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                <title>जल संरक्षण - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>जल संरक्षण RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>प्राकृतिक खेती से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर, मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने दिलाया विकसित कृषि का संकल्प।।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिला पंचायत सभागार, प्रयागराज में शुक्रवार को "प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं विकसित कृषि संकल्प अभियान" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह उपस्थित रहे। इस दौरान उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल खेती की लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाकर किसानों की आय में भी वृद्धि करती है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181676/emphasis-on-increasing-the-income-of-farmers-through-natural-farming"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260619-wa0182-(1).jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिला पंचायत सभागार, प्रयागराज में शुक्रवार को "प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं विकसित कृषि संकल्प अभियान" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह उपस्थित रहे। इस दौरान उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल खेती की लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाकर किसानों की आय में भी वृद्धि करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने तथा कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों को स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध हो सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यशाला में कृषि विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं, जैविक खाद के उपयोग, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन तथा कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के उपायों की विस्तृत जानकारी दी। किसानों को प्राकृतिक खेती से मिलने वाले लाभों एवं सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं के बारे में भी जागरूक किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर सांसद प्रवीण पटेल, विधायकगण, विधान परिषद सदस्य (एमएलसी), भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष, महापौर सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी, कृषि विभाग के अधिकारी, किसान एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने कृषि क्षेत्र को अधिक उन्नत, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा किसानों के हित में कार्य करने का संकल्प लिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 22:14:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हम पर्यावरण सप्ताह मना रहे है, लेकिन यह कार्यक्रम वर्षभर का है। पीके सिंह।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।दया शंकर त्रिपाठी </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इफको घियानगर फूलपुर के सामुदायिक केन्द्र में पर्यावरण सप्ताह का समापन समारोह समपन्न हुआ। समापन समारोह में मुख्य अतिथि वरिष्ठ महाप्रबंधक (इकाई प्रमुख) पी.के.सिंह एवं विशिष्ट अतिथि इफको फूलपुर परिवार की प्रथम महिला सरिता सिंह रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">वरिष्ठ महाप्रबंधक (इकाई प्रमुख) पी.के.सिंह ने कहा कि हम पर्यावरण सप्ताह मना रहे है, लेकिन यह कार्यक्रम वर्षभर का है। आप सभी लोग अपने टाउनशिप को हराभरा अवश्य रखे, क्योंकि इसका लाभ आप के साथ आने वाली पीढ़ियों को भी होगा। पालीथीन एवं प्लास्टिक का प्रयोग बिलकुल भी ना करें, क्योंकि पर्यावरण पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181042/we-are-celebrating-environment-week-but-this-program-is-year-round"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1001823231.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।दया शंकर त्रिपाठी </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इफको घियानगर फूलपुर के सामुदायिक केन्द्र में पर्यावरण सप्ताह का समापन समारोह समपन्न हुआ। समापन समारोह में मुख्य अतिथि वरिष्ठ महाप्रबंधक (इकाई प्रमुख) पी.के.सिंह एवं विशिष्ट अतिथि इफको फूलपुर परिवार की प्रथम महिला सरिता सिंह रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वरिष्ठ महाप्रबंधक (इकाई प्रमुख) पी.के.सिंह ने कहा कि हम पर्यावरण सप्ताह मना रहे है, लेकिन यह कार्यक्रम वर्षभर का है। आप सभी लोग अपने टाउनशिप को हराभरा अवश्य रखे, क्योंकि इसका लाभ आप के साथ आने वाली पीढ़ियों को भी होगा। पालीथीन एवं प्लास्टिक का प्रयोग बिलकुल भी ना करें, क्योंकि पर्यावरण पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वरिष्ठ प्रबंधक ई.पी.सी. उमेश कुमार ने पर्यावरण सप्ताह के अंतर्गत हुए आ कार्यक्रम का विस्तार पूर्वक विवरण दिया। उन्होंने कहा कि अधिकारी,कर्मचारी, महिलाओं एवं बच्चों ने कार्यक्रम में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया तथा कार्यक्रम को सफल बनाया। कार्यक्रम का संचालन हेमलता सिजोरिया तथा धन्यवाद ज्ञापन अनूप यादव ने किया। इस दौरान महाप्रबंधक क्रमशः पी.के.पटेल, रत्नेश कुमार,ए.के.गुप्ता,सतर्कता अधिकारी अजय कुमार मिश्र, सुरेश कुमार सिंह <img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/1001823230.jpg" alt="1001823230" width="1280" height="851"></img>(ईपीसी) मौजूद रहे।  पर्यावरण सप्ताह के अंतर्गत हुए विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। पुरस्कार विजेताओं के नाम निम्नलिखित हैः-</div>
<div style="text-align:justify;">चित्रकला प्रतियोगिता (विषय- पर्यावरण)</div>
<div style="text-align:justify;">कक्षा 1 से कक्षा 3 तक</div>
<div style="text-align:justify;">1. सोनाली पाल</div>
<div style="text-align:justify;">2. अर्शी यादव</div>
<div style="text-align:justify;">3. श्रुति पाल</div>
<div style="text-align:justify;">4. आदविक कुशवाहा</div>
<div style="text-align:justify;">5. सामर्थ्य पाल</div>
<div style="text-align:justify;">कक्षा 4 से प तक </div>
<div style="text-align:justify;">1. आनवी कुशवाहा</div>
<div style="text-align:justify;">2. श्रुति प्रसाद</div>
<div style="text-align:justify;">3. आदया सूद</div>
<div style="text-align:justify;">4. आरध्या गुप्ता</div>
<div style="text-align:justify;">5. शिवांश शंकर</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिचर्चा प्रतियोगिता (विषय- पानी की बर्बादीः क्या हम अनजाने में पानी नष्ट कर रहे हैं और इसे कैसे रोका जाये।)</div>
<div style="text-align:justify;">कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थी</div>
<div style="text-align:justify;">1. पार्वी दुबे </div>
<div style="text-align:justify;">2. आंगना सरकार</div>
<div style="text-align:justify;">3. नाइशा यादव</div>
<div style="text-align:justify;">4. सानवी शर्मा</div>
<div style="text-align:justify;">5. आकांक्षा कुमारी</div>
<div style="text-align:justify;">कक्षा 9 से 10  तक के विद्यार्थी</div>
