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                <title>Aam Aadmi Party - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Aam Aadmi Party RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>रसोई गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाने के विरोध में आप कार्यकर्ताओं का प्रदर्शनं।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी के विरोध में आज आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकर्ताओं ने शहर के पत्थर गिरजाघर चौराहे पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों को आम जनता पर आर्थिक बोझ बताया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे आप पदाधिकारियों ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई से आम आदमी का जीवन कठिन होता जा रहा है। घरेलू गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों का बजट पूरी तरह से बिगड़ गया है। उन्होंने आरोप</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173306/demonstration-of-aap-workers-against-increase-in-the-price-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260314-wa0140.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी के विरोध में आज आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकर्ताओं ने शहर के पत्थर गिरजाघर चौराहे पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों को आम जनता पर आर्थिक बोझ बताया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे आप पदाधिकारियों ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई से आम आदमी का जीवन कठिन होता जा रहा है। घरेलू गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों का बजट पूरी तरह से बिगड़ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महंगाई पर नियंत्रण करने में पूरी तरह विफल रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर विरोध जताया और गैस सिलेंडर की कीमतों को तुरंत कम करने की मांग की। इस दौरान पत्थर गिरजाघर चौराहे पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और प्रदर्शन को शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त कराया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आप नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि गैस सिलेंडर की कीमतों में कमी नहीं की गई तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 21:15:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली मानकपुरा डोरीवालान में विधायक और एस एच ओ अमित ने किया सड़क का उद्घाटन </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली , </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बादल हुसैन मानकपुरा,डोरीवालान,बागरोजी , शादीपुरा, शहरवासियों को बेहतर आवागमन की सुविधा देने के संकल्प के साथ विधायक विषेश रवि ने गुरुवार को गोशाला रोड़,मानक पुरा बाजार वाली गली सड़क शनि मंदीर से डीसीएम चौक तक बनने वाली नयी सड़क के निर्माण कार्य का उद्घाटन नारियल तोड़ कर किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आम आदमी पार्टी के करोलबाग विधानसभा क्षेत्र से विधायक विषेश रवि ने बताया कि इस महत्वपूर्ण सड़क परियोजना पर करीब 50 लाख से अधिक रुपए की राशि खर्च की जाएगी।सडक निर्माण से पहले यहां पानी निकासी की व्यवस्था की जाएगी, ताकि भविष्य में जलभराव या सड़क टूटने की समस्या</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173247/mla-and-sho-amit-inaugurated-the-road-in-delhi-manakpura"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260313-wa0003-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली , </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बादल हुसैन मानकपुरा,डोरीवालान,बागरोजी , शादीपुरा, शहरवासियों को बेहतर आवागमन की सुविधा देने के संकल्प के साथ विधायक विषेश रवि ने गुरुवार को गोशाला रोड़,मानक पुरा बाजार वाली गली सड़क शनि मंदीर से डीसीएम चौक तक बनने वाली नयी सड़क के निर्माण कार्य का उद्घाटन नारियल तोड़ कर किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आम आदमी पार्टी के करोलबाग विधानसभा क्षेत्र से विधायक विषेश रवि ने बताया कि इस महत्वपूर्ण सड़क परियोजना पर करीब 50 लाख से अधिक रुपए की राशि खर्च की जाएगी।सडक निर्माण से पहले यहां पानी निकासी की व्यवस्था की जाएगी, ताकि भविष्य में जलभराव या सड़क टूटने की समस्या न रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निर्माण कार्य में केवल उच्च श्रेणी की सामग्री का उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। विधायक ने स्पष्ट कहा कि गुणवत्ता में कई समझौतों बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सड़क की हालत काफी समय से खस्ता थी और यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। और स्थानीय लोगों का डीमांड भी था कि सकड बने, लेकिन अब सड़क बनने के बाद यातायात सुचारू रूप से चलेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर निगम पार्षद उर्मिला गोतम ने भी क्षेत्र वासियों का आभार व्यक्त किया और लोगों की समस्या भी सुनी और जल्द समस्या हल करने की आश्वासन भी दिए। वहीं शीदीपुरा थाना के एस एच ओ अमीत ने कहा कि सड़क पर ठेली खुंचे व छोटे छोटे दुकानदारों के लिए कार्ड का व्यवस्था किया जाए, ताकि एक गरीब दुकानदारों अच्छा से अपना व्यापार को आगे बढ़ा सके एस एच ओ ने कहा कि यह मार्ग शहर का प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है। बेहतर सड़कें न केवल व्यापार को गति देती है,</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बल्कि दुर्घटनाओं को कम कर समय की भी बचत करती है। सड़क निर्माण कार्य शुरू होने से स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों में खुशी की लहर है। लोगों ने फूल मालाओं के साथ विधायक विषेश रवि का स्वागत किया। इस अवसर पर जन प्रतिनिधि अंकित रवि, क्षेत्र के प्रधान,बंशल जी,रमेश जी,बंटी जी, और पार्टी के कार्यकर्ताओं व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>दिल्‍ली</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 19:41:12 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में मजबूती से उतरेगी आम आदमी पार्टी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में आम आदमी पार्टी द्वारा जिलाध्यक्ष डॉ. राम सुभाष वर्मा और  कप्तानगंज  विधानसभाध्यक्ष भगवानदीन भारती के संयोजन मंें  विधानसभा क्षेत्र के तारा मैरेज हाल में  हर घर सम्पर्क अभियान की कड़ी में बैठक का आयोजन किया गया।  बैठक में हर घर सम्पर्क अभियान के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुये पार्टी के नीति, कार्यक्रमों की जानकारी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि पार्टी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव और आगामी विधानसभा का चुनाव पूरी मजबूती से लड़ेगी। कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों  में तैयारियां तेज कर दें।बैठक में जिलाध्यक्ष  डॉ. राम सुभाष वर्मा ने कहा कि जनपद के पांच विधानसभा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155208/aam-aadmi-party-will-contest-firmly-in-three-tier-panchayat"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/img-20250915-wa0302.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में आम आदमी पार्टी द्वारा जिलाध्यक्ष डॉ. राम सुभाष वर्मा और  कप्तानगंज  विधानसभाध्यक्ष भगवानदीन भारती के संयोजन मंें  विधानसभा क्षेत्र के तारा मैरेज हाल में  हर घर सम्पर्क अभियान की कड़ी में बैठक का आयोजन किया गया।  