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                <title>IPS Success story - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>IPS Success story RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>IPS Navjot Simi: 'ब्यूटी विद ब्रेन' की बेहतरीन मिसाल है ये IPS अफसर, दूसरे प्रयास में मिली सफलता </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IPS Navjot Simi: सपनों को हकीकत में बदलने की कहानी जब लिखी जाती है, तो उसमें संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की स्याही जरूर होती है। 2018 बैच की आईपीएस अधिकारी नवजोत सिमी (Navjot Simi) की सफलता की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।</p>
<p>उन्होंने कभी अवसरों से मुंह नहीं मोड़ा और न ही असफलता से हार मानी। एक डेंटिस्ट के रूप में करियर शुरू करने के बाद उन्होंने सिविल सर्विसेज परीक्षा की राह चुनी और दूसरे ही प्रयास में यूपीएससी (UPSC) पास कर आईपीएस अधिकारी बन गईं।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/8.jpg" alt="8" width="1080" height="1080" /></p>
<h3><strong>डेंटिस्ट से शुरू हुआ करियर</strong></h3>
<p>नवजोत सिमी का जन्म पंजाब के गुरदासपुर जिले</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164155/ips-navjot-simi-this-ips-officer-is-a-great-example"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ips-navjot-simi-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>IPS Navjot Simi: सपनों को हकीकत में बदलने की कहानी जब लिखी जाती है, तो उसमें संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की स्याही जरूर होती है। 2018 बैच की आईपीएस अधिकारी नवजोत सिमी (Navjot Simi) की सफलता की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।</p>
<p>उन्होंने कभी अवसरों से मुंह नहीं मोड़ा और न ही असफलता से हार मानी। एक डेंटिस्ट के रूप में करियर शुरू करने के बाद उन्होंने सिविल सर्विसेज परीक्षा की राह चुनी और दूसरे ही प्रयास में यूपीएससी (UPSC) पास कर आईपीएस अधिकारी बन गईं।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/8.jpg" alt="8" width="1080" height="1080"></img></p>
<h3><strong>डेंटिस्ट से शुरू हुआ करियर</strong></h3>
<p>नवजोत सिमी का जन्म पंजाब के गुरदासपुर जिले में हुआ। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा मॉडल पब्लिक स्कूल, गुरदासपुर से पूरी की और आगे की पढ़ाई लुधियाना के बाबा जसवंत सिंह डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर से की। उन्होंने बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (BDS) की डिग्री हासिल की और एक दंत चिकित्सक के रूप में काम करना शुरू किया।</p>
<h3><strong>सिविल सेवा की ओर बढ़ाया कदम</strong></h3>
<p>डेंटिस्ट के रूप में करियर स्थापित करने के बावजूद नवजोत ने यहीं रुकने का फैसला नहीं किया। वे हमेशा खुद को नई चुनौतियों के लिए तैयार रखती थीं। उन्होंने यूपीएससी परीक्षा देने का निश्चय किया और काम के साथ-साथ तैयारी शुरू की।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/877603-navjot-simi-0.jpg" alt="877603-navjot-simi-0" width="600" height="315"></img></p>
<h3><strong>असफलता से नहीं टूटी हिम्मत</strong></h3>
<p>नवजोत सिमी ने 2016 में पहली बार UPSC सिविल सेवा परीक्षा दी, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। पर उन्होंने असफलता को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने अपनी कमियों पर काम किया और अगले वर्ष फिर परीक्षा दी। 2017 में अपने दूसरे ही प्रयास में उन्होंने 735वीं रैंक हासिल की और आईपीएस के रूप में चयनित हुईं।</p>
<h3><strong>बिहार कैडर मिला, पटना में शुरू हुआ सफर</strong></h3>
<p>नवजोत सिमी को बिहार कैडर मिला और उन्होंने हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (NPA) में प्रशिक्षण पूरा किया। प्रशिक्षण के बाद उनकी पहली पोस्टिंग पटना में पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के रूप में हुई, जहां से उन्होंने अपने आईपीएस करियर की शुरुआत की।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/navjot-simi.jpg" alt="Navjot-Simi" width="1200" height="800"></img></p>
<h3><strong>वर्तमान में बेगूसराय में तैनात</strong></h3>
<p>नवजोत सिमी को हाल ही में बिहार सैन्य पुलिस (BMP)-8, बेगूसराय में कमांडेंट के रूप में नियुक्त किया गया है। उनकी कार्यशैली और सादगी के चलते वे बिहार पुलिस में एक प्रेरणादायक चेहरा बन चुकी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Dec 2025 11:59:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: पिता की मौत के बाद नहीं टूटा हौसला, तीसरे प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर बने IPS अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: आपने कई सफल लोगों की कहानियां पढ़ी होंगी, लेकिन कुछ जीवन संघर्षों की गहराई इतनी होती है कि वे न सिर्फ प्रेरित करती हैं, बल्कि हमें सोचने पर मजबूर कर देती हैं। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है IPS नवनीत आनंद की, जिन्होंने कठिन हालातों को पीछे छोड़कर यूपीएससी 2023 में 499वीं रैंक हासिल की और आईपीएस कैडर पाने में सफलता प्राप्त की।</p>
<p><strong>पिता की असमय मृत्यु, बचपन से जिम्मेदारी का बोझ</strong></p>
