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                <title>patna - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>patna RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कुरुक्षेत्र: राहुल को प्रतिरोध का नारा बनाएगा विपक्ष का चेहरा, 2029 में PM मोदी और नेता विपक्ष का सीधा मुकाबला।</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्चा लीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीबीएसई की गड़बडी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत अमेरिका व्यापार समझौता </span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एपस्तीन फाइल,खाड़ी युद्ध में भारत की विदेश नीति और अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत जैसे  हर ज्वलंत मुद्दे पर राहुल गांधी सीधे प्रधानमंत्री मोदी को ही घेर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में अभी तीन साल का वक्त है लेकिन राजनीति जिस दिशा में चल पड़ी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे साफ जाहिर है कि न सिर्फ 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव बल्कि अब 2029 तक जितने भी चुनाव होंगे सब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेता विपक्ष राहुल</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181388/kurukshetra-will-make-rahul-a-slogan-of-resistance-face-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/43.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्चा लीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीबीएसई की गड़बडी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत अमेरिका व्यापार समझौता </span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एपस्तीन फाइल,खाड़ी युद्ध में भारत की विदेश नीति और अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत जैसे  हर ज्वलंत मुद्दे पर राहुल गांधी सीधे प्रधानमंत्री मोदी को ही घेर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में अभी तीन साल का वक्त है लेकिन राजनीति जिस दिशा में चल पड़ी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे साफ जाहिर है कि न सिर्फ 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव बल्कि अब 2029 तक जितने भी चुनाव होंगे सब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेता विपक्ष राहुल गांधी के बीच ही सीधा मुकाबला होगा।नतीजतन राहुल गांधी खुद खुलकर मैदान में आ गये हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राहुल गांधी ने विपक्षी इंडिया गठबंधन की बैठक में कहा कि अब देश में चुनावों की परंपरागत राजनीति से आगे प्रतिरोध की राजनीति का युग आ गया है। प्रतिरोध की राजनीति से राहुल गांधी का सीधा मतलब है कि मोदी सरकार को संसद के साथ-साथ विपक्ष अब सड़क पर भी घेरेगा। राहुल ने कहा कि सभी संस्थाएं सरकार के कब्जे में हैं और चुनावों का कोई मतलब नहीं रह गया है। इसलिए कांग्रेस को प्रतिरोध की राजनीति के अपने पुराने दौर में लौटना होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राहुल ने सिर्फ एलान ही नहीं किया बल्कि उन्होंने प्रतिरोध की राजनीति की शुरुआत करते हुए सबसे पहले युवाओं और छात्रों से सीधे संवाद करने के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है।इसकी शुरुआत वह कोटा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पटना और दिल्ली में छात्र युवा सम्मेलन से कर रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा और एनडीए तो 2014 से ही चाहे लोकसभा हो या विधानसभा का चुनाव नरेंद्र मोदी को आगे करके उनके नाम पर ही हर चुनाव लड़ रहा है। सत्ता पक्ष के लिए नरेंद्र मोदी का नेतृत्व और नाम चुनावों में जीत का सबसे बड़ा मंत्र है जबकि इसके विपरीत कांग्रेस मोदी के मुकाबले अपने किसी भी नेता को आगे करके चुनाव लड़ने की हिम्मत नही जुटा पा रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसी तरह 2024 के लोकसभा चुनावों में विपक्षी इंडिया गठबंधन भी मोदी के मुकाबले बिना कोई चेहरा आगे लाए ही मैदान में उतरा था। लेकिन अब कांग्रेस जिस राह पर चल पड़ी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे यह साफ है कि अब उसे नरेंद्र मोदी के मुकाबले राहुल गांधी को आगे करने में कोई गुरेज नहीं है। अब राहुल गांधी खुद आगे बढ़कर सरकार के खिलाफ होने वाली लड़ाई की कमान संसद के साथ सड़क पर भी संभालने के लिए तैयार हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उधर विपक्षी खेमे की तस्वीर अब खासी बदल गई है। हाल ही में हुए पांच विधानसभा चुनावों में प.बंगाल में ममता बनर्जी और तमिलनाडु में एमके स्टालिन के किले ढह गए और इसके पहले बिहार में तेजस्वी यादव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली में अरविंद केजरीवाल और महाराष्ट्र में शरद पवार और उद्धव ठाकरे भाजपा के हाथों हार चुके हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस भी 2024 के बाद हरियाणा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महाराष्ट्र और असम में भाजपा से हारी है लेकिन केरल में उसकी जीत और तमिलनाडु में डीएमके को छोड़कर टीवीके सरकार में शामिल होने से पार्टी को फिर आक्सीजन मिल गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए अब मामला कांग्रेस और क्षत्रपों के बीच बराबरी का हो गया है और अब कोई भी क्षत्रप कांग्रेस को यह उलाहना नहीं दे सकता कि भाजपा का मुकाबला क्षेत्रीय दल ही सफलता पूर्वक कर पाते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्षत्रपों में अब झारखंड में हेमंत सोरेन अकेले ऐसे नेता हैं जो दो बार लगातार भाजपा को चुनावी मात दे चुके हैं और कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन है जबकि 