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                <title>यूपीएससी सक्सेस स्टोरी - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>यूपीएससी सक्सेस स्टोरी RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>IAS Success Story: अनाथालय में बीते 13 साल, अब्दुल नासर बने IAS अफसर, पढ़ें सक्सेस स्टोरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: कहते हैं कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर इंसान खुद पर भरोसा रखे और पूरी मेहनत व लगन के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़े, तो कोई भी बाधा उसे रोक नहीं सकती। ऐसी ही मिसाल हैं आईएएस बी. अब्दुल नासर, जिन्होंने संघर्षों से भरे जीवन के बावजूद वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना करना भी आसान नहीं होता।</p>
<p>केरल के कन्नूर जिले के रहने वाले बी. अब्दुल नासर की जिंदगी की शुरुआत बेहद कठिन रही। महज 5 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद परिवार पर जिम्मेदारियों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164005/ias-success-story-abdul-nassar-spent-13-years-in-orphanage"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-abdul-nasar.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: कहते हैं कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर इंसान खुद पर भरोसा रखे और पूरी मेहनत व लगन के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़े, तो कोई भी बाधा उसे रोक नहीं सकती। ऐसी ही मिसाल हैं आईएएस बी. अब्दुल नासर, जिन्होंने संघर्षों से भरे जीवन के बावजूद वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना करना भी आसान नहीं होता।</p>
<p>केरल के कन्नूर जिले के रहने वाले बी. अब्दुल नासर की जिंदगी की शुरुआत बेहद कठिन रही। महज 5 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद परिवार पर जिम्मेदारियों का बोझ आ गया। हालात ऐसे बने कि अब्दुल को अपने भाई-बहनों के साथ करीब 13 साल तक अनाथालय में रहना पड़ा। उनकी मां घरेलू सहायिका के रूप में काम करती थीं, लेकिन सीमित आमदनी में परिवार चलाना आसान नहीं था।</p>
<p>बचपन से ही अब्दुल नासर ने संघर्ष को अपना साथी बना लिया। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने होटलों में बर्तन धोने, घरों में अखबार बेचने, बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने और यहां तक कि फोन ऑपरेटर के तौर पर भी काम किया। इन तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को कभी बीच में नहीं छोड़ा।</p>
<p>कड़ी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने थालास्सेरी के सरकारी कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद पोस्ट ग्रेजुएशन भी हासिल किया। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्हें केरल स्वास्थ्य विभाग में सरकारी नौकरी मिली, जिससे उनके करियर की औपचारिक शुरुआत हुई।</p>
<p>सरकारी सेवा में रहते हुए उन्होंने लगातार बेहतर काम किया और 2006 के बाद राज्य सिविल सेवा में डिप्टी कलेक्टर के पद तक पहुंचे। अपने उत्कृष्ट कार्यों के चलते 2015 में उन्हें केरल का बेस्ट डिप्टी कलेक्टर घोषित किया गया। इसी उपलब्धि के आधार पर वे 2017 में बिना UPSC परीक्षा दिए IAS बनने के योग्य बने।</p>
<p>इसके बाद 2019 में उन्हें कोल्लम जिले का डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर नियुक्त किया गया। आज बी. अब्दुल नासर न सिर्फ एक सफल आईएएस अधिकारी हैं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा भी हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को सच करने का हौसला रखते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Dec 2025 11:56:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: नौकरी के साथ की UPSC की तैयारी, पढ़ें सृष्टि डबास की सक्सेस स्टोरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: कहते हैं कि जब इरादे मजबूत हों, तो सपने आंखें बंद किए बिना भी पूरे किए जा सकते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है सृष्टि डबास की, जिन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 6वीं रैंक हासिल कर अपने सपनों को सच कर दिखाया।</p>
<h3><strong>नौकरी और तैयारी का संघर्ष</strong></h3>
<p>दिल्ली की सृष्टि डबास भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में नौकरी कर रही थीं। दिन में 8-9 घंटे की नौकरी और रात में पढ़ाई के बीच संतुलन बनाए रखना आसान नहीं था। फिर भी उनका जूनून ऐसा था कि उन्होंने काम और पढ़ाई दोनों को प्राथमिकता दी। ऑफिस की लाइब्रेरी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163867/ias-success-story-prepare-for-upsc-along-with-job-read"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-srishti-dabas.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: कहते हैं कि जब इरादे मजबूत हों, तो सपने आंखें बंद किए बिना भी पूरे किए जा सकते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है सृष्टि डबास की, जिन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 6वीं रैंक हासिल कर अपने सपनों को सच कर दिखाया।</p>
<h3><strong>नौकरी और तैयारी का संघर्ष</strong></h3>
<p>दिल्ली की सृष्टि डबास भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में नौकरी कर रही थीं। दिन में 8-9 घंटे की नौकरी और रात में पढ़ाई के बीच संतुलन बनाए रखना आसान नहीं था। फिर भी उनका जूनून ऐसा था कि उन्होंने काम और पढ़ाई दोनों को प्राथमिकता दी। ऑफिस की लाइब्रेरी में लंच टाइम का इस्तेमाल पढ़ाई के लिए किया, और छुट्टी वाले दिन भी तैयारी जारी रखी।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/4007709-srishti-dabas-8.jpg" alt="4007709-srishti-dabas-8" width="659" height="494"></img></p>
<h3><strong>शिक्षा और तैयारी की पृष्ठभूमि</strong></h3>
<p>सृष्टि ने 12वीं के बाद दिल्ली के इंदिरा ट्रस्ट कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद IGNOU से मास्टर डिग्री हासिल की। नौकरी और पढ़ाई के अनुभव के बीच, उनका असली लक्ष्य आईएएस बनना था। सामाजिक न्याय मंत्रालय में काम का अनुभव भी रहा, लेकिन उनका ध्यान केवल यूपीएससी की तैयारी पर था।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/3525697-untitled-design-2024-12-20t063252.912.jpg" alt="3525697-untitled-design-2024-12-20t063252.912" width="1200" height="900"></img></p>
<h3><strong>पहले प्रयास में सफलता</strong></h3>