<p>नवनीत आनंद की जिंदगी उस वक्त पूरी तरह बदल गई, जब वे महज सातवीं कक्षा में थे और पिता का साया उनके सिर से उठ गया।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163948/success-story-did-not-lose-courage-after-fathers-death-became"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/news-2025-06-24t110909.741-780x470-(1).webp" alt=""></a><br /><p>Success Story: आपने कई सफल लोगों की कहानियां पढ़ी होंगी, लेकिन कुछ जीवन संघर्षों की गहराई इतनी होती है कि वे न सिर्फ प्रेरित करती हैं, बल्कि हमें सोचने पर मजबूर कर देती हैं। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है IPS नवनीत आनंद की, जिन्होंने कठिन हालातों को पीछे छोड़कर यूपीएससी 2023 में 499वीं रैंक हासिल की और आईपीएस कैडर पाने में सफलता प्राप्त की।</p>
<p><strong>पिता की असमय मृत्यु, बचपन से जिम्मेदारी का बोझ</strong></p>
<p>नवनीत आनंद की जिंदगी उस वक्त पूरी तरह बदल गई, जब वे महज सातवीं कक्षा में थे और पिता का साया उनके सिर से उठ गया। पिता की मौत के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी नवनीत के कंधों पर आ गई। लेकिन उन्होंने हालात से हार मानने के बजाय पढ़ाई और पारिवारिक जिम्मेदारी दोनों को बराबरी से निभाया।</p>
<p>नवनीत ने 2010 से 2017 तक राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित सैनिक स्कूल में पढ़ाई की। यह वही दौर था, जब उन्होंने अनुशासन और आत्मनिर्भरता को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया। इसके बाद उन्होंने अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से सोशियोलॉजी में मास्टर्स पूरा किया। इन्हीं दिनों उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की थी।</p>
<p><strong>एक नहीं, कई परीक्षाओं में सफलता</strong></p>
<p>नवनीत सिर्फ यूपीएससी तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने CAPF, CDS, UGC NET जैसी कई प्रतियोगी परीक्षाएं पास कीं। इन सफलताओं ने उनके आत्मविश्वास को मज़बूत किया, लेकिन उनका असली सपना UPSC का एग्जाम क्रैक करना था।</p>
<p><strong>तीसरे प्रयास में मिली मंजिल</strong></p>
<p>यूपीएससी के पहले दो प्रयासों में असफलता हाथ लगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने बिना कोचिंग, सेल्फ स्टडी और अनुशासन के दम पर तीसरे प्रयास की तैयारी की। संसाधनों की कमी, घर से दूरी और मानसिक दबाव के बावजूद नवनीत ने खुद को कमजोर नहीं पड़ने दिया। 2023 में, तीसरे प्रयास में नवनीत ने 499वीं रैंक के साथ सिविल सेवा परीक्षा पास की और अब वे आईपीएस अधिकारी बन गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Dec 2025 14:13:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: 33 बार फेल, फिर भी नहीं मानी हार: हिंदी मीडियम से पढ़े आदित्य कुमार बने IPS अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: जीवन में संघर्ष और असफलताएं अक्सर हमें कमजोर बना देती हैं, लेकिन कुछ लोग इन्हीं असफलताओं को सीढ़ी बनाकर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंच जाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है आदित्य कुमार की, जो 33 बार परीक्षा में फेल होने के बावजूद UPSC पास करके IPS अफसर बने।</p>
<p>आदित्य राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के अजीतपुरा गांव के रहने वाले हैं। वे हिंदी मीडियम से पढ़े हुए हैं और एक साधारण ग्रामीण परिवेश से आते हैं। लेकिन उन्होंने बचपन से ही तय कर लिया था कि UPSC परीक्षा पास करनी है।</p>
<p>12वीं के बाद उन्होंने विभिन्न सरकारी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163855/success-story-failed-33-times-but-still-did-not-accept"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/news-2025-06-23t122040.787-780x470.webp" alt=""></a><br /><p>Success Story: जीवन में संघर्ष और असफलताएं अक्सर हमें कमजोर बना देती हैं, लेकिन कुछ लोग इन्हीं असफलताओं को सीढ़ी बनाकर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंच जाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है आदित्य कुमार की, जो 33 बार परीक्षा में फेल होने के बावजूद UPSC पास करके IPS अफसर बने।</p>
<p>आदित्य राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के अजीतपुरा गांव के रहने वाले हैं। वे हिंदी मीडियम से पढ़े हुए हैं और एक साधारण ग्रामीण परिवेश से आते हैं। लेकिन उन्होंने बचपन से ही तय कर लिया था कि UPSC परीक्षा पास करनी है।</p>
<p>12वीं के बाद उन्होंने विभिन्न सरकारी नौकरी परीक्षाओं में हाथ आजमाना शुरू किया। वे 30 बार विभिन्न परीक्षाओं जैसे बैंक, KVS, इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में फेल हुए। इसके बाद उन्होंने UPSC की परीक्षा देने का फैसला किया और यहां भी तीन बार असफलता का सामना किया। कुल मिलाकर वे 33 बार असफल हुए, लेकिन कभी भी अपने लक्ष्य से भटके नहीं।</p>
<p>वर्ष 2013 में आदित्य ने अपने गांव को छोड़कर दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी शुरू की। 2014 में पहले अटेम्प्ट में  प्रीलिम्स भी पास नहीं हुआ। 2015 में दूसरा प्रयास  में प्रीलिम्स और मेंस तो पास हुए, लेकिन इंटरव्यू में ओवरकॉन्फिडेंस के चलते फेल हो गए।</p>
<p>2016 में तीसरा प्रयास में एक बार फिर असफलता हाथ लगी। लेकिन 2017 में चौथे प्रयास में उन्होंने सफलता हासिल की और 630वीं रैंक के साथ यूपीएससी पास किया।</p>
<p>2018 के UPSC रिजल्ट में 630वीं रैंक के साथ IPS कैडर मिला। आज आदित्य कुमार पंजाब के संगरूर जिले में एएसपी (असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस) के पद पर तैनात हैं। आदित्य के माता-पिता दोनों शिक्षक हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 13:12:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UPSC Success Story: किसान की बेटियों ने मेहनत और जज्बे से रचा इतिहास, एक बनी IAS तो दूसरी बनी IPS</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>UPSC Success Story:</strong> वो कहते हैं ना जब हौसलों में जान होती है, तो राह में आने वाली मुसीबतें भी घुटने टेक देती हैं। ऐसा ही कारनामा तमिलनाडु के कडलुर जिले की 2 बहनों ने कर दिखाया। इन दोनों बहनों का नाम है ईश्वर्या रामनाथन और सुष्मिता रामनाथन।</p>
