<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/30238/human-rights" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>human rights - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/30238/rss</link>
                <description>human rights RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>संपादकीय पेज के लिए समसामयिक आलेख </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश में इन दिनों मजहबी आतंकवाद ने लवजेहाद का मुखौटा पहन लिया है। लव जिहाद सिर्फ श्रद्धा वालकर, साक्षी, सीमा गौतम, अनामिता, यशोदा, रबिता पहाड़िन, तनिष्का शर्मा, निकिता तोमर, चयनिका और टिक-टॉक स्टार शिवानी जैसी सैकड़ों हिंदू लड़कियों की कहानियां नहीं हैं। वास्तविकता में लव जिहाद आतंकवाद का ही दूसरा चेहरा है। यह हिंदू बेटियों पर अंतहीन अत्याचार, उनके धर्मांतरण और जिहाद की जुगुत्सा का बेहद वीभत्स और जीवंत चित्रण है। लव जिहाद या रोमियो जिहाद एक षड्यंत्र है, जिसके तहत मुस्लिम लड़के, गैर-मुस्लिम लड़कियों के साथ प्यार का ढोंग करके उनका धर्म-परिवर्तन कराते हैं। ये सिर्फ उनकी अस्मत ही</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181582/current-articles-for-editorial-page"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas16.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश में इन दिनों मजहबी आतंकवाद ने लवजेहाद का मुखौटा पहन लिया है। लव जिहाद सिर्फ श्रद्धा वालकर, साक्षी, सीमा गौतम, अनामिता, यशोदा, रबिता पहाड़िन, तनिष्का शर्मा, निकिता तोमर, चयनिका और टिक-टॉक स्टार शिवानी जैसी सैकड़ों हिंदू लड़कियों की कहानियां नहीं हैं। वास्तविकता में लव जिहाद आतंकवाद का ही दूसरा चेहरा है। यह हिंदू बेटियों पर अंतहीन अत्याचार, उनके धर्मांतरण और जिहाद की जुगुत्सा का बेहद वीभत्स और जीवंत चित्रण है। लव जिहाद या रोमियो जिहाद एक षड्यंत्र है, जिसके तहत मुस्लिम लड़के, गैर-मुस्लिम लड़कियों के साथ प्यार का ढोंग करके उनका धर्म-परिवर्तन कराते हैं। ये सिर्फ उनकी अस्मत ही नही लूटते है वरन उनके अश्लील वीडियो एमएमएस बना कर ब्लेक मेल कर उनको दूसरी हिन्दू लड़कियों को चंगुल मे फंसाने के लिए मजबूर करते हैं इतना ही नहीं जाल में फंसी इन लड़कियों को अब सुनियोजित तरीके से नशे की डोज देकर नशे की आदत डालने का धंधा भी चल रहा है इसके साथ ही इनको फुसलाकर और की बार ब्लेक मेल कर और जबरन धर्म परिवर्तन करने के लिए मजबूर किया जाता है इसके साथ ही इनका आर्थिक शोषण भी किया जाता है यदि शिकार लड़की अच्छे सम्पन्न परिवार से सम्बद्ध है तो उसे परिवार की बदनामी का भय दिखा कर लाखों रुपए की रकम बार बार वसूली जाती है। </div>
<div style="text-align:justify;">हाल ही में महाराष्ट्र के नागपुर से एक ऐसा खौफनाक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे देश को सन्न कर दिया है। यहां भारतीय वायुसेना  के एक अधिकारी की 24 साल की पत्नी को न सिर्फ 'रेप' और ब्लैकमेल का शिकार बनाया गया, बल्कि 'काला जादू' (काला जादू) कर उसका निजी धर्म भी बदल दिया गया। इस खतरनाक वायरस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, आरोप है कि नागपुर में भारतीय वायु सेना के अधिकारी की पत्नी के साथ ये दरिंदगी की गई। पीड़िता का आरोप है कि उसे नशीली दवा देकर रेप किया गया, अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया गया और उससे लाखों रुपये ऐंठे गए. इन सबके बाद धर्म बदलने के लिए दबाव डाला गया। 
<div style="text-align:justify;">पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मदारे और अमीन शेख को गिरफ़्तार कर लिया है, जबकि मध्य प्रदेश के तामिया निवासी तीसरे आरोपी हजरत मौलाना की तलाश जारी है.पुलिस के मुताबिक, पीड़ित महिला का पति एयरफोर्स अधिकारी और अन्य शहर में अधिकारी है। महिला नागपुर में नौकरानी डीलिंग का काम करती है। इसी बात की फ़ायदेमंदी उसके स्कूल के पुराने क्लासमेट अय्याज़ ताज मदारे (26) ने रची है। पुलिस के मुताबिक शिकायत करने वाली 24 साल की महिला के पति इंडियन एयर फ़ोर्स में हैं और अभी दूसरे शहर में तैनात हैं. पीड़िता प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करती है. फरवरी 2025 में अयाज़ ने कथित तौर पर एक प्लॉट खरीदने के बहाने उससे संपर्क किया और उसे वर्धा रोड पर एक होटल में बुलाया. महिला का आरोप है कि उसने उसे नशीला पदार्थ मिला हुआ जूस पिलाया और बेहोशी की हालत में उसके साथ रेप किया, साथ ही इस हरकत का वीडियो और फ़ोटो भी बनाए और कथित तौर पर उससे 3.09 लाख रुपये ऐंठे. पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि उस पर इस्लाम अपनाने का दबाव डाला गया और धार्मिक रीति-रिवाजों के नाम पर उससे कई तरह की चीजें कराई गईं.</div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस ने बलात्कार, बार-बार यौन उत्पीड़न, जबरन वसूली, ब्लैकमेल और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोपों के साथ-साथ काला जादू विरोधी कानून की धाराओं को भी लागू किया है। नागपुर पुलिस की एक टीम उस मौलाना की तलाश कर रही है जिसने कथित तौर पर धर्म परिवर्तन कराया था।</div>
<div style="text-align:justify;">डीसीपी सुरेश रेड्डी ने कहा, "महिला ने अपनी शिकायत में बलात्कार, जबरन वसूली, धर्मांतरण और काला जादू का आरोप लगाया है। जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का फोरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है। यह सबूत बेहद अहम साबित होगा। धर्मांतरण कराने वाले मौलाना की तलाश में पुलिस की एक टीम दूसरे राज्य गई है। गहन जांच जारी है।"  नागपुर पुलिस ने अय्याज मदारे और अमीन शेख को गिरफ्तार कर लिया है।</div>
<div style="text-align:justify;">इससे पहले अभी अप्रैल माह में महाराष्ट्र के अमरावती जिले के अचलपुर-परतवाड़ा इलाके से एक बेहद गंभीर यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग मामले ने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी . पुलिस ने इस मामले के मुख्य आरोपी मोहम्मद अयान ऊर्फ मोहम्मद तनवीर को गिरफ्तार किया गया . प्राथमिक जांच में पता चला  कि आरोपीएआइएमआइएम का कार्यकर्ता है और लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाकर उनका अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करता था.</div>
<div style="text-align:justify;">अमरावती में 180 युवतियों को प्रेमजाल में फंसाकर 350 अश्लील वीडियो बनाए गए. आरोपियों ने ब्लैकमेल कर कई बार शोषण किया. पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच शुरू की.स्थानीय सांसद डॉ. अनिल बोंडे के अनुसार, यह मामला किसी बड़े संगठित गिरोह से जुड़ा हो सकता है. उन्होंने बताया कि मोहम्मद अयान और मोहम्मद जोयान सहित अन्य आरोपियों ने 180 से अधिक लड़कियों के करीब 350 आपत्तिजनक वीडियो बनाए. इन वीडियो के जरिए उन्हें देह व्यापार में धकेलने के लिए ब्लैकमेल किया गया इससे पहले यूपी के मिर्जापुर में जिम की आड़ में चल रहे एक बड़े धर्मांतरण रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है. इस गिरोह का संचालन पुलिस का एक सिपाही और उसके साथी मिलकर कर रहे थे. इंस्टाग्राम से दोस्ती, ब्लैकमेलिंग और फिर धर्म परिवर्तन के इस काले खेल में अब तक 6 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई .मिर्जापुर पुलिस ने जिम के जरिए संचालित हो रहे एक सुनियोजित धर्मांतरण नेटवर्क का खुलासा किया है. जीआरपी में तैनात सिपाही इरशाद खां और उसके शागिर्द फरीद अहमद ने 'आयरन फायर' और 'KGN 2.0' जिम की आड़ में 50 से अधिक लड़कियों को जाल में फंसाया.</div>
