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                <title>new year - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>Rule Change: 1 जनवरी से बदल जाएंगे ये 10 बड़े नियम, आम लोगों पर पड़ेगा सीधा असर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Rule Change From 1st January: नया साल केवल कैलेंडर बदलने तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसके साथ कई अहम नीतिगत और नियमों से जुड़े बदलाव भी लागू होते हैं। 2026 की शुरुआत में भी ऐसे ही करीब 10 बड़े नियमों में बदलाव की संभावना है, जिनका असर आम नागरिकों, किसानों, कर्मचारियों, छात्रों और उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। आइए जानते हैं वे कौन-से बदलाव हैं, जिन पर नए साल से नजर रखना जरूरी होगा।</p>
<h4><strong>राशन कार्ड से जुड़े नियमों में बदलाव</strong></h4>
<p>सरकार राशन कार्ड से संबंधित नियमों को और सरल बनाने की तैयारी में है। खासतौर पर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को आसान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164747/rule-change-these-10-big-rules-will-change-from-january"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/rule-change-(3).jpg" alt=""></a><br /><p>Rule Change From 1st January: नया साल केवल कैलेंडर बदलने तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसके साथ कई अहम नीतिगत और नियमों से जुड़े बदलाव भी लागू होते हैं। 2026 की शुरुआत में भी ऐसे ही करीब 10 बड़े नियमों में बदलाव की संभावना है, जिनका असर आम नागरिकों, किसानों, कर्मचारियों, छात्रों और उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। आइए जानते हैं वे कौन-से बदलाव हैं, जिन पर नए साल से नजर रखना जरूरी होगा।</p>
<h4><strong>राशन कार्ड से जुड़े नियमों में बदलाव</strong></h4>
<p>सरकार राशन कार्ड से संबंधित नियमों को और सरल बनाने की तैयारी में है। खासतौर पर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को आसान किया जाएगा, जिससे ग्रामीण इलाकों के लोगों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।</p>
<h4><strong>किसानों के लिए किसान आईडी होगी जरूरी</strong></h4>
<p>अब किसानों के लिए किसान आईडी अनिवार्य की जा सकती है। पीएम किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए यह जरूरी होगी। इसके साथ ही फसल बीमा योजना में जंगली जानवरों से हुए नुकसान को भी शामिल करने की तैयारी है।</p>
<h4><strong>बैंकिंग और टैक्स नियमों में बदलाव संभव</strong></h4>
<p>नए साल से बैंकिंग और टैक्स सिस्टम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। आयकर रिटर्न (ITR) फॉर्म पहले से ज्यादा डेटा आधारित हो सकते हैं और क्रेडिट स्कोर अब तेजी से अपडेट होने की संभावना है।</p>
<h4><strong>सरकारी स्कूलों में डिजिटल अटेंडेंस</strong></h4>
<p>देश के कई राज्यों में सरकारी स्कूलों में डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम लागू किया जा सकता है। इससे शिक्षकों और स्टाफ की उपस्थिति में पारदर्शिता बढ़ेगी।</p>
<h4><strong>सोशल मीडिया पर सख्त नियम</strong></h4>
<p>सोशल मीडिया को लेकर नियम और सख्त हो सकते हैं। खासतौर पर 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए नए प्रतिबंध लागू किए जाने की चर्चा है।</p>
<h4><strong>LPG सिलेंडर की कीमतों में राहत की उम्मीद</strong></h4>
<p>नए साल से एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे घरेलू बजट पर बोझ कुछ कम हो सकता है।</p>
<h4><strong>8वें वेतन आयोग पर बड़ा फैसला</strong></h4>
