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                <title>सक्सेस स्टोरी - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>सक्सेस स्टोरी RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>IAS Success Story: यूपी की बेटी ने UPSC में रच दिया इतिहास, पहले बनीं IPS फिर बनीं IAS अफसर </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: सपने अक्सर धैर्य और लगातार मेहनत मांगते हैं। उत्तर प्रदेश के शामली जिले की रहने वाली आस्था जैन की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। सिविल सेवा की कठिन तैयारी और लगातार प्रयासों के बाद उन्होंने UPSC 2025 में शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया रैंक-9 हासिल की। खास बात यह रही कि उन्हें अपने इस रिजल्ट की खबर उस समय मिली जब वह आईपीएस अधिकारी के रूप में ट्रेनिंग कर रही थीं।</p>
<h3>व्यापारी परिवार से आती हैं आस्था</h3>
<p>आस्था जैन उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कांधला क्षेत्र की रहने वाली हैं। उनके पिता अजय जैन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172726/ias-success-story-uttar-pradeshs-daughter-created-history-in-upsc"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/success-story-(20).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: सपने अक्सर धैर्य और लगातार मेहनत मांगते हैं। उत्तर प्रदेश के शामली जिले की रहने वाली आस्था जैन की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। सिविल सेवा की कठिन तैयारी और लगातार प्रयासों के बाद उन्होंने UPSC 2025 में शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया रैंक-9 हासिल की। खास बात यह रही कि उन्हें अपने इस रिजल्ट की खबर उस समय मिली जब वह आईपीएस अधिकारी के रूप में ट्रेनिंग कर रही थीं।</p>
<h3>व्यापारी परिवार से आती हैं आस्था</h3>
<p>आस्था जैन उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कांधला क्षेत्र की रहने वाली हैं। उनके पिता अजय जैन एक छोटे व्यापारी हैं और किराना व कंफेक्शनरी की दुकान चलाते हैं। बचपन से ही आस्था पढ़ाई में तेज रही हैं और उनका सपना सिविल सेवा में जाकर समाज के लिए काम करने का था। बेटी की इस बड़ी उपलब्धि से परिवार के साथ-साथ पूरे इलाके में खुशी का माहौल है और लोग उनकी सफलता पर गर्व महसूस कर रहे हैं।</p>
<h3>दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई, वहीं से शुरू की तैयारी</h3>
<p>आस्था जैन ने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">University of Delhi</span></span> से पूरी की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी। दिल्ली में रहते हुए उन्होंने कोचिंग के साथ-साथ सेल्फ-स्टडी पर भी काफी ध्यान दिया और ऑनलाइन संसाधनों का भी इस्तेमाल किया। उनके पिता के मुताबिक आस्था शुरू से ही पढ़ाई में काफी मेधावी रही हैं और उन्होंने 12वीं बोर्ड परीक्षा में भी देशभर में चौथी रैंक हासिल की थी।</p>
<h3>पहले भी पास कर चुकी थीं UPSC, बनी थीं IPS</h3>
<p>आस्था जैन ने इससे पहले भी यूपीएससी परीक्षा पास की थी। साल 2023 में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 131 हासिल की थी, जिसके बाद उनका चयन आईपीएस के रूप में हुआ। उन्हें राजस्थान कैडर मिला और फिलहाल वह हैदराबाद में ट्रेनिंग कर रही थीं।</p>
<h3>लगातार मेहनत से हासिल की टॉप-10 रैंक</h3>
<p>हालांकि आस्था का सपना शुरू से ही IAS अधिकारी बनने का था। इसलिए उन्होंने आईपीएस बनने के बाद भी तैयारी जारी रखी। उनकी मेहनत और धैर्य का परिणाम यह रहा कि यूपीएससी 2025 के रिजल्ट में उन्होंने रैंक-9 हासिल कर अपना सपना पूरा कर लिया। उनकी इस सफलता पर परिवार, रिश्तेदारों और पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Mar 2026 15:41:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success: डॉक्टर बनने का टूटा सपना, 120 दिन की तैयारी से तरुणी पांडे बनीं आईएएस अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: मिडिल क्लास परिवार में पली-बढ़ीं तरुणी पांडे बचपन से डॉक्टर बनना चाहती थीं। उन्होंने एमबीबीएस में दाखिला भी ले लिया था और दूसरे साल की पढ़ाई शुरू हो चुकी थी। लेकिन किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया कि उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी। जीवन के कई उतार-चढ़ावों के बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में टॉपर्स की सूची में जगह बनाते हुए 14वीं रैंक हासिल की। उनकी कहानी संघर्ष, हौसले और आत्मविश्वास की मिसाल है।</p>
<h4><strong>पश्चिम बंगाल में जन्म, झारखंड में परवरिश</strong></h4>
<p>तरुणी का जन्म पश्चिम बंगाल के चित्तरंजन में हुआ, लेकिन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172451/ias-success-broken-dream-of-becoming-a-doctor-taruni-pandey"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/ias-success-story-(31).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: मिडिल क्लास परिवार में पली-बढ़ीं तरुणी पांडे बचपन से डॉक्टर बनना चाहती थीं। उन्होंने एमबीबीएस में दाखिला भी ले लिया था और दूसरे साल की पढ़ाई शुरू हो चुकी थी। लेकिन किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया कि उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी। जीवन के कई उतार-चढ़ावों के बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में टॉपर्स की सूची में जगह बनाते हुए 14वीं रैंक हासिल की। उनकी कहानी संघर्ष, हौसले और आत्मविश्वास की मिसाल है।</p>
<h4><strong>पश्चिम बंगाल में जन्म, झारखंड में परवरिश</strong></h4>
<p>तरुणी का जन्म पश्चिम बंगाल के चित्तरंजन में हुआ, लेकिन उनका बचपन झारखंड के जामताड़ा में बीता। सीमित संसाधनों वाले मध्यमवर्गीय परिवार में पली-बढ़ीं तरुणी ने 10वीं तक की पढ़ाई प्राइवेट स्कूल में की। आर्थिक तंगी के कारण 10वीं के बाद उन्हें सरकारी स्कूल में दाखिला लेना पड़ा। बावजूद इसके, वे पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहीं।</p>
<h4><strong>एमबीबीएस अधूरा, फिर IGNOU से नई शुरुआत</strong></h4>
<p>12वीं के बाद उनका चयन सिक्किम के एक मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के लिए हो गया। डॉक्टर बनने का सपना सच होता नजर आ रहा था, लेकिन दूसरे वर्ष में अचानक तबीयत खराब होने के कारण उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी और घर लौटना पड़ा।</p>
<p>इसके बाद उन्होंने <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Indira Gandhi National Open University</span></span> (IGNOU) से ग्रेजुएशन और पोस्टग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। हालांकि उस समय तक उन्हें अपने जीवन की नई दिशा का अंदाजा नहीं था।</p>
<h4><strong>2016 का हादसा बना टर्निंग पॉइंट</strong></h4>
<p>साल 2016 में परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनकी बड़ी बहन के पति, जो <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Central Reserve Police Force</span></span> (CRPF) में असिस्टेंट कमांडेंट थे, श्रीनगर में शहीद हो गए। इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर दिया।</p>
<p>बहन की नौकरी से जुड़े मामलों में अधिकारियों से मिलने के दौरान तरुणी को प्रशासनिक सेवा की जिम्मेदारी और प्रभाव का एहसास हुआ। तभी उन्होंने सिविल सेवा में जाने का निर्णय लिया।</p>
<h4><strong>बिना कोचिंग, सिर्फ 120 दिन की तैयारी</strong></h4>
