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                <title>Success Story In Hindi - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Success Story In Hindi RSS Feed</description>
                
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                <title>IAS Success Story: यूपी की बेटी ने UPSC में रच दिया इतिहास, पहले बनीं IPS फिर बनीं IAS अफसर </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: सपने अक्सर धैर्य और लगातार मेहनत मांगते हैं। उत्तर प्रदेश के शामली जिले की रहने वाली आस्था जैन की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। सिविल सेवा की कठिन तैयारी और लगातार प्रयासों के बाद उन्होंने UPSC 2025 में शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया रैंक-9 हासिल की। खास बात यह रही कि उन्हें अपने इस रिजल्ट की खबर उस समय मिली जब वह आईपीएस अधिकारी के रूप में ट्रेनिंग कर रही थीं।</p>
<h3>व्यापारी परिवार से आती हैं आस्था</h3>
<p>आस्था जैन उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कांधला क्षेत्र की रहने वाली हैं। उनके पिता अजय जैन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172726/ias-success-story-uttar-pradeshs-daughter-created-history-in-upsc"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/success-story-(20).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: सपने अक्सर धैर्य और लगातार मेहनत मांगते हैं। उत्तर प्रदेश के शामली जिले की रहने वाली आस्था जैन की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। सिविल सेवा की कठिन तैयारी और लगातार प्रयासों के बाद उन्होंने UPSC 2025 में शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया रैंक-9 हासिल की। खास बात यह रही कि उन्हें अपने इस रिजल्ट की खबर उस समय मिली जब वह आईपीएस अधिकारी के रूप में ट्रेनिंग कर रही थीं।</p>
<h3>व्यापारी परिवार से आती हैं आस्था</h3>
<p>आस्था जैन उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कांधला क्षेत्र की रहने वाली हैं। उनके पिता अजय जैन एक छोटे व्यापारी हैं और किराना व कंफेक्शनरी की दुकान चलाते हैं। बचपन से ही आस्था पढ़ाई में तेज रही हैं और उनका सपना सिविल सेवा में जाकर समाज के लिए काम करने का था। बेटी की इस बड़ी उपलब्धि से परिवार के साथ-साथ पूरे इलाके में खुशी का माहौल है और लोग उनकी सफलता पर गर्व महसूस कर रहे हैं।</p>
<h3>दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई, वहीं से शुरू की तैयारी</h3>
<p>आस्था जैन ने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">University of Delhi</span></span> से पूरी की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी। दिल्ली में रहते हुए उन्होंने कोचिंग के साथ-साथ सेल्फ-स्टडी पर भी काफी ध्यान दिया और ऑनलाइन संसाधनों का भी इस्तेमाल किया। उनके पिता के मुताबिक आस्था शुरू से ही पढ़ाई में काफी मेधावी रही हैं और उन्होंने 12वीं बोर्ड परीक्षा में भी देशभर में चौथी रैंक हासिल की थी।</p>
<h3>पहले भी पास कर चुकी थीं UPSC, बनी थीं IPS</h3>
<p>आस्था जैन ने इससे पहले भी यूपीएससी परीक्षा पास की थी। साल 2023 में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 131 हासिल की थी, जिसके बाद उनका चयन आईपीएस के रूप में हुआ। उन्हें राजस्थान कैडर मिला और फिलहाल वह हैदराबाद में ट्रेनिंग कर रही थीं।</p>
<h3>लगातार मेहनत से हासिल की टॉप-10 रैंक</h3>
<p>हालांकि आस्था का सपना शुरू से ही IAS अधिकारी बनने का था। इसलिए उन्होंने आईपीएस बनने के बाद भी तैयारी जारी रखी। उनकी मेहनत और धैर्य का परिणाम यह रहा कि यूपीएससी 2025 के रिजल्ट में उन्होंने रैंक-9 हासिल कर अपना सपना पूरा कर लिया। उनकी इस सफलता पर परिवार, रिश्तेदारों और पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Mar 2026 15:41:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: 6 बार असफल, 7वें प्रयास में बनीं IAS: पढ़ें पल्लवी वर्मा की प्रेरक कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: एक लड़की, जिसके सपने बड़े थे, लेकिन रास्ता आसान नहीं था। जिंदगी ने उसे बार-बार परखा। मां कैंसर से जूझ रही थीं, घर में चिंता और दर्द का माहौल था। ऐसे हालात में ज्यादातर लोग टूट जाते हैं, लेकिन पल्लवी वर्मा ने दर्द को अपनी ताकत बना लिया। आंसुओं को इरादों में बदल दिया और ठान लिया कि अफसर बनकर ही रहेंगी।</p>
<h3><strong>इंदौर से शुरू हुआ सफर</strong></h3>
<p>मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली पल्लवी वर्मा ने बायोटेक्नोलॉजी में ग्रेजुएशन किया। वह अपने परिवार की पहली लड़की थीं, जो यूनिवर्सिटी तक पहुंचीं। पढ़ाई पूरी करने के बाद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171860/ias-success-story-failed-6-times-became-ias-in-7th"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/ias-success-story-(28).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: एक लड़की, जिसके सपने बड़े थे, लेकिन रास्ता आसान नहीं था। जिंदगी ने उसे बार-बार परखा। मां कैंसर से जूझ रही थीं, घर में चिंता और दर्द का माहौल था। ऐसे हालात में ज्यादातर लोग टूट जाते हैं, लेकिन पल्लवी वर्मा ने दर्द को अपनी ताकत बना लिया। आंसुओं को इरादों में बदल दिया और ठान लिया कि अफसर बनकर ही रहेंगी।</p>
<h3><strong>इंदौर से शुरू हुआ सफर</strong></h3>
<p>मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली पल्लवी वर्मा ने बायोटेक्नोलॉजी में ग्रेजुएशन किया। वह अपने परिवार की पहली लड़की थीं, जो यूनिवर्सिटी तक पहुंचीं। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने करीब 10-11 महीने चेन्नई में सॉफ्टवेयर टेस्टर के तौर पर नौकरी की। लेकिन उनका मन कुछ बड़ा करने का था। तभी उन्होंने सिविल सेवा में जाने का फैसला लिया और यूपीएससी  की परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।</p>
<h3><strong>2013 से शुरू हुई संघर्ष की कहानी</strong></h3>
<p>पल्लवी ने 2013 से खुद को पूरी तरह UPSC की तैयारी में झोंक दिया। 2013 से 2020 के बीच उन्होंने कई बार परीक्षा दी। तीन बार प्रीलिम्स में असफल रहीं, एक बार मेन्स में उम्मीद टूटी और तीन बार इंटरव्यू तक पहुंचकर भी चयन नहीं हो पाया। लगातार 6 असफलताओं ने उनका हौसला जरूर परखा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।</p>
<h3><strong>मां की बीमारी के बीच भी नहीं टूटा हौसला</strong></h3>
