिना बिजली के डिजिटल शिक्षा और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की कल्पना अधूरी है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी स्थिति में सरकार को एक दूरदर्शी निर्णय लेते हुए देश के सभी शासकीय स्कूलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेजों और अस्पतालों में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रूफटॉप सोलर प्लांट</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">स्थापित करने की राष्ट्रीय योजना लागू करनी चाहिए। यह केवल वैकल्पिक ऊर्जा का उपाय नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को एक साथ मजबूत करने वाला ऐतिहासिक कदम होगा।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सोलर प्लांट स्थापित होने से इन संस्थानों को दिनभर निर्बाध बिजली मिलेगी। विद्यार्थियों की पढ़ाई बिना व्यवधान जारी रहेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर लैब प्रभावी ढंग से संचालित हो सकेंगी तथा अस्पतालों में जीवन रक्षक उपकरण बिजली संकट से प्रभावित नहीं होंगे। इतना ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार का हर वर्ष बिजली बिलों पर होने वाला करोड़ों रुपये का व्यय भी काफी हद तक कम हो जाएगा। इससे पर्यावरण संरक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्बन उत्सर्जन में कमी और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आज आवश्यकता केवल योजनाएं बनाने की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन्हें धरातल पर टिकाऊ बनाने की है। </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि सरकार वास्तव में विकसित भारत का सपना साकार करना चाहती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो ग्रामीण शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना होगा। शासकीय स्कूलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेजों और अस्पतालों में सोलर प्लांट लगाने की पहल इसी दिशा में एक क्रांतिकारी कदम सिद्ध हो सकती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विकसित भारत की मजबूत नींव तभी रखी जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब गांव का विद्यालय और अस्पताल भी शहरों की तरह रोशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक और ऊर्जा संपन्न होंगे।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>अरविंद रावल</strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 22:24:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बस्ती में बनेगा एथेनालः 350 करोड की लागत से फैक्ट्री का निर्माण दसिया में शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले केवाल्टरगंज सुगर मिल के बंद हो जाने के बाद जनपद में एथनाल उत्पादन के लिये बड़ी फैक्ट्री का निर्माण सल्टौआ गोपालपुर विकास खण्ड क्षेत्र के दसिया में हो रहा है। कारखाने के शीघ्र शुरू हो जाने की उम्मीद है। इसके शुरू होने से लगभग 700 लोगों को सीधे और 2 हजार लोगों को अपरोक्ष रोजगार मिलेगा। अनीता डिस्टलरी प्राइवेट लिमिटेड के टेक्निकल अधिकारी पी.एन. पाण्डेय ने बताया कि लगभग 350 करोड़ की लागत से बनने वाले कारखाने में एथनाल का निर्माण किया जायेगा</div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने बताया कि कारखाने में प्रदूषण नियंत्रण की पूरी व्यवस्था की गई है। बताया</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182274/ethanol-will-be-made-in-basti-construction-of-factory-at"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260628-wa0061.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले केवाल्टरगंज सुगर मिल के बंद हो जाने के बाद जनपद में एथनाल उत्पादन के लिये बड़ी फैक्ट्री का निर्माण सल्टौआ गोपालपुर विकास खण्ड क्षेत्र के दसिया में हो रहा है। कारखाने के शीघ्र शुरू हो जाने की उम्मीद है। इसके शुरू होने से लगभग 700 लोगों को सीधे और 2 हजार लोगों को अपरोक्ष रोजगार मिलेगा। अनीता डिस्टलरी प्राइवेट लिमिटेड के टेक्निकल अधिकारी पी.