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                <title>human rights - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>human rights RSS Feed</description>
                
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                <title>अहिंसा कायरता नहीं बल्कि मानवता का उज्ज्वल प्रतीक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">अहिंसा भारतीय संस्कृति की आत्मा है। यह केवल हिंसा का अभाव नहीं बल्कि प्रेम करुणा दया सहिष्णुता और आत्मबल का ऐसा महान संदेश है जो मानव जीवन को श्रेष्ठता की ओर ले जाता है। अहिंसा मनुष्य को दुर्बल नहीं बनाती बल्कि उसके भीतर साहस संयम और आत्मविश्वास का संचार करती है। यही कारण है कि भारतीय मनीषियों ने अहिंसा को धर्म का सर्वोच्च स्वरूप माना है। अहिंसा का अर्थ किसी भी जीव को मन वचन और कर्म से कष्ट न पहुंचाना है। यह केवल व्यक्तिगत आचरण तक सीमित नहीं रहती बल्कि परिवार समाज राष्ट्र और पूरे विश्व को शांति और</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184777/non-violence-is-not-cowardice-but-a-bright-symbol-of-humanity"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1002114816.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">अहिंसा भारतीय संस्कृति की आत्मा है। यह केवल हिंसा का अभाव नहीं बल्कि प्रेम करुणा दया सहिष्णुता और आत्मबल का ऐसा महान संदेश है जो मानव जीवन को श्रेष्ठता की ओर ले जाता है। अहिंसा मनुष्य को दुर्बल नहीं बनाती बल्कि उसके भीतर साहस संयम और आत्मविश्वास का संचार करती है। यही कारण है कि भारतीय मनीषियों ने अहिंसा को धर्म का सर्वोच्च स्वरूप माना है। अहिंसा का अर्थ किसी भी जीव को मन वचन और कर्म से कष्ट न पहुंचाना है। यह केवल व्यक्तिगत आचरण तक सीमित नहीं रहती बल्कि परिवार समाज राष्ट्र और पूरे विश्व को शांति और सद्भाव का मार्ग दिखाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अहिंसा की दृष्टि अत्यंत व्यापक और विराट है। इसमें संकीर्णता के लिए कोई स्थान नहीं है। यह किसी जाति धर्म भाषा प्रदेश अथवा संप्रदाय की सीमाओं में बंधी हुई विचारधारा नहीं है। जिस प्रकार गंगा का निर्मल जल सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध रहता है उसी प्रकार अहिंसा भी संपूर्ण मानवता के लिए समान रूप से उपयोगी है। यदि इसे किसी विशेष वर्ग या समुदाय तक सीमित कर दिया जाए तो इसका वास्तविक स्वरूप नष्ट हो जाएगा। अहिंसा का संदेश समस्त विश्व के लिए है और इसकी शक्ति किसी भी हथियार से अधिक प्रभावशाली मानी जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इतिहास इस बात का साक्षी है कि अहिंसा ने अनेक बार असंभव प्रतीत होने वाले कार्यों को संभव बनाया है। भारत का स्वतंत्रता संग्राम इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के बल पर अंग्रेजी शासन जैसी विशाल शक्ति को चुनौती दी। उन्होंने न तो हथियार उठाए और न ही हिंसा का सहारा लिया। फिर भी सत्याग्रह असहयोग आंदोलन और दांडी यात्रा जैसे आंदोलनों के माध्यम से उन्होंने पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में बांध दिया। करोड़ों भारतीयों की नैतिक शक्ति के सामने अंग्रेजी साम्राज्य को झुकना पड़ा। यह सिद्ध हो गया कि आत्मबल और सत्य पर आधारित अहिंसा किसी भी सैन्य शक्ति से अधिक प्रभावशाली हो सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अहिंसा का अर्थ कभी भी कायरता नहीं होता। कायर व्यक्ति भय के कारण संघर्ष से बचता है जबकि अहिंसक व्यक्ति अन्याय का सामना साहस और आत्मविश्वास के साथ करता है। अहिंसा वीरों का धर्म है क्योंकि इसके लिए अत्यंत धैर्य त्याग और आत्मसंयम की आवश्यकता होती है। जो व्यक्ति क्रोध और प्रतिशोध की भावना पर विजय प्राप्त कर लेता है वही वास्तविक अर्थों में वीर कहलाता है। हिंसा करना सरल हो सकता है किंतु क्षमा करना और शांति बनाए रखना कहीं अधिक कठिन है। इसलिए अहिंसा दुर्बलों का नहीं बल्कि आत्मबल से परिपूर्ण व्यक्तियों का मार्ग है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अहिंसा मनुष्य को यह शिक्षा देती है कि वह अपने स्वार्थ के लिए किसी दूसरे के अधिकारों का हनन न करे। प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है। किसी भी समाज या राष्ट्र के आंतरिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। विवाद चाहे व्यक्तिगत हो या अंतरराष्ट्रीय उसका समाधान संवाद समझदारी और शांतिपूर्ण प्रयासों से खोजा जाना चाहिए। यदि शांति स्थापित करने के लिए त्याग और बलिदान देना पड़े तो उससे पीछे नहीं हटना चाहिए। यही सच्ची अहिंसा का स्वरूप है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह भी सत्य है कि अहिंसा अन्याय को सहन करने की शिक्षा नहीं देती। अन्याय करना जितना बड़ा अपराध है उतना ही बड़ा अपराध अन्याय को कायरता के कारण स्वीकार कर लेना भी है। यदि किसी व्यक्ति समाज या राष्ट्र पर अत्याचार हो रहा हो तो उसका प्रतिकार करना आवश्यक है। अहिंसा का अर्थ यह नहीं कि मनुष्य अन्याय के सामने हाथ पर हाथ रखकर बैठा रहे। यदि देश धर्म समाज और मानवता की रक्षा के लिए आवश्यक हो तो साहसपूर्ण कदम उठाना भी कर्तव्य बन जाता है। इसलिए अहिंसा विवेकपूर्ण साहस का मार्ग है न कि निष्क्रियता का।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय संतों और महापुरुषों ने अपने जीवन से अहिंसा की महानता को सिद्ध किया है। भगवान महावीर ने संपूर्ण जीवन अहिंसा और करुणा का संदेश दिया। उन्होंने प्रत्येक जीव में आत्मा का वास माना और सभी के प्रति दया का व्यवहार करने की प्रेरणा दी। उनके विचार आज भी विश्वभर में शांति और सहअस्तित्व की भावना को मजबूत करते हैं। महात्मा बुद्ध ने भी प्रेम करुणा और मध्यम मार्ग का संदेश देकर समाज की अनेक बुराइयों का विरोध किया। उन्होंने हिंसा और घृणा के स्थान पर मैत्री और करुणा को अपनाने की शिक्षा दी। उनके उपदेश आज भी मानवता के लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस शिक्षा का वास्तविक अर्थ कायरता नहीं बल्कि घृणा का उत्तर प्रेम से देना है। यह मनुष्य के भीतर की महानता को प्रकट करता है और समाज में वैमनस्य के स्थान पर सद्भाव को बढ़ावा देता है।आधुनिक युग में जब संसार युद्ध आतंकवाद हिंसा और कट्टरता जैसी समस्याओं से जूझ रहा है तब अहिंसा की प्रासंगिकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। आज विज्ञान और तकनीक ने मानव जीवन को सुविधाजनक तो बनाया है किंतु साथ ही विनाशकारी हथियारों का भी निर्माण किया है। ऐसे समय में यदि विश्व को स्थायी शांति चाहिए तो उसे अहिंसा सहिष्णुता और संवाद की राह अपनानी होगी। परिवार से लेकर अंतरराष्ट्रीय संबंधों तक हर स्तर पर प्रेम विश्वास और सहयोग की भावना विकसित करनी होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अहिंसा केवल युद्ध न करने का नाम नहीं है बल्कि अपने व्यवहार विचार और वाणी में भी शालीनता बनाए रखना है। कटु शब्द भी हिंसा का रूप होते हैं और मधुर वचन भी अहिंसा की अभिव्यक्ति बन सकते हैं। जब मनुष्य अपने भीतर से घृणा ईर्ष्या और द्वेष को समाप्त कर देता है तब उसके जीवन में शांति और संतोष का उदय होता है। यही शांति समाज और राष्ट्र तक पहुंचकर विश्व शांति का आधार बनती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः कहा जा सकता है कि अहिंसा मानव सभ्यता की सबसे महान उपलब्धियों में से एक है। यह कायरता नहीं बल्कि आत्मबल सत्य साहस और मानवता का उज्ज्वल प्रतीक है। अहिंसा हमें न्याय के लिए संघर्ष करना सिखाती है किंतु घृणा और प्रतिशोध के बिना। यह प्रेम करुणा और क्षमा के माध्यम से समाज को जोड़ने का कार्य करती है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में अहिंसा के आदर्शों को अपनाए तो विश्व में शांति सद्भाव और भाईचारे की स्थापना संभव है। यही वह मार्ग है जो मानवता को विनाश से बचाकर विकास समृद्धि और स्थायी शांति की ओर ले जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 21:48:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>फर्जी मुकदमों की बढ़ती चुनौती: एससी-एसटी और पॉक्सो कानूनों के कथित दुरुपयोग पर उठे गंभीर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारतीय न्याय व्यवस्था में देरी तो है ही पर इसके साथ बहुत से मामले ऐसे हैं जिनका दुरुपयोग बड़ी तेजी से हो रहा है। हम बात कर रहे हैं एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो मामलों की जिनमें आदमी अगर सतर्क नहीं रहा तो बहुत बुरी तरह से घिर जाता है। एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट के बढ़ते मुकदमे इसकी गवाही दे रहे हैं। कुछ ऐसे संगठित गिरोह भी हैं जो महिलाओं के द्वारा आदमियों को फंसवाते देखे गए हैं। हालांकि उन गिरोहों का पर्दाफाश होता है लेकिन तब तक आरोपी को सज़ा काटनी ही पड़ती है। इसी तरह एससी-एसटी एक्ट के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184359/growing-challenge-of-fake-cases-serious-questions-raised-on-alleged"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/rajeev.