<p>तैयारी के दौरान उनकी मां कैंसर से जूझ रही थीं और कीमोथेरेपी से गुजर रही थीं। घर का माहौल बेहद भावनात्मक और चुनौतीपूर्ण था। अपने माता-पिता को दर्द में देखना आसान नहीं था, लेकिन पल्लवी ने खुद को संभाला। उन्होंने दर्द को कमजोरी नहीं, बल्कि प्रेरणा बनाया। माता-पिता ने भी उनकी लगन देखकर पूरा समर्थन दिया।</p>
<h3><strong>बदली रणनीति और मिली सफलता</strong></h3>
<p>बार-बार की असफलताओं के बाद पल्लवी ने 2020 में अपनी रणनीति बदली। टाइम-टेबल बनाकर नियमित रूप से लाइब्रेरी में पढ़ाई शुरू की। अपनी कमजोरियों को पहचाना और खास तौर पर आंसर राइटिंग पर ध्यान दिया। मेहनत रंग लाई और 7वें प्रयास में उन्होंने 340वीं रैंक हासिल की। इसके साथ ही उनका IAS बनने का सपना पूरा हो गया।</p>
<h3><strong>उम्मीदवारों के लिए पल्लवी की सलाह</strong></h3>
<p>पल्लवी का मानना है कि हालात चाहे जैसे भी हों, आगे बढ़ना नहीं छोड़ना चाहिए। तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को वह नियमित प्रैक्टिस, आंसर राइटिंग और आत्मविश्लेषण की सलाह देती हैं। उनका कहना है कि अपनी कमजोरियों को पहचानकर सुधार करना ही सफलता की असली कुंजी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 13:02:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: चार बार फेल होने के बावजूद नहीं मानी हार, पांचवें प्रयास में काजल जावला बनीं आईएएस अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती। यह पंक्तियां मेरठ की बेटी काजल जावला की जिंदगी पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। चार बार असफल होने के बाद भी उन्होंने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा। 9 घंटे की नौकरी, रोज़ का लंबा सफर, पारिवारिक जिम्मेदारियां—इन सबके बीच उन्होंने अपने सपने को जिंदा रखा। आखिरकार पांचवें प्रयास में उन्होंने UPSC परीक्षा पास कर IAS बनने का सपना पूरा किया और 23 लाख रुपये सालाना की नौकरी छोड़ दी।</p>
<p><strong>मेरठ से शुरू हुआ सफर, डॉक्टर बनने का था सपना</strong></p>
<p>काजल मूल रूप</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171455/ias-success-story-despite-failing-four-times-did-not-accept"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/ias-success-story-(27).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती। यह पंक्तियां मेरठ की बेटी काजल जावला की जिंदगी पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। चार बार असफल होने के बाद भी उन्होंने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा। 9 घंटे की नौकरी, रोज़ का लंबा सफर, पारिवारिक जिम्मेदारियां—इन सबके बीच उन्होंने अपने सपने को जिंदा रखा। आखिरकार पांचवें प्रयास में उन्होंने UPSC परीक्षा पास कर IAS बनने का सपना पूरा किया और 23 लाख रुपये सालाना की नौकरी छोड़ दी।</p>
<p><strong>मेरठ से शुरू हुआ सफर, डॉक्टर बनने का था सपना</strong></p>
<p>काजल मूल रूप से Meerut की रहने वाली हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई मेरठ से ही पूरी की। बचपन में उनका सपना डॉक्टर बनने का था, लेकिन आसपास के लोग उन्हें सिविल सर्विस में जाने की सलाह देते थे। उस समय उन्हें सिविल सेवा के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी।</p>
<p>साल 2010 में वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए मुथरा (मथुरा) चली गईं और वहां से बीटेक की डिग्री हासिल की।</p>
<p><strong>नौकरी के साथ UPSC की तैयारी</strong></p>
<p>बीटेक के बाद उन्हें एक अच्छी कंपनी में आकर्षक पैकेज पर नौकरी मिल गई। हालांकि, उनके पिता चाहते थे कि उनकी बेटी सिविल सर्विस में जाए और देश की सेवा करे। पिता के सपने को अपना लक्ष्य बनाते हुए काजल ने 2014 से गंभीरता से UPSC की तैयारी शुरू की।</p>
<p>दिल्ली से Gurugram तक रोजाना ऑफिस आना-जाना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। लगभग 2 घंटे का सफर वह कैब में तय करती थीं और इसी समय का इस्तेमाल पढ़ाई के लिए करती थीं। 9 घंटे की नौकरी के बाद भी उन्होंने अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा।</p>
<p><strong>शादी के बाद भी नहीं टूटा हौसला</strong></p>
<p>नौकरी के दौरान ही उनकी शादी हो गई, लेकिन उनके पति और पिता ने उन्हें लगातार प्रोत्साहित किया। वीकेंड पर वह ज्यादा समय पढ़ाई को देती थीं। परिवार के सहयोग ने उनके आत्मविश्वास को मजबूत बनाए रखा।</p>
<p><strong>चार असफलताएं, फिर भी नहीं मानी हार</strong></p>
<p>काजल ने 2012 में पहला प्रयास किया। इसके बाद 2014, 2016 और 2017 में भी उन्हें असफलता मिली। चार बार असफल होने के बाद कई लोग हार मान लेते हैं, लेकिन उन्होंने नहीं। हर असफलता से सीख लेकर अपनी रणनीति मजबूत की और तैयारी को और धार दी।</p>
<p><strong>पांचवें प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 28</strong></p>
<p>साल 2018 में पांचवें प्रयास में उन्होंने UPSC परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 28 हासिल की। उस समय उनकी सालाना सैलरी करीब 23 लाख रुपये थी, लेकिन IAS बनने के लिए उन्होंने बिना झिझक वह नौकरी छोड़ दी।</p>
<p>आज वह Indian Administrative Service की अधिकारी हैं और मध्य प्रदेश कैडर में सेवाएं दे रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 13:06:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: 9 घंटे की नौकरी के बाद की UPSC तैयारी, श्वेता भारती अपनी मेहनत से बनीं IAS अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: दिनभर की नौकरी के बाद घर लौटने पर अक्सर लोगों में किसी दूसरी गतिविधि के लिए ऊर्जा नहीं बचती। लेकिन जो लोग अपनी किस्मत बदलने का इरादा कर लेते हैं, उनके लिए मेहनत ही सबसे बड़ा हथियार बन जाती है। यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा के लिए जहां 10 से 12 घंटे पढ़ाई को आदर्श माना जाता है, वहीं श्वेता भारती ने 9 घंटे की नौकरी के साथ तैयारी कर यह परीक्षा पास कर मिसाल कायम की।</p>
<h2><strong>ऑफिस के बाद पढ़ाई करना नहीं था आसान</strong></h2>
<p>ऑफिस का काम, रोजाना का सफर, घर की जिम्मेदारियां और निजी जीवन—इन सबके</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165394/ias-success-story-upsc-preparation-after-9-hours-of-job"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-shweta-bharti-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: दिनभर की नौकरी के बाद घर लौटने पर अक्सर लोगों में किसी दूसरी गतिविधि के लिए ऊर्जा नहीं बचती। लेकिन जो लोग अपनी किस्मत बदलने का इरादा कर लेते हैं, उनके लिए मेहनत ही सबसे बड़ा हथियार बन जाती है। यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा के लिए जहां 10 से 12 घंटे पढ़ाई को आदर्श माना जाता है, वहीं श्वेता भारती ने 9 घंटे की नौकरी के साथ तैयारी कर यह परीक्षा पास कर मिसाल कायम की।</p>
