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                <title>Nisa Unnirajan - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Nisa Unnirajan RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>IAS Success Story: घर, बच्चे और नौकरी के बीच UPSC की तैयारी, 7वें प्रयास में बनीं IAS अफसर </title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: केरल की निसा उन्नीराजन की कहानी यह साबित करती है कि अगर दिल में जुनून और हौसला हो, तो कोई भी सपना असंभव नहीं। 40 साल की उम्र में, दो बेटियों की मां और नौकरी करते हुए, निसा ने 2024 में </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">सिविल सर्विसेज परीक्षा में 1000वीं रैंक हासिल की। सातवें प्रयास में </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">बनने के उनके सफर ने यह सिद्ध कर दिया कि उम्र और हालात कभी भी एक इंसान की मेहनत और जज्बे का रास्ता रोक नहीं सकते।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">की तैयारी की शुरुआत</span></strong></p>
<p><span class="cf0">ज्यादातर लोग 30 की उम्र के बाद </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">की तैयारी छोड़ देते</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/159189/ias-success-story-between-home-child-and-job-preparation-for"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/news---2025-11-06t212042.520.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: केरल की निसा उन्नीराजन की कहानी यह साबित करती है कि अगर दिल में जुनून और हौसला हो, तो कोई भी सपना असंभव नहीं। 40 साल की उम्र में, दो बेटियों की मां और नौकरी करते हुए, निसा ने 2024 में </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">सिविल सर्विसेज परीक्षा में 1000वीं रैंक हासिल की। सातवें प्रयास में </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">बनने के उनके सफर ने यह सिद्ध कर दिया कि उम्र और हालात कभी भी एक इंसान की मेहनत और जज्बे का रास्ता रोक नहीं सकते।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">की तैयारी की शुरुआत</span></strong></p>
<p><span class="cf0">ज्यादातर लोग 30 की उम्र के बाद </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">की तैयारी छोड़ देते हैं, लेकिन निसा ने 35 साल की उम्र में इस कठिन राह को अपनाया। दो बेटियों</span><span class="cf2">—</span><span class="cf0">नंदना (11 साल) और थानवी (7 साल)</span><span class="cf2">—</span><span class="cf0">के साथ घर की जिम्मेदारियां, नौकरी और सुनने की परेशानी होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। सुबह बच्चों को स्कूल भेजना, घर संभालना और रात को </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">की पढ़ाई करना उनके दिनचर्या का हिस्सा था।</span></p>
<p><span class="cf0">उनके पति अरुण, जो सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, और उनके रिटायर्ड माता-पिता ने हर कदम पर उनका पूरा समर्थन किया। निसा कहती हैं, "मेरे परिवार के बिना यह मुमकिन नहीं था।"</span></p>
<p><strong><span class="cf0">सुनने की परेशानी को बनाया ताकत</span></strong></p>
<p><span class="cf0">निसा के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनकी सुनने की परेशानी थी। </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">जैसी कठिन परीक्षा के लिए यह एक बड़ा रोड़ा हो सकता था, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने कोट्टायम के सब-कलेक्टर रंजीत से प्रेरणा ली, जो खुद सुनने की परेशानी के बावजूद </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">बने थे। निसा कहती हैं, "अगर उन्होंने कर सकते हैं, तो मैं क्यों नहीं?" यह सोच उन्हें हर बार और मजबूत बनाती रही।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">असफलताओं से मिली सीख</span></strong></p>
<p><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">का सफर आसान नहीं होता और निसा के लिए भी यह रास्ता कांटों भरा रहा। पहले छह प्रयासों में असफल होने के बावजूद, उन्होंने कभी हार नहीं मानी। हर बार अपनी गलतियों से सीखती रहीं और हर प्रयास को अनुभव के रूप में लिया। यह जिद और मेहनत सातवें प्रयास में रंग लाई, जब उन्होंने 1000वीं रैंक हासिल कर </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">बनने का सपना पूरा किया।</span></p>
