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                <title>सफलता की कहानी - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>सफलता की कहानी RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>छोटे-छोटे निरंतर प्रयासों से खुलते बड़े सफलता के द्वार।</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">  मानव जीवन संघर्ष, परिश्रम, धैर्य और निरंतर प्रयासों की एक लंबी कहानी है। संसार में जितने भी महान व्यक्ति हुए  उनकी सफलता किसी एक दिन की चमत्कारी घटना नहीं थी, बल्कि वर्षों तक किए गए छोटे-छोटे सतत प्रयासों का बड़ा परिणाम थी। सफलता का कोई सुगम और सरल नहीं होता। वह धीरे-धीरे तपकर, गिरकर, संभलकर और निरंतर आगे बढ़ने से प्राप्त होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस प्रकार छोटी-छोटी बूंदें मिलकर विशाल सागर का निर्माण करती हैं, उसी प्रकार मनुष्य के छोटे-छोटे प्रयास जीवन में बड़ी उपलब्धियों का आधार बनते हैं। किसी शायर ने कहा है</p>
<p style="text-align:justify;"><br />"पानी की छोटी बूंदों ने बढ़कर समंदर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178860/small-continuous-efforts-open-doors-to-big-success"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/47.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"> मानव जीवन संघर्ष, परिश्रम, धैर्य और निरंतर प्रयासों की एक लंबी कहानी है। संसार में जितने भी महान व्यक्ति हुए  उनकी सफलता किसी एक दिन की चमत्कारी घटना नहीं थी, बल्कि वर्षों तक किए गए छोटे-छोटे सतत प्रयासों का बड़ा परिणाम थी। सफलता का कोई सुगम और सरल नहीं होता। वह धीरे-धीरे तपकर, गिरकर, संभलकर और निरंतर आगे बढ़ने से प्राप्त होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस प्रकार छोटी-छोटी बूंदें मिलकर विशाल सागर का निर्माण करती हैं, उसी प्रकार मनुष्य के छोटे-छोटे प्रयास जीवन में बड़ी उपलब्धियों का आधार बनते हैं। किसी शायर ने कहा है</p>
<p style="text-align:justify;"><br />"पानी की छोटी बूंदों ने बढ़कर समंदर बना दिया,<br />छोटे-छोटे प्रयासों ने आदमी का मुकद्दर बना दिया।"</p>
<p style="text-align:justify;"><br />आज का समय त्वरित परिणामों का समय माना जाता है। लोग चाहते हैं कि उन्हें बिना संघर्ष के तुरंत सफलता मिल जाए। किंतु प्रकृति का नियम है कि हर बड़ी उपलब्धि के पीछे लंबे समय तक किया गया श्रम और अनुशासन छिपा होता है। किसान बीज बोने के बाद प्रतिदिन उसकी देखभाल करता है। वह जानता है कि फसल एक दिन में नहीं उगेगी, परंतु यदि उसका प्रयास निरंतर रहेगा तो एक दिन खेत अवश्य लहलहाएगा। यही नियम मनुष्य के जीवन पर भी लागू होता है।<br />महान वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडिसन ने बिजली के बल्ब का आविष्कार करने से पहले हजारों बार असफलताएँ झेली थीं। जब उनसे पूछा गया कि वे हजार बार असफल कैसे हुए, तब उन्होंने कहा कि</p>
<p style="text-align:justify;"><br />मैं असफल नहीं हुआ, मैंने केवल हजार ऐसे तरीके खोजे जो काम नहीं करते।<br />यह कथन हमें सिखाता है कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सफलता की ओर बढ़ने का एक चरण होती है। यदि मनुष्य हर असफलता के बाद पुनः प्रयास करता रहे, तो अंततः सफलता उसके कदम चूमती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इसी प्रकार महात्मा गांधी ने भी सत्य और अहिंसा के मार्ग पर निरंतर संघर्ष करते हुए भारत को स्वतंत्रता दिलाई। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि दृढ़ संकल्प और सतत प्रयास किसी भी बड़ी शक्ति को झुका सकते हैं। गांधीजी का प्रसिद्ध कथन है</p>
<p style="text-align:justify;"><br />यह कथन केवल राजनीतिक संघर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में लागू होता है। जब कोई व्यक्ति किसी लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत करता है, तो प्रारंभ में लोग उसका उपहास उड़ाते हैं, किंतु अंततः वही व्यक्ति समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />          भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का जीवन भी छोटे-छोटे प्रयासों की महान कहानी है। साधारण परिवार में जन्म लेने वाले कलाम साहब ने कठिन परिस्थितियों में समाचार पत्र बाँटे, पढ़ाई की और अपने सपनों को कभी मरने नहीं दिया। निरंतर परिश्रम और अनुशासन के बल पर वे “मिसाइल मैन” कहलाए और देश के सर्वोच्च पद तक पहुँचे। उन्होंने कहा था</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सपना वह नहीं जो आप सोते समय देखते हैं, सपना वह है जो आपको सोने न दे। उनका यह विचार युवाओं को निरंतर प्रयास और लक्ष्य के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है। केवल सपना देखने से सफलता नहीं मिलती, बल्कि उसके लिए प्रतिदिन कर्म करना पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />जीवन में सफलता पाने के लिए सबसे आवश्यक है एक स्पष्ट लक्ष्य। बिना लक्ष्य के प्रयास दिशाहीन हो जाते हैं। जिस प्रकार नाविक बिना दिशा के समुद्र में भटक जाता है, उसी प्रकार लक्ष्यहीन मनुष्य भी अपने जीवन की ऊर्जा व्यर्थ कर देता है। यदि मनुष्य एक निश्चित लक्ष्य तय कर ले और उस दिशा में प्रतिदिन थोड़ा-थोड़ा कार्य करता रहे, तो धीरे-धीरे सफलता उसके निकट आने लगती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इतिहास गवाह है कि स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को आत्मविश्वास और निरंतर कर्म का संदेश दिया था। उनका प्रसिद्ध वाक्य—<br />“उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।”</p>