एन. पाण्डेय ने बताया कि लगभग 350 करोड़ की लागत से बनने वाले कारखाने में एथनाल का निर्माण किया जायेगा</div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने बताया कि कारखाने में प्रदूषण नियंत्रण की पूरी व्यवस्था की गई है। बताया कि मक्का और चावल से एथनाल पैदा किया जायेगा। इससे जहां ऊर्जा संकट दूर होगा वहीं विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत सरकार की संस्तुति पर बन रहे कारखाने में भूजल यानी पानी से नहीं धान, मक्का और भूसी से इथेनाल बनेगा। कम्पनी का खुद का 7 मेगावट का पावर प्लांट, वायु प्रदूषण मुक्त 72 मीटर ऊँची चिमनी, लगभग 350 करोड़ की लागत से बनने वाली फैक्ट्री , 6 से 8 सौ कर्मचारी, जल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानक पर खरा उतरने वाला प्लांट, सैकड़ों लोगों को होटल, चाय, पानी, बिस्कुट, सुर्ती बीड़ी, गुटखा जैसे दुकान खोलने वालों को अप्रत्यक्ष रोजगार देगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह पूंछे जाने पर कि कुछ लोग किस आधार पर फैक्ट्री निर्माण का विरोध कर रहे हैं निदेशक सुधीर जायसवाल ने बताया कि यह उनका अपना निजी दृष्टिकोण है। यहां फैक्ट्री पूरे मानक और नियमों के अनुसार हो रहा है। इससे क्षेत्र के किसानों और बेरोजगारों को सर्वाधिक लाभ होगा।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb" style="text-align:justify;"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 15:33:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जिलाधिकारी ने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रगति की समीक्षा की</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी  मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में गुरूवार को संगम सभागार में पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के सम्बंध में बैठक आयोजित की गयी तथा सभी सम्बंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। बैठक में सौर ऊर्जा कनेक्शन के लिए प्राप्त आवेदन, स्वीकृत आवेदन एवं लम्बित आवेदन, डिस्कॉम, बैंक एवं वेण्डर्स द्वारा आवेदन निस्तारण एवं लम्बित आवेदनों की स्थिति, विद्युत विभाग के अन्तर्गत निरीक्षण हेतु लम्बित प्रकरण एवं पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजनान्तर्गत बैंक स्तर पर लोन निर्गत/पार्शियल पेमेण्ट सम्बंधित लम्बित प्रकरणों के बारे में विस्तार से समीक्षा की गयी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">          जिलाधिकारी ने पीओनेडा से पीएम</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181029/district-magistrate-reviewed-the-progress-of-pm-suryghar-free-electricity"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260611-wa0121.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी  मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में गुरूवार को संगम सभागार में पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के सम्बंध में बैठक आयोजित की गयी तथा सभी सम्बंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। बैठक में सौर ऊर्जा कनेक्शन के लिए प्राप्त आवेदन, स्वीकृत आवेदन एवं लम्बित आवेदन, डिस्कॉम, बैंक एवं वेण्डर्स द्वारा आवेदन निस्तारण एवं लम्बित आवेदनों की स्थिति, विद्युत विभाग के अन्तर्गत निरीक्षण हेतु लम्बित प्रकरण एवं पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजनान्तर्गत बैंक स्तर पर लोन निर्गत/पार्शियल पेमेण्ट सम्बंधित लम्बित प्रकरणों के बारे में विस्तार से समीक्षा की गयी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">     जिलाधिकारी ने पीओनेडा से पीएम सूर्यघर योजना के प्रगति के बारे में जानकारी लेते हुए निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष शत-प्रतिशत प्रगति सुनिश्चित किये जाने के निर्देश सम्बंधित अधिकारियों को दिए है। उन्होंने पीओ नेडा से टॉप टेन पेण्डेंसी वाले वेण्डरों के विरूद्ध कार्रवाई हेतु शासन को पत्र प्रेषित करने के लिए कहा है। उन्होंने पीओ नेडा से सौर ऊर्जा कनेक्शन के लिए प्राप्त आवेदन, स्वीकृत आवेदन एवं लम्बित आवेदन की स्थिति की जानकारी ली, जिसपर बताया गया कि कुल 33995 आवेदन प्राप्त हुए है, जिनमें 33978 आवेदन स्वीकृत हुए है तथा 32823 आवेदन के लिए वेण्डर का सेलेक्शन हो चुका है, जिसमें से 19955 में इंस्टालेशन का कार्य पूर्ण हो चुका है। उन्होंने पीओ नेडा को विद्युत विभाग व बैंक के अधिकारियों एवं पीएम सूर्यघर योजना व क्लीन एनर्जी का वेण्डरों एवं लक्षित विभाग के साथ बैठक कर पेंडेसी को समाप्त करने और उपभोक्ताओं का चिन्हांकन करने के लिए कहा है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने  कहा कि प्रत्येक वेण्डर को पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का जो लक्ष्य तय किया गया है, उस लक्ष्य के अनुसार हर घर में सोलर सिस्टम लगाने के लिए प्राथमिकता पर कार्यवाही करें।  