<p>तरुणी ने कभी कोचिंग नहीं ली थी और सेल्फ स्टडी पर भरोसा किया। आयु सीमा की वजह से यह उनका पहला और अंतिम प्रयास था। उन्होंने यूट्यूब वीडियो, नोट्स और किताबों की मदद से करीब 120 दिन तैयारी की।</p>
<p>साल 2021 में उन्होंने <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Union Public Service Commission</span></span> (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में 14वीं रैंक हासिल कर IAS कैडर प्राप्त किया।</p>
<p>रिजल्ट आने का दिन उनके जीवन का सबसे यादगार पल बन गया। शाम को परिणाम मिलने के बाद उन्होंने अपनी मां के घर लौटने का इंतजार किया और फिर रात में परिवार को खुशखबरी दी। बहन की आंखों में आंसू थे, भाई को यकीन नहीं हो रहा था, मां खुशी से नाच रही थीं और पिता भावुक होकर रो पड़े।</p>
<p>तरुणी ने उन पलों को डिजिटल मेमोरी में कैद किया और आज भी उन्हें अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानती हैं।</p>
<h4><strong>वर्तमान पद</strong></h4>
<p>वर्तमान में तरुणी पांडे दिल्ली स्थित संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग के अंतर्गत भारतीय संचार वित्त सेवा (IP&amp;TAFS) में ग्रुप ‘A’ अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 12:22:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: 2 साल के बच्चे की मां ने IAS बनकर रचा इतिहास, पढ़ें पूरी सक्सेस स्टोरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: शादी के बाद अक्सर यह मान लिया जाता है कि लड़की की प्राथमिक जिम्मेदारी केवल घर और परिवार तक सीमित रह जाती है। लेकिन हरियाणा की आईएएस अधिकारी पुष्पलता यादव ने इस रूढ़िवादी सोच को तोड़ते हुए साबित किया कि अगर परिवार का साथ मिले तो महिलाएं हर मुकाम हासिल कर सकती हैं। उनकी सफलता की कहानी दृढ़ निश्चय, कड़ी मेहनत और पारिवारिक सहयोग की मिसाल है।</p>
<p><strong>छोटे गांव से आईएएस तक का सफर</strong></p>
<p>हरियाणा के रेवाड़ी जिले के छोटे से गांव खुशबुरा से आने वाली पुष्पलता यादव ने वर्ष 2017 में Union Public Service Commission (UPSC)</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172316/ias-success-story-mother-of-2-year-old-child-created"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/ias-success-story-(30).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: शादी के बाद अक्सर यह मान लिया जाता है कि लड़की की प्राथमिक जिम्मेदारी केवल घर और परिवार तक सीमित रह जाती है। लेकिन हरियाणा की आईएएस अधिकारी पुष्पलता यादव ने इस रूढ़िवादी सोच को तोड़ते हुए साबित किया कि अगर परिवार का साथ मिले तो महिलाएं हर मुकाम हासिल कर सकती हैं। उनकी सफलता की कहानी दृढ़ निश्चय, कड़ी मेहनत और पारिवारिक सहयोग की मिसाल है।</p>
<p><strong>छोटे गांव से आईएएस तक का सफर</strong></p>
<p>हरियाणा के रेवाड़ी जिले के छोटे से गांव खुशबुरा से आने वाली पुष्पलता यादव ने वर्ष 2017 में Union Public Service Commission (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में 80वीं रैंक हासिल की। यह उपलब्धि उन्होंने ऐसे समय में हासिल की, जब वे शादीशुदा थीं, दो साल के बच्चे की मां थीं और बैंक में नौकरी भी कर रही थीं।</p>
<p><strong>शादी के बाद भी नहीं छोड़ा सपना</strong></p>
<p>पुष्पलता की स्कूली शिक्षा गांव में ही हुई। साल 2011 में उनकी शादी हो गई और वे मानेसर में रहने लगीं। शादी से पहले वे एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत थीं। बाद में उनका चयन स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर हुआ। शादी के बाद भी उन्होंने नौकरी जारी रखी और परिवार की जिम्मेदारियों के साथ अपने करियर को संतुलित किया।</p>
<p><strong>पढ़ाई जारी रखकर बढ़ाया कदम</strong></p>
<p>शादी के बाद उन्होंने आगे पढ़ाई करने की इच्छा जताई, जिसमें पति और ससुराल वालों ने पूरा सहयोग दिया। वर्ष 2016 में उन्होंने बीएससी की डिग्री प्राप्त की और इसके बाद एमबीए भी किया। हालांकि उनका अंतिम लक्ष्य सिविल सेवा में जाना ही था।</p>
<p><strong>परिवार बना सबसे बड़ी ताकत</strong></p>
<p>यूपीएससी की तैयारी के दौरान उनका परिवार उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। जब वे पढ़ाई करती थीं, तो उनके पति दो साल के बेटे की देखभाल करते थे, जबकि सास-ससुर घर के अन्य कामों में सहयोग करते थे। वे रोज सुबह 4 बजे उठकर पढ़ाई करती थीं, ताकि घर और नौकरी के बीच तैयारी में कोई कमी न रह जाए।</p>
<p><strong>दो असफलताओं के बाद भी नहीं मानी हार</strong></p>
<p>पहले दो प्रयासों में उन्हें सफलता नहीं मिली। प्रीलिम्स पास करने के बाद वे मेन्स परीक्षा में सफल नहीं हो पाईं। इससे उनका मनोबल डगमगाया, लेकिन परिवार ने उनका हौसला बढ़ाया। लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने वर्ष 2017 में देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 80वीं रैंक हासिल कर आईएएस बनने का सपना साकार कर लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/172316/ias-success-story-mother-of-2-year-old-child-created</link>
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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 11:54:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: 6 बार असफल, 7वें प्रयास में बनीं IAS: पढ़ें पल्लवी वर्मा की प्रेरक कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: एक लड़की, जिसके सपने बड़े थे, लेकिन रास्ता आसान नहीं था। जिंदगी ने उसे बार-बार परखा। मां कैंसर से जूझ रही थीं, घर में चिंता और दर्द का माहौल था। ऐसे हालात में ज्यादातर लोग टूट जाते हैं, लेकिन पल्लवी वर्मा ने दर्द को अपनी ताकत बना लिया। आंसुओं को इरादों में बदल दिया और ठान लिया कि अफसर बनकर ही रहेंगी।</p>
<h3><strong>इंदौर से शुरू हुआ सफर</strong></h3>
<p>मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली पल्लवी वर्मा ने बायोटेक्नोलॉजी में ग्रेजुएशन किया। वह अपने परिवार की पहली लड़की थीं, जो यूनिवर्सिटी तक पहुंचीं। पढ़ाई पूरी करने के बाद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171860/ias-success-story-failed-6-times-became-ias-in-7th"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/ias-success-story-(28).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: एक लड़की, जिसके सपने बड़े थे, लेकिन रास्ता आसान नहीं था। जिंदगी ने उसे बार-बार परखा। मां कैंसर से जूझ रही थीं, घर में चिंता और दर्द का माहौल था। ऐसे हालात में ज्यादातर लोग टूट जाते हैं, लेकिन पल्लवी वर्मा ने दर्द को अपनी ताकत बना लिया। आंसुओं को इरादों में बदल दिया और ठान लिया कि अफसर बनकर ही रहेंगी।</p>
<h3><strong>इंदौर से शुरू हुआ सफर</strong></h3>
<p>मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली पल्लवी वर्मा ने बायोटेक्नोलॉजी में ग्रेजुएशन किया। वह अपने परिवार की पहली लड़की थीं, जो यूनिवर्सिटी तक पहुंचीं। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने करीब 10-11 महीने चेन्नई में सॉफ्टवेयर टेस्टर के तौर पर नौकरी की। लेकिन उनका मन कुछ बड़ा करने का था। तभी उन्होंने सिविल सेवा में जाने का फैसला लिया और यूपीएससी  की परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।</p>
<h3><strong>2013 से शुरू हुई संघर्ष की कहानी</strong></h3>
<p>पल्लवी ने 2013 से खुद को पूरी तरह UPSC की तैयारी में झोंक दिया। 2013 से 2020 के बीच उन्होंने कई बार परीक्षा दी। तीन बार प्रीलिम्स में असफल रहीं, एक बार मेन्स में उम्मीद टूटी और तीन बार इंटरव्यू तक पहुंचकर भी चयन नहीं हो पाया। लगातार 6 असफलताओं ने उनका हौसला जरूर परखा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।</p>