<p>दोनों बहनों ने अपनी मेहनत के दम पर यूपीएससी (UPSC) जैसी कठिन परीक्षा को न केवल क्लियर किया, बल्कि एक मिसाल भी पेश की। ये दोनों बहनें किसान परिवार से आती हैं, लेकिन उन्होंने कभी संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।</p>
<p><strong>एक बनीं IAS तो दूसरी IPS</strong></p>
<p>सुष्मिता रामनाथन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163721/upsc-success-story-farmers-daughters-created-history-with-hard-work"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/success-story-(15).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>UPSC Success Story:</strong> वो कहते हैं ना जब हौसलों में जान होती है, तो राह में आने वाली मुसीबतें भी घुटने टेक देती हैं। ऐसा ही कारनामा तमिलनाडु के कडलुर जिले की 2 बहनों ने कर दिखाया। इन दोनों बहनों का नाम है ईश्वर्या रामनाथन और सुष्मिता रामनाथन।</p>
<p>दोनों बहनों ने अपनी मेहनत के दम पर यूपीएससी (UPSC) जैसी कठिन परीक्षा को न केवल क्लियर किया, बल्कि एक मिसाल भी पेश की। ये दोनों बहनें किसान परिवार से आती हैं, लेकिन उन्होंने कभी संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।</p>
<p><strong>एक बनीं IAS तो दूसरी IPS</strong></p>
<p>सुष्मिता रामनाथन का सफर आसान नहीं था। 2022 में उन्होंने अपने छठे प्रयास में UPSC क्लियर किया और 528वीं रैंक हासिल की। लेकिन यह सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। 5 बार फेल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।</p>
<p>कई बार ऐसा लगा कि बस अब नहीं होगा। लेकिन उन्होंने हर बार खुद को कहा कि अभी तो पार्टी शुरू हुई है और अपनी तैयारी जारी रखी। उनकी मेहनत रंग लाई और आज वे एक गर्वित IPS अफसर हैं।</p>
<p>वहीं ईश्वर्या रामनाथन जो सुष्मिता की बड़ी बहन हैं, उन्होंने भी UPSC परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में 630वीं रैंक पाई। लेकिन उन्हें और बेहतर करना था। उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और 44वीं रैंक के साथ IAS अधिकारी बन गईं।</p>
<p>22 साल की छोटी उम्र में IAS बनना कोई मजाक नहीं पोग। आज वे थुथुकुडी जिले में एडिशनल कलेक्टर के रूप में सेवा दे रही हैं। सच में यें दोनों बहनें सुपर सिस्टर्स से कम नहीं हैं।</p>
<p><strong>आसान नहीं था दोनों बहनों का सफर</strong></p>
<p>इन दोनों बहनों का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। 2004 में आई सुनामी में उनका घर उजड़ गया था। घर में आर्थिक तंगी थी, लेकिन माता-पिता ने हमेशा शिक्षा को प्राथमिकता दी।</p>
<p>मुश्किलों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। जब दूसरे लोग "Netflix and Chill" कर रहे थे तब ये बहनें "Study and Skill" कर रही थीं और नतीजा यह निकला कि दोनों बहनें आज देश की सेवा कर रही हैं।</p>
<p><strong>किसान की बेटियां बनीं इंस्पिरेशन</strong></p>
<p>अगर आप सोचते हैं कि बिना कोचिंग के UPSC क्लियर नहीं किया जा सकता, तो इन दोनों बहनों की कहानी आपको गलत साबित कर देगी। उन्होंने अपनी स्ट्रेटजी खुद बनाई। यूट्यूब से पढ़ाई की और खुद को मोटिवेट किया।</p>
<p>आज दोनों बहनों की सफलता उन लाखों युवाओं के लिए एक सबक है जो सोचते हैं कि बिना महंगे संसाधनों के कुछ बड़ा नहीं किया जा सकता। मेहनत और लगन हो तो सफलता आपके कदम चूमेगी।</p>
<p>इनके पिता भले ही किसान हैं। लेकिन उन्होंने अपनी बेटियों को हौसला दिया कि हमेशा बड़ा सोचो और मेहनत करो। उनकी बेटियों की मेहनत रंग लाई और दोनों बहनें आज अफसर हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Dec 2025 14:35:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IPS Anshika Verma: ‘लेडी सिंघम’ के नाम से मशहूर है ये आईपीएस अफसर, बिना कोचिंग मिली सफलता</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IPS Anshika Verma: यूपीएससी हर साल सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन करता है, जिसे देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। यह परीक्षा तीन चरणों प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू में होती है। हर साल लाखों युवा IAS-IPS बनने का सपना लेकर इसमें शामिल होते हैं, लेकिन सफलता सिर्फ उन्हीं को मिलती है जो धैर्य, अनुशासन और निरंतर मेहनत के साथ लक्ष्य पर डटे रहते हैं।</p>
<p>आज हम आपको ऐसी ही एक प्रेरणादायक शख्सियत से रूबरू करा रहे हैं, जिन्होंने बिना किसी कोचिंग के अपने दूसरे ही प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर IPS अधिकारी बनने का मुकाम हासिल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163346/ips-anshika-verma-this-ips-officer-is-famous-as-lady"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ips-anshika-verma-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>IPS Anshika Verma: यूपीएससी हर साल सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन करता है, जिसे देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। यह परीक्षा तीन चरणों प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू में होती है। हर साल लाखों युवा IAS-IPS बनने का सपना लेकर इसमें शामिल होते हैं, लेकिन सफलता सिर्फ उन्हीं को मिलती है जो धैर्य, अनुशासन और निरंतर मेहनत के साथ लक्ष्य पर डटे रहते हैं।</p>