<div style="text-align:justify;">(विषयः- आधुनिक तकनीक और ई कचरा क्या गैजेट्स का बढ़ता इस्तेमाल पर्यावरण के लिए एक नया और गंभीर संकट है)</div>
<div style="text-align:justify;">1. अनुष्का यादव</div>
<div style="text-align:justify;">2. आइजा फात्मा</div>
<div style="text-align:justify;">3. सृजन पाण्डेय</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिचर्चा प्रतियोगिता (विषय- जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों एवं उनके समाधान हेतु प्रकृति- आधारित उपाय)</div>
<div style="text-align:justify;">कर्मचारी वर्ग</div>
<div style="text-align:justify;">1. अश्वनी श्रीवास्तव</div>
<div style="text-align:justify;">2. नीतू सिंह</div>
<div style="text-align:justify;">3. सुबोधना शर्मा</div>
<div style="text-align:justify;">4. रजत पाठक</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिचर्चा प्रतियोगिता (विषय- पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली एवं घरेलू अपशिष्ट का उचित प्रबंधन)</div>
<div style="text-align:justify;">महिला वर्ग </div>
<div style="text-align:justify;">1. प्रतिमा दुबे</div>
<div style="text-align:justify;">2. आशा त्रिपाठी</div>
<div style="text-align:justify;">3. मालती तिवारी</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      सादर</div>
<div style="text-align:justify;">  (स्वयम् प्रकाश)</div>
<div style="text-align:justify;">जनसम्पर्क अधिकारी</div>
<div style="text-align:justify;">   इफको फूलपुर</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 21:17:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खेत बचाओ अभियान–2026: प्राकृतिक खेती, मृदा संरक्षण एवं पोषण सुरक्षा पर किसानों को किया गया जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong> बस्ती जिले के सदर विकासखंड अंतर्गत खेत बचाओ अभियान–2026 के अंतर्गत ग्राम पंचायत बभनगांव एवं मझौवा दूधनाथ में किसान जागरूकता कार्यक्रम  आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना, रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के संतुलित उपयोग को प्रोत्साहित करना, जल एवं पर्यावरण संरक्षण, पोषण सुरक्षा तथा स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है।कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख श्री जटाशंकर शुक्ल, संयुक्त कृषि निदेशक बस्ती मंडल श्रीराम बचन राम, उप निदेशक कृषि श्री अशोक कुमार, मंडल अध्यक्ष श्री राम मौर्य, अमित शुक्ला (पूर्व प्रदेश मंत्री, एबीवीपी), ग्राम प्रधान श्री मनोज यादव, एडीओ (कृषि), एटीएम,</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181012/farm-save-campaign-%E2%80%93-2026-farmers-made-aware-on-natural"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260611-wa0058-(45).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong> बस्ती जिले के सदर विकासखंड अंतर्गत खेत बचाओ अभियान–2026 के अंतर्गत ग्राम पंचायत बभनगांव एवं मझौवा दूधनाथ में किसान जागरूकता कार्यक्रम  आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना, रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के संतुलित उपयोग को प्रोत्साहित करना, जल एवं पर्यावरण संरक्षण, पोषण सुरक्षा तथा स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है।कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख श्री जटाशंकर शुक्ल, संयुक्त कृषि निदेशक बस्ती मंडल श्रीराम बचन राम, उप निदेशक कृषि श्री अशोक कुमार, मंडल अध्यक्ष श्री राम मौर्य, अमित शुक्ला (पूर्व प्रदेश मंत्री, एबीवीपी), ग्राम प्रधान श्री मनोज यादव, एडीओ (कृषि), एटीएम, बीटीएम तथा कृषि विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने संबोधन में ब्लॉक प्रमुख श्री जटाशंकर शुक्ल ने किसानों से मिट्टी एवं जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया। संयुक्त कृषि निदेशक श्रीराम बचन राम ने मृदा परीक्षण आधारित खेती अपनाने तथा विभागीय योजनाओं का लाभ उठाने पर बल दिया। उप निदेशक कृषि श्री अशोक कुमार ने प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण एवं जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। मंडल अध्यक्ष श्री राम मौर्य ने पर्यावरण संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने की अपील की, जबकि अमित शुक्ला ने युवाओं को कृषि नवाचारों एवं आधुनिक तकनीकों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। ग्राम प्रधान श्री मनोज यादव ने किसानों से वैज्ञानिक खेती अपनाकर उत्पादन एवं आय बढ़ाने का आह्वान किया। कृषि विज्ञान केंद्र, बस्ती के वैज्ञानिक डॉ. वी. बी. सिंह ने किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती, जीवामृत, घनजीवामृत, मृदा परीक्षण, फसल अवशेष प्रबंधन एवं जल संरक्षण** की तकनीकों की जानकारी दी। वहीं डॉ. अंजली वर्मा ने पोषण वाटिका, श्री अन्न, संतुलित आहार, स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों के उपयोग तथा भोजन में तेल, नमक एवं चीनी की मात्रा कम करने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्वस्थ परिवार एवं कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण का संदेश दिया | कार्यक्रम के दौरान किसानों को “मिट्टी बचाओ–खेत बचाओ, प्राकृतिक खेती अपनाओ, जल बचाओ–भविष्य बचाओ तथा स्वस्थ भोजन–स्वस्थ जीवन” का संदेश दिया गया।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 19:07:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एनजीटी सदस्य ने की पर्यावरणीय कार्यों की समीक्षा, समधा ताल पुनर्जीवन की सराहना</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के सदस्य माननीय न्यायमूर्ति डॉ. अफरोज अहमद ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन एवं हरित विकास से संबंधित कार्यों की समीक्षा की। बैठक में जिलाधिकारी शैलेष कुमार, पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">समीक्षा के दौरान न्यायमूर्ति डॉ. अफरोज अहमद ने एसटीपी से उपचारित जल का उपयोग पार्कों, उद्यानों एवं कृषि कार्यों में करने तथा भूजल की गुणवत्ता की नियमित जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181004/ngt-member-reviews-environmental-works-and-praises-samadha-tal-revitalization"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260611-wa0047.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के सदस्य माननीय न्यायमूर्ति डॉ. अफरोज अहमद ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन एवं हरित विकास से संबंधित कार्यों की समीक्षा की। बैठक में जिलाधिकारी शैलेष कुमार, पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">समीक्षा के दौरान न्यायमूर्ति डॉ. अफरोज अहमद ने एसटीपी से उपचारित जल का उपयोग पार्कों, उद्यानों एवं कृषि कार्यों में करने तथा भूजल की गुणवत्ता की नियमित जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने जिलाधिकारी शैलेष कुमार के प्रयासों से संचालित समधा ताल पुनर्जीवन एवं संरक्षण योजना की विशेष सराहना करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। साथ ही प्लास्टिक मुक्त अभियान, जल संरक्षण एवं हरित विकास से जुड़े कार्यों की भी प्रशंसा की।