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                <title>अबैध खनन का मामला - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>अबैध खनन का मामला RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सोनभद्र में अवैध खनन को लेकर  सच दिखाने वाले पत्रकारों को  माफियाओं द्वारा  रची जा रही फंसाने की साजिश</title>
                                    <description><![CDATA[पर्यायवरणविदों ने जताई चिंता, लोगों ने किया कार्रवाई की मांग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/152524/conspiracy-to-trap-journalists-who-have-shown-the-truth-about"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-06/img-20250610-wa0064.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong><em>अजित सिंह ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong><em>सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">सोनभद्र जिले में अवैध खनन का बेलगाम खेल लगातार जारी है, और इस पूरे गोरखधंधे में खनन विभाग तथा प्रशासन की कथित मिलीभगत पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में जब कुछ निष्पक्ष पत्रकारों ने इस अवैध कारोबार का पर्दाफाश करने का साहस दिखाया, तो उन्हें न सिर्फ माफिया तत्वों से धमकियों का सामना करना पड़ा, बल्कि अब वे झूठे आरोपों और सुनियोजित साजिशों के जाल में भी फंसाते दिख रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-06/img-20250610-wa0025.jpg" alt="सोनभद्र में अवैध खनन को लेकर  सच दिखाने वाले पत्रकारों को  माफियाओं द्वारा  रची जा रही फंसाने की साजिश" width="475" height="627"></img></p>
<p style="text-align:justify;">एक वायरल वीडियो में जिसमें कथित तौर पर एक पत्रकार को दारोगा हूं कहते हुए दिखाया जा रहा है जो कि पूरे मामले को और भी उलझा दिया है। हालांकि वीडियो की गहन पड़ताल से सच्चाई कुछ और ही सामने आ रही है और यह पत्रकारों पर लगे आरोपों की गंभीरता पर बड़े प्रश्नचिह्न लगाती है। यह घटना पत्रकारिता की नैतिकता, एकजुटता और सच को सामने लाने की चुनौतियों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन पत्रकारों ने अपनी रिपोर्टिंग के जरिए खनन माफिया और उनके कथित संरक्षकों के बीच के 'खेल' का पर्दाफाश करने का दावा किया। हालांकि सच्चाई सामने आने के बाद इन पत्रकारों को कड़े विरोध और सीधी धमकियों का सामना करना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-06/img-20250610-wa0024.jpg" alt="IMG-20250610-WA0024" width="451" height="502"></img></p>
<p style="text-align:justify;">सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उन पर आधारहीन और झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं, और उन्हें अपने काम से रोकने तथा फंसाने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है।जबकि इस वीडियो की बारीकी से पड़ताल की गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जो आरोपों की पोल खोलते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वीडियो में कहीं भी कोई पत्रकार अपने मुंह से यह कहते हुए नहीं दिख रहा है कि मैं दारोगा हूं या मैं वन रेंजर हूं। यह बिंदु सीधे तौर पर आरोपों की सत्यता पर सवाल उठाता है। यह कैसे संभव है कि बिना सुने ही आरोप लगा दिए जाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">वीडियो में जो व्यक्ति आरोप लगा रहा है जो खुद वीडियो बना रहा है, वह खुद अपने मुंह से यह गलत आरोप लगा रहा है कि कोई पत्रकार दारोगा बन रहा है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि आरोप एकतरफा, आधारहीन और दुर्भावनापूर्ण हैं, जिनका एकमात्र उद्देश्य पत्रकारों को बदनाम करना और उनके द्वारा उजागर किए गए सच से ध्यान भटकाना हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ताजा मामला कुछ दिन पहले जुगैल क्षेत्र में भी पत्रकारों के साथ इसी तरह की घटना हुई है, जहाँ उन्हें फर्जी तरीके से फंसाने की कोशिश की जा रही है। यह पैटर्न बताता है कि अवैध खनन में शामिल लोग और उनके समर्थक सच सामने लाने वाले पत्रकारों को बदनाम करने और उन्हें अपने काम से रोकने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। यह दर्शाता है कि यह महज एक इत्तफ़ाक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि जो लोग खुद गलत काम में लिप्त हैं, वे दूसरों को फंसाने और बदनाम करने के लिए ऐसे झूठे आरोप गढ़ते हैं ताकि सच्चाई सामने न आ सके और उनका अवैध धंधा बेरोकटोक चलता रहे।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-06/img-20250610-wa0026.jpg" alt="IMG-20250610-WA0026" width="549" height="724"></img></p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना ने सोनभद्र में पत्रकारिता की नैतिकता और पत्रकार एकता के दावों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।जब वीडियो में पत्रकार खुद यह बयान नहीं दे रहा है कि वह दारोगा है, तो कैसे किसी भी व्यक्ति, खासकर किसी अन्य पत्रकार द्वारा, बिना किसी पुष्टि के ऐसे गंभीर आरोप लगाए जा सकते हैं और वीडियो को वायरल किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पत्रकारिता का मूलभूत सिद्धांत है कि किसी भी आरोप या खबर को प्रकाशित करने से पहले संबंधित व्यक्ति का पक्ष जानना अनिवार्य है। इस मामले में, आरोप लगाने से पहले संबंधित पत्रकार से फोन करके या मिलकर सच्चाई जानने की कोशिश क्यों नहीं की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">यह घटना पत्रकार संगठनों की एकजुटता और उनके आंतरिक अनुशासन पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है। यदि पत्रकार ही एक-दूसरे पर झूठे आरोप लगाएंगे और बिना पुष्टि के वीडियो वायरल करेंगे तो सच्चाई कौन उजागर कर पाएगा और पत्रकारिता की साख कैसे बचेगी? यह पत्रकार एकता के दावों को कमजोर करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सोनभद्र में पत्रकारों पर हो रहे ये हमले और झूठे आरोप बेहद चिंताजनक हैं। यह न केवल पत्रकारों की स्वतंत्रता पर हमला है, बल्कि यह सच्चाई को सामने लाने के उनके प्रयासों को दबाने की एक सोची-समझी साजिश भी है।