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                <title>Women Empowerment India - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Women Empowerment India RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नारी बंधन परिसीमन बिल गिरने पर बीजेपी का विपक्ष पर देश व्यापी विरोध सोची समझी स्क्रिप्ट है</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रोफेसर अशोक कुमार</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">17अप्रैल को लोक सभा में परिसिमन बिल सरकार का गिर गया।फिर क्या बिल गिरते ही ससद भवन से बाहर भाजपा के लोगों ने हाथ में स्लोगन लिखे पोस्टर बैनर दफ्ती लेकर विपक्ष के विरोध में घेराव करते रहे।बस यही झूठ बोलते रहे कि महिला आरक्षण बिल कांग्रेस ने और महिलाओं के विरोधी विपक्ष ने गिरा कर देश के नारियों का अपमान किया ।यह सब पोस्टर बैनर स्लोगन  लिखी पट्टिक पहले से भाजपा ने तैयार कर लियि था कि बिल गिरेगा फिर भाजपा नारा लगायेगी सब पहले से स्क्रिप्ट तैयार थी महज देश की जनता को महिलाओं को</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177153/bjps-nationwide-protest-against-the-opposition-on-the-failure-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(1)11.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रोफेसर अशोक कुमार</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">17अप्रैल को लोक सभा में परिसिमन बिल सरकार का गिर गया।फिर क्या बिल गिरते ही ससद भवन से बाहर भाजपा के लोगों ने हाथ में स्लोगन लिखे पोस्टर बैनर दफ्ती लेकर विपक्ष के विरोध में घेराव करते रहे।बस यही झूठ बोलते रहे कि महिला आरक्षण बिल कांग्रेस ने और महिलाओं के विरोधी विपक्ष ने गिरा कर देश के नारियों का अपमान किया ।यह सब पोस्टर बैनर स्लोगन  लिखी पट्टिक पहले से भाजपा ने तैयार कर लियि था कि बिल गिरेगा फिर भाजपा नारा लगायेगी सब पहले से स्क्रिप्ट तैयार थी महज देश की जनता को महिलाओं को बस आरक्षण केशवराम पर धोखा देना था।वह दिया गया पहले से पास बिल को 2024मे नहीं लागू किया गया जब कि विपक्ष बार बार मांग कर रहा था लागू करो पर सरकार सरकार होती है मनमर्जी तो करेगी कर लिया लागू 2024मे नहीं किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परन्तु नारा लगाने वाले भूल गये कि देश की नारी शक्ति का पहला हक कांग्रेस के स्व प्रधान राजीव गान्धी ने ही पंचायती राज में तीनों स्तर पर यानि पंचायत से जिला परिषद तक तैंतीस प्रतिशत आरक्षण दिया जो आज भी लागू है। उसमें भाजपा कि किस  तरह पन्द्रह साल की सीमा नहीं लगाया था। वह एक कानुन बन गया और उसीके तर्ज पर बहुत से राज्यों में पचायतीराज  में पचास प्रतिशत आरक्षण दिया है।तब कांग्रेस महिला विरोधी नहीं विपक्ष नारी विरोधी नहीं था।फिर अब कैसे होगया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बस यही किया एक गलत परिसीमन बिल को पास नहीं किया।भाजपा की महिला सांसदों ने कभी भाजपा से संसद विधानसभाओं में जब आरक्षण का बिल कांग्रेस ला ई थी भाजपा ने क्यों नहीं समर्थन किया । क ई बार कांग्रेस की सरकार बिल को लोक सभा में पास करने का प्रयास किया पर हर बार भाजपा ने विरोध किया कारण तो भारत की जनता सब राजनेता जानते हैं।लेकिन भाजपा सच को छिपातीं है महिलाओं के पीछे छिपती है ।और कांग्रेस के द्वारा खींची गई हर लकीर को मिटाने और छोटा करने में विगत बारह साल से लगी हुई है।  पर लकीर मिटा नहीं  पा रही है जितना मिटाने की कोशिश होती है वह लकीर बड़ी हो जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान सरकार जनोपयोगी क ई क ई बिलों को कांग्रेस के समय पास में जो था जनता उसका उपयोग कर रही थी। सरकार रोक लगा दिया सुचना के अधिकार मनरेगा जैसे बिलों पर कैंची चलाया ।तब भाजपा का कोई नेता संगठन सड़क पर नहीं आया जैसा कि महिला परिसीमन बिल को लेकर सड़क पर दौड़ रहे हैं। और झूठ भ्रम जनता में फैला रहे हैं। कांग्रेस ने 2012मे महिला बिल को राज्य सभा से पारित करा लिया जिसमें महिलाओं के लिए आरक्षण था पंचायती राज की तरह ही। परन्तु जो नया बिल पास भाजपा ने 2023मे सभी दलों की सहमति से पास करवाया है वह बिल आज भी अस्तित्व में है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अगर वास्तव में भाजपा नारी शक्ति का सम्मान करता है तोउसे देश में लागू कर दे।अगर लागू नहीं कर रहा है तोयह मान लें  भाजपा सरकार का नारी आरक्षण बिल  सड़क का खिलौना बनाकर जनता में तमाशा दिखाने के सिवाय सच से बहुत दूर है।यह एक चुनावी नौटंकी से आगे कुछ नहीं है।अब यहां सवाल हर दल से है । अगर महिला आरक्षण बिल संसद विधानसभाओं में नहीं लागू हो रहा है । तो हर दल क्यों नहीं पार्टी के सम्विधान में यह लिखे की पार्टी  अपने   स्तर पर तैंतीस प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण दिया जायेगा वह संसद विधानसभाओं के साथ पार्टी के संगठन में भी दिया जायेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यहां यह भी बताना जरूरी है कि 2022मे यूं पी विधानसभा चुनाव में लड़की हूं लड सकती हूं का नारा प्रियंका-गांधी ने दिया और चालीस प्रतिशत विधानसभा में महिलाओं को टिकट दिया ।परन्तु गजब यूं पी की महिलाएं अपनी ही बहनों को हरा दिया जबकि वह सख्याबल में आबादी की आधीहै चाहती तो कम से कमज्ञतीस प्रतिशत कांग्रेस की महिलाएं विधायक बन गई होती पर महिलाएं भी जातिवादी धरृमवादी पारृटी वाली है तभी तो कांग्रेस की चालिस प्रतिशत महिलाएं चुनाव हार गई मात्र एक महिला जीती अराधना मिश्रा वह भी अपने पिता की सीट राम पुर खास  से।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस चालिस प्रतिशत की हार से डर कर सांसद में सभी दलों ने महिलाओं को कम टिकट दिया।किसी दल के पास ताकत नहीं है कि महिलाओं के आरक्षण नियम को पहले पार्टी में बनाये लागू करें। फिर संसद विधानसभा की बात करें हर पार्टी की नियत में खोट है।अभी जो वर्तमान संसद है उसमें सबसे कम संख्या भाजपा  की महिलाएं हैं सबसे ज्यादा तृणमूल की महिला सासद है इसी संख्या से पता चलता भिजवा कितना महिलाओं का सम्मान करती है।आज तक कोई महिला भाजपा का राष्ष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बन पाईहैक्या भाजपा प्रेस कान्फ्रेंस करके जनता को बतायेगी कि किस कारण से वह महिलाओं को राष्ट्रीय अध्यक्ष आज तक नहीं बनाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक उदाहरण यह भी देख ले 2022मे राजस्थान में वसुंधरा राजे के नेतृत्व में विधानसभा का चुनाव भाजपा जीत जाती है वह दोबारा की मुख्य मंत्री थी एक मात्र महिला थी भाजपा की फिर भी उनको मुख्यमंत्री नहीं बनाया।  यही नारी शक्ति है ।असली भाजपा का चाल चरित्र चेहरा अलग है।फिर बात चली वसुंधरा राजे सिंधिया को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जायेगा तीन महीने तक बात हर पत्रकार करता रहा लेकिन वहां से भी वसुंधरा राजे को हटाया गया नारी थी तो सम्मान कैसे भाजपि करती बिहार चुनाव को देखकर नीतीश नवीन को जाति का वोट कायस्थ वोट साधने को मोहरा वाला अध्यक्ष बना लिया।इनके पूर्व जो अध्यक्ष थे वह भी मोहरा वाले थे वैसे हर पार्टी में यही परम्परा अध्यक्ष मोहरा वाला ही सही होता तेज होगा तो पार्टी पर कब्जा करके राजनिति की शिखर हो जायेगा फिर जिसने अध्यक्ष बनाया उसी को मारेगा हर पार्टी में मुगल शासक का कानुन न चले तभी मोहरा वाला कमजोर राम का अध्यक्ष या जाति समकरण वाला ही बनाया जाता जिससे जाति का वोट अपने पाले में कर लें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">17अप्रैल से कहीं न कहीं भाजपा की महिलाएं महिला आरक्षण बिल  का विरोध मेसडक पर है तो कांग्रेस की भी महिला संगठन सड़क पर 2023मे पास बिल को लागू करने के लिए तथा परिसीमन बिल जो गिरा उसके समर्थन में सड़क पर पतृरकार वार्ता कर ली है।18अप्रैल को चुनाव आचार संहिता का उलंघन कश्रते हुए देश के साहब ने गलत महिला संशोधन बिल पर राष्ट्राभिनंदन किया सही बात जनता को नहीं बताया बस एक लट कांग्रेस महिला विरोधी हैं महिलाओं के आरक्षण को संसद में रोक दिया भाजपा नारी सम्मान देना चाहती थी परन्तु वह नहीं हो पाया पर यह नही कहा कि जो बिल 2023मे पास है उसे लागू करने जा रहा हूं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्यों संसदों की सख्या बढ़ाकर आरक्षण देना है क्या नौकरियों में शिक्षा में ऐसा हुआ है क्या पंचायतों में दो तीनों सृतर पर आरक्षण लागू है तो सीटें बढ़ीं है।नहीं तो संसद और विधानसभाओं में क्यों पचास प्रतिशत सीट बढ़ाने के लिए गलत परिसीमन बिल लाया गया।।भाजपा जानती थी यह बिल पास नहीं होगा वह तो बस जनता का एक अहम मूद्दे इरान अमेरिका इजरायल युद्ध की बात जनता में बंगाल तमिलनाडु के चुनाव में न उठे तो जनता को वरगलाने के लिए मुख्य समस्या हटाने के लिए ही। बिल लाया गया थाजोविपक्ष की एक छूटता से विफल होगया देश को बांटने का बिल था गिर गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वास्तव में भाजपा ईमानदार है नारी शक्ति वन्दन को महत।व दे ना चाहती है तो पहले अपनी पारृटी में हर स्तर पर तैंतीस प्रतिशत आरक्षण दे-दे और महिला को राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दे ।पर ऐसा होंगा नहीं बस चुनाव और वोट के लिए ही नारी सम्मान की बात कही जाती है उत्तराखंड में अंकिता भण्डारी। यूं पी में उन्नाव हिथरस बेटियों को सम्मान तो दिया नहीं फिर कैसे नारी शक्ति वन्दन बिल पर घड़ियाली आंसू गिरा रही है भाजपा।