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                <title>मानसून बारिश - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>मानसून बारिश RSS Feed</description>
                
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                <title>बारिश देर से आई, लेकिन कहर बरपा गई: बाढ़ के सामने बेबस इंसान</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विकास और आधुनिक तकनीक के बावजूद इंसान आखिर प्रकृति के सामने कितना असहाय है। इस साल देश के कई हिस्सों में अतिवृष्टि, बाढ़ और भूस्खलन ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कहीं नदियां खतरे के निशान के करीब पहुंच गईं तो कहीं गांवों और शहरों में पानी घरों के भीतर तक जा पहुंचा। असम में बाढ़ ने बड़ी संख्या में लोगों की जान ली और हजारों परिवारों को प्रभावित किया। अब उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना, घाघरा, राप्ती और गोमती</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185967/the-rain-came-late-but-it-wreaked-havoc-people-were"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1002177002.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विकास और आधुनिक तकनीक के बावजूद इंसान आखिर प्रकृति के सामने कितना असहाय है। इस साल देश के कई हिस्सों में अतिवृष्टि, बाढ़ और भूस्खलन ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कहीं नदियां खतरे के निशान के करीब पहुंच गईं तो कहीं गांवों और शहरों में पानी घरों के भीतर तक जा पहुंचा। असम में बाढ़ ने बड़ी संख्या में लोगों की जान ली और हजारों परिवारों को प्रभावित किया। अब उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना, घाघरा, राप्ती और गोमती जैसी नदियों के बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ा दी है। बारिश देर से जरूर आई, लेकिन जब आई तो अपने साथ ऐसा कहर लेकर आई कि कई इलाके जलमग्न हो गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में मौसम विभाग ने 68 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। लगातार बारिश के कारण राज्य की प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदियों के किनारे बसे निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ का असर साफ दिखाई देने लगा है। राज्य के 13 जिलों के करीब 173 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। लगभग 84 हजार से अधिक आबादी और 13 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र प्रभावित हुआ है। बदायूं, बहराइच, बलिया, बाराबंकी, बिजनौर, फर्रुखाबाद, गौतम बुद्ध नगर, गोंडा, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मुजफ्फरनगर, सीतापुर और उन्नाव जैसे जिलों में हालात चिंता बढ़ाने वाले हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बाढ़ का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ता है जिनकी जिंदगी नदी और खेती पर निर्भर है। कछारी क्षेत्रों में सब्जियों और अन्य फसलों के खेत पानी में डूब गए हैं। किसानों की महीनों की मेहनत और खेती में लगी पूंजी के बर्बाद होने का खतरा है। फसल खराब होने का मतलब केवल तत्काल आर्थिक नुकसान नहीं है, बल्कि आने वाले महीनों की आजीविका पर भी संकट है। छोटे और सीमांत किसान ऐसे संकट से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, क्योंकि उनके पास नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ने से शहर के कई इलाकों में पानी घुस गया है। लगातार बारिश के कारण रिहायशी क्षेत्रों में जलभराव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई घरों में पानी पहुंचने से घरेलू सामान खराब हो गया। रामबाग रेलवे स्टेशन की पटरियों तक पानी पहुंच गया और रेलवे कार्यालय भी जलभराव की चपेट में आ गए। शहर की गंभीर स्थिति को देखते हुए हाई कोर्ट ने जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को तलब किया है। यह स्थिति बताती है कि बाढ़ केवल गांवों की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि तेजी से बढ़ते शहर भी जलभराव के संकट से जूझ रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वाराणसी में गंगा का बढ़ता जलस्तर धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन को भी प्रभावित कर रहा है। घाटों के आसपास बने सौ से अधिक मंदिरों में पानी पहुंच गया है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के श्मशान क्षेत्रों तक पानी पहुंचने से