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                <title>IAS Success Story in Hindi - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>IAS Success Story in Hindi RSS Feed</description>
                
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                <title>IAS Success Story: ASI की बेटी बनीं आईएएस अफसर, पढ़ें रूपल राणा की सक्सेस स्टोरी</title>
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                        <![CDATA[<p>IAS Success Story: जब इरादे मजबूत हों और लक्ष्य साफ हो, तो हालात चाहे जैसे भी हों, सफलता का रास्ता जरूर निकलता है। ऐसी ही प्रेरक कहानी है दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात जसवीर राणा की बेटी आईएएस रूपल राणा की, जिन्होंने कड़ी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के बल पर देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी में सफलता हासिल की।</p>
<h3>कम उम्र में मां का साया उठा</h3>
<p>रूपल राणा की सफलता की कहानी आसान नहीं रही। बचपन में ही मां का साया सिर से उठ गया, जब उन्हें मां के आंचल की सबसे ज्यादा जरूरत थी।</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172364/ias-success-story-read-the-success-story-of-rupal-rana"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/ias-success-story-(25).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: जब इरादे मजबूत हों और लक्ष्य साफ हो, तो हालात चाहे जैसे भी हों, सफलता का रास्ता जरूर निकलता है। ऐसी ही प्रेरक कहानी है दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात जसवीर राणा की बेटी आईएएस रूपल राणा की, जिन्होंने कड़ी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के बल पर देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी में सफलता हासिल की।</p>
<h3>कम उम्र में मां का साया उठा</h3>
<p>रूपल राणा की सफलता की कहानी आसान नहीं रही। बचपन में ही मां का साया सिर से उठ गया, जब उन्हें मां के आंचल की सबसे ज्यादा जरूरत थी। ऐसे समय में उनके पिता जसवीर राणा ने मां और पिता – दोनों की भूमिका निभाई। पिता का मजबूत सहारा और भाई-बहनों का साथ रूपल के लिए सबसे बड़ी ताकत बना। पारिवारिक जिम्मेदारियों और भावनात्मक संघर्षों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई से कभी समझौता नहीं किया।</p>
<h3>पढ़ाई में शुरू से रहीं अव्वल</h3>
<p>रूपल की शुरुआती पढ़ाई बागपत के जेपी पब्लिक स्कूल से हुई, जहां उन्होंने 10वीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की और हाई स्कूल में 10 CGPA हासिल किए। इसके बाद 11वीं और 12वीं की पढ़ाई उन्होंने पिलानी से पूरी की। आगे चलकर उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के देशबंधु कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई की और वहां भी यूनिवर्सिटी टॉपर रहीं।</p>
<h3>यूपीएससी में दो बार असफलता, फिर भी नहीं टूटा हौसला</h3>
<p>शैक्षणिक जीवन में शानदार प्रदर्शन के बावजूद यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में रूपल को शुरुआती प्रयासों में असफलता का सामना करना पड़ा। दो बार असफल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी गलतियों का विश्लेषण किया, रणनीति बदली और नई ऊर्जा के साथ तैयारी में जुट गईं। यही जज्बा आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।</p>
<h3>यूपीएससी 2024 में 26वीं रैंक हासिल</h3>
<p>लगातार मेहनत और आत्ममंथन का नतीजा आखिरकार रंग लाया। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 में रूपल राणा ने ऑल इंडिया रैंक 26 हासिल कर ली। इस सफलता के साथ ही उनका आईएएस अधिकारी बनने का सपना पूरा हो गया और उन्होंने अपने पिता का नाम रोशन किया।</p>]]>
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                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 19:32:42 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Sandeep Kumar ]]>
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                <title>IAS Success Story: ASI की बेटी बनीं आईएएस अफसर, पढ़ें रूपल राणा की सक्सेस स्टोरी</title>