<div style="text-align:justify;"> ये आरोपी इंस्टाग्राम के जरिए युवतियों से संपर्क बढ़ाते थे और बाद में प्रेम जाल या आपत्तिजनक वीडियो के जरिए ब्लैकमेल कर उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाते थे. पुलिस ने मुख्य सरगना लकी अली के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया , जबकि सिपाही इरशाद और मुठभेड़ के बाद ट्रेनर फरीद को गिरफ्तार किया गया.</div>
<div style="text-align:justify;">इन सभी वारदातों के मद्देनज़र यह साफ  है हिन्दू लड़कियों को फुसलाकर लवजेहाद में फंसा कर अय्याशी नशाखोरी और ब्लैकमेलिंग कर उनके धर्मांतरण का सिलसिला चल रहा है इस के पीछे सुनियोजित साजिश है और मजहबी वित्त व लीगल मदद भी भूमिका निभा रही हैं इस सम्बंध में अधिकाधिक जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं पिछले 40 वर्ष से लेखन और पत्रकारिता से जुड़े हैं) सम्पर्क 9219179431 </div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181582/current-articles-for-editorial-page</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/181582/current-articles-for-editorial-page</guid>
                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 17:01:15 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/hindi-divas16.jpg"                         length="173958"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पटियाला में नेशनल कमीशन फॉर विमेन की पब्लिक हियरिंग से कई मामलों में तेज़ी से कार्रवाई हुई</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पटियाला</strong>,  NCW आपके द्वार’ पहल के तहत पटियाला में नेशनल कमीशन फॉर विमेन की पब्लिक हियरिंग में कई लंबे समय से पेंडिंग मामलों में तेज़ी से और सही दखल देखा गया, जिससे महिलाओं को समय पर न्याय दिलाने के कमीशन के वादे को फिर से पक्का किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान, नेशनल कमीशन फॉर विमेन की चेयरपर्सन, सुश्री विजया रहाटकर ने खुद महिलाओं और उनके परिवारों की शिकायतें सुनीं और संबंधित अधिकारियों को महिलाओं के खिलाफ हिंसा, हैरेसमेंट और जांच में लंबे समय तक देरी से जुड़े मामलों में तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">डिप्टी कमिश्नर डॉ. हिमांशु</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181548/public-hearing-of-national-commission-for-women-in-patiala-led"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1000910051.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पटियाला</strong>,  NCW आपके द्वार’ पहल के तहत पटियाला में नेशनल कमीशन फॉर विमेन की पब्लिक हियरिंग में कई लंबे समय से पेंडिंग मामलों में तेज़ी से और सही दखल देखा गया, जिससे महिलाओं को समय पर न्याय दिलाने के कमीशन के वादे को फिर से पक्का किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान, नेशनल कमीशन फॉर विमेन की चेयरपर्सन, सुश्री विजया रहाटकर ने खुद महिलाओं और उनके परिवारों की शिकायतें सुनीं और संबंधित अधिकारियों को महिलाओं के खिलाफ हिंसा, हैरेसमेंट और जांच में लंबे समय तक देरी से जुड़े मामलों में तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डिप्टी कमिश्नर डॉ. हिमांशु अग्रवाल और SSP वरुण शर्मा के नेतृत्व में पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा की गई तुरंत कार्रवाई की तारीफ करते हुए, सुश्री रहाटकर ने कहा कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों और कमीशन के बीच तालमेल से न्याय देने वाले सिस्टम में जनता का भरोसा मजबूत होता है, जिसमें पीड़ितों को बहुत ज़रूरी राहत देने के लिए समय पर दखल देना भी शामिल है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">-कनाडा में NRI महिला पर बेरहमी से हमले के मामले में FIR दर्ज</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान कमीशन के सामने लाए गए सबसे गंभीर मामलों में से एक एक जवान लड़की के माता-पिता से जुड़ा था, जिस पर 2024 में कनाडा में उसके पति ने बेरहमी से हमला किया था, जिससे उसके दिमाग में गंभीर चोटें आईं। पीड़ित का कनाडा में इलाज चल रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिवार ने कमीशन को बताया कि हालांकि कनाडा में क्रिमिनल केस दर्ज था, लेकिन आरोपी पति भारत भाग गया था। लगभग दो साल तक लोकल अधिकारियों से संपर्क करने के बावजूद, उन्हें मामले में ज़रूरी तरक्की नहीं मिली।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिकायत को गंभीरता से लेते हुए, माननीय चेयरपर्सन ने पटियाला के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस को तुरंत कार्रवाई करने और 24 घंटे के अंदर FIR दर्ज करने का निर्देश दिया। निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए, पुलिस ने तुरंत आरोपी पति और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ इंडियन पीनल कोड (IPC) के संबंधित नियमों के तहत FIR दर्ज कर ली।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">-पीछा करने और मारपीट के मामले में सख्त धाराएं जोड़ी गईं</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक और मामले में, एक जवान लड़की ने कमीशन को बताया कि उस पर और उसके परिवार पर उन लोगों ने हिंसक हमला किया जो कथित तौर पर उसका पीछा कर रहे थे और उसे परेशान कर रहे थे। FIR पहले ही दर्ज हो चुकी थी, लेकिन शिकायत करने वाली ने आरोप लगाया कि सही कानूनी नियमों का इस्तेमाल नहीं किया गया और उसे धमकियां और डराया-धमकाया जा रहा था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मामले की सुनवाई के बाद, सुश्री राहतकर ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को शिकायत करने वाली का बयान तुरंत रिकॉर्ड करने और संबंधित नियमों को लागू करने की जांच करने का निर्देश दिया। पुलिस ने बाद में कमीशन को बताया कि शिकायत करने वाले के बयान के अनुसार FIR को अपडेट और बेहतर बनाया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">-लंबे समय से लंबित लापता महिला के मामले में जांच के नए कदम</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कमीशन ने एक मां की याचिका पर भी सुनवाई की, जिसकी शादीशुदा बेटी 2022 से लापता है। शिकायत करने वाली ने लापता महिला के पति और उसके पार्टनर के शामिल होने की आशंका जताई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह देखते हुए कि मामला कई सालों से सुलझा नहीं है, माननीय चेयरपर्सन ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को जांच में तेजी लाने और बिना देर किए सभी जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया। निर्देशों का पालन करते हुए, पुलिस ने कमीशन को बताया कि पति का कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) मांगा गया है ताकि आगे की जांच की जा सके और मामले को आगे बढ़ाया जा सके। -सीधे दखल से समय पर न्याय पक्का करना</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन मामलों में देखी गई तेज़ कार्रवाई ‘नेशनल कमीशन फॉर विमेन एट योर डोरस्टेप’ पहल के ज़रिए कमीशन की ज़मीनी स्तर पर पहुँच का असर दिखाती है, जिसका मकसद न्याय व्यवस्था को महिलाओं के करीब लाना और यह पक्का करना है कि उनकी चिंताओं को बिना किसी देरी के दूर किया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चेयरपर्सन श्रीमती विजया रहाटकर ने दोहराया कि हर शिकायत न्याय व्यवस्था में एक महिला के भरोसे को दिखाती है और इसे तुरंत, निष्पक्ष और गंभीरता से निपटाया जाना चाहिए। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि नेशनल कमीशन फॉर विमेन महिलाओं से जुड़े मामलों की जवाबदेही, असरदार फ़ॉलो-अप और समय पर समाधान पक्का करने के लिए राज्य अधिकारियों के साथ मिलकर काम करता रहेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कमीशन ने पब्लिक हियरिंग के दौरान दिए गए निर्देशों पर तुरंत कार्रवाई करने में पंजाब पुलिस और ज़िला प्रशासन द्वारा दिए गए सहयोग का भी स्वागत किया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181548/public-hearing-of-national-commission-for-women-in-patiala-led</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/181548/public-hearing-of-national-commission-for-women-in-patiala-led</guid>
