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                <title>भारतीय सेना - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>भारतीय सेना RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>देवनहरी के अमन पाल बने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट, बढ़ाया प्रयागराज का  मान </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
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<div style="text-align:justify;">थरवई थाना क्षेत्र के देवनहरी गांव के होनहार युवा अमन पाल ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद प्राप्त कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे प्रयागराज जिले का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से गांव, क्षेत्र और शुभचिंतकों में हर्ष का माहौल है। ग्रामीणों, शिक्षकों और परिचितों ने अमन की सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।</div>
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<div style="text-align:justify;">देवनहरी गांव निवासी अमन पाल ऐसे परिवार से आते हैं, जहां बचपन से ही देशसेवा और अनुशासन का वातावरण रहा है। उनके पिता महाराजदीन पाल पुलिस विभाग में घुड़सवार पुलिस</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181380/aman-pal-of-devnahari-became-lieutenant-in-indian-army-increased"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260617-wa0087.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">थरवई थाना क्षेत्र के देवनहरी गांव के होनहार युवा अमन पाल ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद प्राप्त कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे प्रयागराज जिले का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से गांव, क्षेत्र और शुभचिंतकों में हर्ष का माहौल है। ग्रामीणों, शिक्षकों और परिचितों ने अमन की सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देवनहरी गांव निवासी अमन पाल ऐसे परिवार से आते हैं, जहां बचपन से ही देशसेवा और अनुशासन का वातावरण रहा है। उनके पिता महाराजदीन पाल पुलिस विभाग में घुड़सवार पुलिस के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता सुनीता पाल गृहणी हैं। वहीं उनके चाचा बाबादीन पाल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। परिवार के सदस्यों की राष्ट्रसेवा से प्रेरित होकर अमन ने भी सेना में अधिकारी बनने का सपना देखा और उसे साकार कर दिखाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अमन पाल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कानपुर में प्राप्त की। बचपन से ही वे पढ़ाई में मेधावी और अनुशासित छात्र रहे हैं। उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं उत्कृष्ट अंकों के साथ उत्तीर्ण कीं। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बीएससी में प्रवेश लिया। पढ़ाई के दौरान ही उनका लक्ष्य भारतीय सेना में अधिकारी बनने का था और उन्होंने इस दिशा में लगातार मेहनत जारी रखी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बीएससी द्वितीय वर्ष में अध्ययनरत रहते हुए अमन ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) की प्रतिष्ठित परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। एनडीए में चयन के बाद उन्होंने कठिन प्रशिक्षण प्राप्त किया और अपनी योग्यता, परिश्रम तथा दृढ़ संकल्प के बल पर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद हासिल करने में सफलता प्राप्त की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अमन बताते हैं कि उनके पिता की तैनाती पुलिस लाइन में होने के कारण उनका बचपन कैंट क्षेत्र के वातावरण में बीता। वहां सेना के अधिकारियों की कार्यशैली, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण को देखकर उनके मन में भी सेना में अधिकारी बनने की प्रेरणा जगी। यही प्रेरणा आगे चलकर उनके जीवन का लक्ष्य बन गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपनी सफलता पर अमन पाल ने कहा कि यह उपलब्धि उनके माता-पिता, परिवार के सदस्यों और शिक्षकों के सहयोग का परिणाम है। उन्होंने कहा कि परिवार ने हर परिस्थिति में उनका हौसला बढ़ाया और लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने युवाओं से भी मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को पूरा करने का संदेश दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अमन की इस उपलब्धि से देवनहरी गांव में हर्ष व्याप्त है। ग्रामीणों और क्षेत्र के लोगों ने इसे पूरे इलाके के लिए गौरव  बताया है। लोगों का कहना है कि अमन की सफलता से क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी देशसेवा और उच्च पदों पर पहुंचने की प्रेरणा मिलेगी।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 18:45:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑपरेशन सिंदूर में जवानों की सेवा कर 11 वर्षीय श्रवण सिंह बना देशभक्ति, समर्पण और साहस का अद्भुत प्रतीक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">जब किसी देश की सीमाओं पर सैनिक दिन-रात पहरा दे रहे होते हैं, तब पूरा राष्ट्र उनके साहस और त्याग के भरोसे निश्चिंत होकर जीवन जीता है। लेकिन कभी-कभी इसी देश की मिट्टी से ऐसे अनमोल रत्न जन्म लेते हैं, जो छोटी-सी उम्र में ही राष्ट्रसेवा का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत कर देते हैं कि पूरा देश गर्व से भर उठता है। पंजाब के फिरोजपुर जिले के ‘चक तारा वाली’ गांव का 11 वर्षीय श्रवण सिंह ऐसा ही एक अद्भुत बालक है, जिसकी देशभक्ति और समर्पण की भावना ने करोड़ों भारतीयों का हृदय जीत लिया है। जिस उम्र में बच्चे खिलौनों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178865/11-year-old-shravan-singh-became-a-wonderful-symbol-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/4488d7a01b06f10315418667501c682d17484130177341201_original.