<p>केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ा फैसला आ सकता है। इससे सैलरी और पेंशन में बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है।</p>
<h4><strong>रियल एस्टेट में निवेश को बढ़ावा</strong></h4>
<p>रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश बढ़ाने के लिए REITs (रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट) से जुड़े नियमों में बदलाव किया जा सकता है।</p>
<h4><strong>पैन-आधार लिंक न होने पर दिक्कत</strong></h4>
<p>जिन लोगों ने अब तक पैन-आधार लिंक नहीं कराया है, उन्हें नए साल से वित्तीय लेन-देन में परेशानी हो सकती है। ऐसे में समय रहते यह काम पूरा करना जरूरी होगा।</p>
<h4><strong>CNG और PNG की दरों पर असर</strong></h4>
<p>2026 की शुरुआत के साथ टैक्स सिस्टम में प्रस्तावित बदलावों का असर CNG और PNG की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Dec 2025 11:06:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नववर्ष के स्वागत में देशभर में उमड़ा उल्लास, पहाड़ों की ओर बढ़ता सैलानियों का सैलाब, विंटर कार्निवल, संगीत, रौशनी और जिम्मेदार जश्न का संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश में नए साल के स्वागत की तैयारियां पूरे शबाब पर हैं। वर्ष 2025 के विदा होने और 2026 के आगमन को यादगार बनाने के लिए लोग अभी से योजनाएं बना चुके हैं। होटल बुकिंग, ट्रैवल प्लान, पार्टी पैकेज और विंटर कार्निवल की गहमागहमी ने पर्यटन स्थलों को जीवंत कर दिया है। महानगरों से लेकर पहाड़ी इलाकों तक, हर जगह जश्न का माहौल है। खासतौर पर ठंडे राज्यों की ओर पर्यटकों का रुझान इस बार कुछ ज्यादा ही नजर आ रहा है। शिमला, मनाली, धर्मशाला, डलहौजी, कसौली, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और राजस्थान जैसे पर्यटन स्थल नए साल के जश्न के प्रमुख</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164557/there-is-joy-across-the-country-to-welcome-the-new"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/...jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश में नए साल के स्वागत की तैयारियां पूरे शबाब पर हैं। वर्ष 2025 के विदा होने और 2026 के आगमन को यादगार बनाने के लिए लोग अभी से योजनाएं बना चुके हैं। होटल बुकिंग, ट्रैवल प्लान, पार्टी पैकेज और विंटर कार्निवल की गहमागहमी ने पर्यटन स्थलों को जीवंत कर दिया है। महानगरों से लेकर पहाड़ी इलाकों तक, हर जगह जश्न का माहौल है। खासतौर पर ठंडे राज्यों की ओर पर्यटकों का रुझान इस बार कुछ ज्यादा ही नजर आ रहा है। शिमला, मनाली, धर्मशाला, डलहौजी, कसौली, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और राजस्थान जैसे पर्यटन स्थल नए साल के जश्न के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जैसे-जैसे 31 दिसंबर नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे होटलों, होम-स्टे और रिसॉर्ट्स में बुकिंग का दबाव बढ़ता जा रहा है। शिमला, मनाली और धर्मशाला जैसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों में होटल मालिकों और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों के चेहरे खिले हुए हैं। पर्यटकों का कहना है कि पहाड़ों की ठंड, बर्फबारी का रोमांच, संगीत से सजी रातें और नए साल का पहला सवेरा किसी उत्सव से कम नहीं लगता। यही वजह है कि इस बार बड़ी संख्या में युवा, परिवार और कपल्स पहाड़ी इलाकों का रुख कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हिमाचल प्रदेश इस समय देश के सबसे व्यस्त पर्यटन राज्यों में शामिल हो गया है। मनाली पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लाहौल-स्पीति के शिकुला दर्रा क्षेत्र में भी बर्फ देखने के लिए सैलानी पहुंच रहे हैं। शिमला ट्रैक पर चलने वाली पांचों ट्रेनों की बुकिंग लगभग फुल हो चुकी है, वहीं दिल्ली, अमृतसर, जयपुर और देहरादून जैसे शहरों के लिए फ्लाइट टिकट मिलना मुश्किल होता जा रहा है। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यह साल के अंत का सबसे व्यस्त ट्रैवल सीजन है, जिसमें होटल, टैक्सी, गाइड और स्थानीय कारोबार सभी को बड़ा लाभ मिल रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">धर्मशाला, डलहौजी और शिमला में विंटर कार्निवल की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। रंग-बिरंगी रोशनी, स्थानीय संस्कृति की झलक, लोकनृत्य, संगीत कार्यक्रम और पारंपरिक व्यंजन इन आयोजनों की खास पहचान बन चुके हैं। मनाली और कसौली में न्यू ईयर पार्टियों का दौर पहले ही शुरू हो गया है। कई होटलों में लाइव म्यूजिक, डीजे नाइट और डिनर नाइट्स का आयोजन किया जा रहा है। पर्यटकों के लिए खास पैकेज तैयार किए गए हैं, जिनमें ठहरने, खाने और मनोरंजन की सुविधाएं शामिल हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नए साल का जश्न अब हर साल बदलते दौर का रिवाज बनता जा रहा है। पहले जहां लोग अपने शहरों में ही सीमित दायरे में नया साल मनाते थे, वहीं अब ट्रैवल और टूरिज्म नए साल के उत्सव का अहम हिस्सा बन चुका है। खासतौर पर ठंडे प्रदेशों में 30 और 31 दिसंबर की बुकिंग पहले से शुरू हो जाती है। एडवांस बुकिंग का फायदा यह है कि पर्यटकों को कमरे के लिए मारामारी नहीं करनी पड़ती और वे आराम से अपने प्रवास का आनंद ले पाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पिछले कुछ वर्षों में हिमालयी क्षेत्रों में पर्यटन के बढ़ते दबाव को देखते हुए बड़ी संख्या में होम-स्टे खुले हैं। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वर्षों में हिमाचल प्रदेश में करीब चार हजार से अधिक होम-स्टे पंजीकृत हुए हैं। इससे न सिर्फ पर्यटकों को ठहरने की सुविधा मिली है, बल्कि स्थानीय लोगों की आय के नए स्रोत भी खुले हैं। इस कारण अब कमरों की भारी किल्लत जैसी स्थिति नहीं बन रही है, हालांकि लोकप्रिय स्थानों पर अच्छे होटलों की बुकिंग जल्दी फुल हो जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">किराये की बात करें तो शिमला में होटल का किराया एक हजार से लेकर दस हजार रुपये तक पहुंच चुका है। मनाली में यह रेंज बारह सौ रुपये से शुरू होकर दस हजार रुपये तक है। धर्मशाला में एक हजार से दस हजार, डलहौजी में एक हजार से आठ हजार और कसौली में बारह सौ से लेकर बारह हजार रुपये तक कमरे उपलब्ध हैं। इसके बावजूद कई स्थानों पर आखिरी समय में कमरे मिलना मुश्किल हो रहा है। यह साफ संकेत है कि इस बार नए साल के जश्न के लिए पर्यटन स्थलों पर भारी भीड़ उमड़ रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मौसम का मिजाज भी इस समय पर्यटन के अनुकूल बना हुआ है। देश के कई हिस्सों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है, वहीं पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी ने सैलानियों का उत्साह और बढ़ा दिया है। बर्फ से ढके पहाड़, देवदार के जंगल और ठंडी हवाओं के बीच नए साल का स्वागत करना लोगों के लिए खास अनुभव बन रहा है। यही वजह है कि हिमालयी प्रदेशों में नए साल के जश्न का माहौल सबसे ज्यादा नजर आ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि, इस जश्न के बीच जिम्मेदारी का संदेश भी जरूरी है। प्रशासन और सामाजिक संगठनों की ओर से युवाओं से अपील की जा रही है कि वे शराब और नशे से दूर रहकर सुरक्षित और सभ्य तरीके से नए साल का स्वागत करें। जश्न