<p>आज हम आपको ऐसी ही एक प्रेरणादायक शख्सियत से रूबरू करा रहे हैं, जिन्होंने बिना किसी कोचिंग के अपने दूसरे ही प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर IPS अधिकारी बनने का मुकाम हासिल किया।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/20_04_2023-ips_success_23390446-(1).jpg" alt="20_04_2023-ips_success_23390446 (1)" width="1200" height="675"></img></p>
<h3><strong>‘लेडी सिंघम’ के नाम से मशहूर</strong></h3>
<p>हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित और बेहद खूबसूरत IPS अधिकारी अंशिका वर्मा की। अंशिका वर्मा सिर्फ अपनी खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि अपने सख्त फैसलों और दमदार पुलिसिंग के लिए भी जानी जाती हैं। उत्तर प्रदेश में उनके काम करने के तरीके से अपराधियों में खौफ देखा जाता है। यही वजह है कि लोग उन्हें प्यार से ‘लेडी सिंघम’ भी कहते हैं।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/ipsofficer-1716570976.jpg" alt="ipsofficer-1716570976" width="1200" height="675"></img></p>
<p>IPS अंशिका वर्मा द्वारा किए गए कार्यों पर एक किताब भी लिखी जा चुकी है, जिसका विमोचन दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने किया था। इसके साथ ही उन्हें ‘वुमेन आइकन अवार्ड’ से भी सम्मानित किया जा चुका है।</p>
<h3><strong>परिवार के सहयोग से मिली सफलता</strong></h3>
<p>अंशिका वर्मा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले की रहने वाली हैं। उनके पिता उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। अंशिका बताती हैं कि उनके परिवार ने हर कदम पर उनका साथ दिया, जिसकी बदौलत उन्होंने UPSC जैसी कठिन परीक्षा देने का साहस किया और उसमें सफलता भी हासिल की।</p>
<h3><strong>इंजीनियरिंग से IPS तक का सफर</strong></h3>
<p>अंशिका ने अपनी स्कूली शिक्षा नोएडा से पूरी की। इसके बाद उन्होंने गलगोटिया यूनिवर्सिटी, नोएडा से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में B.Tech की डिग्री हासिल की। साल 2018 में ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा देने का फैसला किया और तैयारी के लिए प्रयागराज चली गईं।</p>
<p>खास बात यह रही कि अंशिका ने UPSC की तैयारी के लिए किसी भी कोचिंग का सहारा नहीं लिया। उन्होंने पूरी तरह सेल्फ स्टडी पर भरोसा किया और नियमित अध्ययन के दम पर तैयारी शुरू की।</p>
<h3><strong>दूसरे प्रयास में हासिल की सफलता</strong></h3>
<p>साल 2019 में अंशिका वर्मा ने UPSC का पहला प्रयास दिया, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। हालांकि, उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी कमियों का विश्लेषण किया और दोबारा पूरे मनोयोग से तैयारी शुरू की। उनकी मेहनत रंग लाई और दूसरे प्रयास में ही उन्होंने UPSC परीक्षा क्रैक कर ली। उन्होंने ऑल इंडिया 136वीं रैंक हासिल की और उत्तर प्रदेश कैडर की IPS अधिकारी बनीं।</p>
<h3><strong>सोशल मीडिया पर भी हैं काफी फेमस</strong></h3>
<p>इंजीनियर से IPS बनीं अंशिका वर्मा सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहती हैं। इंस्टाग्राम पर उन्हें लगभग 6.12 लाख लोग फॉलो करते हैं। वह अक्सर युवाओं को मोटिवेशनल संदेश देती हैं और अपने अनुभव साझा करती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Dec 2025 20:57:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IPS Navjot Simi: 'ब्यूटी विद ब्रेन' की बेहतरीन मिसाल है ये IPS अफसर, दूसरे प्रयास में मिली सफलता </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IPS Navjot Simi: सपनों को हकीकत में बदलने की कहानी जब लिखी जाती है, तो उसमें संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की स्याही जरूर होती है। 2018 बैच की आईपीएस अधिकारी नवजोत सिमी (Navjot Simi) की सफलता की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।</p>
<p>उन्होंने कभी अवसरों से मुंह नहीं मोड़ा और न ही असफलता से हार मानी। एक डेंटिस्ट के रूप में करियर शुरू करने के बाद उन्होंने सिविल सर्विसेज परीक्षा की राह चुनी और दूसरे ही प्रयास में यूपीएससी (UPSC) पास कर आईपीएस अधिकारी बन गईं।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/8.jpg" alt="8" width="1080" height="1080" /></p>
<h3><strong>डेंटिस्ट से शुरू हुआ करियर</strong></h3>
<p>नवजोत सिमी का जन्म पंजाब के गुरदासपुर जिले</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162907/ips-navjot-simi-this-ips-officer-is-a-great-example"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ips-navjot-simi-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>IPS Navjot Simi: सपनों को हकीकत में बदलने की कहानी जब लिखी जाती है, तो उसमें संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की स्याही जरूर होती है। 2018 बैच की आईपीएस अधिकारी नवजोत सिमी (Navjot Simi) की सफलता की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।</p>
<p>उन्होंने कभी अवसरों से मुंह नहीं मोड़ा और न ही असफलता से हार मानी। एक डेंटिस्ट के रूप में करियर शुरू करने के बाद उन्होंने सिविल सर्विसेज परीक्षा की राह चुनी और दूसरे ही प्रयास में यूपीएससी (UPSC) पास कर आईपीएस अधिकारी बन गईं।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/8.jpg" alt="8" width="1080" height="1080"></img></p>
<h3><strong>डेंटिस्ट से शुरू हुआ करियर</strong></h3>