अंतिम संस्कार की व्यवस्था प्रभावित हुई है। दशाश्वमेध घाट की सीढ़ियां जलमग्न होने के कारण गंगा आरती को ऊपरी हिस्से से कराना पड़ा। नमो घाट भी पानी में डूब गया। गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और जीवन का आधार है। इसलिए उसका इस तरह उफान पर आना केवल प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चिंता का विषय भी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कानपुर और उन्नाव में भी गंगा किनारे के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी भर गया है। आवागमन प्रभावित होने से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल हो गई है। प्रशासन नदी के जलस्तर और बाढ़ की स्थिति पर नजर रख रहा है। कई जिलों में स्कूलों को बंद करना पड़ा है। प्रयागराज, गोंडा, कौशांबी, गाजीपुर और भदोही में कक्षा 12 तक के स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई, जबकि कुछ अन्य जिलों में कक्षा आठ तक के विद्यालय बंद रखे गए। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए ऐसे कदम जरूरी हैं, लेकिन यह भी बताता है कि बाढ़ का असर समाज के हर वर्ग और हर क्षेत्र तक पहुंच रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश की वर्तमान स्थिति को इस साल देश के दूसरे हिस्सों में आई प्राकृतिक आपदाओं से अलग करके नहीं देखा जा सकता। असम में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। हजारों लोग प्रभावित हुए और बड़ी संख्या में परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। कई लोगों की जान चली गई। देश के अलग-अलग राज्यों में कहीं बादल फटने, कहीं अत्यधिक बारिश तो कहीं नदियों के उफान ने जनजीवन को प्रभावित किया। इन घटनाओं में एक समान बात दिखाई देती है—प्रकृति के असामान्य व्यवहार के सामने हमारी तैयारियां कई बार कमजोर पड़ जाती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बारिश हमारे लिए वरदान है, लेकिन जब उसका वितरण असामान्य हो जाए या कम समय में बहुत अधिक पानी गिर जाए तो वही बारिश विनाश का कारण बन जाती है। इस वर्ष कई जगह लंबे इंतजार के बाद बारिश शुरू हुई और फिर अचानक तेज बारिश के दौर ने हालात बदल दिए। इससे यह समझना जरूरी है कि केवल बारिश की मात्रा नहीं, बल्कि उसके समय, तीव्रता और वितरण का भी आपदा प्रबंधन में महत्व है। शहरों में नालों की सफाई, जल निकासी की व्यवस्था, नदी के बाढ़ क्षेत्र में अनियंत्रित निर्माण और कमजोर तटबंध जैसे सवालों पर गंभीरता से विचार करना होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बाढ़ के समय प्रशासन की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना, भोजन और पीने का पानी उपलब्ध कराना, स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना और पशुओं की सुरक्षा करना तत्काल प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके साथ ही बाढ़ समाप्त होने के बाद नुकसान का आकलन और किसानों तथा प्रभावित परिवारों को समय पर सहायता देना भी उतना ही जरूरी है। केवल राहत पहुंचाना पर्याप्त नहीं है; भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए स्थायी उपाय करने होंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रकृति को नियंत्रित करना इंसान के हाथ में नहीं है, लेकिन प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करना निश्चित रूप से संभव है। इसके लिए मौसम की सटीक चेतावनी, मजबूत स्थानीय प्रशासन, बेहतर जल निकासी, नदियों के बाढ़ क्षेत्र का संरक्षण और गांवों-शहरों की वैज्ञानिक योजना जरूरी है। विकास का अर्थ केवल सड़क, पुल और इमारतें बनाना नहीं, बल्कि ऐसा सुरक्षित ढांचा तैयार करना भी है जो प्राकृतिक आपदा के समय लोगों की रक्षा कर सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना और दूसरी नदियां उफान पर हैं। कल किसी दूसरे राज्य में यही स्थिति पैदा हो सकती है। असम से लेकर उत्तर प्रदेश तक की घटनाएं हमें चेतावनी दे रही हैं कि बदलते मौसम और बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं को अब सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बारिश देर से आई, लेकिन उसका कहर यह याद दिलाने के लिए काफी है कि प्रकृति के साथ संतुलन बिगाड़ने की कीमत अंततः समाज को ही चुकानी पड़ती है। कुदरत के सामने इंसान लाचार जरूर है, लेकिन बेहतर तैयारी, संवेदनशील प्रशासन और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार रवैया अपनाकर इस लाचारी को काफी हद तक कम किया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 