<h2><strong>ऑफिस के बाद पढ़ाई करना नहीं था आसान</strong></h2>
<p>ऑफिस का काम, रोजाना का सफर, घर की जिम्मेदारियां और निजी जीवन—इन सबके बीच यूपीएससी की तैयारी करना आसान नहीं था। बावजूद इसके श्वेता भारती ने इस चुनौती को स्वीकार किया और वह कर दिखाया, जिसके बारे में कई लोग केवल सोचकर ही रह जाते हैं। उनकी यह सफलता कहानी आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।</p>
<h2><strong>बिहार के नालंदा से शुरू हुआ सफर</strong></h2>
<p>श्वेता भारती बिहार के नालंदा जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पटना से पूरी की और इसके बाद भागलपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने आईटी कंपनी विप्रो में नौकरी शुरू की, जहां काम करते हुए उनके मन में यूपीएससी की तैयारी करने की इच्छा जागी।</p>
<h2><strong>जिम्मेदारियों के कारण नहीं छोड़ पाईं नौकरी</strong></h2>
<p>परिवार की जिम्मेदारियों के चलते श्वेता के लिए नौकरी छोड़ना संभव नहीं था। ऐसे में उन्होंने नौकरी के साथ ही यूपीएससी की तैयारी करने का फैसला किया। दिन में ऑफिस का काम और शाम से देर रात तक पढ़ाई—यही उनका रोज का रूटीन बन गया। ध्यान भटकने से बचने के लिए उन्होंने सोशल मीडिया से भी दूरी बना ली।</p>
<h2><strong>पहले BPSC, फिर UPSC में मिली सफलता</strong></h2>
<p>यूपीएससी से पहले श्वेता ने बीपीएससी परीक्षा भी दी, जिसमें उन्हें सफलता मिली। 65वीं बीपीएससी परीक्षा में उन्होंने 65वीं रैंक हासिल कर डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम ऑफिसर का पद प्राप्त किया। इसके बावजूद उन्होंने अपनी यूपीएससी की तैयारी जारी रखी और आखिरकार साल 2021 में यूपीएससी परीक्षा पास कर 356वीं रैंक हासिल की।</p>
<h2><strong>वर्तमान में असिस्टेंट कलेक्टर के पद पर तैनात</strong></h2>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, श्वेता भारती फिलहाल बिहार के भागलपुर जिले में असिस्टेंट कलेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि सही रणनीति, अनुशासन और निरंतर मेहनत से नौकरी के साथ भी यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा को पास किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 10:51:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: नौकरी के साथ की UPSC की तैयारी, पढ़ें सृष्टि डबास की सक्सेस स्टोरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: कहते हैं कि जब इरादे मजबूत हों, तो सपने आंखें बंद किए बिना भी पूरे किए जा सकते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है सृष्टि डबास की, जिन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 6वीं रैंक हासिल कर अपने सपनों को सच कर दिखाया।</p>
<h3><strong>नौकरी और तैयारी का संघर्ष</strong></h3>
<p>दिल्ली की सृष्टि डबास भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में नौकरी कर रही थीं। दिन में 8-9 घंटे की नौकरी और रात में पढ़ाई के बीच संतुलन बनाए रखना आसान नहीं था। फिर भी उनका जूनून ऐसा था कि उन्होंने काम और पढ़ाई दोनों को प्राथमिकता दी। ऑफिस की लाइब्रेरी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163867/ias-success-story-prepare-for-upsc-along-with-job-read"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-srishti-dabas.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: कहते हैं कि जब इरादे मजबूत हों, तो सपने आंखें बंद किए बिना भी पूरे किए जा सकते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है सृष्टि डबास की, जिन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 6वीं रैंक हासिल कर अपने सपनों को सच कर दिखाया।</p>
<h3><strong>नौकरी और तैयारी का संघर्ष</strong></h3>
<p>दिल्ली की सृष्टि डबास भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में नौकरी कर रही थीं। दिन में 8-9 घंटे की नौकरी और रात में पढ़ाई के बीच संतुलन बनाए रखना आसान नहीं था। फिर भी उनका जूनून ऐसा था कि उन्होंने काम और पढ़ाई दोनों को प्राथमिकता दी। ऑफिस की लाइब्रेरी में लंच टाइम का इस्तेमाल पढ़ाई के लिए किया, और छुट्टी वाले दिन भी तैयारी जारी रखी।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/4007709-srishti-dabas-8.jpg" alt="4007709-srishti-dabas-8" width="659" height="494"></img></p>
<h3><strong>शिक्षा और तैयारी की पृष्ठभूमि</strong></h3>
<p>सृष्टि ने 12वीं के बाद दिल्ली के इंदिरा ट्रस्ट कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद IGNOU से मास्टर डिग्री हासिल की। नौकरी और पढ़ाई के अनुभव के बीच, उनका असली लक्ष्य आईएएस बनना था। सामाजिक न्याय मंत्रालय में काम का अनुभव भी रहा, लेकिन उनका ध्यान केवल यूपीएससी की तैयारी पर था।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/3525697-untitled-design-2024-12-20t063252.912.jpg" alt="3525697-untitled-design-2024-12-20t063252.912" width="1200" height="900"></img></p>
<h3><strong>पहले प्रयास में सफलता</strong></h3>
<p>कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास के साथ, सृष्टि ने 2023 में पहली बार यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया रैंकिंग 6 हासिल की। इस सफलता ने न केवल उनके सपने पूरे किए, बल्कि उनकी मां का सिर भी गर्व से ऊंचा कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 14:42:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: 10 से 15 घंटे की सेल्फ-स्टडी, बिना कोचिंग वंदना मीणा बनीं IAS अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (</span><span class="cf1">UPSC) </span><span class="cf0">सिविल सर्विस एग्जाम को देश का सबसे कठिन परीक्षा माना जाता है। इसे क्लियर करने के लिए ज्यादातर अभ्यर्थी महंगी कोचिंग और स्टडी मैटेरियल का सहारा लेते हैं, लेकिन वंदना मीणा ने साबित कर दिया कि सफलता पाने के लिए महंगी तैयारी नहीं, बल्कि सही दिशा और मजबूत इरादे सबसे बड़ा आधार होते हैं। उन्होंने रोजाना 10 से 15 घंटे की सेल्फ-स्टडी के दम पर </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">को क्लियर किया और अपनी मेहनत व फोकस से दूसरों के लिए मिसाल बन गईं।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">छोटे से गांव से निकलकर बड़ा सपना पूरा किया</span></strong></p>
