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                <title>mahatma gandhi - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>आत्मनिर्भरता स्वाभिमानी राष्ट्र का प्रतीक</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">स्वावलंबन या आत्मनिर्भरता ही मनुष्य को स्वाधीन बनाने की प्रेरणा देती है। आत्मनिर्भरता की स्थिति में व्यक्ति अपनी इच्छाओं अपनी सुविधा अनुसार पूरा कर सकता है, इसके लिए दूसरों की तरफ मुंह ताकने की जरूरत नहीं पड़ती है। आत्मनिर्भरता केवल मनुष्य के लिए व्यक्तिगत रूप से ही जरूरी नहीं है, बल्कि राष्ट्र के लिए भी अति आवश्यक है ।एक स्वतंत्र राष्ट्र अपनी जनता को अपनी क्षमता के अनुसार सारी सुविधाएं तथा अन्य जीवन उपयोगी साधन उपलब्ध करा सकता है। भारत स्वतंत्रता के बाद हरित क्रांति सातवें दशक के प्रारंभ के बाद ही खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बन सका, इसके</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181459/self-reliance-is-a-symbol-of-a-self-respecting-nation"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">स्वावलंबन या आत्मनिर्भरता ही मनुष्य को स्वाधीन बनाने की प्रेरणा देती है। आत्मनिर्भरता की स्थिति में व्यक्ति अपनी इच्छाओं अपनी सुविधा अनुसार पूरा कर सकता है, इसके लिए दूसरों की तरफ मुंह ताकने की जरूरत नहीं पड़ती है। आत्मनिर्भरता केवल मनुष्य के लिए व्यक्तिगत रूप से ही जरूरी नहीं है, बल्कि राष्ट्र के लिए भी अति आवश्यक है ।एक स्वतंत्र राष्ट्र अपनी जनता को अपनी क्षमता के अनुसार सारी सुविधाएं तथा अन्य जीवन उपयोगी साधन उपलब्ध करा सकता है। भारत स्वतंत्रता के बाद हरित क्रांति सातवें दशक के प्रारंभ के बाद ही खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बन सका, इसके साथ ही भारत में खुशहाली की स्वाभाविक तौर पर वृद्धि हुई, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी कहा था कि "एक राष्ट्र की शक्ति उसकी आत्मनिर्भरता में है दूसरों से उधार लेकर काम चलाने में नहीं",पाकिस्तान की स्थिति बिल्कुल ऐसी ही है वह अभी तक स्वतंत्रता के बाद से 75 वर्ष के बाद भी संपूर्ण रूप से आत्मनिर्भर नहीं हो पाया है, वह कर्जे से डूब गया है और अपने देश में खर्चा चलाने के लिए पूरी दुनिया से उधार मांगते हुए घूम रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान आत्मनिर्भर नहीं होने का एवं उधार की जिंदगी जीने का एक बहुत बड़ा उदाहरण है। जबकि भारत देश विज्ञान, टेक्नोलॉजी, मेडिकल साइंस,इंजीनियरिंग और कृषि सेवा, खनिज,स्पेस रिसर्च में पूर्णता आत्मनिर्भर होकर विकसित देशों के बराबर खड़ा हुआ है। यह देशवासियों और देश के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। आत्मनिर्भरता या स्वावलंबन किसी भी देश की प्रगति विकास तथा और उसके नागरिकों की जिंदगी की जिजीविषा है जिससे वह संघर्ष कर आगे बढ़ता है। इतिहास गवाह है कि किसी भी महान लेखक को महान बनने तक निरंतर मेहनत कर किताबें लिखने का का श्रम करना पड़ा एवं आत्मनिर्भरता की स्थिति में विचार कर अपने विचारों को लिपिबद्ध करना पड़ा तब जाकर वह महानता की श्रेणी को प्राप्त कर सका। इसी तरह कोई छात्र अपने जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहता है तो उसे स्वयं परीक्षा में शामिल होना पड़ेगा एवं परीक्षा में मनोवांछित सफलता प्राप्त कर उसे स्वयं अध्ययन करना होगा। इसी प्रकार जीवन के हर क्षेत्र में भी मनुष्य को आत्मनिर्भर होकर मेहनत कर दीक्षित सफलता प्राप्त करनी पड़ेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारा देश भारत भी आजादी के बाद से आत्मनिर्भरता की ओर अग्रेषित हुआ आज स्थिति यह है कि वह विश्व में विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में आ खड़ा हुआ है। तमाम महापुरुषों के जीवन से भी हमें आत्मनिर्भरता तथा स्वावलंबन की शिक्षा मिलती रहती है।महात्मा गांधी अपना कार्य स्वयं किया करते थे। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी "दैव दैव आलसी" पुकारा है, तब जाकर उनकी जिंदगी पटरी पर आई और हमें परिश्रम कर आत्म निर्भर होने की शिक्षा प्रदान की थी। दूसरों पर निर्भरता हमें दूसरों का अनुसरण करने के लिए मजबूर करती है। दूसरों पर निर्भर होने से हमें के अनुरूप ही जीवन जीने के लिए बाध्य होना पड़ता है। पराधीनता हमारा आत्मविश्वास सृजनशीलता सोचने की शक्ति को नष्ट कर देती है। गुलामी एक अभिशाप होती है, आत्मनिर्भरता की कमी हमें किंकर्तव्यविमूढ़ बना देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरों की कृपा पर जीने वाला व्यक्ति जीवन के अक्षय आनंद से वंचित रहता है। खुद के परिश्रम श्रम से आगे बढ़ने वाला देश या व्यक्ति या समाज सदैव प्रफुल्लित आत्म विश्वासी तथा विकास की ओर सदैव अग्रसर रहता है। हमें सदैव अपने अंदर के आत्मविश्वास, छिपी हुई क्षमताओं मनोबल का सहारा लेकर आत्मनिर्भर या स्वावलंबी बनने का प्रयास हमेशा करते रहना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य को मनुष्य होने का अधिकार प्राप्त होता है। पराधीन देश सामान्य व्यक्ति सदैव पशु तुल्य होते हैं। जिनका अपना कोई विचार या व्यक्तित्व नहीं हो सकता है। कवि हरिवंश राय बच्चन की कविता - राम सहायक उनके होते, जो होते हैं, आप सहायक, हम सबको स्वयं पर भरोसा रखना आत्मबल बढ़ाने तथा आत्मनिर्भर होने की प्रेरणा देती रहती हैं।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:45:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अधिकारों की तुलना में कर्तव्य और जिम्मेदारियां के प्रति हम ज्यादा अनभिग्य</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">महात्मा गांधी ने कहा था कि “अधिकारों का वास्तविक स्रोत कर्तव्य है, यदि हम अपने कर्तव्यों का पालन करें, तो अधिकार अपने आप मिल जाएंगे,” भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में अधिकार और कर्तव्य के बीच संतुलन का प्रश्न केवल संवैधानिक बहस का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का आईना भी है।  इसी प्रकार भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान निर्माण के समय यह स्पष्ट किया था कि “संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो, यदि उसे चलाने वाले लोग अच्छे नहीं होंगे, तो वह असफल हो जाएगा,” यह कथन आज भी उतना ही प्रासंगिक है</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176919/we-are-more-ignorant-of-duties-and-responsibilities-than-rights"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/dgkdjgbvax1605352666.jpeg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">महात्मा गांधी ने कहा था कि “अधिकारों का वास्तविक स्रोत कर्तव्य है, यदि हम अपने कर्तव्यों का पालन करें, तो अधिकार अपने आप मिल जाएंगे,” भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में अधिकार और कर्तव्य के बीच संतुलन का प्रश्न केवल संवैधानिक बहस का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का आईना भी है।  