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                <title>election commission of india - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>election commission of india RSS Feed</description>
                
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                <title>विधानसभा चुनाव: पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण से पहले चुनाव आयोग सख्त</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> भारत निर्वाचन आयोग ने आगामी चुनावों के मद्देनजर कानून-व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए हैं।सूत्रों के अनुसार, आयोग ने कोलकाता के पुलिस आयुक्त (सीपी), सभी उपायुक्त (डीसीपी), जिलों के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सहित थाना स्तर तक के अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आयोग ने निर्देश दिया है कि यदि किसी भी अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में किसी व्यक्ति के पास विस्फोटक सामग्री पाई जाती है या डराने-धमकाने की कोई रणनीति अपनाई जाती है, तो संबंधित थाना प्रभारी को इसके</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177429/election-commission-strict-before-the-second-phase-of-assembly-elections"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/navjivanindia_2026-04-25_svf60re9_election-commision.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> भारत निर्वाचन आयोग ने आगामी चुनावों के मद्देनजर कानून-व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए हैं।सूत्रों के अनुसार, आयोग ने कोलकाता के पुलिस आयुक्त (सीपी), सभी उपायुक्त (डीसीपी), जिलों के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सहित थाना स्तर तक के अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आयोग ने निर्देश दिया है कि यदि किसी भी अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में किसी व्यक्ति के पास विस्फोटक सामग्री पाई जाती है या डराने-धमकाने की कोई रणनीति अपनाई जाती है, तो संबंधित थाना प्रभारी को इसके लिए सीधे जिम्मेदार माना जाएगा। आयोग ने चेतावनी दी है कि ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी को अभूतपूर्व परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सूत्रों के मुताबिक, आयोग ने सभी पुलिस अधिकारियों को अगले 24 घंटों के भीतर अपने-अपने क्षेत्रों में व्यापक तलाशी अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान किसी भी प्रकार की अवैध या संदिग्ध सामग्री, विशेषकर विस्फोटक पदार्थों को तत्काल जब्त करने को कहा गया है। साथ ही संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने और असामाजिक तत्वों पर कड़ी नजर रखने के भी निर्देश दिए गए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चुनाव आयोग का यह कदम चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और भयमुक्त वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से उठाया गया है। आयोग का मानना है कि किसी भी प्रकार की हिंसा या धमकी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है, इसलिए इसे हर हाल में रोका जाना जरूरी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस प्रशासन से यह भी कहा गया है कि वे स्थानीय खुफिया तंत्र को सक्रिय रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत उच्च अधिकारियों तक पहुंचाएं। इसके अलावा, आम जनता से भी अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चुनाव आयोग के इस सख्त रुख से स्पष्ट है कि वह चुनावों के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या हिंसा को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता और इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर पूरी सतर्कता बरती जा रही है। 29 अप्रैल को दूसरे चरण के लिए मतदान होगा। