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                <title>RPS Officer Success Story - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>RPS Officer Success Story RSS Feed</description>
                
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                <title>Success Story: पति के निधन के बाद भी नहीं टूटी हिम्मत, बनी राजस्थान पुलिस की DSP</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: अंजू यादव की कहानी संघर्ष और सफलता की मिसाल है, जिसने शादी के बाद अपने ससुराल से अलग होकर मायके में बेटे के साथ रहना चुन लिया और अपनी मेहनत से राजस्थान पुलिस सेवा (RPS) में पुलिस उपाधीक्षक (DSP) बनने का सपना पूरा किया। 2025 की पासिंग आउट परेड में उनका चयन न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश के लिए भी गर्व का पल था।</p>
<p>हरियाणा के नारनौल के गांव धौलेड़ा में जन्मी अंजू ने 12वीं तक की पढ़ाई अपने गांव के सरकारी स्कूल से की और बीए की डिग्री दूरस्थ शिक्षा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/159341/success-story-even-after-the-death-of-her-husband-her"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/dsp-anju-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p>Success Story: अंजू यादव की कहानी संघर्ष और सफलता की मिसाल है, जिसने शादी के बाद अपने ससुराल से अलग होकर मायके में बेटे के साथ रहना चुन लिया और अपनी मेहनत से राजस्थान पुलिस सेवा (RPS) में पुलिस उपाधीक्षक (DSP) बनने का सपना पूरा किया। 2025 की पासिंग आउट परेड में उनका चयन न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश के लिए भी गर्व का पल था।</p>
<p>हरियाणा के नारनौल के गांव धौलेड़ा में जन्मी अंजू ने 12वीं तक की पढ़ाई अपने गांव के सरकारी स्कूल से की और बीए की डिग्री दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से पूरी की। शादी के बाद राजस्थान के बहरोड़ में रहने लगीं, जहां 2012 में उनके बेटे का जन्म हुआ। परिवारिक सपोर्ट न मिलने के कारण वह मायके लौट आईं और बेटे की परवरिश अपने माता-पिता के सहयोग से की। इस दौरान उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और शिक्षक बनने के लिए मेहनत की।</p>
<p>2016 में अंजू को मध्य प्रदेश के भिंड में नवोदय विद्यालय में शिक्षक के पद पर पहली सरकारी नौकरी मिली। इसके बाद राजस्थान और दिल्ली के सरकारी स्कूलों में भी शिक्षक के तौर पर काम किया। लेकिन उनकी मेहनत का असली इनाम 2023 में मिला, जब उन्होंने राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा में विधवा कोटे से चयन पाकर 2024 बैच की राजस्थान पुलिस सेवा में DSP का पद हासिल किया। यह उपलब्धि पति की 2021 में मौत के बाद 12 दिन में परीक्षा फॉर्म भरने और लगातार मेहनत का परिणाम थी।</p>
<p>अंजू का मानना है कि उनकी सफलता इस बात की मिसाल है कि ग्रामीण परिवेश की महिलाएं भी शिक्षा के बल पर अपने जीवन में बड़े मुकाम हासिल कर सकती हैं। उन्होंने महिलाओं से आग्रह किया है कि वे अपनी बेटियों को शिक्षित करें और उनके सपनों को पूरा करने में उनका सहयोग करें। अंजू यादव की कहानी उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य को पाने की हिम्मत रखती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Nov 2025 17:22:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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                <title>Success Story: पति के निधन के बाद भी नहीं टूटी हिम्मत, बनी राजस्थान पुलिस की DSP</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: अंजू यादव की कहानी संघर्ष और सफलता की मिसाल है, जिसने शादी के बाद अपने ससुराल से अलग होकर मायके में बेटे के साथ रहना चुन लिया और अपनी मेहनत से राजस्थान पुलिस सेवा (RPS) में पुलिस उपाधीक्षक (DSP) बनने का सपना पूरा किया। 2025 की पासिंग आउट परेड में उनका चयन न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश के लिए भी गर्व का पल था।</p>
<p>हरियाणा के नारनौल के गांव धौलेड़ा में जन्मी अंजू ने 12वीं तक की पढ़ाई अपने गांव के सरकारी स्कूल से की और बीए की डिग्री दूरस्थ शिक्षा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156221/success-story-dsp-of-rajasthan-police-did-not-break-even"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/dsp-anju-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p>Success Story: अंजू यादव की कहानी संघर्ष और सफलता की मिसाल है, जिसने शादी के बाद अपने ससुराल से अलग होकर मायके में बेटे के साथ रहना चुन लिया और अपनी मेहनत से राजस्थान पुलिस सेवा (RPS) में पुलिस उपाधीक्षक (DSP) बनने का सपना पूरा किया। 2025 की पासिंग आउट परेड में उनका चयन न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश के लिए भी गर्व का पल था।</p>
<p>हरियाणा के नारनौल के गांव धौलेड़ा में जन्मी अंजू ने 12वीं तक की पढ़ाई अपने गांव के सरकारी स्कूल से की और बीए की डिग्री दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से पूरी की। शादी के बाद राजस्थान के बहरोड़ में रहने लगीं, जहां 2012 में उनके बेटे का जन्म हुआ। परिवारिक सपोर्ट न मिलने के कारण वह मायके लौट आईं और बेटे की परवरिश अपने माता-पिता के सहयोग से की। इस दौरान उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और शिक्षक बनने के लिए मेहनत की।</p>
<p>2016 में अंजू को मध्य प्रदेश के भिंड में नवोदय विद्यालय में शिक्षक के पद पर पहली सरकारी नौकरी मिली। इसके बाद राजस्थान और दिल्ली के सरकारी स्कूलों में भी शिक्षक के तौर पर काम किया। लेकिन उनकी मेहनत का असली इनाम 2023 में मिला, जब उन्होंने राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा में विधवा कोटे से चयन पाकर 2024 बैच की राजस्थान पुलिस सेवा में DSP का पद हासिल किया। यह उपलब्धि पति की 2021 में मौत के बाद 12 दिन में परीक्षा फॉर्म भरने और लगातार मेहनत का परिणाम थी।</p>
<p>अंजू का मानना है कि उनकी सफलता इस बात की मिसाल है कि ग्रामीण परिवेश की महिलाएं भी शिक्षा के बल पर अपने जीवन में बड़े मुकाम हासिल कर सकती हैं। उन्होंने महिलाओं से आग्रह किया है कि वे अपनी बेटियों को शिक्षित करें और उनके सपनों को पूरा करने में उनका सहयोग करें। अंजू यादव की कहानी उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य को पाने की हिम्मत रखती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Sep 2025 11:17:22 +0530</pubDate>
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