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                <title>ias success story - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>ias success story RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>IAS Success Story: चार बार असफल होने के बावजूद भी नहीं मानी हार, पांचवें प्रयास में संजीता महापात्रा बनीं आईएएस अफसर </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: सफलता की राह अक्सर आसान नहीं होती, खासकर तब जब लक्ष्य देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को पास करना हो। कई बार असफल होने के बाद भी जो लोग अपने लक्ष्य से नहीं भटकते, वही अंत में सफलता हासिल करते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी आईएएस संजीता महापात्रा की है, जिन्होंने कई असफलताओं का सामना करने के बावजूद हार नहीं मानी और आखिरकार अपने पांचवें प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर आईएएस अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।</p>
<h3>ओडिशा के राउरकेला से शुरू हुआ सफर</h3>
<p>संजीता महापात्रा ओडिशा के राउरकेला</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172825/ias-success-story-despite-failing-four-times-did-not-give"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/ias-success-story-(32).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: सफलता की राह अक्सर आसान नहीं होती, खासकर तब जब लक्ष्य देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को पास करना हो। कई बार असफल होने के बाद भी जो लोग अपने लक्ष्य से नहीं भटकते, वही अंत में सफलता हासिल करते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी आईएएस संजीता महापात्रा की है, जिन्होंने कई असफलताओं का सामना करने के बावजूद हार नहीं मानी और आखिरकार अपने पांचवें प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर आईएएस अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।</p>
<h3>ओडिशा के राउरकेला से शुरू हुआ सफर</h3>
<p>संजीता महापात्रा ओडिशा के राउरकेला शहर की रहने वाली हैं। बचपन से ही उन्हें नई चीजें सीखने और पढ़ाई में आगे बढ़ने का शौक था। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Indian Institute of Technology Kanpur</span></span> में दाखिला लिया। इंजीनियरिंग के दौरान ही उन्होंने तय कर लिया था कि आगे चलकर उन्हें सिविल सेवा में जाना है और देश के लिए काम करना है।</p>
<h3>शुरुआती प्रयासों में मिली असफलता</h3>
<p>कॉलेज से ग्रेजुएशन के बाद संजीता ने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। हालांकि शुरुआत में उन्हें लगातार असफलताओं का सामना करना पड़ा। अपने पहले तीन प्रयासों में वह प्रीलिम्स परीक्षा भी पास नहीं कर सकीं। लगातार असफलता मिलने के कारण वह कुछ समय के लिए निराश हो गईं और बाद में एक कंपनी में नौकरी करने लगीं।</p>
<h3>नौकरी के साथ भी जारी रखी तैयारी</h3>
<p>नौकरी के दौरान भी संजीता ने यूपीएससी की तैयारी जारी रखी और चौथा प्रयास दिया, लेकिन इस बार भी उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने फैसला किया कि अब पूरी तरह से तैयारी पर ध्यान देना होगा। इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी और पूरी मेहनत के साथ तैयारी शुरू कर दी। खास बात यह है कि उन्होंने किसी कोचिंग का सहारा नहीं लिया और ऑनलाइन स्टडी मटेरियल, एनसीईआरटी की किताबों और अखबारों से पढ़ाई की।</p>
<h3>परिवार और ससुराल का मिला साथ</h3>
<p>यूपीएससी की तैयारी के दौरान ही संजीता की शादी हो गई थी, लेकिन उनके ससुराल वालों ने उन्हें पढ़ाई जारी रखने के लिए पूरा सहयोग दिया। उनके पति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Biswa Ranjan Mundari</span></span> <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Reserve Bank of India</span></span> में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं और उन्होंने भी संजीता की पूरी यात्रा में उनका हौसला बढ़ाया।</p>
<h3>पांचवें प्रयास में बनीं IAS</h3>
<p>लगातार मेहनत और धैर्य के बाद आखिरकार संजीता महापात्रा को सफलता मिल ही गई। उन्होंने साल 2019 में अपने पांचवें प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की और ऑल इंडिया रैंक 10 हासिल की। इस तरह एक इंजीनियर से आईएएस अधिकारी बनने का उनका सपना पूरा हो गया और उनकी कहानी आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 12:01:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: हरियाणा की बेटी ने रचा इतिहास, पहले ही प्रयास में UPSC क्रैक कर बनीं IAS</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा हर साल आयोजित की जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने में जहां अधिकतर अभ्यर्थियों को कई सालों की मेहनत और कई प्रयास लगाने पड़ते हैं, वहीं कुछ चुनिंदा उम्मीदवार ऐसे भी होते हैं जो पहले ही प्रयास में शानदार सफलता हासिल कर मिसाल कायम कर देते हैं। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है हरियाणा के भिवानी जिले के एक छोटे से गांव की रहने वाली आईएएस निशा ग्रेवाल की।</p>
