<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/31094/%C2%A0" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title> America President Donald J. Trump - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/31094/rss</link>
                <description> America President Donald J. Trump RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अमेरिका ने बढ़ाई सैन्य तैनाती, F-35 और B-2 विमानों की मौजूदगी से ईरान पर बढ़ा दबाव</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>वॉशिंगटन/तेहरान।</strong> अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपने अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की तैनाती बढ़ा दी है। अमेरिकी विदेश मंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">मार्को रुबियो</span></span> ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ समझौते की संभावनाएं कमजोर हुई हैं और अमेरिका सभी विकल्पों के लिए तैयार है।</p>
<p>खबरों के अनुसार, अमेरिका ने कतर के अल उदैद एयरबेस और जॉर्डन के मुफाक साल्टी एयरबेस पर अपने F-15, F-35A और A-10C लड़ाकू विमानों की तैनाती की है। बताया जा रहा है कि इन ठिकानों पर करीब 24 विमान सक्रिय हैं, जिनमें 12 F-35A और 12 अन्य लड़ाकू विमान</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170056/america-increased-military-deployment-pressure-on-iran-increased-due-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/अमेरिका-ने-बढ़ाई-सैन्य-तैनाती,-f-35-और-b-2-विमानों-की-मौजूदगी-से-ईरान-पर-बढ़ा-दबाव.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वॉशिंगटन/तेहरान।</strong> अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपने अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की तैनाती बढ़ा दी है। अमेरिकी विदेश मंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">मार्को रुबियो</span></span> ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ समझौते की संभावनाएं कमजोर हुई हैं और अमेरिका सभी विकल्पों के लिए तैयार है।</p>
<p>खबरों के अनुसार, अमेरिका ने कतर के अल उदैद एयरबेस और जॉर्डन के मुफाक साल्टी एयरबेस पर अपने F-15, F-35A और A-10C लड़ाकू विमानों की तैनाती की है। बताया जा रहा है कि इन ठिकानों पर करीब 24 विमान सक्रिय हैं, जिनमें 12 F-35A और 12 अन्य लड़ाकू विमान शामिल हैं।</p>
<h4>F-35: अमेरिका का अत्याधुनिक स्टेल्थ फाइटर</h4>
<p>F-35 दुनिया के सबसे आधुनिक स्टेल्थ लड़ाकू विमानों में से एक माना जाता है। इसकी प्रमुख खूबियां—</p>
<ul>
<li>
<p>रडार से बचने की क्षमता (स्टेल्थ टेक्नोलॉजी)</p>
</li>
<li>
<p>लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता</p>
</li>
<li>
<p>सेंसर फ्यूजन टेक्नोलॉजी से लैस</p>
</li>
<li>
<p>एक साथ कई सैन्य यूनिट्स के साथ डेटा शेयर करने में सक्षम</p>
</li>
<li>
<p>एडवांस मिसाइल सिस्टम से लैस</p>
</li>
</ul>
<p>अमेरिका के पास ऐसे 300 से ज्यादा विमान हैं, जिनमें से कुछ को हाल ही में मिडिल ईस्ट में भेजा गया है।</p>
<h4>B-2 बॉम्बर की तैनाती का भी संकेत</h4>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">डोनाल्ड ट्रंप</span></span> ने भी ईरान को लेकर कड़ा रुख दिखाया है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका B-2 जैसे रणनीतिक बॉम्बर विमानों का इस्तेमाल कर सकता है। B-2 बॉम्बर लंबी दूरी तक भारी बम ले जाने और अत्यधिक सुरक्षित ठिकानों पर हमला करने में सक्षम होता है।</p>
<h4>ईरान ने भी दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी</h4>
<p>तनाव के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">अली खामेनेई</span></span> ने संकेत दिया है कि अगर देश की सुरक्षा को खतरा हुआ तो ईरान भी जवाब देने के लिए तैयार है। ईरान ने अपने सैन्य बलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।</p>
<h4>क्षेत्रीय और वैश्विक चिंता बढ़ी</h4>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ती सैन्य गतिविधियां क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय हैं। हालांकि अभी तक किसी बड़े सैन्य टकराव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दोनों देशों के कड़े बयानों ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>यूरोप</category>
                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/170056/america-increased-military-deployment-pressure-on-iran-increased-due-to</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/170056/america-increased-military-deployment-pressure-on-iran-increased-due-to</guid>