                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:12:25 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/1000910051.jpg"                         length="237601"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिरासत में मौत और पुलिसिया हिंसा के मामलों में अभियोजन मंजूरी जरूरी नहीं: ।मध्य प्रदेश हाईकोर्ट।</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि हिरासत में मौत या पुलिसिया हिंसा के मामलों में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (</span>CrPC) <span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा 197 के तहत पूर्व सरकारी मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने दो पुलिस आरक्षकों की याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसे कृत्यों का सरकारी कर्तव्य के निर्वहन से कोई उचित संबंध नहीं माना जा सकता। जस्टिस गजेंद्र सिंह की एकल पीठ इंदौर में वर्ष 2015 में हुई एक युवक की कथित हिरासत मौत से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181536/prosecution-sanction-is-not-necessary-in-cases-of-custodial-death"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas6.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि हिरासत में मौत या पुलिसिया हिंसा के मामलों में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (</span>CrPC) <span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा 197 के तहत पूर्व सरकारी मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने दो पुलिस आरक्षकों की याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसे कृत्यों का सरकारी कर्तव्य के निर्वहन से कोई उचित संबंध नहीं माना जा सकता। जस्टिस गजेंद्र सिंह की एकल पीठ इंदौर में वर्ष 2015 में हुई एक युवक की कथित हिरासत मौत से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">याचिकाकर्ता पुलिसकर्मियों ने तर्क दिया कि उनके खिलाफ अभियोजन चलाने से पहले सरकार की मंजूरी आवश्यक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि कथित घटनाएं उनके आधिकारिक कर्तव्यों से जुड़ी हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मामले के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुसूचित जाति समुदाय से संबंध रखने वाले 24 वर्षीय पंकज वैष्णव को 19 दिसंबर 2015 को स्कूटर चोरी के मामले में पूछताछ के लिए इंदौर के एमआईजी थाने लाया गया। उसी रात उसकी पुलिस हिरासत में मौत हो गई। पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">घटना के बाद </span>CrPC <span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा 176 के तहत स्वतंत्र जांच कराई गई। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा की गई जांच में निष्कर्ष निकाला गया कि यह मामला आपराधिक मानव वध का प्रतीत होता है।इसके बाद दो आरक्षकों और एक थाना प्रभारी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अवैध निरुद्ध करने और झूठे साक्ष्य देने सहित विभिन्न आरोपों में आरोपपत्र दायर किया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 197 के संरक्षण का लाभ तभी मिल सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब आरोपित कृत्य और सरकारी कर्तव्य के निर्वहन के बीच स्पष्ट और उचित संबंध हो। लेकिन वर्तमान मामले में ऐसा कोई संबंध नहीं पाया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने कहा</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">यह ऐसा मामला नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें पुलिसकर्मी किसी हिंसक भीड़ को नियंत्रित कर रहे थे और बल प्रयोग करते हुए अपनी सीमा से आगे बढ़ गए हों। यहां आरोपित बल प्रयोग उस समय किया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब मृतक पुलिस हिरासत में था और थाने के नियंत्रण में था। ऐसी स्थिति में बल प्रयोग या शारीरिक हमला करने का कोई औचित्य नहीं था।”</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हाईकोर्ट ने कहा कि कानून पुलिस को कुछ विशेष परिस्थितियों में बल प्रयोग की अनुमति देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे हिंसक भीड़ को तितर-बितर करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गिरफ्तारी</span><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के उन फैसलों का भी उल्लेख किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें कहा गया कि हिरासत में हिंसा और मौत सभ्य समाज में सबसे गंभीर अपराधों में से हैं तथा यह व्यक्ति के मूल मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने आरक्षकों की पुनरीक्षण याचिका खारिज की और स्पष्ट किया कि हिरासत में मौत या पुलिसिया हिंसा जैसे मामलों में धारा 197 के तहत अभियोजन मंजूरी का संरक्षण उपलब्ध नहीं होगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181536/prosecution-sanction-is-not-necessary-in-cases-of-custodial-death</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/181536/prosecution-sanction-is-not-necessary-in-cases-of-custodial-death</guid>
                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 13:57:49 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/hindi-divas6.jpg"                         length="173958"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाल मजदूरी रोकने के तहत खन्ना में दुकानों और ढाबों की चेकिंग</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लुधियाना, </strong> – डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन की गाइडलाइंस के तहत, जीवनजोत प्रोजेक्ट के तहत बाल मजदूरी रोकने के लिए एक खास कैंपेन चलाया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर रश्मि की लीडरशिप में डिस्ट्रिक्ट टास्क फोर्स ने कल खन्ना में अलग-अलग दुकानों और ढाबों पर सरप्राइज चेकिंग की, जहां बाल मजदूरी में लगे 09 बच्चों को बचाया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर श्रीमती रश्मि ने बताया कि रेस्क्यू के बाद बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, लुधियाना के सामने पेश किया गया। उन्होंने बताया कि बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता की भी काउंसलिंग की गई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह कैंपेन लीगल ऑफिसर दीपक कुमार (डिस्ट्रिक्ट</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181033/checking-of-shops-and-dhabas-in-khanna-to-stop-child"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1000901108.