<p style="text-align:justify;"><br />यह केवल प्रेरणादायक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन का मूल मंत्र है। मनुष्य को कठिनाइयों, आलोचनाओं और असफलताओं से घबराना नहीं चाहिए। निरंतर आगे बढ़ते रहना ही सफलता का मार्ग है।<br />        प्रकृति भी हमें यही शिक्षा देती है। नदी पर्वतों से टकराकर रुकती नहीं, बल्कि अपना मार्ग स्वयं बना लेती है। चींटी बार-बार गिरने के बाद भी दीवार पर चढ़ने का प्रयास करती रहती है। सूर्य प्रतिदिन उगता है और अंधकार को दूर करता है। संसार का प्रत्येक जीव अपने सतत कर्म से जीवन का संतुलन बनाए रखता है। मनुष्य यदि प्रकृति से यह सीख ले ले कि निरंतरता ही सफलता का रहस्य है, तो उसका जीवन बदल सकता है।<br />            आज अनेक विद्यार्थी, युवा और कर्मचारी थोड़ी असफलता मिलते ही निराश हो जाते हैं। वे सोचते हैं कि शायद सफलता उनके भाग्य में नहीं है। जबकि सत्य यह है कि सफलता भाग्य से अधिक परिश्रम और निरंतरता पर निर्भर करती है। भाग्य अवसर दे सकता है, किंतु उस अवसर को उपलब्धि में बदलने का कार्य केवल परिश्रम करता है।नेल्सन मंडेला ने 27 वर्षों तक जेल में रहने के बाद भी अपने संघर्ष को नहीं छोड़ा। अंततः वही व्यक्ति दक्षिण अफ्रीका का राष्ट्रपति बना और विश्वभर में मानवाधिकारों का प्रतीक बन गया। उन्होंने कहा था<br />मैं कभी नहीं हारता। या तो जीतता हूँ या सीखता हूँ।<br />यह विचार मनुष्य को हर परिस्थिति में सकारात्मक बने रहने की प्रेरणा देता है।<br />वास्तव में बड़ी सफलता कोई कठिन कार्य नहीं है। आवश्यकता केवल मजबूत इच्छाशक्ति, स्पष्ट योजना, अनुशासन और निरंतर प्रयास की होती है। यदि मनुष्य प्रतिदिन अपने लक्ष्य की ओर एक छोटा कदम भी बढ़ाता रहे, तो समय के साथ वही कदम उसे महान उपलब्धियों तक पहुँचा देते हैं।<br />अतः यह कहना बिल्कुल उचित है कि छोटे-छोटे निरंतर प्रयास ही बड़ी सफलताओं के द्वार खोलते हैं। सफलता अचानक नहीं आती, बल्कि धीरे-धीरे हमारे प्रयासों की सीढ़ियों पर चढ़कर हमारे जीवन में प्रवेश करती है। इसलिए मनुष्य को कभी निराश नहीं होना चाहिए। कठिनाइयाँ आएँगी, असफलताएँ मिलेंगी, लोग आलोचना करेंगे, किंतु जो व्यक्ति अपने लक्ष्य पर अडिग रहता है और निरंतर कर्म करता रहता है, वही अंततः इतिहास रचता है। यही जीवन का सबसे बड़ा सत्य है।<br /><br />संजीव ठाकुर, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिंतक,स्तंभकार,रायपुर छत्तीसगढ़, 9009 415 415,</p>
<div style="text-align:justify;">कविता,</div>
<div style="text-align:justify;">संजीव-नी।<br /><br />सफलता के इंद्रधनुष।<br /><br />धीरे-धीरे<br />ओस की बूंदों-सी<br />मन के आँगन में उतरती सफलता।<br />वह शोर मचाकर नहीं आती,<br />न ही किसी ऊँचे<br />सिंहासन पर विराज कर<br />अपना परिचय देती ।<br /><br />वो चुपचाप<br />थके हुए हाथों की लकीरों में<br />मुस्कान बनकर खिलती ।<br /><br />नन्हे-नन्हे प्रयासों की<br />सुगंध जब<br />हर सुबह के साथ<br />थोड़ा-थोड़ा आकाश थामने लगती ,<br />तब कहीं जाकर<br />सफलता का इंद्रधनुष<br />जीवन की देहरी पर उतरता है।<br /><br />एक दीपक<br />हर रोज़ थोड़ा-सा दीप्त होता ,<br />तभी तो<br />अंधेरों से भरी रात<br />धीरे-धीरे उजाले में<br />परिणीत होती।<br /><br />कोई नदी भी<br />पहले ही सागर नहीं बनती,<br />पहले<br />पत्थरों से बातें करती हुई,<br />फिर राहों को सहलाती हुई,<br />धीमे-धीमे मचलती आगे बढ़ती।<br /><br />सपनों की मिट्टी में<br />विश्वास के बीज बोने पड़ते ,<br />फिर धैर्य की फुहारें<br />उन्हें सींचती रहती ,<br />तब<br />उम्मीद के फूलों पर<br />सफलता की खुशबू पनपती ।<br /><br />कितना सुंदर लगता<br />जब संघर्ष भी<br />प्रार्थना-सा शांत हो जाए,<br />और मेहनत<br />मां की लोरी सी<br />भली लगने लगे।<br /><br />सफलता<br />एक दिन में नहीं,<br />पर एक दिन<br />ज़रूर मिलती<br />जब मन थककर,<br />रुककर चलना नहीं छोड़ता,<br />जब उम्मीद<br />आख़िरी दीप की तरह<br />धीमे-धीमे जलती रहती ।<br /><br />तब जीवन के नभ पर<br />रंग बिखेरता<br />सफलता का वह इंद्रधनुष,<br />जो संदेश देता<br />छोटे-छोटे कदम ही<br />एक दिन<br />लंबी यात्राओं का<br />उत्सव बन जाते ।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर, रायपुर छत्तीसगढ़, 9009 415 415,</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 13:58:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीएम युवा मिशन,स्वरोजगार की दौड़ में जौनपुर जनपद बना प्रदेश में नंबर-1</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>जौनपुर।</strong></div>
<div>  </div>
<div>उत्तर प्रदेश सरकार का सीएम युवा योजना प्रदेश के युवाओं की पहली पसंद बन गयी है।इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश भर में पौने चार लाख से अधिक आवेदन आए, जबकि योगी सरकार ने इस वित्तीय वर्ष के लिए 1.5 लाख ऋण वितरण का लक्ष्य रखा था।</div>
<div>  </div>
<div>आंकड़ों से साफ है कि सीएम युवा योजना युवाओं को आकर्षित कर रही है और वह इससे जुड़कर अपने सपनों को साकार कर रहे हैं।योजना का शत प्रतिशत लाभ देने में प्रदेश के सभी जिलों को पछाड़ते हुए जौनपुर ने पूरे उत्तर प्रदेश में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174993/cm-youth-mission-jaunpur-district-becomes-number-1-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1001795146.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>जौनपुर।</strong></div>
