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                <title>यूपीएससी - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>यूपीएससी RSS Feed</description>
                
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                <title>IAS Success: डॉक्टर बनने का टूटा सपना, 120 दिन की तैयारी से तरुणी पांडे बनीं आईएएस अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: मिडिल क्लास परिवार में पली-बढ़ीं तरुणी पांडे बचपन से डॉक्टर बनना चाहती थीं। उन्होंने एमबीबीएस में दाखिला भी ले लिया था और दूसरे साल की पढ़ाई शुरू हो चुकी थी। लेकिन किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया कि उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी। जीवन के कई उतार-चढ़ावों के बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में टॉपर्स की सूची में जगह बनाते हुए 14वीं रैंक हासिल की। उनकी कहानी संघर्ष, हौसले और आत्मविश्वास की मिसाल है।</p>
<h4><strong>पश्चिम बंगाल में जन्म, झारखंड में परवरिश</strong></h4>
<p>तरुणी का जन्म पश्चिम बंगाल के चित्तरंजन में हुआ, लेकिन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172451/ias-success-broken-dream-of-becoming-a-doctor-taruni-pandey"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/ias-success-story-(31).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: मिडिल क्लास परिवार में पली-बढ़ीं तरुणी पांडे बचपन से डॉक्टर बनना चाहती थीं। उन्होंने एमबीबीएस में दाखिला भी ले लिया था और दूसरे साल की पढ़ाई शुरू हो चुकी थी। लेकिन किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया कि उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी। जीवन के कई उतार-चढ़ावों के बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में टॉपर्स की सूची में जगह बनाते हुए 14वीं रैंक हासिल की। उनकी कहानी संघर्ष, हौसले और आत्मविश्वास की मिसाल है।</p>
<h4><strong>पश्चिम बंगाल में जन्म, झारखंड में परवरिश</strong></h4>
<p>तरुणी का जन्म पश्चिम बंगाल के चित्तरंजन में हुआ, लेकिन उनका बचपन झारखंड के जामताड़ा में बीता। सीमित संसाधनों वाले मध्यमवर्गीय परिवार में पली-बढ़ीं तरुणी ने 10वीं तक की पढ़ाई प्राइवेट स्कूल में की। आर्थिक तंगी के कारण 10वीं के बाद उन्हें सरकारी स्कूल में दाखिला लेना पड़ा। बावजूद इसके, वे पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहीं।</p>
<h4><strong>एमबीबीएस अधूरा, फिर IGNOU से नई शुरुआत</strong></h4>
<p>12वीं के बाद उनका चयन सिक्किम के एक मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के लिए हो गया। डॉक्टर बनने का सपना सच होता नजर आ रहा था, लेकिन दूसरे वर्ष में अचानक तबीयत खराब होने के कारण उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी और घर लौटना पड़ा।</p>
<p>इसके बाद उन्होंने <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Indira Gandhi National Open University</span></span> (IGNOU) से ग्रेजुएशन और पोस्टग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। हालांकि उस समय तक उन्हें अपने जीवन की नई दिशा का अंदाजा नहीं था।</p>
<h4><strong>2016 का हादसा बना टर्निंग पॉइंट</strong></h4>
<p>साल 2016 में परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनकी बड़ी बहन के पति, जो <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Central Reserve Police Force</span></span> (CRPF) में असिस्टेंट कमांडेंट थे, श्रीनगर में शहीद हो गए। इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर दिया।</p>
<p>बहन की नौकरी से जुड़े मामलों में अधिकारियों से मिलने के दौरान तरुणी को प्रशासनिक सेवा की जिम्मेदारी और प्रभाव का एहसास हुआ। तभी उन्होंने सिविल सेवा में जाने का निर्णय लिया।</p>
<h4><strong>बिना कोचिंग, सिर्फ 120 दिन की तैयारी</strong></h4>
<p>तरुणी ने कभी कोचिंग नहीं ली थी और सेल्फ स्टडी पर भरोसा किया। आयु सीमा की वजह से यह उनका पहला और अंतिम प्रयास था। उन्होंने यूट्यूब वीडियो, नोट्स और किताबों की मदद से करीब 120 दिन तैयारी की।</p>
<p>साल 2021 में उन्होंने <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Union Public Service Commission</span></span> (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में 14वीं रैंक हासिल कर IAS कैडर प्राप्त किया।</p>
<p>रिजल्ट आने का दिन उनके जीवन का सबसे यादगार पल बन गया। शाम को परिणाम मिलने के बाद उन्होंने अपनी मां के घर लौटने का इंतजार किया और फिर रात में परिवार को खुशखबरी दी। बहन की आंखों में आंसू थे, भाई को यकीन नहीं हो रहा था, मां खुशी से नाच रही थीं और पिता भावुक होकर रो पड़े।</p>
<p>तरुणी ने उन पलों को डिजिटल मेमोरी में कैद किया और आज भी उन्हें अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानती हैं।</p>
<h4><strong>वर्तमान पद</strong></h4>
<p>वर्तमान में तरुणी पांडे दिल्ली स्थित संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग के अंतर्गत भारतीय संचार वित्त सेवा (IP&amp;TAFS) में ग्रुप ‘A’ अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 12:22:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: 2 साल के बच्चे की मां ने IAS बनकर रचा इतिहास, पढ़ें पूरी सक्सेस स्टोरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: शादी के बाद अक्सर यह मान लिया जाता है कि लड़की की प्राथमिक जिम्मेदारी केवल घर और परिवार तक सीमित रह जाती है। लेकिन हरियाणा की आईएएस अधिकारी पुष्पलता यादव ने इस रूढ़िवादी सोच को तोड़ते हुए साबित किया कि अगर परिवार का साथ मिले तो महिलाएं हर मुकाम हासिल कर सकती हैं। उनकी सफलता की कहानी दृढ़ निश्चय, कड़ी मेहनत और पारिवारिक सहयोग की मिसाल है।</p>
<p><strong>छोटे गांव से आईएएस तक का सफर</strong></p>
<p>हरियाणा के रेवाड़ी जिले के छोटे से गांव खुशबुरा से आने वाली पुष्पलता यादव ने वर्ष 2017 में Union Public Service Commission (UPSC)</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172316/ias-success-story-mother-of-2-year-old-child-created"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/ias-success-story-(30).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: शादी के बाद अक्सर यह मान लिया जाता है कि लड़की की प्राथमिक जिम्मेदारी केवल घर और परिवार तक सीमित रह जाती है। लेकिन हरियाणा की आईएएस अधिकारी पुष्पलता यादव ने इस रूढ़िवादी सोच को तोड़ते हुए साबित किया कि अगर परिवार का साथ मिले तो महिलाएं हर मुकाम हासिल कर सकती हैं। उनकी सफलता की कहानी दृढ़ निश्चय, कड़ी मेहनत और पारिवारिक सहयोग की मिसाल है।</p>
<p><strong>छोटे गांव से आईएएस तक का सफर</strong></p>
<p>हरियाणा के रेवाड़ी जिले के छोटे से गांव खुशबुरा से आने वाली पुष्पलता यादव ने वर्ष 2017 में Union Public Service Commission (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में 80वीं रैंक हासिल की। यह उपलब्धि उन्होंने ऐसे समय में हासिल की, जब वे शादीशुदा थीं, दो साल के बच्चे की मां थीं और बैंक में नौकरी भी कर रही थीं।</p>
<p><strong>शादी के बाद भी नहीं छोड़ा सपना</strong></p>
<p>पुष्पलता की स्कूली शिक्षा गांव में ही हुई। साल 2011 में उनकी शादी हो गई और वे मानेसर में रहने लगीं। शादी से पहले वे एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत थीं। बाद में उनका चयन स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर हुआ। शादी के बाद भी उन्होंने नौकरी जारी रखी और परिवार की जिम्मेदारियों के साथ अपने करियर को संतुलित किया।</p>
<p><strong>पढ़ाई जारी रखकर बढ़ाया कदम</strong></p>
