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                <title>success story - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>success story RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सीएम युवा मिशन,स्वरोजगार की दौड़ में जौनपुर जनपद बना प्रदेश में नंबर-1</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>जौनपुर।</strong></div>
<div>  </div>
<div>उत्तर प्रदेश सरकार का सीएम युवा योजना प्रदेश के युवाओं की पहली पसंद बन गयी है।इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश भर में पौने चार लाख से अधिक आवेदन आए, जबकि योगी सरकार ने इस वित्तीय वर्ष के लिए 1.5 लाख ऋण वितरण का लक्ष्य रखा था।</div>
<div>  </div>
<div>आंकड़ों से साफ है कि सीएम युवा योजना युवाओं को आकर्षित कर रही है और वह इससे जुड़कर अपने सपनों को साकार कर रहे हैं।योजना का शत प्रतिशत लाभ देने में प्रदेश के सभी जिलों को पछाड़ते हुए जौनपुर ने पूरे उत्तर प्रदेश में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174993/cm-youth-mission-jaunpur-district-becomes-number-1-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1001795146.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>जौनपुर।</strong></div>
<div> </div>
<div>उत्तर प्रदेश सरकार का सीएम युवा योजना प्रदेश के युवाओं की पहली पसंद बन गयी है।इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश भर में पौने चार लाख से अधिक आवेदन आए, जबकि योगी सरकार ने इस वित्तीय वर्ष के लिए 1.5 लाख ऋण वितरण का लक्ष्य रखा था।</div>
<div> </div>
<div>आंकड़ों से साफ है कि सीएम युवा योजना युवाओं को आकर्षित कर रही है और वह इससे जुड़कर अपने सपनों को साकार कर रहे हैं।योजना का शत प्रतिशत लाभ देने में प्रदेश के सभी जिलों को पछाड़ते हुए जौनपुर ने पूरे उत्तर प्रदेश में बेहतर मुकाम हासिल कर प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी कार्यकुशलता का परचम लहरा दिया है।इस उपलब्धि के पीछे जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सिंह का नेतृत्व और उनकी संवेदनशील कार्यशैली को अहम माना जा रहा है।</div>
<div> </div>
<div>          इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1.5 लाख लक्ष्य के सापेक्ष पूरे प्रदेश से तीन लाख 86 हजार 092 युवाओं ने ऋण के लिए आवेदन किया। इनमें तीन लाख 30 हजार 441 आवेदनों को बैंक को अग्रसारित किया गया। एक लाख 45 हजार 454 आवेदनों को बैंक ने लोन देने पर स्वीकृति दी। अब तक एक लाख 38 हजार 304 युवाओं को स्वरोजगार के लिए लोन वितरित किया जा चुका है।</div>
<div> </div>
<div>          सीएम युवा योजना का शत प्रतिशत लाभ देने में पूरे प्रदेश में जौनपुर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है।  जौनपुर जनपद को विकास मुख्यधारा से जोड़ने वाले,जनलोकप्रिय,कृत्यवनिष्ठ व न्यायप्रिय जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी की मंशा के अनुरूप जिले में विशेष अभियान चलाकर युवाओं को स्वरोजगार के लिए बैंकों से संपर्क कर लोन उपलब्ध कराया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले को अभियान के तहत दो हजार 700 युवाओं को ऋण उपलब्ध कराने का लक्ष्य दिया गया था।</div>
<div> </div>
<div>इसके सापेक्ष नौ हजार 785 आवेदन प्राप्त हुए। उनमें आठ हजार 406 आवेदन बैंकों को भेजे गए। इनमें चार हजार 092 आवेदकों को ऋण वितरित किया जा चुका है। ऐसे में लक्ष्य के सापेक्ष 151.56 प्रतिशत ऋण वितरण किया गया। जिलाधिकारी श्री सिंह ने बताया कि लक्ष्य से अधिक ऋण वितरित कर जौनपुर ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है।</div>
<div> </div>
<div>पूरे वित्तीय वर्ष जौनपुर की स्थिति पहले स्थान पर बनी रही।इसी क्रम में बताते चले कि जिलाधिकारी की सख्ती और कुशल निर्देशन का ही असर रहा जो सीएम युवा मिशन स्वरोजगार की दौड़ में बेहतर स्थिति हासिल की है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 19:53:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: राजस्थान की बेटी बनीं आईएएस आफ़सर, 22 साल की उम्र में मिली सफलता </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: राजस्थान की मोनिका यादव ने यह साबित कर दिया कि ईमानदारी और मेहनत के दम पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। महज 22 साल की उम्र में उन्होंने वह कर दिखाया जो कई लोग वर्षों की तैयारी के बाद भी नहीं कर पाते। उनका संबंध राजस्थान के सीकर जिले के लिसाडिया गांव से है, जहां से निकलकर उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता पाई।</p>
<p><strong>पहले प्रयास में यूपीएससी पास</strong></p>
<p>मोनिका के पिता हरफूल सिंह यादव एक आरएएस अधिकारी हैं। घर में प्रशासनिक माहौल होने के कारण बचपन से ही उनका रुझान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173001/ias-success-story-rajasthans-daughter-became-ias-officer-got-success"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/ias-success-story-(29).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: राजस्थान की मोनिका यादव ने यह साबित कर दिया कि ईमानदारी और मेहनत के दम पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। महज 22 साल की उम्र में उन्होंने वह कर दिखाया जो कई लोग वर्षों की तैयारी के बाद भी नहीं कर पाते। उनका संबंध राजस्थान के सीकर जिले के लिसाडिया गांव से है, जहां से निकलकर उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता पाई।</p>
<p><strong>पहले प्रयास में यूपीएससी पास</strong></p>