इसी प्रकार भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान निर्माण के समय यह स्पष्ट किया था कि “संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो, यदि उसे चलाने वाले लोग अच्छे नहीं होंगे, तो वह असफल हो जाएगा,” यह कथन आज भी उतना ही प्रासंगिक है क्योंकि कानून और नियम केवल कागज़ पर नहीं, बल्कि नागरिकों की चेतना और कार्यों में जीवित रहते हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> आज हम जिस दौर में खड़े हैं, वहाँ एक ओर जनसंख्या का विस्तार, स्त्री-पुरुष अनुपात की जटिलता और शिक्षा का असमान वितरण दिखाई देता है, वहीं दूसरी ओर अधिकारों के प्रति तीव्र आग्रह और जिम्मेदारियों के प्रति अपेक्षाकृत शिथिल उदासीनता भी स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होती है। यह विडंबना ही है कि जिस देश ने विश्व को वसुधैव कुटुम्बकम् और कर्तव्य ही धर्म है जैसे विचार दिए, उसी समाज में आज अधिकारों की माँग तो प्रमुखता से अंगीकार और स्वीकार करने की चाहत रखता है, परंतु कर्तव्यों और जिम्मेदारियां के निर्वहन में परिपक्वता का अभाव एवं दुराग्रह दिखाई देता है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भारत की जनसंख्या, जो अब विश्व में शीर्षतम जनसंख्या वाले देशों में शामिल है, यहां केवल संख्या का विषय नहीं बल्कि गुणवत्ता का प्रश्न भी है यह गुणवत्ता शिक्षा, सामाजिक समझ और संवैधानिक चेतना, जागरूकता पर आधारित होती है। जब हम स्त्री-पुरुष अनुपात की बात करते हैं, तो यह केवल आंकड़ों का संतुलन नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और अवसरों की समानता का संकेतक है। किंतु जब तक दोनों ही वर्ग अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को समान रूप से नहीं समझेंगे, तब तक वास्तविक प्रगति अधूरी और दिवा-स्वप्न ही रहेगी। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">शिक्षा इस पूरे विमर्श का केंद्र बिंदु है, क्योंकि शिक्षित समाज ही अधिकार और जिम्मेदारी के बीच संतुलन स्थापित कर सकता है, परंतु भारत में शिक्षा का प्रसार अभी भी समरूप नहीं है।ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच, स्त्री और पुरुष के बीच, तथा विभिन्न आर्थिक वर्गों के बीच एक गहरी और बड़ी खाई मौजूद है। परिणामस्वरूप, एक बड़ा वर्ग अपने अधिकारों के प्रति तो जागरूक हो रहा है, परंतु कर्तव्यों के प्रति उसकी समझ अभी भी सीमित संकुचित है। भारतीय संविधान, जो नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान करता है, </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उसी के साथ मौलिक कर्तव्यों की भी स्पष्ट व्याख्या करता है, किंतु व्यवहारिक जीवन में अधिकारों की चर्चा अधिक होती है और कर्तव्यों की उपेक्षा। महात्मा गांधी ने कहा था कि “अधिकारों का वास्तविक स्रोत कर्तव्य है, यदि हम अपने कर्तव्यों का पालन करें, तो अधिकार अपने आप मिल जाएंगे,” परंतु आधुनिक समाज में यह विचार धीरे-धीरे पृष्ठभूमि में चला गया है। इसी प्रकार डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान निर्माण के समय यह स्पष्ट किया था कि “संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो, यदि उसे चलाने वाले लोग अच्छे नहीं होंगे, तो वह असफल हो जाएगा,” यह कथन आज भी उतना ही प्रासंगिक है क्योंकि कानून और नियम केवल कागज़ पर नहीं, बल्कि नागरिकों की चेतना में जीवित रहते हैं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भारत में कानूनों की कमी नहीं है सड़क सुरक्षा से लेकर महिला संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण से लेकर शिक्षा के अधिकार तक हर क्षेत्र में स्पष्ट नियम बनाए गए हैं, लेकिन उनका पालन तभी संभव है जब नागरिक स्वयं जिम्मेदारी का परिचय दें। उदाहरण के लिए, सड़क पर यातायात नियमों का उल्लंघन केवल एक व्यक्ति की गलती नहीं, बल्कि सामाजिक अनुशासन की कमी का संकेत है।इसी प्रकार, महिला सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून तब तक प्रभावी नहीं हो सकते जब तक समाज में लैंगिक संवेदनशीलता और सम्मान की भावना विकसित न हो। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">स्त्री-पुरुष समानता के संदर्भ में भी यह स्पष्ट है कि अधिकारों की माँग के साथ-साथ कर्तव्यों का निर्वहन भी उतना ही आवश्यक है।जहाँ महिलाएँ अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही हैं, वहीं समाज के सभी वर्गों को उनके प्रति सम्मान और सहयोग का कर्तव्य निभाना होगा। शिक्षा का स्तर बढ़ने के बावजूद यदि नैतिक शिक्षा और नागरिकता के मूल्यों का समावेश नहीं होगा, तो केवल डिग्रीधारी नागरिक तैयार होंगे, जागरूक और जिम्मेदार कर्तव्य निस्ट नागरिक नहीं। आज सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने अधिकारों की आवाज़ को मजबूत किया है,</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> लेकिन कई बार यह जागरूकता एकतरफा हो जाती है, जहाँ केवल अधिकारों की बात होती है और जिम्मेदारियों की चर्चा गौण हो जाती है। यही असंतुलन समाज में तनाव और गहरे हरेअसंतोष को जन्म देता है। आवश्यकता इस बात की है कि शिक्षा प्रणाली में प्रारंभ से ही नागरिक कर्तव्यों पर बल दिया जाए, परिवार और समाज में जिम्मेदारी की भावना को विकसित किया जाए, और शासन स्तर पर भी जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को यह समझाया जाए कि अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जब तक आम नागरिक स्वयं कानूनों का सम्मान नहीं करेंगे, तब तक कोई भी व्यवस्था पूरी तरह सफल नहीं हो सकती। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में नागरिक ही सर्वोच्च शक्ति हैं, और उनकी परिपक्वता ही राष्ट्र की दिशा और दशा तय करती है। इसलिए यह सही समय आत्ममंथन का है क्या हम केवल अपने अधिकारों के लिए सजग हैं, या अपने कर्तव्यों के प्रति भी उतने ही प्रतिबद्ध हैं?</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> यदि इस प्रश्न का उत्तर पूर्ण ईमानदारी और सजगता  से खोजा जाए, तो स्पष्ट होगा कि हमें अभी लंबा सफर तय करना है। जागरूकता, शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी के समन्वय से ही वह दिन आएगा जब भारत केवल अधिकारों के प्रति नहीं, बल्कि कर्तव्यों के प्रति भी समान रूप से परिपक्व राष्ट्र के रूप में स्थापित होगा जिससे विकास की गति को सदैव सशक्त बल मिलेगा और विकास की संभावना चारों दिशाओं में व्याप्त होगी ।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 18:47:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>धीरेन्द्र शास्त्री की ‘सनातन यात्रा’: धार्मिक-सांस्कृतिक आंदोलन या पुनर्जागरण का सामाजिक संदेश </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत का इतिहास साक्षी है कि यह भूमि सदैव यात्राओं की रही है। यहां यात्राएँ केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि आत्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जागरण का माध्यम रही हैं। राम का वनगमन धर्म और मर्यादा के पालन की जीवंत प्रतिमा था; महात्मा बुद्ध की पदयात्राओं ने करुणा और संयम का बीज बोया; आदि शंकराचार्य का भारत भ्रमण अद्वैत दर्शन और राष्ट्रीय एकात्मता का सूत्रधार बना; और महात्मा गांधी का दांडी मार्च औपनिवेशिक अन्याय के विरुद्ध जनचेतना का उद्घोष। इतिहास में दर्ज ये यात्रा-परंपरा समय-समय पर भारतीय समाज को नई दिशा देती आई है।इसी परंपरा की समकालीन कड़ी के रूप में बागेश्वर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/159850/dhirendra-shastris-sanatan-yatra-is-a-religious-cultural-movement-or-social"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/download2.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत का इतिहास साक्षी है कि यह भूमि सदैव यात्राओं की रही है। यहां यात्राएँ केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि आत्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जागरण का माध्यम रही हैं। राम का वनगमन धर्म और मर्यादा के पालन की जीवंत प्रतिमा था; महात्मा बुद्ध की पदयात्राओं ने करुणा और संयम का बीज बोया; आदि शंकराचार्य का भारत भ्रमण अद्वैत दर्शन और राष्ट्रीय एकात्मता का सूत्रधार बना; और महात्मा गांधी का दांडी मार्च औपनिवेशिक अन्याय के विरुद्ध जनचेतना का उद्घोष। इतिहास में दर्ज ये यात्रा-परंपरा समय-समय पर भारतीय समाज को नई दिशा देती आई है।इसी परंपरा की समकालीन कड़ी के रूप में बागेश्वर धाम सरकार के प्रमुख पूज्य पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री द्वारा आरंभ की गई ‘सनातन हिन्दू एकता पदयात्रा’ वर्तमान भारत की सांस्कृतिक चेतना का नया अध्याय बनती दिखाई दे रही है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दिल्ली के प्राचीन आद्य कात्यायनी शक्तिपीठ से प्रारंभ होकर वृंदावन के श्री बाँके बिहारी मंदिर तक पहुँचने वाली यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण सिद्ध हो रही है।