बैठक में हर घर सम्पर्क अभियान के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुये पार्टी के नीति, कार्यक्रमों की जानकारी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि पार्टी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव और आगामी विधानसभा का चुनाव पूरी मजबूती से लड़ेगी। कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों  में तैयारियां तेज कर दें।बैठक में जिलाध्यक्ष  डॉ. राम सुभाष वर्मा ने कहा कि जनपद के पांच विधानसभा क्षेत्रों में बूथ गठन तेजी से जारी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कहा कि आम आदमी पार्टी  जनहित के सवालों को लेकर निरन्तर संघर्ष जारी रखे हुये हैं।  यूरिया संकट, बिजली मूल्यवृद्धि, निजीकरण आदि का मामला पूरी ताकत से उठाया गया। डा. वर्मा ने कहा कि संगठन की मजबूती से ही राजनीतिक, सामाजिक लक्ष्य हासिल होंगे। बैठक में बौद्ध प्रान्त के उपाध्यक्ष कुलदीप जायसवाल ने मुख्य अतिथि के रूप में पार्टी के नीति, कार्यक्रम के बारे में उपस्थित लोगों को विस्तार से जानकारी दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कहा कि दिल्ली की जनता आज अपने फैसले पर उदास है। भाजपा ने दिल्ली में सरकार तो बना लिया किन्तु आम आदमी हाशिये पर है। जिला प्रभारी आशीष कुमार गुप्ता और जिला सह प्रभारी पतिराम आजाद ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कहा कि आम आदमी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव मजबूती से लड़ेगी और जनहित के सवालों को लेकर संघर्ष जारी रहेगा। कप्तानगंज  विधानसभाध्यक्ष भगवानदीन भारती  ने बताया कि पार्टी द्वारा  चलाये जा रहे  हर घर सम्पर्क अभियान के तहत निरन्तर कार्यक्रम जारी है। जनता परिवर्तन का मन बना चुकी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में मुख्य रूप से राम सजन सूर्यबंशी, मिथलेश भारती, प्रमोद कुमार श्रीवास्तव, वीरभद्र ओझा, शेषपाल चौधरी, मो. उमर, हरि प्रसाद, कृष्ण कुमार, डा. नरेन्द्र चौधरी, पवन कुमार, राजेन्द्र कुमार, सुधीर, शिवांशू       चौधरी, अंकित वर्मा, सचिन कुमार, अनिल कुमार मौर्या, राजेन्द्र यादव, रमेश कुमार चौधरी, अमरजीत यादव, परशुराम यादव, जाहिद अली, दिलीप यादव, रामकरन रावत, उमेश शर्मा के साथ ही आम आदमी पार्टी के अनेक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Sep 2025 17:37:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसान आंदोलन: विरोध की राह से भटकाव तक का सफर</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतंत्र का असली सौंदर्य उसकी आजादी में छिपा है—वह आजादी जो हर नागरिक को अपनी बात कहने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपनी असहमति जताने का हक देती है। यह अधिकार ही लोकतंत्र की धड़कन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सत्ता को जनता के प्रति जवाबदेह बनाए रखता है और शासन को निरंकुश होने से रोकता है। लेकिन जब यही विरोध अपनी सीमाएं लांघकर तर्क और समाधान की राह छोड़ देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब वह हठधर्मिता और टकराव का रंग ले लेता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वह न केवल अपने मकसद से भटक जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि समाज के लिए बोझ बन जाता है। किसान आंदोलन इसका</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150164/kisan-agitation-journey-from-the-path-of-protest-to-disorient"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(4)5.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतंत्र का असली सौंदर्य उसकी आजादी में छिपा है—वह आजादी जो हर नागरिक को अपनी बात कहने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपनी असहमति जताने का हक देती है। यह अधिकार ही लोकतंत्र की धड़कन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सत्ता को जनता के प्रति जवाबदेह बनाए रखता है और शासन को निरंकुश होने से रोकता है। लेकिन जब यही विरोध अपनी सीमाएं लांघकर तर्क और समाधान की राह छोड़ देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब वह हठधर्मिता और टकराव का रंग ले लेता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वह न केवल अपने मकसद से भटक जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि समाज के लिए बोझ बन जाता है। किसान आंदोलन इसका सबसे ज्वलंत और दुखद उदाहरण है। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह आंदोलन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कभी किसानों की आवाज बनकर उभरा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धीरे-धीरे संवाद की संभावनाओं को कुचलता हुआ अड़ियलपन और अव्यवस्था का पर्याय बन गया। इसने न सिर्फ कृषि सुधारों के सवाल को उलझाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि देश के सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न किया और आर्थिक ढांचे को ठप कर दिया। सवाल यह है—यह आंदोलन कहां से शुरू हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और कहां जाकर भटक गया</span>?</p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">किसान आंदोलन की शुरुआत </span>2020 <span lang="hi" xml:lang="hi">में तब हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानूनों को लागू किया। सरकार का दावा था कि ये कानून किसानों को बिचौलियों की जकड़न से आजादी देंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें खुले बाजार में अपनी उपज बेचने का मौका देंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और खेती को आधुनिक बनाकर उनकी आय बढ़ाएंगे। यह एक बड़ा सपना था—कृषि को </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi">वीं सदी की जरूरतों के मुताबिक ढालने का सपना। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन किसानों के मन में शंकाएं पनपने लगीं। क्या ये कानून बड़े कॉरपोरेट घरानों के लिए रास्ता बनाएंगे</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या न्यूनतम समर्थन मूल्य (</span><span lang="hi" xml:lang="hi">एमएसपी</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">की व्यवस्था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो दशकों से उनकी आर्थिक रीढ़ रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खत्म हो जाएगी</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">ये डर जायज थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि भारत जैसे देश में खेती सिर्फ आजीविका नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृति और भावनाओं का हिस्सा है। किसानों ने सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और शुरुआत में यह विरोध एक सशक्त लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के रूप में उभरा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने इन शंकाओं को दूर करने की कोशिश की। कई दौर की वार्ता बुलाई गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कमेटी बनाकर बीच का रास्ता निकालने की पहल की। लेकिन आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। उनकी जिद थी कि कानून पूरी तरह रद्द हों और </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एमएसपी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को कानूनी गारंटी मिले। यह अड़ियल रुख धीरे-धीरे संवाद की हर गुंजाइश को निगल गया। दिल्ली की सीमाओं पर ट्रैक्टरों की कतारें लगीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सड़कें महीनों तक जाम रहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रकों की लंबी लाइनें ठहर गईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापार ठप हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। यह आंदोलन अब किसानों की लड़ाई से ज्यादा हठधर्मिता का प्रदर्शन बन चुका था। क्या यह वाकई किसानों के हित में था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या सिर्फ एक ऐसी जिद जो समाधान की बजाय समस्या को और गहरा रही थी</span>?