                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 18:01:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-02/%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%B8%E0%A5%88%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%A4%E0%A5%88%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%80%2C-f-35-%E0%A4%94%E0%A4%B0-b-2-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%9C%E0%A5%82%E0%A4%A6%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%88%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B5.jpg"                         length="132506"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व राजनीति का नया समीकरण, अमेरिका-ईरान और वेनेजुएला तनाव।</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक राजनीति की धुरी को तेज़ी से बदल दिया है,उनके हाल के निर्णयों ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली, सैन्य रणनीति और कूटनीतिक संतुलन पर गंभीर प्रभाव डाला है जिन्हें व्यापक स्तर पर समझना अब वक्त की मांग है। सबसे ताज़ा और व्यापक रूप से पुष्टि की गई घोषणा यह है कि ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर अमेरिका 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाएगा वह आदेश “तत्काल प्रभावी” और “अंतिम व निर्णायक” बताया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह क़दम सीधे तौर पर उन देशों को निशाना बनाता है जिनके पास ईरान</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166014/new-equation-of-world-politics-america-iran-and-venezuela-tension"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/विश्व-राजनीति-का-नया-समीकरण,-अमेरिका-ईरान-और-वेनेजुएला-तनाव।.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक राजनीति की धुरी को तेज़ी से बदल दिया है,उनके हाल के निर्णयों ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली, सैन्य रणनीति और कूटनीतिक संतुलन पर गंभीर प्रभाव डाला है जिन्हें व्यापक स्तर पर समझना अब वक्त की मांग है। सबसे ताज़ा और व्यापक रूप से पुष्टि की गई घोषणा यह है कि ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर अमेरिका 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाएगा वह आदेश “तत्काल प्रभावी” और “अंतिम व निर्णायक” बताया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह क़दम सीधे तौर पर उन देशों को निशाना बनाता है जिनके पास ईरान के साथ बड़े आर्थिक समझौते हैं, जैसे चीन, भारत, तुर्की, रूस और संयुक्त अरब अमीरात। इसके परिणामस्वरूप न केवल वैश्विक व्यापार संबंधों में विसंगति पैदा हो सकती है, बल्कि विश्व अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण अवरोध का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">टैरिफ नीति को व्यापारिक दबाव का एक हथियार बताया गया है, लेकिन यह अब स्पष्ट है कि यह उपाय परंपरागत प्रतिबंधों से आगे बढ़कर उपस्थित किया गया है — यह न केवल ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने का प्रयास है, बल्कि उसके व्यापारिक भागीदारों को भी अमेरिका के साथ रिश्तों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करता है। इस क़दम से उस नेटवर्क पर असर पड़ेगा जो ईरान को कच्चे तेल, औद्योगिक कच्चा माल और कृषि वस्तुओं के रूप में समर्थन देता है, और भारत जैसे बड़े व्यापारिक राष्ट्रों को भी टैरिफ भार का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक संकट का विस्तार टैरिफ का कदम अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दवाब बनाने की कोशिश है, लेकिन इससे वैश्विक आपूर्ति-श्रृंखला में मूल्य वृद्धि, व्यापार विवाद और निवेश अनिश्चितता जैसी चुनौतियाँ उभर सकती हैं। उदाहरण के लिए, चीन खास तौर पर ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, और उसके खिलाफ टैरिफ का असर न केवल तेल के व्यापार पर होगा बल्कि पूरे ईरानी लक्ज़मीन, वस्त्र और तकनीकी वस्तुओं के व्यापार को उलझा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इससे अमेरिका-चीन व्यापार संबंधों पर तनाव और बढ़ सकता है, क्योंकि चीन पहले से ही पश्चिमी बाजार में अपने निर्यात पर भारी शुल्क का सामना कर रहा है। ऐसे में अतिरिक्त 25% टैरिफ से वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंका बढ़ सकती है।</p>
<p style="text-align:center;"><strong>सैन्य रणनीति और तैयारी</strong></p>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक दबाव के साथ-साथ, ट्रंप प्रशासन के कुछ सूत्र यह संकेत भी दे रहे हैं कि ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्पों पर विचार जारी है,खासकर उन स्थितियों में जहाँ ईरान के विरोध प्रदर्शन हिंसक दबाव में बदलते दिख रहे हैं। हालाँकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है कि अमेरिका ने सीधे ईरान पर हमला करने का निर्णय ले लिया है, सैन्य रणनीति के विकल्प “तालिका में मौजूद” बताए जा रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में यह भी उल्लेख है कि कतर जैसे क्षेत्रों में अमेरिकी एयरबेस पर गतिविधियाँ बढ़ी हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि संभव सैन्य कार्रवाइयों के लिए तैयारी भी चल रही है, हालांकि इसकी पुष्टि स्वतंत्र स्रोतों द्वारा अभी सीमित रूप से ही हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रम्प प्रशासन ने पिछले सालों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसके ठिकानों पर कई प्रतिबंधात्मक उपायों और हमले जैसी कार्रवाइयों की भूमिका निभाई थी। इसी कड़ी में पिछले युद्धों और संघर्षों का हवाला देते हुए कई विश्लेषक मानते हैं कि संभावित भविष्य की सैन्य रणनीतियाँ भी गंभीर परिणाम लाने की क्षमता रखती हैं।