असल में भारत की जनता के आंखों पर गांधारी की तरह पट्टी बंधी हुई है वह सच को देख नहीं पा रही बस जो सुनती है वहीं सच मान कर पूजा कर रही है शबृद बोलने वालों का लोकतंत्र में सत्ता के लिए घबियिली आंसू ब आने वाले का।देश में इरान अमेरिका युद्ध पर राष्ट्र के नाम सम्बोधन नहीं हुआ नहीं संसद का विशेष सत्र बुलाया ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 21:21:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महिला सशक्तीकरण की खुलेआम धज्जियां उड़ा रही गौर पुलिस दुष्कर्म पीड़िता को नहीं दे पा रही बस्ती पुलिस न्याय</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के गौर पुलिस महिला सशक्तिकरण की खुलेआम धज्जियां उड़ा रही है । दुष्कर्म पीड़िता न्याय के लिए कई महीनों से गौर थाने का चक्कर काट रही है । बस्ती पुलिस सत्य घटनाओं पर मुकदमा लिखने में पीछे हट रही है अगर मोटी रकम मिल गई तो फर्जी मुकदमा तुरंत दर्ज होता हैपीड़िता ने महिला सीओ हर्रैया व पुलिस अधीक्षक बस्ती से भी लिखित शिकायत दिया  लेकिन पीड़िता को न्याय नहीं मिल पा रहा है। पुलिस महिला उत्पीड़न का केस लिखने से करनी कट रही है क्योंकि आरोपी से मोटी रकम मिलने के कारण पीड़िता को नहीं नया</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176937/gaur-police-is-openly-flouting-women-empowerment-basti-police-is"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260421-wa0030.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के गौर पुलिस महिला सशक्तिकरण की खुलेआम धज्जियां उड़ा रही है । दुष्कर्म पीड़िता न्याय के लिए कई महीनों से गौर थाने का चक्कर काट रही है । बस्ती पुलिस सत्य घटनाओं पर मुकदमा लिखने में पीछे हट रही है अगर मोटी रकम मिल गई तो फर्जी मुकदमा तुरंत दर्ज होता हैपीड़िता ने महिला सीओ हर्रैया व पुलिस अधीक्षक बस्ती से भी लिखित शिकायत दिया  लेकिन पीड़िता को न्याय नहीं मिल पा रहा है। पुलिस महिला उत्पीड़न का केस लिखने से करनी कट रही है क्योंकि आरोपी से मोटी रकम मिलने के कारण पीड़िता को नहीं नया दे पा रही है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> बस्ती पुलिस बस्ती जिले की पुलिस इतना भ्रष्ट हो चुकी है अगर आपके पास पैसा है तो आपका केस दर्ज होगा नहीं तो आप चक्कर लगाते रहो कप्तान भी तेज तर्रार होने के बावजूद भी महिला सशक्तिकरण की धज्जियां उड़ रही है पुलिस विभाग दुष्कर पीड़िता के साथ तमाशा कर रही है न्यायाधीश पानी में अक्षम साबित हो रही है बस्ती पुलिस कैसे होगा गरीबों का न्याय भ्रष्टाचार में बस्ती पुलिस के आगे जनता को न्याय नहीं दे पा रहे हैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के आदेशों की ताजिया उड़ा रही है बस्ती पुलिस कार्रवाई करने से करनी कट रही है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आपको बता दें कि गौैर थाना क्षेत्र में एक युवती के साथ दुष्कर्म, गर्भपात कराने और मंदिर में विवाह के बाद घर से निकाल दिये जाने का मामला प्रकाश में आया है। पीड़िता ने मंगलवार को पुलिस अधीक्षक को पत्र देकर आरोपी के विरूद्ध कार्रवाई की मांग की है और अपने जान माल के रक्षा की गुहार लगाई है। शिकायत पत्र में पीडिता ने लिखा है कि गौैर थाना क्षेत्र के उसी गांव के ही निवासी किशन पुत्र केशवराम ने शौच के लिए गई पीड़िता को पकड़कर जबरन जंगल में ले जाकर दुष्कर्म किया और दुष्कर्म का वीडियो भी बना लिया और धमकी देकर लगभग तीन चार माह से पीड़िता से सम्बन्ध बनाता रहा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> तीन चार महीनो से जबरन बीडियो के माध्यम से ब्लैकमेल कर सम्बंध  बनाते-बनाते पीड़िता गर्भावती हो गई इस बात की जानकारी आरोपी किशन को हुई तभी आरोपी किशन ने पीड़िता रमपता को विश्वासघात कर बहलाया फुसलाया और गुमराह कर कहा कि तुम गर्भ निरोधक गोलियां खा लो गर्भ गिरने के बाद हम आपसे शादी कर लेंगे पीड़िता आरोपी किसन के जाल में फंस कर गर्भ निरोधक गोलियां खा लिया गर्भ निरोधक गोलियां खाने के बाद पीड़िता की हालत बिगड़ गई और खून गिरना बंद नही हो रहा था तब पीड़िता ने मजबूर होकर सारी घटना की जानकारी अपनी माता को दी थी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> तब पीड़िता की माता ने आरोपी किसन के खिलाफ गौर थाने में तहरीर दी थी गौर पुलिस ने मामले का संज्ञान लेकर आरोपी किशन व अन्य परिवार के सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई करने में जुट गई थी । तभी आरोपी पुलिस के दबाव में आकर बैडवा समय माता मंदिर पर पीड़िता से विवाह से किया था किन्तु अब किसन पीड़िता को अपने घर रखने के लिए तैयार नहीं है । और उसके पिता केशवराम, भाई जनकराम व भाभियां उर्मिला व गुडिया आदि ने उसे बुरी तरह से मारा पीटा था और जान से मारने की धमकी देते हुये घर से भगा दिया था पीड़िता ने दोषियों के विरूद्ध मुकदमा पंजीकृत कराकर कार्रवाई की मांग की है और अपने जान माल के रक्षा की गुहार लगाई है। पीड़िता ने घटना की जानकारी हर्रैया सीओ को दी थी और पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायती पत्र दी थी लेकिन अभी तक पीड़िता को न्याय नहीं मिल पाई है । अब देखना यह है कि बस्ती पुलिस पीड़िता को न्याय दिला पाती है या लेन देन करके मामले में लीपापोती करती है ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 19:22:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>धाकड़ अधिवक्ता रवि भूषण चौबे की बेटी रीतिका भी कठिन परिश्रम के साथ बनी सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div style="text-align:justify;">बिहार के बक्सर ज़िले की प्रतिभाशाली बेटी रीतिका ने अपने अथक परिश्रम, अटूट विश्वास और परिवार के मजबूत सहयोग से आज एक नई पहचान स्थापित की है—एडवोकेट रीतिका के रूप में।उनके पिता रवि भूषण चौबे जो कि सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता होने के साथ-साथ Ravi Babita Support Foundation के संस्थापक हैं एवं निदेशक हैं, और माता श्रीमती बबीता कुमारी चौबे जो एक समाजसेवी एवं उसी संस्था की निदेशक है दोनों ने सदैव अपनी बेटी को न्याय के क्षेत्र में ऊँचाइयों तक पहुँचते देखने का सपना संजोया इस सफर में उनके भाई शिवांग जो B.A. LL.B के छात्र एवं सामाजिक कार्यकर्ता</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176921/ritika-daughter-of-powerful-advocate-ravi-bhushan-choubey-also-became"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260422-wa0010.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div style="text-align:justify;">बिहार के बक्सर ज़िले की प्रतिभाशाली बेटी रीतिका ने अपने अथक परिश्रम, अटूट विश्वास और परिवार के मजबूत सहयोग से आज एक नई पहचान स्थापित की है—एडवोकेट रीतिका के रूप में।उनके पिता रवि भूषण चौबे जो कि सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता होने के साथ-साथ Ravi Babita Support Foundation के संस्थापक हैं एवं निदेशक हैं, और माता श्रीमती बबीता कुमारी चौबे जो एक समाजसेवी एवं उसी संस्था की निदेशक है दोनों ने सदैव अपनी बेटी को न्याय के क्षेत्र में ऊँचाइयों तक पहुँचते देखने का सपना संजोया इस सफर में उनके भाई शिवांग जो B.A. LL.B के छात्र एवं सामाजिक कार्यकर्ता हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">और छोटे भाई शौर्य कात्यायन का भरपूर सहयोग रहा परिवार के इस अटूट विश्वास और समर्थन ने रीतिका के सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई दिनांक 20 अप्रैल 2026 को, Bar Council of Delhi में नामांकन के पश्चात सुप्रीम कोर्ट के प्रतिष्ठित चैंबर नंबर 108 D-ब्लॉक में एक गौरवपूर्ण क्षण साकार हुआ, जब वरिष्ठ अधिवक्ता भी,पी यादव ने रीतिका को एडवोकेट बैंड पहनाकर न्याय के पथ पर अग्रसर होने का आशीर्वाद प्रदान किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं दूसरी तरफ इस शुभ अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के प्रतिष्ठित अधिवक्ता मनोज कुमार चौबे , दीपक कुमार चौबे तथा अन्य कई सम्मानित अधिवक्ताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए रीतिका को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं इस दौरान, चैंबर से लेकर सुप्रीम कोर्ट के Advocates’ Sitting Room और Lounge तक बार-बार शुभकामनाओं का आदान-प्रदान हुआ जो इस उपलब्धि की गरिमा और उत्साह को और भी बढ़ा रहा था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज रीतिका न केवल अपने गृह जनपद बक्सर बिहार का, बल्कि बलजीत नगर नई दिल्ली और सबौली, सोनीपत हरियाणा का नाम भी गर्व से रोशन कर रही हैं। यह उपलब्धि हर उस बेटी के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को सच करने का साहस रखती है अंत में एडवोकेट रीतिका एवं उनके पिता रवि भूषण चौबे ने वरिष्ठ अधिवक्ता बी. पी. यादव अधिवक्ता मनोज कुमार चौधरी तथा सभी सम्मानित अधिवक्ता साथियों  और शुभचिंतकों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। रवि भूषण चौबे एडवोकेट का सम्पूर्ण समाज के माता-पिता व बेटीयां को संदेश जब परिवार का साथ और खुद पर विश्वास हो तो हर बेटीयों का हौसला अफजाई हो सकता है।