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                <title>health awareness - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>health awareness RSS Feed</description>
                
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                <title>पटियाला में तंबाकू कंट्रोल कैंपेन के तहत स्पेशल चेकिंग - डॉ. इंदरप्रीत रंधावा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पटियाला  </strong>नेशनल तंबाकू कंट्रोल प्रोग्राम और नेशनल ब्लाइंडनेस कंट्रोल प्रोग्राम के तहत सिविल सर्जन ऑफिस, पटियाला की तरफ से स्पेशल चेकिंग और अवेयरनेस कैंपेन चलाया गया। यह कैंपेन डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. इंदरप्रीत रंधावा, परमजीत और खुशवीर की लीडरशिप में चलाया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस दौरान, टीम ने भादसों रोड, नाभा रोड और फैक्ट्री एरिया, पटियाला में स्पेशल इंस्पेक्शन किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इंस्पेक्शन के दौरान, तंबाकू कंट्रोल एक्ट का उल्लंघन करने पर कुल 8 चालान काटे गए। इस ऑपरेशन से कुल 1100 रुपये का जुर्माना वसूला गया। डिपार्टमेंट ने साफ किया कि तंबाकू प्रोडक्ट्स की बिक्री और इस्तेमाल से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180959/special-checking-under-tobacco-control-campaign-in-patiala-dr"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1000899653.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पटियाला  </strong>नेशनल तंबाकू कंट्रोल प्रोग्राम और नेशनल ब्लाइंडनेस कंट्रोल प्रोग्राम के तहत सिविल सर्जन ऑफिस, पटियाला की तरफ से स्पेशल चेकिंग और अवेयरनेस कैंपेन चलाया गया। यह कैंपेन डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. इंदरप्रीत रंधावा, परमजीत और खुशवीर की लीडरशिप में चलाया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस दौरान, टीम ने भादसों रोड, नाभा रोड और फैक्ट्री एरिया, पटियाला में स्पेशल इंस्पेक्शन किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इंस्पेक्शन के दौरान, तंबाकू कंट्रोल एक्ट का उल्लंघन करने पर कुल 8 चालान काटे गए। इस ऑपरेशन से कुल 1100 रुपये का जुर्माना वसूला गया। डिपार्टमेंट ने साफ किया कि तंबाकू प्रोडक्ट्स की बिक्री और इस्तेमाल से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आने वाले समय में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।</div><div style="text-align:justify;">इसके अलावा, नेशनल ब्लाइंडनेस कंट्रोल प्रोग्राम के तहत मोतियाबिंद स्क्रीनिंग कैंप लगाए गए और बुज़ुर्गों की आँखों की जाँच की गई और उन्हें दवाएँ और चश्मे भी दिए गए। ये कैंप पटियाला के भादसों ब्लॉक के गाँव लोट में लगाए गए थे। टीम ने कैंपों के कामकाज, मरीज़ों की जाँच, दवाओं की उपलब्धता और आँखों के इलाज की सेवाओं का विस्तार से जायज़ा लिया। मरीज़ों को आगे के इलाज के लिए सही सलाह, दवाएँ और रेफरल सेवाएँ भी दी गईं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">हेल्थ अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे तंबाकू जैसे नशे से दूर रहें और समय-समय पर अपनी आँखों की जाँच करवाएँ। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा चलाए जा रहे ये प्रोग्राम लोगों की सेहत को बेहतर बनाने और जागरूकता बढ़ाने के लिए बहुत ज़रूरी हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">डॉ. इंदरप्रीत रंधावा ने कहा कि आने वाले दिनों में भी ऐसी जाँच और कैंप लगातार जारी रहेंगे ताकि तंबाकू-मुक्त समाज और आँखों की बीमारियों से बचाव पक्का किया जा सके।