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                <title>दलित परिवार - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>दलित परिवार RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>चकबंदी अधिकारियों की मनमानी, दलित परिवार के आशियाने को ही वृक्षारोपण के लिए किया चयनित </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के कलवारी मुस्तहकम क्षेत्र में चकबंदी विभाग के एक आदेश को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। आरोप है कि वर्षों से पट्टे की जमीन पर मकान बनाकर रह रहे और उसी भूमि पर खेती-बाड़ी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले एक दलित परिवार की आजीविका पर प्रशासनिक निर्णय के कारण गंभीर संकट खड़ा हो गया है।</div>
<div style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार दलित जुग्गीलाल और रामलाल पुत्रगण विश्राम का परिवार लगभग 50 वर्षों से गाटा संख्या 33 की भूमि पर निवास कर रहा है। बताया जाता है कि यह भूमि विश्राम को सरकार की ओर से</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181232/due-to-the-arbitrariness-of-consolidation-officers-only-the-house"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260615-wa0119.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के कलवारी मुस्तहकम क्षेत्र में चकबंदी विभाग के एक आदेश को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। आरोप है कि वर्षों से पट्टे की जमीन पर मकान बनाकर रह रहे और उसी भूमि पर खेती-बाड़ी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले एक दलित परिवार की आजीविका पर प्रशासनिक निर्णय के कारण गंभीर संकट खड़ा हो गया है।</div>
<div style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार दलित जुग्गीलाल और रामलाल पुत्रगण विश्राम का परिवार लगभग 50 वर्षों से गाटा संख्या 33 की भूमि पर निवास कर रहा है। बताया जाता है कि यह भूमि विश्राम को सरकार की ओर से 99 सालों के लिये पट्टे पर मिली थी, जिस पर उन्होंने स्थायी आवास बनाया और खेती-बाड़ी के माध्यम से अपने परिवार का जीवनयापन करते रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">आरोप है कि समय के साथ कुछ लोगों की नजर इस जमीन पर पड़ गई और चकबंदी प्रक्रिया के दौरान कथित रूप से प्रभाव का इस्तेमाल कर इस भूमि पर अपना चक बैठवाने का प्रयास किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">जब जुग्गीलाल और रामलाल को इस मामले की जानकारी हुई तो उन्होंने विभिन्न स्तरों पर आपत्ति दर्ज कराई और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाए, और उनके पक्ष में निर्णय भी आया |</div>
<div style="text-align:justify;">आरोप है कि विवादित स्थिति बनने के बाद भी मामले का निष्पक्ष समाधान नहीं निकाला गया। इसके बजाय उपचकबंदी अधिकारी की संस्तुति पर चकबंदी अधिकारी हर्रैया द्वारा गाटा संख्या 33, रकबा 0.524 हेक्टेयर को वृक्षारोपण के लिए रिजर्व करने का आदेश पारित कर दिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">इस निर्णय के बाद प्रभावित परिवार के सामने गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। परिवार का दावा है कि जिस जमीन पर उनका मकान और आजीविका दोनों निर्भर हैं, उसी को वृक्षारोपण हेतु आरक्षित कर दिए जाने से उनके सामने भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि आदेश पर अमल हुआ तो परिवार के पास जीवनयापन का कोई साधन नहीं बचेगा।</div>
<div style="text-align:justify;">मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि गांव में अन्य ग्राम सभा भूमि उपलब्ध होने के बावजूद इसी पट्टे की भूमि को वृक्षारोपण के लिए क्यों चुना गया।</div>
<div style="text-align:justify;">वहीं आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों के दबाव और व्यक्तिगत रंजिश के चलते चकबंदी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दबाव में लेकर इस भूमि को वृक्षारोपण के लिये चयनित करवाया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;">एक तरफ सरकार लोगों को छत मुहैया करवा रही है वहीं एक दलित परिवार के आशियाने को उजाड़ने की तैयारी चकबंदी विभाग ने कर की है।</div>
<div style="text-align:justify;">लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में भूमि पर दशकों से परिवार निवास कर रहा है और उसका जीवनयापन उसी पर निर्भर है, तो ऐसे मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए निर्णय लिया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि विवादित आदेश की समीक्षा कर प्रभावित परिवार को राहत प्रदान की जाए तथा पूरे प्रकरण में चकबंदी प्रक्रिया की जांच कराई जाए।</div>
<div style="text-align:justify;">अब यह मामला स्थानीय स्तर से निकलकर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनने लगा है। यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो यह सवाल खड़ा होगा कि आखिर सरकारी पट्टे पर वर्षों से जीवन गुजार रहे परिवार के अधिकारों की रक्षा कौन करेगा और चकबंदी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है।</div>
