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                <title>Lawyers - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>झमाझम बारिश से किसान मगन, व्यवस्था बदहाल</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज, प्रतापगढ़। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सोमवार की आधी रात से शुरू हुई झमाझम बारिश के चलते मंगलवार को सार्वजनिक संस्थानों में कामकाज प्रभावित हुआ दिखाई पड़ा।तहसील में बारिश का पानी पूरा भर गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मंगलवार को दिन में भी सुबह से शाम तक बारिश का सिलसिला रूक रूक कर जारी रहा। तहसील परिसर में जलभराव के कारण लोगों को अदालतों तक पहुंचने में मशक्कत उठाना पड़ा। समस्या को लेकर परेशान वकीलों ने न्यायिक कामकाज से विरत रहने का प्रस्ताव सौंपा।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं नगर पंचायत के नेताजीपुरम में भी कई स्थानों पर जलभराव से लोग परेशान दिखे। कोतवाली परिसर में भी जलजमाव की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186367/farmers-are-happy-system-is-in-bad-shape-due-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260825-wa0117.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज, प्रतापगढ़। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सोमवार की आधी रात से शुरू हुई झमाझम बारिश के चलते मंगलवार को सार्वजनिक संस्थानों में कामकाज प्रभावित हुआ दिखाई पड़ा।तहसील में बारिश का पानी पूरा भर गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मंगलवार को दिन में भी सुबह से शाम तक बारिश का सिलसिला रूक रूक कर जारी रहा। तहसील परिसर में जलभराव के कारण लोगों को अदालतों तक पहुंचने में मशक्कत उठाना पड़ा। समस्या को लेकर परेशान वकीलों ने न्यायिक कामकाज से विरत रहने का प्रस्ताव सौंपा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं नगर पंचायत के नेताजीपुरम में भी कई स्थानों पर जलभराव से लोग परेशान दिखे। कोतवाली परिसर में भी जलजमाव की स्थिति फरियादियों के लिए तकलीफदेह देखी गयी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सीएचसी परिसर में भी बारिश का पानी मरीजों के साथ आये तीमारदारों के लिए भी परेशानी लिए हुए देखा गया। बारिश के बीच बाबा घुइसरनाथ धाम के दर्शनार्थियों व जल चढ़ाने निकले भक्तों को भी कई जगह रूकने की विवशता देखी गयी। हालांकि बारिश पर भगवान के भक्तों की आस्था भारी पड़ी दिखी। श्रावण मास के साथ मंगलवार के परम्परागत मेले को लेकर धाम में शिवभक्तों का जमावड़ा दिन भर बना रहा। वहीं सई नदी का जलस्तर भी अब और बढ़ने लगा है। सार्वजनिक संस्थानों में कई जगह सोख्ता टैंक का निर्माण भी जारी है। इसके बावजूद इन संस्थानों में जलभराव एक बड़ी समस्या बनी हुई है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 18:31:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>किस ओर जा रहा समाज?</title>
                                    <description><![CDATA[<div>आइए! आज बात करते हैं विकसित भारत की। भारत की आज़ादी के 77 वर्ष बीत गए। इतने वर्षों में जनसंख्या भी बढ़ी और हमारा जीवन स्तर भी आधुनिक हो गया। आज विश्व के अन्य देशों के साथ हम भी वैज्ञानिक युग की राह पर हैं। परन्तु क्या सच में बदलाव आया? कुछ समय पहले तक मनोरंजन के लिए टेलीविज़न और रेडियो हुआ करते थे। लगभग हर घर के बच्चे और युवा गुल्ली-डंडा, खो-खो, लूडो, कैरम खेला करते थे। लेकिन आज के तकनीकी युग में, जहां हर हाथ में स्मार्टफोन है, हम बहुत आगे बढ़ चुके हैं। इस युग में हर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150270/which-society-is-going"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/001.jpg" alt=""></a><br /><div>आइए! आज बात करते