<p>शादी के बाद उन्होंने आगे पढ़ाई करने की इच्छा जताई, जिसमें पति और ससुराल वालों ने पूरा सहयोग दिया। वर्ष 2016 में उन्होंने बीएससी की डिग्री प्राप्त की और इसके बाद एमबीए भी किया। हालांकि उनका अंतिम लक्ष्य सिविल सेवा में जाना ही था।</p>
<p><strong>परिवार बना सबसे बड़ी ताकत</strong></p>
<p>यूपीएससी की तैयारी के दौरान उनका परिवार उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। जब वे पढ़ाई करती थीं, तो उनके पति दो साल के बेटे की देखभाल करते थे, जबकि सास-ससुर घर के अन्य कामों में सहयोग करते थे। वे रोज सुबह 4 बजे उठकर पढ़ाई करती थीं, ताकि घर और नौकरी के बीच तैयारी में कोई कमी न रह जाए।</p>
<p><strong>दो असफलताओं के बाद भी नहीं मानी हार</strong></p>
<p>पहले दो प्रयासों में उन्हें सफलता नहीं मिली। प्रीलिम्स पास करने के बाद वे मेन्स परीक्षा में सफल नहीं हो पाईं। इससे उनका मनोबल डगमगाया, लेकिन परिवार ने उनका हौसला बढ़ाया। लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने वर्ष 2017 में देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 80वीं रैंक हासिल कर आईएएस बनने का सपना साकार कर लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 11:54:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: लाखों की नौकरी छोड़ शुरू की यूपीएससी की तैयारी, AIR-6 लाकर बनीं IAS विशाखा यादव</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: इंजीनियरिंग के बाद जिंदगी पूरी तरह सेट लग रही थी। मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी, अच्छी-खासी सैलरी और सुरक्षित भविष्य—सब कुछ मौजूद था। लेकिन मन के अंदर कुछ अलग करने की चाह थी, ऐसी पहचान बनाने की, जो समाज के लिए मायने रखे। यही चाह कब IAS बनने का जुनून बन गई, यह विशाखा यादव को भी पता नहीं चला। आज IAS विशाखा यादव की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आरामदायक जिंदगी छोड़कर कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं।</p>
<h5>दिल्ली पुलिस में दारोगा हैं पिता</h5>
<p>विशाखा यादव दिल्ली के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167038/ias-success-story-left-job-worth-lakhs-and-started-preparing"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-vishakha-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: इंजीनियरिंग के बाद जिंदगी पूरी तरह सेट लग रही थी। मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी, अच्छी-खासी सैलरी और सुरक्षित भविष्य—सब कुछ मौजूद था। लेकिन मन के अंदर कुछ अलग करने की चाह थी, ऐसी पहचान बनाने की, जो समाज के लिए मायने रखे। यही चाह कब IAS बनने का जुनून बन गई, यह विशाखा यादव को भी पता नहीं चला। आज IAS विशाखा यादव की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आरामदायक जिंदगी छोड़कर कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं।</p>
<h5>दिल्ली पुलिस में दारोगा हैं पिता</h5>
<p>विशाखा यादव दिल्ली के द्वारका की रहने वाली हैं। उनके पिता राजकुमार यादव दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) हैं, जबकि मां एक गृहिणी हैं। परिवार का पूरा सपोर्ट विशाखा को हमेशा मिला। खासतौर पर उनकी मां हर कदम पर उनके साथ खड़ी रहीं। विशाखा कई बार कह चुकी हैं कि आज वह जो कुछ भी हैं, उसमें मां का योगदान सबसे बड़ा है।</p>
<h5>इंजीनियरिंग के बाद चुना UPSC का रास्ता</h5>
<p>12वीं तक की पढ़ाई दिल्ली से करने के बाद विशाखा ने इंजीनियरिंग करने का फैसला लिया। उन्होंने दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) से बीटेक किया। साल 2014 में ग्रेजुएशन के बाद उन्हें सिस्को कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी मिल गई। करीब दो साल तक उन्होंने बेंगलुरु में काम किया और अच्छी सैलरी कमाई।</p>
<h5>लाखों की टेक जॉब छोड़ UPSC की तैयारी</h5>
<p>पैसा और सुविधाएं थीं, लेकिन सिविल सेवा जैसी संतुष्टि नहीं थी। इसी सोच के साथ विशाखा ने नौकरी छोड़ दी और दिल्ली आकर फुल-टाइम UPSC की तैयारी शुरू कर दी। यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि आगे अनिश्चितता भरा रास्ता था।</p>
<h5>दो बार असफलता, लेकिन नहीं मानी हार</h5>
<p>विशाखा ने पहला UPSC प्रयास दिया, लेकिन सफलता नहीं मिली। दूसरी बार भी असफलता हाथ लगी। इस दौरान उनके जॉब छोड़ने के फैसले पर सवाल उठने लगे। लोग कहने लगे कि अच्छी नौकरी छोड़कर गलती कर दी। लेकिन विशाखा का आत्मविश्वास नहीं डगमगाया। उन्होंने ठान लिया था कि जवाब शब्दों से नहीं, सफलता से देना है।</p>
<h5>UPSC 2019 में AIR-6 हासिल कर रचा इतिहास</h5>
<p>लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प का नतीजा आखिरकार सामने आया। UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2019 में विशाखा यादव ने ऑल इंडिया रैंक-6 हासिल कर सभी आलोचनाओं पर विराम लगा दिया। इस उपलब्धि का श्रेय उन्होंने अपनी मां और परिवार के सपोर्ट को दिया।</p>
<h5>प्रशासनिक सेवा में शानदार सफर</h5>
<p>जून 2025 तक विशाखा यादव अरुणाचल प्रदेश में डिप्टी कमिश्नर के पद पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। हाल ही में उनका ट्रांसफर दिल्ली किया गया है। उनका सफर इस बात का सबूत है कि अगर लक्ष्य साफ हो और इरादे मजबूत हों, तो असफलताएं रास्ता नहीं रोक सकतीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 19:37:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: लाखों की नौकरी छोड़ शुरू की यूपीएससी की तैयारी, AIR-6 लाकर बनीं IAS विशाखा यादव</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: इंजीनियरिंग के बाद जिंदगी पूरी तरह सेट लग रही थी। मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी, अच्छी-खासी सैलरी और सुरक्षित भविष्य—सब कुछ मौजूद था। लेकिन मन के अंदर कुछ अलग करने की चाह थी, ऐसी पहचान बनाने की, जो समाज के लिए मायने रखे। यही चाह कब IAS बनने का जुनून बन गई, यह विशाखा यादव को भी पता नहीं चला। आज IAS विशाखा यादव की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आरामदायक जिंदगी छोड़कर कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं।</p>
<h5>दिल्ली पुलिस में दारोगा हैं पिता</h5>
<p>विशाखा यादव दिल्ली के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165960/ias-success-story-left-job-worth-lakhs-and-started-preparing"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-vishakha-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: इंजीनियरिंग के बाद जिंदगी पूरी तरह सेट लग रही थी। मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी, अच्छी-खासी सैलरी और सुरक्षित भविष्य—सब कुछ मौजूद था। लेकिन मन के अंदर कुछ अलग करने की चाह थी, ऐसी पहचान बनाने की, जो समाज के लिए मायने रखे। यही चाह कब IAS बनने का जुनून बन गई, यह विशाखा यादव को भी पता नहीं चला। आज IAS विशाखा यादव की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आरामदायक जिंदगी छोड़कर कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं।</p>
<h5>दिल्ली पुलिस में दारोगा हैं पिता</h5>
<p>विशाखा यादव दिल्ली के द्वारका की रहने वाली हैं। उनके पिता राजकुमार यादव दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) हैं, जबकि मां एक गृहिणी हैं। परिवार का पूरा सपोर्ट विशाखा को हमेशा मिला। खासतौर पर उनकी मां हर कदम पर उनके साथ खड़ी रहीं। विशाखा कई बार कह चुकी हैं कि आज वह जो कुछ भी हैं, उसमें मां का योगदान सबसे बड़ा है।</p>
<h5>इंजीनियरिंग के बाद चुना UPSC का रास्ता</h5>
<p>12वीं तक की पढ़ाई दिल्ली से करने के बाद विशाखा ने इंजीनियरिंग करने का फैसला लिया। उन्होंने दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) से बीटेक किया। साल 2014 में ग्रेजुएशन के बाद उन्हें सिस्को कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी मिल गई। करीब दो साल तक उन्होंने बेंगलुरु में काम किया और अच्छी सैलरी कमाई।</p>