<p>निशा ग्रेवाल ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172582/ias-success-story-haryanas-daughter-created-history-by-cracking-upsc"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-success-story-(23).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा हर साल आयोजित की जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने में जहां अधिकतर अभ्यर्थियों को कई सालों की मेहनत और कई प्रयास लगाने पड़ते हैं, वहीं कुछ चुनिंदा उम्मीदवार ऐसे भी होते हैं जो पहले ही प्रयास में शानदार सफलता हासिल कर मिसाल कायम कर देते हैं। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है हरियाणा के भिवानी जिले के एक छोटे से गांव की रहने वाली आईएएस निशा ग्रेवाल की।</p>
<p>निशा ग्रेवाल ने अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर ऑल इंडिया रैंक 51 हासिल की थी। खास बात यह रही कि जब उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की, तब उनकी उम्र महज 23 साल थी। कम उम्र में इतनी बड़ी सफलता ने उन्हें देशभर के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बना दिया।</p>
<p>निशा का सफर साधारण परिवार से शुरू हुआ। उनके पिता बिजली विभाग में कार्यरत हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। परिवार में शिक्षा और अनुशासन का माहौल रहा, लेकिन निशा को आगे बढ़ने की सबसे बड़ी प्रेरणा उनके दादा जी से मिली, जिन्होंने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया और पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया।</p>
<p>शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें तो निशा ग्रेवाल ने 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस में बीए ऑनर्स किया। स्नातक की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया और फिर पूरी एकाग्रता के साथ यूपीएससी की तैयारी में जुट गईं।</p>
<p>अपनी तैयारी के अनुभव साझा करते हुए निशा बताती हैं कि उन्होंने यूपीएससी की मजबूत नींव बनाने के लिए सबसे पहले NCERT की किताबों को अच्छे से पढ़ा। इसके साथ ही उन्होंने इंटरनेट पर उपलब्ध विश्वसनीय अध्ययन सामग्री और करंट अफेयर्स पर खास ध्यान दिया। उनका मानना है कि सही रणनीति, निरंतरता और आत्मविश्वास ही इस कठिन परीक्षा में सफलता की कुंजी है।</p>
<p>वर्तमान में आईएएस निशा ग्रेवाल उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) के पद पर तैनात हैं और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभा रही हैं। उनका कहना है कि यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्रों को धैर्य बनाए रखना चाहिए और हर दिन खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए।</p>
<p>पहले ही प्रयास में टॉप रैंक हासिल कर आईएएस बनने वाली निशा ग्रेवाल आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला रखते हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि सही दिशा, कड़ी मेहनत और मजबूत इरादों के साथ कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 11:15:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: हरियाणा की बेटी ने रचा इतिहास, पहले ही प्रयास में UPSC क्रैक कर बनीं IAS</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा हर साल आयोजित की जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने में जहां अधिकतर अभ्यर्थियों को कई सालों की मेहनत और कई प्रयास लगाने पड़ते हैं, वहीं कुछ चुनिंदा उम्मीदवार ऐसे भी होते हैं जो पहले ही प्रयास में शानदार सफलता हासिल कर मिसाल कायम कर देते हैं। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है हरियाणा के भिवानी जिले के एक छोटे से गांव की रहने वाली आईएएस निशा ग्रेवाल की।</p>
<p>निशा ग्रेवाल ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168209/ias-success-story-haryanas-daughter-created-history-by-cracking-upsc"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-success-story-(23).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा हर साल आयोजित की जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने में जहां अधिकतर अभ्यर्थियों को कई सालों की मेहनत और कई प्रयास लगाने पड़ते हैं, वहीं कुछ चुनिंदा उम्मीदवार ऐसे भी होते हैं जो पहले ही प्रयास में शानदार सफलता हासिल कर मिसाल कायम कर देते हैं। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है हरियाणा के भिवानी जिले के एक छोटे से गांव की रहने वाली आईएएस निशा ग्रेवाल की।</p>
<p>निशा ग्रेवाल ने अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर ऑल इंडिया रैंक 51 हासिल की थी। खास बात यह रही कि जब उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की, तब उनकी उम्र महज 23 साल थी। कम उम्र में इतनी बड़ी सफलता ने उन्हें देशभर के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बना दिया।</p>
<p>निशा का सफर साधारण परिवार से शुरू हुआ। उनके पिता बिजली विभाग में कार्यरत हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। परिवार में शिक्षा और अनुशासन का माहौल रहा, लेकिन निशा को आगे बढ़ने की सबसे बड़ी प्रेरणा उनके दादा जी से मिली, जिन्होंने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया और पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया।</p>
<p>शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें तो निशा ग्रेवाल ने 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस में बीए ऑनर्स किया। स्नातक की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया और फिर पूरी एकाग्रता के साथ यूपीएससी की तैयारी में जुट गईं।</p>
