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                <title>Siddharth University Kapilvastu - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Siddharth University Kapilvastu RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नशा न  केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि उसके  विकास में भी बाधा उत्पन्न करता है : कुलपति</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर /</strong> सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु (सिद्धार्थनगर) में कुलपति प्रो. कविता शाह की अध्यक्षता में छात्र-छात्राओं के लिए नशा मुक्ति शपथ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करना था।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का आयोजन अध्यक्ष छात्र कल्याण प्रो. नीता यादव द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों एवं उनके परिवारों को नशीले पदार्थों से दूर रहने के लिए प्रेरित करना तथा समाज में जागरूकता फैलाना है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को यह शपथ दिलाई</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176505/addiction-not-only-affects-a-persons-health-but-also-hinders"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/hindi-divas15.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर /</strong> सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु (सिद्धार्थनगर) में कुलपति प्रो. कविता शाह की अध्यक्षता में छात्र-छात्राओं के लिए नशा मुक्ति शपथ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करना था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का आयोजन अध्यक्ष छात्र कल्याण प्रो. नीता यादव द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों एवं उनके परिवारों को नशीले पदार्थों से दूर रहने के लिए प्रेरित करना तथा समाज में जागरूकता फैलाना है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को यह शपथ दिलाई गई कि वे स्वयं नशे से दूर रहेंगे और अपने आसपास के लोगों को भी इसके दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि युवा शक्ति यदि संकल्पित हो जाए तो समाज से नशे जैसी कुरीतियों को समाप्त किया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कुलपति प्रो. कविता शाह ने अपने उद्बोधन में कहा कि नशा न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि उसके परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में भी बाधा उत्पन्न करता है। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में सकारात्मक सोच अपनाएं, स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा दें और अपने साथियों को भी नशामुक्त रहने के लिए प्रेरित करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान सभी उपस्थित छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से नशा मुक्ति की शपथ ली और समाज को नशामुक्त बनाने के लिए हर संभव प्रयास करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम  युवाओं में जागरूकता फैलाने और सकारात्मक संदेश देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 20:04:11 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बौद्धिक संपदा अधिकार आज के ज्ञान-आधारित समाज की आधारशिला:  कुलपति प्रो.कविता शाह</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर,</strong> सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु  के विज्ञान संकाय द्वारा बुधवार  को गौतम बुद्ध प्रेक्षागृह में भारत सरकार  के लक्ष्य विकसित भारत 2047 के संदर्भ  में बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व से अवगत कराने के उद्देश्य से “बौद्धिक संपदा अधिकार: विकसित भारत2047 में प्रासंगिकता” विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो० कविता शाह एवं डॉ० भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा की कुलपति प्रो० आशु रानी की  उपस्थिति में संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रो० आशु रानी ने कहा कि  बौद्धिक संपदा अधिकार नवाचार, अनुसंधान एवं तकनीकी विकास को प्रोत्साहित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। </div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173542/intellectual-property-rights-are-the-cornerstone-of-todays-knowledge-based-society"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1773844986201.