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय न्याय व्यवस्था में देरी तो है ही पर इसके साथ बहुत से मामले ऐसे हैं जिनका दुरुपयोग बड़ी तेजी से हो रहा है। हम बात कर रहे हैं एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो मामलों की जिनमें आदमी अगर सतर्क नहीं रहा तो बहुत बुरी तरह से घिर जाता है। एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट के बढ़ते मुकदमे इसकी गवाही दे रहे हैं। कुछ ऐसे संगठित गिरोह भी हैं जो महिलाओं के द्वारा आदमियों को फंसवाते देखे गए हैं। हालांकि उन गिरोहों का पर्दाफाश होता है लेकिन तब तक आरोपी को सज़ा काटनी ही पड़ती है। इसी तरह एससी-एसटी एक्ट के कानून का दुरुपयोग वर्षों से हो रहा है लेकिन आज तक कितनी ही सरकारें आईं हों इनमें संसोधन नहीं हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समान न्याय का अधिकार देता है। इसी उद्देश्य से समय-समय पर ऐसे विशेष कानून बनाए गए जो समाज के कमजोर और संवेदनशील वर्गों को सुरक्षा प्रदान कर सकें। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और पॉक्सो कानून भी इसी सोच का परिणाम हैं। इन कानूनों ने अनेक पीड़ितों को न्याय दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया है और समाज में अपराधियों के विरुद्ध कठोर संदेश दिया है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एक दूसरा पक्ष भी लगातार चर्चा में रहा है। कई लोग आरोप लगाते हैं कि व्यक्तिगत दुश्मनी, संपत्ति विवाद, राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता या पारिवारिक संघर्ष में इन कानूनों का दुरुपयोग कर झूठे मुक़दमे दर्ज कराए जाते हैं। यह मुद्दा अदालतों, विधि विशेषज्ञों और समाज के बीच लगातार बहस का विषय बना हुआ है। क्या सचमुच फर्जी मुकदमों की बाढ़ है?</p>
<p style="text-align:justify;"><br />यह कहना कि अधिकांश एससी-एसटी या पॉक्सो के मामले फर्जी हैं, उपलब्ध आधिकारिक आँकड़ों के आधार पर उचित नहीं होगा। कई मामलों में जांच के बाद आरोप सिद्ध नहीं हो पाते, लेकिन इसका कारण हमेशा झूठा मुकदमा नहीं होता। कमजोर जांच, पर्याप्त साक्ष्यों का अभाव, गवाहों का मुकर जाना, समझौते का दबाव या लंबी न्यायिक प्रक्रिया भी इसके कारण हो सकते हैं। हालाँकि, विभिन्न उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय ने अलग-अलग मामलों में यह भी स्वीकार किया है कि कुछ मामलों में कानूनों का दुरुपयोग होने की शिकायतें सामने आई हैं। इसलिए यह विषय संतुलित दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है। निर्दोष व्यक्ति पर मुकदमे का प्रभाव- यदि कोई व्यक्ति वास्तव में झूठे मुकदमे में फँस जाता है, तो उसका प्रभाव केवल अदालत तक सीमित नहीं रहता। उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित होती है, नौकरी पर संकट आ सकता है, आर्थिक बोझ बढ़ जाता है और पूरा परिवार मानसिक तनाव से गुजरता है। वर्षों तक मुकदमा चलने के बाद यदि वह निर्दोष साबित भी हो जाए, तब भी खोया हुआ समय और सम्मान आसानी से वापस नहीं आता। दूसरी ओर यह भी नहीं भूलना चाहिए कि एससी-एसटी कानून और पॉक्सो अधिनियम लाखों वास्तविक पीड़ितों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। भारत में जातीय उत्पीड़न और बच्चों के साथ यौन अपराध आज भी गंभीर समस्या हैं। यदि इन कानूनों को कमजोर किया जाए या हर शिकायत को संदेह की दृष्टि से देखा जाए, तो वास्तविक पीड़ित न्याय पाने से वंचित हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इसलिए चुनौती यह नहीं है कि कानून समाप्त कर दिए जाएँ, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका सही और निष्पक्ष उपयोग हो। देश की अदालतों में करोड़ों मुकदमे लंबित हैं। विशेष कानूनों के अंतर्गत दर्ज मामलों की संख्या बढ़ने से न्यायिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। सुनवाई में देरी के कारण न तो पीड़ित को समय पर न्याय मिल पाता है और न ही निर्दोष व्यक्ति को शीघ्र राहत। तेज और वैज्ञानिक जांच, पर्याप्त न्यायाधीशों की नियुक्ति तथा समयबद्ध सुनवाई इस समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सरकार की जिम्मेदारी केवल कठोर कानून बनाना नहीं है, बल्कि उनकी निष्पक्ष क्रियान्वयन व्यवस्था सुनिश्चित करना भी है। यदि कहीं झूठे मुकदमे दर्ज होते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं यदि वास्तविक पीड़ित न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं तो उन्हें भी समय पर न्याय मिलना चाहिए। इस विषय पर कई विधि विशेषज्ञ निम्न सुधारों की आवश्यकता बताते हैं— निष्पक्ष और वैज्ञानिक पुलिस जांच। फॉरेंसिक साक्ष्यों का अधिक उपयोग। विशेष अदालतों की संख्या बढ़ाना।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण। यदि अदालत यह पाए कि शिकायत जानबूझकर झूठी और दुर्भावनापूर्ण थी, तो कानून के अनुसार उचित कार्रवाई। पुलिस और अभियोजन अधिकारियों का नियमित प्रशिक्षण। "सरकार और अदालतें धृतराष्ट्र बनी हुई हैं" जैसी अभिव्यक्ति एक राजनीतिक और भावनात्मक टिप्पणी हो सकती है, लेकिन वास्तविक समाधान तथ्यों और संस्थागत सुधारों में निहित है। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में दो सिद्धांत समान रूप से महत्वपूर्ण हैं—दोषी को दंड मिले और निर्दोष को अनावश्यक दंड या उत्पीड़न न झेलना पड़े। इसलिए आवश्यकता न तो कानूनों को कमजोर करने की है और न ही हर शिकायत को झूठा मानने की। आवश्यकता ऐसी न्याय व्यवस्था की है जो वास्तविक पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाए, निर्दोष लोगों के अधिकारों की रक्षा करे और न्याय प्रणाली पर जनता का विश्वास मजबूत बनाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 22:55:39 +0530</pubDate>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट की गरिमा और न्याय की संवेदना</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश की सर्वोच्च अदालत केवल एक न्यायिक संस्था नहीं है, बल्कि संविधान की आत्मा और लोकतंत्र की अंतिम आशा का केंद्र है। जब देश का कोई नागरिक हर स्तर पर न्याय की तलाश में असफल होकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाता है, तो उसके मन में यही विश्वास होता है कि यहां उसकी बात निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ सुनी जाएगी। इसी कारण सुप्रीम कोर्ट की गरिमा, मर्यादा और प्रतिष्ठा पूरे न्यायिक तंत्र की आधारशिला मानी जाती है। अदालत की गरिमा बनाए रखना जितना न्यायाधीशों और न्यायिक कर्मचारियों का दायित्व है, उतना ही वहां उपस्थित प्रत्येक अधिवक्ता, याचिकाकर्ता और नागरिक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183200/supreme-courts-sense-of-dignity-and-justice"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/images-(3)2.