कूटनीतिक परिदृश्य और प्रत्युत्तर कूटनीति के क्षेत्र में, ट्रंप प्रशासन की नीतियाँ स्वरूप में सख्त हैं लेकिन अपने साथ कई विरोध भी जड़ित करती हैं। उदाहरण के लिए, ईरान ने संवाद चैनल खुले रखने की इच्छा जताई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि तेहरान वार्ता के द्वार बंद नहीं करना चाहता है — बावजूद इसके कि स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन ने स्पष्ट रूप से अमेरिकी टैरिफ नीति का विरोध किया है, इसे “अनैच्छिक, एकतरफा और अनिश्चितता पैदा करने वाला” बताया है। चीनी प्रवक्ता ने कहा कि टैरिफ युद्ध के समाधान के बजाय समस्या को और बढ़ाता है, और यह भी चेतावनी दी कि ऐसे उपाय “कोई विजेता नहीं पैदा करते”। यूरोपीय और एशियाई देशों ने भी संकेत दिया है कि वे विवादास्पद फैसलों के संभावित स्थायी प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं, और ऐसे में वैश्विक स्तर पर कूटनीति, व्यापार संगठन और संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों में व्यापक बहस की संभावनाएँ बन रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>वेनेजुएला प्रकरण से वैश्विक प्रतिक्रिया</strong><br />ट्रम्प प्रशासन ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार करके अमेरिका ले जाने का दावा किया, जिससे अंतरराष्ट्रीय क़ानून, संप्रभुता और शक्ति संतुलन पर तीखी बहस छिड़ गई है। कई देशों ने इसे वैश्विक हस्तक्षेप के रूप में देखा, और अमेरिका-विरोधी राष्ट्रों में चिंता और नाराज़गी बढ़ी है। यह कदम संकेत देता है कि अमेरिकी नीति अब केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही बल्कि औपनिवेशिक-जनित दबाव, सैन्य हस्तक्षेप और विरोधी राज्यों पर कड़ा रुख अपनाने की दिशा में अग्रसर है। अमेरिका अगर सैन्य कदम उठता है, तो परिणाम मानवीय संकट, स्थानीय प्रतिरोध, ईंधन की कीमतों में वृद्धि, निवेश प्रवाह में गिरावट और वैश्विक सुरक्षा ढाँचे में तीव्र अस्थिरता हो सकते हैं। इसके अलावा, ईरान का उत्तरदायित्व, बातचीत के दरवाज़े खोलने की संभावना और स्थानीय प्रदर्शनकारी समूहों की भूमिका भी मध्य-पूर्व के भविष्य को आकार दे रहे हैं। ट्रंप प्रशासन की नीतियाँ, आर्थिक कठोरता, सैन्य विकल्पों की संभावना और कूटनीतिक तनाव  ने वैश्विक शक्ति संतुलन को चुनौती दी है और एक ऐसे दौर की शुरुआत की है जहां अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संघर्ष दोनों की लकीरें दिख रही हैं।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर, वरिष्ठ पत्रकार,लेखक चिंतक, स्तंभकार</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/166014/new-equation-of-world-politics-america-iran-and-venezuela-tension</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/166014/new-equation-of-world-politics-america-iran-and-venezuela-tension</guid>
                <pubDate>Wed, 14 Jan 2026 18:29:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A3%2C-%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%88%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%9C%E0%A5%81%E0%A4%8F%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A5%A4.webp"                         length="118770"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप प्रशासन ने ग्रीन कार्ड लॉटरी कार्यक्रम किया स्थगित, ब्राउन यूनिवर्सिटी गोलीबारी से जुड़ा मामला बना वजह</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>International Desk</strong></p>
<p><strong>वॉशिंगटन: </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार को विविधता आप्रवासी वीजा यानी ग्रीन कार्ड लॉटरी कार्यक्रम को स्थगित करने का आदेश दिया। यह फैसला ब्राउन विश्वविद्यालय और एमआईटी में हुई गोलीबारी की घटनाओं के बाद लिया गया, जिनका प्रमुख संदिग्ध इसी कार्यक्रम के तहत अमेरिका में दाखिल हुआ था।</p>
<p>होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की सचिव क्रिस्टी नोएम ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) को इस कार्यक्रम को तत्काल रोकने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा, “यह एक घृणित व्यक्ति था, जिसे</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163761/united-states-of-america"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ट्रंप-प्रशासन-ने-ग्रीन-कार्ड-लॉटरी-कार्यक्रम.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>International Desk</strong></p>
<p><strong>वॉशिंगटन: </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार को विविधता आप्रवासी वीजा यानी ग्रीन कार्ड लॉटरी कार्यक्रम को स्थगित करने का आदेश दिया। यह फैसला ब्राउन विश्वविद्यालय और एमआईटी में हुई गोलीबारी की घटनाओं के बाद लिया गया, जिनका प्रमुख संदिग्ध इसी कार्यक्रम के तहत अमेरिका में दाखिल हुआ था।</p>
