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                <title>abhishek upadhyay - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>abhishek upadhyay RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>लखनऊ कोर्ट ने पॉक्सो मामले में आरोपी को 20 साल की सख्त सजा सुनाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">  </p>
<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">लखनऊ के विशेष न्यायालय पॉक्सो ने नाबालिग पीड़िता के साथ बलात्कार और संबंधित अपराधों के मामले में आरोपी पूरन कश्यप को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर लगाए गए सभी आरोपों को साबित मानते हुए कठोर दंड दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (POCSO एक्ट) कुमार प्रशान्त ने की। फैसला 30 जुलाई  को सुनाया गया। अभियोग पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अभिषेक उपाध्याय और अरुण कुमार ने दलीलें रखीं, जबकि बचाव पक्ष की ओर से निजी अधिवक्ता  आर.एन. यादव उपस्थित रहे।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><br /><strong>मामले</strong></h4>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184361/lucknow-court-sentenced-20-years-rigorous-imprisonment-to-the-accused"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/2023031278.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"> </p>
<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">लखनऊ के विशेष न्यायालय पॉक्सो ने नाबालिग पीड़िता के साथ बलात्कार और संबंधित अपराधों के मामले में आरोपी पूरन कश्यप को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर लगाए गए सभी आरोपों को साबित मानते हुए कठोर दंड दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (POCSO एक्ट) कुमार प्रशान्त ने की। फैसला 30 जुलाई  को सुनाया गया। अभियोग पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अभिषेक उपाध्याय और अरुण कुमार ने दलीलें रखीं, जबकि बचाव पक्ष की ओर से निजी अधिवक्ता  आर.एन. यादव उपस्थित रहे।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><br /><strong>मामले की पृष्ठभूमि</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><br />पुलिस थाना वजीरगंज, जनपद लखनऊ की मुकदमा में आरोपी पूरन कश्यप (आयु 55 वर्ष, पुत्र स्व. भोला कश्यप, निवासी  राजेन्द्र नगर, थाना नाका, लखनऊ) पर धारा 376(2)एन, 323, 504, 506, 452 भा.दं.सं. तथा धारा 5/6 POCSO एक्ट के तहत मुकदमा चलाया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />वादी  (पीड़िता के पिता) के अनुसार, आरोपी (रिश्तेदार) 4 मई 2023 को उनके घर आकर 17 वर्षीय नाबालिग पुत्री के साथ जबरन बलात्कार किया। पीड़िता की मां की मृत्यु हो चुकी थी और घर पर कोई जिम्मेदार सदस्य नहीं रहता था। आरोपी लगभग छह महीने तक मौका पाकर बार-बार बलात्कार करता रहा, जिससे पीड़िता गर्भवती हो गई। डॉक्टर ने छह महीने की गर्भावस्था की पुष्टि की।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />आरोपी ने कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए दबाव डालकर 19 नवंबर 2023 को पीड़िता का विवाह अपने बड़े बेटे आयुष कश्यप से करवा दिया।<br />अदालत का निर्णय और सजा</p>
<p style="text-align:justify;"><br />अदालत ने अभियोजन साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्ट तथा डीएनए रिपोर्ट (जिसमें आरोपी पीड़िता के नवजात शिशु का जैविक पिता साबित हुआ) पर विश्वास जताते हुए आरोपी को दोषी ठहराया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि आरोपी ने नाबालिग रिश्तेदार की असहाय स्थिति का फायदा उठाकर गंभीर अपराध किया, इसलिए किसी तरह की नरमी नहीं दिखाई जा सकती।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सुनाई गई सजाएं:</strong></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<blockquote class="format2">- धारा 5/6 POCSO एक्ट (धारा 376(2)एन भा.दं.सं. सहित): 20 वर्ष कठोर कारावास तथा 50,000 अर्थदंड (अर्थदंड न देने पर 1 वर्ष अतिरिक्त साधारण कारावास)।<br />- धारा 452 भा.दं.सं.: 3 वर्ष कठोर कारावास तथा 5,000 अर्थदंड।<br />- धारा 323 भा.दं.सं.: 6 महीने कठोर कारावास तथा 1,000 अर्थदंड।<br />- धारा 504 भा.दं.सं.: 1 वर्ष कठोर कारावास तथा 1,000 अर्थदंड।<br />- धारा 506 भा.दं.सं.: 2 वर्ष कठोर कारावास तथा 2,000 अर्थदंड।</blockquote>