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>विधान सभा चुनाव </category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 18:28:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एक वोट का सम्मान और लोकतंत्र की विराट शक्ति मतदान केंद्र का संदेश जो पूरे देश के लिए प्रेरणा बना</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">गीर के घने जंगलों के बीच स्थापित मतदान केंद्र केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं बल्कि भारतीय लोकतंत्र की आत्मा का जीवंत उदाहरण है। जब एक ही मतदाता के लिए पूरा मतदान केंद्र बनाया जाता है तो यह स्पष्ट संदेश देता है कि इस देश में हर नागरिक का वोट बराबर महत्व रखता है। बाणेज क्षेत्र में एकमात्र मतदाता हरिदास बापू के लिए चुनाव आयोग द्वारा की गई यह व्यवस्था दिखाती है कि लोकतंत्र केवल संख्या का खेल नहीं बल्कि अधिकार और सम्मान की भावना है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के इस दूरस्थ इलाके में जहां पहुंचना भी आसान नहीं</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177389/the-message-of-respect-of-one-vote-and-the-great"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/election-3.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">गीर के घने जंगलों के बीच स्थापित मतदान केंद्र केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं बल्कि भारतीय लोकतंत्र की आत्मा का जीवंत उदाहरण है। जब एक ही मतदाता के लिए पूरा मतदान केंद्र बनाया जाता है तो यह स्पष्ट संदेश देता है कि इस देश में हर नागरिक का वोट बराबर महत्व रखता है। बाणेज क्षेत्र में एकमात्र मतदाता हरिदास बापू के लिए चुनाव आयोग द्वारा की गई यह व्यवस्था दिखाती है कि लोकतंत्र केवल संख्या का खेल नहीं बल्कि अधिकार और सम्मान की भावना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के इस दूरस्थ इलाके में जहां पहुंचना भी आसान नहीं है वहां चुनाव कर्मियों का जाना और पूरी प्रक्रिया को निभाना अपने आप में एक बड़ी जिम्मेदारी और समर्पण का उदाहरण है। यहां न तो भीड़ है और न ही राजनीतिक शोर लेकिन फिर भी मतदान की पूरी प्रक्रिया वैसी ही होती है जैसी किसी बड़े शहर के मतदान केंद्र पर होती है। यह दिखाता है कि भारत का लोकतंत्र हर परिस्थिति में अपने मूल सिद्धांतों को निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह परंपरा नई नहीं है बल्कि कई वर्षों से चली आ रही है। पहले भरतदास बापू इस केंद्र के एकमात्र मतदाता थे और उनके बाद उनके शिष्य हरिदास बापू इस जिम्मेदारी को निभा रहे हैं। यह केवल एक व्यक्ति का मतदान नहीं बल्कि एक परंपरा का निर्वहन है जो यह बताती है कि लोकतंत्र में भागीदारी एक निरंतर प्रक्रिया है। यह प्रेरणा देता है कि चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों नागरिक को अपने अधिकार का उपयोग करना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घने जंगलों में वन्यजीवों के बीच मतदान केंद्र स्थापित करना आसान नहीं होता। चुनाव कर्मियों को कठिन रास्तों से गुजरना पड़ता है सुरक्षा बलों को तैनात करना पड़ता है और हर छोटी बड़ी व्यवस्था का ध्यान रखना पड़ता है। फिर भी यह सब केवल एक वोट के लिए किया जाता है। यह उस सोच को दर्शाता है जिसमें हर नागरिक को समान अधिकार दिया गया है और किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाता।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हरिदास बापू का यह कहना कि जब सरकार एक व्यक्ति के लिए इतनी व्यवस्था कर सकती है तो हर नागरिक को मतदान करना चाहिए एक गहरी बात है। यह केवल एक बयान नहीं बल्कि पूरे देश के लिए एक संदेश है। अक्सर देखा जाता है कि शहरों में लोग मतदान के दिन घर पर ही रहते हैं या छुट्टी का आनंद लेते हैं। ऐसे लोगों के लिए यह उदाहरण एक आईना है जो उन्हें अपने कर्तव्य की याद दिलाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गुजरात में हुए स्थानीय स्वराज चुनाव भी इस बात का प्रमाण हैं कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद लोग लोकतंत्र में अपनी आस्था बनाए रखते हैं। भीषण गर्मी के बावजूद लोगों ने मतदान किया और औसतन अच्छा प्रतिशत दर्ज हुआ। ग्रामीण क्षेत्रों में तो उत्साह और भी अधिक देखने को मिला जहां लोगों ने बड़ी संख्या में अपने मताधिकार का उपयोग किया। यह दर्शाता है कि लोकतंत्र की जड़ें गांवों में कितनी मजबूत हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महानगरपालिकाओं में अपेक्षाकृत कम मतदान प्रतिशत जरूर चिंता का विषय है लेकिन यह भी एक अवसर है सुधार का। जब एक व्यक्ति जंगल में मतदान कर सकता है तो शहरों में रहने वाले लोगों के लिए मतदान करना और भी आसान होना चाहिए। यह सोचने की जरूरत है कि आखिर क्यों शहरी क्षेत्रों में मतदान के प्रति उदासीनता देखने को मिलती है और इसे कैसे दूर किया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चुनाव आयोग की भूमिका इस पूरे