<div> </div>
<div>उत्तर प्रदेश सरकार का सीएम युवा योजना प्रदेश के युवाओं की पहली पसंद बन गयी है।इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश भर में पौने चार लाख से अधिक आवेदन आए, जबकि योगी सरकार ने इस वित्तीय वर्ष के लिए 1.5 लाख ऋण वितरण का लक्ष्य रखा था।</div>
<div> </div>
<div>आंकड़ों से साफ है कि सीएम युवा योजना युवाओं को आकर्षित कर रही है और वह इससे जुड़कर अपने सपनों को साकार कर रहे हैं।योजना का शत प्रतिशत लाभ देने में प्रदेश के सभी जिलों को पछाड़ते हुए जौनपुर ने पूरे उत्तर प्रदेश में बेहतर मुकाम हासिल कर प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी कार्यकुशलता का परचम लहरा दिया है।इस उपलब्धि के पीछे जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सिंह का नेतृत्व और उनकी संवेदनशील कार्यशैली को अहम माना जा रहा है।</div>
<div> </div>
<div>          इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1.5 लाख लक्ष्य के सापेक्ष पूरे प्रदेश से तीन लाख 86 हजार 092 युवाओं ने ऋण के लिए आवेदन किया। इनमें तीन लाख 30 हजार 441 आवेदनों को बैंक को अग्रसारित किया गया। एक लाख 45 हजार 454 आवेदनों को बैंक ने लोन देने पर स्वीकृति दी। अब तक एक लाख 38 हजार 304 युवाओं को स्वरोजगार के लिए लोन वितरित किया जा चुका है।</div>
<div> </div>
<div>          सीएम युवा योजना का शत प्रतिशत लाभ देने में पूरे प्रदेश में जौनपुर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है।  जौनपुर जनपद को विकास मुख्यधारा से जोड़ने वाले,जनलोकप्रिय,कृत्यवनिष्ठ व न्यायप्रिय जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी की मंशा के अनुरूप जिले में विशेष अभियान चलाकर युवाओं को स्वरोजगार के लिए बैंकों से संपर्क कर लोन उपलब्ध कराया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले को अभियान के तहत दो हजार 700 युवाओं को ऋण उपलब्ध कराने का लक्ष्य दिया गया था।</div>
<div> </div>
<div>इसके सापेक्ष नौ हजार 785 आवेदन प्राप्त हुए। उनमें आठ हजार 406 आवेदन बैंकों को भेजे गए। इनमें चार हजार 092 आवेदकों को ऋण वितरित किया जा चुका है। ऐसे में लक्ष्य के सापेक्ष 151.56 प्रतिशत ऋण वितरण किया गया। जिलाधिकारी श्री सिंह ने बताया कि लक्ष्य से अधिक ऋण वितरित कर जौनपुर ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है।</div>
<div> </div>
<div>पूरे वित्तीय वर्ष जौनपुर की स्थिति पहले स्थान पर बनी रही।इसी क्रम में बताते चले कि जिलाधिकारी की सख्ती और कुशल निर्देशन का ही असर रहा जो सीएम युवा मिशन स्वरोजगार की दौड़ में बेहतर स्थिति हासिल की है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 19:53:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: 60 लाख की नौकरी छोड़ पति-पत्नी ने शुरू किया ये बिजनेस, आज दुनिया के हर कोने में पहुंच रहा ब्रांड</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: सफलता की कहानियां अक्सर बड़े और साहसिक फैसलों से शुरू होती हैं। बेंगलुरु के रहने वाले सुदर्शन एम.के. और प्रवलिका वी. की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। आईटी सेक्टर में एक दशक से ज्यादा समय तक शानदार करियर और विदेश में 60 लाख रुपये सालाना पैकेज पाने के बाद सुदर्शन ने कॉर्पोरेट दुनिया को अलविदा कह दिया। पत्नी प्रवलिका के साथ मिलकर उन्होंने ‘The Pickls’ नाम से एक D2C स्टार्टअप शुरू किया, जो आंध्र प्रदेश के पारंपरिक अचारों और हेल्दी फूड को दुनिया तक पहुंचा रहा है।</p>
<p><strong>कॉर्पोरेट करियर छोड़ चुनी उद्यमिता की राह</strong></p>
<p>सुदर्शन और प्रवलिका</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165517/success-story-husband-and-wife-left-their-job-worth-rs"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/success-story-(18).jpg" alt=""></a><br /><p>Success Story: सफलता की कहानियां अक्सर बड़े और साहसिक फैसलों से शुरू होती हैं। बेंगलुरु के रहने वाले सुदर्शन एम.के. और प्रवलिका वी. की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। आईटी सेक्टर में एक दशक से ज्यादा समय तक शानदार करियर और विदेश में 60 लाख रुपये सालाना पैकेज पाने के बाद सुदर्शन ने कॉर्पोरेट दुनिया को अलविदा कह दिया। पत्नी प्रवलिका के साथ मिलकर उन्होंने ‘The Pickls’ नाम से एक D2C स्टार्टअप शुरू किया, जो आंध्र प्रदेश के पारंपरिक अचारों और हेल्दी फूड को दुनिया तक पहुंचा रहा है।</p>
<p><strong>कॉर्पोरेट करियर छोड़ चुनी उद्यमिता की राह</strong></p>
<p>सुदर्शन और प्रवलिका दोनों ही उच्च शिक्षित हैं। दोनों ने इंजीनियरिंग और एमबीए किया है। सुदर्शन यूएई में एक सफल आईटी प्रोफेशनल के तौर पर काम कर रहे थे, जबकि प्रवलिका भी आईटी सेक्टर में थीं। एक पारिवारिक आपात स्थिति के चलते सुदर्शन को भारत लौटना पड़ा और यहीं से उनके जीवन ने नया मोड़ लिया।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/starting-was-not-easy.jpg" alt="starting-was-not-easy" width="700" height="525"></img></p>
<p>शानदार नौकरी छोड़ने का फैसला आसान नहीं था, लेकिन दोनों ने मिलकर पहले एक आईटी कंसल्टिंग फर्म शुरू की। इसके बावजूद उनका मन आंध्र प्रदेश के पारंपरिक अचारों और देसी स्वाद को वैश्विक पहचान दिलाने में लगा रहा।</p>
<p><strong>दिसंबर 2023 में रखी ‘The Pickls’ की नींव</strong></p>