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश की सर्वोच्च अदालत केवल एक न्यायिक संस्था नहीं है, बल्कि संविधान की आत्मा और लोकतंत्र की अंतिम आशा का केंद्र है। जब देश का कोई नागरिक हर स्तर पर न्याय की तलाश में असफल होकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाता है, तो उसके मन में यही विश्वास होता है कि यहां उसकी बात निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ सुनी जाएगी। इसी कारण सुप्रीम कोर्ट की गरिमा, मर्यादा और प्रतिष्ठा पूरे न्यायिक तंत्र की आधारशिला मानी जाती है। अदालत की गरिमा बनाए रखना जितना न्यायाधीशों और न्यायिक कर्मचारियों का दायित्व है, उतना ही वहां उपस्थित प्रत्येक अधिवक्ता, याचिकाकर्ता और नागरिक का भी कर्तव्य है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता वकील द्वारा न्यायाधीशों के प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग करना, कागजात उछालना और मुख्य न्यायाधीश के लिए अपशब्द कहना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। किसी भी परिस्थिति में न्यायालय के भीतर इस प्रकार का व्यवहार स्वीकार्य नहीं कहा जा सकता। अदालत तर्क और कानून की भाषा समझती है, आक्रोश और अपमान की नहीं। यदि न्याय की लड़ाई लड़ने वाला स्वयं कानून और शिष्टाचार की सीमाएं लांघने लगे, तो न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास कमजोर होने का खतरा पैदा हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वकील केवल अपने मुवक्किल का प्रतिनिधि नहीं होता, बल्कि वह न्यायालय का भी अधिकारी माना जाता है। उसकी वाणी, उसका आचरण और उसका व्यवहार न्यायपालिका की गरिमा से जुड़ा होता है। इसलिए अधिवक्ताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे कठिन से कठिन परिस्थिति में भी संयम बनाए रखें। असहमति व्यक्त करने का अधिकार सभी को है, लेकिन असहमति और अभद्रता के बीच एक स्पष्ट रेखा होती है। उस रेखा का सम्मान करना ही लोकतांत्रिक संस्कृति और न्यायिक परंपरा की पहचान है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अदालत ने वकील की याचिका खारिज कर दी, लेकिन उसके खिलाफ अवमानना की कठोर कार्रवाई नहीं की। न्यायाधीशों ने यह भी कहा कि वह व्यक्ति संभवतः अत्यधिक तनाव और मानसिक दबाव में है तथा उसकी हताशा स्पष्ट दिखाई दे रही है। यह दृष्टिकोण न्यायपालिका की मानवीय संवेदना को भी सामने लाता है। कानून केवल दंड देने का माध्यम नहीं है, बल्कि परिस्थितियों को समझने और न्याय के व्यापक उद्देश्य को ध्यान में रखने की व्यवस्था भी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वास्तविकता यह है कि न्याय की तलाश में अदालत तक पहुंचने वाला प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी पीड़ा, संघर्ष या अन्याय का बोझ लेकर आता है। वर्षों तक मुकदमे लड़ने, आर्थिक बोझ उठाने और बार-बार अदालतों के चक्कर लगाने के बाद जब अपेक्षित परिणाम नहीं मिलता, तब कई लोग मानसिक रूप से टूट जाते हैं। यह टूटन कभी-कभी हताशा और असंतुलित व्यवहार के रूप में सामने आती है। इसका अर्थ यह नहीं कि ऐसे व्यवहार को उचित ठहराया जाए, बल्कि यह समझना आवश्यक है कि उसके पीछे पीड़ा और निराशा का एक लंबा इतिहास भी हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">न्यायपालिका की सबसे बड़ी ताकत उसकी निष्पक्षता के साथ-साथ उसकी संवेदनशीलता भी है। यदि कोई व्यक्ति अदालत में अत्यधिक तनावग्रस्त दिखाई देता है, तो उसके साथ कानून के अनुसार व्यवहार करते हुए उसकी मानसिक स्थिति को भी समझना चाहिए। न्याय केवल आदेश सुनाने से पूरा नहीं होता, बल्कि यह विश्वास भी पैदा करता है कि अदालत ने व्यक्ति की बात पूरी गंभीरता से सुनी और समझी। यही विश्वास लोकतंत्र की सबसे बड़ी पूंजी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह भी सच है कि न्याय में विलंब, लंबी कानूनी प्रक्रिया और बढ़ते मुकदमों का बोझ कई लोगों में निराशा पैदा करता है। ऐसे में न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ, सरल और समयबद्ध बनाने की दिशा में लगातार प्रयास आवश्यक हैं। जब लोगों को समय पर न्याय मिलेगा, तो निराशा और असंतोष की स्थितियां भी कम होंगी। न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल विवादों का निपटारा नहीं, बल्कि समाज में विश्वास और संतुलन बनाए रखना भी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना ने एक और संदेश दिया है कि न्यायालय की गरिमा बनाए रखने में सभी की समान जिम्मेदारी है। यदि अदालत में अनुशासन समाप्त हो जाए, तो न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होगी और इसका नुकसान अंततः आम नागरिक को ही होगा। इसलिए चाहे वह वरिष्ठ अधिवक्ता हों, नए वकील हों या स्वयं पक्षकार, सभी को यह समझना होगा कि अदालत में शब्दों का चयन, व्यवहार की मर्यादा और कानून के प्रति सम्मान सर्वोपरि है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरी ओर न्यायपालिका की उदारता भी सराहनीय है। यदि अदालत चाहती तो अवमानना की कार्रवाई कर सकती थी, लेकिन उसने संयम दिखाया और कठोर दंड देने के बजाय मामले को वहीं समाप्त करना उचित समझा। यह निर्णय बताता है कि न्याय केवल शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि विवेक, धैर्य और करुणा का संतुलित स्वरूप है। हालांकि इस उदारता का अर्थ यह नहीं लगाया जाना चाहिए कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाने का साहस करे। कानून का सम्मान हर परिस्थिति में अनिवार्य है।</div>
<div style="text-align:justify;">लोकतंत्र में न्यायपालिका अंतिम आशा होती है। जब प्रशासन, व्यवस्था और अन्य संस्थाओं से निराश व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट पहुंचता है, तो उसके मन में उम्मीद की आखिरी किरण बची होती है। इसलिए अदालतों को भी यह ध्यान रखना होगा कि उनके सामने खड़ा हर व्यक्ति केवल एक केस नंबर नहीं, बल्कि अपने जीवन की किसी गहरी समस्या से जूझता हुआ इंसान है। उसकी बात सुनते समय कानून के साथ मानवीय संवेदना भी बनी रहनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना से देश को दो महत्वपूर्ण सीख मिलती हैं। पहली, अदालत की गरिमा किसी भी कीमत पर भंग नहीं होनी चाहिए। न्यायालय में अपशब्द, आक्रोश और अभद्र व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध हैं। दूसरी, न्याय व्यवस्था को लोगों की पीड़ा, मानसिक तनाव और संघर्ष को भी समझना चाहिए, क्योंकि न्याय केवल निर्णय देने का नाम नहीं, बल्कि समाज में विश्वास बनाए रखने की प्रक्रिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट देश की सबसे बड़ी अदालत है और उसकी प्रतिष्ठा पूरे राष्ट्र की प्रतिष्ठा से जुड़ी हुई है। वहीं, अदालत की चौखट पर आने वाला हर व्यक्ति न्याय की उम्मीद लेकर आता है। इसलिए आवश्यक है कि एक ओर अधिवक्ता और पक्षकार अपनी मर्यादा और जिम्मेदारी को समझें, तो दूसरी ओर न्याय व्यवस्था भी हर पीड़ित की व्यथा को महसूस करते हुए कानून और संवेदना के बीच संतुलन बनाए रखे। यही संतुलन भारतीय न्यायपालिका की सबसे बड़ी शक्ति है और यही लोकतंत्र की स्थायी पहचान भी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 22:12:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भीम आर्मी के अतुल वाल्मीकि को पुलिस ने किया घर में नजर बंद </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बरेली।</strong> मेरठ की पीड़िता ललिता गौतम के परिवार से मिलने जा रहे सांसद एवं आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्रशेखर आज़ाद के कार्यक्रम से पूर्व बरेली में भीम आर्मी के नेता अतुल वाल्मीकि को बीती रात से उनके आवास पर पुलिस ने घर में ही नजर बंद कर उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">अतुल वाल्मीकि ने बताया  किसी भी नागरिक या सामाजिक कार्यकर्ता को बिना किसी स्पष्ट कानूनी आदेश के उसके घर में रोकना लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। लोकतंत्र में अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाना और पीड़ित परिवार के साथ</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183117/bhim-armys-atul-valmiki-put-under-house-arrest-by-police"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260710-wa0003-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बरेली।</strong> मेरठ की पीड़िता ललिता गौतम के परिवार से मिलने जा रहे सांसद एवं आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्रशेखर आज़ाद के कार्यक्रम से पूर्व बरेली में भीम आर्मी के नेता अतुल वाल्मीकि को बीती रात से उनके आवास पर पुलिस ने घर में ही नजर बंद कर उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अतुल वाल्मीकि ने बताया  किसी भी नागरिक या सामाजिक कार्यकर्ता को बिना किसी स्पष्ट कानूनी आदेश के उसके घर में रोकना लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। लोकतंत्र में अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाना और पीड़ित परिवार के साथ खड़ा होना कोई अपराध नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन के पास कोई वैधानिक आदेश है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। बिना लिखित आदेश के किसी व्यक्ति की स्वतंत्र आवाजाही पर रोक लगाना उचित नहीं है ।