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                <title>farmers news - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>farmers news RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव परिवेश में हमारे किसान और कृषि पर संकट बढ़  रहा है, कृषि वैज्ञानिक - प्रोफेसर प्यारेलाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी।</p><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> हिमाचल प्रदेश में राजकीय कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे डॉक्टर अशोक कुमार प्यारेलाल ने कहा है कि मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव परिवेश में हमारे किसान और किसी  पर संकट बढ़ रहा है। लगातार जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के मध्य नजर कृषि पर इसका क्या असर पड़ेगा इस संबंध में उन्होंने इलाहाबाद ब्यूरो के प्रमुख दयाशंकर त्रिपाठी से विस्तार से बातचीत की जिस पर उन्होंने कृषि पर पड़ने वाले दुष्परिणाम के कई कारण बताएं।उन्होंने कहा की जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण वनों की कटाई और जैव विविधता का ह्रास जैसी पर्यावरणीय चुनौतियां अब दूर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180800/climate-change-water-shortage-soil-erosion-the-crisis-on-our"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260605-wa0071.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी।</p><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> हिमाचल प्रदेश में राजकीय कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे डॉक्टर अशोक कुमार प्यारेलाल ने कहा है कि मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव परिवेश में हमारे किसान और किसी  पर संकट बढ़ रहा है। लगातार जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के मध्य नजर कृषि पर इसका क्या असर पड़ेगा इस संबंध में उन्होंने इलाहाबाद ब्यूरो के प्रमुख दयाशंकर त्रिपाठी से विस्तार से बातचीत की जिस पर उन्होंने कृषि पर पड़ने वाले दुष्परिणाम के कई कारण बताएं।उन्होंने कहा की जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण वनों की कटाई और जैव विविधता का ह्रास जैसी पर्यावरणीय चुनौतियां अब दूर की समस्या नहीं रही यह सब सीधे हमारे दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही हैंजैसे अत्यधिक मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव और घटती वायु गुणवत्ता।ऐसे परिवेश में हमारे किसान और कृषि पर संकट बढता जा रहा है।</p><p style="text-align:justify;">मौसम के बदलते तेवर से  किसानों बागवानो को  जहां बहुत अधिक लाभ  नहीं होने वाला है। वहीं दूसरी तरफ इस साल का मानसून आम जनता को  भी  परेशान करेगा। एक अनुमान के अनुसार इस साल सामान्य से कम वर्षा होगी और साथ में अल नीनो का प्रभाव  बहुत  ख़तरनाक होगा सूखा और गर्मी   बढ़ेगी जिसके कारण खरीफ की फसलों का उत्पादन काम होगा विशेष तौर पर उन क्षेत्रों में जहां फसलों की सिंचाई की सुविधा नही है वहां पर बिजाई देर से होगी।और उत्पादन भी कम होगा।और देश में महंगाई बढ़ेगी । आमदनी पिछले साल की अपेक्षा इस साल कम हहोगी।<br /></p><p style="text-align:justify;">आज विश्व का हर देश ईरान इजरायल अमेरिका युद्ध से भयंकर महंगाई के मोहाने पर खड़ा हो गया है। परन्तु युद्ध लड़ने वालों को मौसम मानसून  महंगाई और जनता से सरोकार नहीं है।  बस अपने को शक्तिशाली दिखाने की होड़ विश्व पटल पर लगी है कि मैं महान विजेता हूं ।इस युद्ध से भारत भी बहुत बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है।देश में महंगाई बढ़ रही है ऊर्जा का दाम बढ़ रहा है।