</p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">किसानों की सबसे बड़ी मांग थी कि </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एमएसपी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को कानूनी दर्जा दिया जाए। पहली नजर में यह मांग भावनात्मक रूप से मजबूत और जायज लगती है। आखिर कौन किसान नहीं चाहेगा कि उसकी फसल का दाम तय हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी मेहनत की कीमत सुरक्षित रहे</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इस मांग का दूसरा पहलू उतना ही जटिल और चुनौतीपूर्ण है। अगर </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एमएसपी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को कानून बना दिया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सरकार को हर फसल को तय दाम पर खरीदना होगा—चाहे बाजार में उसकी मांग हो या न हो। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इससे सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गोदामों में अनाज सड़ेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और कृषि बाजार का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाएगा। इतना ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इससे किसानों में नवाचार की भावना कम होगी—नई फसलें उगाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक अपनाने या बाजार की जरूरतों के हिसाब से बदलने की प्रेरणा खत्म हो जाएगी। सरकार ने इन खतरों को बार-बार सामने रखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसे अव्यावहारिक बताया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आंदोलनकारियों के कानों पर जूं तक न रेंगी। यह हठ क्या हासिल कर रहा था—किसानों का भला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या सिर्फ एक असंभव सपने की खोज</span>?</p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पूरे प्रकरण में पंजाब सरकार की भूमिका भी कम दिलचस्प नहीं। जब किसान दिल्ली की सीमाओं पर डटे थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (</span><span lang="hi" xml:lang="hi">आप</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">ने खुलकर उनका साथ दिया। उनके नेता धरना स्थलों पर पहुंचे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जोशीले भाषण दिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और किसानों को "क्रांतिकारी" करार दिया। यह समर्थन तब तक चला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक आंदोलन से अराजकता नहीं फैली।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi"> लेकिन जैसे ही सड़कों पर हिंसा भड़की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानून-व्यवस्था पर सवाल उठे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और आम लोग परेशान होने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वही सरकार पलटी। आंदोलनकारियों को हटाने का फैसला लिया गया—वह भी तब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब नुकसान अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुका था। यह क्या था—राजनीतिक अवसरवाद या मजबूरी</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">सच तो यह है कि पंजाब सरकार ने पहले आग को हवा दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और फिर उसे बुझाने का नाटक किया। इस दोहरे रवैये ने आंदोलन को और उलझाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समाधान को और दूर धकेल दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">किसान आंदोलन ने एक कड़वी सच्चाई सामने रखी—जब विरोध टकराव का रूप ले लेता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वह अपनी आत्मा खो देता है। लोकतंत्र में असहमति का हक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन वह अराजकता की सीमा को पार नहीं करना चाहिए। इस आंदोलन ने सड़कों को जाम किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और समाज में दरारें पैदा कीं। लेकिन क्या यह सब जरूरी था</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या संवाद से यह रास्ता नहीं निकल सकता था</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार को किसानों की असली तकलीफें सुननी होंगी—उनका डर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी अनिश्चितता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी उम्मीदें। इसके लिए उसे नीतियों में पारदर्शिता लानी होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भरोसा जीतना होगा। दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसानों को भी हठ छोड़ना होगा। यह समझना होगा कि हर मांग का कानूनी जवाब संभव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हर जिद हल नहीं लाती। दोनों पक्षों को अपने-अपने किलों से बाहर निकलकर संवाद की मेज पर बैठना होगा। टकराव से सिर्फ नुकसान होता है—चाहे वह किसानों का हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार का हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या पूरे देश का।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि सुधार भारत जैसे देश के लिए अनिवार्य हैं। खेती को आधुनिक बनाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसानों को सशक्त करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अर्थव्यवस्था को गति देना समय की मांग है। लेकिन यह तभी मुमकिन होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब सरकार और किसान मिलकर काम करें। सरकार को चाहिए कि वह किसानों के साथ संवेदनशीलता से पेश आए—उनकी आशंकाओं को दूर करे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी बात सुने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और व्यावहारिक समाधान पेश करे। किसानों को भी चाहिए कि वे अड़ियल रुख छोड़ें और बदलते वक्त के साथ कदम मिलाएं। यह आंदोलन तभी सार्थक होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब हठधर्मिता की जगह संवाद ले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और टकराव की जगह सहयोग ले।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">किसान आंदोलन हमें एक गहरा सबक देता है—लोकतंत्र में संवाद ही वह सेतु है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो टूटी उम्मीदों को जोड़ सकता है। जब आंदोलन अपनी राह से भटककर हठ की आग में जलने लगता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वह न सिर्फ अपने मकसद को खो देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि समाज को भी घायल करता है। क्या हम इस सबक को सीखेंगे</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या सरकार और किसान मिलकर एक नई शुरुआत करेंगे</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">या फिर यह आग और भड़केगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और सब कुछ जलाकर राख कर देगी</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">जवाब हमारे हाथ में है—संवाद चुनें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या हठ की कीमत चुकाएं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Mar 2025 15:28:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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                <title>' आखिर  क्यों पिटती है हमारी पुलिस ?'</title>
                                    <description><![CDATA[<p>एक छोटा सा सवाल है  कि आखिर देश  के हर हिस्से में पुलिस क्यों पिटती है ? क्या देश में जनता को खाकी वर्दी से अब डर नहीं लगता जबकि पुलिस की वर्दी का दूसरा नाम ही खौफ है। मध्यप्रदेश के मऊगंज से लेकर भागलपुर तक  और भागलपुर से लेकर जहानाबाद तक पुलिस को पिटते देख ये सोचने पर विवश होना पड़ रहा है कि  हिंदुस्तान में आखिर क्या वजह है जो  पुलिस का इकबाल मिटटी में मिल गया है ?</p>