<p>मोनिका के पिता हरफूल सिंह यादव एक आरएएस अधिकारी हैं। घर में प्रशासनिक माहौल होने के कारण बचपन से ही उनका रुझान सिविल सेवा की ओर रहा। उन्होंने 22 वर्ष की उम्र में पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर 403वीं रैंक हासिल की। इसके बाद उन्होंने राजस्थान सिविल सेवा परीक्षा में भी 93वीं रैंक प्राप्त की।</p>
<p>मोनिका ने सिर्फ यूपीएससी ही नहीं, बल्कि नेट, जेआरएफ और सीए जैसी कठिन परीक्षाएं भी उत्तीर्ण कीं। उनकी उपलब्धियां यहीं नहीं रुकीं। लखनऊ स्थित भारतीय रेलवे प्रबंधन संस्थान में 78 सप्ताह की ट्रेनिंग के दौरान उन्हें सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का पुरस्कार भी मिला।</p>
<p><strong>परिवार से मिला मजबूत समर्थन</strong></p>
<p>मोनिका के पिता हरफूल सिंह यादव वरिष्ठ आरएएस अधिकारी हैं, जबकि उनकी मां सुनीता यादव गृहिणी हैं। तीन भाई-बहनों में वह सबसे बड़ी हैं। बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहने वाली मोनिका का स्कूल रिकॉर्ड भी बेहद शानदार रहा। परिवार के सहयोग और अनुशासन ने उनकी सफलता की राह को मजबूत बनाया।</p>
<p><strong>आईएएस अधिकारी से हुई शादी</strong></p>
<p>आईएएस बनने के बाद भी मोनिका अपनी जड़ों से जुड़ी हुई हैं। उनकी शादी आईएएस अधिकारी सुशील यादव से हुई है। सोशल मीडिया पर भी वह काफी सक्रिय रहती हैं और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 15:50:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: राजस्थान की बेटी बनीं आईएएस आफ़सर, 22 साल की उम्र में मिली सफलता </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: राजस्थान की मोनिका यादव ने यह साबित कर दिया कि ईमानदारी और मेहनत के दम पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। महज 22 साल की उम्र में उन्होंने वह कर दिखाया जो कई लोग वर्षों की तैयारी के बाद भी नहीं कर पाते। उनका संबंध राजस्थान के सीकर जिले के लिसाडिया गांव से है, जहां से निकलकर उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता पाई।</p>
<p><strong>पहले प्रयास में यूपीएससी पास</strong></p>
<p>मोनिका के पिता हरफूल सिंह यादव एक आरएएस अधिकारी हैं। घर में प्रशासनिक माहौल होने के कारण बचपन से ही उनका रुझान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172157/ias-success-story-rajasthans-daughter-became-ias-officer-got-success"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/ias-success-story-(29).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: राजस्थान की मोनिका यादव ने यह साबित कर दिया कि ईमानदारी और मेहनत के दम पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। महज 22 साल की उम्र में उन्होंने वह कर दिखाया जो कई लोग वर्षों की तैयारी के बाद भी नहीं कर पाते। उनका संबंध राजस्थान के सीकर जिले के लिसाडिया गांव से है, जहां से निकलकर उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता पाई।</p>
<p><strong>पहले प्रयास में यूपीएससी पास</strong></p>
<p>मोनिका के पिता हरफूल सिंह यादव एक आरएएस अधिकारी हैं। घर में प्रशासनिक माहौल होने के कारण बचपन से ही उनका रुझान सिविल सेवा की ओर रहा। उन्होंने 22 वर्ष की उम्र में पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर 403वीं रैंक हासिल की। इसके बाद उन्होंने राजस्थान सिविल सेवा परीक्षा में भी 93वीं रैंक प्राप्त की।</p>
<p>मोनिका ने सिर्फ यूपीएससी ही नहीं, बल्कि नेट, जेआरएफ और सीए जैसी कठिन परीक्षाएं भी उत्तीर्ण कीं। उनकी उपलब्धियां यहीं नहीं रुकीं। लखनऊ स्थित भारतीय रेलवे प्रबंधन संस्थान में 78 सप्ताह की ट्रेनिंग के दौरान उन्हें सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का पुरस्कार भी मिला।</p>
<p><strong>परिवार से मिला मजबूत समर्थन</strong></p>
<p>मोनिका के पिता हरफूल सिंह यादव वरिष्ठ आरएएस अधिकारी हैं, जबकि उनकी मां सुनीता यादव गृहिणी हैं। तीन भाई-बहनों में वह सबसे बड़ी हैं। बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहने वाली मोनिका का स्कूल रिकॉर्ड भी बेहद शानदार रहा। परिवार के सहयोग और अनुशासन ने उनकी सफलता की राह को मजबूत बनाया।</p>
<p><strong>आईएएस अधिकारी से हुई शादी</strong></p>
<p>आईएएस बनने के बाद भी मोनिका अपनी जड़ों से जुड़ी हुई हैं। उनकी शादी आईएएस अधिकारी सुशील यादव से हुई है। सोशल मीडिया पर भी वह काफी सक्रिय रहती हैं और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Mar 2026 11:24:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: ऑटो चालक का बेटा बना IAS अफसर, 21 साल की उम्र में क्रैक किया UPSC एग्जाम</title>
                                    <description><![CDATA[<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/ias-success-story-(6).jpg" alt="ias success story (6)" width="1200" height="790" /></p>
<p>महाराष्ट्र के जालना गांव में जन्में अंसार शेख भारत के सबसे युवा IAS अफसर थे। अंसार शेख के पिता एक ऑटो चालक है। अंसार शेख का बचपन बहुत ही मुश्किलों में बीता। लेकिन इन परेशानियों के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और यूपीएससी परीक्षा पास कर आईएएस बन गए।</p>
<p><strong>21 वर्ष की आयु में बने सबसे युवा IAS अधिकारी</strong></p>
<p>अंसार ने पहले ही अटेंप्ट में 2015 में UPSC फाइनल रिजल्ट में 361वीं रैंक हासिल कर देश के सबसे युवा अफसर बनने का खिताब अपने नाम किया था। उन्होंने 21 वर्ष की आयु में यूपीएससी परीक्षा पास कर सफलता हासिल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166384/ias-success-story-auto-drivers-son-became-ias-officer-cracked"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/ias-success-story-(6).jpg" alt=""></a><br /><p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/ias-success-story-(6).jpg" alt="ias success story (6)" width="1366" height="790"></img></p>