इस यात्रा का उद्देश्य स्पष्ट है-सनातनी समाज को जागृत और संगठित करना, भक्ति भाव जगाना और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करना। बाबा बागेश्वर धाम के शब्दों में, “हम सब उसी सनातन संस्कृति के अंग हैं, जिसके केंद्र में करुणा, सत्य और सेवा है। भेद केवल पंथ का है, धर्म का नहीं।” इस यात्रा का स्वर इस वाक्य में निहित है-धर्म को जोड़ने और जाग्रत करने का माध्यम बनाना।यह यात्रा प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं, संतों, युवाओं और परिवारों की सहभागिता से आगे बढ़ रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस यात्रा में भगवा पताकाओं की छटा, भजन-कीर्तन की गूंज और वैदिक मंत्रों की लयबद्ध स्वरधारा श्रद्धा और अनुशासन का अद्भुत संयोजन प्रस्तुत कर रही है। मार्ग में स्थानीय समाजसेवक, स्वयंसेवी संगठन और ग्राम समितियाँ श्रद्धालुओं के लिए भोजन, चिकित्सा और आवास की व्यवस्था में स्वेच्छा से सहयोग कर रहे हैं। यह सहयोग इस यात्रा को सामाजिक सद्भाव और परस्पर सेवा का जीवंत प्रतीक बना रहा है, जहाँ जाति, वर्ग और क्षेत्रीय सीमाएँ अप्रासंगिक हो गई हैं। यह “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भारतीय अवधारणा का जीवंत रूप है।यह यात्रा हमें स्मरण कराती है कि धर्म केवल अनुष्ठान या आचार नहीं, बल्कि समाज के भीतर सेवा, सद्भाव और सह-अस्तित्व की भावना है। दिल्ली से वृंदावन तक का मार्ग आधुनिकता और अध्यात्म, प्रौद्योगिकी और परंपरा, प्रगति और संस्कृति के समन्वय को दर्शाता है। वास्तव में यही सनातन संस्कृति की आत्मा है- नवीनता में निहित प्राचीनता।कुछ आलोचक इस यात्रा को प्रचार का माध्यम बता सकते हैं, किंतु वस्तुतः इसका प्रभाव इससे कहीं व्यापक है। यह यात्रा यह संदेश देती है कि जब धर्म जोड़ने का कार्य करता है, तभी वह लोकधर्म बनता है। जब वह सेवा और समरसता का साधन बनता है, तभी वह समाज के उत्थान की शक्ति बनता है। श्री धीरेन्द्र शास्त्री की पहल इस तथ्य को पुनः प्रतिपादित करती है कि सनातन धर्म किसी एक वर्ग या समूह का नहीं, बल्कि सबका धर्म है-जो स्वीकृति, करुणा और सहअस्तित्व पर आधारित है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निष्कर्षतः ‘सनातन यात्रा’ केवल आस्था का आयोजन नहीं, बल्कि समाज के अंतर्मन में सोई हुई आत्मचेतना को जगाने का एक संगठित प्रयास है। यह यात्रा हमें स्मरण कराती है कि सनातन धर्म एक जीवन-दर्शन है-“सर्वे भवन्तु सुखिनः” की साकार व्याख्या। इस यात्रा में धर्म जोड़ने की शक्ति , संस्कृति जीवन का उत्सव, और समाज सामूहिक चेतना के मार्ग पर अग्रसर होता दिख रहा है। यह यात्रा इस बात का सशक्त प्रमाण है कि भारत की आत्मा अब भी अपनी जड़ों और अपने मूल्यबोध की ओर लौटने के लिए तत्पर है-एकता और आध्यात्मिकता के मार्ग पर। मैं तो श्री धीरेन्द्र शास्त्री को इस हिन्दू जागरण यात्रा के लिए नमन करता हूं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Nov 2025 16:01:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मनरेगा सप्ताह का हुआ शुभारंभ, बीपीओ ने दी विस्तृत जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:- </strong>पाकुड़िया प्रखंड कार्यालय के सभा कक्ष में 4 फरवरी को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) सप्ताह का विधिवत उद्घाटन किया गया। प्रखंड प्रमुख कालीदास मरांडी, बीपीओ जगदीश पंडित और उप प्रमुख अर्चना देवी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।</div>
<div>  </div>
<div>कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रखंड प्रमुख की अनुमति से प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी जगदीश पंडित ने मनरेगा सप्ताह के उद्देश्यों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस सप्ताह के दौरान बागवानी सहित कई अन्य कार्य योजनाएं चलाई जाएंगी। ग्राम सभाओं का आयोजन कर ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148183/bpo-launched-mnrega-week"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/news-2.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:- </strong>पाकुड़िया प्रखंड कार्यालय के सभा कक्ष में 4 फरवरी को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) सप्ताह का विधिवत उद्घाटन किया गया। प्रखंड प्रमुख कालीदास मरांडी, बीपीओ जगदीश पंडित और उप प्रमुख अर्चना देवी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।</div>
<div> </div>
<div>कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रखंड प्रमुख की अनुमति से प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी जगदीश पंडित ने मनरेगा सप्ताह के उद्देश्यों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस सप्ताह के दौरान बागवानी सहित कई अन्य कार्य योजनाएं चलाई जाएंगी। ग्राम सभाओं का आयोजन कर ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।</div>
<div> </div>
<div>इसके अलावा, रोजगार दिवस का आयोजन, लंबित जॉब कार्ड का निर्गमन, श्रमिकों से काम के आवेदन प्राप्त करना और आधार कार्ड सत्यापन जैसी गतिविधियां भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगी।</div>
<div> </div>
<div>इस अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रतिनिधि, जेएसएलपीएस प्रतिनिधि, विभिन्न पंचायतों के मुखिया, पंचायत प्रतिनिधि, पंचायत सचिव, प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी त्रिदीप शील, सहायक अभियंता रोहित कुमार समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Feb 2025 18:20:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> ध्वजारोहण कर याद किये गये राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व शास्त्री जी </title>
                                    <description><![CDATA[<div>  <strong>गोलाबाजार गोरखपुर। </strong>गोला क्षेत्र में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती बड़े ही धुम धूमधाम से मनाया गया। सभी सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थाओं पर ध्वजारोहण किया गया और महापुरूषों के चित्र पर श्रद्धासुमन पुष्पांजली अर्पित करने के साथ साथ स्वच्छता अभियान चलाया गया। प्राप्त बिबरण के अनुसार  गोला तहसील मुख्यालय पर उपजिलाधिकारी राजू कुमार वर्मा ब्लाक कार्यालय पर खण्ड विकास अधिकारी दिवाकर सिंह कोतवाली गोला पर मधुपनाथ मिश्रा नगर पंचायत कार्यालय पर अध्यक्ष लालती देवी सी एच सीगोलापर अधीक्षक डॉ अमरेन्द्र नाथ ठाकुर  केआर मिमोरियल पब्लिक स्कूल पर प्रबन्धक बागेश्वरी राय एलपीएम पब्लिक स्कूल</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145259/%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-10/,1.jpg" alt=""></a><br /><div> <strong>गोलाबाजार गोरखपुर। </strong>गोला क्षेत्र में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती बड़े ही धुम धूमधाम से मनाया गया। सभी सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थाओं पर ध्वजारोहण किया गया और महापुरूषों के चित्र पर श्रद्धासुमन पुष्पांजली अर्पित करने के साथ साथ स्वच्छता अभियान चलाया गया। प्राप्त बिबरण के अनुसार  गोला तहसील मुख्यालय पर उपजिलाधिकारी राजू कुमार वर्मा ब्लाक कार्यालय पर खण्ड विकास अधिकारी दिवाकर सिंह कोतवाली गोला पर मधुपनाथ मिश्रा नगर पंचायत कार्यालय पर अध्यक्ष लालती देवी सी एच सीगोलापर अधीक्षक डॉ अमरेन्द्र नाथ ठाकुर  केआर मिमोरियल पब्लिक स्कूल पर प्रबन्धक बागेश्वरी राय एलपीएम पब्लिक स्कूल पर प्रबन्धक व निदेशक अमरनाथ वर्मा पी एच इंटरनॅशनल स्कूल कुशल देईया पर प्रबंधक मनोज कुमार उमर प्राथमिक विद्यालय मिश्रपुरा पर प्रधानाध्यापक दुर्गेश कुमार दुबे बथवाल संस्कृत महाविद्यालय  प्राचार्य परमानंद दूबे विजय आईटीआई पर विजयशंकर पाण्डेय प्राथमिक विद्यालय सेमरी पर प्रधान सदन तिवारी आदि अन्य लोगो  ने दोनों महापुरुषों के चित्र पर फूल माला चढ़ाकर झंडारोहण कर गांव  व नगर में लोगो द्वारा स्वच्छता अभियान के तहत साफ सफाई किया  गया।