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                <title>holi - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>ओबरा थर्मल पावर परियोजना मुख्य महाप्रबंधक के आवास पर आयोजित हुआ भव्य होली मिलन समारोह</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><em>ब्यूरो रिपोर्ट</em></strong></p>
<p><strong><em>ओबरा/सोनभद्र-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">  रंगों और आपसी सौहार्द के महापर्व होली के पावन अवसर पर ओबरा थर्मल पावर परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक (CGM) आर.के. अग्रवाल के आवास पर एक भव्य होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस उत्सव में प्रशासनिक गरिमा के साथ-साथ अपनत्व और भाईचारे की अनूठी झलक देखने को मिली।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/img-20260304-wa0081.jpg" alt="IMG-20260304-WA0081" width="1200" height="580" /></p>
<p style="text-align:justify;">समारोह के दौरान मुख्य महाप्रबंधक आर.के. अग्रवाल ने उपस्थित सभी आगंतुकों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर पर्व की बधाई दी। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि होली का यह पर्व केवल रंगों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172437/grand-holi-celebration-organized-at-the-residence-of-chief-general"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img_20260304_223227.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>ब्यूरो रिपोर्ट</em></strong></p>
<p><strong><em>ओबरा/सोनभद्र-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;"> रंगों और आपसी सौहार्द के महापर्व होली के पावन अवसर पर ओबरा थर्मल पावर परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक (CGM) आर.के. अग्रवाल के आवास पर एक भव्य होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस उत्सव में प्रशासनिक गरिमा के साथ-साथ अपनत्व और भाईचारे की अनूठी झलक देखने को मिली।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/img-20260304-wa0081.jpg" alt="IMG-20260304-WA0081" width="1296" height="580"></img></p>
<p style="text-align:justify;">समारोह के दौरान मुख्य महाप्रबंधक आर.के. अग्रवाल ने उपस्थित सभी आगंतुकों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर पर्व की बधाई दी। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि होली का यह पर्व केवल रंगों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज में एकता, शांति और भाईचारे की भावना को और अधिक मजबूत करने का एक सशक्त माध्यम है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/img_20260304_223139.jpg" alt="IMG_20260304_223139" width="715" height="858"></img></p>
<p style="text-align:justify;">इस मिलन समारोह में ओबरा थर्मल पावर परियोजना के मीडिया प्रभारी अजीत सिंह एवं संतोष साहनी ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। साथ ही शिक्षा और पत्रकारिता जगत के प्रमुख चेहरे, क्रिस केयर विद्यालय के महाप्रबंधक व वरिष्ठ पत्रकार अमरदीप सिंह भी इस उत्सव का हिस्सा बने। उपस्थित अतिथियों ने परियोजना की प्रगति और क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ त्यौहारों के सामाजिक महत्व पर भी विस्तृत चर्चा की।</p>
<p style="text-align:justify;">समारोह में उपस्थित सभी प्रबुद्ध जनों ने एक स्वर में प्रार्थना की कि प्रभु की कृपा से होली के इन पावन रंगों की तरह ही हर व्यक्ति का जीवन खुशियों, उल्लास और समृद्धि से सराबोर रहे। अंत में मुख्य महाप्रबंधक और गणमान्य व्यक्तियों ने पूरे ओबरा क्षेत्र और समस्त देशवासियों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। मिष्ठान वितरण और मंगलकामनाओं के आदान-प्रदान के साथ इस गौरवमयी कार्यक्रम का हर्षोल्लास के साथ समापन हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Mar 2026 22:39:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[राजेश तिवारी]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नशे में लड़खड़ाती नई पीढ़ी।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>देश में इस बार होली के अवसर पर कई गुना लगातार हो रही ड्रग्स की सप्लाई ने देशभर में अपराधों का इजाफा कर दिया है| इस बार होली में लगा कि पूरा युवा वर्ग नशे में लड़खड़ा कर डोल रहा है। होली के अवसर पर युवा बुजुर्ग यहां तक छोटे-छोटे जवान होते बच्चे भी नशे का शिकार हो चुके हैं और होली में शराब गांजा भांग ड्रग्स जैसे खतरनाक नशीले पदार्थों को लेने का जन्म सिद्ध अधिकार समझ उसका भयानक तरीके से सेवन करने लगे हैंl नशीले पदार्थों की इस बार खपत पिछली बार की तुलना में लगभग दुगनी हो</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149901/new-generation-staggering-drunk"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(10)2.jpg" alt=""></a><br /><div>देश में इस बार होली के अवसर पर कई गुना लगातार हो रही ड्रग्स की सप्लाई ने देशभर में अपराधों का इजाफा कर दिया है| इस बार होली में लगा कि पूरा युवा वर्ग नशे में लड़खड़ा कर डोल रहा है। होली के अवसर पर युवा बुजुर्ग यहां तक छोटे-छोटे जवान होते बच्चे भी नशे का शिकार हो चुके हैं और होली में शराब गांजा भांग ड्रग्स जैसे खतरनाक नशीले पदार्थों को लेने का जन्म सिद्ध अधिकार समझ उसका भयानक तरीके से सेवन करने लगे हैंl नशीले पदार्थों की इस बार खपत पिछली बार की तुलना में लगभग दुगनी हो गई है। नशीले पदार्थों से हुई अपराधिक गतिविधियों में हुई तेजी शासन, प्रशासन तथा पुलिस के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया है|</div>
<div> </div>
<div>नशीले पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय, अंतर राज्यीय तस्करी देश तथा विश्व के लिए एक बड़ा सिरदर्द बनी हुई है| यह चुनौती इसलिए भी है कि पिछले वर्ष में अपराधियों ने सूखे नशे का सेवन कर अपराध की वारदातें की हैं, नशे की लत में आकर अपराधियों में महानगरों मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई में लगातार बलात्कार, लूट, डकैती,और राहगीरों की हत्या को जन्म दिया है| दूसरी तरफ सूखे नशे की लत में स्कूल और कॉलेज के युवा तथा बच्चे अपना भविष्य खराब करने पर आमादा है|</div>
