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                <title>manoj kumar - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>manoj kumar RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सनातन सांस्कृतिक की सौंदर्य आभा में स्नेही बहना ने बांधी भाई की सुन्दर कोमल कलाई पर प्रीत के धागे</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:- </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कच्चे धागों में गुंथा 'अमर प्रेम' का अटूट नाता भरा उत्सव 28 अगस्त को प्रखंड मुख्यालय पाकुड़िया सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े ही उत्साह एवं अनुराग भरे सौम्यता पूर्ण माहौल में सम्पन्न हुआ। रक्षाबंधन की पुनीत व मंगलमयी वेला में बहनों ने अपने भाई के ललाट पर बड़े ही अनुराग भरे भाव लिए तिलक लगाई, मिष्ठान खिलाकर शुभाशीष ली और भाई की सुख-समृद्धि की कामना की। वहीं भाई ने अपनी प्यारी स्नेही बहना को सदा सुखी-सुहागन रहने का शुभाशीष दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">रक्षाबंधन को लेकर प्रखंड के मोंगलाबांध, आमकोना, आलूदाहा, फुलझिंझरी, गनपूरा, राजवाहा, सिंहपुर, बेनाकूड़ा, लखीजोल, गोपालनगर, बनडीगा,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186717/in-the-aura-of-beauty-of-sanatan-sanskriti-the-affectionate"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/news-21.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:- </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कच्चे धागों में गुंथा 'अमर प्रेम' का अटूट नाता भरा उत्सव 28 अगस्त को प्रखंड मुख्यालय पाकुड़िया सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े ही उत्साह एवं अनुराग भरे सौम्यता पूर्ण माहौल में सम्पन्न हुआ। रक्षाबंधन की पुनीत व मंगलमयी वेला में बहनों ने अपने भाई के ललाट पर बड़े ही अनुराग भरे भाव लिए तिलक लगाई, मिष्ठान खिलाकर शुभाशीष ली और भाई की सुख-समृद्धि की कामना की। वहीं भाई ने अपनी प्यारी स्नेही बहना को सदा सुखी-सुहागन रहने का शुभाशीष दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रक्षाबंधन को लेकर प्रखंड के मोंगलाबांध, आमकोना, आलूदाहा, फुलझिंझरी, गनपूरा, राजवाहा, सिंहपुर, बेनाकूड़ा, लखीजोल, गोपालनगर, बनडीगा, अंगरगड़िया, नावाडीह, पाथरडांगा, रामदेव कुंडी, बदरीकुंड, चौकीसाल, पारुलिया, तेतुलिया, रामघाटी, तेगुड़िया, पलासी, श्रीधरपाड़ा, बनो ग्राम, राधानगर, नूनाडंगाल, तालवा, लागडुम, खजूर डंगाल, सागबेरिया एवं दुर्गापुर ग्राम में सौम्यता के साथ प्रेमपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">27 अगस्त को पाकुड़िया के उषा देवी सरस्वती शिशु मंदिर में बहनों ने भाई की कलाइयों पर प्रेम की राखी बांधकर स्नेह का प्रदर्शन किया। जबकि बीच पहाड़ी स्थित एकलव्य विद्यालय की छात्राओं ने थाना प्रभारी मनोज कुमार एवं पुलिस भाइयों की मजबूत कलाइयों पर प्रीत के धागे बांधकर सुरक्षा का आशीर्वचन लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रक्षाबंधन की स्वर्णिम वेला में भाई-बहनों के खिलते प्रसून की अनुराग भरी सुगंध से पाकुड़िया प्रखंड का कोना-कोना सुगंधित होता रहा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 23:03:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मनोज कुमार की 89वीं जयंती पर ज़ी क्लासिक का खास प्रोग्राम।