विद्युत विभाग के सभी अधिकारियों को उनके स्तर पर पीएम सूर्यघर योजना से सम्बंधित लम्बित सभी पेण्डेंसी को अभियान चलाकर प्राथमिकता पर निस्तारित करते हुए ज्यादा से ज्यादा सोलर कनेक्शन कराये जाने के लिए कहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> बैठक में उपस्थित एलडीएम से बैंक स्तर पर लम्बित प्रकरणों की नियमित समीक्षा करते हुए जल्द से जल्द पेण्डेंसी को समाप्त कराने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि पीएम सूर्यघर योजना के वेण्डरों के द्वारा सोलर सिस्टम लगाये जाने में अच्छा काम करने वाले वेंडरों को प्रमोट करें।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने बैठक में उपस्थित एडीओ पंचायतों से प्रत्येक विकास खण्ड में एक ग्राम का सोलर ग्राम के रूप में चयन करते हुए गांव के शत-प्रतिशत घरों में सोलर कनेक्शन कराये जाने के लिए कहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने सभी आवासों में पीएम सूर्यघर योजना के तहत सोलर सिस्टम लगाये जाने के लिए निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना फ्लैगशिप स्कीम है, जिसमें घरों में सोलर कनेक्शन लगाये जाने पर सरकार के द्वारा सब्सिडी प्रदान की जा रही है और सोलर कनेक्शन होने से विद्युत खपत में कमी आयेंगी तथा विद्युत बिल में बचत भी होगी, इसलिए सभी लोग इस योजना का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाये।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">     इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, जिला पंचायतराज अधिकारी रवि शंकर द्विवेदी, पीओ नेडा  कोमिल द्विवेदी, विद्युत विभाग के अधिकारी सहित अन्य सम्बंधित अधिकारी उपस्थित रहे।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 20:44:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बढ़ती कीमतों से बिगड़ी मध्यवर्गीय सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">मानवी अहंकार के परिणाम स्वरूप अमेरिका ईरान इजरायल और यूक्रेन रूस युद्ध के चलते पेट्रोलियम पदार्थों के दाम लगभग विश्व के हर देश में बढ़ गए हैं। इसी परिपेक्ष में भारत में भी बढ़ते पेट्रोल डीजल के दामों के करण भारतीय मध्यम वर्गीय अर्थव्यवस्था तथा सामाजिक संरचना बृहद रूप में प्रभावित हुई है । विश्व स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, युद्धों और शक्ति-संघर्षों का सबसे अधिक प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका-ईरान तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध तथा मध्य-पूर्व में इजरायल से जुड़े संघर्षों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में हुई वृद्धि ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180351/middle-class-socio-economic-system-deteriorated-due-to-rising-prices"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images-(1)2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मानवी अहंकार के परिणाम स्वरूप अमेरिका ईरान इजरायल और यूक्रेन रूस युद्ध के चलते पेट्रोलियम पदार्थों के दाम लगभग विश्व के हर देश में बढ़ गए हैं। इसी परिपेक्ष में भारत में भी बढ़ते पेट्रोल डीजल के दामों के करण भारतीय मध्यम वर्गीय अर्थव्यवस्था तथा सामाजिक संरचना बृहद रूप में प्रभावित हुई है । विश्व स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, युद्धों और शक्ति-संघर्षों का सबसे अधिक प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका-ईरान तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध तथा मध्य-पूर्व में इजरायल से जुड़े संघर्षों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में हुई वृद्धि ने लगभग प्रत्येक देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने विशेष रूप से भारतीय मध्यम वर्ग की आर्थिक और सामाजिक संरचना को गहरे स्तर पर प्रभावित किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा प्रभाव घरेलू बाजार पर पड़ता है। पेट्रोल और डीजल केवल वाहन चलाने के साधन नहीं हैं, बल्कि वे संपूर्ण आर्थिक गतिविधियों की रीढ़ हैं। परिवहन, कृषि, उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र लगभग सभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन पर निर्भर हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डीजल की कीमतों में वृद्धि का सबसे अधिक प्रभाव परिवहन क्षेत्र पर पड़ता है। देश में अधिकांश माल ढुलाई ट्रकों के माध्यम से होती है। जब डीजल महंगा होता है, तो परिवहन लागत बढ़ जाती है। इसका परिणाम यह होता है कि खाद्यान्न, फल-सब्जियां, दूध, दालें, निर्माण सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतें स्वतः बढ़ने लगती हैं। व्यापारी अतिरिक्त लागत का भार अंततः उपभोक्ताओं पर डाल देते हैं। इस प्रकार महंगाई का एक ऐसा चक्र प्रारंभ हो जाता है, जिससे सामान्य नागरिक बच नहीं पाता।