<p>नवजोत सिमी का जन्म पंजाब के गुरदासपुर जिले में हुआ। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा मॉडल पब्लिक स्कूल, गुरदासपुर से पूरी की और आगे की पढ़ाई लुधियाना के बाबा जसवंत सिंह डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर से की। उन्होंने बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (BDS) की डिग्री हासिल की और एक दंत चिकित्सक के रूप में काम करना शुरू किया।</p>
<h3><strong>सिविल सेवा की ओर बढ़ाया कदम</strong></h3>
<p>डेंटिस्ट के रूप में करियर स्थापित करने के बावजूद नवजोत ने यहीं रुकने का फैसला नहीं किया। वे हमेशा खुद को नई चुनौतियों के लिए तैयार रखती थीं। उन्होंने यूपीएससी परीक्षा देने का निश्चय किया और काम के साथ-साथ तैयारी शुरू की।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/877603-navjot-simi-0.jpg" alt="877603-navjot-simi-0" width="600" height="315"></img></p>
<h3><strong>असफलता से नहीं टूटी हिम्मत</strong></h3>
<p>नवजोत सिमी ने 2016 में पहली बार UPSC सिविल सेवा परीक्षा दी, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। पर उन्होंने असफलता को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने अपनी कमियों पर काम किया और अगले वर्ष फिर परीक्षा दी। 2017 में अपने दूसरे ही प्रयास में उन्होंने 735वीं रैंक हासिल की और आईपीएस के रूप में चयनित हुईं।</p>
<h3><strong>बिहार कैडर मिला, पटना में शुरू हुआ सफर</strong></h3>
<p>नवजोत सिमी को बिहार कैडर मिला और उन्होंने हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (NPA) में प्रशिक्षण पूरा किया। प्रशिक्षण के बाद उनकी पहली पोस्टिंग पटना में पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के रूप में हुई, जहां से उन्होंने अपने आईपीएस करियर की शुरुआत की।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/navjot-simi.jpg" alt="Navjot-Simi" width="1200" height="800"></img></p>
<h3><strong>वर्तमान में बेगूसराय में तैनात</strong></h3>
<p>नवजोत सिमी को हाल ही में बिहार सैन्य पुलिस (BMP)-8, बेगूसराय में कमांडेंट के रूप में नियुक्त किया गया है। उनकी कार्यशैली और सादगी के चलते वे बिहार पुलिस में एक प्रेरणादायक चेहरा बन चुकी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Dec 2025 15:00:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: 33 बार फेल, फिर भी नहीं मानी हार: हिंदी मीडियम से पढ़े आदित्य कुमार बने IPS अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: जीवन में संघर्ष और असफलताएं अक्सर हमें कमजोर बना देती हैं, लेकिन कुछ लोग इन्हीं असफलताओं को सीढ़ी बनाकर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंच जाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है आदित्य कुमार की, जो 33 बार परीक्षा में फेल होने के बावजूद UPSC पास करके IPS अफसर बने।</p>
<p>आदित्य राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के अजीतपुरा गांव के रहने वाले हैं। वे हिंदी मीडियम से पढ़े हुए हैं और एक साधारण ग्रामीण परिवेश से आते हैं। लेकिन उन्होंने बचपन से ही तय कर लिया था कि UPSC परीक्षा पास करनी है।</p>
<p>12वीं के बाद उन्होंने विभिन्न सरकारी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162830/success-story-failed-33-times-but-still-did-not-accept"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/news-2025-06-23t122040.787-780x470.webp" alt=""></a><br /><p>Success Story: जीवन में संघर्ष और असफलताएं अक्सर हमें कमजोर बना देती हैं, लेकिन कुछ लोग इन्हीं असफलताओं को सीढ़ी बनाकर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंच जाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है आदित्य कुमार की, जो 33 बार परीक्षा में फेल होने के बावजूद UPSC पास करके IPS अफसर बने।</p>
<p>आदित्य राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के अजीतपुरा गांव के रहने वाले हैं। वे हिंदी मीडियम से पढ़े हुए हैं और एक साधारण ग्रामीण परिवेश से आते हैं। लेकिन उन्होंने बचपन से ही तय कर लिया था कि UPSC परीक्षा पास करनी है।</p>
<p>12वीं के बाद उन्होंने विभिन्न सरकारी नौकरी परीक्षाओं में हाथ आजमाना शुरू किया। वे 30 बार विभिन्न परीक्षाओं जैसे बैंक, KVS, इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में फेल हुए। इसके बाद उन्होंने UPSC की परीक्षा देने का फैसला किया और यहां भी तीन बार असफलता का सामना किया। कुल मिलाकर वे 33 बार असफल हुए, लेकिन कभी भी अपने लक्ष्य से भटके नहीं।</p>
<p>वर्ष 2013 में आदित्य ने अपने गांव को छोड़कर दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी शुरू की। 2014 में पहले अटेम्प्ट में  प्रीलिम्स भी पास नहीं हुआ। 2015 में दूसरा प्रयास  में प्रीलिम्स और मेंस तो पास हुए, लेकिन इंटरव्यू में ओवरकॉन्फिडेंस के चलते फेल हो गए।</p>
<p>2016 में तीसरा प्रयास में एक बार फिर असफलता हाथ लगी। लेकिन 2017 में चौथे प्रयास में उन्होंने सफलता हासिल की और 630वीं रैंक के साथ यूपीएससी पास किया।</p>
<p>2018 के UPSC रिजल्ट में 630वीं रैंक के साथ IPS कैडर मिला। आज आदित्य कुमार पंजाब के संगरूर जिले में एएसपी (असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस) के पद पर तैनात हैं। आदित्य के माता-पिता दोनों शिक्षक हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Dec 2025 18:43:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UPSC Success Story: किसान की बेटियों ने मेहनत और जज्बे से रचा इतिहास, एक बनी IAS तो दूसरी बनी IPS</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>UPSC Success Story:</strong> वो कहते हैं ना जब हौसलों में जान होती है, तो राह में आने वाली मुसीबतें भी घुटने टेक देती हैं। ऐसा ही कारनामा तमिलनाडु के कडलुर जिले की 2 बहनों ने कर दिखाया। इन दोनों बहनों का नाम है ईश्वर्या रामनाथन और सुष्मिता रामनाथन।</p>
