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                <title>जल संरक्षण - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>जल संरक्षण RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>जलवायु परिवर्तन का गहराता संकट: युद्ध, समुद्री तापमान और ‘वेस्टर्न वेव्स’ का भारत पर प्रभाव</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ | </strong>अप्रैल..., 2026 अप्रैल का महीना, जो कभी वसंत की सुखद अनुभूति का प्रतीक माना जाता था, आज 40–43°C की झुलसा देने वाली गर्मी का संकेतक बन गया है। उत्तर भारत, विशेषकर लखनऊ, दिल्ली, राजस्थान और मध्य गंगा के मैदानों में यह तापमान अब असामान्य नहीं रहा, बल्कि एक नई सामान्य स्थिति (New Normal) के रूप में उभर रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> यह परिवर्तन केवल मौसमी नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक स्तर पर चल रही जटिल प्रक्रियाएँ—जैसे जलवायु परिवर्तन, समुद्री तापमान में वृद्धि, और अंतरराष्ट्रीय युद्ध—मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177842/deepening-crisis-of-climate-change-war-sea-temperature-and-impact"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/4416221.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ | </strong>अप्रैल..., 2026 अप्रैल का महीना, जो कभी वसंत की सुखद अनुभूति का प्रतीक माना जाता था, आज 40–43°C की झुलसा देने वाली गर्मी का संकेतक बन गया है। उत्तर भारत, विशेषकर लखनऊ, दिल्ली, राजस्थान और मध्य गंगा के मैदानों में यह तापमान अब असामान्य नहीं रहा, बल्कि एक नई सामान्य स्थिति (New Normal) के रूप में उभर रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> यह परिवर्तन केवल मौसमी नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक स्तर पर चल रही जटिल प्रक्रियाएँ—जैसे जलवायु परिवर्तन, समुद्री तापमान में वृद्धि, और अंतरराष्ट्रीय युद्ध—मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक दशक में अप्रैल माह के अधिकतम तापमान में स्पष्ट वृद्धि देखी गई है - यह आकड़ा वर्ष के सापेक्ष अधिकतम तापमान (°C) का 2015-40.7, 2016-43.1, 2017-41.8, 2018-40.7, 2019-44.6, 2020-38.8, 2021-41.9, 2022~43.0, 2023-39.0, 2024-41.0, 2025-42.0, और 2026-43.0 से ऊपर (27 अप्रैल तक)।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">[Chitra-Gragh] इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि तापमान में गिरावट केवल अस्थायी रही है (जैसे 2020 में), जबकि दीर्घकालिक प्रवृत्ति लगातार वृद्धि की [Chitra-Gragh] महामारी और तापमान: एक अस्थायी राहत 2020 में COVID-19 लॉकडाउन के दौरान तापमान 38.8°C तक गिर गया था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> इसका मुख्य कारण था—वाहनों की आवाजाही में कमी, औद्योगिक गतिविधियों का ठहराव और वायु प्रदूषण में गिरावट हालाँकि, यह गिरावट स्थायी नहीं रही। जैसे ही गतिविधियाँ पुनः शुरू हुईं, तापमान फिर से तेजी से बढ़ने लगा। युद्ध और जलवायु परिवर्तन का संबंध वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन और युद्ध के बीच एक खतरनाक संबंध उभरकर सामने आया है, जिनका मुख्य प्रभाव: सैन्य उपकरणों में भारी ईंधन खपत, बमबारी और आग से कार्बन उत्सर्जन और ऊर्जा बुनियादी ढांचे का विनाश ही कहा जा सकता है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध और 2026 में मध्य-पूर्व के संघर्षों के दौरान तापमान का 43°C के आसपास पहुँचना इस संबंध को मजबूत करता है। युद्ध केवल मानव जीवन ही नहीं, बल्कि पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन को भी गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। ‘वेस्टर्न वेव्स’ (पश्चिमी विक्षोभ) का बदलता स्वरूप भारत में आने वाले पश्चिमी विक्षोभ अब अनियमित और अधिक तीव्र होते जा रहे हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जिससे प्रमुख परिवर्तन जो महसूस किये गए, वह है -अचानक वर्षा और ओलावृष्टि, उसके