<p>अपनी तैयारी के अनुभव साझा करते हुए निशा बताती हैं कि उन्होंने यूपीएससी की मजबूत नींव बनाने के लिए सबसे पहले NCERT की किताबों को अच्छे से पढ़ा। इसके साथ ही उन्होंने इंटरनेट पर उपलब्ध विश्वसनीय अध्ययन सामग्री और करंट अफेयर्स पर खास ध्यान दिया। उनका मानना है कि सही रणनीति, निरंतरता और आत्मविश्वास ही इस कठिन परीक्षा में सफलता की कुंजी है।</p>
<p>वर्तमान में आईएएस निशा ग्रेवाल उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) के पद पर तैनात हैं और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभा रही हैं। उनका कहना है कि यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्रों को धैर्य बनाए रखना चाहिए और हर दिन खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए।</p>
<p>पहले ही प्रयास में टॉप रैंक हासिल कर आईएएस बनने वाली निशा ग्रेवाल आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला रखते हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि सही दिशा, कड़ी मेहनत और मजबूत इरादों के साथ कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 11:22:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: चार बार असफलता के बाद भी नहीं हारीं तृप्ति कल्हंस, 5वें प्रयास में बनीं IAS अफसर </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए सिर्फ तेज दिमाग ही नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और मजबूत इरादों की भी जरूरत होती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है तृप्ति कल्हंस की, जिन्होंने लगातार चार असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी और अपने पांचवें प्रयास में IAS अधिकारी बनने का सपना साकार किया।</p>
<p>तृप्ति की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो एक-दो बार की असफलता के बाद खुद पर विश्वास खोने लगते हैं।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167981/ias-success-story-trupti-kalhans-did-not-give-up-even"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-success-story-(22).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए सिर्फ तेज दिमाग ही नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और मजबूत इरादों की भी जरूरत होती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है तृप्ति कल्हंस की, जिन्होंने लगातार चार असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी और अपने पांचवें प्रयास में IAS अधिकारी बनने का सपना साकार किया।</p>
<p>तृप्ति की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो एक-दो बार की असफलता के बाद खुद पर विश्वास खोने लगते हैं।</p>
<h5>दिल्ली यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ UPSC का सफर</h5>
<p>तृप्ति कल्हंस ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। दिल्ली में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रशासनिक सेवाओं में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह से यूपीएससी की तैयारी के लिए समर्पित कर दिया।</p>
<p>हालांकि, उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि यह सफर आसान नहीं होगा और उन्हें कई बार कठिन दौर से गुजरना पड़ेगा।</p>
<p>UPSC की तैयारी के दौरान तृप्ति को लगातार चार बार असफलता का सामना करना पड़ा। कभी वह प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में नहीं निकल पाईं, तो कभी मुख्य परीक्षा (Mains) में अटक गईं। चार प्रयासों की नाकामी किसी भी उम्मीदवार को मानसिक रूप से तोड़ सकती है, लेकिन तृप्ति ने हर हार को सीख के रूप में लिया।</p>
<p>उन्होंने अपनी तैयारी की रणनीति में बदलाव किया, आंसर राइटिंग प्रैक्टिस पर ज्यादा ध्यान दिया और अपने वैकल्पिक विषय को पहले से ज्यादा मजबूत बनाया। तृप्ति का मानना है कि यूपीएससी की तैयारी में खुद पर भरोसा बनाए रखना सबसे अहम होता है।</p>
<h5>पांचवें प्रयास में हासिल की बड़ी कामयाबी</h5>
<p>लगातार मेहनत और आत्मविश्लेषण के बाद तृप्ति कल्हंस को आखिरकार सफलता मिली। उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास करते हुए 199वीं रैंक हासिल की। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सफलता की दिशा दिखाने वाला एक पड़ाव होती है।</p>
<p>उनकी सफलता की खबर मिलते ही परिवार और शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ गई। आज तृप्ति की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को छोड़ने से इनकार करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/167981/ias-success-story-trupti-kalhans-did-not-give-up-even</link>
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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 21:31:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: चार बार असफलता के बाद भी नहीं हारीं तृप्ति कल्हंस, 5वें प्रयास में बनीं IAS अफसर </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए सिर्फ तेज दिमाग ही नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और मजबूत इरादों की भी जरूरत होती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है तृप्ति कल्हंस की, जिन्होंने लगातार चार असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी और अपने पांचवें प्रयास में IAS अधिकारी बनने का सपना साकार किया।</p>