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बैठक में नगर निकायों एवं संबंधित विभागों को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ विशेष अभियान चलाने तथा लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए गए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी बाल गोविंद शुक्ल, अपर जिलाधिकारी शुभांगी शुक्ला, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार चक, प्रभागीय वनाधिकारी विवेक यादव समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:41:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गर्मी में प्यास, बारिश में सैलाब: विकास के मॉडल पर बड़ा सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>  </strong>21<span lang="hi" xml:lang="hi">वीं सदी का भारत एक कड़वी विडंबना के दौर से गुजर रहा है। एक ओर देश अंतरिक्ष में नई ऊंचाइयां छू रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर करोड़ों लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझ रहे हैं। वर्ष </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">की भीषण गर्मी ने विकास की चमक के पीछे छिपी हकीकत उजागर कर दी है। कई क्षेत्रों में तापमान </span>48 <span lang="hi" xml:lang="hi">डिग्री सेल्सियस पार कर चुका है। बाड़मेर जैसे इलाकों में गांव एक हैंडपंप के सहारे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाएं मीलों दूर से पानी ला रही हैं और शहरों में दूषित जलापूर्ति को लेकर आक्रोश है। लेकिन</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180368/thirst-in-summer-flood-in-rain-big-question-on-development"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/whatsapp-image-2026-05-31-at-6.28.39-pm-(1).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong> </strong>21<span lang="hi" xml:lang="hi">वीं सदी का भारत एक कड़वी विडंबना के दौर से गुजर रहा है। एक ओर देश अंतरिक्ष में नई ऊंचाइयां छू रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर करोड़ों लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझ रहे हैं। वर्ष </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">की भीषण गर्मी ने विकास की चमक के पीछे छिपी हकीकत उजागर कर दी है। कई क्षेत्रों में तापमान </span>48 <span lang="hi" xml:lang="hi">डिग्री सेल्सियस पार कर चुका है। बाड़मेर जैसे इलाकों में गांव एक हैंडपंप के सहारे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाएं मीलों दूर से पानी ला रही हैं और शहरों में दूषित जलापूर्ति को लेकर आक्रोश है। लेकिन कुछ ही सप्ताह बाद मानसून आते ही यही देश जल संकट से निकलकर जल प्रलय में घिर जाता है। सड़कें नदियां बन जाती हैं और जनजीवन थम जाता है। आखिर यह कैसा विकास है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां गर्मी में प्यास और बारिश में सैलाब नियति बन चुके हैं</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह संकट प्रकृति नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विकास और जल प्रबंधन की उपेक्षा का परिणाम है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार अप्रैल </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में देश के </span>166 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण क्षमता का लगभग </span>39 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत ही बचा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो मई में और घट गया। कई बड़े जलाशय आधी क्षमता से नीचे पहुंच गए। पिछले वर्षों में वर्षा के असमान वितरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बढ़ती गर्मी और कमजोर जल प्रबंधन ने संकट को गहरा किया है। वहीं </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में एल-नीनो के प्रभाव से सामान्य से कम मानसून की आशंका है। दूसरी ओर भूजल का बेलगाम दोहन हालात और बिगाड़ रहा है। दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहर जल संकट के साथ भूमि धंसाव जैसे खतरों का भी सामना कर रहे हैं। स्पष्ट है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह केवल आज की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य की भी गंभीर चुनौती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस संकट की जड़ अंधाधुंध शहरीकरण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने प्रकृति और पानी का संतुलन तोड़ दिया है। कभी तालाब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झीलें और आर्द्रभूमियां वर्षा जल संजोती थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आज उनकी जगह कंक्रीट के जंगल उग आए हैं। नतीजा यह है कि बारिश का पानी जमीन में उतरने के बजाय सड़कों और नालों में बह जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि गर्मियों में भूजल खाली पड़ जाता है। मानो हम बरसात में पानी को ठुकराते हैं और फिर गर्मी में उसकी तलाश में भटकते हैं। दुर्भाग्य से विकास की परिभाषा ऊंची इमारतों और चौड़ी सड़कों तक सिमट गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि जल संरक्षण हाशिये पर है। यही सोच आज जल संकट और जलभराव—दोनों की सबसे बड़ी वजह है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में जल संकट का कारण केवल पानी की कमी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसके उपयोग और प्रबंधन की खामियां भी हैं। कृषि और शहर मिलकर देश के </span>80 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत से अधिक भूजल का दोहन कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी जल व्यवस्था चरमराई हुई है। शहरों में लाखों लीटर पानी पाइपलाइन लीकेज में बह जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कई बस्तियां बूंद-बूंद को तरसती हैं। दूसरी ओर सीमित जल वाले क्षेत्रों में भी अत्यधिक पानी मांगने वाली फसलें उगाई जा रही हैं। नतीजा यह है कि गर्मियों में जलाशय सूख जाते हैं और बरसात में वही पानी अनियंत्रित होकर तबाही मचाता है। स्पष्ट है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह संकट संसाधनों के अभाव से अधिक गलत प्रबंधन और विकृत प्राथमिकताओं का परिणाम है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गर्मी की प्यास और बारिश की तबाही का सबसे भारी बोझ समाज के कमजोर वर्गों पर पड़ रहा है। गांवों में पेयजल संकट स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खेती और पशुधन—तीनों पर चोट कर रहा है। सूखती फसलें किसानों की आय घटा रही हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कमजोर बना रही हैं। वहीं शहरों में जलभराव और बाढ़ यातायात</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कारोबार और जनजीवन को ठप कर देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही बीमारियों का खतरा बढ़ा देते हैं। गरीब परिवारों के घर डूबते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोज़गार प्रभावित होता है और जीवन स्तर गिरता है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जल संकट और जल प्रलय की सबसे बड़ी कीमत वही लोग चुका रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनकी इन समस्याओं को पैदा करने में सबसे कम भूमिका है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह संकट अब केवल पर्यावरण