</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>दिल्‍ली</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 18:52:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अधिकारों की तुलना में कर्तव्य और जिम्मेदारियां के प्रति हम ज्यादा अनभिग्य</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">महात्मा गांधी ने कहा था कि “अधिकारों का वास्तविक स्रोत कर्तव्य है, यदि हम अपने कर्तव्यों का पालन करें, तो अधिकार अपने आप मिल जाएंगे,” भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में अधिकार और कर्तव्य के बीच संतुलन का प्रश्न केवल संवैधानिक बहस का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का आईना भी है।  इसी प्रकार भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान निर्माण के समय यह स्पष्ट किया था कि “संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो, यदि उसे चलाने वाले लोग अच्छे नहीं होंगे, तो वह असफल हो जाएगा,” यह कथन आज भी उतना ही प्रासंगिक है</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176919/we-are-more-ignorant-of-duties-and-responsibilities-than-rights"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/dgkdjgbvax1605352666.jpeg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">महात्मा गांधी ने कहा था कि “अधिकारों का वास्तविक स्रोत कर्तव्य है, यदि हम अपने कर्तव्यों का पालन करें, तो अधिकार अपने आप मिल जाएंगे,” भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में अधिकार और कर्तव्य के बीच संतुलन का प्रश्न केवल संवैधानिक बहस का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का आईना भी है।  इसी प्रकार भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान निर्माण के समय यह स्पष्ट किया था कि “संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो, यदि उसे चलाने वाले लोग अच्छे नहीं होंगे, तो वह असफल हो जाएगा,” यह कथन आज भी उतना ही प्रासंगिक है क्योंकि कानून और नियम केवल कागज़ पर नहीं, बल्कि नागरिकों की चेतना और कार्यों में जीवित रहते हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> आज हम जिस दौर में खड़े हैं, वहाँ एक ओर जनसंख्या का विस्तार, स्त्री-पुरुष अनुपात की जटिलता और शिक्षा का असमान वितरण दिखाई देता है, वहीं दूसरी ओर अधिकारों के प्रति तीव्र आग्रह और जिम्मेदारियों के प्रति अपेक्षाकृत शिथिल उदासीनता भी स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होती है। यह विडंबना ही है कि जिस देश ने विश्व को वसुधैव कुटुम्बकम् और कर्तव्य ही धर्म है जैसे विचार दिए, उसी समाज में आज अधिकारों की माँग तो प्रमुखता से अंगीकार और स्वीकार करने की चाहत रखता है, परंतु कर्तव्यों और जिम्मेदारियां के निर्वहन में परिपक्वता का अभाव एवं दुराग्रह दिखाई देता है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भारत की जनसंख्या, जो अब विश्व में शीर्षतम जनसंख्या वाले देशों में शामिल है, यहां केवल संख्या का विषय नहीं बल्कि गुणवत्ता का प्रश्न भी है यह गुणवत्ता शिक्षा, सामाजिक समझ और संवैधानिक चेतना, जागरूकता पर आधारित होती है। जब हम स्त्री-पुरुष अनुपात की बात करते हैं, तो यह केवल आंकड़ों का संतुलन नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और अवसरों की समानता का संकेतक है। किंतु जब तक दोनों ही वर्ग अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को समान रूप से नहीं समझेंगे, तब तक वास्तविक प्रगति अधूरी और दिवा-स्वप्न ही रहेगी। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">शिक्षा इस पूरे विमर्श का केंद्र बिंदु है, क्योंकि शिक्षित समाज ही अधिकार और जिम्मेदारी के बीच संतुलन स्थापित कर सकता है, परंतु भारत में शिक्षा का प्रसार अभी भी समरूप नहीं है।ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच, स्त्री और पुरुष के बीच, तथा विभिन्न आर्थिक वर्गों के बीच एक गहरी और बड़ी खाई मौजूद है। परिणामस्वरूप, एक बड़ा वर्ग अपने अधिकारों के प्रति तो जागरूक हो रहा है, परंतु कर्तव्यों के प्रति उसकी समझ अभी भी सीमित संकुचित है। भारतीय संविधान, जो नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान करता है, </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उसी के साथ मौलिक कर्तव्यों की भी स्पष्ट व्याख्या करता है, किंतु व्यवहारिक जीवन में अधिकारों की चर्चा अधिक होती है और कर्तव्यों की उपेक्षा। महात्मा गांधी ने कहा था कि “अधिकारों का वास्तविक स्रोत कर्तव्य है, यदि हम अपने कर्तव्यों का पालन करें, तो अधिकार अपने आप मिल जाएंगे,” परंतु आधुनिक समाज में यह विचार धीरे-धीरे पृष्ठभूमि में चला गया है। इसी प्रकार डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान निर्माण के समय यह स्पष्ट किया था कि “संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो, यदि उसे चलाने वाले लोग अच्छे नहीं होंगे, तो वह असफल हो जाएगा,” यह कथन आज भी उतना ही प्रासंगिक है क्योंकि कानून और नियम केवल कागज़ पर नहीं, बल्कि नागरिकों की चेतना में जीवित रहते हैं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भारत में कानूनों की कमी नहीं है सड़क सुरक्षा से लेकर महिला संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण से लेकर शिक्षा के अधिकार तक हर क्षेत्र में स्पष्ट नियम बनाए गए हैं, लेकिन उनका पालन तभी संभव है जब नागरिक स्वयं जिम्मेदारी का परिचय दें। उदाहरण के लिए, सड़क पर यातायात नियमों का उल्लंघन केवल एक व्यक्ति की गलती नहीं, बल्कि सामाजिक अनुशासन की कमी का संकेत है।इसी प्रकार, महिला सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून तब तक प्रभावी नहीं हो सकते जब तक समाज में लैंगिक संवेदनशीलता और सम्मान की भावना विकसित न हो। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">स्त्री-पुरुष समानता के संदर्भ में भी यह स्पष्ट है कि अधिकारों की माँग के साथ-साथ कर्तव्यों का निर्वहन भी उतना ही आवश्यक है।जहाँ महिलाएँ अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही हैं, वहीं समाज के सभी वर्गों को उनके प्रति सम्मान और सहयोग का कर्तव्य निभाना होगा। शिक्षा का स्तर बढ़ने के बावजूद यदि नैतिक शिक्षा और नागरिकता के मूल्यों का समावेश नहीं होगा, तो केवल डिग्रीधारी नागरिक तैयार होंगे, जागरूक और जिम्मेदार कर्तव्य निस्ट नागरिक नहीं। आज सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने अधिकारों की आवाज़ को मजबूत किया है,</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> लेकिन कई बार यह जागरूकता एकतरफा हो जाती है, जहाँ केवल अधिकारों की बात होती है और जिम्मेदारियों की चर्चा गौण हो जाती है। यही असंतुलन समाज में तनाव और गहरे हरेअसंतोष को जन्म देता है। आवश्यकता इस बात की है कि शिक्षा प्रणाली में प्रारंभ से ही नागरिक कर्तव्यों पर बल दिया जाए, परिवार और समाज में जिम्मेदारी की भावना को विकसित किया जाए, और शासन स्तर पर भी जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को यह समझाया जाए कि अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जब तक आम नागरिक स्वयं कानूनों का सम्मान नहीं करेंगे, तब तक कोई भी व्यवस्था पूरी तरह सफल नहीं हो सकती। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में नागरिक ही सर्वोच्च शक्ति हैं, और उनकी परिपक्वता ही राष्ट्र की दिशा और दशा तय करती है। इसलिए यह सही समय आत्ममंथन का है क्या हम केवल अपने अधिकारों के लिए सजग हैं, या अपने कर्तव्यों के प्रति भी उतने ही प्रतिबद्ध हैं?</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> यदि इस प्रश्न का उत्तर पूर्ण ईमानदारी और सजगता  से खोजा जाए, तो स्पष्ट होगा कि हमें अभी लंबा सफर तय करना है। जागरूकता, शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी के समन्वय से ही वह दिन आएगा जब भारत केवल अधिकारों के प्रति नहीं, बल्कि कर्तव्यों के प्रति भी समान रूप से परिपक्व राष्ट्र के रूप में स्थापित होगा जिससे विकास की गति को सदैव सशक्त बल मिलेगा और विकास की संभावना चारों दिशाओं में व्याप्त होगी ।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 18:47:29 +0530</pubDate>