<p>महाराष्ट्र के जालना गांव में जन्में अंसार शेख भारत के सबसे युवा IAS अफसर थे। अंसार शेख के पिता एक ऑटो चालक है। अंसार शेख का बचपन बहुत ही मुश्किलों में बीता। लेकिन इन परेशानियों के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और यूपीएससी परीक्षा पास कर आईएएस बन गए।</p>
<p><strong>21 वर्ष की आयु में बने सबसे युवा IAS अधिकारी</strong></p>
<p>अंसार ने पहले ही अटेंप्ट में 2015 में UPSC फाइनल रिजल्ट में 361वीं रैंक हासिल कर देश के सबसे युवा अफसर बनने का खिताब अपने नाम किया था। उन्होंने 21 वर्ष की आयु में यूपीएससी परीक्षा पास कर सफलता हासिल की थी।</p>
<p><strong>यूपीएससी के लिए 12 से 13 घंटे पढ़ाई की</strong></p>
<p>अंसार शेख ने पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने 73 प्रतिशत नंबर हासिल किए। अंसार शेख बताते हैं कि उन्होंने यूपीएससी के लिए रोजाना 12 से 13 घंटे पढ़ाई की थी।</p>
<p><strong>सोशल मीडिया पर हैं काफी पॉपुलर</strong></p>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वर्तमान में, आईएएस ऑफिसर अंसार शेख पश्चिम बंगाल के कूच बिहार में एडीएम के रूप में कार्यरत हैं। वे सोशल पर भी बहुत लोकप्रिय हैं और उनके इंस्टाग्राम पर 3.43 लाख फॉलोअर्स हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Jan 2026 10:54:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: सेट करियर छोड़कर UPSC चुना, हरियाणा की बेटी डॉ. अंकुर लाठर बनीं IAS</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: सेट करियर, सुरक्षित भविष्य और आरामदायक जिंदगी—सब कुछ होते हुए भी हरियाणा की एक बेटी ने देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC का रास्ता चुना। यह फैसला आसान नहीं था। पहले प्रयास में असफलता मिली, लेकिन हार मानना उनके स्वभाव में नहीं था। यही जिद, जुनून और आत्मविश्वास उन्हें IAS बनने तक ले गया। हम बात कर रहे हैं हरियाणा के हिसार जिले की रहने वाली IAS डॉ. अंकुर लाठर की।</p>
<h3>गांव से अफसर बनने तक का सफर</h3>
<p>डॉ. अंकुर लाठर हिसार जिले के छोटे से गांव राजगढ़ से ताल्लुक रखती हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165918/ias-success-story-haryanas-daughter-dr-ankur-lather-chose-upsc"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-ankur-lather.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: सेट करियर, सुरक्षित भविष्य और आरामदायक जिंदगी—सब कुछ होते हुए भी हरियाणा की एक बेटी ने देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC का रास्ता चुना। यह फैसला आसान नहीं था। पहले प्रयास में असफलता मिली, लेकिन हार मानना उनके स्वभाव में नहीं था। यही जिद, जुनून और आत्मविश्वास उन्हें IAS बनने तक ले गया। हम बात कर रहे हैं हरियाणा के हिसार जिले की रहने वाली IAS डॉ. अंकुर लाठर की।</p>
<h3>गांव से अफसर बनने तक का सफर</h3>
<p>डॉ. अंकुर लाठर हिसार जिले के छोटे से गांव राजगढ़ से ताल्लुक रखती हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कड़ी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया। इस पूरे सफर में परिवार का भरपूर सहयोग उन्हें मिलता रहा, जिसने उनके हौसले को मजबूत बनाए रखा।</p>
<h3>पिता से मिली डॉक्टर बनने की प्रेरणा</h3>
<p>अंकुर लाठर के पिता करण सिंह लाठर पेशे से पशु चिकित्सक (Veterinary Doctor) हैं। बचपन से ही उन्होंने अपने पिता को सेवा भाव से काम करते देखा, जिससे उन्हें भी डॉक्टर बनने की प्रेरणा मिली। यही पारिवारिक संस्कार आगे चलकर देश सेवा के जुनून में बदल गए।</p>
<h3>पढ़ाई में हमेशा अव्वल, AIIMS तक का सफर</h3>
<p>अंकुर लाठर शुरू से ही पढ़ाई में तेज थीं। 10वीं में 94% अंक, 12वीं में 91% अंक प्राप्त किए थे। </p>
<p>शुरुआती पढ़ाई गांव में करने के बाद उन्होंने हिसार के एक CBSE स्कूल से आगे की पढ़ाई की। इसके बाद MBBS में दाखिले के लिए एंट्रेंस एग्जाम पास कर उन्होंने AIIMS में प्रवेश लिया, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।</p>
<h3>मेडिकल करियर छोड़ चुना UPSC</h3>
<p>AIIMS से MBBS करने के बाद अंकुर लाठर के सामने एक सुरक्षित और शानदार मेडिकल करियर का रास्ता खुला था। लेकिन उनका सपना सिर्फ डॉक्टर बनना नहीं था, बल्कि प्रशासनिक सेवा के जरिए देश की सेवा करना था। इसी सोच के साथ उन्होंने वर्ष 2013 में UPSC की तैयारी शुरू की। मेडिकल बैकग्राउंड होने के कारण उन्होंने Medical Science को अपना ऑप्शनल विषय चुना।</p>
<h3>पहली असफलता, फिर ऐतिहासिक सफलता</h3>
<p>UPSC का पहला प्रयास उनके लिए सफल नहीं रहा। लेकिन असफलता ने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि और मजबूत बना दिया। लगातार मेहनत, आत्मविश्लेषण और सही रणनीति के दम पर उन्होंने UPSC CSE 2016 में ऑल इंडिया रैंक 77 हासिल कर ली और IAS अधिकारी बनीं।</p>
<h3>युवाओं के लिए प्रेरणा</h3>
<p>IAS डॉ. अंकुर लाठर की कहानी उन युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है, जो असफलता से डर जाते हैं या सुरक्षित रास्ता छोड़ने का साहस नहीं कर पाते। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य बड़ा हो और इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 19:21:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: अंकिता चौधरी ने मां के सपने को सच कर रचा इतिहास, दूसरे प्रयास में बनीं IAS अफसर </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो मंजिल कोई भी क्यों न हो, उसे पाया जा सकता है। इस कहावत को सच कर दिखाया है हरियाणा की आईएएस अफसर अंकिता चौधरी ने। कभी जिंदगी में एक ऐसा दौर आया जिसने उन्हें तोड़कर रख दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। गिरकर भी उठीं और ऐसा मुकाम पाया कि अब हर युवा के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।</p>