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                        <![CDATA[<p>IAS Success Story: जब इरादे मजबूत हों और लक्ष्य साफ हो, तो हालात चाहे जैसे भी हों, सफलता का रास्ता जरूर निकलता है। ऐसी ही प्रेरक कहानी है दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात जसवीर राणा की बेटी आईएएस रूपल राणा की, जिन्होंने कड़ी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के बल पर देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी में सफलता हासिल की।</p>
<h3>कम उम्र में मां का साया उठा</h3>
<p>रूपल राणा की सफलता की कहानी आसान नहीं रही। बचपन में ही मां का साया सिर से उठ गया, जब उन्हें मां के आंचल की सबसे ज्यादा जरूरत थी।</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171431/ias-success-story-read-the-success-story-of-rupal-rana"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/ias-success-story-(25).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: जब इरादे मजबूत हों और लक्ष्य साफ हो, तो हालात चाहे जैसे भी हों, सफलता का रास्ता जरूर निकलता है। ऐसी ही प्रेरक कहानी है दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात जसवीर राणा की बेटी आईएएस रूपल राणा की, जिन्होंने कड़ी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के बल पर देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी में सफलता हासिल की।</p>
<h3>कम उम्र में मां का साया उठा</h3>
<p>रूपल राणा की सफलता की कहानी आसान नहीं रही। बचपन में ही मां का साया सिर से उठ गया, जब उन्हें मां के आंचल की सबसे ज्यादा जरूरत थी। ऐसे समय में उनके पिता जसवीर राणा ने मां और पिता – दोनों की भूमिका निभाई। पिता का मजबूत सहारा और भाई-बहनों का साथ रूपल के लिए सबसे बड़ी ताकत बना। पारिवारिक जिम्मेदारियों और भावनात्मक संघर्षों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई से कभी समझौता नहीं किया।</p>
<h3>पढ़ाई में शुरू से रहीं अव्वल</h3>
<p>रूपल की शुरुआती पढ़ाई बागपत के जेपी पब्लिक स्कूल से हुई, जहां उन्होंने 10वीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की और हाई स्कूल में 10 CGPA हासिल किए। इसके बाद 11वीं और 12वीं की पढ़ाई उन्होंने पिलानी से पूरी की। आगे चलकर उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के देशबंधु कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई की और वहां भी यूनिवर्सिटी टॉपर रहीं।</p>
<h3>यूपीएससी में दो बार असफलता, फिर भी नहीं टूटा हौसला</h3>
<p>शैक्षणिक जीवन में शानदार प्रदर्शन के बावजूद यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में रूपल को शुरुआती प्रयासों में असफलता का सामना करना पड़ा। दो बार असफल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी गलतियों का विश्लेषण किया, रणनीति बदली और नई ऊर्जा के साथ तैयारी में जुट गईं। यही जज्बा आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।</p>
<h3>यूपीएससी 2024 में 26वीं रैंक हासिल</h3>
<p>लगातार मेहनत और आत्ममंथन का नतीजा आखिरकार रंग लाया। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 में रूपल राणा ने ऑल इंडिया रैंक 26 हासिल कर ली। इस सफलता के साथ ही उनका आईएएस अधिकारी बनने का सपना पूरा हो गया और उन्होंने अपने पिता का नाम रोशन किया।</p>]]>
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                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 21:59:37 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Sandeep Kumar ]]>
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                <title>IAS Success Story: ASI की बेटी बनीं आईएएस अफसर, पढ़ें रूपल राणा की सक्सेस स्टोरी</title>
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                        <![CDATA[<p>IAS Success Story: जब इरादे मजबूत हों और लक्ष्य साफ हो, तो हालात चाहे जैसे भी हों, सफलता का रास्ता जरूर निकलता है। ऐसी ही प्रेरक कहानी है दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात जसवीर राणा की बेटी आईएएस रूपल राणा की, जिन्होंने कड़ी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के बल पर देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी में सफलता हासिल की।</p>
<h3>कम उम्र में मां का साया उठा</h3>