20:53:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Aaj Ka Mausam 04 Oct 2025: देश के इन राज्यों में होगी बारिश, देखें आज का मौसम पूर्वानुमान</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>आज का मौसम कैसा रहेगा 04 अक्टूबर 2025 : </strong>अक्टूबर का महीना मौसमी गतिविधियों से भरा रह सकता है, जिसके प्रभाव से गुलाबी सर्दी का एहसास समय से पहले महसूस होने लगेगा। मौसम विभाग के मुताबिक, 15 अक्टूबर तक देश के विभिन्न हिस्सों पर बादलों की आवाजाही जारी रहेगी और कहीं-कहीं बारिश की बूंदे मौसम को सुहावना रखेंगी। </p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-10/2947-mp-weather-news-1.webp" alt="2947-mp-weather-news-1" width="1200" height="720" /></p>
<p>आईएमडी (<strong>IMD</strong>) ने अगले 24 घंटे का पूर्वानुमान जताते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में गरज चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। इस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156500/aaj-ka-mausam-04-oct-2025-see-rain-in-these"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/2947-mp-weather-news-1.webp" alt=""></a><br /><p><strong>आज का मौसम कैसा रहेगा 04 अक्टूबर 2025 : </strong>अक्टूबर का महीना मौसमी गतिविधियों से भरा रह सकता है, जिसके प्रभाव से गुलाबी सर्दी का एहसास समय से पहले महसूस होने लगेगा। मौसम विभाग के मुताबिक, 15 अक्टूबर तक देश के विभिन्न हिस्सों पर बादलों की आवाजाही जारी रहेगी और कहीं-कहीं बारिश की बूंदे मौसम को सुहावना रखेंगी। </p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-10/2947-mp-weather-news-1.webp" alt="2947-mp-weather-news-1" width="1280" height="720"></img></p>
<p>आईएमडी (<strong>IMD</strong>) ने अगले 24 घंटे का पूर्वानुमान जताते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में गरज चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाओं के साथ ओलावृष्टि और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी है। </p>
<p> </p>
<p>लिहाजा, बिगड़ते मौसम के दौरान खुले आसमान के नीचे रहने से बचना होगा। 4 अक्टूबर से लेकर वीकेंड तक पश्चिमी विक्षोभ (<strong>Western Disturbance</strong>) के सक्रिय होने से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊपरी हिस्सों में आंधी के साथ झमाझम मेघ बरसेंगे। कुछ हिस्सों में आसमानी पत्थरों (Hailstrom) के साथ बर्फबारी (<strong>Snowfall</strong>) से तापमान में तेजी से गिरावट देखी जाएगी। </p>
<p> </p>
<p>उधर, बंगाल की खाड़ी में साइक्लोनिक सर्कुलेशन (<strong>Cyclonic Circulation</strong>) और निम्न दबाव क्षेत्र बनने से उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा, अंडमान निकोबार द्वीप समूह और छत्तीसगढ़ में सतही हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। वहीं, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक, मराठवाड़ा, महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ इलाकों में अच्छी खासी वर्षा का अलर्ट है।</p>
<div class="YouTubeEmbeds"> </div>
<h2>यूपी का मौसम</h2>
<div class="YouTubeEmbeds"> </div>
<p>उत्तर प्रदेश में मौसम का मिजाज बदला हुआ है। कई जिलों में बादलों की आवाजाही के साथ मौसमी गतिविधियां दर्ज की जा रही हैं। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं आंधी आने की संभावना जताई है। इस दौरान मेघ गर्जन, ओलावृष्टि और बारिश का पूर्वानुमान है।</p>
<p> </p>
<p>आईएमडी ने बताया कि बुंदेलखंड में बांदा, चित्रकूट, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, कौशांबी, सोनभद्र, चंदौली और वाराणसी में तेज बारिश का अनुमान है। वहीं, गाजीपुर, बलिया, बस्ती, गोरखपुर, अयोध्या, सिद्धार्थनगर, सुलतानपुर, कुशीनगर, आजमगढ़, अंबेडकर नगर, रायबरेली, कानपुर, हमीरपुर, ललितपुर, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, इटावा, औरैया, फर्रुखाबाद, लखीमपुर खीरी, श्रावस्ती, बहराइच, बलरामपुर और सीतापुर गरज चमक के साथ वज्रपात होने और बारिश की चेतावनी है।</p>
<div class="lhsToggleContent">
<div class="YouTubeEmbeds"> </div>
<h2>बिहार में कैसा रहेगा मौसम?</h2>
<div class="YouTubeEmbeds"> </div>