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लुधियाना, </strong> – डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन की गाइडलाइंस के तहत, जीवनजोत प्रोजेक्ट के तहत बाल मजदूरी रोकने के लिए एक खास कैंपेन चलाया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर रश्मि की लीडरशिप में डिस्ट्रिक्ट टास्क फोर्स ने कल खन्ना में अलग-अलग दुकानों और ढाबों पर सरप्राइज चेकिंग की, जहां बाल मजदूरी में लगे 09 बच्चों को बचाया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर श्रीमती रश्मि ने बताया कि रेस्क्यू के बाद बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, लुधियाना के सामने पेश किया गया। उन्होंने बताया कि बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता की भी काउंसलिंग की गई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह कैंपेन लीगल ऑफिसर दीपक कुमार (डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिस), शरद सूद (सुपरवाइजर) चाइल्ड हेल्प लाइन (1098), लुधियाना लेबर डिपार्टमेंट और पुलिस डिपार्टमेंट ने मिलकर चलाया। अवेयरनेस कैंपेन के दौरान लोगों को बताया गया कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों से बाल मजदूरी न करवाई जाए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिला बाल संरक्षण अधिकारी रश्मि ने कहा कि यह सरप्राइज चेकिंग भविष्य में भी जारी रहेगी ताकि बाल मजदूरी को पूरी तरह से खत्म किया जा सके।<br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181033/checking-of-shops-and-dhabas-in-khanna-to-stop-child</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/181033/checking-of-shops-and-dhabas-in-khanna-to-stop-child</guid>
                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 20:52:31 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/1000901108.jpg"                         length="106593"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑपरेशन मिलाप : बिछड़ों को अपनों से मिलाने का मानवीय अभियान, परिवारों के आंसुओं में लौटी खुशियों की रोशनी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">किसी घर का बेटा, बेटी, बहन, भाई या माता-पिता अचानक लापता हो जाएं तो उस परिवार पर क्या गुजरती है, इसका अंदाजा वही लगा सकता है जिसने इस पीड़ा को करीब से महसूस किया हो। गुमशुदगी केवल किसी व्यक्ति का घर से दूर हो जाना नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार की खुशियों, उम्मीदों और मानसिक शांति के खो जाने जैसा होता है। हर गुजरते दिन के साथ परिजनों की चिंता बढ़ती जाती है। हर दरवाजे की आहट उन्हें उम्मीद देती है कि शायद उनका अपना लौट आया हो। हर फोन कॉल उन्हें चौंका देती है। ऐसे में जब वर्षों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181002/operation-milap-a-humanitarian-campaign-to-reunite-separated-people-with"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/delhi-police.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">किसी घर का बेटा, बेटी, बहन, भाई या माता-पिता अचानक लापता हो जाएं तो उस परिवार पर क्या गुजरती है, इसका अंदाजा वही लगा सकता है जिसने इस पीड़ा को करीब से महसूस किया हो। गुमशुदगी केवल किसी व्यक्ति का घर से दूर हो जाना नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार की खुशियों, उम्मीदों और मानसिक शांति के खो जाने जैसा होता है। हर गुजरते दिन के साथ परिजनों की चिंता बढ़ती जाती है। हर दरवाजे की आहट उन्हें उम्मीद देती है कि शायद उनका अपना लौट आया हो। हर फोन कॉल उन्हें चौंका देती है। ऐसे में जब वर्षों या महीनों से बिछड़ा कोई व्यक्ति अचानक परिवार से मिल जाता है तो वह क्षण किसी चमत्कार से कम नहीं होता।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">गुजरात पुलिस द्वारा चलाया गया “ऑपरेशन मिलाप” इसी मानवीय संवेदना का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है। इस विशेष अभियान के अंतर्गत मात्र एक महीने में 1470 गुमशुदा व्यक्तियों को खोजकर उनके परिवारों से मिलाया गया। यह केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि हजारों टूटते हुए परिवारों के जीवन में आशा, विश्वास और खुशियों की वापसी का अभियान है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अभियान में 852 महिलाओं, 342 पुरुषों तथा 276 नाबालिग बच्चों और किशोरियों को खोजकर उनके परिजनों तक पहुंचाया गया। विशेष रूप से यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि बड़ी संख्या में किशोरियां और महिलाएं अपने परिवारों से बिछड़ गई थीं। ऐसे मामलों में समय के साथ परिवारों की चिंता कई गुना बढ़ जाती है। उन्हें हर पल किसी अनहोनी की आशंका सताती रहती है। ऐसे में पुलिस द्वारा इन लोगों को सुरक्षित ढूंढ़ निकालना निश्चित रूप से सराहनीय कार्य है।</div><div style="text-align:justify;">गुजरात पुलिस ने केवल औपचारिक जांच तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि पुराने और लंबित मामलों को दोबारा खोलकर नए सिरे से जांच की। आधुनिक तकनीक, मोबाइल फोन विश्लेषण, सोशल मीडिया गतिविधियों की निगरानी, विभिन्न राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय, सार्वजनिक परिवहन केंद्रों और आश्रय गृहों की जांच जैसे अनेक माध्यमों का उपयोग किया गया। शिकायतकर्ताओं और गवाहों से दोबारा संपर्क कर नए सुराग जुटाए गए। यह दर्शाता है कि यदि इच्छाशक्ति और संवेदनशीलता हो तो वर्षों पुराने मामलों में भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।</div><div style="text-align:justify;">सूरत पुलिस द्वारा सर्वाधिक 341 गुमशुदा व्यक्तियों का पता लगाना भी इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय स्तर पर समर्पित प्रयास किस प्रकार बड़े परिणाम दे सकते हैं। पुलिस और प्रशासन की यह सक्रियता उन परिवारों के लिए राहत का कारण बनी है जो वर्षों से अपने प्रियजनों की प्रतीक्षा में दिन गिन रहे थे।</div><div style="text-align:justify;">इस अभियान का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे समाज के सामने गुमशुदगी के वास्तविक कारण भी उजागर हुए हैं। पुलिस के विश्लेषण में सामने आया कि 14 से 17 वर्ष की आयु वर्ग की अनेक किशोरियां प्रेम संबंधों, पारिवारिक विवादों, अभिभावकों की डांट-फटकार अथवा पढ़ाई में असफलता जैसी परिस्थितियों के कारण घर छोड़कर चली गई थीं। कुछ मामले रोजगार की तलाश में पलायन करने वाले परिवारों से भी जुड़े पाए गए।</div><div style="text-align:justify;">यहां एक गंभीर सामाजिक संदेश छिपा हुआ है। जीवन में कठिनाइयां, असफलताएं, पारिवारिक मतभेद या भावनात्मक उलझनें आना स्वाभाविक है। किशोरावस्था में भावनाएं अधिक संवेदनशील होती हैं और कई बार छोटी घटनाएं भी बहुत बड़ी लगने लगती हैं। लेकिन घर छोड़ देना किसी समस्या का समाधान नहीं है। यह निर्णय क्षणिक आवेश में लिया जा सकता है, पर उसके परिणाम बहुत गंभीर होते हैं।</div><div style="text-align:justify;">कई बार बच्चों और किशोरों को लगता है कि उनके जाने से परिवार को कोई फर्क नहीं पड़ेगा या कुछ दिनों बाद सब सामान्य हो जाएगा। वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत होती है। जिस दिन कोई बच्चा या किशोर घर से लापता होता है, उसी दिन से उसके माता-पिता का चैन और नींद समाप्त हो जाती है। मां की आंखें दरवाजे पर लगी रहती हैं। पिता बाहर से मजबूत दिखने का प्रयास करता है, लेकिन भीतर से टूट चुका होता है। भाई-बहन चिंता और असुरक्षा के बीच जीते हैं। पूरा परिवार हर संभावित स्थान पर तलाश करता है, पुलिस थानों के चक्कर लगाता है और अनिश्चितता के अंधेरे में जीवन बिताता है।