<p>रूपल राणा की सफलता की कहानी आसान नहीं रही। बचपन में ही मां का साया सिर से उठ गया, जब उन्हें मां के आंचल की सबसे ज्यादा जरूरत थी।</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168506/ias-success-story-read-the-success-story-of-rupal-rana"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/ias-success-story-(25).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: जब इरादे मजबूत हों और लक्ष्य साफ हो, तो हालात चाहे जैसे भी हों, सफलता का रास्ता जरूर निकलता है। ऐसी ही प्रेरक कहानी है दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात जसवीर राणा की बेटी आईएएस रूपल राणा की, जिन्होंने कड़ी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के बल पर देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी में सफलता हासिल की।</p>
<h3>कम उम्र में मां का साया उठा</h3>
<p>रूपल राणा की सफलता की कहानी आसान नहीं रही। बचपन में ही मां का साया सिर से उठ गया, जब उन्हें मां के आंचल की सबसे ज्यादा जरूरत थी। ऐसे समय में उनके पिता जसवीर राणा ने मां और पिता – दोनों की भूमिका निभाई। पिता का मजबूत सहारा और भाई-बहनों का साथ रूपल के लिए सबसे बड़ी ताकत बना। पारिवारिक जिम्मेदारियों और भावनात्मक संघर्षों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई से कभी समझौता नहीं किया।</p>
<h3>पढ़ाई में शुरू से रहीं अव्वल</h3>
<p>रूपल की शुरुआती पढ़ाई बागपत के जेपी पब्लिक स्कूल से हुई, जहां उन्होंने 10वीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की और हाई स्कूल में 10 CGPA हासिल किए। इसके बाद 11वीं और 12वीं की पढ़ाई उन्होंने पिलानी से पूरी की। आगे चलकर उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के देशबंधु कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई की और वहां भी यूनिवर्सिटी टॉपर रहीं।</p>
<h3>यूपीएससी में दो बार असफलता, फिर भी नहीं टूटा हौसला</h3>
<p>शैक्षणिक जीवन में शानदार प्रदर्शन के बावजूद यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में रूपल को शुरुआती प्रयासों में असफलता का सामना करना पड़ा। दो बार असफल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी गलतियों का विश्लेषण किया, रणनीति बदली और नई ऊर्जा के साथ तैयारी में जुट गईं। यही जज्बा आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।</p>
<h3>यूपीएससी 2024 में 26वीं रैंक हासिल</h3>
<p>लगातार मेहनत और आत्ममंथन का नतीजा आखिरकार रंग लाया। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 में रूपल राणा ने ऑल इंडिया रैंक 26 हासिल कर ली। इस सफलता के साथ ही उनका आईएएस अधिकारी बनने का सपना पूरा हो गया और उन्होंने अपने पिता का नाम रोशन किया।</p>]]>
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                <pubDate>Sat, 07 Feb 2026 11:22:30 +0530</pubDate>
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                <title>IAS Success Story: पिता के सपने और मां के हौसले ने बनाया गरिमा को IAS अफसर, बिना कोचिंग क्रैक किया एग्जाम </title>
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                        <![CDATA[<p>IAS Success Story: कामयाब होने के लिए सिर्फ मेहनत नहीं, बल्कि दृढ़ हौसला और मुश्किल हालातों से लड़ने का जज्बा होना भी जरूरी है। बिहार की बेटी गरिमा लोहिया ने अपने जीवन में यही सिद्ध किया। कम उम्र में पिता का चले जाना और परिवार का बिखरना उनके लिए बड़े दुख का कारण था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आज उनकी सफलता की कहानी देशभर की बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।</p>
<p><strong>बक्सर से दिल्ली तक की शिक्षा यात्रा</strong><br />बक्सर की रहने वाली गरिमा लोहिया ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा वुट स्टॉक स्कूल और बाद में सनबीम भगवानपुर से</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162881/ias-success-story-fathers-dreams-and-mothers-courage-made-garima"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-garima-lohia.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: कामयाब होने के लिए सिर्फ मेहनत नहीं, बल्कि दृढ़ हौसला और मुश्किल हालातों से लड़ने का जज्बा होना भी जरूरी है। बिहार की बेटी गरिमा लोहिया ने अपने जीवन में यही सिद्ध किया। कम उम्र में पिता का चले जाना और परिवार का बिखरना उनके लिए बड़े दुख का कारण था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आज उनकी सफलता की कहानी देशभर की बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।</p>