<p style="text-align:justify;">सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जेल में पूर्व में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित की जाएगी। अर्थदंड की राशि पीड़िता को पुनर्वास के लिए दी जाएगी। अदालत ने पीड़िता की पहचान गोपनीय रखने का भी निर्देश दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ को भी निर्देश दिया है कि पीड़िता को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाए। सजायाबी वॉरंट जिला कारागार लखनऊ भेजने तथा निर्णय की प्रतियां संबंधित अधिकारियों और पीड़िता को उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">यह फैसला नाबालिग बालिकाओं की सुरक्षा और  पॉक्सो कानून के कड़े प्रावधानों को दोहराता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 23:29:51 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पत्रकार पर तीसरी एफआईआर! कलम से क्यों डर रही सरकार?</title>
                                    <description><![CDATA[हजरतगंज थाने में दर्ज केस, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उठे सवाल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155308/why-is-the-government-afraid-of-the-third-fir-pen"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/1000031022.png" alt=""></a><br /><div class="adn ads">
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<div style="text-align:justify;">
<div><strong>संवाददाता - विपिन शुक्ला</strong> </div>
<div> </div>
<div><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पत्रकारिता और सत्ता के टकराव ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। हजरतगंज थाने में वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ तीसरी एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि उन्होंने गोरखपुर में पशु तस्करों के हाथों मारे गए 19 वर्षीय युवक दीपक गुप्ता की मौत से जुड़े मामले में भड़काऊ रिपोर्टिंग की।</div>
<div> </div>
<div>पत्रकार का कहना है कि उन्होंने केवल वही तथ्य रिपोर्ट किए जो मृतक के परिजनों ने मीडिया कैमरों के सामने रखे थे। इसके बावजूद उन पर दंगा भड़काने जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर दिया गया।</div>
<div> </div>
<div>पत्रकार ने इस कार्रवाई को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए तीखा हमला बोला।</div>
<div> </div>
<div><strong>उन्होंने कहा –</strong> “कलम की धार से इतना डर लगता है योगी जी? अगर लड़ाई लड़नी है तो सामने से लड़िए, अनाम शिकायतकर्ताओं के सहारे नहीं।”</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नजर में सत्ता से जुड़े और प्रभावशाली लोग तो बचा लिए जाते हैं, गोरखपुर वाले कांड में कई अखबारों की कटिंग शेयर करते हुए वरिष्ठ पत्रकार ने दिखाया कि यही ख़बर उन्होंने भी चलाया है लेकिन हर बार की तरह उन्हें ही सिर्फ़ निशाना बनाया गया। सरकार का ये क़दम स्वस्थ पत्रकारिता का गला घोंटने जैसा है।सच्चाई दिखाने वाले पत्रकारों को लगातार निशाना बनाना ठीक नहीं है।</div>
<div> </div>
<div><strong>पत्रकार ने तीखे शब्दों में कहा –</strong></div>
<div>&gt; “एफआईआर से डर मुझे नहीं, उन लोगों को होना चाहिए जो घोटालों, भ्रष्टाचार और सत्ता संरक्षण में शामिल हैं। मेरी रिपोर्टिंग से परेशान होकर ही मुझे टारगेट किया जा रहा है।”</div>
<div>इससे पहले भी हजरतगंज थाने में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को “ईश्वर” बताया गया था।</div>
<div> </div>
<div><strong>इस पर पत्रकार ने सवाल उठाया –</strong></div>
<div>&gt; “क्या ईश्वर इतना कमजोर होता है कि वो छाया और अनाम लोगों के सहारे वार करे?”</div>
<div> </div>
<div>पत्रकार ने व्यंग्य करते हुए कहा कि यदि सरकार को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी ही है तो अगली एफआईआर सीधे मुख्यमंत्री के नाम से दर्ज कराई जाए। उन्होंने कटाक्ष करते हुए सुझाव दिया कि अगली एफआईआर मानहानि की मेरे ऊपर दर्ज़ कराइए क्योंकि मुख्यमंत्री से श्रेष्ठ मैंने ईश्वर को  बता दिया है। </div>
<div> </div>
<div>पत्रकार के खिलाफ दर्ज होती लगातार एफआईआर ने न सिर्फ पत्रकार संगठनों बल्कि बुद्धिजीवियों और राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। प्रेस की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार पर इसका असर गंभीर माना जा रहा है।</div>
<div>लखनऊ से उठी यह नई जंग केवल एक पत्रकार और सरकार के बीच का टकराव नहीं है, बल्कि लोकतंत्र में पत्रकारिता की स्वतंत्रता बनाम सत्ता की ताक़त का अहम सवाल भी खड़ा कर रही है।</div>
<div> </div>
<div><br />
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</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Sep 2025 18:40:41 +0530</pubDate>
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