<p><strong>दिल्ली यूनिवर्सिटी से की पढ़ाई</strong></p>
<p>अंकिता चौधरी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया। बचपन से ही वे पढ़ाई में बेहद होशियार थीं और उनका सपना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165769/ias-success-story-ankita-chaudhary-created-history-by-making-her"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/ias-ankita-chaudhary.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो मंजिल कोई भी क्यों न हो, उसे पाया जा सकता है। इस कहावत को सच कर दिखाया है हरियाणा की आईएएस अफसर अंकिता चौधरी ने। कभी जिंदगी में एक ऐसा दौर आया जिसने उन्हें तोड़कर रख दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। गिरकर भी उठीं और ऐसा मुकाम पाया कि अब हर युवा के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।</p>
<p><strong>दिल्ली यूनिवर्सिटी से की पढ़ाई</strong></p>
<p>अंकिता चौधरी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया। बचपन से ही वे पढ़ाई में बेहद होशियार थीं और उनका सपना था कि वे आईएएस अफसर बनकर देश की सेवा करें। ग्रेजुएशन पूरी करते ही उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।</p>
<p><img src="https://static.clmbtech.com/c1e/client/128336/uploaded/3a16f671cbfadb65fc8e22a5f123666c.jpg" alt="ias ankita choudhary" width="900" height="473"></img></p>
<p><strong>2017 में टूटा दुखों का पहाड़</strong></p>
<p>साल 2017 अंकिता की जिंदगी का सबसे कठिन साल साबित हुआ। जब वे दिन-रात यूपीएससी की तैयारी में जुटी थीं, तभी उनकी मां का निधन हो गया। मां ही उनकी सबसे बड़ी ताकत थीं। यह सदमा इतना गहरा था कि अंकिता अंदर से टूट गईं। उसी साल वे परीक्षा में असफल रहीं, लेकिन उनके पिता ने हिम्मत नहीं टूटने दी।</p>
<p><strong>पिता ने बढ़ाया हौसला</strong></p>
<p>अंकिता के पिता ने उन्हें संभाला और याद दिलाया कि उनकी मां का सपना था कि अंकिता एक आईएएस अफसर बने। पिता के इन शब्दों ने अंकिता को फिर से ऊर्जा दी। उन्होंने खुद से वादा किया कि अब मां का सपना किसी भी हाल में पूरा करना है।</p>
<p><img src="https://static.clmbtech.com/c1e/client/128336/uploaded/be8059f04c5f377f356993314f33d2b7.jpg" alt="ias ankita choudhary" width="900" height="506"></img></p>
<p><strong>2018 में हासिल की ऑल इंडिया 18वीं रैंक</strong></p>
<p>अगले ही साल, यानी 2018 में, अंकिता ने दोबारा यूपीएससी परीक्षा दी और इस बार उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 18 हासिल कर इतिहास रच दिया। उनकी सफलता ने न सिर्फ परिवार को गर्व से भर दिया, बल्कि यह साबित कर दिया कि कठिनाइयाँ सफलता की राह में केवल परीक्षा लेती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 11:16:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: ऑटो चालक का बेटा बना IAS अफसर, 21 साल की उम्र में क्रैक किया UPSC एग्जाम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: यूपीएससी को देश की सबसे कठिन परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। आज हम आपको ऐसे आईएएस अफसर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने बहुत संघर्ष कर इस परीक्षा को पास कर सफलता हासिल की है। आइए जानते हैं इस आईएएस अफसर के बारे में।</p>
<p>महाराष्ट्र के जालना गांव में जन्में अंसार शेख भारत के सबसे युवा IAS अफसर थे। अंसार शेख के पिता एक ऑटो चालक है। अंसार शेख का बचपन बहुत ही मुश्किलों में बीता। लेकिन इन परेशानियों के बाद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165626/ias-success-story-auto-drivers-son-became-ias-officer-cracked"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/ias-success-story-(6).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: यूपीएससी को देश की सबसे कठिन परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। आज हम आपको ऐसे आईएएस अफसर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने बहुत संघर्ष कर इस परीक्षा को पास कर सफलता हासिल की है। आइए जानते हैं इस आईएएस अफसर के बारे में।</p>
<p>महाराष्ट्र के जालना गांव में जन्में अंसार शेख भारत के सबसे युवा IAS अफसर थे। अंसार शेख के पिता एक ऑटो चालक है। अंसार शेख का बचपन बहुत ही मुश्किलों में बीता। लेकिन इन परेशानियों के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और यूपीएससी परीक्षा पास कर आईएएस बन गए।</p>
<p><strong>21 वर्ष की आयु में बने सबसे युवा IAS अधिकारी</strong></p>
<p>अंसार ने पहले ही अटेंप्ट में 2015 में UPSC फाइनल रिजल्ट में 361वीं रैंक हासिल कर देश के सबसे युवा अफसर बनने का खिताब अपने नाम किया था। उन्होंने 21 वर्ष की आयु में यूपीएससी परीक्षा पास कर सफलता हासिल की थी।</p>
<p><strong>यूपीएससी के लिए 12 से 13 घंटे पढ़ाई की</strong></p>
<p>अंसार शेख ने पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने 73 प्रतिशत नंबर हासिल किए। अंसार शेख बताते हैं कि उन्होंने यूपीएससी के लिए रोजाना 12 से 13 घंटे पढ़ाई की थी।</p>
<p><strong>सोशल मीडिया पर हैं काफी पॉपुलर</strong></p>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वर्तमान में, आईएएस ऑफिसर अंसार शेख पश्चिम बंगाल के कूच बिहार में एडीएम के रूप में कार्यरत हैं। वे सोशल पर भी बहुत लोकप्रिय हैं और उनके इंस्टाग्राम पर 3.43 लाख फॉलोअर्स हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/165626/ias-success-story-auto-drivers-son-became-ias-officer-cracked</link>