<p>सबसे पहले मध्यप्रदेश के मऊगंज की बात करते हैं। मऊगंज में न कोई अबू आजमी है और न किसी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149952/after-all-why-is-the-police-in-every-state"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(15)2.jpg" alt=""></a><br /><p>एक छोटा सा सवाल है  कि आखिर देश  के हर हिस्से में पुलिस क्यों पिटती है ? क्या देश में जनता को खाकी वर्दी से अब डर नहीं लगता जबकि पुलिस की वर्दी का दूसरा नाम ही खौफ है। मध्यप्रदेश के मऊगंज से लेकर भागलपुर तक  और भागलपुर से लेकर जहानाबाद तक पुलिस को पिटते देख ये सोचने पर विवश होना पड़ रहा है कि  हिंदुस्तान में आखिर क्या वजह है जो  पुलिस का इकबाल मिटटी में मिल गया है ?</p>
<p>सबसे पहले मध्यप्रदेश के मऊगंज की बात करते हैं। मऊगंज में न कोई अबू आजमी है और न किसी औरंगजेब की कब्र ,लेकिन यहां जो बवाल हुआ उसमें एक पुलिस कर्मी की मौत हो गयी और अनेक घायल हो गए। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के  गड़रा गांव में दो गुटों के बीच झगड़े की कीमत पुलिस को चुकानी पड़ी। पुलिसकर्मियों के झड़प ने ऐसा स्वरूप लिया कि एक एएसआई रामचरण गौतम की जान चली गई। वहीं तहसीलदार समेत कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं।यहां न कोई हिन्दू था और न कोई मुसलमान। पक्षकार आदिवासी थे ,लेकिन वे पुलिस पर भारी पड़े।  मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने इस घटना की जांच के आदेश दिए हैं।</p>
<p>मध्यप्रदेश में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू हुए चार साल हो गए हैं ,हालाँकि पुलिस कमीश्नर प्रणाली केवल भोपाल और इंदौर शहर में लागू है लेकिन प्रदेश में पुलिस का इक़बाल बुलंद नहीं हो पाया। कारण ये है कि  प्रदेश की पुलिस भ्र्ष्ट होने के साथ ही साम्प्रदायिक और नेताओं की कठपुतली बन गयी है। पुलिस में सिपाही से लेकर पुलिस अधीक्षक तक की पदस्थापना में सियासत का दखल है और नतीजा ये है  कि  लोग अब पुलिस की वर्दी का न सम्मान करते हैं और न पुलिस से खौफ कहते हैं।</p>
<p>अब बात बिहार की कर लेते है।  यहां तो पुलिस न सिर्फ पिटती है बल्कि नेताओं के इशारे पर नाचने के लिए भी मजबूर  की जाती है ,और आखिर में महकमें की प्रताड़ना का शिकार भी पुलिस वाले ही होते हैं। लालू प्रसाद के बेटे तेजप्रताप   के इशारे पार होली के दिन नाचने वाले एक सिपाही को आखिर निलंबित कर दिया गया। बिहार में बेखौफ बदमाश पुलिस पर हमला करने से भी बाज नहीं आ रहे। तीन दिनों पहले अररिया जिला के फुलकाहा थाना में तैनात एएसआई (जमादार) राजीव रंजन मल्ल की धक्का-मुक्की में मौत के बाद फिर मुंगेर में मुफस्सिल थाना के एएसआई संतोष कुमार सिंह की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई।वे 14 मार्च की रात आपसी विवाद की सूचना पर उसे सुलझाने नंदलालपुर गांव गए थे। जहां बदमाशों ने उन पर हमला कर दिया। इसमें एएसआई संतोष गंभीर रूप से घायल हो गए थे, उनके सिर पर चोट लगी थी।</p>
<p>पंजाब में तो हालत और भी ज्यादा खराब हैं।  सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने कहा कि पूरा पुलिस महकमा केजरीवाल की सेवा में लगा हुआ है। पंजाब में कानून व्यवस्था बेहद खराब है।पुलिस के साथ जो व्यवहार मध्यप्रदेश के मऊगंज में हुआ वैसा ही व्यवहार उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में भी हु।  जिले के अजगैन कोतवाली के छेड़ा गांव में 14 मार्च को शराब के नशे में दो भाइयों में विवाद के बाद पथराव हुआ था। पहले आरोपियों के पिता रामस्वरूप की हृदयगति रुकने से मौत हो गई थी। वहीं, पड़ोसी धीरेंद्र की नाक में पत्थर लगने से उसकी मौत हो गई थी।पुलिस आरोपी भाइयों को हिरासत में लेकर जा रही थी तभी कुछ ग्रामीणों ने रास्ता रोक लिया और दोनों आरोपियों को जीप से खींचने का प्रयास किया था।</p>
<p>भारत में पुलिस व्यवस्था बहुत पुरानी है। मुगलों और अंग्रेजों से भी पुरानी।  लेकिन मुगलों और अंग्रेजों ने पुलिस व्यवस्था को और मजबूत किया और इसका इकबाल भी बुलंद किया। कोटवार से लेकर कोतवाल तक और आज सिपाही से लेकर   महानिदेशक तक का इकबाल होता है ,किन्तु आजादी के बाद देशभक्ति -जन सेवा का ध्येय  लेकर बनाई गयी पुलिस या तो जुल्म का पर्याय बन गयी या फिर कालांतर में सत्ता प्रतिष्ठान की कठपुतली। पुलिस बल में समय के साथ सुधार भी हुए लेकिन पुलिस आज भी जनता की जरूरतों से ज्यादा सत्ता प्रतिष्ठान की जरूरतों का ख्याल रखती है।  जनता के मन में पुलिस के लिए कोई आदरभाव नहीं है क्योंकि पुलिस अपराधियों,नेताओं और सत्ता रपतिष्ठं के गठजोड़ का एक हिस्सा बनकर रह गयी है।</p>
<p>आपको बता दूँ कि  संविधान के तहत, पुलिस राज्यों द्वारा शासित एक विषय है। इसलिए, 29 राज्यों में से प्रत्येक के पास अपने स्वयं के पुलिस बल हैं। केंद्र को कानून और व्यवस्था सुनिश्चित करने में राज्यों की सहायता के लिए अपने स्वयं के पुलिस बलों को बनाए रखने की भी अनुमति है। केवल केंद्र शासित क्षेत्रों में पुलिस केंद्र के अधीन होती है ,पुलिस के आधुनिकीकरण पर बेहिसाब खर्च के बावजूद न पुलिस की मानसिकता बदली और न व्यवहार ।  आज भी आम आदमी  पुलिस से डरता है।   आम इंसान यही समझता है कि  पुलिस मतलब समस्या को आमंत्रण देना है। पुलिस के प्रति समाज में घृणा है /पुलिस न खुद क़ानून का पालन करती है और न क़ानून का पालन करा पाती है।</p>
<p>मैंने दुनिया के अनेक देशों में पुलिसिंग देखी है ।  कहीं भारत की पुलिस कुछ आगे है तो कहीं बहुत पीछे ।  हमारी पुलिस न इंग्लैण्ड की पुलिस बन पायी और न अमेरिका की पुलिस। भारत की पुलिस में राजनीति का दखल इतना बढ़ गया है कि  पुलिस अपने विवेक से कोई काम कर ही नहीं सकती। पुलिस नेताओं के हुक्म की गुलाम बनकर रह गयी है और इसका नतीजा है कि  पुलिस पर पूरे देश में हमले हो रहे हैं ,पुलिस कर्मी मारे जा रहे हैं ,लेकिन कोई इसकी जड़ तक नहीं जाना चाहता। सब क्रिया की प्रतिक्रिया तक ही सीमित हैं। पुलिस का इकबाल बुलंद किये बिना पुलिस कर्मियों पर होने वाले हमले रुकने वाले नहीं हैं। पुलिस का व्यवहार बदलना बेहद जरूरी है।</p>
<p>इस समय दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाले देश भारत में करीब 21.41 लाख पुलिसकर्मी हैं, लेकिन कुल पुलिस फोर्स में महिलाओं का औसत महज 12 प्रतिशत से कुछ ही ज्यादा है। भारत में औसत करीब 646 लोगों पर एक पुलिसकर्मी का बैठता है. हालांकि, इसमें राज्यों के विशेष सशस्त्र पुलिस बल और रिजर्व बटालियन के पुलिसकर्मियों की संख्या भी  शामिल है।  कुछ राज्यों में पुलिस के पास अपना वाहन या स्पीडगन नहीं है तो कुछ पुलिस स्टेशनों में वायरलेस या मोबाइल फोन तक नहीं है।</p>
<p>पुलिस अनुसन्धान एवं विकास ब्यूरो के आंकड़ें बताते हैं कि  राज्यों में मिलाकर 27.23 लाख पदों में से कुल 5.82 लाख से ज्यादा पुलिसकर्मियों के पद खाली हैं।  इनमें सबसे ज्यादा सिविल पुलिस के 18.34 लाख में से 4 लाख पद खाली हैं।  सिविल पुलिस ही थाना क्षेत्रों में गश्त करने, मौका-ए-वारदात पर पहुंचने, किसी केस की छानबीन करने और कानून-व्यवस्था संभालने का का काम करती है।  इसके अलावा, देश में जिला सशस्त्र रिजर्व पुलिस बल के 3.26 लाख पदों में करीब 87 हजार पद खाली हैं. वहीं, राज्य विशेष सशस्त्र बल के 3.95.लाख पदों में से 63 हजार और रिजर्व बटालियन के 1.69 लाख पदों में से 28.5 हजार पद भरे नहीं जा सके। सरकारों का बस चले तो वो पुलिस में भी संविदा पर भर्तियां कर दे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Mar 2025 14:35:29 +0530</pubDate>
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                <title>आखिर कब खत्म होगा किसान आंदोलन !</title>
                                    <description><![CDATA[<div>भारतीय किसान यूनियन के एक घटक द्वारा चंडीगढ़ में नये सिरे से आंदोलन शुरू करने की चेतावनी के बाद पुलिस-प्रशासन की सख्ती से बुधवार को सामान्य जीवन व यातायात बुरी तरह से प्रभावित हुआ।</div>