<p>कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास के साथ, सृष्टि ने 2023 में पहली बार यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया रैंकिंग 6 हासिल की। इस सफलता ने न केवल उनके सपने पूरे किए, बल्कि उनकी मां का सिर भी गर्व से ऊंचा कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 14:42:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: 6 साल में मिली 12 सरकारी नौकरी, पढ़ें पटवारी से IPS अफसर बनने तक का सफर </title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">Success Story: 3 अप्रैल 1988 का दिन राजस्थान के बीकानेर जिले की नोखा तहसील के छोटे से गाँव रायसर में एक बच्चे के जन्म के रूप में याद किया जाएगा। उसके पिता ऊंटगाड़ी चलाते थे और घर चलाने के लिए मजदूरी करते थे। घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी, और बचपन में वह लड़का मवेशियों के गले में बंधी जंजीर पकड़कर उन्हें चराने जाता था।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">गरीबी से निकलने की ठानी और सरकारी नौकरी का सपना</span></strong></p>
<p><span class="cf0">बचपन से ही उस बच्चे को एहसास हो गया कि अपने परिवार को गरीबी से बाहर निकालने के लिए उसे कड़ी मेहनत करनी होगी।</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163709/success-story-got-12-government-jobs-in-6-years-read"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/success-story-(16).jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">Success Story: 3 अप्रैल 1988 का दिन राजस्थान के बीकानेर जिले की नोखा तहसील के छोटे से गाँव रायसर में एक बच्चे के जन्म के रूप में याद किया जाएगा। उसके पिता ऊंटगाड़ी चलाते थे और घर चलाने के लिए मजदूरी करते थे। घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी, और बचपन में वह लड़का मवेशियों के गले में बंधी जंजीर पकड़कर उन्हें चराने जाता था।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">गरीबी से निकलने की ठानी और सरकारी नौकरी का सपना</span></strong></p>
<p><span class="cf0">बचपन से ही उस बच्चे को एहसास हो गया कि अपने परिवार को गरीबी से बाहर निकालने के लिए उसे कड़ी मेहनत करनी होगी। शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने सरकारी नौकरी की तैयारी में खुद को झोंक दिया। उसके पास खोने के लिए कुछ नहीं था। पहली सफलता तब मिली जब उसने लेखपाल (पटवारी) भर्ती परीक्षा पास की और पटवारी बन गया। लेकिन उसके सपनों की मंजिल सिर्फ इतना ही नहीं थी।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">आईपीएस बनने का कठिन सफर</span></strong></p>
<p><span class="cf0">पटवारी बनने के बाद भी प्रेमसुख देलू ने सभी सरकारी नौकरियों के फॉर्म भरे और महज छह साल के भीतर 12 अलग-अलग सरकारी विभागों की प्रवेश परीक्षा क्वालीफाई कर ली। साल 2015 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी और पूरे देश में 170वीं रैंक हासिल की। इस रैंक के साथ उनका चयन आईपीएस के रूप में हुआ। आज प्रेमसुख देलू गुजरात के जामनगर में एसपी के पद पर तैनात हैं।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">असिस्टेंट जेलर और लेक्चरर के रूप में भी काम किया</span></strong></p>
<p><span class="cf0">अपने संघर्ष के दौरान प्रेमसुख ने राजस्थान में असिस्टेंट जेलर के रूप में नियुक्ति पाई। इसके अलावा तहसीलदार और स्कूल लेक्चरर के रूप में भी काम किया। राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित ग्राम सेवक परीक्षा में उन्हें दूसरा स्थान मिला। सब इंस्पेक्टर के रूप में चयन हुआ, लेकिन उन्होंने अन्य पदों को भी छोड़कर शिक्षा विभाग में योगदान दिया।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">हिम्मत और मेहनत से बनी मिसाल</span></strong></p>
<p><span class="cf0">प्रेमसुख देलू का परिवार बहुत पढ़ा-लिखा नहीं था; उनकी बड़ी बहन ने कभी स्कूल का मुंह तक नहीं देखा। लेकिन प्रेमसुख ने अपने हौसले और मेहनत से वो मुकाम हासिल किया, जिसका आज पूरे देश में सम्मान है। आईपीएस बनने के बाद उन्हें गुजरात कैडर मिला और उनकी पहली पोस्टिंग अमरेली में एसीपी के रूप में हुई।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/163709/success-story-got-12-government-jobs-in-6-years-read</link>
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                <pubDate>Fri, 19 Dec 2025 13:07:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: अनाथालय में बीते 13 साल, अब्दुल नासर बने IAS अफसर, पढ़ें सक्सेस स्टोरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>कहते हैं कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर इंसान खुद पर भरोसा रखे और पूरी मेहनत व लगन के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़े, तो कोई भी बाधा उसे रोक नहीं सकती। ऐसी ही मिसाल हैं आईएएस बी. अब्दुल नासर, जिन्होंने संघर्षों से भरे जीवन के बावजूद वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना करना भी आसान नहीं होता।</p>
<p>IAS Success Story: केरल के कन्नूर जिले के रहने वाले बी. अब्दुल नासर की जिंदगी की शुरुआत बेहद कठिन रही। महज 5 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद परिवार पर जिम्मेदारियों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163577/ias-success-story-abdul-nassar-spent-13-years-in-orphanage"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-abdul-nasar.jpg" alt=""></a><br /><p>कहते हैं कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर इंसान खुद पर भरोसा रखे और पूरी मेहनत व लगन के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़े, तो कोई भी बाधा उसे रोक नहीं सकती। ऐसी ही मिसाल हैं आईएएस बी. अब्दुल नासर, जिन्होंने संघर्षों से भरे जीवन के बावजूद वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना करना भी आसान नहीं होता।</p>
<p>IAS Success Story: केरल के कन्नूर जिले के रहने वाले बी. अब्दुल नासर की जिंदगी की शुरुआत बेहद कठिन रही। महज 5 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद परिवार पर जिम्मेदारियों का बोझ आ गया। हालात ऐसे बने कि अब्दुल को अपने भाई-बहनों के साथ करीब 13 साल तक अनाथालय में रहना पड़ा। उनकी मां घरेलू सहायिका के रूप में काम करती थीं, लेकिन सीमित आमदनी में परिवार चलाना आसान नहीं था।</p>
<p>बचपन से ही अब्दुल नासर ने संघर्ष को अपना साथी बना लिया। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने होटलों में बर्तन धोने, घरों में अखबार बेचने, बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने और यहां तक कि फोन ऑपरेटर के तौर पर भी काम किया। इन तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को कभी बीच में नहीं छोड़ा।</p>
<p>कड़ी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने थालास्सेरी के सरकारी कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद पोस्ट ग्रेजुएशन भी हासिल किया। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्हें केरल स्वास्थ्य विभाग में सरकारी नौकरी मिली, जिससे उनके करियर की औपचारिक शुरुआत हुई।</p>
<p>सरकारी सेवा में रहते हुए उन्होंने लगातार बेहतर काम किया और 2006 के बाद राज्य सिविल सेवा में डिप्टी कलेक्टर के पद तक पहुंचे। अपने उत्कृष्ट कार्यों के चलते 2015 में उन्हें केरल का बेस्ट डिप्टी कलेक्टर घोषित किया गया। इसी उपलब्धि के आधार पर वे 2017 में बिना UPSC परीक्षा दिए IAS बनने के योग्य बने।</p>