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">जब किसी देश की सीमाओं पर सैनिक दिन-रात पहरा दे रहे होते हैं, तब पूरा राष्ट्र उनके साहस और त्याग के भरोसे निश्चिंत होकर जीवन जीता है। लेकिन कभी-कभी इसी देश की मिट्टी से ऐसे अनमोल रत्न जन्म लेते हैं, जो छोटी-सी उम्र में ही राष्ट्रसेवा का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत कर देते हैं कि पूरा देश गर्व से भर उठता है। पंजाब के फिरोजपुर जिले के ‘चक तारा वाली’ गांव का 11 वर्षीय श्रवण सिंह ऐसा ही एक अद्भुत बालक है, जिसकी देशभक्ति और समर्पण की भावना ने करोड़ों भारतीयों का हृदय जीत लिया है। जिस उम्र में बच्चे खिलौनों और खेलों में खोए रहते हैं, उस उम्र में श्रवण सिंह भारतीय सेना के जवानों की सेवा में स्वयं को समर्पित कर चुका था। उसका हर कदम राष्ट्रभक्ति की उस पवित्र भावना से प्रेरित था, जो किसी साधारण बच्चे में नहीं, बल्कि किसी असाधारण आत्मा में ही दिखाई देती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब भारतीय सेना सीमा पर पूरी मुस्तैदी से डटी हुई थी, तब श्रवण सिंह बिना किसी भय और संकोच के जवानों के बीच पहुंचता रहा। सुबह होते ही वह चाय लेकर खेतों और कच्चे रास्तों से गुजरता हुआ सेना के कैंप तक पहुंच जाता। दोपहर की भीषण गर्मी में वह जवानों के लिए बर्फ लेकर जाता ताकि देश की रक्षा में लगे सैनिकों को थोड़ी राहत मिल सके। शाम के समय वह दूध और लस्सी लेकर फिर कैंप में पहुंच जाता। उसके मन में न कोई डर था, न कोई स्वार्थ। उसके भीतर केवल एक ही भावना थी—देश के वीर जवानों की सेवा करना। यह भावना किसी किताब से नहीं आती, यह राष्ट्रप्रेम की वह आग होती है जो आत्मा में जन्म लेती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्रवण सिंह जब जवानों के बीच जाता था तो उनके साथ बड़े गर्व से घूमता और उनकी बंदूक हाथ में लेकर कहता, “मैं भी बड़ा होकर सैनिक बनूंगा।” यह केवल एक मासूम इच्छा नहीं थी, बल्कि उस बालक के हृदय में धधकती देशभक्ति की लौ थी। उसकी आंखों में सेना की वर्दी के प्रति जो सम्मान था, वह बताता है कि भारत की नई पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम की भावना कितनी गहरी है। श्रवण के भीतर देश के लिए कुछ कर गुजरने का जो जज्बा दिखाई देता है, वह वास्तव में करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा है।</div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय सेना भी इस नन्हे सिपाही के समर्पण और सेवा भावना से अत्यंत प्रभावित हुई। सेना ने श्रवण को केवल सम्मान ही नहीं दिया, बल्कि उसे अपने परिवार का हिस्सा मानते हुए “गोद” ले लिया। यह किसी भी बच्चे के लिए बहुत बड़ा सम्मान है। सेना ने उसकी शिक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी उठाई। जब जवानों को पता चला कि श्रवण डायबिटीज जैसी बीमारी से जूझ रहा है, तब उन्होंने तुरंत उसकी चिकित्सा की व्यवस्था की। उसकी बेहतर पढ़ाई के लिए प्राइवेट स्कूल में दाखिला कराया गया और आगे की शिक्षा के लिए कपूरथला भेजने का निर्णय लिया गया। यह केवल सहायता नहीं, बल्कि उस देशभक्त बालक के प्रति सेना का प्रेम और सम्मान है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्रवण सिंह की कहानी यह सिद्ध करती है कि देशभक्ति उम्र की मोहताज नहीं होती। केवल 11 वर्ष की उम्र में उसने जो कार्य किया, वह बड़े-बड़े लोगों के लिए भी प्रेरणा बन गया। वह न किसी पुरस्कार के लिए काम कर रहा था, न किसी प्रसिद्धि के लिए। उसके मन में केवल भारत माता के प्रति प्रेम था। यही कारण है कि उसकी सेवा भावना को पूरे देश ने सलाम किया और उसे प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी श्रवण सिंह की खुलकर प्रशंसा की। बाल पुरस्कार समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने उसके जज्बे को याद करते हुए कहा था कि जिन कपड़ों और चप्पलों में यह बच्चा देश सेवा कर रहा था, उन्हें संभालकर रखा जाए क्योंकि वे इतिहास का हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री के ये शब्द केवल तारीफ नहीं थे, बल्कि उस बालक के राष्ट्रप्रेम को दिया गया सर्वोच्च सम्मान थे। देश के प्रधानमंत्री का किसी छोटे बच्चे के समर्पण को इस प्रकार सम्मान देना यह दर्शाता है कि श्रवण का कार्य कितना असाधारण था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्रवण सिंह को देशभर की अनेक संस्थाओं ने सम्मानित किया। कश्मीर से लेकर इंदौर तक उसे बुलाकर सम्मान दिया गया। उसे पहली बार हवाई जहाज में बैठाकर इंदौर ले जाया गया। यह सब उस बच्चे के लिए किसी सपने जैसा था, लेकिन इन सब उपलब्धियों के बाद भी श्रवण के स्वभाव में कोई बदलाव नहीं आया। वह आज भी उसी सादगी और विनम्रता के साथ अपने गांव में रहता है। यही उसकी सबसे बड़ी विशेषता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आईपीएल में पंजाब किंग्स की मालकिन और प्रसिद्ध अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने भी श्रवण को मोहाली आमंत्रित किया। वहां उसने उनके साथ बैठकर क्रिकेट मैच देखा। लेकिन श्रवण के लिए सबसे बड़ा गौरव क्रिकेट मैच देखना नहीं, बल्कि भारतीय सेना के जवानों के बीच रहना था। उसके लिए सैनिकों की वर्दी किसी हीरो से कम नहीं थी। यही कारण है कि वह हर समय सेना के प्रति सम्मान और प्रेम से भरा दिखाई देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्रवण के परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत साधारण है। उसके पिता सोना सिंह एक छोटे किसान हैं और मां आंगनवाड़ी में काम करती हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद इस परिवार ने अपने बेटे में देशभक्ति और संस्कारों की जो भावना जगाई, वह वास्तव में अनुकरणीय है। श्रवण के माता-पिता को भी यह अंदाजा नहीं था कि उनका छोटा-सा बेटा एक दिन पूरे देश के लिए प्रेरणा बन जाएगा। लेकिन सच्चाई यही है कि महानता कभी साधनों से नहीं, बल्कि विचारों और भावनाओं से जन्म लेती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज जब समाज में स्वार्थ और व्यक्तिगत लाभ की भावना बढ़ती दिखाई देती है, तब श्रवण सिंह जैसे बच्चे आशा की किरण बनकर सामने आते हैं। वह बताता है कि सच्चा देशप्रेम क्या होता है। देशभक्ति केवल नारों और भाषणों से सिद्ध नहीं होती, बल्कि सेवा, त्याग और समर्पण से प्रकट होती है। श्रवण ने यह साबित कर दिया कि यदि मन में राष्ट्र के प्रति प्रेम हो तो छोटी उम्र भी बड़े कार्य करने से नहीं रोक सकती।