मनाना बुरा नहीं है, लेकिन बुरी आदतों से परहेज करना जरूरी है। कई पर्यटन स्थलों पर पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना न हो और पर्यटक बेफिक्र होकर आनंद ले सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नए साल का इंतजार कर रहे पर्यटक सिर्फ पार्टी ही नहीं, बल्कि सुकून और यादगार पलों की तलाश में भी हैं। पहाड़ों की शांति, ठंडी सुबह की धूप, स्थानीय लोगों की मेहमाननवाजी और प्रकृति के करीब बिताए गए पल उन्हें साल भर की भागदौड़ से राहत देते हैं। यही कारण है कि नए साल का जश्न अब केवल एक रात का उत्सव नहीं रह गया, बल्कि यह कुछ दिनों की छुट्टियों और अनुभवों का संगम बन चुका है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कुल मिलाकर, देशभर में नए साल के स्वागत को लेकर जबरदस्त उत्साह है। पहाड़ी राज्यों में पर्यटकों की बढ़ती भीड़, होटल और ट्रांसपोर्ट की फुल बुकिंग और विंटर कार्निवल की रंगीन तैयारियां इस बात का संकेत हैं कि 2026 का आगमन पूरे उल्लास और उमंग के साथ किया जा रहा है। जश्न जरूर मनाया जा रहा है, लेकिन उम्मीद यही है कि यह जश्न जिम्मेदारी, सुरक्षा और सकारात्मक सोच के साथ मनाया जाए, ताकि नया साल खुशियों और बेहतर भविष्य का संदेश लेकर आए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Dec 2025 20:18:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चैत्र माह में चेतने का मौक़ा देती है प्रकृति</title>
                                    <description><![CDATA[<p>हिंदी का नया साल चैत्र मास से शुरू होता है। मेरे लिए ये महीना बहुत महत्वपूर्ण है। मेरी दादी बताया करतीं थीं   कि  मै चैत्र मास में ही अवतरित हुआ था। इसी महीने में चेतुओं की किस्मत चेतती है।  दादी निरक्षर थीं लेकिन पंचांग के बारे में उन्हें पता नहीं कहाँ से पता चल जाता था। वे बताती थीं कि  चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है। इसी  दिन से चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व का शुभारंभ भी होता है। इस बार चैत्र मास 30 मार्च 2025 यानी आज से शुरू हुआ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150615/nature-gives-a-chance-to-conscious-in-chaitra-month"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/navdurga.webp" alt=""></a><br /><p>हिंदी का नया साल चैत्र मास से शुरू होता है। मेरे लिए ये महीना बहुत महत्वपूर्ण है। मेरी दादी बताया करतीं थीं   कि  मै चैत्र मास में ही अवतरित हुआ था। इसी महीने में चेतुओं की किस्मत चेतती है।  दादी निरक्षर थीं लेकिन पंचांग के बारे में उन्हें पता नहीं कहाँ से पता चल जाता था। वे बताती थीं कि  चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है। इसी  दिन से चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व का शुभारंभ भी होता है। इस बार चैत्र मास 30 मार्च 2025 यानी आज से शुरू हुआ तो दादी की बहुत याद आयी। वे पक्की सनातनी थीं किन्तु मैंने उन्हें कभी व्रत -उपवास करते नहीं देखा ,जबकि ठीक उनके विपरीत मेरी माँ को तीज-त्यौहार,व्रत,उपवास में गहरी दिलचस्पी थी। उनकी देखा-देखी मैंने भी अनेक बार चैत्र मास में 9 दिन के न सिर्फ व्रत किये बल्कि दो मर्तबा गवालियर से करौली तक 208  किमी की लम्बी और कठिन पदयात्रा भी की।</p>