<p>दोनों बहनों ने अपनी मेहनत के दम पर यूपीएससी (UPSC) जैसी कठिन परीक्षा को न केवल क्लियर किया, बल्कि एक मिसाल भी पेश की। ये दोनों बहनें किसान परिवार से आती हैं, लेकिन उन्होंने कभी संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।</p>
<p><strong>एक बनीं IAS तो दूसरी IPS</strong></p>
<p>सुष्मिता रामनाथन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162120/upsc-success-story-farmers-daughters-created-history-with-hard-work"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/success-story-(15).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>UPSC Success Story:</strong> वो कहते हैं ना जब हौसलों में जान होती है, तो राह में आने वाली मुसीबतें भी घुटने टेक देती हैं। ऐसा ही कारनामा तमिलनाडु के कडलुर जिले की 2 बहनों ने कर दिखाया। इन दोनों बहनों का नाम है ईश्वर्या रामनाथन और सुष्मिता रामनाथन।</p>
<p>दोनों बहनों ने अपनी मेहनत के दम पर यूपीएससी (UPSC) जैसी कठिन परीक्षा को न केवल क्लियर किया, बल्कि एक मिसाल भी पेश की। ये दोनों बहनें किसान परिवार से आती हैं, लेकिन उन्होंने कभी संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।</p>
<p><strong>एक बनीं IAS तो दूसरी IPS</strong></p>
<p>सुष्मिता रामनाथन का सफर आसान नहीं था। 2022 में उन्होंने अपने छठे प्रयास में UPSC क्लियर किया और 528वीं रैंक हासिल की। लेकिन यह सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। 5 बार फेल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।</p>
<p>कई बार ऐसा लगा कि बस अब नहीं होगा। लेकिन उन्होंने हर बार खुद को कहा कि अभी तो पार्टी शुरू हुई है और अपनी तैयारी जारी रखी। उनकी मेहनत रंग लाई और आज वे एक गर्वित IPS अफसर हैं।</p>
<p>वहीं ईश्वर्या रामनाथन जो सुष्मिता की बड़ी बहन हैं, उन्होंने भी UPSC परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में 630वीं रैंक पाई। लेकिन उन्हें और बेहतर करना था। उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और 44वीं रैंक के साथ IAS अधिकारी बन गईं।</p>
<p>22 साल की छोटी उम्र में IAS बनना कोई मजाक नहीं पोग। आज वे थुथुकुडी जिले में एडिशनल कलेक्टर के रूप में सेवा दे रही हैं। सच में यें दोनों बहनें सुपर सिस्टर्स से कम नहीं हैं।</p>
<p><strong>आसान नहीं था दोनों बहनों का सफर</strong></p>
<p>इन दोनों बहनों का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। 2004 में आई सुनामी में उनका घर उजड़ गया था। घर में आर्थिक तंगी थी, लेकिन माता-पिता ने हमेशा शिक्षा को प्राथमिकता दी।</p>
<p>मुश्किलों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। जब दूसरे लोग "Netflix and Chill" कर रहे थे तब ये बहनें "Study and Skill" कर रही थीं और नतीजा यह निकला कि दोनों बहनें आज देश की सेवा कर रही हैं।</p>
<p><strong>किसान की बेटियां बनीं इंस्पिरेशन</strong></p>
<p>अगर आप सोचते हैं कि बिना कोचिंग के UPSC क्लियर नहीं किया जा सकता, तो इन दोनों बहनों की कहानी आपको गलत साबित कर देगी। उन्होंने अपनी स्ट्रेटजी खुद बनाई। यूट्यूब से पढ़ाई की और खुद को मोटिवेट किया।</p>
<p>आज दोनों बहनों की सफलता उन लाखों युवाओं के लिए एक सबक है जो सोचते हैं कि बिना महंगे संसाधनों के कुछ बड़ा नहीं किया जा सकता। मेहनत और लगन हो तो सफलता आपके कदम चूमेगी।</p>
<p>इनके पिता भले ही किसान हैं। लेकिन उन्होंने अपनी बेटियों को हौसला दिया कि हमेशा बड़ा सोचो और मेहनत करो। उनकी बेटियों की मेहनत रंग लाई और दोनों बहनें आज अफसर हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Nov 2025 11:17:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: 33 बार फेल, फिर भी नहीं मानी हार: हिंदी मीडियम से पढ़े आदित्य कुमार बने IPS अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: जीवन में संघर्ष और असफलताएं अक्सर हमें कमजोर बना देती हैं, लेकिन कुछ लोग इन्हीं असफलताओं को सीढ़ी बनाकर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंच जाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है आदित्य कुमार की, जो 33 बार परीक्षा में फेल होने के बावजूद UPSC पास करके IPS अफसर बने।</p>
<p>आदित्य राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के अजीतपुरा गांव के रहने वाले हैं। वे हिंदी मीडियम से पढ़े हुए हैं और एक साधारण ग्रामीण परिवेश से आते हैं। लेकिन उन्होंने बचपन से ही तय कर लिया था कि UPSC परीक्षा पास करनी है।</p>
<p>12वीं के बाद उन्होंने विभिन्न सरकारी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161615/success-story-failed-33-times-but-still-did-not-accept"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/news-2025-06-23t122040.787-780x470.webp" alt=""></a><br /><p>Success Story: जीवन में संघर्ष और असफलताएं अक्सर हमें कमजोर बना देती हैं, लेकिन कुछ लोग इन्हीं असफलताओं को सीढ़ी बनाकर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंच जाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है आदित्य कुमार की, जो 33 बार परीक्षा में फेल होने के बावजूद UPSC पास करके IPS अफसर बने।</p>
<p>आदित्य राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के अजीतपुरा गांव के रहने वाले हैं। वे हिंदी मीडियम से पढ़े हुए हैं और एक साधारण ग्रामीण परिवेश से आते हैं। लेकिन उन्होंने बचपन से ही तय कर लिया था कि UPSC परीक्षा पास करनी है।</p>
