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                <title>kapilbastu - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में होगी 'भारतीय भाषा परिवार' विषय पर चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>  स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में आगामी 7 फरवरी को भारतीय भाषा समिति, दिल्ली तथा सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें अनेक राष्ट्रीय स्तर के साहित्यकार और विद्वान सहभागिता करेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत भारतीय भाषा समिति की ओर से राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, दिल्ली (एनबीटी) से 'भारतीय भाषा परिवार' विषय पर प्रकाशित दो पुस्तकों के विशेष संदर्भ में इस संगोष्ठी में चर्चा होगी। ज्ञातव्य है कि भारत सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति -२०२० की नीतियों के अनुरूप भारतीय भाषा समिति का गठन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168315/discussion-on-indian-language-family-will-be-held-in-siddharth"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/1770300682597.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong> स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में आगामी 7 फरवरी को भारतीय भाषा समिति, दिल्ली तथा सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें अनेक राष्ट्रीय स्तर के साहित्यकार और विद्वान सहभागिता करेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत भारतीय भाषा समिति की ओर से राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, दिल्ली (एनबीटी) से 'भारतीय भाषा परिवार' विषय पर प्रकाशित दो पुस्तकों के विशेष संदर्भ में इस संगोष्ठी में चर्चा होगी। ज्ञातव्य है कि भारत सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति -२०२० की नीतियों के अनुरूप भारतीय भाषा समिति का गठन किया है, जिसका उद्देश्य भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन एवं उनके पारस्परिक समन्वयन की दिशा में काम करना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी प्रयोजन के अन्तर्गत समिति द्वारा देश-भर के मान्य भाषाविदों के सहयोग से पर्याप्त श्रम-शोध के उपरान्त दो पुस्तकों का प्रकाशन कराया गया है, जिनका उद्देश्य औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होकर भारतीय विचार-सरणियों के अनुसार ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में तार्किक ढंग से भारतीय भाषाओं का अध्ययन करना है। इसी विचार को विस्तार देने के उद्देश्य से यह संगोष्ठी आयोजित की जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करने हेतु दिल्ली से प्रोफेसर रमेश चंद्र शर्मा, गोरखपुर से प्रोफेसर विमलेश कुमार मिश्र एवं प्रोफेसर प्रत्यूष दुबे (दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय, गोरखपुर), प्रयागराज से प्रोफेसर अमरेंद्र त्रिपाठी तथा डॉ. विनम्र सेन सिंह (इलाहाबाद विश्वविद्यालय), वाराणसी से प्रोफेसर निरंजन सहाय (काशी विद्यापीठ) तथा डॉक्टर सत्य प्रकाश पाल (काशी हिंदू विश्वविद्यालय) एव लखनऊ से डॉक्टर बलजीत कुमार श्रीवास्तव (बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय) सहित अनेक शिक्षक, शोधार्थी एवं अध्येता भाग लेंगे। यह जानकारी संगोष्ठी के संयोजक प्रोफेसर हरीश कुमार शर्मा ने दी है, </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अन्य</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 20:24:05 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु एवं माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के मध्य चिकित्सा सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div><strong>  सिद्धार्थनगर, </strong></div>
<div>  </div>
<div>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर एवं माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज, सिद्धार्थनगर के मध्य  मंगलवार को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन ( एमओयू ) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता विशेष रूप से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में पारस्परिक सहयोग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया गया है।</div>
<div>  </div>
<div>इस समझौता ज्ञापन का प्रमुख उद्देश्य सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में आगामी समय की कार्य योजना में प्रस्तावित बी.एससी. नर्सिंग जैसे महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम के सुचारु संचालन हेतु आवश्यक चिकित्सीय एवं प्रयोगात्मक प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करना है। नर्सिंग पाठ्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को व्यावहारिक चिकित्सा प्रशिक्षण प्रदान करने के</div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166852/signing-of-mou-for-medical-cooperation-between-siddharth-university-kapilvastu"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/1768918874772.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div><strong> सिद्धार्थनगर, </strong></div>
<div> </div>
<div>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर एवं माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज, सिद्धार्थनगर के मध्य  मंगलवार को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन ( एमओयू ) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता विशेष रूप से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में पारस्परिक सहयोग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया गया है।</div>
<div> </div>
<div>इस समझौता ज्ञापन का प्रमुख उद्देश्य सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में आगामी समय की कार्य योजना में प्रस्तावित बी.एससी. नर्सिंग जैसे महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम के सुचारु संचालन हेतु आवश्यक चिकित्सीय एवं प्रयोगात्मक प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करना है। नर्सिंग पाठ्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को व्यावहारिक चिकित्सा प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सालय से संबद्धता आवश्यक होती है, इसी आवश्यकता की पूर्ति के लिए यह समझौता किया गया है।</div>
<div> </div>
<div>इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कविता शाह ने कहा कि सिद्धार्थ विश्वविद्यालय एवं माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज दोनों संस्थानों की भूमिका इस क्षेत्र के लोगों, विशेषकर विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। दोनों संस्थान मिलकर शिक्षा और चिकित्सा के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विद्यार्थियों को नर्सिंग जैसे रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के लिए सुदूर जाना पड़ता है, भविष्य में यदि यह पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय में प्रारंभ हो जाता है तो स्थानीय विद्यार्थियों को लाभ इसका बहुत लाभ भी होगा और मानव सेवा का पुनीत कार्य भी सम्भव है। नर्सिंग शिक्षा न केवल रोजगार की दृष्टि से बल्कि मानव सेवा की भावना के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।</div>