2014</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2017</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2019 और 2022 में लगातार भाजपा के हाथों चुनावी हार झेल चुके अखिलेश यादव ने 2024 में लोकसभा चुनावों में भाजपा को पटखनी देकर फिर से 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए खम ठोंक रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब 2027 में उत्तर प्रदेश अकेला ऐसा राज्य है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां चुनाव में भाजपा का सपा से मुकाबला होगा और कांग्रेस उसकी सहयोगी पार्टी होगी। वहीं पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के साथ कांग्रेस का सीधा मुकाबला होगा क्योंकि यहां भाजपा अभी अपनी जमीन बनाने की कोशिश कर रही है और अकाली दल के सामने अस्तित्व बचाने की चुनौती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बाकी 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले होने वाले सारे राज्यों उत्तराखंड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिमाचल प्रदेश</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi">गुजरात</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्नाटक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला होगा। वहीं तेलंगाना में कांग्रेस बीआरएस और भाजपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होगा। यहां भी कांग्रेस मुख्य किरदार होगी</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></strong></p>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181388/kurukshetra-will-make-rahul-a-slogan-of-resistance-face-of</link>
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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 18:52:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षा जगत में क्रांति ला रहा टीचर्स ऑफ बिहार</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><em>पटना/ बिहार- </em></strong></p>
<p>बिहार की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव और शिक्षकों के कौशल विकास को लेकर टीचर्स ऑफ बिहार एक सशक्त मंच के रूप में उभरा है। वर्तमान में यह प्रदेश की सबसे बड़ी प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी बन चुकी है, जहाँ हजारों शिक्षक तकनीक और नवाचार के माध्यम से एक-दूसरे से सीख रहे हैं।</p>
<p><strong><em>तकनीक से सुदृढ़ हो रही शिक्षा: संस्थापक व तकनीकी टीम-</em></strong></p>
<p>समूह के संस्थापक शिव कुमार एवं टेक्निकल टीम लीडर ई. शिवेंद्र प्रकाश सुमन ने संयुक्त रूप से कहा कि, हमारा मुख्य उद्देश्य बिहार के शिक्षकों को डिजिटल युग की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। 'टीचर्स</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178567/teachers-of-bihar-is-bringing-revolution-in-the-education-world"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260508-wa0005.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>पटना/ बिहार- </em></strong></p>
<p>बिहार की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव और शिक्षकों के कौशल विकास को लेकर टीचर्स ऑफ बिहार एक सशक्त मंच के रूप में उभरा है। वर्तमान में यह प्रदेश की सबसे बड़ी प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी बन चुकी है, जहाँ हजारों शिक्षक तकनीक और नवाचार के माध्यम से एक-दूसरे से सीख रहे हैं।</p>
<p><strong><em>तकनीक से सुदृढ़ हो रही शिक्षा: संस्थापक व तकनीकी टीम-</em></strong></p>
<p>समूह के संस्थापक शिव कुमार एवं टेक्निकल टीम लीडर ई. शिवेंद्र प्रकाश सुमन ने संयुक्त रूप से कहा कि, हमारा मुख्य उद्देश्य बिहार के शिक्षकों को डिजिटल युग की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। 'टीचर्स ऑफ बिहार' केवल एक समूह नहीं, बल्कि एक विजन है जहाँ हर शिक्षक को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और नई शिक्षण विधियों को सीखने का समान अवसर मिल रहा है। हम तकनीक के माध्यम से शिक्षा को अंतिम पायदान पर खड़े छात्र तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।</p>
<p><strong><em>मीडिया और सूचना का सशक्त माध्यम</em></strong></p>
<p>संगठन की पहुँच और इसके कार्यों को जन-जन तक पहुँचाने की दिशा में प्रदेश प्रवक्ता रंजेश कुमार एवं प्रदेश मीडिया संयोजक मृत्युंजय कुमार ने कहा कि आज के समय में सूचनाओं का सही और त्वरित आदान-प्रदान बहुत आवश्यक है। 'टीचर्स ऑफ बिहार' न केवल शिक्षकों की समस्याओं को रचनात्मक मंच प्रदान करता है, बल्कि बिहार के सरकारी स्कूलों में हो रहे बेहतरीन कार्यों को दुनिया के सामने सकारात्मक बिहार' के रूप में पेश भी कर रहा है। हमारी टीम निरंतर धरातल पर शिक्षकों की आवाज़ बन रही है।<strong><em>आयोजन और नवाचार की नई राह</em></strong>संगठन द्वारा आयोजित होने वाले कार्यक्रमों पर प्रकाश डालते हुए इवेंट लीडर केशव कुमार ने बताया कि, "हम समय-समय पर राज्य स्तरीय वेबिनार, कार्यशालाएं और नवाचारी गतिविधियों का आयोजन करते हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य शिक्षकों के भीतर छिपे नेतृत्व गुणों को उभारना और उन्हें शिक्षण के आधुनिक तौर-तरीकों से परिचित कराना है। आने वाले दिनों में हम कई और बड़े शैक्षणिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं।</p>
<p><strong><em>टीचर्स ऑफ बिहार' की मुख्य विशेषताएं-</em></strong></p>
<p>▪️प्रोफेशनल नेटवर्किंग: बिहार के 38 जिलों के शिक्षकों का एक मंच पर जुड़ाव।</p>
<p>▪️स्किल डेवलपमेंट: आईसीटी और टीएलएम निर्माण में शिक्षकों को दक्ष बनाना</p>
<p>▪️सकारात्मक पत्रकारिता: स्कूलों की सफलता की कहानियों का व्यापक प्रचार-प्रसार।</p>
<p>▪️डिजिटल लाइब्रेरी: शिक्षकों के लिए ई-कंटेंट और शिक्षण सामग्री की उपलब्धता।</p>