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर,</strong> सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु  के विज्ञान संकाय द्वारा बुधवार  को गौतम बुद्ध प्रेक्षागृह में भारत सरकार  के लक्ष्य विकसित भारत 2047 के संदर्भ  में बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व से अवगत कराने के उद्देश्य से “बौद्धिक संपदा अधिकार: विकसित भारत2047 में प्रासंगिकता” विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो० कविता शाह एवं डॉ० भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा की कुलपति प्रो० आशु रानी की  उपस्थिति में संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रो० आशु रानी ने कहा कि  बौद्धिक संपदा अधिकार नवाचार, अनुसंधान एवं तकनीकी विकास को प्रोत्साहित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क एवं डिज़ाइन जैसे अधिकार न केवल शोधकर्ताओं और आविष्कारकों के कार्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, बल्कि उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में भी सक्षम बनाते हैं। साथ ही, यह भी बताया गया कि आईपीआर   का प्रभावी उपयोग देश की आर्थिक वृद्धि, औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अपने अध्यक्षीय उद्बोधन  में प्रो० कविता शाह ने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार आज के ज्ञान-आधारित समाज की आधारशिला हैं। यदि हम विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं, तो हमें नवाचार, अनुसंधान और रचनात्मकता को बढ़ावा देना होगा तथा उनके संरक्षण के लिए प्रभावी आईपीआर   प्रणाली को अपनाना होगा।” विज्ञान संकाय की अधिष्ठाता प्रो० प्रकृति राय ने विषय प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए कहा कि वर्तमान समय में उच्च शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे छात्रों में नवाचार की भावना विकसित करें । प्रो एस के श्रीवास्तव ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए उपस्थित  सभी के  आभार व्यक्त किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. अश्वनी कुमार, परीक्षा नियंत्रक दीनानाथ यादव, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. नीता यादव ,शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो जितेंद्र कुमार सिंह   सिंह  , प्रो कौशलेन्द्र चतुर्वेदी , डॉ. लक्ष्मण सिंह,  डॉ. अमित साहनी , डॉ. मयंक कुशवाहा,  डॉ. अब्दुल हफीज, डॉ  शिवम शुक्ला , डॉ. रेनू त्रिपाठी, ,डॉ विमल वर्मा सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सञ्चालन डॉ शिल्पी श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम का  समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अवसर पर  सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु एवं डॉ० भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के मध्य शोध सहयोग एवं शैक्षणिक विकास हेतु समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरितसिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु सिद्धार्थनगर एवं डॉ० भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के मध्य शैक्षणिक एवं शोध सहयोग को बढ़ावा देने हेतु एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया गया। यह समझौता दोनों विश्वविद्यालयों के बीच अनुसंधान सहयोग, संयुक्त विकास कार्यक्रमों तथा पाठ्यक्रम साझेदारी  को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस दौरान  दोनों विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने आपसी सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। आई  क्यू ए सी निदेशक प्रो. सौरभ ने बताया कि समझौते के अंतर्गत दोनों संस्थान संयुक्त रूप से शोध परियोजनाओं पर कार्य करेंगे, विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए आदान-प्रदान कार्यक्रम संचालित करेंगे तथा विभिन्न विषयों में विशेषज्ञता साझा करेंगे। इसके साथ ही, नवीन पाठ्यक्रमों के विकास, कार्यशालाओं, सेमिनारों एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संयुक्त आयोजन भी किया जाएगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 20:47:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मत्स्य पालन किसानों की आय बढ़ाने लिए  महत्वपूर्ण और लाभकारी माध्यम बन सकता है : जिलाधिकारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div><strong>सिद्धार्थनगर, </strong></div>