<div>कुलपति ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय एवं मेडिकल कॉलेज की भूमिका केवल पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के व्यापक हित में कार्य करते हुए क्षेत्र के समग्र विकास में भी योगदान दिया जा सकता है। दोनों संस्थान मिलकर रक्तदान, देहदान एवं अंगदान जैसे पवित्र कार्यों के प्रति समाज, विशेषकर युवाओं को जागरूक कर सकते हैं, जिससे विकसित भारत के निर्माण की दिशा में सार्थक प्रयास संभव होंगे।</div>
<div> </div>
<div>मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य प्रो. राजेश मोहन ने कहा कि मेडिकल कॉलेज कम्युनिटी हेल्थ के क्षेत्र में अपने पाठ्यक्रमों से आगे बढ़कर समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के साथ जुड़कर क्षेत्रीय विकास में मेडिकल कॉलेज अपना उल्लेखनीय योगदान दे सकेगा। उन्होंने बताया कि टेली क्लीनिक के माध्यम से मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ चिकित्सक सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के साथ जुड़कर चिकित्सीय परामर्श एवं सहयोग उपलब्ध कराएंगे, जिसके लिए आगे विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।</div>
<div> </div>
<div>इस अवसर पर विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव डॉ. अश्वनी कुमार, वित्त अधिकारी  रामेंद्र मौर्य, आईसीसी निदेशक प्रो. सौरभ, रसायन विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मण सिंह, सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अविनाश प्रताप सिंह  उपस्थित रहे। वहीं मेडिकल कॉलेज की ओर से प्रो. विष्णु अवस्थी, प्रो. नौशाद आलम , प्रो. हसमतुल्लाह, डॉ. आशीष कुमार शर्मा, अरविंद कुमार सिंह सहित अनेक  लोग उपस्थित थे।</div>
<div> </div>
<div>विशेष रूप से इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक  श्याम धनी राही की  उपस्थिति रही। उन्होंने कहा कि शासन स्तर पर दोनों शिक्षण संस्थानों को जो भी सहयोग आवश्यक होगा, उसे उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। दोनों संस्थान अपने-अपने क्षेत्र में प्रतिष्ठित हैं तथा कुलपति प्रो. कविता शाह एवं प्रधानाचार्य प्रो. राजेश मोहन की रचनात्मक दृष्टि से क्षेत्र के लोगों एवं समाज को व्यापक लाभ मिलेगा।</div>
<div> </div>
<div>यह समझौता ज्ञापन शिक्षा एवं चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई दिशा प्रदान करते हुए क्षेत्रीय विकास में मील का पत्थर सिद्ध होगा।</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अन्य</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 21:20:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु और साउथ एशिया फाउंडेशन नेपाल के बीच समझौता ज्ञापन</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div>
<div>
<div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">लुम्बिनी बौद्ध विश्वविद्यालय, लुंबिनी, नेपाल में 27-28 जुलाई 2025 को चल रही  "डिप्लोमेसी एंड बुद्धाज टीचिंग: ए पाथ टू ग्लोबल पीस एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट सिम्पोजियम के उद्घाटन समारोह के दौरान रविवार को सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु (उत्तर प्रदेश) और साउथ एशिया फाउंडेशन-नेपाल  के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन  पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता प्रो. कविता शाह, कुलपति, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, और  राहुल बरुआ, मानद महासचिव, साउथ एशिया फाउंडेशन द्वारा हस्ताक्षरित किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  इस साझेदारी के अंतर्गत साउथ एशिया सेंटर फॉर पीस रिसर्च एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट की स्थापना की जाएगी, जो शांति, बौद्ध अध्ययन एवं सतत विकास पर</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
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<div style="text-align:justify;">यह</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/153527/siddharth-university-kapilvastu-and-south-asia-foundation-nepal-memorandum-memorandum"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-07/1753621214859.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div>
<div>
<div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लुम्बिनी बौद्ध विश्वविद्यालय, लुंबिनी, नेपाल में 27-28 जुलाई 2025 को चल रही  "डिप्लोमेसी एंड बुद्धाज टीचिंग: ए पाथ टू ग्लोबल पीस एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट सिम्पोजियम के उद्घाटन समारोह के दौरान रविवार को सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु (उत्तर प्रदेश) और साउथ एशिया फाउंडेशन-नेपाल  के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन  पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता प्रो. कविता शाह, कुलपति, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, और  राहुल बरुआ, मानद महासचिव, साउथ एशिया फाउंडेशन द्वारा हस्ताक्षरित किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> इस साझेदारी के अंतर्गत साउथ एशिया सेंटर फॉर पीस रिसर्च एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट की स्थापना की जाएगी, जो शांति, बौद्ध अध्ययन एवं सतत विकास पर संयुक्त अनुसंधान एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करेगा। यह पहल वैश्विक शांति और विकास के लिए बौद्ध शिक्षाओं की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नया आयाम प्रदान करेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> इस अवसर पर  प्रो. कविता शाह ने  कहा कि बुद्ध की शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी दो सहस्राब्दी पहले थीं। इस एमओयू के माध्यम से हमारा उद्देश्य इन्हें वैश्विक शांति एवं टिकाऊ विकास के संदर्भ में पुनः स्थापित करना है। विश्वविद्यालय के नैक समन्वयक प्रो0 सौरभ ने कहा कि इस साझेदारी का उद्देश्य दक्षिण एशियाई क्षेत्र में बौद्ध दर्शन, शांति अध्ययन एवं सतत विकास के क्षेत्र में सहयोगात्मक शोध कार्यों को गति देना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह केंद्र छात्र, शोधार्थियों, शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं को एक साझा मंच प्रदान करेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सांस्कृतिक संवाद को बल मिलेगा। इस कार्यक्रम में नेपाल, भारत सहित कई दक्षिण एशियाई देशों के बौद्ध विद्वानों, शोधकर्ताओं एवं विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 27 Jul 2025 21:31:41 +0530</pubDate>
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