तो वहीं यह मानसून भारत पर अलग तरह से कहर बरपाने का संकेत देकर भारत की गरीब जनता को और गरीबी में जीने के लिए मजबूर कर रहा है</p><p style="text-align:justify;">भारत को तीन  तरफ से मार पड़ेगा ।खराब मानूसन  खाद  की कमी और ऊर्जा ।भले टी वी डिवेट  पर सरकार के समर्थक  लोग आंकड़ों के जाल में जनता को फंसाते रहे परन्तु सच्चाई इन  आंकड़ों से इतर है। युद्ध कब तक चलेगा यह अगस्त या आगे तक भी चल सकता है फिर देश में नोट बन्दी की तरह हर चीज पर प्रतिबंध जैसे बैंकों से कम रुपया निकालना तेल गैस पर प्रतिबंध हर चीज का सीमित उपयोग।आदि  क ई तरह के उपाय करने पड़ सकते हैं। खाद के संकट को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने एक जुन से तीस जुन तक खेत बचाओ अभियान शुरू करने जा रहा है जिसमे कृषि वैज्ञानिक किसानों को रासायनिक खाद का उपयोग कम करने हरी खाद को बढ़ावा देने याद गोबर की खाद का अधिक उपयोग करने के फायदे बतायेंगे ।</p><p style="text-align:justify;">किसानों को अपने खेत की कम होती उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए कौन-सा सही तरीका लाभ कारी होगा साथ में खेती में लागत कम लगे और उत्पादन बढे यह एक सही कदम है।अब किसानों को आधुनिक खेती के साथ पुरानी खेती को अपनाने की जरुरत है जिसमें हरी खाद कमृपोष्ट खाद का बहुत महत्व है परन्तु बहुत से छोटे मझोले किसानों के पास पशुधन यानि बैल गाय भैंस नहीं के बराबर है जिससे गोबर की खाद बनेऔर खेत बचे साथ में उत्पादन भी बढ़े।सत्तर के दशक में कम्पोस्ट खाद बनाने की सरकार द्वारा योजना चला ई ग ई किसानों ने  गोबर गैस  प्लांट लगवाया खाद का उपयोग किया खेती से मजदुरो का पलायन होना शुरू हुआ पशुधन कम हुए तो गोबर गैस प्लांट बंद होते गये।अब खेती ट्रैक्टर रासायनिक खाद पर निर्भर है।</p><p style="text-align:justify;">हिमाचल के साथ देश भर में पिछले दो महीने से रुक रुक कर बे मौसमी बारिश ओला तेज हवा के कारण किसानों को काफी नुकसान पहुंचा है । जनहानि भी हुई है।मौसम की यह बेरूखी  ऊपरी हिमाचल में सेव  के किसानों और अन्य फल के किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है  । यह भी  एक अनुमान है कि हिमाचल प्रदेश वर्ष में 5000 से 6000 करोड़ का सेव  का कारोबार  हर साल होता है। जो इस साल  बे मौसम बरसात ओलावृष्टि से सेव का उत्पादन कम होने का अनुमान है। जिसके कारण  किसानों को 1500 से 2000 करोड़ का नुकसान होगा।  कम पैदावार का नुकसान आम जनता को भी उठाना पड़ता है कि फल सब्जियां अनाज दूध तेल सब महगे दामो  पर बिकेंगे गरीब और गरीब होता जाएगा व्यापारी अमीर होता जाएगा।<br /></p><p style="text-align:justify;">आईएमडी के अनुसार बरसात  कम हो सकती है प्रशांत महासागर  में अल नीनो का प्रभाव बढ़ रहा   है। मानसून इस साल जल्दी आयेगा ।उत्तर और मध्य भारत में कम बारिश हो सकती है खेती में फसलों के साथ फल  जैसे सेव  नाशपाती  का उत्पादन के साथ  बिजली उत्पादन कम हो सकता है।  मानसून कमजोर होने पर सीधा असर  फसलो  किसानों की आय और खाद्यान्न की कीमतों पर पड़ता है।   कमजोर मानसून से कम पैदावार होगी खरीफ की फसलों के साथ सब्जी फल  महंगें होगे। सिंचाई की लागत भी बढेगी सरकार का प्रयास रहा है कि जल संचयन को बढ़ावा  जाए।  यह प्रयास बहुत अच्छा नहीं हो पाया गांव-गांव अमृत सरोवर बन रहा है।  परंतु लाभ उतना नहीं मिलता है जितनी उम्मीद सरकार कर रही है अमृतसरोवर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है यदि किसानों को यह जानकारी पहले से हो कि मानसून कमजोर है और कम वर्षा होगी तो  अधिक पानी की फसलों की जगह कम पानी की फसलो जैसे बाजार ज्वार मक्का उड़द मूंग  तिल अन्य मिलट की फसलों की बिजाई करने से बहुत लाभ हो सकता है ।  </p><p style="text-align:justify;">सरकार को इन फसलों की खरीद  को भी सुनिश्चित करना होगा।  अरहर  मूग उड़द बाजरा के साथ मिश्रित खेती अधिक लाभकारी होगी ।जब मानसून कमजोर होता है तब इस तरह की खेती किसानों के लिए लाभदायक होती  है। इस वर्ष   ओलावृष्टि वारिस जो  हिमाचल और भारत के अन्य प्रदेशों में हो रही है।  जिसके परिणामस्वरूप  सबसे ज्यादा सेवव फल   उत्पादक किसान प्रभावित हो रहे हैं ।इस बदले मानसून से हिमाचल  मे सेव  का उत्पादन 50 से 70% कम होगा। बे मौसमी  बारिश से सेव  के पौधों में फूल काम हो गए हैं । मधुमक्खियां  से परगण भी काम हुआ है ।  हिमाचल में ढाई लाख परिवार बागवानी विशेष तौर पर सेव के ऊपर  निर्भर है।<br /></p><p style="text-align:justify;">भारत कृषि प्रधान देश है खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर  है तो दूध उत्पादन में पहले पायदान पर दुनिया में टिका हुआ है । सब्जी फल उत्पादन में भी दुनिया में अपना स्थान बनाया हुआ है।  परंतु अभी तक हमारे वैज्ञानिकों ने मौसम के अनुकूल या कम बारिश होने पर उस तरह के बीजों का ईजाद नहीं कर पाए हैं जो कम पानी में अधिक पैदावार दे सके। कुछ किस्में हैं  परन्तु उतना लाभदायक नहीं है। कमजोर मानसुन होने पर खाघानो के साथ फल सब्जियों का उत्पादन कम न हो । और देश में कम उत्पादन के कारण महंगाई न बढ़े परन्तु ऐसा नहीं हो पा रहा है।</p><p style="text-align:justify;"> किसानों को भी खेती से घाटा न हो वह भी  राहत महसुस करें कि कमजोर मानसून होने पर आय कम नहीं होंगी बस फसल बदल दे तो निश्चित ही आय होगी। यह देखा गया है कि धान लगाने वाला किसान जल्दी फसल नहीं बदलते है । वह धान पर ही टिका रहता है धान में अधिक सिंचाई के कारण लागत बढ़ जाता है।बाजार में सही मूल्य नहीं मिलता  है।तब किसानो  को नुकसान उठाना ही होता है ।अगर मानुसन के अनुरूप किसान सही फसल का चयन कर लेता है तो कभी भी किसान नुकसान में नहीं होगा बस उसके उत्पाद का सही बाजार मूल्य सरकार दे।<br /></p><p style="text-align:justify;">खरीफ के मौसम में  अधिकांश तौर पर पंजाब हरियाणा पश्चिमी उत्तर प्रदेश राजस्थान के किसान धान की खेती करते हैं कम बारिश के कारण धान की खेती में अधिक सिंचाई की जरूरत होगी जो महंगे डीजल के कारण पैदावार में लागत  मूल्य को बढ़ाता है।बाजार में मूल्य कम मिलता है। कमजोर मानसून से होने वाले नुकसान से बचने के लिए बस मोटे अनाजों की खेती है  एक मात्र सही उपाय है।जिसमें पानी की बहुत कम जरुरत होती है। मिश्रित खेती जैसे बाजरा उड़द अरहर बाजरा अहरह उड़द की खेती लाभ कारी होगी।। </p><p style="text-align:justify;">इस तरह की खेती से डीजल और  बिजली की बचत भी हो सकती है।  साथ में रसायनिक खाद की जरुरत भी कम पड़ती है।इस वर्ष किसानों पर तीन तरह से   मार पड़ेगी पहली मार कि मानसुन कमजोर है। बारिश कम होंगी। दुसरी मार खाद भी कम मात्रा में मिलेगा।  तीसरा ऊर्जा की कमी ।कारण ईरान अमेरिका इजरायल युद्ध से देश में यूरिया के साथ साथ पोटाश फास्फोरस जैसे खादों का जो आयात होता वह भी कम होगा जिससे किसानों को खरीफ के फसलों के लिए भरपूर रसायनिक खाद नहीं मिलेगा।</p><p style="text-align:justify;">पिछले साल देश ने बड़े शोर के साथ मोटे अनाजों के उत्पादन और उपयोग पर बहुत गोष्ठी और सेमीनार करके किसानों को जागरूक किया और इन मोटे अनाजों के उपयोग से लाभ के बारे में भी खुब चर्चा हुई परन्तु उत्पादन बढ़ा कितना इस पर बात उसके बाद नही हुआ। नहीं यह बताया गया कि देश में क्या यह भोजन की थाली में आया या बस पशुचारा में गया मुफ्त अनाज योजना में मोटे अनाज को वितरित किया गया परन्तु अधिकांश परिवारो  को जो मुफ्त में दिया गया उसे बाजार में बेच दिये।