<p><span class="cf0">निसा ने तिरुवनंतपुरम के एक कोचिंग सेंटर से मार्गदर्शन लिया, लेकिन उनकी असली ताकत थी उनकी खुद की पढ़ाई की रणनीति। वे </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">टॉपर्स की कहानियों और मोटिवेशनल वीडियो से प्रेरणा लेती थीं। हर विषय को छोटे हिस्सों में बांटकर पढ़ना, नियमित रिवीजन और नोट्स बनाना, और समय प्रबंधन उनकी सफलता की कुंजी रहा।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Nov 2025 21:21:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: 35 की उम्र में शुरू की UPSC की तैयारी, 40 की उम्र में बनीं IAS अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों, तो उम्र, हालात और शारीरिक सीमाएं भी सपनों के आड़े नहीं आतीं। इस कथन को सच कर दिखाया है केरल की 40 वर्षीय निसा उन्नीराजन (</span><span class="cf1">Nisa Unnirajan) </span><span class="cf0">ने, जिन्होंने सातवें प्रयास में </span><span class="cf1">UPSC 2024 </span><span class="cf0">में 1000वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया। उनकी सफलता उन तमाम लोगों के लिए एक रौशनी की किरण है, जो यह मान चुके हैं कि अब उनके सपनों को पूरा करने का समय निकल चुका है।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">35 साल की उम्र में उठाया सिविल सेवा का कदम</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">जहां अधिकतर उम्मीदवार 21-25 की उम्र में </span><span class="cf1">UPSC </span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155466/ias-success-story-started-at-the-age-of-35-ias"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/ias-निसा-उन्नीराजन.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों, तो उम्र, हालात और शारीरिक सीमाएं भी सपनों के आड़े नहीं आतीं। इस कथन को सच कर दिखाया है केरल की 40 वर्षीय निसा उन्नीराजन (</span><span class="cf1">Nisa Unnirajan) </span><span class="cf0">ने, जिन्होंने सातवें प्रयास में </span><span class="cf1">UPSC 2024 </span><span class="cf0">में 1000वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया। उनकी सफलता उन तमाम लोगों के लिए एक रौशनी की किरण है, जो यह मान चुके हैं कि अब उनके सपनों को पूरा करने का समय निकल चुका है।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">35 साल की उम्र में उठाया सिविल सेवा का कदम</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">जहां अधिकतर उम्मीदवार 21-25 की उम्र में </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">की तैयारी शुरू करते हैं, वहीं निसा ने 35 वर्ष की उम्र में सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। उस समय वह दो बेटियों की मां थीं </span><span class="cf2">— </span><span class="cf0">नंदना (11) और थानवी (7)। बावजूद इसके, उन्होंने न सिर्फ पढ़ाई को समय दिया, बल्कि घर और बच्चों की जिम्मेदारी को भी बखूबी निभाया। पति अरुण और माता-पिता (जो रिटायर्ड पुलिस कर्मचारी हैं) का सहयोग उनके इस सफर में मजबूत आधार रहा।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">हर असफलता बनी सीख का सबक</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">निसा के लिए यह रास्ता आसान नहीं था। सात प्रयासों में असफलताओं का सामना करने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया, “हर बार जब असफल हुई, मैंने खुद से एक सवाल पूछा </span><span class="cf2">— ‘</span><span class="cf0">अब क्या बेहतर किया जा सकता है?’”। यही सोच उन्हें बार-बार गिरने के बाद उठने की हिम्मत देती रही।</span></p>
<p><span class="cf0">उन्होंने यह सफलता डिसेबिलिटी कैटेगरी में हासिल की है, और यह उनके दृढ़ निश्चय और मानसिक ताकत का उदाहरण है।</span></p>
<p><span class="cf0">निसा ने </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">की तैयारी तिरुवनंतपुरम के एक निजी कोचिंग सेंटर से की थी। इस दौरान उन्हें कोट्टायम के उप-कलेक्टर रंजीत से विशेष प्रेरणा मिली, जो खुद सुनने में असमर्थ हैं और उन्होंने भी विकलांगता के बावजूद </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">परीक्षा पास की थी। निसा ने कहा, “जब आप किसी ऐसे इंसान की सफलता देखते हैं जो आपकी ही चुनौती से जूझ चुका है, तो आत्मविश्वास और उम्मीद दोनों को नया बल मिलता है।”</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">अनूठी दिनचर्या और मानसिक मजबूती का मंत्र</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">निसा की दिनचर्या आम उम्मीदवारों से अलग थी। उन्होंने किताबों के साथ-साथ अपनी दिनचर्या को प्रेरणादायक आत्मकथाओं, सफल लोगों की कहानियों और मोटिवेशनल वीडियो से भर दिया था। यह तरीका पारंपरिक नहीं था, लेकिन इससे उन्हें मानसिक ऊर्जा और स्थायित्व मिला।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">अब बनेगी </span><span class="cf1">IAS, </span><span class="cf0">लाखों के लिए प्रेरणा</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">अब जब निसा ने </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">परीक्षा में सफलता प्राप्त कर ली है, तो उनका अगला कदम </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">अधिकारी बनने का है। उनकी यह कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो सोचते हैं कि उम्र या परिस्थिति उनके सपनों के रास्ते की दीवार हैं।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Sep 2025 19:23:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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