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                <title>परिसीमन बिल गिरने से  देश को तो  लाभ हुआ</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक मधुप</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश की आधी आबादी यानी महिलाओं को </span>33 <span lang="hi" xml:lang="hi">फीसदी राजनीतिक आरक्षण देने वाला ऐतिहासिक बिल लोकसभा में भले ही गिर गया हो किंतु भाजपा को जो लाभ मिलना था,  वह मिल या।  इस बिल के माध्यम से वह यह संदेश देने में कामयाब रही कि हम तो महिलाओं को संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण देना  चाहते  है, कितु विपक्ष  नही चाहता।  विपक्ष  भी  इस बिल के गिरने को  अपनी विजय मानता है।  इस बिल के गिरने से भाजपा को लाभ मिले या विपक्ष को किंतु सबसे बड़ा  लाभ देश को हुआ है। इस बिल के पास होने से</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176917/the-country-benefited-from-the-falling-of-the-delimitation-bill"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1399507-womens-reservation-delimitation-opposition.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक मधुप</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश की आधी आबादी यानी महिलाओं को </span>33 <span lang="hi" xml:lang="hi">फीसदी राजनीतिक आरक्षण देने वाला ऐतिहासिक बिल लोकसभा में भले ही गिर गया हो किंतु भाजपा को जो लाभ मिलना था,  वह मिल या।  इस बिल के माध्यम से वह यह संदेश देने में कामयाब रही कि हम तो महिलाओं को संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण देना  चाहते  है, कितु विपक्ष  नही चाहता।  विपक्ष  भी  इस बिल के गिरने को  अपनी विजय मानता है।  इस बिल के गिरने से भाजपा को लाभ मिले या विपक्ष को किंतु सबसे बड़ा  लाभ देश को हुआ है। इस बिल के पास होने से बढ़ने वाली लोकसभा और विधान सभा  सीट के    सांसदों के वेतन और भत्तों का  खर्च बच गया। नए सांसदों और विधायकों  की पेंशन की राशि का बोझ अब देश को नही उठाना पड़ेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी सरकार ने लोकसभा और विधानसभाओं में वर्तमान सीटों की संख्या एकमुश्त बढ़ाकर  डेढ़ गुना करने का जो प्रस्ताव इस बिल में किया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका लाभ कुल मिलाकर </span>2250 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटों का होता।  लोकसभा में वर्तमान </span>545 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटों के हिसाब से की महिलाओं के </span>33<span lang="hi" xml:lang="hi">  प्रतिशत</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आरक्षण के हिसाब से </span>205 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटें बढ़तीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि सभी </span>28 <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यों और दो केन्द्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में </span>2045 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटों का इजाफा होता। यानी </span>70 <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ महिलाओं में से मात्र </span>2250 <span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाएं चुनकर विधानमंडलों में पहुंचतीं।</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें राज्यसभा और विधानपरिषदों की सीटें शामिल नहीं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि उनकी संख्या बाद में तय होगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> तर्क दिया जा सकता है कि इस आरक्षण को महिलाओं की संख्या की बजाए उनके राजनीतिक-सामाजिक सशक्तिकरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लैंगिक समता और राजनीतिक नैतिकता की पवित्र मंशा के आईने में देखा जाना चाहिए। सही है। लेकिन अगर बिल पास हो जाता। सासंदों और  विधायकों के क्षेत्र और सीट बढ़  जाती तो वढ़े सासदों , विधायकों के वेतन, भत्ते, सुविधाओं और पेंशन का बोझ तो देश पर ही पड़ता।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">12 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल के कार्यकाल में यह पहला अवसर था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब मोदी सरकार  की संसद में विधायी हार हुई। संसदीय इतिहास में </span>1990 <span lang="hi" xml:lang="hi">में पंचायत सशक्तिकरण संशोधन बिल के राज्यसभा में गिरने के बाद यह पहला बिल है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो लोकसभा में ही ढ़ह  गया। वैसे मोदी सरकार चाहती तो यह अत्यंत महत्वपूर्ण बिल अपने दूसरे कार्यकाल में ला सकती थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब एनडीए के अपने </span>353 <span lang="hi" xml:lang="hi">सांसद थे और कोई भी संशाधन बिल आसानी से पारित हो सकता था। लेकिन उसने तब ऐसा नहीं किया।</span> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय राजव्यवस्था में पिछले कुछ वर्षों से वित्तीय प्रबंधन और संसाधनों के आवंटन को लेकर एक व्यापक बहस छिड़ी हुई है। एक तरफ सरकार राजकोषीय घाटे को कम करने और अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के नाम पर पुरानी पेंशन योजनाओं और सैन्य भर्ती की पारंपरिक प्रक्रियाओं में आमूलचूल परिवर्तन कर रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं दूसरी ओर लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के विस्तार के नाम पर विधायी निकायों के आकार को बढ़ाने की योजनाएं भी चर्चा के केंद्र में हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन निर्णयों का भारतीय अर्थव्यवस्था और आम नागरिक के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। सरकार के इन कदमों के पीछे तर्क दिया जाता है कि आधुनिक समय की चुनौतियों से निपटने के लिए संसाधनों का कुशल उपयोग अनिवार्य है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जब बात सांसदों और जनप्रतिनिधियों की सुविधाओं की आती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जनता के बीच विरोधाभास की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पेंशन के मुद्दे पर सरकारी कर्मचारियों में व्यापक असंतोष देखा जा रहा है। केंद्र सरकार ने वित्तीय बोझ को कम करने के लिए लंबे समय से पुरानी पेंशन योजना (</span><span lang="hi" xml:lang="hi">ओपीएस</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">के स्थान पर नई पेंशन योजना (</span><span lang="hi" xml:lang="hi">एनपीएस</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">को प्राथमिकता दी है। हालिया वर्षों में महंगाई भत्ते (</span><span lang="hi" xml:lang="hi">डीए</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">और महंगाई राहत (</span><span lang="hi" xml:lang="hi">डीआर</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">में वृद्धि तो की गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे कि 2026 के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार इसे 60 प्रतिशत तक पहुँचाया गया</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> फिर भी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> यह वृद्धि कर्मचारियों की उन मांगों को शांत करने में विफल रही है। वे तो  सेवानिवृत्ति के बाद एक सुनिश्चित आय की गारंटी चाहते हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार का तर्क है कि पेंशन पर होने वाला खर्च भविष्य में विकास कार्यों के लिए उपलब्ध बजट को कम कर सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए निवेश-आधारित पेंशन प्रणाली अधिक व्यावहारिक है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी कर्मचारी इसे अपनी सामाजिक सुरक्षा में कटौती के रूप में देखते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे उनके भविष्य की स्थिरता पर सवालिया निशान लग जाते हैं। अर्थशास्त्री दावा करते हैं कि यदि पुरानी पेंशन दी गई तो कुछ राज्य आर्थिक रूप से दिवालिया  हो जाएगें,किंतु सासदों और विधायकों की संख्या  उनके  वेतन भत्तों और पेंशन से देश के सामने आने  वाली आर्थिक चुनौतियों की और ध्यान नही दिया जाता। यह कहीं गणना  नही होती कि इससे देश पर कितना बोझ  पड़ेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सैनिकों की भर्ती के लिए लाई गई अग्निपथ योजना इसी वित्तीय पुनर्गठन की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जाती है। अग्निवीर योजना के तहत युवाओं को चार साल के लिए सेना में भर्ती किया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद केवल 25 प्रतिशत को ही स्थायी सेवा में रखा जाता है। शेष 75 प्रतिशत युवाओं को एकमुश्त सेवा निधि पैकेज देकर सेवामुक्त कर दिया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उन्हें आजीवन पेंशन या अन्य चिकित्सा सुविधाएं नहीं दी जातीं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार का उद्देश्य रक्षा बजट के एक बड़े हिस्से को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो वर्तमान में वेतन और पेंशन में चला जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक हथियारों और तकनीक की खरीद में लगाना है। लेकिन इस योजना ने सुरक्षा विशेषज्ञों और युवाओं के बीच चिंता पैदा कर दी है। आलोचकों का कहना है कि पेंशन के अभाव में सैनिकों का मनोबल प्रभावित हो सकता है और चार साल बाद बेरोजगार होने का डर युवाओं को इस गौरवशाली पेशे से दूर कर सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक तरफ जहां देश की सुरक्षा और प्रशासनिक सेवा में लगे लोगों के लाभों को सीमित किया जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं दूसरी ओर 131वें संविधान संशोधन विधेयक के माध्यम से लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त किया गया है। वर्तमान में लोकसभा की 543 सीटों को बढ़ाकर लगभग 815 से 850 तक करने का प्रस्ताव है।इसी के साथ नए परीसीमन से विधायकों की भी 2045 सीट बढ़ने की व्यवस्था है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह वृद्धि परिसीमन की प्रक्रिया के तहत की जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका उद्देश्य बढ़ती जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व को संतुलित करना है। हालांकि यह कदम लोकतांत्रिक दृष्टिकोण से तर्कसंगत लग सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर  इसके आर्थिक निहितार्थ अत्यधिक गंभीर हैं। सांसदों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि का अर्थ है उनके वेतन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भत्तों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आवास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा और कार्यालय खर्चों में भी उसी अनुपात में बढ़ोतरी होना।