<p>आज का पंचांग बता रहा है कि इस तिथि पर रेवती नक्षत्र और ऐन्द्र योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण भी हो रहा है। इसके अलावा यह दिन हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2082 के रूप में आया है, जिसमें सूर्य और चंद्र देव दोनों मीन राशि में मौजूद हैं।आज के ही दिन देश-दुनिया में ईद का त्यौहार भी मनाया जा रहा है लेकिन  भारत में तमाम पाबंदियों के साथ। कहते हैं न कि  -जिसकी लाठी,उसकी भैंस। आज लाठी हमारे हाथ में हैं। इसलिए भैंस भी हमारी है। हमारी भैंस  के आगे बीन बजाने का कोई फायदा नहीं ,क्योंकि वो ससुरी खड़ी-खड़ी पगुराती रहती है ।  बीन की धुन पर नाचना उसे आता ही नहीं है।उसे न मणिपुर कि जलने से कोई फर्क पड़ता है और न कुणाल कामरा काण्ड से।  </p>
<p>आप कहेंगे कि  नया साल और नए साल का पहला  दिन में ये भैंस कहाँ से आ गयी। तो आपको बता दें कि  भैंस  से हमारा सनातन नाता है,ये बात अलग है कि  हम किसी भैंस को अपनी माता नहीं कहते,जबकि भैंस ,गौमाता से जायदा  दूध देती है,ज्यादा गोबर देती है और ज्यादा मांसाहार भी देती है। दुर्भाग्य ये है  कि  हमारे यहां भैंसपुत्र   केवल बलि के लिए इस्तेमाल किये जाते है।</p>
<p> किसी जमाने में भैंसे पंचायतों ,नगर निगमों में कचरा गाडी खींचने के काम भी आते थे किन्तु अब तो बेचारे सिर्फ  कटते हैं और लोगों के पेट भरने के काम आते हैं। भैंसों के नाम परदुनिया के  किसी देश में कोई राजनीती नहीं होती ।  कम से कम हमारे देश में तो नहीं होती ।  हमारे यहां गायों के नाम पर राजनीति भी होती है और लिंचिंग भी। दुर्भाग्य ये है कि  भारत में अभी तक किसी ने भैंसशाला नहीं खोली  इसीलिए भैंसे अक्सर सड़क पर आवारगी करते देखी जा सकतीं हैं।  </p>
<p>मै कट्टर सनातनी हूँ, फिर भी इन ज्योतिषियों की वजह से हमेशा परेशान रहते है।  ये हर त्यौहार को सुलभ के बजाय दुर्लभ बताकर ऐसा उन्माद पैदा करते हैं कि  आधा देश महाकुम्भ में नहाने जा धमकता है ,दीवाली पर ऐसा पुष्य योग बताते हैं कि  आधा देश भले कटोरा लिए खड़ा रहे लेकिन बाकी देश सर्राफा बाजार या मोटरकार   बाजार में खड़ा नजर आता है।  ज्योतिषी इस बार भी नहीं माने।</p>
<p>ज्योतिषीय गणना के मुताबिक लगभग 100 वर्षों बाद नवरात्रि के प्रथम दिन पंचग्रही योग का निर्माण भी हो रहा है. इसके साथ ही पहले दिन सर्वार्थ सिद्धि ,इंद्र, बुद्धदित्य ,शुक्रदित्य, लक्ष्मी नारायण जैसे शुभ योग का निर्माण हो रहा है.।  हमारा   सौभाग्य है या दुर्भाग्य कि  ये ज्योतिषी हमारे पास ही सबसे जायदा है।  दूसरे मजहबों में भी हैं लेकिन वे इतने शातिर नहीं हैं जितने किहमारे हैं। हम पढ़े-लिखे हों या अनपढ़  सब के सब ज्योतिषियों के इशारों पर नाचते हैं।</p>
<p>कभी-कभी मै सोचता हूँ कि  हमारे पास भले ही वैज्ञानिक कम हों किन्तु  ज्योतिषी इफरात में है। काश ऐसे ही ज्योतिषी म्यांमार वालों के पास होते ।  कम से कम वे ये तो बता देते कि  वहां  जो भूकमंप आया है वो किस दुर्लभ योग में आया है और उसके क्या लाभ-हानि है। किस राशि के जातकों के लिए भूकंप जानलेवा साबित होगा और कौन सा  महफूज रहेगा ? म्यांमार वालों के साथ हमारी गहन संवदना है ।  हमारी सनातनी सरकार ने म्यांमार के भूकंप पीड़ितों की इमदाद के लिए  लेफ्टिनेंट कर्नल जगनीत गिल के नेतृत्व में शत्रुजीत ब्रिगेड मेडिकल रिस्पॉन्डर्स की 118 सदस्यीय टीम आवश्यक चिकित्सा उपकरणों और आपूर्ति के साथ शीघ्र ही म्यांमार के लिए रवाना हुई. यह टीम जरूरी चिकित्सा उपकरणों और आपूर्ति के साथ एयरबोर्न एंजल्स टास्क फोर्स के रूप में तैनात की जा रही है, ये फोर्स आपदा-प्रभावित क्षेत्रों में उन्नत चिकित्सा और सर्जरी सेवाएं देने के लिए प्रशिक्षित है।</p>
<p>हम शुक्रगुजार   हैं भारत सरकार की दरियादिली के, कि  उसने कम से कम चैत्र मास में कोई तो पुण्यकार्य किया ! अन्यथा मुमकिन था कि  हमारे गृहमंत्री अड़ जाते कि - नहीं  ! म्यांमार में राहत भेजने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि वहां  के रोहिंग्या मुसलमान भी इस राहत का फायदा उठाएंगे। हमारी सरकार को मुसलमानों से खासी चिढ है,फिर चाहे वे हिन्दुस्तानी हों या बांग्लादेशी या म्यांमारी। हमारे यहां मुसलमान ही हैं जो सड़क पर नमाज नहीं पढ़ सकते,सड़क तो छोड़िये अपने घर की छत पर नमाज नहीं पढ़ सकते।  मुसलमानों को छोड़ दुसरे मजहबों का कोई भी आदमी कुछ भी कर सकता है। उसके लिए कोईपाबन्दी नहीं है।</p>