<p><span class="cf0">वंदना</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162563/ias-success-story-10-to-15-hours-of-self-study-without"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-vandana-meena.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (</span><span class="cf1">UPSC) </span><span class="cf0">सिविल सर्विस एग्जाम को देश का सबसे कठिन परीक्षा माना जाता है। इसे क्लियर करने के लिए ज्यादातर अभ्यर्थी महंगी कोचिंग और स्टडी मैटेरियल का सहारा लेते हैं, लेकिन वंदना मीणा ने साबित कर दिया कि सफलता पाने के लिए महंगी तैयारी नहीं, बल्कि सही दिशा और मजबूत इरादे सबसे बड़ा आधार होते हैं। उन्होंने रोजाना 10 से 15 घंटे की सेल्फ-स्टडी के दम पर </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">को क्लियर किया और अपनी मेहनत व फोकस से दूसरों के लिए मिसाल बन गईं।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">छोटे से गांव से निकलकर बड़ा सपना पूरा किया</span></strong></p>
<p><span class="cf0">वंदना राजस्थान के टोकसी गांव की रहने वाली हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उनके माता-पिता ने हमेशा यह सुनिश्चित किया कि बेटी की पढ़ाई में कोई कमी न आए। बेहतर अवसरों की तलाश में पूरा परिवार दिल्ली आ गया। उनके पिता पृथ्वीराज मीणा दिल्ली पुलिस में अधिकारी हैं, जबकि उनकी मां संपति देवी गृहणी हैं। वंदना बताती हैं कि परिवार ने न सिर्फ उनका साथ दिया, बल्कि हर कदम पर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।</span></p>
<p><span class="cf0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/success-story-of-vandana-meena.jpg" alt="success-story-of-vandana-meena" width="700" height="394"></img></span></p>
<p><strong><span class="cf0">दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन</span></strong></p>
<p><span class="cf0">वंदना ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गंगापुर सिटी के ज्ञान रश्मि सीनियर सेकेंडरी स्कूल से की। अच्छे प्रदर्शन के चलते उन्हें दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट कोलंबा स्कूल में एडमिशन मिला। इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के आचार्य नरेंद्र देव कॉलेज से मैथमेटिक्स ऑनर्स में ग्रेजुएशन पूरा किया। पढ़ाई के दौरान ही उनके मन में सिविल सर्विस में जाने का सपना मजबूत हुआ, और यही सपना उन्हें </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">की तैयारी की ओर ले गया।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">AIR 331 </span><span class="cf0">हासिल कर बनीं </span><span class="cf1">IAS</span></strong></p>
<p><span class="cf0">साल 2021 में वंदना की मेहनत रंग लाई और उन्होंने </span><span class="cf1">UPSC CSE </span><span class="cf0">में ऑल इंडिया रैंक 331 हासिल की। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">बनने का सपना पूरा किया। रिज़ल्ट आने के बाद वंदना अपने स्कूल और गांव भी गईं, जहां उन्हें भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बताया गया। उनकी इस सफलता से न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे गांव और शिक्षकों को गर्व महसूस हुआ।</span></p>
<p><span class="cf0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/success-story-of-ias-vandana-meena.jpg" alt="success-story-of-ias-vandana-meena" width="700" height="394"></img></span></p>
<p><strong><span class="cf0">सेल्फ-स्टडी थी उनकी असली ताकत</span></strong></p>
<p><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">की तैयारी के लिए वंदना ने कोचिंग पर निर्भर रहने के बजाय पूरी तरह से सेल्फ-स्टडी को प्राथमिकता दी। पीक तैयारी के दौरान वह रोजाना 10 से 15 घंटे पढ़ाई करती थीं। उनका कहना है कि इस एग्जाम में निरंतरता, फोकस और सही स्ट्रैटेजी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके अनुशासन और मेहनत ने उन्हें सफलता के उस मुकाम तक पहुंचाया, जिसकी इच्छा हजारों अभ्यर्थी रखते हैं।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/162563/ias-success-story-10-to-15-hours-of-self-study-without</link>
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                <pubDate>Fri, 05 Dec 2025 10:57:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IPS Pooja Yadav: बेहद खूबसूरत है ये महिला IPS अफसर, विदेश से नौकरी छोड़कर की UPSC की तैयारी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IPS Pooja Yadav: भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में शुमार UPSC (सिविल सेवा परीक्षा) केवल पढ़ाई में तेज होने से पास नहीं होती, इसके लिए लगन और असफलताओं से लड़ने की जिद भी जरूरी होती है। आईपीएस अधिकारी पूजा यादव की कहानी इसी का एक शानदार उदाहरण है।</p>
<h3><strong>विदेशों में करियर, लेकिन दिल था देश में</strong></h3>
<p>पूजा यादव का जन्म 20 सितंबर, 1988 को हरियाणा में हुआ था। उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और मास्टर्स भी किया। करियर को ऊंचाई देने के लिए पूजा जर्मनी और कनाडा चली गईं, जहां उन्होंने कुछ वर्षों तक नौकरी भी की। लेकिन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/159930/ips-pooja-yadav-this-female-ips-officer-is-very-beautiful"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/ips-pooja-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p>IPS Pooja Yadav: भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में शुमार UPSC (सिविल सेवा परीक्षा) केवल पढ़ाई में तेज होने से पास नहीं होती, इसके लिए लगन और असफलताओं से लड़ने की जिद भी जरूरी होती है। आईपीएस अधिकारी पूजा यादव की कहानी इसी का एक शानदार उदाहरण है।</p>
<h3><strong>विदेशों में करियर, लेकिन दिल था देश में</strong></h3>
<p>पूजा यादव का जन्म 20 सितंबर, 1988 को हरियाणा में हुआ था। उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और मास्टर्स भी किया। करियर को ऊंचाई देने के लिए पूजा जर्मनी और कनाडा चली गईं, जहां उन्होंने कुछ वर्षों तक नौकरी भी की। लेकिन विदेशी जीवन की चकाचौंध उन्हें संतोष नहीं दे सकी। उनके मन में अपने देश के लिए कुछ करने का संकल्प जागा और उन्होंने सिविल सेवा की राह पकड़ ली।</p>
<p><img alt="Z"></img></p>
<h3><strong>पहली कोशिश में मिली नाकामी</strong></h3>