</div>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 18:39:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आगज़नी की मार से टूटे राजेश गौतम का हौसला बने विवेक मौर्य</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>अंबेडकरनगर</strong>।</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश की अग्रणी समाजसेवी संस्था ने फिर एक बार ज़रूरतमंद का हाथ थामा। संस्था के संरक्षक विवेक मौर्य के निर्देश पर नारायण फ़ाउंडेशन की टीम ने अकबरपुर विधानसभा के ग्राम पंचायत कोटवा महमदपुर के दलित परिवार के साथ खड़े होकर उनके टूटे हौसलों को जोड़ने व उदास चेहरों पर मुस्कान बिखेरने का काम किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">बीते दिन ग्राम पंचायत कोटवा महमदपुर निवासी राजेश गौतम का छप्परनुमा मकान खाना बनाते वक्त चूल्हे से निकली चिंगारी से जल गया। जिसमें घर का सारा सामान और परिवार का अरमान जलकर ख़ाक हो गया। रात आठ बजे राधिका पत्नी राजेश कुमार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/152879/vivek-maurya-became-the-courage-of-rajesh-gautam-broken-by"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-06/img-20250629-wa1249.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अंबेडकरनगर</strong>।</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश की अग्रणी समाजसेवी संस्था ने फिर एक बार ज़रूरतमंद का हाथ थामा। संस्था के संरक्षक विवेक मौर्य के निर्देश पर नारायण फ़ाउंडेशन की टीम ने अकबरपुर विधानसभा के ग्राम पंचायत कोटवा महमदपुर के दलित परिवार के साथ खड़े होकर उनके टूटे हौसलों को जोड़ने व उदास चेहरों पर मुस्कान बिखेरने का काम किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">बीते दिन ग्राम पंचायत कोटवा महमदपुर निवासी राजेश गौतम का छप्परनुमा मकान खाना बनाते वक्त चूल्हे से निकली चिंगारी से जल गया। जिसमें घर का सारा सामान और परिवार का अरमान जलकर ख़ाक हो गया। रात आठ बजे राधिका पत्नी राजेश कुमार चूल्हे पर खाना बना रहीं थीं, अचानक चूल्हे की आग से निकली तेज लपक से झोपड़ी में आग लग गयी और घर में रखी दो साइकिल जिनसे इनकी बच्चियां स्कूल आती जाती थीं और इन बच्चों की किताब कापी घर में रखा सारा राशन कपड़ा सब जलकर राख हो गया। इस घटना से पूरे गांव में अफरा तफरी और घर में सन्नाटा पसर गया।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-06/img-20250629-wa1259.jpg" alt="IMG-20250629-WA1259" width="4032" height="2268"></img></p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि जान का नुक़सान तो नहीं हुआ पर परिवार के पास अपना खुद का कुछ नहीं बचा। बताया जाता है कि उक्त घटना की सूचना गांव के प्रधान द्वारा नारायण फाउंडेशन के संरक्षक विवेक मौर्य को दी गयी। घटना की सूचना मिलने पर विवेक मौर्य ने अपनी संस्था की टीम को मौके पर भेजकर छप्पर निर्माण हेतु सीमेंट की नालीदार चद्दर व लोहे की पाइप, वस्त्र और बच्चों की शिक्षा सामाग्री एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई। संस्था के संरक्षक द्वारा की गई इस सहायता से परिवार गदगद हो उठा। पीड़ित परिवार की त्वरित सहायता हेतु खड़े होने के कारण क्षेत्र में विवेक मौर्य की भूरि भूरि प्रशंसा हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-06/img-20250629-wa1262.jpg" alt="IMG-20250629-WA1262" width="3024" height="2554"></img></p>
<p style="text-align:justify;">अभी हाल ही में विवेक मौर्य ने बेवाना मण्डल के कुढ़ा मोहम्मद गढ़ ग्राम सभा के निषाद बस्ती में अज्ञात कारणों से आग लगने की घटना पर जिसमें गांव के चार परिवारों का छप्पर नुमा मकान पूरी तरह से जलकर राख होने की घटना पर पीड़ित परिवार के घरों पहुंचकर पीड़ितों को सांत्वना दी, साथ ही आर्थिक मदद, परिवार में सबके लिए कपड़े, राशन के साथ साथ गृहउपयोगी वस्तुएँ देने का कार्य किया था। </p>
<p style="text-align:justify;">घटना के बारे में जानकारी देते हुए कोटवा महमदपुर ग्राम पंचायत के प्रधान ने कहा हमारे गाँव में विगत दिन खाना बनाने के दौरान भीषण आगज़नी की घटना हुई। जिसमें दलित परिवार का घर व रखा हुआ सामान पूरी तरह जल कर ख़ाक हो गया था, मैंने नारायण फ़ाउंडेशन के संरक्षक विवेक मौर्य से बात कर पीड़ित परिवार की मदद करने जी गुज़ारिश की जिसके बाद नारायण फ़ाउंडेशन की टीम पूरी तैयारी के साथ पीड़ित परिवार की मदद के लिए पहुंची और पीड़ित परिवार को आवश्यक वस्तुएं एवं आर्थिक सहायता देने का सराहनीय कार्य किया। पीड़ित परिवार का सहयोग करने के लिए संस्था के संरक्षक विवेक मौर्य का लोगों ने आभार प्रकट किया।</p>
<p style="text-align:justify;">प्राथमिक स्तर पर किसी भी छात्र को पठन सामग्री की कमी ना हो, उसकी शिक्षा में बाधा ना हो, अति ग़रीब बेटियों की शादियों में कोई अड़चन ना आए, क्षेत्र में स्वच्छता बनी रहे, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़े नारायण फ़ाउंडेशन इसके लिए कृतसंकल्पित है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Jun 2025 20:30:02 +0530</pubDate>
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