या समाज तक सीमित नहीं रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता की चुनौती बन चुका है। पानी सीधे खाद्य सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनस्वास्थ्य और सामाजिक संतुलन से जुड़ा है। यदि जल स्रोत लगातार कमजोर होते रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो भविष्य में जल विवाद बढ़ेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि उत्पादन घटेगा और शहरों की जीवन क्षमता पर भी संकट गहराएगा। जो राष्ट्र अपने नागरिकों के लिए पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता सुनिश्चित नहीं कर सकता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका विकास भी लंबे समय तक टिक नहीं सकता। इसलिए पानी को महज़ एक संसाधन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राष्ट्र निर्माण और विकास की आधारशिला मानने का समय आ गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राह मुश्किल जरूर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन समाधान सामने हैं। जरूरत केवल दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति और जनभागीदारी की है। हर शहर और गांव में वर्षा जल संचयन अनिवार्य बनाना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि तालाबों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झीलों और पारंपरिक जलस्रोतों को पुनर्जीवित करना होगा। शहरी विकास ऐसा हो कि वर्षा जल जमीन में समा सके और स्मार्ट ड्रेनेज व्यवस्था भूजल का आधार बने। कृषि में ड्रिप सिंचाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूक्ष्म सिंचाई और क्षेत्रानुकूल फसल चक्र को बढ़ावा देना होगा। साथ ही जल वितरण व्यवस्था दुरुस्त कर पाइपलाइन लीकेज पर अंकुश लगाना होगा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और लोगों को जल संरक्षण का भागीदार बनाना होगा। बदलाव घोषणाओं से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि ईमानदार और सख्त क्रियान्वयन से आएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं है कि भारत कितना विकसित हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह है कि क्या वह अपने लोगों के लिए पानी सुरक्षित रख पाया। गर्मी में प्यास और बारिश में सैलाब की यह विडंबना हमारी विकास यात्रा पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। यदि जल संरक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जल साक्षरता और जल के न्यायपूर्ण वितरण को राष्ट्रीय संकल्प नहीं बनाया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आने वाली पीढ़ियां हमारी दूरदर्शिता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी लापरवाही को याद रखेंगी। विकास का वास्तविक पैमाना कंक्रीट के जंगल नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हर नागरिक तक स्वच्छ और पर्याप्त पानी की पहुंच है। भारत को अब जल-केंद्रित विकास की दिशा में बढ़ना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि भविष्य की समृद्धि का रास्ता पानी से होकर गुजरता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180368/thirst-in-summer-flood-in-rain-big-question-on-development</link>
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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 18:30:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इंसानियत सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं होती.. इस की मिसाल है पहल 'दाना-पानी'।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>  ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
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<div style="text-align:justify;">गर्मी जब अपने चरम पर होती है, तो इंसान छाँव ढूँढ लेता है, कहीं बाहर होने पर या न मिलने पर पानी खरीद कर पी लेता है, कुल मिलाकर प्यास बुझाने के हजार रास्ते तलाश लेता है.. लेकिन, उन बेज़ुबान परिंदों और जानवरों का क्या, जो न तो किसी के घर का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं, न ही अपनी प्यास की वजह से हुए अपने बेहाल हुए हाल की दास्ताँ बयाँ कर सकते हैं? तेज धूप में झुलसती सड़कों पर, सूखी छतों और वीरान कोनों में जब कोई चिड़िया अपनी चोंच खोलकर बेबस निगाहों से आसमान</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179343/humanity-is-not-limited-to-humans-only-pahal-dana-paani-is"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260513-wa0066.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गर्मी जब अपने चरम पर होती है, तो इंसान छाँव ढूँढ लेता है, कहीं बाहर होने पर या न मिलने पर पानी खरीद कर पी लेता है, कुल मिलाकर प्यास बुझाने के हजार रास्ते तलाश लेता है.. लेकिन, उन बेज़ुबान परिंदों और जानवरों का क्या, जो न तो किसी के घर का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं, न ही अपनी प्यास की वजह से हुए अपने बेहाल हुए हाल की दास्ताँ बयाँ कर सकते हैं? तेज धूप में झुलसती सड़कों पर, सूखी छतों और वीरान कोनों में जब कोई चिड़िया अपनी चोंच खोलकर बेबस निगाहों से आसमान की तरफ देखती है, यह मंज़र ही काफी है दिल को भीतर तक हिला देने के लिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> ये वही पल होते हैं, जब इंसानियत की असली परीक्षा होती है और कुछ लोग इस परीक्षा में खरे उतरते हैं। शहर की तेजी से उभरती संस्था बीइंग रेस्पॉन्सिबल इस भावना को लगभग चार वर्षों से सर्वोपरि रखे हुए है। संस्था इस भावना को अपने कार्यों में उतारते हुए हर साल गर्मियों में 'दाना-पानी' अभियान संचालित करती है।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वो बोल नहीं सकते.. इसलिए उनकी प्यास सुनाई नहीं देती। वो माँग नहीं सकते.. इसलिए उनकी तकलीफ दिखाई नहीं देती। लेकिन, उनका दर्द उतना ही सच्चा है, जितना कि हमारा। "बेजुबान हैं तो क्या हुआ, प्यास उन्हें भी लगती है.." थीम पर यही एहसास, पिछले कई वर्षों से एक खूबसूरत पहल को जिंदा रखे हुए है। यह पहल कोई एक बार का प्रयास नहीं, बल्कि लगातार कई वर्षों से हर गर्मी में दोहराई जा रही एक जिम्मेदारी है, जो बेज़ुबानों के लिए जीवन का सहारा बनती जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस वर्ष भी संस्था ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में 200 से अधिक मिट्टी के सकोरे और दाने वितरित किए हैं, ताकि पक्षियों और जानवरों को इस भीषण गर्मी में थोड़ी राहत मिल सके। ये सकोरे सिर्फ मिट्टी के बर्तन नहीं हैं.. ये उम्मीद हैं, राहत हैं, और कई जिंदगियों के लिए जीवन की डोर हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संस्था बीइंग रेस्पॉन्सिबल का मानना है कि यदि हर व्यक्ति अपने घर के बाहर, छत पर या आसपास सिर्फ एक सकोरा रख दे और हर दिन उसमें पानी भरने की जिम्मेदारी ले ले, तो न जाने कितने ही मासूम जीवन बचाए जा सकते हैं। यह छोटा-सा प्रयास किसी के लिए पूरी दुनिया बन सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संस्था इस पहल को सिर्फ सेवा नहीं, बल्कि एक एक विचार के रूप में आगे बढ़ा रही है, एक ऐसा संवेदनशील विचार, जो हमें यह एहसास कराता है कि इस दुनिया में सिर्फ इंसानों का ही नहीं, बल्कि हर जीव का समान हक है। जब एक चिड़िया प्यास से तड़पती है, तो वह सिर्फ एक पक्षी नहीं होती, वह हमारे