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                <title>muskan - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>क्या सोनम रघुवंशी और मुस्कान बनने से नहीं रहा कोई गुरेज? </title>
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                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;">विवाह पूर्व  और विवाहेत्तर सेक्स स्वछंदता लिव-इन का बढ़ता चलन समाज में जहरीली बेल की तरह विनाश कर रहा है। परिणाम यह है कि हर सौ में से बीस से अधिक विवाह अब टूट रहे हैं परिवार में नवागंतुक वधुओं का समायोजन होना टेड़ी खीर होता जा रहा है। भारतीय समाज में दाम्पत्य जीवन के लिए खतरा बढ़ गया है लगातार इस तरह की वारदातों की झड़ी लगी है जिसमें छोटी मोटी बातों पर लोग पति पत्नी लिव-इन पार्टनर खून बहाने से नही चूक रहे हैं समाज में परिवर्तन के इस दौर में जहां वर्जना रहित सेक्स और बिना रोक</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164552/is-there-anyone-averse-to-becoming-sonam-raghuvanshi-and-muskaan"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/007.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">विवाह पूर्व  और विवाहेत्तर सेक्स स्वछंदता लिव-इन का बढ़ता चलन समाज में जहरीली बेल की तरह विनाश कर रहा है। परिणाम यह है कि हर सौ में से बीस से अधिक विवाह अब टूट रहे हैं परिवार में नवागंतुक वधुओं का समायोजन होना टेड़ी खीर होता जा रहा है। भारतीय समाज में दाम्पत्य जीवन के लिए खतरा बढ़ गया है लगातार इस तरह की वारदातों की झड़ी लगी है जिसमें छोटी मोटी बातों पर लोग पति पत्नी लिव-इन पार्टनर खून बहाने से नही चूक रहे हैं समाज में परिवर्तन के इस दौर में जहां वर्जना रहित सेक्स और बिना रोक टोक जीने की होड़ लगी है। इसी का परिणाम है कि यौन अपराध बढ़ रहा है वहीं जरा जरा सी बात पर लोग कत्ल कर रहे हैं कहीं पत्नी प्रेमी के साथ मिल कर सात फेरों वाले पति का कत्ल कर रही है तो कभी पति शराब के नशे में चूर हो कर अपनी अर्धांगिनी का कत्ल कर रहे हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पिछले कुछ दिनों की घटनाएं जो अखबारों की सुर्खियां बनी उन्हें सामने रखकर समाज में बढ़ रही अमानवीयता क्रूरता हैवानियत और प्रतिशोध की भावना को समझ सकते हैं। कभी मेरठ की मुस्कान के नीले ड्राम और इंदौर की सोनम रघुवंशी द्वारा हनीमून ट्रिप पर पति की हत्या की वारदातों से हतप्रभ हुए समाज को अब आए दिन ऐसी वारदातों से दो चार होना पड़ रहा है जिनमें अबला सबला बन कर अपने विवाहेत्तर संबंधो के लिए पति को नृशंसता के साथ रास्ते से हटा रहीं हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ताज़ा वारदात मेरठ की मुस्कान की तर्ज पर एक और हत्यारिन विवाहिता रूबी ने अंजाम दिया है उत्तर प्रदेश के संभल जिले के चंदौसी कोतवाली क्षेत्र से एक सनसनीखेज हत्याकांड सामने आया है. यहां एक महिला ने अपने प्रेमी और साथियों के साथ मिलकर पति की बेरहमी से लोहे के हथियार और ग्राइंडर से हाथ पैर काटकर हत्या कर दी. हत्या के बाद शव के टुकड़े कर पहचान छिपाने की कोशिश की गई. फिलहाल पुलिस मृतक के कटे हुए हाथ-पैर और सिर कुछ बरामद कर लिया है और पत्नी सेहत दो लोगों को गिरफ्तार कर खुलासा किया.</div>