हैं विकसित भारत की। भारत की आज़ादी के 77 वर्ष बीत गए। इतने वर्षों में जनसंख्या भी बढ़ी और हमारा जीवन स्तर भी आधुनिक हो गया। आज विश्व के अन्य देशों के साथ हम भी वैज्ञानिक युग की राह पर हैं। परन्तु क्या सच में बदलाव आया? कुछ समय पहले तक मनोरंजन के लिए टेलीविज़न और रेडियो हुआ करते थे। लगभग हर घर के बच्चे और युवा गुल्ली-डंडा, खो-खो, लूडो, कैरम खेला करते थे। लेकिन आज के तकनीकी युग में, जहां हर हाथ में स्मार्टफोन है, हम बहुत आगे बढ़ चुके हैं। इस युग में हर चीज़ मशीनी हो गई है, चाहे वह खेल हो, पढ़ाई हो या मनोरंजन। इंटरनेट और सोशल मीडिया के इस दौर में खबरें और लोगों की मानसिकता हवाई जहाज़ से भी तेज़ उड़ रही हैं।</div>
<div> </div>
<div>तकनीक बढ़ी, शिक्षा बढ़ी, डिग्रियाँ भी बढ़ीं, और लोग डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, तथा जज जैसे ऊँचे पदों पर पहुँच रहे हैं। लेकिन हमारे समाज और उसकी मानसिकता में बदलाव क्यों नहीं आया? क्या डिग्रियाँ और पद सिर्फ़ कमाने का ज़रिया हैं? क्या स्वस्थ समाज के निर्माण की कोई ज़िम्मेदारी नहीं है?</div>
<div> </div>
<div>स्त्री अस्मिता की लड़ाई सदियों से चली आ रही है, जिसमें आज भी हम पूरी तरह जीत नहीं सके हैं। लेकिन अब इस लड़ाई के बीच एक नई समस्या जुड़ गई है—‘महिला कानून का दुरुपयोग।’ स्त्री अस्मिता की सुरक्षा और समानता की जंग में जिन चीज़ों में सुधार लाना था, उसमें तो हम सफल नहीं हो पाए, लेकिन बराबरी की ज़िद्द कहें या बदले की भावना, एक नई सामाजिक गंदगी जन्म ले चुकी है। अब समझ नहीं आता कि महिलाओं के अधिकारों की बात की जाए या बराबरी की अंधी दौड़ में वे जो विवेकहीन रास्ते अपना रही हैं, उन्हें रोका जाए?</div>
<div> </div>
<div>एक कहावत है, "दुनिया चाँद पर चली गई और गाँव में अब भी डायन है।" आज भी हमारे समाज में लोग चाहे कितने भी पढ़े-लिखे क्यों न हों, आपसी रंजिश में माँ-बेटियों और बहनों को ही गाली देते हैं। पहले ये चीज़ें सिर्फ़ सुनने और बोलने तक सीमित थीं, लेकिन अब सोशल मीडिया के दौर में खुलेआम माँ-बहनों के नाम पर गालियाँ लिखी और बोली जा रही हैं। यहाँ कोई रोक-टोक नहीं है। अश्लीलता की सारी हदें पार की जा रही हैं।</div>
<div> </div>
<div>इतना ही नहीं, सोशल मीडिया पर तो अब बड़े-बड़े 'जज' बैठे हैं, जो कोई भी न्यूज़ आते ही उसे वायरल कर इंसाफ़ कर देते हैं। इन्हें तर्क और तथ्य से कोई मतलब नहीं होता, क्योंकि ये स्वयंभू 'अंतर्यामी' होते हैं।</div>
<div> </div>
<div>अब भी समाज के इंसाफ़ का अंतिम भरोसा देश की न्यायपालिका है। लेकिन अब इस पर से भी भरोसा उठने लगा है। न्याय का स्थान ईश्वरीय होता है, और यदि न्याय की कुर्सी पर कुंठित मानसिकता के लोग विराजमान हो जाएँ, तो वह भी शोषण का माध्यम बन जाती है।</div>
<div> </div>
<div>आजकल जिस तरह से न्यायाधीशों के विवादास्पद बयान सामने आ रहे हैं, वे चिंता का विषय हैं। किसी ने कहा, "पत्नी से अप्राकृतिक संबंध बनाना बलात्कार नहीं है।" किसी और ने कहा, "लड़की के प्राइवेट पार्ट को हाथ लगाना बलात्कार जैसा नहीं है।" जब इस तरह की स्त्री-विरोधी मानसिकता वाले लोग न्याय की कुर्सी पर बैठे हों, तो इस देश की स्त्रियाँ उनसे न्याय की उम्मीद कैसे करें?</div>
<div> </div>
<div>न्याय की कुर्सी पर बैठकर ऐसी बयानबाज़ी करने वालों को यह समझना चाहिए कि उनके ये शब्द पूरे समाज की महिलाओं का मानसिक शोषण करते हैं। ऐसा लगता है कि इस समाज में सड़क से लेकर कोर्ट तक, स्त्री अस्मिता सबसे सस्ती चीज़ है। अगर सच में न्याय की बात करनी है, तो सबसे पहले न्यायपालिका की गरिमा की रक्षा करनी होगी और कुंठित मानसिकता वाले व्यक्तियों को वहाँ पहुँचने से रोकना होगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Mar 2025 15:12:00 +0530</pubDate>
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