</div><div style="text-align:justify;">गुमशुदगी का दर्द केवल भावनात्मक नहीं होता, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी परिवारों को प्रभावित करता है। अनेक परिवार अपनी बचत तक खर्च कर देते हैं। कई लोग कामकाज छोड़कर अपने प्रियजन की तलाश में जुट जाते हैं। मानसिक तनाव के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न होने लगती हैं। इसलिए किसी भी परिस्थिति में घर छोड़कर चले जाना न तो समझदारी है और न ही समस्याओं का समाधान।</div><div style="text-align:justify;">आज आवश्यकता इस बात की है कि परिवारों और बच्चों के बीच संवाद को मजबूत बनाया जाए। अभिभावक बच्चों की भावनाओं को समझें और बच्चे अपने माता-पिता पर विश्वास करें। यदि पढ़ाई में असफलता मिली है, किसी बात पर डांट पड़ी है या जीवन में कोई परेशानी आई है, तो उसका समाधान बातचीत से निकाला जा सकता है। परिवार ही वह स्थान है जहां व्यक्ति को सबसे अधिक सुरक्षा, प्रेम और सहयोग मिलता है।</div><div style="text-align:justify;">ऑपरेशन मिलाप की सफलता केवल आंकड़ों में नहीं मापी जा सकती। इसकी वास्तविक सफलता उन हजारों मुस्कानों में दिखाई देती है जो बिछड़ने के बाद फिर से लौट आईं। उन माताओं की आंखों में दिखाई देती है जिन्होंने वर्षों बाद अपने बच्चों को गले लगाया। उन परिवारों की खुशी में दिखाई देती है जिनकी उम्मीदें लगभग समाप्त हो चुकी थीं।</div><div style="text-align:justify;">यह अभियान यह भी सिद्ध करता है कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्था नहीं है, बल्कि समाज के दुख-दर्द में सहभागी बनने वाली संवेदनशील व्यवस्था भी है। जब पुलिस किसी गुमशुदा व्यक्ति को उसके परिवार तक पहुंचाती है, तब वह केवल एक केस बंद नहीं करती बल्कि एक टूटे हुए परिवार को फिर से जोड़ती है।</div><div style="text-align:justify;">ऑपरेशन मिलाप ने हजारों परिवारों को नई जिंदगी दी है। यह अभियान मानवता, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। साथ ही यह हम सभी को यह संदेश भी देता है कि जीवन की किसी भी कठिन परिस्थिति में घर और परिवार से दूर जाना समाधान नहीं है। संवाद, धैर्य और विश्वास ही हर समस्या का सबसे मजबूत उत्तर हैं। यदि यह संदेश समाज के प्रत्येक बच्चे और किशोर तक पहुंच जाए तो शायद भविष्य में अनेक परिवार गुमशुदगी की उस पीड़ा से बच सकेंगे, जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना संभव नहीं है।</div><div style="text-align:justify;">       </div><div style="text-align:justify;"><strong><br /></strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>                                                                           *कांतिलाल मांडोत*</strong></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181002/operation-milap-a-humanitarian-campaign-to-reunite-separated-people-with</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/181002/operation-milap-a-humanitarian-campaign-to-reunite-separated-people-with</guid>
                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:35:40 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/delhi-police.jpg"                         length="421769"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिंसा के दुष्चक्र से बाहर निकलने के लिए भरोसे संवाद और न्याय की सबसे बड़ी जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">पूर्वोत्तर भारत का सुंदर और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य मणिपुर पिछले कई वर्षों से अशांति और हिंसा की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। एक बार फिर कांगपोकपी जिले में हुई दर्दनाक घटना ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि आखिर मणिपुर की आग कब बुझेगी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">हथियारबंद हमलावरों द्वारा एक गांव पर किए गए हमले में चर्च से जुड़े तीन लोगों की हत्या कर दी गई जिनमें सात माह की गर्भवती महिला भी शामिल थी। कई लोग घायल हुए और अनेक घर जलकर राख हो गए। यह घटना केवल तीन व्यक्तियों की मृत्यु भर नहीं है बल्कि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180759/the-biggest-need-for-trust-dialogue-and-justice-is-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/shutterstock_2461989209-scaled.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">पूर्वोत्तर भारत का सुंदर और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य मणिपुर पिछले कई वर्षों से अशांति और हिंसा की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। एक बार फिर कांगपोकपी जिले में हुई दर्दनाक घटना ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि आखिर मणिपुर की आग कब बुझेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हथियारबंद हमलावरों द्वारा एक गांव पर किए गए हमले में चर्च से जुड़े तीन लोगों की हत्या कर दी गई जिनमें सात माह की गर्भवती महिला भी शामिल थी। कई लोग घायल हुए और अनेक घर जलकर राख हो गए। यह घटना केवल तीन व्यक्तियों की मृत्यु भर नहीं है बल्कि उस गहरे सामाजिक विभाजन और अविश्वास का प्रतीक है जिसने मणिपुर को लंबे समय से अपनी गिरफ्त में ले रखा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मणिपुर की समस्या को केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा मानना पर्याप्त नहीं होगा। इसके पीछे ऐतिहासिक विवाद जातीय असुरक्षाएं राजनीतिक मतभेद और संसाधनों पर अधिकार को लेकर लंबे समय से चली आ रही प्रतिस्पर्धा भी शामिल है। राज्य में विभिन्न समुदायों के बीच संबंध समय के साथ जटिल होते गए हैं। जब भी कोई हिंसक घटना होती है तो उसका प्रभाव केवल प्रभावित परिवारों तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरे समाज में भय और असुरक्षा का वातावरण पैदा हो जाता है। बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती है। व्यापार और रोजगार पर असर पड़ता है। सामान्य जनजीवन बाधित हो जाता है और विकास की गति थम जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हाल की घटना ने एक बार फिर यह दिखाया है कि हिंसा का कोई धर्म जाति या समुदाय नहीं होता। गोली और आग केवल जान लेती है। वह यह नहीं देखती कि सामने कौन है और उसकी पहचान क्या है। जब एक गर्भवती महिला हिंसा का शिकार होती है तो उसके साथ एक अजन्मा जीवन भी समाप्त हो जाता है। यह किसी भी सभ्य समाज के लिए गहरी पीड़ा और आत्ममंथन का विषय होना चाहिए। ऐसे समय में संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मणिपुर में लंबे समय से चल रहे संघर्ष ने दोनों प्रमुख समुदायों के बीच अविश्वास की ऐसी खाई पैदा कर दी है जिसे केवल सुरक्षा बलों की तैनाती से नहीं भरा जा सकता। सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है क्योंकि नागरिकों की रक्षा राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है। लेकिन स्थायी शांति केवल हथियारों के बल पर स्थापित नहीं की जा सकती। शांति तब आती है जब लोग एक दूसरे को दुश्मन नहीं बल्कि पड़ोसी और साथी नागरिक के रूप में देखने लगते हैं। इसके लिए संवाद और मेलमिलाप की प्रक्रिया को मजबूत करना होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार की भूमिका इस दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य और केंद्र दोनों सरकारों को मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करना होगा जिसमें सभी समुदाय अपनी बात खुलकर रख सकें और उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए। केवल राजनीतिक बयान पर्याप्त नहीं हैं। जमीनी स्तर पर विश्वास बहाली के ठोस प्रयास आवश्यक हैं। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है उन्हें न्याय मिलना चाहिए। दोषियों की पहचान कर निष्पक्ष कार्रवाई की जानी चाहिए। जब लोगों को यह भरोसा होगा कि कानून सभी के लिए समान है तभी व्यवस्था में विश्वास लौटेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि केवल सरकार के प्रयासों से समस्या का समाधान संभव नहीं है। समाज के विभिन्न वर्गों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। धार्मिक संगठन सामाजिक संस्थाएं बुद्धिजीवी युवा और स्थानीय नेतृत्व शांति की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। चर्च मंदिर और अन्य धार्मिक स्थल केवल पूजा के केंद्र नहीं बल्कि समाज को जोड़ने वाले मंच भी बन सकते हैं। यदि विभिन्न समुदायों के धार्मिक और सामाजिक नेता मिलकर शांति का संदेश दें तो उसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मणिपुर की वर्तमान स्थिति यह भी बताती है कि अफवाहें और नफरत फैलाने वाली सूचनाएं कितनी खतरनाक हो सकती हैं। डिजिटल युग में सोशल मीडिया के माध्यम से गलत जानकारी तेजी से फैलती है और लोगों की भावनाओं को भड़का सकती है। इसलिए जिम्मेदार संवाद और तथ्य आधारित जानकारी का प्रसार अत्यंत आवश्यक है। मीडिया को भी अपनी भूमिका संतुलित और संवेदनशील ढंग से निभानी होगी ताकि तनाव कम हो और समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">युवाओं को हिंसा से दूर रखना भी समय की मांग है। संघर्ष और अशांति का सबसे अधिक प्रभाव युवा पीढ़ी पर पड़ता है। यदि उन्हें शिक्षा रोजगार और सकारात्मक अवसर नहीं मिलेंगे तो वे निराशा और कट्टरता की ओर बढ़ सकते हैं। इसलिए विकास और शांति को एक दूसरे का पूरक मानते हुए आगे बढ़ना होगा। स्कूलों कॉलेजों और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक सद्भाव और आपसी सम्मान की भावना को बढ़ावा देना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मणिपुर का इतिहास केवल संघर्ष का इतिहास नहीं है। यह सांस्कृतिक विविधता परंपराओं और सहअस्तित्व की समृद्ध विरासत का भी इतिहास है। सदियों से विभिन्न समुदायों ने यहां साथ रहकर अपनी पहचान को विकसित किया है। आज आवश्यकता इस बात की है कि उस साझा विरासत को याद किया जाए और उसे भविष्य की नींव बनाया जाए। विभाजन की राजनीति और हिंसा का रास्ता अंततः सभी को नुकसान पहुंचाता है जबकि संवाद और सहयोग सभी के लिए बेहतर भविष्य का मार्ग प्रशस्त करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कांगपोकपी की घटना ने एक बार फिर पूरे देश को झकझोर दिया है। निर्दोष लोगों की हत्या और घरों का जलना केवल समाचार नहीं बल्कि उन परिवारों का असहनीय दर्द है जिनकी दुनिया एक पल में बदल गई। इस पीड़ा को समझना और उससे सीख लेना जरूरी है। यदि हर नई घटना के बाद केवल शोक व्यक्त किया जाए और फिर सब कुछ पहले जैसा चलता रहे तो समाधान कभी नहीं निकलेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मणिपुर की आग तब बुझेगी जब भय की जगह विश्वास लेगा। जब प्रतिशोध की जगह संवाद होगा। जब राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ सामाजिक सहभागिता भी जुड़ेगी। जब हर समुदाय यह महसूस करेगा कि उसकी सुरक्षा सम्मान और अधिकार सुरक्षित हैं। और सबसे महत्वपूर्ण तब जब इंसान की पहचान किसी जातीय या सामुदायिक खांचे से पहले एक नागरिक और एक मानव के रूप में की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शांति कोई एक दिन में हासिल होने वाली उपलब्धि नहीं है। यह धैर्य समझदारी और निरंतर प्रयासों का परिणाम होती है। मणिपुर को आज इसी सामूहिक संकल्प की आवश्यकता है। सरकार समाज और दोनों समुदायों को मिलकर आगे बढ़ना होगा। हिंसा का प्रत्येक नया अध्याय राज्य को और पीछे धकेलता है जबकि सुलह और संवाद का हर कदम उसे स्थायी शांति और विकास की दिशा में आगे ले जाता है। अब समय आ गया है कि बंदूक की आवाज को बातचीत की आवाज से बदला जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां एक सुरक्षित शांत और समृद्ध मणिपुर देख सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180759/the-biggest-need-for-trust-dialogue-and-justice-is-to</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180759/the-biggest-need-for-trust-dialogue-and-justice-is-to</guid>
                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 19:02:00 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/shutterstock_2461989209-scaled.jpg"                         length="58931"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निष्पक्ष पत्रकारिता की वैश्विक चुनौतिया</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>- महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस हर वर्ष 3 मई को मनाया जाता है और यह दिन लोकतंत्र की उस मूल भावना को उजागर करता है, जिसमें नागरिकों को स्वतंत्र रूप से जानकारी प्राप्त करने और अपनी बात रखने का अधिकार होता है। 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा घोषित यह दिवस 1991 के विंडहोक घोषणा पत्र से प्रेरित है, जिसने स्वतंत्र और बहुलतावादी मीडिया की आवश्यकता को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया।आज जब हम 2026 के वैश्विक परिदृश्य पर दृष्टि डालते हैं, तो प्रेस स्वतंत्रता की स्थिति अत्यंत चिंताजनक और डरावनी प्रतीत होती है। वैश्विक सूचकांक के आंकड़े</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178001/global-challenges-to-freedom-of-expression-and-impartial-journalism"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20250331-wa0163.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div style="text-align:justify;"><strong>- महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस हर वर्ष 3 मई को मनाया जाता है और यह दिन लोकतंत्र की उस मूल भावना को उजागर करता है, जिसमें नागरिकों को स्वतंत्र रूप से जानकारी प्राप्त करने और अपनी बात रखने का अधिकार होता है। 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा घोषित यह दिवस 1991 के विंडहोक घोषणा पत्र से प्रेरित है, जिसने स्वतंत्र और बहुलतावादी मीडिया की आवश्यकता को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया।आज जब हम 2026 के वैश्विक परिदृश्य पर दृष्टि डालते हैं, तो प्रेस स्वतंत्रता की स्थिति अत्यंत चिंताजनक और डरावनी प्रतीत होती है। वैश्विक सूचकांक के आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि दुनिया के 180 देशों में से आधे से अधिक देशों में प्रेस की स्थिति या तो बहुत कठिन है या फिर बेहद गंभीर श्रेणी में जा चुकी है। यह जानकर हृदय कांप उठता है कि विश्व की 1 प्रतिशत से भी कम आबादी आज उन क्षेत्रों में निवास कर रही है जहाँ प्रेस को वास्तव में स्वतंत्र और सुरक्षित माना जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पिछले 25 वर्षों का इतिहास गवाह है कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर दबाव निरंतर बढ़ा है और पत्रकारों के काम करने की गुंजाइश संकुचित हुई है। पत्रकारिता आज एक ऐसा पेशा बन गया है जहाँ सच बोलने की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है। वर्ष 2025 के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में 129 पत्रकारों और मीडिया कर्मियों की निर्मम हत्या कर दी गई, जो अब तक का सबसे बड़ा और विचलित करने वाला आंकड़ा है। यह संख्या केवल एक डेटा नहीं है, बल्कि उन आवाजों की खामोशी है जो समाज की विसंगतियों पर प्रहार कर रही थीं। सन 2000 से लेकर अब तक लगभग 1795 पत्रकारों ने अपने कर्तव्य की वेदी पर प्राण न्यौछावर किए हैं, जो इस पेशे के बढ़ते जोखिमों को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हिंसा के साथ-साथ कानूनी उत्पीड़न भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मार्ग में एक बड़ी बाधा बनकर उभरा है। 2026 के आंकड़ों के अनुसार विश्व भर की जेलों में लगभग 330 पत्रकार बंद हैं, जिनमें से 61 प्रतिशत पत्रकारों पर राष्ट्रविरोधी होने या देश की सुरक्षा को खतरे में डालने जैसे संगीन आरोप मढ़े गए हैं। विडंबना यह है कि जिन कानूनों का निर्माण राष्ट्र की सुरक्षा के लिए किया गया था, उनका उपयोग अक्सर उन लोगों को चुप कराने के लिए किया जा रहा है जो सत्ता की खामियों को उजागर करने का साहस करते हैं। पत्रकारिता को अपराध की तरह देखे जाने की यह प्रवृत्ति किसी भी सभ्य समाज के लिए घातक है। इससे भी अधिक चिंता का विषय वह न्यायहीनता है जो पत्रकारों के खिलाफ होने वाले अपराधों में व्याप्त है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार पत्रकारों की हत्या के लगभग 86 प्रतिशत मामलों में अपराधियों को कभी सजा नहीं मिलती। यह न्याय की विफलता न केवल अपराधियों का मनोबल बढ़ाती है बल्कि क्षेत्र में कार्यरत अन्य पत्रकारों के मन में भी भय का संचार करती है। जब सच के पहरेदारों को लगने लगता है कि उनकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है और उनके हत्यारे खुलेआम घूम सकते हैं, तो वे आत्म-सेंसरशिप का रास्ता चुनने को मजबूर हो जाते हैं, जो अंततः लोकतंत्र की मृत्यु की शुरुआत होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रेस की स्वतंत्रता पर केवल भौतिक हमला ही एकमात्र खतरा नहीं है, बल्कि आज के दौर में इसके स्वरूप बदल गए हैं। कई देशों में मानहानि और आतंकवाद विरोधी कानूनों का दुरुपयोग एक सुनियोजित हथियार की तरह किया जा रहा है। इसके साथ ही आर्थिक दबावों के जरिए मीडिया संस्थानों की रीढ़ तोड़ने का प्रयास किया जाता है। विज्ञापन और वित्तीय संसाधनों के वितरण में पक्षपात करके उन संस्थानों को पुरस्कृत किया जाता है जो सत्ता के सुर में सुर मिलाते हैं, जबकि आलोचनात्मक रुख अपनाने वाले संस्थानों को आर्थिक रूप से पंगु बना दिया जाता है। इस बदलती दुनिया में डिजिटल युग ने जहाँ सूचना के प्रसार को पंख दिए हैं, वहीं पत्रकारों के लिए नई और जटिल चुनौतियां भी पैदा की हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से दुष्प्रचार और गलत जानकारियों का जाल इतनी तेजी से फैलता है कि तथ्य और झूठ के बीच का अंतर मिटने लगता है। इसके साथ ही ऑनलाइन ट्रोलिंग, साइबर हमले और अवैध डिजिटल निगरानी ने पत्रकारों के निजी और पेशेवर जीवन को असुरक्षित बना दिया है। विशेष रूप से महिला पत्रकारों को ऑनलाइन माध्यमों पर जिस तरह के अपमान और धमकियों का सामना करना पड़ता है, वह अत्यंत निंदनीय है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक और महत्वपूर्ण पहलू पर्यावरण से जुड़ी रिपोर्टिंग का है, जो आज के समय में सबसे जोखिम भरे क्षेत्रों में से एक बन चुका है। पिछले 15 वर्षों में पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से जुड़ी खबरें कवर करने वाले कम से कम 749 पत्रकारों पर जानलेवा हमले हुए हैं। 2019 से 2023 के बीच इस तरह के हमलों में 42 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो यह दर्शाता है कि जब पत्रकार भू-माफियाओं, अवैध खनन और कॉर्पोरेट जगत के भ्रष्टाचार पर कलम चलाते हैं, तो उन्हें कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। यूनेस्को और द गार्जियन जैसी संस्थाओं की रिपोर्टें इस भयावह वास्तविकता की पुष्टि करती हैं। यह तथ्य हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम वास्तव में उस सच को सुनने के लिए तैयार हैं जो हमारे अस्तित्व और प्रकृति की रक्षा से जुड़ा है। प्रेस की स्वतंत्रता का मुद्दा केवल मीडिया घरानों या पत्रकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर आम नागरिकों के जीवन को प्रभावित करता है। एक स्वतंत्र मीडिया भ्रष्टाचार की परतों को खोलता है, सरकारी नीतियों की निष्पक्ष समीक्षा करता है और यह सुनिश्चित करता है कि जनता को सही और सटीक जानकारी मिले ताकि वे एक जागरूक नागरिक के रूप में अपने निर्णय ले सकें। इसके विपरीत जब मीडिया को सरकारी या कॉर्पोरेट नियंत्रण में ले लिया जाता है, तो जनता तक केवल वही सूचनाएं पहुँचती हैं जो एक खास एजेंडे को पुष्ट करती हैं। इससे समाज में भ्रम और अविश्वास की स्थिति उत्पन्न होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वाशिंगटन पोस्ट और स्टेटिस्टा जैसे मंचों से प्राप्त डेटा यह संकेत देता है कि प्रेस की आजादी में गिरावट का प्रभाव केवल कुछ विशिष्ट देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक महामारी का रूप ले चुका है। भारत सहित दुनिया के कई बड़े लोकतांत्रिक देशों में भी प्रेस स्वतंत्रता के सूचकांक में गिरावट देखी गई है। यह गिरावट इस बात का संकेत है कि लोकतांत्रिक संस्थानों के भीतर असहमति के स्वरों के प्रति सहिष्णुता कम होती जा रही है। प्रेस की स्वतंत्रता दरअसल लोकतंत्र का वह दर्पण है जिसमें समाज अपनी असलियत देखता है। यदि इस दर्पण पर धूल जमा दी जाए या इसे धुंधला कर दिया जाए, तो समाज अपनी कमजोरियों को कभी सुधार नहीं पाएगा। अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस हमें यह अवसर प्रदान करता है कि हम उन साहसी पत्रकारों को श्रद्धांजलि दें जिन्होंने अपने जीवन का बलिदान देकर सच की मशाल को जलाए रखा। यह दिन सरकारों के लिए भी एक चेतावनी है कि वे प्रेस की आजादी के प्रति अपनी संवैधानिक और नैतिक प्रतिबद्धताओं को फिर से परिभाषित करें। यह आवश्यक है कि ऐसी नीतियां बनाई जाएं जो पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और न्याय प्रणाली को इतना मजबूत बनाया जाए कि पत्रकारों के खिलाफ अपराध करने वाला कोई भी व्यक्ति कानून की पकड़ से बाहर न रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करना किसी एक समूह का दायित्व नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। हमें यह समझना होगा कि यदि आज हम पत्रकारों की आवाज दबाने वाली शक्तियों के खिलाफ खड़े नहीं होंगे, तो भविष्य में हमारी अपनी आवाज भी छीन ली जाएगी। लोकतंत्र की जीवंतता के लिए यह अनिवार्य है कि प्रेस बिना किसी डर या प्रलोभन के अपना कार्य कर सके। जब तक दुनिया में एक भी पत्रकार को सच बोलने के लिए जेल भेजा जाएगा या उसकी हत्या की जाएगी, तब तक हमारा लोकतंत्र अधूरा रहेगा। प्रेस की आजादी की मशाल को प्रज्वलित रखना ही इस दिवस की सार्थकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियां एक ऐसे समाज में सांस ले सकें जहाँ सूचना पर किसी का एकाधिकार न हो और सच बोलने का साहस करने वालों को सम्मान मिले, न कि सजा।</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/178001/global-challenges-to-freedom-of-expression-and-impartial-journalism</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/178001/global-challenges-to-freedom-of-expression-and-impartial-journalism</guid>