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्रवण सिंह वास्तव में भारत माता का वह वीर पुत्र है, जिसकी कहानी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी। उसकी आंखों में सैनिक बनने का सपना केवल उसका व्यक्तिगत सपना नहीं, बल्कि राष्ट्र के गौरव का सपना है। वह करोड़ों बच्चों के लिए उदाहरण है कि देश के प्रति प्रेम और सम्मान बचपन से ही जीवन का सबसे बड़ा संस्कार होना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह नन्हा सिपाही केवल पंजाब का नहीं, बल्कि पूरे भारत का गौरव बन चुका है। उसकी देशभक्ति, निस्वार्थ सेवा और समर्पण की भावना हर भारतीय के हृदय में राष्ट्रप्रेम की नई ऊर्जा भरती है। श्रवण सिंह जैसे बच्चे ही भारत के भविष्य की असली ताकत हैं, जिनके कारण यह विश्वास और मजबूत होता है कि भारत की आत्मा आज भी देशभक्ति और बलिदान की भावना से ओतप्रोत है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div>  <strong>    *कांतिलाल मांडोत*</strong></div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 15:59:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक ऑपरेशन जिसने बदल दी युद्ध की तस्वीर: ऑपरेशन सिंदूर और दो सेनाओं के बीच तकनीकी अंतर</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>भारत </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"><strong>सुधांशु कुमार द्वारा</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong> </strong>7 मई 2025 की रात भारत ने सिर्फ 23 मिनट में ऐसा सैन्य अभियान पूरा किया जिसने पूरे क्षेत्र की रणनीतिक सोच बदल दी। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पीओके में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों पर बेहद सटीक हमले किए। इन हमलों में आधुनिक मिसाइलें, सैटेलाइट-निर्देशित हथियार और ड्रोन का इस्तेमाल हुआ। सबसे अहम बात यह रही कि भारत ने पाकिस्तान की चीनी तकनीक वाली एयर डिफेंस प्रणाली को निष्क्रिय करते हुए मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया।</p>
<p style="text-align:justify;">दो दिन के भीतर दुनिया के सामने सैटेलाइट तस्वीरें आ गईं। Maxar, KawaSpace और MizarVision जैसी कंपनियों द्वारा जारी तस्वीरों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178485/an-operation-that-changed-the-face-of-war-operation-sindoor"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/whatsapp-image-2026-05-07-at-19.11.42.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>भारत </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"><strong>सुधांशु कुमार द्वारा</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong> </strong>7 मई 2025 की रात भारत ने सिर्फ 23 मिनट में ऐसा सैन्य अभियान पूरा किया जिसने पूरे क्षेत्र की रणनीतिक सोच बदल दी। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पीओके में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों पर बेहद सटीक हमले किए। इन हमलों में आधुनिक मिसाइलें, सैटेलाइट-निर्देशित हथियार और ड्रोन का इस्तेमाल हुआ। सबसे अहम बात यह रही कि भारत ने पाकिस्तान की चीनी तकनीक वाली एयर डिफेंस प्रणाली को निष्क्रिय करते हुए मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया।</p>
<p style="text-align:justify;">दो दिन के भीतर दुनिया के सामने सैटेलाइट तस्वीरें आ गईं। Maxar, KawaSpace और MizarVision जैसी कंपनियों द्वारा जारी तस्वीरों में साफ दिखा कि किन ठिकानों को निशाना बनाया गया और कितना नुकसान हुआ। शाहबाज एयरबेस का हैंगर पूरी तरह तबाह दिखाई दिया, जबकि कई एयरबेस की रनवे और रडार सिस्टम भी क्षतिग्रस्त मिले। इन तस्वीरों ने भारत के दावों को मजबूत प्रमाण दे दिया।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>फर्क सिर्फ हमले का नहीं, सोच का था</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">भारत ने अपने हर हमले का प्रमाण दुनिया के सामने रखा। यही सबसे बड़ा अंतर था। आधुनिक युद्ध में केवल हमला करना काफी नहीं होता, यह भी जरूरी है कि दुनिया देख सके कि हमला किस पर हुआ और क्यों हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी तरफ पाकिस्तान की प्रतिक्रिया अलग थी। सीमा पार से भारी गोलाबारी हुई, जिसमें मंदिर, गुरुद्वारे और नागरिक इलाके प्रभावित हुए। पुंछ, राजौरी और कश्मीर के कई इलाकों में आम नागरिकों को निशाना बनाया गया। कई लोगों की जान गई और घर तबाह हुए। इन हमलों का कोई स्पष्ट सैन्य लक्ष्य दिखाई नहीं दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">यहीं से दोनों देशों की सैन्य क्षमता और तकनीकी सोच का अंतर साफ हो गया।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>भारत का युद्ध मॉडल पूरी तरह तकनीक आधारित था</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">ऑपरेशन से पहले भारत की कई एजेंसियों ने मिलकर काम किया। सैटेलाइट निगरानी, ड्रोन सर्विलांस, इंटरसेप्टेड कम्युनिकेशन और रियल टाइम इंटेलिजेंस को एक साथ जोड़कर लक्ष्य तय किए गए। हर जानकारी सीधे सेना और वायुसेना के कमांडरों तक पहुंच रही थी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह केवल पारंपरिक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि आधुनिक तकनीक और इंटेलिजेंस का संयुक्त इस्तेमाल था। भारत ने भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी, बल्कि डेटा और सटीक जानकारी के आधार पर कार्रवाई की।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>स्वदेशी रक्षा तकनीक की ताकत</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल हुए कई हथियार और ड्रोन भारत में बने या भारत के सहयोग से विकसित किए गए थे। ब्रह्मोस, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, स्काईस्ट्राइकर और नागास्त्र जैसे सिस्टम भारत की बढ़ती रक्षा आत्मनिर्भरता का उदाहरण बने।</p>