<p>आखिरकार दिसंबर 2023 में उन्होंने ‘The Pickls’ की शुरुआत की। इस स्टार्टअप में उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से 25 लाख रुपये निवेश किए। लक्ष्य सिर्फ बिजनेस करना नहीं था, बल्कि पारंपरिक स्वाद और शुद्धता को बनाए रखते हुए एक भरोसेमंद ब्रांड खड़ा करना था।</p>
<p><strong>शुद्धता, स्वाद और सामाजिक सशक्तीकरण का मॉडल</strong></p>
<p>‘The Pickls’ सिर्फ अचार बेचने वाला ब्रांड नहीं है, बल्कि यह एक मिशन है। इस स्टार्टअप के ज्यादातर उत्पाद आंध्र प्रदेश की ग्रामीण महिलाएं तैयार करती हैं।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/left-corporate-job.jpg" alt="left-corporate-job" width="700" height="525"></img></p>
<p>ब्रांड का फोकस ‘क्लीन-लेबल’ प्रोडक्ट्स पर है—यानि न कोई आर्टिफिशियल रंग, न प्रिजर्वेटिव। अचारों के साथ-साथ यह स्टार्टअप कर्नाटक के किसानों से सीधे जैविक मिलेट्स खरीदता है, जिससे किसानों को सही दाम मिल सके और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो।</p>
<p><strong>चुनौतियों से भरा रहा शुरुआती सफर</strong></p>
<p>हर स्टार्टअप की तरह सुदर्शन और प्रवलिका के लिए भी रास्ता आसान नहीं रहा। शुरुआत में लॉजिस्टिक्स, खराब डिलीवरी और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के भारी कमीशन जैसी समस्याएं सामने आईं।</p>
<p>अमेजन और फ्लिपकार्ट पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय उन्होंने D2C मॉडल अपनाया और अपनी खुद की वेबसाइट के जरिए ग्राहकों से सीधे जुड़ने पर फोकस किया। सीमित वर्किंग कैपिटल के बावजूद उन्होंने गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं किया, जिसका नतीजा यह हुआ कि ग्राहकों का भरोसा तेजी से बढ़ा।</p>
<p><strong>एक साल में 8,000 से ज्यादा ग्राहक, 75 से अधिक प्रोडक्ट्स</strong></p>
<p>महज एक साल के भीतर ‘The Pickls’ ने भारत समेत अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और खाड़ी देशों में 8,000 से ज्यादा ग्राहकों तक अपनी पहुंच बना ली है।</p>
<p>स्टार्टअप का प्रोडक्ट पोर्टफोलियो 50 से बढ़कर 75 से ज्यादा आइटम्स तक पहुंच चुका है। अब इसमें अचारों के साथ-साथ रेडी-टू-कुक मिलेट प्रोडक्ट्स जैसे उपमा, खिचड़ी और पास्ता भी शामिल हैं।</p>
<p><strong>आगे की बड़ी योजनाएं</strong></p>
<p>वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 12 लाख रुपये के राजस्व के साथ सुदर्शन और प्रवलिका अब वेंचर कैपिटल फंडिंग और नई हेल्थ-फूड कैटेगरी में विस्तार की योजना बना रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Jan 2026 11:55:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: नौकरी के साथ की UPSC की तैयारी, पढ़ें सृष्टि डबास की सक्सेस स्टोरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: कहते हैं कि जब इरादे मजबूत हों, तो सपने आंखें बंद किए बिना भी पूरे किए जा सकते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है सृष्टि डबास की, जिन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 6वीं रैंक हासिल कर अपने सपनों को सच कर दिखाया।</p>
<h3><strong>नौकरी और तैयारी का संघर्ष</strong></h3>
<p>दिल्ली की सृष्टि डबास भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में नौकरी कर रही थीं। दिन में 8-9 घंटे की नौकरी और रात में पढ़ाई के बीच संतुलन बनाए रखना आसान नहीं था। फिर भी उनका जूनून ऐसा था कि उन्होंने काम और पढ़ाई दोनों को प्राथमिकता दी। ऑफिस की लाइब्रेरी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163867/ias-success-story-prepare-for-upsc-along-with-job-read"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-srishti-dabas.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: कहते हैं कि जब इरादे मजबूत हों, तो सपने आंखें बंद किए बिना भी पूरे किए जा सकते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है सृष्टि डबास की, जिन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 6वीं रैंक हासिल कर अपने सपनों को सच कर दिखाया।</p>
<h3><strong>नौकरी और तैयारी का संघर्ष</strong></h3>
<p>दिल्ली की सृष्टि डबास भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में नौकरी कर रही थीं। दिन में 8-9 घंटे की नौकरी और रात में पढ़ाई के बीच संतुलन बनाए रखना आसान नहीं था। फिर भी उनका जूनून ऐसा था कि उन्होंने काम और पढ़ाई दोनों को प्राथमिकता दी। ऑफिस की लाइब्रेरी में लंच टाइम का इस्तेमाल पढ़ाई के लिए किया, और छुट्टी वाले दिन भी तैयारी जारी रखी।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/4007709-srishti-dabas-8.jpg" alt="4007709-srishti-dabas-8" width="659" height="494"></img></p>
<h3><strong>शिक्षा और तैयारी की पृष्ठभूमि</strong></h3>
<p>सृष्टि ने 12वीं के बाद दिल्ली के इंदिरा ट्रस्ट कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद IGNOU से मास्टर डिग्री हासिल की। नौकरी और पढ़ाई के अनुभव के बीच, उनका असली लक्ष्य आईएएस बनना था। सामाजिक न्याय मंत्रालय में काम का अनुभव भी रहा, लेकिन उनका ध्यान केवल यूपीएससी की तैयारी पर था।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/3525697-untitled-design-2024-12-20t063252.912.jpg" alt="3525697-untitled-design-2024-12-20t063252.912" width="1200" height="900"></img></p>
<h3><strong>पहले प्रयास में सफलता</strong></h3>