<br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 19:08:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>टीबी अब लाइलाज नहीं समय पर पहचान और उपचार से संभव है पूरी तरह स्वस्थ जीवन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">एक समय था जब टीबी यानी क्षय रोग का नाम सुनते ही मरीज और उसके परिवार में डर का माहौल बन जाता था। लोगों को लगता था कि यह बीमारी जीवन भर पीछा नहीं छोड़ेगी और इसका इलाज संभव नहीं है। जानकारी की कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के कारण अनेक मरीज समय पर उपचार नहीं ले पाते थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में चिकित्सा विज्ञान ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज टीबी का प्रभावी इलाज उपलब्ध है और लाखों मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं। यही कारण है कि अब टीबी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180379/tb-is-no-longer-incurable-with-timely-detection-and-treatment"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/07_12_2024-tb_23844079_m.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">एक समय था जब टीबी यानी क्षय रोग का नाम सुनते ही मरीज और उसके परिवार में डर का माहौल बन जाता था। लोगों को लगता था कि यह बीमारी जीवन भर पीछा नहीं छोड़ेगी और इसका इलाज संभव नहीं है। जानकारी की कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के कारण अनेक मरीज समय पर उपचार नहीं ले पाते थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में चिकित्सा विज्ञान ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज टीबी का प्रभावी इलाज उपलब्ध है और लाखों मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं। यही कारण है कि अब टीबी को लाइलाज बीमारी नहीं माना जाता बल्कि समय पर पहचान और नियमित उपचार से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">टीबी एक संक्रामक रोग है जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है। यह बीमारी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु के कारण होती है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने छींकने या बोलने के दौरान निकलने वाली सूक्ष्म बूंदों के माध्यम से यह दूसरे लोगों तक फैल सकती है। हालांकि यह बीमारी केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं रहती बल्कि शरीर के अन्य अंगों जैसे हड्डियों लिम्फ नोड्स मस्तिष्क और गुर्दों को भी प्रभावित कर सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत लंबे समय से दुनिया में टीबी से सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2030 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है जबकि भारत ने इससे पहले ही टीबी मुक्त बनने का संकल्प लिया था। हालांकि यह लक्ष्य अभी पूरी तरह हासिल नहीं हो पाया है लेकिन सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जागरूकता अभियान बेहतर जांच सुविधाएं और मुफ्त उपचार जैसी योजनाओं ने इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजस्थान सहित देश के कई राज्यों में टीबी मरीजों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। 24 मार्च से शुरू किए गए 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत हाई रिस्क गांवों और क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग की जा रही है। आधुनिक तकनीक से लैस पोर्टेबल एक्स रे मशीनों का उपयोग किया जा रहा है जो गांव गांव पहुंचकर लोगों की जांच कर रही हैं। इन मशीनों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सॉफ्टवेयर लगा है जो मौके पर ही टीबी की आशंका का संकेत दे सकता है। इससे संदिग्ध मरीजों की पहचान तेजी से हो रही है और उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">टीबी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य बीमारी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी रहना टीबी का प्रमुख संकेत माना जाता है। इसके अलावा बुखार का बार बार आना रात में अत्यधिक पसीना आना वजन कम होना भूख न लगना सीने में दर्द होना सांस फूलना थकान बने रहना और बलगम में खून आना भी इसके महत्वपूर्ण लक्षण हैं। यदि किसी व्यक्ति में ये लक्षण दिखाई दें तो तुरंत जांच करानी चाहिए। समय पर जांच होने से बीमारी गंभीर होने से पहले ही