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                <pubDate>Sat, 10 Jan 2026 11:11:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: 60 लाख की नौकरी छोड़ पति-पत्नी ने शुरू किया ये बिजनेस, आज दुनिया के हर कोने में पहुंच रहा ब्रांड</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: सफलता की कहानियां अक्सर बड़े और साहसिक फैसलों से शुरू होती हैं। बेंगलुरु के रहने वाले सुदर्शन एम.के. और प्रवलिका वी. की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। आईटी सेक्टर में एक दशक से ज्यादा समय तक शानदार करियर और विदेश में 60 लाख रुपये सालाना पैकेज पाने के बाद सुदर्शन ने कॉर्पोरेट दुनिया को अलविदा कह दिया। पत्नी प्रवलिका के साथ मिलकर उन्होंने ‘The Pickls’ नाम से एक D2C स्टार्टअप शुरू किया, जो आंध्र प्रदेश के पारंपरिक अचारों और हेल्दी फूड को दुनिया तक पहुंचा रहा है।</p>
<p><strong>कॉर्पोरेट करियर छोड़ चुनी उद्यमिता की राह</strong></p>
<p>सुदर्शन और प्रवलिका</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165517/success-story-husband-and-wife-left-their-job-worth-rs"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/success-story-(18).jpg" alt=""></a><br /><p>Success Story: सफलता की कहानियां अक्सर बड़े और साहसिक फैसलों से शुरू होती हैं। बेंगलुरु के रहने वाले सुदर्शन एम.के. और प्रवलिका वी. की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। आईटी सेक्टर में एक दशक से ज्यादा समय तक शानदार करियर और विदेश में 60 लाख रुपये सालाना पैकेज पाने के बाद सुदर्शन ने कॉर्पोरेट दुनिया को अलविदा कह दिया। पत्नी प्रवलिका के साथ मिलकर उन्होंने ‘The Pickls’ नाम से एक D2C स्टार्टअप शुरू किया, जो आंध्र प्रदेश के पारंपरिक अचारों और हेल्दी फूड को दुनिया तक पहुंचा रहा है।</p>
<p><strong>कॉर्पोरेट करियर छोड़ चुनी उद्यमिता की राह</strong></p>
<p>सुदर्शन और प्रवलिका दोनों ही उच्च शिक्षित हैं। दोनों ने इंजीनियरिंग और एमबीए किया है। सुदर्शन यूएई में एक सफल आईटी प्रोफेशनल के तौर पर काम कर रहे थे, जबकि प्रवलिका भी आईटी सेक्टर में थीं। एक पारिवारिक आपात स्थिति के चलते सुदर्शन को भारत लौटना पड़ा और यहीं से उनके जीवन ने नया मोड़ लिया।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/starting-was-not-easy.jpg" alt="starting-was-not-easy" width="700" height="525"></img></p>
<p>शानदार नौकरी छोड़ने का फैसला आसान नहीं था, लेकिन दोनों ने मिलकर पहले एक आईटी कंसल्टिंग फर्म शुरू की। इसके बावजूद उनका मन आंध्र प्रदेश के पारंपरिक अचारों और देसी स्वाद को वैश्विक पहचान दिलाने में लगा रहा।</p>
<p><strong>दिसंबर 2023 में रखी ‘The Pickls’ की नींव</strong></p>
<p>आखिरकार दिसंबर 2023 में उन्होंने ‘The Pickls’ की शुरुआत की। इस स्टार्टअप में उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से 25 लाख रुपये निवेश किए। लक्ष्य सिर्फ बिजनेस करना नहीं था, बल्कि पारंपरिक स्वाद और शुद्धता को बनाए रखते हुए एक भरोसेमंद ब्रांड खड़ा करना था।</p>
<p><strong>शुद्धता, स्वाद और सामाजिक सशक्तीकरण का मॉडल</strong></p>
<p>‘The Pickls’ सिर्फ अचार बेचने वाला ब्रांड नहीं है, बल्कि यह एक मिशन है। इस स्टार्टअप के ज्यादातर उत्पाद आंध्र प्रदेश की ग्रामीण महिलाएं तैयार करती हैं।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/left-corporate-job.jpg" alt="left-corporate-job" width="700" height="525"></img></p>
<p>ब्रांड का फोकस ‘क्लीन-लेबल’ प्रोडक्ट्स पर है—यानि न कोई आर्टिफिशियल रंग, न प्रिजर्वेटिव। अचारों के साथ-साथ यह स्टार्टअप कर्नाटक के किसानों से सीधे जैविक मिलेट्स खरीदता है, जिससे किसानों को सही दाम मिल सके और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो।</p>
<p><strong>चुनौतियों से भरा रहा शुरुआती सफर</strong></p>
<p>हर स्टार्टअप की तरह सुदर्शन और प्रवलिका के लिए भी रास्ता आसान नहीं रहा। शुरुआत में लॉजिस्टिक्स, खराब डिलीवरी और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के भारी कमीशन जैसी समस्याएं सामने आईं।</p>
<p>अमेजन और फ्लिपकार्ट पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय उन्होंने D2C मॉडल अपनाया और अपनी खुद की वेबसाइट के जरिए ग्राहकों से सीधे जुड़ने पर फोकस किया। सीमित वर्किंग कैपिटल के बावजूद उन्होंने गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं किया, जिसका नतीजा यह हुआ कि ग्राहकों का भरोसा तेजी से बढ़ा।</p>
<p><strong>एक साल में 8,000 से ज्यादा ग्राहक, 75 से अधिक प्रोडक्ट्स</strong></p>
<p>महज एक साल के भीतर ‘The Pickls’ ने भारत समेत अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और खाड़ी देशों में 8,000 से ज्यादा ग्राहकों तक अपनी पहुंच बना ली है।</p>
<p>स्टार्टअप का प्रोडक्ट पोर्टफोलियो 50 से बढ़कर 75 से ज्यादा आइटम्स तक पहुंच चुका है। अब इसमें अचारों के साथ-साथ रेडी-टू-कुक मिलेट प्रोडक्ट्स जैसे उपमा, खिचड़ी और पास्ता भी शामिल हैं।</p>
<p><strong>आगे की बड़ी योजनाएं</strong></p>
<p>वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 12 लाख रुपये के राजस्व के साथ सुदर्शन और प्रवलिका अब वेंचर कैपिटल फंडिंग और नई हेल्थ-फूड कैटेगरी में विस्तार की योजना बना रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/165517/success-story-husband-and-wife-left-their-job-worth-rs</link>