<p style="text-align:justify;">इन हथियारों का सफल इस्तेमाल केवल सैन्य उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग के लिए भी बड़ी सफलता है। इससे आने वाले समय में रिसर्च और निवेश दोनों बढ़ेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके विपरीत पाकिस्तान का रक्षा ढांचा बड़े पैमाने पर विदेशी हथियारों पर निर्भर है। ऐसे में किसी बड़े नुकसान के बाद उसकी भरपाई आसान नहीं होती।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सैटेलाइट तस्वीरों ने बदल दिया प्रचार का खेल</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान ने दावा किया कि भारत ने नागरिक इलाकों पर हमला किया, लेकिन सैटेलाइट तस्वीरों ने इन दावों को कमजोर कर दिया। आधुनिक दौर में अब केवल बयान देकर सच नहीं बदला जा सकता। कुछ ही घंटों में सैटेलाइट तस्वीरें पूरी दुनिया के सामने वास्तविक स्थिति ला देती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यही आधुनिक तकनीक की सबसे बड़ी ताकत है — पारदर्शिता।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>परमाणु हथियारों की रणनीति पर असर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कई वर्षों तक पाकिस्तान की रणनीति यह रही कि परमाणु हथियारों के डर से भारत बड़े सैन्य कदम नहीं उठाएगा। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर ने यह धारणा बदल दी।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत ने यह दिखाया कि सीमित, सटीक और नियंत्रित सैन्य कार्रवाई संभव है, बिना युद्ध को बड़े स्तर तक ले जाए। भारत ने केवल आतंकी ढांचे को निशाना बनाया, न कि पाकिस्तानी सेना या नागरिकों को।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पाकिस्तान की पुरानी रणनीतिक बढ़त कमजोर पड़ती दिखाई दी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ड्रोन युद्ध का नया दौर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">यह पहली बार था जब दो परमाणु संपन्न देशों के बीच इतने बड़े स्तर पर ड्रोन का इस्तेमाल हुआ। भारत ने सटीक निशाना लगाने वाले ड्रोन इस्तेमाल किए, जबकि पाकिस्तान ने बड़ी संख्या में ड्रोन भेजकर दबाव बनाने की कोशिश की।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत की एयर डिफेंस प्रणाली ने अधिकांश ड्रोन को रास्ते में ही रोक दिया। इससे साफ हुआ कि भविष्य के युद्धों में केवल हथियारों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता और तकनीकी क्षमता ज्यादा मायने रखेगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>बदलते युद्ध का नया संदेश</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया कि आने वाले समय में युद्ध केवल ताकत से नहीं, बल्कि तकनीक, सटीकता और जवाबदेही से तय होंगे। भारत ने दुनिया को दिखाया कि आधुनिक युद्ध में पारदर्शिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी सैन्य क्षमता।</p>
<p style="text-align:justify;">सैटेलाइट लगातार देख रहे हैं, तकनीक सब रिकॉर्ड कर रही है और अब सच को लंबे समय तक छिपाना आसान नहीं रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 19:17:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्यमंत्री  ने रक्षा प्रदर्शनी का किया अवलोकन, उभरती स्वदेशी क्षमताओं को सराहा।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>नॉर्थ टेक सिम्पोजियम-2026 में मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश  योगी आदित्यनाथ जी ने रक्षा प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए देश की उभरती स्वदेशी रक्षा क्षमताओं की सराहना की। तीन दिवसीय इस आयोजन में आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप विकसित अत्याधुनिक तकनीकों और उपकरणों का व्यापक प्रदर्शन किया गया, जिसमें सेना, उद्योग और स्टार्टअप्स की सहभागिता स्पष्ट रूप से दिखाई दी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">            प्रदर्शनी के दौरान मुख्यमंत्री  ने बुलेटप्रूफ जैकेट, टैक्टिकल गियर, अत्याधुनिक हेलमेट और मल्टी-टेरेन ऑपरेशंस के लिए विकसित सैन्य उपकरणों का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विशेषज्ञों से तकनीकी विशेषताओं की जानकारी ली और उत्पादों की उपयोगिता</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178377/chief-minister-visits-defense-exhibition-and-appreciates-emerging-indigenous-capabilities"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1001767890.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>नॉर्थ टेक सिम्पोजियम-2026 में मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश  योगी आदित्यनाथ जी ने रक्षा प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए देश की उभरती स्वदेशी रक्षा क्षमताओं की सराहना की। तीन दिवसीय इस आयोजन में आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप विकसित अत्याधुनिक तकनीकों और उपकरणों का व्यापक प्रदर्शन किया गया, जिसमें सेना, उद्योग और स्टार्टअप्स की सहभागिता स्पष्ट रूप से दिखाई दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      प्रदर्शनी के दौरान मुख्यमंत्री  ने बुलेटप्रूफ जैकेट, टैक्टिकल गियर, अत्याधुनिक हेलमेट और मल्टी-टेरेन ऑपरेशंस के लिए विकसित सैन्य उपकरणों का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विशेषज्ञों से तकनीकी विशेषताओं की जानकारी ली और उत्पादों की उपयोगिता पर चर्चा की। विशेष रूप से ‘हेड-टू-बूट’ सुरक्षा प्रणाली, अत्यधिक विषम तापमान में पहने जाने वाले कपड़े और मॉड्यूलर प्रोटेक्शन सिस्टम जैसे इनोवेशन आकर्षण का केंद्र रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 19:54:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस: सुरक्षित भारत का निर्माण</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;line-height:normal;background:rgb(246,246,246);text-align:justify;" align="right"><strong><span style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#2d2d2d;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></span></strong></p>