<p>इसके बाद 2019 में उन्हें कोल्लम जिले का डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर नियुक्त किया गया। आज बी. अब्दुल नासर न सिर्फ एक सफल आईएएस अधिकारी हैं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा भी हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को सच करने का हौसला रखते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Dec 2025 11:48:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: 12 घंटे की ड्यूटी के बाद UPSC की तैयारी, जानें अंजलि गर्ग के डॉक्टर से आईएएस बनने तक का सफर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>IAS Success Story: </strong>यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इसे पास करने के लिए उम्मीदवार सालों तक कड़ी मेहनत करते हैं। कई लोग अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर भी इस परीक्षा की तैयारी में जुट जाते हैं।</p>
<p>आज हम आपको ऐसी ही एक प्रेरणादायक महिला की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने न सिर्फ NEET जैसी कठिन परीक्षा पास की, बल्कि MBBS की पढ़ाई और मेडिकल इंटर्नशिप के साथ-साथ UPSC की तैयारी कर आईएएस अधिकारी बनने का सपना भी साकार किया। यह कहानी है आईएएस अंजलि गर्ग की।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/dr-anjali-garg-ias-rank.jpg" alt="Dr-Anjali-Garg-IAS-Rank" width="1200" height="900" /></p>
<p>आईएएस अंजलि गर्ग की मेहनत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163463/ias-success-story-preparation-for-upsc-after-12-hours-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-anjali-garg.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>IAS Success Story: </strong>यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इसे पास करने के लिए उम्मीदवार सालों तक कड़ी मेहनत करते हैं। कई लोग अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर भी इस परीक्षा की तैयारी में जुट जाते हैं।</p>
<p>आज हम आपको ऐसी ही एक प्रेरणादायक महिला की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने न सिर्फ NEET जैसी कठिन परीक्षा पास की, बल्कि MBBS की पढ़ाई और मेडिकल इंटर्नशिप के साथ-साथ UPSC की तैयारी कर आईएएस अधिकारी बनने का सपना भी साकार किया। यह कहानी है आईएएस अंजलि गर्ग की।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/dr-anjali-garg-ias-rank.jpg" alt="Dr-Anjali-Garg-IAS-Rank" width="1200" height="900"></img></p>
<p>आईएएस अंजलि गर्ग की मेहनत और लगन किसी भी युवा के लिए प्रेरणा है। उन्होंने अस्पताल में 12 घंटे की ड्यूटी करने के बाद भी यूपीएससी की तैयारी जारी रखी और आखिरकार सफलता हासिल की। हालांकि यह सफर आसान नहीं था, लेकिन उनके मजबूत इरादों ने उन्हें मंजिल तक पहुंचाया।</p>
<p><strong>कौन हैं आईएएस अंजलि गर्ग</strong></p>
<p>अंजलि गर्ग का जन्म 14 सितंबर 1996 को चंडीगढ़ में हुआ था। बचपन से ही उनका सपना डॉक्टर बनने का था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई चंडीगढ़ से ही पूरी की और पढ़ाई में हमेशा उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। 12वीं कक्षा में उन्होंने 96 प्रतिशत अंक हासिल किए।</p>
<p>शानदार शैक्षणिक रिकॉर्ड के बाद अंजलि ने NEET परीक्षा की तैयारी शुरू की और सफलता हासिल कर दिल्ली के प्रतिष्ठित VMMC (वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज) एवं सफदरजंग अस्पताल में MBBS में दाखिला लिया।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/dr-anjali-garg-ias-success-story.jpg" alt="Dr-Anjali-Garg-IAS-Success-Story" width="1200" height="675"></img></p>
<p><strong>MBBS के दौरान बदला नजरिया, शुरू हुई UPSC की तैयारी</strong></p>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, MBBS के तीसरे वर्ष में अंजलि ने जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को करीब से देखा। यहीं से उनके मन में समाज के लिए बड़े स्तर पर काम करने की इच्छा जागी और उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी का फैसला किया।</p>
<p>UPSC की तैयारी के दौरान उन्होंने अपनी मेडिकल इंटर्नशिप भी जारी रखी। अस्पताल में 12 घंटे की नाइट ड्यूटी के बावजूद वे कोचिंग और सेल्फ स्टडी के लिए समय निकालती रहीं। पहले प्रयास में उन्हें असफलता मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और दोबारा पूरी मेहनत से तैयारी की।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/2958923-ias-dr-anjali-garg-6.jpg" alt="2958923-ias-dr-anjali-garg-6" width="1200" height="900"></img></p>
<p><strong>दूसरे प्रयास में मिली सफलता</strong></p>
<p>अंजलि गर्ग ने दूसरे प्रयास में UPSC सिविल सेवा परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की। उन्होंने UPSC CSE 2022 में 79वीं रैंक प्राप्त की और आईएएस अधिकारी बनीं। खास बात यह है कि वे अपने बैच की मेडिकल साइंस टॉपर भी रहीं।</p>
<p><strong>शौक और निजी जीवन</strong></p>
<p>आईएएस अंजलि गर्ग न सिर्फ पढ़ाई में बल्कि कला के क्षेत्र में भी काफी प्रतिभाशाली हैं। वे सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं और उन्हें गाना गाने का शौक है। हाल ही में उनका एक गायन वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसके अलावा, आईएएस अंजलि गर्ग और आईएएस द्विज गोयल ने शादी करने का फैसला भी लिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 10:41:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: 12 घंटे की ड्यूटी के बाद UPSC की तैयारी, जानें अंजलि गर्ग के डॉक्टर से आईएएस बनने तक का सफर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>IAS Success Story: </strong>यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इसे पास करने के लिए उम्मीदवार सालों तक कड़ी मेहनत करते हैं। कई लोग अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर भी इस परीक्षा की तैयारी में जुट जाते हैं।</p>
<p>आज हम आपको ऐसी ही एक प्रेरणादायक महिला की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने न सिर्फ NEET जैसी कठिन परीक्षा पास की, बल्कि MBBS की पढ़ाई और मेडिकल इंटर्नशिप के साथ-साथ UPSC की तैयारी कर आईएएस अधिकारी बनने का सपना भी साकार किया। यह कहानी है आईएएस अंजलि गर्ग की।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/dr-anjali-garg-ias-rank.jpg" alt="Dr-Anjali-Garg-IAS-Rank" width="1200" height="900" /></p>