तुरंत बाद भीषण हीटवेव और तापमान में तीव्र उतार-चढ़ाव (25°C से 43°C तक) होता रहा । इससे दुष्प्रभाव न ही रबी फसलों (विशेषकर गेहूं) पर संकट छाया बल्कि किसानों की आय पर असर हुआ और तरह–तरह की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं में अप्रत्यासित वृद्धि हुई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> शहरी भारत और ‘हीट आइलैंड’ प्रभाव लखनऊ, दिल्ली और पटियाला जैसे शहरों में कंक्रीट संरचनाओं और हरियाली की कमी के कारण “अर्बन हीट आइलैंड” प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। जिसके परिणाम स्वरुप शहरों में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक गर्म, रात का भी तापमान 30°C से ऊपर रहता है जिससे शरीर को भी आराम नहीं मिल पा रहा है और आम जनता बेहाल है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भविष्य का संकट (2026–2030) यदि वर्तमान प्रवृत्ति जारी रही, तो आने वाले वर्षों में भारत को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि पिछले 15 दिनों से अधिक लंबी हीटवेव, सभी शहरों/देहातों में भी भरी जल संकट और भूजल स्तर में गिरावट पायी जा रही है। इसके साथ ही ऊर्जा  मांग में भी तीव्र वृद्धि हो रही है। उक्त कारणों से GDP में 4–6% तक संभावित कमी से भी नकारा नहीं जा सकता है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह भी अनुमान लगाया जा सकता है कि 2030 के बाद स्थिति और गंभीर हो सकती है, जब तापमान 48–50°C तक पहुँचने की संभावना बनी हुई है। समाधान: क्या किया जा सकता है? इस संकट से निपटने के लिए बहुआयामी प्रयास आवश्यक हैं:</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">1. पर्यावरणीय उपाय-अब हमें वृक्षारोपण और वन संरक्षण में अभियान स्वरुप सरकार के साथ कन्धा से कंधा मिलाकर काम करना होगा तथा जैव विविधता का संरक्षण के लिए प्रभावी कार्य की आवश्यकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">2. ऊर्जा परिवर्तन- यद्यपि भारतवर्ष में वर्तमान सरकार ने आम जनता से लेकर व्यवसायिक संस्थाओं तक तेजी से सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है , परन्तु इसे वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर भारत के साथ ही ऊर्जा हेतु आत्म निर्भर होना होगा | इसी के साथ – साथ जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना पड़ेगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">3.जल प्रबंधन- अभी तक भारतवर्ष में सरकार प्रयासों के बावजूद भी आम जनता में वर्षा जल संचयन के बारें में नगण्य जानकारी हो पाई है और नहीं जल संरक्षण तकनीकों का उपयोग का उपयोग किया जा रहा है, केवल कागजी कार्यवाही तक सीमित रह गया है । इस क्षेत्र में अभियान चलाकार जागरूक करने और प्रभावी कार्य करने की आवश्यकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">4. शहरी योजना- भारत सरकार ने स्मार्टसिटी व ग्रीन सिटी मॉडल की योजनायें चलाई, इसका कोई प्रभावी असर अभी तक दिखाई न पड़ रहा है और नहीं कम कंक्रीट और अधिक हरियाली ही किसी शहरी अथवा कस्बो पर्याप्त असर छोड़ रहा है। इस पर अधिक प्रभावी कार्य करने की आवश्यकता है ।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">5. सामाजिक भागीदारी- उपरोक्त से स्पष्ट है कि जो योजनाये प्रभावीरूप से संचालित  नहीं हो पा रही हैं, उनमें जन-जागरूकता अभियान चलाना तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए  जन आंदोलन चलाना अत्यंत आवश्यक है ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 19:44:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सूखी नहरे सूखे तालाब पानी की तलाश में भटक रहे बेजुबान जानवर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में भीषण गर्मी तपती धूप में बेजुबान पानी बगैर तरस रहे हैं जिले में सुखी नहरे तालाब गड्ढे में पानी न होने से जंगली जानवर नील गाय पशु पक्षी बेजुबान पानी के लिए तरस रहे हैं जिला प्रशासन एक के कमरों में बैठकर आदेश देती रहती है लेकिन सूखी नारे सूखे तालाब बेजुबानों के लिए हलक सूख रहा है जिला प्रशासन बिजवानों के लिए ना तो नहरे में पानी की व्यवस्था कर रहे हैं और ना ही तालाबों और नहरे में पानी छुड़वाने का काम कर रहे हैं कैसे बेजुबान जानवर भीषण तपती गर्मी में बेहाल नजर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177402/dry-canals-dry-ponds-dumb-animals-wandering-in-search-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260427-wa0051.