<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">प्रत्येक वर्ष 4 मार्च को भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस का आयोजन हमें उस उत्तरदायित्व का बोध कराता है जो केवल सीमा पर तैनात प्रहरियों तक सीमित नहीं है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि जिसका विस्तार देश के प्रत्येक ग्राम</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">नगर और गलियों तक है। सुरक्षा एक व्यापक संकल्पना है जिसमें न केवल बाह्य शत्रुओं से रक्षा सम्मिलित है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">वरन आंतरिक स्थिरता</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">आर्थिक सुदृढ़ता और प्राकृतिक आपदाओं से बचाव भी इसके अभिन्न अंग हैं। इस दिवस की पृष्ठभूमि अत्यंत गौरवमयी है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जिसकी नींव वर्ष 1999 में तत्कालीन राष्ट्रपति के. आर. नारायणन</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172183/national-security-day-building-a-safe-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/images1.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;line-height:normal;background:rgb(246,246,246);text-align:justify;" align="right"><strong><span style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#2d2d2d;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">प्रत्येक वर्ष 4 मार्च को भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस का आयोजन हमें उस उत्तरदायित्व का बोध कराता है जो केवल सीमा पर तैनात प्रहरियों तक सीमित नहीं है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि जिसका विस्तार देश के प्रत्येक ग्राम</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">नगर और गलियों तक है। सुरक्षा एक व्यापक संकल्पना है जिसमें न केवल बाह्य शत्रुओं से रक्षा सम्मिलित है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">वरन आंतरिक स्थिरता</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">आर्थिक सुदृढ़ता और प्राकृतिक आपदाओं से बचाव भी इसके अभिन्न अंग हैं। इस दिवस की पृष्ठभूमि अत्यंत गौरवमयी है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जिसकी नींव वर्ष 1999 में तत्कालीन राष्ट्रपति के. आर. नारायणन द्वारा रखी गई थी। यह दिवस राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की ३६वीं वर्षगांठ का प्रतीक है। हैदराबाद में स्थित यह गौरवशाली संस्थान दशकों से नागरिकों को आपदा प्रबंधन</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">आतंकवाद के विरुद्ध प्रतिकार</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">आभासी प्रहारों और प्राकृतिक आपदाओं के समय धैर्य एवं कौशल से कार्य करने का प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। वर्ष 2026 के परिप्रेक्ष्य में</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जब भारत एक वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी धाक जमा रहा है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">तब इस दिवस की महत्ता और भी बढ़ जाती है क्योंकि एक सशक्त राष्ट्र की आधारशिला उसकी सुरक्षा व्यवस्था की अभेद्यता पर टिकी होती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">यदि हम भारत की सुरक्षा यात्रा के इतिहास का अवलोकन करें</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">तो यह संघर्ष और विजय की गाथाओं से परिपूर्ण है। 15 अगस्त 1947 को जब भारत ने पराधीनता की बेड़ियाँ काटीं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">तो उसके साथ ही विभाजन की त्रासदी और सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रायोजित घुसपैठ की चुनौतियां भी सामने आईं। 1962 के युद्ध ने हमें यह सिखाया कि सुरक्षा के प्रति शिथिलता घातक हो सकती है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जिसके पश्चात 1963 में नागरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रशिक्षण संस्थानों की रूपरेखा तैयार की गई। इसके उपरांत 1965 और 1971 के युद्धों ने भारतीय सैन्य बल की अदम्य शक्ति को सिद्ध किया और यह स्पष्ट कर दिया कि सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक नीतियों की आवश्यकता है। इसी दूरदर्शिता के परिणामस्वरूप 1999 में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का गठन हुआ</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जो प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्र की रक्षा हेतु रणनीतिक निर्णय लेती है। इतिहास गवाह है कि जब-जब राष्ट्र पर संकट आया</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">चाहे वह 2004 की विनाशकारी सुनामी हो या 2008 का मुंबई आतंकी हमला</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">प्रशिक्षित नागरिकों और स्वयंसेवकों ने सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मानवता की रक्षा की। वीरता और समर्पण की इसी परंपरा को सम्मानित करने हेतु केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा प्रतिवर्ष पुरस्कार वितरित किए जाते हैं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जो सुरक्षा को केवल एक सरकारी विभाग की जिम्मेदारी न मानकर इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक कर्तव्य से जोड़ते हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">आज के इस आधुनिक युग में सुरक्षा की परिभाषा केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं रह गई है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि यह बहुआयामी और अत्यंत जटिल हो चुकी है। वर्तमान समय में भारत के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती सीमा पार से संचालित आतंकवाद है। कश्मीर की शांत वादियों में अशांति फैलाने के उद्देश्य से विदेशी शक्तियों द्वारा समर्थित आतंकी संगठन निरंतर षड्यंत्र रचते रहते हैं। 