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                <title>upsc success story - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>upsc success story RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>IAS Success Story: चार बार असफल होने के बावजूद भी नहीं मानी हार, पांचवें प्रयास में संजीता महापात्रा बनीं आईएएस अफसर </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: सफलता की राह अक्सर आसान नहीं होती, खासकर तब जब लक्ष्य देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को पास करना हो। कई बार असफल होने के बाद भी जो लोग अपने लक्ष्य से नहीं भटकते, वही अंत में सफलता हासिल करते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी आईएएस संजीता महापात्रा की है, जिन्होंने कई असफलताओं का सामना करने के बावजूद हार नहीं मानी और आखिरकार अपने पांचवें प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर आईएएस अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।</p>
<h3>ओडिशा के राउरकेला से शुरू हुआ सफर</h3>
<p>संजीता महापात्रा ओडिशा के राउरकेला</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172825/ias-success-story-despite-failing-four-times-did-not-give"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/ias-success-story-(32).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: सफलता की राह अक्सर आसान नहीं होती, खासकर तब जब लक्ष्य देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को पास करना हो। कई बार असफल होने के बाद भी जो लोग अपने लक्ष्य से नहीं भटकते, वही अंत में सफलता हासिल करते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी आईएएस संजीता महापात्रा की है, जिन्होंने कई असफलताओं का सामना करने के बावजूद हार नहीं मानी और आखिरकार अपने पांचवें प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर आईएएस अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।</p>
<h3>ओडिशा के राउरकेला से शुरू हुआ सफर</h3>
<p>संजीता महापात्रा ओडिशा के राउरकेला शहर की रहने वाली हैं। बचपन से ही उन्हें नई चीजें सीखने और पढ़ाई में आगे बढ़ने का शौक था। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Indian Institute of Technology Kanpur</span></span> में दाखिला लिया। इंजीनियरिंग के दौरान ही उन्होंने तय कर लिया था कि आगे चलकर उन्हें सिविल सेवा में जाना है और देश के लिए काम करना है।</p>
<h3>शुरुआती प्रयासों में मिली असफलता</h3>
<p>कॉलेज से ग्रेजुएशन के बाद संजीता ने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। हालांकि शुरुआत में उन्हें लगातार असफलताओं का सामना करना पड़ा। अपने पहले तीन प्रयासों में वह प्रीलिम्स परीक्षा भी पास नहीं कर सकीं। लगातार असफलता मिलने के कारण वह कुछ समय के लिए निराश हो गईं और बाद में एक कंपनी में नौकरी करने लगीं।</p>
<h3>नौकरी के साथ भी जारी रखी तैयारी</h3>
<p>नौकरी के दौरान भी संजीता ने यूपीएससी की तैयारी जारी रखी और चौथा प्रयास दिया, लेकिन इस बार भी उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने फैसला किया कि अब पूरी तरह से तैयारी पर ध्यान देना होगा। इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी और पूरी मेहनत के साथ तैयारी शुरू कर दी। खास बात यह है कि उन्होंने किसी कोचिंग का सहारा नहीं लिया और ऑनलाइन स्टडी मटेरियल, एनसीईआरटी की किताबों और अखबारों से पढ़ाई की।</p>
<h3>परिवार और ससुराल का मिला साथ</h3>
<p>यूपीएससी की तैयारी के दौरान ही संजीता की शादी हो गई थी, लेकिन उनके ससुराल वालों ने उन्हें पढ़ाई जारी रखने के लिए पूरा सहयोग दिया। उनके पति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Biswa Ranjan Mundari</span></span> <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Reserve Bank of India</span></span> में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं और उन्होंने भी संजीता की पूरी यात्रा में उनका हौसला बढ़ाया।</p>
<h3>पांचवें प्रयास में बनीं IAS</h3>
<p>लगातार मेहनत और धैर्य के बाद आखिरकार संजीता महापात्रा को सफलता मिल ही गई। उन्होंने साल 2019 में अपने पांचवें प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की और ऑल इंडिया रैंक 10 हासिल की। इस तरह एक इंजीनियर से आईएएस अधिकारी बनने का उनका सपना पूरा हो गया और उनकी कहानी आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 12:01:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success: डॉक्टर बनने का टूटा सपना, 120 दिन की तैयारी से तरुणी पांडे बनीं आईएएस अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: मिडिल क्लास परिवार में पली-बढ़ीं तरुणी पांडे बचपन से डॉक्टर बनना चाहती थीं। उन्होंने एमबीबीएस में दाखिला भी ले लिया था और दूसरे साल की पढ़ाई शुरू हो चुकी थी। लेकिन किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया कि उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी। जीवन के कई उतार-चढ़ावों के बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में टॉपर्स की सूची में जगह बनाते हुए 14वीं रैंक हासिल की। उनकी कहानी संघर्ष, हौसले और आत्मविश्वास की मिसाल है।</p>
<h4><strong>पश्चिम बंगाल में जन्म, झारखंड में परवरिश</strong></h4>
<p>तरुणी का जन्म पश्चिम बंगाल के चित्तरंजन में हुआ, लेकिन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172451/ias-success-broken-dream-of-becoming-a-doctor-taruni-pandey"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/ias-success-story-(31).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: मिडिल क्लास परिवार में पली-बढ़ीं तरुणी पांडे बचपन से डॉक्टर बनना चाहती थीं। उन्होंने एमबीबीएस में दाखिला भी ले लिया था और दूसरे साल की पढ़ाई शुरू हो चुकी थी। लेकिन किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया कि उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी। जीवन के कई उतार-चढ़ावों के बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में टॉपर्स की सूची में जगह बनाते हुए 14वीं रैंक हासिल की। उनकी कहानी संघर्ष, हौसले और आत्मविश्वास की मिसाल है।</p>