<p>आज टीचर्स ऑफ बिहार' अपनी सक्रियता और रचनात्मकता के कारण न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। इस मंच ने यह साबित कर दिया है कि यदि शिक्षक ठान लें, तो सरकारी विद्यालयों की तस्वीर और तकदीर दोनों बदली जा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 14:17:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[राजेश तिवारी]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकारी विद्यालयों में बदलाव की नई पहचान बना टीचर्स ऑफ बिहार-द चेंज मेकर्स</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><em>पटना/ बिहार - </em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">राज्य के सरकारी विद्यालयों में बेहतर शैक्षिक वातावरण तैयार करने की दिशा में टीचर्स ऑफ बिहार-द चेंज मेकर्स समूह पिछले कई वर्षों से निःस्वार्थ भाव से कार्य कर रहा है। वर्ष 2019 से सक्रिय यह समूह विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिक्षकों, छात्रों एवं शिक्षा प्रेमियों को जोड़ते हुए शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और सकारात्मक बदलाव की मिसाल बन चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">समूह का मुख्य उद्देश्य सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रचनात्मक गतिविधियों तथा नवाचारों को बढ़ावा देना है। टीचर्स ऑफ बिहार के प्रयासों का प्रभाव अब राज्य के अधिकांश विद्यालयों में स्पष्ट रूप से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177982/teachers-of-bihar-the-change-makers-became-the-new"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260503-wa0073.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>पटना/ बिहार - </em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">राज्य के सरकारी विद्यालयों में बेहतर शैक्षिक वातावरण तैयार करने की दिशा में टीचर्स ऑफ बिहार-द चेंज मेकर्स समूह पिछले कई वर्षों से निःस्वार्थ भाव से कार्य कर रहा है। वर्ष 2019 से सक्रिय यह समूह विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिक्षकों, छात्रों एवं शिक्षा प्रेमियों को जोड़ते हुए शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और सकारात्मक बदलाव की मिसाल बन चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">समूह का मुख्य उद्देश्य सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रचनात्मक गतिविधियों तथा नवाचारों को बढ़ावा देना है। टीचर्स ऑफ बिहार के प्रयासों का प्रभाव अब राज्य के अधिकांश विद्यालयों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। शिक्षक अपने विद्यालयों में नई गतिविधियों और तकनीकी संसाधनों का उपयोग करते हुए बच्चों के सीखने के स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">टीचर्स ऑफ बिहार द्वारा शिक्षा, साहित्य, विज्ञान, बाल गतिविधियों एवं नवाचारों को केंद्र में रखते हुए अनेक पत्रिकाओं का नियमित प्रकाशन किया जा रहा है। इनमें दैनिक ज्ञानकोश, प्रज्ञानिका, पद्यपंकज, गद्यगुंजन, बालमन, बालमंच, कर्मणा, अनुसंधानम्, अभिमत, प्रकृति प्रहरी, प्रगाथा, विद्यार्थी दर्पण, रेलगाड़ी (बालमन एक्सप्रेस), चम्पारण ज्ञानाग्रह, सुरक्षित शनिवार और बैगलेस डे, प्रोजेक्ट शिक्षक साथी, शिक्षक और AI तथा भावों की उड़ान जैसी पत्रिकाएँ शामिल हैं। इन पत्रिकाओं के माध्यम से शिक्षकों और विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">समूह के संस्थापक शिव कुमार एवं टेक्निकल टीम लीडर ई. शिवेंद्र प्रकाश सुमन ने कहा कि टीचर्स ऑफ बिहार केवल एक संगठन नहीं, बल्कि शिक्षा में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला एक जनआंदोलन बन चुका है। उन्होंने कहा कि समूह का उद्देश्य शिक्षकों को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराना है, जहाँ वे अपने नवाचार, गतिविधियाँ और अनुभव साझा कर सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदेश प्रवक्ता रंजेश कुमार एवं प्रदेश मीडिया संयोजक मृत्युंजय कुमार ने संयुक्त रूप से बताया कि समूह लगातार शिक्षकों को डिजिटल शिक्षा, नवाचार, साहित्य, विज्ञान एवं सामाजिक जागरूकता से जोड़ते हुए नई दिशा देने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में समूह राज्य स्तर पर और भी बड़े शैक्षिक अभियानों का संचालन करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इवेंट लीडर केशव कुमार ने कहा कि टीचर्स ऑफ बिहार शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणा का केंद्र बन चुका है। यह समूह शिक्षकों एवं छात्रों की प्रतिभा को नई पहचान दिलाने के साथ-साथ सरकारी विद्यालयों की सकारात्मक तस्वीर समाज के सामने प्रस्तुत कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 13:47:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[राजेश तिवारी]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पृथ्वी दिवस पर टीचर्स ऑफ बिहार की शैक्षिक ई-पत्रिका प्रकृति प्रहरी का हुआ भव्य ऑनलाइन विमोचन, पर्यावरण संरक्षण का दिया सशक्त संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><em>पटना/ बिहार - </em></strong></p>
<p>पृथ्वी दिवस के अवसर पर टीचर्स ऑफ बिहार के तत्वावधान में त्रैमासिक ई-शैक्षिक पत्रिका प्रकृति प्रहरी का भव्य ऑनलाइन विमोचन समारोह आयोजित किया गया।पर्यावरण संरक्षण, हरित जीवनशैली और प्रकृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित यह कार्यक्रम 22 अप्रैल 2026 की रात्रि 8 बजे फेसबुक लाइव के माध्यम से प्रसारित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षक, विद्यार्थी एवं पर्यावरण प्रेमियों ने सहभागिता की।</p>