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                <pubDate>Thu, 08 Jan 2026 11:55:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: राजस्थान की बेटी 22 साल की उम्र में बनीं IAS अफसर, पहले ही प्रयास में हासिल की 73वीं रैंक</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: बीते कुछ वर्षों में राजस्थान ने देश को कई प्रतिभाशाली IAS और IPS अधिकारी दिए हैं। इसी कड़ी में एक और नाम जुड़ गया है IAS कृष्णा जोशी का, जिन्होंने बेहद कम उम्र में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जोधपुर की रहने वाली कृष्णा जोशी ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर पहले ही प्रयास में UPSC CSE 2023 में 73वीं रैंक हासिल की और आज वे बिहार कैडर की आईएएस अधिकारी हैं।</p>
<p><strong>पिता वकील, बेटी ने चुनी सिविल सेवा की राह</strong></p>
<p>IAS कृष्णा जोशी का जन्म 08 अक्टूबर 2001</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165469/ias-success-story-rajasthans-daughter-became-an-ias-officer-at"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-success-story-(19).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: बीते कुछ वर्षों में राजस्थान ने देश को कई प्रतिभाशाली IAS और IPS अधिकारी दिए हैं। इसी कड़ी में एक और नाम जुड़ गया है IAS कृष्णा जोशी का, जिन्होंने बेहद कम उम्र में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जोधपुर की रहने वाली कृष्णा जोशी ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर पहले ही प्रयास में UPSC CSE 2023 में 73वीं रैंक हासिल की और आज वे बिहार कैडर की आईएएस अधिकारी हैं।</p>
<p><strong>पिता वकील, बेटी ने चुनी सिविल सेवा की राह</strong></p>
<p>IAS कृष्णा जोशी का जन्म 08 अक्टूबर 2001 को राजस्थान के जोधपुर में हुआ। वे एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता पेशे से वकील हैं, जिन्होंने शुरू से ही उन्हें सिविल सेवा में जाने के लिए प्रेरित किया।</p>
<p>महज 22 साल की उम्र में आईएएस बनना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। कृष्णा की सफलता यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, अनुशासन और निरंतर मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।</p>
<p><strong>Krishna Joshi Education: जोधपुर से दिल्ली तक का सफर</strong></p>
<p>कृष्णा जोशी की शुरुआती शिक्षा से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई जोधपुर से हुई। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज (LSR) से अंग्रेजी विषय में ग्रेजुएशन किया।</p>
<p>ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने बिना समय गंवाए यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी और सीमित उम्र में ही देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक को पास कर दिखाया।</p>
<p><strong>पहले ही प्रयास में UPSC पास</strong></p>
<p>UPSC CSE 2023 में पहले प्रयास में 73वीं रैंक हासिल करना सिर्फ एक परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, धैर्य और कड़ी मेहनत की जीत है।</p>
<p>कृष्णा जोशी का सफर उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं। अनगिनत घंटों की पढ़ाई, असफलता का डर और समाज की अपेक्षाओं के बीच उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनका मानना है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता जरूर मिलती है।</p>
<p><strong>Bihar Cadre IAS: नालंदा में मिली पहली बड़ी जिम्मेदारी</strong></p>
<p>आईएएस बनने के बाद कृष्णा जोशी को बिहार कैडर मिला। वर्ष 2025 में उन्हें बिहार के नालंदा जिले में सहायक कलेक्टर के पद पर तैनाती दी गई।</p>
<p>कम उम्र में प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालते हुए वे न सिर्फ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रही हैं, बल्कि लाखों युवाओं के लिए रोल मॉडल भी बन चुकी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 19:27:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: बर्तन बेचने वाले की बेटी बनीं IAS अफसर, हासिल की ऑल इंडिया 17वीं रैंक </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: कठिन हालात अगर हौसले को मजबूत कर दें, तो मंजिल खुद रास्ता बना लेती है। उत्तराखंड के ऋषिकेश की रहने वाली नमामि बंसल की कहानी कुछ ऐसी ही है। जिस परिवार में पिता बर्तन बेचकर घर चलाते थे, उसी घर से एक दिन IAS बनने का सपना निकला और मेहनत, अनुशासन व आत्मविश्वास के दम पर नमामि ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2017 में ऑल इंडिया रैंक 17 हासिल कर देशभर में अपनी पहचान बना ली।</p>
<h3>साधारण परिवार, असाधारण हौसला</h3>
<p>नमामि बंसल का जन्म एक बेहद सामान्य परिवार में हुआ। आर्थिक संसाधन सीमित थे, लेकिन परिवार में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165291/ias-success-story-utensil-sellers-daughter-became-ias-officer-achieved"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-success-story-(17).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: कठिन हालात अगर हौसले को मजबूत कर दें, तो मंजिल खुद रास्ता बना लेती है। उत्तराखंड के ऋषिकेश की रहने वाली नमामि बंसल की कहानी कुछ ऐसी ही है। जिस परिवार में पिता बर्तन बेचकर घर चलाते थे, उसी घर से एक दिन IAS बनने का सपना निकला और मेहनत, अनुशासन व आत्मविश्वास के दम पर नमामि ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2017 में ऑल इंडिया रैंक 17 हासिल कर देशभर में अपनी पहचान बना ली।</p>
<h3>साधारण परिवार, असाधारण हौसला</h3>
