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                <title>टीकाकरण अभियान - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>टीकाकरण अभियान RSS Feed</description>
                
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                <title>नर्सों का योगदान और विश्व स्वास्थ्य का भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>- महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मानवता की सेवा और उपचार की प्रक्रिया में नर्सों का योगदान अतुलनीय है। प्रत्येक वर्ष 12 मई को संपूर्ण विश्व अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस मनाता है। यह दिवस केवल एक तिथि नहीं है बल्कि उस समर्पण और करुणा का सम्मान है जो नर्सें बिना किसी स्वार्थ के समाज को प्रदान करती हैं। इस विशेष दिवस का आयोजन आधुनिक नर्सिंग की संस्थापक फ्लोरेंस नाइटिंगेल की जयंती के उपलक्ष्य में किया जाता है। 1820 में जन्मी फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने नर्सिंग को एक पेशेवर और सम्मानित स्वरूप प्रदान किया। क्रीमिया युद्ध के दौरान उन्होंने रात के अंधेरे में हाथ में लालटेन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178919/contribution-of-nurses-and-the-future-of-world-health"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/12_05_2023-new_project_10_23410139.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>- महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मानवता की सेवा और उपचार की प्रक्रिया में नर्सों का योगदान अतुलनीय है। प्रत्येक वर्ष 12 मई को संपूर्ण विश्व अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस मनाता है। यह दिवस केवल एक तिथि नहीं है बल्कि उस समर्पण और करुणा का सम्मान है जो नर्सें बिना किसी स्वार्थ के समाज को प्रदान करती हैं। इस विशेष दिवस का आयोजन आधुनिक नर्सिंग की संस्थापक फ्लोरेंस नाइटिंगेल की जयंती के उपलक्ष्य में किया जाता है। 1820 में जन्मी फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने नर्सिंग को एक पेशेवर और सम्मानित स्वरूप प्रदान किया। क्रीमिया युद्ध के दौरान उन्होंने रात के अंधेरे में हाथ में लालटेन लेकर घायल सैनिकों की जिस प्रकार सेवा की उसने उन्हें लेडी विद द लैंप की उपाधि दी। उन्होंने यह सिद्ध किया कि चिकित्सा केवल औषधियों का खेल नहीं है बल्कि इसमें स्वच्छता, सहानुभूति और निरंतर देखभाल का भी उतना ही महत्व है। वर्ष 2026 के लिए इस दिवस की विषयवस्तु हमारी नर्सें, हमारा भविष्य, सशक्त नर्सें जीवन बचाती हैं निर्धारित की गई है। यह विषयवस्तु इस बात की ओर संकेत करती है कि भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए नर्सों का सशक्तिकरण अनिवार्य है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नर्सिंग सेवा का विस्तार केवल चिकित्सालयों की दीवारों तक सीमित नहीं है। यह एक ऐसी व्यवस्था है जो व्यक्ति के जन्म से लेकर जीवन के अंतिम क्षणों तक उसके साथ बनी रहती है। स्वास्थ्य प्रणाली में नर्सों की भूमिका एक सेतु के समान है जो चिकित्सक और रोगी के मध्य संवाद और उपचार को सुगम बनाती है। किसी भी आपदा या आपातकाल की स्थिति में नर्सें ही सबसे अग्रिम पंक्ति में खड़ी नजर आती हैं। यदि हम वैश्विक आंकड़ों पर दृष्टि डालें तो विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि स्वास्थ्य क्षेत्र के कुल कार्यबल का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा नर्सों और दाइयों का है। इसके बावजूद वैश्विक स्तर पर नर्सों की भारी कमी देखी जा रही है। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक दुनिया भर में स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए लगभग 60 लाख अतिरिक्त नर्सों की आवश्यकता होगी। यह आंकड़ा हमें सचेत करता है कि यदि समय रहते इस क्षेत्र में निवेश नहीं किया गया तो भविष्य में स्वास्थ्य प्रणालियाँ लड़खड़ा सकती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत जैसे सघन जनसंख्या वाले देश में नर्सों का उत्तरदायित्व और भी अधिक बढ़ जाता है। भारतीय नर्सिंग परिषद के आंकड़ों के अनुसार देश में पंजीकृत नर्सों की संख्या लाखों में है परंतु प्रति 1000 जनसंख्या पर नर्सों की उपलब्धता अभी भी वैश्विक मानकों से कम है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है