<p><strong>बक्सर से दिल्ली तक की शिक्षा यात्रा</strong><br />बक्सर की रहने वाली गरिमा लोहिया ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा वुट स्टॉक स्कूल और बाद में सनबीम भगवानपुर से 12वीं तक पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए वे दिल्ली आईं और डीयू के किरोडीमल कॉलेज से बीकॉम की डिग्री हासिल की।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/ias-success-story.jpg" alt="ias-success-story" width="700" height="719"></img></p>
<p><strong>पिता का सपना और मां की ताकत</strong><br />गरिमा के पिता का सपना था कि उनकी बेटी यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास करके आईएएस बने। हालांकि साल 2015 में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी मां ने परिवार और गरिमा का हौसला बनाए रखा। मां की लगन और समर्थन से गरिमा ने पिता के सपने को जीवित रखा और उसकी ओर बढ़ती रहीं।</p>
<p><strong>कोरोना की चुनौती और घर पर तैयारी</strong><br />कोरोना महामारी के दौरान सभी कोचिंग बंद हो गईं और गरिमा घर लौट आईं। इस मुश्किल समय में उन्होंने हार नहीं मानी और यूट्यूब और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की मदद से यूपीएससी की तैयारी जारी रखी। स्टडी मटेरियल की कमी और शुरुआती असफलताओं के बावजूद उन्होंने लगातार मेहनत की।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/ias-garima-lohia-success-story-bihar-girl-who-got-upsc-air-2-rank-in-2022-exam.jpg" alt="ias-garima-lohia-success-story-bihar-girl-who-got-upsc-air-2-rank-in-2022-exam" width="700" height="393"></img></p>
<p><strong>दूसरे प्रयास में यूपीएससी टॉपर बनीं</strong><br />पहले अटेंप्ट में असफल होने के बावजूद गरिमा ने हौसला नहीं छोड़ा। अपनी असफलता से सीख लेकर उन्होंने दोगुनी मेहनत की और साल 2022 में यूपीएससी सिविल सर्विसेज परीक्षा में देश में दूसरी रैंक हासिल की।</p>
<p><strong>सफलता का श्रेय मां को</strong><br />गरिमा ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां को दिया और कहा कि उनकी प्रेरणा और समर्थन के बिना यह संभव नहीं होता। आज वे बिहार कैडर की आईएएस अधिकारी हैं और पालीगंज में SDM पद पर तैनात हैं।</p>]]>
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                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Dec 2025 11:46:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Sandeep Kumar ]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: 10 से 15 घंटे की सेल्फ-स्टडी, बिना कोचिंग वंदना मीणा बनीं IAS अफसर</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (</span><span class="cf1">UPSC) </span><span class="cf0">सिविल सर्विस एग्जाम को देश का सबसे कठिन परीक्षा माना जाता है। इसे क्लियर करने के लिए ज्यादातर अभ्यर्थी महंगी कोचिंग और स्टडी मैटेरियल का सहारा लेते हैं, लेकिन वंदना मीणा ने साबित कर दिया कि सफलता पाने के लिए महंगी तैयारी नहीं, बल्कि सही दिशा और मजबूत इरादे सबसे बड़ा आधार होते हैं। उन्होंने रोजाना 10 से 15 घंटे की सेल्फ-स्टडी के दम पर </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">को क्लियर किया और अपनी मेहनत व फोकस से दूसरों के लिए मिसाल बन गईं।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">छोटे से गांव से निकलकर बड़ा सपना पूरा किया</span></strong></p>
<p><span class="cf0">वंदना</span></p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162563/ias-success-story-10-to-15-hours-of-self-study-without"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-vandana-meena.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (</span><span class="cf1">UPSC) </span><span class="cf0">सिविल सर्विस एग्जाम को देश का सबसे कठिन परीक्षा माना जाता है। इसे क्लियर करने के लिए ज्यादातर अभ्यर्थी महंगी कोचिंग और स्टडी मैटेरियल का सहारा लेते हैं, लेकिन वंदना मीणा ने साबित कर दिया कि सफलता पाने के लिए महंगी तैयारी नहीं, बल्कि सही दिशा और मजबूत इरादे सबसे बड़ा आधार होते हैं। उन्होंने रोजाना 10 से 15 घंटे की सेल्फ-स्टडी के दम पर </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">को क्लियर किया और अपनी मेहनत व फोकस से दूसरों के लिए मिसाल बन गईं।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">छोटे से गांव से निकलकर बड़ा सपना पूरा किया</span></strong></p>