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि हम वर्तमान वित्तीय आंकड़ों का विश्लेषण करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो एक सांसद का वेतन और विभिन्न भत्ते मिलाकर प्रतिमाह एक बड़ी राशि बनती है। वर्ष 2025-26 के संशोधित आंकड़ों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक सांसद का मूल वेतन लगभग 1.24 लाख रुपये है। इसके अतिरिक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें निर्वाचन क्षेत्र भत्ता (लगभग 70,000 रुपये)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यालय भत्ता (लगभग 60,000 रुपये) और संसद सत्र के दौरान प्रतिदिन का दैनिक भत्ता (2,500 रुपये) मिलता है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि इन सबको जोड़ दिया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो एक सांसद पर सीधे तौर पर प्रतिमाह लगभग 2.7 लाख से 3 लाख रुपये का खर्च आता है। इसमें उनके लिए उपलब्ध मुफ्त बिजली (50,000 यूनिट)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पानी (4,000 किलोलीटर)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">34 मुफ्त हवाई यात्राएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रेल यात्राएं और दिल्ली में मिलने वाले महंगे बंगलों का रखरखाव शामिल नहीं है। यदि लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 816 हो जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो केवल इन सीधे खर्चों के कारण देश पर प्रतिमाह करोड़ों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।विधायकों की सीट बढ़ने से होने वाला  आर्थिक बोझ इसमें शामिल नही किया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ का अनुमान लगाने के लिए यदि हम 273 नए सांसदों (816 - 543) को आधार मानें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो केवल उनके वेतन और नियमित भत्तों पर ही प्रतिमाह लगभग 7.5 करोड़ से 8 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च होगा। वार्षिक आधार पर यह आंकड़ा 90 करोड़ से 100 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। लेकिन यह तो केवल हिमशैल का सिरा है। प्रत्येक नए सांसद के लिए लुटियंस दिल्ली जैसे महंगे इलाकों में आवास की व्यवस्था करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके कार्यालयों का निर्माण और उनके साथ तैनात होने वाले सुरक्षा कर्मियों व सहायक कर्मचारियों का वेतन इस खर्च को कई गुना बढ़ा देगा। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांसदों को मिलने वाली आजीवन पेंशन का खर्च भी भविष्य के बजटों पर एक स्थायी बोझ बन जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विवाद का मुख्य बिंदु यही है कि जब देश के सैनिकों और आम कर्मचारियों के लिए </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">राजकोषीय अनुशासन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">पेंशन सुधार</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">की बात की जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वही मापदंड जनप्रतिनिधियों पर लागू क्यों नहीं होते</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">अग्निवीर योजना के माध्यम से करोड़ों रुपये बचाने की कोशिश करने वाली सरकार जब सांसदों की फौज बढ़ाने की तैयारी करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आम नागरिक के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या देश की प्राथमिकताएं सही दिशा में हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक तरफ एक जवान है जो अपनी जवानी के चार साल देश को देता है और बिना पेंशन के घर लौट आता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और दूसरी तरफ एक सांसद है जो केवल पांच साल के कार्यकाल के बाद आजीवन पेंशन और सुविधाओं का हकदार बन जाता है। एक बात और जहां कर्मचारी को पेंशन का हकदार बनने के लिए 20 से 25 साल की सेवा अनिवार्य  है,  वहां सांसद या विधायक के लिए ऐसा नही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> एक दिन के लिए सांसद या विधायक  बनने  पर उन्हें पूरी पेंशन मिलती है। सांसद या विधायक जितनी बार चुना जाता है,  उसकी   उ पेंशन में बढ़े कार्यकाल के हिसाब से वृद्धि मिलती है।कोई व्यक्ति  यदि चार बार सांसद  और तीन बार विधायक  बने तो उसे सांसद काल की चार और विधायक काल की तीन वृद्धि पेंशन में जुड़कर  मिलती है। वर्तमान   पंजाब सरकार ने  एक आदेश करने विधायक के लिए सिर्फ  एक पेंशन की व्यवस्था रखी है। ऐसा पूरे देश में क्यों नही हो सकता। सांसद और विधायकों के साथ भी ऐसा ही किया जाना चाहिए।    </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत जैसे विकासशील देश में जहां शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के लिए संसाधनों की भारी कमी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां विधायी विस्तार के खर्चों को बहुत सावधानी से तौलने की आवश्यकता है। लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसे इस तरह से लागू किया जाना चाहिए कि यह आम जनता के त्याग और सैनिकों के समर्पण के साथ न्याय करे। यदि सरकार को वास्तव में राजकोषीय घाटे की चिंता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे सांसदों के वेतन-भत्तों में भी कटौती करने और </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">एक राष्ट्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक पेंशन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसी व्यवस्था पर विचार करना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि देश का पैसा सांसदों की सुख-सुविधाओं के बजाय उन लोगों पर खर्च हो जो वास्तव में देश की नींव को मजबूत करते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक मधुप</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/176917/the-country-benefited-from-the-falling-of-the-delimitation-bill</link>
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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 18:37:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अक्षय तृतीया पर गौरीगंज रेलवे स्टेशन पर चला जनजागरूकता अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> जनपद अमेठी में  दिनांक 19 अप्रैल 2026 को उप जिलाधिकारी/जिला प्रोबेशन अधिकारी के निर्देशन में अक्षय तृतीया के अवसर पर नारी शक्ति वंदन अधिनियम के अंतर्गत गौरीगंज रेलवे स्टेशन पर जनजागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान का उद्देश्य बाल विवाह जैसी कुप्रथा के प्रति लोगों को जागरूक करना रहा। इस दौरान चाइल्ड हेल्पलाइन के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर गौरव श्रीवास्तव ने बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 भारत में बाल विवाह को रोकने, पीड़ितों को संरक्षण देने तथा दोषियों को दंडित करने का प्रमुख कानून है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने लोगों से अपील की कि इस कानून का पालन करें और बाल विवाह जैसी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176653/public-awareness-campaign-launched-at-gauriganj-railway-station-on-akshaya"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1-10.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> जनपद अमेठी में  दिनांक 19 अप्रैल 2026 को उप जिलाधिकारी/जिला प्रोबेशन अधिकारी के निर्देशन में अक्षय तृतीया के अवसर पर नारी शक्ति वंदन अधिनियम के अंतर्गत गौरीगंज रेलवे स्टेशन पर जनजागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान का उद्देश्य बाल विवाह जैसी कुप्रथा के प्रति लोगों को जागरूक करना रहा। इस दौरान चाइल्ड हेल्पलाइन के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर गौरव श्रीवास्तव ने बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 भारत में बाल विवाह को रोकने, पीड़ितों को संरक्षण देने तथा दोषियों को दंडित करने का प्रमुख कानून है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने लोगों से अपील की कि इस कानून का पालन करें और बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त करने में सहयोग दें। चाइल्ड हेल्पलाइन की रुचि सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि बाल विवाह के लिए न्यूनतम आयु लड़कियों के लिए 18 वर्ष तथा लड़कों के लिए 21 वर्ष निर्धारित की गई है। इसका उल्लंघन करने पर दोषियों को 2 वर्ष तक की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान केस वर्कर बेबी सिंह ने उपस्थित लोगों को विभिन्न टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबरों—181, 1098, 112, 1090 और 1076—की विस्तृत जानकारी दी तथा आवश्यकता पड़ने पर इनका उपयोग करने की सलाह दी। इस मौके पर गौरीगंज के बाल कल्याण दरोगा एवं आरपीएफ जवान भी मौजूद रहे और अभियान को सफल बनाने में सहयोग किया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 20:47:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जिलाधिकारी अमेठी व पुलिस अधीक्षक अमेठी द्वारा महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर की गई गोष्ठी </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> पुलिस सभागार गौरीगंज में जिलाधिकारी अमेठी व पुलिस अधीक्षक अमेठी श सरवणन टी. द्वारा मिशन शक्ति फेज-5 द्वितीय चरण के तहत महिला सुरक्षा, सुविधा और कार्यस्थल पर उनके अधिकारों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जनपद के प्रमुख चिकित्सालयों, शिक्षण संस्थानों, महिला छात्रावासों, व्यापार मंडल व अन्य प्रमुख संस्थानों के पदाधिकारियों  के साथ गोष्ठी की गई । महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से शासन द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के विषय में विस्तार से जानकारी दी गई व किसी भी आपात स्थिति में विभिन्न हेल्पलाइऩ नंबरों जैसे- 1090-वीमेन पॅावर लाइन, 181-महिला हेल्प लाइन, 108-एम्बुलेंस सेवा, 1076–मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, 112-पुलिस आपातकालीन</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176513/seminar-conducted-by-district-magistrate-amethi-and-superintendent-of-police"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/3-7.