<h5>लाखों की टेक जॉब छोड़ UPSC की तैयारी</h5>
<p>पैसा और सुविधाएं थीं, लेकिन सिविल सेवा जैसी संतुष्टि नहीं थी। इसी सोच के साथ विशाखा ने नौकरी छोड़ दी और दिल्ली आकर फुल-टाइम UPSC की तैयारी शुरू कर दी। यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि आगे अनिश्चितता भरा रास्ता था।</p>
<h5>दो बार असफलता, लेकिन नहीं मानी हार</h5>
<p>विशाखा ने पहला UPSC प्रयास दिया, लेकिन सफलता नहीं मिली। दूसरी बार भी असफलता हाथ लगी। इस दौरान उनके जॉब छोड़ने के फैसले पर सवाल उठने लगे। लोग कहने लगे कि अच्छी नौकरी छोड़कर गलती कर दी। लेकिन विशाखा का आत्मविश्वास नहीं डगमगाया। उन्होंने ठान लिया था कि जवाब शब्दों से नहीं, सफलता से देना है।</p>
<h5>UPSC 2019 में AIR-6 हासिल कर रचा इतिहास</h5>
<p>लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प का नतीजा आखिरकार सामने आया। UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2019 में विशाखा यादव ने ऑल इंडिया रैंक-6 हासिल कर सभी आलोचनाओं पर विराम लगा दिया। इस उपलब्धि का श्रेय उन्होंने अपनी मां और परिवार के सपोर्ट को दिया।</p>
<h5>प्रशासनिक सेवा में शानदार सफर</h5>
<p>जून 2025 तक विशाखा यादव अरुणाचल प्रदेश में डिप्टी कमिश्नर के पद पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। हाल ही में उनका ट्रांसफर दिल्ली किया गया है। उनका सफर इस बात का सबूत है कि अगर लक्ष्य साफ हो और इरादे मजबूत हों, तो असफलताएं रास्ता नहीं रोक सकतीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Jan 2026 11:39:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: 40 लाख रुपये का छोड़ा पैकेज, आदित्य श्रीवास्तव पहले IPS फिर बने IAS अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf1">IAS Success Story: भारत</span> <span class="cf1">में</span> <span class="cf0">IAS-IPS </span><span class="cf1">बनने</span> <span class="cf1">का</span> <span class="cf1">सपना</span> <span class="cf1">लाखों</span> <span class="cf1">युवाओं</span> <span class="cf1">देखते</span> <span class="cf1">हैं</span><span class="cf1">, </span><span class="cf1">लेकिन</span> <span class="cf1">इस</span> <span class="cf1">राह</span> <span class="cf1">पर</span><span class="cf1"> चलने के लिए साहस, धैर्य और </span><span class="cf1">आत्मविश्वास</span> <span class="cf1">की</span> <span class="cf1">जरूरत</span> <span class="cf1">होती</span> <span class="cf1">है</span><span class="cf1">। </span><span class="cf1">लखनऊ</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">आदित्य</span><span class="cf1"> श्रीवास्तव उन्हीं चुनिंदा युवाओं में शामिल हैं, जिन्होंने </span><span class="cf0">UPSC </span><span class="cf1">की तैयारी के लिए </span><span class="cf2">₹</span><span class="cf0">40 </span><span class="cf1">लाख सालाना </span><span class="cf1">पैकेज</span> <span class="cf1">वाली</span> <span class="cf1">नौकरी</span><span class="cf1"> छोड़ दी। </span><span class="cf1">अनिश्चित</span><span class="cf1"> भविष्य के बावजूद </span><span class="cf1">उन्होंने</span> <span class="cf1">पिता</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">सपने</span> <span class="cf1">और</span> <span class="cf1">खुद</span> <span class="cf1">पर</span> <span class="cf1">भरोसे</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">दम</span> <span class="cf1">पर</span> <span class="cf1">वह</span> <span class="cf1">मुकाम</span> <span class="cf1">हासिल</span> <span class="cf1">किया</span><span class="cf1">, </span><span class="cf1">जो</span> <span class="cf1">आज</span> <span class="cf1">लाखों</span> <span class="cf1">अभ्यर्थियों</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">लिए</span> <span class="cf1">प्रेरणा</span> <span class="cf1">है</span><span class="cf1">।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">बचपन</span> <span class="cf1">से</span> <span class="cf1">ही</span> <span class="cf1">मेधावी</span> <span class="cf1">रहे</span> <span class="cf1">आदित्य</span></strong></p>
<p><span class="cf1">लखनऊ</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">आईआईएम</span> <span class="cf1">रोड</span> <span class="cf1">स्थित</span> <span class="cf1">एल्डिको</span> <span class="cf1">सिटी</span> <span class="cf1">में</span> <span class="cf1">रहने</span> <span class="cf1">वाले</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164164/ias-success-story-aditya-srivastava-left-a-package-of-rs"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-success-story-(11).jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf1">IAS Success Story: भारत</span> <span class="cf1">में</span> <span class="cf0">IAS-IPS </span><span class="cf1">बनने</span> <span class="cf1">का</span> <span class="cf1">सपना</span> <span class="cf1">लाखों</span> <span class="cf1">युवाओं</span> <span class="cf1">देखते</span> <span class="cf1">हैं</span><span class="cf1">, </span><span class="cf1">लेकिन</span> <span class="cf1">इस</span> <span class="cf1">राह</span> <span class="cf1">पर</span><span class="cf1"> चलने के लिए साहस, धैर्य और </span><span class="cf1">आत्मविश्वास</span> <span class="cf1">की</span> <span class="cf1">जरूरत</span> <span class="cf1">होती</span> <span class="cf1">है</span><span class="cf1">। </span><span class="cf1">लखनऊ</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">आदित्य</span><span class="cf1"> श्रीवास्तव उन्हीं चुनिंदा युवाओं में शामिल हैं, जिन्होंने </span><span class="cf0">UPSC </span><span class="cf1">की तैयारी के लिए </span><span class="cf2">₹</span><span class="cf0">40 </span><span class="cf1">लाख सालाना </span><span class="cf1">पैकेज</span> <span class="cf1">वाली</span> <span class="cf1">नौकरी</span><span class="cf1"> छोड़ दी। </span><span class="cf1">अनिश्चित</span><span class="cf1"> भविष्य के बावजूद </span><span class="cf1">उन्होंने</span> <span class="cf1">पिता</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">सपने</span> <span class="cf1">और</span> <span class="cf1">खुद</span> <span class="cf1">पर</span> <span class="cf1">भरोसे</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">दम</span> <span class="cf1">पर</span> <span class="cf1">वह</span> <span class="cf1">मुकाम</span> <span class="cf1">हासिल</span> <span class="cf1">किया</span><span class="cf1">, </span><span class="cf1">जो</span> <span class="cf1">आज</span> <span class="cf1">लाखों</span> <span class="cf1">अभ्यर्थियों</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">लिए</span> <span class="cf1">प्रेरणा</span> <span class="cf1">है</span><span class="cf1">।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">बचपन</span> <span class="cf1">से</span> <span class="cf1">ही</span> <span class="cf1">मेधावी</span> <span class="cf1">रहे</span> <span class="cf1">आदित्य</span></strong></p>