<p><span class="cf0">वंदना राजस्थान के टोकसी गांव की रहने वाली हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उनके माता-पिता ने हमेशा यह सुनिश्चित किया कि बेटी की पढ़ाई में कोई कमी न आए। बेहतर अवसरों की तलाश में पूरा परिवार दिल्ली आ गया। उनके पिता पृथ्वीराज मीणा दिल्ली पुलिस में अधिकारी हैं, जबकि उनकी मां संपति देवी गृहणी हैं। वंदना बताती हैं कि परिवार ने न सिर्फ उनका साथ दिया, बल्कि हर कदम पर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।</span></p>
<p><span class="cf0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/success-story-of-vandana-meena.jpg" alt="success-story-of-vandana-meena" width="700" height="394"></img></span></p>
<p><strong><span class="cf0">दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन</span></strong></p>
<p><span class="cf0">वंदना ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गंगापुर सिटी के ज्ञान रश्मि सीनियर सेकेंडरी स्कूल से की। अच्छे प्रदर्शन के चलते उन्हें दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट कोलंबा स्कूल में एडमिशन मिला। इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के आचार्य नरेंद्र देव कॉलेज से मैथमेटिक्स ऑनर्स में ग्रेजुएशन पूरा किया। पढ़ाई के दौरान ही उनके मन में सिविल सर्विस में जाने का सपना मजबूत हुआ, और यही सपना उन्हें </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">की तैयारी की ओर ले गया।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">AIR 331 </span><span class="cf0">हासिल कर बनीं </span><span class="cf1">IAS</span></strong></p>
<p><span class="cf0">साल 2021 में वंदना की मेहनत रंग लाई और उन्होंने </span><span class="cf1">UPSC CSE </span><span class="cf0">में ऑल इंडिया रैंक 331 हासिल की। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">बनने का सपना पूरा किया। रिज़ल्ट आने के बाद वंदना अपने स्कूल और गांव भी गईं, जहां उन्हें भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बताया गया। उनकी इस सफलता से न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे गांव और शिक्षकों को गर्व महसूस हुआ।</span></p>
<p><span class="cf0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/success-story-of-ias-vandana-meena.jpg" alt="success-story-of-ias-vandana-meena" width="700" height="394"></img></span></p>
<p><strong><span class="cf0">सेल्फ-स्टडी थी उनकी असली ताकत</span></strong></p>
<p><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">की तैयारी के लिए वंदना ने कोचिंग पर निर्भर रहने के बजाय पूरी तरह से सेल्फ-स्टडी को प्राथमिकता दी। पीक तैयारी के दौरान वह रोजाना 10 से 15 घंटे पढ़ाई करती थीं। उनका कहना है कि इस एग्जाम में निरंतरता, फोकस और सही स्ट्रैटेजी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके अनुशासन और मेहनत ने उन्हें सफलता के उस मुकाम तक पहुंचाया, जिसकी इच्छा हजारों अभ्यर्थी रखते हैं।</span></p>
<p></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Dec 2025 10:57:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Sandeep Kumar ]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: पिता कैब ड्राइवर, कम उम्र में शादी का दबाव झेला, बन गई IAS अधिकारी</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p>IAS Success Story: तमिलनाडु के इरोड जिले के सत्यमंगलम गांव की सी वनमथी ने अपने कठिन संघर्ष और मेहनत के बल पर IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया है। वनमथी की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो आर्थिक और सामाजिक बाधाओं के कारण अपने लक्ष्य से पीछे हट जाते हैं।</p>
<p>सी वनमथी के पिता एक कैब ड्राइवर हैं, जिनकी कमाई से घर का खर्च चलाना मुश्किल होता था। बचपन में वनमथी पढ़ाई के साथ-साथ पशुओं को चराकर घर के लिए भैंस का दूध बेचने में मदद करती थीं। यही नहीं, एक टीवी सीरियल देखकर</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156175/ias-success-story"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/ias-c-vanmathi.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: तमिलनाडु के इरोड जिले के सत्यमंगलम गांव की सी वनमथी ने अपने कठिन संघर्ष और मेहनत के बल पर IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया है। वनमथी की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो आर्थिक और सामाजिक बाधाओं के कारण अपने लक्ष्य से पीछे हट जाते हैं।</p>