पकड़ में आ जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज टीबी की जांच पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और सटीक हो गई है। न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट जैसी आधुनिक जांच तकनीकों के माध्यम से कुछ ही समय में रोग की पुष्टि की जा सकती है। देशभर में सैकड़ों आधुनिक मशीनें स्थापित की गई हैं जिनसे छिपे हुए मरीज भी सामने आ रहे हैं। इससे संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद मिल रही है और मरीजों को शीघ्र उपचार मिल रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">टीबी के इलाज में सबसे महत्वपूर्ण बात नियमित दवा सेवन है। सरकार की ओर से टीबी मरीजों को मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। उपचार की अवधि सामान्यतः छह महीने या उससे अधिक हो सकती है जो बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करती है। कई बार मरीज शुरुआती सुधार के बाद दवाएं लेना बंद कर देते हैं जिससे बीमारी दोबारा उभर सकती है और दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सकती है। इसलिए चिकित्सकों की सलाह के अनुसार पूरा उपचार लेना अत्यंत आवश्यक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पोषण भी टीबी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। संतुलित आहार शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और मरीज को जल्दी स्वस्थ होने में सहायता करता है। पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन विटामिन और खनिज तत्वों का सेवन लाभकारी होता है। सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत टीबी मरीजों को पोषण सहायता भी प्रदान की जाती है ताकि उपचार के दौरान उन्हें आवश्यक पोषण मिल सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">टीबी को लेकर समाज में फैली भ्रांतियां भी एक बड़ी समस्या रही हैं। कई लोग इस बीमारी को सामाजिक कलंक के रूप में देखते हैं जिसके कारण मरीज अपनी बीमारी छिपाने की कोशिश करते हैं। इससे उपचार में देरी होती है और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। आवश्यकता इस बात की है कि टीबी को एक सामान्य इलाज योग्य बीमारी के रूप में देखा जाए और मरीजों को सामाजिक सहयोग तथा मानसिक समर्थन दिया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोविड महामारी के दौरान टीबी नियंत्रण कार्यक्रमों पर भी असर पड़ा था जिससे कई मरीज समय पर जांच और उपचार से वंचित रह गए। लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग फिर से सक्रिय होकर व्यापक स्तर पर जांच अभियान चला रहा है। गांवों और दूरदराज क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं ताकि कोई भी मरीज उपचार से वंचित न रहे। टीबी के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार या स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि इसमें पूरे समाज की भागीदारी आवश्यक है। यदि किसी व्यक्ति में लक्षण दिखाई दें तो उसे जांच के लिए प्रेरित करना चाहिए। परिवार और समुदाय का सहयोग मरीज के आत्मविश्वास को बढ़ाता है और उपचार पूरा करने में मदद करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज चिकित्सा विज्ञान और सरकारी प्रयासों की बदौलत टीबी का सफल उपचार संभव है। लाखों लोग इस बीमारी को हराकर स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। इसलिए टीबी के लक्षण दिखने पर घबराने की नहीं बल्कि तुरंत जांच और उपचार शुरू कराने की जरूरत है। जागरूकता समय पर पहचान नियमित दवा सेवन और संतुलित पोषण के माध्यम से टीबी को पूरी तरह हराया जा सकता है। यदि समाज और स्वास्थ्य तंत्र मिलकर प्रयास करें तो टीबी मुक्त भारत का सपना भी निश्चित रूप से साकार हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 18:51:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दूध : स्वस्थ शरीर के लिए आवश्यक तत्व</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ई0 प्रभात किशोर</strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">दूध हमारे भोजन का एक प्रमुख हिस्सा है । इसे सम्पूर्ण भोजन भी माना जाता है । यह विटामिन ए, बी 2, डी, बी 12, कार्बोहाइट्रेट, पोटाशियम, मैग्निशियम, फास्फोरस, प्रोटीन का प्रमुख स्रोत है । आर्युवेदिक चिकित्सा पद्धति में विभिन्न असाध्य रोगों के निदान हेतु प्रयुक्त पंचगव्य के पांच तत्वों में तीन तत्व दूध तथा उसके उत्पाद क्रमशः दही एवं घी हैं ।