<p>आईएएस अंजलि गर्ग की मेहनत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163255/ias-success-story-preparation-for-upsc-after-12-hours-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-anjali-garg.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>IAS Success Story: </strong>यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इसे पास करने के लिए उम्मीदवार सालों तक कड़ी मेहनत करते हैं। कई लोग अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर भी इस परीक्षा की तैयारी में जुट जाते हैं।</p>
<p>आज हम आपको ऐसी ही एक प्रेरणादायक महिला की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने न सिर्फ NEET जैसी कठिन परीक्षा पास की, बल्कि MBBS की पढ़ाई और मेडिकल इंटर्नशिप के साथ-साथ UPSC की तैयारी कर आईएएस अधिकारी बनने का सपना भी साकार किया। यह कहानी है आईएएस अंजलि गर्ग की।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/dr-anjali-garg-ias-rank.jpg" alt="Dr-Anjali-Garg-IAS-Rank" width="1200" height="900"></img></p>
<p>आईएएस अंजलि गर्ग की मेहनत और लगन किसी भी युवा के लिए प्रेरणा है। उन्होंने अस्पताल में 12 घंटे की ड्यूटी करने के बाद भी यूपीएससी की तैयारी जारी रखी और आखिरकार सफलता हासिल की। हालांकि यह सफर आसान नहीं था, लेकिन उनके मजबूत इरादों ने उन्हें मंजिल तक पहुंचाया।</p>
<p><strong>कौन हैं आईएएस अंजलि गर्ग</strong></p>
<p>अंजलि गर्ग का जन्म 14 सितंबर 1996 को चंडीगढ़ में हुआ था। बचपन से ही उनका सपना डॉक्टर बनने का था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई चंडीगढ़ से ही पूरी की और पढ़ाई में हमेशा उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। 12वीं कक्षा में उन्होंने 96 प्रतिशत अंक हासिल किए।</p>
<p>शानदार शैक्षणिक रिकॉर्ड के बाद अंजलि ने NEET परीक्षा की तैयारी शुरू की और सफलता हासिल कर दिल्ली के प्रतिष्ठित VMMC (वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज) एवं सफदरजंग अस्पताल में MBBS में दाखिला लिया।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/dr-anjali-garg-ias-success-story.jpg" alt="Dr-Anjali-Garg-IAS-Success-Story" width="1200" height="675"></img></p>
<p><strong>MBBS के दौरान बदला नजरिया, शुरू हुई UPSC की तैयारी</strong></p>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, MBBS के तीसरे वर्ष में अंजलि ने जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को करीब से देखा। यहीं से उनके मन में समाज के लिए बड़े स्तर पर काम करने की इच्छा जागी और उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी का फैसला किया।</p>
<p>UPSC की तैयारी के दौरान उन्होंने अपनी मेडिकल इंटर्नशिप भी जारी रखी। अस्पताल में 12 घंटे की नाइट ड्यूटी के बावजूद वे कोचिंग और सेल्फ स्टडी के लिए समय निकालती रहीं। पहले प्रयास में उन्हें असफलता मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और दोबारा पूरी मेहनत से तैयारी की।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/2958923-ias-dr-anjali-garg-6.jpg" alt="2958923-ias-dr-anjali-garg-6" width="1200" height="900"></img></p>
<p><strong>दूसरे प्रयास में मिली सफलता</strong></p>
<p>अंजलि गर्ग ने दूसरे प्रयास में UPSC सिविल सेवा परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की। उन्होंने UPSC CSE 2022 में 79वीं रैंक प्राप्त की और आईएएस अधिकारी बनीं। खास बात यह है कि वे अपने बैच की मेडिकल साइंस टॉपर भी रहीं।</p>
<p><strong>शौक और निजी जीवन</strong></p>
<p>आईएएस अंजलि गर्ग न सिर्फ पढ़ाई में बल्कि कला के क्षेत्र में भी काफी प्रतिभाशाली हैं। वे सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं और उन्हें गाना गाने का शौक है। हाल ही में उनका एक गायन वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसके अलावा, आईएएस अंजलि गर्ग और आईएएस द्विज गोयल ने शादी करने का फैसला भी लिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Dec 2025 10:48:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Riya Saini: जॉब के साथ की UPSC की तैयारी, तीसरे प्रयास में रिया सैनी बनीं IAS अफसर </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>IAS Riya Saini:</strong> मुजफ्फरपुर की बेटी रिया सैनी ने यह साबित कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर जारी रहे, तो नौकरी के साथ भी यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को सफलतापूर्वक क्रैक किया जा सकता है। यूपीएससी 2024 के घोषित नतीजों में रिया ने ऑल इंडिया रैंक 22 हासिल कर आईएएस बनने का गौरव प्राप्त किया है। यह उनका तीसरा प्रयास था।</p>
<h3><strong>पहले प्रयास में मिली रेलवे सेवा</strong></h3>
<p>रिया सैनी मूल रूप से मुजफ्फरपुर जिले के टांडा गांव की रहने वाली हैं। बीटेक के बाद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। पहले ही प्रयास में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161858/ias-riya-saini-prepared-for-upsc-with-job-riya-saini"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/riya-1-2025-11-bac3b96743d2b4f8202c86f5f49baf7a.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>IAS Riya Saini:</strong> मुजफ्फरपुर की बेटी रिया सैनी ने यह साबित कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर जारी रहे, तो नौकरी के साथ भी यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को सफलतापूर्वक क्रैक किया जा सकता है। यूपीएससी 2024 के घोषित नतीजों में रिया ने ऑल इंडिया रैंक 22 हासिल कर आईएएस बनने का गौरव प्राप्त किया है। यह उनका तीसरा प्रयास था।</p>
<h3><strong>पहले प्रयास में मिली रेलवे सेवा</strong></h3>
<p>रिया सैनी मूल रूप से मुजफ्फरपुर जिले के टांडा गांव की रहने वाली हैं। बीटेक के बाद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। पहले ही प्रयास में उनका चयन भारतीय रेलवे ट्रैफिक सेवा (IRTS) में हो गया था और उनकी पोस्टिंग लखनऊ में हुई। लेकिन रिया का लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ IAS था, इसलिए रेलवे की नौकरी के साथ उन्होंने परीक्षा की तैयारी जारी रखी।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/riya-1-2025-11-bac3b96743d2b4f8202c86f5f49baf7a.jpg" alt="riya-1-2025-11-bac3b96743d2b4f8202c86f5f49baf7a" width="807" height="807"></img></p>
<h3><strong>आईएएस बनने के पीछे मजबूत रहा परिवार का साथ</strong></h3>
<p>रिया के पिता मुकेश कुमार सेना की मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस (MES) में मुख्य इंजीनियर हैं, जबकि मां प्रीति सैनी गृहिणी हैं। उनका छोटा भाई अनमोल राष्ट्रीय स्तर का टेनिस खिलाड़ी है। रिया ने कहा कि परिवार का unwavering सपोर्ट ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा।</p>
<h3><strong>टाइम मैनेजमेंट बना सफलता की कुंजी</strong></h3>
<p>नौकरी के साथ तैयारी करना आसान नहीं था, लेकिन रिया ने इसे रणनीति और अनुशासन के साथ पूरा किया।<br />वे रोजाना 7–8 घंटे पढ़ाई करती थीं और समयबद्ध तरीके से अपने लक्ष्य पर फोकस रखती थीं। यूपीएससी मेन्स में उन्होंने समाजशास्त्र (Sociology) को अपना वैकल्पिक विषय चुना।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/riya-7-2025-11-b6d71e96568dfd5c5e51fff8be0c729c.jpg" alt="riya-7-2025-11-b6d71e96568dfd5c5e51fff8be0c729c" width="807" height="807"></img></p>