ऐसे में सोनभद्र के सभी पत्रकारों को व्यक्तिगत मतभेदों को भुलाकर एकजुट होने की सख्त जरूरत है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्हें इन फर्जी आरोपों के खिलाफ मिलकर आवाज उठानी चाहिए और उन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए जो अवैध खनन कर रहे हैं और साथ ही पत्रकारों को झूठे मुकदमों में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। ताकि भविष्य में कोई भी पत्रकार को इस तरह से निशाना बनाने की हिम्मत न कर सके।</p>
<p style="text-align:justify;">पत्रकार संगठनों को भी इस मामले में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और अपने सदस्यों के हितों की रक्षा करनी चाहिए।यह पूरा प्रकरण जिला प्रशासन और खनन विभाग की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि जिलाधिकारी और अन्य उच्चाधिकारी वास्तव में अवैध खनन को रोकने के लिए गंभीर हैं, तो उन्हें न केवल अवैध खनन करने वालों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, बल्कि उन पत्रकारों को भी सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए जो इस अवैध धंधे का पर्दाफाश कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पत्रकारों पर लगाए जा रहे झूठे आरोपों की निष्पक्ष और त्वरित जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। सोनभद्र में पत्रकारिता की स्वतंत्रता और सच सामने लाने के उनके प्रयास कब तक इन चुनौतियों का सामना करते रहेंगे यह देखना बाकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Jun 2025 21:28:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[राजेश तिवारी]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अबैध बालू परिवहन करते  ट्रैक्टर धराया, खननकर्ताओं में मचा हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[विंढमगंज वन रेंज के अन्तर्गत का मामला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/151752/tractor-caught-in-illegal-sand-transfusions-created-a-stir-among"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-05/img-20250509-wa0008.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>राजेश तिवारी ( क्राइम ब्यूरो) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश -</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">विंढमगंज / कोन वन क्षेत्र में अबैध खनन व परिवहन करना आम बात है जबकि शासन के द्वारा बालू का अवैध खनन व परिवहन किसी भी सूरत में नहीं होने देने का अल्टीमेटम दिया जाता है इसके बाद भी कनहर व मलिया नदी से प्रतिदिन रात्रि को दर्जनों ट्रैक्टरों के द्वारा अवैध बालू का खनन व परिवहन थमने का नाम नहीं ले रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बीती रात्रि को वन क्षेत्राधिकारी ने गश्त के दौरान ग्राम पंचायत फुलवार मलिया नदी से अवैध बालू का खनन कर के परिवहन कर रहे एक ट्रैक्टर को पकड़ लिया जो फुलवार निवासी अवधेश गुप्ता पुत्र ईश्वरी गुप्ता का बताया जा रहा हैं जिसे रेंज ऑफिस पर लाकर वन अधिनियम के विस्तृत धाराओं के तहत विधि सम्मत कार्रवाई की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीणों के अनुसार विंढमगंज क्षेत्र के अंतर्गत कनहर और मलिया नदी के किनारे बसे ग्राम पंचायतो से प्रतिदिन रात्रि को दर्जनों ट्रैक्टर से अवैध बालू का खनन और परिवहन करके बालू माफिया मालामाल हो रहे हैं वहीं बालू का अवैध खनन व परिवहन रुकने का नाम नहीं ले रहा है।जानकारों का कहना हैं कि अबैध कार्य मे संलिप्त ट्रेक्टरों को जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा पकड़ा जरूर जाता हैं लेकिन विस्तृत धाराओं में कार्रवाई न करने के बजाय छोटी रकम की जुर्माना वसूल कर गाड़ी को रिहा कर दिया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिससे खनन माफियाओं का हौसला इतना बुलंद है कि गाड़ी को रिहा होते ही रात्रि को नदी से बालू लोड करके ट्रैक्टर का ड्राइवर तीव्र गति से गाड़ी को सड़कों पर दौडाते हैं जिसके कारण घरों के सामने बंधे जानवरो व सड़क पर चल रहे राहगीरों को भी जान का खतरा बना रहता है तथा रात्रि में ट्रैक्टर के शोर से आम जनमानस को सोना भी दुश्वार हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"> इस बावत रेंजर इमरान खान ने बताया कि अवैध बालू का खनन व परिवहन करने की सूचना मिलती थी जिसके क्रम में बीती रात्रि को ग्रस्त के दौरान मलिया नदी फुलवार से अवैध बालू लोड करके परिवहन कर रहे महिंद्रा ट्रैक्टर लाल रंग को पड़कर रेंज ऑफिस लाया गया है तथा वन अधिनियम के तहत विधि सम्मत कारवाई किया जा रहा है साथ ही साथ क्षेत्र में अवैध बालू का खनन और परिवहन किसी भी सूरत में नहीं होने दिया जाएगा।उधर वन विभाग के द्वारा उक्त कार्रवाई से अवैध बालू खनन व परिवहन करने वाले लोगों में हड़कंप मच गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 May 2025 16:56:21 +0530</pubDate>
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