<p>कार्यक्रम में अहसन, क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक, भागलपुर प्रमंडल, डॉ. रश्मि प्रभा, शिक्षाविद् सह पूर्व संयुक्त निदेशक, राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद, पटना, महताब रहमानी, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, बिहार शिक्षा परियोजना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177124/on-earth-day-grand-online-release-of-teachers-of-bihars"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260423-wa0039(2).jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>पटना/ बिहार - </em></strong></p>
<p>पृथ्वी दिवस के अवसर पर टीचर्स ऑफ बिहार के तत्वावधान में त्रैमासिक ई-शैक्षिक पत्रिका प्रकृति प्रहरी का भव्य ऑनलाइन विमोचन समारोह आयोजित किया गया।पर्यावरण संरक्षण, हरित जीवनशैली और प्रकृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित यह कार्यक्रम 22 अप्रैल 2026 की रात्रि 8 बजे फेसबुक लाइव के माध्यम से प्रसारित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षक, विद्यार्थी एवं पर्यावरण प्रेमियों ने सहभागिता की।</p>
<p>कार्यक्रम में अहसन, क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक, भागलपुर प्रमंडल, डॉ. रश्मि प्रभा, शिक्षाविद् सह पूर्व संयुक्त निदेशक, राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद, पटना, महताब रहमानी, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, बिहार शिक्षा परियोजना परिषद, पटना तथा सुजीत कुमार दास, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, प्रारंभिक शिक्षा एवं समग्र शिक्षा अभियान, बिहार शिक्षा परियोजना, मुजफ्फरपुर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने पत्रिका की सराहना करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक एवं सार्थक पहल बताया।</p>
<p>पत्रिका के संपादक मुजफ्फरपुर जिले के सरैया प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, गोपालपुर नेउरा के शिक्षक अभिषेक कुमार हैं। वहीं सह-संपादक के रूप में बांका जिले के फुल्लीडुमर प्रखंड स्थित प्रोन्नत मध्य विद्यालय ईटहरी के विद्यालय अध्यापक सिद्धांत तथा मुजफ्फरपुर जिले के सरैया प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय अजीजपुर की शिक्षिका आराधना कुमारी ने पत्रिका को समृद्ध बनाने में अहम भूमिका निभाई।</p>
<p>इस महत्वपूर्ण पहल के मार्गदर्शक एवं प्रेरणास्रोत के रूप में टीचर्स ऑफ बिहार के फाउंडर शिव कुमार, टेक्निकल टीम लीडर शिवेंद्र प्रकाश सुमन एवं इवेंट लीडर केशव कुमार का विशेष योगदान रहा।पत्रिका के संकलन एवं डिजाइन का कार्य मुजफ्फरपुर जिले के कांटी प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय सलेमपुर ढाब के विद्यालय अध्यापक कुमार अभिषेक एवं अन्य शिक्षकों की टीम द्वारा किया गया, जिनके रचनात्मक प्रयासों से पत्रिका आकर्षक, प्रभावशाली एवं उपयोगी बनी है।</p>
<p>टीचर्स ऑफ बिहार के इवेंट लीडर सह मुजफ्फरपुर जिले के मुरौल प्रखण्ड स्थित प्राथमिक विद्यालय मोहनपुर उर्दू के प्रधान शिक्षक केशव कुमार ने कहा कि प्रकृति प्रहरी केवल एक पत्रिका नहीं, बल्कि एक सतत जन-जागरूकता अभियान है, जिसका उद्देश्य समाज के प्रत्येक व्यक्ति को प्रकृति का प्रहरी बनाना है। पत्रिका में बिहार में गौरैया का महत्व एवं संरक्षण पेड़-पौधों की दुनिया इको क्लब फॉर मिशन लाइफ पुनर्चक्रण पर आधारित बच्चों की प्रेरक कहानियाँ तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई महत्वपूर्ण लेख शामिल किए गए हैं।</p>
<p>टीचर्स ऑफ बिहार के प्रदेश प्रवक्ता रंजेश कुमार एवं प्रदेश मीडिया संयोजक मृत्युंजय कुमार ने संयुक्त रूप से बताया कि यह पत्रिका आने वाले समय में पर्यावरण शिक्षा और जन-जागरूकता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177124/on-earth-day-grand-online-release-of-teachers-of-bihars</link>
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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 20:37:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[राजेश तिवारी]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिहार की राजनीति- निशांत कुमार का राजनीतिक उदय</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="center">  </p>
<p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="en-us" xml:lang="en-us">- महेन्द्र तिवारी</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बिहार की राजनीति आज उस मोड़ पर खड़ी है जहाँ सत्ता के गलियारों में बदलाव की सरसराहट नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक युग के अवसान और नए नेतृत्व के अभ्युदय की पदचाप सुनाई दे रही है। पिछले दो दशकों से बिहार की नियति को अपनी उंगलियों पर नचाने वाले नीतीश कुमार ने अपनी राजनीतिक यात्रा के उस पड़ाव पर कदम रखा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ से वापसी के रास्ते संगठन की मजबूती और उत्तराधिकार के प्रश्न पर जाकर टिक जाते हैं। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के भीतर लंबे समय से जिस सन्नाटे को महसूस किया जा रहा था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">,</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173025/political-rise-of-nishant-kumar"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/mahendra_tiwari.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="center"> </p>