<h4><strong>पश्चिम बंगाल में जन्म, झारखंड में परवरिश</strong></h4>
<p>तरुणी का जन्म पश्चिम बंगाल के चित्तरंजन में हुआ, लेकिन उनका बचपन झारखंड के जामताड़ा में बीता। सीमित संसाधनों वाले मध्यमवर्गीय परिवार में पली-बढ़ीं तरुणी ने 10वीं तक की पढ़ाई प्राइवेट स्कूल में की। आर्थिक तंगी के कारण 10वीं के बाद उन्हें सरकारी स्कूल में दाखिला लेना पड़ा। बावजूद इसके, वे पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहीं।</p>
<h4><strong>एमबीबीएस अधूरा, फिर IGNOU से नई शुरुआत</strong></h4>
<p>12वीं के बाद उनका चयन सिक्किम के एक मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के लिए हो गया। डॉक्टर बनने का सपना सच होता नजर आ रहा था, लेकिन दूसरे वर्ष में अचानक तबीयत खराब होने के कारण उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी और घर लौटना पड़ा।</p>
<p>इसके बाद उन्होंने <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Indira Gandhi National Open University</span></span> (IGNOU) से ग्रेजुएशन और पोस्टग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। हालांकि उस समय तक उन्हें अपने जीवन की नई दिशा का अंदाजा नहीं था।</p>
<h4><strong>2016 का हादसा बना टर्निंग पॉइंट</strong></h4>
<p>साल 2016 में परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनकी बड़ी बहन के पति, जो <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Central Reserve Police Force</span></span> (CRPF) में असिस्टेंट कमांडेंट थे, श्रीनगर में शहीद हो गए। इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर दिया।</p>
<p>बहन की नौकरी से जुड़े मामलों में अधिकारियों से मिलने के दौरान तरुणी को प्रशासनिक सेवा की जिम्मेदारी और प्रभाव का एहसास हुआ। तभी उन्होंने सिविल सेवा में जाने का निर्णय लिया।</p>
<h4><strong>बिना कोचिंग, सिर्फ 120 दिन की तैयारी</strong></h4>
<p>तरुणी ने कभी कोचिंग नहीं ली थी और सेल्फ स्टडी पर भरोसा किया। आयु सीमा की वजह से यह उनका पहला और अंतिम प्रयास था। उन्होंने यूट्यूब वीडियो, नोट्स और किताबों की मदद से करीब 120 दिन तैयारी की।</p>
<p>साल 2021 में उन्होंने <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Union Public Service Commission</span></span> (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में 14वीं रैंक हासिल कर IAS कैडर प्राप्त किया।</p>
<p>रिजल्ट आने का दिन उनके जीवन का सबसे यादगार पल बन गया। शाम को परिणाम मिलने के बाद उन्होंने अपनी मां के घर लौटने का इंतजार किया और फिर रात में परिवार को खुशखबरी दी। बहन की आंखों में आंसू थे, भाई को यकीन नहीं हो रहा था, मां खुशी से नाच रही थीं और पिता भावुक होकर रो पड़े।</p>
<p>तरुणी ने उन पलों को डिजिटल मेमोरी में कैद किया और आज भी उन्हें अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानती हैं।</p>
<h4><strong>वर्तमान पद</strong></h4>
<p>वर्तमान में तरुणी पांडे दिल्ली स्थित संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग के अंतर्गत भारतीय संचार वित्त सेवा (IP&amp;TAFS) में ग्रुप ‘A’ अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 12:22:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: सोशल मीडिया से 3 साल की दूरी, चौथे प्रयास में नेहा ब्याडवाल बनीं IAS अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: आज के दौर में कुछ मिनट भी मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर रहना कई लोगों के लिए चुनौती बन चुका है। लेकिन <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Neha Byadwal</span></span> ने अपने लक्ष्य को पाने के लिए खुद पर कड़ा अनुशासन लगाया। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में शुरुआती असफलताओं के बाद उन्होंने बड़ा फैसला लिया—करीब तीन साल तक सोशल मीडिया से पूरी दूरी और मोबाइल का इस्तेमाल केवल बेहद जरूरी कामों तक सीमित। यही त्याग और एकाग्रता आखिरकार उन्हें आईएएस अधिकारी बनने तक ले गई।</p>
<h3>राजस्थान से छत्तीसगढ़ तक का सफर</h3>
<p>नेहा का जन्म राजस्थान के जयपुर में हुआ, लेकिन उनके पिता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171281/ias-success-story-3-years-away-from-social-media-neha"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/ias-success-story-(26).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: आज के दौर में कुछ मिनट भी मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर रहना कई लोगों के लिए चुनौती बन चुका है। लेकिन <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Neha Byadwal</span></span> ने अपने लक्ष्य को पाने के लिए खुद पर कड़ा अनुशासन लगाया। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में शुरुआती असफलताओं के बाद उन्होंने बड़ा फैसला लिया—करीब तीन साल तक सोशल मीडिया से पूरी दूरी और मोबाइल का इस्तेमाल केवल बेहद जरूरी कामों तक सीमित। यही त्याग और एकाग्रता आखिरकार उन्हें आईएएस अधिकारी बनने तक ले गई।</p>
<h3>राजस्थान से छत्तीसगढ़ तक का सफर</h3>
<p>नेहा का जन्म राजस्थान के जयपुर में हुआ, लेकिन उनके पिता श्रवण कुमार की सरकारी नौकरी के कारण परिवार को अलग-अलग शहरों में रहना पड़ा। उनकी स्कूली शिक्षा जयपुर के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और भोपाल के विभिन्न स्कूलों में हुई। बार-बार स्कूल बदलने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। आगे चलकर उन्होंने रायपुर के डीबी गर्ल्स कॉलेज से ग्रेजुएशन किया और यूनिवर्सिटी टॉपर रहीं।</p>
<h3>तीन असफलताओं के बाद भी नहीं टूटा हौसला</h3>