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय मध्यम वर्ग पहले से ही शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रोजगार संबंधी चुनौतियों से जूझ रहा है। पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों ने उसकी मासिक आय और व्यय के संतुलन को और बिगाड़ दिया है। जिन परिवारों के पास निजी वाहन हैं, उनके लिए कार्यालय, विद्यालय और अन्य आवश्यक यात्राओं का खर्च बढ़ गया है। वहीं रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि ने घरेलू बजट को प्रभावित किया है। परिणामस्वरूप परिवारों को अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओं के बीच समझौता करना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">महंगाई का सामाजिक प्रभाव भी कम गंभीर नहीं है। जब आय स्थिर हो और खर्च लगातार बढ़ता जाए, तो परिवारों में तनाव बढ़ने लगता है। आर्थिक दबाव पारिवारिक संबंधों, सामाजिक सहभागिता और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। मध्यम वर्ग, जो समाज की स्थिरता और विकास का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है, स्वयं असुरक्षा और भविष्य की चिंताओं से घिर जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि क्षेत्र भी इससे प्रभावित हुआ है। डीजल से चलने वाले पंप, ट्रैक्टर और कृषि यंत्रों की लागत बढ़ने से खेती महंगी हो गई है। उत्पादन लागत बढ़ने पर किसान अपनी उपज का उचित मूल्य चाहते हैं, जिससे बाजार में खाद्य पदार्थों की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इस प्रकार महंगाई का प्रभाव खेत से लेकर थाली तक दिखाई देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अर्थशास्त्री लंबे समय से कहते रहे हैं कि ऊर्जा की कीमतें किसी भी अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण संकेतक होती हैं। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह ने अनेक अवसरों पर ऊर्जा सुरक्षा को आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक बताया था। वहीं अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने भी विकास को केवल आय वृद्धि नहीं बल्कि जीवन-स्तर की गुणवत्ता से जोड़कर देखा है। यदि बढ़ती महंगाई लोगों की बुनियादी आवश्यकताओं को प्रभावित करती है, तो विकास का वास्तविक लाभ समाज तक नहीं पहुंच पाता।</p>
<p style="text-align:justify;">आज आवश्यकता इस बात की है कि वैश्विक स्तर पर युद्ध और संघर्ष की राजनीति के स्थान पर संवाद और सहयोग को बढ़ावा दिया जाए। साथ ही भारत को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में और अधिक प्रयास करने होंगे। सौर ऊर्जा, जैव ईंधन और विद्युत वाहनों को बढ़ावा देकर पेट्रोलियम पर निर्भरता कम की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">बढ़ती पेट्रोलियम कीमतें केवल आर्थिक समस्या नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक स्थिरता और जीवन की गुणवत्ता से भी जुड़ी हुई हैं। युद्धों और वैश्विक तनावों की कीमत अंततः आम नागरिक चुकाता है। इसलिए विश्व शांति, ऊर्जा सुरक्षा और संतुलित आर्थिक नीतियां ही मध्यम वर्ग को राहत प्रदान कर सकती हैं। जब तक पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों पर नियंत्रण नहीं होगा, तब तक महंगाई का दबाव भारतीय मध्यम वर्ग की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था को प्रभावित करता रहेगा।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:43:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लू की हवा का प्रकोप, कैसे सांस लेंगे हम</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">बेरहम तथा अप्राकृतिक प्रकृति के दोहन का परिणाम अब अपने चरम परिणामों के साथ हमारे सामने खड़ा है। आने वाले महीनों में मौसम वैज्ञानिकों ने जिस तीव्र गर्मी की आशंका जताई है, वह केवल मौसमी उतार-चढ़ाव नहीं बल्कि दशकों से जारी प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन का प्रत्यक्ष परिणाम है। इंटरगवर्नमेंटल क्लाइमेटिक चेंज स्टडीज की नवीनतम रिपोर्टें स्पष्ट करती हैं कि वैश्विक तापमान औद्योगिक क्रांति के बाद लगभग 1.1 से 1.2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है और यदि वर्तमान उत्सर्जन दर जारी रही तो 2030 के दशक में यह 1.5 डिग्री की सीमा को पार कर जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ल्ड मेटियोरोलिजकल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177276/how-will-we-breathe-the-wrath-of-heat-wave"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/154169033.