<div> </div>
<div>पिछले कुछ माह में मुंबई नारकोटिक्स इकाई ने ताबड़तोड़ छापेमारी कर बड़ी मात्रा में चरस, कोकीन, गांजा, स्मैक की बड़ी तादाद में जप्त कर कई नामचीन अभिनेता, अभिनेत्रियों को गिरफ्तार कर प्रकरण न्यायालय के हवाले किया है| दूसरी तरफ दिल्ली,बेंगलुरु, कोलकाता में भी पुलिस प्रशासन द्वारा सीधे कड़ी कार्रवाई की हैं|वर्तमान में शराब तो सामाजिक बुराई बना ही हुआ है| साथ-साथ सूखा नशा भी समाज के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है, सुखे नशे के मामले में केंद्र के सर्वोच्च नेतृत्व में यानी प्रधानमंत्री ने भी गंभीरता पूर्वक इसे रोकने के लिए चिंता जताई है देश में न सिर्फ ड्रग्स के नशे का इस्तेमाल किया जा रहा है बल्कि बड़े पैमाने पर इसकी तस्करी कर अवैध कारोबार भी किया जा रहा है ड्रग्स का नशा सामाजिक विडंबना बना हुआ है|</div>
<div> </div>
<div>तब देश में नए वर्ष के आगमन के पूर्व बड़े-बड़े आलीशान होटलों मैं सूखे नशे की पार्टियां आयोजित करने की तैयारी कर ली है, ऐसे में पुलिस के केंद्र सरकार के तथा राज्य सरकार के आला अधिकारी इसे रोकने के लिए हर संभव प्रयास की रणनीति बनाने में जुट गए है और शासन तथा पुलिस प्रशासन अपना पूरा ध्यान सूखे नसे को प्रतिबंधित करने में लगे हुए हैं, मूलतः मुंबई गोवा और पाकिस्तानी सरहद से लगे क्षेत्र और राज्य से सूखे नशे पदार्थों की आवक सभी राज्यों में होती है| निसंदेह इसे गंभीर षड्यंत्र के रूप में लिया जाना चाहिए| मुंबई सूखे नशे का एक बड़ा केंद्र बन चुका है, सुशांत सिंह राजपूत के आत्महत्या प्रकरण को लेकर जब पुलिस के आला अधिकारी को नशीले पदार्थों रेकेट हाथ लगा तब राज्य तथा केंद्र के कान खड़े हो गए और तब से पूरे देश में ताबड़तोड़ नशे के विरोध में कार्रवाई की जाने लगी|</div>
<div> </div>
<div>और इसी तारतम्य में देश को यह बात समझ में आई कि सूखे नशे की लत में बड़े शहरों के तमाम पूंजीपति नशे के आदी हो चुके परिस्थितियां बहुत गंभीर एवं चुनौतीपूर्ण है, नए वर्ष के आगमन की सेलिब्रेशन तमाम नशीले पदार्थ की सप्लाई करने वाले तस्कर अपनी तैयारी में जुट गए हैं| देश के सभी राज्यों में नशीले पदार्थों के विरोध में केंद्र के निर्देशन पर लगातार कार्रवाई की जा रही है और युवा वर्ग बच्चों को सोशल मीडिया के द्वारा भी इसकी बुराई के संबंध में लगातार अवगत कराया जा रहा है एवं इस बुराई से दूर रहने का आह्वान किया गया है, देश के बड़े-बड़े रिसोर्ट, जंगल के पिकनिक स्पॉट, देश की मुख्य सड़कों के आसपास ढाबों के संचालकों पर भी नजर रखने की योजना को मूर्त रूप दिया जाना है| </div>
<div> </div>
<div>ताकि अपराधों में कमी आ सके ,शराब से तो अपराध होते ही हैं पर सूखे नशे से अपराधिक ज्यादा उम्र हिंसक और मस्तिष्क शुन्य हो जाते ऐसे में अपराध करने में उन्हें कोई हिचक नहीं होती, और इस तरह वे नशे में अपराधिक कृत्य करने से नहीं चूकते |केंद्र तथा राज्य प्रशासन की चिंता इस बात के लिए तो है ही कि इससे अपराध की संख्या में काफी वृद्धि हुई है पर साथ में इसके तस्करों द्वारा की जा रही ड्रग्स की तस्करी पर एक गंभीर चुनौती बनी हुई है|अंतरराष्ट्रीय सीमा से आने वाला ड्रग्स शारीरिक रूप से भी काफी नुकसानदेह होता है अंतरराष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने का एक राष्ट्रीय स्तर पर योजना बनाकर उसे रोकने का प्रयास किया जा रहा है, जितने व्यक्ति नशा करके अपराध करने के लिए दोषी हैं |</div>
<div> </div>
<div>उससे ज्यादा दोषी नशीले पदार्थों के तस्करी करने वाले भी है, तस्कर समूह को चिन्हित कर उस पर बड़ी कार्रवाई करने की देश को गंभीर आवश्यकता है, देश में शराब जहां ग्रामीण क्षेत्रों में एक बड़ी बुराई है उससे ग्रामीण आमजन को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ शारीरिक नुकसान भी बहुत बड़ा होता है, इसी के साथ शहरी क्षेत्रों में खासकर बड़े शहरों में सुखा नशा एक बडी सामाजिक बीमारी की तरह अत्यंत गंभीर चुनौती बन गई है, इसे रोकने के हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए तभी इस सामाजिक गंभीर समस्या पर कुछ राहत और निदान मिल सकता है|</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Mar 2025 16:18:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बदरंग सियासत और जुमा की नमाज बनाम होली का रंग </title>
                                    <description><![CDATA[<div>जुमा साल में 52 बार आता है, लेकिन होली सिर्फ एक बार. मुसलमान रंग-गुलाल को बुरा मानते हैं, तो उन्हें घर में ही रहना चाहिए. अगर बाहर निकलें, तो रंग सहन करें. यही वह बयान है जिसको लेकर यूपी ही नहीं देश भर में धमाल मचा हुआ है। न सिर्फ सियासतदान इस बयान को लेकर दो खेमों में बंट गए हैं संभव के सीओ अनुज चौधरी के बयान को उत्तर प्रदेश के चीफ मिनिस्टर योगी आदित्यनाथ के दोहराने के बाद होली और रमजान को लेकर जबरदस्त बयानबाजी शुरू हुई है।</div>
<div>  </div>
<div>इस बयानबाजी ने सामुदायिक चेतना को आहत करने में कोई</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149870/badrang-politics-and-zumas-prayer-vs-holi-color%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/rajneeti.jpg" alt=""></a><br /><div>जुमा साल में 52 बार आता है, लेकिन होली सिर्फ एक बार. मुसलमान रंग-गुलाल को बुरा मानते हैं, तो उन्हें घर में ही रहना चाहिए. अगर बाहर निकलें, तो रंग सहन करें. यही वह बयान है जिसको लेकर यूपी ही नहीं देश भर में धमाल मचा हुआ है। न सिर्फ सियासतदान इस बयान को लेकर दो खेमों में बंट गए हैं संभव के सीओ अनुज चौधरी के बयान को उत्तर प्रदेश के चीफ मिनिस्टर योगी आदित्यनाथ के दोहराने के बाद होली और रमजान को लेकर जबरदस्त बयानबाजी शुरू हुई है।</div>
<div> </div>
<div>इस बयानबाजी ने सामुदायिक चेतना को आहत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है होली का रंग और रमजान के जुमे की नमाज एक साथ सम्पन्न कराना चुनौती है। इसे देखते हुए उत्तर प्रदेश में प्रशासन अलर्ट पर है।कम से कम 13 जिलों में मुस्लिम समाज ने जुमे की नमाज का वक्त बदला है। सैकड़ों मस्जिदों को रंग से बचाने के लिए तिरपाल से ढका गया है।प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी ही और स्थिति पर नजर रखने के लिए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरे तैनात किए गए हैं। </div>