<div style="text-align:justify;">मृतक राहुल की शादी 15 साल पहले चंदौसी के मोहल्ला चुन्नी निवासी रूबी से हुई थी. दंपती के दो बच्चे हैं. 10 साल की बेटी और 12 साल का बेटा. राहुल जूते का व्यापार करता था और 18 नवंबर से लापता था. पत्नी रूबी ने 24 नवंबर को कोतवाली चंदौसी में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी. जांच के दौरान पुलिस को पत्नी की भूमिका संदिग्ध लगी. पूछताछ में रूबी, उसके प्रेमी अभिषेक, और अन्य युवक गौरव को हिरासत में लिया। </div>
<div style="text-align:justify;">
<div> </div>
<div>25 दिसंबर को कानपुर में एक पत्नी ने खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। पत्नी ने पहले शराब पी इसके बाद पति की बेरहमी से हत्या कर दी। उसके सिर को बेलन और पत्थर से कुचलकर मार डाला। बिठूर थाना क्षेत्र के टिकरा गांव में बुधवार देर शाम शराब के नशे में हुए झगड़े के बाद पत्नी ने पति के सिर पर सिलबट्टे से ताबड़तोड़ वार किए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। आनन-फानन में पुलिस ने उसे एलएलआर अस्पताल में भर्ती कराया, जहां गुरुवार तड़के उसने दम तोड़ दिया। </div>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक अन्य वारदात अभी 23 दिसंबर को ही सामने आई है हैदराबाद मे 22 वर्ष के युवक संग सेक्स व अय्याशी के नशे में अंधी हो चुकी 36 वर्ष की पत्नी ने प्रेमी और उसके दोस्त के साथ मिलकर अपने ही 45 वर्ष के पति की गला घोंटकर हत्या कर दी। घटना का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद हुआ। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार, अशोक (45) की शादी 12 साल पहले पूर्णिमा (36) से हुई थी। दंपती अपने 11 वर्षीय बेटे के साथ कॉलोनी में रहते थे। पूर्णिमा की कॉलोनी में रहने वाले पालेटी महेश (22) से नजदीकियां बढ़ गईं। धीरे-धीरे दोनों के बीच अवैध संबंध हो गए।  पति को रास्ते से हटाने के बाद प्रेम संबंध में कोई बाधा नहीं रहेगी, इसी सोच के तहत पूर्णिमा ने अपने प्रेमी महेश और उसके दोस्त साई के साथ मिलकर हत्या की साजिश रच डाली।</div>
<div style="text-align:justify;">11 दिसंबर को जब अशोक ड्यूटी से घर लौटा, तो पहले से मौजूद महेश और साई ने पूर्णिमा के साथ मिलकर चुन्नी से गला कसकर उसकी हत्या कर दी। वारदात के बाद पूर्णिमा ने पुलिस को सूचना दी कि उसके पति की मौत हार्ट अटैक से हुई है।बाद में अशोक की मौत गला दबाने से होने की पुष्टि हुई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में आज 24 दिसंबर को एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक पति ने अपनी पत्नी को गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतार दिया है। एक हफ्ते पहले ही पत्नी ने उसे तलाक का नोटिस भेजा था। पति-पत्नी दोनों अलग रह रहे थे। आरोपी बालमुरुगन ने कथित तौर पर अपनी पत्नी भुवनेश्वरी पर तब चार गोलियां चलाईं, जब वह काम से घर लौटी थी। हत्यारे पति की उम्र 40 साल है और वो सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। पहले वो एक प्राइवेट फर्म में काम करता था, लेकिन पिछले चार सालों से बेरोजगार था। 