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में भीषण गर्मी तपती धूप में बेजुबान पानी बगैर तरस रहे हैं जिले में सुखी नहरे तालाब गड्ढे में पानी न होने से जंगली जानवर नील गाय पशु पक्षी बेजुबान पानी के लिए तरस रहे हैं जिला प्रशासन एक के कमरों में बैठकर आदेश देती रहती है लेकिन सूखी नारे सूखे तालाब बेजुबानों के लिए हलक सूख रहा है जिला प्रशासन बिजवानों के लिए ना तो नहरे में पानी की व्यवस्था कर रहे हैं और ना ही तालाबों और नहरे में पानी छुड़वाने का काम कर रहे हैं कैसे बेजुबान जानवर भीषण तपती गर्मी में बेहाल नजर आ रहे हैं पानी के लिए तड़प रहे बेजुबान सूखी नहर तालाब जिम्मेदार बेपरवाह जिले के हरैया तहसील क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जहां भीषण गर्मी के बीच बेजुबान पशु पक्षियों की हालत गंभीर जंगली जानवर गांव की तरफ पलायन कर रहे हैं जिससे ग्रामीणों को भारी नुकसान होने की आशंका है नहर तालाब और पोखरे पूरी तरह सूख चुके  जिससे पानी के अभाव में जानवर दर-दर भटकने को मजबूर ग्रामीण क्षेत्रों में इनका आवागमन हो गया है पानी की तलाश में इधर-उधर भटक रहे जानवर ग्रामीणों को नुकसान पहुंचा रहे हैं क्षेत्र में जलस्रोतों की हालत बद से बदतर हो चुकी लेकिन जिम्मेदार अधिकारी एसी कमरों में बैठकर सिर्फ आदेश जारी करने तक सीमित. धरातल पर कुछ दिखाई नहीं देता है</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कागजों में लाखों रुपए का जलाशय भराव के लिए पैसा खर्च हो जा रहा है लेकिन स्थित सुखी तालाब नहरे बयां कर रही है कि भ्रष्टाचार करके जल स्रोतों का भंडारण नहीं हो पा रहा है नदिया सुख रही है नदियों की सफाई नहीं की जा रही जिसके कारण पानी नहीं रख रहा हैजमीनी स्तर पर राहत के कोई ठोस इंतजाम नजर नहीं पानी की तलाश में पशु-पक्षी गांव और सड़कों की ओर भटक रहे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल पानी की व्यवस्था कराने और सूखे जलस्रोतों को भरवाने की मांग की व्यवस्था करनी चाहिए </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो यह स्थिति भयावह हो सकती है बड़ी संख्या में बेजुबान जानवरों की जान जा सकती हैसवाल यह है कि आखिर कब जागेगा जिला प्रशासन बेजुबानों को कब जल का व्यवस्था कराएगी सरकार केवल कागजों में तालाबों में पानी भरा जा रहा है नहरे में पानी सप्लाई हो रही है लेकिन सब सुखी नजर आ रही है कहीं पानी की व्यवस्था सरकार नहीं कर पा रही है जिला प्रशासन आदेश देकर के अपने एक ऑफिस में बैठे रहते हैं जंगली जानवर और बेजुबान पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था सरकार नहीं कर पा रही है</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:45:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आग उगलती भीषण गर्मी में प्यासे कंठों की कौन सुने दास्तां</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के कई राज्यों में इस समय भीषण और भयावह गर्मी का प्रकोप जारी है। हर वर्ष तापमान अपने पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए नई ऊंचाइयां छू रहा है। आसमान से बरसती आग ने मानो समस्त जीव-जंतुओं के कंठ सूखा दिए हैं। यह बढ़ती हुई भीषण गर्मी कहीं न कहीं मानव द्वारा किए जा रहे पर्यावरण के अंधाधुंध दोहन और प्रकृति-विनाश का परिणाम है। इसी के चलते जल के प्राकृतिक स्रोत समाप्त हो रहे हैं और भूजल स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जंगलों के अंधाधुंध विनाश के कारण अनेक प्राकृतिक जल स्रोत सूख चुके हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे मूक