<div>किसानों को चंडीगढ़ जाने से रोकने पर पंजाब के संगठनों में रोष व्याप्त हो गया है। अब तक केंद्र सरकार के खिलाफ ही मोर्चा खोलने वाले संयुक्त किसान मोर्चा ने पंजाब की भगवंत मान सरकार के खिलाफ आंदोलन का फैसला लिया है। भारतीय किसान यूनियन (लाखोवाल) के नेता हरिंदर सिंह लाखोवाल ने अब भगवंत मान सरकार के सभी विधायकों के घरों का घेराव करने की बात</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149672/when-will-the-peasant-movement-end-after-all"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(28).jpg" alt=""></a><br /><div>भारतीय किसान यूनियन के एक घटक द्वारा चंडीगढ़ में नये सिरे से आंदोलन शुरू करने की चेतावनी के बाद पुलिस-प्रशासन की सख्ती से बुधवार को सामान्य जीवन व यातायात बुरी तरह से प्रभावित हुआ।</div>
<div>किसानों को चंडीगढ़ जाने से रोकने पर पंजाब के संगठनों में रोष व्याप्त हो गया है। अब तक केंद्र सरकार के खिलाफ ही मोर्चा खोलने वाले संयुक्त किसान मोर्चा ने पंजाब की भगवंत मान सरकार के खिलाफ आंदोलन का फैसला लिया है। भारतीय किसान यूनियन (लाखोवाल) के नेता हरिंदर सिंह लाखोवाल ने अब भगवंत मान सरकार के सभी विधायकों के घरों का घेराव करने की बात कही है।</div>
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<div>उन्होंने कहा कि हम 10 मार्च को पूरे प्रदेश में आम आदमी पार्टी के विधायकों के घरों का घेराव करेंगे। उन्होंने कहा कि आगे के आंदोलन को लेकर भी हम रणनीति बना रहे हैं। किसान नेताओं का कहना है कि भगवंत मान ने सही से बात नहीं की और जिस तरह से मीटिंग छोड़कर निकल गए। वह ठीक नहीं था।लाखोवाल ने कहा कि सरकार से असहमति जताने के लिए AAP के सभी विधायकों के घरों के बाहर धरना दिया जाएगा। ये धरने 10 मार्च को सुबह 10 से दोपहर तक 3 बजे तक दिए जाएंगे।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने कहा कि इस संबंध में जल्दी ही एक ऐक्शन प्लान तैयार करेंगे। इसके अलावा 15 मार्च को चंडीगढ़ स्थित सीएम भगवंत मान के घर का भी घेराव किया जाएगा। लाखोवाल ने कहा, ‘हम इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि कैसे अपने आंदोलन को आगे बढ़ाया जाए। हम 15 मार्च को सीएम भगवंत मान को चर्चा में शामिल होने के लिए आमंत्रित करेंगे। यदि वह उस दिन उपलब्ध नहीं हैं तो फिर अपनी सुविधा के अनुसार कोई और तारीख बता सकते हैं।’</div>
<div> </div>
<div> चंडीगढ़ से लगते इलाकों में पुलिस के अवरोधों के चलते वाहन घंटों जाम में फंसे रहे। पुलिस आंदोलनकारियों से निबटने के लिये सख्त बनी रही और कई किसान नेताओं को गिरफ्तार किया गया। चंडीगढ़ के अनेक प्रवेश मार्गों को सील किया गया था और भारी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया था। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर शुरू हुए आंदोलन से उपजे हालात पर आम लोग कहते रहे कि जाम किसानों की तरफ से है या सरकार की तरफ से।</div>
<div> </div>
<div>दरअसल, पंजाब जो लंबे समय से कृषि क्षेत्र में उदार दृष्टिकोण रखने वाला राज्य रहा है, तंत्र की संवेदनहीनता और शासन की सख्ती के चलते अशांत नजर आता है। भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार, जिसे कभी बदलाव का अग्रदूत कहा जाता था, अब खुद को प्रमुख हितधारकों-किसानों, राजस्व अधिकारियों और नौकरशाही के साथ उलझी हुई पा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि कहां कमी रही कि कृषि क्षेत्र अशांत बना हुआ है।</div>
<div> </div>
<div>समय रहते किसानों की मांगों को पूरा न किए जाने और कारगर समाधान के लिये परामर्श न मिल पाने से निराश किसान यूनियनों ने नये सिरे से विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। जिसकी परिणति चंडीगढ़ चलो मार्च के रूप में सामने आई है। किसान नेता आरोप लगा रहे हैं कि किसानों की समस्याओं के समाधान पर संवेदनशील रवैया अपनाने के बजाय दमनात्मक कदम उठाये जा रहे हैं। जिसे वे देर रात छापेमारी करके किसान नेताओं की गिरफ्तारी और चंडीगढ़ की सीमाएं सील करने के रूप में देख रहे हैं। किसान नेता आरोप लगा रहे हैं कि मुख्यमंत्री मान ने किसानों की बैठक में से नाटकीय ढंग से वॉकआउट करके अपनी हताशा</div>
<div>को ही जाहिर किया है।</div>
<div> </div>
<div>वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री का कहना है कि पंजाब में किसान संगठनों में आंदोलन करने की होड़ मची है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि पंजाब धरनों का राज्य बनता जा रहा है। उनका कहना है कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जोरदार जंग लड़ रही है। सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के लिये तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों सहित पंद्रह राजस्व अधिकारियों को निलंबित किया है। साथ ही अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन न करने वाले कई अन्य अधिकारियों का तबादला किया गया है।</div>
<div> </div>
<div>जिसके विरोध में राजस्व अधिकारियों ने तल्ख प्रतिक्रिया व्यक्त की। जिसके प्रत्युत्तर में राजस्व अधिकारियों ने सामूहिक अवकाश लेने का विकल्प चुना। जिसके चलते प्रशासनिक काम बुरी तरह प्रभावित हुआ। हालांकि, बुधवार शाम उन्होंने अपनी हड़ताल वापस ले ली है। वैसे एक हकीकत यह भी है कि भले ही सरकार सख्त रवैया अपनाते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई के जरिये अपनी ताकत दिखा सकती है, लेकिन प्रणालीगत भ्रष्टाचार और नौकरशाही की नाराजगी की गहरी गुत्थी अभी भी अनसुलझी है। सवाल उठाया जा रहा है कि सरकार की यह सख्ती क्या हताशा का पर्याय है?</div>
<div> </div>
<div>वहीं प्रशासन का तर्क है कि लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन से बड़े निवेशक पंजाब में निवेश करने से कतरा रहे हैं। जिससे राज्य का आर्थिक विकास बाधित हो सकता है। लेकिन सवाल यह भी कि कृषि प्रधान राज्य क्या किसानों के हितों की अनदेखी कर सकता है? जिस तरह से लंबे समय से आंदोलनरत किसानों की मांगों के प्रति उदासीनता दर्शायी जा रही है, उससे किसानों की लोकतांत्रिक भागीदारी को लेकर चिंताएं पैदा होती हैं। निश्चित रूप से किसी भी लोकतांत्रिक आंदोलन के दमन से सामाजिक विभाजन और गहरा होता है।</div>
<div> </div>
<div>दरअसल, पंजाब का संकट सिर्फ हड़ताली अधिकारियों या फिर विरोध करने वाले किसानों को लेकर ही नहीं है। यह असंतोष शासन की रीति-नीतियों पर भी सवाल उठाता है जो आंदोलनकारियों से सहज संवाद की कला को खोता प्रतीत हो रहा है। निश्चित रूप से अपने राज्य के लोगों के साथ सख्ती का व्यवहार तंत्र की नाकामी को ही उजागर करता है। निर्विवाद रूप से निराशाजनक वातावरण को यथाशीघ्र दूर करने के प्रयास किए जाने चाहिए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Mar 2025 15:25:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चुनावी वादे कितना असर डालते हैं मतदाताओं पर</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div class="gmail_quote">
<div>भारत का लोकतंत्र विश्व का सबसे सशक्त लोकतंत्र माना जाता है। और इस लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करते हैं देश के मतदाता। हम चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से अपना जनप्रतिनिधि चुनते हैं और वो जनप्रतिनिधि हमें श्रेष्ठ मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री देते हैं। 150 करोड़ की आबादी में चुनाव संपन्न कराना कोई छोटी बात नहीं है। इन चुनावों में तमाम राजनैतिक दल भाग लेते हैं और जनता से कुछ वादे करते हैं कि यदि हमारी सरकार बनती है तो हम आपको ये सुविधाएं देंगे और जनता को जो श्रेष्ठ लगता है, उसी को जनता चुनती है। चुनावी वादे विकास शिक्षा, स्वस्थ्य</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/144913/how-much-impact-do-election-promises-have-on-voters"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-09/one-nation-one-election.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div class="gmail_quote">