<h3><strong>मां की बीमारी के बीच भी नहीं टूटा हौसला</strong></h3>
<p>तैयारी के दौरान उनकी मां कैंसर से जूझ रही थीं और कीमोथेरेपी से गुजर रही थीं। घर का माहौल बेहद भावनात्मक और चुनौतीपूर्ण था। अपने माता-पिता को दर्द में देखना आसान नहीं था, लेकिन पल्लवी ने खुद को संभाला। उन्होंने दर्द को कमजोरी नहीं, बल्कि प्रेरणा बनाया। माता-पिता ने भी उनकी लगन देखकर पूरा समर्थन दिया।</p>
<h3><strong>बदली रणनीति और मिली सफलता</strong></h3>
<p>बार-बार की असफलताओं के बाद पल्लवी ने 2020 में अपनी रणनीति बदली। टाइम-टेबल बनाकर नियमित रूप से लाइब्रेरी में पढ़ाई शुरू की। अपनी कमजोरियों को पहचाना और खास तौर पर आंसर राइटिंग पर ध्यान दिया। मेहनत रंग लाई और 7वें प्रयास में उन्होंने 340वीं रैंक हासिल की। इसके साथ ही उनका IAS बनने का सपना पूरा हो गया।</p>
<h3><strong>उम्मीदवारों के लिए पल्लवी की सलाह</strong></h3>
<p>पल्लवी का मानना है कि हालात चाहे जैसे भी हों, आगे बढ़ना नहीं छोड़ना चाहिए। तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को वह नियमित प्रैक्टिस, आंसर राइटिंग और आत्मविश्लेषण की सलाह देती हैं। उनका कहना है कि अपनी कमजोरियों को पहचानकर सुधार करना ही सफलता की असली कुंजी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 13:02:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: चार बार फेल होने के बावजूद नहीं मानी हार, पांचवें प्रयास में काजल जावला बनीं आईएएस अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती। यह पंक्तियां मेरठ की बेटी काजल जावला की जिंदगी पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। चार बार असफल होने के बाद भी उन्होंने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा। 9 घंटे की नौकरी, रोज़ का लंबा सफर, पारिवारिक जिम्मेदारियां—इन सबके बीच उन्होंने अपने सपने को जिंदा रखा। आखिरकार पांचवें प्रयास में उन्होंने UPSC परीक्षा पास कर IAS बनने का सपना पूरा किया और 23 लाख रुपये सालाना की नौकरी छोड़ दी।</p>
<p><strong>मेरठ से शुरू हुआ सफर, डॉक्टर बनने का था सपना</strong></p>
<p>काजल मूल रूप</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171455/ias-success-story-despite-failing-four-times-did-not-accept"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/ias-success-story-(27).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती। यह पंक्तियां मेरठ की बेटी काजल जावला की जिंदगी पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। चार बार असफल होने के बाद भी उन्होंने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा। 9 घंटे की नौकरी, रोज़ का लंबा सफर, पारिवारिक जिम्मेदारियां—इन सबके बीच उन्होंने अपने सपने को जिंदा रखा। आखिरकार पांचवें प्रयास में उन्होंने UPSC परीक्षा पास कर IAS बनने का सपना पूरा किया और 23 लाख रुपये सालाना की नौकरी छोड़ दी।</p>
<p><strong>मेरठ से शुरू हुआ सफर, डॉक्टर बनने का था सपना</strong></p>
<p>काजल मूल रूप से Meerut की रहने वाली हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई मेरठ से ही पूरी की। बचपन में उनका सपना डॉक्टर बनने का था, लेकिन आसपास के लोग उन्हें सिविल सर्विस में जाने की सलाह देते थे। उस समय उन्हें सिविल सेवा के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी।</p>
<p>साल 2010 में वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए मुथरा (मथुरा) चली गईं और वहां से बीटेक की डिग्री हासिल की।</p>
<p><strong>नौकरी के साथ UPSC की तैयारी</strong></p>
<p>बीटेक के बाद उन्हें एक अच्छी कंपनी में आकर्षक पैकेज पर नौकरी मिल गई। हालांकि, उनके पिता चाहते थे कि उनकी बेटी सिविल सर्विस में जाए और देश की सेवा करे। पिता के सपने को अपना लक्ष्य बनाते हुए काजल ने 2014 से गंभीरता से UPSC की तैयारी शुरू की।</p>
<p>दिल्ली से Gurugram तक रोजाना ऑफिस आना-जाना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। लगभग 2 घंटे का सफर वह कैब में तय करती थीं और इसी समय का इस्तेमाल पढ़ाई के लिए करती थीं। 9 घंटे की नौकरी के बाद भी उन्होंने अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा।</p>
<p><strong>शादी के बाद भी नहीं टूटा हौसला</strong></p>
<p>नौकरी के दौरान ही उनकी शादी हो गई, लेकिन उनके पति और पिता ने उन्हें लगातार प्रोत्साहित किया। वीकेंड पर वह ज्यादा समय पढ़ाई को देती थीं। परिवार के सहयोग ने उनके आत्मविश्वास को मजबूत बनाए रखा।</p>
<p><strong>चार असफलताएं, फिर भी नहीं मानी हार</strong></p>
<p>काजल ने 2012 में पहला प्रयास किया। इसके बाद 2014, 2016 और 2017 में भी उन्हें असफलता मिली। चार बार असफल होने के बाद कई लोग हार मान लेते हैं, लेकिन उन्होंने नहीं। हर असफलता से सीख लेकर अपनी रणनीति मजबूत की और तैयारी को और धार दी।</p>
<p><strong>पांचवें प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 28</strong></p>
<p>साल 2018 में पांचवें प्रयास में उन्होंने UPSC परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 28 हासिल की। उस समय उनकी सालाना सैलरी करीब 23 लाख रुपये थी, लेकिन IAS बनने के लिए उन्होंने बिना झिझक वह नौकरी छोड़ दी।</p>
<p>आज वह Indian Administrative Service की अधिकारी हैं और मध्य प्रदेश कैडर में सेवाएं दे रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/171455/ias-success-story-despite-failing-four-times-did-not-accept</link>
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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 13:06:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: लाखों की नौकरी छोड़ शुरू की यूपीएससी की तैयारी, AIR-6 लाकर बनीं IAS विशाखा यादव</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: इंजीनियरिंग के बाद जिंदगी पूरी तरह सेट लग रही थी। मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी, अच्छी-खासी सैलरी और सुरक्षित भविष्य—सब कुछ मौजूद था। लेकिन मन के अंदर कुछ अलग करने की चाह थी, ऐसी पहचान बनाने की, जो समाज के लिए मायने रखे। यही चाह कब IAS बनने का जुनून बन गई, यह विशाखा यादव को भी पता नहीं चला। आज IAS विशाखा यादव की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आरामदायक जिंदगी छोड़कर कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं।</p>
<h5>दिल्ली पुलिस में दारोगा हैं पिता</h5>
<p>विशाखा यादव दिल्ली के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167038/ias-success-story-left-job-worth-lakhs-and-started-preparing"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-vishakha-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: इंजीनियरिंग के बाद जिंदगी पूरी तरह सेट लग रही थी। मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी, अच्छी-खासी सैलरी और सुरक्षित भविष्य—सब कुछ मौजूद था। लेकिन मन के अंदर कुछ अलग करने की चाह थी, ऐसी पहचान बनाने की, जो समाज के लिए मायने रखे। यही चाह कब IAS बनने का जुनून बन गई, यह विशाखा यादव को भी पता नहीं चला। आज IAS विशाखा यादव की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आरामदायक जिंदगी छोड़कर कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं।</p>
<h5>दिल्ली पुलिस में दारोगा हैं पिता</h5>