39 साल की भुवनेश्वरी यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया में असिस्टेंट मैनेजर थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कुछ अन्य वारदातों का जायजा लें 24 दिसंबर को राजस्थान श्रीगंगानगर जिले में दहेज उत्पीड़न और अवैध संबंधों की रंजिश ने एक महिला की जान ले ली। आरोपी पति ने पत्नी की गला दबाकर हत्या कर दी और वारदात को आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को घर में बनी पानी की डिग्गी (टंकी) में डाल दिया। हालांकि पुलिस जांच में सच्चाई सामने आ गई, जिसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजस्थान के दौसा जिले के कोलवा थाना क्षेत्र में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर 10 माह पूर्व मिले एक अज्ञात शव के मामले में पुलिस ने खुलासा किया आरोपी पत्नी ने अवैध संबंधों में बाधक बन रहे पति की अपने प्रेमी से गोली मारकर हत्या करवा दी थी. एक अन्य वारदात मे उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिला में पत्नी से अवैध संबंध के कारण एक पति ने एलाऊ थाना क्षेत्र के गांव बहादुरपुर के रहने वाले रविंद्र की हत्या की थी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उम्र दराज लोग भी अपने जीवन साथी की जान लेने से नहीं घबरा रहे हैं। ऐसा एक मामला कर्नाटक के बैंगलुरू में सामने आया है। 23 दिसंबर को बेंगलुरु के मिट्टागनहल्ली गांव के पास रविवार शाम को एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई। यहां 64 वर्षीय अनंत ने अपनी 50 वर्षीय पत्नी गायत्री को मौत के घाट उतार दिया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">22 दिसंबर को ही वाराणसी में एक 46 वर्षीय शख्स ने 26 वर्षीय पत्नी का सिर और चेहरा कूंचकर मार डाला। महिला की टैटू से पहचान हुई। पुलिस ने दस घंटे में आरोपी पति को पकड़ लिया। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।वाराणसी के चोलापुर थाना इलाके के कैथोर गांव में चौबेपुर की सोनबरसा निवासी लक्ष्मी मिश्रा (26) के सिर और चेहरे को कूचकर हत्या कर दी गई। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यूपी के लखनऊ में 23 दिसंबर को पुलिस ने शिव प्रकाश हत्याकांड का खुलासा कर दिया है. पुलिस के मुताबिक यह मर्डर पत्नी और उसके प्रेमी ने साथ मिलकर अंजाम दिया. दोनों की लव स्टोरी के बीच में पति आ रहा था इस वजह से उसकी हत्या कर दी गई. पुलिस ने दोनों हत्यारोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के मुताबिक लखनऊ के रहने वाले शिव प्रकाश की पत्नी सविता रावत का मोहल्ले के ही 21 वर्षीय युवक सतीश गौतम के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था. शिव प्रकाश को अपनी पत्नी के अवैध संबंधों की भनक लग गई थी. इसके बाद घर में विवाद शुरू हो गया था. प्रेमी के साथ रहने के लिए सविता ने पति को रास्ते से हटाने की साजिश रची. शनिवार रात ऑटो चालक सतीश गौतम रॉड लेकर शिव प्रकाश के घर पहुंचा. आरोपी सतीश शिव प्रकाश को सड़क पर खींचकर लाया और लोहे की रॉड से ताबड़तोड़ कई वार किए. इसके बाद शिवप्रकाश की मौत हो गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">9 दिसम्बर को 'अमृतसर' (पंजाब) में अपनी पत्नी के साथ महाराष्ट्र से घूमने आए एक व्यक्ति ने पहले तो किसी विवाद के चलते अपनी पत्नी 'सुनीता सोनकर' की हत्या कर दी और फिर स्वयं भी रेलगाड़ी के नीचे आकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ये घटनाएं परिवारों में टूटते विश्वास अर्थ की अंधी दौड़ और टूट रहे दांपत्य के भयानक नतीजों की ओर इशारा करती हैं। अपनी प्राचीन संस्कृति पर गर्व करने वाले हमारे देश में लोगों के नैतिक पतन के ये तो वे मामले हैं जो सामने आए हैं। इनके अलावा भी न जाने कितने ऐसे मामले हुए होंगे जो प्रकाश में नहीं आ पाए। इस तरह की घटनाएं जहां घोर निंदनीय हैं, वहीं ऐसा करने वालों को तेजी से कानूनी कार्रवाई करके उन्हें कठोरतम दंड देने की आवश्यकता है।