<div>भारत का लोकतंत्र विश्व का सबसे सशक्त लोकतंत्र माना जाता है। और इस लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करते हैं देश के मतदाता। हम चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से अपना जनप्रतिनिधि चुनते हैं और वो जनप्रतिनिधि हमें श्रेष्ठ मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री देते हैं। 150 करोड़ की आबादी में चुनाव संपन्न कराना कोई छोटी बात नहीं है। इन चुनावों में तमाम राजनैतिक दल भाग लेते हैं और जनता से कुछ वादे करते हैं कि यदि हमारी सरकार बनती है तो हम आपको ये सुविधाएं देंगे और जनता को जो श्रेष्ठ लगता है, उसी को जनता चुनती है। चुनावी वादे विकास शिक्षा, स्वस्थ्य और रोजगार को लेकर होने चाहिए लेकिन पिछले कुछ समय से जो वादे जनता से किए जा रहे हैं। उनमें ज्यादातर ऐसे हैं जो सीधे सीधे जनता के व्यक्तिगत लाभ से जुड़े होते हैं और जनता भी उसको पसंद कर रही है। और ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत में बहुत सी जनसंख्या ऐसी है जो रोजगार के लिए जूझ रही है। और जो सब्सिडी और फ्री का चलन भारत में चल गया है यह तमाम योजनाओं पर असर डाल रहा है। शायद इसे रोकना ही जनता के हित में होगा।
<div> </div>
<div>पहले चुनाव में जो वादे होते थे और आज जो वादे हो रहे हैं उनमें समय के साथ साथ बहुत अंतर आ चुका है। सरकार के बताए अनुसार देश की 80 करोड़ आबादी को जनता फ्री राशन मुहैया करा रही है। यह कोई चुनावी मुद्दा नहीं था। सरकार को जब लगा कि देश की जनता में ग़रीबी रेखा के नीचे बहुत से लोग जीवन यापन कर रहे हैं और वह अपने लिए दो वक्त के भोजन की भी व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं तब इस योजना को शुरू किया गया था। लेकिन अब इसमें राजनीति प्रवेश कर चुकी है। हर राजनैतिक दल को डर है कि यदि इस चलती हुई योजना को बंद किया तो चुनावों में जनता नाराज़ हो सकती है और इसीलिए इसकी अवधि बढ़ती जा रही है। कोई फ्री में बिजली देने का वादा कर रहा है, कोई फ्री लैपटॉप के वितरण का वादा कर रहा है तो कोई खटाखट नोट पहुंचाने का वादा कर रहा है। लेकिन यह कितना ख़तरनाक है इसके विषय में हम कल्पना भी नहीं कर सकते। यदि हम बजट का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी तरह बांटते रहेंगे तो हम कहां से रोजगार देंगे और कहां से अच्छा स्वास्थ्य और कहां से अच्छी शिक्षा देने में समर्थ होंगे।</div>
<div> </div>
<div>इन वादों को पूरा करने में हम यह भूल जाते हैं कि चुनाव के समय हमने जो अन्य वादे किए थे वह हम पूरे नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि हमारे पास उतना बजट नहीं है। समाजवादी पार्टी की सरकार ने उत्तर प्रदेश में फ्री में साइकिलों का वितरण किया था। बच्चियों को आगे की पढ़ाई के लिए पहले 20000 फिर उसको बढ़ाकर 30000 की राशि के चैक वितरित किए थे, फ्री लैपटॉप, फ्री स्मार्टफोन वितरित किए थे। लेकिन अगले चुनाव में उनको हार का सामना करना पड़ा। इसका मुख्य कारण था कि आप मध्य वर्ग के टैक्स के उस पैसे को फ्री में बांट रहे हैं जो कि उसने देश के विकास की योजनाओं के लिए दिए हैं। हमको वह योजना चुननी होगी जो देश के हर व्यक्ति तक पहुंच सके। हम आयुष्मान योजना के तहत गरीबों को फ्री में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं लेकिन वहीं मध्यम वर्ग का व्यक्ति स्वस्थ्य सेवाओं को लेकर बहुत चिंतित है क्योंकि कि स्वस्थ्य सेवा इतनी महंगी हो चुकी है कि मध्यम वर्ग ठीक से अपना इलाज नहीं करा पा रहा है। और यदि इलाज करा भी रहा है तो उसके घर मकान तक बिक जाते हैं।</div>
<div> </div>
<div>देश में बिजली बहुत महंगी है, महंगी बिजली को सस्ता करने के उपाय न ढूंढ कर केजरीवाल ने दिल्ली में एक फ्री की नई जंग छेड़ दी और काफी यूनिट बिजली फ्री देने का ऐलान कर दिया। और दिल्ली में केजरीवाल की सरकार बन गई। वास्तव में यह फ्री का कल्चर आम आदमी पार्टी ने दिल्ली से शुरू किया था और अब सारी पार्टियां उसी राह पर चल पड़ीं हैं। क्यों कि इन वादों से और उनको पूरा करने पर वोटर उन्हें वोट दे रहा है। अब सवाल यह उठता है कि यह फ्री का कल्चर कब तक चलेगा।जिस योजना को सरकार एक बार लागू कर देती है फिर चाहे उससे कितना भी नुक्सान हो रहा हो उसे बंद करने की वह हिमाकत नहीं कर सकती क्योंकि वह जानती है कि यदि इस योजना को बंद कर दिया गया तो उसका वोट कट जाएगा। </div>
<div> </div>
<div>कभी चुनावी वादों को जुमला कहा गया था लेकिन आज जो चुनावी वादे हो रहे हैं वो वास्तव में जनता में असर डाल रहे हैं। केन्द्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार 80 करोड़ लोगों को फ्री राशन मुहैया करा रही है। लेकिन इसमें बहुत सा वर्ग ऐसा भी शामिल है जिसके पास सारे साधन उपलब्ध हैं लेकिन फिर भी वह इस योजना का लाभ ले रहा है यह हमारे सिस्टम की कमी है। क्यों कि हमने ऐसे लोगों को खोजने में लापरवाही बरती है जो वास्तव में इस योजना के पात्र हैं और जिनको इस योजना का लाभ मिलना चाहिए। इसलिए राजनैतिक दलों को ऐसे फ्री के वादे छोड़ने होंगे क्योंकि यह देश के लिए घातक सिद्ध हो सकते हैं। एक मध्यम वर्गीय परिवार जिसको किसी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है और उसी घर के युवा पढ़ लिख कर बेरोजगार घूम रहे हैं। यह एक बहुत बड़ी समस्या है। आज वोटर राजनैतिक दलों के वादों पर निगाह रखता है। खासकर वो जो इस तरह की फ्री योजनाओं का लाभ पा रहा है।</div>
<div> </div>
<div><strong>जितेन्द्र सिंह पत्रकार </strong></div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"><br /><br /></div>
</div>
</div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Sep 2024 17:23:48 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली में अब 'आतिशी सरकार' का क्या है बीजेपी के पास तोड़ </title>
                                    <description><![CDATA[<div>आखिरकार आम आदमी पार्टी ने अपने कहने के मुताबिक दिल्ली को एक नया मुख्यमंत्री दे ही दिया और वह हैं आतिशी। अरविंद केजरीवाल और उनके बड़े नेताओं के नाम शराब घोटाले में आने के कारण आम आदमी पार्टी ने एक ऐसी मुख्यमंत्री दिल्ली को दी है जो कि हाईली क्वालीफाइड हैं और शिक्षक भी रह चुकीं हैं। आतिशी ने कई एनजीओ के साथ भी कार्य किया है। और जब दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, और सतेंद्र जैन के नाम घोटालों में आ गए और अरविंद केजरीवाल को जमानत तो मिल गई लेकिन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/144886/now-what-does-atishi-government-have-in-delhi-bjp-has"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-09/1a2beb80-74c5-11ef-a40c-b1a35e8138c3.jpg.jpeg" alt=""></a><br /><div>आखिरकार आम आदमी पार्टी ने अपने कहने के मुताबिक दिल्ली को एक नया मुख्यमंत्री दे ही दिया और वह हैं आतिशी। अरविंद केजरीवाल और उनके बड़े नेताओं के नाम शराब घोटाले में आने के कारण आम आदमी पार्टी ने एक ऐसी मुख्यमंत्री दिल्ली को दी है जो कि हाईली क्वालीफाइड हैं और शिक्षक भी रह चुकीं हैं। आतिशी ने कई एनजीओ के साथ भी कार्य किया है। और जब दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, और सतेंद्र जैन के नाम घोटालों में आ गए और अरविंद केजरीवाल को जमानत तो मिल गई लेकिन इस शर्त पर मिली कि वह बिना एलजी की परमीशन के किसी भी कागज़ पर मुख्यमंत्री की हैसियत से काम नहीं कर सकेंगे। अब ऐसे में अरविंद केजरीवाल के पास सिर्फ एक ही विकल्प बचा था कि वो इस्तीफा दें और कोई नया मुख्यमंत्री तय करें। लोगों को उम्मीद थी कि केजरीवाल अपनी पत्नी सुनीता केजरीवाल के नाम का प्रस्ताव रखेंगे और विपक्ष को बोलने का मौका दे देंगे। </div>
<div> </div>