<h3><strong>रिजल्ट के बाद भावुक हुईं रिया</strong></h3>
<p>नतीजा आने के बाद रिया ने सोशल मीडिया पर लिखा कि तीन अटेम्प्ट, दो इंटरव्यू और एक सर्विस के बाद UPSC PDF में 22वें नंबर पर अपना नाम देखना एक सपने जैसा है, जिससे मैं जागना नहीं चाहती।</p>
<p>उन्होंने कहा कि UPSC ने उन्हें वे सबक सिखाए हैं जिन्हें वे जिंदगी भर याद रखेंगी। साथ ही उन्होंने अपने परिवार को “मजबूत सहारा” बताया।</p>
<h3><strong>युवा उम्मीदवारों के लिए मिसाल</strong></h3>
<p>रिया सैनी की सफलता उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो नौकरी के साथ यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं। रिया ने दिखाया कि सही रणनीति, निरंतरता और आत्मविश्वास से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Nov 2025 15:41:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: किसान की बेटी बनी IAS अधिकारी, पढ़ें तपस्या परिहार की सक्सेस स्टोरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: हर साल भारत में लाखों छात्र UPSC की परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही इस कठिनतम परीक्षा में सफलता प्राप्त कर पाते हैं। जो इसे पास करते हैं, उनमें जुनून, समर्पण और कड़ी मेहनत का जबरदस्त मिश्रण होता है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है IAS तपस्या परिहार की, जिन्होंने तमाम मुश्किलों के बावजूद UPSC 2017 में ऑल इंडिया रैंक 23 हासिल कर यह साबित किया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी सपना हकीकत बन सकता है।</p>
<p><strong>छोटे से गांव से निकली बड़ी सोच</strong></p>
<p>तपस्या मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के एक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/160449/ias-success-story-farmers-daughter-becomes-ias-officer-read-success"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/3d89f015d491e6f505428e42844aa3f7.webp" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: हर साल भारत में लाखों छात्र UPSC की परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही इस कठिनतम परीक्षा में सफलता प्राप्त कर पाते हैं। जो इसे पास करते हैं, उनमें जुनून, समर्पण और कड़ी मेहनत का जबरदस्त मिश्रण होता है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है IAS तपस्या परिहार की, जिन्होंने तमाम मुश्किलों के बावजूद UPSC 2017 में ऑल इंडिया रैंक 23 हासिल कर यह साबित किया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी सपना हकीकत बन सकता है।</p>
<p><strong>छोटे से गांव से निकली बड़ी सोच</strong></p>
<p>तपस्या मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के एक छोटे से गांव जबेरा से आती हैं। उनके पिता किसान हैं और परिवार आर्थिक रूप से सामान्य स्थिति में था। गांव की एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली तपस्या ने संसाधनों की कमी को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने खुद को हमेशा पढ़ाई और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रखा।</p>
<p><strong>केंद्रीय विद्यालय से ILS लॉ कॉलेज तक</strong></p>
<p>तपस्या ने शुरुआती पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से की और आगे की पढ़ाई के लिए पुणे स्थित ILS Law College से कानून की डिग्री प्राप्त की। यहीं से उनके मन में UPSC की तैयारी करने का विचार जन्मा। कानून की पढ़ाई के दौरान उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखना शुरू किया।</p>
<p><strong>पहले प्रयास में असफलता</strong></p>
<p>UPSC के पहले प्रयास में तपस्या प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं कर पाईं। यह असफलता किसी के भी आत्मविश्वास को डगमगा सकती है, लेकिन तपस्या ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी रणनीति पर पुनर्विचार किया और यह तय किया कि अगली बार तैयारी और मजबूत होनी चाहिए।</p>
<p><strong>बिना कोचिंग के की सेल्फ स्टडी</strong></p>
<p>दूसरे प्रयास में तपस्या ने कोचिंग पर निर्भर रहने के बजाय सेल्फ स्टडी को चुना। उन्होंने मॉक टेस्ट, करंट अफेयर्स, और लगातार रिवीजन पर फोकस किया। साथ ही सोशल मीडिया से दूरी बनाकर अपनी ऊर्जा सिर्फ पढ़ाई में लगाई। उनका मानना था कि सही रणनीति और निरंतरता ही सफलता की कुंजी है।</p>
<p><strong>AIR 23 और IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा</strong></p>
<p>तपस्या की मेहनत रंग लाई और उन्होंने UPSC 2017 में ऑल इंडिया रैंक 23 हासिल की। इस शानदार उपलब्धि के साथ वे IAS अधिकारी बनीं और लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गईं। उनका यह सफर बताता है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास ईमानदार हों, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Nov 2025 20:31:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IPS Anshika Jain: 5 बार असफल, फिर भी नहीं टूटी हिम्मत, दिल छू लेगी IPS अंशिका जैन की सक्सेस स्टोरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">IPS Anshika Jain: माता-पिता</span> <span class="cf0">का</span> <span class="cf0">साया</span> <span class="cf0">सिर</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">उठ</span> <span class="cf0">जाए</span> <span class="cf0">तो</span> <span class="cf0">जिंदगी</span> <span class="cf0">एक</span> <span class="cf0">पल</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">बदल</span> <span class="cf0">जाती</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">लेकिन</span> <span class="cf0">अगर</span><span class="cf0"> हिम्मत और विश्वास बना रहे, तो मुश्किल रास्ते भी आसान हो जाते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक </span><span class="cf0">कहानी</span><span class="cf0"> है दिल्ली की </span><span class="cf0">अंशिका</span><span class="cf0"> जैन (</span><span class="cf1">Anshika</span> <span class="cf1">Jain</span><span class="cf1">) </span><span class="cf0">की, जिन्होंने बचपन में मां-बाप को खो दिया, दादी के सहारे बड़ी हुईं और पांच बार असफल होने के बाद भी हार नहीं मानी। आखिरकार छठे प्रयास में </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">परीक्षा पास कर </span><span class="cf1">IPS </span><span class="cf0">अधिकारी बनीं।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">दादी का सपना </span><span class="cf2">— </span><span class="cf0">पोती बने अधिकारी</span></strong></p>