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Oct 2024 16:48:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कुशीनगर: जनपद में हर्षोल्लास पूर्वक मनाई गई महात्मा गांधी जी व शास्त्री जी की जयंती </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>ब्यूरो रिपोर्ट प्रमोद रौनियार </strong></div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कुशीनगर(स्वतंत्र प्रभात)। </strong>जनपद के रिजर्व पुलिस लाइन में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी व लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती के शुभ अवसर पर पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार मिश्रा द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी व लाल बहादुर शास्त्री जी के चित्र पर पुष्प माल्यार्पण कर पुलिस कर्मियो को सत्यनिष्ठा के साथ राष्ट्र की एकता व अखंडता की शपथ दिलाई गयी तथा उनके आदर्शो पर चलने के बारे में बताया गया।</div>
<div><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-10/img-20241002-wa0014.jpg" alt="IMG-20241002-WA0014" width="1200" height="747" /></div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी व लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती के अपर पुलिस अधीक्षक रितेश कुमार सिंह द्वारा पुलिस कर्मियो को सत्यनिष्ठा के साथ राष्ट्र की</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145246/the-birth-anniversary-of-gandhiji-and-lal-bahadur-shastri-was"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-10/img-20241002-wa0024.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>ब्यूरो रिपोर्ट प्रमोद रौनियार </strong></div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कुशीनगर(स्वतंत्र प्रभात)। </strong>जनपद के रिजर्व पुलिस लाइन में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी व लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती के शुभ अवसर पर पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार मिश्रा द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी व लाल बहादुर शास्त्री जी के चित्र पर पुष्प माल्यार्पण कर पुलिस कर्मियो को सत्यनिष्ठा के साथ राष्ट्र की एकता व अखंडता की शपथ दिलाई गयी तथा उनके आदर्शो पर चलने के बारे में बताया गया।</div>
<div><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-10/img-20241002-wa0014.jpg" alt="IMG-20241002-WA0014" width="1600" height="747"></img></div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी व लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती के अपर पुलिस अधीक्षक रितेश कुमार सिंह द्वारा पुलिस कर्मियो को सत्यनिष्ठा के साथ राष्ट्र की एकता व अखंडता की शपथ दिलाई गयी तथा उनके आदर्शो पर चलने के बारे में बताया गया। साथ ही क्षेत्राधिकारी तमकुहीराज जितेन्द्र सिंह कालरा, क्षेत्राधिकारी कसया कुंदन सिंह, क्षेत्राधिकारी खड्डा उमेशचन्द भट्ट द्वारा सीओ कार्यालय पर तथा जनपद कुशीनगर के समस्त थानों पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादूर शास्त्री जी की जयंती हर्षोउल्लास के साथ मनायी गयी।</div>
</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Oct 2024 09:49:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महात्मा गांधी की जयंती को गरिमापूर्ण ढंग से मनाये जाने हेतु अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>प्रयागरज। </strong>अपर जिलाधिकारी नगर मदन कुमार की अध्यक्षता में  गुरूवार को महात्मा गांधी की 155वीं जयंती-02 अक्टूबर, राष्ट्रीय पर्व को गरिमापूर्ण ढंग से मनाये जाने एवं इस अवसर पर आयोजित होने वाले विविध कार्यक्रमों की तैयारियों के सम्बंध में बैठक आयोजित की गयी। बैठक में अपर जिलाधिकारी ने  राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पावन स्मृति व योगदान को याद करने एवं उनके कृतित्व व व्यक्तित्व से प्रेरणा लेने हेतु विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन के सम्बंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए है। उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों से नगर क्षेत्र में मूर्तियों की साफ-सफाई, नगर की साफ-सफाई हेतु स्वच्छता अभियान एवं मलिन बस्ती</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145141/meeting-under-the-chairmanship-of-additional-district-magistrate-to-celebrate"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-09/img-20240926-wa0133.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>प्रयागरज। </strong>अपर जिलाधिकारी नगर मदन कुमार की अध्यक्षता में  गुरूवार को महात्मा गांधी की 155वीं जयंती-02 अक्टूबर, राष्ट्रीय पर्व को गरिमापूर्ण ढंग से मनाये जाने एवं इस अवसर पर आयोजित होने वाले विविध कार्यक्रमों की तैयारियों के सम्बंध में बैठक आयोजित की गयी। बैठक में अपर जिलाधिकारी ने  राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पावन स्मृति व योगदान को याद करने एवं उनके कृतित्व व व्यक्तित्व से प्रेरणा लेने हेतु विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन के सम्बंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए है। उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों से नगर क्षेत्र में मूर्तियों की साफ-सफाई, नगर की साफ-सफाई हेतु स्वच्छता अभियान एवं मलिन बस्ती के आस-पास व नदियों के किनारे विशेष साफ-सफाई कराये जाने के लिए कहा है। उन्होंने जिला पंचायतीराज अधिकारी को ग्राम पंचायतों में विशेष साफ-सफाई कराये जाने के लिए निर्देशित किया है।</div>
<div> </div>
<div>अपर जिलाधिकारी नगर ने सभी कार्यालयों में साफ-सफाई का कार्य 02 अक्टूबर के पूर्व ठीक ढंग से कराने   जिला विद्यालय निरीक्षक व बेसिक शिक्षा अधिकारी से विद्यालयों में महात्मा गांधी जी के विचार दर्शन एवं जीवन परिचय पर आधारित निबंध कला, भाषण प्रतियोगिता, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं चित्रकला का आयोजन कराये जाने के लिए कहा है। इस अवसर पर सभी सरकारी/अर्द्धसरकारी कार्यालयों एवं संस्थानों में राष्ट्रध्वज फहराया जायेगा तथा राष्ट्रगान गाया जायेगा। इसके साथ ही कार्यालयों में उनके चित्र पर माल्यार्पण एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया जायेगा। </div>
<div> </div>
<div>इस  अवसर पर क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी द्वारा चन्द्रशेखर आजाद पार्क गेट नं0-3 से क्रास कंट्री रेस का आयोजन, स्वास्थ्य विभाग द्वारा मलिन बस्तियों में हेल्थ कैम्प,  जिला अपराध निरोधक समिति द्वारा यातायात जागरूकता अभियान व सम्मान समारोह, पंजाबी सभा प्रयागराज द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण एवं रक्तदान शिविर, प्रयागराज व्यापार मण्डल द्वारा खुल्दाबाद बालगृह में फल वितरण एवं अन्य सामाजिक संगठनों के द्वारा विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा।</div>
<div> </div>
<div>बैठक मेंअपर जिलाधिकारी आपूर्ति  राजेश सिंह, अपर नगर मजिस्टेªट प्रथम संदीप कुमार, अपर नगर मजिस्टेªट द्वितीय प्रेम नारायण प्रजापति, अपर नगर मजिस्टेªट तृतीय  सुदामा, उपजिलाधिकारी बारा जयजीत कौर, उपजिलाधिकारी सौरभ कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक पी0एन0 सिंह, सिविल डिफंेस, व्यापार मण्डल, जिला अपराध निरोधक के प्रतिनिधिगणों सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/145141/meeting-under-the-chairmanship-of-additional-district-magistrate-to-celebrate</link>