<p>UPSC जैसी कठिन परीक्षा में पूजा को पहले प्रयास में असफलता हाथ लगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। पूरी लगन और तैयारी के साथ दोबारा परीक्षा दी और 2018 में 174वीं रैंक (All India Rank) हासिल कर आईपीएस अधिकारी बनीं।</p>
<h3><strong>राजकोट में तैनाती</strong></h3>
<p>वर्तमान में पूजा यादव गुजरात के राजकोट शहर में डीसीपी (यातायात) के पद पर तैनात हैं। वह तकनीक और अनुशासन के दम पर राजकोट ट्रैफिक सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही हैं।</p>
<p>पूजा यादव की जिंदगी सिर्फ प्रोफेशनल तौर पर ही नहीं, बल्कि निजी रूप से भी मोटिवेशनल रही है। उन्होंने साल 2016 बैच के केरल कैडर के IAS अधिकारी विकलप भारद्वाज से शादी की। दोनों की मुलाकात मसूरी के लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (LBSNAA) में ट्रेनिंग के दौरान हुई थी और फिर 18 फरवरी, 2021 को दोनों ने शादी कर ली।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/159930/ips-pooja-yadav-this-female-ips-officer-is-very-beautiful</link>
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                <pubDate>Thu, 13 Nov 2025 10:42:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: 45 की उम्र में बिजनेस किया शुरू, आज लाखों कमा रही हैं वंदना पाटिल</title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">Success Story: "</span><span class="cf1">कारोबार</span> <span class="cf1">शुरू</span> <span class="cf1">करने</span> <span class="cf1">की</span> <span class="cf1">कोई</span> <span class="cf1">उम्र</span> <span class="cf1">नहीं</span> <span class="cf1">होती</span><span class="cf1">, </span><span class="cf1">जरूरत</span> <span class="cf1">होती</span> <span class="cf1">है</span> <span class="cf1">तो</span> <span class="cf1">बस</span> <span class="cf1">एक</span> <span class="cf1">अच्छे</span> <span class="cf1">आइडिया</span> <span class="cf1">और</span> <span class="cf1">हिम्मत</span> <span class="cf1">की</span><span class="cf1">।"</span> <span class="cf1">महाराष्ट्र</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">जलगांव</span> <span class="cf1">की</span> <span class="cf1">वंदना</span> <span class="cf1">प्रभाकर</span> <span class="cf1">पाटिल</span> <span class="cf1">ने</span> <span class="cf1">इस</span> <span class="cf1">कहावत</span> <span class="cf1">को</span> <span class="cf1">सच</span> <span class="cf1">कर</span> <span class="cf1">दिखाया</span> <span class="cf1">है</span><span class="cf1">। </span><span class="cf1">करीब</span><span class="cf1"> 45 </span><span class="cf1">साल</span> <span class="cf1">की</span> <span class="cf1">उम्र</span> <span class="cf1">में</span> <span class="cf1">उन्होंने</span> <span class="cf1">एक</span><span class="cf1"> ऐसा कारोबार शुरू किया, जिसकी बदौलत आज वह हर महीने लाखों रुपये कमा रही हैं, और उनके उत्पाद देश ही नहीं, विदेशों तक पहुँच रहे हैं।</span></p>
<h3><strong><span class="cf1">स्वयं सहायता समूह से </span><span class="cf1">उद्यमिता</span><span class="cf1"> की ओर सफर</span></strong></h3>
<p><span class="cf1">वंदना </span><span class="cf1">पाटिल</span><span class="cf1"> ने दो दशक से भी अधिक समय तक महिला स्वयं सहायता समूहों (</span><span class="cf0">SHGs</span><span class="cf0">) </span><span class="cf1">के</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156416/vandana-patil-is-earning-millions-today-at-the-age-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/success-story-(7).jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">Success Story: "</span><span class="cf1">कारोबार</span> <span class="cf1">शुरू</span> <span class="cf1">करने</span> <span class="cf1">की</span> <span class="cf1">कोई</span> <span class="cf1">उम्र</span> <span class="cf1">नहीं</span> <span class="cf1">होती</span><span class="cf1">, </span><span class="cf1">जरूरत</span> <span class="cf1">होती</span> <span class="cf1">है</span> <span class="cf1">तो</span> <span class="cf1">बस</span> <span class="cf1">एक</span> <span class="cf1">अच्छे</span> <span class="cf1">आइडिया</span> <span class="cf1">और</span> <span class="cf1">हिम्मत</span> <span class="cf1">की</span><span class="cf1">।"</span> <span class="cf1">महाराष्ट्र</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">जलगांव</span> <span class="cf1">की</span> <span class="cf1">वंदना</span> <span class="cf1">प्रभाकर</span> <span class="cf1">पाटिल</span> <span class="cf1">ने</span> <span class="cf1">इस</span> <span class="cf1">कहावत</span> <span class="cf1">को</span> <span class="cf1">सच</span> <span class="cf1">कर</span> <span class="cf1">दिखाया</span> <span class="cf1">है</span><span class="cf1">। </span><span class="cf1">करीब</span><span class="cf1"> 45 </span><span class="cf1">साल</span> <span class="cf1">की</span> <span class="cf1">उम्र</span> <span class="cf1">में</span> <span class="cf1">उन्होंने</span> <span class="cf1">एक</span><span class="cf1"> ऐसा कारोबार शुरू किया, जिसकी बदौलत आज वह हर महीने लाखों रुपये कमा रही हैं, और उनके उत्पाद देश ही नहीं, विदेशों तक पहुँच रहे हैं।</span></p>
<h3><strong><span class="cf1">स्वयं सहायता समूह से </span><span class="cf1">उद्यमिता</span><span class="cf1"> की ओर सफर</span></strong></h3>
<p><span class="cf1">वंदना </span><span class="cf1">पाटिल</span><span class="cf1"> ने दो दशक से भी अधिक समय तक महिला स्वयं सहायता समूहों (</span><span class="cf0">SHGs</span><span class="cf0">) </span><span class="cf1">के साथ मिलकर अचार, </span><span class="cf1">स्नैक्स</span><span class="cf1"> और मसाले बनाकर बेचे। लेकिन इन उत्पादों की बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धा और सीमित मांग ने उन्हें कुछ नया सोचने के लिए प्रेरित किया। 2021 में उन्होंने </span><span class="cf1">ममुराबाद</span><span class="cf1"> स्थित </span><span class="cf1">कृषि</span><span class="cf1"> विज्ञान केंद्र (</span><span class="cf0">KVK) </span><span class="cf1">का दौरा किया, जहां उन्होंने </span><span class="cf1">सोलर</span> <span class="cf1">डिहाइड्रेशन</span><span class="cf1"> तकनीक सीखी। यह तकनीक न सिर्फ उत्पादों की </span><span class="cf1">शेल्फ</span> <span class="cf1">लाइफ</span><span class="cf1"> बढ़ाती है, बल्कि पोषण तत्वों को भी बनाए रखती है।</span></p>