भीतर की इंसानियत का आईना होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बीइंग रेस्पॉन्सिबल द्वारा की जा रही यह अद्भुत पहल सालों से बिना किसी शोर के चल रही है, जिसमें न तो कोई दिखावा और न ही किसी प्रकार की अपेक्षा.. यह सिर्फ और सिर्फ एक सच्चा प्रयास है, जो हर गर्मी में किसी बेज़ुबान पंछी की प्यास के लिए राहत बन जाता है। धीरे-धीरे यह भावना लोगों के दिलों तक पहुँच रही है। अब कई लोग खुद आगे आकर अपने घरों और आसपास पानी रखने लगे हैं, इस पहल को अपनाने लगे हैं। क्योंकि सच्चाई यही है कि इंसानियत सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं होती.. वह हर उस जीवन में होती है, जो इसे महसूस करता है, भले ही बोल नहीं पाता। और शायद, यही वह पल होता है, जब हम सिर्फ जीते नहीं, बल्कि किसी और को भी जीने देने का कारण बन जाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मिट्टी के एक छोटे-से सकोरे में पानी भरकर रखना भले ही हमें साधारण लगे.. लेकिन हमें यह भूलना नहीं चाहिए कि शहरों में ऊँची-ऊँची इमारतें खड़ी करने की होड़ में पेड़ों और जलस्त्रोतों को खत्म करके हम इन नन्हें जीवों से उनके हक के आशियाने और पीने के संसाधन धीरे-धीरे करके छीनते चले जा रहे हैं। ऐसे में ये सकोरे किसी डूबते को तिनके के सहारे के समान हैं।</div>
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<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 18:09:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्रामीण विकास की नई दिशा: रोजगार से समृद्धि तक का सफर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत के ग्रामीण विकास की कहानी समय के साथ लगातार बदलती रही है। कभी रोजगार गारंटी योजनाओं का मुख्य उद्देश्य केवल गरीब परिवारों को अस्थायी राहत देना था, लेकिन अब देश गांवों को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी सोच के साथ नया ग्रामीण रोजगार एवं विकास ढांचा सामने आया है, जिसका उद्देश्य केवल मजदूरी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि गांवों में स्थायी विकास की नींव तैयार करना है।</p>
<p>नई व्यवस्था में रोजगार की गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिनों तक करने का प्रस्ताव ग्रामीण परिवारों के लिए बड़ी राहत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179217/new-direction-of-rural-development-journey-from-employment-to-prosperity"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/kishan.png" alt=""></a><br /><p>भारत के ग्रामीण विकास की कहानी समय के साथ लगातार बदलती रही है। कभी रोजगार गारंटी योजनाओं का मुख्य उद्देश्य केवल गरीब परिवारों को अस्थायी राहत देना था, लेकिन अब देश गांवों को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी सोच के साथ नया ग्रामीण रोजगार एवं विकास ढांचा सामने आया है, जिसका उद्देश्य केवल मजदूरी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि गांवों में स्थायी विकास की नींव तैयार करना है।</p>
<p>नई व्यवस्था में रोजगार की गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिनों तक करने का प्रस्ताव ग्रामीण परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। इससे खेतिहर मजदूरों, छोटे किसानों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को अतिरिक्त आय का सहारा मिलेगा। साथ ही मजदूरी भुगतान को समयबद्ध और सीधे बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था पारदर्शिता को मजबूत करेगी।</p>
<p>इस नई योजना की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रोजगार को गांवों के विकास कार्यों से जोड़ा गया है। अब केवल अस्थायी काम कराने के बजाय जल संरक्षण, सिंचाई व्यवस्था, ग्रामीण सड़कें, भंडारण केंद्र, मत्स्य पालन, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां और जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे जैसे कार्यों पर जोर दिया जाएगा। इससे गांवों में रोजगार के साथ-साथ स्थायी परिसंपत्तियां भी तैयार होंगी।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि जल संरक्षण और सिंचाई परियोजनाएं कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद करेंगी, जबकि ग्रामीण बाजार और भंडारण सुविधाएं किसानों की आय में सुधार ला सकती हैं। इसके अलावा छोटे स्तर के ग्रामीण उद्योगों और स्थानीय उद्यमों को भी बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p>नई व्यवस्था में ग्राम पंचायतों की भूमिका भी पहले से अधिक महत्वपूर्ण होगी। गांव स्तर पर विकास योजनाएं तैयार की जाएंगी और स्थानीय जरूरतों के अनुसार कार्यों का चयन होगा। इससे योजनाओं में स्थानीय भागीदारी बढ़ेगी और विकास अधिक प्रभावी बन सकेगा।</p>
<p>तकनीक के इस्तेमाल पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। डिजिटल उपस्थिति प्रणाली, भू-टैगिंग, सामाजिक ऑडिट और ऑनलाइन निगरानी जैसी व्यवस्थाएं भ्रष्टाचार कम करने और जवाबदेही बढ़ाने में मदद करेंगी।</p>
<p>ग्रामीण भारत आज तेजी से बदल रहा है। ऐसे समय में केवल रोजगार देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। गांवों को मजबूत बुनियादी ढांचा, बेहतर कृषि व्यवस्था और स्थानीय आर्थिक अवसरों की जरूरत है। यही कारण है कि यह नया मॉडल रोजगार योजना से आगे बढ़कर ग्रामीण समृद्धि का आधार बनने की कोशिश करता दिखाई देता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 12:27:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जलवायु परिवर्तन का गहराता संकट: युद्ध, समुद्री तापमान और ‘वेस्टर्न वेव्स’ का भारत पर प्रभाव</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ | </strong>अप्रैल..., 2026 अप्रैल का महीना, जो कभी वसंत की सुखद अनुभूति का प्रतीक माना जाता था, आज 40–43°C की झुलसा देने वाली गर्मी का संकेतक बन गया है। उत्तर भारत, विशेषकर लखनऊ, दिल्ली, राजस्थान और मध्य गंगा के मैदानों में यह तापमान अब असामान्य नहीं रहा, बल्कि एक नई सामान्य स्थिति (New Normal) के रूप में उभर रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> यह परिवर्तन केवल मौसमी नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक स्तर पर चल रही जटिल प्रक्रियाएँ—जैसे जलवायु परिवर्तन, समुद्री तापमान में वृद्धि, और अंतरराष्ट्रीय युद्ध—मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177842/deepening-crisis-of-climate-change-war-sea-temperature-and-impact"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/4416221.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ | </strong>अप्रैल..., 2026 अप्रैल का महीना, जो कभी वसंत की सुखद अनुभूति का प्रतीक माना जाता था, आज 40–43°C की झुलसा देने वाली गर्मी का संकेतक बन गया है। उत्तर भारत, विशेषकर लखनऊ, दिल्ली, राजस्थान और मध्य गंगा के मैदानों में यह तापमान अब असामान्य नहीं रहा, बल्कि एक नई सामान्य स्थिति (New Normal) के रूप में उभर रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> यह परिवर्तन केवल मौसमी नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक स्तर पर चल रही जटिल प्रक्रियाएँ—जैसे जलवायु परिवर्तन, समुद्री तापमान में वृद्धि, और अंतरराष्ट्रीय युद्ध—मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक दशक में अप्रैल माह के अधिकतम तापमान में स्पष्ट वृद्धि देखी गई है - यह आकड़ा वर्ष के सापेक्ष अधिकतम तापमान (°C) का 2015-40.7, 2016-43.1, 2017-41.8, 2018-40.7, 2019-44.6, 2020-38.8, 2021-41.9, 2022~43.0, 2023-39.0, 2024-41.0, 2025-42.0, और 2026-43.0 से ऊपर (27 अप्रैल तक)।