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बेरहम तथा अप्राकृतिक प्रकृति के दोहन का परिणाम अब अपने चरम परिणामों के साथ हमारे सामने खड़ा है। आने वाले महीनों में मौसम वैज्ञानिकों ने जिस तीव्र गर्मी की आशंका जताई है, वह केवल मौसमी उतार-चढ़ाव नहीं बल्कि दशकों से जारी प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन का प्रत्यक्ष परिणाम है। इंटरगवर्नमेंटल क्लाइमेटिक चेंज स्टडीज की नवीनतम रिपोर्टें स्पष्ट करती हैं कि वैश्विक तापमान औद्योगिक क्रांति के बाद लगभग 1.1 से 1.2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है और यदि वर्तमान उत्सर्जन दर जारी रही तो 2030 के दशक में यह 1.5 डिग्री की सीमा को पार कर जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ल्ड मेटियोरोलिजकल ऑर्गेनाइजेशन ने हाल ही में चेतावनी दी है कि पिछले आठ वर्ष मानव इतिहास के सबसे गर्म वर्ष रहे हैं और दक्षिण एशिया विशेष रूप से चरम हीटवेव की चपेट में है। जब हम अपने विकास का इतिहास देखते हैं तो ब्रिटिश सत्ता के दौरान हमारे संसाधनों का अंधाधुंध दोहन हुआ, परंतु विडंबना यह है कि स्वतंत्रता के बाद भी हमने उसी मॉडल को और तीव्र रूप में अपनाया, परिणामस्वरूप मनुष्य तो स्वतंत्र हुआ पर प्रकृति आज भी बंधनों में जकड़ी रही। यूनाइटेड नेशंस एनवायरमेंटल एजेंसी के अनुसार दुनिया हर वर्ष लगभग 1 करोड़ हेक्टेयर वन क्षेत्र खो रही है, और भारत भी इससे अछूता नहीं है, जहाँ शहरीकरण और औद्योगीकरण की तेज रफ्तार ने जंगलों, जलस्रोतों और जैव विविधता पर गंभीर दबाव डाला है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमूमन हमारी जरूरत रोटी, कपड़ा, मकान और जल की थी, किंतु हमने विकास को उपभोग और विस्तार की अंधी दौड़ बना दिया, मशीनें जितनी विशाल होती गईं, मनुष्य उतना ही प्रकृति से दूर और बौना होता गया। फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन के आंकड़े बताते हैं कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से विश्व की लगभग 33 प्रतिशत भूमि की उर्वरता प्रभावित हुई है, भारत में भी कई क्षेत्रों में मिट्टी की गुणवत्ता तेजी से गिर रही है और भूजल स्तर खतरनाक रूप से नीचे जा रहा है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार भारत विश्व के उन देशों में शामिल है जहाँ जल संकट तेजी से गहराता जा रहा है और 2030 तक देश की जल मांग उपलब्ध संसाधनों से दोगुनी हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब से हमने विकास के नाम पर उद्योगों की चिमनियाँ ऊँची कीं, मोबाइल क्रांति का बटन दबाया और डिजिटल संसार में प्रवेश किया, तब से प्रकृति की ध्वनियाँ धीमी पड़ती चली गईं, झरनों का कलकल स्वर, पक्षियों का कलरव और नदियों की जीवनदायिनी धारा जैसे विलुप्त होती जा रही है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अनुसार भारत के कई प्रमुख शहरों की वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुँच चुकी है, वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन अनुमान है कि वायु प्रदूषण के कारण हर वर्ष लाखों समयपूर्व मृत्यु हो रही हैं। अब प्रश्न यह है कि विकास के नाम पर हमें केवल डिजिटल इंडिया चाहिए या हरित भारत की भी आवश्यकता है, क्या बच्चों के हाथ में केवल इंटरनेट देकर हम भविष्य सुरक्षित कर लेंगे या उन्हें स्वच्छ हवा, जल और हरियाली भी देनी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हरा-भरा हिंदुस्तान और डिजिटल इंडिया विरोधी नहीं बल्कि पूरक हो सकते हैं, बशर्ते हम संतुलन बनाना सीखें। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा संस्थान के अनुसार नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेज़ी से बढ़ना ही जलवायु संकट से निपटने का सबसे प्रभावी उपाय है और भारत ने सौर तथा पवन ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति भी की है, फिर भी यह प्रयास पर्याप्त नहीं है जब तक कि हम उपभोग की प्रवृत्ति को नियंत्रित न करें। महात्मा गांधी का यह कथन आज और भी प्रासंगिक हो उठता है कि पृथ्वी सभी की आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है, किंतु किसी एक के लालच को नहीं। भारत की विडंबना यह है कि एक ओर महानगरों की चकाचौंध, मेट्रो, डिजिटल नेटवर्क और ऊँची इमारतें हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण भारत में आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, किसान पसीना बहा रहा है और बच्चे दीपक या कैरोसिन की रोशनी में पढ़ रहे हैं, यह असमानता केवल आर्थिक नहीं बल्कि विकास के असंतुलित मॉडल की भी देन है।</p>