<h3><strong><span class="cf1">बिना बैंक लोन के शुरू किया </span><span class="cf1">बिजनेस</span></strong></h3>
<p><span class="cf1">बिजनेस</span><span class="cf1"> शुरू करना आसान नहीं था। जब बैंक ने </span><span class="cf1">बिजनेस</span><span class="cf1"> लोन देने से मना कर दिया, तब वंदना ने 10 लाख रुपये का </span><span class="cf1">पर्सनल</span><span class="cf1"> लोन लेकर यूनिट लगाने का फैसला किया। बाद में उन्हें केंद्र सरकार की </span><span class="cf0">PMFME (</span><span class="cf1">प्रधानमंत्री </span><span class="cf1">फॉर्मलाइजेशन</span><span class="cf1"> ऑफ </span><span class="cf1">माइक्रो</span> <span class="cf1">फूड</span> <span class="cf1">प्रोसेसिंग</span> <span class="cf1">एंटरप्राइजेज</span><span class="cf1">) योजना के तहत 1.81 लाख रुपये की </span><span class="cf1">सब्सिडी</span><span class="cf1"> भी मिली। नवंबर 2022 तक उनकी </span><span class="cf1">सोलर</span> <span class="cf1">ड्राइंग</span><span class="cf1"> यूनिट पूरी तरह से चालू हो गई।</span></p>
<h3><strong><span class="cf1">कैसे काम करता है </span><span class="cf1">सोलर</span> <span class="cf1">डिहाइड्रेशन</span><span class="cf1"> यूनिट?</span></strong></h3>
<p><span class="cf1">वंदना की यूनिट में </span><span class="cf1">पॉलीकार्बोनेट</span><span class="cf1"> शीट से बने </span><span class="cf1">टनलनुमा</span><span class="cf1"> ढांचे का इस्तेमाल होता है, जो सूर्य की </span><span class="cf1">रोशनी</span> <span class="cf1">से</span> <span class="cf1">ग्रीनहाउस</span><span class="cf1"> जैसा प्रभाव पैदा करता है। अंदर की गरम हवा </span><span class="cf1">ट्रे</span><span class="cf1"> पर रखी सब्जियों को धीरे-धीरे सुखाती है और </span><span class="cf1">एग्जॉस्ट</span> <span class="cf1">फैन</span><span class="cf1"> नमी बाहर निकाल देते हैं। इस तकनीक से सब्जियों और फलों का </span><span class="cf1">प्राकृतिक</span> <span class="cf1">रंग</span><span class="cf1">, </span><span class="cf1">स्वाद</span><span class="cf1"> और पोषण बना रहता है। यहाँ </span><span class="cf1">मोरिंगा</span><span class="cf1">, </span><span class="cf1">करी</span><span class="cf1"> पत्ता, चुकंदर, टमाटर, प्याज और </span><span class="cf1">नींबू</span><span class="cf1"> को सुखाकर </span><span class="cf1">फ्लेक्स</span><span class="cf1"> और पाउडर बनाए जाते हैं, जिन्हें वंदना "</span><span class="cf1">ब्रेकफास्ट</span> <span class="cf1">फूड्स</span><span class="cf1">" ब्रांड नाम से बेचती हैं।</span></p>
<h3><strong><span class="cf1">देश से विदेश तक पहुँचा कारोबार</span></strong></h3>
<p><span class="cf1">वंदना का ब्रांड गायत्री </span><span class="cf1">फूड्स</span><span class="cf1"> आज न केवल भारत के विभिन्न हिस्सों में सप्लाई करता है, बल्कि अमेरिका, </span><span class="cf1">कनाडा</span><span class="cf1"> और </span><span class="cf1">मालदीव</span><span class="cf1"> जैसे देशों में भी उनके उत्पादों की बिक्री हो रही है। भारत में ही </span><span class="cf1">डिहाइड्रेटेड</span><span class="cf1"> फलों और सब्जियों का बाजार 2023 में 17,200 करोड़ रुपये का था और 2035 तक इसके दोगुना होने की संभावना है। सेहत को लेकर बढ़ती जागरूकता और </span><span class="cf1">क्विक</span> <span class="cf1">फूड</span><span class="cf1"> की </span><span class="cf1">डिमांड</span><span class="cf1"> इस बाजार को और तेज़ी से बढ़ा रही है।</span></p>
<h3><strong><span class="cf1">उत्पाद की कीमत और </span><span class="cf1">टर्नओवर</span></strong></h3>
<p><span class="cf1">सोलर</span> <span class="cf1">ड्राईंग</span><span class="cf1"> से बने उत्पाद कीमती जरूर होते हैं, लेकिन गुणवत्ता और पोषण के मामले में बेहतरीन होते हैं</span><span class="cf1">। </span><span class="cf1">22 किलो ताजे टमाटर से सिर्फ 1 किलो पाउडर बनता है जिसकी कीमत </span><span class="cf0">700 </span><span class="cf3">रुपये </span><span class="cf1">प्रति किलो है। </span><span class="cf0">10 </span><span class="cf1">किलो चुकंदर से करीब 2.5 से 3 किलो </span><span class="cf1">फ्लेक्स</span><span class="cf1"> बनते हैं, जिसकी कीमत भी </span><span class="cf0">700 </span><span class="cf3">रुपये </span><span class="cf1">प्रति किलो है।</span></p>
<p><span class="cf1">इसके बावजूद, ग्राहकों में इनके प्रति भरोसा और मांग लगातार बढ़ रही है। वंदना </span><span class="cf1">का</span><span class="cf1"> मासिक </span><span class="cf1">टर्नओवर</span><span class="cf1"> करीब </span><span class="cf0">3 </span><span class="cf1">लाख रुपये </span><span class="cf1">है</span><span class="cf1">, </span><span class="cf1">जबकि</span><span class="cf1"> प्रदर्शनियों में 2 से 3 दिन में ही </span><span class="cf0">8</span><span class="cf4">–</span><span class="cf0">10 </span><span class="cf1">लाख </span><span class="cf3">रुपये</span><span class="cf1"> तक की बिक्री हो जाती है। उन्होंने अब बैंक का कर्ज पूरी तरह चुका दिया है और अपने एक्सपोर्ट </span><span class="cf1">ऑर्डर</span><span class="cf1"> को पूरा करने के लिए यूनिट की </span><span class="cf1">क्षमता</span> <span class="cf1">बढ़ाने</span> <span class="cf1">की</span> <span class="cf1">योजना</span> <span class="cf1">बना</span> <span class="cf1">रही</span><span class="cf1"> हैं।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/156416/vandana-patil-is-earning-millions-today-at-the-age-of</link>