<p>तृप्ति की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो एक-दो बार की असफलता के बाद खुद पर विश्वास खोने लगते हैं।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166884/ias-success-story-trupti-kalhans-did-not-give-up-even"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-success-story-(22).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए सिर्फ तेज दिमाग ही नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और मजबूत इरादों की भी जरूरत होती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है तृप्ति कल्हंस की, जिन्होंने लगातार चार असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी और अपने पांचवें प्रयास में IAS अधिकारी बनने का सपना साकार किया।</p>
<p>तृप्ति की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो एक-दो बार की असफलता के बाद खुद पर विश्वास खोने लगते हैं।</p>
<h5>दिल्ली यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ UPSC का सफर</h5>
<p>तृप्ति कल्हंस ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। दिल्ली में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रशासनिक सेवाओं में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह से यूपीएससी की तैयारी के लिए समर्पित कर दिया।</p>
<p>हालांकि, उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि यह सफर आसान नहीं होगा और उन्हें कई बार कठिन दौर से गुजरना पड़ेगा।</p>
<p>UPSC की तैयारी के दौरान तृप्ति को लगातार चार बार असफलता का सामना करना पड़ा। कभी वह प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में नहीं निकल पाईं, तो कभी मुख्य परीक्षा (Mains) में अटक गईं। चार प्रयासों की नाकामी किसी भी उम्मीदवार को मानसिक रूप से तोड़ सकती है, लेकिन तृप्ति ने हर हार को सीख के रूप में लिया।</p>
<p>उन्होंने अपनी तैयारी की रणनीति में बदलाव किया, आंसर राइटिंग प्रैक्टिस पर ज्यादा ध्यान दिया और अपने वैकल्पिक विषय को पहले से ज्यादा मजबूत बनाया। तृप्ति का मानना है कि यूपीएससी की तैयारी में खुद पर भरोसा बनाए रखना सबसे अहम होता है।</p>
<h5>पांचवें प्रयास में हासिल की बड़ी कामयाबी</h5>
<p>लगातार मेहनत और आत्मविश्लेषण के बाद तृप्ति कल्हंस को आखिरकार सफलता मिली। उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास करते हुए 199वीं रैंक हासिल की। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सफलता की दिशा दिखाने वाला एक पड़ाव होती है।</p>
<p>उनकी सफलता की खबर मिलते ही परिवार और शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ गई। आज तृप्ति की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को छोड़ने से इनकार करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Jan 2026 14:24:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: हरियाणा की बेटी ने रचा इतिहास, पहले ही प्रयास में UPSC क्रैक कर बनीं IAS</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा हर साल आयोजित की जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने में जहां अधिकतर अभ्यर्थियों को कई सालों की मेहनत और कई प्रयास लगाने पड़ते हैं, वहीं कुछ चुनिंदा उम्मीदवार ऐसे भी होते हैं जो पहले ही प्रयास में शानदार सफलता हासिल कर मिसाल कायम कर देते हैं। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है हरियाणा के भिवानी जिले के एक छोटे से गांव की रहने वाली आईएएस निशा ग्रेवाल की।</p>
<p>निशा ग्रेवाल ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166809/ias-success-story-haryanas-daughter-created-history-by-cracking-upsc"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-success-story-(23).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा हर साल आयोजित की जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने में जहां अधिकतर अभ्यर्थियों को कई सालों की मेहनत और कई प्रयास लगाने पड़ते हैं, वहीं कुछ चुनिंदा उम्मीदवार ऐसे भी होते हैं जो पहले ही प्रयास में शानदार सफलता हासिल कर मिसाल कायम कर देते हैं। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है हरियाणा के भिवानी जिले के एक छोटे से गांव की रहने वाली आईएएस निशा ग्रेवाल की।</p>
<p>निशा ग्रेवाल ने अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर ऑल इंडिया रैंक 51 हासिल की थी। खास बात यह रही कि जब उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की, तब उनकी उम्र महज 23 साल थी। कम उम्र में इतनी बड़ी सफलता ने उन्हें देशभर के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बना दिया।</p>
<p>निशा का सफर साधारण परिवार से शुरू हुआ। उनके पिता बिजली विभाग में कार्यरत हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। परिवार में शिक्षा और अनुशासन का माहौल रहा, लेकिन निशा को आगे बढ़ने की सबसे बड़ी प्रेरणा उनके दादा जी से मिली, जिन्होंने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया और पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया।</p>
<p>शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें तो निशा ग्रेवाल ने 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस में बीए ऑनर्स किया। स्नातक की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया और फिर पूरी एकाग्रता के साथ यूपीएससी की तैयारी में जुट गईं।</p>