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">गाय के दूध में 87 प्रतिशत जल होता है जबकि शेष 13 प्रतिशत में प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइट्रेट, विटामिन एवं अन्य पोषक खनिज पदार्थ मौजूद होते हैं।  विटामिन ए और बी आंख एवं लाल रक्त</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180370/milk-is-an-essential-element-for-a-healthy-body"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/cow-milk-blog-scaled.webp" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ई0 प्रभात किशोर</strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">दूध हमारे भोजन का एक प्रमुख हिस्सा है । इसे सम्पूर्ण भोजन भी माना जाता है । यह विटामिन ए, बी 2, डी, बी 12, कार्बोहाइट्रेट, पोटाशियम, मैग्निशियम, फास्फोरस, प्रोटीन का प्रमुख स्रोत है । आर्युवेदिक चिकित्सा पद्धति में विभिन्न असाध्य रोगों के निदान हेतु प्रयुक्त पंचगव्य के पांच तत्वों में तीन तत्व दूध तथा उसके उत्पाद क्रमशः दही एवं घी हैं ।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">गाय के दूध में 87 प्रतिशत जल होता है जबकि शेष 13 प्रतिशत में प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइट्रेट, विटामिन एवं अन्य पोषक खनिज पदार्थ मौजूद होते हैं।  विटामिन ए और बी आंख एवं लाल रक्त कणिकाओं के निर्माण हेतु, बी 12 तंत्रिकाओं की उचित कार्यप्रणाली के लिए, मैगनिशियम मांसपेशियों की कार्यप्रणाली के लिए, फास्फोरस उर्जा प्रदान करने के लिए, प्रोटीन शरीर के विकास एवं मरम्मत के लिए, कैल्शियम और विटामिन डी हड्डियों की मजबूती एवं सुरक्षा हेतु आवश्यक होते हैं ।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">सोडियम की मात्रा कम होने और पोटेशियम के कारण दूध रक्तचाप को सामान्य बनाए रखता है । दूध शरीर के कोलस्ट्रॉल को निष्प्रभावी कर देता है । यह कैंसर की आशंका को 35 प्रतिशत तक कम कर देता है । नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन के अनुसार मानव शरीर को प्रति दिन 1000 से 1200  मिलीग्राम कैल्सियम की आवश्यकता होती है और दूध कैल्शियम का प्रमुख स्रोत है ।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">दूध में अनेक पोषक तत्व उपलब्ध होते हैं, जो चमकती त्वचा के लिए आवश्यक है । इसमें उपलब्ध लैक्टिस एसिड जहां त्वचा को मुलायम रखता है, वहीं एंटी- ऑक्सीडेंटस पर्यावरण के विषैले प्रभाव से रक्षा करते हैं।  दूध एवं दूध-उत्पाद कैल्सियम, फॉस्फोरस और प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं, जो हड्डियों के स्वास्थ्य और विकास के लिए आवश्यक हैं। प्रति दिन एक गिलास दूध का सेवन हमारे लिए उपयोगी है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">इससे ऑस्टियोपोरोसिस की आशंका कम हो जाती है। दूध में दो प्रकार के प्रोटीन होते हैं। कुल प्रोटीन का 80 प्रतिशत कैसीन और 20 प्रतिशत व्हे होता है । कैसीन दांतों के लिए उपयोगी है, क्योंकि यह दांतों के इनेमल पर पतली पर्त बना लेता है, जो दांतों और मसूढ़ों को स्वस्थ रखने में सहायक होता है ।