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज से दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कुछ कलाकार सिर्फ मनोरंजन करते हैं, कुछ फिल्में बनाकर यादें छोड़ जाते हैं, लेकिन मनोज कुमार जैसे दिग्गज कलाकार पीढ़ियों के दिलों में हमेशा के लिए बस जाते हैं। 'भारत कुमार' के नाम से मशहूर मनोज कुमार ने देशभक्ति को सिर्फ पर्दे तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे हर भारतीय के दिल का जज़्बा बना दिया। उनकी फिल्मों में सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि यहाँ के लोग, उनके संघर्ष, उनके सपने, उनका त्याग और उनका अटूट हौंसला भी नजर आता था।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस जुलाई,में जब महान अभिनेता, लेखक और निर्देशक</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183657/special-program-of-zee-classic-on-the-89th-birth-anniversary"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260718-wa0040.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज से दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कुछ कलाकार सिर्फ मनोरंजन करते हैं, कुछ फिल्में बनाकर यादें छोड़ जाते हैं, लेकिन मनोज कुमार जैसे दिग्गज कलाकार पीढ़ियों के दिलों में हमेशा के लिए बस जाते हैं। 'भारत कुमार' के नाम से मशहूर मनोज कुमार ने देशभक्ति को सिर्फ पर्दे तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे हर भारतीय के दिल का जज़्बा बना दिया। उनकी फिल्मों में सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि यहाँ के लोग, उनके संघर्ष, उनके सपने, उनका त्याग और उनका अटूट हौंसला भी नजर आता था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस जुलाई,में जब महान अभिनेता, लेखक और निर्देशक मनोज कुमार की 89वीं जयंती है, तब ज़ी क्लासिक उनके शानदार सफर को याद करते हुए एक खास फिल्म फेस्टिवल लेकर आ रहा है। 19 जुलाई से 24 जुलाई तक दर्शकों को उनकी कुछ सबसे यादगार और सुपरहिट फिल्में देखने का मौका मिलेगा। ये वही फिल्में हैं, जिन्होंने मनोज कुमार को भारतीय सिनेमा का अमर सितारा बनाया और जो आज भी दर्शकों को उतनी ही पसंद आती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चार दशक से भी ज्यादा लंबे करियर में मनोज कुमार ने हिंदी सिनेमा को एक नई सोच दी। उस दौर में जब ज्यादातर फिल्में सिर्फ रोमांस और मनोरंजन पर आधारित होती थीं, तब उन्होंने आम आदमी, समाज और देश से जुड़ी कहानियों को बड़े पर्दे पर उतारा। एक अभिनेता के साथ साथ उन्होंने लेखक और निर्देशक के रूप में भी ऐसी फिल्में बनाईं, जो अपनी दमदार कहानी, शानदार संगीत और हमेशा याद रहने वाले संदेश की वजह से आज भी मिसाल मानी जाती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस खास फिल्म फेस्टिवल में मनोज कुमार के सफर की छह शानदार फिल्में दिखाई जाएँगी। शुरुआत होगी ‘रोटी कपड़ा और मकान’ से, जिसमें आम आदमी के संघर्ष और उसके सपनों को बेहद असरदार तरीके से दिखाया गया है। इसके बाद आएगी ‘उपकार’, जिसने उन्हें हमेशा के लिए ‘भारत कुमार’ की पहचान दिलाई। देश के किसान और जवान को समर्पित यह फिल्म आज भी उतनी ही प्रेरणादायक मानी जाती है। इसके बाद ‘पूरब और पश्चिम’ भारतीय संस्कृति और संस्कारों की खूबसूरती को दिखाएगी। ‘शोर’ प्यार, बिछड़ने के दर्द और पिता के जज़्बात की ऐसी कहानी है, जो आज भी दिल को छू जाती है। ‘शहीद’ में मनोज कुमार ने भगत सिंह के किरदार को जिस दमदार अंदाज में निभाया, वो भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार परफॉर्मेंस में गिना जाता है। इस खास सफर का समापन 24 जुलाई को उनकी भव्य फिल्म ‘क्रांति’ के साथ होगा। शानदार कलाकारों से सजी इस फिल्म ने एक बार फिर साबित किया कि मनोज कुमार बड़े कैनवास पर देशभक्ति, त्याग और इंसानियत की कहानियाँ कहने में बेमिसाल थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस खास मौके पर उनके साथ काम कर चुके कई कलाकारों और करीबी दोस्तों ने भी उन्हें याद किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, “जब भी मैं मनोज कुमार जी को याद करता हूँ, तो सिर्फ एक शानदार अभिनेता या निर्देशक याद नहीं आता, बल्कि एक ऐसा इंसान याद आता है, जो अपनी हर फिल्म को पूरी तरह जीता था। उनके लिए सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं था। हर कहानी का एक मकसद होता था और हर किरदार कुछ बड़ा कहता था।   साथ काम करके मैंने सीखा कि किसी भी कलाकार की सबसे बड़ी ताकत उसकी सच्चाई होती है। पूरी इंडस्ट्री उन्हें 'भारत कुमार' कहती थी, लेकिन हमारे लिए वो हमेशा मनोज जी ही रहे, एक बेहद सादगी पसंद, गरिमामय और अपने देश से बेइंतहा प्यार करने वाले इंसान।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हेमा मालिनी ने कहा, “मनोज जी के साथ काम करने की मेरी कई खूबसूरत यादें हैं। उनके सेट पर हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता था। वो अपने कलाकारों को बहुत प्यार और धैर्य से समझाते थे और हमेशा कहते थे कि अभिनय में सच्चाई दिखनी चाहिए, सिर्फ ड्रामा नहीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्यारेलाल ने कहा, “मनोज कुमार जी के लिए संगीत बहुत मायने रखता था। जब भी हम साथ काम करते थे, वे घंटों हमारे साथ बैठकर सिर्फ धुन ही नहीं, बल्कि हर गीत के जज़्बात पर भी बात करते थे। संगीत की उनकी समझ कमाल की थी। उन्हें पता था कि एक गीत सिर्फ फिल्म का हिस्सा नहीं होता, बल्कि पूरी कहानी की धड़कन होता है। शायद यही वजह है कि उनकी फिल्मों के गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं। उनके साथ काम करना हमेशा एक यादगार अनुभव रहा, क्योंकि वे हर बार हमें अपना सर्वश्रेष्ठ देने की प्रेरणा देते थे।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रेम चोपड़ा ने कहा, “मनोज और मैंने सिर्फ फिल्मों में साथ काम नहीं किया, बल्कि ज़िंदगी के भी कई खूबसूरत पल साथ बिताए। कैमरे के सामने और पीछे वो बेहद अनुशासित, मेहनती और अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित रहते थे। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">। मुझे उनकी सबसे बड़ी बात यह लगती थी कि उन्होंने कभी अपने विचारों से समझौता नहीं किया। देश, रिश्तों और इंसानियत पर फिल्में बनाना उनका विश्वास था और उन्होंने इसे हमेशा निभाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ज़ी क्लासिक का यह खास फिल्म फेस्टिवल सिर्फ मनोज कुमार को श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के उस सुनहरे दौर का जश्न भी है, जिसने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया। जिन्होंने उनकी फिल्में देखी हैं, वे एक बार फिर पुरानी यादों को ताजा कर सकेंगे और जिन्होंने नहीं देखीं, उन्हें भारतीय सिनेमा की कुछ बेहतरीन फिल्मों से रूबरू होने का मौका मिलेगा। क्योंकि वक्त बदल सकता है, लेकिन बेहतरीन फिल्में और उन्हें बनाने वाले कलाकार हमेशा अमर रहते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मनोज कुमार की 89वीं जयंती पर 19 जुलाई से 24 जुलाई तक हर शाम 7 बजे से क्लासिक का खास फिल्म फेस्टिवल। 