<p style="text-align:justify;">नीति आयोग की रिपोर्टों में भी जल संकट, कृषि संकट और पर्यावरणीय असंतुलन को गंभीर चुनौती के रूप में रेखांकित किया गया है। हमें यह स्वीकार करना होगा कि विकास का रास्ता हरित क्रांति, सतत संसाधन उपयोग और पर्यावरण संरक्षण से होकर ही गुजरता है, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोगैस, ज्वार-भाटा ऊर्जा जैसे विकल्प केवल विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्यता बन चुके हैं। यदि जल, खनिज और प्राकृतिक संसाधन ही समाप्त हो गए तो न तो उद्योग चलेंगे, न ऊर्जा उत्पादन होगा और न ही डिजिटल इंडिया का सपना साकार होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी कवि की पंक्ति आज सच लगती है कि यदि घर बनाओ तो एक पेड़ भी लगा लेना, क्योंकि वही पेड़ आने वाली पीढ़ियों की सांसों का आधार बनेगा। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम विकास की परिभाषा को पुनः परिभाषित करें, उसे केवल आर्थिक प्रगति नहीं बल्कि पर्यावरणीय संतुलन, सामाजिक समानता और मानवीय संवेदनाओं के साथ जोड़ें, तभी हम अपनी 141 करोड़ जनसंख्या को स्वच्छ, सुरक्षित और संतुलित भविष्य दे पाएंगे और एक ऐसे भारत का निर्माण कर सकेंगे जहाँ हरित क्रांति और डिजिटल प्रगति साथ-साथ आगे बढ़ें, न कि एक-दूसरे के विकल्प बनकर खड़े हों।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 17:29:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Solar Pump: हरियाणा मे किसानों के लिए खुशखबरी, सोलर पंप पर मिल रही 75% सब्सिडी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>Solar Pump: हरियाणा के किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग की ओर से प्रधानमंत्री कुसुम (PM-KUSUM) योजना के तहत किसानों को 75 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर एनर्जी पंप लगाने का अवसर दिया जा रहा है। नारनौल के अतिरिक्त उपायुक्त ने जानकारी दी कि इच्छुक किसान 25 दिसंबर से 29 दिसंबर 2025 तक हरियाणा सरकार के सरल पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।</p><p>योजना के तहत किसानों को 3 एचपी, 5 एचपी, 7.5 एचपी और 10 एचपी क्षमता के सोलर पंप 12 अलग-अलग श्रेणियों में उपलब्ध कराए जाएंगे। लाभार्थियों का चयन परिवार की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164276/good-news-for-farmers-in-haryana-75-subsidy-is-available"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/solar-pump.jpg" alt=""></a><br /><p>Solar Pump: हरियाणा के किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग की ओर से प्रधानमंत्री कुसुम (PM-KUSUM) योजना के तहत किसानों को 75 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर एनर्जी पंप लगाने का अवसर दिया जा रहा है। नारनौल के अतिरिक्त उपायुक्त ने जानकारी दी कि इच्छुक किसान 25 दिसंबर से 29 दिसंबर 2025 तक हरियाणा सरकार के सरल पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।</p><p>योजना के तहत किसानों को 3 एचपी, 5 एचपी, 7.5 एचपी और 10 एचपी क्षमता के सोलर पंप 12 अलग-अलग श्रेणियों में उपलब्ध कराए जाएंगे। लाभार्थियों का चयन परिवार की वार्षिक आय और उपलब्ध कृषि भूमि के आधार पर किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों ने पहले बिजली आधारित ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए आवेदन किया है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी, बशर्ते वे अपना मौजूदा बिजली कनेक्शन सरेंडर करें। इसके अलावा वर्ष 2019 से 2023 के बीच बिजली आधारित ट्यूबवेल के लिए आवेदन करने वाले किसान भी प्राथमिकता सूची में शामिल रहेंगे।</p><p>प्रशासन ने भूजल स्तर को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिन गांवों में भूजल स्तर 100 फीट से नीचे चला गया है, वहां माइक्रो-इरिगेशन सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। अन्य क्षेत्रों में भी भूमिगत पाइपलाइन या माइक्रो-इरिगेशन सिस्टम जरूरी रहेगा। वहीं, धान की खेती करने वाले वे किसान जिनके क्षेत्र में भूजल स्तर 40 मीटर से नीचे है, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे।</p><p>वेटिंग लिस्ट में शामिल पुराने आवेदकों को भी राहत दी गई है। यदि वे अपने सोलर पंप की क्षमता या प्रकार बदलना चाहते हैं, तो वे पुरानी फैमिली आईडी के माध्यम से दोबारा आवेदन कर सकते हैं। ऐसे किसानों को नया चालान जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि उनका अंश पहले ही विभाग के पास जमा है। यदि तय समय सीमा में नया आवेदन नहीं किया गया और पंप आवंटित नहीं होता, तो जमा की गई राशि वापस कर दी जाएगी।