<p>कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास के साथ, सृष्टि ने 2023 में पहली बार यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया रैंकिंग 6 हासिल की। इस सफलता ने न केवल उनके सपने पूरे किए, बल्कि उनकी मां का सिर भी गर्व से ऊंचा कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 14:42:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: गरीबी से लड़कर IAS बना ये लड़का, संघर्ष भरी कहानी सुन आ जाएंगे आंसू </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। UP के बुलंदशहर के एक छोटे से कस्बे के रहने वाले पवन कुमार ने यूपीएससी परीक्षा पास कर IAS बने। पवन कुमार का बचपन छप्पर से बनी छत के कच्चे मकान में बीता। उनके जीवन की शुरुआत ही मुश्किलों से भरी थी और इन्हीं से गुजरकर वह एक IAS अधिकारी बने।</p>
<p><strong>मुकेश और किसान पिता के सपने</strong><br />पवन के पिता किसान थे और चाहते थे उनका बेटा कोई अच्छी नौकरी करके</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163841/ias-success-story-this-boy-became-an-ias-after-fighting"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-success-story-(12).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। UP के बुलंदशहर के एक छोटे से कस्बे के रहने वाले पवन कुमार ने यूपीएससी परीक्षा पास कर IAS बने। पवन कुमार का बचपन छप्पर से बनी छत के कच्चे मकान में बीता। उनके जीवन की शुरुआत ही मुश्किलों से भरी थी और इन्हीं से गुजरकर वह एक IAS अधिकारी बने।</p>
<p><strong>मुकेश और किसान पिता के सपने</strong><br />पवन के पिता किसान थे और चाहते थे उनका बेटा कोई अच्छी नौकरी करके परिवार का सहारा बने। यूपीएससी की तैयारी करते हुए पवन ने अपना हौंसला कम नहीं होने दिया। उनका एक ही लक्ष्य था IAS बनकर समाज सेवा करना।</p>
<p><strong>परिवार ने जोड़े पैसे</strong><br />पवन के अंदर पढ़ाई की ललक को देखते हुए पिता ने मजदूरी करके पढ़ाया। बुलंदशहर जिले के रघुनाथ गांव के रहने वाले पवन के पिता मुकेश मनरेगा में मजदूर और एक गरीब किसान रहे हैं। वह किसानी के साथ मजदूरी करके किसी तरह से परिवार पालते हैं।</p>
<p><strong>कम नहीं होने दी अपनी लगन</strong></p>
<p>पवन ने अपने मन में सिविल सेवा का सपना पूरे करने का निश्चय कर चुके थे। UPSC में उनकी मेहनत रंग लाई और वे अच्छ नंबरों से पास होकर आईएएस अफसर बन गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 10:55:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: मां पुलिस में और बेटी बन गई IAS अफसर, पढ़ें सफलता की कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। आज हम आपको ऐसी ही आईएएस अफसर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने UPSC परीक्षा में पूरे देश में रैंक 30 हासिल की थी। ये कोई और नहीं बल्कि IAS परी बिश्नोई है।</p>
<p><strong>बीकानेर की रहने वाली है परी बिश्नोई</strong></p>
<p>परी बिश्नोई राजस्थान के राजस्थान के बीकानेर के रहने वाली है। उन्होंने अजमेर से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की। इसके बाद उन्होंने मास्टर डिग्री</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163691/ias-success-story-mother-joined-police-and-daughter-became-ias"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-pari-bishnoi-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। आज हम आपको ऐसी ही आईएएस अफसर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने UPSC परीक्षा में पूरे देश में रैंक 30 हासिल की थी। ये कोई और नहीं बल्कि IAS परी बिश्नोई है।</p>
<p><strong>बीकानेर की रहने वाली है परी बिश्नोई</strong></p>
<p>परी बिश्नोई राजस्थान के राजस्थान के बीकानेर के रहने वाली है। उन्होंने अजमेर से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की। इसके बाद उन्होंने मास्टर डिग्री ली। आपको बता दें की परी बिश्नोई ने UPSC की परीक्षा पास करने से पहले नेट की परीक्षा पास की।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/3339122-ias-pari-bishnoi-1.jpg" alt="3339122-ias-pari-bishnoi-1" width="1200" height="900"></img></p>
<p><strong>मां से मिली प्रेरणा</strong></p>
<p>परी बिश्नोई ने बताया कि आईएएस बनने के लिए उन्हें अपने मां से प्रेरणा मिली। उनकी मां राजस्थान पुलिस में है। बचपन से ही उन्होंने अपनी मां को समाज के लिए काम करते देखा है। मां को समाजसेवा करते देख उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास करने की सोची।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/ias-pari-story-in-hindi.jpg" alt="ias-pari-story-in-hindi" width="1280" height="720"></img></p>
<p>IAS परी बिश्नोई की 2024 के लोकसभा चुनावों में रिटर्निग ऑफिसर के रूप में कार्यरत थीं। आईएएस परी बिश्नोई इस समय वे उत्तर- पूर्व कैडर के अंदर सिक्किम में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पद पर काम कर रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Dec 2025 10:53:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: मां पुलिस में और बेटी बन गई IAS अफसर, पढ़ें सफलता की कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। आज हम आपको ऐसी ही आईएएस अफसर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने UPSC परीक्षा में पूरे देश में रैंक 30 हासिल की थी। ये कोई और नहीं बल्कि IAS परी बिश्नोई है।</p>
<p><strong>बीकानेर की रहने वाली है परी बिश्नोई</strong></p>