<div>  </div>
<div>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के प्राणी विज्ञान विभाग तथा जिला प्रशासन सिद्धार्थनगर के संयुक्त तत्वावधान में किसानों में  पैंगेसियस मछली पालन की आधुनिक तकनीकों, व्यवसायिक संभावनाओं तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी उन्नत करने के उद्देश्य से गौतम बुद्ध सभागार में “पैंगेसियस मछली पालन किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे   जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जी. एन. ने कहा कि मत्स्य पालन किसानों की आय बढ़ाने लिए  राज्य सरकार एवं विश्वविद्यालय प्रशासन  का यह  संयुक्त प्रयास  अत्यंत  महत्वपूर्ण और लाभकारी माध्यम बन सकता है।</div>
<div>  </div>
<div>उन्होंने विशेष रूप से पैंगेसियस मछली पालन को कम</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173243/fisheries-can-become-an-important-and-profitable-medium-to-increase"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1773406513101-(1).jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div><strong>सिद्धार्थनगर, </strong></div>
<div> </div>
<div>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के प्राणी विज्ञान विभाग तथा जिला प्रशासन सिद्धार्थनगर के संयुक्त तत्वावधान में किसानों में  पैंगेसियस मछली पालन की आधुनिक तकनीकों, व्यवसायिक संभावनाओं तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी उन्नत करने के उद्देश्य से गौतम बुद्ध सभागार में “पैंगेसियस मछली पालन किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे   जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जी. एन. ने कहा कि मत्स्य पालन किसानों की आय बढ़ाने लिए  राज्य सरकार एवं विश्वविद्यालय प्रशासन  का यह  संयुक्त प्रयास  अत्यंत  महत्वपूर्ण और लाभकारी माध्यम बन सकता है।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने विशेष रूप से पैंगेसियस मछली पालन को कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली तकनीक बताया। जिलाधिकारी ने किसानों को सरकार की विभिन्न मत्स्य योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीकों को अपना कर किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं। साथ ही उन्होंने सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो कविता शाह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों के लिए आयोजित यह  प्रशिक्षण कार्यक्रम  कृषि और मत्स्य क्षेत्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।</div>
<div> </div>
<div>कार्यक्रम में प्राणी विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष एवं संयोजक डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष कुमार वर्मा ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कार्यक्रमों और यहां अध्ययन के लाभों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में स्वागत संबोधन विज्ञान  संकाय की अधिष्ठाता प्रो प्रकृति राय ने किया ।  </div>
<div> </div>
<div> आचार्य डॉ. विनीता रावत, मत्स्य विभाग के सहायक निदेशक नन्द किशोर प्रसाद,  एक्वा डॉक्टर सॉल्यूशंस कोलकाता के डॉ देब तनु  बर्मन, गौरव एक्वा यूनिवर्स, महाराजगंज के संस्थापक वीर गौरव, जंतु  विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव ने हैचरी प्रबंधन तथा सहायक आचार्य एवं सह-संयोजक डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने रोग निदान के विषय में प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम में अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो नीता यादव , अधिष्ठाता वाणिज्य संकाय प्रो सौरभ , डॉ लक्ष्मण सिंह, डॉ विशाल गुप्ता, डॉ अविनाश प्रताप सिंह सहित लगभग एक सौ पचास  किसानों  ने  प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 19:33:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्रीय सेवा योजना सामाजिक संवेदनशीलता और मानव मूल्यों के विकास का सशक्त माध्यम है : प्रो. सत्येंद्र कुमार दूबे</title>