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                <pubDate>Thu, 02 Oct 2025 10:53:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: मॉडलिंग से लेकर प्रशासनिक सेवा तक का सफर, यूपी की बेटी स्वीटी उपाध्याय बनी कमिश्नर</title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">Success Story: अगर जुनून हो तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं होती।</span> <span class="cf0">इस बात को उत्तर प्रदेश सरकार में </span><span class="cf0">असिस्टेंट</span> <span class="cf0">कमिश्नर</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">पद</span><span class="cf0"> पर कार्यरत </span><span class="cf0">स्वीटी</span><span class="cf0"> उपाध्याय ने न केवल साबित किया, बल्कि अपने जीवन से लाखों युवाओं के लिए मिसाल कायम की है। पढ़ाई में अव्वल, </span><span class="cf0">मॉडलिंग</span><span class="cf0"> और </span><span class="cf0">डांसिंग</span><span class="cf0"> में माहिर और लाखों के </span><span class="cf0">पैकेज</span><span class="cf0"> वाली </span><span class="cf0">कॉर्पोरेट</span><span class="cf0"> नौकरी छोड़कर सिविल सेवा की राह पर चलने वाली </span><span class="cf0">स्वीटी</span><span class="cf0">, वाकई में </span><span class="cf0">ब्यूटी</span> <span class="cf0">विद</span> <span class="cf0">ब्रेन</span><span class="cf0"> की परिभाषा हैं।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">प्रयागराज की होनहार बेटी</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">स्वीटी</span><span class="cf0"> उपाध्याय का जन्म उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के </span><span class="cf0">कटरा</span><span class="cf0"> क्षेत्र में हुआ। वे बचपन से ही पढ़ाई</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156318/travel-from-modeling-to-administrative-service"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/success-story-(5).jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">Success Story: अगर जुनून हो तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं होती।</span> <span class="cf0">इस बात को उत्तर प्रदेश सरकार में </span><span class="cf0">असिस्टेंट</span> <span class="cf0">कमिश्नर</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">पद</span><span class="cf0"> पर कार्यरत </span><span class="cf0">स्वीटी</span><span class="cf0"> उपाध्याय ने न केवल साबित किया, बल्कि अपने जीवन से लाखों युवाओं के लिए मिसाल कायम की है। पढ़ाई में अव्वल, </span><span class="cf0">मॉडलिंग</span><span class="cf0"> और </span><span class="cf0">डांसिंग</span><span class="cf0"> में माहिर और लाखों के </span><span class="cf0">पैकेज</span><span class="cf0"> वाली </span><span class="cf0">कॉर्पोरेट</span><span class="cf0"> नौकरी छोड़कर सिविल सेवा की राह पर चलने वाली </span><span class="cf0">स्वीटी</span><span class="cf0">, वाकई में </span><span class="cf0">ब्यूटी</span> <span class="cf0">विद</span> <span class="cf0">ब्रेन</span><span class="cf0"> की परिभाषा हैं।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">प्रयागराज की होनहार बेटी</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">स्वीटी</span><span class="cf0"> उपाध्याय का जन्म उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के </span><span class="cf0">कटरा</span><span class="cf0"> क्षेत्र में हुआ। वे बचपन से ही पढ़ाई में तेज़ थीं और अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह समर्पित भी। उनके माता-पिता पेशे से वकील हैं, जिससे उन्हें शुरू से ही एक अनुशासित और शिक्षित माहौल मिला।</span></p>
<h3><strong><span class="cf2"> MBA </span><span class="cf0">के बाद लाखों की नौकरी, फिर भी बनीं अफसर</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">स्वीटी</span><span class="cf0"> ने </span><span class="cf2">MBA </span><span class="cf0">की डिग्री हासिल करने के बाद दो </span><span class="cf0">साल</span><span class="cf0"> तक एक निजी कंपनी में लाखों के </span><span class="cf0">पैकेज</span><span class="cf0"> पर नौकरी की। लेकिन उनका सपना इससे कहीं बड़ा था</span><span class="cf0">।</span></p>
<p><span class="cf0">नौकरी के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। दिन में 9 घंटे की </span><span class="cf0">ड्यूटी</span><span class="cf0"> और रात में पढ़ाई </span><span class="cf3">– </span><span class="cf0">ऐसा कठिन </span><span class="cf0">शेड्यूल</span><span class="cf0"> उन्होंने लंबे समय तक निभाया। उनका टाइम </span><span class="cf0">मैनेजमेंट</span><span class="cf0"> और समर्पण काबिल-ए-तारीफ है।</span></p>
<h3><strong><span class="cf2"> UPPCS 2019 </span><span class="cf0">में 55वीं </span><span class="cf0">रैंक</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">साल 2019 में आयोजित उत्तर प्रदेश </span><span class="cf0">पीसीएस</span><span class="cf0"> परीक्षा में </span><span class="cf0">स्वीटी</span><span class="cf0"> उपाध्याय ने 55वीं </span><span class="cf0">रैंक</span><span class="cf0"> हासिल की और उनका चयन </span><span class="cf0">असिस्टेंट</span><span class="cf0"> कमिश्नर पद के लिए हुआ। यह पद न केवल जिम्मेदारी भरा है, बल्कि समाज में बदलाव लाने का एक अहम माध्यम भी है।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">मॉडलिंग</span><span class="cf0"> और </span><span class="cf0">डांसिंग</span><span class="cf0"> में भी </span><span class="cf0">रुचि</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">पढ़ाई के साथ-साथ </span><span class="cf0">स्वीटी</span><span class="cf0"> को </span><span class="cf0">डांसिंग</span><span class="cf0"> और </span><span class="cf0">मॉडलिंग</span><span class="cf0"> का भी शौक है। उन्होंने अपने शौक को कभी अपनी पढ़ाई में बाधा नहीं बनने दिया, बल्कि समय का बेहतर उपयोग कर दोनों क्षेत्रों में खुद को साबित किया।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Sep 2025 11:37:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IPS Pooja Yadav: बेहद खूबसूरत है ये महिला IPS अफसर, विदेश से नौकरी छोड़कर की UPSC की तैयारी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IPS Pooja Yadav: भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में शुमार UPSC (सिविल सेवा परीक्षा) केवल पढ़ाई में तेज होने से पास नहीं होती, इसके लिए लगन और असफलताओं से लड़ने की जिद भी जरूरी होती है। आईपीएस अधिकारी पूजा यादव की कहानी इसी का एक शानदार उदाहरण है।</p>