<p>नमामि बंसल का जन्म एक बेहद सामान्य परिवार में हुआ। आर्थिक संसाधन सीमित थे, लेकिन परिवार में शिक्षा को सबसे बड़ी पूंजी माना जाता था। उनके माता-पिता ने कभी हालात को बेटी के सपनों के आड़े नहीं आने दिया। नमामि ने भी परिवार पर बोझ बनने के बजाय अपने सपनों को सच करने का संकल्प लिया।</p>
<h3>पढ़ाई में शुरू से रही अव्वल</h3>
<p>नमामि बचपन से ही पढ़ाई में तेज रहीं। उन्होंने 10वीं कक्षा में 92.4 प्रतिशत और 12वीं में 94.8 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद दिल्ली के प्रतिष्ठित लेडी श्रीराम कॉलेज से इकोनॉमिक्स ऑनर्स में ग्रेजुएशन किया। आगे चलकर उन्होंने ओपन यूनिवर्सिटी से एमए इकोनॉमिक्स किया, जहां वे टॉपर रहीं और राज्यपाल द्वारा गोल्ड मेडल से सम्मानित की गईं।</p>
<h3>UPSC का सफर आसान नहीं रहा</h3>
<p>शैक्षणिक उपलब्धियों के बावजूद UPSC की राह नमामि के लिए आसान नहीं थी। एमए पूरा करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की, लेकिन लगातार तीन बार असफलता का सामना करना पड़ा। कई बार हिम्मत डगमगाई, मगर उन्होंने हार नहीं मानी। बिना किसी कोचिंग के, पूरी तरह सेल्फ स्टडी पर भरोसा रखते हुए उन्होंने अपनी रणनीति में सुधार किया और गलतियों से सीखते हुए आगे बढ़ती रहीं।</p>
<h3>मेहनत लाई रंग, देश को मिला युवा IAS</h3>
<p>आखिरकार 2017 में नमामि बंसल की मेहनत रंग लाई और उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 17 हासिल कर ली। इस सफलता के साथ वे देश के टॉप IAS अधिकारियों में शामिल हो गईं। आज नमामि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को लगातार प्रेरित करती हैं और बताती हैं कि हालात चाहे जैसे भी हों, मजबूत इरादों के आगे कोई भी बाधा टिक नहीं सकती।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 10:15:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Success Story: 4 बार असफल होने के बाद भी पूजा रणावत ने नहीं मानी हार, पांचवें प्रयास में बनीं IRS अफसर </title>
                                    <description><![CDATA[<p>Success Story: कहते हैं कि मेहनत और धैर्य अगर साथ हों तो बड़ी से बड़ी मुश्किल भी आसान लगने लगती है। IRS ऑफिसर पूजा रणावत की UPSC यात्रा इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है। पूजा ने अपने सपने को कभी नहीं छोड़ा और लगातार असफलताओं के बाद भी डटी रहीं। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और आज वे आयकर विभाग में Deputy Commissioner के पद पर कार्यरत हैं।</p>
<p><strong>कौन हैं पूजा रणावत?</strong></p>
<p>पूजा रणावत मूल रूप से महाराष्ट्र के पुणे जिले के गोडवाड़ दुजाना गांव की रहने वाली हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव में की। बाद में वे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165155/success-story-even-after-failing-4-times-pooja-ranaut-did"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/irs-poojna-ranawat.jpg" alt=""></a><br /><p>Success Story: कहते हैं कि मेहनत और धैर्य अगर साथ हों तो बड़ी से बड़ी मुश्किल भी आसान लगने लगती है। IRS ऑफिसर पूजा रणावत की UPSC यात्रा इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है। पूजा ने अपने सपने को कभी नहीं छोड़ा और लगातार असफलताओं के बाद भी डटी रहीं। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और आज वे आयकर विभाग में Deputy Commissioner के पद पर कार्यरत हैं।</p>
<p><strong>कौन हैं पूजा रणावत?</strong></p>
<p>पूजा रणावत मूल रूप से महाराष्ट्र के पुणे जिले के गोडवाड़ दुजाना गांव की रहने वाली हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव में की। बाद में वे फर्ग्युसन कॉलेज, पुणे पहुंचीं और वहां से Psychology में ग्रेजुएशन किया। साधारण परिवार से आने के बावजूद उन्होंने साबित किया कि सपनों को पूरा करने के लिए सिर्फ हिम्मत और मेहनत काफी है।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/11.jpg" alt="11" width="963" height="960"></img></p>
<p><strong>UPSC की तैयारी</strong></p>
<p>कॉलेज के दिनों में ही पूजा रणावत ने UPSC की तैयारी शुरू कर दी थी। उन्हें पता था कि यह परीक्षा लंबी और कठिन होती है, इसलिए शुरुआत जल्दी करनी जरूरी थी। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने IGNOU से Political Science और International Relations में मास्टर डिग्री हासिल की।</p>
<p><strong>लगातार 4 बार फेल</strong></p>
<p>पूजा की UPSC यात्रा बिल्कुल आसान नहीं थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने 2013 से लेकर शुरुआती चार प्रयासों में प्रीलिम्स पास नहीं किए। असफलताओं के बावजूद पूजा ने खुद को संभाला और ठान लिया कि चाहे कितनी भी बार असफलता मिले, वह पीछे नहीं हटेंगी।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/irs-pooja-ranawat-upsc-rank-biography-age-instagram-husband-2023-11-c5e2c96254ab8598ed27b2f47ccab971.jpg" alt="IRS-Pooja-Ranawat-UPSC-Rank-Biography-Age-instagram-husband-2023-11-c5e2c96254ab8598ed27b2f47ccab971" width="1280" height="1280"></img></p>
<p><strong>पांचवें अटेम्प्ट में मिली सफलता</strong></p>