<p><span class="cf1">लखनऊ</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">आईआईएम</span> <span class="cf1">रोड</span> <span class="cf1">स्थित</span> <span class="cf1">एल्डिको</span> <span class="cf1">सिटी</span> <span class="cf1">में</span> <span class="cf1">रहने</span> <span class="cf1">वाले</span> <span class="cf1">आदित्य</span> <span class="cf1">श्रीवास्तव</span> <span class="cf1">बचपन</span><span class="cf1"> से ही पढ़ाई में अव्वल रहे हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई </span><span class="cf0">CMS </span><span class="cf1">अलीगंज</span><span class="cf1">, लखनऊ से की। </span><span class="cf1">उन्होंने </span><span class="cf0">10</span><span class="cf1">वीं </span><span class="cf1">कक्षा में</span><span class="cf1"> 97.8% अंक </span><span class="cf1">और </span><span class="cf0">12</span><span class="cf1">वीं </span><span class="cf1">कक्षा में</span><span class="cf1"> 97.5% अंक </span><span class="cf1">प्राप्त किए। </span></p>
<p><strong><span class="cf0">IIT-JEE </span><span class="cf1">में भी शानदार प्रदर्शन</span></strong></p>
<p><span class="cf1">स्कूलिंग</span><span class="cf1"> के बाद आदित्य ने इंजीनियरिंग को </span><span class="cf1">करियर</span><span class="cf1"> के रूप में चुना। उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शामिल </span><span class="cf0">JEE </span><span class="cf1">मेन्स</span><span class="cf1"> और </span><span class="cf0">JEE </span><span class="cf1">एडवांस्ड</span><span class="cf1"> दोनों में बेहतरीन प्रदर्शन किया। अच्छे </span><span class="cf1">रैंक</span><span class="cf1"> के दम पर उन्हें </span><span class="cf0">IIT </span><span class="cf1">कानपुर में दाखिला मिला, जहां से उन्होंने </span><span class="cf1">इलेक्ट्रिकल</span><span class="cf1"> इंजीनियरिंग में </span><span class="cf0">B.Tech</span> <span class="cf1">और </span><span class="cf0">M.Tech</span> <span class="cf1">की पढ़ाई पूरी की।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">करोड़ों की नौकरी छोड़ </span><span class="cf0">UPSC </span><span class="cf1">का फैसला</span></strong></p>
<p><span class="cf0">IIT </span><span class="cf1">कानपुर से निकलने के बाद आदित्य को एक </span><span class="cf1">मल्टीनेशनल</span><span class="cf1"> कंपनी में </span><span class="cf2">₹</span><span class="cf0">40 </span><span class="cf1">लाख सालाना </span><span class="cf1">पैकेज</span><span class="cf1"> की नौकरी मिली। करीब डेढ़ साल तक उन्होंने </span><span class="cf1">बेंगलुरु</span><span class="cf1"> में काम किया।</span></p>
<p><span class="cf1">लेकिन उनके पिता अजय श्रीवास्तव, जो केंद्रीय </span><span class="cf1">ऑडिट</span><span class="cf1"> विभाग में </span><span class="cf0">AAO </span><span class="cf1">हैं</span><span class="cf1">, </span><span class="cf1">चाहते</span> <span class="cf1">थे</span> <span class="cf1">कि</span> <span class="cf1">बेटा</span> <span class="cf1">सिविल</span> <span class="cf1">सर्विस</span> <span class="cf1">में</span> <span class="cf1">जाए</span><span class="cf1">। </span><span class="cf1">बहन</span><span class="cf1"> भी सिविल सेवा की तैयारी कर रही थी। इसी बीच आदित्य ने भी तय कर लिया कि वे </span><span class="cf0">UPSC </span><span class="cf1">की राह चुनेंगे।</span></p>
<p><span class="cf0">UPSC </span><span class="cf1">सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2021 से ठीक एक महीना पहले उन्होंने अपनी हाई-</span><span class="cf1">पैकेज</span><span class="cf1"> नौकरी छोड़ दी।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">पहली असफलता, फिर जबरदस्त वापसी</span></strong></p>
<p><span class="cf0">2021 </span><span class="cf1">में यह आदित्य का पहला </span><span class="cf1">अटेंप्ट</span><span class="cf1"> था, जिसमें वे </span><span class="cf1">प्रीलिम्स</span><span class="cf1"> पास नहीं कर पाए। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। परिवार का पूरा साथ मिला।</span></p>
<p><span class="cf1">आदित्य ने </span><span class="cf0">NCERT </span><span class="cf1">किताबों और </span><span class="cf1">यूट्यूब</span><span class="cf1"> की मदद से दोबारा रणनीति बनाई और दोगुनी मेहनत शुरू की।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">पहले बने </span><span class="cf0">IPS, </span><span class="cf1">फिर </span><span class="cf0">IAS</span></strong></p>
<p><span class="cf0">UPSC 2022</span> <span class="cf1">रिजल्ट</span><span class="cf1"> में </span><span class="cf1">ऑल</span><span class="cf1"> इंडिया </span><span class="cf1">रैंक</span><span class="cf1"> 236 </span><span class="cf1">के साथ</span> <span class="cf0">IPS </span><span class="cf1">अधिकारी </span><span class="cf1">बने और </span><span class="cf0">UPSC 2023</span> <span class="cf1">रिजल्ट</span> <span class="cf1">मे</span><span class="cf0"> AIR-1</span><span class="cf1"> के साथ</span> <span class="cf0">IAS </span><span class="cf1">अधिकारी </span><span class="cf1">बने। </span><span class="cf1">आदित्य को उत्तर प्रदेश </span><span class="cf1">कैडर</span><span class="cf1"> मिला, जो उनका गृह राज्य भी है।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Dec 2025 13:50:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: मां पुलिस में और बेटी बन गई IAS अफसर, पढ़ें सफलता की कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। आज हम आपको ऐसी ही आईएएस अफसर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने UPSC परीक्षा में पूरे देश में रैंक 30 हासिल की थी। ये कोई और नहीं बल्कि IAS परी बिश्नोई है।</p>
<p><strong>बीकानेर की रहने वाली है परी बिश्नोई</strong></p>
<p>परी बिश्नोई राजस्थान के राजस्थान के बीकानेर के रहने वाली है। उन्होंने अजमेर से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की। इसके बाद उन्होंने मास्टर डिग्री</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163691/ias-success-story-mother-joined-police-and-daughter-became-ias"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-pari-bishnoi-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। आज हम आपको ऐसी ही आईएएस अफसर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने UPSC परीक्षा में पूरे देश में रैंक 30 हासिल की थी। ये कोई और नहीं बल्कि IAS परी बिश्नोई है।</p>
<p><strong>बीकानेर की रहने वाली है परी बिश्नोई</strong></p>
<p>परी बिश्नोई राजस्थान के राजस्थान के बीकानेर के रहने वाली है। उन्होंने अजमेर से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की। इसके बाद उन्होंने मास्टर डिग्री ली। आपको बता दें की परी बिश्नोई ने UPSC की परीक्षा पास करने से पहले नेट की परीक्षा पास की।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/3339122-ias-pari-bishnoi-1.jpg" alt="3339122-ias-pari-bishnoi-1" width="1200" height="900"></img></p>
<p><strong>मां से मिली प्रेरणा</strong></p>
<p>परी बिश्नोई ने बताया कि आईएएस बनने के लिए उन्हें अपने मां से प्रेरणा मिली। उनकी मां राजस्थान पुलिस में है। बचपन से ही उन्होंने अपनी मां को समाज के लिए काम करते देखा है। मां को समाजसेवा करते देख उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास करने की सोची।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/ias-pari-story-in-hindi.jpg" alt="ias-pari-story-in-hindi" width="1280" height="720"></img></p>
<p>IAS परी बिश्नोई की 2024 के लोकसभा चुनावों में रिटर्निग ऑफिसर के रूप में कार्यरत थीं। आईएएस परी बिश्नोई इस समय वे उत्तर- पूर्व कैडर के अंदर सिक्किम में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पद पर काम कर रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/163691/ias-success-story-mother-joined-police-and-daughter-became-ias</link>