<h3><strong>विदेशों में करियर, लेकिन दिल था देश में</strong></h3>
<p>पूजा यादव का जन्म 20 सितंबर, 1988 को हरियाणा में हुआ था। उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और मास्टर्स भी किया। करियर को ऊंचाई देने के लिए पूजा जर्मनी और कनाडा चली गईं, जहां उन्होंने कुछ वर्षों तक नौकरी भी की। लेकिन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155798/ips-pooja-yadav-this-woman-ips-officer-is-very-beautiful"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/ips-pooja-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p>IPS Pooja Yadav: भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में शुमार UPSC (सिविल सेवा परीक्षा) केवल पढ़ाई में तेज होने से पास नहीं होती, इसके लिए लगन और असफलताओं से लड़ने की जिद भी जरूरी होती है। आईपीएस अधिकारी पूजा यादव की कहानी इसी का एक शानदार उदाहरण है।</p>
<h3><strong>विदेशों में करियर, लेकिन दिल था देश में</strong></h3>
<p>पूजा यादव का जन्म 20 सितंबर, 1988 को हरियाणा में हुआ था। उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और मास्टर्स भी किया। करियर को ऊंचाई देने के लिए पूजा जर्मनी और कनाडा चली गईं, जहां उन्होंने कुछ वर्षों तक नौकरी भी की। लेकिन विदेशी जीवन की चकाचौंध उन्हें संतोष नहीं दे सकी। उनके मन में अपने देश के लिए कुछ करने का संकल्प जागा और उन्होंने सिविल सेवा की राह पकड़ ली।</p>
<p><img alt="Z"></img></p>
<h3><strong>पहली कोशिश में मिली नाकामी</strong></h3>
<p>UPSC जैसी कठिन परीक्षा में पूजा को पहले प्रयास में असफलता हाथ लगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। पूरी लगन और तैयारी के साथ दोबारा परीक्षा दी और 2018 में 174वीं रैंक (All India Rank) हासिल कर आईपीएस अधिकारी बनीं।</p>
<h3><strong>राजकोट में तैनाती</strong></h3>
<p>वर्तमान में पूजा यादव गुजरात के राजकोट शहर में डीसीपी (यातायात) के पद पर तैनात हैं। वह तकनीक और अनुशासन के दम पर राजकोट ट्रैफिक सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही हैं।</p>
<p>पूजा यादव की जिंदगी सिर्फ प्रोफेशनल तौर पर ही नहीं, बल्कि निजी रूप से भी मोटिवेशनल रही है। उन्होंने साल 2016 बैच के केरल कैडर के IAS अधिकारी विकलप भारद्वाज से शादी की। दोनों की मुलाकात मसूरी के लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (LBSNAA) में ट्रेनिंग के दौरान हुई थी और फिर 18 फरवरी, 2021 को दोनों ने शादी कर ली।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/155798/ips-pooja-yadav-this-woman-ips-officer-is-very-beautiful</link>
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                <pubDate>Wed, 24 Sep 2025 15:52:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: 9 घंटे की नौकरी, फिर UPSC की तैयारी, सेल्फ स्टडी के दम पर श्वेता भारती बनीं IAS अफसर </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: UPSC की तैयारी वैसे ही बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती है, और अगर किसी के पास पूरा दिन भी उपलब्ध हो, तब भी इसे पार करना आसान नहीं होता। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति 9 घंटे की नौकरी के बाद तैयारी करे और परीक्षा पास भी कर ले, तो वह हिम्मत और समर्पण की मिसाल बन जाता है। ऐसी ही कहानी है बिहार की श्वेता भारती की, जिन्होंने ऑफिस से लौटने के बाद थकान को हराकर IAS बनने की दिशा में कदम बढ़ाया और UPSC परीक्षा पास की।</p>
<h3><strong>काम और पढ़ाई के बीच बनाया संतुलन</strong></h3>
<p>श्वेता बिहार के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155496/ias-success-story-9-hour-job-and-then-upsc-preparation"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/ias-shweta-bharti.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: UPSC की तैयारी वैसे ही बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती है, और अगर किसी के पास पूरा दिन भी उपलब्ध हो, तब भी इसे पार करना आसान नहीं होता। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति 9 घंटे की नौकरी के बाद तैयारी करे और परीक्षा पास भी कर ले, तो वह हिम्मत और समर्पण की मिसाल बन जाता है। ऐसी ही कहानी है बिहार की श्वेता भारती की, जिन्होंने ऑफिस से लौटने के बाद थकान को हराकर IAS बनने की दिशा में कदम बढ़ाया और UPSC परीक्षा पास की।</p>
<h3><strong>काम और पढ़ाई के बीच बनाया संतुलन</strong></h3>
<p>श्वेता बिहार के नालंदा जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने पटना से स्कूली शिक्षा प्राप्त की और फिर भागलपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इंजीनियर बनने के बाद उन्होंने विप्रो कंपनी में नौकरी शुरू की। लेकिन नौकरी करते हुए भी उनके मन में UPSC की तैयारी करने का विचार आया। पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते वह नौकरी छोड़ नहीं सकीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और ऑफिस के बाद पढ़ाई का सिलसिला शुरू कर दिया।</p>
<h3><strong>सोशल मीडिया से बनाई दूरी</strong></h3>
<p>दिनभर ऑफिस का काम, आना-जाना और घर के छोटे-बड़े कार्यों के बावजूद श्वेता ने पढ़ाई के लिए वक्त निकाला। उन्होंने शाम से लेकर रात तक पढ़ाई की। ध्यान केंद्रित रहे, इसके लिए उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बना ली और distractions को खुद से दूर रखा।</p>
<h3><strong>BPSC से मिली पहली सफलता</strong></h3>
<p>UPSC से पहले श्वेता ने BPSC (बिहार लोक सेवा आयोग) की परीक्षा दी और उसमें 65वीं रैंक हासिल की। इसके तहत उन्हें डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम ऑफिसर का पद मिला। इस सफलता ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया, लेकिन उनका लक्ष्य अब भी UPSC था।</p>
<h3><strong>UPSC में मिली बड़ी सफलता</strong></h3>
<p>कड़ी मेहनत और ईमानदारी के साथ की गई तैयारी रंग लाई। श्वेता ने साल 2021 की UPSC परीक्षा में 356वीं रैंक हासिल की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब वह बिहार के भागलपुर में असिस्टेंट कलेक्टर के पद पर कार्यरत हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/155496/ias-success-story-9-hour-job-and-then-upsc-preparation</link>
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                <pubDate>Sat, 20 Sep 2025 09:05:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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