अब देश को मुफ्त अनाज वितरण को बन्द करें।<br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचारधारा</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 23:16:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Haryana: हरियाणा में किसानों के लिए खुशखबरी, सरकार ने लिया ये बड़ा फैसला </title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">Haryana News: </span><span class="cf1">हरियाणा</span> <span class="cf1">में</span> <span class="cf1">रबी</span> <span class="cf1">सीजन</span> <span class="cf1">की</span> <span class="cf1">फसलों</span> <span class="cf1">की</span> <span class="cf1">बुवाई</span> <span class="cf1">शुरू</span> <span class="cf1">हो</span> <span class="cf1">चुकी</span> <span class="cf1">है</span><span class="cf1">। </span><span class="cf1">राज्य</span> <span class="cf1">सरकार</span> <span class="cf1">ने</span><span class="cf1"> किसानों की लागत घटाने और उपज बढ़ाने के उद्देश्य से एक बड़ा निर्णय लिया </span><span class="cf1">है।इस</span><span class="cf1"> बार किसानों को गेहूं के बीज पर बढ़ी हुई </span><span class="cf1">सब्सिडी</span><span class="cf1"> का लाभ मिलेगा</span></p>
<p><strong><span class="cf1">अब मिलेगी 1075 रुपये प्रति </span><span class="cf1">क्विंटल</span><span class="cf1"> की </span><span class="cf1">सब्सिडी</span></strong></p>
<p><span class="cf1">राज्य सरकार ने घोषणा की है कि अब किसानों को गेहूं के बीज पर 1075 रुपये प्रति </span><span class="cf1">क्विंटल</span><span class="cf1"> की </span><span class="cf1">सब्सिडी</span><span class="cf1"> दी जाएगी।</span> <span class="cf1">पहले यह सहायता 1000 रुपये प्रति </span><span class="cf1">क्विंटल</span><span class="cf1"> थी।</span> <span class="cf1">इस बढ़ोतरी से किसानों को बीज खरीदने में आर्थिक राहत मिलेगी और उत्पादन लागत में कमी</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/159288/haryana-good-news-for-farmers-in-haryana-government-took-this"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/news---2025-11-08t100302.542.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">Haryana News: </span><span class="cf1">हरियाणा</span> <span class="cf1">में</span> <span class="cf1">रबी</span> <span class="cf1">सीजन</span> <span class="cf1">की</span> <span class="cf1">फसलों</span> <span class="cf1">की</span> <span class="cf1">बुवाई</span> <span class="cf1">शुरू</span> <span class="cf1">हो</span> <span class="cf1">चुकी</span> <span class="cf1">है</span><span class="cf1">। </span><span class="cf1">राज्य</span> <span class="cf1">सरकार</span> <span class="cf1">ने</span><span class="cf1"> किसानों की लागत घटाने और उपज बढ़ाने के उद्देश्य से एक बड़ा निर्णय लिया </span><span class="cf1">है।इस</span><span class="cf1"> बार किसानों को गेहूं के बीज पर बढ़ी हुई </span><span class="cf1">सब्सिडी</span><span class="cf1"> का लाभ मिलेगा</span></p>
<p><strong><span class="cf1">अब मिलेगी 1075 रुपये प्रति </span><span class="cf1">क्विंटल</span><span class="cf1"> की </span><span class="cf1">सब्सिडी</span></strong></p>