<p>सी वनमथी के पिता एक कैब ड्राइवर हैं, जिनकी कमाई से घर का खर्च चलाना मुश्किल होता था। बचपन में वनमथी पढ़ाई के साथ-साथ पशुओं को चराकर घर के लिए भैंस का दूध बेचने में मदद करती थीं। यही नहीं, एक टीवी सीरियल देखकर उनके मन में IAS बनने का सपना जागा।</p>
<p>2011 में वनमथी ने UPSC परीक्षा में पहला प्रयास किया और इंटरव्यू तक पहुंचीं, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद लगातार तीन प्रयासों में असफल रहने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। अंततः 2015 में चौथे प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 152 हासिल कर UPSC परीक्षा पास की और IAS अधिकारी बनीं।</p>
<p>उनके माता-पिता ने भी इस सफर में पूरा साथ दिया। पढ़ाई के दौरान जब रिश्तेदारों ने उनकी शादी का दबाव डाला, तब भी माता-पिता ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/156175/ias-success-story</link>
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                <pubDate>Sun, 28 Sep 2025 16:30:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Sandeep Kumar ]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story:  विकलांगता और असफलता को नहीं बनने दिया बाधा, 40 की उम्र में बनीं IAS अफसर </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: "</span><span class="cf0">सपने</span> <span class="cf0">देखने</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">कोई</span> <span class="cf0">उम्र</span> <span class="cf0">नहीं</span> <span class="cf0">होती</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">और</span> <span class="cf0">उन्हें</span> <span class="cf0">पूरा</span> <span class="cf0">करने</span> <span class="cf0">का</span> <span class="cf0">जज़्बा</span> <span class="cf0">अगर</span> <span class="cf0">सच्चा</span> <span class="cf0">हो</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">तो</span> <span class="cf0">कोई</span> <span class="cf0">भी</span> <span class="cf0">रुकावट</span> <span class="cf0">बड़ी</span> <span class="cf0">नहीं</span> <span class="cf0">लगती</span><span class="cf0">।"</span> <span class="cf0">कुछ</span> <span class="cf0">यही</span> <span class="cf0">साबित</span> <span class="cf0">किया</span> <span class="cf0">है</span> <span class="cf0">केरल</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">रहने</span> <span class="cf0">वाली</span> <span class="cf0">निसा</span> <span class="cf0">उन्नीराजन</span> <span class="cf0">ने</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">जिन्होंने</span><span class="cf0"> 40 </span><span class="cf0">वर्ष</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">उम्र</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">अपने</span> <span class="cf0">सातवें</span> <span class="cf0">प्रयास</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf2">UPSC </span><span class="cf0">परीक्षा पास कर </span><span class="cf2">IAS </span><span class="cf0">अधिकारी बनने का सपना साकार किया।</span></p>
<h3><strong><span class="cf2">35 </span><span class="cf0">की उम्र में शुरू की </span><span class="cf2">UPSC </span><span class="cf0">की तैयारी</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">जहां </span><span class="cf0">अक्सर</span><span class="cf0"> लोग 30 की उम्र के बाद अपने सपनों को स्थगित कर देते हैं या किसी सुरक्षित नौकरी को अपनाने की सोचने लगते हैं, वहीं </span><span class="cf0">निसा</span></p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155637/ias-success-story-did-not-allow-disability-and-failure-ias"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/kas-success-story.