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                <pubDate>Fri, 19 Dec 2025 10:53:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: 40 लाख रुपये का छोड़ा पैकेज, आदित्य श्रीवास्तव पहले IPS फिर बने IAS अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf1">IAS Success Story: भारत</span> <span class="cf1">में</span> <span class="cf0">IAS-IPS </span><span class="cf1">बनने</span> <span class="cf1">का</span> <span class="cf1">सपना</span> <span class="cf1">लाखों</span> <span class="cf1">युवाओं</span> <span class="cf1">देखते</span> <span class="cf1">हैं</span><span class="cf1">, </span><span class="cf1">लेकिन</span> <span class="cf1">इस</span> <span class="cf1">राह</span> <span class="cf1">पर</span><span class="cf1"> चलने के लिए साहस, धैर्य और </span><span class="cf1">आत्मविश्वास</span> <span class="cf1">की</span> <span class="cf1">जरूरत</span> <span class="cf1">होती</span> <span class="cf1">है</span><span class="cf1">। </span><span class="cf1">लखनऊ</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">आदित्य</span><span class="cf1"> श्रीवास्तव उन्हीं चुनिंदा युवाओं में शामिल हैं, जिन्होंने </span><span class="cf0">UPSC </span><span class="cf1">की तैयारी के लिए </span><span class="cf2">₹</span><span class="cf0">40 </span><span class="cf1">लाख सालाना </span><span class="cf1">पैकेज</span> <span class="cf1">वाली</span> <span class="cf1">नौकरी</span><span class="cf1"> छोड़ दी। </span><span class="cf1">अनिश्चित</span><span class="cf1"> भविष्य के बावजूद </span><span class="cf1">उन्होंने</span> <span class="cf1">पिता</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">सपने</span> <span class="cf1">और</span> <span class="cf1">खुद</span> <span class="cf1">पर</span> <span class="cf1">भरोसे</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">दम</span> <span class="cf1">पर</span> <span class="cf1">वह</span> <span class="cf1">मुकाम</span> <span class="cf1">हासिल</span> <span class="cf1">किया</span><span class="cf1">, </span><span class="cf1">जो</span> <span class="cf1">आज</span> <span class="cf1">लाखों</span> <span class="cf1">अभ्यर्थियों</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">लिए</span> <span class="cf1">प्रेरणा</span> <span class="cf1">है</span><span class="cf1">।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">बचपन</span> <span class="cf1">से</span> <span class="cf1">ही</span> <span class="cf1">मेधावी</span> <span class="cf1">रहे</span> <span class="cf1">आदित्य</span></strong></p>
<p><span class="cf1">लखनऊ</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">आईआईएम</span> <span class="cf1">रोड</span> <span class="cf1">स्थित</span> <span class="cf1">एल्डिको</span> <span class="cf1">सिटी</span> <span class="cf1">में</span> <span class="cf1">रहने</span> <span class="cf1">वाले</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163482/ias-success-story-aditya-srivastava-left-a-package-of-rs"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-success-story-(11).jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf1">IAS Success Story: भारत</span> <span class="cf1">में</span> <span class="cf0">IAS-IPS </span><span class="cf1">बनने</span> <span class="cf1">का</span> <span class="cf1">सपना</span> <span class="cf1">लाखों</span> <span class="cf1">युवाओं</span> <span class="cf1">देखते</span> <span class="cf1">हैं</span><span class="cf1">, </span><span class="cf1">लेकिन</span> <span class="cf1">इस</span> <span class="cf1">राह</span> <span class="cf1">पर</span><span class="cf1"> चलने के लिए साहस, धैर्य और </span><span class="cf1">आत्मविश्वास</span> <span class="cf1">की</span> <span class="cf1">जरूरत</span> <span class="cf1">होती</span> <span class="cf1">है</span><span class="cf1">। </span><span class="cf1">लखनऊ</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">आदित्य</span><span class="cf1"> श्रीवास्तव उन्हीं चुनिंदा युवाओं में शामिल हैं, जिन्होंने </span><span class="cf0">UPSC </span><span class="cf1">की तैयारी के लिए </span><span class="cf2">₹</span><span class="cf0">40 </span><span class="cf1">लाख सालाना </span><span class="cf1">पैकेज</span> <span class="cf1">वाली</span> <span class="cf1">नौकरी</span><span class="cf1"> छोड़ दी। </span><span class="cf1">अनिश्चित</span><span class="cf1"> भविष्य के बावजूद </span><span class="cf1">उन्होंने</span> <span class="cf1">पिता</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">सपने</span> <span class="cf1">और</span> <span class="cf1">खुद</span> <span class="cf1">पर</span> <span class="cf1">भरोसे</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">दम</span> <span class="cf1">पर</span> <span class="cf1">वह</span> <span class="cf1">मुकाम</span> <span class="cf1">हासिल</span> <span class="cf1">किया</span><span class="cf1">, </span><span class="cf1">जो</span> <span class="cf1">आज</span> <span class="cf1">लाखों</span> <span class="cf1">अभ्यर्थियों</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">लिए</span> <span class="cf1">प्रेरणा</span> <span class="cf1">है</span><span class="cf1">।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">बचपन</span> <span class="cf1">से</span> <span class="cf1">ही</span> <span class="cf1">मेधावी</span> <span class="cf1">रहे</span> <span class="cf1">आदित्य</span></strong></p>
<p><span class="cf1">लखनऊ</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">आईआईएम</span> <span class="cf1">रोड</span> <span class="cf1">स्थित</span> <span class="cf1">एल्डिको</span> <span class="cf1">सिटी</span> <span class="cf1">में</span> <span class="cf1">रहने</span> <span class="cf1">वाले</span> <span class="cf1">आदित्य</span> <span class="cf1">श्रीवास्तव</span> <span class="cf1">बचपन</span><span class="cf1"> से ही पढ़ाई में अव्वल रहे हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई </span><span class="cf0">CMS </span><span class="cf1">अलीगंज</span><span class="cf1">, लखनऊ से की। </span><span class="cf1">उन्होंने </span><span class="cf0">10</span><span class="cf1">वीं </span><span class="cf1">कक्षा में</span><span class="cf1"> 97.8% अंक </span><span class="cf1">और </span><span class="cf0">12</span><span class="cf1">वीं </span><span class="cf1">कक्षा में</span><span class="cf1"> 97.5% अंक </span><span class="cf1">प्राप्त किए। </span></p>
<p><strong><span class="cf0">IIT-JEE </span><span class="cf1">में भी शानदार प्रदर्शन</span></strong></p>