                                    <description><![CDATA[<div><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर, </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के  राष्ट्रीय सेवा योजना की तीनों इकाइयों — भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई इकाई, महारानी अहिल्या बाई होलकर इकाई एवं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस इकाई — के सप्त दिवसीय विशेष शिविर के तृतीय दिवस पर सोमवार को  जनजागरण एवं स्वच्छता अभियान के साथ बौद्धिक सत्र का आयोजन किया गया। स्वयंसेवक-स्वयंसेविकाओं ने शिविर स्थल की स्वच्छता के पश्चात ग्राम संग्रामपुर में जनसंपर्क कर स्वच्छता, सेवा भाव एवं जनसहभागिता के प्रति ग्रामीणों को जागरूक किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बौद्धिक सत्र में अध्यक्षता करते हुए प्रो. सत्येन्द्र कुमार दुबे (अध्यक्ष, हिन्दी विभाग) ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना युवाओं</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173039/national-service-scheme-is-a-powerful-medium-for-development-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1773061459179.jpg" alt=""></a><br /><div><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर, </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के  राष्ट्रीय सेवा योजना की तीनों इकाइयों — भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई इकाई, महारानी अहिल्या बाई होलकर इकाई एवं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस इकाई — के सप्त दिवसीय विशेष शिविर के तृतीय दिवस पर सोमवार को  जनजागरण एवं स्वच्छता अभियान के साथ बौद्धिक सत्र का आयोजन किया गया। स्वयंसेवक-स्वयंसेविकाओं ने शिविर स्थल की स्वच्छता के पश्चात ग्राम संग्रामपुर में जनसंपर्क कर स्वच्छता, सेवा भाव एवं जनसहभागिता के प्रति ग्रामीणों को जागरूक किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बौद्धिक सत्र में अध्यक्षता करते हुए प्रो. सत्येन्द्र कुमार दुबे (अध्यक्ष, हिन्दी विभाग) ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना युवाओं के चरित्र निर्माण, सामाजिक संवेदनशीलता और मानव मूल्यों के विकास का सशक्त माध्यम है। समाज को सकारात्मक दिशा देने में धैर्य, सहनशीलता और सेवा भाव जैसे गुणों का विशेष महत्व है,</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जिन्हें एनएसएस के माध्यम से विकसित किया जाता है। मुख्य वक्ता डॉ. अरविन्द कुमार रावत (सहायक आचार्य, लोक प्रशासन विभाग) ने कहा कि आदर्श, मानव मूल्य और लोक संस्कृति के संरक्षण में राष्ट्रीय सेवा योजना की महत्वपूर्ण भूमिका है। एनएसएस के स्वयंसेवक समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना के साथ एक आदर्श नागरिक के रूप में समाज निर्माण में सक्रिय योगदान देते हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में डॉ. विशाल गुप्ता तथा डॉ. विमल चन्द्र वर्मा ने भी राष्ट्र निर्माण, सामाजिक सौहार्द एवं स्वच्छता के महत्व पर विचार व्यक्त किए। संध्या सत्र में स्वयंसेवक-स्वयंसेविकाओं द्वारा महिला दिवस, लोक संस्कृति और सामाजिक मूल्यों पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का संचालन डॉ. यशवन्त यादव के निर्देशन में हुआ। स्वागत एवं आभार डॉ. सरिता सिंह द्वारा व्यक्त किया गया।</div></div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 22:04:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तकनीकी एवं नवाचार आधारित कार्यक्रम प्रारम्भ किए जाए  - राज्यपाल</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>  सिद्धार्थनगर।</strong>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर में प्रवास के दूसरे दिन मंगलवार को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों एवं शिक्षकों के साथ एक विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में कुलपति प्रोफेसर कविता शाह सहित सभी अधिकारी, विभागाध्यक्ष एवं प्रकल्प प्रभारी उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक के प्रारंभ में राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में आयोजित नवम दीक्षांत समारोह की सफल एवं गरिमामय सम्पन्नता पर प्रसन्नता व्यक्त की । राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि नेट एवं जेआरएफ में विद्यार्थियों का चयन बढ़ रहा है, जो सकारात्मक संकेत है। उन्होंने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/159761/technology-and-innovation-based-programs-should-be-started-%E2%80%93-governor"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/1762869350359-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong> सिद्धार्थनगर।