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                <title>भारी बारिश - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>भारी बारिश RSS Feed</description>
                
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                <title>बारिश देर से आई, लेकिन कहर बरपा गई: बाढ़ के सामने बेबस इंसान</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विकास और आधुनिक तकनीक के बावजूद इंसान आखिर प्रकृति के सामने कितना असहाय है। इस साल देश के कई हिस्सों में अतिवृष्टि, बाढ़ और भूस्खलन ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कहीं नदियां खतरे के निशान के करीब पहुंच गईं तो कहीं गांवों और शहरों में पानी घरों के भीतर तक जा पहुंचा। असम में बाढ़ ने बड़ी संख्या में लोगों की जान ली और हजारों परिवारों को प्रभावित किया। अब उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना, घाघरा, राप्ती और गोमती</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185967/the-rain-came-late-but-it-wreaked-havoc-people-were"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1002177002.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विकास और आधुनिक तकनीक के बावजूद इंसान आखिर प्रकृति के सामने कितना असहाय है। इस साल देश के कई हिस्सों में अतिवृष्टि, बाढ़ और भूस्खलन ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कहीं नदियां खतरे के निशान के करीब पहुंच गईं तो कहीं गांवों और शहरों में पानी घरों के भीतर तक जा पहुंचा। असम में बाढ़ ने बड़ी संख्या में लोगों की जान ली और हजारों परिवारों को प्रभावित किया। अब उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना, घाघरा, राप्ती और गोमती जैसी नदियों के बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ा दी है। बारिश देर से जरूर आई, लेकिन जब आई तो अपने साथ ऐसा कहर लेकर आई कि कई इलाके जलमग्न हो गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में मौसम विभाग ने 68 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। लगातार बारिश के कारण राज्य की प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदियों के किनारे बसे निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ का असर साफ दिखाई देने लगा है। राज्य के 13 जिलों के करीब 173 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। लगभग 84 हजार से अधिक आबादी और 13 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र प्रभावित हुआ है। बदायूं, बहराइच, बलिया, बाराबंकी, बिजनौर, फर्रुखाबाद, गौतम बुद्ध नगर, गोंडा, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मुजफ्फरनगर, सीतापुर और उन्नाव जैसे जिलों में हालात चिंता बढ़ाने वाले हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बाढ़ का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ता है जिनकी जिंदगी नदी और खेती पर निर्भर है। कछारी क्षेत्रों में सब्जियों और अन्य फसलों के खेत पानी में डूब गए हैं। किसानों की महीनों की मेहनत और खेती में लगी पूंजी के बर्बाद होने का खतरा है। फसल खराब होने का मतलब केवल तत्काल आर्थिक नुकसान नहीं है, बल्कि आने वाले महीनों की आजीविका पर भी संकट है। छोटे और सीमांत किसान ऐसे संकट से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, क्योंकि उनके पास नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ने से शहर के कई इलाकों में पानी घुस गया है। लगातार बारिश के कारण रिहायशी क्षेत्रों में जलभराव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई घरों में पानी पहुंचने से घरेलू सामान खराब हो गया। रामबाग रेलवे स्टेशन की पटरियों तक पानी पहुंच गया और रेलवे कार्यालय भी जलभराव की चपेट में आ गए। शहर की गंभीर स्थिति को देखते हुए हाई कोर्ट ने जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को तलब किया है। यह स्थिति बताती है कि बाढ़ केवल गांवों की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि तेजी से बढ़ते शहर भी जलभराव के संकट से जूझ रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वाराणसी में गंगा का बढ़ता जलस्तर धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन को भी प्रभावित कर रहा है। घाटों के आसपास बने सौ से अधिक मंदिरों में पानी पहुंच गया है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के श्मशान क्षेत्रों तक पानी पहुंचने से अंतिम संस्कार की व्यवस्था प्रभावित हुई है। दशाश्वमेध घाट की सीढ़ियां जलमग्न होने के कारण गंगा आरती को ऊपरी हिस्से से कराना पड़ा। नमो घाट भी पानी में डूब गया। गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और जीवन का आधार है। इसलिए