<div>लेकिन ऐसा नहीं हुआ केजरीवाल एक मंझे हुए राजनैतिक खिला़ड़ी बन चुके हैं और कब कैसी चाल चलना है उन्हें अच्छी तरह से पता है। आतिशी के मुख्यमंत्री बनने के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर भारतीय जनता पार्टी जो आरोप लगाती थी फिलहाल उस पर विराम लगेगा। लेकिन यदि सुनीता केजरीवाल को मुख्यमंत्री बनाया जाता तो एक तो परिवार वाद और दूसरा राजनीति का ज्ञान न होने का आरोप आम आदमी पार्टी पर मढ़ दिया जाता। जैसे ही अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफा की घोषणा की थी तभी एक विचारक थे जिनका एक समाचार पत्र में लेख आया कि अब दिल्ली को राबड़ी देवी। कम से कम अब इन इन आरोपों से आम आदमी पार्टी दूर रहेगी।</div>
<div> </div>
<div>देखा जाए तो आतिशी शुरुआती समय से ही आम आदमी पार्टी में काम कर रही हैं और वह राजनीति को अच्छी तरह से समझतीं भी हैं। जिस समय आम आदमी पार्टी की टॉप लीडरशिप जेल में थी उस समय आतिशी ने बड़ी अच्छी तरह से सरकार को चलाया था। उस समय सबसे अधिक मंत्रालय आतिशी के पास ही थे। एक तरफ आतिशी सरकार चला रहीं थीं और दूसरी तरफ बड़ी दृढ़ता से विपक्षी दलों को जबाब भी दे रहीं थीं। और अब जब मनीष सिसोदिया और अरविंद केजरीवाल को जमानत मिल चुकी है तो आतिशी के लिए सरकार चलाना और आसान होगा। अरविंद केजरीवाल और मनीष का साथ मिलने पर वह और अच्छी तरह से निर्णय ले सकेंगी। और भारतीय जनता पार्टी के पास अब आरोप लगाने के लिए बहुत ज्यादा कारण नहीं रहेंगे।</div>
<div> </div>
<div>भारतीय जनता पार्टी ने अभी से ही आप पर हमला बोलना शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल बहुत बड़े नाटक कार हैं। वो यहीं नहीं रुके बल्कि उन्होंने यह भी कह दिया कि राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल आतंकवाद का पोषण और समर्थन भी करते हैं। यही राजनीति है नेताओं की जुबान को आप नहीं रोक सकते। आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी रहेगा और दिल्ली की सत्ता भी चलेगी। दिल्ली में विधानसभा चुनाव अगले साल होने हैं और यह तय है कि आतिशी एक साल तक तो सरकार चलाएंगी ही। और यदि केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पर सुप्रीम कोर्ट का कोई अन्य निर्णय नहीं आ पाता है तब आतिशी को दुबारा मौका मिल सकता है।‌ केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पर अभी किसी प्रकार के आरोप तय नहीं हुए हैं।</div>
<div> </div>
<div>दरअसल मामला अभी न्यायालय में है तो इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने यह प्रतिबंध अरविंद केजरीवाल पर लगाए हैं ताकि अरविंद केजरीवाल केस से जुड़े मामले में कोई मदद न ले सकें। लेकिन आतिशी को मुख्यमंत्री पद सौंपकर अरविंद ने पशा विपक्ष यानि भारतीय राजनीति पार्टी के पाले में डाल दिया है। और भाजपा की भी रणनीति यही होगी कि वह आतिशी पर हमला न करके अरविन्द केजरीवाल पर ही हमला करेगी। लेकिन केजरीवाल के पास प्रबंधन की एक ऐसी कला है कि वह हर स्थिति में मुकाबला कर सकते हैं। अभी हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में चुनाव का माहौल है। हरियाणा में आम आदमी पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है।‌ अरविंद के अकेले चुनाव लड़ने से कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। लेकिन कहीं न कहीं वह भारतीय जनता पार्टी का भी नुक्सान कर सकते हैं।</div>
<div>भारतीय जनता पार्टी यह नहीं समझती थी कि केजरीवाल आतिशी को सामने कर देंगे। उनके इस निर्णय से भारतीय जनता पार्टी को अब नई रणनीति बनानी होगी।</div>
<div> </div>
<div><strong> जितेन्द्र सिंह पत्रकार </strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Sep 2024 16:38:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोर्ट के आदेश से APP ने खाली किया आफिस HQ</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात। </strong>सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद आम आदमी पार्टी ने मुख्यालय खाली कर दिया है। सुप्रीमकोर्ट ने आप के दफ्तर को खाली करने के लिए 10 अगस्त की समय सीमा दी थी। लिहाजा पार्टी ने अपना आफिस खाली करने के लिए गठरी बांधने शुरू कर दी है।आप पार्टी का नया ठिकाना अब बंगला नंबर-1,पंडित रवि शंकर शुक्ला लेन नई दिल्ली-110001 में शिफ्ट हो गया है। सुप्रीमकोर्ट ने कहा था कि आम आदमी पार्टी के पास 10 अगस्त तक राउज एवेन्यू वाला दफ्तर खाली करने का आखिरी मौका दिया था।  यह आदेश सुप्रीमकोर्ट ने 10 जून को आम आदमी पार्टी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/144006/app-vacated-office-hq-due-to-court-order"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-08/screenshot_20240811_165042_dailyhunt.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात। </strong>सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद आम आदमी पार्टी ने मुख्यालय खाली कर दिया है। सुप्रीमकोर्ट ने आप के दफ्तर को खाली करने के लिए 10 अगस्त की समय सीमा दी थी। लिहाजा पार्टी ने अपना आफिस खाली करने के लिए गठरी बांधने शुरू कर दी है।आप पार्टी का नया ठिकाना अब बंगला नंबर-1,पंडित रवि शंकर शुक्ला लेन नई दिल्ली-110001 में शिफ्ट हो गया है। सुप्रीमकोर्ट ने कहा था कि आम आदमी पार्टी के पास 10 अगस्त तक राउज एवेन्यू वाला दफ्तर खाली करने का आखिरी मौका दिया था।  यह आदेश सुप्रीमकोर्ट ने 10 जून को आम आदमी पार्टी की उस याचिका पर दिया था ,जिसमें अपील की गई थी कि पार्टी को आफिस खाली करने के लिए और समय दिया जाए।</p>
<p>बता दें कि राउज एवेन्यू स्थित परिसर दिल्ली हाईकोर्ट को आवंटित किया गया है।कोर्ट को यह जमीन 2020 में आवंटित की गई थी।उधर दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद केन्द्र सरकार ने बंगला नंबर-1,पंडित रविशंकर शुक्ला लेन में आप को नया कार्यालय आवंटित किया था। इससे पहले पार्टी को कार्यालय खाली करने की आखरी तारीख 15 जून दी गई थी। हालांकि सुप्रीमकोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगाते हुए पार्टी को 10 अगस्त तक का समय दिया था। बतादें कि आम आदमी पार्टी ने अपना नया.बोर्ड नये पते पर लगा दिया है। अब जल्द ही आप का दफ्तर राउज एवेन्यू से पूरी तरह पंडित रविशंकर लेन के बंगले में शिफ्ट हो जाएगा।अब पार्टी की मीटिंग, प्रेसवार्ता समेत अन्य गतिविधियां नए हेड क्वार्टर पर ही आयोजित होगी ।</p>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Aug 2024 16:50:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इण्डिया गठबंधन ने किया केजरीवाल की गिरफ्तारी का विरोध</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>मीरजापुर ।</strong> इण्डिया गठबंधन के बैनर तले सपा, कांग्रेस व आम आदमी पार्टी ने कलेक्टेªट में दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की गिरफ्तारी व उनके गिरते हुये स्वास्थ्य को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा केजरीवाल को जल्द से जल्द रिहा नही किया गया तो इण्डिया गठबंधन के कार्यकर्ता सड़क से लेकर संसद तक प्रदर्शन करने के लिये बाध्य होंगे। इस मौके पर सपा जिलाध्यक्ष देवी प्रसाद चौधरी ने कहा कि भाजपा सरकार अरविन्द केजरीवाल की जल्द से जल्द रिहाई करें अन्यथा इसका परिणाम अत्यन्त भयंकर होगा। उन्होने कहा कि यह सरकार जनविरोधी है।</div>
<div>  </div>
<div>जनता से किये</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/143653/india-alliance-protested-against-kejriwals-arrest"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/11..,,,...,-(1).jpg" alt=""></a><br /><div><strong>मीरजापुर ।</strong> इण्डिया गठबंधन के बैनर तले सपा, कांग्रेस व आम आदमी पार्टी ने कलेक्टेªट में दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की गिरफ्तारी व उनके गिरते हुये स्वास्थ्य को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा केजरीवाल को जल्द से जल्द रिहा नही किया गया तो इण्डिया गठबंधन के कार्यकर्ता सड़क से लेकर संसद तक प्रदर्शन करने के लिये बाध्य होंगे। इस मौके पर सपा जिलाध्यक्ष देवी प्रसाद चौधरी ने कहा कि भाजपा सरकार अरविन्द केजरीवाल की जल्द से जल्द रिहाई करें अन्यथा इसका परिणाम अत्यन्त भयंकर होगा। उन्होने कहा कि यह सरकार जनविरोधी है।</div>