<p>पिता से प्रेरित होकर नेहा ने <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Union Public Service Commission</span></span> (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। हालांकि, पहले तीन प्रयासों में उन्हें सफलता नहीं मिली। लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी रणनीति में बदलाव किया।</p>
<h3>खुद को किया पूरी तरह समर्पित</h3>
<p>नेहा ने महसूस किया कि सोशल मीडिया और मोबाइल फोन उनकी तैयारी में बाधा बन रहे हैं। उन्होंने तीन साल तक इनसे दूरी बना ली। यहां तक कि दोस्तों और परिवार से भी सीमित संपर्क रखा, ताकि पूरा ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित रहे। इस दौरान उन्होंने एसएससी जैसी परीक्षाएं पास कीं, लेकिन नौकरी जॉइन नहीं की क्योंकि उनका अंतिम लक्ष्य आईएएस बनना था।</p>
<h3>चौथे प्रयास में मिली सफलता</h3>
<p>साल 2021 में चौथे प्रयास में नेहा को सफलता मिली। उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 569 के साथ सिविल सेवा परीक्षा पास की। कुल 960 अंक हासिल कर महज 24 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना आईएएस बनने का सपना साकार कर लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 12:24:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: चार बार असफलता के बाद भी नहीं हारीं तृप्ति कल्हंस, 5वें प्रयास में बनीं IAS अफसर </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए सिर्फ तेज दिमाग ही नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और मजबूत इरादों की भी जरूरत होती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है तृप्ति कल्हंस की, जिन्होंने लगातार चार असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी और अपने पांचवें प्रयास में IAS अधिकारी बनने का सपना साकार किया।</p>
<p>तृप्ति की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो एक-दो बार की असफलता के बाद खुद पर विश्वास खोने लगते हैं।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167981/ias-success-story-trupti-kalhans-did-not-give-up-even"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-success-story-(22).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए सिर्फ तेज दिमाग ही नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और मजबूत इरादों की भी जरूरत होती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है तृप्ति कल्हंस की, जिन्होंने लगातार चार असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी और अपने पांचवें प्रयास में IAS अधिकारी बनने का सपना साकार किया।</p>
<p>तृप्ति की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो एक-दो बार की असफलता के बाद खुद पर विश्वास खोने लगते हैं।</p>
<h5>दिल्ली यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ UPSC का सफर</h5>
<p>तृप्ति कल्हंस ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। दिल्ली में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रशासनिक सेवाओं में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह से यूपीएससी की तैयारी के लिए समर्पित कर दिया।</p>
<p>हालांकि, उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि यह सफर आसान नहीं होगा और उन्हें कई बार कठिन दौर से गुजरना पड़ेगा।</p>
<p>UPSC की तैयारी के दौरान तृप्ति को लगातार चार बार असफलता का सामना करना पड़ा। कभी वह प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में नहीं निकल पाईं, तो कभी मुख्य परीक्षा (Mains) में अटक गईं। चार प्रयासों की नाकामी किसी भी उम्मीदवार को मानसिक रूप से तोड़ सकती है, लेकिन तृप्ति ने हर हार को सीख के रूप में लिया।</p>
<p>उन्होंने अपनी तैयारी की रणनीति में बदलाव किया, आंसर राइटिंग प्रैक्टिस पर ज्यादा ध्यान दिया और अपने वैकल्पिक विषय को पहले से ज्यादा मजबूत बनाया। तृप्ति का मानना है कि यूपीएससी की तैयारी में खुद पर भरोसा बनाए रखना सबसे अहम होता है।</p>
<h5>पांचवें प्रयास में हासिल की बड़ी कामयाबी</h5>
<p>लगातार मेहनत और आत्मविश्लेषण के बाद तृप्ति कल्हंस को आखिरकार सफलता मिली। उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास करते हुए 199वीं रैंक हासिल की। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सफलता की दिशा दिखाने वाला एक पड़ाव होती है।</p>
<p>उनकी सफलता की खबर मिलते ही परिवार और शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ गई। आज तृप्ति की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को छोड़ने से इनकार करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 21:31:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: 9 घंटे की नौकरी के बाद UPSC की तैयारी, पढ़ें IAS श्वेता भारती सक्सेस स्टोरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: अक्सर यह माना जाता है कि पूरे दिन की नौकरी के बाद न तो पढ़ाई का समय बचता है और न ही ऊर्जा, लेकिन जो लोग अपनी किस्मत बदलने का जज़्बा रखते हैं, वे हर हाल में रास्ता निकाल लेते हैं। यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा, जिसमें रोज़ाना 10–12 घंटे पढ़ाई की सलाह दी जाती है और फिर भी सफलता की कोई गारंटी नहीं होती, उसी चुनौती को श्वेता भारती ने स्वीकार किया।</p>
<p>9 घंटे की नौकरी के बावजूद उन्होंने पढ़ाई पर फोकस बनाए रखा और आखिरकार यूपीएससी परीक्षा पास कर मिसाल कायम कर दी।</p>
<h5>ऑफिस और पढ़ाई</h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167888/ias-success-story-upsc-preparation-after-9-hours-of-job"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/ias-shweta-bharti-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: अक्सर यह माना जाता है कि पूरे दिन की नौकरी के बाद न तो पढ़ाई का समय बचता है और न ही ऊर्जा, लेकिन जो लोग अपनी किस्मत बदलने का जज़्बा रखते हैं, वे हर हाल में रास्ता निकाल लेते हैं। यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा, जिसमें रोज़ाना 10–12 घंटे पढ़ाई की सलाह दी जाती है और फिर भी सफलता की कोई गारंटी नहीं होती, उसी चुनौती को श्वेता भारती ने स्वीकार किया।</p>