क्या यह स्थिति एक सभ्य समाज का प्रतिनिधित्व कर सकती है तमाम उपदेश प्रवचन कथाओं के बड़े बड़े आयोजन संत समागम स्नान पांच टाइम सजदा मनुष्य में मानवता रोपने में नाकाम हो रहे हैं क्योंकि तमाम मजहब धर्म जीवन पद्धति के दया करुणा क्षमा दम शम धैर्य अस्तेय के मूल सिद्धांत का प्रचार-प्रसार करने के स्थान पर घृणा और द्वेष को बढ़ाने में लग गए हैं।धर्मगुरु खुद को पुजवाने में लगे हैं इस का नतीजा समाज को एक न एक दिन भारी पड़ेगा। </div>]]>
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                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Dec 2025 20:16:29 +0530</pubDate>
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                <title>सभ्यता की यात्रा: पाषाण युग से पाषाणहृदय तक</title>
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                        <![CDATA[<p><span lang="hi" xml:lang="hi">मनुष्य की असभ्यता से सभ्यता की ओर की यात्रा एक अनंत कथा है, जो न कभी पूर्ण होती है, न कभी अपने अंतिम पड़ाव पर ठहरती है। यह एक ऐसी गाथा है, जो समय के साथ अपने रंग बदलती है, कभी उजाले की ओर बढ़ती है तो कभी अंधेरे की गहराइयों में खो जाती है। हम उस देश के वासी हैं, जहां सभ्यता ने सबसे पहले अपनी नींव रखी, जहां मानव ने जंगलीपन को त्याग कर संस्कारों का आलिंगन किया। </span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">यह वही धरती है, जहां मंत्रों की गूंज ने पहली बार प्रकृति को सानंद से भर दिया, जहां नदियों के</span></p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150412/tour-of-civilization-from-stone-age-to-stone"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/hindi-divas49.jpg" alt=""></a><br /><p><span lang="hi" xml:lang="hi">मनुष्य की असभ्यता से सभ्यता की ओर की यात्रा एक अनंत कथा है, जो न कभी पूर्ण होती है, न कभी अपने अंतिम पड़ाव पर ठहरती है। यह एक ऐसी गाथा है, जो समय के साथ अपने रंग बदलती है, कभी उजाले की ओर बढ़ती है तो कभी अंधेरे की गहराइयों में खो जाती है। हम उस देश के वासी हैं, जहां सभ्यता ने सबसे पहले अपनी नींव रखी, जहां मानव ने जंगलीपन को त्याग कर संस्कारों का आलिंगन किया। </span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">यह वही धरती है, जहां मंत्रों की गूंज ने पहली बार प्रकृति को सानंद से भर दिया, जहां नदियों के किनारे ज्ञान के दीप जले और जहां प्रेम, त्याग और धर्म की ऐसी कथाएं रची गईं, जो आज भी हमारे हृदय को स्पंदित करती हैं। परंतु आज उसी पवित्र भूमि पर मानव पुनः असभ्यता के उस गर्त की ओर बढ़ रहा है, जहां न संस्कारों का मूल्य है, न प्रेम की गरिमा और न ही जीवन की पवित्रता का सम्मान।</span></p>