<p>विशाखा यादव दिल्ली के द्वारका की रहने वाली हैं। उनके पिता राजकुमार यादव दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) हैं, जबकि मां एक गृहिणी हैं। परिवार का पूरा सपोर्ट विशाखा को हमेशा मिला। खासतौर पर उनकी मां हर कदम पर उनके साथ खड़ी रहीं। विशाखा कई बार कह चुकी हैं कि आज वह जो कुछ भी हैं, उसमें मां का योगदान सबसे बड़ा है।</p>
<h5>इंजीनियरिंग के बाद चुना UPSC का रास्ता</h5>
<p>12वीं तक की पढ़ाई दिल्ली से करने के बाद विशाखा ने इंजीनियरिंग करने का फैसला लिया। उन्होंने दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) से बीटेक किया। साल 2014 में ग्रेजुएशन के बाद उन्हें सिस्को कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी मिल गई। करीब दो साल तक उन्होंने बेंगलुरु में काम किया और अच्छी सैलरी कमाई।</p>
<h5>लाखों की टेक जॉब छोड़ UPSC की तैयारी</h5>
<p>पैसा और सुविधाएं थीं, लेकिन सिविल सेवा जैसी संतुष्टि नहीं थी। इसी सोच के साथ विशाखा ने नौकरी छोड़ दी और दिल्ली आकर फुल-टाइम UPSC की तैयारी शुरू कर दी। यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि आगे अनिश्चितता भरा रास्ता था।</p>
<h5>दो बार असफलता, लेकिन नहीं मानी हार</h5>
<p>विशाखा ने पहला UPSC प्रयास दिया, लेकिन सफलता नहीं मिली। दूसरी बार भी असफलता हाथ लगी। इस दौरान उनके जॉब छोड़ने के फैसले पर सवाल उठने लगे। लोग कहने लगे कि अच्छी नौकरी छोड़कर गलती कर दी। लेकिन विशाखा का आत्मविश्वास नहीं डगमगाया। उन्होंने ठान लिया था कि जवाब शब्दों से नहीं, सफलता से देना है।</p>
<h5>UPSC 2019 में AIR-6 हासिल कर रचा इतिहास</h5>
<p>लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प का नतीजा आखिरकार सामने आया। UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2019 में विशाखा यादव ने ऑल इंडिया रैंक-6 हासिल कर सभी आलोचनाओं पर विराम लगा दिया। इस उपलब्धि का श्रेय उन्होंने अपनी मां और परिवार के सपोर्ट को दिया।</p>
<h5>प्रशासनिक सेवा में शानदार सफर</h5>
<p>जून 2025 तक विशाखा यादव अरुणाचल प्रदेश में डिप्टी कमिश्नर के पद पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। हाल ही में उनका ट्रांसफर दिल्ली किया गया है। उनका सफर इस बात का सबूत है कि अगर लक्ष्य साफ हो और इरादे मजबूत हों, तो असफलताएं रास्ता नहीं रोक सकतीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/167038/ias-success-story-left-job-worth-lakhs-and-started-preparing</link>
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                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 19:37:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: लाखों की नौकरी छोड़ शुरू की यूपीएससी की तैयारी, AIR-6 लाकर बनीं IAS विशाखा यादव</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: इंजीनियरिंग के बाद जिंदगी पूरी तरह सेट लग रही थी। मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी, अच्छी-खासी सैलरी और सुरक्षित भविष्य—सब कुछ मौजूद था। लेकिन मन के अंदर कुछ अलग करने की चाह थी, ऐसी पहचान बनाने की, जो समाज के लिए मायने रखे। यही चाह कब IAS बनने का जुनून बन गई, यह विशाखा यादव को भी पता नहीं चला। आज IAS विशाखा यादव की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आरामदायक जिंदगी छोड़कर कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं।</p>
<h5>दिल्ली पुलिस में दारोगा हैं पिता</h5>
<p>विशाखा यादव दिल्ली के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165960/ias-success-story-left-job-worth-lakhs-and-started-preparing"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-vishakha-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: इंजीनियरिंग के बाद जिंदगी पूरी तरह सेट लग रही थी। मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी, अच्छी-खासी सैलरी और सुरक्षित भविष्य—सब कुछ मौजूद था। लेकिन मन के अंदर कुछ अलग करने की चाह थी, ऐसी पहचान बनाने की, जो समाज के लिए मायने रखे। यही चाह कब IAS बनने का जुनून बन गई, यह विशाखा यादव को भी पता नहीं चला। आज IAS विशाखा यादव की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आरामदायक जिंदगी छोड़कर कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं।</p>
<h5>दिल्ली पुलिस में दारोगा हैं पिता</h5>
<p>विशाखा यादव दिल्ली के द्वारका की रहने वाली हैं। उनके पिता राजकुमार यादव दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) हैं, जबकि मां एक गृहिणी हैं। परिवार का पूरा सपोर्ट विशाखा को हमेशा मिला। खासतौर पर उनकी मां हर कदम पर उनके साथ खड़ी रहीं। विशाखा कई बार कह चुकी हैं कि आज वह जो कुछ भी हैं, उसमें मां का योगदान सबसे बड़ा है।</p>
<h5>इंजीनियरिंग के बाद चुना UPSC का रास्ता</h5>
<p>12वीं तक की पढ़ाई दिल्ली से करने के बाद विशाखा ने इंजीनियरिंग करने का फैसला लिया। उन्होंने दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) से बीटेक किया। साल 2014 में ग्रेजुएशन के बाद उन्हें सिस्को कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी मिल गई। करीब दो साल तक उन्होंने बेंगलुरु में काम किया और अच्छी सैलरी कमाई।</p>
<h5>लाखों की टेक जॉब छोड़ UPSC की तैयारी</h5>
<p>पैसा और सुविधाएं थीं, लेकिन सिविल सेवा जैसी संतुष्टि नहीं थी। इसी सोच के साथ विशाखा ने नौकरी छोड़ दी और दिल्ली आकर फुल-टाइम UPSC की तैयारी शुरू कर दी। यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि आगे अनिश्चितता भरा रास्ता था।</p>
<h5>दो बार असफलता, लेकिन नहीं मानी हार</h5>
<p>विशाखा ने पहला UPSC प्रयास दिया, लेकिन सफलता नहीं मिली। दूसरी बार भी असफलता हाथ लगी। इस दौरान उनके जॉब छोड़ने के फैसले पर सवाल उठने लगे। लोग कहने लगे कि अच्छी नौकरी छोड़कर गलती कर दी। लेकिन विशाखा का आत्मविश्वास नहीं डगमगाया। उन्होंने ठान लिया था कि जवाब शब्दों से नहीं, सफलता से देना है।</p>
<h5>UPSC 2019 में AIR-6 हासिल कर रचा इतिहास</h5>
<p>लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प का नतीजा आखिरकार सामने आया। UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2019 में विशाखा यादव ने ऑल इंडिया रैंक-6 हासिल कर सभी आलोचनाओं पर विराम लगा दिया। इस उपलब्धि का श्रेय उन्होंने अपनी मां और परिवार के सपोर्ट को दिया।</p>
<h5>प्रशासनिक सेवा में शानदार सफर</h5>
<p>जून 2025 तक विशाखा यादव अरुणाचल प्रदेश में डिप्टी कमिश्नर के पद पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। हाल ही में उनका ट्रांसफर दिल्ली किया गया है। उनका सफर इस बात का सबूत है कि अगर लक्ष्य साफ हो और इरादे मजबूत हों, तो असफलताएं रास्ता नहीं रोक सकतीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Jan 2026 11:39:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: राजस्थान की बेटी 22 साल की उम्र में बनीं IAS अफसर, पहले ही प्रयास में हासिल की 73वीं रैंक</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: बीते कुछ वर्षों में राजस्थान ने देश को कई प्रतिभाशाली IAS और IPS अधिकारी दिए हैं। इसी कड़ी में एक और नाम जुड़ गया है IAS कृष्णा जोशी का, जिन्होंने बेहद कम उम्र में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जोधपुर की रहने वाली कृष्णा जोशी ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर पहले ही प्रयास में UPSC CSE 2023 में 73वीं रैंक हासिल की और आज वे बिहार कैडर की आईएएस अधिकारी हैं।</p>
<p><strong>पिता वकील, बेटी ने चुनी सिविल सेवा की राह</strong></p>