24 जुलाई को उनकी जयंती के मौके पर होगी भव्य फिल्म ‘क्रांति’ की खास प्रस्तुति, </div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 20:10:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>​मॉडर्न नर्सरी वेलफेयर सोसायटी चुनाव: विभिन्न पदों के लिए उम्मीदवारों ने दाखिल किए नामांकन पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>​बरेली।</strong> मॉडर्न नर्सरी वेलफेयर सोसायटी के आगामी संगठन चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चुनाव प्रक्रिया के अंतर्गत चुनाव अधिकारी अवधेश सिंह की देखरेख में विभिन्न पदों के लिए उम्मीदवारों ने अपने नामांकन पत्र खरीदे और विधिवत रूप से दाखिल किए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">​नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह से शांतिपूर्ण, पारदर्शी और लोकतांत्रिक माहौल में संपन्न हुई। इस अवसर पर उपस्थित पदाधिकारियों और उम्मीदवारों में संगठन के प्रति भारी एकजुटता और उत्साह देखने को मिला।</div>
<div style="text-align:justify;">​विभिन्न पदों के लिए नामांकन दाखिल करने वाले उम्मीदवारों का विवरण इस प्रकार है:।</div>
<div style="text-align:justify;">​अध्यक्ष पद: लक्ष्मी गंगवार जी एवं मलकीत सिंह</div>
<div style="text-align:justify;">​उपाध्यक्ष पद:</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181617/candidates-filed-nomination-papers-for-various-posts-in-modern-nursery"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260619-wa0009.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>​बरेली।</strong> मॉडर्न नर्सरी वेलफेयर सोसायटी के आगामी संगठन चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चुनाव प्रक्रिया के अंतर्गत चुनाव अधिकारी अवधेश सिंह की देखरेख में विभिन्न पदों के लिए उम्मीदवारों ने अपने नामांकन पत्र खरीदे और विधिवत रूप से दाखिल किए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह से शांतिपूर्ण, पारदर्शी और लोकतांत्रिक माहौल में संपन्न हुई। इस अवसर पर उपस्थित पदाधिकारियों और उम्मीदवारों में संगठन के प्रति भारी एकजुटता और उत्साह देखने को मिला।</div>
<div style="text-align:justify;">​विभिन्न पदों के लिए नामांकन दाखिल करने वाले उम्मीदवारों का विवरण इस प्रकार है:।</div>
<div style="text-align:justify;">​अध्यक्ष पद: लक्ष्मी गंगवार जी एवं मलकीत सिंह</div>
<div style="text-align:justify;">​उपाध्यक्ष पद: संजीव श्रीवास्तव एवं वंदना यादव</div>
<div style="text-align:justify;">​महामंत्री पद: रूपाली गुप्ता</div>
<div style="text-align:justify;">​सचिव पद: मनोज कुमार एवं अनुज गुप्ता</div>
<div style="text-align:justify;">​कोषाध्यक्ष पद: विकास पाठक ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​नामांकन पत्र जमा करने के बाद सभी मुख्य दावेदारों और पदाधिकारियों ने चुनाव अधिकारी अवधेश सिंह के साथ एक विशेष बैठक की, जिसमें आगामी चुनावी रूपरेखा और सोसायटी के कल्याणकारी कार्यों पर चर्चा की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​चुनाव अधिकारी अवधेश सिंह ने बताया कि प्राप्त हुए सभी नामांकन पत्रों की नियमानुसार जांच की जाएगी और आगे की चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष व पारदर्शी तरीके से संपन्न कराया जाएगा। इस दौरान सोसायटी के तमाम सम्मानित सदस्य और प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे, जिन्होंने सभी प्रत्याशियों को अपनी शुभकामनाएं दीं।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181617/candidates-filed-nomination-papers-for-various-posts-in-modern-nursery</link>