</strong>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर में प्रवास के दूसरे दिन मंगलवार को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों एवं शिक्षकों के साथ एक विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में कुलपति प्रोफेसर कविता शाह सहित सभी अधिकारी, विभागाध्यक्ष एवं प्रकल्प प्रभारी उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक के प्रारंभ में राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में आयोजित नवम दीक्षांत समारोह की सफल एवं गरिमामय सम्पन्नता पर प्रसन्नता व्यक्त की । राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि नेट एवं जेआरएफ में विद्यार्थियों का चयन बढ़ रहा है, जो सकारात्मक संकेत है। उन्होंने शोध परियोजनाओं, शिक्षकों द्वारा प्राप्त पेटेंट्स तथा नवाचार को सराहनीय बताते हुए कहा कि शोध कार्य समाजोपयोगी होना चाहिए, जिससे शिक्षा एवं समाज दोनों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सके। उन्होंने एनईपी आधारित एकीकृत पाठ्यक्रमों, पर्यावरण विज्ञान, संगीत एवं ललित कला जैसे नए पाठ्यक्र​मों की शुरुआत को विश्वविद्यालय की दूरदर्शी पहल बताया तथा सुझाव दिया कि आगे और तकनीकी एवं नवाचार आधारित कार्यक्रम प्रारंभ किए जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने साइबर सुरक्षा के महत्व पर बल देते हुए कहा कि यह वर्तमान समय की अत्यंत महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षकों को इस क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त करने तथा विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को सजग करने से परिवार और उससे आगे पूरा समाज जागरूक होगा तथा भारत साइबर चुनौतियों से प्रभावी रूप से निपट सकेगा। डीआरडीओ, इसरो,आई आईटी,आईआईएम सहित विभिन्न संस्थानों से एमओयू करने, फैकल्टी ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाने तथा रक्षा तकनीक से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भारत रक्षा उत्पादन एवं निर्यात का वैश्विक केंद्र बनने जा रहा है, ऐसे में विश्वविद्यालय को इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुबह किए गए निरीक्षण का उल्लेख करते हुए उन्होंने ने छात्रावासों की साफ-सफाई, स्वास्थ्यवर्धक भोजन तथा समुचित व्यवस्था की सराहना की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को सरकारी योजनाओं से और अधिक फंडिंग प्राप्त कर छात्रावासों में उच्च स्तरीय सुविधाएँ प्रदान करनी चाहिए। उन्होंने स्वच्छता की नियमित मॉनिटरिंग, पर्यावरण संरक्षण तथा प्लास्टिक के उपयोग पर रोक की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। एक विश्वविद्यालय के उदाहरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि घास या प्राकृतिक अपशिष्ट से स्वयं सहायता समूह उपयोगी उत्पाद जैसे टोकरी, दरी इत्यादि बनाकर आर्थिक रूप से सशक्त हो सकते हैं। इस दिशा में विश्वविद्यालय को भी प्रयास करना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राज्यपाल ने डिजिटल लाइब्रेरी की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे शीघ्र विद्यार्थियों को समर्पित करने के निर्देश दिए। उन्होंने इक़युवेशन सेंटर एवं प्लेसमेंट सेल को और अधिक सक्रिय एवं प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने विभिन्न विभागो द्वारा शैक्षणिक भ्रमण महत्वपूर्ण स्थान पर ले जाने की बात कही ताकि विद्यार्थी परिषर से बाहर ऐसे महत्वपूर्ण स्थानों का भ्रमण करते थे जो उनके लिए ज्ञानवर्धक होगा। विश्वविद्यालय में स्थापित सोलर प्लांट को और विस्तार की बात कही।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कुलाधिपति ने विश्विद्यालय के सामाजिक दायित्व का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षण संस्थान पाठ्यक्रम के साथ ही आस पास के समाज के उत्थान एवं विकास में अनुकरणीय भूमिका है। इस हेतु नियमित संवेदनशील सक्रियता बहुत आवश्यक है। उन्होंने विश्वविद्यालय समुदाय में सकारात्मक और पारिवारिक वातावरण के विकास पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि परिसर में सहचर्य, सहयोग और संवेदनशीलता होनी चाहिए। परिसर में रहने वाले परिवारों के बीच नियमित संवाद, सुख-दुख की साझेदारी और सामाजिक-परिवारिक वातावरण विद्यार्थियों के लिए एक प्रेरक एवं संस्कारित माहौल तैयार करता है। उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ, सहयोगी और पारिवारिक वातावरण ही विश्वविद्यालय की