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">दूध में मौजूद प्रोटीन मांसपेशियों को शक्तिशाली बनाता है । व्यायाम के पश्चात दूध पीने पर कोशिकाओं में होने वाली टूट-फूट की मरम्मत हेतु शरीर को आवश्यक उर्जा प्राप्त होती है । साथ हीं यह वर्क-आउट के कारण शरीर में आई द्रव्य की कमी की पूर्ति भी करता है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">रात्रि में सोने के पूर्व दूध पीने पर मांसपेशियों और नसों को आराम मिलता है और नींद अच्छी आती है । दूध में मौजूद कैल्शियम, पोटेशियम और प्रोटीन रक्तचाप को संतुलित रखते हैं जिससे स्ट्रोक की संभावना कम हो जाती है । दूध कार्डियो वैस्कूलर बीमारियों का खतरा कम करता है । यह विटामिन बी 12 की प्रचुरता के कारण मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को भी दुरूस्त रखता है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">भारत विश्व का सबसे अधिक दूध उत्पादक और उपभोग करने वाला देश है । विश्व का लगभग 24 प्रतिशत दूध का उत्पादन भारत में होता है । वर्ष 1950-51 में देश में दुग्ध उत्पादन मात्र 17 मिलियन टन था । वर्ष 1968-69 में, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के द्वारा ऑपरेशन फ्लड प्रारम्भ किये जाने के पूर्व भारत में दूध का उत्पादन मात्र 21.2 मिलियन टन था, जो वर्ष 2024-25 तक बढ़कर 247.87 मिलियन टन हो गया है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">भारतवर्ष में दशकीय दुग्ध उत्पादन की स्थिति निम्नवत रही है:- वर्ष 1951 - 17 मिलियन टन, 1951 - 17 मिलियन टन, 1961 - 20 मिलियन टन, 1971 - 22 मिलियन टन, 1981 - 31.6 मिलियन टन, 1991 - 53.9 मिलियन टन, 2001 - 80.6 मिलियन टन, 2011 - 121.8 मिलियन टन, एवं वर्ष  2021 - 210 मिलियन टन ।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण में स्वस्थ नागरिक के भोज्य पदार्थ में दूध की अहम भूमिका है और प्रत्येक वर्ष 1 जून को आयोजित विश्व दुग्ध दिवस एवं 26 नवम्बर को आयोजित राष्ट्रीय दुग्ध दिवस मानव समाज को इस दिशा में सकारात्मक पहल करने हेतु प्रेरित करता है ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 18:34:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>करियर पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज एंड हॉस्पिटल द्वारा ‘विश्व मौखिक स्वास्थ्य दिवस’ पर जागरूकता अभियान </title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ-सचिन बाजपेई </strong></blockquote>
<p>राजधानी के चिनहट क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत सरौरा में विश्व मौखिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर एक व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम Career Post Graduate Institute of Dental Sciences and Hospital के पब्लिक हेल्थ डेंटिस्ट्री विभाग द्वारा ग्राम सचिवालय परिसर में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया।</p>
<p>कार्यक्रम का उद्देश्य केवल जानकारी देना ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना भी था, ताकि वे मौखिक स्वास्थ्य को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना सकें।</p>
<hr />
<h3><strong>स्वस्थ मुँह- स्वस्थ जीवन का आधार</strong></h3>
<p>कार्यक्रम की शुरुआत में विशेषज्ञ डॉक्टरों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177069/awareness-campaign-on-%E2%80%98world-oral-health-day%E2%80%99-in-saraura-%E2%80%93"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/whatsapp-image-2026-04-23-at-18.45.17.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ-सचिन बाजपेई </strong></blockquote>
<p>राजधानी के चिनहट क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत सरौरा में विश्व मौखिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर एक व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम Career Post Graduate Institute of Dental Sciences and Hospital के पब्लिक हेल्थ डेंटिस्ट्री विभाग द्वारा ग्राम सचिवालय परिसर में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया।</p>
<p>कार्यक्रम का उद्देश्य केवल जानकारी देना ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना भी था, ताकि वे मौखिक स्वास्थ्य को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना सकें।</p>
<hr />
<h3><strong>स्वस्थ मुँह- स्वस्थ जीवन का आधार</strong></h3>