<p><span class="cf1">स्कूलिंग</span><span class="cf1"> के बाद आदित्य ने इंजीनियरिंग को </span><span class="cf1">करियर</span><span class="cf1"> के रूप में चुना। उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शामिल </span><span class="cf0">JEE </span><span class="cf1">मेन्स</span><span class="cf1"> और </span><span class="cf0">JEE </span><span class="cf1">एडवांस्ड</span><span class="cf1"> दोनों में बेहतरीन प्रदर्शन किया। अच्छे </span><span class="cf1">रैंक</span><span class="cf1"> के दम पर उन्हें </span><span class="cf0">IIT </span><span class="cf1">कानपुर में दाखिला मिला, जहां से उन्होंने </span><span class="cf1">इलेक्ट्रिकल</span><span class="cf1"> इंजीनियरिंग में </span><span class="cf0">B.Tech</span> <span class="cf1">और </span><span class="cf0">M.Tech</span> <span class="cf1">की पढ़ाई पूरी की।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">करोड़ों की नौकरी छोड़ </span><span class="cf0">UPSC </span><span class="cf1">का फैसला</span></strong></p>
<p><span class="cf0">IIT </span><span class="cf1">कानपुर से निकलने के बाद आदित्य को एक </span><span class="cf1">मल्टीनेशनल</span><span class="cf1"> कंपनी में </span><span class="cf2">₹</span><span class="cf0">40 </span><span class="cf1">लाख सालाना </span><span class="cf1">पैकेज</span><span class="cf1"> की नौकरी मिली। करीब डेढ़ साल तक उन्होंने </span><span class="cf1">बेंगलुरु</span><span class="cf1"> में काम किया।</span></p>
<p><span class="cf1">लेकिन उनके पिता अजय श्रीवास्तव, जो केंद्रीय </span><span class="cf1">ऑडिट</span><span class="cf1"> विभाग में </span><span class="cf0">AAO </span><span class="cf1">हैं</span><span class="cf1">, </span><span class="cf1">चाहते</span> <span class="cf1">थे</span> <span class="cf1">कि</span> <span class="cf1">बेटा</span> <span class="cf1">सिविल</span> <span class="cf1">सर्विस</span> <span class="cf1">में</span> <span class="cf1">जाए</span><span class="cf1">। </span><span class="cf1">बहन</span><span class="cf1"> भी सिविल सेवा की तैयारी कर रही थी। इसी बीच आदित्य ने भी तय कर लिया कि वे </span><span class="cf0">UPSC </span><span class="cf1">की राह चुनेंगे।</span></p>
<p><span class="cf0">UPSC </span><span class="cf1">सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2021 से ठीक एक महीना पहले उन्होंने अपनी हाई-</span><span class="cf1">पैकेज</span><span class="cf1"> नौकरी छोड़ दी।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">पहली असफलता, फिर जबरदस्त वापसी</span></strong></p>
<p><span class="cf0">2021 </span><span class="cf1">में यह आदित्य का पहला </span><span class="cf1">अटेंप्ट</span><span class="cf1"> था, जिसमें वे </span><span class="cf1">प्रीलिम्स</span><span class="cf1"> पास नहीं कर पाए। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। परिवार का पूरा साथ मिला।</span></p>
<p><span class="cf1">आदित्य ने </span><span class="cf0">NCERT </span><span class="cf1">किताबों और </span><span class="cf1">यूट्यूब</span><span class="cf1"> की मदद से दोबारा रणनीति बनाई और दोगुनी मेहनत शुरू की।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">पहले बने </span><span class="cf0">IPS, </span><span class="cf1">फिर </span><span class="cf0">IAS</span></strong></p>
<p><span class="cf0">UPSC 2022</span> <span class="cf1">रिजल्ट</span><span class="cf1"> में </span><span class="cf1">ऑल</span><span class="cf1"> इंडिया </span><span class="cf1">रैंक</span><span class="cf1"> 236 </span><span class="cf1">के साथ</span> <span class="cf0">IPS </span><span class="cf1">अधिकारी </span><span class="cf1">बने और </span><span class="cf0">UPSC 2023</span> <span class="cf1">रिजल्ट</span> <span class="cf1">मे</span><span class="cf0"> AIR-1</span><span class="cf1"> के साथ</span> <span class="cf0">IAS </span><span class="cf1">अधिकारी </span><span class="cf1">बने। </span><span class="cf1">आदित्य को उत्तर प्रदेश </span><span class="cf1">कैडर</span><span class="cf1"> मिला, जो उनका गृह राज्य भी है।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 12:53:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: 12 घंटे की ड्यूटी के बाद UPSC की तैयारी, जानें अंजलि गर्ग के डॉक्टर से आईएएस बनने तक का सफर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>IAS Success Story: </strong>यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इसे पास करने के लिए उम्मीदवार सालों तक कड़ी मेहनत करते हैं। कई लोग अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर भी इस परीक्षा की तैयारी में जुट जाते हैं।</p>
<p>आज हम आपको ऐसी ही एक प्रेरणादायक महिला की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने न सिर्फ NEET जैसी कठिन परीक्षा पास की, बल्कि MBBS की पढ़ाई और मेडिकल इंटर्नशिप के साथ-साथ UPSC की तैयारी कर आईएएस अधिकारी बनने का सपना भी साकार किया। यह कहानी है आईएएस अंजलि गर्ग की।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/dr-anjali-garg-ias-rank.jpg" alt="Dr-Anjali-Garg-IAS-Rank" width="1200" height="900" /></p>
<p>आईएएस अंजलि गर्ग की मेहनत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163463/ias-success-story-preparation-for-upsc-after-12-hours-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-anjali-garg.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>IAS Success Story: </strong>यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इसे पास करने के लिए उम्मीदवार सालों तक कड़ी मेहनत करते हैं। कई लोग अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर भी इस परीक्षा की तैयारी में जुट जाते हैं।</p>
<p>आज हम आपको ऐसी ही एक प्रेरणादायक महिला की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने न सिर्फ NEET जैसी कठिन परीक्षा पास की, बल्कि MBBS की पढ़ाई और मेडिकल इंटर्नशिप के साथ-साथ UPSC की तैयारी कर आईएएस अधिकारी बनने का सपना भी साकार किया। यह कहानी है आईएएस अंजलि गर्ग की।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/dr-anjali-garg-ias-rank.jpg" alt="Dr-Anjali-Garg-IAS-Rank" width="1200" height="900"></img></p>
<p>आईएएस अंजलि गर्ग की मेहनत और लगन किसी भी युवा के लिए प्रेरणा है। उन्होंने अस्पताल में 12 घंटे की ड्यूटी करने के बाद भी यूपीएससी की तैयारी जारी रखी और आखिरकार सफलता हासिल की। हालांकि यह सफर आसान नहीं था, लेकिन उनके मजबूत इरादों ने उन्हें मंजिल तक पहुंचाया।</p>
<p><strong>कौन हैं आईएएस अंजलि गर्ग</strong></p>
<p>अंजलि गर्ग का जन्म 14 सितंबर 1996 को चंडीगढ़ में हुआ था। बचपन से ही उनका सपना डॉक्टर बनने का था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई चंडीगढ़ से ही पूरी की और पढ़ाई में हमेशा उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। 12वीं कक्षा में उन्होंने 96 प्रतिशत अंक हासिल किए।</p>
<p>शानदार शैक्षणिक रिकॉर्ड के बाद अंजलि ने NEET परीक्षा की तैयारी शुरू की और सफलता हासिल कर दिल्ली के प्रतिष्ठित VMMC (वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज) एवं सफदरजंग अस्पताल में MBBS में दाखिला लिया।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/dr-anjali-garg-ias-success-story.jpg" alt="Dr-Anjali-Garg-IAS-Success-Story" width="1200" height="675"></img></p>
<p><strong>MBBS के दौरान बदला नजरिया, शुरू हुई UPSC की तैयारी</strong></p>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, MBBS के तीसरे वर्ष में अंजलि ने जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को करीब से देखा। यहीं से उनके मन में समाज के लिए बड़े स्तर पर काम करने की इच्छा जागी और उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी का फैसला किया।</p>