<p>अपनी तैयारी के अनुभव साझा करते हुए निशा बताती हैं कि उन्होंने यूपीएससी की मजबूत नींव बनाने के लिए सबसे पहले NCERT की किताबों को अच्छे से पढ़ा। इसके साथ ही उन्होंने इंटरनेट पर उपलब्ध विश्वसनीय अध्ययन सामग्री और करंट अफेयर्स पर खास ध्यान दिया। उनका मानना है कि सही रणनीति, निरंतरता और आत्मविश्वास ही इस कठिन परीक्षा में सफलता की कुंजी है।</p>
<p>वर्तमान में आईएएस निशा ग्रेवाल उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) के पद पर तैनात हैं और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभा रही हैं। उनका कहना है कि यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्रों को धैर्य बनाए रखना चाहिए और हर दिन खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए।</p>
<p>पहले ही प्रयास में टॉप रैंक हासिल कर आईएएस बनने वाली निशा ग्रेवाल आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला रखते हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि सही दिशा, कड़ी मेहनत और मजबूत इरादों के साथ कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 14:00:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: ऑटो चालक का बेटा बना IAS अफसर, 21 साल की उम्र में क्रैक किया UPSC एग्जाम</title>
                                    <description><![CDATA[<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/ias-success-story-(6).jpg" alt="ias success story (6)" width="1200" height="790" /></p>
<p>महाराष्ट्र के जालना गांव में जन्में अंसार शेख भारत के सबसे युवा IAS अफसर थे। अंसार शेख के पिता एक ऑटो चालक है। अंसार शेख का बचपन बहुत ही मुश्किलों में बीता। लेकिन इन परेशानियों के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और यूपीएससी परीक्षा पास कर आईएएस बन गए।</p>
<p><strong>21 वर्ष की आयु में बने सबसे युवा IAS अधिकारी</strong></p>
<p>अंसार ने पहले ही अटेंप्ट में 2015 में UPSC फाइनल रिजल्ट में 361वीं रैंक हासिल कर देश के सबसे युवा अफसर बनने का खिताब अपने नाम किया था। उन्होंने 21 वर्ष की आयु में यूपीएससी परीक्षा पास कर सफलता हासिल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166384/ias-success-story-auto-drivers-son-became-ias-officer-cracked"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/ias-success-story-(6).jpg" alt=""></a><br /><p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/ias-success-story-(6).jpg" alt="ias success story (6)" width="1366" height="790"></img></p>
<p>महाराष्ट्र के जालना गांव में जन्में अंसार शेख भारत के सबसे युवा IAS अफसर थे। अंसार शेख के पिता एक ऑटो चालक है। अंसार शेख का बचपन बहुत ही मुश्किलों में बीता। लेकिन इन परेशानियों के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और यूपीएससी परीक्षा पास कर आईएएस बन गए।</p>
<p><strong>21 वर्ष की आयु में बने सबसे युवा IAS अधिकारी</strong></p>
<p>अंसार ने पहले ही अटेंप्ट में 2015 में UPSC फाइनल रिजल्ट में 361वीं रैंक हासिल कर देश के सबसे युवा अफसर बनने का खिताब अपने नाम किया था। उन्होंने 21 वर्ष की आयु में यूपीएससी परीक्षा पास कर सफलता हासिल की थी।</p>
<p><strong>यूपीएससी के लिए 12 से 13 घंटे पढ़ाई की</strong></p>
<p>अंसार शेख ने पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने 73 प्रतिशत नंबर हासिल किए। अंसार शेख बताते हैं कि उन्होंने यूपीएससी के लिए रोजाना 12 से 13 घंटे पढ़ाई की थी।</p>
<p><strong>सोशल मीडिया पर हैं काफी पॉपुलर</strong></p>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वर्तमान में, आईएएस ऑफिसर अंसार शेख पश्चिम बंगाल के कूच बिहार में एडीएम के रूप में कार्यरत हैं। वे सोशल पर भी बहुत लोकप्रिय हैं और उनके इंस्टाग्राम पर 3.43 लाख फॉलोअर्स हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/166384/ias-success-story-auto-drivers-son-became-ias-officer-cracked</link>
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                <pubDate>Sat, 17 Jan 2026 10:54:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: चार बार असफलता के बाद भी नहीं हारीं तृप्ति कल्हंस, 5वें प्रयास में बनीं IAS अफसर </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए सिर्फ तेज दिमाग ही नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और मजबूत इरादों की भी जरूरत होती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है तृप्ति कल्हंस की, जिन्होंने लगातार चार असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी और अपने पांचवें प्रयास में IAS अधिकारी बनने का सपना साकार किया।</p><p>तृप्ति की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो एक-दो बार की असफलता के बाद खुद पर विश्वास खोने लगते हैं।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166083/ias-success-story-trupti-kalhans-did-not-give-up-even"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-success-story-(22).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए सिर्फ तेज दिमाग ही नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और मजबूत इरादों की भी जरूरत होती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है तृप्ति कल्हंस की, जिन्होंने लगातार चार असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी और अपने पांचवें प्रयास में IAS अधिकारी बनने का सपना साकार किया।