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                <title>टीबी - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>टीबी RSS Feed</description>
                
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                <title>टीबी अब लाइलाज नहीं समय पर पहचान और उपचार से संभव है पूरी तरह स्वस्थ जीवन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">एक समय था जब टीबी यानी क्षय रोग का नाम सुनते ही मरीज और उसके परिवार में डर का माहौल बन जाता था। लोगों को लगता था कि यह बीमारी जीवन भर पीछा नहीं छोड़ेगी और इसका इलाज संभव नहीं है। जानकारी की कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के कारण अनेक मरीज समय पर उपचार नहीं ले पाते थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में चिकित्सा विज्ञान ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज टीबी का प्रभावी इलाज उपलब्ध है और लाखों मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं। यही कारण है कि अब टीबी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180379/tb-is-no-longer-incurable-with-timely-detection-and-treatment"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/07_12_2024-tb_23844079_m.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">एक समय था जब टीबी यानी क्षय रोग का नाम सुनते ही मरीज और उसके परिवार में डर का माहौल बन जाता था। लोगों को लगता था कि यह बीमारी जीवन भर पीछा नहीं छोड़ेगी और इसका इलाज संभव नहीं है। जानकारी की कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के कारण अनेक मरीज समय पर उपचार नहीं ले पाते थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में चिकित्सा विज्ञान ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज टीबी का प्रभावी इलाज उपलब्ध है और लाखों मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं। यही कारण है कि अब टीबी को लाइलाज बीमारी नहीं माना जाता बल्कि समय पर पहचान और नियमित उपचार से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">टीबी एक संक्रामक रोग है जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है। यह बीमारी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु के कारण होती है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने छींकने या बोलने के दौरान निकलने वाली सूक्ष्म बूंदों के माध्यम से यह दूसरे लोगों तक फैल सकती है। हालांकि यह बीमारी केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं रहती बल्कि शरीर के अन्य अंगों जैसे हड्डियों लिम्फ नोड्स मस्तिष्क और गुर्दों को भी प्रभावित कर सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत लंबे समय से दुनिया में टीबी से सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2030 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है जबकि भारत ने इससे पहले ही टीबी मुक्त बनने का संकल्प लिया था। हालांकि यह लक्ष्य अभी पूरी तरह हासिल नहीं हो पाया है लेकिन सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जागरूकता अभियान बेहतर जांच सुविधाएं और मुफ्त उपचार जैसी योजनाओं ने इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजस्थान सहित देश के कई राज्यों में टीबी मरीजों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। 24 मार्च से शुरू किए गए 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत हाई रिस्क गांवों और क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग की जा रही है। आधुनिक तकनीक से लैस पोर्टेबल एक्स रे मशीनों का उपयोग किया जा रहा है जो गांव गांव पहुंचकर लोगों की जांच कर रही हैं। इन मशीनों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सॉफ्टवेयर लगा है जो मौके पर ही टीबी की आशंका का संकेत दे सकता है। इससे संदिग्ध मरीजों की पहचान तेजी से हो रही है और उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">टीबी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य बीमारी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी रहना टीबी का प्रमुख संकेत माना जाता है। इसके अलावा बुखार का बार बार आना रात में अत्यधिक पसीना आना वजन कम होना भूख न लगना सीने में दर्द होना सांस फूलना थकान बने रहना और बलगम में खून आना भी इसके महत्वपूर्ण लक्षण हैं। यदि किसी व्यक्ति में ये लक्षण दिखाई दें तो तुरंत जांच करानी चाहिए। समय पर जांच होने से बीमारी गंभीर होने से पहले ही पकड़ में आ जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज टीबी की जांच पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और सटीक हो गई है। न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट जैसी आधुनिक जांच तकनीकों के माध्यम से कुछ ही समय में रोग की पुष्टि की जा सकती है। देशभर में सैकड़ों आधुनिक मशीनें स्थापित की गई हैं जिनसे छिपे हुए मरीज भी सामने आ रहे हैं। इससे संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद मिल रही है और मरीजों को शीघ्र उपचार मिल रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">टीबी के इलाज में सबसे महत्वपूर्ण बात नियमित दवा सेवन है। सरकार की ओर से टीबी मरीजों को मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। उपचार की अवधि सामान्यतः छह महीने या उससे अधिक हो सकती है जो बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करती है। कई बार मरीज शुरुआती सुधार के बाद दवाएं लेना बंद कर देते हैं जिससे बीमारी दोबारा उभर सकती है और दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सकती है। इसलिए चिकित्सकों की सलाह के अनुसार पूरा उपचार लेना अत्यंत आवश्यक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पोषण भी टीबी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। संतुलित आहार शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और मरीज को जल्दी स्वस्थ होने में सहायता करता है। पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन विटामिन और खनिज तत्वों का सेवन लाभकारी होता है। सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत टीबी मरीजों को पोषण सहायता भी प्रदान की जाती है ताकि उपचार के दौरान उन्हें आवश्यक पोषण मिल सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">टीबी को लेकर समाज में फैली भ्रांतियां भी एक बड़ी समस्या रही हैं। कई लोग इस बीमारी को सामाजिक कलंक के रूप में देखते हैं जिसके कारण मरीज अपनी बीमारी छिपाने की कोशिश करते हैं। इससे उपचार में देरी होती है और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। आवश्यकता इस बात की है कि टीबी को एक सामान्य इलाज योग्य बीमारी के रूप में देखा जाए और मरीजों को सामाजिक सहयोग तथा मानसिक समर्थन दिया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोविड महामारी के दौरान टीबी नियंत्रण कार्यक्रमों पर भी असर पड़ा था जिससे कई मरीज समय पर जांच और उपचार से वंचित रह गए। लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग फिर से सक्रिय होकर व्यापक स्तर पर जांच अभियान चला रहा है। गांवों और दूरदराज क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं ताकि कोई भी मरीज उपचार से वंचित न रहे। टीबी के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार या स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि इसमें पूरे समाज की भागीदारी आवश्यक है। यदि किसी व्यक्ति में लक्षण दिखाई दें तो उसे जांच के लिए प्रेरित करना चाहिए। परिवार और समुदाय का सहयोग मरीज के आत्मविश्वास को बढ़ाता है और उपचार पूरा करने में मदद करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज चिकित्सा विज्ञान और सरकारी प्रयासों की बदौलत टीबी का सफल उपचार संभव है। लाखों लोग इस बीमारी को हराकर स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। इसलिए टीबी के लक्षण दिखने पर घबराने की नहीं बल्कि तुरंत जांच और उपचार शुरू कराने की जरूरत है। जागरूकता समय पर पहचान नियमित दवा सेवन और संतुलित पोषण के माध्यम से टीबी को पूरी तरह हराया जा सकता है। यदि समाज और स्वास्थ्य तंत्र मिलकर प्रयास करें तो टीबी मुक्त भारत का सपना भी निश्चित रूप से साकार हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 18:51:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वेक्टर जनित व संचारी रोगों की रोकथाम हेतु प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल फॉगिंग एवं एंटी-लार्वा छिड़काव के निर्देश।</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने हेतु ओवरड्यू बच्चों का विशेष अभियान।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>पांच आशाओं की सेवाएं समाप्त, कमजोर प्रदर्शन करने वाले सीएचओ पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>संस्थागत प्रसव, लो बर्थ वेट बच्चों की देखभाल व जननी सुरक्षा योजना पर विशेष ध्यान।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>निजी चिकित्सालयों में सीसीटीवी अनिवार्य, प्रत्येक माह डीवीआर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">अंबेडकरनगर।</p>
<p style="text-align:justify;">जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला की अध्यक्षता में दिनांक 30 अगस्त 2025 को देर शाम तक कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक संपन्न हुई। बैठक में जिलाधिकारी ने वेक्टर जनित रोगों एवं संचारी रोगों पर प्रभावी रोकथाम के निर्देश देते हुए कहा कि जिन-जिन क्षेत्रों में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154262/instructions-for-immediate-fogging-and-anti-movement-spraying-in-the-affected"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/img-20250831-wa0875.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने हेतु ओवरड्यू बच्चों का विशेष अभियान।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>पांच आशाओं की सेवाएं समाप्त, कमजोर प्रदर्शन करने वाले सीएचओ पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>संस्थागत प्रसव, लो बर्थ वेट बच्चों की देखभाल व जननी सुरक्षा योजना पर विशेष ध्यान।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>निजी चिकित्सालयों में सीसीटीवी अनिवार्य, प्रत्येक माह डीवीआर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">अंबेडकरनगर।</p>