<div> </div>
<div>इसी बीच इस मामले पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी अपनी प्रतिक्रिया दे दी है।चार बार यूपी की मुख्यमंत्री रह चुके मायावती ने आड़े हाथों लेते हुए कहा कि संभल की तरह अधिकारियों का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। बल्कि इन्हें कानून व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना चाहिए।</div>
<div> </div>
<div>मायावती ने कहा कि इसकी आड़ में किसी भी मुद्दे को लेकर कोई भी राजनीति करना ठीक नहीं है। सभी धर्मों के अनुयायियों के मान-सम्मान का बराबर ध्यान रखना बहुत जरूरी है। मायावती ने पोस्ट के जरिये कहा कि जैसा कि मालूम है कि इस समय रमज़ान चल रहे हैं और इसी बीच जल्दी होली का भी त्योहार आ रहा है। जिसे मद्देनजर रखते हुये उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में सभी राज्य सरकारों को इसे आपसी भाईचारे में तब्दील करना चाहिए तो यह सभी के हित में होगा।</div>
<div> </div>
<div>उधर इस मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, कांग्रेस नेता उदित राज आदि ने जिस तरह अनुज चौधरी के खिलाफ बयान देना शुरू किया जाहिर है कि उसकी प्रतिक्रिया तो होनी ही थी. उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार और महाराष्ट्र तक बयान वीर बिलों से बाहर आ गए जिस तरह की जहरीली बयानबाजी हो रही है उससे सबसे ज्यादा नुकसान उन मुस्लिम धर्मगुरुओं का हुआ है जिन लोगों ने शांति का रास्ता दिखाया।</div>
<div> </div>
<div>विपक्ष  इसे भारत की धार्मिक स्वतंत्रता और मुसलमानों के खिलाफ इस तरह बता रहे हैं कि जो शांतिपूर्ण लोग हैं वो भी रेडिकल हो जा रहे हैं. जब हमारे देश के कुछ नेता इस बयान पर राजनीति करके इसे मुसलमानों के खिलाफ बताने में जुटे हैं, ठीक उसी समय कई मुस्लिम धर्मगुरुओं ने कहा है कि वो अनुज चौधरी के बयान में कुछ भी गलत नहीं मानते और वो होली के दिन जुमे की नमाज़ का समय बदलने के लिए तैयार हैं। </div>
<div> </div>
<div> इस मुद्दे को लेकर तमाम सियासतदान हाथ सेंकने के लिए बयानबाजी करने लगे। यूपी के एक विधायक ने यहां तक कह दिया कि होली के रंग से अगर दिक्कत है मुस्लिम समुदाय को तो उनके लिए अस्पतालों में अलग वॉर्ड भी बनवाना चाहिए. आखिर जिसका धर्म रंग नहीं बर्दाश्त कर पा रहा है वो हिंदुओं के साथ किस तरह अस्पतालों में इलाज करवाएंगे. इसी तरह के बयान उत्तर प्रदेश के एक मंत्री रघुराज सिंह का भी आया कि जिन लोगों को होली के रंगों से दिक्कत है वो लोग बुरके की तरह का एक तिरपाल बनवा कर ओढ़ लें।</div>
<div> </div>
<div>बिहार के एक विधायक ने कहा मुस्लिम लोग उस दिन घर से बाहर ही न निकलें. बीजेपी विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल का कहना है कि अगर बाहर निकलना जरूरी हो, तो उन्हें 'कलेजा बड़ा' रखना होगा, क्योंकि होली के दौरान कोई रंग लग सकता है जिसे उन्हें सहन करना चाहिए. उन्होंने आगे कहा, 'जुमा साल में 52 बार आता है, लेकिन होली सिर्फ एक बार. मुसलमान रंग-गुलाल को बुरा मानते हैं, तो उन्हें घर में ही रहना चाहिए.</div>
<div>अगर बाहर निकलें, तो रंग सहन करें।</div>
<div> </div>
<div>इस सारे प्रकरण की शुरुआत तब हुयी जब शांति समिति की बैठक में सम्भल पुलिस के सर्किल ऑफिसर अनुज चौधरी ने केवल यही कहा था कि जुमे की नमाज़ साल में 52 बार पढ़ी जाती है और होली का त्योहार साल में एक बार मनाया जाता है. इसलिए जिन मुसलमानों को होली के रंगों से दिक्कत है, वो अपने घरों से उस दिन बाहर ना निकलें और अपने घरों पर रहकर ही जुमे की नमाज़ करें. कितनी सीधी बात थी. इस बात को तिल का ताड़ बना दिया गया. सीधी सी बात थी कि होली हर महीने और हर हफ्ते नहीं आती है।</div>
<div> </div>
<div>ऐसे मौके पर मुस्लिम समुदाय को खुद आगे आकर ये पहल करनी चाहिए थी. तमाम मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने इस संबंध में सौहार्द बढ़ाने वाला बयान दिया भी. कई क्लैरिक्स ने तो जुमे की नमाज का टाइम भी बदलने की पहल की. लेकिन इस मुद्दे पर फिरकापरस्त नजरिया रखने वाले सियासतदानों को मौके की तलाश पूरी हो गयी और उन्होंने बयान के पक्ष विपक्ष में हो हल्ला मचा कर रंगों के त्योहार को बदरंग करना शुरू कर दिया।</div>
<div>आपको बता दें कि लखनऊ में ईदगाह मस्जिद के इमाम और इस्लामिक सेंटर आफ इंडिया के सदर ने ऐलान है कि 14 मार्च को जुमे की नमाज़ दोपहर 12 बजकर 45 मिनट पर नहीं बल्कि दो बजे पढ़ी जाएगी।</div>
<div> </div>
<div>इसी संस्था ने देश की दूसरी मस्जिदों से भी ये अपील की है कि वो हिन्दुओं के साथ अपने भाईचारे को कायम रखते हुए जुमे की नमाज़ के समय को आगे बढ़ा सकते हैं और ऐसा करने से नमाज़ का महत्व कम नहीं होगा. ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने भी देश के सभी इमामों से जुमे की नमाज़ को देर से पढ़ाने की अपील की है. और मुसलमानों से ये भी कहा गया है कि वो होली के दिन दूर की मस्जिदों में नमाज़ पढ़ने के लिए ना जाएं और स्थानीय मस्जिदों में ही जुमे की नमाज़ को अता करें और इसे ही असली धर्मनिरपेक्षता और भाईचारा कहते हैं।</div>
<div> </div>
<div>उत्तर प्रदेश के संभल में होली के जुलूस मार्ग पर पड़ने वाली 10 मस्जिदों को तिरपाल से ढका गया है। इसमें शाही जामा मस्जिद भी शामिल है।अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक  श्रीशचंद्र ने कहा कि दोनों समुदायों के बीच समझौता होने के बाद होली जुलूस के पारंपरिक मार्ग से लगे धार्मिक स्थल ढके रहेंगे।ज्ञात हो कि संभल की जामा मस्जिद में मंदिर होने को लेकर विवाद चल रहा है।</div>
<div> </div>
<div>शाहजहांपुर में 67 मस्जिदों पर तिरपाल लगाई गई है और जुलूस मार्ग पर पड़ने वाली मस्जिदों में जुमे की नमाज का समय बदला गया है। जुलूस वाले मार्ग तैनाती के लिए दूसरी जगहों से 1,000 अतिरिक्त जवानों को बुलाया गया है।इसके अलावा जौनपुर, मिर्जापुर, ललितपुर, औरैया, लखनऊ, मुरादाबाद, उन्नाव, बरेली, अयोध्या समेत कई जगहों पर जुमे की नमाज का वक्त आगे बढ़ाया गया है, ताकि जुलूस खत्म होने के बाद नमाज अदा की जा सके।</div>