</p><p>तृप्ति की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो एक-दो बार की असफलता के बाद खुद पर विश्वास खोने लगते हैं।</p><h5>दिल्ली यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ UPSC का सफर</h5><p>तृप्ति कल्हंस ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। दिल्ली में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रशासनिक सेवाओं में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह से यूपीएससी की तैयारी के लिए समर्पित कर दिया।</p><p>हालांकि, उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि यह सफर आसान नहीं होगा और उन्हें कई बार कठिन दौर से गुजरना पड़ेगा।</p><p>UPSC की तैयारी के दौरान तृप्ति को लगातार चार बार असफलता का सामना करना पड़ा। कभी वह प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में नहीं निकल पाईं, तो कभी मुख्य परीक्षा (Mains) में अटक गईं। चार प्रयासों की नाकामी किसी भी उम्मीदवार को मानसिक रूप से तोड़ सकती है, लेकिन तृप्ति ने हर हार को सीख के रूप में लिया।</p><p>उन्होंने अपनी तैयारी की रणनीति में बदलाव किया, आंसर राइटिंग प्रैक्टिस पर ज्यादा ध्यान दिया और अपने वैकल्पिक विषय को पहले से ज्यादा मजबूत बनाया। तृप्ति का मानना है कि यूपीएससी की तैयारी में खुद पर भरोसा बनाए रखना सबसे अहम होता है।</p><h5>पांचवें प्रयास में हासिल की बड़ी कामयाबी</h5><p>लगातार मेहनत और आत्मविश्लेषण के बाद तृप्ति कल्हंस को आखिरकार सफलता मिली। उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास करते हुए 199वीं रैंक हासिल की। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सफलता की दिशा दिखाने वाला एक पड़ाव होती है।</p><p>उनकी सफलता की खबर मिलते ही परिवार और शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ गई। आज तृप्ति की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को छोड़ने से इनकार करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jan 2026 13:34:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: सेट करियर छोड़कर UPSC चुना, हरियाणा की बेटी डॉ. अंकुर लाठर बनीं IAS</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: सेट करियर, सुरक्षित भविष्य और आरामदायक जिंदगी—सब कुछ होते हुए भी हरियाणा की एक बेटी ने देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC का रास्ता चुना। यह फैसला आसान नहीं था। पहले प्रयास में असफलता मिली, लेकिन हार मानना उनके स्वभाव में नहीं था। यही जिद, जुनून और आत्मविश्वास उन्हें IAS बनने तक ले गया। हम बात कर रहे हैं हरियाणा के हिसार जिले की रहने वाली IAS डॉ. अंकुर लाठर की।</p>
<h3>गांव से अफसर बनने तक का सफर</h3>
<p>डॉ. अंकुर लाठर हिसार जिले के छोटे से गांव राजगढ़ से ताल्लुक रखती हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165918/ias-success-story-haryanas-daughter-dr-ankur-lather-chose-upsc"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-ankur-lather.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: सेट करियर, सुरक्षित भविष्य और आरामदायक जिंदगी—सब कुछ होते हुए भी हरियाणा की एक बेटी ने देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC का रास्ता चुना। यह फैसला आसान नहीं था। पहले प्रयास में असफलता मिली, लेकिन हार मानना उनके स्वभाव में नहीं था। यही जिद, जुनून और आत्मविश्वास उन्हें IAS बनने तक ले गया। हम बात कर रहे हैं हरियाणा के हिसार जिले की रहने वाली IAS डॉ. अंकुर लाठर की।</p>
<h3>गांव से अफसर बनने तक का सफर</h3>
<p>डॉ. अंकुर लाठर हिसार जिले के छोटे से गांव राजगढ़ से ताल्लुक रखती हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कड़ी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया। इस पूरे सफर में परिवार का भरपूर सहयोग उन्हें मिलता रहा, जिसने उनके हौसले को मजबूत बनाए रखा।</p>
<h3>पिता से मिली डॉक्टर बनने की प्रेरणा</h3>
<p>अंकुर लाठर के पिता करण सिंह लाठर पेशे से पशु चिकित्सक (Veterinary Doctor) हैं। बचपन से ही उन्होंने अपने पिता को सेवा भाव से काम करते देखा, जिससे उन्हें भी डॉक्टर बनने की प्रेरणा मिली। यही पारिवारिक संस्कार आगे चलकर देश सेवा के जुनून में बदल गए।</p>
<h3>पढ़ाई में हमेशा अव्वल, AIIMS तक का सफर</h3>
<p>अंकुर लाठर शुरू से ही पढ़ाई में तेज थीं। 10वीं में 94% अंक, 12वीं में 91% अंक प्राप्त किए थे। </p>
<p>शुरुआती पढ़ाई गांव में करने के बाद उन्होंने हिसार के एक CBSE स्कूल से आगे की पढ़ाई की। इसके बाद MBBS में दाखिले के लिए एंट्रेंस एग्जाम पास कर उन्होंने AIIMS में प्रवेश लिया, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।</p>
<h3>मेडिकल करियर छोड़ चुना UPSC</h3>
<p>AIIMS से MBBS करने के बाद अंकुर लाठर के सामने एक सुरक्षित और शानदार मेडिकल करियर का रास्ता खुला था। लेकिन उनका सपना सिर्फ डॉक्टर बनना नहीं था, बल्कि प्रशासनिक सेवा के जरिए देश की सेवा करना था। इसी सोच के साथ उन्होंने वर्ष 2013 में UPSC की तैयारी शुरू की। मेडिकल बैकग्राउंड होने के कारण उन्होंने Medical Science को अपना ऑप्शनल विषय चुना।</p>
<h3>पहली असफलता, फिर ऐतिहासिक सफलता</h3>
<p>UPSC का पहला प्रयास उनके लिए सफल नहीं रहा। लेकिन असफलता ने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि और मजबूत बना दिया। लगातार मेहनत, आत्मविश्लेषण और सही रणनीति के दम पर उन्होंने UPSC CSE 2016 में ऑल इंडिया रैंक 77 हासिल कर ली और IAS अधिकारी बनीं।</p>