<p>इस नवरात्रि पर मै भी 9  दिन के व्रत रख रखा हूँ ।  मेरी देवी में भारी आशक्ति है ।  मेरी कामना है कि  देवी माँ भारत की पुण्य भूमि पर पैदा होने वाले हर हिंदुस्तानी का कल्याण करें ।  मुझे उम्मीद है कि  ऐसा होगा भी ,क्योंकि हमारी देवियाँ नेताओं की तरह हिन्दू-मुसलमान नहीं देखतीं कल्याण करते वक्त। हमने जितनी भी किम्वदंतियां या लोक कथाएं पढ़ी हैं उनमें  किसी में भी किसी देवी ने किसी खान  साहब का वध नहीं किया। उन्होंने महिषासुर को मारा। मुसलमानों में भी शैतान के बच्चे पैदा होते हैं जो आतंकवादी हो जाते हैं लेकिन उनका नाश करने के लिए देवियों ने दूसरी व्यवस्था की है।</p>
<p> </p>
<p>हिन्दुओं में भी शैतान होते हैं ,वे भी आदमी तो आदमी इमारतों और कब्रों तक को जमीदोज कर देते हैं ,लेकिन उनका इलाज हमारी देवियों के पास नहीं  है। चूंकि  हमारे सनातनियों को अब विक्रम सम्वत में आस्था है इसलिए उन्हें इस नववर्ष की बधाइयां ,चूंकि आज ही ईद है इसलिए मुसलमानों को ईद मुबारक और म्यांमार के भूकंप पीड़ितों को अपनी हार्दिक संवेदनाएं देते हुए मै अपने आपको खुशनसीब समझता हूँ क्योंकि आज से 9  दिन तक मुझे शक्ति की आराधना की छूट है।  मै कमरे में ,घर की छत पर या सड़क पर ,कहीं भी आराधना कर सकता हू।  तमाम पाबंदियां  तो विधर्मीयों  के लिए हैं।  वे भारतीय होकर भी हमारे लिए प्रवासी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 30 Mar 2025 14:43:31 +0530</pubDate>
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                <title>भारतीय नवसंवत्सर : युगधर्म का उद्घोष बने</title>
                                    <description><![CDATA[<div>भारत में चैत्र मास की शुक्ल  प्रतिपदा तिथि (युगादि तिथि) से हिंदू नव वर्ष की अर्थात विक्रम संवत की शुरुआत होती है। इस वर्ष यह पावन दिन(सवंत 2082 का प्रथम दिवस) भारत में सरकारी कामकाज के लिए स्वीकृत ग्रेग्ररियन कैलेंडर  जिसे हम अंग्रेज़ी/ईसाई कैलेंडर भी कहते हैं के अनुसार 30 मार्च,2025 को आ रहा है। शासन स्तर पर अंग्रेजी कैलेंडर के प्रचलन में होने के बाबजूद भारत अपनी धार्मिक, सामाजिक तथा अन्य सांस्कृतिक परंपराओं के निर्वहन के लिए भारतीय कैलेंडर को सदियों से महत्व देता रहा है।</div>
<div>  </div>
<div>भारत की ही तरह कुछ और देश भी है जो पूरी तरह ग्रेग्रेरियन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150506/indian-navasvatsar-became-the-announcement-of-yugadharma"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/hindi-divas53.jpg" alt=""></a><br /><div>भारत में चैत्र मास की शुक्ल  प्रतिपदा तिथि (युगादि तिथि) से हिंदू नव वर्ष की अर्थात विक्रम संवत की शुरुआत होती है। इस वर्ष यह पावन दिन(सवंत 2082 का प्रथम दिवस) भारत में सरकारी कामकाज के लिए स्वीकृत ग्रेग्ररियन कैलेंडर  जिसे हम अंग्रेज़ी/ईसाई कैलेंडर भी कहते हैं के अनुसार 30 मार्च,2025 को आ रहा है। शासन स्तर पर अंग्रेजी कैलेंडर के प्रचलन में होने के बाबजूद भारत अपनी धार्मिक, सामाजिक तथा अन्य सांस्कृतिक परंपराओं के निर्वहन के लिए भारतीय कैलेंडर को सदियों से महत्व देता रहा है।</div>
<div> </div>