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: "</span><span class="cf0">सपने</span> <span class="cf0">देखने</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">कोई</span> <span class="cf0">उम्र</span> <span class="cf0">नहीं</span> <span class="cf0">होती</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">और</span> <span class="cf0">उन्हें</span> <span class="cf0">पूरा</span> <span class="cf0">करने</span> <span class="cf0">का</span> <span class="cf0">जज़्बा</span> <span class="cf0">अगर</span> <span class="cf0">सच्चा</span> <span class="cf0">हो</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">तो</span> <span class="cf0">कोई</span> <span class="cf0">भी</span> <span class="cf0">रुकावट</span> <span class="cf0">बड़ी</span> <span class="cf0">नहीं</span> <span class="cf0">लगती</span><span class="cf0">।"</span> <span class="cf0">कुछ</span> <span class="cf0">यही</span> <span class="cf0">साबित</span> <span class="cf0">किया</span> <span class="cf0">है</span> <span class="cf0">केरल</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">रहने</span> <span class="cf0">वाली</span> <span class="cf0">निसा</span> <span class="cf0">उन्नीराजन</span> <span class="cf0">ने</span><span class="cf0">, </span><span class="cf0">जिन्होंने</span><span class="cf0"> 40 </span><span class="cf0">वर्ष</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">उम्र</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">अपने</span> <span class="cf0">सातवें</span> <span class="cf0">प्रयास</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf2">UPSC </span><span class="cf0">परीक्षा पास कर </span><span class="cf2">IAS </span><span class="cf0">अधिकारी बनने का सपना साकार किया।</span></p>
<h3><strong><span class="cf2">35 </span><span class="cf0">की उम्र में शुरू की </span><span class="cf2">UPSC </span><span class="cf0">की तैयारी</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">जहां </span><span class="cf0">अक्सर</span><span class="cf0"> लोग 30 की उम्र के बाद अपने सपनों को स्थगित कर देते हैं या किसी सुरक्षित नौकरी को अपनाने की सोचने लगते हैं, वहीं </span><span class="cf0">निसा</span><span class="cf0"> ने 35 वर्ष की उम्र में </span><span class="cf2">UPSC </span><span class="cf0">जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी शुरू की। उन्होंने हार नहीं </span><span class="cf0">मानी</span><span class="cf0">, भले ही उम्र </span><span class="cf0">और परिस्थितियाँ </span><span class="cf0">उनके पक्ष में नहीं थी।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">दो बेटियों की माँ, फिर भी न रुकी</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">निसा</span><span class="cf0"> की </span><span class="cf0">दो</span><span class="cf0"> बेटियां हैं </span><span class="cf3">–</span> <span class="cf0">बड़ी बेटी 11 वर्ष और छोटी 7 वर्ष की है। पढ़ाई और परिवार की ज़िम्मेदारियों के बीच संतुलन साधना किसी भी व्यक्ति के लिए कठिन हो सकता है, लेकिन </span><span class="cf0">निसा</span><span class="cf0"> ने इस चुनौती को भी बखूबी निभाया। उन्होंने न </span><span class="cf0">केवल</span> <span class="cf0">बच्चों</span><span class="cf0"> की देखभाल की, बल्कि नियमित रूप से पढ़ाई भी जारी रखी।</span></p>
<h3><strong><span class="cf0">परिवार का मिला पूरा सहयोग</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">निसा</span><span class="cf0"> की सफलता के पीछे उनके पति अरुण और बुजुर्ग माता-पिता का महत्वपूर्ण योगदान रहा। </span><span class="cf0">निसा</span><span class="cf0"> के माता-पिता दोनों रिटायर्ड पुलिसकर्मी हैं, और उन्होंने अपनी बेटी को हर कदम पर सहारा दिया। उनके पति ने भी घर की ज़िम्मेदारियों को साझा कर </span><span class="cf0">निसा</span><span class="cf0"> को पढ़ाई का पर्याप्त समय दिया।</span></p>
<h3><strong><span class="cf2">6 </span><span class="cf0">बार मिली असफलता, लेकिन नहीं टूटी उम्मीद</span></strong></h3>
<p><span class="cf0">निसा</span><span class="cf0"> को पहले छह प्रयासों </span><span class="cf0">में</span><span class="cf0"> असफलता का सामना करना पड़ा। इसके अलावा, वह सुनने में अक्षम हैं, लेकिन उन्होंने कभी अपनी विकलांगता को बहाना नहीं बनाया। हर बार असफलता के बाद उन्होंने खुद को और मजबूत किया और अंततः 2024 में 1000वीं </span><span class="cf0">रैंक</span> <span class="cf0">लाकर</span> <span class="cf2">IAS </span><span class="cf0">बनने का सपना पूरा किया।</span></p>