<p>साल 2017 में पांचवें प्रयास में पूजा रणावत ने पूरे भारत में 258वीं रैंक हासिल की। यह रैंक उन्हें Indian Revenue Service (IRS) में नियुक्त होने के लिए पर्याप्त थी। आज वे आयकर विभाग में Deputy Commissioner के रूप में कार्यरत हैं। उनका संघर्ष और सफलता लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Jan 2026 20:45:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: संघर्ष और मेहनत की मिसाल है IAS ममता यादव, दो बार पास की UPSC परीक्षा </title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: हर किसी की जिंदगी में सपने होते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो विपरीत हालातों से लड़कर अपने सपनों को साकार कर दिखाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है हरियाणा के छोटे से गांव बसई की रहने वाली ममता यादव की, जिन्होंने कड़ी मेहनत, धैर्य और लगातार प्रयासों के बल पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (</span><span class="cf1">IAS) </span><span class="cf0">में जगह बनाई। उनकी सफलता आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो साधारण परिवार से आते हैं लेकिन बड़े सपने देखते हैं।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">सीमित संसाधन, लेकिन सपने बड़े</span></strong></p>
<p><span class="cf0">ममता यादव का सफर आसान नहीं रहा। गांव</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164939/ias-success-story-ias-mamta-yadav-is-an-example-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/ias-mamta-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">IAS Success Story: हर किसी की जिंदगी में सपने होते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो विपरीत हालातों से लड़कर अपने सपनों को साकार कर दिखाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है हरियाणा के छोटे से गांव बसई की रहने वाली ममता यादव की, जिन्होंने कड़ी मेहनत, धैर्य और लगातार प्रयासों के बल पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (</span><span class="cf1">IAS) </span><span class="cf0">में जगह बनाई। उनकी सफलता आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो साधारण परिवार से आते हैं लेकिन बड़े सपने देखते हैं।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">सीमित संसाधन, लेकिन सपने बड़े</span></strong></p>
<p><span class="cf0">ममता यादव का सफर आसान नहीं रहा। गांव का माहौल, सीमित संसाधन और देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक यूपीएससी</span><span class="cf2">—</span><span class="cf0">इन सभी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहीं ममता के मन में कुछ बड़ा करने की चाह थी। उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें आईएएस अधिकारी बनना है और इसी लक्ष्य को लेकर उन्होंने लगातार चार साल तक यूपीएससी की तैयारी की।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">दिल्ली से हुई पढ़ाई, यहीं पक्का हुआ </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">बनने का सपना</span></strong></p>
<p><span class="cf0">ममता की शुरुआती शिक्षा दिल्ली के बलवंत राय मेहता स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। कॉलेज के दिनों में ही उनके मन में सिविल सेवा में जाने का सपना पूरी तरह स्पष्ट हो गया था, जिसके बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।</span></p>
<p><span class="cf0">साल 2019 में ममता ने पहली बार यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की। उस समय उनकी ऑल इंडिया रैंक 556 आई थी। यह एक बड़ी उपलब्धि जरूर थी, लेकिन इस रैंक पर उन्हें आईएएस सेवा नहीं मिल पाई। जहां कई उम्मीदवार इस मोड़ पर रुक जाते हैं, वहीं ममता ने इसे असफलता नहीं, बल्कि सीख माना और खुद को और बेहतर बनाने का फैसला किया।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">दूसरी कोशिश में मिली शानदार कामयाबी</span></strong></p>
<p><span class="cf0">अगले साल ममता ने दोबारा यूपीएससी परीक्षा दी। इस बार उनका आत्मविश्वास कहीं ज्यादा मजबूत था और तैयारी पहले से कहीं अधिक सटीक। उन्होंने पूरे समर्पण के साथ पढ़ाई की और हर दिन खुद को बेहतर बनाने पर काम किया। नतीजा यह रहा कि उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 5 हासिल की। यह न सिर्फ उनकी निजी जीत थी, बल्कि पूरे गांव और परिवार के लिए गर्व का क्षण बन गया। ममता अपने गांव की पहली </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">अधिकारी बनीं।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">कड़ी मेहनत और सही रणनीति को देती हैं सफलता का श्रेय</span></strong></p>
<p><span class="cf0">ममता यादव वर्तमान में </span><span class="cf1">AGMUT </span><span class="cf0">कैडर की </span><span class="cf1">IAS </span><span class="cf0">अधिकारी हैं। एक छोटे से गांव से निकलकर इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे कोई बाधा टिक नहीं सकती। ममता अपनी सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत, सही रणनीति और अनुशासन को देती हैं।</span></p>
<p><span class="cf0">उन्होंने बताया कि यूपीएससी की तैयारी के दौरान उन्होंने कोचिंग के साथ-साथ सेल्फ स्टडी पर भी बराबर ध्यान दिया। वह रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थीं, जबकि परीक्षा के नजदीक यह समय 10 से 12 घंटे तक पहुंच जाता था। ममता ने </span><span class="cf1">NCERT </span><span class="cf0">की किताबों को अपनी तैयारी की नींव बनाया और इसके साथ जरूरी स्टैंडर्ड बुक्स व नोट्स का सहारा लिया।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">युवाओं के लिए प्रेरणा बनी ममता यादव</span></strong></p>
<p><span class="cf0">ममता यादव की कहानी यह संदेश देती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो साधारण पृष्ठभूमि भी असाधारण सफलता की राह में बाधा नहीं बनती। उनकी सफलता आज देशभर के उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आईएएस बनने का सपना देखते हैं।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 12:02:05 +0530</pubDate>
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