<p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="en-us" xml:lang="en-us">- महेन्द्र तिवारी</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बिहार की राजनीति आज उस मोड़ पर खड़ी है जहाँ सत्ता के गलियारों में बदलाव की सरसराहट नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक युग के अवसान और नए नेतृत्व के अभ्युदय की पदचाप सुनाई दे रही है। पिछले दो दशकों से बिहार की नियति को अपनी उंगलियों पर नचाने वाले नीतीश कुमार ने अपनी राजनीतिक यात्रा के उस पड़ाव पर कदम रखा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ से वापसी के रास्ते संगठन की मजबूती और उत्तराधिकार के प्रश्न पर जाकर टिक जाते हैं। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के भीतर लंबे समय से जिस सन्नाटे को महसूस किया जा रहा था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वह 8 मार्च 2026 को पटना स्थित पार्टी मुख्यालय में नारों की गूँज के साथ टूट गया। निशांत कुमार का राजनीति में औपचारिक प्रवेश केवल एक व्यक्ति का दल में शामिल होना नहीं है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह एक क्षेत्रीय दल के अस्तित्व को बचाने की उस छटपटाहट का परिणाम है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो अक्सर </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">वन मैन शो</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वाली पार्टियों में उनके शीर्ष नेता के सक्रिय राजनीति से दूर होने पर दिखाई देती है। नीतीश कुमार ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में जिस समाजवाद और वंशवाद विरोधी विचारधारा का झंडा बुलंद किया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आज उनकी पार्टी उसी वंशवाद के छाते तले खुद को सुरक्षित महसूस कर रही है। यह भारतीय राजनीति की एक कड़वी हकीकत है कि क्षेत्रीय दल विचारधारा से ज्यादा एक चेहरे से बंधे होते हैं और जब वह चेहरा धुंधला पड़ने लगता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो कार्यकर्ता किसी ऐसे नाम की तलाश करते हैं जो उस विरासत को संजो सके। निशांत कुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे एक ऐसे पिता के उत्तराधिकारी बनकर आए हैं जिन्होंने अपनी शर्तों पर राजनीति की है। नीतीश कुमार वह शख्सियत रहे हैं जिन्होंने विधानसभा में संख्या बल कम होने के बावजूद गठबंधन के साथियों को अपनी उंगलियों पर नचाया और चार बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर यह साबित किया कि राजनीति में करिश्मा और चाणक्य नीति का मेल क्या होता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">2025 के विधानसभा चुनावों ने नीतीश कुमार की लोकप्रियता पर उठ रहे तमाम सवालों पर विराम लगा दिया था। उनके गिरते स्वास्थ्य और भूलने की बीमारी की चर्चाओं के बीच जब परिणाम आए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे चौंकाने वाले थे। जनता ने उन्हें न केवल वोट दिया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि बिहार के ग्रामीण अंचलों में आज भी </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुशासन बाबू</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की धमक बरकरार है। यहाँ तक कि भारतीय जनता पार्टी को मिली भारी सफलता के पीछे भी नीतीश कुमार का वह अति पिछड़ा और महिला वोट बैंक सक्रिय था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो खामोशी से उनके पक्ष में लामबंद रहता है। लेकिन अपने राजनीतिक चरमोत्कर्ष पर नीतीश कुमार का राज्यसभा जाने का फैसला और पार्टी की बागडोर परोक्ष रूप से निशांत कुमार के हाथों में सौंपने की तैयारी ने कार्यकर्ताओं को हतप्रभ कर दिया है। निशांत के स्वागत में लगे </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत हैं तो निश्चिंत हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के नारे दरअसल कार्यकर्ताओं के उसी भय को दर्शाते हैं जो नीतीश के बिना पार्टी के बिखरने की आशंका से पैदा हुआ है। 40 वर्षीय निशांत</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो पेशे से इंजीनियर हैं और अब तक सक्रिय राजनीति की चकाचौंध से दूर रहे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनके लिए यह डगर कांटों भरी है। राजनीति कोई इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट नहीं है जहाँ फार्मूलों से नतीजे निकाले जा सकें</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यहाँ समीकरण हर पल बदलते हैं। उनकी पहली और सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के उस मूल आधार—कुर्मी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कोइरी और अति पिछड़ा वर्ग—को अपने साथ जोड़े रखने की है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो नीतीश कुमार के व्यक्तित्व के आकर्षण में जेडीयू के साथ रहा है। क्या एक सौम्य और राजनीति से दूर रहा युवा इन वर्गों की आकांक्षाओं को वह स्वर दे पाएगा जो उनके पिता ने दिया था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि तेजस्वी यादव और चिराग पासवान जैसे युवा नेता पहले से ही बिहार की मिट्टी में अपनी जड़ें गहरी कर चुके हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री एक ऐसे समय में हुई है जब उनके प्रतिद्वंद्वी राजनीति के मजे हुए खिलाड़ी बन चुके हैं। तेजस्वी यादव ने जहाँ लालू प्रसाद यादव की विरासत को अपनी मेहनत और संघर्ष से एक नई ऊँचाई दी है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं चिराग पासवान ने भी </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">हनुमान</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की छवि से निकलकर अपनी स्वतंत्र पहचान बनाई है। इन दोनों नेताओं के विपरीत निशांत को राजनीति विरासत में मिली तो है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उन्होंने कभी अपने पिता के साथ धूप-छाँव में संघर्ष नहीं किया। वे नीतीश कुमार के उन राजनीतिक दांव-पेंचों के साक्षी नहीं रहे हैं जिन्होंने जेडीयू को बार-बार संकट से उबारा। ऐसे में पार्टी के भीतर मौजूद </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">घाघ</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और पुराने नेताओं के साथ तालमेल बिठाना उनके लिए अग्निपरीक्षा जैसा होगा। जेडीयू के भीतर कई ऐसे दिग्गज नेता हैं जो खुद को नीतीश का स्वाभाविक उत्तराधिकारी मानते रहे हैं। राजीव रंजन सिंह और संजय झा जैसे नेताओं की मौजूदगी में निशांत को अपनी स्वतंत्र पहचान बनानी होगी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वरना यह आशंका हमेशा बनी रहेगी कि वे केवल एक </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">रबर स्टैंप</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बनकर रह जाएंगे और पार्टी की दूसरी लाइन के नेता उन्हें अपने हितों के लिए इस्तेमाल करेंगे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक और गंभीर चुनौती भारतीय जनता पार्टी के साथ संबंधों को लेकर है। बिहार में बीजेपी अब वह छोटी पार्टी नहीं रही जो नीतीश कुमार के पीछे चलती थी। 