</p><p>ऑनलाइन आवेदन के लिए किसानों के पास फैमिली आईडी, कृषि भूमि के रिकॉर्ड या जमाबंदी और यह प्रमाण पत्र होना जरूरी है कि आवेदक के नाम पर कोई बिजली आधारित पंप नहीं है। आवेदन प्रक्रिया और कंपनी चयन के बाद किसानों को वर्चुअल अकाउंट नंबर के साथ चालान जारी किया जाएगा, जिसमें लाभार्थी को अपना हिस्सा NEFT या RTGS के माध्यम से जमा करना होगा।</p><p>विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि सोलर पंपों पर 5 साल की वारंटी दी जाएगी और साथ ही 5 वर्षों के लिए चोरी व प्राकृतिक आपदाओं के खिलाफ बीमा सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Dec 2025 10:49:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Hydrogen Train: हरियाणा में दौड़ेगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, जानें कब और कहां से चलेगी </title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">Hydrogen Train: भारत</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">हरित</span> <span class="cf0">ऊर्जा</span><span class="cf0"> (</span><span class="cf1">Green Energy) </span><span class="cf0">की</span> <span class="cf0">दिशा</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">एक</span> <span class="cf0">ऐतिहासिक</span> <span class="cf0">कदम</span> <span class="cf0">उठाया</span> <span class="cf0">गया</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">देश</span> <span class="cf0">का</span> <span class="cf0">पहला</span> <span class="cf0">हाइड्रोजन</span> <span class="cf0">उत्पादन</span> <span class="cf0">प्लांट</span> <span class="cf0">लगभग</span> <span class="cf0">तैयार</span> <span class="cf0">है</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">अगले</span><span class="cf0"> 10-15 </span><span class="cf0">दिनों</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">पूरी</span> <span class="cf0">तरह</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">चालू</span> <span class="cf0">होने</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">संभावना</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">इसके</span> <span class="cf0">बाद</span> <span class="cf0">भारत</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">पहली</span> <span class="cf0">हाइड्रोजन</span> <span class="cf0">ईंधन</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">चलने</span> <span class="cf0">वाली</span> <span class="cf0">ट्रेन</span> <span class="cf0">जींद-गोहाना-सोनीपत</span> <span class="cf0">मार्ग</span> <span class="cf0">पर</span> <span class="cf0">पटरियों</span> <span class="cf0">पर</span> <span class="cf0">दौड़ेगी</span><span class="cf0">।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">प्लांट</span> <span class="cf0">निर्माण</span><span class="cf0"> कार्य अंतिम चरण में</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">इस </span><span class="cf0">पायलट</span><span class="cf0"> परियोजना के तहत 430 किलोग्राम प्रतिदिन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता वाला प्लांट स्थापित किया गया है, जिस पर करीब 70 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। प्लांट में अभी परीक्षण (</span><span class="cf0">टेस्टिंग</span><span class="cf0">) जारी</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156638/hydrogen-train"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/hydrogen-train.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">Hydrogen Train: भारत</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">हरित</span> <span class="cf0">ऊर्जा</span><span class="cf0"> (</span><span class="cf1">Green Energy) </span><span class="cf0">की</span> <span class="cf0">दिशा</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">एक</span> <span class="cf0">ऐतिहासिक</span> <span class="cf0">कदम</span> <span class="cf0">उठाया</span> <span class="cf0">गया</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">देश</span> <span class="cf0">का</span> <span class="cf0">पहला</span> <span class="cf0">हाइड्रोजन</span> <span class="cf0">उत्पादन</span> <span