परिदृश्य में अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक निष्पक्ष और पारदर्शी संस्था के रूप में उसने बार बार यह साबित किया है कि वह हर परिस्थिति में लोकतंत्र की रक्षा के लिए तैयार है। चाहे वह दूरदराज का इलाका हो या भीड़भाड़ वाला शहर हर जगह एक समान प्रक्रिया का पालन किया जाता है। यही कारण है कि भारत का चुनावी तंत्र विश्व में सबसे बड़ा और सबसे विश्वसनीय माना जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कई बार राजनीतिक दल चुनाव आयोग पर आरोप लगाते हैं और उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाते हैं। लेकिन बाणेज जैसे उदाहरण इन आरोपों का सीधा जवाब देते हैं। जब एक वोट के लिए इतनी मेहनत और संसाधन लगाए जाते हैं तो यह स्पष्ट हो जाता है कि चुनाव आयोग अपने कर्तव्य के प्रति कितना गंभीर है। ऐसे में बिना ठोस आधार के आरोप लगाना न केवल संस्था की छवि को नुकसान पहुंचाता है बल्कि लोकतंत्र के प्रति लोगों के विश्वास को भी कमजोर करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह जरूरी है कि राजनीतिक दल और नेता अपनी जिम्मेदारी को समझें और लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करें। आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है लेकिन वह तथ्यों और प्रमाणों पर आधारित होनी चाहिए। निराधार आरोप केवल भ्रम फैलाते हैं और जनता को गुमराह करते हैं। बाणेज का यह उदाहरण बताता है कि सच्चाई क्या है और व्यवस्था कितनी मजबूत है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मतदान केवल अधिकार नहीं बल्कि एक कर्तव्य भी है। यह वह माध्यम है जिसके जरिए नागरिक अपनी सरकार चुनते हैं और अपने भविष्य को आकार देते हैं। जब लोग मतदान नहीं करते तो वे अपने अधिकार को खो देते हैं और दूसरों को निर्णय लेने का मौका दे देते हैं। इसलिए हर नागरिक को यह समझना चाहिए कि उसका एक वोट कितना महत्वपूर्ण है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज के समय में जब तकनीक और सुविधा हर जगह उपलब्ध है तब भी अगर लोग मतदान से दूर रहते हैं तो यह चिंताजनक है। बाणेज का मतदान केंद्र हमें यह सिखाता है कि अगर इच्छाशक्ति हो तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। यह हमें प्रेरित करता है कि हम अपने अधिकार का सम्मान करें और हर चुनाव में भाग लें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंत में यह कहा जा सकता है कि गिर के जंगल में स्थापित यह मतदान केंद्र केवल एक स्थान नहीं बल्कि एक विचार है। यह विचार है समानता का अधिकार का और जिम्मेदारी का। यह हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र केवल सरकार का नहीं बल्कि हर नागरिक का है। इसे मजबूत बनाने की जिम्मेदारी हम सभी की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जब एक व्यक्ति के लिए पूरा मतदान केंद्र बनाया जा सकता है तो यह हमारे लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती है। यह संदेश हमें हमेशा याद रखना चाहिए और अपने जीवन में अपनाना चाहिए। तभी हम एक मजबूत और जागरूक समाज का निर्माण कर पाएंगे जहां हर आवाज सुनी जाएगी और हर वोट की कीमत होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:26:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विधान परिषद के गोरखपुर-फैजाबाद खण्ड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की निर्वाचक नामावलियों के पुनरीक्षण हेतु संशोधित कार्यक्रम जारी किया गया</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में भारत निर्वाचन आयोग एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी उतर प्रदेश, लखनऊ के निर्देश के क्रम में उप जिला निर्वाचन अधिकारी बस्ती ने एक विज्ञप्ति के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया है कि दिनॉक 21 नवम्बर 2025 के द्वारा अर्हता तिथि 01.11.2025 के आधार पर उत्तर प्रदेश विधान परिषद के गोरखपुर-फैजाबाद खण्ड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की निर्वाचक नामावलियों के पुनरीक्षण हेतु संशोधित कार्यक्रम जारी किया गया है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने बताया कि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 के नियम 31(3) के अन्तर्गत सार्वजनिक नोटिस जारी किये जाने की अवधि दिनॉक 30.9.2025 मंगलवार, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 के नियम 