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                <pubDate>Fri, 27 Sep 2024 17:07:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अपने जीवनकाल में ही प्रसिद्धी के चरम पर थे महात्मा गांधी </title>
                                    <description><![CDATA[<div>एक समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह कह विवाद खड़ा कर दिया कि रिचर्ड एटनबरो की फिल्म से पहले महात्मा गांधी को दुनिया नहीं जानती थी। उन्होने अपनी इंटरव्यू में कहा महात्मा गांधी दुनिया की एक महान आत्मा थे। इन 75 साल में क्या महात्मा गांधी के बारे में दुनिया को बताना हमारी जिम्मेदारी नहीं थी? कोई भी उनके बारे में नहीं जानता था। मुझे माफ करें, लेकिन दुनिया में पहली बार उनके बारे में जिज्ञासा तब पैदा हुई, जब फिल्म गांधी बनी, हमने ऐसा नहीं किया। उन्होंने आगे कहा कि अगर दुनिया मार्टिन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141809/mahatma-gandhi-was-at-the-peak-of-fame-during-his"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/fsadf.jpg" alt=""></a><br /><div>एक समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह कह विवाद खड़ा कर दिया कि रिचर्ड एटनबरो की फिल्म से पहले महात्मा गांधी को दुनिया नहीं जानती थी। उन्होने अपनी इंटरव्यू में कहा महात्मा गांधी दुनिया की एक महान आत्मा थे। इन 75 साल में क्या महात्मा गांधी के बारे में दुनिया को बताना हमारी जिम्मेदारी नहीं थी? कोई भी उनके बारे में नहीं जानता था। मुझे माफ करें, लेकिन दुनिया में पहली बार उनके बारे में जिज्ञासा तब पैदा हुई, जब फिल्म गांधी बनी, हमने ऐसा नहीं किया। उन्होंने आगे कहा कि अगर दुनिया मार्टिन लूथर किंग और नेल्सन मंडेला जैसे अन्य नेताओं के बारे में जानती है, तो गांधी उनसे कम नहीं थे।</div>
<div> </div>
<div>गांधी के विचारों से सहमत होना या ना होना एक अलग विषय है परन्तु यह कह देना गांधी को कोई जानता ही नही था। यह बात तर्कसंगत नही है। मोदी ने महात्मा गांधी को उस तरह से प्रचारित न करने के लिए पिछली कांग्रेस नीत सरकारों की आलोचना की जिसके वे हकदार थे। बता दें कि रिचर्ड एटनबरो ने 1982 में फिल्म गांधी बनाई थी। अब सवाल यह उठता है कि क्या दुनिया 1982 से पहले गांधी को जानती नहीं थी?</div>
<div>महात्मा गांधी दुनिया में शांति और अहिंसा के प्रतीक के रूप में देखे जाते हैं। वे भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व करने वाले सबसे प्रमुख व्यक्तियों में से एक रहे। प्रधानमंत्री ने अपनी इंटरव्यू में जिन दो अन्य दुनिया के प्रसिद्ध एवंम प्रभावशाली नेताओं मार्टिन लूथर किंग और नेल्सन मंडेला का नाम लिया वे दोनो स्वयं भी खुद को गांधी के विचारों से अत्यधिक प्रभावित मानते थे।</div>
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<div>गांधी ने दुनिया भर में नागरिक अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए होते आंदोलनों को प्रेरित किया। मार्टिन लूथर किंग का कहना था कि ईसा मसीह ने हमें लक्ष्य दिया और महात्मा गांधी ने रणनीति। मार्टिन लूथर किंग ने 1959 में भारत का दौरा किया और गांधी के परिवार और दोस्तों से मिले। रंगभेद के खिलाफ 67 वर्षों तक आंदोलन करने वाले और 27 वर्षों तक कारागार में उम्रकैद की सजा भुगतने वाले नेल्सन मंडेला का गांधी के बारे में कहना था कि उनकी सफलता का श्रेय महात्मा गांधी को जाता है। उन्होंने कहा था कि भारत महात्मा गांधी के जन्म का देश है और दक्षिण अफ्रीका उनका गोद लिया हुआ देश है। श्रीलंका को 1948 में अंग्रेजों से आजादी मिली थी, जिसकी प्रेरणा भी गांधी के विचारों से ली गई थी।</div>
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<div>श्रीलंकाई स्वतंत्रता सेनानी चार्ल्स एडगर कोरिया के निमंत्रण पर महात्मा गांधी ने 1927 में श्रीलंका जिसे पहले सीलोन के नाम से जाना जाता था का दौरा भी किया था। महात्मा गांधी ने श्रीलंका में कई भाषण दिए और वहां एक स्थायी प्रभाव छोड़ा था। महात्मा गांधी की अहिंसा नीति ने बौद्ध पुनरुत्थानवादी अनागारिका धर्मपाल सहित कई उल्लेखनीय नेताओं को आंदोलन के लिए प्रभावित किया। घाना को आजादी दिलाने वाले  क्वामे न्क्रुमा (जो घाना के पहले अफ्रीकी मूल के प्रधानमंत्री बने) गांधी के जीवन और उनकी शिक्षाओं से काफी प्रभावित थे। घाना के स्वतंत्रता आंदोलन के दो बड़े चेहरे न्क्रूमा और जेबी दानक्वा ने गांधी से प्रेरित होने की बात को स्वीकार भी किया है।</div>
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<div>1945 में न्क्रुमा ने मैनचेस्टर में पांचवीं पैन-अफ्रीकी कांग्रेस का आयोजन किया। इस सम्मेलन के दौरान गांधी के अहिंसक आदर्शों को सबके सामने लाया गया और विदेशी शासकों को एक निहत्थे लोगों की इच्छाओं का सम्मान करने के एकमात्र प्रभावी साधन के रूप में समर्थन दिया गया। साल 1920 के आस-पास जब महात्मा गांधी का प्रभाव भारत के कोने-कोने में फैल रहा था। चीन के लोग भी प्रेरणा के लिए उनकी ओर देख रहे थे। उन दिनों भारत में अंग्रेजी हुकूमत थी। चीन में ब्रिटेन, अमरीका, फ्रांस जैसी ताकतों का जोर था। महात्मा गांधी कभी चीन नहीं गए लेकिन चीन और महात्मा गांधी विषय पर काम करने वाले साउथ चाइना नॉर्मल यूनिवर्सिटी प्रोफ़ेसर शांग छुआनयू के मुताबिक चीन में महात्मा गांधी पर करीब 800 किताबें लिखी गई हैं। चीन में गांधी की मूर्ति राजधानी बीजिंग के छाओयांग पार्क में है।</div>
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<div>विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर जारी आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में गांधी की 8 मूर्तियां हैं जबकि जर्मनी में उनकी 11 प्रतिमाएं स्थापित हैं। स्पेन के बुर्गस शहर में महात्मा गांधी की प्रतिमा लगाई गई है, जहां वह इसे अपने प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में प्रचारित करता है। ब्रिटेन के लिसेस्टर में महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित है, वहीं अमेरिका के वॉशिंगटन के बेलेवुए में गांधी की आदमकद प्रतिमा स्थापित है। दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी की 3 प्रतिमाएं स्थापित हैं। श्रीलंका के जफना क्षेत्र में गांधी की प्रतिमा स्थापित है। कनाडा में ओंटारियो सहित विभिन्न शहरों में गांधी की 3 प्रतिमाएं स्थापित हैं। जबकि इटली, अर्जेंटीना, ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया में महात्मा गांधी की 2-2 प्रतिमाएं स्थापित हैं। इसके अतिरिक्त रूस के मॉस्को और स्विट्जरलैंड के जिनेवा में गांधी आज भी सत्य, अहिंसा के प्रतीक बने हुए हैं।</div>
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<div>इनके अलावा ईराक, इंडोनेशिया, फ्रांस, मिस्र, फिजी, इथोपिया, घाना, गुयाना, हंगरी, जापान, बेलारूस, बेल्जियम, कोलंबिया, कुवैत, नेपाल, मालावी, न्यूजीलैंड, पोलैंड, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, सर्बिया, मलेशिया, यूएई, युगांडा, पेरू, तुर्कमेनिस्तान, कतर, वियतनाम, सऊदी अरब, स्पेन, सूडान, तंजानिया जैसे देशों में भी गांधी की मूर्तियां स्थापित है। बाहर के लगभग 84 देशों में गांधी की 110 से अधिक मूर्तियां लगी हुई हैं। कई देशों में उनके नाम के मार्ग और स्मारक हैं। यहां तक कि भारत का कट्टर दुश्मन पाकिस्तान भी महात्मा गांधी के प्रभाव से खुद को नही बचा सका वहां भी उनकी दो मूर्तियां स्थापित हैं। उनकी प्रसिद्धी का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि आज इंटरनेट के जमाने में भी जिस टाइम मैग्जीन में विश्व के प्रतिष्ठित व्यक्ति अपना नाम छपवाने के लिए तरसते हैं।</div>