<div>भारत की ही तरह कुछ और देश भी है जो पूरी तरह ग्रेग्रेरियन कैलेंडर को नहीं मानते हैं तथा धार्मिक आदि कारणों से अपने देश के कैलेंडर को भी महत्व देते हैं जैसे ईरान, अफगानिस्तान (हिजरी कैलेंडर), इथियोपिया (इथियोपियन कैलेंडर), नेपाल (विक्रम संवत),सऊदी अरब (इस्लामिक हिजरी कैलेंडर), चीन (चीनी चंद्र कैलेंडर), भारत (विक्रम संवत), इजरायल (हिब्रू कैलेंडर) आदि।</div>
<div> </div>
<div>हिन्दूओं द्वारा नव संवत्सर के प्रथम दिवस को नव वर्ष की शुरुआत के रूप में मान्यता देने के पीछे कई  ठोस सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, वैज्ञानिक तथा अध्यात्मिक कारण है।ऐसी मान्यता है कि इस तिथि पर ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना आरंभ की थी(ब्रह्मपुराण) तथा कालगणना (समय-गणना) प्रारंभ की थी। इसी तिथि पर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम तथा धर्मराज युधिष्ठिर का राज्याभिषेक हुआ था ,इसी तिथि से सतयुग आरंभ हुआ था, इसी तिथि से चैत्र नवरात्र(देवी अराधना का पर्व) आरंभ होती है तथा इसी दिन 1875 को जागरूकता और पुनर्जागरण के प्रतीक आर्य समाज की स्थापना हुई।</div>
<div> </div>
<div>भारतीयों के लिए नवसंवत्सर इस लिए भी अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि इसकी शुरुआत न्याय के प्रतीक महाराजा विक्रमादित्य ने की थी जो  वैदिक ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है तथा प्राकृतिक चक्रों के अनुरूप है।वैज्ञानिक और खगोलीय दृष्टिकोण से नव संवत्सर के प्रथम दिवस पर  सूर्य  संक्रांति काल में होता है, चंद्रमा शुक्ल पक्ष में होता है तथा वसंत विषुव के निकट होती है अथार्त सूर्य और चंद्रमा दोनों उच्च ऊर्जा में होते हैं। प्रकृति  नया चक्र शुरू कर रही होती है मसलन पेड़-पौधे नई कोंपलों को जन्म दे रहे होते हैं, फसलें पक चुकी होती हैं या पकने की स्थिति में होती हैं, और मौसम का मिजाज बदल रहा होता है।</div>
<div> </div>
<div>यह तिथि इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि यह लगभग संपूर्ण भारत  में भारतीय नववर्ष के प्रथम दिवस के रूप में स्वीकार है, और अधिकांश भारतीय भी उसी रूप में इसका पूरे हर्ष और उल्लास से स्वागत करते हैं जैसे महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश आदि  गुड़ी पड़वा के रूप में,आंध्र प्रदेश और कर्नाटक  उगादि के रूप में तथा राजस्थान  थापना के रूप में। वहीं सिंधी समाज इस तिथि को चेती चाँद  के  रूप में तथा कश्मीरी पंडितों द्वारा इस तिथि को नवरेह के रूप में मनाया जाता है।</div>
<div> </div>
<div>एक विचार आता  है कि अंग्रेजी कैलेंडर तथा इसकी 1 जनवरी को नववर्ष के प्रथम दिवस के रूप में वैश्विक मान्यता प्राप्त है। भारत में भी अंग्रजों के शासनकाल से ही इस कलैंडर को सरकारी व निजी संस्थानों द्वारा व्यवहार में लाया जा रहा है, तथा इसकी एक जनवरी को नए साल की शुरुआती दिन के रूप में स्वीकारा जाता है। यह धर्म, जाति, भाषा या क्षेत्रीय भेदभाव से परे भी दिखाई देता है।जनता के मन में भी इसी कैलेंडर की तिथियां और माह रच-बस गए हैं, तथा अधिकांश जनता मन से या बेमन से या फिर मजबूरी बस जन्म,मरण, शादी की तिथि, नोकरी में आने की तिथि, नोकरी से सेवा निवृत्त होने की तिथि,पदोन्नति की तिथि, न्यायालय में केस दर्ज करने तथा केस मुक्त होने की तिथि,गृह प्रवेश तिथि, बेटा-बेटी के जन्म तथा विवाह की तिथि, स्कूल आदि में प्रवेश की तिथि आदि सभी महत्वपूर्ण कार्यों की तिथियों को याद रखने के लिए अंग्रेजी कैलेंडर पर निर्भर है तो फिर हिन्दू कैलेंडर (विक्रम संवत्सर) की चर्चा करना, उसके माह और तिथियों को स्मरण करना तथा उसके प्रथम दिवस को अंग्रेजी कलैंडर के नववर्ष के प्रथम दिन की तुलना में अधिक महत्व देने का क्या औचित्य है? </div>
<div> </div>