<p>कार्यक्रम की शुरुआत में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने बताया कि मुँह की स्वच्छता केवल दाँतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शरीर के स्वास्थ्य से जुड़ी होती है।<br />डॉक्टरों ने समझाया कि—</p>
<ul>
<li>
<p>मुँह में संक्रमण से हृदय और पाचन संबंधी समस्याएँ भी हो सकती हैं</p>
</li>
<li>
<p>नियमित सफाई से कई गंभीर बीमारियों को रोका जा सकता है</p>
</li>
<li>
<p>सही खान-पान और स्वच्छता से जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है</p>
</li>
</ul>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/whatsapp-image-2026-04-23-at-18.45.18.jpeg" alt="स्वस्थ मुँह- स्वस्थ जीवन का आधार तंबाकू और गुटखा: छिपा हुआ खतरा" width="729" height="486"></img></p>
<hr />
<h3><strong>तंबाकू और गुटखा: छिपा हुआ खतरा</strong></h3>
<p>जागरूकता सत्र में तंबाकू उत्पादों के दुष्प्रभावों पर विशेष चर्चा की गई।<br />विशेषज्ञों ने बताया कि—</p>
<ul>
<li>
<p>तंबाकू, बीड़ी और गुटखा से दाँतों का क्षरण होता है</p>
</li>
<li>
<p>मसूड़ों की बीमारी और मुँह की दुर्गंध बढ़ती है</p>
</li>
<li>
<p>लंबे समय तक सेवन से <strong>मुँह का कैंसर</strong> होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है</p>
</li>
</ul>
<p>ग्रामीणों को वास्तविक उदाहरणों और चित्रों के माध्यम से इन दुष्प्रभावों को समझाया गया, जिससे लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ा।</p>
<hr />
<h3><strong>व्यावहारिक प्रशिक्षण और सहभागिता</strong></h3>
<p>कार्यक्रम को केवल भाषण तक सीमित न रखते हुए इसे पूरी तरह सहभागितापूर्ण बनाया गया।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/whatsapp-image-2026-04-23-at-18.45.15.jpeg" alt="स्वस्थ मुँह- स्वस्थ जीवन का आधार तंबाकू और गुटखा: छिपा हुआ खतरा" width="701" height="467"></img></p>
<p><strong>मुख्य गतिविधियाँ:</strong></p>
<ul>
<li>
<p><strong>ब्रशिंग तकनीक का प्रदर्शन:</strong> डॉक्टरों ने सही तरीके से ब्रश करने की विधि का लाइव डेमो दिया, जिसमें गोलाकार मूवमेंट और सही समय (कम से कम 2 मिनट) पर जोर दिया गया।</p>
</li>
<li>
<p><strong>दंत जांच परामर्श:</strong> ग्रामीणों को नियमित रूप से दंत चिकित्सक से जांच कराने की सलाह दी गई।</p>
</li>
<li>
<p><strong>पोस्टर और स्लोगन अभियान:</strong> “A Happy Mouth is a Happy Life” जैसे संदेशों के जरिए लोगों को सरल भाषा में जागरूक किया गया।</p>
</li>
<li>
<p><strong>प्रश्नोत्तर सत्र:</strong> ग्रामीणों ने अपने दाँतों और मुँह से जुड़ी समस्याओं के बारे में सवाल पूछे, जिनका डॉक्टरों ने विस्तार से जवाब दिया।</p>
</li>
</ul>
<hr />
<h3><strong>महिलाओं और बुजुर्गों की सक्रिय भागीदारी</strong></h3>
<p>कार्यक्रम में महिलाओं और बुजुर्गों की विशेष भागीदारी देखने को मिली।</p>
<ul>
<li>
<p>महिलाओं को बच्चों के दंत स्वास्थ्य की देखभाल के बारे में बताया गया</p>
</li>
<li>
<p>बुजुर्गों को कृत्रिम दाँत (डेंचर) की सफाई और देखभाल के बारे में जानकारी दी गई</p>
</li>
</ul>
<hr />
<h3><strong>स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संकल्प</strong></h3>
<p>कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों ने तंबाकू छोड़ने और नियमित रूप से मुँह की सफाई करने का संकल्प लिया।<br />स्थानीय लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में बेहद आवश्यक हैं, क्योंकि यहाँ जागरूकता की कमी के कारण लोग छोटी समस्याओं को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर गंभीर बीमारी का रूप ले लेती हैं।</p>
<hr />
<h3><strong>ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत पहल</strong></h3>
<p>इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम यह दर्शाते हैं कि स्वास्थ्य सेवाओं को केवल अस्पतालों तक सीमित न रखकर गाँव-गाँव तक पहुँचाना कितना जरूरी है। Career Post Graduate Institute of Dental Sciences and Hospital द्वारा किया गया यह प्रयास न केवल मौखिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि ग्रामीण समाज को स्वस्थ और जागरूक बनाने की दिशा में भी एक प्रेरणादायक पहल है।</p>