<p>9 घंटे की नौकरी के बावजूद उन्होंने पढ़ाई पर फोकस बनाए रखा और आखिरकार यूपीएससी परीक्षा पास कर मिसाल कायम कर दी।</p>
<h5>ऑफिस और पढ़ाई का संतुलन बनाना नहीं था आसान</h5>
<p>ऑफिस का दबाव, रोज़ का सफर, घर की जिम्मेदारियां और फिर यूपीएससी की तैयारी—इन सबको एक साथ संभालना आसान नहीं था। थकान और समय की कमी के बावजूद श्वेता ने हार नहीं मानी। उन्होंने वह कर दिखाया, जिसे करने का सपना बहुत से लोग देखते हैं, लेकिन हालात के डर से कदम नहीं बढ़ा पाते। उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को टाल देते हैं।</p>
<h5>बिहार के नालंदा से शुरू हुआ सफर</h5>
<p>श्वेता भारती बिहार के नालंदा जिले की रहने वाली हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई पटना के एक स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने भागलपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। कॉलेज के दिनों में ही उनके मन में सिविल सेवा में जाने का सपना जन्म ले चुका था, जो आगे चलकर यूपीएससी की तैयारी में बदला।</p>
<h5>जिम्मेदारियों के चलते नहीं छोड़ पाईं नौकरी</h5>
<p>इंजीनियरिंग के बाद श्वेता ने विप्रो कंपनी में नौकरी शुरू की। नौकरी के दौरान ही उन्होंने यूपीएससी की तैयारी का मन बनाया, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण नौकरी छोड़ना उनके लिए संभव नहीं था। ऐसे में उन्होंने नौकरी के साथ ही पढ़ाई करने का फैसला लिया। दिन में ऑफिस और शाम से देर रात तक पढ़ाई—यही उनकी दिनचर्या बन गई।</p>
<h5>सोशल मीडिया से बनाई दूरी, बढ़ाया फोकस</h5>
<p>पढ़ाई के दौरान ध्यान भटकने से बचने के लिए श्वेता ने सोशल मीडिया से दूरी बना ली। उन्होंने समय का सही प्रबंधन किया और काम व पढ़ाई के बीच संतुलन बनाकर लगातार मेहनत करती रहीं। यही अनुशासन और समर्पण उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।</p>
<h5>BPSC से UPSC तक का सफर</h5>
<p>यूपीएससी से पहले श्वेता ने बीपीएससी परीक्षा भी दी, जिसमें उन्हें सफलता मिली। 65वीं बीपीएससी परीक्षा में उन्होंने 65वां रैंक हासिल किया और डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम ऑफिसर के पद पर चयनित हुईं। इसके बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी नहीं छोड़ी और आगे बढ़ती रहीं।</p>
<p>साल 2021 में श्वेता भारती ने यूपीएससी परीक्षा पास कर 356वीं रैंक हासिल की और अपने सपने को साकार किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 12:08:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: बिना कोचिंग पहले प्रयास में बनीं IFS अफसर, पढ़ें 22 साल की मुस्कान जिंदल की सक्सेस स्टोरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: जिंदगी में अगर कुछ हासिल करने का जज्बा हो तो महंगी कोचिंग या बार-बार कोशिशों की जरूरत नहीं पड़ती। खुद पर भरोसा, मेहनत के प्रति ईमानदारी और मजबूत हौसला आपको सफलता तक पहुंचा सकता है। इस बात को सच कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले की रहने वाली मुस्कान जिंदल ने, जिन्होंने बिना किसी कोचिंग के पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर IFS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।</p>
<h5>हिमाचल के सोलन जिले से ताल्लुक रखती हैं मुस्कान</h5>
<p>IFS अधिकारी मुस्कान जिंदल हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में नगर परिषद बद्दी के हाउसिंग बोर्ड</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167337/success-story-without-coaching-she-became-an-ifsc-officer-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ifs-muskan-jindal.jpg" alt=""></a><br /><p>Success Story: जिंदगी में अगर कुछ हासिल करने का जज्बा हो तो महंगी कोचिंग या बार-बार कोशिशों की जरूरत नहीं पड़ती। खुद पर भरोसा, मेहनत के प्रति ईमानदारी और मजबूत हौसला आपको सफलता तक पहुंचा सकता है। इस बात को सच कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले की रहने वाली मुस्कान जिंदल ने, जिन्होंने बिना किसी कोचिंग के पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर IFS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।</p>
<h5>हिमाचल के सोलन जिले से ताल्लुक रखती हैं मुस्कान</h5>
<p>IFS अधिकारी मुस्कान जिंदल हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में नगर परिषद बद्दी के हाउसिंग बोर्ड फेज-2 की रहने वाली हैं। उनके पिता एक बिजनेसमैन हैं, जबकि माता गृहिणी हैं। परिवार में दो बहनें हैं। मुस्कान का बचपन से ही पढ़ाई में रुझान रहा है।</p>
<h5>स्कूल टॉपर से UPSC तक का सफर</h5>
<p>मुस्कान ने बद्दी के एक निजी स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई की। 12वीं बोर्ड परीक्षा में उन्होंने 96.4 प्रतिशत अंक हासिल कर स्कूल में पहला स्थान प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ के एसडी कॉलेज से बीकॉम ऑनर्स की पढ़ाई पूरी की।</p>
<h5>घर पर रहकर की UPSC की तैयारी</h5>
<p>ग्रेजुएशन के साथ ही मुस्कान ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने किसी भी तरह की कोचिंग नहीं ली, बल्कि घर पर रहकर सेल्फ-स्टडी पर पूरा फोकस किया। मुस्कान रोजाना 4 से 5 घंटे नियमित पढ़ाई करती थीं। ग्रेजुएशन पूरा होने के बाद उम्र कम होने के कारण उन्होंने एक साल का ब्रेक लिया और फिर परीक्षा के लिए आवेदन किया।</p>
<h5>पहले ही प्रयास में मिली बड़ी सफलता</h5>
<p>साल 2019 में मुस्कान जिंदल ने अपने पहले ही प्रयास में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली। महज 22 साल की उम्र में उन्होंने 87वीं रैंक हासिल की और भारतीय विदेश सेवा (IFS) में चयनित हो गईं। बिना कोचिंग, बिना किसी अतिरिक्त संसाधन के यह उपलब्धि उन्हें खास बनाती है।</p>