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<div>उस अमेर‍िकी पत्र‍िका टाइम ने 1931 में पांच जनवरी के अंक में महात्‍मा गांधी को कवर पेज पर छापा था। निस्संदेह महात्मा गांधी की प्रसिद्धी अपने जीवनकाल में ही पूरे विश्व में चरम पर पहुंच चुकी थी। उनके प्रभाव और प्रसिद्धी को सिद्ध करने के लिए महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के महात्मा गांधी के बारे में लिखे शब्द ही काफी हैं  कि आने वाली पीढ़ियाँ मुश्किल से ही यह विश्वास कर पाएँगी कि हाड़-मांस से बना ऐसा कोई व्यक्ति भी कभी धरती पर आया था।</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"><strong> (नीरज शर्मा'भरथल)</strong></div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 May 2024 16:26:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>मजबूरी का नाम महात्मा मोदी है</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong><br />आप कहेंगे कि राजनीति में मोदी जी   के बिना कोई बात शुरू या खत्म क्यों नहीं होती ? तो मेरा उठता है कि मोदी जी के बिना अब देश का एक पल नहीं बीतता।  मोदी जी हैं तो राजनीति का मजा है अन्यथा सब कुछ नीरस है। अक्सर भाजपा के मित्र एक जमाने में कहते थे कि राहुल गाँधी से पहले राजीव गांधी थे जिनके बिना राजनीति की बात पूरी नहीं होती थी। यानि हर किरदार का एक महत्व है।  मोदी जी का भी अपना महत्व है।  वे आज की राजनीति में किसी के लिए यदि मजबूती का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139639/the-name-of-compulsion-is-mahatma-modi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/mahatma-modi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong><br />आप कहेंगे कि राजनीति में मोदी जी   के बिना कोई बात शुरू या खत्म क्यों नहीं होती ? तो मेरा उठता है कि मोदी जी के बिना अब देश का एक पल नहीं बीतता।  मोदी जी हैं तो राजनीति का मजा है अन्यथा सब कुछ नीरस है। अक्सर भाजपा के मित्र एक जमाने में कहते थे कि राहुल गाँधी से पहले राजीव गांधी थे जिनके बिना राजनीति की बात पूरी नहीं होती थी। यानि हर किरदार का एक महत्व है।  मोदी जी का भी अपना महत्व है।  वे आज की राजनीति में किसी के लिए यदि मजबूती का नाम हैं तो मेरे लिए वे मजबूरी का   नाम बन गए हैं। महात्मा मोदी जी की मजबूरियों की फेहरिस्त उनकी मजबूतियों से ज्यादा लम्बी है।</p>
<p>महात्मा मोदी जी और उनकी पार्टी ने लोकसभा चुनाव में राष्ट्र जीतने की ठानी है किन्तु उनके लिए इस समय महाराष्ट्र सबसे बड़ी   चुनौती है।  महाराष्ट्र जीतने के लिए मोदी जी ने अपने दोनों कार्यकालों में महाराष्ट्र की शिव सेना,एनसीपी और कांग्रेस को खंड-खंड करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मुंबइया लहजे में कहें तो - ऐसा कोई सगा नहीं ,जिसे भाजपा यानि मोदी जी ने ठगा नहीं ,लेकिन बात नहीं बन रही ।  एकनाथ शिंदे और अजित पंवार के बाद भी महात्मा मोदी को अब महाराष्ट्र में मनसे के राज ठाकरे की चिरोरियाँ कर उन्हें अपनी अक्षोहणी सेना में शामिल करना पड़ रहा  है।</p>
<p><br />महाराष्ट्र में हिंदुत्व की धुरी पर राजनीति करने वाले स्वर्गीय बाला साहब ठाकरे की विरासत के दावेदार रहे राज ठाकरे को शिवसेना ने ठुकराया तो उन्होंने अपनी महाराष्ट्र नव निर्माण सेना बना l।  हमारे यहां सेनाएं बनाने पर कोई रोक नहीं है लेकिन राज ठाकरे को सूबे की जनता ने विधानसभा चुनाव में ही खारिज कर दिया था ।  राज साहब की पार्टी के 101  प्रत्याशियों में से कोई 86  की जमानत  जब्त हो गयी थी। बावजूद इसके राज भाई महाराष्ट्र का एक प्रमुख चेहरा है।  महात्मा मोदी की मजबूरी ने उन्हें और महत्वपूर्ण बना दिया है।</p>
<p> महाराष्ट्र में सियासत की किष्किंधा तैयार हो रही है। महात्मा मोदी जी के हनुमान अमित शाह राज और मोदी जी की मिटाई करने के लिए पावक को साक्षी बनाकर उन्हें भाजपा के साथ खड़ा करने जा रहे हैं।महाराष्ट्र में महात्मा मोदी जी को   अपना किला सुरक्षित  रखने के साथ ही दोबारा जीतने के लिए कहीं की ईंट ही नहीं कहीं के भी रोड़े भी जुटाने पड़ रहे है।  भवन निर्माण में ईंटों के साथ ही खाली जगह भरने के लिए रोड़े यानि अद्धा,पौना सबकी जरूरत पड़ती है। महाराष्ट्र ही क्या बिहार में महात्मा मोदी जी ने बुझते हुए चिराग को भी अपने साथ रख लिया है।</p>
<p> लेकिन इसके लिए उन्हें पारस से हाथ धोना पड़ा। यदि महात्मा मोदी मजबूती का नाम होते तो ये सब आखिर क्यों होता ? पारस की क्या मजाल होती कि वे मोदी जी के मंत्रिमंडल से इस्तीफा देकर भाग निकलते ? मोदी जी ने मध्य प्रदेश में कांग्रेस की नौना लगी ईंटें तक जमा करने में संकोच  नहीं किया ,अन्यथा जिंदगी में एक भी चुनाव न जीतने वाले सुरेश पचौरी को पीले चावल देकर भाजपा में शामिल करने की क्या जरूरत थी  ? मध्यप्रदेश में तो डबल इंजिन की सरकार हाल ही में बनीं है।</p>
<p><br />दरअसल मै महात्मा मोदी जी की दरियादिली और उदारता का कायल हूँ। वे दीन-हीन, दलित,पददलित ,भ्र्ष्ट,ईमानदार कमजोर और बाहुबली किसी में कोई भेद नहीं करते।  सभी को गले लगा लेते है। वे राजनीति के शिव हैं। उन्हें किसी के विष से कोई फर्क नहीं पड़ता। उनका स्पर्श पाकर विष अमृत और लोहा सोना हो जाता है। बहुत कम राजनेताओं के पास ये गुण होता है। गुण क्या आप इसे चुंबकीय आकर्षण कह सकते हैं। मुझे तो कभी-कभी लगता है कि किसी दिन महुआ मोइत्रा ,ममता और माया दीदी भी कहीं भाजपा में शामिल न हो जाएँ !</p>
<p><br />महात्मा मोदी जी को मैंने मजबूरी का नाम ऐसे ही नहीं दिया। मेरे पास अपनी बात के समर्थन के लिए एक नहीं अनेक उदाहरण हैं। मै उन लोगों में से नहीं हों जो महात्मा मोदी को असुर सम्राट कहते है। मै उन्हें महात्मा मानता हूँ ,लेकिन मुझे ये बताने में कोई लज्जा नहीं आती कि जिन मोदी जी को दुनिया मजबूती का पर्याय समझते हैं वे सचमुच इतने कमजोर हैं की उन्हें झारखण्ड  जीतने के लिए झामुमो की सीता की जरूरत पड़ गयी। झारखण्ड में मोदी जी का ऑपरेशन लोट्स पहले ही नाकाम हो चुका है ,लेकिन मोदी जी ने हार नहीं मानी। उन्होंने अब जेल में बंद झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भाभी सीता सोरेन को भाजपा में शामिल कर लिया।</p>
<p> ये बात और है कि झामुमो की सीता भाजपा की अशोक वाटिका में बैठकर खुश दिखाई दे रहीं हैं,क्योंकि उन्हें यहां कोई त्रिजटा सताने नहीं आ रही। महात्मा   मोदी ने  झामुमो की सीता का अपहरण  नहीं किया ,वे खुद बाखुद राजी-ख़ुशी से भाजपा में शामिल हुईं हैं। मजबूरी का नाम महात्मा मोदी होने के एक नहीं अनेक उदाहरण है। मोदी जी को   हरियाणा   जीतने के लिए अच्छे -खासे अपने पुराने हमराही मनोहर खटटर को मुख्यमंत्री पद से हटाना पड़ा। अब हरियाणा भाजपा के असल हीरो अनिल विज साहब मुंह फुलाये घूम रहे हैं। लेकिन उनके लिए न कांग्रेस ने अपना दरवाजा खोला है और न वे खुद भाजपा से बाहर जाने का साहस जुटा पा रहे ,आखिर हैं तो वे भी महात्मा मोदी जी के ही भाई- बंधु।</p>
<p>एकदम मजबूर। महात्मा मोदी जी को अपना मिशन 400  पार पूरा करने के लिए दक्षिण में पीएमके के साथ हाथ मिलाना पड़ा ।  मजबूरी थी,क्योंकि उन्हें दक्षिण में कोई महात्मा मानने को राजी ही नहीं था। ख़ुशी की बात ये है कि महात्मा मोदी अपनी कमजोरी को हंसकर छिपा लेते हैं और अपनी सेंधमारी को ' सबका साथ, सबका विकास ' का चोला पहना देते हैं।<br />मुझे पूरा यकीन है कि जिस पीढ़ी ने महत्मा गाँधी को देखा नहीं,पढ़ा नहीं वो पीढ़ी ' मजबूरी का नाम महात्मा गाँधी ' पर यकीन करे या न करे किन्तु ' मजबूरी का नाम महात्मा मोदी ' के जुमले पर जरूर यकीन कर लेगी,क्योंकि उसने महात्मा मोदी जी को देखा है।</p>
<p>महात्मा गांधी कभी महात्मा के चोले में नजर नहीं आये। लोग उन्हें अधनंगा फकीर कहते थे,लेकिम महात्मा मोदी जी को आप महात्मा के अनेक स्वरूपों में देख चुके है। कभी बद्रीनाथ मंदिर में कभी बाबा विश्वनाथ के प्रांगण में ,कभी तिरुपति में तो कभी यूएई में। मोहनदास करमचंद गाँधी को महात्मा  की उपाधि गुरुदेव रविंद्र नाथ ठाकुर ने दी थी किन्तु मोदी जी को ये उपाधि मेरे जैसा मामूली लेखक दे रहा है ।  अब वे इसे स्वीकार करें या न करें। जय सियाराम</p>