<p>UPSC की तैयारी के दौरान उन्होंने अपनी मेडिकल इंटर्नशिप भी जारी रखी। अस्पताल में 12 घंटे की नाइट ड्यूटी के बावजूद वे कोचिंग और सेल्फ स्टडी के लिए समय निकालती रहीं। पहले प्रयास में उन्हें असफलता मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और दोबारा पूरी मेहनत से तैयारी की।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/2958923-ias-dr-anjali-garg-6.jpg" alt="2958923-ias-dr-anjali-garg-6" width="1200" height="900"></img></p>
<p><strong>दूसरे प्रयास में मिली सफलता</strong></p>
<p>अंजलि गर्ग ने दूसरे प्रयास में UPSC सिविल सेवा परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की। उन्होंने UPSC CSE 2022 में 79वीं रैंक प्राप्त की और आईएएस अधिकारी बनीं। खास बात यह है कि वे अपने बैच की मेडिकल साइंस टॉपर भी रहीं।</p>
<p><strong>शौक और निजी जीवन</strong></p>
<p>आईएएस अंजलि गर्ग न सिर्फ पढ़ाई में बल्कि कला के क्षेत्र में भी काफी प्रतिभाशाली हैं। वे सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं और उन्हें गाना गाने का शौक है। हाल ही में उनका एक गायन वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसके अलावा, आईएएस अंजलि गर्ग और आईएएस द्विज गोयल ने शादी करने का फैसला भी लिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/163463/ias-success-story-preparation-for-upsc-after-12-hours-of</link>
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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 10:41:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: 12 घंटे की ड्यूटी के बाद UPSC की तैयारी, जानें अंजलि गर्ग के डॉक्टर से आईएएस बनने तक का सफर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>IAS Success Story: </strong>यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इसे पास करने के लिए उम्मीदवार सालों तक कड़ी मेहनत करते हैं। कई लोग अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर भी इस परीक्षा की तैयारी में जुट जाते हैं।</p>
<p>आज हम आपको ऐसी ही एक प्रेरणादायक महिला की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने न सिर्फ NEET जैसी कठिन परीक्षा पास की, बल्कि MBBS की पढ़ाई और मेडिकल इंटर्नशिप के साथ-साथ UPSC की तैयारी कर आईएएस अधिकारी बनने का सपना भी साकार किया। यह कहानी है आईएएस अंजलि गर्ग की।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/dr-anjali-garg-ias-rank.jpg" alt="Dr-Anjali-Garg-IAS-Rank" width="1200" height="900" /></p>
<p>आईएएस अंजलि गर्ग की मेहनत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163255/ias-success-story-preparation-for-upsc-after-12-hours-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-anjali-garg.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>IAS Success Story: </strong>यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इसे पास करने के लिए उम्मीदवार सालों तक कड़ी मेहनत करते हैं। कई लोग अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर भी इस परीक्षा की तैयारी में जुट जाते हैं।</p>
<p>आज हम आपको ऐसी ही एक प्रेरणादायक महिला की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने न सिर्फ NEET जैसी कठिन परीक्षा पास की, बल्कि MBBS की पढ़ाई और मेडिकल इंटर्नशिप के साथ-साथ UPSC की तैयारी कर आईएएस अधिकारी बनने का सपना भी साकार किया। यह कहानी है आईएएस अंजलि गर्ग की।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/dr-anjali-garg-ias-rank.jpg" alt="Dr-Anjali-Garg-IAS-Rank" width="1200" height="900"></img></p>
<p>आईएएस अंजलि गर्ग की मेहनत और लगन किसी भी युवा के लिए प्रेरणा है। उन्होंने अस्पताल में 12 घंटे की ड्यूटी करने के बाद भी यूपीएससी की तैयारी जारी रखी और आखिरकार सफलता हासिल की। हालांकि यह सफर आसान नहीं था, लेकिन उनके मजबूत इरादों ने उन्हें मंजिल तक पहुंचाया।</p>
<p><strong>कौन हैं आईएएस अंजलि गर्ग</strong></p>
<p>अंजलि गर्ग का जन्म 14 सितंबर 1996 को चंडीगढ़ में हुआ था। बचपन से ही उनका सपना डॉक्टर बनने का था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई चंडीगढ़ से ही पूरी की और पढ़ाई में हमेशा उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। 12वीं कक्षा में उन्होंने 96 प्रतिशत अंक हासिल किए।</p>
<p>शानदार शैक्षणिक रिकॉर्ड के बाद अंजलि ने NEET परीक्षा की तैयारी शुरू की और सफलता हासिल कर दिल्ली के प्रतिष्ठित VMMC (वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज) एवं सफदरजंग अस्पताल में MBBS में दाखिला लिया।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/dr-anjali-garg-ias-success-story.jpg" alt="Dr-Anjali-Garg-IAS-Success-Story" width="1200" height="675"></img></p>
<p><strong>MBBS के दौरान बदला नजरिया, शुरू हुई UPSC की तैयारी</strong></p>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, MBBS के तीसरे वर्ष में अंजलि ने जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को करीब से देखा। यहीं से उनके मन में समाज के लिए बड़े स्तर पर काम करने की इच्छा जागी और उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी का फैसला किया।</p>
<p>UPSC की तैयारी के दौरान उन्होंने अपनी मेडिकल इंटर्नशिप भी जारी रखी। अस्पताल में 12 घंटे की नाइट ड्यूटी के बावजूद वे कोचिंग और सेल्फ स्टडी के लिए समय निकालती रहीं। पहले प्रयास में उन्हें असफलता मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और दोबारा पूरी मेहनत से तैयारी की।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/2958923-ias-dr-anjali-garg-6.jpg" alt="2958923-ias-dr-anjali-garg-6" width="1200" height="900"></img></p>
<p><strong>दूसरे प्रयास में मिली सफलता</strong></p>
<p>अंजलि गर्ग ने दूसरे प्रयास में UPSC सिविल सेवा परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की। उन्होंने UPSC CSE 2022 में 79वीं रैंक प्राप्त की और आईएएस अधिकारी बनीं। खास बात यह है कि वे अपने बैच की मेडिकल साइंस टॉपर भी रहीं।</p>
<p><strong>शौक और निजी जीवन</strong></p>
<p>आईएएस अंजलि गर्ग न सिर्फ पढ़ाई में बल्कि कला के क्षेत्र में भी काफी प्रतिभाशाली हैं। वे सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं और उन्हें गाना गाने का शौक है। हाल ही में उनका एक गायन वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसके अलावा, आईएएस अंजलि गर्ग और आईएएस द्विज गोयल ने शादी करने का फैसला भी लिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Dec 2025 10:48:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: मां पुलिस में और बेटी बन गई IAS अफसर, पढ़ें सफलता की कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। आज हम आपको ऐसी ही आईएएस अफसर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने UPSC परीक्षा में पूरे देश में रैंक 30 हासिल की थी। ये कोई और नहीं बल्कि IAS परी बिश्नोई है।</p>
<p><strong>बीकानेर की रहने वाली है परी बिश्नोई</strong></p>
<p>परी बिश्नोई राजस्थान के राजस्थान के बीकानेर के रहने वाली है। उन्होंने अजमेर से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की। इसके बाद उन्होंने मास्टर डिग्री</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162975/ias-success-story-mother-joined-police-and-daughter-became-ias"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/ias-success-story-(9).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। आज हम आपको ऐसी ही आईएएस अफसर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने UPSC परीक्षा में पूरे देश में रैंक 30 हासिल की थी। ये कोई और नहीं बल्कि IAS परी बिश्नोई है।</p>