कार्यकुशलता, उत्पादकता और मानव संसाधन विकास को सर्वाधिक समृद्ध बनाता है, और यही विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> राज्यपाल ने कहा कि सिद्धार्थ विश्वविद्यालय आकांक्षी जनपद सिद्धार्थनगर के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और विश्वविद्यालय निरंतर प्रगति के मार्ग पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि कोई भी कार्य अंतिम नहीं होता । जहा आज खड़े हैं, कल उससे आगे बढ़ने का सतत प्रयास ही वास्तविक विकास है। यही भविष्य की दिशा है और यही जीवन का सार है। समीक्षा बैठक में कुलसचिव दीनानाथ यादव ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा समापन उद्बोधन कुलपति प्रो. कविता शाह द्वारा किया गया। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Nov 2025 20:23:59 +0530</pubDate>
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                <title>सिविवि और जिला प्रशासन के बीच समझौता ज्ञापन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर में कुलपति प्रो. कविता शाह के सक्रिय नेतृत्व से  जिले के सर्वांगीण विकास और युवाओं के उत्थान के उद्देश्य से उद्यमिता विकास पर एक  ऐतिहासिक गोलमेज बैठक का आयोजान किया गया ।   इस अवसर पर विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन  पर हस्ताक्षर किए गए, जो जिले को नई दिशा देने वाला मील का पत्थर साबित हो सकता है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही  कुलपति प्रो. शाह ने कहा कि विश्वविद्यालय अपने छात्रों के प्रति एवं समाज के प्रति अपने दायित्वों को अच्छे से भलीभांति परिचित है ।  इस</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156080/memorandum-of-understanding-between-civi-and-district-administration"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/1758982237273.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर में कुलपति प्रो. कविता शाह के सक्रिय नेतृत्व से  जिले के सर्वांगीण विकास और युवाओं के उत्थान के उद्देश्य से उद्यमिता विकास पर एक  ऐतिहासिक गोलमेज बैठक का आयोजान किया गया ।   इस अवसर पर विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन  पर हस्ताक्षर किए गए, जो जिले को नई दिशा देने वाला मील का पत्थर साबित हो सकता है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही  कुलपति प्रो. शाह ने कहा कि विश्वविद्यालय अपने छात्रों के प्रति एवं समाज के प्रति अपने दायित्वों को अच्छे से भलीभांति परिचित है ।  इस समझौता ज्ञापन से विवि  के शिक्षक और छात्र जनपद की प्रगति के ब्रांड एम्बेसडर बनकर शिक्षा, शोध और कौशल विकास के माध्यम से जिले की आकांक्षाओं को नई उड़ान प्रदान करेंगे  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> जिलाधिकारी डॉ. राजगणपति आर. ने प्रो. शाह के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि यह समझौता आकांक्षी जनपद से विकसित जनपद तक की यात्रा को गति देगा। उन्होंने बताया कि इस सहयोग से जिले के सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही जनपद में एक जनपद एक उत्पाद के रुप में दर्जा प्राप्त कालानमक  चावल के वैश्विक पहचान बनाने के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है  जिसके अंतर्गत मुख्य रूप से  बीज गुणवत्ता परीक्षण केंद्र एवं  वेयरहाउस को स्थापित करना है। उन्होंने आगे कहा कि जिले में अच्छे काला नमक चावल के लिए   लो-टेम्परेचर मिलिंग तकनीक को विकसित करने एवं  सिंचाई व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करना भी   और उन्होंने आगे बताया कि इस समझौता ज्ञापन के तहत  विश्वविद्यालय की ओर से मैनपावर सहायता से निश्चित ही इन सभी क्षेत्रों में  विकास की नई संभावनाएँ खुलेंगी।  कार्यक्रम के संयोजक एवं उद्यमिता विकास समिति के निदेशक प्रो. सौरभ ने कहा कि यह समझौता विश्वविद्यालय को नई गति प्रदान करेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> इस अवसर पर विवि के परीक्षा नियंत्रक सह कुलसचिव दीना नाथ यादव सहित जिले के  मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह, कृषि अधिकारी मोहम्मद मुजम्मिल, उपायुक्त उदय पासवान, उपकृषि निदेशक राजेश कुमार, जीआईडीए उद्योग संघ के अध्यक्ष  रामाशंकर शुक्ला ने भी हिस्सा लिया।  </div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Sep 2025 19:46:06 +0530</pubDate>
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