<h5>बचपन का सपना हुआ पूरा</h5>
<p>मुस्कान जिंदल का सिविल सर्विस में जाने का सपना बचपन से ही था। स्कूल के दिनों से ही उन्होंने अपने लक्ष्य को लेकर गंभीरता दिखाई। सही रणनीति, समय प्रबंधन और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने अपने सपने को साकार कर दिखाया।</p>
<h5>युवाओं के लिए मिसाल बनीं मुस्कान</h5>
<p>IFS मुस्कान जिंदल आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो संसाधनों की कमी या कोचिंग न मिलने को अपनी कमजोरी मानते हैं। उनकी सफलता साबित करती है कि अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Jan 2026 22:40:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: लाखों की नौकरी छोड़ शुरू की यूपीएससी की तैयारी, AIR-6 लाकर बनीं IAS विशाखा यादव</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: इंजीनियरिंग के बाद जिंदगी पूरी तरह सेट लग रही थी। मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी, अच्छी-खासी सैलरी और सुरक्षित भविष्य—सब कुछ मौजूद था। लेकिन मन के अंदर कुछ अलग करने की चाह थी, ऐसी पहचान बनाने की, जो समाज के लिए मायने रखे। यही चाह कब IAS बनने का जुनून बन गई, यह विशाखा यादव को भी पता नहीं चला। आज IAS विशाखा यादव की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आरामदायक जिंदगी छोड़कर कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं।</p>
<h5>दिल्ली पुलिस में दारोगा हैं पिता</h5>
<p>विशाखा यादव दिल्ली के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167038/ias-success-story-left-job-worth-lakhs-and-started-preparing"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-vishakha-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: इंजीनियरिंग के बाद जिंदगी पूरी तरह सेट लग रही थी। मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी, अच्छी-खासी सैलरी और सुरक्षित भविष्य—सब कुछ मौजूद था। लेकिन मन के अंदर कुछ अलग करने की चाह थी, ऐसी पहचान बनाने की, जो समाज के लिए मायने रखे। यही चाह कब IAS बनने का जुनून बन गई, यह विशाखा यादव को भी पता नहीं चला। आज IAS विशाखा यादव की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आरामदायक जिंदगी छोड़कर कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं।</p>
<h5>दिल्ली पुलिस में दारोगा हैं पिता</h5>
<p>विशाखा यादव दिल्ली के द्वारका की रहने वाली हैं। उनके पिता राजकुमार यादव दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) हैं, जबकि मां एक गृहिणी हैं। परिवार का पूरा सपोर्ट विशाखा को हमेशा मिला। खासतौर पर उनकी मां हर कदम पर उनके साथ खड़ी रहीं। विशाखा कई बार कह चुकी हैं कि आज वह जो कुछ भी हैं, उसमें मां का योगदान सबसे बड़ा है।</p>
<h5>इंजीनियरिंग के बाद चुना UPSC का रास्ता</h5>
<p>12वीं तक की पढ़ाई दिल्ली से करने के बाद विशाखा ने इंजीनियरिंग करने का फैसला लिया। उन्होंने दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) से बीटेक किया। साल 2014 में ग्रेजुएशन के बाद उन्हें सिस्को कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी मिल गई। करीब दो साल तक उन्होंने बेंगलुरु में काम किया और अच्छी सैलरी कमाई।</p>
<h5>लाखों की टेक जॉब छोड़ UPSC की तैयारी</h5>
<p>पैसा और सुविधाएं थीं, लेकिन सिविल सेवा जैसी संतुष्टि नहीं थी। इसी सोच के साथ विशाखा ने नौकरी छोड़ दी और दिल्ली आकर फुल-टाइम UPSC की तैयारी शुरू कर दी। यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि आगे अनिश्चितता भरा रास्ता था।</p>
<h5>दो बार असफलता, लेकिन नहीं मानी हार</h5>
<p>विशाखा ने पहला UPSC प्रयास दिया, लेकिन सफलता नहीं मिली। दूसरी बार भी असफलता हाथ लगी। इस दौरान उनके जॉब छोड़ने के फैसले पर सवाल उठने लगे। लोग कहने लगे कि अच्छी नौकरी छोड़कर गलती कर दी। लेकिन विशाखा का आत्मविश्वास नहीं डगमगाया। उन्होंने ठान लिया था कि जवाब शब्दों से नहीं, सफलता से देना है।</p>
<h5>UPSC 2019 में AIR-6 हासिल कर रचा इतिहास</h5>
<p>लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प का नतीजा आखिरकार सामने आया। UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2019 में विशाखा यादव ने ऑल इंडिया रैंक-6 हासिल कर सभी आलोचनाओं पर विराम लगा दिया। इस उपलब्धि का श्रेय उन्होंने अपनी मां और परिवार के सपोर्ट को दिया।</p>
<h5>प्रशासनिक सेवा में शानदार सफर</h5>
<p>जून 2025 तक विशाखा यादव अरुणाचल प्रदेश में डिप्टी कमिश्नर के पद पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। हाल ही में उनका ट्रांसफर दिल्ली किया गया है। उनका सफर इस बात का सबूत है कि अगर लक्ष्य साफ हो और इरादे मजबूत हों, तो असफलताएं रास्ता नहीं रोक सकतीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 19:37:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: चार बार असफलता के बाद भी नहीं हारीं तृप्ति कल्हंस, 5वें प्रयास में बनीं IAS अफसर </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए सिर्फ तेज दिमाग ही नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और मजबूत इरादों की भी जरूरत होती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है तृप्ति कल्हंस की, जिन्होंने लगातार चार असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी और अपने पांचवें प्रयास में IAS अधिकारी बनने का सपना साकार किया।</p>
<p>तृप्ति की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो एक-दो बार की असफलता के बाद खुद पर विश्वास खोने लगते हैं।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166884/ias-success-story-trupti-kalhans-did-not-give-up-even"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-success-story-(22).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए सिर्फ तेज दिमाग ही नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और मजबूत इरादों की भी जरूरत होती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है तृप्ति कल्हंस की, जिन्होंने लगातार चार असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी और अपने पांचवें प्रयास में IAS अधिकारी बनने का सपना साकार किया।</p>