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> पुलिस सभागार गौरीगंज में जिलाधिकारी अमेठी व पुलिस अधीक्षक अमेठी श सरवणन टी. द्वारा मिशन शक्ति फेज-5 द्वितीय चरण के तहत महिला सुरक्षा, सुविधा और कार्यस्थल पर उनके अधिकारों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जनपद के प्रमुख चिकित्सालयों, शिक्षण संस्थानों, महिला छात्रावासों, व्यापार मंडल व अन्य प्रमुख संस्थानों के पदाधिकारियों  के साथ गोष्ठी की गई । महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से शासन द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के विषय में विस्तार से जानकारी दी गई व किसी भी आपात स्थिति में विभिन्न हेल्पलाइऩ नंबरों जैसे- 1090-वीमेन पॅावर लाइन, 181-महिला हेल्प लाइन, 108-एम्बुलेंस सेवा, 1076–मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, 112-पुलिस आपातकालीन सेवा, 1098-चाइल्ड लाइन, 102-स्वास्थ्य सेवा, थानों पर स्थापित मिशन शक्ति केन्द्र के विषय में जानकारी दी गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गोष्ठी में महोदय द्वारा संस्थानों मे कार्यरत महिला कर्मचारियों व छात्राओं के लिये परिसर में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए तथा वर्तमान समय में प्रचलित विभिन्न प्रकार के साइबर अपराध व उनसे बचने के उपाय जैसे साइबर अपराध होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन नं 1930 पर संपर्क करने अथवा <a href="http://www.cybercrime.gov.in/">www.cybercrime.gov.in</a> पर रिपोर्ट दर्ज कराने के साथ संबंधित थाने अथवा जनपदीय साइबर थाना पर शिकायत दर्ज कराने  हेतु जागरुक किया गया । साइबर अपराध से बचने हेतु किसी भी प्रकार के सोशल साइट पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी जैसे- ओटीपी, फोटो, मोबाइल नं0, आदि साझा न करें । तदोपरान्त उपस्थित पदाधिकारियों एवं उद्यमियों की समस्याओं व सुझावों को विस्तार से सुना गया । एसपी द्वारा प्राप्त शिकायतों के त्वरित निस्तारण हेतु संबंधित को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। । इस दौरान अपर पुलिस अधीक्षक अमेठा  ज्ञानेन्द्र कुमार सिंह व अन्य मौजूद रहे ।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/176513/seminar-conducted-by-district-magistrate-amethi-and-superintendent-of-police</link>
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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 20:20:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम - सुधांशु शुक्ला</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर मटियारी हाउस गौरीगंज में एक भव्य आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी प्रतिष्ठित महिलाओं ने प्रतिभाग किया और अधिनियम के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में महिलाओं ने मीडिया से मुखातिब होते हुए इस अधिनियम को देश में लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं परिवर्तनकारी कदम बताया। इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष सुधांशु शुक्ला ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सशक्त भागीदारी प्रदान करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> उन्होंने कहा कि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176507/nari-shakti-vandan-act-is-a-historic-step-towards-women"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1-9.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर मटियारी हाउस गौरीगंज में एक भव्य आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी प्रतिष्ठित महिलाओं ने प्रतिभाग किया और अधिनियम के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में महिलाओं ने मीडिया से मुखातिब होते हुए इस अधिनियम को देश में लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं परिवर्तनकारी कदम बताया। इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष सुधांशु शुक्ला ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सशक्त भागीदारी प्रदान करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> उन्होंने कहा कि लंबे समय से राजनीति में महिलाओं की भागीदारी अपेक्षाकृत कम रही है, जिसे संतुलित करने के लिए यह अधिनियम अत्यंत आवश्यक था। यह कानून महिलाओं को लोकसभा, राज्यसभा एवं विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान कर उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में सशक्त बनाएगा। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि अनीता सिंह ने कहा कि यह अधिनियम केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में महिलाओं के प्रति सोच और दृष्टिकोण को भी सकारात्मक रूप से परिवर्तित करेगा। उन्होंने कहा कि इससे महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता मिलेगी और वे आत्मविश्वास के साथ समाज के हर क्षेत्र में आगे बढ़ेंगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">  महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से नीति निर्माण में संवेदनशीलता आएगी, जिससे महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों को बेहतर ढंग से समझा और हल किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम भविष्य में एक सशक्त एवं समावेशी समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जिला उपाध्यक्ष उपमा सरोज ने कहा कि यह कानून महिलाओं को संवैधानिक अधिकारों के तहत मजबूत आधार प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि इससे महिलाओं को न्याय और समानता के अधिकारों को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने का अवसर मिलेगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> उपमा सरोज ने कहा कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में आगे आती हैं तो वह किसी भी समस्या का समाधान भावनात्मक रूप से करती हैं हमारे देश में जितना महिला नेतृत्व बढ़ेगा उतना ही हमारा देश विकसित होगा। महिला ही नींव बनाती है कि हमारा भविष्य कैसा होगा हमारे देश का भविष्य कैसा होगा, जितना महिलाएं आगे आएंगी उतना ही हमारा देश तरक्की करेगा। इस अधिनियम में सभी वर्गों की महिलाओं को समान अवसर मिलेगा।  केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में भी सकारात्मक परिवर्तन लाएगा। इससे बालिकाओं को प्रेरणा मिलेगी और वे अपने भविष्य को लेकर अधिक जागरूक और आत्मनिर्भर बनेगी ,महिलाओं को समाज में सम्मान और पहचान मिलेगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> उन्होंने कहा कि जब महिलाएं निर्णय लेने वाले पदों पर पहुंचेंगी, तो स्वास्थ्य, पोषण और महिला कल्याण से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता मिलेगी, जिससे समाज का समग्र विकास सुनिश्चित होगा। कार्यक्रम में उपस्थित सभी महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का महत्व केवल 33 प्रतिशत आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज में लैंगिक समानता की दिशा में एक सशक्त संदेश भी देता है। यह महिलाओं को राजनीतिक नेतृत्व में आगे आने के लिए प्रेरित करेगा और शासन व्यवस्था में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेगा। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">महिलाओं ने यह भी कहा कि इस अधिनियम के लागू होने से पंचायत से लेकर संसद तक महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, जिससे समाज के सभी वर्गों की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा और नीतियां अधिक समावेशी एवं प्रभावी बनेंगी। अंत में सभी वक्ताओं ने इस अधिनियम का स्वागत करते हुए इसे महिलाओं के उज्जवल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया और कहा कि इससे देश में महिला सशक्तिकरण को नई गति मिलेगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 20:07:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में उतरी महिलाएं</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में आज सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़ी महिलाओं ने एकजुट होकर प्रेस वार्ता की और इसे महिलाओं के प्रतिनिधित्व को सशक्त करने वाला ऐतिहासिक सुधार बताया। वक्ताओं ने कहा कि यह पहल देश के लोकतंत्र को नई दिशा देने के साथ-साथ आधी आबादी की भागीदारी को और मजबूत करेगी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">अधिवक्ता एवं महिला अधिकारों के लिए कार्य करने वाली सोशल एक्टिविस्ट दिशा अरोड़ा ने बताया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के प्रतिनिधित्व की ऐतिहासिक कमी को दूर करने वाला महत्वपूर्ण कदम है। महिलाओं में क्षमता हमेशा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176494/women-came-out-in-support-of-nari-shakti-vandan-act"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1001837614.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में आज सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़ी महिलाओं ने एकजुट होकर प्रेस वार्ता की और इसे महिलाओं के प्रतिनिधित्व को सशक्त करने वाला ऐतिहासिक सुधार बताया। वक्ताओं ने कहा कि यह पहल देश के लोकतंत्र को नई दिशा देने के साथ-साथ आधी आबादी की भागीदारी को और मजबूत करेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अधिवक्ता एवं महिला अधिकारों के लिए कार्य करने वाली सोशल एक्टिविस्ट दिशा अरोड़ा ने बताया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के प्रतिनिधित्व की ऐतिहासिक कमी को दूर करने वाला महत्वपूर्ण कदम है। महिलाओं में क्षमता हमेशा से रही है, लेकिन अवसर और भागीदारी सीमित थे। 33 प्रतिशत आरक्षण के साथ अब संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की आवाज अधिक मजबूती से गूंजेगी और वे नीति निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगी। उन्होंने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सामाजिक कार्यकर्ता सुभाषिनी शिवहरे ने बताया कि यह अधिनियम महिलाओं के बढ़ते आत्मविश्वास और बदलती भूमिका का प्रतीक है। पहले महिलाएं वोट डालने की बात करती थीं, लेकिन अब वे नेतृत्व की भूमिका में आने के लिए आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से देश की आधी आबादी से जुड़े मुद्दे मजबूती से सामने आएंगे और उनका समाधान संभव होगा। 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को निर्णय लेने का अधिकार देगा, जिससे वे अपने मुद्दों को खुलकर रख सकेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में “प्रधान पति” जैसी चुनौतियाँ अभी भी हैं, लेकिन यह व्यवस्था तेजी से बदल रही है और महिलाएं अब वास्तविक नेतृत्व की ओर बढ़ रही हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 19:47:07 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अरैल सेल्फी प्वाइंट पर ‘नारी शक्ति हस्ताक्षर अभियान’ आयोजित</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज। </strong>नैनी क्षेत्र स्थित अरैल सेल्फी प्वाइंट पर गुरुवार को ‘नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम’ के अंतर्गत ‘नारी शक्ति हस्ताक्षर (वॉल सिग्नेचर) अभियान’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं और सरकार के कार्यों की जानकारी देना रहा।इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में जिला अध्यक्ष राजेश शुक्ला उपस्थित रहे। उन्होंने महिलाओं को संबोधित करते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी और महिलाओं की भागीदारी को समाज के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176411/%E2%80%98nari-shakti-signature-campaign%E2%80%99-organized-at-arail-selfie-point"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260416-wa0143.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज। </strong>नैनी क्षेत्र स्थित अरैल सेल्फी प्वाइंट पर गुरुवार को ‘नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम’ के अंतर्गत ‘नारी शक्ति हस्ताक्षर (वॉल सिग्नेचर) अभियान’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं और सरकार के कार्यों की जानकारी देना रहा।इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में जिला अध्यक्ष राजेश शुक्ला उपस्थित रहे। उन्होंने महिलाओं को संबोधित करते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी और महिलाओं की भागीदारी को समाज के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और ‘नारी शक्ति हरवाला वॉल’ पर हस्ताक्षर कर अपनी सहभागिता दर्ज कराई।इस मौके पर जिला उपाध्यक्ष सविता मिश्रा,महिला मोर्चा की जिला उपाध्यक्ष शोभा द्विवेदी, उत्तर प्रदेश राज्य परिषद सदस्य पूजा बिंद, पूर्व जिला पदाधिकारी आरती कोल, उपाध्यक्ष आकांक्षा जायसवाल, मिथिलेश सिंह, देवी एम., उपाध्यक्ष आरती सिंह, जनजातीय मंत्री प्रमिला, नीटू केशरवानी, भाजपा नेता हरि कृष्ण तिवारी,बबलू, प्रजा जायसवाल तथा पार्षद राकेश जायसवाल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।कार्यक्रम का समापन महिलाओं के सशक्तिकरण के संकल्प के साथ हुआ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 21:12:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मील का पत्थर साबित होगा नारी शक्ति वंदन अधिनियम </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">नारी शक्ति वंदन अधिनियम आज लोकसभा के पटल पर चर्चा के लिए रख दिया गया है। यह भारत की महिलाओं के उत्थान के लिए मील का पत्थर साबित होगा। देश की राजनीति और भविष्य निर्माण में महिलाओं की भूमिका हमेशा से उल्लेखनीय रही है। भारतीय संविधान सभा में कुल 15 महिला सदस्य थीं। इन महिलाओं ने संविधान के मसौदे को तैयार करने और देश के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। संविधान सभा के बाद महिलाओं ने संसद में भी एंट्री ली। भारतीय लोकतंत्र के सात दशकों के सफर में संसद की संरचना में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176346/nari-shakti-vandan-act-will-prove-to-be-a-milestone"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/hindi-divas14.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नारी शक्ति वंदन अधिनियम आज लोकसभा के पटल पर चर्चा के लिए रख दिया गया है। यह भारत की महिलाओं के उत्थान के लिए मील का पत्थर साबित होगा। देश की राजनीति और भविष्य निर्माण में महिलाओं की भूमिका हमेशा से उल्लेखनीय रही है। भारतीय संविधान सभा में कुल 15 महिला सदस्य थीं। इन महिलाओं ने संविधान के मसौदे को तैयार करने और देश के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। संविधान सभा के बाद महिलाओं ने संसद में भी एंट्री ली। भारतीय लोकतंत्र के सात दशकों के सफर में संसद की संरचना में कई बदलाव आए हैं, लेकिन अब एक बड़ा बदलाव अंतिम चरण में है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यदि महिलाएं सशक्त देती हैं और देश के शासन-प्रशासन में उनकी भागीदारी बढ़ती है, तो हमारे लोकतंत्र और समाज के लिए इससे बेहतर भला और क्या होगा। आधी आबादी को उनका हक मिलना सिर्फ न्याय नहीं, बल्कि राष्ट्र की प्रगति के लिए अनिवार्य है। लेकिन जब हम महिला आरक्षण से जुड़े हालिया घटनाक्रमों और इसके कानूनी पेचीदगियों को देखते हैं, तो साफ नजर आता है कि सरकार की मंशा इस मुद्दे पर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऐसा लगता है कि इसे वास्तविक सशक्तिकरण के बजाय एक राजनीतिक हथियार के तौर पर अधिक इस्तेमाल किया जा रहा है। इस कानून की सबसे बड़ी और बुनियादी कमी इसका शतों में बंधा होना है। सरकार ने बिल तो पास कर दिया, लेकिन इसके साथ एक ऐसी शतं जोड़ दी जिसने इसे फिलहाल एक भविष्य का वादा बनाकर खेड़ दिया है। कानून के मुताबिक, आरक्षण तभी लागू होगा जब नई जनगणना होगी और उसके आधार पर सीटों का नया चंटवारा यानी परिसीमन होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के माध्यम से लोकसभा में महिलाओं को मिलने वाला 33 प्रतिशत आरक्षण केवल एक कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि उस असमानता को दूर करने का प्रयास है जो 1952 से लगातार चली आ रही है। लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी समय के साथ धीरे-धीरे बढ़ती रही है, हालांकि यह अब भी संतोषजनक स्तर तक नहीं पहुंची है। पहली लोकसभा में 22 महिलाएं चुनी गई थीं, जो कुल सदस्यों का 4.4 प्रतिशत थीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके बाद 1957 की दूसरी लोकसभा में यह संख्या बढ़कर 27 (5.4 प्रतिशत) हो गई और 1962 की तीसरी लोकसभा में 34 महिलाएं (6.7 प्रतिशत) सदन तक पहुंचीं।चौथी लोकसभा में यह संख्या थोड़ी घटकर 31 (5.9 प्रतिशत) रह गई, जबकि पांचवीं लोकसभा में केवल 22 महिलाएं (4.2 प्रतिशत) ही चुनी गईं। इसके बाद छठी लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी और कम होकर 19 (3.4 प्रतिशत) रह गई, लेकिन सातवीं लोकसभा में यह फिर बढ़कर 28 (5.1 प्रतिशत) हो गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आठवीं लोकसभा में महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई और 44 महिलाएं (8.11 प्रतिशत) चुनी गईं। हालांकि नौवीं लोकसभा में यह संख्या फिर घटकर 28 (5.3 प्रतिशत) रह गई, जबकि दसवीं लोकसभा में 36 महिलाएं (7 प्रतिशत) सांसद बनीं। इसके बाद 11वीं लोकसभा में 40 महिलाएं (7.4 प्रतिशत) और 12वीं लोकसभा में 44 महिलाएं (8 प्रतिशत) चुनी गईं। 