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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 18:41:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इमरजेंसी में इंदिरा सरकार के खिलाफ अड़ गए थे मनोज कुमार! </title>
                                    <description><![CDATA[<div>वह आपात काल का दौर था जब बड़े से बड़े एक्टर प्रोड्यूसर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ एक शब्द बोलने या फिल्म बनाने की हिम्मत नहीं रखते थे सैंसरशिप इतना कि फिल्म में आम आदमी की दशा महंगाई भ्रष्टाचार रिश्वतखोरी को केंद्र में रखकर फिल्माना भी जुर्म बन गया था लेकिन अभिनेता मनोज कुमार तो मनोज कुमार ठहरे उन्होंने न सिर्फ आम आदमी को केंद्र में रखकर फिल्म बनाई बल्कि सरकार की रोक के खिलाफ अदालत में लडाई भी लड़ी और सरकार को पटखनी दी। </div>
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<div>बॉलीवुड के  एक्टर-डायरेक्टर मनोज कुमार अब हमारे बीच नहीं रहे हैं. उन्होंने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150802/manoj-kumar-was-adamant-against-indira-government-in-emergency"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-04/download-(5)1.jpg" alt=""></a><br /><div>वह आपात काल का दौर था जब बड़े से बड़े एक्टर प्रोड्यूसर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ एक शब्द बोलने या फिल्म बनाने की हिम्मत नहीं रखते थे सैंसरशिप इतना कि फिल्म में आम आदमी की दशा महंगाई भ्रष्टाचार रिश्वतखोरी को केंद्र में रखकर फिल्माना भी जुर्म बन गया था लेकिन अभिनेता मनोज कुमार तो मनोज कुमार ठहरे उन्होंने न सिर्फ आम आदमी को केंद्र में रखकर फिल्म बनाई बल्कि सरकार की रोक के खिलाफ अदालत में लडाई भी लड़ी और सरकार को पटखनी दी। </div>
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<div>बॉलीवुड के  एक्टर-डायरेक्टर मनोज कुमार अब हमारे बीच नहीं रहे हैं. उन्होंने 87 साल की उम्र में मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में आखिरी सांस ली. वो लंबे समय से उम्र संबंधित बीमारियों से जूझ रहे थे. मनोज कुमार अपनी देशभक्ति फिल्मों की वजह से फेमस थे. मनोज कुमार को लोग भारत कुमार कहकर बुलाते थे. मनोज कुमार के साथ बॉलीवुड के एक युग का भी आज अंत हो गया है. उनकी फिल्में जितनी हिट रही हैं उतनी ही उनकी पर्सनल लाइफ मुश्किल में रही. उन्होंने  बंटवारे का दर्द भी झेला है.</div>
<div>मनोज कुमार का जन्म 24 जुलाई 1937 को ब्रिटिश भारत के एबटाबाद (अब पाकिस्तान) में हुआ था. बंटवारे के बाद उनका पूरा परिवार दिल्ली आकर बस गया था.</div>
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<div>एक दौर ऐसा आया कि पूरब पश्चिम की जबरदस्त कामयाबी के बाद मनोज कुमार देशभक्ति के नायक बन गए। उनपर फिल्माए गए गीत के बोल "जीते हो किसी ने देश तो क्या हमने तो दिलों को जीता है यहां राम अभी तक है नर में नारी में अभी तक सीता है" हर देशवासी के दिल में एक जज्बा पैदा करने में कामयाब रहे। </div>
<div>पाकिस्तान के एबटाबाद में जन्में मनोज कुमार को सिर्फ 10 साल की उम्र में बंटवारे का दर्द झेलना पड़ा था.  उन्हें जलियाला शेर खान से दिल्ली जाना पड़ गया था. जबकि मनोज कुमार का परिवार विजय नगर, किंग्सवे कैंप में शरणार्थियों के तौर पर रहा और वो भी कुछ समय के बाद दिल्ली के पुराने राजेंद्र नगर इलाके में चले गए। </div>