<p><span class="cf0">निसा</span><span class="cf0"> को प्रेरणा मिली </span><span class="cf0">कोट्टायम</span><span class="cf0"> के उप कलेक्टर </span><span class="cf0">रंजीत</span><span class="cf0"> से, जो खुद भी सुनने की क्षमता से जूझते हैं लेकिन एक सफल प्रशासनिक अधिकारी हैं। </span><span class="cf0">निसा</span><span class="cf0"> ने </span><span class="cf0">तिरुवनंतपुरम</span><span class="cf0"> के एक प्राइवेट </span><span class="cf0">कोचिंग</span><span class="cf0"> सेंटर से पढ़ाई की और अपने सपनों को आकार दिया।</span></p>
<p></p>]]>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Sep 2025 12:31:30 +0530</pubDate>
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                <title>IAS Success Story: 10वीं में 44%, फिर भी बने IAS अफसर, जानें अवनीश शरण की सफलता की कहानी</title>
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                        <![CDATA[<p>IAS Success Story: UPSC सिविल सेवा परीक्षा (CSE) को देश की ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। हर साल लाखों छात्र इसमें हिस्सा लेते हैं, लेकिन सफलता कुछ ही को मिलती है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है IAS अधिकारी अवनीश शरण की, जिन्होंने साधारण शैक्षणिक पृष्ठभूमि और बार-बार की असफलताओं के बावजूद अपनी मेहनत और लगन से UPSC में सफलता हासिल की।</p>
<h3><strong>कौन हैं अवनीश शरण?</strong></h3>
<p>बिहार से ताल्लुक रखने वाले अवनीश शरण ने अपनी शुरुआती पढ़ाई एक सरकारी स्कूल से की। वे खुद मानते थे कि वे एक औसत छात्र</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155440/ias-officer-also-knows-the-success-story-of-avnish-sharan"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/ias-awanish-sharan.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: UPSC सिविल सेवा परीक्षा (CSE) को देश की ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। हर साल लाखों छात्र इसमें हिस्सा लेते हैं, लेकिन सफलता कुछ ही को मिलती है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है IAS अधिकारी अवनीश शरण की, जिन्होंने साधारण शैक्षणिक पृष्ठभूमि और बार-बार की असफलताओं के बावजूद अपनी मेहनत और लगन से UPSC में सफलता हासिल की।</p>
<h3><strong>कौन हैं अवनीश शरण?</strong></h3>
<p>बिहार से ताल्लुक रखने वाले अवनीश शरण ने अपनी शुरुआती पढ़ाई एक सरकारी स्कूल से की। वे खुद मानते थे कि वे एक औसत छात्र हैं, लेकिन उनके मन में IAS बनने का सपना था। उन्होंने इसे एक मिशन की तरह लिया और कभी हार नहीं मानी।</p>
<h3><strong>10वीं में सिर्फ 44% नंबर</strong></h3>
<p>अवनीश शरण के अकादमिक रिकॉर्ड शुरुआत में बहुत अच्छे नहीं थे। उन्होंने कक्षा 10वीं में सिर्फ 44.7% अंक प्राप्त किए। इसके बाद 12वीं में उन्होंने थोड़ा सुधार करते हुए 65% अंक हासिल किए, और फिर ग्रेजुएशन में 60% अंक लाकर अपनी पढ़ाई पूरी की।</p>
<p>UPSC की राह आसान नहीं थी। अवनीश ने CDS और CPF जैसी UPSC की अन्य परीक्षाएं भी दीं, लेकिन वे इन दोनों में सफल नहीं हो पाए। इसके अलावा, उन्होंने स्टेट PCS की प्रीलिम्स परीक्षा में 10 बार भाग लिया और हर बार असफल रहे। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।</p>
<p>अवनीश ने अपने पहले UPSC अटेम्प्ट में इंटरव्यू तक पहुंचने के बावजूद सेलेक्ट नहीं हो सके। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। दूसरे प्रयास में, उन्होंने 77वीं रैंक (All India Rank) हासिल की और IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा कर लिया।</p>
<p>साल 2009 में IAS बनने के बाद, अवनीश शरण ने कई जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। मौजूदा समय में वे छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक जिम्मेदार पद पर तैनात हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए जाने जाते हैं।</p>]]>
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                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Sep 2025 13:50:00 +0530</pubDate>
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