<p>होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की सचिव क्रिस्टी नोएम ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) को इस कार्यक्रम को तत्काल रोकने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा, “यह एक घृणित व्यक्ति था, जिसे हमारे देश में कभी प्रवेश नहीं मिलना चाहिए था।”</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, 48 वर्षीय पुर्तगाली नागरिक क्लाउडियो नेवेस वैलेंते ब्राउन विश्वविद्यालय में हुई गोलीबारी का मुख्य संदिग्ध था। इस घटना में दो छात्रों की मौत हो गई, जबकि नौ अन्य घायल हुए। इसके अलावा, एक अलग गोलीबारी की घटना में एमआईटी के एक प्रोफेसर की भी जान चली गई। बाद में बृहस्पतिवार शाम नेवेस वैलेंते ने कथित तौर पर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।</p>
<p>प्रोविडेंस पुलिस के एक जासूस के हलफनामे के मुताबिक, नेवेस वैलेंते वर्ष 2000 में छात्र वीजा पर ब्राउन विश्वविद्यालय में पढ़ने आया था। बाद में 2017 में उसे विविधता आप्रवासी वीजा जारी किया गया और कुछ महीनों के भीतर उसे कानूनी रूप से स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) का दर्जा मिल गया। हालांकि, वर्ष 2001 में पढ़ाई छोड़ने और 2017 में वीजा मिलने के बीच की अवधि में वह कहां था, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है।</p>
<p>विविधता वीजा लॉटरी कार्यक्रम के तहत हर साल उन देशों के नागरिकों को, जिनका अमेरिका में प्रतिनिधित्व कम है, लॉटरी के माध्यम से लगभग 50,000 ग्रीन कार्ड दिए जाते हैं। इनमें कई अफ्रीकी देश शामिल होते हैं। यह कार्यक्रम कांग्रेस द्वारा शुरू किया गया था, इसलिए इसके स्थगन को लेकर कानूनी चुनौतियों का सामना करना तय माना जा रहा है।</p>
<p>आंकड़ों के अनुसार, 2025 के वीजा लॉटरी कार्यक्रम के लिए करीब दो करोड़ लोगों ने आवेदन किया था। इनमें विजेताओं और उनके जीवनसाथियों सहित 1.31 लाख से अधिक लोगों का चयन हुआ था। चयन के बाद उम्मीदवारों को दूतावासों में साक्षात्कार और कड़ी जांच प्रक्रिया से गुजरना होता है। पुर्तगाल के नागरिकों को इस लॉटरी में केवल 38 सीटें मिली थीं।</p>
<p>गौरतलब है कि राष्ट्रपति ट्रंप लंबे समय से विविधता वीजा लॉटरी कार्यक्रम के आलोचक रहे हैं और इसे अमेरिका की आव्रजन सुरक्षा के लिए जोखिमपूर्ण बताते रहे हैं।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>यूरोप</category>
                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/163761/united-states-of-america</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/163761/united-states-of-america</guid>
                <pubDate>Fri, 19 Dec 2025 18:31:29 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%AA-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%A8-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A1-%E0%A4%B2%E0%A5%89%E0%A4%9F%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AE.jpg"                         length="92315"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप के कबूलनामे के बाद ईरान का कड़ा रुख: अमेरिका-इज़रायल पर यूएन में कार्रवाई की मांग</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>International Desk </strong></p>
<p style="text-align:justify;">ईरान ने अमेरिका और इज़रायल के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में सख़्त कार्रवाई की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि जून में ईरान के परमाणु स्थलों पर हुए सैन्य हमलों के लिए दोनों देश सीधे तौर पर ज़िम्मेदार हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और सुरक्षा परिषद को भेजे एक विस्तृत पत्र में कहा कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया स्वीकारोक्ति ने दोनों देशों की भूमिका “निर्विवाद रूप से साबित” कर दी है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>ट्रंप का कबूलनामा और ईरान की प्रतिक्रिया</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">पिछले सप्ताह डोनाल्ड ट्रंप ने यह स्वीकार किया</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/160254/irans-tough-stance-after-trumps-confession-demand-for-action-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/ट्रंप-के-कबूलनामे-के-बाद-ईरान-का-कड़ा-रुख-अमेरिका-इज़रायल-पर-यूएन-में-कार्रवाई-की-मांग.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>International Desk </strong></p>
<p style="text-align:justify;">ईरान ने अमेरिका और इज़रायल के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में सख़्त कार्रवाई की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि जून में ईरान के परमाणु स्थलों पर हुए सैन्य हमलों के लिए दोनों देश सीधे तौर पर ज़िम्मेदार हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और सुरक्षा परिषद को भेजे एक विस्तृत पत्र में कहा कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया स्वीकारोक्ति ने दोनों देशों की भूमिका “निर्विवाद रूप से साबित” कर दी है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>ट्रंप का कबूलनामा और ईरान की प्रतिक्रिया</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">पिछले सप्ताह डोनाल्ड ट्रंप ने यह स्वीकार किया था कि ईरान पर इज़रायल द्वारा किए गए शुरुआती हमलों के निर्देश उन्होंने ही दिए थे। अराघची ने कहा कि यह स्वीकारोक्ति “अमेरिका की आपराधिक संलिप्तता का स्पष्ट प्रमाण” है और अब अमेरिका को इन हमलों की पूरी ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>यूएन से दंडात्मक कार्रवाई की मांग</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">अपने पत्र में ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि 13 जून को ईरान के खिलाफ किए गए ये सैन्य हमले अंतर्राष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और वैश्विक शांति सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन हैं।