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 21:40:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जमीन विवाद में पुलिस पर मारपीट और अभद्रता का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के कलवारी थाना क्षेत्र के ग्राम कुसौरा में जमीन कब्जे के विवाद के बीच पुलिस पर मारपीट और अभद्रता का गंभीर आरोप लगाया गया है। पीड़िता सबा, पुत्री स्वर्गीय मोहम्मद कासिम, निवासी कुसौरा ने पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्रार्थना पत्र के अनुसार, 5 जुलाई को सुबह करीब 11 बजे गांव निवासी नागेंद्र पुत्र रामजतन कथित रूप से उस जमीन पर दीवार बनाकर कब्जा करने का प्रयास कर रहे थे, जहां पीड़िता के अनुसार उसके पूर्वजों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182881/police-accused-of-assault-and-indecency-in-land-dispute"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260707-wa0070.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के कलवारी थाना क्षेत्र के ग्राम कुसौरा में जमीन कब्जे के विवाद के बीच पुलिस पर मारपीट और अभद्रता का गंभीर आरोप लगाया गया है। पीड़िता सबा, पुत्री स्वर्गीय मोहम्मद कासिम, निवासी कुसौरा ने पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रार्थना पत्र के अनुसार, 5 जुलाई को सुबह करीब 11 बजे गांव निवासी नागेंद्र पुत्र रामजतन कथित रूप से उस जमीन पर दीवार बनाकर कब्जा करने का प्रयास कर रहे थे, जहां पीड़िता के अनुसार उसके पूर्वजों की आरा मशीन संचालित होती थी। सूचना मिलने पर सबा, उसकी मां कुलसुम बानो और भाई सुफियान मौके पर पहुंचे तथा निर्माण कार्य रोकने का अनुरोध किया। आरोप है कि इस दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बन गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पीड़िता का कहना है कि इसके बाद परिवार ने महिला हेल्पलाइन पर सूचना दी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। आरोप है कि नागेंद्र के बुलाने पर पहुंचे दरोगा एस.एन. सिंह ने बिना मामले की जांच किए ही सबा और उसके परिवार के साथ अभद्र व्यवहार किया।सबा का आरोप है कि दरोगा ने उसका कॉलर और गला पकड़कर धक्का दिया तथा जबरन थाने ले गए। परिवार का कहना है कि उन्हें शाम तक हवालात में रखा गया और बाद में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की निवारक धाराओं 107/151 के तहत चालान कर एसडीएम न्यायालय भेज दिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पीड़ित परिवार ने उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जमीन कब्जे के आरोपों की भी जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित दरोगा के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई किए जाने की मांग की है।हालांकि, इस मामले में पुलिस विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। अब जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182881/police-accused-of-assault-and-indecency-in-land-dispute</link>
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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 21:59:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुज़फ्फरनगर में बंधुआ मजदूरों के कथित उत्पीड़न मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का स्वतः संज्ञान</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर जिले में एक पेपर प्लेट निर्माण फैक्ट्री में बंधुआ मजदूरों के कथित उत्पीड़न और अमानवीय व्यवहार के मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने इस प्रकरण को मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन से जुड़ा मामला माना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, मुज़फ्फरनगर के मंडी गांव स्थित एक पेपर प्लेट फैक्ट्री में 12 मजदूरों को करीब डेढ़ वर्ष तक कथित रूप से बंधक बनाकर काम कराया गया। आरोप है कि उनसे देर रात तक लगातार काम लिया जाता था, जबकि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182528/national-human-rights-commission-takes-suo-motu-cognizance-of-alleged"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-02-at-15.59.16.jpeg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर जिले में एक पेपर प्लेट निर्माण फैक्ट्री में बंधुआ मजदूरों के कथित उत्पीड़न और अमानवीय व्यवहार के मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने इस प्रकरण को मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन से जुड़ा मामला माना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, मुज़फ्फरनगर के मंडी गांव स्थित एक पेपर प्लेट फैक्ट्री में 12 मजदूरों को करीब डेढ़ वर्ष तक कथित रूप से बंधक बनाकर काम कराया गया। आरोप है कि उनसे देर रात तक लगातार काम लिया जाता था, जबकि उन्हें पर्याप्त भोजन, उचित मजदूरी और मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई जाती थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया गया कि पीड़ित मजदूरों में से एक किसी तरह फैक्ट्री से निकलने में सफल रहा और उसने तितावी थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद पुलिस ने छापेमारी कर अन्य मजदूरों को भी फैक्ट्री से मुक्त कराया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मेडिकल जांच में कई मजदूरों के शरीर पर चोट, कटने के निशान, हड्डियां टूटने तथा लंबे समय तक शारीरिक प्रताड़ना के संकेत मिले हैं। पुलिस जांच में एक व्यक्ति की मृत्यु की भी पुष्टि हुई है। साथ ही यह जांच जारी है कि इस दौरान किसी अन्य व्यक्ति की भी मौत तो नहीं हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कहा कि यदि मीडिया में प्रकाशित तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह मानवाधिकारों का अत्यंत गंभीर उल्लंघन है। आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर मामले की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त आयोग ने मुज़फ्फरनगर के जिलाधिकारी को श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की मानक कार्यप्रणाली (SOP) तथा <strong>बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम, 1976</strong> के प्रावधानों के अनुरूप पूरे मामले की जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि सभी मुक्त कराए गए मजदूरों का <strong>ई-श्रम पोर्टल</strong> पर पंजीकरण कराया जाए तथा आयोग द्वारा 8 दिसंबर 2021 को जारी परामर्श के अनुसार उनके पुनर्वास और अन्य आवश्यक सहायता संबंधी कार्रवाई की जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">25 जून 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पीड़ित मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा, छत्तीसगढ़, झारखंड तथा नेपाल के निवासी हैं। आरोप है कि उन्हें रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और अन्य सार्वजनिक स्थानों से रोजगार, नियमित वेतन, भोजन और रहने की सुविधा का लालच देकर फैक्ट्री लाया गया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फैक्ट्री पहुंचने के बाद कथित रूप से उनके मोबाइल फोन और पहचान पत्र छीन लिए गए ताकि वे अपने परिवारों से संपर्क न कर सकें। रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि मजदूरों को डराने और उनके भागने से रोकने के लिए पिटबुल नस्ल के कुत्तों का इस्तेमाल किया जाता था।</p>
<p style="text-align:justify;">अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की निगरानी में मामले की जांच आगे बढ़ेगी। आयोग द्वारा मांगी गई रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और पीड़ित मजदूरों के पुनर्वास संबंधी निर्णय लिए जाने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 17:12:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिहार पुलिस की कार्रवाई के विरोध में ब्राह्मण महासभा ने निकाला कैंडल मार्च, भरत भूषण तिवारी को दिया श्रद्धांजलि</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong> बिहार पुलिस की फायरिंग में कथित मुठभेड़ के शिकार हुये  भरत भूष्ण तिवारी की स्मृति में शनिवार की शाम छावनी क्षेत्र में श्रद्धांजलि सभा एवं कैंडल मार्च का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा के जिलाध्यक्ष नवीन दुबे के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और घटना की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">शनिवार शाम करीब छह बजे छावनी तिराहे पर एकत्रित हुए लोगों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर मौन कैंडल मार्च निकाला। यह मार्च शहीद स्मारक तक पहुंचा, जहां स्वर्गीय भरत तिवारी के चित्र पर पुष्प</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182276/brahmin-mahasabha-took-out-a-candle-march-in-protest-against"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260628-wa0064.