वहाँ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की पूरी जिम्मेदारी नर्सों के कंधों पर होती है। वे न केवल प्रसव संबंधी सेवाएं प्रदान करती हैं बल्कि टीकाकरण अभियानों, संक्रामक रोगों के नियंत्रण और पोषण संबंधी जागरूकता फैलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को कम करने के भारत के राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में नर्सों का योगदान सबसे महत्वपूर्ण रहा है। वे समाज के सबसे निचले स्तर तक पहुँचकर स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हाल के वर्षों में वैश्विक महामारी कोविड 19 ने संपूर्ण विश्व को नर्सों की वास्तविक शक्ति से परिचित कराया। जब पूरा विश्व भयभीत होकर घरों में बंद था तब नर्सें बिना अपनी जान की परवाह किए संक्रमित मरीजों की सेवा कर रही थीं। पीपीई किट पहनकर घंटों बिना भोजन और जल के काम करना उनके अदम्य साहस का परिचायक था। उस कठिन समय में नर्सों ने न केवल शारीरिक उपचार किया बल्कि एकांतवास में रह रहे मरीजों को मानसिक संबल भी प्रदान किया। कई नर्सों ने इस सेवा के दौरान अपने प्राणों की आहुति दे दी जो उनके व्यवसाय के प्रति सर्वोच्च बलिदान को दर्शाता है। इस महामारी ने यह पाठ पढ़ाया कि किसी भी देश की सुरक्षा केवल उसकी सीमाओं पर नहीं बल्कि उसके स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और उसके समर्पित स्वास्थ्य कर्मियों के हाथों में भी सुरक्षित है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान परिदृश्य में नर्सिंग के क्षेत्र में कई चुनौतियां भी विद्यमान हैं जिन्हें संबोधित करना अत्यंत आवश्यक है। नर्सों को अक्सर लंबे समय तक कार्य करना पड़ता है जिससे उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। कई स्थानों पर उन्हें उचित वेतन और सुविधाएं प्राप्त नहीं होती हैं। कार्यस्थल पर सुरक्षा का अभाव और तनावपूर्ण वातावरण उनके प्रदर्शन को प्रभावित करता है। इसके अतिरिक्त नर्सिंग को आज भी समाज के कुछ वर्गों में केवल एक सहायक कार्य के रूप में देखा जाता है जबकि वास्तव में यह एक उच्च कौशल वाला पेशेवर कार्य है। नर्सों को निर्णय लेने की प्रक्रियाओं और नीति निर्माण में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलता है। वर्ष 2026 की विषयवस्तु इसी अंतर को पाटने का आह्वान करती है। सशक्त नर्सों का अर्थ है उन्हें उन्नत प्रशिक्षण देना, उन्हें नेतृत्व के अवसर प्रदान करना और उनके कार्य की गरिमा को पहचानना।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिक्षा और तकनीक के विकास ने नर्सिंग के स्वरूप को भी बदला है। आज की नर्सें केवल सहायता प्रदान नहीं करतीं बल्कि वे आधुनिक चिकित्सा उपकरणों के संचालन, जटिल उपचार प्रक्रियाओं और शोध कार्यों में भी निपुण हैं। डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं और टेलीमेडिसिन के युग में नर्सों की भूमिका और भी तकनीकी हो गई है। वे डेटा प्रबंधन और रोगियों की निरंतर निगरानी के लिए उन्नत प्रणालियों का उपयोग कर रही हैं। नर्सिंग शिक्षा के पाठ्यक्रम को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की आवश्यकता है ताकि नर्सें किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य चुनौती का सामना करने में सक्षम हो सकें। शोध कार्यों में नर्सों की भागीदारी चिकित्सा के क्षेत्र में नए दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक सिद्ध हो सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समाज के रूप में हमारा यह कर्तव्य है कि हम नर्सों के प्रति अपने दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन लाएं। उनके प्रति कृतज्ञता केवल एक दिन के उत्सव तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनके लिए अनुकूल कार्य वातावरण सुनिश्चित करना, उनकी समस्याओं को सुनना और उन्हें सम्मानजनक जीवन स्तर प्रदान करना सरकार और समाज दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि हम नर्सों के प्रशिक्षण और भर्ती में निवेश करते हैं तो इसके परिणाम स्वरूप स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी क्योंकि एक स्वस्थ समाज ही प्रगतिशील राष्ट्र का निर्माण कर सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने एक बार कहा था कि नर्सिंग एक कला है और यदि इसे कला बनाना है तो इसके लिए वैसी ही अनन्य भक्ति और कठोर तैयारी की आवश्यकता होती है जैसा कि किसी चित्रकार या मूर्तिकार के कार्य के लिए होती है। उनकी यह बात आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। आज की नर्सें न केवल उपचार करती हैं बल्कि वे मानवता की रक्षक भी हैं। 