2025 के नतीजों के बाद बीजेपी अब खुद को </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">बड़े भाई</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की भूमिका में देख रही है। गठबंधन की राजनीति अक्सर क्रूर होती है और हर बड़ी पार्टी अपने छोटे सहयोगी को निगलने या उसे अप्रासंगिक बनाने की कोशिश करती है। बीजेपी की दीर्घकालिक रणनीति बिहार में अपना मुख्यमंत्री लाने की है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से हटने के बाद जेडीयू के लिए जूनियर पार्टनर बनकर अपनी स्वायत्तता बचाए रखना लगभग असंभव सा कार्य होगा। बीजेपी चाहेगी कि भविष्य में जेडीयू का उसमें विलय हो जाए या फिर वह इतनी कमजोर हो जाए कि उसका अपना कोई अस्तित्व न बचे। निशांत कुमार को इस </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">मित्रवत हमले</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से पार्टी को बचाना होगा। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि जेडीयू केवल एक चुनाव जिताने वाली मशीन न बनकर रह जाए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसका अपना वैचारिक स्टैंड भी बना रहे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत के पक्ष में एक बात यह जाती है कि वे शिक्षित हैं और उनकी छवि साफ-सुथरी है। बिहार की युवा पीढ़ी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो जातिगत समीकरणों से ऊपर उठकर विकास और शिक्षा की बात करती है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत में एक उम्मीद देख सकती है। लेकिन राजनीति में केवल शिक्षा और सौम्यता काफी नहीं होती</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यहाँ जनमानस से जुड़ने के लिए पसीना बहाना पड़ता है। नीतीश कुमार की अनुपस्थिति में जब वे सदस्यता ले रहे थे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसमें एक गहरा संदेश छिपा था। नीतीश ने शायद यह जतलाने की कोशिश की कि वे अभी भी वंशवाद के खिलाफ हैं और निशांत का आना पार्टी की इच्छा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी निजी जिद नहीं। हालांकि</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह संदेश आम जनता तक किस रूप में पहुँचता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह देखने वाली बात होगी। क्या जनता इसे नीतीश की मजबूरी समझेगी या एक सोची-समझी रणनीति</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि जनता के बीच यह संदेश गया कि जेडीयू अब केवल एक परिवार को बचाने की कोशिश कर रही है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो नीतीश कुमार द्वारा दशकों में कमाई गई </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुशासन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की साख को धक्का लग सकता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जेडीयू की सांगठनिक स्थिति वर्तमान में नाजुक है। 2010 में 115 सीटें जीतने वाली पार्टी 2020 में 45 पर सिमट गई थी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि 2025 में उसने फिर से 85 सीटों के साथ वापसी की। यह उतार-चढ़ाव दिखाता है कि पार्टी का जनाधार पूरी तरह सुरक्षित नहीं है और वह गठबंधन के साथी की मजबूती पर निर्भर करता है। नीतीश कुमार का करिश्मा ही वह गोंद था जो इस गठबंधन को वजन देता था। अब जब गठबंधन की कमान निशांत की ओर झुक रही है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो उन्हें साबित करना होगा कि वे केवल नीतीश के पुत्र नहीं हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक कुशल रणनीतिकार भी हैं। उन्हें उन विधायकों और नेताओं को टूटने से रोकना होगा जो सत्ता के नए केंद्रों की तलाश में दूसरी पार्टियों का रुख कर सकते हैं। अटकलें हैं कि उन्हें डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है या पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष। पद चाहे जो भी मिले</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">असली चुनौती सड़क पर उतरकर कार्यकर्ताओं का विश्वास जीतने की होगी।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंततः</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत कुमार की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे अपने पिता के </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">मार्गदर्शन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का उपयोग किस सीमा तक करते हैं। नीतीश कुमार ने भले ही कह दिया हो कि "मैं हूँ ना"</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन दिल्ली की राजनीति और पटना की जमीन के बीच का फासला बहुत बड़ा होता है। गठबंधन की राजनीति में सहयोगी दल अक्सर कमजोर कड़ियों की तलाश में रहते हैं। यदि निशांत ने अपनी राजनीतिक परिपक्वता का परिचय जल्द नहीं दिया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो जेडीयू का अस्तित्व बीजेपी के बढ़ते प्रभुत्व और तेजस्वी यादव के आक्रामक विपक्ष के बीच सैंडविच बनकर रह सकता है। बिहार की राजनीति में यह एक नए अध्याय की शुरुआत है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें विरासत का बोझ है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिद्वंद्वियों की चुनौती है और एक ऐसी जनता की उम्मीदें हैं जो अब पुराने नारों से आगे निकलना चाहती है। निशांत कुमार को यह समझना होगा कि उनके पिता ने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि उन्हें शिखर पर बने रहने के लिए शून्य से शुरुआत करनी है। यह चुनौती किसी भी युद्ध से बड़ी है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि यहाँ हारने के लिए एक पूरी विरासत है और जीतने के लिए केवल संघर्ष।