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<div>मनोज कुमार ने अपनी पढ़ाई दिल्ली यूनिवर्सिटी से की. उन्होंने ग्रेजुएशन करने के बाद ही फिल्म इंडस्ट्री में जाने का फैसला कर लिया था. उस समय किसी ने नहीं सोचा होगा मनोज कुमार इतने बड़े स्टार हैं। मनोज कुमार की 1957 में पहली फिल्म फैशन आई थी. इस फिल्म में उन्होंने 80 साल के बुजुर्ग का रोल निभाया था. इसके बाद वो हरियाली और रास्ता में नजर आए थे. इस फिल्म के बाद से मनोज कुमार ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. इस फिल्म ने उनकी किस्मत चमका दी थी. उसके बाद से मनोज कुमार की हिट फिल्मों की लाइन लग गई थी. जिसमें वो कौन थी, गुमनाम, हिमालय की गोद में जैसी कई फिल्में शामिल हैं. ये सारी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई थीं।</div>
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<div>मनोज कुमार ने कई हिट फिल्में देने के बाद डायरेक्शन में कदम रखा. उन्होंने उपकार, जय हिंद. क्लर्क, क्रांति, रोटी कपड़ा और मकार, शोर, पूरब और पश्चिम जैसी कई फिल्मों का डायरेक्शन किया. मनोज कुमार देशभक्ति की फिल्मों के लिए पर्याय बन गए। फिर शुरू हुआ नया सफर जिसमें देशभक्ति वाली फिल्में ,मतलब मनोज कुमार. 15 अगस्त और 26 जनवरी पर बजने वाले देशभक्ति गीतों को याद करेंगे तो ज्यादातर में मनोज कुमार मिलेंगे. बॉलिवुड में वह 'भारत कुमार' के नाम से मशहूर हो गए. चेहरे पर हाथ फेरती उनकी अदा की दीवानी कई पीढ़ी रही. शुक्रवार सुबह मनोज कुमार हमेशा के लिए खामोश हो गए. बॉलिवुड सदमे हैं और उनके चाहने वाले उनके गीतों को गुनगुना रहे हैं।</div>
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<div>मनोज कुमार का असली नाम हरिकृष्ण गिरि गोस्वामी था, इनका जन्म 24 जुलाई, 1937 को एबटाबाद में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। विभाजन के कारण उनका परिवार दिल्ली आ गया था और इस दौरान उन्हें शरणार्थी शिविर में रहना पड़ा था. तब उनकी उम्र 10 साल थी. बाद में गोस्वामी परिवार राजधानी के पटेल नगर इलाके में बस गया।</div>
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<div>अभिनेता मनोज कुनार ने हिंदू कॉलेज से डिग्री हासिल की है.साल 1949 में उन्होंने अपना नाम मनोज कुमार रखा लिया था. दरअसल उनके पसंदीदा अभिनेता दिलीप कुमार ने फिल्म शबनम में इसी नाम का किरदार निभाया था.साल 1960 में आई कांच की गुड़िया उनकी पहली मुख्य भूमिका वाली फिल्म थी.मनोज कुमार और उनकी पत्नी शशि के दो बेटे हैं, विशाल और कुणाल।</div>
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<div>मनोज कुमार ने अपने करियर में कुल 35 फिल्मों में काम किया था. दरअसल दिलीप कुमार की फिल्म शबनम देखने के बाद उन्होंने अपना नाम बदला था. इसी के बाद उन्होंने फिल्मी दुनिया में आने का फैसला लिया. मनोज ने कांच की गुड़िया, वो कौन थी, क्रांति, पूरब और पश्चिम और शिरडी वाले साई बाबा में यादगार रोल निभाए. साल 1995 में मैदान ए जंग में की रिलीज के बाद मनोज ने एक्टिंग की दुनिया से तौबा कर लिया. साल 1999 में उन्होंने आखिरी फिल्म जय हिंद को डायरेक्ट किया था. फिल्मी करियर को विराम लगाते ही मनोज कुमार ने पॉलिटिक्स की दुनिया में कदम रखा था। </div>
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<div>मनोज कुमार को पद्मश्री और दादासाहेब फाल्के, किशोर कुमार अवॉर्ड से नवाजा गया था. वहीं उन्हें फिल्मफेयर की ओर से बेस्ट एक्टर के अवॉर्ड कई दफा मिले. मनोज कुमार को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था।</div>