<p>IAS कृष्णा जोशी का जन्म 08 अक्टूबर 2001</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165469/ias-success-story-rajasthans-daughter-became-an-ias-officer-at"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-success-story-(19).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: बीते कुछ वर्षों में राजस्थान ने देश को कई प्रतिभाशाली IAS और IPS अधिकारी दिए हैं। इसी कड़ी में एक और नाम जुड़ गया है IAS कृष्णा जोशी का, जिन्होंने बेहद कम उम्र में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जोधपुर की रहने वाली कृष्णा जोशी ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर पहले ही प्रयास में UPSC CSE 2023 में 73वीं रैंक हासिल की और आज वे बिहार कैडर की आईएएस अधिकारी हैं।</p>
<p><strong>पिता वकील, बेटी ने चुनी सिविल सेवा की राह</strong></p>
<p>IAS कृष्णा जोशी का जन्म 08 अक्टूबर 2001 को राजस्थान के जोधपुर में हुआ। वे एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता पेशे से वकील हैं, जिन्होंने शुरू से ही उन्हें सिविल सेवा में जाने के लिए प्रेरित किया।</p>
<p>महज 22 साल की उम्र में आईएएस बनना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। कृष्णा की सफलता यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, अनुशासन और निरंतर मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।</p>
<p><strong>Krishna Joshi Education: जोधपुर से दिल्ली तक का सफर</strong></p>
<p>कृष्णा जोशी की शुरुआती शिक्षा से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई जोधपुर से हुई। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज (LSR) से अंग्रेजी विषय में ग्रेजुएशन किया।</p>
<p>ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने बिना समय गंवाए यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी और सीमित उम्र में ही देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक को पास कर दिखाया।</p>
<p><strong>पहले ही प्रयास में UPSC पास</strong></p>
<p>UPSC CSE 2023 में पहले प्रयास में 73वीं रैंक हासिल करना सिर्फ एक परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, धैर्य और कड़ी मेहनत की जीत है।</p>
<p>कृष्णा जोशी का सफर उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं। अनगिनत घंटों की पढ़ाई, असफलता का डर और समाज की अपेक्षाओं के बीच उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनका मानना है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता जरूर मिलती है।</p>
<p><strong>Bihar Cadre IAS: नालंदा में मिली पहली बड़ी जिम्मेदारी</strong></p>
<p>आईएएस बनने के बाद कृष्णा जोशी को बिहार कैडर मिला। वर्ष 2025 में उन्हें बिहार के नालंदा जिले में सहायक कलेक्टर के पद पर तैनाती दी गई।</p>
<p>कम उम्र में प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालते हुए वे न सिर्फ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रही हैं, बल्कि लाखों युवाओं के लिए रोल मॉडल भी बन चुकी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 19:27:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: संघर्ष और मेहनत की मिसाल है IAS ममता यादव, दो बार पास की UPSC परीक्षा </title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: हर किसी की जिंदगी में सपने होते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो विपरीत हालातों से लड़कर अपने सपनों को साकार कर दिखाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है हरियाणा के छोटे से गांव बसई की रहने वाली ममता यादव की, जिन्होंने कड़ी मेहनत, धैर्य और लगातार प्रयासों के बल पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (</span><span class="cf1">IAS) </span><span class="cf0">में जगह बनाई। उनकी सफलता आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो साधारण परिवार से आते हैं लेकिन बड़े सपने देखते हैं।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">सीमित संसाधन, लेकिन सपने बड़े</span></strong></p>
<p><span class="cf0">ममता यादव का सफर आसान नहीं रहा। गांव</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164939/ias-success-story-ias-mamta-yadav-is-an-example-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-mamta-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: हर किसी की जिंदगी में सपने होते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो विपरीत हालातों से लड़कर अपने सपनों को साकार कर दिखाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है हरियाणा के छोटे से गांव बसई की रहने वाली ममता यादव की, जिन्होंने कड़ी मेहनत, धैर्य और लगातार प्रयासों के बल पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (</span><span class="cf1">IAS) </span><span class="cf0">में जगह बनाई। उनकी सफलता आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो साधारण परिवार से आते हैं लेकिन बड़े सपने देखते हैं।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">सीमित संसाधन, लेकिन सपने बड़े</span></strong></p>
<p><span class="cf0">ममता यादव का सफर आसान नहीं रहा। गांव का माहौल, सीमित संसाधन और देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक यूपीएससी</span><span class="cf2">—</span><span class="cf0">इन सभी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहीं ममता के मन में कुछ बड़ा करने की चाह थी। उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें आईएएस अधिकारी बनना है और इसी लक्ष्य को लेकर उन्होंने लगातार चार साल तक यूपीएससी की तैयारी की।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">दिल्ली से हुई पढ़ाई, यहीं पक्का हुआ </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">बनने का सपना</span></strong></p>
<p><span class="cf0">ममता की शुरुआती शिक्षा दिल्ली के बलवंत राय मेहता स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। कॉलेज के दिनों में ही उनके मन में सिविल सेवा में जाने का सपना पूरी तरह स्पष्ट हो गया था, जिसके बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।</span></p>
<p><span class="cf0">साल 2019 में ममता ने पहली बार यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की। उस समय उनकी ऑल इंडिया रैंक 556 आई थी। यह एक बड़ी उपलब्धि जरूर थी, लेकिन इस रैंक पर उन्हें आईएएस सेवा नहीं मिल पाई। जहां कई उम्मीदवार इस मोड़ पर रुक जाते हैं, वहीं ममता ने इसे असफलता नहीं, बल्कि सीख माना और खुद को और बेहतर बनाने का फैसला किया।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">दूसरी कोशिश में मिली शानदार कामयाबी</span></strong></p>
<p><span class="cf0">अगले साल ममता ने दोबारा यूपीएससी परीक्षा दी। इस बार उनका आत्मविश्वास कहीं ज्यादा मजबूत था और तैयारी पहले से कहीं अधिक सटीक। उन्होंने पूरे समर्पण के साथ पढ़ाई की और हर दिन खुद को बेहतर बनाने पर काम किया। नतीजा यह रहा कि उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 5 हासिल की। यह न सिर्फ उनकी निजी जीत थी, बल्कि पूरे गांव और परिवार के लिए गर्व का क्षण बन गया। ममता अपने गांव की पहली </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">अधिकारी बनीं।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">कड़ी मेहनत और सही रणनीति को देती हैं सफलता का श्रेय</span></strong></p>