class="cf0">प्लांट</span> <span class="cf0">लगभग</span> <span class="cf0">तैयार</span> <span class="cf0">है</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">अगले</span><span class="cf0"> 10-15 </span><span class="cf0">दिनों</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">पूरी</span> <span class="cf0">तरह</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">चालू</span> <span class="cf0">होने</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">संभावना</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">इसके</span> <span class="cf0">बाद</span> <span class="cf0">भारत</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">पहली</span> <span class="cf0">हाइड्रोजन</span> <span class="cf0">ईंधन</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">चलने</span> <span class="cf0">वाली</span> <span class="cf0">ट्रेन</span> <span class="cf0">जींद-गोहाना-सोनीपत</span> <span class="cf0">मार्ग</span> <span class="cf0">पर</span> <span class="cf0">पटरियों</span> <span class="cf0">पर</span> <span class="cf0">दौड़ेगी</span><span class="cf0">।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">प्लांट</span> <span class="cf0">निर्माण</span><span class="cf0"> कार्य अंतिम चरण में</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">इस </span><span class="cf0">पायलट</span><span class="cf0"> परियोजना के तहत 430 किलोग्राम प्रतिदिन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता वाला प्लांट स्थापित किया गया है, जिस पर करीब 70 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। प्लांट में अभी परीक्षण (</span><span class="cf0">टेस्टिंग</span><span class="cf0">) जारी है </span><span class="cf0">और</span><span class="cf0"> आवश्यक </span><span class="cf0">विभागीय</span> <span class="cf0">एनओसी</span><span class="cf0"> (</span><span class="cf1">NOC) </span><span class="cf0">मिलने की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है।</span></p>
<p><span class="cf0">हालांकि, हाल ही में हुई जांच में फायर </span><span class="cf0">फाइटिंग</span> <span class="cf0">सिस्टम</span><span class="cf0"> में कुछ खामियां पाई गई थीं, जिन्हें दूर किया जा रहा है।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">सबसे पहले चलेगी </span><span class="cf0">जींद-गोहाना-सोनीपत</span><span class="cf0"> मार्ग पर </span><span class="cf0">हाइड्रोजन</span><span class="cf0"> ट्रेन</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">इस परियोजना का सबसे रोमांचक पहलू यह है कि भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के </span><span class="cf0">जींद-गोहाना-सोनीपत</span><span class="cf0"> रेल मार्ग पर दौड़ेगी। यह ट्रैक लगभग 89 किलोमीटर लंबा है। इस ट्रेन की गति 110 से 140 </span><span class="cf0">किमी</span><span class="cf0">/घंटा होगी और इसमें एक बार में 2638 यात्री सफर कर सकेंगे।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">कैसे</span> <span class="cf0">काम</span> <span class="cf0">करती</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0"> हाइड्रोजन ट्रेन?</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">यह ट्रेन हाइड्रोजन </span><span class="cf0">फ्यूल</span><span class="cf0"> सेल तकनीक पर आधारित होगी। इंजन में डीजल या कोयले की बजाय हाइड्रोजन गैस का उपयोग होगा। सबसे खास बात यह है कि इस ट्रेन से कार्बन </span><span class="cf0">डाइऑक्साइड</span><span class="cf0"> या अन्य हानिकारक </span><span class="cf0">गैसें</span><span class="cf0"> नहीं </span><span class="cf0">निकलेंगी</span><span class="cf0">। इसके बदले इंजन सिर्फ भाप और पानी </span><span class="cf0">उत्सर्जित</span><span class="cf0"> करेगा, जिससे यह ट्रेन 100% पर्यावरण-अनुकूल होगी।</span></p>
<p><span class="cf0">इस पहल से रेलवे को धीरे-धीरे डीजल ट्रेनों से हटाकर ग्रीन ट्रांसपोर्ट की ओर बढ़ने में मदद मिलेगी। हाइड्रोजन ट्रेनों से न केवल कार्बन उत्सर्जन कम होगा, बल्कि ईंधन की लागत में भी लंबे समय में कमी आएगी।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Oct 2025 11:11:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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