12 मई का यह दिन हमें उनके उन हजारों घंटों की याद दिलाता है जो उन्होंने दूसरों के दुखों को कम करने में बिताए हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि एक नर्स की मुस्कान और धैर्य कई बार सबसे महंगी औषधि से भी अधिक प्रभावी सिद्ध होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि नर्सिंग सेवा किसी भी राष्ट्र की स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ है। वर्ष 2026 में जब हम इस दिवस को मनाते हैं तो हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम नर्सों के सशक्तिकरण के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। हमें ऐसी नीतियों की आवश्यकता है जो नर्सिंग क्षेत्र में आने वाले युवाओं को प्रोत्साहित करें और वर्तमान नर्सों को उनकी योग्यता के अनुरूप सम्मान और स्थान दिलाएं। जब हम कहते हैं कि सशक्त नर्सें जीवन बचाती हैं तो इसका अर्थ केवल एक नारा नहीं है बल्कि यह एक वैज्ञानिक तथ्य है। एक सशक्त और संतुष्ट नर्स ही सर्वोत्तम उपचार प्रदान कर सकती है। आइए इस अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस पर हम उन सभी नर्सों को नमन करें जो अंधकार में प्रकाश की किरण बनकर मरीजों के जीवन को रोशन कर रही हैं और एक स्वस्थ सुरक्षित भविष्य की नींव रख रही हैं। उनकी सेवा और त्याग ही वह ऊर्जा है जो चिकित्सा जगत को निरंतर गति प्रदान करती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 17:18:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बच्चा तथा गर्भवती महिला जांच एवं टीकाकरण से छूटना नही चाहिए - जिलाधिकारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर,</strong> जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जीएन द्वारा शनिवार को  बीएचएनडी दिवस के अवसर पर ग्राम रमवापुर कली, विकास खण्ड खुनियावं, पशुपतिनगर, नरकटहा, विकास खण्ड बांसी तथा मसिना, विकास खण्ड जोगिया का निरीक्षण किया गया।  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जीएन गर्भवती महिलाओं  के रजिस्टर को देखा गया।  आंगनबाड़ी कार्यकत्री के सैम-मैम बच्चों का रजिस्टर देखा गया तथा सैम मैम बच्चों को पोषाहार का वितरण के बारे में जानकारी प्राप्त किया गया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि बीएचएनडी दिवस में गर्भवती महिलाओ की गोदभराई, अन्नप्रासन्न कराये तथा पोषाहार का वितरण कराये।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आंगनबाड़ी एवं आशा को निर्देश दिया कि गांव में घर-घर जाकर टीकाकरण</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175078/children-and-pregnant-women-should-not-be-left-out-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1775307093038.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर,</strong> जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जीएन द्वारा शनिवार को  बीएचएनडी दिवस के अवसर पर ग्राम रमवापुर कली, विकास खण्ड खुनियावं, पशुपतिनगर, नरकटहा, विकास खण्ड बांसी तथा मसिना, विकास खण्ड जोगिया का निरीक्षण किया गया।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जीएन गर्भवती महिलाओं  के रजिस्टर को देखा गया।  आंगनबाड़ी कार्यकत्री के सैम-मैम बच्चों का रजिस्टर देखा गया तथा सैम मैम बच्चों को पोषाहार का वितरण के बारे में जानकारी प्राप्त किया गया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि बीएचएनडी दिवस में गर्भवती महिलाओ की गोदभराई, अन्नप्रासन्न कराये तथा पोषाहार का वितरण कराये।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आंगनबाड़ी एवं आशा को निर्देश दिया कि गांव में घर-घर जाकर टीकाकरण से एक दिन पूर्व गर्भवती महिलाओं  एवं बच्चों को सूचित करें। एएनएम को निर्देश दिया कि कोई भी बच्चा तथा गर्भवती महिला जांच एवं टीकाकरण से छूटना नही चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने गर्भवती महिलाओं को चिन्हित कर उनकी मानीटरिंग करे। जिलाधिकारी ने प्रधानमंत्री  मातृत्व बन्दना योजना का लाभ दिये जाने का निर्देश दिया। ग्राम रमवापुर कली, विकास खण्ड खुनियावं में जिलाधिकारी द्वारा गर्भवती महिलाओं  की गोदभराई की गई। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर सम्बन्धित एमओआईसी, एएनएम, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकत्री व अन्य सम्बन्धित उपस्थित रहे ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 18:29:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में बालिकाओं को एचपीवी टीके की दूसरी खुराक दी गई, गर्भाशय कैंसर से बचाव की पहल</title>