<div> </div>
<div>जनता से किये गये वादे चुनावी वादे होते है जो चुनाव बाद भाजपा भूल जाती है और आम जनमानस के भावनाओं से खिलवाड़ करती है।  पूर्व सांसद डा0 रमेश चन्द्र बिन्द ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री को गिरफ्तार कर जेल में डाला गया है। आने वाले चुनाव में जनता इन्हे सबक सिखाकर सत्ता से हटाने में कोई कोर कसर नही छोड़ेगी। इस मौके पर आप पार्टी के जिलाध्यक्ष बबऊ सिंह, मुन्नी यादव, झल्लू यादव, रोहित शुक्ला ‘‘लल्लू‘‘, दामोदर मौर्या, अमिताभ पाण्डेय, सुनील पाण्डेय, राजन पाठक, बब्बू चमार, मेवालाल प्रजापति, परवीन बानो, अरशद, राजधर दूबे, दीना प्रजापति, राकेश यादव, मनोज चौहान, रामजी चौहान समेत सैकड़ो इण्डिया गठबंधन के कार्यकर्ता व पदाधिकारी मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Jul 2024 16:27:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र को आप पार्टी को दफ्तर के लिए जगह दिए जाने का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में अपने पार्टी कार्यालय के लिए सामान्य पूल से अस्थायी आधार पर एक आवास इकाई आवंटित करने के आम आदमी पार्टी (आप) के अनुरोध पर निर्णय लेने के लिए केंद्र को 25 जुलाई तक का समय दिया। 4 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने आप को राउज़ एवेन्यू में अपना कार्यालय 15 जून तक खाली करने के लिए कहा क्योंकि विचाराधीन भूमि न्यायिक बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए आवंटित की गई थी। 5 जून को उच्च न्यायालय ने केंद्र को छह सप्ताह के भीतर अस्थायी आवास के लिए पार्टी के अनुरोध पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/143244/delhi-high-court-orders-center-to-give-office-space-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/ दिल्ली-हाई-कोर्ट-ने-केंद्र-को-आप-पार्टी-को-दफ्तर-के-लिए-जगह-दिए-जाने-का-आदेश.jpg" alt=""></a><br /><p>दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में अपने पार्टी कार्यालय के लिए सामान्य पूल से अस्थायी आधार पर एक आवास इकाई आवंटित करने के आम आदमी पार्टी (आप) के अनुरोध पर निर्णय लेने के लिए केंद्र को 25 जुलाई तक का समय दिया। 4 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने आप को राउज़ एवेन्यू में अपना कार्यालय 15 जून तक खाली करने के लिए कहा क्योंकि विचाराधीन भूमि न्यायिक बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए आवंटित की गई थी। 5 जून को उच्च न्यायालय ने केंद्र को छह सप्ताह के भीतर अस्थायी आवास के लिए पार्टी के अनुरोध पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था।</p>
<p><strong>केंद्र सरकार ने उच्च न्यायालय से मांगा समय </strong></p>
<p><br />केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के संपदा निदेशालय ने उच्च न्यायालय के समक्ष एक आवेदन दायर कर अदालत द्वारा 5 जून के आदेश में पारित निर्देशों का पालन करने के लिए चार सप्ताह का समय बढ़ाने की मांग की। पक्ष और केंद्र द्वारा की गई दलीलों को सुनने के बाद, न्यायमूर्ति संजीव नरूला की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा कि प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, चूंकि अदालत के निर्देशों का पालन करने के लिए आवेदक (संपदा निदेशालय) को पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है, चार सप्ताह का समय बढ़ाने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जा सकता. हालाँकि, समग्र तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए समय अवधि 25 जुलाई तक बढ़ा दी गई है।</p>
<p>संपदा निदेशालय की ओर से पेश होते हुए, केंद्र सरकार के स्थायी वकील कीर्तिमान सिंह ने कहा कि यह संसद के विभिन्न सदस्यों के लिए सामान्य पूल से आवास आवंटित करने की प्रक्रिया में व्यस्त था, जो एक बहुत बड़ा काम था और इसलिए अदालत के निर्देशों के अनुपालन में देरी हुई थी।</p>
<h6><strong>अंतिम समय में आने का क्या तुक है?</strong></h6>
<p>वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, कि कल आदेश का अनुपालन करने के लिए दी गई छह सप्ताह की समय सीमा का अंतिम दिन है...आप इस अदालत के सामने पहले नहीं आए। अंतिम समय में आने का क्या तुक है? यदि आप देना नहीं चाहते तो उन्हें तर्कसंगत आदेश देने से कौन रोक रहा है। जस्टिस संजीव नरुला ने कहा कि प्राधिकारियों को कार्यालय के लिए भूमि आवंटित करने के लिए 'पर्याप्त समय' दिया गया था एवं इसलिए और चार सप्ताह का समय नहीं दिया जा सकता।</p>
<p><strong>केंद्र 6 सप्ताह के भीतर फैसला ले </strong></p>
<p><br />अदालत ने कहा, ''लेकिन सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के लिए समयसीमा 25 जुलाई 2024 तक बढ़ाई जाती है। इस अदालत को उम्मीद है कि आवेदनकर्ता की ओर से समय सीमा बढ़ाने के लिए भविष्य में अब कोई अनुरोध नहीं किया जाएगा।' अदालत ने कहा कि अन्य राष्ट्रीय दलों की तरह 'आप' यहां कार्यालय बनाने कह अर्हता रखती है और केंद्र से कहा कि इस मामले में छह सप्ताह के भीतर फैसला करे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jul 2024 17:08:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>युवा नेता अज़मत शाह और समीर अहमद जिला महा सचिव ने किया प्रेस वार्ता</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>बलरामपुर </strong>आम आदमी पार्टी के युवा नेता अज़मत शाह और समीर अहमद जिला महा सचिव ने बलरामपुर जनपद में बेरोजगारी शिक्षा और किसानों को लेकर प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि यदि इंडिया गठबंधन की सरकार बनती है तो युवाओं को रोजगार किसानों के दुगनी आय के लिये नये- नये तकनीकों का लाना शिक्षा के जगत में जनपद बलरामपुर अति पिछड़ा है</div>
<div>  </div>
<div>यदि बलरामपुर की जनता ने समर्थन किया तो इसके लिये भी उचित प्रबंध किया जायेगा बलरामपुर जनपद में ज्यादातर गाँव जंगल से सटा हुआ है आये दिन नरभक्षी तेंदुआ बच्चों और जानवरों को निवाला बनाता रहता है आने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141583/youth-leader-azmat-shah-and-sameer-ahmed-district-general-secretary"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/img-20240524-wa0015.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>बलरामपुर </strong>आम आदमी पार्टी के युवा नेता अज़मत शाह और समीर अहमद जिला महा सचिव ने बलरामपुर जनपद में बेरोजगारी शिक्षा और किसानों को लेकर प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि यदि इंडिया गठबंधन की सरकार बनती है तो युवाओं को रोजगार किसानों के दुगनी आय के लिये नये- नये तकनीकों का लाना शिक्षा के जगत में जनपद बलरामपुर अति पिछड़ा है</div>
<div> </div>
<div>यदि बलरामपुर की जनता ने समर्थन किया तो इसके लिये भी उचित प्रबंध किया जायेगा बलरामपुर जनपद में ज्यादातर गाँव जंगल से सटा हुआ है आये दिन नरभक्षी तेंदुआ बच्चों और जानवरों को निवाला बनाता रहता है आने वाले समय मे कोई ऐसी घटना घटित न हो उसके लिये वन विभाग से वार्तालाप करके उचित प्रबंध कराया जाएगा।</div>
<div> </div>
<div>इस मौके पर हिदायतुल्लाह पूर्व विधानसभा प्रत्याशी तुलसीपुर, आम आदमी पार्टी जिला महासचिव समीर अहमद, मोहम्मद नफीस ,अफजल आलम ,जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि महाराजगंज, आजम शाह ,आजाद अहमद, निजाम शाह आदि लोग मौजूद रहे</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>लोक सभा चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 May 2024 17:56:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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