<p><strong>@ राकेश अचल </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Mar 2024 15:58:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुजरात का नाम बदनाम न करो  </title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p><br /><strong>राकेश अचल </strong></p>
<p>महात्मा गांधी की जन्म और कर्म भूमि लगातार सुर्ख़ियों में हैं और ये तमाम सुर्खियां हैं बदनामी की। आज जब देश का नेतृत्व एक महान गुजराती कर रहा हो तब गुजरात को लगातार बदनाम करने की कोशिशें मुझे नागवार लगतीं हैं ।हाल ही में उज्जयनी में नव नृमित महाकाल लोक की मूर्तियों के आंधी में उड़ जाने से एक बार फिर गुजरात की बहुत बदनामी हुई ।</p>
<p>मै जितना प्रेम भारत से करता हूँ,उतना ही स्नेह मुझे गुजरात से है । गुजरात से प्रेम की एक वजह हो तो बताऊँ ।फिर भी यहां महात्मा गांधी का पैदा होना.</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/129782/dont-defame-the-name-of-gujarat"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-05/गुजरात-का-नाम-बदनाम-न-करो.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p><br /><strong>राकेश अचल </strong></p>
<p>महात्मा गांधी की जन्म और कर्म भूमि लगातार सुर्ख़ियों में हैं और ये तमाम सुर्खियां हैं बदनामी की। आज जब देश का नेतृत्व एक महान गुजराती कर रहा हो तब गुजरात को लगातार बदनाम करने की कोशिशें मुझे नागवार लगतीं हैं ।हाल ही में उज्जयनी में नव नृमित महाकाल लोक की मूर्तियों के आंधी में उड़ जाने से एक बार फिर गुजरात की बहुत बदनामी हुई ।</p>
<p>मै जितना प्रेम भारत से करता हूँ,उतना ही स्नेह मुझे गुजरात से है । गुजरात से प्रेम की एक वजह हो तो बताऊँ ।फिर भी यहां महात्मा गांधी का पैदा होना. सरदार बल्ल्भ भाई पटेल का यहीं से होना ही गुजरात प्रेम की असली वजह है । गुजरात से प्रेम की वजह द्वारिका भी है और सोमनाथ भी ।अमूल के उत्पाद भी हैं और गुजराती व्यंजन भी । गुजरात के उद्यमी भी हैं और गिर के शेर भी ।कच्छ का रण भी । </p>
<p>गुजरात से प्रेम करने के तमाम कारण हैं इसीलिए मुझे सोते-जागते गुजरात की फ़िक्र रहती है । पिछले कुछ वर्षों से गुजरात को लगातार बदनाम करने की कोशिश की जा रही है । कभी दंगों के नाम पर, कभी भ्र्ष्टाचार के नाम पर । कभी भगोड़ों के नाम पर, तो कभी घटिया निर्माण के नाम पर । कोई नहीं है जो गुजरात की तारीफ़ करे ,जबकि गुजरात में तमाम बुराइयों के बावजूद प्रेम करने के लिए सबको साथ लेकर सबका विकास करने वाली सरकार के मुखिया यानि देश के प्रधानमंत्री जी भी हैं ।</p>
<p>गुजरात से प्रधानमंत्री तो मोरार जी देसाई भी बने लेकिन वे गुजराती कम मुंबईकर ज्यादा थे । वे मोदी जी की तरह सबका विकास करने के लिए सबको साथ लेकर नहीं चल पाए और दो-ढाई साल में ही अपनी सरकार गिरा बैठे । मोदी जी ने मोरारजी भाई देसाई से सबक सीखा और न केवल अपनी सरकार को पूरे पांच साल चलाया बल्कि अगले पांच साल के लिए भी मौक़ा दिलवाया । अब वे तीसरी बार गुजरात का झंडा बुलंद करने वाले हैं । लेकिन एक मोदी इतने बड़े गुजरात की नाक जितनी ऊंची करते हैं ,दूसरे मोदी उससे ज्यादा कटवा देते हैं । कभी बैंकों का पैसा लेकर भाग जाते हैं तो कभी कुछ और खेल कर जाते हैं । यानी मोदी के दुश्मन हम और आप नहीं बल्कि दूसरे मोदी हैं । गुजरात को बदनाम करने वाले मोदियों की फेहरिस्त बहुत लंबी है।</p>
<p>मै बात कर रहा था गुजरात की । मोदी जी जबसे देश के प्रधानमंत्री बने हैं तभी से दिल्ली से लेकर जहाँ-जहां भाजपा की सिंगल या डबल इंजन की सरकारें हैं वहां-वहां गुजरातियों का मान रखा जाता है।  नौकरशाही से लेकर ठेकेदारी तक में गुजरातियों को प्राथमिकता दी जाती है । ऐसी ही प्राथमिकता गुजरात के अलावा तमिलनाडु को भी मिली और दूसरे दक्षिणी राज्यों को । क्योंकि वहां मोदी सरकार के मंत्री-संत्री और उप राष्ट्रपति तक हुआ करते थे ।लेकिन देश को शिकायत है कि गुजराती नौकरशाह हों या ठेकेदार सब मिलकर गुजरात का नाम बदनाम कर रहे हैं ।</p>
<p>हमारे मध्यप्रदेश में जब महाकाल लोक बनाने की बात आयी तो राजस्थान के शिल्पियों के बजाय मामा मुख्यमंत्री ने गुजरात के शिल्पियों को प्राथमिकता दी । लेकिन गुजराती भाइयों ने जो मूर्तियां बनाएं वे एक ही आंधी में चित हो गयीं।  नाक कटी मामा की और गुजरात की । दोनों को शायद नहीं पता कि लोक-परलोक बनाना इंसानों का नहीं ऊपर वाले का काम है । इसलिए जब नीचे वाले कोई लोक बनाएं तो कम से कम ईमानदारी से काम करें । लेकिन लोभ-लालच ,मुनाफाखोरी,कमीशनबाजी ने गुजरात के साथ-साथ मध्यप्रदेश की नाक कटा दी । अब इस कटी  नाक को जोड़ने का काम किया जा रहा है ।</p>
<p>गुजराती विदेशों में क्या झक्काट काम करते हैं। मैंने तो अमरीका में उनके द्वारा बनवाये गए तमाम मंदिर देखे हैं ।गर्व होता है उन्हें देखकर । लेकिन अपने देश में पता नहीं गुजरातियों को क्या हो जाता है ? गुजरात का अमूल भी अब अपनी मान-प्रतिष्ठा नहीं बचा पा रहा है । गुजरात में दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा अगर खुद गुजरातियों ने बनाई होती तो उसका भी शायद उज्जैन के महाकाल लोक की प्रतिमानों जैसा हाल होता .। गनीमत है कि सरदार बल्ल्भ भाई की प्रतिमा चीनियों ने बनाई है , गुजरातियों ने नहीं ।</p>
<p>गुजरातियों को लांच्छित करने का मेरा कोई इरादा नहीं । मै हमेशा से गुजरातियों का सम्मान करता हूँ।  अनेक गुजराती मेरे जान से ज्यादा प्यारे मित्र हैं । गुजरात की हर चीज मुझे प्रिय हैं। फिर चाहे  वे नेता हों या खिलाड़ी अजय जडेजा । हमारे शहर की महारानी तक गुजराती हैं ।हम उनका भी दिल से सम्मान करते हैं । वे बड़ोदरा के राजपरिवार से हैं।गुजरात का सम्मान करना इस दौर में राष्ट्रधर्म है । जिसने गुजरात से प्रेम नहीं किया उसने भारत से प्रेम नहीं किया । असली भारतवासी वो ही है जो गुजरात का मुरीद है । गुजराती हर मामले में अव्वल होते हैं । मेहनत में ,ईमानदारी में ,बेईमानी में ,नेतृत्व में ,कलाकारी में ।  गुजराती असल जौहरी हैं । वे जानते हैं कि असली और नकली हीरे में कितना फर्क होता है ।</p>
<p>देश के नए संसद भवन से गुजरात का कितना कनेक्शन है, मुझे नहीं मालूम । लेकिन यदि कुछ है तो हमें नए संसद भवन पर भी नजर रखना चाहिए.।  नया भवन कम से कम 2024  तक तो अपना रंग-रूप न बदले । नए संसद भवन में ईंट-गारे से ज्यादा गुजरात की इच्छाशक्ति शामिल है ।वरना किसी और ने क्यों नहीं बनाया नया संसद भवन ? डॉ मन मोहन सिंह बनवा सकते थे । अटल जी बनवा सकते थे । .चंद्रशेखर को क्यों नहीं सूझा इस बारे में?  इंद्रकुमार गुजराल को किसने रोका था  नया संसद भवन बनवाने से ?  देवगौड़ा जी को भी इस बारे में कभी कोई ख्याल क्यों नहीं आया ? आखिर मोदी जी ने नया संसद भवन बनवाया ।नया इतिहास गढ़ना केवल गुजरातियों के बूते की बात है ।गुजराती किसी भी सीमा तक जाकर काम करते हैं,फील्ड भले ही कोई भी हो ।</p>
<p>आप सोचेंगे की आज बन्दा देश के तमाम ज्वलंत मुद्दे छोड़कर कहाँ आकर गुजरात में अटक गया ! गुजरात है ही ऐसा जहां हर कोई आकर अटक जाता है । कांग्रेस क्या ,आप क्या ,सब यहां आकर अटके हुए हैं । सबकी लालसा एक बार गुजरात जीतने की है । लेकिन कोई भी अब तक कामयाब नहीं हुआ है । पहले की बात छोड़ दीजिये । पहले गुजरात आज के गुजरात से भिन्न था । आज का गुजरात आज का गुजरात है.। गुजरात में एक रात बिताकर तो देखिये । गुजरात की बदनामी के तमाम कारणों पर धूल डालकर गुजरात को देखिये । बड़ा ही खूबसूरत नजर आएगा । आज गुजरात के पास राजधर्म के साथ ही राजदंड भी है । गुजरात में लोकतंत्र है ।गुजरात में न्यायतंत्र है।  गुजरात की ही ताकत थी जो उसने राहुल गांधी से उनकी लोकभा की सदस्यता  छिनवा दी ।</p>
<p>ऐसे गुजरात को नमन कीजिये । उज्जैन की मूर्तियों को भूल जाइये । उज्जैन में एक ही कालजयी मूर्ती महाकाल की है । बाक़ी को तो आज नहीं तो कल धराशायी होना ही है । फिर चाहे वे फाईवर  से बनाई जाएँ या पत्थर से । ध्वस्त हुई मूर्तियों को घटिया बताकर हम गुजरात का अपमान नहीं कर सकते । हम तो तब भी मौन थे जब गुजरात में खुद का बनाया पुल गिरा और सैकड़ों लोग मारे गए । इस सबके लिए गुजराती नहीं बल्कि काल जिम्मेदार है । गुजरात अजर है,गुजरात अमर है ।जय गुजरात,जय भारत ।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 May 2023 12:01:23 +0530</pubDate>