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong> बिहार पुलिस की फायरिंग में कथित मुठभेड़ के शिकार हुये  भरत भूष्ण तिवारी की स्मृति में शनिवार की शाम छावनी क्षेत्र में श्रद्धांजलि सभा एवं कैंडल मार्च का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा के जिलाध्यक्ष नवीन दुबे के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और घटना की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शनिवार शाम करीब छह बजे छावनी तिराहे पर एकत्रित हुए लोगों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर मौन कैंडल मार्च निकाला। यह मार्च शहीद स्मारक तक पहुंचा, जहां स्वर्गीय भरत तिवारी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा के जिलाध्यक्ष नवीन दुबे ने कहा कि भरत तिवारी की मौत अत्यंत दुखद एवं निंदनीय है। उन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय महामन्त्रीे सम्भू नाथ मिश्रा ने कहा कि संगठन पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।</div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में संजय शुक्ला जिला महामन्त्री शंभु नाथ शुक्ला, राधेश्याम पाण्डेय, आदित्य मणि पाण्डेय, अंकित त्रिपाठी उपेंद्र शुक्ला  प्रशांत पाण्डेय राहुल तिवारी, भृगुवंश मणि पाण्डेय, गणेश दूूबे, प्रभात मिश्रा, राम जी पाण्डेय, प्रवीण पाठक, दीपक पंडित, पैण्डा वाले बाबा, सूरज मिश्रा, शिवमंगल, लोकेश शुक्ला, अनुराग पाण्डेय, शिवम सिंह, जितेंद्र पाण्डेय, अंकित मिश्रा आशीष वर्मा, निर्भय पाठक संतोष दुबे के साथ ही संगठन के पदाधिकारी, समाजसेवी एवं क्षेत्र के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
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</div>
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<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 15:35:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संपादकीय पेज के लिए समसामयिक आलेख </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश में इन दिनों मजहबी आतंकवाद ने लवजेहाद का मुखौटा पहन लिया है। लव जिहाद सिर्फ श्रद्धा वालकर, साक्षी, सीमा गौतम, अनामिता, यशोदा, रबिता पहाड़िन, तनिष्का शर्मा, निकिता तोमर, चयनिका और टिक-टॉक स्टार शिवानी जैसी सैकड़ों हिंदू लड़कियों की कहानियां नहीं हैं। वास्तविकता में लव जिहाद आतंकवाद का ही दूसरा चेहरा है। यह हिंदू बेटियों पर अंतहीन अत्याचार, उनके धर्मांतरण और जिहाद की जुगुत्सा का बेहद वीभत्स और जीवंत चित्रण है। लव जिहाद या रोमियो जिहाद एक षड्यंत्र है, जिसके तहत मुस्लिम लड़के, गैर-मुस्लिम लड़कियों के साथ प्यार का ढोंग करके उनका धर्म-परिवर्तन कराते हैं। ये सिर्फ उनकी अस्मत ही</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181582/current-articles-for-editorial-page"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas16.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश में इन दिनों मजहबी आतंकवाद ने लवजेहाद का मुखौटा पहन लिया है। लव जिहाद सिर्फ श्रद्धा वालकर, साक्षी, सीमा गौतम, अनामिता, यशोदा, रबिता पहाड़िन, तनिष्का शर्मा, निकिता तोमर, चयनिका और टिक-टॉक स्टार शिवानी जैसी सैकड़ों हिंदू लड़कियों की कहानियां नहीं हैं। वास्तविकता में लव जिहाद आतंकवाद का ही दूसरा चेहरा है। यह हिंदू बेटियों पर अंतहीन अत्याचार, उनके धर्मांतरण और जिहाद की जुगुत्सा का बेहद वीभत्स और जीवंत चित्रण है। लव जिहाद या रोमियो जिहाद एक षड्यंत्र है, जिसके तहत मुस्लिम लड़के, गैर-मुस्लिम लड़कियों के साथ प्यार का ढोंग करके उनका धर्म-परिवर्तन कराते हैं। ये सिर्फ उनकी अस्मत ही नही लूटते है वरन उनके अश्लील वीडियो एमएमएस बना कर ब्लेक मेल कर उनको दूसरी हिन्दू लड़कियों को चंगुल मे फंसाने के लिए मजबूर करते हैं इतना ही नहीं जाल में फंसी इन लड़कियों को अब सुनियोजित तरीके से नशे की डोज देकर नशे की आदत डालने का धंधा भी चल रहा है इसके साथ ही इनको फुसलाकर और की बार ब्लेक मेल कर और जबरन धर्म परिवर्तन करने के लिए मजबूर किया जाता है इसके साथ ही इनका आर्थिक शोषण भी किया जाता है यदि शिकार लड़की अच्छे सम्पन्न परिवार से सम्बद्ध है तो उसे परिवार की बदनामी का भय दिखा कर लाखों रुपए की रकम बार बार वसूली जाती है। </div>
<div style="text-align:justify;">हाल ही में महाराष्ट्र के नागपुर से एक ऐसा खौफनाक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे देश को सन्न कर दिया है। यहां भारतीय वायुसेना  के एक अधिकारी की 24 साल की पत्नी को न सिर्फ 'रेप' और ब्लैकमेल का शिकार बनाया गया, बल्कि 'काला जादू' (काला जादू) कर उसका निजी धर्म भी बदल दिया गया। इस खतरनाक वायरस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, आरोप है कि नागपुर में भारतीय वायु सेना के अधिकारी की पत्नी के साथ ये दरिंदगी की गई। पीड़िता का आरोप है कि उसे नशीली दवा देकर रेप किया गया, अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया गया और उससे लाखों रुपये ऐंठे गए. इन सबके बाद धर्म बदलने के लिए दबाव डाला गया। 
<div style="text-align:justify;">पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मदारे और अमीन शेख को गिरफ़्तार कर लिया है, जबकि मध्य प्रदेश के तामिया निवासी तीसरे आरोपी हजरत मौलाना की तलाश जारी है.पुलिस के मुताबिक, पीड़ित महिला का पति एयरफोर्स अधिकारी और अन्य शहर में अधिकारी है। महिला नागपुर में नौकरानी डीलिंग का काम करती है। इसी बात की फ़ायदेमंदी उसके स्कूल के पुराने क्लासमेट अय्याज़ ताज मदारे (26) ने रची है। पुलिस के मुताबिक शिकायत करने वाली 24 साल की महिला के पति इंडियन एयर फ़ोर्स में हैं और अभी दूसरे शहर में तैनात हैं. पीड़िता प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करती है. फरवरी 2025 में अयाज़ ने कथित तौर पर एक प्लॉट खरीदने के बहाने उससे संपर्क किया और उसे वर्धा रोड पर एक होटल में बुलाया. महिला का आरोप है कि उसने उसे नशीला पदार्थ मिला हुआ जूस पिलाया और बेहोशी की हालत में उसके साथ रेप किया, साथ ही इस हरकत का वीडियो और फ़ोटो भी बनाए और कथित तौर पर उससे 3.09 लाख रुपये ऐंठे. पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि उस पर इस्लाम अपनाने का दबाव डाला गया और धार्मिक रीति-रिवाजों के नाम पर उससे कई तरह की चीजें कराई गईं.</div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस ने बलात्कार, बार-बार यौन उत्पीड़न, जबरन वसूली, ब्लैकमेल और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोपों के साथ-साथ काला जादू विरोधी कानून की धाराओं को भी लागू किया है। नागपुर पुलिस की एक टीम उस मौलाना की तलाश कर रही है जिसने कथित तौर पर धर्म परिवर्तन कराया था।</div>
<div style="text-align:justify;">डीसीपी सुरेश रेड्डी ने कहा, "महिला ने अपनी शिकायत में बलात्कार, जबरन वसूली, धर्मांतरण और काला जादू का आरोप लगाया है। जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का फोरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है। यह सबूत बेहद अहम साबित होगा। धर्मांतरण कराने वाले मौलाना की तलाश में पुलिस की एक टीम दूसरे राज्य गई है। गहन जांच जारी है।"  नागपुर पुलिस ने अय्याज मदारे और अमीन शेख को गिरफ्तार कर लिया है।</div>
<div style="text-align:justify;">इससे पहले अभी अप्रैल माह में महाराष्ट्र के अमरावती जिले के अचलपुर-परतवाड़ा इलाके से एक बेहद गंभीर यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग मामले ने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी . पुलिस ने इस मामले के मुख्य आरोपी मोहम्मद अयान ऊर्फ मोहम्मद तनवीर को गिरफ्तार किया गया . प्राथमिक जांच में पता चला  कि आरोपीएआइएमआइएम का कार्यकर्ता है और लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाकर उनका अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करता था.</div>