<br />उन्होंने मांग की कि—</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p><strong>अमेरिका और इज़रायल पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए</strong>,</p>
</li>
<li>
<p><strong>दोनों देशों को क्षतिपूर्ति और हुए नुकसान की भरपाई करनी चाहिए</strong>,</p>
</li>
<li>
<p>और <strong>इन हमलों के लिए ज़िम्मेदार नेताओं और अधिकारियों को आपराधिक रूप से जवाबदेह ठहराया जाए</strong>।</p>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">ईरान का कहना है कि हमलों ने उसके कई परमाणु प्रतिष्ठानों को भारी क्षति पहुंचाई और क्षेत्रीय अस्थिरता को गहरा किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>अमेरिका और यूएन की चुप्पी</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">ईरान की सख़्त शिकायत के बाद भी संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुटेरेस के कार्यालय और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी मिशन ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।</p>
<p style="text-align:justify;">अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पहले ही पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित है, और अब ईरान की यह औपचारिक मांग सुरक्षा परिषद पर नया दबाव डाल सकती है।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>यूरोप</category>
                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/160254/irans-tough-stance-after-trumps-confession-demand-for-action-in</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/160254/irans-tough-stance-after-trumps-confession-demand-for-action-in</guid>
                <pubDate>Fri, 14 Nov 2025 21:29:35 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%AA-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%AC%E0%A5%82%E0%A4%B2%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%88%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%96-%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%87%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%B2-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%8F%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97.jpg"                         length="807748"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका- भारत में 10 साल का डिफेंस एग्रीमेंट: US नई टेक्नोलॉजी शेयर करेगा</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong>International Desk </strong></p>
<p>भारत और अमेरिका ने शुक्रवार को एक नया 10 साल का रक्षा (डिफेंस फ्रेमवर्क एग्रीमेंट) समझौता किया है। इसका मतलब है कि आने वाले 10 सालों तक दोनों देश मिलकर अपनी सेनाओं, रक्षा उद्योग और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करेंगे। इसके तहत अमेरिका, भारत से एडवांस टेक्नोलॉजी शेयर करेगा, जिससे एडवांस ड्रोन और AI हथियारों पर जॉइंट रिसर्च में मदद मिलेगी। यह समझौता 31 अक्टूबर को कुआलालंपुर (मलेशिया) में हुआ, जहां दोनों देश ASEAN रक्षा मंत्रियों की बैठक (ADMM-Plus) में शामिल थे। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158622/10-year-defense-agreement-between-america-and-india-we-will"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/अमेरिका--भारत-में-10-साल-का-डिफेंस-एग्रीमेंट--us-नई-टेक्नोलॉजी-शेयर-करेगा.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>International Desk </strong></p>
<p>भारत और अमेरिका ने शुक्रवार को एक नया 10 साल का रक्षा (डिफेंस फ्रेमवर्क एग्रीमेंट) समझौता किया है। इसका मतलब है कि आने वाले 10 सालों तक दोनों देश मिलकर अपनी सेनाओं, रक्षा उद्योग और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करेंगे। इसके तहत अमेरिका, भारत से एडवांस टेक्नोलॉजी शेयर करेगा, जिससे एडवांस ड्रोन और AI हथियारों पर जॉइंट रिसर्च में मदद मिलेगी। यह समझौता 31 अक्टूबर को कुआलालंपुर (मलेशिया) में हुआ, जहां दोनों देश ASEAN रक्षा मंत्रियों की बैठक (ADMM-Plus) में शामिल थे। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस समझौते पर दस्तखत किए।</p>
<p><strong>रिपोर्ट्स के मुताबिक इस समझौते से 4 बड़े फायदे होंगे।</strong></p>
<div class="f5e1d774">
<ul class="d7ef6cb6">
<li><strong>सैन्य सहयोग बढ़ेगा- </strong>दोनों देशों की सेनाएं मिलकर ट्रेनिंग और सेनाभ्यास करेंगी।</li>
<li><strong>जॉइंट प्रोडक्शन-</strong> यानी दोनों देश मिलकर हथियार, रक्षा उपकरण और नई तकनीक बनाएंगे।</li>