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                <title>गांधी के पीछे भी गांधी का हासिल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p><br />महात्मा गांधी अतुलनीय  हैं और अनुकरणीय भी. आज मै महात्मा गांधी के आयुधों का अनुकरण करने वाले आज के गांधी यानि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा पर एक निरपेक्ष बात  कर  रहा हूँ. इसमें न राग है न द्वेष .एक आकलन भर है. मुमकिन है आपको गलत लगे और ये भी मुमकिन है कि  आप इससे सहमत हों. मेरे लिए दोनों महत्वपूर्ण  हैं.</p>
<p>महात्मा  गांधी की जो तस्वीरें आप देखते हैं,महात्मा गांधी शुरू से वैसे नहीं थे. महात्मागांधी बनने से पहले के मोहनदास करमचंद गांधी तब घुटनों तक धोती नहीं बल्कि बाकायदा पेण्ट-शर्ट और कोट पहनते थे. उन्होंने अपनी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/125161/gandhis-achievement-even-behind-gandhi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2022-10/गांधी-के-पीछे-भी-गांधी-का-हासिल.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p><br />महात्मा गांधी अतुलनीय  हैं और अनुकरणीय भी. आज मै महात्मा गांधी के आयुधों का अनुकरण करने वाले आज के गांधी यानि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा पर एक निरपेक्ष बात  कर  रहा हूँ. इसमें न राग है न द्वेष .एक आकलन भर है. मुमकिन है आपको गलत लगे और ये भी मुमकिन है कि  आप इससे सहमत हों. मेरे लिए दोनों महत्वपूर्ण  हैं.</p>
<p>महात्मा  गांधी की जो तस्वीरें आप देखते हैं,महात्मा गांधी शुरू से वैसे नहीं थे. महात्मागांधी बनने से पहले के मोहनदास करमचंद गांधी तब घुटनों तक धोती नहीं बल्कि बाकायदा पेण्ट-शर्ट और कोट पहनते थे. उन्होंने अपनी पोशाक कब बदली ये जानने के लिए आप हमारे साथी अवधेश पांडे की फेसबुक बाल  पर जा सकते हैं. बहरहाल महात्मा गाँधी ने घुटनों तक धोती और कमर के ऊपर एक चादर ओढ़कर भारतीय राजनीति में एक नया सूत्रपात किया था. वे इसी पोशाक में चर्चिल से मिले और दुनिया के तमाम नेताओं से .यानि उन्होंने सियासत में पोशाक का ट्रेंड बदला,लेकिन उनकी पोशाक का अनुकरण करने वाले बहुत कम लोग निकले.हाँ खादी  को असंख्य भारतीयों ने अपनाया .</p>
<p>महात्मा गांधी जब दक्षिण अफ्रीका  से भारत लौटे तो वे बाल गंगाधर तिलक से मिले और आपने लिए काम माँगा तो तिलक ने उन्हें सबसे पहले देशाटन की सलाह दी .महात्मा ने ये काम शिद्द्त  से किया और आजीवन करते रहे .कभी पदयात्राओं के जरिये ,तो कभी रेल यात्राओं के जरिये .उन्हें मंहगे विमानों की जरूरत शायद कभी नहीं पड़ी .मुझे लगता है कि  जनता से सीधा संवाद या मन की बात कर ही मोहन बाबू महात्मा बने .</p>
<p>आज भारत जोड़ो पदयात्रा पर निकले अधमरी कांग्रेस के हीरो राहुल गांधी भी राजनीति के मायने बदलने की कोशिश कर रहे हैं. उन्हें देशाटन करने की सलाह आज के किस तिलक ने दी ,मुझे नहीं पता ,लेकिन जिसने भी दी उसने ठीक किया .देश की सियासत करने में कामयाबी की शर्त है कि  आप देश को अपनी आँखों से देखते हों .जनता से आपका सीधा सम्पर्क हो .कोई भी आपसे राह चलते गले मिल सकता हो,आपसे लिप्त सकता हो.आपके साथ दौड़ लगा सकता हो .आपके साथ सेल्फी ले सकता हो ,आपको अपने खेत में पैदा हुए खीरे दे सकता हो .</p>
<p>राहुल गांधी ने इस भारत जोड़ो पदयात्रा में अपने लिए जो पोशाक चुनी है वो आज के युग के बहुसंख्यक युवाओं की पोशाक है,. मैंने देश के दूरस्थ आदिवासी अंचल में भी युवाओं को जींस और टीशर्ट पहने देखा है ,यानि वे महात्मा गांधी के पदचिन्हों पर चलकर देश की सियासत में काम करने वालों की बदनाम हो चुकी पोशाक के खिलाफ एक विकल्प प्रस्तुत कर रहे हैं .राहुल के आलोचकों ने शुरू में उनकी टीशर्ट की कीमत को लेकर बावेला   खड़ा किया था ,लेकिन यदि  आप वैसी टी शर्ट पहनना चाहने तो आपको किसी भी बाजार में दो-ढाई सौ रूपये मिल जाएगी .</p>
<p>बहरहाल राहुल का हासिल ये भी है कि  वे उन इलाकों से गुजर रहे हैं हैं जो हाल में ही अनेकानेक कारणों से नफरत की आग में झुलस चुके हैं. वे अपनी पदयात्रा में सबके लिए उपलब्ध हैं,केवल कांग्रेसियों के लिए नहीं .कोई भी उनसे हाथ मिलाये,मन की बात करे ,अपना भय  और आशंकाएं बताये .उनकी पदयात्राओं का हासिल ये भी है कि  उनके लिए किसी सरकार को भीड़ जुटाकर नहीं देना पड़ रही यानि राहुल की ये पदयात्रा ' ईवेंट पॉलटिक्स ' के लिए भी एक बड़ी चुनौती  है .अभी हाल ही में मैंने  अपने क्षेत्र में माननीय प्रधानमंत्री और माननीय गृहमंत्री जी की आमसभाओं के लिए भीड़ जुटाने के लिए सरकारी मशीनरी को हलकान होते देखा है .</p>
<p>राहुल गांधी की भारत जोड़ो पदयात्रा से देश में कोई जाग्रति आएगी या फिर उनकी ख़ाक में मिलती कांग्रेस को नवजीवन मिलेगा इसके बारे में मै कोई भविष्यवाणी नहीं करना चाहता ,ये मेरा काम भी नहीं है. मेरा काम अपनी नजर से घटनाओं को देखकर उनका आकलन करना है .</p>
<p>महात्मा गांधी का अनुशरण करते हुए देशाटन पर निकले राहुल गांधी ने जो तीसरा हासिल किया है कि  वे सत्तापेक्षी मीडिया के सहारे नहीं हैं .जैसे महात्मा  गांधी ने तत्कालीन मीडिया की और देखे बिना खुद पत्रकार बनने का प्रयोग किया था लगभग कुछ-कुछ राहुल ने भी किया है. राहुल के कार्यकर्ताओं की एक बड़ी फ़ौज सोशल मीडिया के जरिये इस भारत  जोड़ो पदयात्रा को इतना प्रचारित कर चुकी है कि  उसे अब देश के गोदी या मोदी मीडिया की आवश्यकता नहीं है .अब ये दोनों प्रकार के मीडिया मजबूरन राहुल गांधी को स्थान दे रहे हैं .</p>
<p>मेरा मानना है कि  कोई सात सर का भी हो जाए तो महात्मा गांधी नहीं हो सकता लेकिन कोशिश  करे तो महात्मा गांधी के आजमाए हुए फार्मूलों का इस्तेमाल कर अपने लक्ष्य तक पहुँच जरूर सकता है .राहुल गांधी ने ये हिम्मत कहिये या हिमाकत कहिये की है ,अन्यथा आज  देश में शायद ही कोई ऐसा नेता हो जो पैदल देश को नापने की गलती करे .सियासत के लिए रथ यात्राएं निकाली जा सकतीं हैं लेकिन पदयात्राएं नहीं की जा सकतीं .पदयात्राएं बेहद कष्टप्रद होती हैं लेकिन उनका प्रतिफल सुस्वाद और मीठा होता है,ये मेरा निजी अनुभव है .</p>
<p>जैसा मैंने पहले ही कहा कि  मै आज महात्मा  गांधी और राहुल गांधी के बीच कोई तुलना नहीं कर रहा ,किन्तु मै देख रहा हूँ की 150  साल बाद भी देश में ऐसे लोग हैं जो महात्मा गांधी के बताये रास्ते पर चलकर सियासत का रंग -रूप बदलने के लिए सड़क पर निकलने का माद्दा रखते हैं .देश के दूसरे दलों में भी राहुल की तरह ऊर्जावान युवाओं की कमी नहीं है किन्तु कोई भी इस तरह के प्रयोग करने की स्थिति में नहीं है. या तो दूसरे दलों के युवाओं की इसकी महत्ता का अनुमान नहीं है या वे इसकी जरूरत महसूस नहीं करते ,करते तो देश को जानने के लिए कम से कम एक बार तो देशाटन कर जनता की नब्ज टटोलने की जुर्रत जरूर करते ,किन्तु आज की पीढ़ी  तो सीधे छलांग लगाने में यकीन रखती है .</p>
<p>भारत जोड़ो पदयात्रा से सत्ता केंद्र में हलचल है लेकिन उसे कोई बाहर नहीं आने दे रहा. घबड़ाहट को छिपाने के लिए एक चेहरे पर कई चेहरे लगाए जा रहे हैं ,लेकिन घबड़ाहट आखिर कब तक छिप सकती है ? देश की सियासत में कोई तब्दीली आये  या न आये ये देश की जनता को तय करना है.हम और आप जैसे लोग ये तय नहीं कर सकते ,लेकिन हम और आप ये कह सकते हैं कि देश में राजनीति करवट लेती दिखाई दे रही है. देश में आज महात्मा गाँधी कि वशंजों की आंधी भले न हो किन्तु उनके अनुयायी गांधी की आंधी अवश्य उठती नजर आ रही है .ये वेगवती होगी या नहीं ,कहना आवश्यक नहीं है.<br />@ राकेश अचल </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Oct 2022 12:19:23 +0530</pubDate>
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