2019 का पुलवामा प्रहार भारतीय सुरक्षा इतिहास का एक दुखद अध्याय था</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">किंतु इसके उत्तर में किए गए नियोजित वायु सेना के प्रहार ने विश्व को यह संदेश दिया कि नवीन भारत अब केवल रक्षात्मक नहीं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए कठोर निर्णय लेने में भी सक्षम है। आतंकवाद के साथ-साथ आज </span><span>'</span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">आभासी सुरक्षा</span><span>' </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">या कंप्यूटर तंत्र की सुरक्षा एक अत्यंत गंभीर विषय बनकर उभरी है। जैसे-जैसे हम अंकीय क्रांति और वित्तीय लेन-देन के लिए अंतरजाल पर निर्भर हो रहे हैं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">वैसे-वैसे विदेशी हैकर्स और शत्रु देशों द्वारा हमारे डेटा और महत्वपूर्ण सूचनाओं को चुराने के प्रयास बढ़ गए हैं। रूस और यूक्रेन के मध्य चले संघर्ष के उपरांत आभासी आक्रमणों की तीव्रता में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। भारत जैसे विशाल देश में</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जहाँ करोड़ों लोग डिजिटल माध्यमों का प्रयोग कर रहे हैं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">वहाँ एक छोटी सी तकनीकी चूक भी राष्ट्र की आर्थिक व्यवस्था को चोट पहुँचा सकती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर नक्सलवाद और वामपंथी उग्रवाद जैसी समस्याएं राष्ट्र की प्रगति में बाधक रही हैं। छत्तीसगढ़ और झारखंड के वनाच्छादित क्षेत्रों में सक्रिय उग्रवादी तत्व विकास कार्यों को रोकने का प्रयास करते हैं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जिससे निपटने के लिए सरकार निरंतर सामरिक और विकासात्मक रणनीतियों का समन्वय कर रही है। वहीं दूसरी ओर</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश की सीमाओं पर पड़ोसी देशों की विस्तारवादी नीतियां और आक्रामकता एक सतत चिंता का विषय है। 2020 में गलवान घाटी में हुआ संघर्ष इस बात का प्रमाण है कि शांति बनाए रखने के लिए भी सैन्य तत्परता अनिवार्य है। थल और नभ के साथ-साथ जलमार्ग की सुरक्षा भी भारत के लिए प्राणवायु के समान है। हिंद महासागर में विदेशी नौसेनाओं की बढ़ती हलचल और समुद्री डाकुओं का आतंक हमारे व्यापारिक हितों के लिए चुनौती है। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत ने चतुर्भुज सुरक्षा संवाद (क्वाड) जैसे अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों के माध्यम से अपनी समुद्री उपस्थिति को सशक्त किया है। इसके अतिरिक्त</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न होने वाली प्राकृतिक आपदाएं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जैसे हिमालयी क्षेत्रों में आने वाली बाढ़ और समुद्री चक्रवात</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा बन चुके हैं क्योंकि ये जन-धन की अपार हानि करते हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">इन सभी चुनौतियों का प्रत्युत्तर देने हेतु भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। </span><span>'</span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">आत्मनिर्भर भारत</span><span>' </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">अभियान के अंतर्गत रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में हम स्वावलंबी बन रहे हैं। 2026 तक हमारा लक्ष्य है कि भारतीय सेना द्वारा प्रयोग किए जाने वाले 70 प्रतिशत अस्त्र-शस्त्र स्वदेशी हों। तेजस जैसे युद्धक विमान और अग्नि जैसी शक्तिशाली प्रक्षेपास्त्र प्रणालियां भारत की वैज्ञानिक प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी </span><span>'</span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">साइबर सुरक्षा संचालन केंद्रों</span><span>' </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">की स्थापना की गई है जो चौबीसों घंटे हमारे आभासी अंतरिक्ष की निगरानी करते हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने अपनी त्वरित कार्यप्रणाली से आपदाओं के समय होने वाली क्षति को न्यूनतम करने में सफलता प्राप्त की है। सरकार ने शिक्षा के स्तर पर भी सुरक्षा बोध को अनिवार्य बनाने का प्रयास किया है। विद्यालयों और महाविद्यालयों में राष्ट्रीय कैडेट कोर और राष्ट्रीय सेवा योजना के माध्यम से युवाओं को अनुशासन और राष्ट्र रक्षा का पाठ पढ़ाया जा रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली प्रदर्शनियाँ और संगोष्ठियाँ सामान्य नागरिकों को उन खतरों के प्रति सचेत करती हैं जिनसे वे अनभिज्ञ हो सकते हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">परंतु</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">प्रश्न यह उठता है कि एक सामान्य नागरिक इस महायज्ञ में क्या आहुति दे सकता है</span><span>? </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">सुरक्षा का प्रथम नियम </span><span>'</span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">सजगता</span><span>' </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">है। एक जागरूक नागरिक समाज की आँखें और कान होता है। सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी लावारिस वस्तु या संदिग्ध व्यक्ति की सूचना तुरंत सुरक्षा बलों को देना एक अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। अंकीय जगत में सुरक्षा बरतने के लिए जटिल कूटशब्दों का प्रयोग करना</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">अपरिचित संदेशों से सावधान रहना और वित्तीय जानकारी को गोपनीय रखना आज के युग की अनिवार्य आवश्यकता है। इसके साथ ही</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">प्राकृतिक आपदाओं के समय घबराने के स्थान पर पूर्व-तैयारी रखना</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जैसे प्राथमिक चिकित्सा किट और आवश्यक वस्तुओं का संचय करना</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">न केवल व्यक्ति विशेष बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण हैं जहाँ सामान्य नागरिकों ने अपनी सूझबूझ से बड़े संकटों को टाला है। मुंबई के आतंकी हमलों के दौरान स्थानीय टैक्सी चालकों और होटल कर्मियों ने जिस साहस का परिचय दिया</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">वह सेना के पराक्रम से कम नहीं था। अतः</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">सुरक्षा का मार्ग व्यक्तिगत अनुशासन से होकर राष्ट्र के गौरव तक जाता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">भविष्य की ओर दृष्टि डालें तो आने वाला समय कृत्रिम मेधा</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">मानवरहित विमानों (ड्रोन) और क्वांटम संगणना का है। ये तकनीकें जहाँ सुरक्षा को अभेद्य बनाएंगी</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">वहीं नई चुनौतियां भी प्रस्तुत करेंगी। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित की जा रही कृत्रिम मेधा प्रणालियां सीमाओं पर बिना मानवीय हस्तक्षेप के निगरानी रखने में सक्षम होंगी। अंतरिक्ष की सुरक्षा के क्षेत्र में भी भारत ने 2019 के एंटी-सैटेलाइट परीक्षण के माध्यम से अपनी धाक जमाई है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जिससे यह सुनिश्चित हुआ है कि हमारे संचार उपग्रह अंतरिक्ष में भी सुरक्षित हैं। भविष्य की सुरक्षा केवल शस्त्रों से नहीं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि श्रेष्ठतम तकनीक और अटूट एकता से सुनिश्चित होगी। आर्थिक विषमता और सामाजिक भेदभाव भी कभी-कभी आंतरिक विद्रोह का कारण बनते हैं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">इसलिए वास्तविक सुरक्षा तभी संभव है जब देश के अंतिम व्यक्ति तक विकास के फल पहुँचें और वह स्वयं को राष्ट्र की मुख्यधारा का हिस्सा समझे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">निष्कर्षतः</span><span style="font-size:11pt;line-height:115%;font-family:Calibri, 'sans-serif';">, </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस एक ऐसा अवसर है जो हमें आत्मचिंतन की प्रेरणा देता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हम एक ऐसे देश के निवासी हैं जिसकी सीमाएं हिमालय की चोटियों से लेकर हिंद महासागर की गहराइयों तक फैली हैं। इसकी रक्षा का दायित्व केवल उन वीरों का नहीं है जो शून्य से नीचे के तापमान में सीमाओं पर प्रहरी बने खड़े हैं</span><span style="font-size:11pt;line-height:115%;font-family:Calibri, 'sans-serif';">, </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि यह हमारा सामूहिक धर्म है। प्रधानमंत्री के शब्दों में</span><span style="font-size:11pt;line-height:115%;font-family:Calibri, 'sans-serif';">, </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">सुरक्षा एक साझा संकल्प है। जब तक राष्ट्र का प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को देश का प्रथम रक्षक नहीं मानेगा</span><span style="font-size:11pt;line-height:115%;font-family:Calibri, 'sans-serif';">, </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">तब तक पूर्ण सुरक्षा की कल्पना अधूरी है। आइए</span><span style="font-size:11pt;line-height:115%;font-family:Calibri, 'sans-serif';">, </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">इस पावन दिवस पर हम यह प्रतिज्ञा लें कि हम सदैव सजग रहेंगे</span><span style="font-size:11pt;line-height:115%;font-family:Calibri, 'sans-serif';">, </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">विधि-व्यवस्था का सम्मान करेंगे और अपने आचरण से राष्ट्र की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखेंगे। सतर्क भारत ही समर्थ भारत है और समर्थ भारत ही विश्व शांति का अग्रदूत बन सकता है। जय हिंद</span><span style="font-size:11pt;line-height:115%;font-family:Calibri, 'sans-serif';">, </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जय भारत।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Mar 2026 18:02:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूएस राजदूत गोर को सेना मुख्यालय में किसने जाने दिया, विपक्ष भड़का, सेना की सफाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की भारतीय सेना की वेस्टर्न कमांड मुख्यालय की यात्रा ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। सोमवार को चंडीगढ़ के चंडीमंदिर स्थित मुख्यालय का दौरा करने वाले गोर की इस यात्रा को विपक्ष ने नरेंद्र मोदी सरकार की अमेरिकी हितों को प्राथमिकता देने की नीति का विस्तार बताया है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों को अमेरिका के इशारों पर चलाया जा रहा है। वहीं, सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस यात्रा को रेयर लेकिन अप्रत्याशित नहीं बताते हुए भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी के बढ़ते संबंधों का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170141/who-allowed-us-ambassador-gore-into-army-headquarters-opposition-furious"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/442.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की भारतीय सेना की वेस्टर्न कमांड मुख्यालय की यात्रा ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। सोमवार को चंडीगढ़ के चंडीमंदिर स्थित मुख्यालय का दौरा करने वाले गोर की इस यात्रा को विपक्ष ने नरेंद्र मोदी सरकार की अमेरिकी हितों को प्राथमिकता देने की नीति का विस्तार बताया है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों को अमेरिका के इशारों पर चलाया जा रहा है। वहीं, सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस यात्रा को रेयर लेकिन अप्रत्याशित नहीं बताते हुए भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी के बढ़ते संबंधों का संकेत बताया। गोर इसके बाद अब बेंगलुरु का दौरा करने वाले हैं। जहां वे हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड कंपनी का दौरा भी कर सकते हैं। बेंगलुरु में सेना से जुड़े कई कार्यक्रम रखे गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सर्जियो गोर, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी हैं, ने पिछले महीने भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप में पदभार ग्रहण किया है। वे दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के लिए अमेरिकी विशेष दूत के रूप में भी कार्यरत हैं। अपनी यात्रा की जानकारी साझा करते हुए गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया: "अभी-अभी चंडीगढ़ पहुंचा हूं। भारतीय सेना की वेस्टर्न कमांड का दौरा करने के लिए उत्सुक हूं।" उनके साथ अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पापारो भी थे।