<p>परी बिश्नोई राजस्थान के राजस्थान के बीकानेर के रहने वाली है। उन्होंने अजमेर से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की। इसके बाद उन्होंने मास्टर डिग्री</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162975/ias-success-story-mother-joined-police-and-daughter-became-ias"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/ias-success-story-(9).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। आज हम आपको ऐसी ही आईएएस अफसर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने UPSC परीक्षा में पूरे देश में रैंक 30 हासिल की थी। ये कोई और नहीं बल्कि IAS परी बिश्नोई है।</p>
<p><strong>बीकानेर की रहने वाली है परी बिश्नोई</strong></p>
<p>परी बिश्नोई राजस्थान के राजस्थान के बीकानेर के रहने वाली है। उन्होंने अजमेर से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की। इसके बाद उन्होंने मास्टर डिग्री ली। आपको बता दें की परी बिश्नोई ने UPSC की परीक्षा पास करने से पहले नेट की परीक्षा पास की।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/3339122-ias-pari-bishnoi-1.jpg" alt="3339122-ias-pari-bishnoi-1" width="1200" height="900"></img></p>
<p><strong>मां से मिली प्रेरणा</strong></p>
<p>परी बिश्नोई ने बताया कि आईएएस बनने के लिए उन्हें अपने मां से प्रेरणा मिली। उनकी मां राजस्थान पुलिस में है। बचपन से ही उन्होंने अपनी मां को समाज के लिए काम करते देखा है। मां को समाजसेवा करते देख उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास करने की सोची।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/ias-pari-story-in-hindi.jpg" alt="ias-pari-story-in-hindi" width="1280" height="720"></img></p>
<p>IAS परी बिश्नोई की 2024 के लोकसभा चुनावों में रिटर्निग ऑफिसर के रूप में कार्यरत थीं। आईएएस परी बिश्नोई इस समय वे उत्तर- पूर्व कैडर के अंदर सिक्किम में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पद पर काम कर रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Dec 2025 11:01:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: मां पुलिस में और बेटी बन गई IAS अफसर, पढ़ें सफलता की कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। आज हम आपको ऐसी ही आईएएस अफसर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने UPSC परीक्षा में पूरे देश में रैंक 30 हासिल की थी। ये कोई और नहीं बल्कि IAS परी बिश्नोई है।</p>
<p><strong>बीकानेर की रहने वाली है परी बिश्नोई</strong></p>
<p>परी बिश्नोई राजस्थान के राजस्थान के बीकानेर के रहने वाली है। उन्होंने अजमेर से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की। इसके बाद उन्होंने मास्टर डिग्री</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162156/ias-success-story-mother-joined-police-and-daughter-became-ias"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/ias-success-story-(9).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। आज हम आपको ऐसी ही आईएएस अफसर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने UPSC परीक्षा में पूरे देश में रैंक 30 हासिल की थी। ये कोई और नहीं बल्कि IAS परी बिश्नोई है।</p>
<p><strong>बीकानेर की रहने वाली है परी बिश्नोई</strong></p>
<p>परी बिश्नोई राजस्थान के राजस्थान के बीकानेर के रहने वाली है। उन्होंने अजमेर से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की। इसके बाद उन्होंने मास्टर डिग्री ली। आपको बता दें की परी बिश्नोई ने UPSC की परीक्षा पास करने से पहले नेट की परीक्षा पास की।</p>
<p><strong>मां से मिली प्रेरणा</strong></p>
<p>परी बिश्नोई ने बताया कि आईएएस बनने के लिए उन्हें अपने मां से प्रेरणा मिली। उनकी मां राजस्थान पुलिस में है। बचपन से ही उन्होंने अपनी मां को समाज के लिए काम करते देखा है। मां को समाजसेवा करते देख उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास करने की सोची।</p>
<p>IAS परी बिश्नोई की 2024 के लोकसभा चुनावों में रिटर्निग ऑफिसर के रूप में कार्यरत थीं। आईएएस परी बिश्नोई इस समय वे उत्तर- पूर्व कैडर के अंदर सिक्किम में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पद पर काम कर रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Nov 2025 16:49:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: स्टेशन पर काम करने वाला कुली बन गया IAS अफसर, पढ़ें सक्सेस स्टोरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: अगर मोबाइल फोन का इस्तेमाल किसी अच्छी काम के लिए किया जाए तो वह आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकता है। यह सच कर दिखाया है एक कुली ने जिसने रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करते हुए मोबाइल फोन से ही यूपीएससी परीक्षा की तैयारी की। आइए जानते हैं आईएएस श्रीनाथ के बारे में।</p>
<h3><strong>जानिए कौन हैं आईएएस श्रीनाथ के</strong></h3>
<p>श्रीनाथ के. केरल के मुन्नार के रहने वाले हैं। उन्होंने एर्नाकुलम में एक कुली के तौर पर काम किया था। वह एक मिडिल क्लास परिवार से संबंध रखते हैं। वह अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162132/success-story-a-porter-working-at-a-station-became-an"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/ias-success-story-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>Success Story: अगर मोबाइल फोन का इस्तेमाल किसी अच्छी काम के लिए किया जाए तो वह आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकता है। यह सच कर दिखाया है एक कुली ने जिसने रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करते हुए मोबाइल फोन से ही यूपीएससी परीक्षा की तैयारी की। आइए जानते हैं आईएएस श्रीनाथ के बारे में।</p>