<p>12वीं के बाद उन्होंने विभिन्न सरकारी नौकरी परीक्षाओं में हाथ आजमाना शुरू किया। वे 30 बार विभिन्न परीक्षाओं जैसे बैंक, KVS, इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में फेल हुए। इसके बाद उन्होंने UPSC की परीक्षा देने का फैसला किया और यहां भी तीन बार असफलता का सामना किया। कुल मिलाकर वे 33 बार असफल हुए, लेकिन कभी भी अपने लक्ष्य से भटके नहीं।</p>
<p>वर्ष 2013 में आदित्य ने अपने गांव को छोड़कर दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी शुरू की। 2014 में पहले अटेम्प्ट में  प्रीलिम्स भी पास नहीं हुआ। 2015 में दूसरा प्रयास  में प्रीलिम्स और मेंस तो पास हुए, लेकिन इंटरव्यू में ओवरकॉन्फिडेंस के चलते फेल हो गए।</p>
<p>2016 में तीसरा प्रयास में एक बार फिर असफलता हाथ लगी। लेकिन 2017 में चौथे प्रयास में उन्होंने सफलता हासिल की और 630वीं रैंक के साथ यूपीएससी पास किया।</p>
<p>2018 के UPSC रिजल्ट में 630वीं रैंक के साथ IPS कैडर मिला। आज आदित्य कुमार पंजाब के संगरूर जिले में एएसपी (असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस) के पद पर तैनात हैं। आदित्य के माता-पिता दोनों शिक्षक हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Nov 2025 11:20:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: 33 बार फेल, फिर भी नहीं मानी हार: हिंदी मीडियम से पढ़े आदित्य कुमार बने IPS अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: जीवन में संघर्ष और असफलताएं अक्सर हमें कमजोर बना देती हैं, लेकिन कुछ लोग इन्हीं असफलताओं को सीढ़ी बनाकर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंच जाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है आदित्य कुमार की, जो 33 बार परीक्षा में फेल होने के बावजूद UPSC पास करके IPS अफसर बने।</p>
<p>आदित्य राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के अजीतपुरा गांव के रहने वाले हैं। वे हिंदी मीडियम से पढ़े हुए हैं और एक साधारण ग्रामीण परिवेश से आते हैं। लेकिन उन्होंने बचपन से ही तय कर लिया था कि UPSC परीक्षा पास करनी है।</p>
<p>12वीं के बाद उन्होंने विभिन्न सरकारी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161243/success-story-failed-33-times-but-still-did-not-accept"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/news-2025-06-23t122040.787-780x470.webp" alt=""></a><br /><p>Success Story: जीवन में संघर्ष और असफलताएं अक्सर हमें कमजोर बना देती हैं, लेकिन कुछ लोग इन्हीं असफलताओं को सीढ़ी बनाकर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंच जाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है आदित्य कुमार की, जो 33 बार परीक्षा में फेल होने के बावजूद UPSC पास करके IPS अफसर बने।</p>
<p>आदित्य राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के अजीतपुरा गांव के रहने वाले हैं। वे हिंदी मीडियम से पढ़े हुए हैं और एक साधारण ग्रामीण परिवेश से आते हैं। लेकिन उन्होंने बचपन से ही तय कर लिया था कि UPSC परीक्षा पास करनी है।</p>
<p>12वीं के बाद उन्होंने विभिन्न सरकारी नौकरी परीक्षाओं में हाथ आजमाना शुरू किया। वे 30 बार विभिन्न परीक्षाओं जैसे बैंक, KVS, इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में फेल हुए। इसके बाद उन्होंने UPSC की परीक्षा देने का फैसला किया और यहां भी तीन बार असफलता का सामना किया। कुल मिलाकर वे 33 बार असफल हुए, लेकिन कभी भी अपने लक्ष्य से भटके नहीं।</p>
<p>वर्ष 2013 में आदित्य ने अपने गांव को छोड़कर दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी शुरू की। 2014 में पहले अटेम्प्ट में  प्रीलिम्स भी पास नहीं हुआ। 2015 में दूसरा प्रयास  में प्रीलिम्स और मेंस तो पास हुए, लेकिन इंटरव्यू में ओवरकॉन्फिडेंस के चलते फेल हो गए।</p>
<p>2016 में तीसरा प्रयास में एक बार फिर असफलता हाथ लगी। लेकिन 2017 में चौथे प्रयास में उन्होंने सफलता हासिल की और 630वीं रैंक के साथ यूपीएससी पास किया।</p>
<p>2018 के UPSC रिजल्ट में 630वीं रैंक के साथ IPS कैडर मिला। आज आदित्य कुमार पंजाब के संगरूर जिले में एएसपी (असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस) के पद पर तैनात हैं। आदित्य के माता-पिता दोनों शिक्षक हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
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                <pubDate>Sat, 22 Nov 2025 14:46:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Success Story: बेहद खूबसूरत है ये IPS अफसर, फिल्मों में भी कर चुकी काम </title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: मनोरंजन की दुनिया में ग्लैमर और स्टारडम को आमतौर पर सफलता का पैमाना माना जाता है, लेकिन कुछ चेहरे ऐसे भी हैं जो कैमरे के सामने ही नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे भी अपनी अलग पहचान बनाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक शख्सियत हैं सिमाला प्रसाद — जो एक तरफ देश की सेवा में समर्पित एक ईमानदार भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं और दूसरी ओर एक प्रतिभाशाली अभिनेत्री भी है।</p>
<p>जहां फिल्मी दुनिया की कई एक्ट्रेस पर्दे पर पुलिस के किरदार में नजर आने के लिए ट्रेनिंग लेती हैं, वहीं सिमाला असल जिंदगी में एक पुलिस अधीक्षक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/160668/success-story-this-ips-officer-is-very-beautiful-and-has"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/ed495d853105b232abc01384338da33c.webp" alt=""></a><br /><p>Success Story: मनोरंजन की दुनिया में ग्लैमर और स्टारडम को आमतौर पर सफलता का पैमाना माना जाता है, लेकिन कुछ चेहरे ऐसे भी हैं जो कैमरे के सामने ही नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे भी अपनी अलग पहचान बनाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक शख्सियत हैं सिमाला प्रसाद — जो एक तरफ देश की सेवा में समर्पित एक ईमानदार भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं और दूसरी ओर एक प्रतिभाशाली अभिनेत्री भी है।</p>