वन्यजीवों</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177391/who-will-listen-to-the-tales-of-thirsty-throats-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/download2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के कई राज्यों में इस समय भीषण और भयावह गर्मी का प्रकोप जारी है। हर वर्ष तापमान अपने पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए नई ऊंचाइयां छू रहा है। आसमान से बरसती आग ने मानो समस्त जीव-जंतुओं के कंठ सूखा दिए हैं। यह बढ़ती हुई भीषण गर्मी कहीं न कहीं मानव द्वारा किए जा रहे पर्यावरण के अंधाधुंध दोहन और प्रकृति-विनाश का परिणाम है। इसी के चलते जल के प्राकृतिक स्रोत समाप्त हो रहे हैं और भूजल स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जंगलों के अंधाधुंध विनाश के कारण अनेक प्राकृतिक जल स्रोत सूख चुके हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे मूक वन्यजीवों के जीवन पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पानी प्रकृति के समस्त जीवों की मूलभूत और अनिवार्य आवश्यकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन विडंबना यह है कि जब यही आवश्यकता पूरी नहीं हो पा रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जीवों के अस्तित्व पर संकट गहराना स्वाभाविक है।</span></p><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह स्वीकार करना होगा कि आजादी के साढ़े सात दशक बाद भी देश के कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को पेयजल के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसे में यह कल्पना करना कठिन नहीं कि वन्यजीव अपनी प्यास बुझाने के लिए कितनी कठिनाइयों का सामना करते होंगे। मानव जीवन के लिए शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने हेतु केंद्र और राज्य सरकारें हर वर्ष अनेक प्रयास करती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जमीनी स्तर पर ये प्रयास अभी भी अपर्याप्त सिद्ध हो रहे हैं। विशेषकर सुदूर ग्रामीण अंचलों में पेयजल व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सरकार की ‘नल-जल योजना’ एक महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी पहल है। बावजूद इसके</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई स्थानों पर जिला प्रशासन की उदासीनता के कारण इन योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। अनेक गाँवों में बनी पानी की टंकियाँ केवल दिखावा बनकर रह गई हैं। ये टंकियाँ प्यासे कंठों को राहत देने के बजाय व्यवस्था की खामियों का प्रतीक बनती जा रही हैं।</span></p><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पानी हर जीव की मूलभूत आवश्यकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और यदि इसी आवश्यकता की पूर्ति में कमी रह जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह न केवल गंभीर लापरवाही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अक्षम्य अपराध के समान है। भीषण गर्मी में जब लोग घर से बाहर निकलने से बचते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब ग्रामीण क्षेत्रों के लोग मीलों दूर से पानी लाने को विवश होते हैं। जल संकट के कारण मूक पशु-पक्षियों का जीवन बचाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति-विनाश के चलते बढ़ती गर्मी और अस्तित्व बचाने के लिए भटकते वन्यजीव—ये दोनों ही हमारी सामूहिक जिम्मेदारी हैं। ऐसे में सरकार और समाज को मिलकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के अंतिम छोर तक मानव और वन्य प्राणियों के लिए पेयजल की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। यदि इस दिशा में ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ कार्य किया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो देश के हर कोने में सभी जीवों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित जल उपलब्ध कराया जा सकता है। अन्यथा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर वर्ष की भाँति आग उगलती गर्मी में प्यासे मूक प्राणियों की दास्तां अधूरी ही रह जाएगी।