<div style="text-align:justify;">अमरावती में 180 युवतियों को प्रेमजाल में फंसाकर 350 अश्लील वीडियो बनाए गए. आरोपियों ने ब्लैकमेल कर कई बार शोषण किया. पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच शुरू की.स्थानीय सांसद डॉ. अनिल बोंडे के अनुसार, यह मामला किसी बड़े संगठित गिरोह से जुड़ा हो सकता है. उन्होंने बताया कि मोहम्मद अयान और मोहम्मद जोयान सहित अन्य आरोपियों ने 180 से अधिक लड़कियों के करीब 350 आपत्तिजनक वीडियो बनाए. इन वीडियो के जरिए उन्हें देह व्यापार में धकेलने के लिए ब्लैकमेल किया गया इससे पहले यूपी के मिर्जापुर में जिम की आड़ में चल रहे एक बड़े धर्मांतरण रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है. इस गिरोह का संचालन पुलिस का एक सिपाही और उसके साथी मिलकर कर रहे थे. इंस्टाग्राम से दोस्ती, ब्लैकमेलिंग और फिर धर्म परिवर्तन के इस काले खेल में अब तक 6 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई .मिर्जापुर पुलिस ने जिम के जरिए संचालित हो रहे एक सुनियोजित धर्मांतरण नेटवर्क का खुलासा किया है. जीआरपी में तैनात सिपाही इरशाद खां और उसके शागिर्द फरीद अहमद ने 'आयरन फायर' और 'KGN 2.0' जिम की आड़ में 50 से अधिक लड़कियों को जाल में फंसाया.</div>
<div style="text-align:justify;"> ये आरोपी इंस्टाग्राम के जरिए युवतियों से संपर्क बढ़ाते थे और बाद में प्रेम जाल या आपत्तिजनक वीडियो के जरिए ब्लैकमेल कर उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाते थे. पुलिस ने मुख्य सरगना लकी अली के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया , जबकि सिपाही इरशाद और मुठभेड़ के बाद ट्रेनर फरीद को गिरफ्तार किया गया.</div>
<div style="text-align:justify;">इन सभी वारदातों के मद्देनज़र यह साफ  है हिन्दू लड़कियों को फुसलाकर लवजेहाद में फंसा कर अय्याशी नशाखोरी और ब्लैकमेलिंग कर उनके धर्मांतरण का सिलसिला चल रहा है इस के पीछे सुनियोजित साजिश है और मजहबी वित्त व लीगल मदद भी भूमिका निभा रही हैं इस सम्बंध में अधिकाधिक जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं पिछले 40 वर्ष से लेखन और पत्रकारिता से जुड़े हैं) सम्पर्क 9219179431 </div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 17:01:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पटियाला में नेशनल कमीशन फॉर विमेन की पब्लिक हियरिंग से कई मामलों में तेज़ी से कार्रवाई हुई</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पटियाला</strong>,  NCW आपके द्वार’ पहल के तहत पटियाला में नेशनल कमीशन फॉर विमेन की पब्लिक हियरिंग में कई लंबे समय से पेंडिंग मामलों में तेज़ी से और सही दखल देखा गया, जिससे महिलाओं को समय पर न्याय दिलाने के कमीशन के वादे को फिर से पक्का किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान, नेशनल कमीशन फॉर विमेन की चेयरपर्सन, सुश्री विजया रहाटकर ने खुद महिलाओं और उनके परिवारों की शिकायतें सुनीं और संबंधित अधिकारियों को महिलाओं के खिलाफ हिंसा, हैरेसमेंट और जांच में लंबे समय तक देरी से जुड़े मामलों में तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया।</div>
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<div style="text-align:justify;">डिप्टी कमिश्नर डॉ. हिमांशु</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181548/public-hearing-of-national-commission-for-women-in-patiala-led"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1000910051.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पटियाला</strong>,  NCW आपके द्वार’ पहल के तहत पटियाला में नेशनल कमीशन फॉर विमेन की पब्लिक हियरिंग में कई लंबे समय से पेंडिंग मामलों में तेज़ी से और सही दखल देखा गया, जिससे महिलाओं को समय पर न्याय दिलाने के कमीशन के वादे को फिर से पक्का किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान, नेशनल कमीशन फॉर विमेन की चेयरपर्सन, सुश्री विजया रहाटकर ने खुद महिलाओं और उनके परिवारों की शिकायतें सुनीं और संबंधित अधिकारियों को महिलाओं के खिलाफ हिंसा, हैरेसमेंट और जांच में लंबे समय तक देरी से जुड़े मामलों में तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डिप्टी कमिश्नर डॉ. हिमांशु अग्रवाल और SSP वरुण शर्मा के नेतृत्व में पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा की गई तुरंत कार्रवाई की तारीफ करते हुए, सुश्री रहाटकर ने कहा कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों और कमीशन के बीच तालमेल से न्याय देने वाले सिस्टम में जनता का भरोसा मजबूत होता है, जिसमें पीड़ितों को बहुत ज़रूरी राहत देने के लिए समय पर दखल देना भी शामिल है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">-कनाडा में NRI महिला पर बेरहमी से हमले के मामले में FIR दर्ज</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान कमीशन के सामने लाए गए सबसे गंभीर मामलों में से एक एक जवान लड़की के माता-पिता से जुड़ा था, जिस पर 2024 में कनाडा में उसके पति ने बेरहमी से हमला किया था, जिससे उसके दिमाग में गंभीर चोटें आईं। पीड़ित का कनाडा में इलाज चल रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिवार ने कमीशन को बताया कि हालांकि कनाडा में क्रिमिनल केस दर्ज था, लेकिन आरोपी पति भारत भाग गया था। लगभग दो साल तक लोकल अधिकारियों से संपर्क करने के बावजूद, उन्हें मामले में ज़रूरी तरक्की नहीं मिली।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिकायत को गंभीरता से लेते हुए, माननीय चेयरपर्सन ने पटियाला के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस को तुरंत कार्रवाई करने और 24 घंटे के अंदर FIR दर्ज करने का निर्देश दिया। निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए, पुलिस ने तुरंत आरोपी पति और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ इंडियन पीनल कोड (IPC) के संबंधित नियमों के तहत FIR दर्ज कर ली।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">-पीछा करने और मारपीट के मामले में सख्त धाराएं जोड़ी गईं</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक और मामले में, एक जवान लड़की ने कमीशन को बताया कि उस पर और उसके परिवार पर उन लोगों ने हिंसक हमला किया जो कथित तौर पर उसका पीछा कर रहे थे और उसे परेशान कर रहे थे। FIR पहले ही दर्ज हो चुकी थी, लेकिन शिकायत करने वाली ने आरोप लगाया कि सही कानूनी नियमों का इस्तेमाल नहीं किया गया और उसे धमकियां और डराया-धमकाया जा रहा था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मामले की सुनवाई के बाद, सुश्री राहतकर ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को शिकायत करने वाली का बयान तुरंत रिकॉर्ड करने और संबंधित नियमों को लागू करने की जांच करने का निर्देश दिया। पुलिस ने बाद में कमीशन को बताया कि शिकायत करने वाले के बयान के अनुसार FIR को अपडेट और बेहतर बनाया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">-लंबे समय से लंबित लापता महिला के मामले में जांच के नए कदम</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कमीशन ने एक मां की याचिका पर भी सुनवाई की, जिसकी शादीशुदा बेटी 2022 से लापता है। शिकायत करने वाली ने लापता महिला के पति और उसके पार्टनर के शामिल होने की आशंका जताई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह देखते हुए कि मामला कई सालों से सुलझा नहीं है, माननीय चेयरपर्सन ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को जांच में तेजी लाने और बिना देर किए सभी जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया। निर्देशों का पालन करते हुए, पुलिस ने कमीशन को बताया कि पति का कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) मांगा गया है ताकि आगे की जांच की जा सके और मामले को आगे बढ़ाया जा सके। -सीधे दखल से समय पर न्याय पक्का करना</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन मामलों में देखी गई तेज़ कार्रवाई ‘नेशनल कमीशन फॉर विमेन एट योर डोरस्टेप’ पहल के ज़रिए कमीशन की ज़मीनी स्तर पर पहुँच का असर दिखाती है, जिसका मकसद न्याय व्यवस्था को महिलाओं के करीब लाना और यह पक्का करना है कि उनकी चिंताओं को बिना किसी देरी के दूर किया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चेयरपर्सन श्रीमती विजया रहाटकर ने दोहराया कि हर शिकायत न्याय व्यवस्था में एक महिला के भरोसे को दिखाती है और इसे तुरंत, निष्पक्ष और गंभीरता से निपटाया जाना चाहिए। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि नेशनल कमीशन फॉर विमेन महिलाओं से जुड़े मामलों की जवाबदेही, असरदार फ़ॉलो-अप और समय पर समाधान पक्का करने के लिए राज्य अधिकारियों के साथ मिलकर काम करता रहेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कमीशन ने पब्लिक हियरिंग के दौरान दिए गए निर्देशों पर तुरंत कार्रवाई करने में पंजाब पुलिस और ज़िला प्रशासन द्वारा दिए गए सहयोग का भी स्वागत किया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181548/public-hearing-of-national-commission-for-women-in-patiala-led</link>