<div> </div>
<div>पुलिस टीमें संवेदनशील इलाकों में लगातार फ्लैग मार्च कर रही हैं। बाजारों, धार्मिक स्थलों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में गश्त की जा रही है और भीड़ को काबू करने के लिए बैरिकेड्स लगाए गए हैं। किसी भी भड़काऊ सामग्री या फर्जी खबरों पर नजर रखने के लिए सोशल मीडिया की भी निगरानी की जा रही है। पुलिस टीमें सार्वजनिक स्थानों और वाहनों के अंदर शराब पीने को रोकने के लिए औचक निरीक्षण कर रही हैं।</div>
<div> </div>
<div>बहरहाल इस सारे प्रकरण के मूल में वह प्रतिकार भी कहीं न कहीं उभार ले रहा है जो एक आजादी से पहले साढ़े आठ सौ साल के विधर्मी राज के दौरान बहुसंख्यकों की भावना को लगातार आहत करने की स्वाभाविक प्रतिक्रिया है आजादी के बाद बनी मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति वाली सरकार के राज मे एक समुदाय को कानून की अवमानना कर मनमानी करने का भरपूर अवसर दिया गया जिसके चलते एक समुदाय के लोगों द्वारा खुद को कानून से ऊपर मानकर व्यवहार किया जाता रहा।</div>
<div> </div>
<div>अब दक्षिण पंथी राष्ट्रवादी विचारों की सरकारों के सत्ता में आने के बाद बहुसंख्यक समाज अपने समान लोक अधिकार आस्था और श्रद्धा के मुद्दे पर एक जुट होकर खड़ा हो रहा है यह शोषणकारी और तुष्टिकरण वाली राजनीति के लिए सहन करना कठिन है और यही एक वजह है कि कुछ सियासतदान रंगो में भीगने की नसीहत देने के स्थान पर रंगों से परहेज करने और साझी संस्कृति को बदरंग करने की जुगत कर रहे हैं लेकिन आम आदमी इस सियासत को जान चुका है और किसी उकसावे मे आने वाला नही है अतः रंग भी खेलेंगे और शांति पूर्वक जुमा की नमाज भी होगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Mar 2025 15:41:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत के विभिन्न राज्यों में होली की अनोखी परंपराएं</title>
                                    <description><![CDATA[<div>भारतीय संस्कृति में होली एक खास उत्सव है, जो सिर्फ रंगों का ही आकर्षण नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक एवं धार्मिक त्योहार भी है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, होली हिंदू नववर्ष की शुरुआत का दिन है। प्राचीन समय से ही भारत में कृषि की प्रधानता रही है, और ऋतु परिवर्तन एवं फसलों की बुआई-कटाई की मान्यताएं हिंदू त्योहारों से जुड़ी हुई हैं। फसल पकने की खुशी में होली मनाने की और रंग खेलने की परंपरा है। जलती हुई अग्नि में नई फसल का कुछ भाग अर्पित करते हैं। दरअसल, जब भी कोई फसल आती है तो उसका कुछ भाग भगवान</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149867/unique-traditions-of-holi-in-different-states-of-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(6)3.jpg" alt=""></a><br /><div>भारतीय संस्कृति में होली एक खास उत्सव है, जो सिर्फ रंगों का ही आकर्षण नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक एवं धार्मिक त्योहार भी है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, होली हिंदू नववर्ष की शुरुआत का दिन है। प्राचीन समय से ही भारत में कृषि की प्रधानता रही है, और ऋतु परिवर्तन एवं फसलों की बुआई-कटाई की मान्यताएं हिंदू त्योहारों से जुड़ी हुई हैं। फसल पकने की खुशी में होली मनाने की और रंग खेलने की परंपरा है। जलती हुई अग्नि में नई फसल का कुछ भाग अर्पित करते हैं। दरअसल, जब भी कोई फसल आती है तो उसका कुछ भाग भगवान को, प्रकृति को भोग के रूप में चढ़ाया जाता है। पूरे भारतवर्ष में होली धूमधाम से मनाई जाती है और इस त्योहार को लेकर देश के अलग-अलग राज्यों में लोककथाएं एवं परंपराएं प्रचलित हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong>बिहार की होली</strong></div>
<div>बिहार में होली का सतरंगी मिजाज देखने को मिलता है। मिथिला, भोजपुरी भाषी एवं मगध प्रदेश में होली के अलग-अलग अंदाज हैं। मिथिला क्षेत्र में सहरसा के बनगांव की घुमौर होली ब्रज की तरह ही प्रसिद्ध है। यहां हजारों की संख्या में लोग जुटकर घुमौर होली खेलते हैं। समस्तीपुर में एक विशेष प्रकार की छाता होली खेली जाती है, जिसमें बांस के बड़े-बड़े छाते बनाए जाते हैं। मगध क्षेत्र के पटना सहित नवादा, गया, औरंगाबाद, अरवल और जहानाबाद आदि जगहों पर बुढ़वा होली मनाई जाती है, जो होली के अगले दिन मनाई जाती है। भोजपुर क्षेत्र—आरा, जमुई आदि में धुरखेल होली का चलन है। यहां लोग पहले होलिका दहन की राख से होली खेलते हैं, फिर कादो-माटी की होली, फिर रंगों की होली और अंत में अबीर की होली खेलते हैं। बिहार में होली के पारंपरिक फाग लोकगीत गाए जाते हैं और होलिका दहन के दिन होलिका की अग्नि में कुलदेवी या देवता को बारा चढ़ाने का रिवाज है।</div>
<div> </div>
<div><strong>उत्तर प्रदेश की होली</strong></div>
<div>उत्तर प्रदेश की होली की बात ही निराली है। यहाँ होली की कई छटाएँ देखने को मिलती हैं, जो विदेशों तक प्रसिद्ध हैं। काशी की होली की परंपरा बेहद खास है। यहाँ होली से पहले रंग एकादशी के दिन माता पार्वती की विदाई की परंपरा है। विदाई के लिए आए शिवजी के साथ रंग-गुलाल खेलकर होली का शुभारंभ किया जाता है। मथुरा-वृंदावन की होली कृष्ण और राधा के प्रेम का प्रतीक है। यहां होली की खुमारी 16 दिनों तक छाई रहती है। राधा के गांव बरसाने में लट्ठमार होली मनाई जाती है, जो विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ महिलाएँ पुरुषों को लाठियों से मारती हैं और पुरुष उनसे बचते हुए उन पर रंग डालते हैं। प्रयागराज में होली के दिन जुलूस निकालने की परंपरा है।</div>
<div> </div>
<div><strong>मध्य प्रदेश की होली</strong></div>
<div>मध्य प्रदेश की भगोरिया होली झाबुआ और अलीराजपुर में मनाई जाती है। इसमें आदिवासी मेले का आयोजन रंगों और गुलाल के साथ किया जाता है। यह जीवन और प्रेम का उत्सव होता है। इंदौर की रंगपंचमी विश्व प्रसिद्ध है, जहाँ गेर (एक तरह का जुलूस) निकालने का रिवाज है, जिसमें लाखों लोग शामिल होते हैं और पूरी धरती रंगों से सराबोर हो जाती है। ग्वालियर में सिंधिया राजपरिवार की होली खेली जाती है। निमाड़ अंचल में बड़ी संख्या में गोंड आदिवासी लोग रहते हैं, जो पारंपरिक तरीके से होली मनाते हैं और मेघनाद की पूजा करते हैं। रायसेन जिले में अंगारे वाली होली मनाई जाती है, जिसमें नंगे पाँव अंगारों पर चलने की परंपरा है।</div>