</span></p><p style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अरविंद रावल</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:28:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर धरा का किया गया जलाभिषेक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी प्रयागराज।</strong> बुधवार को विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर परमार्थ त्रिवेणी पुष्प,अरैल, प्रयागराज में प्रकृति, पर्यावरण एवं जल संरक्षण को समर्पित एक प्रेरणादायी जलाभिषेक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती का प्रेरणादायी उद्बोधन  हुआ।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में पद्मश्री एवं पद्मभूषण से सम्मानित प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, संजय स्वामी, राष्ट्रीय सह संयोजक, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली, स्वामी वेद विद्यानन्द जी, योगी शुक्राई नाथ जी सहित अनेक गणमान्य अतिथियों, पूज्य संतों, समाजसेवियों, शिक्षाविदों एवं पर्यावरणविदों की गरिमामयी उपस्थिति रही।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">स्वामी चिदानन्द सरस्वती  ने अपने आशीर्वचन में कहा कि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176954/jalabhishek-of-earth-was-done-on-the-occasion-of-world"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260422-wa0315.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी प्रयागराज।</strong> बुधवार को विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर परमार्थ त्रिवेणी पुष्प,अरैल, प्रयागराज में प्रकृति, पर्यावरण एवं जल संरक्षण को समर्पित एक प्रेरणादायी जलाभिषेक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती का प्रेरणादायी उद्बोधन  हुआ।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में पद्मश्री एवं पद्मभूषण से सम्मानित प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, संजय स्वामी, राष्ट्रीय सह संयोजक, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली, स्वामी वेद विद्यानन्द जी, योगी शुक्राई नाथ जी सहित अनेक गणमान्य अतिथियों, पूज्य संतों, समाजसेवियों, शिक्षाविदों एवं पर्यावरणविदों की गरिमामयी उपस्थिति रही।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">स्वामी चिदानन्द सरस्वती  ने अपने आशीर्वचन में कहा कि पृथ्वी केवल ग्रह नहीं, हमारी माता है। पृथ्वी केवल संसाधनों का भंडार नहीं, बल्कि समस्त जीवन का आधार है। यदि धरती सुरक्षित है, तो मानवता, संस्कृति, सभ्यता और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित है। जल, जंगल, जमीन और जीवन ये सब एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। यदि हम पृथ्वी को बचाना चाहते हैं तो हमें जल संरक्षण, वृक्षारोपण और सतत जीवनशैली को अपनाना होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ने सदैव प्रकृति को पूजनीय माना है। हमारे वेदों, उपनिषदों और सनातन परंपरा में पृथ्वी, नदियों, पर्वतों और वृक्षों को देवतुल्य सम्मान दिया है।स्वामी जी ने उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया कि हर व्यक्ति अपने जीवन में जल बचाने, प्लास्टिक मुक्त जीवन अपनाने, वृक्ष लगाने तथा पर्यावरण संरक्षण हेतु व्यक्तिगत संकल्प ले। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि बिन अर्थ (पृथ्वी), सब व्यर्थ। यह सम्पूर्ण जीवन का शाश्वत सत्य है। यदि पृथ्वी न हो, तो न जीवन होगा, न जल होगा, न वायु होगी, न अन्न होगा और न ही यह सुंदर संसार होगा। हमारी हर साँस, हर धड़कन, हर आशा और हर भविष्य पृथ्वी पर ही आधारित है। इसलिए पृथ्वी का संरक्षण केवल पर्यावरण की बात नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पद्मश्री एवं पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी जी ने कहा कि पृथ्वी को बचाने का समय अभी है। यदि हमने आज प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें क्षमा नहीं करेंगी। उन्होंने युवाओं से विज्ञान, संस्कार और संवेदनशीलता के साथ पर्यावरण संरक्षण में आगे आने का आह्वान किया।