<p>जहां फिल्मी दुनिया की कई एक्ट्रेस पर्दे पर पुलिस के किरदार में नजर आने के लिए ट्रेनिंग लेती हैं, वहीं सिमाला असल जिंदगी में एक पुलिस अधीक्षक हैं। वे मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में तैनात हैं। सिमाला ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत साल 2016 में फिल्म ‘अलिफ’ से की थी, जिसमें उनके गंभीर और सादगी भरे अभिनय की सराहना हुई थी। इसके बाद वे 2019 में आई फिल्म ‘नक्काश’ में नजर आईं, जिसमें उन्होंने दिग्गज कलाकारों कुमुद मिश्रा, शारिब हाशमी और राजेश शर्मा के साथ स्क्रीन साझा की।</p>
<p>अब सिमाला एक बार फिर चर्चा में हैं अपनी नई फिल्म ‘द नर्मदा स्टोरी’ को लेकर, जिसमें वे एक मजबूत जांच अधिकारी की भूमिका निभा रही हैं। यह फिल्म सच्ची घटनाओं पर आधारित एक पुलिस ड्रामा थ्रिलर है। खास बात यह है कि फिल्म की शूटिंग मध्य प्रदेश में ही हुई है और इसमें पुलिस बल के असली अनुभवों को फिल्म के जरिए सामने लाया गया है। फिल्म का निर्देशन जैगम इमाम ने किया है, जो उनकी पिछली दोनों फिल्मों के भी निर्देशक रह चुके हैं।</p>
<p>भोपाल में जन्मी सिमाला का पारिवारिक बैकग्राउंड भी बेहद प्रभावशाली रहा है। उनके पिता डॉ. भागीरथ प्रसाद 1975 बैच के IAS अधिकारी रहे हैं और पूर्व सांसद भी रह चुके हैं। वहीं उनकी मां मेहरुन्निसा परवेज, एक प्रतिष्ठित साहित्यकार हैं जिन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया जा चुका है। सिमाला ने अपने प्रशासनिक करियर की शुरुआत MPPSC पास कर डीएसपी पद से की थी, और बिना किसी कोचिंग के उन्होंने पहले ही प्रयास में UPSC CSE 2010 में AIR 51 हासिल कर आईपीएस बनीं।</p>
<p>सिमाला सिर्फ प्रशासन और अभिनय में ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी सक्रिय रहती हैं। सरकारी आयोजनों में वे नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों में भाग लेकर अपनी रचनात्मकता को भी जीती हैं। उनका मानना है कि "एक इंसान को खुद को एक ही पहचान तक सीमित नहीं रखना चाहिए।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Nov 2025 20:45:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: 33 बार फेल, फिर भी नहीं मानी हार: हिंदी मीडियम से पढ़े आदित्य कुमार बने IPS अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: जीवन में संघर्ष और असफलताएं अक्सर हमें कमजोर बना देती हैं, लेकिन कुछ लोग इन्हीं असफलताओं को सीढ़ी बनाकर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंच जाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है आदित्य कुमार की, जो 33 बार परीक्षा में फेल होने के बावजूद UPSC पास करके IPS अफसर बने।</p>
<p>आदित्य राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के अजीतपुरा गांव के रहने वाले हैं। वे हिंदी मीडियम से पढ़े हुए हैं और एक साधारण ग्रामीण परिवेश से आते हैं। लेकिन उन्होंने बचपन से ही तय कर लिया था कि UPSC परीक्षा पास करनी है।</p>
<p>12वीं के बाद उन्होंने विभिन्न सरकारी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/160596/success-story-failed-33-times-but-still-did-not-accept"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/news-2025-06-23t122040.787-780x470.webp" alt=""></a><br /><p>Success Story: जीवन में संघर्ष और असफलताएं अक्सर हमें कमजोर बना देती हैं, लेकिन कुछ लोग इन्हीं असफलताओं को सीढ़ी बनाकर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंच जाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है आदित्य कुमार की, जो 33 बार परीक्षा में फेल होने के बावजूद UPSC पास करके IPS अफसर बने।</p>
<p>आदित्य राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के अजीतपुरा गांव के रहने वाले हैं। वे हिंदी मीडियम से पढ़े हुए हैं और एक साधारण ग्रामीण परिवेश से आते हैं। लेकिन उन्होंने बचपन से ही तय कर लिया था कि UPSC परीक्षा पास करनी है।</p>
<p>12वीं के बाद उन्होंने विभिन्न सरकारी नौकरी परीक्षाओं में हाथ आजमाना शुरू किया। वे 30 बार विभिन्न परीक्षाओं जैसे बैंक, KVS, इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में फेल हुए। इसके बाद उन्होंने UPSC की परीक्षा देने का फैसला किया और यहां भी तीन बार असफलता का सामना किया। कुल मिलाकर वे 33 बार असफल हुए, लेकिन कभी भी अपने लक्ष्य से भटके नहीं।</p>
<p>वर्ष 2013 में आदित्य ने अपने गांव को छोड़कर दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी शुरू की। 2014 में पहले अटेम्प्ट में  प्रीलिम्स भी पास नहीं हुआ। 2015 में दूसरा प्रयास  में प्रीलिम्स और मेंस तो पास हुए, लेकिन इंटरव्यू में ओवरकॉन्फिडेंस के चलते फेल हो गए।</p>
<p>2016 में तीसरा प्रयास में एक बार फिर असफलता हाथ लगी। लेकिन 2017 में चौथे प्रयास में उन्होंने सफलता हासिल की और 630वीं रैंक के साथ यूपीएससी पास किया।</p>
<p>2018 के UPSC रिजल्ट में 630वीं रैंक के साथ IPS कैडर मिला। आज आदित्य कुमार पंजाब के संगरूर जिले में एएसपी (असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस) के पद पर तैनात हैं। आदित्य के माता-पिता दोनों शिक्षक हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
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                <pubDate>Sun, 16 Nov 2025 21:55:50 +0530</pubDate>
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