<p><span class="cf0">ममता यादव वर्तमान में </span><span class="cf1">AGMUT </span><span class="cf0">कैडर की </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">अधिकारी हैं। एक छोटे से गांव से निकलकर इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे कोई बाधा टिक नहीं सकती। ममता अपनी सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत, सही रणनीति और अनुशासन को देती हैं।</span></p>
<p><span class="cf0">उन्होंने बताया कि यूपीएससी की तैयारी के दौरान उन्होंने कोचिंग के साथ-साथ सेल्फ स्टडी पर भी बराबर ध्यान दिया। वह रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थीं, जबकि परीक्षा के नजदीक यह समय 10 से 12 घंटे तक पहुंच जाता था। ममता ने </span><span class="cf1">NCERT </span><span class="cf0">की किताबों को अपनी तैयारी की नींव बनाया और इसके साथ जरूरी स्टैंडर्ड बुक्स व नोट्स का सहारा लिया।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">युवाओं के लिए प्रेरणा बनी ममता यादव</span></strong></p>
<p><span class="cf0">ममता यादव की कहानी यह संदेश देती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो साधारण पृष्ठभूमि भी असाधारण सफलता की राह में बाधा नहीं बनती। उनकी सफलता आज देशभर के उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आईएएस बनने का सपना देखते हैं।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 12:02:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: 40 लाख रुपये का छोड़ा पैकेज, आदित्य श्रीवास्तव पहले IPS फिर बने IAS अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf1">IAS Success Story: भारत</span> <span class="cf1">में</span> <span class="cf0">IAS-IPS </span><span class="cf1">बनने</span> <span class="cf1">का</span> <span class="cf1">सपना</span> <span class="cf1">लाखों</span> <span class="cf1">युवाओं</span> <span class="cf1">देखते</span> <span class="cf1">हैं</span><span class="cf1">, </span><span class="cf1">लेकिन</span> <span class="cf1">इस</span> <span class="cf1">राह</span> <span class="cf1">पर</span><span class="cf1"> चलने के लिए साहस, धैर्य और </span><span class="cf1">आत्मविश्वास</span> <span class="cf1">की</span> <span class="cf1">जरूरत</span> <span class="cf1">होती</span> <span class="cf1">है</span><span class="cf1">। </span><span class="cf1">लखनऊ</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">आदित्य</span><span class="cf1"> श्रीवास्तव उन्हीं चुनिंदा युवाओं में शामिल हैं, जिन्होंने </span><span class="cf0">UPSC </span><span class="cf1">की तैयारी के लिए </span><span class="cf2">₹</span><span class="cf0">40 </span><span class="cf1">लाख सालाना </span><span class="cf1">पैकेज</span> <span class="cf1">वाली</span> <span class="cf1">नौकरी</span><span class="cf1"> छोड़ दी। </span><span class="cf1">अनिश्चित</span><span class="cf1"> भविष्य के बावजूद </span><span class="cf1">उन्होंने</span> <span class="cf1">पिता</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">सपने</span> <span class="cf1">और</span> <span class="cf1">खुद</span> <span class="cf1">पर</span> <span class="cf1">भरोसे</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">दम</span> <span class="cf1">पर</span> <span class="cf1">वह</span> <span class="cf1">मुकाम</span> <span class="cf1">हासिल</span> <span class="cf1">किया</span><span class="cf1">, </span><span class="cf1">जो</span> <span class="cf1">आज</span> <span class="cf1">लाखों</span> <span class="cf1">अभ्यर्थियों</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">लिए</span> <span class="cf1">प्रेरणा</span> <span class="cf1">है</span><span class="cf1">।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">बचपन</span> <span class="cf1">से</span> <span class="cf1">ही</span> <span class="cf1">मेधावी</span> <span class="cf1">रहे</span> <span class="cf1">आदित्य</span></strong></p>
<p><span class="cf1">लखनऊ</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">आईआईएम</span> <span class="cf1">रोड</span> <span class="cf1">स्थित</span> <span class="cf1">एल्डिको</span> <span class="cf1">सिटी</span> <span class="cf1">में</span> <span class="cf1">रहने</span> <span class="cf1">वाले</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164164/ias-success-story-aditya-srivastava-left-a-package-of-rs"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-success-story-(11).jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf1">IAS Success Story: भारत</span> <span class="cf1">में</span> <span class="cf0">IAS-IPS </span><span class="cf1">बनने</span> <span class="cf1">का</span> <span class="cf1">सपना</span> <span class="cf1">लाखों</span> <span class="cf1">युवाओं</span> <span class="cf1">देखते</span> <span class="cf1">हैं</span><span class="cf1">, </span><span class="cf1">लेकिन</span> <span class="cf1">इस</span> <span class="cf1">राह</span> <span class="cf1">पर</span><span class="cf1"> चलने के लिए साहस, धैर्य और </span><span class="cf1">आत्मविश्वास</span> <span class="cf1">की</span> <span class="cf1">जरूरत</span> <span class="cf1">होती</span> <span class="cf1">है</span><span class="cf1">। </span><span class="cf1">लखनऊ</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">आदित्य</span><span class="cf1"> श्रीवास्तव उन्हीं चुनिंदा युवाओं में शामिल हैं, जिन्होंने </span><span class="cf0">UPSC </span><span class="cf1">की तैयारी के लिए </span><span class="cf2">₹</span><span class="cf0">40 </span><span class="cf1">लाख सालाना </span><span class="cf1">पैकेज</span> <span class="cf1">वाली</span> <span class="cf1">नौकरी</span><span class="cf1"> छोड़ दी। </span><span class="cf1">अनिश्चित</span><span class="cf1"> भविष्य के बावजूद </span><span class="cf1">उन्होंने</span> <span class="cf1">पिता</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">सपने</span> <span class="cf1">और</span> <span class="cf1">खुद</span> <span class="cf1">पर</span> <span class="cf1">भरोसे</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">दम</span> <span class="cf1">पर</span> <span class="cf1">वह</span> <span class="cf1">मुकाम</span> <span class="cf1">हासिल</span> <span class="cf1">किया</span><span class="cf1">, </span><span class="cf1">जो</span> <span class="cf1">आज</span> <span class="cf1">लाखों</span> <span class="cf1">अभ्यर्थियों</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">लिए</span> <span class="cf1">प्रेरणा</span> <span class="cf1">है</span><span class="cf1">।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">बचपन</span> <span class="cf1">से</span> <span class="cf1">ही</span> <span class="cf1">मेधावी</span> <span class="cf1">रहे</span> <span class="cf1">आदित्य</span></strong></p>