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">[Chitra-Gragh] इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि तापमान में गिरावट केवल अस्थायी रही है (जैसे 2020 में), जबकि दीर्घकालिक प्रवृत्ति लगातार वृद्धि की [Chitra-Gragh] महामारी और तापमान: एक अस्थायी राहत 2020 में COVID-19 लॉकडाउन के दौरान तापमान 38.8°C तक गिर गया था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> इसका मुख्य कारण था—वाहनों की आवाजाही में कमी, औद्योगिक गतिविधियों का ठहराव और वायु प्रदूषण में गिरावट हालाँकि, यह गिरावट स्थायी नहीं रही। जैसे ही गतिविधियाँ पुनः शुरू हुईं, तापमान फिर से तेजी से बढ़ने लगा। युद्ध और जलवायु परिवर्तन का संबंध वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन और युद्ध के बीच एक खतरनाक संबंध उभरकर सामने आया है, जिनका मुख्य प्रभाव: सैन्य उपकरणों में भारी ईंधन खपत, बमबारी और आग से कार्बन उत्सर्जन और ऊर्जा बुनियादी ढांचे का विनाश ही कहा जा सकता है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध और 2026 में मध्य-पूर्व के संघर्षों के दौरान तापमान का 43°C के आसपास पहुँचना इस संबंध को मजबूत करता है। युद्ध केवल मानव जीवन ही नहीं, बल्कि पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन को भी गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। ‘वेस्टर्न वेव्स’ (पश्चिमी विक्षोभ) का बदलता स्वरूप भारत में आने वाले पश्चिमी विक्षोभ अब अनियमित और अधिक तीव्र होते जा रहे हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जिससे प्रमुख परिवर्तन जो महसूस किये गए, वह है -अचानक वर्षा और ओलावृष्टि, उसके तुरंत बाद भीषण हीटवेव और तापमान में तीव्र उतार-चढ़ाव (25°C से 43°C तक) होता रहा । इससे दुष्प्रभाव न ही रबी फसलों (विशेषकर गेहूं) पर संकट छाया बल्कि किसानों की आय पर असर हुआ और तरह–तरह की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं में अप्रत्यासित वृद्धि हुई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> शहरी भारत और ‘हीट आइलैंड’ प्रभाव लखनऊ, दिल्ली और पटियाला जैसे शहरों में कंक्रीट संरचनाओं और हरियाली की कमी के कारण “अर्बन हीट आइलैंड” प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। जिसके परिणाम स्वरुप शहरों में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक गर्म, रात का भी तापमान 30°C से ऊपर रहता है जिससे शरीर को भी आराम नहीं मिल पा रहा है और आम जनता बेहाल है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भविष्य का संकट (2026–2030) यदि वर्तमान प्रवृत्ति जारी रही, तो आने वाले वर्षों में भारत को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि पिछले 15 दिनों से अधिक लंबी हीटवेव, सभी शहरों/देहातों में भी भरी जल संकट और भूजल स्तर में गिरावट पायी जा रही है। इसके साथ ही ऊर्जा  मांग में भी तीव्र वृद्धि हो रही है। उक्त कारणों से GDP में 4–6% तक संभावित कमी से भी नकारा नहीं जा सकता है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह भी अनुमान लगाया जा सकता है कि 2030 के बाद स्थिति और गंभीर हो सकती है, जब तापमान 48–50°C तक पहुँचने की संभावना बनी हुई है। समाधान: क्या किया जा सकता है? इस संकट से निपटने के लिए बहुआयामी प्रयास आवश्यक हैं:</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">1. पर्यावरणीय उपाय-अब हमें वृक्षारोपण और वन संरक्षण में अभियान स्वरुप सरकार के साथ कन्धा से कंधा मिलाकर काम करना होगा तथा जैव विविधता का संरक्षण के लिए प्रभावी कार्य की आवश्यकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">2. ऊर्जा परिवर्तन- यद्यपि भारतवर्ष में वर्तमान सरकार ने आम जनता से लेकर व्यवसायिक संस्थाओं तक तेजी से सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है , परन्तु इसे वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर भारत के साथ ही ऊर्जा हेतु आत्म निर्भर होना होगा | इसी के साथ – साथ जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना पड़ेगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">3.जल प्रबंधन- अभी तक भारतवर्ष में सरकार प्रयासों के बावजूद भी आम जनता में वर्षा जल संचयन के बारें में नगण्य जानकारी हो पाई है और नहीं जल संरक्षण तकनीकों का उपयोग का उपयोग किया जा रहा है, केवल कागजी कार्यवाही तक सीमित रह गया है । इस क्षेत्र में अभियान चलाकार जागरूक करने और प्रभावी कार्य करने की आवश्यकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">4. शहरी योजना- भारत सरकार ने स्मार्टसिटी व ग्रीन सिटी मॉडल की योजनायें चलाई, इसका कोई प्रभावी असर अभी तक दिखाई न पड़ रहा है और नहीं कम कंक्रीट और अधिक हरियाली ही किसी शहरी अथवा कस्बो पर्याप्त असर छोड़ रहा है। इस पर अधिक प्रभावी कार्य करने की आवश्यकता है ।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">5. सामाजिक भागीदारी- उपरोक्त से स्पष्ट है कि जो योजनाये प्रभावीरूप से संचालित  नहीं हो पा रही हैं, उनमें जन-जागरूकता अभियान चलाना तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए  जन आंदोलन चलाना अत्यंत आवश्यक है ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 19:44:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सूखी नहरे सूखे तालाब पानी की तलाश में भटक रहे बेजुबान जानवर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में भीषण गर्मी तपती धूप में बेजुबान पानी बगैर तरस रहे हैं जिले में सुखी नहरे तालाब गड्ढे में पानी न होने से जंगली जानवर नील गाय पशु पक्षी बेजुबान पानी के लिए तरस रहे हैं जिला प्रशासन एक के कमरों में बैठकर आदेश देती रहती है लेकिन सूखी नारे सूखे तालाब बेजुबानों के लिए हलक सूख रहा है जिला प्रशासन बिजवानों के लिए ना तो नहरे में पानी की व्यवस्था कर रहे हैं और ना ही तालाबों और नहरे में पानी छुड़वाने का काम कर रहे हैं कैसे बेजुबान जानवर भीषण तपती गर्मी में बेहाल नजर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177402/dry-canals-dry-ponds-dumb-animals-wandering-in-search-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260427-wa0051.