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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:12:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिरासत में मौत और पुलिसिया हिंसा के मामलों में अभियोजन मंजूरी जरूरी नहीं: ।मध्य प्रदेश हाईकोर्ट।</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि हिरासत में मौत या पुलिसिया हिंसा के मामलों में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (</span>CrPC) <span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा 197 के तहत पूर्व सरकारी मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने दो पुलिस आरक्षकों की याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसे कृत्यों का सरकारी कर्तव्य के निर्वहन से कोई उचित संबंध नहीं माना जा सकता। जस्टिस गजेंद्र सिंह की एकल पीठ इंदौर में वर्ष 2015 में हुई एक युवक की कथित हिरासत मौत से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181536/prosecution-sanction-is-not-necessary-in-cases-of-custodial-death"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas6.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि हिरासत में मौत या पुलिसिया हिंसा के मामलों में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (</span>CrPC) <span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा 197 के तहत पूर्व सरकारी मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने दो पुलिस आरक्षकों की याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसे कृत्यों का सरकारी कर्तव्य के निर्वहन से कोई उचित संबंध नहीं माना जा सकता। जस्टिस गजेंद्र सिंह की एकल पीठ इंदौर में वर्ष 2015 में हुई एक युवक की कथित हिरासत मौत से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">याचिकाकर्ता पुलिसकर्मियों ने तर्क दिया कि उनके खिलाफ अभियोजन चलाने से पहले सरकार की मंजूरी आवश्यक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि कथित घटनाएं उनके आधिकारिक कर्तव्यों से जुड़ी हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मामले के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुसूचित जाति समुदाय से संबंध रखने वाले 24 वर्षीय पंकज वैष्णव को 19 दिसंबर 2015 को स्कूटर चोरी के मामले में पूछताछ के लिए इंदौर के एमआईजी थाने लाया गया। उसी रात उसकी पुलिस हिरासत में मौत हो गई। पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">घटना के बाद </span>CrPC <span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा 176 के तहत स्वतंत्र जांच कराई गई। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा की गई जांच में निष्कर्ष निकाला गया कि यह मामला आपराधिक मानव वध का प्रतीत होता है।इसके बाद दो आरक्षकों और एक थाना प्रभारी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अवैध निरुद्ध करने और झूठे साक्ष्य देने सहित विभिन्न आरोपों में आरोपपत्र दायर किया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 197 के संरक्षण का लाभ तभी मिल सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब आरोपित कृत्य और सरकारी कर्तव्य के निर्वहन के बीच स्पष्ट और उचित संबंध हो। लेकिन वर्तमान मामले में ऐसा कोई संबंध नहीं पाया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने कहा</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">यह ऐसा मामला नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें पुलिसकर्मी किसी हिंसक भीड़ को नियंत्रित कर रहे थे और बल प्रयोग करते हुए अपनी सीमा से आगे बढ़ गए हों। यहां आरोपित बल प्रयोग उस समय किया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब मृतक पुलिस हिरासत में था और थाने के नियंत्रण में था। ऐसी स्थिति में बल प्रयोग या शारीरिक हमला करने का कोई औचित्य नहीं था।”</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हाईकोर्ट ने कहा कि कानून पुलिस को कुछ विशेष परिस्थितियों में बल प्रयोग की अनुमति देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे हिंसक भीड़ को तितर-बितर करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गिरफ्तारी</span><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के उन फैसलों का भी उल्लेख किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें कहा गया कि हिरासत में हिंसा और मौत सभ्य समाज में सबसे गंभीर अपराधों में से हैं तथा यह व्यक्ति के मूल मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने आरक्षकों की पुनरीक्षण याचिका खारिज की और स्पष्ट किया कि हिरासत में मौत या पुलिसिया हिंसा जैसे मामलों में धारा 197 के तहत अभियोजन मंजूरी का संरक्षण उपलब्ध नहीं होगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 13:57:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाल मजदूरी रोकने के तहत खन्ना में दुकानों और ढाबों की चेकिंग</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लुधियाना, </strong> – डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन की गाइडलाइंस के तहत, जीवनजोत प्रोजेक्ट के तहत बाल मजदूरी रोकने के लिए एक खास कैंपेन चलाया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर रश्मि की लीडरशिप में डिस्ट्रिक्ट टास्क फोर्स ने कल खन्ना में अलग-अलग दुकानों और ढाबों पर सरप्राइज चेकिंग की, जहां बाल मजदूरी में लगे 09 बच्चों को बचाया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर श्रीमती रश्मि ने बताया कि रेस्क्यू के बाद बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, लुधियाना के सामने पेश किया गया। उन्होंने बताया कि बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता की भी काउंसलिंग की गई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह कैंपेन लीगल ऑफिसर दीपक कुमार (डिस्ट्रिक्ट</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181033/checking-of-shops-and-dhabas-in-khanna-to-stop-child"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1000901108.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लुधियाना, </strong> – डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन की गाइडलाइंस के तहत, जीवनजोत प्रोजेक्ट के तहत बाल मजदूरी रोकने के लिए एक खास कैंपेन चलाया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर रश्मि की लीडरशिप में डिस्ट्रिक्ट टास्क फोर्स ने कल खन्ना में अलग-अलग दुकानों और ढाबों पर सरप्राइज चेकिंग की, जहां बाल मजदूरी में लगे 09 बच्चों को बचाया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर श्रीमती रश्मि ने बताया कि रेस्क्यू के बाद बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, लुधियाना के सामने पेश किया गया। उन्होंने बताया कि बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता की भी काउंसलिंग की गई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह कैंपेन लीगल ऑफिसर दीपक कुमार (डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिस), शरद सूद (सुपरवाइजर) चाइल्ड हेल्प लाइन (1098), लुधियाना लेबर डिपार्टमेंट और पुलिस डिपार्टमेंट ने मिलकर चलाया। अवेयरनेस कैंपेन के दौरान लोगों को बताया गया कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों से बाल मजदूरी न करवाई जाए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिला बाल संरक्षण अधिकारी रश्मि ने कहा कि यह सरप्राइज चेकिंग भविष्य में भी जारी रहेगी ताकि बाल मजदूरी को पूरी तरह से खत्म किया जा सके।<br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181033/checking-of-shops-and-dhabas-in-khanna-to-stop-child</link>