<div> </div>
<div><strong>राजस्थान की होली</strong></div>
<div>राजस्थान में बरसाने और मथुरा-वृंदावन की तरह लट्ठमार और फूलों की होली का प्रचलन है। जोधपुर, जयपुर और उदयपुर में शाही होली खेली जाती है। अजमेर में माली होली और गैर होली मनाई जाती हैं। गैर होली में कम से कम 12 गाँवों के पुरुष अजमेर में इकट्ठा होते हैं और ढोल-नगाड़ों के साथ फाग गाते हैं, जिसका आनंद पूरा शहर लेता है। डोलची होली एक विशिष्ट परंपरा है, जिसमें पुरुष ऊँट की खाल से बने डोलची नामक बर्तन से दूसरे पुरुष पर रंग फेंकते हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong>गुजरात की होली</strong></div>
<div>गुजरात में होली का त्योहार धुलेटी के नाम से जाना जाता है। यहाँ मथुरा की तरह 40 दिनों तक होली खेलने की परंपरा है। होली के अगले दिन हांड़ी प्रतियोगिता होती है, जिसमें लोग ऊँचाई पर टंगी हांड़ी तोड़ने का प्रयत्न करते हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong>उत्तराखंड की होली</strong></div>
<div>देवों की नगरी उत्तराखंड की होली ब्रज की तरह ही प्रसिद्ध है। यहाँ कुमाऊँ क्षेत्र में दो तरह की होली मनाई जाती है—बैठकी होली और खड़ी होली। बैठकी होली का आयोजन बैठकर किया जाता है, जबकि खड़ी होली में सामूहिक नृत्य के साथ चौराहों और चौबारों में इसे गाया जाता है। इनके अलावा देश के दक्षिण और अन्य राज्यों में भी होली धूमधाम से मनाई जाती है। होली की तरह ही रंगों का यह त्योहार दुनिया के कई अन्य देशों में भी मनाया जाता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Mar 2025 15:23:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होली, ईद उल फितर को लेकर डीसीपी ने दिये दिशा निर्देश </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>कानपुर। </strong>आज पुलिस उपायुक्त पूर्वी श्रवण कुमार सिंह द्वारा पुलिस उपायुक्त पूर्वी कार्यालय पर एक महत्वपूर्ण गोष्ठी का आयोजन किया जिसमें आगामी त्यौहारों के दौरान शांति और सुरक्षा व्यवस्था व सद्भाव बनाए रखने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिए। होली, अलविदा जुमा, ईद-उल-फितर के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को सतर्कता बरतने के निर्देश। सभी थाना प्रभारियों को अपने क्षेत्र के होलिका दहन स्थलों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों, धर्मगुरुओं के साथ बैठकें आयोजित कर शांति और सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया गया। </div>
<div>  </div>
<div>⁠प्रीवेंटिव एक्शन पर जोर: किसी भी अप्रिय घटना को रोकने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149469/dcp-gave-guidelines-regarding-holi-eid-ul-fitr%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/img-20250305-wa0059.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>कानपुर। </strong>आज पुलिस उपायुक्त पूर्वी श्रवण कुमार सिंह द्वारा पुलिस उपायुक्त पूर्वी कार्यालय पर एक महत्वपूर्ण गोष्ठी का आयोजन किया जिसमें आगामी त्यौहारों के दौरान शांति और सुरक्षा व्यवस्था व सद्भाव बनाए रखने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिए। होली, अलविदा जुमा, ईद-उल-फितर के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को सतर्कता बरतने के निर्देश। सभी थाना प्रभारियों को अपने क्षेत्र के होलिका दहन स्थलों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों, धर्मगुरुओं के साथ बैठकें आयोजित कर शांति और सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया गया। </div>
<div> </div>
<div>⁠प्रीवेंटिव एक्शन पर जोर: किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए असामाजिक तत्वों पर कड़ी निगरानी रखने और पहले से ही आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। ⁠अपराधियों की पहचान और सक्रिय अपराधियों, हिस्ट्रीशीटरों और असामाजिक तत्वों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश। संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा: संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की उपस्थिति बढ़ाने, गश्त तेज करने के निर्देश दिए। ⁠त्योहारों के दौरान यातायात व्यवस्था सुचारू बनाए रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। ⁠मीटिंग में अपर पुलिस उपायुक्त पूर्वी, सहायक पुलिस आयुक्त व सभी थाना प्रभारी उपस्थित रहे ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Mar 2025 13:36:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होली पर मचाया हुडदंग तो नहीं होगी बेल !</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>हरदोई हरियावां। </strong>होली के त्यौहार को शांति पूर्वक निपटने के लिए शासन प्रशासन ने कमर कस ली है। जिसको लेकर हरदोई पुलिस हर तरीके से निपटने की योजना बना ली है होली के त्यौहार को शांति पूर्वक निपटने के लिए हरियावां पुलिस ने अपने थाना क्षेत्र के होलिका दहन स्थलों का मुआयना कर सख्त निर्देश दे रही है जहां त्यौहार को शांतिपूर्वक निपटने के लिए पुलिस ने क्षेत्र के सम्मानित लोगों के साथ-साथ सभी धर्म के धर्म गुरुओं के साथ बैठक कर सभी जरूरी दिशा निर्देश बैठक में दिए जा चुके हैं।</div>
<div>  </div>
<div>इसके बाद होलिका दहन स्थलों पर कोई विवाद</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149224/there-will-be-no-bell-on-holi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/unnamed-(8).jpg" alt=""></a><br /><div><strong>हरदोई हरियावां। </strong>होली के त्यौहार को शांति पूर्वक निपटने के लिए शासन प्रशासन ने कमर कस ली है। जिसको लेकर हरदोई पुलिस हर तरीके से निपटने की योजना बना ली है होली के त्यौहार को शांति पूर्वक निपटने के लिए हरियावां पुलिस ने अपने थाना क्षेत्र के होलिका दहन स्थलों का मुआयना कर सख्त निर्देश दे रही है जहां त्यौहार को शांतिपूर्वक निपटने के लिए पुलिस ने क्षेत्र के सम्मानित लोगों के साथ-साथ सभी धर्म के धर्म गुरुओं के साथ बैठक कर सभी जरूरी दिशा निर्देश बैठक में दिए जा चुके हैं।</div>