13वीं लोकसभा में यह आंकड़ा बढ़कर 48 (8.8 प्रतिशत) हुआ, जबकि 14वीं लोकसभा में 45 महिलाएं (8.1 प्रतिशत) संसद पहुंचीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">15वीं लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी पहली बार दो अंकों में पहुंची, जब 59 महिलाएं (10.9 प्रतिशत) सांसद बनीं। 16वीं लोकसभा में यह संख्या और बढ़कर 62 हो गई, जो कुल संख्याबल का लगभग 11 प्रतिशत है। वहीं, 2019 की 17वीं लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या 78 रही जो कुल सांसदों का 14.3 प्रतिशत थी। वर्तमान 18वीं लोकसभा में मामूली बदलाव के साथ यह संख्या 74 पर है, जो पिछली बार से कम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान 18वीं लोकसभा में मामूली बदलाव के साथ यह संख्या 74 पर है, जो पिछली बार से कम है। कुल मिला कर यह वृद्धि सुखद तो है, लेकिन भारत की उस आधी आबादी की आकांक्षाओं के सामने नाकाफी है, जो देश के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने में बराबर की हिस्सेदार है। हालांकि, साल 2026 की जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन ने महिला आरक्षण की राह को और अधिक स्पष्ट कर दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार की नई योजना के अनुसार भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 की जा सकती है। इसमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, क्योंकि सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू करने जा रही है। कानून के आने से ऐसा पहली बार होगा जब भारतीय संसद में महिला सांसदों की संख्या एक साथ लगभग 200 की बढ़त दर्ज करेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महिला आरक्षण के लागू होने से केवल संख्या बल नहीं बदलेगा, बल्कि विधायी प्रक्रिया और नीति-निर्माण के मुद्दों में भी व्यापक बदलाव आने की उम्मीद है। शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सुरक्षा जैसे विषयों पर सदन के भीतर अब और अधिक प्रखर और संवेदनशील बहसें देखने को मिलेंगी।जानकारों का मानना है कि इस लंबी प्रक्रिया के कारण यह आरक्षण 2029 या शायद 2034 तक खिंच सकता है। सवाल यह उठता है कि अगर नीयत साफ थी, तो इसे तुरंत मौजूदा सीटों पर ही क्यों लागू नहीं किया गया?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जनगणना और परिसीमन जैसी उलझी हुई प्रक्रियाओं के साथ जोड़कर सरकार ने इसे एक ऐसे रास्ते पर डाल दिया है, जिसकी मंजिल का फिलहाल कोई पता नहीं है। जैसे ही सरकार सीटों के नए बंटवारे की बात करती है, दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंता बढ़ जाती है। तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों ने पिछले कई सालों में जनसंख्या को काबू करने के लिए बहुत अच्छा काम किया है। अब तकनीकी दिक्कत यह है कि यदि सीटों का फैसला केवल आबादी के आधार पर होता है, तो उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों की लोकसभा सीटें बहुत ज्यादा बढ़ जाएंगी और दक्षिण का राजनीतिक बजन कम हो जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आंकड़ों के हिसाब से देखें तो उत्तर भारत के कुछ राज्यों में सीटें अस्सी प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं, जबकि दक्षिण में यह बढ़ोतरी बहुत कम होगी। दक्षिण के राज्यों का कहना है कि उन्हें अच्छा काम करने की सजा दी जा रही है। सरकार ने इस क्षेत्रीय विवाद को सुलझाने का कोई पका रास्ता बताए बिना ही महिला आरक्षण को सीटों के बंटवारे से जोड़ दिया। इससे यह डर पैदा हो गया है कि महिलाओं को हक देने के नाम पर कहीं देश के अलग-अलग हिस्सों के बीच का तालमेल ही न बिगड़ जाए। इस बिल की एक और बड़ी व्यावहारिक चिंता प्रॉक्सी संस्कृति और रसूखदार राजनीतिक घरानों का कब्जा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसे आसान भाषा में समों तो यह नाम महिला का और काम पुरुष का वाली स्थिति है। गाँवों की पंच्चायतों में हमने अक्सर देखा है कि महिला चुनाव तो जीत जाती है, लेकिन दफ्तर में उसके पति, पिता या भाई बैठते हैं और सारे फैसले बही लेते हैं। इसे ही पति-सरपंच संस्कृति कहा जाता है। अब डर यह है कि विधानसभा और संसद में भी यही होगा। राजनीतिक पार्टियां जमीन से जुड़ी संघर्षशील महिलाओं के बजाय उन्हीं महिलाओं को टिकट देंगी जो पहले से ताकतवर राजनीतिक परिवारों से आती हैं। यानी एक आम महिला के लिए संसद के दरवाजे अभी भी बंद रह सकते हैं, क्योंकि आज के दौर में चुनाव लड़ना बहुत महंगा हो चुका है और महिलाओं के पास अपने खर्च के लिए पैसे नहीं होते।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बिना सरकारी मदद या चुनावी खर्च में छूट के, यह आरक्षण केवल अमीर वर्ग की महिलाओं तक सिमट कर रह जाएगा।गौरतलब है कि आज से लोकसभा सभा का तीन दिवसीय विशेष सत्र शुरू हो रहा है। इस दौरान केंद्र सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा कर इसे लागू करेगी। इसके लागू होने के बाद 2029 की लोकसभा में संसद में महिला सांसदों की संख्या 273 तक पहुंचने की उम्मीद है। यह आरक्षण केवल सीटों का बंटवारा नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के निर्माण में महिलाओं की बराबरी की दावेदारी का प्रमाण है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 19:26:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>भाजपा द्वारा रैली निकाल कर नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम का हुआ भव्य आयोजन </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> नगर में बुधवार को भारतीय जनता पार्टी द्वारा “नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम” का भव्य आयोजन किया गया, जिसकी शुरुआत कंपनी गार्डन से हस्ताक्षर अभियान, स्कूटी रैली और पदयात्रा के साथ हुई। इस कार्यक्रम में जिले भर से बड़ी संख्या में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रंग-बिरंगे परिधानों में सजी महिलाएं हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर नारी सशक्तिकरण के संदेश देती हुई पदयात्रा में शामिल हुईं। स्कूटी रैली ने कार्यक्रम को और आकर्षक बना दिया, जिससे शहर के विभिन्न मार्गों पर जागरूकता का संदेश फैलाया गया।</div>
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<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में गीता विश्वकर्मा सदस्य महिला आयोग, विशेष</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176235/bjp-organized-a-grand-nari-shakti-vandan-program-by-taking"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260415-wa0114.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> नगर में बुधवार को भारतीय जनता पार्टी द्वारा “नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम” का भव्य आयोजन किया गया, जिसकी शुरुआत कंपनी गार्डन से हस्ताक्षर अभियान, स्कूटी रैली और पदयात्रा के साथ हुई। इस कार्यक्रम में जिले भर से बड़ी संख्या में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रंग-बिरंगे परिधानों में सजी महिलाएं हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर नारी सशक्तिकरण के संदेश देती हुई पदयात्रा में शामिल हुईं। स्कूटी रैली ने कार्यक्रम को और आकर्षक बना दिया, जिससे शहर के विभिन्न मार्गों पर जागरूकता का संदेश फैलाया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में गीता विश्वकर्मा सदस्य महिला आयोग, विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने, सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने तथा सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।</div>
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<div style="text-align:justify;">विशिष्ट अतिथि के रूप में सदर विधायक राजेंद्र मौर्य ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नारी शक्ति देश के विकास की आधारशिला है और सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है।कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष आशीष श्रीवास्तव ने की एवं संचालन जिला महामंत्री राजेश मिश्रा राजन द्वारा किया गया। सभी पदाधिकारियों ने कार्यक्रम की सफलता के लिए कार्यकर्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।</div>
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<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम मे प्रमुख रूप से पार्टी के पदाधिकारी महिला मोर्चा की महिलाये और समाज के विभिन्न क्षेत्रो की अग्रणी महिलाये और स्कूली छात्राये उपस्थित रही। उक्त जानकारी राघवेंद्र शुक्ला जिला प्रवक्ता भाजपा नें दी।रैली कंपनी बाग से प्रारम्भ होकर मीरा भवन चौराहे होते हुए अम्बेडकर चौराहा से कंपनी बाग में समाप्त हुई और पदयात्रा कंपनी बाग से पुलिस लाइन गेट तक और पुनः कंपनी बाग आकर समाप्त हुई।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/176235/bjp-organized-a-grand-nari-shakti-vandan-program-by-taking</link>
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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 19:02:40 +0530</pubDate>
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