<p style="text-align:justify;">जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला की अध्यक्षता में दिनांक 30 अगस्त 2025 को देर शाम तक कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक संपन्न हुई। बैठक में जिलाधिकारी ने वेक्टर जनित रोगों एवं संचारी रोगों पर प्रभावी रोकथाम के निर्देश देते हुए कहा कि जिन-जिन क्षेत्रों में डेंगू और मलेरिया के मरीज निकल रहे हैं वहां पर पूरे क्षेत्र में तत्काल फॉगिंग एवं एंटी लार्वा का छिड़काव संबंधित अधिशासी अधिकारी/एडीओ पंचायत द्वारा कराया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर उन्होंने 102 एवं 108 एम्बुलेंस सेवाओं के रिस्पांस टाइम में और सुधार लाने के निर्देश दिए उन्होंने उप जिलाधिकारियों को अवशेष एम्बुलेंसों में भी उपकरणों की उपलब्धता एवं क्रियाशीलता की जांच का कार्य तत्काल करने के निर्देश दिए तथा एंबुलेंस में कमियां पाई जाती हैं तो स्टेट को सूचित करते हुए उसके भुगतान में कटौती किए जाने  हेतु पत्र लिखने के निर्देश दिए। <br />      टीबी मुक्त अभियान की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने स्क्रीनिंग को बढ़ाने तथा मरीज को बेहतर पौष्टिक आहार, चिकित्सीय सुविधा एवं सुझाव प्रदान करने, सभी एमओआईसी को टीबी रोगियों की सघन मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री जी एवं प्रधानमंत्री जी के विजन के अनुरूप मार्च 2026 तक प्रत्येक दशा में जनपद को भी टीवी मुक्त करना है इसे दृष्टिगत रखते हुए पूरी गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही क्षम्य नहीं है।<br />      बैठक में समस्त एमओआईसी द्वारा अवगत कराया कि सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों सभी दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं, कहीं पर भी दवाओं की कोई कमी नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (गोल्डन कार्ड) के अंतर्गत शत प्रतिशत पात्र व्यक्तियों का आयुष्मान कार्ड से आच्छादन सुनिश्चित करने हेतु कंट्रोल रूम का संचालन करने तथा रोजाना अधिक से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जाने के लक्ष्य के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">टीकाकरण की स्थिति की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने एमओआईसी अकबरपुर के द्वारा टीकाकरण एनालिसिस के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि इसी प्रकार अन्य एमओआईसी भी टीकाकरण का एनालिसिस करके ओवर ड्यू टीकाकरण वाले बच्चों को प्राथमिकता पर अपेक्षित समय में टीकाकरण से आच्छादन सुनिश्चित करें तथा भविष्य में सभी बच्चों का समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करते रहने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी एमओआईसी को ओवरड्यू बच्चों का शत प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित होने का प्रमाण पत्र देने के भी निर्देश दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए की एक भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे सभी बच्चों को समय पर सभी टीके लगे। उन्होंने आशा डायरी का सभी एमओआईसी को स्वयं सत्यापन करने और समय-समय पर आशाओं को आशा डायरी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बैठक में समिति द्वारा जनपद के पांच आशाओं द्वारा बार बार चेतावनी के उपरांत भी अपने दायित्वों का सम्यक निर्वहन न करने के कारण उनकी सेवाओं को समाप्त करने का निर्णय लिया गया। इसी के साथ ही सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले अर्थात अपने दायित्वों का सही से निर्वहन न करने वाले सीएचओ पर भी नियमानुसार कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।<br />        जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत भुगतान समय पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने संस्थागत प्रसव में खराब प्रगति पर नाराजगी व्यक्त की तथा इसमें सुधार लाने हेतु संबंधित को निर्देशित किया गया। उन्होंने संस्थागत प्रसवनमें सुधार लाने हेतु सभी एमओआईसी को गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए। सभी एमओआईसी व एएनएम को निर्देशित करते हुए कहा कि जन्म के समय लो वर्थ वेट वाले बच्चों को एसएनसीयू अथवा एनबीएसयू में अवश्य भर्ती कराएं तथा उनकी नियमित बेहतर देखभाल सुनिश्चित करें जिससे वे बच्चे सैम या मैम श्रेणी में जाएं। बैठक में अर्बन कोऑर्डिनेटर को अनुपस्थित होने पर स्पष्टीकरण देने तथा अग्रिम आदेश तक वेतन रोकने के निर्देश दिए गए। <br />      बैठक में जिलाधिकारी ने उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी को समस्त प्राइवेट चिकित्सालय में सीसीटीवी की स्थापना एवं क्रियाशीलता को अनिवार्य करने तथा प्रत्येक माह का डीवीआर प्राप्त करने के निर्देश दिए। इसी के साथ ही उन्होंने प्राइवेट चिकित्सालय में हो रहे प्रसव का डाटा भी प्राप्त करने के निर्देश दिए। <br />      बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने कहा कि एक स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण में स्वास्थ्य एवं शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण घटक हैं अतः सभी चिकित्सक एवं कार्मिक  अपने दायित्वों का पूरी  गंभीरता के साथ निर्वहन करें और प्रत्येक व्यक्ति को बेहतर चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराएं। <br />      बैठक में मुख्य विकास अधिकारी आनंद कुमार शुक्ला एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर संजय कुमार शैवाल सहित अन्य संबंधित चिकित्सक एवं संबंधित कार्मिक उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य-आरोग्य</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 Aug 2025 19:40:03 +0530</pubDate>
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