<p><span class="cf0">अंशिका</span><span class="cf0"> जब सिर्फ 5 साल की थीं, तभी उनके माता-पिता का</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/159292/ips-anshika-jain-failed-5-times-but-still-did-not"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/news---2025-11-08t102706.012.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">IPS Anshika Jain: माता-पिता</span> <span class="cf0">का</span> <span class="cf0">साया</span> <span class="cf0">सिर</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">उठ</span> <span class="cf0">जाए</span> <span class="cf0">तो</span> <span class="cf0">जिंदगी</span> <span class="cf0">एक</span> <span class="cf0">पल</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">बदल</span> <span class="cf0">जाती</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">लेकिन</span> <span class="cf0">अगर</span><span class="cf0"> हिम्मत और विश्वास बना रहे, तो मुश्किल रास्ते भी आसान हो जाते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक </span><span class="cf0">कहानी</span><span class="cf0"> है दिल्ली की </span><span class="cf0">अंशिका</span><span class="cf0"> जैन (</span><span class="cf1">Anshika</span> <span class="cf1">Jain</span><span class="cf1">) </span><span class="cf0">की, जिन्होंने बचपन में मां-बाप को खो दिया, दादी के सहारे बड़ी हुईं और पांच बार असफल होने के बाद भी हार नहीं मानी। आखिरकार छठे प्रयास में </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">परीक्षा पास कर </span><span class="cf1">IPS </span><span class="cf0">अधिकारी बनीं।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">दादी का सपना </span><span class="cf2">— </span><span class="cf0">पोती बने अधिकारी</span></strong></p>
<p><span class="cf0">अंशिका</span><span class="cf0"> जब सिर्फ 5 साल की थीं, तभी उनके माता-पिता का निधन हो गया था। उनका पालन-पोषण दादी और चाचा ने किया। दादी एक </span><span class="cf0">टीचर</span><span class="cf0"> थीं और हमेशा कहती थीं कि शिक्षा ही सबसे बड़ी पूंजी है। दादी ने ही उन्हें सिविल सेवा में जाने की प्रेरणा दी। तभी से </span><span class="cf0">अंशिका</span> <span class="cf0">ने</span><span class="cf0"> निश्चय कर लिया कि एक दिन वह अफसर बनकर दिखाएंगी।</span></p>
<p><span class="cf0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/navbharat-times-(5).jpg" alt="navbharat-times (5)" width="700" height="875"></img></span></p>
<p><strong><span class="cf0">नौकरी छोड़ी और </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">की तैयारी </span><span class="cf0">शुरू</span><span class="cf0"> की</span></strong></p>
<p><span class="cf0">अंशिका</span><span class="cf0"> ने दिल्ली </span><span class="cf0">यूनिवर्सिटी</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">रामजस</span> <span class="cf0">कॉलेज</span><span class="cf0"> से </span><span class="cf0">बीकॉम</span><span class="cf0"> और </span><span class="cf0">एमकॉम</span><span class="cf0"> की पढ़ाई की। इस दौरान उन्हें एक </span><span class="cf0">मल्टीनेशनल</span><span class="cf0"> कंपनी में नौकरी </span><span class="cf0">भी</span><span class="cf0"> मिली, लेकिन उन्होंने अपना सपना चुनते हुए नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">की तैयारी में </span><span class="cf0">लग</span><span class="cf0"> गईं।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">दादी के निधन ने तोड़ा, लेकिन हिम्मत नहीं हारी</span></strong></p>
<p><span class="cf0">साल 2019 में </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">की तैयारी के दौरान </span><span class="cf0">दादी</span><span class="cf0"> का निधन हो गया, जो उनके लिए दूसरा सबसे बड़ा झटका था। फिर भी उन्होंने दादी के </span><span class="cf0">शब्दों</span><span class="cf0"> को याद किया </span><span class="cf2">— “</span><span class="cf0">सपनों से पीछे नहीं हटना।” यही सोच उन्हें दोबारा पढ़ाई की ओर लौटने की शक्ति देती रही।</span></p>
<p><span class="cf0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/navbharat-times-(6).jpg" alt="navbharat-times (6)" width="700" height="700"></img></span></p>
<p><strong><span class="cf0">पांच बार </span><span class="cf0">असफलता</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">छठी</span> <span class="cf0">बार</span> <span class="cf0">मिली</span> <span class="cf0">सफलता</span></strong></p>
<p><span class="cf0">अंशिका</span> <span class="cf0">ने</span><span class="cf0"> पांच बार असफलता का सामना किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी रणनीति बदली, </span><span class="cf0">मॉक</span> <span class="cf0">टेस्ट</span><span class="cf0"> देना शुरू किया और अपने कमजोर विषयों पर काम किया। कॉमर्स और </span><span class="cf0">अकाउंटेंसी</span><span class="cf0"> को वैकल्पिक विषय चुना। आखिरकार </span><span class="cf1">UPSC 2022 </span><span class="cf0">में उन्होंने </span><span class="cf0">ऑल</span><span class="cf0"> इंडिया </span><span class="cf0">रैंक</span><span class="cf0"> 306 हासिल की और </span><span class="cf1">IPS </span><span class="cf0">अधिकारी बनीं।</span></p>
<p><span class="cf0">सफलता के बाद </span><span class="cf0">अंशिका</span><span class="cf0"> ने </span><span class="cf0">सोशल</span><span class="cf0"> मीडिया पर अपना संघर्ष साझा करते हुए लिखा कि </span><span class="cf2">6 </span><span class="cf0">सालों की मेहनत आखिरकार </span><span class="cf0">रंग</span><span class="cf0"> लाई। कई बार असफल होने और खुद पर शक करने के बावजूद, धैर्य, समर्पण और परिवार के सहयोग से मैंने </span><span class="cf1">IPS </span><span class="cf0">बनने का सपना पूरा किया।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Nov 2025 10:29:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: ब्यूटी विद ब्रेन की मिसाल है ये IAS अफसर, पढ़ें सक्सेस स्टोरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: हर साल लाखों युवा यूपीएससी की परीक्षा में बैठते हैं लेकिन सिर्फ मुट्ठीभर ही इसे पास कर सफलता हासिल कर पाते हैं। आज हम आपको बिहार की ऐसी लड़की के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी जिंदगी की शुरआत बहुत मुश्किलों में हुई।</p>
<p>पूरे गांव वाले उसकी पढ़ाई के खिलाफ थे। उनके माता-पिता ने मेहनत की ताकि प्रिया को पढ़ा सके। प्रिया रानी एक IAS अधिकारी है और सोशल मीडिया पर काफी मशूह है। उनकी स्टोरी लाखों युवाओं को मोटिवेट करने वाली है।</p>