<h3>युवाओं के लिए प्रेरणा</h3>
<p>IAS डॉ. अंकुर लाठर की कहानी उन युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है, जो असफलता से डर जाते हैं या सुरक्षित रास्ता छोड़ने का साहस नहीं कर पाते। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य बड़ा हो और इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 19:21:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: अंकिता चौधरी ने मां के सपने को सच कर रचा इतिहास, दूसरे प्रयास में बनीं IAS अफसर </title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो मंजिल कोई भी क्यों न हो, उसे पाया जा सकता है। इस कहावत को सच कर दिखाया है हरियाणा की आईएएस अफसर अंकिता चौधरी ने। कभी जिंदगी में एक ऐसा दौर आया जिसने उन्हें तोड़कर रख दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। गिरकर भी उठीं और ऐसा मुकाम पाया कि अब हर युवा के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।</p>
<p><strong>दिल्ली यूनिवर्सिटी से की पढ़ाई</strong></p>
<p>अंकिता चौधरी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया। बचपन से ही वे पढ़ाई में बेहद होशियार थीं और उनका सपना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165769/ias-success-story-ankita-chaudhary-created-history-by-making-her"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/ias-ankita-chaudhary.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो मंजिल कोई भी क्यों न हो, उसे पाया जा सकता है। इस कहावत को सच कर दिखाया है हरियाणा की आईएएस अफसर अंकिता चौधरी ने। कभी जिंदगी में एक ऐसा दौर आया जिसने उन्हें तोड़कर रख दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। गिरकर भी उठीं और ऐसा मुकाम पाया कि अब हर युवा के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।</p>
<p><strong>दिल्ली यूनिवर्सिटी से की पढ़ाई</strong></p>
<p>अंकिता चौधरी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया। बचपन से ही वे पढ़ाई में बेहद होशियार थीं और उनका सपना था कि वे आईएएस अफसर बनकर देश की सेवा करें। ग्रेजुएशन पूरी करते ही उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।</p>
<p><img src="https://static.clmbtech.com/c1e/client/128336/uploaded/3a16f671cbfadb65fc8e22a5f123666c.jpg" alt="ias ankita choudhary" width="900" height="473"></img></p>
<p><strong>2017 में टूटा दुखों का पहाड़</strong></p>
<p>साल 2017 अंकिता की जिंदगी का सबसे कठिन साल साबित हुआ। जब वे दिन-रात यूपीएससी की तैयारी में जुटी थीं, तभी उनकी मां का निधन हो गया। मां ही उनकी सबसे बड़ी ताकत थीं। यह सदमा इतना गहरा था कि अंकिता अंदर से टूट गईं। उसी साल वे परीक्षा में असफल रहीं, लेकिन उनके पिता ने हिम्मत नहीं टूटने दी।</p>
<p><strong>पिता ने बढ़ाया हौसला</strong></p>
<p>अंकिता के पिता ने उन्हें संभाला और याद दिलाया कि उनकी मां का सपना था कि अंकिता एक आईएएस अफसर बने। पिता के इन शब्दों ने अंकिता को फिर से ऊर्जा दी। उन्होंने खुद से वादा किया कि अब मां का सपना किसी भी हाल में पूरा करना है।</p>
<p><img src="https://static.clmbtech.com/c1e/client/128336/uploaded/be8059f04c5f377f356993314f33d2b7.jpg" alt="ias ankita choudhary" width="900" height="506"></img></p>
<p><strong>2018 में हासिल की ऑल इंडिया 18वीं रैंक</strong></p>
<p>अगले ही साल, यानी 2018 में, अंकिता ने दोबारा यूपीएससी परीक्षा दी और इस बार उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 18 हासिल कर इतिहास रच दिया। उनकी सफलता ने न सिर्फ परिवार को गर्व से भर दिया, बल्कि यह साबित कर दिया कि कठिनाइयाँ सफलता की राह में केवल परीक्षा लेती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 11:16:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: कक्षा 6 में फेल, बिना कोचिंग के बनी IAS अफसर, पढ़ें रुक्मणी रियार की सक्सेस स्टोरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: भारत की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाने वाली UPSC सिविल सेवा परीक्षा तीन चरणों – प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू – में आयोजित होती है। हर साल लाखों उम्मीदवार प्रीलिम्स देते हैं, लेकिन मेंस तक पहुँचने वाले कुछ हजार ही होते हैं। इंटरव्यू तक पहुँचने वालों की संख्या और भी कम हो जाती है। इसी कठिनाई के बावजूद पंजाब की रुक्मणी रियार ने अपनी मेहनत और लगन से ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल कर IAS बनने का सपना पूरा किया।</p>
<p><strong>शुरुआत मुश्किलों भरी: कक्षा 6 में फेल</strong></p>
<p>गुरदासपुर की रहने वाली रुक्मणी रियार बचपन में पढ़ाई में कमजोर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165716/ias-success-story-read-the-success-story-of-rukmani-riar"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/ias-sukmani-riar.jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: भारत की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाने वाली UPSC सिविल सेवा परीक्षा तीन चरणों – प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू – में आयोजित होती है। हर साल लाखों उम्मीदवार प्रीलिम्स देते हैं, लेकिन मेंस तक पहुँचने वाले कुछ हजार ही होते हैं। इंटरव्यू तक पहुँचने वालों की संख्या और भी कम हो जाती है। इसी कठिनाई के बावजूद पंजाब की रुक्मणी रियार ने अपनी मेहनत और लगन से ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल कर IAS बनने का सपना पूरा किया।</p>