<p> <span lang="hi" xml:lang="hi">मद्र देश के राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री की कहानी याद कीजिए। वह राजकुमारी, जिसके सामने सारा वैभव और राजसी ठाठ-बाट बिछा था, उसने अपने जीवन का सबसे बड़ा निर्णय तब लिया, जब उसकी नजर एक साधारण-से दिखने वाले लकड़हारे पर पड़ी और उसने मन ही मन उसका वरण कर लिया। जब अश्वपति ने अपनी पुत्री के इस चयन पर ज्योतिषी से परामर्श लिया, तो ज्योतिषी ने अपनी गणना से एक कठोर सत्य उद्घाटित किया। उसने कहा,</span> "<span lang="hi" xml:lang="hi">यह युवक कोई साधारण मनुष्य नहीं अपितु एक राजकुमार है, जिसके पिता अश्वपति ने अपना राज्य खो दिया था और जो अब जंगल में निर्वासित जीवन जी रहे हैं।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi"> परंतु उसकी आयु अब अधिक नहीं बची। ठीक एक वर्ष बाद वह मृत्यु के आगोश में चला जाएगा।</span>" <span lang="hi" xml:lang="hi">यह सुनकर अश्वपति का हृदय कांप उठा। उसने अपनी पुत्री को समझाने का हर संभव प्रयास किया, उसे इस विवाह से रोकने की चेष्टा की, परंतु सावित्री का उत्तर अडिग था। उसने कहा,</span> "<span lang="hi" xml:lang="hi">पिताजी, मैंने मन ही मन उनका वरण कर लिया है। मैं उस धरती की बेटी हूं, जहां स्त्री एक बार विश्वास करती है, एक बार प्रेम करती है और एक बार अपने जीवन का संकल्प लेती है। यदि उनके प्राणों का समय एक वर्ष है, तो वह अब मेरा भाग्य है। मैं इसे स्वीकार करती हूं।</span>"</p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">सावित्री का यह संकल्प केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहा। उसने अपने तप, अपनी बुद्धिमता और अपने अटूट प्रेम से यमराज तक को झुका दिया। जिस दिन सत्यवान की मृत्यु का समय आया, सावित्री उनके पीछे-पीछे यम के लोक तक पहुंच गई। उसने न केवल अपने पति के प्राणों को वापस लिया, बल्कि इस धरती पर प्रेम और समर्पण की एक ऐसी मिसाल कायम की, जो युगों-युगों तक गूंजती रहेगी। यह थी उस सभ्यता की शक्ति, जो इस देश की आत्मा में बसी थी। यह थी वह संस्कृति, जिसने नारी को केवल एक देह नहीं, बल्कि एक शक्ति, एक संकल्प और एक सृजन का प्रतीक माना।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु आज वही धरती, वही संस्कारों की भूमि एक ऐसी घटना की साक्षी बन रही है, जो मानवता को शर्मसार कर देती है। मेरठ की एक घटना ने न केवल इस देश के लोगों को झकझोर दिया, बल्कि यह प्रश्न उठा दिया कि क्या हम वास्तव में सभ्यता की ओर बढ़ रहे हैं, या फिर असभ्यता के उस अंधेरे कुएं में गिरते जा रहे हैं, जहां से निकलने का कोई मार्ग शेष नहीं? यह कहानी है सौरभ और मुस्कान की, एक प्रेम विवाह की, जो कभी स्नेह और विश्वास से शुरू हुआ था, परंतु अंत में रक्त, विश्वासघात और क्रूरता की परछाई में डूब गया।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">सौरभ और मुस्कान का विवाह एक प्रेम विवाह था। सौरभ के परिवार ने इस रिश्ते को कभी स्वीकार नहीं किया। उनके लिए यह विवाह एक विद्रोह था, एक ऐसा निर्णय जो उनकी परंपराओं और मान्यताओं के खिलाफ था। परंतु सौरभ और मुस्कान ने अपने प्रेम को चुना। उन्होंने शहर में एक किराए का कमरा लिया और अपने छोटे से संसार को बसाया। समय बीता, और इस प्रेम का एक फल भी उन्हें मिला—एक नन्ही बेटी, जो उनके जीवन में खुशियों का प्रकाश लेकर आई। सौरभ मर्चेंट नेवी में कार्यरत था। उसकी नौकरी उसे छह-छह महीने घर से दूर रखती थी। वह समुद्र की लहरों के बीच अपने परिवार के लिए मेहनत करता था, यह सोचकर कि उसकी अनुपस्थिति में उसका घर, उसकी पत्नी और उसकी बेटी सुरक्षित हैं।