<p>तृप्ति की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो एक-दो बार की असफलता के बाद खुद पर विश्वास खोने लगते हैं।</p>
<h5>दिल्ली यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ UPSC का सफर</h5>
<p>तृप्ति कल्हंस ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। दिल्ली में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रशासनिक सेवाओं में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह से यूपीएससी की तैयारी के लिए समर्पित कर दिया।</p>
<p>हालांकि, उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि यह सफर आसान नहीं होगा और उन्हें कई बार कठिन दौर से गुजरना पड़ेगा।</p>
<p>UPSC की तैयारी के दौरान तृप्ति को लगातार चार बार असफलता का सामना करना पड़ा। कभी वह प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में नहीं निकल पाईं, तो कभी मुख्य परीक्षा (Mains) में अटक गईं। चार प्रयासों की नाकामी किसी भी उम्मीदवार को मानसिक रूप से तोड़ सकती है, लेकिन तृप्ति ने हर हार को सीख के रूप में लिया।</p>
<p>उन्होंने अपनी तैयारी की रणनीति में बदलाव किया, आंसर राइटिंग प्रैक्टिस पर ज्यादा ध्यान दिया और अपने वैकल्पिक विषय को पहले से ज्यादा मजबूत बनाया। तृप्ति का मानना है कि यूपीएससी की तैयारी में खुद पर भरोसा बनाए रखना सबसे अहम होता है।</p>
<h5>पांचवें प्रयास में हासिल की बड़ी कामयाबी</h5>
<p>लगातार मेहनत और आत्मविश्लेषण के बाद तृप्ति कल्हंस को आखिरकार सफलता मिली। उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास करते हुए 199वीं रैंक हासिल की। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सफलता की दिशा दिखाने वाला एक पड़ाव होती है।</p>
<p>उनकी सफलता की खबर मिलते ही परिवार और शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ गई। आज तृप्ति की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को छोड़ने से इनकार करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Jan 2026 14:24:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: बिना कोचिंग पहले प्रयास में बनीं IFS अफसर, पढ़ें 22 साल की मुस्कान जिंदल की सक्सेस स्टोरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: जिंदगी में अगर कुछ हासिल करने का जज्बा हो तो महंगी कोचिंग या बार-बार कोशिशों की जरूरत नहीं पड़ती। खुद पर भरोसा, मेहनत के प्रति ईमानदारी और मजबूत हौसला आपको सफलता तक पहुंचा सकता है। इस बात को सच कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले की रहने वाली मुस्कान जिंदल ने, जिन्होंने बिना किसी कोचिंग के पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर IFS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।</p>
<h5>हिमाचल के सोलन जिले से ताल्लुक रखती हैं मुस्कान</h5>
<p>IFS अधिकारी मुस्कान जिंदल हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में नगर परिषद बद्दी के हाउसिंग बोर्ड</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166232/success-story-without-coaching-she-became-an-ifsc-officer-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ifs-muskan-jindal.jpg" alt=""></a><br /><p>Success Story: जिंदगी में अगर कुछ हासिल करने का जज्बा हो तो महंगी कोचिंग या बार-बार कोशिशों की जरूरत नहीं पड़ती। खुद पर भरोसा, मेहनत के प्रति ईमानदारी और मजबूत हौसला आपको सफलता तक पहुंचा सकता है। इस बात को सच कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले की रहने वाली मुस्कान जिंदल ने, जिन्होंने बिना किसी कोचिंग के पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर IFS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।</p>
<h5>हिमाचल के सोलन जिले से ताल्लुक रखती हैं मुस्कान</h5>
<p>IFS अधिकारी मुस्कान जिंदल हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में नगर परिषद बद्दी के हाउसिंग बोर्ड फेज-2 की रहने वाली हैं। उनके पिता एक बिजनेसमैन हैं, जबकि माता गृहिणी हैं। परिवार में दो बहनें हैं। मुस्कान का बचपन से ही पढ़ाई में रुझान रहा है।</p>
<h5>स्कूल टॉपर से UPSC तक का सफर</h5>
<p>मुस्कान ने बद्दी के एक निजी स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई की। 12वीं बोर्ड परीक्षा में उन्होंने 96.4 प्रतिशत अंक हासिल कर स्कूल में पहला स्थान प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ के एसडी कॉलेज से बीकॉम ऑनर्स की पढ़ाई पूरी की।</p>
<h5>घर पर रहकर की UPSC की तैयारी</h5>
<p>ग्रेजुएशन के साथ ही मुस्कान ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने किसी भी तरह की कोचिंग नहीं ली, बल्कि घर पर रहकर सेल्फ-स्टडी पर पूरा फोकस किया। मुस्कान रोजाना 4 से 5 घंटे नियमित पढ़ाई करती थीं। ग्रेजुएशन पूरा होने के बाद उम्र कम होने के कारण उन्होंने एक साल का ब्रेक लिया और फिर परीक्षा के लिए आवेदन किया।</p>
<h5>पहले ही प्रयास में मिली बड़ी सफलता</h5>
<p>साल 2019 में मुस्कान जिंदल ने अपने पहले ही प्रयास में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली। महज 22 साल की उम्र में उन्होंने 87वीं रैंक हासिल की और भारतीय विदेश सेवा (IFS) में चयनित हो गईं। बिना कोचिंग, बिना किसी अतिरिक्त संसाधन के यह उपलब्धि उन्हें खास बनाती है।</p>
<h5>बचपन का सपना हुआ पूरा</h5>
<p>मुस्कान जिंदल का सिविल सर्विस में जाने का सपना बचपन से ही था। स्कूल के दिनों से ही उन्होंने अपने लक्ष्य को लेकर गंभीरता दिखाई। सही रणनीति, समय प्रबंधन और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने अपने सपने को साकार कर दिखाया।</p>
<h5>युवाओं के लिए मिसाल बनीं मुस्कान</h5>