<p><strong>शुरुआत मुश्किलों भरी: कक्षा 6 में फेल</strong></p>
<p>गुरदासपुर की रहने वाली रुक्मणी रियार बचपन में पढ़ाई में कमजोर थीं। कक्षा 6 में फेल हो जाने के कारण उन्हें कक्षा 7 में प्रवेश पाने में दो साल लग गए। उनके पिता बलजिंदर सिंह रियार, जो रिटायर्ड डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी हैं, और माता, जो गृहिणी हैं, इस स्थिति को लेकर चिंतित थे।</p>
<p>इसके बावजूद रुक्मणी ने हार नहीं मानी और डलहौजी के सेक्रेड हार्ट स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी से सोशल साइंसेज में ग्रेजुएशन किया। पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए उन्होंने मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस से सोशल साइंस में डिग्री हासिल की और गोल्ड मेडल भी जीता।</p>
<p><strong>बिना कोचिंग के UPSC टॉपर</strong></p>
<p>पोस्ट ग्रेजुएशन के दौरान रुक्मणी ने मैसूर और मुंबई में NGO में इंटर्नशिप की। वहीं उन्होंने यूपीएससी की तैयारी का निर्णय लिया। किसी कोचिंग का सहारा लिए बिना उन्होंने खुद की मेहनत और योजना से तैयारी की।</p>
<p>साल 2011 की UPSC सिविल सेवा परीक्षा में रुक्मणी ने ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल कर IAS बनने का गौरव पाया।</p>
<p><strong>शादी और निजी जीवन</strong></p>
<p>UPSC में सफलता हासिल करने के बाद रुक्मणी रियार ने IAS सिद्धार्थ सिहाग से शादी की।</p>
<p><strong>तैयारी की स्ट्रैटेजी</strong></p>
<p>रुक्मणी ने इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने कक्षा 6 से 12 तक की NCERT किताबों पर भरोसा किया और रोजाना अखबार और मैगजीन पढ़ीं। यह दोनों चीजें UPSC क्रैक करने के लिए बेहद जरूरी हैं। इसके अलावा, उन्होंने मॉक टेस्ट और पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र हल कर परीक्षा की रणनीति तैयार की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/165716/ias-success-story-read-the-success-story-of-rukmani-riar</link>
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                <pubDate>Sun, 11 Jan 2026 11:48:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IAS Success Story: ऑटो चालक का बेटा बना IAS अफसर, 21 साल की उम्र में क्रैक किया UPSC एग्जाम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: यूपीएससी को देश की सबसे कठिन परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। आज हम आपको ऐसे आईएएस अफसर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने बहुत संघर्ष कर इस परीक्षा को पास कर सफलता हासिल की है। आइए जानते हैं इस आईएएस अफसर के बारे में।</p>
<p>महाराष्ट्र के जालना गांव में जन्में अंसार शेख भारत के सबसे युवा IAS अफसर थे। अंसार शेख के पिता एक ऑटो चालक है। अंसार शेख का बचपन बहुत ही मुश्किलों में बीता। लेकिन इन परेशानियों के बाद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165626/ias-success-story-auto-drivers-son-became-ias-officer-cracked"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/ias-success-story-(6).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: यूपीएससी को देश की सबसे कठिन परीक्षा में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। आज हम आपको ऐसे आईएएस अफसर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने बहुत संघर्ष कर इस परीक्षा को पास कर सफलता हासिल की है। आइए जानते हैं इस आईएएस अफसर के बारे में।</p>
<p>महाराष्ट्र के जालना गांव में जन्में अंसार शेख भारत के सबसे युवा IAS अफसर थे। अंसार शेख के पिता एक ऑटो चालक है। अंसार शेख का बचपन बहुत ही मुश्किलों में बीता। लेकिन इन परेशानियों के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और यूपीएससी परीक्षा पास कर आईएएस बन गए।</p>
<p><strong>21 वर्ष की आयु में बने सबसे युवा IAS अधिकारी</strong></p>
<p>अंसार ने पहले ही अटेंप्ट में 2015 में UPSC फाइनल रिजल्ट में 361वीं रैंक हासिल कर देश के सबसे युवा अफसर बनने का खिताब अपने नाम किया था। उन्होंने 21 वर्ष की आयु में यूपीएससी परीक्षा पास कर सफलता हासिल की थी।</p>
<p><strong>यूपीएससी के लिए 12 से 13 घंटे पढ़ाई की</strong></p>
<p>अंसार शेख ने पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने 73 प्रतिशत नंबर हासिल किए। अंसार शेख बताते हैं कि उन्होंने यूपीएससी के लिए रोजाना 12 से 13 घंटे पढ़ाई की थी।</p>
<p><strong>सोशल मीडिया पर हैं काफी पॉपुलर</strong></p>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वर्तमान में, आईएएस ऑफिसर अंसार शेख पश्चिम बंगाल के कूच बिहार में एडीएम के रूप में कार्यरत हैं। वे सोशल पर भी बहुत लोकप्रिय हैं और उनके इंस्टाग्राम पर 3.43 लाख फॉलोअर्स हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/165626/ias-success-story-auto-drivers-son-became-ias-officer-cracked</link>
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                <pubDate>Sat, 10 Jan 2026 11:11:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>

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