<div> </div>
<div>इसके बाद होलिका दहन स्थलों पर कोई विवाद ना रहे इसको लेकर इसकी कमान थाना अध्यक्ष बालेंद्र कुमार मिश्र ने स्वयं संभाली है रविवार को थाना अध्यक्ष ने क्षेत्र के संवेदन सील से लेकर लगभग एक दर्जन से अधिक होलिका दहन स्थलों का मुआयना कर लोगों को साफ निर्देशित किया की होली को आपसी सद्भाव और सौहार्दपूर्ण तरीके का त्यौहार मानकर मनाएं शराबियों और हुड़दंगियों पर कड़ी नजर रहेगी इसको लेकर स्थानीय पुलिस ने पांच जोनों में क्षेत्र को बांटा है साथ ही सभी अलग-अलग प्रभारी भी बनाए गए हैं  गोपनीय तरीके से खुरापातियों व अराजक तत्वों पर नजर रखने के लिए एक विशेष टीम तैयार की गई है अगर फिर भी होली पर माहौल बिगड़ा तो किसी भी प्रकार बक्सा नहीं जाएगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Mar 2025 12:44:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हूं हूं हुर्र हुर्र...अरे भंग का रंग जमा हो चकाचक फिर लो पान चबाय, आंव ऊं ऊं ऊ ....</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस लाइन में जम कर हुई होली मिलन समारोह ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139868/hoon-hoon-hurrah-hurrah-let-the-color-of-the-bhang"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/img-20240327-wa0025.jpg" alt=""></a><br /><div> <strong><span style="vertical-align:inherit;"><span style="vertical-align:inherit;">ब्यूरो प्रमुख प्रमोद रौनियार </span></span></strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong><span style="vertical-align:inherit;"><span style="vertical-align:inherit;">कुशीनगर।  </span></span></strong><span style="vertical-align:inherit;"><span style="vertical-align:inherit;">आज रविवार को पुलिस लाइन में जिले के जिलाधिकार उमेश मिश्रा और कप्तान धवल जायसवाल के नेतृत्व में प्रशानिक समूह </span></span><span style="vertical-align:inherit;">द्वारा एक दूसरे को रंग गुलाल लगाकर जोरदार होली खेली गई। </span><span style="vertical-align:inherit;">एक सहयोगी का भाव पैदा करते हुए सभी ने एक दूसरे को रंग डालकर और गालों पर अबीर गुलाल लगाकर होली की बधाईयां दिए।</span></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div><span style="vertical-align:inherit;">होली के इस रंग पर्व पर अबीर गुलाल लगाकर ठहाको के साथ जोगीरा गीत की फुहार गाते सुनाते हुए और होली की शुभकामनाएं दीं। </span><span style="vertical-align:inherit;">इस अवसर पर अधिकारी संग कर्मचारीगण एवं उनके परिवार जन होली की मस्ती के साथ </span><span style="text-align:justify;">खूब आनंद उठाते हुए उत्सव मनाया गया। जो बेहद आकर्षित रहा।</span></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><span style="vertical-align:inherit;"><span style="vertical-align:inherit;"></span></span><video style="width:100%;height:auto;" src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-03/vid-20240327-wa0031.mp4" controls=""></video></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Mar 2024 23:15:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>पडरौना : नपाध्यक्ष विनय जायसवाल संग नपाकर्मियों ने उड़ाए रंग गुलाल</title>
                                    <description><![CDATA[होली की पूर्व संध्या पर जलकल परिसर में आयोजित हुआ रंग गुलाल स्नेह मिलन समारोह ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139812/councilors-spread-colors-along-with-padrauna-municipal-president-vinay-jaiswal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/img-20240325-wa0005.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong><span style="vertical-align:inherit;"><span style="vertical-align:inherit;">कुशीनगर।</span></span></strong><span style="vertical-align:inherit;"><span style="vertical-align:inherit;"> रविवार को पडरौना नगर पालिका परिषद के जलकल भवन में होली की पूर्व संध्या पर नगर पालिका परिषद के सभी सदस्यों के साथ रंगोत्सव होली पर्व पर एक दूसरे को अबीर गुलाल लगा रंगपर्व होली की बधाई दी गई। नपा प्रमुख ने कहा कि इस महापर्व होली पर हम सभी को एक रंग में रंगते हुए गले लगाकर रहने का संदेश दिया गया है। मीडिया के माध्यम से सभी हर्षोल्लास के साथ होली पर्व को उत्सव के रूप में सुरक्षित तरीके से मनाया गया, साये की अपील के साथ यह भी जानकारी दी गई कि ऋषि पंचांग और अन्य हिंदी पंचांग के अनुसार इस वर्ष होली चैत्र कृष्ण पक्ष प्रतिपदा उदयातिथि के अनुसार को मनाऊंगा।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>चेयरमैन संग पत्रकारों की टोली खेली होली </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong></strong></p><video style="width:100%;height:auto;" src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-03/km_20240325_720p_50f_20240325_065024.mp4" controls=""><strong></strong></video><strong></strong>
<p style="text-align:justify;"><span style="vertical-align:inherit;"><span style="vertical-align:inherit;">इस मौके पर उनके प्रमुख प्रतिनिधि के रूप में उनके प्रतिनिधि मैनचेस्टर बुलबुल वैल, गोस्वामी शमीम, अनिल वैल, श्याम साहा, विश्वनाथ प्रताप सिंह, छोटे, पीयूष सिंह पीयूष सिंह, संजय चौधरी, रामाश्रय गौतम खरवार, भोली अरुण मित्र, साउदीकांत सिंह, श्यामा साहू, बलवंत सिंह शामिल हैं। कयामुद्दीन निज़ामुद्दीन गोलू उत्तम चौहान संतोष मद्धेशिया सौरभ सिंह मोनू सिंह सहित सैकड़ों लोग शामिल रहे।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Mar 2024 07:00:17 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भाभियों ने देवरों के फाड़े कपड़े, बरसाए कोड़े, 40 दिवसीय ब्रज की होली खत्म, देखें अनदेखी तस्वीरें</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Holi 2023: ब्रज में आज से होली का हुड़दंग थम गया है। 40 दिवसीय होली उत्सव का दाऊ जी के हुरंगे के बाद समापन हो गया है। मान्यता है कि हुरंगे में भाभियां देवरों के कपड़े फाड़ती हैं और उसी कपड़े का कोड़ा बनाकर देवरों की पीठ पर वार करती हैं।</p>