<p>बिहार में मौसम ने करवट ले ली है। मौसम विभाग ने बताया कि अगले 7 दिन तक राज्य के अधिकांश जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश और ठनका गिरने का खतरा रहेगा। आईएमडी ने पटना, बक्सर, भोजपुर, सारण, सीतामढ़ी, शिवहर, बांका, जमुई, जहानाबाद, शेखपुरा, भोजपुर, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, अरवल, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सिवान, नवादा, और गयाजी में मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने लोगों से सावधान रहने की अपील की है।</p>
<div class="YouTubeEmbeds"> </div>
<h2>दिल्ली का मौसम</h2>
</div>
<p>दिल्ली-एनसीआर में पिछले 2-3 दिन से मौसमी गतिविधियां होने से मौसम का मिजाज नर्म है। दिन में गर्मी से मामूली राहत और रात का तापमान काफी कंट्रोल में है। मौसम विभाग के मुताबिक, वीकेंड तक बादलों की आवाजाही का सिलसिला जारी रह सकता है। शुक्रवार को आंशिक रूप से बादलों छाए रहने और कहीं-कहीं हल्की बौछारें पड़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है। आईएमडी ने न्यूनतम तापमान 23.7 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की उम्मीद जताई है। पिछले 24 घंटों की बात करें तो शहर में 14 मिलीमीटर बारिश हुई, जिससे दशहरे का मजा किरकिरा रहा।</p>
<div class="YouTubeEmbeds"> </div>
<h2>दिल्ली की एयर क्वालिटी कितनी है?</h2>
<div class="YouTubeEmbeds"> </div>
<p>दिल्ली-एनसीआर में बादलों की मेहरबानी से अभी पॉल्यूशन का मीटर नीचे है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बार देर तक बारिश की गतिविधियां होने से हवा में तैरने वाले धूल के कण बैठे हुए हैं, जिससे लोगों को शुद्ध हवा मिल रही है, लेकिन दिवाली के पटाखों से वातावरण में धुंध छा सकती है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 94 रहा, जो बेहद संतोषजनक श्रेणी में है। सीपीसीबी की मानें तो शून्य से 50 के बीच एक्यूआई को अच्छा, 51 से 100 के बीच को संतोषजनक, 101 से 200 के बीच को मध्यम, 201 से 300 के बीच को खराब, 301 से 400 के बीच को बहुत खराब और 401 से 500 के बीच को गंभीर माना जाता है।</p>
<div class="YouTubeEmbeds"> </div>
<h2>हिमाचल प्रदेश-उत्तराखंड का मौसम</h2>
<div class="YouTubeEmbeds"> </div>
<p>उत्तराखंड में मौसम का मिजाज खुशनुमा बना हुआ है। मौसम विभाग ने अगले कुछ घंटों तक राज्य के 7 जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान जताया है। आईएमडी ने देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर, रूद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ में मौसमी गतिविधियां होने की संभावना जताई है। इन जिलों मेघ गर्जन के साथ ओलावृष्टि और बारिश का खतरा है। हिमाचल प्रदेश में मौसम ने करवट ले ली है। मौसमी सीजन की पहली बर्फबारी दर्ज की गई। आईएमडी ने लाहौल स्पीति में बर्फबारी से नजारा बेहद आकर्षक दिखा। मौसम विभाग ने राज्य के ऊंचाई वाले हिस्सों में बारिश का अलर्ट जारी किया है।</p>
<div class="YouTubeEmbeds"> </div>
<div class="table-container">
<table class="redcator-table-advance">
<tbody>
<tr>
<td><strong>शहर का नाम</strong></td>
<td><strong>न्यूनतम तापमान</strong></td>
<td><strong>अधिकतम तापमान</strong></td>
</tr>
<tr>
<td>दिल्ली</td>
<td>25°C</td>
<td>32°C</td>
</tr>
<tr>
<td>मुंबई</td>
<td>26°C</td>
<td>29°C</td>
</tr>
<tr>
<td>जयपुर</td>
<td>25°C</td>
<td>30°C</td>
</tr>
<tr>
<td>भोपाल</td>
<td>23°C</td>
<td>29°C</td>
</tr>
<tr>
<td>पटना</td>
<td>26°C</td>
<td>28°C</td>
</tr>
<tr>
<td>लखनऊ</td>
<td>25°C</td>
<td>31°C</td>
</tr>
<tr>
<td>देहरादून</td>
<td>19°C</td>
<td>28°C</td>
</tr>
<tr>
<td>शिमला</td>
<td>12°C</td>
<td>22°C</td>
</tr>
<tr>
<td>कश्मीर</td>
<td>7°C</td>
<td>17°C</td>
</tr>
<tr>
<td>हैदराबाद</td>
<td>23°C</td>
<td>29°C</td>
</tr>
<tr>
<td>चेन्नई</td>
<td>26°C</td>
<td>32°C</td>
</tr>
</tbody>
</table>
</div>
<div class="YouTubeEmbeds"> </div>
<h2>राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ एक्टिव</h2>
<div class="YouTubeEmbeds"> </div>
<p>राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य के जयपुर, जालोर, बाड़मेर, जोधपुर और नागौर जैसे कई जिलों में देर शाम तक आसमान में बादल छाए रहने के साथ मध्यम से तेज बारिश दर्ज की जाएगी। मानसून के बाद राजस्थान के कई जिलों में बारिश का एक और दौर शुरू हो गया है। जयपुर में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है। करौली, अलवर और धौलपुर जैसे अन्य जिलों में भी हल्की बारिश हुई। </p>