31(4) के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161501/revised-program-issued-for-revision-of-electoral-rolls-of-gorakhpur-faizabad"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/img-20251122-wa0337-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में भारत निर्वाचन आयोग एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी उतर प्रदेश, लखनऊ के निर्देश के क्रम में उप जिला निर्वाचन अधिकारी बस्ती ने एक विज्ञप्ति के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया है कि दिनॉक 21 नवम्बर 2025 के द्वारा अर्हता तिथि 01.11.2025 के आधार पर उत्तर प्रदेश विधान परिषद के गोरखपुर-फैजाबाद खण्ड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की निर्वाचक नामावलियों के पुनरीक्षण हेतु संशोधित कार्यक्रम जारी किया गया है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने बताया कि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 के नियम 31(3) के अन्तर्गत सार्वजनिक नोटिस जारी किये जाने की अवधि दिनॉक 30.9.2025 मंगलवार, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 के नियम 31(4) के अन्तर्गत समाचार पत्रों में नोटिस का प्रथम पुनर्प्रकाशन 15.10.2025 बुधवार, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण 1960 के नियम 31(4) अन्तर्गत समाचार पत्रों में नोटिस का द्वितीय पुनर्प्रकाशन 25.10.2025 शनिवार, फार्म 18 या 19 में आवेदन पत्र प्राप्त करने की अन्तिम तिथि जैसी स्थिति हो 06.11.2025 गुरूवार, वह तिथि जिस तक पाण्डुलियों की तैयारी और आलेख्य निर्वाचक नामावलियों का मुद्रण किया जाना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">27.11.2025 गुरूवार, निर्वाचक नामावलियों का आलेख्य प्रकाशन 02.12.2025 मंगलवार, दावे और आपत्तिया दाखिल करने की अवधि (निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 के नियम 12 के अन्तर्गत) 02.12.2025 से 16.12.2025, वह तिथि जिस तक दावे और आपत्तियों का निस्तारण किया जायेंगा और अनुपूरक सूची तैयार और मुद्रित की जायेंगी 30.12.2025, निर्वाचक नामावलियों का अन्तिम प्रकाशन 06.1.2026 मंगलवार को किया जायेंगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/161501/revised-program-issued-for-revision-of-electoral-rolls-of-gorakhpur-faizabad</link>
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                <pubDate>Mon, 24 Nov 2025 16:57:41 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title> बीएलओ को आगे बढ़कर जानकारी दें — शहरी शिक्षित मतदाता</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार विधानसभा के चुनावों से पूर्व मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य की बम्पर सफलता के बाद अब देश के एक दर्जन राज्यों में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 खंड 21 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों का पालन करते हुए नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अर्थात SIR का कार्य 4 नवंबर से शुरू किया है, जिसे 4 दिसंबर 2025 तक एक माह में पूरा किया जाना अनिवार्य भी है। देश के जिन बारह राज्यों में मतदाता सूची के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161374/6922e3d33b86f"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/download10.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार विधानसभा के चुनावों से पूर्व मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य की बम्पर सफलता के बाद अब देश के एक दर्जन राज्यों में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 खंड 21 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों का पालन करते हुए नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अर्थात SIR का कार्य 4 नवंबर से शुरू किया है, जिसे 4 दिसंबर 2025 तक एक माह में पूरा किया जाना अनिवार्य भी है। देश के जिन बारह राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य चल रहा है, उसके अंतर्गत 321 जिले और 1843 विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिनमें करीब इक्यावन करोड़ से अधिक मतदाता हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इन सभी का SIR कार्य घर–घर जाकर साढ़े पाँच लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारी अर्थात बीएलओ समय सीमा में संपादित करेंगे और देश के कर्तव्यनिष्ठ जिम्मेदार कर्मचारी व नागरिक की भूमिका भी निभाते हुए दर्जन भर राज्यों में दिन–रात कार्य करते हुए नज़र आएँगे। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य को शत–प्रतिशत समय सीमा में पूर्ण करने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से बीएलओ के कंधों पर है। इस कार्य का कितना अधिक दबाव इस समय बीएलओ के ऊपर है, इसका आकलन आप देशभर की मीडिया में आए दिन कई बीएलओ की आत्महत्या या हार्ट अटैक से मौत की खबरों से लगा सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> बक़ौल, इस समय देश के बीएलओ के ऊपर राष्ट्र के नागरिकों के सत्यापन की महती जिम्मेदारी है, जिसके चलते उनका दायित्व बहुत बड़ा है। समय सीमा में कार्य पूर्ण करने के दबाव के कारण आज देश का हर बीएलओ मानसिक रूप से तनाव में अवश्य है, लेकिन फिर भी राष्ट्रहित के इस कार्य में एक सैनिक की तरह डटा हुआ है और चुनाव आयोग द्वारा चलाए गए इस राष्ट्रीय मिशन को सफलता पूर्वक पूरा करने में मनोयोग से लगा हुआ है, इसीलिए देश के नागरिकों से—विशेषकर महानगरीय शहरी शिक्षित संभ्रांत वर्ग से—निवेदन है कि अपने क्षेत्र के बीएलओ के SIR कार्य में आगे बढ़कर अपनी तथा अपने परिवार की जानकारी देकर सहयोग करें और एक देशभक्त नागरिक होने का परिचय दें !</p>
<p style="text-align:justify;">देश के जिन बारह राज्यों में SIR का कार्य चल रहा है, वहाँ के महानगरीय और शहरी इलाकों में रहने वाले संभ्रांत वर्ग के नागरिक SIR संबंधी सबकुछ जानते हुए भी बीएलओ को जानकारी देने से कतराते हैं और तरह–तरह के बहाने बनाकर उन्हें बार–बार चक्कर लगवाते हैं, जिससे उनका कार्य पिछड़ता है। कुछ शहरी शिक्षित लोग तो बीएलओ को दूसरे ग्रह का प्राणी समझकर उसके साथ ऐसा व्यवहार करते हैं कि लगता ही नहीं कि देश के नागरिकों का सत्यापन कार्य किया जा रहा है ! बीएलओ कोई मज़ाक या तौहीन का पात्र नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">वह पूरे एक निर्वाचन बूथ का भारत निर्वाचन आयोग द्वारा अधिकृत जिम्मेदार अधिकारी है। देश के नागरिकों को यह याद रखना चाहिए कि बीएलओ द्वारा सत्यापित नागरिक ही मतदाता बनकर मतदान का अधिकार प्राप्त करते हैं, और देश में लोकतांत्रिक सरकार चुनते हैं। मतदाता सूची में नाम होना ही देश के नागरिक होने का सबसे बड़ा प्रमाण है, जिसके आधार पर हम अन्य दस्तावेज भी बनवा सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बीएलओ भी देश का, आपके बीच का ही एक जिम्मेदार नागरिक है — ऊपर से एक शिक्षक या किसी अन्य विभाग का कर्मचारी। उसका सम्मान और सहयोग करना हर नागरिक का कर्तव्य है। इस समय देश के बीएलओ के ऊपर भारत सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर अवैध रूप से रह रहे पाकिस्तानी–बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें बाहर निकालने की बड़ी जिम्मेदारी भी है। आज देशभर में अवैध घुसपैठिए इस तरह रच–बस गए हैं कि उन्होंने हमारे तंत्र में बैठे कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों और वोट बैंक बढ़ाकर सत्ता लाभ चाहने वाले भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों के सहयोग से भारतीय नागरिकों को प्राप्त होने वाले लगभग सभी दस्तावेज बनवा लिए हैं और सरकारी सुविधाओं का सर्वाधिक लाभ भी उठा रहे हैं। अवैध घुसपैठिए देश की आंतरिक सुरक्षा, लोकतंत्र और संस्कृति तीनों के लिए खतरा बनते जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि देश में आबादी से अधिक आधार कार्ड बनने का मामला उजागर न हुआ होता, तो शायद न भारत निर्वाचन आयोग जागरूक होता, न ही केंद्र व राज्य सरकारें। अवैध घुसपैठियों के चलते देश के कुछ राज्यों में जब आबादी से अधिक आधार कार्ड बनने का मामला सामने आया, तो राज्य सरकारें सतर्क हुईं और भारत निर्वाचन आयोग ने यह आशंका भी व्यक्त की कि कहीं सत्ता स्वार्थ के चलते कुछ नेताओं द्वारा अवैध घुसपैठियों को मतदाता बनाकर लोकतंत्र को कमजोर तो नहीं किया जा रहा। इसी कारण बिहार विधानसभा चुनावों से पूर्व मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य किया गया, जिसमें अकेले बिहार में 65 लाख मतदाता जानकारी के अभाव में मतदाता सूची से बाहर किए गए।</p>