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में भीषण गर्मी तपती धूप में बेजुबान पानी बगैर तरस रहे हैं जिले में सुखी नहरे तालाब गड्ढे में पानी न होने से जंगली जानवर नील गाय पशु पक्षी बेजुबान पानी के लिए तरस रहे हैं जिला प्रशासन एक के कमरों में बैठकर आदेश देती रहती है लेकिन सूखी नारे सूखे तालाब बेजुबानों के लिए हलक सूख रहा है जिला प्रशासन बिजवानों के लिए ना तो नहरे में पानी की व्यवस्था कर रहे हैं और ना ही तालाबों और नहरे में पानी छुड़वाने का काम कर रहे हैं कैसे बेजुबान जानवर भीषण तपती गर्मी में बेहाल नजर आ रहे हैं पानी के लिए तड़प रहे बेजुबान सूखी नहर तालाब जिम्मेदार बेपरवाह जिले के हरैया तहसील क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जहां भीषण गर्मी के बीच बेजुबान पशु पक्षियों की हालत गंभीर जंगली जानवर गांव की तरफ पलायन कर रहे हैं जिससे ग्रामीणों को भारी नुकसान होने की आशंका है नहर तालाब और पोखरे पूरी तरह सूख चुके  जिससे पानी के अभाव में जानवर दर-दर भटकने को मजबूर ग्रामीण क्षेत्रों में इनका आवागमन हो गया है पानी की तलाश में इधर-उधर भटक रहे जानवर ग्रामीणों को नुकसान पहुंचा रहे हैं क्षेत्र में जलस्रोतों की हालत बद से बदतर हो चुकी लेकिन जिम्मेदार अधिकारी एसी कमरों में बैठकर सिर्फ आदेश जारी करने तक सीमित. धरातल पर कुछ दिखाई नहीं देता है</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कागजों में लाखों रुपए का जलाशय भराव के लिए पैसा खर्च हो जा रहा है लेकिन स्थित सुखी तालाब नहरे बयां कर रही है कि भ्रष्टाचार करके जल स्रोतों का भंडारण नहीं हो पा रहा है नदिया सुख रही है नदियों की सफाई नहीं की जा रही जिसके कारण पानी नहीं रख रहा हैजमीनी स्तर पर राहत के कोई ठोस इंतजाम नजर नहीं पानी की तलाश में पशु-पक्षी गांव और सड़कों की ओर भटक रहे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल पानी की व्यवस्था कराने और सूखे जलस्रोतों को भरवाने की मांग की व्यवस्था करनी चाहिए </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो यह स्थिति भयावह हो सकती है बड़ी संख्या में बेजुबान जानवरों की जान जा सकती हैसवाल यह है कि आखिर कब जागेगा जिला प्रशासन बेजुबानों को कब जल का व्यवस्था कराएगी सरकार केवल कागजों में तालाबों में पानी भरा जा रहा है नहरे में पानी सप्लाई हो रही है लेकिन सब सुखी नजर आ रही है कहीं पानी की व्यवस्था सरकार नहीं कर पा रही है जिला प्रशासन आदेश देकर के अपने एक ऑफिस में बैठे रहते हैं जंगली जानवर और बेजुबान पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था सरकार नहीं कर पा रही है</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177402/dry-canals-dry-ponds-dumb-animals-wandering-in-search-of</link>
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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:45:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आग उगलती भीषण गर्मी में प्यासे कंठों की कौन सुने दास्तां</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के कई राज्यों में इस समय भीषण और भयावह गर्मी का प्रकोप जारी है। हर वर्ष तापमान अपने पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए नई ऊंचाइयां छू रहा है। आसमान से बरसती आग ने मानो समस्त जीव-जंतुओं के कंठ सूखा दिए हैं। यह बढ़ती हुई भीषण गर्मी कहीं न कहीं मानव द्वारा किए जा रहे पर्यावरण के अंधाधुंध दोहन और प्रकृति-विनाश का परिणाम है। इसी के चलते जल के प्राकृतिक स्रोत समाप्त हो रहे हैं और भूजल स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जंगलों के अंधाधुंध विनाश के कारण अनेक प्राकृतिक जल स्रोत सूख चुके हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे मूक वन्यजीवों</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177391/who-will-listen-to-the-tales-of-thirsty-throats-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/download2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के कई राज्यों में इस समय भीषण और भयावह गर्मी का प्रकोप जारी है। हर वर्ष तापमान अपने पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए नई ऊंचाइयां छू रहा है। आसमान से बरसती आग ने मानो समस्त जीव-जंतुओं के कंठ सूखा दिए हैं। यह बढ़ती हुई भीषण गर्मी कहीं न कहीं मानव द्वारा किए जा रहे पर्यावरण के अंधाधुंध दोहन और प्रकृति-विनाश का परिणाम है। इसी के चलते जल के प्राकृतिक स्रोत समाप्त हो रहे हैं और भूजल स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जंगलों के अंधाधुंध विनाश के कारण अनेक प्राकृतिक जल स्रोत सूख चुके हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे मूक वन्यजीवों के जीवन पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पानी प्रकृति के समस्त जीवों की मूलभूत और अनिवार्य आवश्यकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन विडंबना यह है कि जब यही आवश्यकता पूरी नहीं हो पा रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जीवों के अस्तित्व पर संकट गहराना स्वाभाविक है।</span></p><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह स्वीकार करना होगा कि आजादी के साढ़े सात दशक बाद भी देश के कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को पेयजल के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसे में यह कल्पना करना कठिन नहीं कि वन्यजीव अपनी प्यास बुझाने के लिए कितनी कठिनाइयों का सामना करते होंगे। मानव जीवन के लिए शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने हेतु केंद्र और राज्य सरकारें हर वर्ष अनेक प्रयास करती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जमीनी स्तर पर ये प्रयास अभी भी अपर्याप्त सिद्ध हो रहे हैं। विशेषकर सुदूर ग्रामीण अंचलों में पेयजल व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सरकार की ‘नल-जल योजना’ एक महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी पहल है। बावजूद इसके</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई स्थानों पर जिला प्रशासन की उदासीनता के कारण इन योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। अनेक गाँवों में बनी पानी की टंकियाँ केवल दिखावा बनकर रह गई हैं। ये टंकियाँ प्यासे कंठों को राहत देने के बजाय व्यवस्था की खामियों का प्रतीक बनती जा रही हैं।</span></p><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पानी हर जीव की मूलभूत आवश्यकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और यदि इसी आवश्यकता की पूर्ति में कमी रह जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह न केवल गंभीर लापरवाही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अक्षम्य अपराध के समान है। भीषण गर्मी में जब लोग घर से बाहर निकलने से बचते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब ग्रामीण क्षेत्रों के लोग मीलों दूर से पानी लाने को विवश होते हैं। जल संकट के कारण मूक पशु-पक्षियों का जीवन बचाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति-विनाश के चलते बढ़ती गर्मी और अस्तित्व बचाने के लिए भटकते वन्यजीव—ये दोनों ही हमारी सामूहिक जिम्मेदारी हैं। ऐसे में सरकार और समाज को मिलकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के अंतिम छोर तक मानव और वन्य प्राणियों के लिए पेयजल की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। यदि इस दिशा में ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ कार्य किया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो देश के हर कोने में सभी जीवों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित जल उपलब्ध कराया जा सकता है। अन्यथा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर वर्ष की भाँति आग उगलती गर्मी में प्यासे मूक प्राणियों की दास्तां अधूरी ही रह जाएगी।</span></p><p style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अरविंद रावल</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:28:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर धरा का किया गया जलाभिषेक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी प्रयागराज।