महापौर गणेश केशरवानी ने प्रयागराज को स्वच्छ, हरित बनाने के लिए नगर निगम द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">संजय स्वामी ने शिक्षा के माध्यम से पर्यावरण चेतना को जन-जन तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया।कार्यक्रम के अंतर्गत पवित्र जल से पृथ्वी एवं प्रकृति के प्रतीक स्वरूप जलाभिषेक किया गया तथा सभी ने मिलकर “धरती बचाओ, जल बचाओ, भविष्य बचाओ” का संकल्प लिया। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस दिव्य अवसर पर अशोक मेहता , अपर महाधिवक्ता, विधायक जवाहर लाल राजपूत,प्रो कपिलदेव मिश्रा पूर्व कुलपति रानीदुर्गावती, प्रो राजाराम यादव, पूर्व कुलपति,  अनामिका चौधरी, सुबेदार इमृतलाल, गंगा टास्कफोर्स,न्यायमूर्ति सुधीरनारायण अग्रवाल, स्वामी मदनगोपाल दास जी और अनेक विभूतियों की  उपस्थिति रही।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 20:16:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बभनकुइया में जल अर्पण दिवस व विश्व जल दिवस पर भव्य समारोह,।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बभनकुइया ग्राम में रविवार को विश्व जल दिवस एवं जल अर्पण दिवस के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जल जीवन मिशन के अंतर्गत आयोजित हुआ, जिसमें क्षेत्र के ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रवीण पटेल रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, जिससे ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार आए। उन्होंने योजना को जनता को समर्पित करते हुए कहा कि यह पहल गांवों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173905/grand-celebration-on-water-offering-day-and-world-water-day"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260322-wa0133.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बभनकुइया ग्राम में रविवार को विश्व जल दिवस एवं जल अर्पण दिवस के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जल जीवन मिशन के अंतर्गत आयोजित हुआ, जिसमें क्षेत्र के ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रवीण पटेल रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, जिससे ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार आए। उन्होंने योजना को जनता को समर्पित करते हुए कहा कि यह पहल गांवों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर जिला समन्वयक अश्विनी श्रीवास्तव ने कार्यक्रम का संचालन किया। उन्होंने योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस मिशन के तहत गांव में पाइपलाइन के माध्यम से घर-घर जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समारोह के दौरान जल संरक्षण और उसके महत्व पर भी विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने ग्रामीणों से अपील की कि वे जल का विवेकपूर्ण उपयोग करें और वर्षा जल संचयन जैसे उपाय अपनाएं, ताकि भविष्य में जल संकट से बचा जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं ग्रामीणों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। आयोजन के अंत में जल संरक्षण का संकल्प दिलाया गया और योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी को जागरूक किया गया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 22:02:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिविर के पांचवें दिन जल संरक्षण एवं मृदा संरक्षण जागरूकता अभियान चला कर ग्रामीणों को किया गया जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कोरांव प्रयागराज। </strong>बलराम महाविद्यालय के पांचवें दिन राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा जैविक, खेती मृदा संरक्षण तथा जल संरक्षण विषयों पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने बताया कि जैविक खेती से भूमि की उर्वरता बढ़ती है तथा रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की रक्षा होती है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त मृदा संरक्षण (मिट्टी संरक्षण) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि पेड़ पौधे लगाकर खेतों में मेड बंदी करके संतुलित</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173419/on-the-fifth-day-of-the-camp-villagers-were-made"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260316-wa0137.