<p style="text-align:justify;"> देश का शिक्षित नागरिक यह विचार करे कि जब केवल एक राज्य में ही इतनी बड़ी संख्या में मतदाता जब अपने भारतीय नागरिक होने का प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाये हे तो पूरे देश में SIR प्रक्रिया में कितने करोड़ लोग बाहर होंगे — यह सोचना भी बड़ा कठिन है ? यदि हम भारतीय अपने देश को बाहरी ताकतों से बचाना चाहते हैं और सुखद भविष्य देखना चाहते हैं, तो सभी नागरिकों को विशेषकर शहरी शिक्षित संभ्रांत लोगों को  मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य में आगे आकर बीएलओ का सहयोग करना होगा। तभी देश के भीतर नागरिक बनकर बैठे देशविरोधी तत्वों की पहचान होगी और उन्हें बाहर किया जा सकेगा। चुनाव आयोग द्वारा देश में SIR का कार्य देश को आंतरिक दुश्मनों से बचाने के लिए एक महायज्ञ के रूप में चलाया जा रहा है, जिसमें देश के हर नागरिक को बीएलओ का सहयोग कर इस महायज्ञ को सम्पन्न कराने  हेतू अपनी जानकारी रूपी आहुति देना होगी तभी देश में शांति, सद्भाव और प्रेम कायम रहेगा !</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Nov 2025 16:07:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>चुनाव आयोग ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार के चार अधिकारियों को मतदाता सूची में गलत नाम शामिल करने और डेटा सुरक्षा से समझौता करने के आरोप में निलंबित किया।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को चुनाव कानूनों के प्रावधानों के तहत चार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को भी कहा। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने बरुईपुर पूर्व और मोयना निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में अनधिकृत प्रविष्टियों का खुलासा करने वाली मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) की रिपोर्ट के बाद पश्चिम बंगाल के चार चुनाव अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्य सचिव को लिखे अपने पत्र में  चुनाव आयोग ने निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) और सहायक ईआरओ द्वारा की गई अनियमितताओं के सीईओ के निष्कर्षों का हवाला दिया है।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/153765/the-election-commission-on-tuesday-suspended-four-officers-of-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/election-commision1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को चुनाव कानूनों के प्रावधानों के तहत चार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को भी कहा। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने बरुईपुर पूर्व और मोयना निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में अनधिकृत प्रविष्टियों का खुलासा करने वाली मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) की रिपोर्ट के बाद पश्चिम बंगाल के चार चुनाव अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्य सचिव को लिखे अपने पत्र में  चुनाव आयोग ने निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) और सहायक ईआरओ द्वारा की गई अनियमितताओं के सीईओ के निष्कर्षों का हवाला दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ये अधिकारी - देबोत्तम दत्ता चौधरी (ईआरओ), तथागत मंडल (एईआरओ), बिप्लब सरकार (ईआरओ), और सुदीप्त दास (एईआरओ) मतदाता सूची तैयार करने, उसमें संशोधन और सुधार के लिए ज़िम्मेदार थे। चुनाव आयोग ने निर्देश दिया कि उनके खिलाफ "उचित अनुशासनात्मक कार्यवाही" शुरू की जाए और "आपराधिक कदाचार" के लिए एफआईआर दर्ज की जाए। आकस्मिक डेटा एंट्री ऑपरेटर सुरोजित हलदर के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग द्वारा मतदाता आवेदन पत्रों (फॉर्म 6) की नमूना जाँच के दौरान ये विसंगतियाँ सामने आईं। चुनाव आयोग ने पाया कि अधिकारियों ने उचित प्रक्रिया का उल्लंघन किया है, जिसके लिए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32(1) के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। सीईओ के आदेशों के बाद, जिला चुनाव अधिकारी (डीईओ) को पिछले वर्ष संसाधित सभी मतदाता प्रपत्रों की जाँच के लिए एक वरिष्ठ अधिकारियों की टीम गठित करनी होगी और 14 अगस्त, 2025 तक एक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव को सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने और "शीघ्रतम" कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, चुनाव आयोग द्वारा राज्य की मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए दिए जा रहे प्रयास का विरोध कर रही हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Aug 2025 22:16:52 +0530</pubDate>
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