<p><span class="cf1">लखनऊ</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">आईआईएम</span> <span class="cf1">रोड</span> <span class="cf1">स्थित</span> <span class="cf1">एल्डिको</span> <span class="cf1">सिटी</span> <span class="cf1">में</span> <span class="cf1">रहने</span> <span class="cf1">वाले</span> <span class="cf1">आदित्य</span> <span class="cf1">श्रीवास्तव</span> <span class="cf1">बचपन</span><span class="cf1"> से ही पढ़ाई में अव्वल रहे हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई </span><span class="cf0">CMS </span><span class="cf1">अलीगंज</span><span class="cf1">, लखनऊ से की। </span><span class="cf1">उन्होंने </span><span class="cf0">10</span><span class="cf1">वीं </span><span class="cf1">कक्षा में</span><span class="cf1"> 97.8% अंक </span><span class="cf1">और </span><span class="cf0">12</span><span class="cf1">वीं </span><span class="cf1">कक्षा में</span><span class="cf1"> 97.5% अंक </span><span class="cf1">प्राप्त किए। </span></p>
<p><strong><span class="cf0">IIT-JEE </span><span class="cf1">में भी शानदार प्रदर्शन</span></strong></p>
<p><span class="cf1">स्कूलिंग</span><span class="cf1"> के बाद आदित्य ने इंजीनियरिंग को </span><span class="cf1">करियर</span><span class="cf1"> के रूप में चुना। उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शामिल </span><span class="cf0">JEE </span><span class="cf1">मेन्स</span><span class="cf1"> और </span><span class="cf0">JEE </span><span class="cf1">एडवांस्ड</span><span class="cf1"> दोनों में बेहतरीन प्रदर्शन किया। अच्छे </span><span class="cf1">रैंक</span><span class="cf1"> के दम पर उन्हें </span><span class="cf0">IIT </span><span class="cf1">कानपुर में दाखिला मिला, जहां से उन्होंने </span><span class="cf1">इलेक्ट्रिकल</span><span class="cf1"> इंजीनियरिंग में </span><span class="cf0">B.Tech</span> <span class="cf1">और </span><span class="cf0">M.Tech</span> <span class="cf1">की पढ़ाई पूरी की।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">करोड़ों की नौकरी छोड़ </span><span class="cf0">UPSC </span><span class="cf1">का फैसला</span></strong></p>
<p><span class="cf0">IIT </span><span class="cf1">कानपुर से निकलने के बाद आदित्य को एक </span><span class="cf1">मल्टीनेशनल</span><span class="cf1"> कंपनी में </span><span class="cf2">₹</span><span class="cf0">40 </span><span class="cf1">लाख सालाना </span><span class="cf1">पैकेज</span><span class="cf1"> की नौकरी मिली। करीब डेढ़ साल तक उन्होंने </span><span class="cf1">बेंगलुरु</span><span class="cf1"> में काम किया।</span></p>
<p><span class="cf1">लेकिन उनके पिता अजय श्रीवास्तव, जो केंद्रीय </span><span class="cf1">ऑडिट</span><span class="cf1"> विभाग में </span><span class="cf0">AAO </span><span class="cf1">हैं</span><span class="cf1">, </span><span class="cf1">चाहते</span> <span class="cf1">थे</span> <span class="cf1">कि</span> <span class="cf1">बेटा</span> <span class="cf1">सिविल</span> <span class="cf1">सर्विस</span> <span class="cf1">में</span> <span class="cf1">जाए</span><span class="cf1">। </span><span class="cf1">बहन</span><span class="cf1"> भी सिविल सेवा की तैयारी कर रही थी। इसी बीच आदित्य ने भी तय कर लिया कि वे </span><span class="cf0">UPSC </span><span class="cf1">की राह चुनेंगे।</span></p>
<p><span class="cf0">UPSC </span><span class="cf1">सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2021 से ठीक एक महीना पहले उन्होंने अपनी हाई-</span><span class="cf1">पैकेज</span><span class="cf1"> नौकरी छोड़ दी।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">पहली असफलता, फिर जबरदस्त वापसी</span></strong></p>
<p><span class="cf0">2021 </span><span class="cf1">में यह आदित्य का पहला </span><span class="cf1">अटेंप्ट</span><span class="cf1"> था, जिसमें वे </span><span class="cf1">प्रीलिम्स</span><span class="cf1"> पास नहीं कर पाए। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। परिवार का पूरा साथ मिला।</span></p>
<p><span class="cf1">आदित्य ने </span><span class="cf0">NCERT </span><span class="cf1">किताबों और </span><span class="cf1">यूट्यूब</span><span class="cf1"> की मदद से दोबारा रणनीति बनाई और दोगुनी मेहनत शुरू की।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">पहले बने </span><span class="cf0">IPS, </span><span class="cf1">फिर </span><span class="cf0">IAS</span></strong></p>
<p><span class="cf0">UPSC 2022</span> <span class="cf1">रिजल्ट</span><span class="cf1"> में </span><span class="cf1">ऑल</span><span class="cf1"> इंडिया </span><span class="cf1">रैंक</span><span class="cf1"> 236 </span><span class="cf1">के साथ</span> <span class="cf0">IPS </span><span class="cf1">अधिकारी </span><span class="cf1">बने और </span><span class="cf0">UPSC 2023</span> <span class="cf1">रिजल्ट</span> <span class="cf1">मे</span><span class="cf0"> AIR-1</span><span class="cf1"> के साथ</span> <span class="cf0">IAS </span><span class="cf1">अधिकारी </span><span class="cf1">बने। </span><span class="cf1">आदित्य को उत्तर प्रदेश </span><span class="cf1">कैडर</span><span class="cf1"> मिला, जो उनका गृह राज्य भी है।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/164164/ias-success-story-aditya-srivastava-left-a-package-of-rs</link>
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                <pubDate>Wed, 24 Dec 2025 13:50:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: नौकरी के साथ की UPSC की तैयारी, पढ़ें सृष्टि डबास की सक्सेस स्टोरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: कहते हैं कि जब इरादे मजबूत हों, तो सपने आंखें बंद किए बिना भी पूरे किए जा सकते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है सृष्टि डबास की, जिन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 6वीं रैंक हासिल कर अपने सपनों को सच कर दिखाया।</p>
<h3><strong>नौकरी और तैयारी का संघर्ष</strong></h3>
<p>दिल्ली की सृष्टि डबास भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में नौकरी कर रही थीं। दिन में 8-9 घंटे की नौकरी और रात में पढ़ाई के बीच संतुलन बनाए रखना आसान नहीं था। फिर भी उनका जूनून ऐसा था कि उन्होंने काम और पढ़ाई दोनों को प्राथमिकता दी। ऑफिस की लाइब्रेरी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163867/ias-success-story-prepare-for-upsc-along-with-job-read"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-srishti-dabas.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: कहते हैं कि जब इरादे मजबूत हों, तो सपने आंखें बंद किए बिना भी पूरे किए जा सकते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है सृष्टि डबास की, जिन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 6वीं रैंक हासिल कर अपने सपनों को सच कर दिखाया।</p>
<h3><strong>नौकरी और तैयारी का संघर्ष</strong></h3>
<p>दिल्ली की सृष्टि डबास भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में नौकरी कर रही थीं। दिन में 8-9 घंटे की नौकरी और रात में पढ़ाई के बीच संतुलन बनाए रखना आसान नहीं था। फिर भी उनका जूनून ऐसा था कि उन्होंने काम और पढ़ाई दोनों को प्राथमिकता दी। ऑफिस की लाइब्रेरी में लंच टाइम का इस्तेमाल पढ़ाई के लिए किया, और छुट्टी वाले दिन भी तैयारी जारी रखी।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/4007709-srishti-dabas-8.jpg" alt="4007709-srishti-dabas-8" width="659" height="494"></img></p>