<li><strong>टेक्नोलॉजी साझाकरण-</strong> अमेरिका भारत को अपनी कुछ एडवांस डिफेंस टेक्नोलॉजी शेयर करेगा।</li>
<li><strong>सूचना और खुफिया जानकारी साझा-</strong> दोनों देशों की एजेंसियां एक-दूसरे से सुरक्षा जानकारियां साझा करेंगी।</li>
</ul>
</div>
<p><strong>हमारी साझेदारी मजबूत होगी बोले- अमेरिकी रक्षामंत्री </strong></p>
<p>अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने X पर लिखा- मैंने राजनाथ सिंह के साथ 10 साल का अमेरिका-भारत रक्षा समझौता साइन किया है। यह हमारी साझेदारी को और मजबूत करेगा। दोनों देशों के बीच समन्वय, जानकारी साझा करने और तकनीकी सहयोग का नया दौर शुरू हो रहा है।</p>
<p>समझौता साइन होने के बाद हेगसेथ ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को शुक्रिया कहा। उन्होंने बताया कि यह रिश्ता दुनिया के सबसे अहम रिश्तों में से एक है। दोनों देश एक-दूसरे पर भरोसा करते हैं और इंडो-पेसिफिक इलाके में सुरक्षा व खुशहाली चाहते हैं।</p>
<p>राजनाथ सिंह ने कहा कि यह बैठक आसियान देशों और भारत के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करेगी। इससे भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी को भी बल मिलेगा।</p>
<p><strong>ट्रेड डील दोनों देश पर बात कर रहे</strong></p>
<p>यह समझौता ऐसे वक्त पर हुआ है, जब दोनों देश के अधिकारी ट्रेड डील पर बातचीत कर रहे हैं। अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने की वजह से भारत पर 50% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया है।कॉमर्स मंत्री पीयूष गोयल साफ कह चुके हैं कि भारत कोई व्यापार समझौता जल्दी-जल्दी में नहीं साइन करेगा। हम किसी की ऐसी शर्त नहीं मानेंगे जो हमारे व्यापार को रोकती हो। उन्होंने कहा कि व्यापार सिर्फ टैरिफ का खेल नहीं है। यह विश्वास और लंबे रिश्ते का मामला है। फिर भी गोयल ने बताया कि दोनों देशों की टीमें मिलकर काम कर रही हैं। जल्द ही एक अच्छा और निष्पक्ष समझौता होने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>अमेरिकी विदेशमंत्री से हाल में जयशंकर ने बात की थी</strong></p>
<p>कुछ दिन पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर भी कुआलालंपुर में थे। उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात की। दोनों ने भारत-अमेरिका संबंधों और दुनिया के बड़े मुद्दों पर बात की।</p>
<p>तब ईस्ट एशिया शिखर सम्मेलन में जयशंकर ने कहा था कि ऊर्जा व्यापार पर दबाव बढ़ रहा है, बाजार में गड़बड़ी आ रही है। सिद्धांत चुनिंदा तरीके से लागू किए जा रहे हैं।</p>
<h2>क्या मिलेगा अमेरिका को?</h2>
<p>वहीं अमेरिका के लिए भी ये डील किसी खजाने से कम नहीं है. भारत जैसे बड़े बाजार से उसे अरबों डॉलर के रक्षा सौदे मिल रहे हैं. 2008 से अब तक भारत ने अमेरिका से 24 बिलियन डॉलर के हथियार खरीदे हैं, और नई डील्स के साथ ये आंकड़ा और बढ़ेगा. इससे अमेरिका की रक्षा कंपनियों जैसे बोइंग, लॉकहीड मार्टिन और जनरल एटॉमिक्स को बड़ा फायदा होगा।इसके अलावा, भारत के साथ रक्षा सहयोग से अमेरिका को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक मजबूत साझेदार मिलेगा. चीन के खिलाफ रणनीतिक संतुलन बनाने में भारत अमेरिका का बड़ा सहयोगी साबित हो सकता है. साथ ही, भारत के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और संयुक्त उत्पादन से अमेरिकी कंपनियों को भारत में बिजनेस बढ़ाने का मौका मिलेगा।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>यूरोप</category>
                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/158622/10-year-defense-agreement-between-america-and-india-we-will</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/158622/10-year-defense-agreement-between-america-and-india-we-will</guid>
                <pubDate>Fri, 31 Oct 2025 19:26:54 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-10/%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE--%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-10-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%AB%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%B8-%E0%A4%8F%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%9F--us-%E0%A4%A8%E0%A4%88-%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A5%89%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%AF%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A4%BE.jpg"                         length="8391"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन पर 10% टैरिफ ट्रंप-शी की बैठक के बाद घटा, उम्मीद है व्यापार युद्ध थमने की </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div class="nev7se">
<div>
<div>
<div class="tw-src-ltr">
<div class="oSioSc">
<div>
<div class="g9WsWb PZPZlf">
<div class="tw-ta-container tw-nfl">