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कोरांव प्रयागराज। </strong>बलराम महाविद्यालय के पांचवें दिन राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा जैविक, खेती मृदा संरक्षण तथा जल संरक्षण विषयों पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने बताया कि जैविक खेती से भूमि की उर्वरता बढ़ती है तथा रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की रक्षा होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त मृदा संरक्षण (मिट्टी संरक्षण) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि पेड़ पौधे लगाकर खेतों में मेड बंदी करके संतुलित खेती अपनाकर मिट्टी के कटाव को रोका जा सकता है। यह कार्यक्रम बलराम महाविद्यालय के प्रबंधिका श्रीमती उमा सिंह के निर्देशन में संचालक पूर्वक संपन्न हुआ। इस मौके कार्यक्रमाधिकारी गौरव वर्मा एसोसिएट डायरेक्टर शाश्वत मिश्रा, डिप्टी डायरेक्टर शालिनी श्रीवास्त प्राचार्य डॉ अरुण कुमार सिंह डॉ अशोक उत्तम डॉ0 वी0 पी0 सिंह, डॉ अजय सिंह, संध्या पाण्डेय, आशीष पाण्डेय, बृजेश कुमार और ग्रामीण उपस्थित रहे।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 19:56:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोनभद्र में भूजल सप्ताह का आयोजन जल संरक्षण हेतु जन-जागरण का लक्ष्य</title>
                                    <description><![CDATA[भूजल संसाधनों की सुरक्षा  , संरक्षण पर जोर, संबंधितों को दिये आवश्यक दिशा निर्देश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/153222/ground-water-week-organized-in-sonbhadra-the-goal-of-public"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-07/img-20250705-wa0015.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>अजित सिंह /राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">जिलाधिकारी बी0एन0 सिंह ने अवगत कराया है कि प्रदेश में अत्यधिक भूजल दोहन के कारण उस पर आसन्न संकट के दृश्टिगत भूजल संसाधनों की सुरक्षा, सरंक्षण, प्रबन्धन तथा उसके महत्व के प्रति आम जनमानस को जागरूक करने के उद्येश्य से वर्ष 2012 से प्रत्येक वर्ष निरन्तर उक्त अवधि मे भूजल सप्ताह का आयोजन जनपद में होता रहा है तथा पूर्व वर्षो की भांति इस वर्ष भी दिनांक 16 जुलाई,2025 से 22 जुलाई,2025 तक भूजल सप्ताह प्रभावी ढंग से मनाये जाने का निर्णय लिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान स्कूल, कालेजों में छात्र/छात्राओं द्वारा प्रभातफेरी, पद यात्रा स्लोगन राइटिंग प्रतियोगिता इत्यादि के माध्यम से प्रचार-प्रसार करके जन-जन में जागरूकता लायी जायेगी। इसी प्रकार ग्राम पंचायतों विकास खण्ड तथा तहसील स्तरों पर भी विभिन्न प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम जैसे-नुक्कड़ नाटक, कठपुतली नृत्य, मोटर साइकिल रैली एवं गोष्ठियों तथा होर्डिग्ंस, पोस्टर बैनर्स इत्यादि के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जायेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">जनपद, तहसील तथा विकास खण्ड स्तरों पर आयोजित होने वाले समस्त कार्यक्रमों की रूपरेखा के अनुसार तैयार कराई गयी है, उन्होंने सभी खण्ड विकास अधिकारी ग्राम पंचायतों में जन-जागरूकता प्रचार-प्रसार हेतु कार्यक्रम की रूप रेखा अपने स्तर से भी तैयार कर कार्यक्रम को सम्पन्न करायें तथा इस कार्य में मा0 जन प्रतिनिधियों एवं स्वंय सेवी संस्थाओं का भी सहयोग लेना सुनिश्चित करें, जल सुरक्षित तो कल सुरक्षित पर ध्यान केन्द्रित करते हुए भूजल सप्ताह का आयोजन किया जायेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/153222/ground-water-week-organized-in-sonbhadra-the-goal-of-public</link>