<p><span class="cf1">राज्य सरकार ने घोषणा की है कि अब किसानों को गेहूं के बीज पर 1075 रुपये प्रति </span><span class="cf1">क्विंटल</span><span class="cf1"> की </span><span class="cf1">सब्सिडी</span><span class="cf1"> दी जाएगी।</span> <span class="cf1">पहले यह सहायता 1000 रुपये प्रति </span><span class="cf1">क्विंटल</span><span class="cf1"> थी।</span> <span class="cf1">इस बढ़ोतरी से किसानों को बीज खरीदने में आर्थिक राहत मिलेगी और उत्पादन लागत में कमी आएगी।</span></p>
<p><strong><span class="cf1">बेहतर बीज से बढ़ेगी उपज</span></strong></p>
<p><span class="cf1">कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस सीजन में किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे उपज में </span><span class="cf1">सुधार</span><span class="cf1"> और उत्पादन लागत में कमी आएगी।</span> <span class="cf1">राज्य सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक किसान </span><span class="cf1">प्रमाणित</span><span class="cf1"> बीजों का उपयोग करें ताकि </span><span class="cf1">प्रति</span> <span class="cf1">हेक्टेयर</span><span class="cf1"> उत्पादन में बढ़ोतरी हो सके।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Nov 2025 10:03:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, कृषि यंत्रों के रेट आधे से भी होंगे कम, देखें कृषि यंत्रों के रेटों की नई लिस्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की प्रेस कॉन्फ्रेंस</p>
<p>केंद्र सरकार ने कम की कृषि उपकरणों में GST दर, किसानों को बड़ी राहत</p>
<p>18% से कम कर 5% की गई जीएसटी दर</p>
<p>45 एचपी ट्रेक्टर- पहले 7,20,000 रूपए, अब 6,75,000 रूपए, बचत 45,000 रू.</p>
<p>35 एचपी ट्रैक्टर – पहले 6,50,000 रुपए , अब 6,09,000 रुपए (अनुमानित) , बचत 41,000 रुपए</p>
<p>50 एचपी ट्रेक्टर- पहले- 8,50,000 रूपए, अब 7,97,000 रूपए, बचत 53,000 रूपए</p>
<p>पावर टिलर 13 एचपी- पहले 20,357 रूपए, अब 8,482 रूपए, बचत 11,875 रूपए</p>
<p>75 एचपी ट्रेक्टर- पहले 10,00,000 रूपए, अब 9,37,000</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154593/the-rates-of-very-good-news-for-farmers-will-be"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/great-news-for-farmers.jpg" alt=""></a><br /><p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की प्रेस कॉन्फ्रेंस</p>
<p>केंद्र सरकार ने कम की कृषि उपकरणों में GST दर, किसानों को बड़ी राहत</p>
<p>18% से कम कर 5% की गई जीएसटी दर</p>
<p>45 एचपी ट्रेक्टर- पहले 7,20,000 रूपए, अब 6,75,000 रूपए, बचत 45,000 रू.</p>
<p>35 एचपी ट्रैक्टर – पहले 6,50,000 रुपए , अब 6,09,000 रुपए (अनुमानित) , बचत 41,000 रुपए</p>
<p>50 एचपी ट्रेक्टर- पहले- 8,50,000 रूपए, अब 7,97,000 रूपए, बचत 53,000 रूपए</p>
<p>पावर टिलर 13 एचपी- पहले 20,357 रूपए, अब 8,482 रूपए, बचत 11,875 रूपए</p>
<p>75 एचपी ट्रेक्टर- पहले 10,00,000 रूपए, अब 9,37,000 रूपए, बचत 63,000 रूपए</p>
<p>बहुफसली थ्रेशर – 4 टन- पहले 24,000 रूपए, अब 10,000 रू, बचत 14,000 रू.</p>
<p>धान रोपण यंत्र (4 पंक्ति – वॉक बिहाइंड)- पहले 26,400 रूपए, अब 11,000, बचत 15,400 रूपए</p>
<p>सीड कम फर्टिलाइज़र ड्रिल – 11 टाइन- पहले 18,000 रू, अब 7,500 रू. बचत 10,500 रू.</p>
<p>पावर वीडर – 7.5 एचपी- पहले 9,420 रू. अब 3,925 रू., बचत 5,495 रूपए</p>
<p>हार्वेस्टर कंबाइन- पहले 7,500 रू. अब 3,125 रू, बचत 4,375 रू.</p>
<p>सीड कम फर्टिलाइज़र ड्रिल – 13 टाइन- पहले 5,520 रू. अब 2,300 रू. बचत 3,220 रू</p>
<p>स्ट्रॉ रीपर – 5 फीट- पहले 37,500 रू, अब 15,625 रू, बचत 21,875 रू.</p>
<p>14 फीट कटर बार- पहले 3,21,428 रू. अब 1,33,928 रू. बचत 1,87,500 रू.</p>
<p>रोटावेटर – 6 फीट- पहले 13,392 रू. अब 5,580 रू. बचत 7,812 रू.</p>