<div>मेरा ऐसा मानना है कि हम भारतीयों को  खुले मन से यह विचार करना होगा कि क्या अंग्रेजी नव वर्ष (1 जनवरी) पूरी तरह से पश्चिमी अवधारणा का प्रतीक नहीं है?, क्या यह हम भारतीयों को अपनी संस्कृति से दूर नहीं करता? क्या ऐसा करने से भारतीय परंपराएं और संस्कृति धीरे-धीरे कमज़ोर नहीं होती? क्या इसका कोई धार्मिक, प्राकृतिक, आध्यात्मिक आधार है? क्या इसके मनाने के तौर-तरीकों  समाज में कृत्रिमता,अनैतिक गतिविधियाँ, उपभोक्तावाद को बढ़ावा नहीं देते?वहीं हमें इन प्रश्नों के उत्तर भी निष्पक्ष रूप से अपने आप से पूछना होगा कि क्या हमें  प्रकृति, धर्म, संस्कृति, और परंपराओं से जुड़े तथा हिन्दू (हिन्दुस्तान) कैलेंडर को महत्व देते हुए नववर्ष के प्रथम दिवस ‘गुड़ी पड़वा’को हर्ष और उल्लास से नहीं मनाना चाहिए?, क्या भारतीयों को अपनी संस्कृति की रक्षा और पहचान को बनाए रखने के लिए जाति, धर्म, राज्य से ऊपर  उठकर नव संवत्सर को अधिक महत्व नहीं देना नहीं चाहिए?</div>
<div> </div>
<div>मेरा ऐसा मानना है कि हमें अंग्रेजी कैलेंडर तथा हिन्दू कैलेंडर के नववर्ष शुरुआत की तुलनात्मक विवेचना कर के भी देखना चाहिए। यदि हम ऐसा करते हैं तो पाते हैं कि नव संवत्सर का प्रथम दिवस हमारी अपनी परंपराओं, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा है, जबकि अंग्रेजी कैलेंडर की 1 जनवरी पश्चिमी परंपरा का हिस्सा है, औपनिवेशिक मानसिकता तथा सांस्कृतिक गुलामी का प्रतीक है।1 जनवरी सिर्फ एक औपचारिक तिथि परिवर्तन है, जबकि नव संवत्सर की गुड़ी पड़वा वास्तव में एक नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है।</div>
<div> </div>
<div>नव संवत्सर की गुड़ी पड़वा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को आती है, इसके विपरीत 1 जनवरी का कोई विशेष खगोलीय या प्राकृतिक महत्व नहीं होता; यह सिर्फ ग्रेगोरियन कैलेंडर का पहला दिन है, जिसे यूरोप में ईसाई धर्म के विस्तार के साथ अपनाया गया।नव संवत्सर धर्म, सत्कर्म, शक्ति और ज्ञान की उपासना का समय है, तथा इसे एक पर्व के रूप में उपवास, हवन और पूजा-पाठ के साथ मनाया जाता है, जो मानसिक शुद्धता और स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है।जबकि 1 जनवरी आतिशबाजी, पश्चिम रंग में ढली पार्टी, मौज मस्ती और दिखावे का माध्यम बन चुका है।</div>
<div> </div>
<div>हिंदू नव वर्ष (नव संवत्सर) से नवऋतु (वसंत) का आगमन होता है, जिससे पर्यावरण में भी नयापन आता है। जबकि अंग्रेजी नववर्ष की शुरुआत ऐसी किसी नयेपन की ओर संकेत नहीं करती।हिन्दू नव वर्ष के प्रथम दिवस को सैलिब्रेट करने में हमें संस्कृति, परंपरा,धर्म, अध्यात्म, इतिहास, प्रकृति, विज्ञान, राष्ट्रीय एकता, स्वास्थ्य और सकारात्मकता का संकेत और दृष्टि स्पष्ट दिखाई देती है जबकि अंग्रेजी नववर्ष का इन सबसे कोई लेना देना नहीं है।</div>
<div> </div>
<div>मुझे लगता है कि यह संवत्सर यह भी प्रश्न करता है कि क्या तुम्हारी आधुनिकता में संस्कृति का प्राण बसता है? क्या विकास की अट्टालिकाओं में संस्कारों के दीप जलते हैं?या तुम उस पश्चिमी हवा में अपने मूल को ही तज बैठे हो? अतः मेरा सभी भारतवासियों से आग्रह है कि - यह नवसंवत्सर केवल तिथि नहीं,</div>
<div>यह युगधर्म का उद्घोष है। यह तुम्हें पुकारता है— अपने अभ्युदय की ओर, अपने आत्मबोध की ओर,</div>
<div>अपने स्वर को पहचानने की ओर। चेतना के इस प्रभात में अपने पूर्वजों के स्वप्नों को स्वर दो, संस्कृति को अभ्युदय दो, परंपरा को गति दो, और इस नवसंवत्सर को सच्चे अर्थों में नव बनाओ!</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Mar 2025 15:40:51 +0530</pubDate>
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