<pre class="tw-data-text tw-text-large tw-ta" dir="ltr"><strong><span style="font-family:'-apple-system', BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, 'Helvetica Neue', Arial, 'Noto Sans', sans-serif, 'Apple Color Emoji', 'Segoe UI Emoji', 'Segoe UI Symbol', 'Noto Color Emoji';font-size:14px;">International Desk </span></strong></pre>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि दक्षिण कोरिया के बुसान में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई अद्भुत बैठक के बाद चीनी वस्तुओं पर टैरिफ 57 प्रतिशत से घटाकर 47 प्रतिशत कर दिया जाएगा। बातचीत के बाद, ट्रंप ने कहा कि कई निर्णय लिए गए और दोनों पक्षों ने व्यापार एवं सहयोग पर कई महत्वपूर्ण समझौते किए। </p>
<p>बुसान में शी जिनपिंग के साथ दो घंटे से ज़्यादा समय तक बंद कमरे में चली बातचीत के बाद, ट्रंप ने कहा कि कई निर्णय लिए गए और बहुत महत्वपूर्ण मुद्दों पर निष्कर्ष जल्द ही घोषित किए</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158298/68fd2246c1bbe"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/चीन-पर-टैरिफ-ट्रंप-शी-की-बैठक-के-बाद-घटा.jpg" alt=""></a><br /><div class="nev7se">
<div>
<div>
<div class="tw-src-ltr">
<div class="oSioSc">
<div>
<div class="g9WsWb PZPZlf">
<div class="tw-ta-container tw-nfl">
<pre class="tw-data-text tw-text-large tw-ta" dir="ltr"><strong><span style="font-family:'-apple-system', BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, 'Helvetica Neue', Arial, 'Noto Sans', sans-serif, 'Apple Color Emoji', 'Segoe UI Emoji', 'Segoe UI Symbol', 'Noto Color Emoji';font-size:14px;">International Desk </span></strong></pre>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि दक्षिण कोरिया के बुसान में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई अद्भुत बैठक के बाद चीनी वस्तुओं पर टैरिफ 57 प्रतिशत से घटाकर 47 प्रतिशत कर दिया जाएगा। बातचीत के बाद, ट्रंप ने कहा कि कई निर्णय लिए गए और दोनों पक्षों ने व्यापार एवं सहयोग पर कई महत्वपूर्ण समझौते किए। </p>
<p>बुसान में शी जिनपिंग के साथ दो घंटे से ज़्यादा समय तक बंद कमरे में चली बातचीत के बाद, ट्रंप ने कहा कि कई निर्णय लिए गए और बहुत महत्वपूर्ण मुद्दों पर निष्कर्ष जल्द ही घोषित किए जाएँगे। ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा मैं यह नहीं कहूँगा कि हर बात पर चर्चा हुई। लेकिन यह एक अद्भुत बैठक थी। हम इस बात पर सहमत हुए कि राष्ट्रपति शी फेंटेनाइल को रोकने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे, सोयाबीन की खरीद तुरंत शुरू होगी, और चीन पर टैरिफ 57 प्रतिशत से घटाकर 47 प्रतिशत कर दिया जाएगा।" </p>
<p>सबसे महत्वपूर्ण परिणामों में से एक दुर्लभ मृदा खनिजों से संबंधित था, जो उच्च तकनीक निर्माण, इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा उपकरणों में उपयोग किए जाने वाले महत्वपूर्ण खनिज हैं। ट्रंप ने कहा, "दुर्लभ मृदा से संबंधित सभी मुद्दे सुलझा लिए गए हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि अब अमेरिका को चीनी निर्यात को प्रभावित करने वाली "कोई और बाधा" नहीं होगी।</p>
<p>ट्रंप और शी जिनपिंग छह साल बाद दक्षिण कोरिया के बुसान में मिले। ट्रंप ने शी जिनपिंग को एक "कठोर वार्ताकार" बताया और कहा कि उन्हें व्यापार और शुल्कों पर बातचीत के दौरान एक "शानदार समझौते" की उम्मीद है। चीनी राष्ट्रपति ने भी इसी तरह की आशा व्यक्त की और कहा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच टकराव होना सामान्य बात है, लेकिन चीन और अमेरिका को एक स्थिर आधार बनाना चाहिए और एक-दूसरे की प्रगति का समर्थन करना चाहिए।</p>
<p>ट्रंप के साथ यात्रा कर रहे एक अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि की कि बीजिंग एक साल की व्यवस्था के तहत अमेरिका को दुर्लभ मृदा खनिजों का निर्यात जारी रखने पर सहमत हो गया है, जिसे दोनों पक्ष नवीनीकृत करने की उम्मीद कर रहे हैं। इस समझौते से आपूर्ति श्रृंखला संबंधी उन चिंताओं में कमी आने की संभावना है जो हाल के महीनों में अमेरिकी प्रौद्योगिकी और रक्षा कंपनियों को परेशान कर रही थीं।</p>
<div>
<div></div>
</div>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>यूरोप</category>
                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/158298/68fd2246c1bbe</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/158298/68fd2246c1bbe</guid>
                <pubDate>Thu, 30 Oct 2025 15:02:33 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-10/%E0%A4%9A%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%9F%E0%A5%88%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AB-%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%AA-%E0%A4%B6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%A0%E0%A4%95-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%98%E0%A4%9F%E0%A4%BE.jpg"                         length="9999"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Sandeep Kumar ]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति भारत के दोस्त ने भी बिगाड़ा ट्रंप का खेल कहा ...आपसे नहीं डरते हैं</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div class="news-description my-2">