<h3><strong>शिक्षा और तैयारी की पृष्ठभूमि</strong></h3>
<p>सृष्टि ने 12वीं के बाद दिल्ली के इंदिरा ट्रस्ट कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद IGNOU से मास्टर डिग्री हासिल की। नौकरी और पढ़ाई के अनुभव के बीच, उनका असली लक्ष्य आईएएस बनना था। सामाजिक न्याय मंत्रालय में काम का अनुभव भी रहा, लेकिन उनका ध्यान केवल यूपीएससी की तैयारी पर था।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/3525697-untitled-design-2024-12-20t063252.912.jpg" alt="3525697-untitled-design-2024-12-20t063252.912" width="1200" height="900"></img></p>
<h3><strong>पहले प्रयास में सफलता</strong></h3>
<p>कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास के साथ, सृष्टि ने 2023 में पहली बार यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया रैंकिंग 6 हासिल की। इस सफलता ने न केवल उनके सपने पूरे किए, बल्कि उनकी मां का सिर भी गर्व से ऊंचा कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 14:42:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IFS Aishwarya Sheoran: मिस इंडिया फाइनलिस्ट से बनीं IFS अधिकारी, पढ़ें ऐश्वर्या श्योराण की सक्सेस स्टोरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p></p>
<p><span class="cf0">IFS Aishwarya Sheoran: संघ लोक सेवा आयोग (</span><span class="cf1">UPSC) </span><span class="cf0">के सिविल सेवा परीक्षा 2019 के परिणाम आते ही एक नाम ऐश्वर्या श्योराण तेजी से सुर्खियों में आया</span><span class="cf0">। मिस इंडिया 2016 की फाइनलिस्ट रह चुकी ऐश्वर्या ने न केवल ग्लैमर इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई, बल्कि यूपीएससी में 93वीं रैंक हासिल कर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का अद्भुत उदाहरण भी पेश किया। उनका सफर मॉडलिंग की रैंप वॉक से शुरू होकर प्रशासनिक सेवा तक पहुंचा, जो युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">राजस्थान में जन्म, आर्मी परिवेश में बचपन</span></strong></p>
<p><span class="cf0">राजस्थान में पली-बढ़ीं ऐश्वर्या आर्मी परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163636/ifs-aishwarya-sheoran-became-ifs-officer-from-miss-india-finalist"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ifs-aishwarya-sheoran.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p></p>
<p><span class="cf0">IFS Aishwarya Sheoran: संघ लोक सेवा आयोग (</span><span class="cf1">UPSC) </span><span class="cf0">के सिविल सेवा परीक्षा 2019 के परिणाम आते ही एक नाम ऐश्वर्या श्योराण तेजी से सुर्खियों में आया</span><span class="cf0">। मिस इंडिया 2016 की फाइनलिस्ट रह चुकी ऐश्वर्या ने न केवल ग्लैमर इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई, बल्कि यूपीएससी में 93वीं रैंक हासिल कर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का अद्भुत उदाहरण भी पेश किया। उनका सफर मॉडलिंग की रैंप वॉक से शुरू होकर प्रशासनिक सेवा तक पहुंचा, जो युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">राजस्थान में जन्म, आर्मी परिवेश में बचपन</span></strong></p>
<p><span class="cf0">राजस्थान में पली-बढ़ीं ऐश्वर्या आर्मी परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता कर्नल अजय कुमार, 9वीं तेलंगाना </span><span class="cf1">NCC </span><span class="cf0">बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर रहे हैं। सेना के अनुशासन, देशभक्ति और मूल्यों से भरे माहौल में पली-बढ़ीं ऐश्वर्या के व्यक्तित्व पर इसका गहरा असर पड़ा। इसी पृष्ठभूमि ने उनके सपनों को अलग दिशा दी।</span></p>
<p><span class="cf0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/navbharat-times-(7).jpg" alt="navbharat-times (7)" width="700" height="394"></img></span></p>
<p><strong><span class="cf0">बचपन से ही मेधावी</span></strong></p>
<p><span class="cf0">ऐश्वर्या पढ़ाई में हमेशा टॉपर रहीं। दिल्ली के संस्कृति स्कूल से 12वीं में 97.5% अंक, दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (</span><span class="cf1">SRCC) </span><span class="cf0">से स्नातक की डिग्री की। पढ़ाई के साथ-साथ वह सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय रहीं, जिससे उनका व्यक्तित्व और भी निखरता गया।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">मॉडलिंग की दुनिया में चमका सितारा</span></strong></p>
<p><span class="cf0">कॉलेज के दिनों में ऐश्वर्या ने मॉडलिंग के प्रति अपने जुनून को दिशा दी। वह </span><span class="cf3">2014</span><span class="cf0"> में</span> <span class="cf0">मिस क्लीन एंड क्लियर फ्रेश फेस की विजेता, 2015 में मिस दिल्ली और 2016 में मिस इंडिया फाइनलिस्ट बनीं।</span></p>
<p><span class="cf0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/navbharat-times-(8).jpg" alt="navbharat-times (8)" width="700" height="394"></img></span></p>
<p><span class="cf0">फैशन इंडस्ट्री में उनकी सफलता लगातार बढ़ रही थी, लेकिन इसी दौर में उन्होंने अपने जीवन को एक नया मोड़ देने का फैसला किया।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">IIM </span><span class="cf0">को ठुकराया, </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">को चुना</span></strong></p>
<p><span class="cf0">साल 2018 में ऐश्वर्या का चयन </span><span class="cf1">IIM </span><span class="cf0">इंदौर में हुआ, जो किसी भी छात्र के लिए एक बड़ा अवसर होता है। लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया क्योंकि अब उनका लक्ष्य </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">था। ग्लैमर की दुनिया छोड़कर उन्होंने प्रशासनिक सेवा के सपने को प्राथमिकता दी।</span></p>
<p><span class="cf0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/navbharat-times-(9).jpg" alt="navbharat-times (9)" width="700" height="394"></img></span></p>
<p><strong><span class="cf0">सिर्फ 10 महीने की सेल्फ स्टडी</span></strong></p>
<p><span class="cf0">ऐश्वर्या ने बिना किसी औपचारिक कोचिंग के मात्र 10 महीनों की सेल्फ स्टडी के दम पर </span><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">की तैयारी की। और पहले ही प्रयास में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास कर 93वीं रैंक हासिल कर ली। उनकी सफलता युवाओं के लिए संदेश है कि मजबूत इच्छाशक्ति और अनुशासन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">मौजूदा समय में एक चर्चित </span><span class="cf1">IFS </span><span class="cf0">अधिकारी</span></strong></p>
<p><span class="cf1">UPSC </span><span class="cf0">में अच्छी रैंक मिलने के बाद ऐश्वर्या ने </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">के बजाय भारतीय विदेश सेवा (</span><span class="cf1">IFS) </span><span class="cf0">को चुना। आज वे विदेश मंत्रालय में </span><span class="cf1">IFS </span><span class="cf0">अधिकारी के रूप में सेवा दे रही हैं और देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।</span></p>
<p></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Dec 2025 18:45:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>

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