<p>इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि सही जानकारी और समय पर जागरूकता से बड़ी से बड़ी बीमारियों को रोका जा सकता है, और एक स्वस्थ समाज की नींव रखी जा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>स्वास्थ्य-आरोग्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:12:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हम सबने ठाना है पूरे भदोही को स्वस्थ बनाना है - अताउल अंसारी अध्यक्ष भदोही साइकिलिंग क्लब</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>भदोही -</strong> साइकिलिंग क्लब के तत्वाधान में गोपीगंज राष्ट्रीय राजमार्ग बड़ा चौराहा से पर्यावरण और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान साइकिल यात्रा निकाली गई। अताउल अंसारी ने कहा कि स्वास्थ्य अनमोल धन है। अगर आपका स्वास्थ्य सही रहेगा तो आप बहुत रुपया पैसा कमा सकते हैं लेकिन एकबार आपका स्वास्थ्य बिगड़ गया फिर आपकी सारी जमापूंजी खर्च हो जाती है और बहुत मुश्किल होता है पहले की तरह स्वस्थ होना। जरूरी कामों के साथ आधे घंटे का योग व्यायाम करें। आसपास के काम साइकिल से करें। महीने में एक वृक्ष जरूर लगाएं। अगर हम अपनी दिनचर्या में इसको शामिल करते हैं तो</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154058/we-all-have-to-make-the-whole-bhadohi-healthy"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/img-20250824-wa0616.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>भदोही -</strong> साइकिलिंग क्लब के तत्वाधान में गोपीगंज राष्ट्रीय राजमार्ग बड़ा चौराहा से पर्यावरण और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान साइकिल यात्रा निकाली गई। अताउल अंसारी ने कहा कि स्वास्थ्य अनमोल धन है। अगर आपका स्वास्थ्य सही रहेगा तो आप बहुत रुपया पैसा कमा सकते हैं लेकिन एकबार आपका स्वास्थ्य बिगड़ गया फिर आपकी सारी जमापूंजी खर्च हो जाती है और बहुत मुश्किल होता है पहले की तरह स्वस्थ होना। जरूरी कामों के साथ आधे घंटे का योग व्यायाम करें। आसपास के काम साइकिल से करें। महीने में एक वृक्ष जरूर लगाएं। अगर हम अपनी दिनचर्या में इसको शामिल करते हैं तो सभी स्वस्थ रहेंगे और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। अताउल अंसारी की अध्यक्षता में निकली साइकिल यात्रा को बीरनई प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक मुस्ताक अंसारी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। </div>
<div> </div>
<div>साइकिल यात्रा आरंभ होकर शहीद तिराहा, कांजी हाउस, आजाद नगर, झीलियापुल, शिव नगर, चूड़िहारी मोहाल, लाई बाजार, पड़ाव के आस पास का भ्रमण करते हुए *वृक्ष लगाओ पर्यावरण बचाओ, वृक्षों की जब करोगे रक्षा, तभी बनेगा जीवन अच्छा, हिंदुस्तान जिंदाबाद, स्वस्थ रहे मस्त रहे, करो योग रहो निरोग, हम सबने ये ठाना है पुरे भदोही को स्वस्थ बनाना है, सुबह की हवा सौ रोगों की दवा, भारत माता की जय, वन्दे मातरम* का नारा लगाते हुए लोगों को स्वास्थ्य और पर्यावरण के बारे में जागरूक करते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोपीगंज के सामने इसका समापन हुआ ।</div>
<div> </div>
<div>साइकिल यात्रा में अधिवक्ता राम श्रृंगार चौधरी, जगदीश यादव, सरफराज अहमद, अजय बिंद, मैनुद्दीन अली, कमलेश, राजीव जायसवाल, अबरार हाशमी, प्रमोद मौर्या, पीर मोहम्मद, सीताशरण गौतम, इम्तियाज अहमद, प्रेम गुप्ता, फरियाद अली, सुंदरम चौधरी, अबू हुरैरा, कमलेश चौधरी, अनिल बिंद, कार्तिक सुनील, अबू दर्दा समेत आदि रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/154058/we-all-have-to-make-the-whole-bhadohi-healthy</link>
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                <pubDate>Sun, 24 Aug 2025 17:51:03 +0530</pubDate>
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