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की यात्रा से पहले किसी विदेशी राजदूत द्वारा भारतीय सेना के पश्चिमी कमान मुख्यालय का दौरा करने का कोई दस्तावेजी उदाहरण नहीं है। यह पहली बार है। 2014 से पहले किसी विदेशी राजदूत द्वारा भारतीय सेना कमान मुख्यालय का दौरा करने का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है। 2016 में, हमले के बाद जांच के लिए पाकिस्तान की संयुक्त जांच टीम (जेआईटी) को पठानकोट वायुसेना अड्डे का निरीक्षण करने की अनुमति दी गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">वेस्टर्न कमांड ने एक्स पर इस यात्रा की जानकारी साझा करते हुए कहा: "भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर... और कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पापारो... ने वेस्टर्न कमांड मुख्यालय का दौरा किया और लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, आर्मी कमांडर, वेस्टर्न कमांड के साथ भारत की पश्चिमी सीमा पर रणनीतिक सुरक्षा गतिशीलता पर गहन चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल को वेस्टर्न फ्रंट के परिप्रेक्ष्य पर व्यापक जानकारी दी गई, जिसमें परिचालन तैयारियां, विशिष्ट विरासत, ऑपरेशन सिंदूर का संचालन और राष्ट्र निर्माण तथा क्षेत्रीय स्थिरता में भारतीय सेना की महत्वपूर्ण भूमिका शामिल है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 23:33:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तिनसुकिया के मकुम में समन्वय शक्ति - सैन्य नागरिक संलयन: ऊपरी असम में संयुक्त सुरक्षा एवं ड्रोन-रोधी अभ्यास।</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>धेमाजी असम,</strong></div>
<div>  </div>
<div>भारतीय सेना ने नागरिक प्रशासन, पुलिस, अर्धसैनिक बलों और उद्योग जगत के हितधारकों के सहयोग से ऊपरी असम में तैयारियों को मज़बूत करने और महत्वपूर्ण ऊर्जा अवसंरचना की सुरक्षा के लिए "समन्वय शक्ति - सैन्य नागरिक संलयन" के अंतर्गत तीन प्रमुख अभ्यास किए।</div>
<div>  </div>
<div><strong><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-08/%E0%A4%B8%E0%A5%88%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B2%E0%A4%AF%E0%A4%A8-%E0%A4%8A%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A4%AE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%8F%E0%A4%B5%E0%A4%82-%E0%A4%A1%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A7%E0%A5%80-%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8.jpg" alt="सैन्य नागरिक संलयन ऊपरी असम में संयुक्त सुरक्षा एवं ड्रोन-रोधी अभ्यास" width="679" height="453" /></strong></div>
<div>  </div>
<div>ऑयल इंडिया के हेबेडा संग्रह केंद्र, मकुम (तिनसुकिया) में, एक संयुक्त सुरक्षा अभ्यास में एक विद्रोही हमले का अनुकरण किया गया। इस अभ्यास में कक्ष हस्तक्षेप, बम निरोधक, हताहतों को निकालना, अग्निशमन, तेल रिसाव नियंत्रण और क्षति आकलन शामिल थे। सेना की त्वरित प्रतिक्रिया और बम निरोधक टीमों, ऑयल इंडिया सुरक्षा, असम औद्योगिक सुरक्षा बल,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154158/coordination-shakti-in-tinsukias-makum-military-citizen-finance-joint"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/1000326441.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>धेमाजी असम,</strong></div>
<div> </div>
<div>भारतीय सेना ने नागरिक प्रशासन, पुलिस, अर्धसैनिक बलों और उद्योग जगत के हितधारकों के सहयोग से ऊपरी असम में तैयारियों को मज़बूत करने और महत्वपूर्ण ऊर्जा अवसंरचना की सुरक्षा के लिए "समन्वय शक्ति - सैन्य नागरिक संलयन" के अंतर्गत तीन प्रमुख अभ्यास किए।</div>
<div> </div>
<div><strong><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-08/%E0%A4%B8%E0%A5%88%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B2%E0%A4%AF%E0%A4%A8-%E0%A4%8A%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A4%AE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%8F%E0%A4%B5%E0%A4%82-%E0%A4%A1%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A7%E0%A5%80-%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8.jpg" alt="सैन्य नागरिक संलयन ऊपरी असम में संयुक्त सुरक्षा एवं ड्रोन-रोधी अभ्यास" width="679" height="453"></img></strong></div>
<div> </div>
<div>ऑयल इंडिया के हेबेडा संग्रह केंद्र, मकुम (तिनसुकिया) में, एक संयुक्त सुरक्षा अभ्यास में एक विद्रोही हमले का अनुकरण किया गया। इस अभ्यास में कक्ष हस्तक्षेप, बम निरोधक, हताहतों को निकालना, अग्निशमन, तेल रिसाव नियंत्रण और क्षति आकलन शामिल थे। सेना की त्वरित प्रतिक्रिया और बम निरोधक टीमों, ऑयल इंडिया सुरक्षा, असम औद्योगिक सुरक्षा बल, राज्य अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं और चिकित्सा इकाइयों ने एकीकृत प्रतिक्रिया क्षमताओं का प्रदर्शन करते हुए भाग लिया।</div>
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<div>इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, डिगबोई में, एक ड्रोन-रोधी अभ्यास में एक नकली कामिकेज़ ड्रोन हमले की प्रतिक्रिया का पूर्वाभ्यास किया गया। इस अभ्यास में ड्रोन का पता लगाने, अग्निशमन, हताहतों को निकालने, ट्राइएज, बम निरोधक, स्थल नियंत्रण और भीड़ प्रबंधन का परीक्षण किया गया। नागरिकों को सुरक्षा उपायों और झूठे अलार्म से बचने के लिए ड्रोन और उपग्रहों के बीच अंतर करने के बारे में भी जागरूक किया गया।</div>
<div><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-08/1000326442.jpg" alt="1000326442" width="1152" height="864"></img></div>
<div>कोल इंडिया लिमिटेड, लेडो में, सेना ने सीआईएल और असम औद्योगिक सुरक्षा बल के सहयोग से सुरक्षा प्रतिक्रिया, आपदा तैयारी और जन जागरूकता बढ़ाने के लिए एक व्यापक संयुक्त अभ्यास सफलतापूर्वक आयोजित किया। इन अभ्यासों ने सैन्य-नागरिक तालमेल को मजबूत किया, अंतर-एजेंसी समन्वय को प्रमाणित किया और असम की महत्वपूर्ण सुविधाओं की सुरक्षा में जनता का विश्वास बढ़ाया</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 Aug 2025 18:43:49 +0530</pubDate>
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