                                    <description><![CDATA[अभियान में 9 से 14 वर्ष की आयु की लड़कियों के लिए महत्वपूर्ण अभियान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/153569/the-second-dose-of-hpv-vaccine-to-girls-in-kasturba"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-07/img-20250729-wa0652.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>अजित सिंह / राजेश तिवारी (ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र/उत्तर प्रदेश-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;"> चिकित्सा विभाग द्वारा आज (29 जुलाई, 2025) सोनभद्र जिले के म्योरपुर और बभनी स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य पहल के तहत 9 से 14 वर्ष की आयु वर्ग की 100 छात्राओं को ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) वैक्सीन की दूसरी और अंतिम खुराक दी गई। इस टीकाकरण अभियान का उद्देश्य किशोरियों को गर्भाशय ग्रीवा (गर्भाशय के मुख) के कैंसर से बचाना है, जो एचपीवी वायरस के कारण होता है। प्रत्येक विद्यालय में 50-50 बालिकाओं को यह महत्वपूर्ण वैक्सीन लगाई गई।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-07/img-20250729-wa0653.jpg" alt="IMG-20250729-WA0653" width="1600" height="1204"></img></p>
<p style="text-align:justify;">इन बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन की पहली खुराक इसी वर्ष 29 जनवरी, 2025 को दी गई थी, और छह महीने के अंतराल के बाद अब उन्हें दूसरी और अंतिम खुराक प्रदान की गई है। यह टीकाकरण अभियान माननीय राज्यपाल महोदया, उत्तर प्रदेश के विशेष निर्देशों के तहत आयोजित किया गया है और इसे बिरला कार्बन (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी - सीएसआर मद) के सौजन्य से वित्त पोषित किया गया है, जो सामाजिक उत्तरदायित्व की दिशा में उनके समर्पण को दर्शाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एचपीवी वैक्सीन गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर महिलाओं में होने वाले सबसे आम कैंसरों में से एक है, और एचपीवी वायरस इसका मुख्य कारण है। यह वायरस यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है, लेकिन टीकाकरण के माध्यम से इसके संक्रमण को रोका जा सकता है। विशेष रूप से 9 से 14 वर्ष की आयु वर्ग की लड़कियों के लिए यह टीका अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस आयु में उनका शरीर वैक्सीन के प्रति बेहतर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया विकसित करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">चिकित्सा अधिकारियों ने बताया कि एचपीवी वैक्सीन आमतौर पर 6 माह के अंतराल पर दो खुराकों में दिया जाता है ताकि अधिकतम सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह पहल न केवल इन युवा बालिकाओं को एक गंभीर बीमारी से बचाएगी बल्कि उनके भविष्य के स्वास्थ्य को भी सुरक्षित रखेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह टीकाकरण अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाने और महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बिरला कार्बन जैसे कॉर्पोरेट घरानों का सहयोग ऐसे अभियानों को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उम्मीद है कि इस तरह के और अधिक कार्यक्रम भविष्य में भी चलाए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक लड़कियों और महिलाओं को इस जानलेवा बीमारी से बचाया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>स्वास्थ्य-आरोग्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Jul 2025 23:04:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[राजेश तिवारी]]></dc:creator>
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