<p>प्रिया रानी फुलवारी शरीफ के कुड़कुरी गांव की रहने वाली है उन्होंने यूपीएससी परीक्षा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155945/success-story-is-an-example-of-beauty-with-brain-this"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/ias-priya-rani-780x470.webp" alt=""></a><br /><p>Success Story: हर साल लाखों युवा यूपीएससी की परीक्षा में बैठते हैं लेकिन सिर्फ मुट्ठीभर ही इसे पास कर सफलता हासिल कर पाते हैं। आज हम आपको बिहार की ऐसी लड़की के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी जिंदगी की शुरआत बहुत मुश्किलों में हुई।</p>
<p>पूरे गांव वाले उसकी पढ़ाई के खिलाफ थे। उनके माता-पिता ने मेहनत की ताकि प्रिया को पढ़ा सके। प्रिया रानी एक IAS अधिकारी है और सोशल मीडिया पर काफी मशूह है। उनकी स्टोरी लाखों युवाओं को मोटिवेट करने वाली है।</p>
<p>प्रिया रानी फुलवारी शरीफ के कुड़कुरी गांव की रहने वाली है उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में 69वीं रैंक हासिल कर बिहार का नाम रोशन किया। प्रिया रानी को पढ़ाई के लिए बहुत विरोध झेलना पड़ा लेकिन उनके दादा ने उनका पूरा साथ दिया और उनकी पढ़ाई में मदद की। अपनी जिद्द और लगन के कारण प्रिया आज IAS अफसर बन गई।</p>
<p>BIT मेसरा से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री के बाद प्रिया ने UPSC की तैयारी शुरु कर दी। दूसरे प्रयास में उन्हें इंडियन डिफेंस सर्विस में नौकरी मिल गई लेकिन IAS बनने का उनका सपना अधूरा रह गया। तीसरे प्रयास में भी असफल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। आखिरकार चौथे प्रयास में यूपीएससी क्रैक कर IAS बन गई।</p>
<p>प्रिया रानी का कहना है कि उनकी सफलता का राज नियमति पढ़ाई और मेहनत है। वो रोजाना सुबह 4 बजे उठकर पढ़ती थी। उन्होंने इकोनॉमिक्स को मेन सबजेक्ट बनाया और एनसीआरटी की किताबों और अखबारों पर ध्यान दिया।। उनका मानना है कि शिक्षा ही जिंदगी की सबसे बड़ी संपत्ति है। वो युवाओं को टारगेट के प्रति समर्पित रहने की सलाह दी है।</p>
<p>जो लोग उनकी पढ़ाई का विरोध करते थे आज वे उनकी कामयाबी पर गर्व महसूस करते हैं। प्रिया ने साबित कर दिया कि मेहनत और लगन से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Sep 2025 19:55:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: किसान की बेटी बनी IAS अफसर, गांव से सीधा UPSC की टॉप लिस्ट में</title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: भारत</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">हर</span> <span class="cf0">साल</span> <span class="cf0">लाखों</span> <span class="cf0">छात्र</span> <span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">जैसी</span> <span class="cf0">कठिन</span> <span class="cf0">परीक्षा</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">तैयारी</span> <span class="cf0">करते</span> <span class="cf0">हैं</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">लेकिन</span> <span class="cf0">केवल</span> <span class="cf0">वही</span> <span class="cf0">सफल</span> <span class="cf0">होते</span> <span class="cf0">हैं</span> <span class="cf0">जो</span> <span class="cf0">दृढ़</span> <span class="cf0">निश्चय</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">मेहनत</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">आत्मविश्वास</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">भरे</span> <span class="cf0">होते</span> <span class="cf0">हैं</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">ऐसी</span> <span class="cf0">ही</span> <span class="cf0">एक</span> <span class="cf0">प्रेरणादायक</span> <span class="cf0">कहानी</span> <span class="cf0">है</span> <span class="cf0">मध्य</span> <span class="cf0">प्रदेश</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">तपस्या</span> <span class="cf0">परिहार</span> <span class="cf0">की</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">जिन्होंने</span> <span class="cf1">UPSC 2017 </span><span class="cf0">में</span> <span class="cf0">ऑल</span> <span class="cf0">इंडिया</span> <span class="cf0">रैंक</span><span class="cf0"> 23 </span><span class="cf0">हासिल</span> <span class="cf0">कर</span> <span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">अधिकारी</span> <span class="cf0">बनने</span> <span class="cf0">का</span> <span class="cf0">सपना</span> <span class="cf0">पूरा</span> <span class="cf0">किया</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">उनका</span> <span class="cf0">सफर</span> <span class="cf0">यह</span> <span class="cf0">बताता</span> <span class="cf0">है</span> <span class="cf0">कि</span> <span class="cf0">अगर</span> <span class="cf0">आपका</span> <span class="cf0">इरादा</span> <span class="cf0">मजबूत</span> <span class="cf0">हो</span> <span class="cf0">तो</span> <span class="cf0">सपने</span> <span class="cf0">हकीकत</span> <span class="cf0">बन</span> <span class="cf0">सकते</span> <span class="cf0">हैं</span><span class="cf0">।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">छोटे</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">गांव</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">तक की उड़ान</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">तपस्या परिहार मध्य प्रदेश के </span><span class="cf0">नरसिंहपुर</span><span class="cf0"> जिले</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155462/ias-success-story-ias-officer-became-the-daughter-of-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/ias-success-story.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: भारत</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">हर</span> <span class="cf0">साल</span> <span class="cf0">लाखों</span> <span class="cf0">छात्र</span> <span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">जैसी</span> <span class="cf0">कठिन</span> <span class="cf0">परीक्षा</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">तैयारी</span> <span class="cf0">करते</span> <span class="cf0">हैं</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">लेकिन</span> <span class="cf0">केवल</span> <span class="cf0">वही</span> <span class="cf0">सफल</span> <span class="cf0">होते</span> <span class="cf0">हैं</span> <span class="cf0">जो</span> <span class="cf0">दृढ़</span> <span class="cf0">निश्चय</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">मेहनत</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">आत्मविश्वास</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">भरे</span> <span