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत कुमार की राह में सबसे बड़ी बाधा वह </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">सूडो-पॉलिटिकल</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ढांचा भी है जिसे उनके पिता ने बड़ी कुशलता से बुना था। नीतीश कुमार ने अधिकारियों के भरोसे शासन चलाया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता अक्सर खुद को उपेक्षित महसूस करते रहे। यदि निशांत भी इसी रास्ते पर चलते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो कार्यकर्ताओं का उत्साह जल्दी ही ठंडे बस्ते में चला जाएगा। उन्हें पार्टी के भीतर लोकतंत्र को बहाल करना होगा और उन कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित करना होगा जो अब तक केवल नीतीश के नाम पर वोट मांगते आए हैं। बिहार का भविष्य अब इस बात पर टिका है कि क्या यह नया नेतृत्व सुशासन की उस लौ को जलाए रख पाता है या फिर सत्ता की इस खींचतान में जेडीयू इतिहास के पन्नों में एक और क्षेत्रीय दल के रूप में दर्ज हो जाती है जो अपने नायक के जाने के बाद अपनी पहचान खो बैठा। 8 मार्च की वह शाम पटना के आकाश में नई उम्मीदें लेकर आई थी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उन उम्मीदों को हकीकत में बदलना निशांत कुमार के लिए लोहे के चने चबाने जैसा होगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173025/political-rise-of-nishant-kumar</link>
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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 21:17:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NEET छात्रा मौत केस में  CBI ने दर्ज की FIR, SIT से टेकओवर करेगी सभी दस्तावेज</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">बिहार की राजधानी पटना के बहुचर्चित नीट छात्रा की संदिग्ध हालत में हुई मौत के मामले में बड़ा अपडेट है. सूत्रों से के अनुसार सीबीआई ने बिहार पुलिस से इस केस को टेकओवर कर लिया है और अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है. इस बेहद चर्चित मामले को लेकर राजधानी के चित्रगुप्त नगर थाने में केस दर्ज किया गया था. एजेंसी ने इस प्रकरण को स्पेशल केस के रूप में दर्ज करते हुए केस नंबर 7S/26 आवंटित किया है. प्राथमिकी दर्ज होने के साथ ही मामले की जांच में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>छात्रा की संदिग्ध</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169484/cbi-files-first-sit-in-neet-student-death-case-will"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/download-(3).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बिहार की राजधानी पटना के बहुचर्चित नीट छात्रा की संदिग्ध हालत में हुई मौत के मामले में बड़ा अपडेट है. सूत्रों से के अनुसार सीबीआई ने बिहार पुलिस से इस केस को टेकओवर कर लिया है और अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है. इस बेहद चर्चित मामले को लेकर राजधानी के चित्रगुप्त नगर थाने में केस दर्ज किया गया था. एजेंसी ने इस प्रकरण को स्पेशल केस के रूप में दर्ज करते हुए केस नंबर 7S/26 आवंटित किया है. प्राथमिकी दर्ज होने के साथ ही मामले की जांच में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>छात्रा की संदिग्ध हालत में मौत</strong><br />बता दें कि पिछले जनवरी माह में जहानाबाद की निवासी और राजधानी के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर के नीट की तैयारी करने वाली एक छात्रा की संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी. इस मौत के बाद से पूरे राज्य में पक्ष और विपक्ष में संग्राम छिड़ गया था. परिजनों ने भी इस पूरे मामले को लेकर के पुलिस प्रशासन के ऊपर कई गंभीर आरोप लगाए थे.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>डीएनए मैच नहीं होने की खबर</strong><br />एसआईटी को अपनी जांच के क्रम में मृतका के इनरवियर पर स्पर्म के अवशेष भी मिलने की खबर सामने आई थी. हालांकि स्पर्म के डीएनए मैच को लेकर के उसके रिश्तेदारों के साथ ही कई अन्य के सैंपल को भी लिया गया था. लेकिन अब तक की मिली जानकारी के अनुसार किसी का भी डीएनए मैच नहीं होने की खबर है.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>एसआईटी का गठन</strong><br />परिजनों के आरोप के लगाने के बाद से बिहार पुलिस की तरफ से एक एसआईटी का गठन किया गया था. जो इस पूरे मामले की जांच कर रही थी. इस घटना में तब अचानक बड़ा मोड़ आ गया था, जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई थी. इसमें मृतका के साथ यौन उत्पीड़न की घटना होने से इंकार नहीं किया गया था.</p>