<h3><strong>जानिए कौन हैं आईएएस श्रीनाथ के</strong></h3>
<p>श्रीनाथ के. केरल के मुन्नार के रहने वाले हैं। उन्होंने एर्नाकुलम में एक कुली के तौर पर काम किया था। वह एक मिडिल क्लास परिवार से संबंध रखते हैं। वह अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। इसलिए उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास कर आईएएस बनने का फैसला लिया।</p>
<h3><strong>पैसे के लिए की नाइट शिफ्ट</strong></h3>
<p>इनकम बढ़ाने के लिए श्रीनाथ ने रात की शिफ्ट्स की जिससे रोजाना उन्हें 400-500 रुपये से ज्यादा मिलने लगे। लेकिन जब वह भी इससे संतुष्ट नहीं हो पाए , तो उनके मन में UPSC सिविल सर्विसेज की तैयारी करने का ख्याल आया. उनके पास कोचिंग या ट्यूशन के लिए पैसे नहीं थे, लेकिन उन्होंने जो भी साधन उपलब्ध थे, उनका इस्तेमाल करने का फैसला किया और सिविल सर्वेंट बनने का अपना सपना नहीं छोड़ा।</p>
<h3><strong>इस तरह मोबाइल से की तैयारी</strong></h3>
<p>साल 2016 में सरकार ने मुफ्त वाईफाई की सुविधा शुरु की थी, ऐसे में उन्होंने इसका लाभ उठाने का फैसला लिया। उनके पास जो मोबाइल फोन था और मुफ्त वाईफाई कनेक्शन था, जिसने उन्हें अपना सपना देखने और अपने लक्ष्य को प्राप्त कनरे का हौसला दिया।</p>
<h3><strong>पहले पास की KPSC और चौथे अटेम्प्ट में UPSC</strong></h3>
<p>श्रीनाथ ने कुली का काम करते हुए स्मार्टफोन के जरिए पढ़ना शुरु किया। मुफ्त वाईफाई की सहायता से श्रीनाथ रेलवे स्टेशन पर काम करते हुए ऑनलाइन लेक्चर सुनते थे। केपीएससी में पास होने के बाद श्रीनाथ ने चौथे प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर ली।</p>
<p>IAS श्रीनाथ आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जोल कुछ असफल प्रयासों के बाद निराश महसूस करते हैं। इनकी सफलता की कहानी बताती है कि कोई भी परेशानी आपकी तरक्की में बाधा नहीं बन सकती। बस कुछ कर गुजरने का साहस होना जरुरी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Nov 2025 12:42:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: स्टेशन पर काम करने वाला कुली बन गया IAS अफसर, पढ़ें सक्सेस स्टोरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: अगर मोबाइल फोन का इस्तेमाल किसी अच्छी काम के लिए किया जाए तो वह आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकता है। यह सच कर दिखाया है एक कुली ने जिसने रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करते हुए मोबाइल फोन से ही यूपीएससी परीक्षा की तैयारी की। आइए जानते हैं आईएएस श्रीनाथ के बारे में।</p>
<h3><strong>जानिए कौन हैं आईएएस श्रीनाथ के</strong></h3>
<p>श्रीनाथ के. केरल के मुन्नार के रहने वाले हैं। उन्होंने एर्नाकुलम में एक कुली के तौर पर काम किया था। वह एक मिडिल क्लास परिवार से संबंध रखते हैं। वह अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161707/success-story-a-porter-working-at-a-station-became-an"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/ias-success-story-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>Success Story: अगर मोबाइल फोन का इस्तेमाल किसी अच्छी काम के लिए किया जाए तो वह आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकता है। यह सच कर दिखाया है एक कुली ने जिसने रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करते हुए मोबाइल फोन से ही यूपीएससी परीक्षा की तैयारी की। आइए जानते हैं आईएएस श्रीनाथ के बारे में।</p>
<h3><strong>जानिए कौन हैं आईएएस श्रीनाथ के</strong></h3>
<p>श्रीनाथ के. केरल के मुन्नार के रहने वाले हैं। उन्होंने एर्नाकुलम में एक कुली के तौर पर काम किया था। वह एक मिडिल क्लास परिवार से संबंध रखते हैं। वह अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। इसलिए उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास कर आईएएस बनने का फैसला लिया।</p>
<h3><strong>पैसे के लिए की नाइट शिफ्ट</strong></h3>
<p>इनकम बढ़ाने के लिए श्रीनाथ ने रात की शिफ्ट्स की जिससे रोजाना उन्हें 400-500 रुपये से ज्यादा मिलने लगे। लेकिन जब वह भी इससे संतुष्ट नहीं हो पाए , तो उनके मन में UPSC सिविल सर्विसेज की तैयारी करने का ख्याल आया. उनके पास कोचिंग या ट्यूशन के लिए पैसे नहीं थे, लेकिन उन्होंने जो भी साधन उपलब्ध थे, उनका इस्तेमाल करने का फैसला किया और सिविल सर्वेंट बनने का अपना सपना नहीं छोड़ा।</p>
<h3><strong>इस तरह मोबाइल से की तैयारी</strong></h3>
<p>साल 2016 में सरकार ने मुफ्त वाईफाई की सुविधा शुरु की थी, ऐसे में उन्होंने इसका लाभ उठाने का फैसला लिया। उनके पास जो मोबाइल फोन था और मुफ्त वाईफाई कनेक्शन था, जिसने उन्हें अपना सपना देखने और अपने लक्ष्य को प्राप्त कनरे का हौसला दिया।</p>
<h3><strong>पहले पास की KPSC और चौथे अटेम्प्ट में UPSC</strong></h3>
<p>श्रीनाथ ने कुली का काम करते हुए स्मार्टफोन के जरिए पढ़ना शुरु किया। मुफ्त वाईफाई की सहायता से श्रीनाथ रेलवे स्टेशन पर काम करते हुए ऑनलाइन लेक्चर सुनते थे। केपीएससी में पास होने के बाद श्रीनाथ ने चौथे प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर ली।</p>