उसका इस तरह उफान पर आना केवल प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चिंता का विषय भी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कानपुर और उन्नाव में भी गंगा किनारे के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी भर गया है। आवागमन प्रभावित होने से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल हो गई है। प्रशासन नदी के जलस्तर और बाढ़ की स्थिति पर नजर रख रहा है। कई जिलों में स्कूलों को बंद करना पड़ा है। प्रयागराज, गोंडा, कौशांबी, गाजीपुर और भदोही में कक्षा 12 तक के स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई, जबकि कुछ अन्य जिलों में कक्षा आठ तक के विद्यालय बंद रखे गए। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए ऐसे कदम जरूरी हैं, लेकिन यह भी बताता है कि बाढ़ का असर समाज के हर वर्ग और हर क्षेत्र तक पहुंच रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश की वर्तमान स्थिति को इस साल देश के दूसरे हिस्सों में आई प्राकृतिक आपदाओं से अलग करके नहीं देखा जा सकता। असम में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। हजारों लोग प्रभावित हुए और बड़ी संख्या में परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। कई लोगों की जान चली गई। देश के अलग-अलग राज्यों में कहीं बादल फटने, कहीं अत्यधिक बारिश तो कहीं नदियों के उफान ने जनजीवन को प्रभावित किया। इन घटनाओं में एक समान बात दिखाई देती है—प्रकृति के असामान्य व्यवहार के सामने हमारी तैयारियां कई बार कमजोर पड़ जाती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बारिश हमारे लिए वरदान है, लेकिन जब उसका वितरण असामान्य हो जाए या कम समय में बहुत अधिक पानी गिर जाए तो वही बारिश विनाश का कारण बन जाती है। इस वर्ष कई जगह लंबे इंतजार के बाद बारिश शुरू हुई और फिर अचानक तेज बारिश के दौर ने हालात बदल दिए। इससे यह समझना जरूरी है कि केवल बारिश की मात्रा नहीं, बल्कि उसके समय, तीव्रता और वितरण का भी आपदा प्रबंधन में महत्व है। शहरों में नालों की सफाई, जल निकासी की व्यवस्था, नदी के बाढ़ क्षेत्र में अनियंत्रित निर्माण और कमजोर तटबंध जैसे सवालों पर गंभीरता से विचार करना होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बाढ़ के समय प्रशासन की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना, भोजन और पीने का पानी उपलब्ध कराना, स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना और पशुओं की सुरक्षा करना तत्काल प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके साथ ही बाढ़ समाप्त होने के बाद नुकसान का आकलन और किसानों तथा प्रभावित परिवारों को समय पर सहायता देना भी उतना ही जरूरी है। केवल राहत पहुंचाना पर्याप्त नहीं है; भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए स्थायी उपाय करने होंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रकृति को नियंत्रित करना इंसान के हाथ में नहीं है, लेकिन प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करना निश्चित रूप से संभव है। इसके लिए मौसम की सटीक चेतावनी, मजबूत स्थानीय प्रशासन, बेहतर जल निकासी, नदियों के बाढ़ क्षेत्र का संरक्षण और गांवों-शहरों की वैज्ञानिक योजना जरूरी है। विकास का अर्थ केवल सड़क, पुल और इमारतें बनाना नहीं, बल्कि ऐसा सुरक्षित ढांचा तैयार करना भी है जो प्राकृतिक आपदा के समय लोगों की रक्षा कर सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना और दूसरी नदियां उफान पर हैं। कल किसी दूसरे राज्य में यही स्थिति पैदा हो सकती है। असम से लेकर उत्तर प्रदेश तक की घटनाएं हमें चेतावनी दे रही हैं कि बदलते मौसम और बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं को अब सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बारिश देर से आई, लेकिन उसका कहर यह याद दिलाने के लिए काफी है कि प्रकृति के साथ संतुलन बिगाड़ने की कीमत अंततः समाज को ही चुकानी पड़ती है। कुदरत के सामने इंसान लाचार जरूर है, लेकिन बेहतर तैयारी, संवेदनशील प्रशासन और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार रवैया अपनाकर इस लाचारी को काफी हद तक कम किया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 20:53:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>आंधी-बारिश से मौसम हुआ सुहाना, चार घंटे गुल रही बिजली</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>तिलहर (शाहजहांपुर)।</strong> मंगलवार दोपहर अचानक आए तेज आंधी और बारिश से मौसम खुशगवार हो गया। पिछले कई दिनों से भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों को राहत मिली। </div>