<p>हैप्पी सीडर – 10 टाइन- पहले 18,214 रू. अब 7,589 रू. बचत 10,625 रू.</p>
<p>सुपर सीडर – 8 फीट- पहले 28,928 रू. अब 12,053 रू. बचत 16,875 रू.</p>
<p>मल्चर – 8 फीट- पहले 19,821 रू. अब 8,258 रू. बचत 11,562 रू.</p>
<p>स्क्वायर बेलर – 6 फीट- पहले 1,60,714 रू. अब 66,964 रू. बचत 93,750 रू.</p>
<p>ट्रैक्टर माउंटेड स्प्रेयर – 400 लीटर- पहले 16,071 रू. अब 6,696 रू. बचत 9,375 रूपए</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Sep 2025 13:50:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्यमंत्री का किसान हितैषी फैंसला, फसल नुकसान पंजीकरण हेतु ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल 12 जिलों के 1402 गांवों के लिए 10 सितंबर तक खुला रहेगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">चंडीगढ़</span>, 31<span lang="hi" xml:lang="hi">  अगस्त</span>– <span lang="hi" xml:lang="hi">हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने आज घोषणा की हैं कि हाल ही में आई बाढ़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जल भराव और भारी वर्षा के कारण प्रभावित किसानों की सुविधा को देखते हुए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल को </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi">  सितंबर </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi">  तक खुला रखा जाएगा। इससे </span>12<span lang="hi" xml:lang="hi">  जिलों के </span>1402<span lang="hi" xml:lang="hi">  गांवों के किसान खरीफ </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi">  के दौरान हुई फसल क्षति का पंजीकरण कर सकेंगे। ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल से प्राप्त ताज़ा आंकड़ों के अनुसार अब तक कुल </span>38,286<span lang="hi" xml:lang="hi">  किसानों ने अपनी फसल क्षति का दावा दर्ज कराया है। पंजीकृत कुल क्षेत्रफल </span>2,42,945.15<span lang="hi" xml:lang="hi">  एकड़ तक पहुँच चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal">                <span lang="hi" xml:lang="hi">खरीफ </span>2025</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154265/the-chief-ministers-farmer-friendly-decision-will-be-open-till"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/hindi-divas4.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">चंडीगढ़</span>, 31<span lang="hi" xml:lang="hi"> अगस्त</span>– <span lang="hi" xml:lang="hi">हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने आज घोषणा की हैं कि हाल ही में आई बाढ़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जल भराव और भारी वर्षा के कारण प्रभावित किसानों की सुविधा को देखते हुए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल को </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> सितंबर </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक खुला रखा जाएगा। इससे </span>12<span lang="hi" xml:lang="hi"> जिलों के </span>1402<span lang="hi" xml:lang="hi"> गांवों के किसान खरीफ </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> के दौरान हुई फसल क्षति का पंजीकरण कर सकेंगे। ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल से प्राप्त ताज़ा आंकड़ों के अनुसार अब तक कुल </span>38,286<span lang="hi" xml:lang="hi"> किसानों ने अपनी फसल क्षति का दावा दर्ज कराया है। पंजीकृत कुल क्षेत्रफल </span>2,42,945.15<span lang="hi" xml:lang="hi"> एकड़ तक पहुँच चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal">        <span lang="hi" xml:lang="hi">खरीफ </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> में फसल क्षति पंजीकरण के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल शुरू में </span>7<span lang="hi" xml:lang="hi"> जिलों के </span>188<span lang="hi" xml:lang="hi"> गांवों के लिए खोला गया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें रोहतक के </span>21, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिसार के </span>85, <span lang="hi" xml:lang="hi">चरखी दादरी के </span>13, <span lang="hi" xml:lang="hi">पलवल के </span>17, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिरसा के </span>2, <span lang="hi" xml:lang="hi">भिवानी के </span>43<span lang="hi" xml:lang="hi"> और रेवाड़ी के </span>7<span lang="hi" xml:lang="hi"> गाँव शामिल थे। इसके बाद इसका दायरा बढ़ाकर </span>12<span lang="hi" xml:lang="hi"> जिलों के </span>1402<span lang="hi" xml:lang="hi"> गांवों तक कर दिया गया। इनमें शामिल हैं </span>– <span lang="hi" xml:lang="hi">रोहतक (</span>41), <span lang="hi" xml:lang="hi">हिसार (</span>86), <span lang="hi" xml:lang="hi">चरखी दादरी (</span>34), <span lang="hi" xml:lang="hi">पलवल (</span>59), <span lang="hi" xml:lang="hi">सिरसा (</span>6), <span lang="hi" xml:lang="hi">भिवानी (</span>43), <span lang="hi" xml:lang="hi">रेवाड़ी (</span>7), <span lang="hi" xml:lang="hi">कुरुक्षेत्र (</span>75), <span lang="hi" xml:lang="hi">यमुनानगर (</span>600 – <span lang="hi" xml:lang="hi">सभी गाँव)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नूंह (</span>166), <span lang="hi" xml:lang="hi">फतेहाबाद (</span>21) <span lang="hi" xml:lang="hi">और झज्जर (</span>264 – <span lang="hi" xml:lang="hi">सभी गाँव)। अब इन </span>12<span lang="hi" xml:lang="hi"> जिलों के सभी प्रभावित किसान </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> सितंबर </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक अपने दावे पोर्टल पर दर्ज करा सकेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal">        <span lang="hi" xml:lang="hi">जिला राजस्व अधिकारी पोर्टल के माध्यम से प्राप्त दावों का सत्यापन विशेष गिरदावरी के रूप में करेंगे। इन आकलनों के आधार पर निर्धारित मानकों के अनुसार किसानों को मुआवजा प्रदान किया जाएगा। प्रवक्ता ने किसानों से अपील की कि वे बढ़ी हुई समयसीमा का लाभ उठाते हुए जल्द से जल्द फसल क्षति का पंजीकरण करें।</span></p>
<p class="MsoNormal">        <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) के मानकों के तहत बाढ़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पानी भराव और भारी वर्षा की घटनाएँ ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर दावा पंजीकरण के लिए मान्य हैं। प्रभावित किसानों द्वारा दावा दर्ज कराने के बाद पटवारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानूनगो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सर्कल रेवेन्यू ऑफिसर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीआरओ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एसडीओ (सी)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उपायुक्त और मंडल आयुक्त स्तर तक राजस्व अधिकारी फसल क्षति का आकलन करेंगे और मुआवजा जारी करने की प्रक्रिया शुरू करेंगे।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Sep 2025 18:07:30 +0530</pubDate>
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