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                <pubDate>Wed, 16 Jul 2025 20:19:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[राजेश तिवारी]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जल जीवन का अनमोल रत्न है ,इसे व्यर्थ न गवाये-आर पी सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[हिंडालको रेनुसागर में जल संरक्षण  पर विशेष जोर, लोगों को जल संरक्षण हेतु शपथ दिलाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150828/water-is-a-precious-gem-of-life-do-not-lose"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-04/img_20250405_230646.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>अजीत सिंह ( अजयंत सिंह) ब्यूरो रिपोर्ट</em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र / उत्तर प्रदेश -</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">हिण्डालको, रेनूसागर पावर डिवीजन के पर्यावरण विभाग द्वारा आयोजित जल संरक्षण माह 2025 का समापन समारोह का आयोजन स्थानीय पैराडाइज प्रेक्षागृह में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि हिंडाल्को रेनुसागर के यूनिट हेड आर पी सिंह ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य अतिथि के साथ हेड एच आर शैलेश विक्रम सिंह भी मौजूद रहे। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुये शोभित कुमार द्वारा जल संरक्षण की शपथ दिलाई गई ।समापन समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि रेनूसागर पावर डिवीजन के यूनिट हेड आर पी सिंह ने जल संरक्षण पर आधारित महत्वपूर्ण टिप्स साझा कर लोगों को प्रेरित किया। तत्पश्चात अपने संबोधन में कहा कि जल जीवन का अनमोल रत्न है इसे व्यर्थ न गवाये।</p>
<p style="text-align:justify;">यह न केवल हमारे दैनिक जीवन के लिए आवश्यक है, बल्कि कृषि, उद्योग, ऊर्जा उत्पादन और पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए भी अपरिहार्य है। फिर भी, हम देख रहे हैं कि जल संकट की समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।ऐसे में हम सभी संकल्प ले जल संरक्षण करने के लिये तभी जीवन सम्भव होगा।उन्होंने कहा कि जल के बिना हम जीवन की कल्पना नहीं कर सकते। जल हमारे जीवन के लिए बेहद जरूरी है।</p>
<p style="text-align:justify;">वही स्कूली बच्चों द्वारा जल संरक्षण की लाइव प्रस्तुति दी गई। विजेताओं ने जल संरक्षण पर अपनी कविता भी प्रस्तुत की जिसमें जल संरक्षण शामिल था।कार्यक्रम के अंत मे जल संरक्षण माह के दौरान हुये विविध कार्यक्रमों में भाग लेने वाले विजेताओं को यूनिट हेड, एचआर हेड,मेंटीनेंस हेड और सभी विभागाध्यक्षों द्वारा पुरस्कार वितरित किए गए।इसके पूर्ब स्वागत भाषण में हेड पर्यावरण विभाग कमलेश मौर्या ने आये हुये अतिथियों का स्वागत किया और जल संरक्षण माह के दौरान हुये विविध कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला ।</p>
<p style="text-align:justify;">समापन समारोह के अंत मे पर्यावरण विभाग के अधिकारी अजय कुमार मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।जल संरक्षण माह के समापन समारोह में मुख्य रुप से मेंटिनेंस हेड जगदीश महापात्रा,दीपक पांडेय ,मनीष सिंह,कुमार हर्षवर्धन ,अरविंद सिंह ,समीर आनंद,सुबोध दवे,आशुतोष सिंह ,मृदुल भारद्वाज,ललित खुराना कर्नल जयदीप मिश्रा,संदीप यावले ,सुधाकर अन्नामलाई,मोहित सक्सेना ,शिक्षक शिक्षिकायें आदि के अलावा मान्यता प्राप्त श्रमिक संगठनो के पदाधिकारी सहित भारी संख्या में कर्मचारी एवं श्रमिक गण मौजूद रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन दीपाली राजपूत एवं रोशन पटेल ने संयुक्त रुप से किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Apr 2025 00:08:17 +0530</pubDate>
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