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<div style="text-align:justify;">दोपहर करीब एक बजे तेज आंधी के साथ बारिश शुरू हुई। कुछ देर की बारिश से ही सड़कों पर पानी भर गया और लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर पेड़ों की डालियां टूटकर गिर गईं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आंधी के दौरान नगर के पूर्वी तिराहे के पास बिजली का खंभा टूट गया, जिससे मौजमपुर फीडर की विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई। अचानक बिजली</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179032/weather-became-pleasant-due-to-storm-and-rain-power-cut"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260512-wa0061.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>तिलहर (शाहजहांपुर)।</strong> मंगलवार दोपहर अचानक आए तेज आंधी और बारिश से मौसम खुशगवार हो गया। पिछले कई दिनों से भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों को राहत मिली। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दोपहर करीब एक बजे तेज आंधी के साथ बारिश शुरू हुई। कुछ देर की बारिश से ही सड़कों पर पानी भर गया और लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर पेड़ों की डालियां टूटकर गिर गईं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आंधी के दौरान नगर के पूर्वी तिराहे के पास बिजली का खंभा टूट गया, जिससे मौजमपुर फीडर की विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई। अचानक बिजली गुल होने से लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। सूचना मिलने पर विद्युत विभाग की टीम मौके पर पहुंची और टूटे खंभे को बदलने का कार्य शुरू किया। कर्मचारियों ने देर शाम तक मरम्मत कार्य कर आपूर्ति बहाल की। बिजली आने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली। नगरवासियों का कहना था कि हल्की आंधी और बारिश में भी बिजली व्यवस्था चरमरा जाती है। लोगों ने विद्युत विभाग से जर्जर खंभों और तारों को जल्द बदलवाने की मांग की है, ताकि बरसात के मौसम में परेशानी न उठानी पड़े।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
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</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 17:46:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कनहर बांध के चार फाटक खुले, सिंचाई विभाग की लगातार निगरानी</title>
                                    <description><![CDATA[बारिस को देखते हुए छत्तीसगढ़ के रामानुजगंज, त्रिशूली, खुरी में कर्मियों को तैनात किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/153221/%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A7-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A4%95-%E0%A4%96%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A5%87--%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B2%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-07/img_20250716_195404.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>नितीश कुमार (संवाददाता) </em></strong></p>
<p><strong><em>दुद्धी/ सोनभद्र-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;"> जनपद के दुद्धी क्षेत्र के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और झारखंड में हो रही लगातार बारिश के कारण कनहर बांध का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए अमवार स्थित कनहर बांध के एक के बाद एक करके चार गेट खोल दिए गए हैं, जिससे 1200 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है, सिंचाई विभाग बांध की प्रत्येक घंटे निगरानी कर रहा है। </p>
<p style="text-align:justify;">कनहर परियोजना के अवर अभियंता नंदलाल वर्मा ने बताया कि कनहर बांध में छत्तीसगढ़ और झारखंड से लगातार बारिश का पानी आ रहा है, बुधवार सुबह बांध का जलस्तर 256 मीटर तक पहुंच गया था, जलस्तर में लगातार वृद्धि को देखते हुए पहले दो गेट खोले गए. इसके बाद मंगलवार सुबह एक और गेट खोला गया और मंगलवार दोपहर एक बजे के बाद एक और गेट खोलना पड़ा, जिससे कुल चार गेट खोल दिए गए हैं ।</p>
<p style="text-align:justify;">सहायक अभियंता से मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह से हो रही बारिश के मद्देनजर अमवार में कनहर नदी के जलस्तर में वृद्धि की सूचना प्राप्त करने के लिए छत्तीसगढ़ के रामानुज गंज, त्रिशूली और खुरी में कर्मियों को तैनात किया गया है, ये कर्मी अमवार फील्ड हॉस्टल स्थित कंट्रोल रूम में समय-समय पर जानकारी भेज रहे हैं। इसके अतिरिक्त बांध की स्थिति पर प्रत्येक घंटे नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Jul 2025 20:02:20 +0530</pubDate>
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