</strong> बुधवार को विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर परमार्थ त्रिवेणी पुष्प,अरैल, प्रयागराज में प्रकृति, पर्यावरण एवं जल संरक्षण को समर्पित एक प्रेरणादायी जलाभिषेक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती का प्रेरणादायी उद्बोधन  हुआ।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में पद्मश्री एवं पद्मभूषण से सम्मानित प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, संजय स्वामी, राष्ट्रीय सह संयोजक, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली, स्वामी वेद विद्यानन्द जी, योगी शुक्राई नाथ जी सहित अनेक गणमान्य अतिथियों, पूज्य संतों, समाजसेवियों, शिक्षाविदों एवं पर्यावरणविदों की गरिमामयी उपस्थिति रही।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">स्वामी चिदानन्द सरस्वती  ने अपने आशीर्वचन में कहा कि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176954/jalabhishek-of-earth-was-done-on-the-occasion-of-world"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260422-wa0315.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी प्रयागराज।</strong> बुधवार को विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर परमार्थ त्रिवेणी पुष्प,अरैल, प्रयागराज में प्रकृति, पर्यावरण एवं जल संरक्षण को समर्पित एक प्रेरणादायी जलाभिषेक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती का प्रेरणादायी उद्बोधन  हुआ।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में पद्मश्री एवं पद्मभूषण से सम्मानित प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, संजय स्वामी, राष्ट्रीय सह संयोजक, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली, स्वामी वेद विद्यानन्द जी, योगी शुक्राई नाथ जी सहित अनेक गणमान्य अतिथियों, पूज्य संतों, समाजसेवियों, शिक्षाविदों एवं पर्यावरणविदों की गरिमामयी उपस्थिति रही।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">स्वामी चिदानन्द सरस्वती  ने अपने आशीर्वचन में कहा कि पृथ्वी केवल ग्रह नहीं, हमारी माता है। पृथ्वी केवल संसाधनों का भंडार नहीं, बल्कि समस्त जीवन का आधार है। यदि धरती सुरक्षित है, तो मानवता, संस्कृति, सभ्यता और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित है। जल, जंगल, जमीन और जीवन ये सब एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। यदि हम पृथ्वी को बचाना चाहते हैं तो हमें जल संरक्षण, वृक्षारोपण और सतत जीवनशैली को अपनाना होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ने सदैव प्रकृति को पूजनीय माना है। हमारे वेदों, उपनिषदों और सनातन परंपरा में पृथ्वी, नदियों, पर्वतों और वृक्षों को देवतुल्य सम्मान दिया है।स्वामी जी ने उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया कि हर व्यक्ति अपने जीवन में जल बचाने, प्लास्टिक मुक्त जीवन अपनाने, वृक्ष लगाने तथा पर्यावरण संरक्षण हेतु व्यक्तिगत संकल्प ले। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि बिन अर्थ (पृथ्वी), सब व्यर्थ। यह सम्पूर्ण जीवन का शाश्वत सत्य है। यदि पृथ्वी न हो, तो न जीवन होगा, न जल होगा, न वायु होगी, न अन्न होगा और न ही यह सुंदर संसार होगा। हमारी हर साँस, हर धड़कन, हर आशा और हर भविष्य पृथ्वी पर ही आधारित है। इसलिए पृथ्वी का संरक्षण केवल पर्यावरण की बात नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पद्मश्री एवं पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी जी ने कहा कि पृथ्वी को बचाने का समय अभी है। यदि हमने आज प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें क्षमा नहीं करेंगी। उन्होंने युवाओं से विज्ञान, संस्कार और संवेदनशीलता के साथ पर्यावरण संरक्षण में आगे आने का आह्वान किया।महापौर गणेश केशरवानी ने प्रयागराज को स्वच्छ, हरित बनाने के लिए नगर निगम द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">संजय स्वामी ने शिक्षा के माध्यम से पर्यावरण चेतना को जन-जन तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया।कार्यक्रम के अंतर्गत पवित्र जल से पृथ्वी एवं प्रकृति के प्रतीक स्वरूप जलाभिषेक किया गया तथा सभी ने मिलकर “धरती बचाओ, जल बचाओ, भविष्य बचाओ” का संकल्प लिया। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस दिव्य अवसर पर अशोक मेहता , अपर महाधिवक्ता, विधायक जवाहर लाल राजपूत,प्रो कपिलदेव मिश्रा पूर्व कुलपति रानीदुर्गावती, प्रो राजाराम यादव, पूर्व कुलपति,  अनामिका चौधरी, सुबेदार इमृतलाल, गंगा टास्कफोर्स,न्यायमूर्ति सुधीरनारायण अग्रवाल, स्वामी मदनगोपाल दास जी और अनेक विभूतियों की  उपस्थिति रही।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 20:16:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बभनकुइया में जल अर्पण दिवस व विश्व जल दिवस पर भव्य समारोह,।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बभनकुइया ग्राम में रविवार को विश्व जल दिवस एवं जल अर्पण दिवस के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जल जीवन मिशन के अंतर्गत आयोजित हुआ, जिसमें क्षेत्र के ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रवीण पटेल रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, जिससे ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार आए। उन्होंने योजना को जनता को समर्पित करते हुए कहा कि यह पहल गांवों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173905/grand-celebration-on-water-offering-day-and-world-water-day"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260322-wa0133.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बभनकुइया ग्राम में रविवार को विश्व जल दिवस एवं जल अर्पण दिवस के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जल जीवन मिशन के अंतर्गत आयोजित हुआ, जिसमें क्षेत्र के ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रवीण पटेल रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, जिससे ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार आए। उन्होंने योजना को जनता को समर्पित करते हुए कहा कि यह पहल गांवों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर जिला समन्वयक अश्विनी श्रीवास्तव ने कार्यक्रम का संचालन किया। उन्होंने योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस मिशन के तहत गांव में पाइपलाइन के माध्यम से घर-घर जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समारोह के दौरान जल संरक्षण और उसके महत्व पर भी विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने ग्रामीणों से अपील की कि वे जल का विवेकपूर्ण उपयोग करें और वर्षा जल संचयन जैसे उपाय अपनाएं, ताकि भविष्य में जल संकट से बचा जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं ग्रामीणों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। आयोजन के अंत में जल संरक्षण का संकल्प दिलाया गया और योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी को जागरूक किया गया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173905/grand-celebration-on-water-offering-day-and-world-water-day</link>
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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 22:02:10 +0530</pubDate>
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