<p>IFS मुस्कान जिंदल आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो संसाधनों की कमी या कोचिंग न मिलने को अपनी कमजोरी मानते हैं। उनकी सफलता साबित करती है कि अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Jan 2026 11:09:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: चार बार असफलता के बाद भी नहीं हारीं तृप्ति कल्हंस, 5वें प्रयास में बनीं IAS अफसर </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए सिर्फ तेज दिमाग ही नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और मजबूत इरादों की भी जरूरत होती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है तृप्ति कल्हंस की, जिन्होंने लगातार चार असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी और अपने पांचवें प्रयास में IAS अधिकारी बनने का सपना साकार किया।</p><p>तृप्ति की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो एक-दो बार की असफलता के बाद खुद पर विश्वास खोने लगते हैं।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166083/ias-success-story-trupti-kalhans-did-not-give-up-even"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-success-story-(22).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए सिर्फ तेज दिमाग ही नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और मजबूत इरादों की भी जरूरत होती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है तृप्ति कल्हंस की, जिन्होंने लगातार चार असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी और अपने पांचवें प्रयास में IAS अधिकारी बनने का सपना साकार किया।</p><p>तृप्ति की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो एक-दो बार की असफलता के बाद खुद पर विश्वास खोने लगते हैं।</p><h5>दिल्ली यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ UPSC का सफर</h5><p>तृप्ति कल्हंस ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। दिल्ली में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रशासनिक सेवाओं में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह से यूपीएससी की तैयारी के लिए समर्पित कर दिया।</p><p>हालांकि, उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि यह सफर आसान नहीं होगा और उन्हें कई बार कठिन दौर से गुजरना पड़ेगा।</p><p>UPSC की तैयारी के दौरान तृप्ति को लगातार चार बार असफलता का सामना करना पड़ा। कभी वह प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में नहीं निकल पाईं, तो कभी मुख्य परीक्षा (Mains) में अटक गईं। चार प्रयासों की नाकामी किसी भी उम्मीदवार को मानसिक रूप से तोड़ सकती है, लेकिन तृप्ति ने हर हार को सीख के रूप में लिया।</p><p>उन्होंने अपनी तैयारी की रणनीति में बदलाव किया, आंसर राइटिंग प्रैक्टिस पर ज्यादा ध्यान दिया और अपने वैकल्पिक विषय को पहले से ज्यादा मजबूत बनाया। तृप्ति का मानना है कि यूपीएससी की तैयारी में खुद पर भरोसा बनाए रखना सबसे अहम होता है।</p><h5>पांचवें प्रयास में हासिल की बड़ी कामयाबी</h5><p>लगातार मेहनत और आत्मविश्लेषण के बाद तृप्ति कल्हंस को आखिरकार सफलता मिली। उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास करते हुए 199वीं रैंक हासिल की। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सफलता की दिशा दिखाने वाला एक पड़ाव होती है।</p><p>उनकी सफलता की खबर मिलते ही परिवार और शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ गई। आज तृप्ति की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को छोड़ने से इनकार करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jan 2026 13:34:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: लाखों की नौकरी छोड़ शुरू की यूपीएससी की तैयारी, AIR-6 लाकर बनीं IAS विशाखा यादव</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: इंजीनियरिंग के बाद जिंदगी पूरी तरह सेट लग रही थी। मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी, अच्छी-खासी सैलरी और सुरक्षित भविष्य—सब कुछ मौजूद था। लेकिन मन के अंदर कुछ अलग करने की चाह थी, ऐसी पहचान बनाने की, जो समाज के लिए मायने रखे। यही चाह कब IAS बनने का जुनून बन गई, यह विशाखा यादव को भी पता नहीं चला। आज IAS विशाखा यादव की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आरामदायक जिंदगी छोड़कर कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं।</p>
<h5>दिल्ली पुलिस में दारोगा हैं पिता</h5>
<p>विशाखा यादव दिल्ली के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165960/ias-success-story-left-job-worth-lakhs-and-started-preparing"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-vishakha-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: इंजीनियरिंग के बाद जिंदगी पूरी तरह सेट लग रही थी। मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी, अच्छी-खासी सैलरी और सुरक्षित भविष्य—सब कुछ मौजूद था। लेकिन मन के अंदर कुछ अलग करने की चाह थी, ऐसी पहचान बनाने की, जो समाज के लिए मायने रखे। यही चाह कब IAS बनने का जुनून बन गई, यह विशाखा यादव को भी पता नहीं चला। आज IAS विशाखा यादव की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आरामदायक जिंदगी छोड़कर कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं।</p>
<h5>दिल्ली पुलिस में दारोगा हैं पिता</h5>
<p>विशाखा यादव दिल्ली के द्वारका की रहने वाली हैं। उनके पिता राजकुमार यादव दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) हैं, जबकि मां एक गृहिणी हैं। परिवार का पूरा सपोर्ट विशाखा को हमेशा मिला। खासतौर पर उनकी मां हर कदम पर उनके साथ खड़ी रहीं। विशाखा कई बार कह चुकी हैं कि आज वह जो कुछ भी हैं, उसमें मां का योगदान सबसे बड़ा है।</p>
<h5>इंजीनियरिंग के बाद चुना UPSC का रास्ता</h5>