<p><strong>बीकानेर की रहने वाली है परी बिश्नोई</strong></p>
<p>परी बिश्नोई राजस्थान के राजस्थान के बीकानेर के रहने वाली है। उन्होंने अजमेर से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की। इसके बाद उन्होंने मास्टर डिग्री ली। आपको बता दें की परी बिश्नोई ने UPSC की परीक्षा पास करने से पहले नेट की परीक्षा पास की।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/3339122-ias-pari-bishnoi-1.jpg" alt="3339122-ias-pari-bishnoi-1" width="1200" height="900"></img></p>
<p><strong>मां से मिली प्रेरणा</strong></p>
<p>परी बिश्नोई ने बताया कि आईएएस बनने के लिए उन्हें अपने मां से प्रेरणा मिली। उनकी मां राजस्थान पुलिस में है। बचपन से ही उन्होंने अपनी मां को समाज के लिए काम करते देखा है। मां को समाजसेवा करते देख उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास करने की सोची।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/ias-pari-story-in-hindi.jpg" alt="ias-pari-story-in-hindi" width="1280" height="720"></img></p>
<p>IAS परी बिश्नोई की 2024 के लोकसभा चुनावों में रिटर्निग ऑफिसर के रूप में कार्यरत थीं। आईएएस परी बिश्नोई इस समय वे उत्तर- पूर्व कैडर के अंदर सिक्किम में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पद पर काम कर रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Dec 2025 11:01:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: मां पुलिस में और बेटी बन गई IAS अफसर, पढ़ें सफलता की कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। आज हम आपको ऐसी ही आईएएस अफसर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने UPSC परीक्षा में पूरे देश में रैंक 30 हासिल की थी। ये कोई और नहीं बल्कि IAS परी बिश्नोई है।</p>
<p><strong>बीकानेर की रहने वाली है परी बिश्नोई</strong></p>
<p>परी बिश्नोई राजस्थान के राजस्थान के बीकानेर के रहने वाली है। उन्होंने अजमेर से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की। इसके बाद उन्होंने मास्टर डिग्री</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162156/ias-success-story-mother-joined-police-and-daughter-became-ias"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/ias-success-story-(9).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: यूपीएससी को देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। आज हम आपको ऐसी ही आईएएस अफसर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने UPSC परीक्षा में पूरे देश में रैंक 30 हासिल की थी। ये कोई और नहीं बल्कि IAS परी बिश्नोई है।</p>
<p><strong>बीकानेर की रहने वाली है परी बिश्नोई</strong></p>
<p>परी बिश्नोई राजस्थान के राजस्थान के बीकानेर के रहने वाली है। उन्होंने अजमेर से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की। इसके बाद उन्होंने मास्टर डिग्री ली। आपको बता दें की परी बिश्नोई ने UPSC की परीक्षा पास करने से पहले नेट की परीक्षा पास की।</p>
<p><strong>मां से मिली प्रेरणा</strong></p>
<p>परी बिश्नोई ने बताया कि आईएएस बनने के लिए उन्हें अपने मां से प्रेरणा मिली। उनकी मां राजस्थान पुलिस में है। बचपन से ही उन्होंने अपनी मां को समाज के लिए काम करते देखा है। मां को समाजसेवा करते देख उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास करने की सोची।</p>
<p>IAS परी बिश्नोई की 2024 के लोकसभा चुनावों में रिटर्निग ऑफिसर के रूप में कार्यरत थीं। आईएएस परी बिश्नोई इस समय वे उत्तर- पूर्व कैडर के अंदर सिक्किम में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पद पर काम कर रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Nov 2025 16:49:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: किसान की बेटी बनी IAS अधिकारी, पढ़ें तपस्या परिहार की सक्सेस स्टोरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: हर साल भारत में लाखों छात्र UPSC की परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही इस कठिनतम परीक्षा में सफलता प्राप्त कर पाते हैं। जो इसे पास करते हैं, उनमें जुनून, समर्पण और कड़ी मेहनत का जबरदस्त मिश्रण होता है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है IAS तपस्या परिहार की, जिन्होंने तमाम मुश्किलों के बावजूद UPSC 2017 में ऑल इंडिया रैंक 23 हासिल कर यह साबित किया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी सपना हकीकत बन सकता है।</p>
<p><strong>छोटे से गांव से निकली बड़ी सोच</strong></p>
<p>तपस्या मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के एक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/160449/ias-success-story-farmers-daughter-becomes-ias-officer-read-success"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/3d89f015d491e6f505428e42844aa3f7.webp" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: हर साल भारत में लाखों छात्र UPSC की परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही इस कठिनतम परीक्षा में सफलता प्राप्त कर पाते हैं। जो इसे पास करते हैं, उनमें जुनून, समर्पण और कड़ी मेहनत का जबरदस्त मिश्रण होता है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है IAS तपस्या परिहार की, जिन्होंने तमाम मुश्किलों के बावजूद UPSC 2017 में ऑल इंडिया रैंक 23 हासिल कर यह साबित किया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी सपना हकीकत बन सकता है।</p>
<p><strong>छोटे से गांव से निकली बड़ी सोच</strong></p>
<p>तपस्या मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के एक छोटे से गांव जबेरा से आती हैं। उनके पिता किसान हैं और परिवार आर्थिक रूप से सामान्य स्थिति में था। गांव की एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली तपस्या ने संसाधनों की कमी को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने खुद को हमेशा पढ़ाई और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रखा।</p>
<p><strong>केंद्रीय विद्यालय से ILS लॉ कॉलेज तक</strong></p>
<p>तपस्या ने शुरुआती पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से की और आगे की पढ़ाई के लिए पुणे स्थित ILS Law College से कानून की डिग्री प्राप्त की। यहीं से उनके मन में UPSC की तैयारी करने का विचार जन्मा। कानून की पढ़ाई के दौरान उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखना शुरू किया।</p>
<p><strong>पहले प्रयास में असफलता</strong></p>
<p>UPSC के पहले प्रयास में तपस्या प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं कर पाईं। यह असफलता किसी के भी आत्मविश्वास को डगमगा सकती है, लेकिन तपस्या ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी रणनीति पर पुनर्विचार किया और यह तय किया कि अगली बार तैयारी और मजबूत होनी चाहिए।</p>
<p><strong>बिना कोचिंग के की सेल्फ स्टडी</strong></p>
<p>दूसरे प्रयास में तपस्या ने कोचिंग पर निर्भर रहने के बजाय सेल्फ स्टडी को चुना। उन्होंने मॉक टेस्ट, करंट अफेयर्स, और लगातार रिवीजन पर फोकस किया। साथ ही सोशल मीडिया से दूरी बनाकर अपनी ऊर्जा सिर्फ पढ़ाई में लगाई। उनका मानना था कि सही रणनीति और निरंतरता ही सफलता की कुंजी है।</p>
<p><strong>AIR 23 और IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा</strong></p>
<p>तपस्या की मेहनत रंग लाई और उन्होंने UPSC 2017 में ऑल इंडिया रैंक 23 हासिल की। इस शानदार उपलब्धि के साथ वे IAS अधिकारी बनीं और लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गईं। उनका यह सफर बताता है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास ईमानदार हों, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Nov 2025 20:31:04 +0530</pubDate>
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