class="cf0">होते</span> <span class="cf0">हैं</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">ऐसी</span> <span class="cf0">ही</span> <span class="cf0">एक</span> <span class="cf0">प्रेरणादायक</span> <span class="cf0">कहानी</span> <span class="cf0">है</span> <span class="cf0">मध्य</span> <span class="cf0">प्रदेश</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">तपस्या</span> <span class="cf0">परिहार</span> <span class="cf0">की</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">जिन्होंने</span> <span class="cf1">UPSC 2017 </span><span class="cf0">में</span> <span class="cf0">ऑल</span> <span class="cf0">इंडिया</span> <span class="cf0">रैंक</span><span class="cf0"> 23 </span><span class="cf0">हासिल</span> <span class="cf0">कर</span> <span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">अधिकारी</span> <span class="cf0">बनने</span> <span class="cf0">का</span> <span class="cf0">सपना</span> <span class="cf0">पूरा</span> <span class="cf0">किया</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">उनका</span> <span class="cf0">सफर</span> <span class="cf0">यह</span> <span class="cf0">बताता</span> <span class="cf0">है</span> <span class="cf0">कि</span> <span class="cf0">अगर</span> <span class="cf0">आपका</span> <span class="cf0">इरादा</span> <span class="cf0">मजबूत</span> <span class="cf0">हो</span> <span class="cf0">तो</span> <span class="cf0">सपने</span> <span class="cf0">हकीकत</span> <span class="cf0">बन</span> <span class="cf0">सकते</span> <span class="cf0">हैं</span><span class="cf0">।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">छोटे</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">गांव</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">तक की उड़ान</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">तपस्या परिहार मध्य प्रदेश के </span><span class="cf0">नरसिंहपुर</span><span class="cf0"> जिले के छोटे से गांव </span><span class="cf0">जबेरा</span><span class="cf0"> की रहने वाली हैं। उनके पिता एक किसान हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति साधारण थी। लेकिन तपस्या ने कभी अपने सीमित संसाधनों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने यह साबित कर दिया कि सफलता सिर्फ शहरों की नहीं होती, गांव की बेटियां भी अपने हौसले और मेहनत से देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा पास कर सकती हैं।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">केंद्रीय विद्यालय से शिक्षा और कानून की डिग्री</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">तपस्या की शुरुआती पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से हुई। इसके बाद उन्होंने </span><span class="cf1">ILS </span><span class="cf1">Law</span> <span class="cf1">College</span><span class="cf1">, </span><span class="cf0">पुणे</span><span class="cf0"> से कानून की डिग्री ली। </span><span class="cf0">कॉलेज</span><span class="cf0"> के दिनों में ही उनके मन में </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">का सपना आकार लेने लगा था। कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">की तैयारी शुरू की।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">पहले</span> <span class="cf0">प्रयास</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">असफलता</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">लेकिन</span> <span class="cf0">हिम्मत</span> <span class="cf0">नहीं</span> <span class="cf0">हारी</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">तपस्या</span> <span class="cf0">ने</span> <span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">में</span> <span class="cf0">पहली</span> <span class="cf0">बार</span><span class="cf0"> 2016 </span><span class="cf0">में</span><span class="cf0"> प्रयास किया, लेकिन वे </span><span class="cf0">प्रीलिम्स</span><span class="cf0"> भी </span><span class="cf0">क्लियर</span><span class="cf0"> नहीं कर सकीं। इस असफलता से वे निराश जरूर हुईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने खुद से सवाल किए, खुद को समझा और दोबारा तैयारी में लग गईं।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">सेल्फ</span> <span class="cf0">स्टडी</span><span class="cf0"> और </span><span class="cf0">स्मार्ट</span><span class="cf0"> रणनीति बनी सफलता की कुंजी</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">दूसरे प्रयास में तपस्या ने अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी। उन्होंने </span><span class="cf0">कोचिंग</span><span class="cf0"> नहीं ली और पूरी तैयारी </span><span class="cf0">सेल्फ</span> <span class="cf0">स्टडी</span><span class="cf0"> से की। </span><span class="cf0">मॉक</span> <span class="cf0">टेस्ट</span><span class="cf0">, करंट </span><span class="cf0">अफेयर्स</span><span class="cf0"> और निरंतर </span><span class="cf0">रिवीजन</span><span class="cf0"> पर ध्यान दिया। उन्होंने </span><span class="cf0">सोशल</span><span class="cf0"> मीडिया से दूरी बनाकर पढ़ाई में पूरा ध्यान लगाया और समय का भरपूर उपयोग किया।</span></p>
<p><span class="cf0">तपस्या की मेहनत रंग लाई और </span><span class="cf1">UPSC 2017 </span><span class="cf0">में</span> <span class="cf0">उन्होंने</span> <span class="cf1">AIR 23 </span><span class="cf0">हासिल</span> <span class="cf0">की</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">उनका</span> <span class="cf0">चयन</span> <span class="cf0">भारतीय</span> <span class="cf0">प्रशासनिक</span> <span class="cf0">सेवा</span><span class="cf0"> (</span><span class="cf1">IAS) </span><span class="cf0">में</span> <span class="cf0">हुआ</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">आज</span> <span class="cf0">वे</span><span class="cf0"> न </span><span class="cf0">सिर्फ</span> <span class="cf0">अपने</span> <span class="cf0">गांव</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">राज्य</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">बल्कि</span> <span class="cf0">देशभर</span><span class="cf0"> की बेटियों के लिए </span><span class="cf0">एक</span><span class="cf0"> मिसाल बन चुकी हैं।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Sep 2025 17:37:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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