<p>12वीं तक की पढ़ाई दिल्ली से करने के बाद विशाखा ने इंजीनियरिंग करने का फैसला लिया। उन्होंने दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) से बीटेक किया। साल 2014 में ग्रेजुएशन के बाद उन्हें सिस्को कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी मिल गई। करीब दो साल तक उन्होंने बेंगलुरु में काम किया और अच्छी सैलरी कमाई।</p>
<h5>लाखों की टेक जॉब छोड़ UPSC की तैयारी</h5>
<p>पैसा और सुविधाएं थीं, लेकिन सिविल सेवा जैसी संतुष्टि नहीं थी। इसी सोच के साथ विशाखा ने नौकरी छोड़ दी और दिल्ली आकर फुल-टाइम UPSC की तैयारी शुरू कर दी। यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि आगे अनिश्चितता भरा रास्ता था।</p>
<h5>दो बार असफलता, लेकिन नहीं मानी हार</h5>
<p>विशाखा ने पहला UPSC प्रयास दिया, लेकिन सफलता नहीं मिली। दूसरी बार भी असफलता हाथ लगी। इस दौरान उनके जॉब छोड़ने के फैसले पर सवाल उठने लगे। लोग कहने लगे कि अच्छी नौकरी छोड़कर गलती कर दी। लेकिन विशाखा का आत्मविश्वास नहीं डगमगाया। उन्होंने ठान लिया था कि जवाब शब्दों से नहीं, सफलता से देना है।</p>
<h5>UPSC 2019 में AIR-6 हासिल कर रचा इतिहास</h5>
<p>लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प का नतीजा आखिरकार सामने आया। UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2019 में विशाखा यादव ने ऑल इंडिया रैंक-6 हासिल कर सभी आलोचनाओं पर विराम लगा दिया। इस उपलब्धि का श्रेय उन्होंने अपनी मां और परिवार के सपोर्ट को दिया।</p>
<h5>प्रशासनिक सेवा में शानदार सफर</h5>
<p>जून 2025 तक विशाखा यादव अरुणाचल प्रदेश में डिप्टी कमिश्नर के पद पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। हाल ही में उनका ट्रांसफर दिल्ली किया गया है। उनका सफर इस बात का सबूत है कि अगर लक्ष्य साफ हो और इरादे मजबूत हों, तो असफलताएं रास्ता नहीं रोक सकतीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/165960/ias-success-story-left-job-worth-lakhs-and-started-preparing</link>
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                <pubDate>Wed, 14 Jan 2026 11:39:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: सेट करियर छोड़कर UPSC चुना, हरियाणा की बेटी डॉ. अंकुर लाठर बनीं IAS</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: सेट करियर, सुरक्षित भविष्य और आरामदायक जिंदगी—सब कुछ होते हुए भी हरियाणा की एक बेटी ने देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC का रास्ता चुना। यह फैसला आसान नहीं था। पहले प्रयास में असफलता मिली, लेकिन हार मानना उनके स्वभाव में नहीं था। यही जिद, जुनून और आत्मविश्वास उन्हें IAS बनने तक ले गया। हम बात कर रहे हैं हरियाणा के हिसार जिले की रहने वाली IAS डॉ. अंकुर लाठर की।</p>
<h3>गांव से अफसर बनने तक का सफर</h3>
<p>डॉ. अंकुर लाठर हिसार जिले के छोटे से गांव राजगढ़ से ताल्लुक रखती हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165918/ias-success-story-haryanas-daughter-dr-ankur-lather-chose-upsc"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-ankur-lather.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: सेट करियर, सुरक्षित भविष्य और आरामदायक जिंदगी—सब कुछ होते हुए भी हरियाणा की एक बेटी ने देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC का रास्ता चुना। यह फैसला आसान नहीं था। पहले प्रयास में असफलता मिली, लेकिन हार मानना उनके स्वभाव में नहीं था। यही जिद, जुनून और आत्मविश्वास उन्हें IAS बनने तक ले गया। हम बात कर रहे हैं हरियाणा के हिसार जिले की रहने वाली IAS डॉ. अंकुर लाठर की।</p>
<h3>गांव से अफसर बनने तक का सफर</h3>
<p>डॉ. अंकुर लाठर हिसार जिले के छोटे से गांव राजगढ़ से ताल्लुक रखती हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कड़ी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया। इस पूरे सफर में परिवार का भरपूर सहयोग उन्हें मिलता रहा, जिसने उनके हौसले को मजबूत बनाए रखा।</p>
<h3>पिता से मिली डॉक्टर बनने की प्रेरणा</h3>
<p>अंकुर लाठर के पिता करण सिंह लाठर पेशे से पशु चिकित्सक (Veterinary Doctor) हैं। बचपन से ही उन्होंने अपने पिता को सेवा भाव से काम करते देखा, जिससे उन्हें भी डॉक्टर बनने की प्रेरणा मिली। यही पारिवारिक संस्कार आगे चलकर देश सेवा के जुनून में बदल गए।</p>
<h3>पढ़ाई में हमेशा अव्वल, AIIMS तक का सफर</h3>
<p>अंकुर लाठर शुरू से ही पढ़ाई में तेज थीं। 10वीं में 94% अंक, 12वीं में 91% अंक प्राप्त किए थे। </p>
<p>शुरुआती पढ़ाई गांव में करने के बाद उन्होंने हिसार के एक CBSE स्कूल से आगे की पढ़ाई की। इसके बाद MBBS में दाखिले के लिए एंट्रेंस एग्जाम पास कर उन्होंने AIIMS में प्रवेश लिया, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।</p>
<h3>मेडिकल करियर छोड़ चुना UPSC</h3>
<p>AIIMS से MBBS करने के बाद अंकुर लाठर के सामने एक सुरक्षित और शानदार मेडिकल करियर का रास्ता खुला था। लेकिन उनका सपना सिर्फ डॉक्टर बनना नहीं था, बल्कि प्रशासनिक सेवा के जरिए देश की सेवा करना था। इसी सोच के साथ उन्होंने वर्ष 2013 में UPSC की तैयारी शुरू की। मेडिकल बैकग्राउंड होने के कारण उन्होंने Medical Science को अपना ऑप्शनल विषय चुना।</p>
<h3>पहली असफलता, फिर ऐतिहासिक सफलता</h3>
<p>UPSC का पहला प्रयास उनके लिए सफल नहीं रहा। लेकिन असफलता ने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि और मजबूत बना दिया। लगातार मेहनत, आत्मविश्लेषण और सही रणनीति के दम पर उन्होंने UPSC CSE 2016 में ऑल इंडिया रैंक 77 हासिल कर ली और IAS अधिकारी बनीं।</p>
<h3>युवाओं के लिए प्रेरणा</h3>
<p>IAS डॉ. अंकुर लाठर की कहानी उन युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है, जो असफलता से डर जाते हैं या सुरक्षित रास्ता छोड़ने का साहस नहीं कर पाते। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य बड़ा हो और इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 19:21:02 +0530</pubDate>
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