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु सौरभ की अनुपस्थिति में मुस्कान का जीवन एक अलग राह पर चल पड़ा। उसकी मुलाकात साहिल से हुई, और धीरे-धीरे यह मुलाकात एक संबंध में बदल गई। यह संबंध केवल भावनाओं तक सीमित नहीं रहा। मुस्कान नशे की आदी हो गई, और उसका जीवन उस संयम और संस्कार से दूर होता चला गया, जिसकी नींव पर कभी उसका विवाह खड़ा हुआ था। साहिल के साथ उसकी निकटता बढ़ती गई और सौरभ की अनुपस्थिति अब उसके लिए एक अवसर बन गई। यह अवसर केवल विश्वासघात तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक ऐसी साजिश में बदल गया, जिसने मानवता के सारे बंधनों को तोड़ दिया।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">एक दिन, जब सौरभ अपनी ड्यूटी से लौटा, तो उसका स्वागत न तो मुस्कान के प्रेम से हुआ, न ही उसकी बेटी की मुस्कान से। उसके घर में जो हुआ, वह किसी दुःस्वप्न से कम नहीं था। मुस्कान और साहिल ने मिलकर सौरभ की हत्या कर दी। यह हत्या केवल एक क्षणिक क्रोध का परिणाम नहीं थी। यह एक सोची-समझी क्रूरता थी, जो अपने चरम पर पहुंची जब उन्होंने सौरभ के शरीर को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट दिया। इन टुकड़ों को एक ड्रम में बंद कर दिया गया, जैसे वह कोई निर्जन वस्तु हो, न कि वह पुरुष जिसने कभी मुस्कान को अपना जीवनसाथी चुना था। इसके बाद मुस्कान और साहिल ने मकान को ताला लगाया और हिमाचल की वादियों में घूमने निकल पड़े। पंद्रह दिनों तक वे वहां मौज-मस्ती करते रहे, मानो कुछ हुआ ही न हो, मानो सौरभ का अस्तित्व ही उनके जीवन से मिट गया हो।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">जब यह घटना प्रकाश में आई, तो मेरठ ही नहीं, पूरे देश में हाहाकार मच गया। लोग यह समझ नहीं पा रहे थे कि जिस प्रेम ने कभी दो लोगों को जोड़ा, वह इतनी क्रूरता में कैसे बदल गया। सौरभ की बेटी, जो अभी जीवन के उस पड़ाव पर भी नहीं पहुंची थी जहां वह अपने पिता की अनुपस्थिति को समझ सके, अब अनाथ हो गई। मुस्कान, जो कभी उसकी मां थी, अब उसकी दुनिया की सबसे बड़ी शत्रु बन चुकी थी। यह घटना केवल एक अपराध की कहानी नहीं थी। यह उस सभ्यता के पतन की कहानी थी, जिसे हमने सहस्राब्दियों तक संजोया था।</span></p>
<p><span lang="hi" xml:lang="hi">सावित्री और मुस्कान—दो नारियां, दो युग, दो कहानियां। एक ओर सावित्री, जिसने अपने पति के प्राणों को यमराज से छीन लिया, और दूसरी ओर मुस्कान, जिसने अपने पति के प्राणों को छीनकर उन्हें एक ड्रम में कैद कर दिया। यह अंतर केवल व्यक्तियों का नहीं, बल्कि उस संस्कृति और उन मूल्यों का है, जो कभी इस धरती की पहचान थे। क्या हम सचमुच सभ्यता की ओर बढ़ रहे हैं, या यह केवल एक भ्रम है, जो हमें उस असभ्यता की ओर ले जा रहा है, जहां प्रेम, विश्वास और मानवता का कोई स्थान नहीं? यह प्रश्न आज हम सबके सामने है, और इसका उत्तर शायद समय ही दे सकेगा। परंतु यह निश्चित है कि यदि हमने अपनी जड़ों को नहीं संभाला, तो यह धरती, जो कभी सभ्यता की जननी थी, एक दिन असभ्यता की कब्र बनकर रह जाएगी।</span></p>]]>
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                <pubDate>Wed, 26 Mar 2025 15:07:54 +0530</pubDate>
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