<p>ब्रज में चलने वाले 40 दिवसीय होली महोत्सव का आज दाऊ दादा की नगरी से समापन हो गया। मंदिर में चले हुरेंगे उत्सव में देवर पर भाभियों ने अपना प्यार जताते हुए पहले उनके कपड़े फाड़े और फिर फाड़े हुए कपड़ों से कोड़ा बनाकर हुरंगे का आनंद उठाया। पीठों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/127803/sister-in-law-flogged-brother-in-laws-torn-clothes-40-day-braj-holi-ends-see"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-03/98514687.webp" alt=""></a><br /><p>Holi 2023: ब्रज में आज से होली का हुड़दंग थम गया है। 40 दिवसीय होली उत्सव का दाऊ जी के हुरंगे के बाद समापन हो गया है। मान्यता है कि हुरंगे में भाभियां देवरों के कपड़े फाड़ती हैं और उसी कपड़े का कोड़ा बनाकर देवरों की पीठ पर वार करती हैं।</p>
<p>ब्रज में चलने वाले 40 दिवसीय होली महोत्सव का आज दाऊ दादा की नगरी से समापन हो गया। मंदिर में चले हुरेंगे उत्सव में देवर पर भाभियों ने अपना प्यार जताते हुए पहले उनके कपड़े फाड़े और फिर फाड़े हुए कपड़ों से कोड़ा बनाकर हुरंगे का आनंद उठाया। पीठों पर कोड़े खाते हुए दाऊ जी महाराज के जयकारों से पूरा वातावरण भक्ति में सराबोर और रंगमय नजर आया।</p>
<p>ब्रज में होली की धूम धुल होली के बाद भी गूंज रही है। भले ही राधा-कृष्ण होली का समापन धुलंडी के साथ हो गया हो, लेकिन श्री कृष्ण के बड़े भाई और ब्रज के राजा बलराम जी की नगरी में आज भी होली खेली गई। अनोखे तरीके से खेली गई इस होली में ग्वालों के कपडे फाड़ कर कोड़ा बनाकर हुरियारिनों ने उन्हीं पर बरसाए।</p>
<p>हाथों में बाल्टी लेकर मंदिर परिसर में नाचते हुरियारे दोपहर बारह बजे बाद से यहां एकत्रित होना शुरू हुए। इसके बाद जैसे ही मंदिर के अन्दर से बलराम जी की छड़ी रुपी झंडा आया और यहां मौजूद हुरियारिनों ने इनके कपड़े फाड़ना शुरू कर दिया। फिर उनको रंग में भिगोकर कोड़ा बनाया। हुरियारिनों ने कोड़े को हुरियारों पर ही बरसाना शुरू कर दिया। हुरियारे दाउजी महाराज के जयकारे लगाते हुए मंदिर की परिक्रमा करते रहे।</p>
<p>दाऊजी मंदिर के रिसीवर ने हुरंगे की जानकारी देते हुए बताया कि हुरंगे के दौरान हुरियारे इतने उत्साहित हो गए कि वह कभी अपने साथियों को कंधे पर बिठा ले रहे थे तो कभी उन्हें गिरा दे रहे थे। इस दौरान लगातार कपड़े के बनाए हुए कोड़े से हुरियारिन इन ग्वालों पर वार कर रही थीं। यह सब देखकर यहां आने वाले देशी-विदेशी पर्यटक भाव विभोर हो गए।</p>
<p>बरसाना और नन्द गांव की ही तरह यहां के हुरंगे में भी हुरियारिन हुरियारों पर हावी रहती हैं, लेकिन यहां लाठियों से नहीं, बल्कि हुरियारों के कपड़े फाड़ कर बनाए गए कोड़े से उन्हीं की पिटाई कर होली का समापन करती हैं।</p>
<p>दाऊजी महाराज मंदिर के रिसीवर राम कटोर पांडेय ने जानकारी देते हुए बताया कि 5 हजार वर्ष से यह परंपरा चली आ रही है। यहां देवर भाभी के बीच एक अनोखी होली होती है।</p>
<p>मंदिर प्रांगण में देवरों के पहले कपड़े फाड़े जाते हैं और उन्हीं कपड़ों से कोड़ा बनाकर भाभियां देवरों के ऊपर बरसाती हैं। अबीर गुलाल और टेसू के फूलों से तैयार किए गए प्राकृतिक रंग पूरे मंदिर के वातावरण को सतरंगी कर देता है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि 21 क्विंटल टेसू के फूलों से रंग तैयार किया गया था। 50 क्विंटल कई प्रकार के फूलों की पत्तियां मंगाई गईं, जोकि लगातार श्रद्धालुओं पर हुरंगे के आयोजन के द्वारा मशीनों से बरसाई गईं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Mar 2023 15:29:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फीके -फीके रंग है, सूना-सूना फाग।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div>  </div>
</div>
<p><strong>पहले </strong>की होली और आज की होली में अंतर आ गया है, कुछ साल पहले होली के पर्व को लेकर लोगों को उमंग रहता था, आपस में प्रेम था। किसी के भी प्रति द्वेष भाव नहीं था। आपस में मिल कर लोग प्रेम से होली खेलते थे।  मनोरंजन के अन्य साधानों के चलते लोगों की परंपरागत लोक त्यौहारों के प्रति रुचि कम हुई है। इसका कारण लोगों के पास समय कम होना है। होली आने में महज कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन शहर में होली के रंग कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। एक माह तो दूर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/127782/faded-colors-are-empty-fag"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-03/hindi-divas2.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div> </div>
</div>
<p><strong>पहले </strong>की होली और आज की होली में अंतर आ गया है, कुछ साल पहले होली के पर्व को लेकर लोगों को उमंग रहता था, आपस में प्रेम था। किसी के भी प्रति द्वेष भाव नहीं था। आपस में मिल कर लोग प्रेम से होली खेलते थे।  मनोरंजन के अन्य साधानों के चलते लोगों की परंपरागत लोक त्यौहारों के प्रति रुचि कम हुई है। इसका कारण लोगों के पास समय कम होना है। होली आने में महज कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन शहर में होली के रंग कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। एक माह तो दूर रहा अब तो होली की मस्ती एक-दो दिन भी नहीं रही। मात्र आधे दिन में यह त्योहार सिमट गया है। रंग-गुलाल लगाया और हो गई होली। जैसे-जैसे परंपराएं बदल रही हैं, रिश्‍तों का मिठास खत्‍म होता जा रहा है।<br /><br /><br />होली एक ऐसा रंगबिरंगा त्योहार है, जिसे हर धर्म के लोग पूरे उत्साह और मस्ती के साथ मनाते रहे हैं। होली के दिन सभी बैर-भाव भूलकर एक-दूसरे से परस्पर गले मिलते थे। लेकिन सामाजिक भाईचारे और आपसी प्रेम और मेलजोल का होली का यह त्याेहार भी अब बदलाव का दौर देख रहा है। फाल्गुन की मस्ती का नजारा अब गुजरे जमाने की बात हो गई है। कुछ सालों से फीके पड़ते होली के रंग अब उदास कर रहे हैं। शहर के बुजुर्गों का कहना है कि ‘ न हंसी- ठिठोली, न हुड़दंग, न रंग, न ढप और न भंग’ ऐसा क्या फाल्गुन? न पानी से भरी ‘खेळी’ और न ही होली का .....रे का शोर। अब कुछ नहीं, कुछ घंटों की रंग-गुलाल के बाद सब कुछ शांत। होली की मस्ती में अब वो रंग नहीं रहे। आओ राधे खेला फाग होली आई....ताम्बा पीतल का मटका भरवा दो...सोना रुपाली लाओ पिचकारी...के स्वर धीरे धीरे धीमे हो गए हैं।</p>