<p style="text-align:justify;">इस बेहद चर्चित मामले में राजधानी के कई अस्पताल भी कटघरे में खड़े हो गए थे. इसके अलावा लोगों का गुस्सा भी फूट पड़ा था. कई राजनीतिक दलों ने राजधानी की सड़कों पर उतर कर अपना आक्रोश भी जताया था. मृतका के परिजनों ने डीजीपी से भी मुलाकात की थी. मुलाकात के अगले ही दिन राज्य के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने इस पूरे मामले की जांच सीबीआई से करने की अनुशंसा किए जाने की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से दी थी.</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री के बेटे की संलिप्तता का आरोप<br />इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बिहार सरकार के वर्तमान बजट सत्र में भी बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष रावड़ी देवी ने सीधे-सीधे यह आरोप लगाकर के सनसनी फैला दिया था कि इस घटना में किसी मंत्री के बेटे की संलिप्तता हो सकती है. जिसके कारण पूरे मामले की लीपापोती की जा रही है. इसके जवाब में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने यह कहा था कि अगर उनके पास कोई जानकारी हो तो शेयर करें. सरकार 24 घंटे के अंदर कार्रवाई करेगी.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Feb 2026 16:39:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली के मंत्री और मेयर सहित कई अन्य मंत्रियों द्वारा सम्मानित हुई बिहार की बेटी काजल</title>
                                    <description><![CDATA[पटना की टॉप 10 ज्योतिषी की श्रेणी में आती हैं काजल।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155625/bihars-daughter-kajal-honored-by-many-other-ministers-including-delhi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/img-20250920-wa0283.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div>
<div><strong>ब्यूरो चीफ डीएस त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
</div>
</blockquote>
</div>
<div>
<div> </div>
<div> </div>
<div>नई दिल्ली की एक संस्था कमला ट्रस्ट जो कि भारत के महान विभूतियों को उनकी विशेष और अद्भुत प्रतिभाओं के लिए सम्मानित करती आ रहीं ने बिहार की बेटी काजल को उनके बहुमुखी प्रतिभा और योग्यता के लिए  पटना बिहार की बेटी काजल को पुरस्कृत करने के लिए चयनित किया है।कमला ट्रस्ट की स्थापना घमंडीराम गोंडवानी और इनकी पत्नी आंकिबाई ने की थी।</div>
<div> </div>
<div> इस ट्रस्ट के द्वारा 19 सितंबर 2025 को पूरे भारत से 32 लोगों का चयन कर उन्हें सम्मानित किया गया जिसमें बिहार की शान काजल कुमारी  को विशेष स्थान दिया गया हैं। </div>
<div> </div>
<div> </div>
<h4><strong>युवाओं के लिए प्रेरणा है काजल।</strong></h4>
<div> </div>
<div>यह बहुत गर्व की बात हैं कि पूरे बिहार से इस अवॉर्ड के लिए इनका ही चयन किया गया। सुश्री काजल कुमारी  बिहार के पट ना की रहने वाली हैं और इन्होंने बहुत कम उम्र में वो सारे कार्य किए हैं, जो कि आज के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।  इन्होंने खेल के क्षेत्र में 2020 में कबड्डी में डिस्टिक लेवल पर टॉप किया और बिहार का मान बढ़ाई। सन् 2022 में काजल जी ने कृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित ब्यूटी कॉन्टेस्ट में अपनी खूबसूरती से मिस पटना का ताज अपने नाम किया। </div>
<div> </div>
<div>
<div class="youtubeplayer-responsive-iframe-outer"><iframe class="youtubeplayer-responsive-iframe" title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/9L3k7YpzGVo" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></div>
</div>
<div> </div>
<div> </div>
<h4><strong>साहित्य के क्षेत्र में महत्व पूर्ण योगदान।</strong></h4>
<div> </div>
<div>इन्होंने साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया हैं। मात्र 20 वर्ष की उम्र में 9 पुस्तक सहित 3 उपन्यास लिखी हैं। इनकी रचनाएं देश विदेश की पत्र पत्रिकाओं में भी प्रकाशित होती रहती हैं। शिक्षा के क्षेत्र में इन्होंने स्लम बस्तियों के बच्चों को मुफ्त में 2 वर्षों तक शिक्षा प्रदान कर उनके भविष्य को एक नई दिशा दी हैं। जो बच्चे नाली साफ करते थे कूड़ा चुनते थे उन्हें काजल जी ने कलम थमाया हैं।</div>
<div> </div>
<div> ज्योतिष के क्षेत्र में इन्होंने इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं जो कि लोग 50 साल की उम्र में भी हासिल नहीं कर पाते हैं। इन्होंने ज्योतिष को एक अलौकिक दिव्य ज्ञान बताया हैं तथा ये पटना की टॉप 10 ज्योतिषी की श्रेणी में आती हैं। </div>
<div> </div>
<h4><strong>सामाजिक छेत्र में बड़ा योगदान।</strong></h4>
<div> </div>
<div>अब इनके सामाजिक क्षेत्र में यदि हम बात करें तो इनका बहुत बड़ा योगदान रहा हैं। इन्होंने बाल विवाह, दहेज प्रथा,  महिला उत्पीड़न, नाबालिक लड़कीयों को देह व्यापार आदि से बचाया तथा उनकी आवाज बनकर उनके अस्तित्व के लिए लड़ी हैं।  इतनी सारी प्रतिभा किसी एक व्यक्ति में होना वाकई कमाल की बात हैं। कमला ट्रस्ट ऐसे ही प्रतिभावान व्यक्तियों को प्रोत्साहित करने का कार्य करती हैं। </div>
<div> </div>
<h4><strong>काजल की प्रतिभा पर एक दिन विहार चमकेगा।</strong></h4>
<div> </div>
<div>ये अवॉर्ड देते हुए मध्यप्रदेश की कैबिनेट मंत्री और उत्तरप्रदेश के खेल मंत्री सहित कई मंत्रियों ने इन्हें सम्मानित करते हुए बोले कि ये सबसे कम उम्र की प्रतिभावान लड़की हैं और हमें विश्वास हैं कि बिहार एक दिन इनकी काबिलियत से चमकेगा। </div>
<div> </div>
<h4><strong>माता पिता के आशीर्वाद से संभव हुआ </strong></h4>
<div> </div>
<div>अवॉर्ड लेते हुए काजल कुमारी जी ने कहा मैं आज जो कुछ भी हूं अपने माता पिता के आशीर्वाद से हूं और मां सरस्वती की कृपया दृष्टि से हूं। मैं आप लोगों का आभार व्यक्त करती हूं कि आपने इस सम्मान का पात्र बनाया मुझे। हमारी न्यूज टीम इनको बहुत बहुत धन्यवाद देती हैं और ये कामना करती हैं कि बिहार की यह बेटी खूब तरक्की करे।</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>साहित्य/ज्योतिष</category>
                                            <category>कविता/कहानी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Sep 2025 00:29:47 +0530</pubDate>
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