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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 20:52:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑपरेशन मिलाप : बिछड़ों को अपनों से मिलाने का मानवीय अभियान, परिवारों के आंसुओं में लौटी खुशियों की रोशनी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">किसी घर का बेटा, बेटी, बहन, भाई या माता-पिता अचानक लापता हो जाएं तो उस परिवार पर क्या गुजरती है, इसका अंदाजा वही लगा सकता है जिसने इस पीड़ा को करीब से महसूस किया हो। गुमशुदगी केवल किसी व्यक्ति का घर से दूर हो जाना नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार की खुशियों, उम्मीदों और मानसिक शांति के खो जाने जैसा होता है। हर गुजरते दिन के साथ परिजनों की चिंता बढ़ती जाती है। हर दरवाजे की आहट उन्हें उम्मीद देती है कि शायद उनका अपना लौट आया हो। हर फोन कॉल उन्हें चौंका देती है। ऐसे में जब वर्षों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181002/operation-milap-a-humanitarian-campaign-to-reunite-separated-people-with"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/delhi-police.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">किसी घर का बेटा, बेटी, बहन, भाई या माता-पिता अचानक लापता हो जाएं तो उस परिवार पर क्या गुजरती है, इसका अंदाजा वही लगा सकता है जिसने इस पीड़ा को करीब से महसूस किया हो। गुमशुदगी केवल किसी व्यक्ति का घर से दूर हो जाना नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार की खुशियों, उम्मीदों और मानसिक शांति के खो जाने जैसा होता है। हर गुजरते दिन के साथ परिजनों की चिंता बढ़ती जाती है। हर दरवाजे की आहट उन्हें उम्मीद देती है कि शायद उनका अपना लौट आया हो। हर फोन कॉल उन्हें चौंका देती है। ऐसे में जब वर्षों या महीनों से बिछड़ा कोई व्यक्ति अचानक परिवार से मिल जाता है तो वह क्षण किसी चमत्कार से कम नहीं होता।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">गुजरात पुलिस द्वारा चलाया गया “ऑपरेशन मिलाप” इसी मानवीय संवेदना का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है। इस विशेष अभियान के अंतर्गत मात्र एक महीने में 1470 गुमशुदा व्यक्तियों को खोजकर उनके परिवारों से मिलाया गया। यह केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि हजारों टूटते हुए परिवारों के जीवन में आशा, विश्वास और खुशियों की वापसी का अभियान है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अभियान में 852 महिलाओं, 342 पुरुषों तथा 276 नाबालिग बच्चों और किशोरियों को खोजकर उनके परिजनों तक पहुंचाया गया। विशेष रूप से यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि बड़ी संख्या में किशोरियां और महिलाएं अपने परिवारों से बिछड़ गई थीं। ऐसे मामलों में समय के साथ परिवारों की चिंता कई गुना बढ़ जाती है। उन्हें हर पल किसी अनहोनी की आशंका सताती रहती है। ऐसे में पुलिस द्वारा इन लोगों को सुरक्षित ढूंढ़ निकालना निश्चित रूप से सराहनीय कार्य है।</div><div style="text-align:justify;">गुजरात पुलिस ने केवल औपचारिक जांच तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि पुराने और लंबित मामलों को दोबारा खोलकर नए सिरे से जांच की। आधुनिक तकनीक, मोबाइल फोन विश्लेषण, सोशल मीडिया गतिविधियों की निगरानी, विभिन्न राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय, सार्वजनिक परिवहन केंद्रों और आश्रय गृहों की जांच जैसे अनेक माध्यमों का उपयोग किया गया। शिकायतकर्ताओं और गवाहों से दोबारा संपर्क कर नए सुराग जुटाए गए। यह दर्शाता है कि यदि इच्छाशक्ति और संवेदनशीलता हो तो वर्षों पुराने मामलों में भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।</div><div style="text-align:justify;">सूरत पुलिस द्वारा सर्वाधिक 341 गुमशुदा व्यक्तियों का पता लगाना भी इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय स्तर पर समर्पित प्रयास किस प्रकार बड़े परिणाम दे सकते हैं। पुलिस और प्रशासन की यह सक्रियता उन परिवारों के लिए राहत का कारण बनी है जो वर्षों से अपने प्रियजनों की प्रतीक्षा में दिन गिन रहे थे।</div><div style="text-align:justify;">इस अभियान का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे समाज के सामने गुमशुदगी के वास्तविक कारण भी उजागर हुए हैं। पुलिस के विश्लेषण में सामने आया कि 14 से 17 वर्ष की आयु वर्ग की अनेक किशोरियां प्रेम संबंधों, पारिवारिक विवादों, अभिभावकों की डांट-फटकार अथवा पढ़ाई में असफलता जैसी परिस्थितियों के कारण घर छोड़कर चली गई थीं। कुछ मामले रोजगार की तलाश में पलायन करने वाले परिवारों से भी जुड़े पाए गए।</div><div style="text-align:justify;">यहां एक गंभीर सामाजिक संदेश छिपा हुआ है। जीवन में कठिनाइयां, असफलताएं, पारिवारिक मतभेद या भावनात्मक उलझनें आना स्वाभाविक है। किशोरावस्था में भावनाएं अधिक संवेदनशील होती हैं और कई बार छोटी घटनाएं भी बहुत बड़ी लगने लगती हैं। लेकिन घर छोड़ देना किसी समस्या का समाधान नहीं है। यह निर्णय क्षणिक आवेश में लिया जा सकता है, पर उसके परिणाम बहुत गंभीर होते हैं।</div><div style="text-align:justify;">कई बार बच्चों और किशोरों को लगता है कि उनके जाने से परिवार को कोई फर्क नहीं पड़ेगा या कुछ दिनों बाद सब सामान्य हो जाएगा। वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत होती है। जिस दिन कोई बच्चा या किशोर घर से लापता होता है, उसी दिन से उसके माता-पिता का चैन और नींद समाप्त हो जाती है। मां की आंखें दरवाजे पर लगी रहती हैं। पिता बाहर से मजबूत दिखने का प्रयास करता है, लेकिन भीतर से टूट चुका होता है। भाई-बहन चिंता और असुरक्षा के बीच जीते हैं। पूरा परिवार हर संभावित स्थान पर तलाश करता है, पुलिस थानों के चक्कर लगाता है और अनिश्चितता के अंधेरे में जीवन बिताता है।</div><div style="text-align:justify;">गुमशुदगी का दर्द केवल भावनात्मक नहीं होता, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी परिवारों को प्रभावित करता है। अनेक परिवार अपनी बचत तक खर्च कर देते हैं। कई लोग कामकाज छोड़कर अपने प्रियजन की तलाश में जुट जाते हैं। मानसिक तनाव के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न होने लगती हैं। इसलिए किसी भी परिस्थिति में घर छोड़कर चले जाना न तो समझदारी है और न ही समस्याओं का समाधान।</div><div style="text-align:justify;">आज आवश्यकता इस बात की है कि परिवारों और बच्चों के बीच संवाद को मजबूत बनाया जाए। अभिभावक बच्चों की भावनाओं को समझें और बच्चे अपने माता-पिता पर विश्वास करें। यदि पढ़ाई में असफलता मिली है, किसी बात पर डांट पड़ी है या जीवन में कोई परेशानी आई है, तो उसका समाधान बातचीत से निकाला जा सकता है। परिवार ही वह स्थान है जहां व्यक्ति को सबसे अधिक सुरक्षा, प्रेम और सहयोग मिलता है।</div><div style="text-align:justify;">ऑपरेशन मिलाप की सफलता केवल आंकड़ों में नहीं मापी जा सकती। इसकी वास्तविक सफलता उन हजारों मुस्कानों में दिखाई देती है जो बिछड़ने के बाद फिर से लौट आईं। उन माताओं की आंखों में दिखाई देती है जिन्होंने वर्षों बाद अपने बच्चों को गले लगाया। उन परिवारों की खुशी में दिखाई देती है जिनकी उम्मीदें लगभग समाप्त हो चुकी थीं।</div><div style="text-align:justify;">यह अभियान यह भी सिद्ध करता है कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्था नहीं है, बल्कि समाज के दुख-दर्द में सहभागी बनने वाली संवेदनशील व्यवस्था भी है। जब पुलिस किसी गुमशुदा व्यक्ति को उसके परिवार तक पहुंचाती है, तब वह केवल एक केस बंद नहीं करती बल्कि एक टूटे हुए परिवार को फिर से जोड़ती है।</div><div style="text-align:justify;">ऑपरेशन मिलाप ने हजारों परिवारों को नई जिंदगी दी है। यह अभियान मानवता, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। साथ ही यह हम सभी को यह संदेश भी देता है कि जीवन की किसी भी कठिन परिस्थिति में घर और परिवार से दूर जाना समाधान नहीं है। संवाद, धैर्य और विश्वास ही हर समस्या का सबसे मजबूत उत्तर हैं। यदि यह संदेश समाज के प्रत्येक बच्चे और किशोर तक पहुंच जाए तो शायद भविष्य में अनेक परिवार गुमशुदगी की उस पीड़ा से बच सकेंगे, जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना संभव नहीं है।</div><div style="text-align:justify;">       </div><div style="text-align:justify;"><strong><br /></strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>                                                                           *कांतिलाल मांडोत*</strong></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:35:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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