<p><strong>International Desk</strong></p>
<p>अमेरिका टैरिफ के जरिए अन्य देशों पर आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन उसकी ये रणनीति अब कमोजर पड़ती दिखाई दे रही है। पहले भारत ने इस दबाव का मजबूती से सामना किया और अपने हितों की रक्षा की। अब भारत के बाद दक्षिण अफ्रीका ने भी कुछ ऐसा कदम उठाया है।</p>
<p>दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रामाफोसा ने अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता पर एक कड़ा बयान दिया है। उन्होंने अमेरिका को बताया कि अफ्रीका को धमकाया नहीं जा सकता है। रामाफोसा ने कहा है कि हमारी कोशिश है कि हम अमेरिका को ज्यादा से</p></div>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155049/68c7e407de676"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/दक्षिण-अफ्रीका-के-राष्ट्रपति-भारत-के-दोस्त-ने-भी-बिगाड़ा-ट्रंप-का-खेल-कहा-...आपसे-नहीं-डरते-हैं.webp" alt=""></a><br /><div class="news-description my-2">
<p><strong>International Desk</strong></p>
<p>अमेरिका टैरिफ के जरिए अन्य देशों पर आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन उसकी ये रणनीति अब कमोजर पड़ती दिखाई दे रही है। पहले भारत ने इस दबाव का मजबूती से सामना किया और अपने हितों की रक्षा की। अब भारत के बाद दक्षिण अफ्रीका ने भी कुछ ऐसा कदम उठाया है।</p>
<p>दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रामाफोसा ने अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता पर एक कड़ा बयान दिया है। उन्होंने अमेरिका को बताया कि अफ्रीका को धमकाया नहीं जा सकता है। रामाफोसा ने कहा है कि हमारी कोशिश है कि हम अमेरिका को ज्यादा से ज्यादा चीजें निर्यात करते रहें। साथ ही हमारी कंपनियां अमेरिका में निवेश कर सकें और अमेरिका की कंपनियां भी हमारे देश में आकर पैसा लगाएं। </p>
</div>
<div class="text-center ad">
<p style="text-align:left;"><strong>हमारे पास ये खास खनिज है और उन्हें प्रोसेस करने की क्षमता है</strong></p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि हमारे पास बातचीत में ताकत है। ये ताकत हमारे देश में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों और खास खनिजों से आती है। जिनकी अमेरिका को बहुत जरूरत है। हमारे पास ये खास खनिज है और उन्हें प्रोसेस करने की क्षमता भी है। इसके अलावा हमारे पास ऊर्जा की भी बहुत अच्छी सुविधा है। </p>
<p style="text-align:justify;">जो बहुत से देशों के पास नहीं है। यही चीजें हम बातचीत में अपनी तरफ से रखते हैं। हमने बातचीत के लिए एक साफ रणनीति अपनाई है। हम सीधे सम्मान के साथ बात करते हैं। हम अमेरिका से डरते नहीं हैं और ना ही कभी घुटनों पर बैठे हैं। हमने साफ कह दिया कि हमें धमकाया नहीं जा सकता। </p>
<div class="news-description my-2" style="text-align:justify;">
<p><strong>रामाफोसा का ये बयान ट्रंप के लिए बड़ा झटका</strong></p>
<p>रामाफोसा ने कहा कि हम एक आजाद देश हैं और अपनी शर्तों पर बातचीत करेंगे। ताकी दक्षिण अफ्रीका के लिए सबसे अच्छा समझौता कर सके। रामाफोसा का ये बयान ट्रंप के लिए बड़ा झटका है। रामाफोसा ने अमेरिका को अपना संदेश दे दिया है।</p>
<p>दक्षिण अफ्रीका अमेरिका से नहीं डरता और न ही दक्षिण अफ्रीका को धमकाया जा सकता है। आपको बता दें कि ट्रंप लगातार दूसरे देशों पर टैरिफ के जरिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन ट्रंप की ये नीति कहीं भी काम नहीं आ रही है। ट्रंप ने भी भारत पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगाया। अमेरिका के इस बड़े रवैये का सामना भारत ने डटकर किया और भारत ने अपना रुख स्पष्ट रखा। </p>
</div>
<div class="text-center ad" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="social-share" style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"></div>
</div>
<div class="social-share" style="text-align:justify;"> </div>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>यूरोप</category>
                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/155049/68c7e407de676</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/155049/68c7e407de676</guid>
                <pubDate>Mon, 15 Sep 2025 18:54:38 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-09/%E0%A4%A6%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%A3-%E0%A4%85%E0%A4%AB%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A5%9C%E0%A4%BE-%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%AA-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A5%87%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%BE-...%E0%A4%86%E0%A4%AA%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%A1%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82.webp"                         length="47122"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Sandeep Kumar ]]>
                    </dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        