<div> </div>
<div>
<div>बदले-बदले रंग है, सूना-सूना फाग ।</div>
<div>ढपली भी गाने लगी, अब तो बदले राग ।।</div>
<br />फाल्गुन लगते ही होली का हुड़दंग शुरू हो जाता था। मंदिरों में भी फाल्गुन आते ही ‘फाग’ शुरू हो जाता था। होली के लोकगीत गूंजते थे। शाम होते ही ढप-चंग के साथ जगह-जगह फाग के गीतों पर पारंपरिक नृत्य की छटा होली के रंग बिखेरती थी। होली खेलते समय पानी की खेली में लोगों को पकडक़र डाल दिया जाता था। कोई नाराजगी नहीं, सब कुछ खुशी-खुशी होता था। वसन्त पंचमी से होली की तैयारियां करते थे। चौराहो पर समाज के नोहरे व मंदिरों में चंग की थाप के साथ होली के गीत गूंजते।  रात को चंग की थाप पर गैर नृत्य का आकर्षण था। बाहर से फाल्गुन के गीत व रसिया गाने वाले रात में होली की मस्ती में गैर नृत्य करते थे।</div>
<div> </div>
<div> <br />पहले की होली और आज की होली में अंतर आ गया है, कुछ साल पहले होली के पर्व को लेकर लोगों को उमंग रहता था, आपस में प्रेम था। किसी के भी प्रति द्वेष भाव नहीं था। आपस में मिल कर लोग प्रेम से होली खेलते थे।  मनोरंजन के अन्य साधानों के चलते लोगों की परंपरागत लोक त्यौहारों के प्रति रुचि कम हुई है। इसका कारण लोगों के पास समय कम होना है। होली आने में महज कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन शहर में होली के रंग कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। एक माह तो दूर रहा अब तो होली की मस्ती एक-दो दिन भी नहीं रही। मात्र आधे दिन में यह त्योहार सिमट गया है। रंग-गुलाल लगाया और हो गई होली। 
<div> </div>
<div>जैसे-जैसे परंपराएं बदल रही हैं, रिश्‍तों का मिठास खत्‍म होता जा रहा है। जहां तक होली का सवाल है तो अब मोबाइल और इंटरनेट पर ही ‘हैप्‍पी होली’ शुरू होती है और खत्‍म हो जाती है। अब पहले जैसा वो हर्षोल्‍लास नहीं रह गया है। पहले बच्चे टोलियां बनाकर गली-गली में हुड़दंग मचाते थे। होली के 10-12 दिन पहले ही मित्रों संग होली का हुड़दंग और गली-गली होली का चंदा इकट्ठा करना और किसी पर बिना पूछे रंग उड़ेल देने से एक अलग प्‍यार दिखता था। इस दौरान गाली देने पर भी लोग उसे हंसी में उड़ा देते थे। अब तो लोग मारपीट पर उतारू हो जाते हैं।<br /><br />पहले परायों की बहू-बेटियों को लोग बिल्कुल अपने जैसा समझते थे। पूरा दिन घरों में पकवान बनते थे और मेहमानों की आवभगत होती थी। अब तो सबकुछ बस घरों में ही सिमट कर रह गया है। आजकल तो मानों रिश्तों में मेल-मिलाप की कोई जगह ही नहीं रह गई हो। मन आया तो औपचारिकता में फोन पर हैप्‍पी होली कहकर इतिश्री कर लिए। अब रिश्‍तों में वह मिठास नहीं रह गया है। यही वजह है कि लोग अपनी बहू-बेटियों को किसी परिचित के यहां जाने नहीं देते। पहले घर की लड़कियां सबके घर जाकर खूब होली की हुल्‍लड़ मचाती थीं। अब माहौल ऐसा हो गया है कि यदि कोई लड़की किसी रिश्‍तेदार के यहां ही ज्‍यादा देर तक रुक गई तो परिवार के लोग चिंतित हो जाते हैं कि क्‍यों इतना देर हो गया। तुरंत फोन करके पूछने लगते हैं कि क्‍या कर रही हो, तुम जल्‍दी घर आओ। क्‍यों अब लोगों को रिश्‍तों पर भी उतना भरोसा नहीं रह गया है।<br /><br />दूसरी ओर, होली के दिन खान-पान में भी अब अंतर आ गया है। गुझि‍या, पूड़ी-कचौड़ी, आलू दम, महजूम (खोवा) आदि मात्र औपचारिकता रह गई है। अब तो होली के दिन भी मेहमानों को कोल्‍ड ड्रिंक्‍स और फास्‍ट फूड जैसी चीजों को परोसा जाने लगा है। वहीं, होलिका के चारों तरफ सात फेरे लेकर अपने घर के सुख शांति की कामना करना, वो गोबर के विभिन्न आकृति के उपले बनाना, दादी-नानी का मखाने वाली माला बनाना, रंग-बिरंगे ड्रेसअप में अपनी सखी-सहेलियों संग घर-घर मिठाई बांटना, गेहूं के पौधे भूनना और होली के लोकगीतों को गाना। अब यह सब परंपराएं तो मानो नाम की ही रह गई हैं।<br /><br /> होली रोपण के बाद से होली की मस्ती शुरू हो जाती थी। छोटी बच्चियां गोबर से होली के लिए वलुडिये बनाती थी। उसमें गोबर के गहने, नारियल, पायल, बिछियां आदि बनाकर माला बनाती थी। अब यह सब नजर नही आता है। होली से पूर्व घरों में टेशु व पलाश के फूलों को पीस कर रंग बनाते थे। महिलाएं होली के गीत गाती थी। होली के दिन गोठ भी होती थी जिसमें चंग की थाप पर होली के गीत गाते थे। होली रोपण से पूर्व बसंत पंचमी से फाग के गीत गूंजने लगते थे। आज के समय कुछ मंदिरों में ही होली के गीत सुनाई देते हैं। होली के दिन कई समाज के लोग सामूहिक होली खेलने निकलते थे। साथ में ढोलक व चंग बजाई जाती थी, अब वह मस्ती-हुड़दंग कहां?<br /><br />अब होली केवल परंपरा का निर्वहन रह गया है। हाल के समय में समाज में आक्रोश और नफरत इस कदर बढ़ गई है कि सभ्रांत परिवार होली के दिन निकलना नहीं चाहते हैं। लोग साल दर साल से जमकर होली मनाते आ रहे हैं। इस पर्व का मकसद कुरीतियों व बुराइयों का दहन कर आपसी भाईचारा को कायम रखना है। आज भारत देश मे समस्यायों का अंबार लगा हुआ है। बात सामाजिक असमानता की करें, इसके कारण समाज में आपसी प्रेम, भाईचारा, मानवता, नैतिकता खत्म होती जा रही हैं। कभी होली पर्व का अपना अलग महत्व था, होलिका दहन पर पूरे परिवार के लोग एक साथ मौजूद रहते थे। और होली के दिन एक दूसरे को रंग लगा व अबीर उड़ा पर्व मनाते थे। लोगों की टोली भांग की मस्ती में फगुआ गीत गाते व घर-घर जाकर होली का प्रेम बांटते थे।<br /><br /> अब हालात यह है कि होली के दिन 40 फीसदी आबादी खुद को कमरे में बंद कर लेती है। हर माह, हर ऋतु किसी न किसी त्योहार के आने का संदेसा लेकर आती है और आए भी क्यों न, हमारे ये त्योहार हमें जीवंत बनाते हैं, ऊर्जा का संचार करते हैं, उदास मनों में आशा जागृत करते हैं। अकेलेपन के बोझ को थोड़ी देर के लिए ही सही, कम करके साथ के सलोने अहसास से परिपूर्ण करते हैं, यह उत्सवधर्मिता ही तो है जो हमारे देश को अन्य की तुलना में एक अलग पहचान, अस्मिता प्रदान करती है। होली पर समाज में बढ़ते द्वेष भावना को कम करने के लिए मानवीय व आधारभूत अनिवार्यता की दृष्टि से देखना होगा।</div>
<div> </div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Mar 2023 14:36:37 +0530</pubDate>
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