<p> </p>
<p>जयपुर मौसम केंद्र के मुताबिक, बूंदी, कोटा, बारां, झालावाड़, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर, भीलवाड़ा, राजसमंद और सिरोही जिलों में बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। 5 और 6 अक्टूबर को बीकानेर और जोधपुर संभाग में भारी बारिश और आंधी का पूर्वानुमान जारी किया गया है। श्रीगंगानगर में अधिकतम तापमान 37 डिग्री से अधिक रहा, जो 37.5 डिग्री दर्ज किया गया।</p>
<div class="YouTubeEmbeds"> </div>
<h2>मध्य प्रदेश में मौसम का हाल</h2>
<div class="YouTubeEmbeds"> </div>
<p>मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बादलों की आवाजाही का दौर जारी है। भोपाल मौसम केंद्र के ताजा मौसम बुलेटिन के अनुसार, कुछ जिलों में छिटपुट बारिश दर्ज की गई है। उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में मानसून कमजोर पड़ रहा है, लेकिन मध्य भारत में छिटपुट बारिश की स्थिति बनी हुई है। छत्तीसगढ़ में भी ऐसी ही मौसम देखा जा रहा है, जहां कुछ इलाकों में बादलों के साथ हल्की बारिश हुई। दोनों राज्यों में दिन का तापमान 30 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जबकि रात के तापमान में थोड़ी गिरावट आनी शुरू हो गई है। मौसम विभाग के अनुसार नरसिंहपुर, पांढुर्ना, पेंच, छिंदवाड़ा, पन्ना, अनूपपुर, अमरकंटक, मुरैना, ग्वालियर, भिंड, दतिया, रतनगढ़, निवाड़ी, ओरछा, छतरपुर, खजुराहो, दमोह, रायसेन, सतना, चित्रकूट, मैहर, शहडोल, बालाघाट, सिवनी में भी गरज चमक और तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है।</p>
<div class="YouTubeEmbeds"> </div>
<h2>ओडिशा में भारी वर्षा का अलर्ट</h2>
<div class="YouTubeEmbeds"> </div>
<p>ओडिशा में भारी वर्षा का अलर्ट है। आईएमडी के मुताबिक, विभिन्न जिलों में भूस्खलन हुआ और ओडिशा को आंध्र प्रदेश से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 326 पर वाहनों की आवाजाही बाधित हो गई। भारी बारिश के कारण जगतसिंहपुर और मच्छगांव के बीच सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है। फिलहाल, मछुआरों को तीन अक्टूबर तक ओडिशा तट के आसपास समुद्र में न जाने की सलाह दी है। आईएमडी ने 7 जिलों में अत्यधिक भारी वर्षा का रेड अलर्ट, 16 जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट और शेष सात जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है।</p>
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<h2>पश्चिम बंगाल का मौसम</h2>
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<p>पश्चिम बंगाल के विभिन्न इलाकों में बारिश का अलर्ट है। बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने गहरे दबाव के क्षेत्र के कारण पश्चिम बंगाल के कई जिलों में 6 अक्टूबर की सुबह तक भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। आईएमडी ने बताया कि आसमान में बादल छाए रहेंगे और मध्यम बारिश के साथ-साथ कुछ स्थानों पर तेज बारिश होगी मौसम विभाग ने बताया कि 3 से 4 अक्टूबर तक 45 से 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने के साथ उत्तर 24 परगना, बांकुड़ा, हुगली, पूर्व और पश्चिम बर्धमान तथा दक्षिण बंगाल के पुरुलिया जिलों में एक-दो स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है।</p>
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<h2>कश्मीर में बर्फबारी</h2>
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<p>पहाडी राज्य कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में शुक्रवार को मौसम की पहली बर्फबारी हुई। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और बर्फबारी होने की संभावना जताई है। आईएमडी के मुताबिक, उत्तरी कश्मीर के बारामूला स्थित प्रसिद्ध स्की रिजॉर्ट गुलमर्ग के अफ़रवत और दक्षिण में अनंतनाग ज़िले के सिंथन टॉप में बर्फबारी हुई और श्रीनगर एवं उसके आसपास के मैदानी इलाकों में कुछ जगहों पर हल्की बारिश हुई। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 5 से 7 अक्टूबर तक मध्यम बारिश या बर्फबारी होने की संभावना है। अगले कुछ दिन अनंतनाग-पहलगाम, कुलगाम, सिंथन दर्रा, शोपियां, पीर की गली, सोनमर्ग-ज़ोजिला, बांदीपुरा-राजदान दर्रा, गुलमर्ग और कुपवाड़ा-साधना दर्रे की ऊंची चोटियों पर मध्यम से भारी बर्फबारी होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Oct 2025 06:40:56 +0530</pubDate>
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