                <pubDate>Sun, 03 May 2026 18:07:06 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/img-20250331-wa0163.jpg"                         length="154899"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इतिहास से सबक और भविष्य के प्रति आशावान होने का सार्थक समय</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्रत्येक परिवर्तन अपने साथ-साथ बड़े तथा महान अवसर लेकर आता है।  मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने जिस "आई हैव ए ड्रीम "की कल्पना की थी वह जीवन के नए अवसर की कल्पना थी। महात्मा गांधी जी ने भी जिस स्वराज की कल्पना अपने मन में की थी वह भी उसी नए अवसर की खोज में उसकी तरफ छेड़ा गया एक अभियान था । बराक ओबामा ने भी कहा था "यस वी कैन" ने भी बड़े परिवर्तन को सच्चाई के अवसर की तलाश थी। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने भी मनुष्य से देवत्व की यात्रा का वर्णन किया था।  समय परिवर्तन के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154145/lesson-from-history-and-meaningful-time-to-be-hopeful-towards"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/hindi-divas11.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रत्येक परिवर्तन अपने साथ-साथ बड़े तथा महान अवसर लेकर आता है।  मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने जिस "आई हैव ए ड्रीम "की कल्पना की थी वह जीवन के नए अवसर की कल्पना थी। महात्मा गांधी जी ने भी जिस स्वराज की कल्पना अपने मन में की थी वह भी उसी नए अवसर की खोज में उसकी तरफ छेड़ा गया एक अभियान था । बराक ओबामा ने भी कहा था "यस वी कैन" ने भी बड़े परिवर्तन को सच्चाई के अवसर की तलाश थी। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने भी मनुष्य से देवत्व की यात्रा का वर्णन किया था।  समय परिवर्तन के मुख्य द्वार से होकर गुजरता कर प्रत्येक परिवर्तन अपने साथ-साथ बड़े तथा अर्थपूर्ण अवसर लेकर आता है।  मनुष्य के जीवन में प्रगति विकास और परिवर्तन ही जीवन का असली गुंजन है, और यही विजय यात्रा की ओर मनुष्य, समाज तथा देश को अग्रसर करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अवसर का जिसने भी सदुपयोग कर लाभ उठाया है और अपने अनुकूल बनाने का ऊर्जा के साथ प्रयास किया है वह विश्व विजेता बनने में सक्षम हुआ जीवन की संपूर्ण यात्रा में व्यक्ति को अपने जीवन में संघर्ष करना पड़ता है और तमाम कठिनाइयों को तोड़कर आगे की ओर अग्रसर होना पड़ता है। अवसर के मार्ग को खोलकर बड़ी विजय की महायात्रा प्राप्त हो सकती है। मूलतः परिवर्तन जीवन की एक मूलभूत विशेषता और एक जरूरी सत्य है बल्कि बेहतर कल तथा विकास के प्रत्येक सपने का हल भी होता है। परिवर्तन में अवसर तलाशने की यात्रा का अस्तित्व ही एक विजय गीत का गान है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिवर्तन की इस महा प्रक्रिया का साइकल स्वयं इस बात का साक्ष्य है की परिवर्तन खुद ही नवीनता की एक बड़ी खोज है और परिवर्तन का सीधा अर्थ है जड़ता का नाश है। जो हमारी पुरानी परंपराएं जड़ तथा जंगम हो चुकी है या जो स्वयं को नई परिस्थितियों के अनुसार ढाल पाने में सक्षम नहीं है उसका अंत ही परिवर्तन का प्रस्थान बिंदु होता है और इसका अंत एक बड़े शून्य को जन्म देता है और यह नवीन तथा प्राचीनता के बीच की एक समन्वय की कड़ी होती हैं। और इसमें वह सारे और अवसर निहित होते हैं जिनका चयन ही भविष्य की बुनियाद तय करता है और इस शून्य के काल में किया गया प्रयत्न और प्रयास भविष्य के बड़े भाग्य को तय करता है और किसी समय चक्र के बार-बार परिवर्तन को ही जीवन की संज्ञा दी गई है। गीता में कृष्ण ने इस परिवर्तन वह उसमें अंतर्निहित मौके की तलाश करने का संकेत दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मानवीय इतिहास में भी यदि नजर दौड़ाई तो पहला परिवर्तन 1215 में नागरिक अधिकार पत्र यानी मैग्नाकार्टा की प्राप्ति हुई थी। 12वीं और 13वीं सदी का समय सामंती प्रथा व क्रूरता से भरा समय था जहां मनुष्य एक साधन मात्र था। और उसी समय जब सदियों से भरी जनता को ललकारते हुए परिवर्तन का महत्व तथा सपना मनुष्य के दिमाग में पैदा हुआ,परिवर्तन की इस घड़ी ने एक अवसर को जन्म दिया था और उसी अवसर का उपयोग करते हुए मानव को नागरिक अधिकार पत्र प्रदान किया था। अब मनुष्य स्वयं का कर्ताधर्ता था और उसी नागरिक अधिकार पत्र में किए उल्लेख का परिणाम है कि आज हर समाज को सभ्यता का प्रमाण उसी अधिकार पत्र के आधार पर दिया जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बीसवीं सदी ने जड़ता पर चोट की, मशीनों के शोर, हथियारों की होड़ के बीच कैलिफोर्निया क्रांति ने विश्व को सूचना प्रौद्योगिकी का उपहार दिया था। इस बड़े परिवर्तन ने संपूर्ण मानव समाज को एक बड़ा अवसर प्रदान किया पूरी कार्यप्रणाली को सरल बनाने और संपूर्ण सामाजिक व्यवस्था को पारदर्शी बनाने का उपहार भी दिया था। यह तो तय है कि जब जब जनता ने समाज की गति को रोकने का प्रयास किया तब मानवीय उद्यम और साहस ने उसे चुनौती दी और नए नए अवसरों की तलाश कर उसका नवीन परिवर्तन का सकारात्मक उपयोग किया। एक प्रसिद्ध कहावत है परिवर्तन के अलावा कुछ भी स्थाई नहीं है यह प्रकृति का एक स्थाई और व्यवस्था जनक है कि परिवर्तनशील होना जिवंतता और संघर्ष का प्रमाण है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिस व्यक्ति, समाज तथा देश में स्थायित्व जाता है वह विकास के विरुद्ध होने लगता है। परिवर्तन सदैव धीरे-धीरे होते हैं यह अचानक नहीं होते प्राकृतिक व्यवस्था अनुसार हर परिवर्तन का एक बड़ा उद्देश्य होता है हर परिवर्तन अपने साथ एक बड़ा अवसर लेकर आता है यह अवसर नवीन लक्ष्यों के आपूर्ति का और उद्देश्य की ओर बढ़ती आकांक्षा को नवीन सृष्टि के निर्माण को संभव बनाने का प्रयास होता है। परिवर्तन का चक्र स्वयं इस बात का प्रमाण है कि परिवर्तन स्वयं की नवीनता का एक बड़ा स्रोत है। बढ़ती जनसंख्या के लिए उत्पादन की ना तो मात्रा पूरी हो पा रही थी और नाही उत्पादन उसकी गति में भी विराम लग गया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">व्यक्ति, समाज तथा देश के पास पूंजी होने के बावजूद उसके उपयोग का ना तो सामर्थ्य था नहीं उतनी बौद्धिक क्षमता,उसी क्षण विचारों ने परिवर्तन लाना शुरू किया मानव की बुद्धि ने एक बड़ा परिवर्तन लाकर मशीनों का इजाद किया फल स्वरूप कार्य करने की गति को अवसर मिला इस अवसर के साथ उत्पादन मैं भी वृद्धि हुई। मानव समाज ने इस परिवर्तन तथा नए अवसर की खोज के साथ नई नई वस्तुओं का अंबार लगा और संपूर्ण विश्व में औद्योगिक क्रांति का उदय हुआ। यही औद्योगिक क्रांति विश्व के लिए विकास की नई गाथा है और सफलता के साथ एक नए युग का परिवर्तन भी हुआ है। स्थायित्व के विरुद्ध नए अवसर की तलाश थी मनुष्य के जीवन के नवीन पायदान ओं का आगाज करती है और जीवन परिवर्तनशील होकर नए युग की ओर प्रशस्त होता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/154145/lesson-from-history-and-meaningful-time-to-be-hopeful-towards</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/154145/lesson-from-history-and-meaningful-time-to-be-hopeful-towards</guid>
                <pubDate>Tue, 02 Sep 2025 17:21:10 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-08/hindi-divas11.jpg"                         length="173958"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        