<p>IAS श्रीनाथ आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जोल कुछ असफल प्रयासों के बाद निराश महसूस करते हैं। इनकी सफलता की कहानी बताती है कि कोई भी परेशानी आपकी तरक्की में बाधा नहीं बन सकती। बस कुछ कर गुजरने का साहस होना जरुरी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Nov 2025 22:22:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: बेहद दिलचस्प है इस IAS अफसर की कहानी, न्यूज पेपर और टीवी से की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। आज हम आपको ऐसी आईएएस अफसर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने टीवी देखकर आईएएस अफसर बनने की ठानी। आइए जानते हैं आईएएस सृष्टि देशमुख के बारे में।</p>
<p><strong>भोपाल में हुआ जन्म</strong></p>
<p>सृष्टि का जन्म भोपाल में 28 मार्च 1996 को हुआ। उनके पिता जयंत देशमुख एक प्राइवेट कंपनी में इंजीनियर हैं और उनकी मां सुनीता एक निजी स्कूल में टीचर है। उनके पालन-पोषण ने उन्हें बचपन से ही कड़ी मेहनत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161488/success-story-the-story-of-this-ias-officer-is-very"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/ias-srushti-deshmukh.jpg" alt=""></a><br /><p>Success Story: यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। आज हम आपको ऐसी आईएएस अफसर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने टीवी देखकर आईएएस अफसर बनने की ठानी। आइए जानते हैं आईएएस सृष्टि देशमुख के बारे में।</p>
<p><strong>भोपाल में हुआ जन्म</strong></p>
<p>सृष्टि का जन्म भोपाल में 28 मार्च 1996 को हुआ। उनके पिता जयंत देशमुख एक प्राइवेट कंपनी में इंजीनियर हैं और उनकी मां सुनीता एक निजी स्कूल में टीचर है। उनके पालन-पोषण ने उन्हें बचपन से ही कड़ी मेहनत और दृढ़ता के मूल्य से परिचित कराया।</p>
<p><strong>UPSC की कठिन तैयारी में मिला प्यार</strong></p>
<p>यूपीएससी की तैयारी के दौरान सृष्टि को प्यार भी मिला। मसूरी में LBSNAA में ट्रेनिंग के दौरान उनकी मुलाकात IAS डॉ. नागार्जुन बी गौड़ा से हुई। 24 अप्रैल 2022 में दोनों शादी के बंधन में बंध गए।</p>
<p><strong>सृष्टि देशमुख का UPSC स्कोर और रैंक</strong></p>
<p>सृष्टि ने फर्स्ट अटेंप्ट में ही सफलता पाने की ठान ली थी। उन्होंने जी जान लगाकर यूपीएससी की तैयारी की और ऑल इंडिया रैंक 5 हासिल की। वह UPSC मेन्स में 895 नंबर और इंटरव्यू में 173 नंबर हासिल कर अपने बैच की महिला टॉपर बनी।</p>
<p><strong>न्यूज पेपर और टीवी से तैयारी</strong></p>
<p>सृष्टि ने यूपीएससी की तैयारी के लिए अनुशासित दृष्टिकोण अपनाते हुए सेल्फ स्टडी पर ध्यान दिया। उन्होंने रोजाना न्यूजपेपर और राज्यसभा टीवी पर ज्ञानवर्धक कार्यक्रम देखे। इन आदतों ने उनकी नॉलेज में बढ़ोत्तरी की। ये सभी चीजें उनकी यूपीएससी की परीक्षा पास करने में मददगार साबित हुई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Nov 2025 16:00:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: गरीबी से लड़कर IAS बना ये लड़का, संघर्ष भरी कहानी सुन आ जाएंगे आसूं</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। UP के बुलंदशहर के एक छोटे से कस्बे के रहने वाले पवन कुमार ने यूपीएससी परीक्षा पास कर IAS बने। पवन कुमार का बचपन छप्पर से बनी छत के कच्चे मकान में बीता। उनके जीवन की शुरुआत ही मुश्किलों से भरी थी और इन्हीं से गुजरकर वह एक IAS अधिकारी बने।</p>
<p><strong>मुकेश और किसान पिता के सपने</strong></p>
<p>पवन के पिता किसान थे और चाहते थे उनका बेटा कोई अच्छी नौकरी करके</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/160794/ias-success-story-this-boy-became-an-ias-after-fighting"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/ias-success-story-(4).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। UP के बुलंदशहर के एक छोटे से कस्बे के रहने वाले पवन कुमार ने यूपीएससी परीक्षा पास कर IAS बने। पवन कुमार का बचपन छप्पर से बनी छत के कच्चे मकान में बीता। उनके जीवन की शुरुआत ही मुश्किलों से भरी थी और इन्हीं से गुजरकर वह एक IAS अधिकारी बने।</p>
<p><strong>मुकेश और किसान पिता के सपने</strong></p>
<p>पवन के पिता किसान थे और चाहते थे उनका बेटा कोई अच्छी नौकरी करके परिवार का सहारा बने। यूपीएससी की तैयारी करते हुए पवन ने अपना हौंसला कम नहीं होने दिया। उनका एक ही लक्ष्य था IAS बनकर समाज सेवा करना।</p>
<p><strong>परिवार ने जोड़े पैसे</strong></p>
<p>पवन के अंदर पढ़ाई की ललक को देखते हुए पिता ने मजदूरी करके पढ़ाया। बुलंदशहर जिले के रघुनाथ गांव के रहने वाले पवन के पिता मुकेश मनरेगा में मजदूर और एक गरीब किसान रहे हैं। वह किसानी के साथ मजदूरी करके किसी तरह से परिवार पालते हैं।</p>
<p><strong>कम नहीं होने दी अपनी लगन</strong></p>
<p>पवन ने अपने मन में सिविल सेवा का सपना पूरे करने का निश्चय कर चुके थे। UPSC में उनकी मेहनत रंग लाई और वे अच्छ नंबरों से पास होकर आईएएस अफसर बन गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/160794/ias-success-story-this-boy-became-an-ias-after-fighting</link>
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                <pubDate>Wed, 19 Nov 2025 12:31:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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