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<div>देशभक्ति आधारित फिल्मों से मनोज कुमार का जुड़ाव 1965 में आयी शहीद से हुआ था, जिसमें उन्होंने सरदार भगत सिंह का किरदार निभाया था। प्रेम धवन रचित फिल्म का संगीत बेहद सफल रहा था और आज भी देशभक्ति के गीतों के लिए जाना जाता है। मेरा रंग दे बसंती चोला, सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, पगड़ी सम्भाल जट्टा और ऐ वतन ऐ वतन... बजते हैं तो आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। </div>
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<div>1967 मनोज कुमार के लिए काफी अच्छा साबित हुआ। रोमांटिक ड्रामा पत्थर के सनम और उपकार बड़ी हिट रही थीं। उपकार इसलिए भी खास है, क्योंकि इसके साथ उन्होंने निर्देशन में कदम रखा। इसी फिल्म के बाद से उन्हें भारत कुमार का नाम मिल गया।</div>
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<div>उपकार’ फिल्म उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के कहने पर बनाई थी। दरअसल, साल 1965 में जब भारत और पाकिस्तान का युद्ध हुआ था, तब इस युद्ध के बाद ही मनोज कुमार ने तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से मुलाकात की थी, जिसमें उन्होंने अभिनेता से युद्ध से होने वाली परेशानियों पर एक फिल्म बनाने के लिए कहा था। हालांकि, इस फिल्म को खुद लाल बहादुर शास्त्री नहीं देख पाए थे।</div>
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<div>ताशकंद से लौटने के बाद लाल बहादुर शास्त्री इस फिल्म को देखने वाले थे, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया।मनोज कुमार की फिल्में लाल बहादुर शास्त्री और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं को भी काफी पसंद आती थीl उन्होंने उपकार फिल्म लाल बहादुर शास्त्री के नारे 'जय जवान, जय किसान' से प्रेरणा लेकर बनाई थी।</div>
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<div>दरअसल, देश में आपातकाल लगने के बाद मनोज कुमार ने इसका विरोध किया था. इससे सरकार नाराज हो गई थी. कहा जाता है कि जब तत्‍कालीन मंत्री विध्याचरण शुक्‍ला ने इंदिरा गांधी और उनके आपातकाल के फेवर में मनोज कुमार को प्रो-इमरजेंसी डॉक्‍यूमेंट्री बनाने का ऑफर दिया तो उन्‍होंने इनकार कर दिया था. इतना ही नहीं मनोज कुमार ने डॉक्‍यूमेंट्री के लेखक अमृता प्रीतम को फोन कर इतना तक कह दिया था कि क्‍या लेखक के तौर पर समझौता कर लिए हो।</div>
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<div>यही वजह रही कि मनोज कुमार के लिए इमरजेंसी का दौर चुनौतीपूर्ण रहा. उस दौर में उनकी फ‍िल्‍में भी फ्लाप हो गई थींइतना ही नहीं मनोज कुमार की एक फ‍िल्‍म दस नंबरी पर रोक तक लगा दी गई थी. इससे उनका करियर भी समाप्‍त होने का डर था, हालांकि वह डरे नहीं.   मनोज कुमार ने सरकार के खिलाफ केस तक कर दिया और वह केस जीत भी गए थे. वह एकलौते अभिनेता थे, जिन्‍होंने सरकार से केस जीता।</div>
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<div>मनोज कुमार ने एचएल गोस्वामी और कृष्णा कुमारी गोस्वामी के घर जन्म लिया था. मनोज के एक भाई और बहन थे. मनोज ने शशि गोस्वामी से शादी रचाई, जिनसे उनके दो बच्चे कुणाल और साशा हुए. बता दें कि टीवी के जाने-माने प्रोड्यूसर मनीष गोस्वामी उनके कजिन हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Apr 2025 16:56:03 +0530</pubDate>
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